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  • कुवैत का बड़ा दावा, ईरान ने डिसैलिनेशन प्लांट पर किया हमला, बिजली उत्पादन और पेयजल आपूर्ति पर मंडराया संकट

    कुवैत का बड़ा दावा, ईरान ने डिसैलिनेशन प्लांट पर किया हमला, बिजली उत्पादन और पेयजल आपूर्ति पर मंडराया संकट

    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच कुवैत ने ईरान पर अपने महत्वपूर्ण डिसैलिनेशन और बिजली संयंत्र पर हमला करने का आरोप लगाया है। कुवैती प्रशासन का कहना है कि इस हमले से संयंत्र को भारी नुकसान पहुंचा है और कुछ हिस्सों में आग भी लग गई थी। घटना के बाद राहत और मरम्मत कार्य तत्काल शुरू कर दिया गया है, जबकि सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले की निगरानी कर रही हैं।

    कुवैत के बिजली, पानी और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार हमले के कारण बिजली उत्पादन से जुड़ी कई इकाइयों को क्षति पहुंची है। अधिकारियों ने बताया कि आग पर समय रहते काबू पा लिया गया, जिससे बड़े स्तर पर नुकसान को रोका जा सका। फिलहाल तकनीकी विशेषज्ञ प्रभावित इकाइयों का निरीक्षण कर रहे हैं और संयंत्र को दोबारा पूरी क्षमता से संचालित करने की दिशा में कार्य जारी है।

    कुवैत के लिए डिसैलिनेशन संयंत्र अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। यह देश प्राकृतिक मीठे जल स्रोतों की कमी के कारण अपनी अधिकांश पेयजल जरूरतों के लिए समुद्र के खारे पानी को मीठा बनाने की प्रक्रिया पर निर्भर है। ऐसे में यदि इस तरह के संयंत्र लंबे समय तक प्रभावित रहते हैं तो जल आपूर्ति के साथ-साथ बिजली व्यवस्था पर भी व्यापक असर पड़ सकता है। सरकार ने कहा है कि आवश्यक सेवाओं को बनाए रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर भी काम किया जा रहा है।

    कुवैती प्रशासन ने कहा कि इस प्रकार के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हमला केवल आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे आम नागरिकों के दैनिक जीवन और आवश्यक सेवाओं पर भी गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। इसी कारण संबंधित एजेंसियों को नुकसान का त्वरित आकलन करने और संयंत्र को जल्द से जल्द सामान्य संचालन में लाने के निर्देश दिए गए हैं।

    इस घटना के बीच पश्चिम एशिया में सैन्य गतिविधियां भी तेज बनी हुई हैं। क्षेत्र में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण कई रणनीतिक ठिकानों और बुनियादी ढांचों को लेकर सुरक्षा चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं। हाल के दिनों में दोनों पक्षों के बीच बढ़ी सैन्य कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र में अस्थिरता का माहौल पैदा कर दिया है, जिसका असर पड़ोसी देशों पर भी दिखाई देने लगा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा और जल आपूर्ति से जुड़े प्रतिष्ठानों पर किसी भी प्रकार का हमला केवल संबंधित देश ही नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में कुवैत द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा और कूटनीतिक गतिविधियों पर भी नजरें टिकी हुई हैं। फिलहाल इस घटना के संबंध में आधिकारिक स्तर पर आगे की जांच और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है, जबकि कुवैत सरकार ने आवश्यक सेवाओं को निर्बाध बनाए रखने के लिए सभी संबंधित विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।

  • बाल संरक्षण तंत्र को मजबूत करने के लिए भोपाल में हुई राज्य स्तरीय कार्यशाला

    बाल संरक्षण तंत्र को मजबूत करने के लिए भोपाल में हुई राज्य स्तरीय कार्यशाला


    भोपाल । मध्यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग, भोपाल द्वारा दिनांक 17 जुलाई, 2026 को मध्यप्रदेश काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी (MPCST), भोपाल में “लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (पॉक्सो अधिनियम) एवं किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 के प्रभावी क्रियान्वयन में बाल कल्याण समिति (CWC) की भूमिका” विषय पर राज्य स्तरीय प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया।

    कार्यक्रम रामेन्द्र सिंह, महासचिव, भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी, मध्यप्रदेश। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. अनिल कोठारी, गहानिदेशक, मध्यप्रदेश काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी (MPCST), भोपाल तथा श्रीमती सुधा विजय सिंह भदौरिया, सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी, जिला न्यायालय, भोपाल, आयोग की सदस्य श्रीमती सोनम निनामा एवं श्रीमती अर्चना गुप्ता की गरिमामयी उपस्थिति रही।

    बाल कल्याण समितियों की कार्यप्रणाली में एकरूपता लाना मुख्य उद्देश्य

    कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य प्रदेश की समस्त बाल कल्याण समितियों की कार्यप्रणाली में एकरूपता स्थापित करना, सदस्यों की विधिक एवं पुक्रियागत दक्षता का संवर्धन करना, विभिन्न जिलों के अनुभवों एवं श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों का आदान-प्रदान सुनिश्चित करना तथा राज्य की वाल संरक्षण व्यवस्था को अधिक प्रभावी, उत्तरदायी एवं “बालहित सर्वोपरि” (Best Interest of Child) के सिद्धांत के अनुरूप सुटढ़ बनाना था।

    कानूनी प्रावधानों और व्यावहारिक चुनौतियों पर गहन मंथन

    इस प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला में प्रदेश के समस्त जिलों की बाल कल्याण समितियों के अध्यक्षों एवं सदस्यों को लैंगिक अपराधों से चालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (पॉक्सो अधिनियम) तथा किशोर न्याय (वालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 के प्रभावी क्रियान्वयन से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत एवं व्यवहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण में वाल संरक्षण संबंधी वैधानिक प्रावधानों, प्रक्रियात्मक कार्यवाही, वालहित सर्वोपरि के सिद्धांत, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन, विभागीय समन्वय, बाल कल्याण समिति की भूमिका, प्रकरण प्रबंधन (Case Management), अभिलेख संधारण, आयोग की रिपोर्टिंग प्रणाली तथा संवेदनशील प्रकरणों के प्रभावी एवं समयबद्ध निराकरण जैसे महत्वपूर्ण विपयों पर विस्तार से चर्चा की गई।

    प्रशिक्षण के प्रथम सत्र में रामेन्द्र सिंह द्वारा बाल संरक्षण व्यवस्था को अधिक संवेदनशील एवं प्रभावी बनाने पर विशेष बल दिया गया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक प्रकरण में बालक अथवा बालिका के सर्वोतम हित को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान करते हुए वाल कल्याण समितियों को आपसी समन्वय, संवे संवेदनशील दृष्टिकोण एवं विधिक प्रावधानों के अनुरूप कार्य करना चाहिए। उन्होंने समितियों को प्रत्येक प्रकरण में मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए उत्तरदायित्वपूर्ण एवं निष्पक्ष निर्णय लेने हेतु प्रेरित किया।

    एमपीसीएसटी के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी ने अपने उद्धोधन में वर्तमान समय में बाल संरक्षण प्रणाली को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि नवीनतम तकनीकी संसाधनों एवं डिजिटल माध्यमों के प्रभावी उपयोग से वाल संरक्षण तंत्र को अधिक सुदृढ़, पारदर्शी एवं परिणामोन्मुख बनाया जा सकता है।

    कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में श्रीमती सुधा विजय सिंह भदौरिया द्वारा बाल कल्याण समितियों को विस्तृत विधिक एवं व्यवहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। उन्होंने पॉक्सो अधिनियम एवं किशोर न्याय अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों की विस्तारपूर्वक जानकारी देते हुए कहा कि प्रत्येक पीड़ित बालक अथवा बालिका के पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन की प्रक्रिया सुरक्षित, संवेदनशील एवं बाल-अनुकूल सामाजिक वातावरण में सुनिधित की जानी चाहिए। उन्होंने समितियों को विधिक प्रक्रियाओं का पूर्ण पालन करते हुए पीड़ित के अधिकारों एवं गरिमा की रक्षा सुनिश्चित करने के संबंध में आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया।

    मध्यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा ने बाल संरक्षण से संबंधित प्रत्येक प्रकरण में समयबद्ध, निष्पक्ष एवं गुणवत्तापूर्ण कार्यवाही सुनिधित की जाए उन्होंने सतत संवाद, प्रभावी समन्वय तथा बालहित सर्वोपरि के सिद्धांत को प्रत्येक निर्णय का आधार बनाने पर विशेष बल दिया। उन्होंने पॉक्सो अधिनियम के अंतर्गत पीड़ित बच्चों के लिए सपोर्ट पर्सन की नियुक्ति पूर्ण पारदर्शिता एवं निष्पक्षता के साथ किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे व्यक्तियों का चयन किया जाए जो पीड़ित बच्चों के सर्वोतम हितों की प्रभावी रूप से रक्षा कर सकें।

  • एमपी में यूसीसी पर कैबिनेट की मुहर के बाद विधानसभा में आएगा विधेयक, मंत्रियों के सामने होगा प्रेजेंटेशन

    एमपी में यूसीसी पर कैबिनेट की मुहर के बाद विधानसभा में आएगा विधेयक, मंत्रियों के सामने होगा प्रेजेंटेशन


    भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक को मानसून सत्र में विधानसभा में पेश करने की तैयारी में है। इससे पहले 19 जुलाई को भोपाल के निकट स्थित जगदीशपुर में आयोजित होने वाली कैबिनेट बैठक में विधेयक के प्रमुख प्रावधानों का प्रस्तुतीकरण किया जाएगा, ताकि सभी मंत्री इसके विभिन्न पहलुओं से पूरी तरह अवगत हो सकें।

    सरकार का उद्देश्य है कि विधानसभा में विधेयक पेश होने से पहले मंत्रियों की सभी जिज्ञासाओं का समाधान हो जाए और वे सदन में प्रस्तावित कानून के प्रावधानों पर तथ्यात्मक रूप से अपना पक्ष रख सकें।

    कांग्रेस के विरोध की तैयारी
    सूत्रों के अनुसार, विधानसभा के मानसून सत्र में कांग्रेस यूसीसी विधेयक का विरोध कर सकती है। इसे देखते हुए सरकार पहले ही कैबिनेट के समक्ष इसके प्रावधानों की विस्तृत जानकारी साझा करेगी, ताकि चर्चा के दौरान मंत्री प्रभावी ढंग से सरकार का पक्ष रख सकें।

    आदिवासी समुदाय रहेगा दायरे से बाहर
    प्रस्तावित यूसीसी विधेयक में आदिवासी, घुमंतु, अर्द्धघुमंतु और मतांतरित आदिवासी समुदायों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। इसके अलावा लिव-इन रिलेशनशिप के लिए अनिवार्य पंजीयन, उत्तराधिकार से जुड़े प्रावधान और विवाह एवं विवाह विच्छेद (तलाक) के मामलों में सभी नागरिकों के लिए समान नियम लागू करने का प्रस्ताव शामिल किया गया है।

    साढ़े नौ लाख सुझावों के आधार पर तैयार हुआ मसौदा
    यूसीसी का मसौदा तैयार करने के दौरान समिति को करीब साढ़े नौ लाख सुझाव प्राप्त हुए थे। इन्हीं सुझावों और विभिन्न पक्षों पर विचार-विमर्श के बाद विधेयक को अंतिम रूप दिया गया है।

    मानसून सत्र में आएंगे 14 विधेयक
    20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र में सरकार कुल 14 विधेयक प्रस्तुत करने की तैयारी में है। इनमें केंद्र सरकार द्वारा संशोधित श्रम कानूनों को प्रदेश में लागू करने संबंधी विधेयक, कोचिंग संस्थानों के विनियमन का कानून, फायर सेफ्टी, कॉलोनाइजर एक्ट, माल एवं सेवा कर (जीएसटी), पंचायतराज, नागरिक सुरक्षा संहिता तथा प्रथम अनुपूरक बजट से संबंधित विनियोग विधेयक समेत कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव शामिल हैं।

  • अमेरिकी चुनाव में दखल के ट्रंप के आरोपों पर चीन का पलटवार, बोला- बेबुनियाद दावे बंद करें, बेहतर संबंधों के लिए माहौल बनाएं

    अमेरिकी चुनाव में दखल के ट्रंप के आरोपों पर चीन का पलटवार, बोला- बेबुनियाद दावे बंद करें, बेहतर संबंधों के लिए माहौल बनाएं

    नई दिल्ली । अमेरिका और चीन के बीच एक बार फिर चुनावी हस्तक्षेप के आरोपों को लेकर जुबानी टकराव तेज हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा चीन पर अमेरिकी चुनावों में दखल देने और करोड़ों मतदाताओं का डेटा हासिल करने के आरोप लगाए जाने के बाद बीजिंग ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। चीन ने कहा है कि उसने कभी अमेरिकी चुनावों में हस्तक्षेप नहीं किया और न ही उसकी ऐसी कोई मंशा है।

    चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि अमेरिका की ओर से लगाए गए आरोप तथ्यहीन और मनगढ़ंत हैं। उन्होंने कहा कि चीन को बदनाम करने के उद्देश्य से इस प्रकार के बयान दिए जा रहे हैं। उनके अनुसार चीन हमेशा दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने की नीति का पालन करता है और अमेरिकी चुनाव उसके लिए किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप करने का विषय नहीं हैं।

    चीन ने अमेरिका से अपील की कि वह चुनावी राजनीति में चीन का नाम घसीटना बंद करे और दोनों देशों के संबंधों को बेहतर बनाने के लिए सकारात्मक माहौल तैयार करे। प्रवक्ता ने संकेत दिया कि यदि दोनों देश स्थिर और रचनात्मक संबंध चाहते हैं तो आरोप-प्रत्यारोप की बजाय संवाद और सहयोग पर अधिक ध्यान देना चाहिए।

    यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क बनाए रखने की कोशिशें भी जारी हैं। इसी वर्ष अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन का दौरा कर राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की थी। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए नए संवाद तंत्र पर सहमति जताई थी। इसके बाद राष्ट्रपति शी जिनपिंग के अमेरिका दौरे की भी तैयारी चल रही है, जिसे दोनों देशों के संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    इस बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने आरोप लगाया कि चीन ने अमेरिकी चुनावी प्रणाली को प्रभावित करने के उद्देश्य से करोड़ों मतदाताओं का डेटा अवैध रूप से हासिल किया। उनके अनुसार इस कथित डेटा में मतदाताओं के नाम, पते, फोन नंबर, राजनीतिक संबद्धता और अन्य व्यक्तिगत जानकारियां शामिल थीं। ट्रंप ने दावा किया कि इन सूचनाओं का उपयोग चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने और अन्य गतिविधियों के लिए किया जा सकता था।

    ट्रंप ने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के पास चीन की कथित गतिविधियों से संबंधित जानकारी थी, लेकिन वह पूरी तरह सार्वजनिक नहीं की गई। उन्होंने दावा किया कि कुछ रिपोर्टों में चीन द्वारा अमेरिकी कारोबारी नेताओं और मीडिया से जुड़े लोगों को प्रभावित करने के प्रयासों का भी उल्लेख किया गया था। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण सूचनाएं शीर्ष स्तर तक समय पर नहीं पहुंचाई गईं।

    हालांकि चीन ने इन सभी आरोपों को सिरे से नकारते हुए कहा कि ऐसे दावों का कोई आधार नहीं है। बीजिंग का कहना है कि दोनों देशों के बीच मतभेदों का समाधान संवाद और आपसी सम्मान के माध्यम से होना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और चीन के बीच व्यापार, तकनीक, सुरक्षा और भू-राजनीतिक मुद्दों पर पहले से ही तनाव बना हुआ है। ऐसे में चुनावी हस्तक्षेप जैसे आरोप दोनों देशों के संबंधों में नई चुनौती पैदा कर सकते हैं।

    फिलहाल दोनों देशों की ओर से अपने-अपने दावों पर कायम रहने के कारण यह विवाद कूटनीतिक चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले समय में उच्चस्तरीय बैठकों और आधिकारिक संवाद के दौरान इस मुद्दे पर दोनों पक्षों का रुख अंतरराष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण माना जाएगा।

  • करंट हादसों से भड़का किसानों का गुस्सा, सीहोर से भोपाल पहुंचे ग्रामीणों ने बिजली मुख्यालय घेरा, कार्रवाई और मुआवजे की उठाई मांग

    करंट हादसों से भड़का किसानों का गुस्सा, सीहोर से भोपाल पहुंचे ग्रामीणों ने बिजली मुख्यालय घेरा, कार्रवाई और मुआवजे की उठाई मांग

    मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में करंट लगने की लगातार सामने आई घटनाओं के विरोध में किसानों और ग्रामीणों का आक्रोश राजधानी भोपाल तक पहुंच गया। जिले के कई गांवों से सैकड़ों किसान भोपाल स्थित मध्य प्रदेश विद्युत मंडल के गोविंदपुरा मुख्यालय पहुंचे और बिजली विभाग की कथित लापरवाही के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि जर्जर बिजली लाइनों और झूलते तारों की बार-बार शिकायत करने के बावजूद विभाग ने समय रहते आवश्यक सुधार नहीं किए, जिसके कारण कई गंभीर हादसे हुए। किसानों ने दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई, पीड़ित परिवारों को पर्याप्त आर्थिक सहायता और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।

    सीहोर जिले के बड़वेली, चंदेरी, बिलकिसगंज, ढाबला, मंगरखेड़ा, पचामा, पाली, जामुनिया, रामाखेड़ी और अन्य गांवों से पहुंचे किसानों ने समाजसेवी एमएस मेवाड़ा के नेतृत्व में मुख्यालय के बाहर करीब तीन घंटे तक धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने बिजली विभाग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि खेतों के ऊपर से गुजर रही जर्जर 11 केवी और एलटी लाइनें किसानों की जान के लिए लगातार खतरा बनी हुई हैं। उनका आरोप है कि शिकायतों के बावजूद अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था सुधारने में गंभीरता नहीं दिखाई।

    प्रदर्शन के दौरान किसानों ने बताया कि हाल के वर्षों में करंट की चपेट में आने से पांच किसान गंभीर हादसों का शिकार हुए। इनमें तीन किसानों की मौत हो चुकी है, जबकि दो किसानों के हाथ काटने पड़े। ग्रामीणों का कहना है कि इन हादसों ने प्रभावित परिवारों को आर्थिक और सामाजिक संकट में डाल दिया है। उनका आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, जिससे लोगों में नाराजगी लगातार बढ़ रही है।

    प्रदर्शनकारियों ने विद्युत मंडल के प्रबंध निदेशक ऋषि गर्ग को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करने और पीड़ित परिवारों को नियमानुसार राहत उपलब्ध कराने की मांग की। किसानों ने यह भी कहा कि वे पहले मुख्यमंत्री कार्यालय, ऊर्जा मंत्री, जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को कई बार ज्ञापन दे चुके हैं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका। उनका कहना है कि यदि समय रहते बिजली लाइनों की मरम्मत और रखरखाव किया जाता तो कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी।

    धरने के बाद प्रबंध निदेशक ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत करते हुए मामले की जांच कराने और नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया। किसानों ने हालांकि स्पष्ट किया कि केवल आश्वासन पर्याप्त नहीं होगा और यदि निर्धारित समय में कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। उनका कहना है कि प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता के साथ परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी भी दी जानी चाहिए, ताकि उनका भविष्य सुरक्षित हो सके।

    इसके बाद किसान प्रतिनिधिमंडल ने मानव अधिकार आयोग और महिला आयोग को भी ज्ञापन सौंपकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की। आयोग के अधिकारियों ने शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराने का भरोसा दिया। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई, पीड़ित परिवारों को 25 लाख रुपये का मुआवजा और अन्य मांगें पूरी नहीं हुईं तो सीहोर, भोपाल, शाजापुर और उज्जैन सहित आसपास के जिलों के किसान संयुक्त रूप से बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे। उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।

  • दुर्लभ बीमारी से जूझ रही तीन वर्षीय बच्ची के इलाज में कथित देरी पर हाई कोर्ट सख्त, दिल्ली AIIMS से मांगा जवाब, 23 जुलाई तक रिपोर्ट तलब

    दुर्लभ बीमारी से जूझ रही तीन वर्षीय बच्ची के इलाज में कथित देरी पर हाई कोर्ट सख्त, दिल्ली AIIMS से मांगा जवाब, 23 जुलाई तक रिपोर्ट तलब


    मध्य प्रदेश: हाई कोर्ट ने स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (एसएमए) टाइप-2 जैसी दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी से पीड़ित तीन वर्षीय बच्ची के इलाज में कथित देरी को गंभीरता से लेते हुए नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) से निर्धारित समय सीमा के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की संवेदनशीलता और बच्ची की स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए जवाब 23 जुलाई तक हर हाल में दाखिल किया जाना चाहिए। मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को निर्धारित की गई है।

    इंदौर निवासी तीन वर्षीय अनिका शर्मा की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में अनावश्यक देरी मरीज के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है। सुनवाई के दौरान AIIMS की ओर से पेश अधिवक्ता ने जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय का अनुरोध किया, लेकिन याचिकाकर्ता की ओर से इसका विरोध किया गया। उनका कहना था कि इलाज के लिए आवश्यक धनराशि का बड़ा हिस्सा जुटाए जाने के बावजूद उपचार शुरू नहीं हो सका है।

    इससे पहले भी अदालत केंद्र और राज्य सरकार से इस मामले में जानकारी मांग चुकी है। न्यायालय ने यह भी जानना चाहा था कि क्या राज्य सरकार बच्ची के उपचार में किसी प्रकार की आर्थिक या प्रशासनिक सहायता उपलब्ध करा सकती है। अदालत का मानना है कि गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के मामलों में संबंधित संस्थाओं को समयबद्ध और संवेदनशील तरीके से कार्रवाई करनी चाहिए।

    याचिका के अनुसार बच्ची के इलाज के लिए लगभग 9.50 करोड़ रुपये की आवश्यकता है। परिवार अब तक करीब 8 करोड़ रुपये की व्यवस्था कर चुका है। इसमें केंद्र सरकार से स्वीकृत आर्थिक सहायता के अलावा सामाजिक संगठनों और विभिन्न दानदाताओं का सहयोग भी शामिल है। परिवार का कहना है कि उपचार में जितनी अधिक देरी होगी, बीमारी के बढ़ने का जोखिम उतना ही बढ़ता जाएगा।

    मामले में बताया गया है कि उपचार के लिए एक विशेष जीवनरक्षक इंजेक्शन विदेश से मंगाना आवश्यक है। यह दवा अमेरिका से आयात की जानी है और इसके बिना उपचार की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकती। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार एसएमए जैसी बीमारी में समय पर इलाज अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि देरी होने पर मांसपेशियों की कार्यक्षमता लगातार प्रभावित होती जाती है और रोगी की स्थिति अधिक जटिल हो सकती है।

    स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी एक दुर्लभ आनुवंशिक न्यूरोमस्कुलर बीमारी है, जिसमें रीढ़ की हड्डी के मोटर न्यूरॉन्स धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त होने लगते हैं। इसके कारण शरीर की मांसपेशियां कमजोर होती जाती हैं और सांस लेने, निगलने तथा सामान्य गतिविधियां करने जैसी आवश्यक शारीरिक क्षमताएं भी प्रभावित हो सकती हैं। यही वजह है कि इस बीमारी में समय पर उपचार को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

    अब सभी की निगाहें AIIMS की ओर से अदालत में प्रस्तुत किए जाने वाले जवाब और आगामी सुनवाई पर टिकी हैं। उम्मीद की जा रही है कि न्यायालय के निर्देशों के बाद उपचार प्रक्रिया को लेकर स्थिति जल्द स्पष्ट होगी और बच्ची को आवश्यक चिकित्सा सहायता समय पर उपलब्ध कराने की दिशा में आगे की कार्रवाई तेज होगी।

  • सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की पहली तिमाही शानदार, 13 प्रतिशत बढ़ा शुद्ध मुनाफा; एनपीए में सुधार से वित्तीय स्थिति और मजबूत

    सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की पहली तिमाही शानदार, 13 प्रतिशत बढ़ा शुद्ध मुनाफा; एनपीए में सुधार से वित्तीय स्थिति और मजबूत


    नई दिल्ली ।
    सार्वजनिक क्षेत्र के सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के वित्तीय नतीजों में मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया है। अप्रैल से जून 2026 के दौरान बैंक का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 13.3 प्रतिशत बढ़कर 1,324 करोड़ रुपये पहुंच गया। बैंक की ब्याज आय में बढ़ोतरी और प्रावधानों में कमी ने लाभप्रदता को मजबूती दी, जबकि परिसंपत्ति गुणवत्ता में भी सुधार देखने को मिला। हालांकि परिचालन लाभ में हल्की गिरावट दर्ज की गई है।

    बैंक द्वारा जारी वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में शुद्ध मुनाफा 1,169 करोड़ रुपये था, जो इस बार बढ़कर 1,324 करोड़ रुपये हो गया। यह वृद्धि ऐसे समय में आई है जब बैंकिंग क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है और वित्तीय संस्थान अपनी आय बढ़ाने के साथ जोखिम नियंत्रण पर भी विशेष ध्यान दे रहे हैं।

    तिमाही के दौरान बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम यानी ब्याज से प्राप्त आय और ब्याज पर किए गए खर्च के बीच का अंतर भी मजबूत रहा। यह सालाना आधार पर 16 प्रतिशत बढ़कर 3,914 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह 3,383 करोड़ रुपये था। विशेषज्ञों के अनुसार, नेट इंटरेस्ट इनकम में बढ़ोतरी बैंक की मुख्य बैंकिंग गतिविधियों की मजबूती को दर्शाती है।

    हालांकि बैंक के परिचालन लाभ में मामूली दबाव दिखाई दिया। पहली तिमाही में ऑपरेटिंग प्रॉफिट 5.1 प्रतिशत घटकर 2,186 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 2,304 करोड़ रुपये था। इसके बावजूद शुद्ध लाभ में वृद्धि इस बात का संकेत है कि बैंक ने खर्चों और जोखिम प्रबंधन पर बेहतर नियंत्रण बनाए रखा।

    बैंक ने इस तिमाही में प्रावधानों में भी उल्लेखनीय कमी दर्ज की। अप्रैल-जून अवधि में प्रोविजन घटकर 401.6 करोड़ रुपये रह गया, जबकि एक वर्ष पहले इसी अवधि में यह 521.1 करोड़ रुपये था। पिछली तिमाही की तुलना में भी इसमें कमी दर्ज की गई है। प्रावधानों में गिरावट से बैंक की लाभप्रदता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।

    परिसंपत्ति गुणवत्ता के मोर्चे पर भी बैंक का प्रदर्शन बेहतर रहा। ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (जीएनपीए) अनुपात घटकर 2.60 प्रतिशत पर आ गया, जो पिछली तिमाही में 2.67 प्रतिशत था। वहीं नेट नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (एनएनपीए) अनुपात 0.49 प्रतिशत पर स्थिर बना रहा। यह संकेत देता है कि बैंक खराब ऋणों पर नियंत्रण बनाए रखने में सफल रहा है।

    बैंक ने तिमाही परिणामों के साथ किसी लाभांश की घोषणा नहीं की। वहीं शेयर बाजार में कारोबारी सत्र के दौरान बैंक का शेयर मामूली गिरावट के साथ 31.70 रुपये पर बंद हुआ। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों की नजर आने वाली तिमाहियों में बैंक की आय वृद्धि, ऋण विस्तार और परिसंपत्ति गुणवत्ता के प्रदर्शन पर बनी रहेगी।

    सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने अपनी रिपोर्ट में यह भी बताया कि कॉस्ट-टू-इनकम रेशियो लगभग स्थिर बना हुआ है, जबकि जमा राशि जुटाने की लागत में भी सुधार दर्ज किया गया है। इससे बैंक की परिचालन दक्षता और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन का संकेत मिलता है। बैंकिंग क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच पहली तिमाही के ये परिणाम सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की वित्तीय मजबूती और स्थिर प्रदर्शन की दिशा में सकारात्मक संकेत माने जा रहे हैं।

  • दतिया उपचुनाव में अवधेश नायक बने सियासी केंद्र, कांग्रेस मनाने में जुटी तो भाजपा भी बनाए हुए संपर्क; बढ़ीं राजनीतिक अटकलें

    दतिया उपचुनाव में अवधेश नायक बने सियासी केंद्र, कांग्रेस मनाने में जुटी तो भाजपा भी बनाए हुए संपर्क; बढ़ीं राजनीतिक अटकलें

     मध्य प्रदेश: के दतिया विधानसभा उपचुनाव से पहले वरिष्ठ कांग्रेस नेता अवधेश नायक को लेकर राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज होती जा रही हैं। पार्टी से टिकट नहीं मिलने के बाद उनके भविष्य को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। इसी बीच कांग्रेस नेतृत्व ने उन्हें अपने साथ बनाए रखने के प्रयास तेज कर दिए हैं। शुक्रवार को पूर्व मंत्री मुकेश नायक ने उनके निवास पहुंचकर मुलाकात की, जिसके बाद दतिया की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा शुरू हो गई है।

    जानकारी के अनुसार दोनों नेताओं के बीच करीब 25 मिनट तक बंद कमरे में बातचीत हुई। हालांकि इस मुलाकात में किन मुद्दों पर चर्चा हुई, इसकी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। इसके बावजूद राजनीतिक गलियारों में इस मुलाकात को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उपचुनाव के दौरान हुई इस बैठक ने कांग्रेस की रणनीति और अवधेश नायक के भविष्य को लेकर कई तरह की अटकलों को जन्म दिया है।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि टिकट वितरण के बाद उत्पन्न असंतोष को देखते हुए कांग्रेस किसी भी तरह वरिष्ठ नेताओं को साथ बनाए रखना चाहती है। इसी कारण पार्टी लगातार संवाद के माध्यम से स्थिति को सामान्य करने का प्रयास कर रही है। अवधेश नायक लंबे समय से क्षेत्र की राजनीति में सक्रिय रहे हैं और उनके समर्थकों की संख्या भी प्रभावशाली मानी जाती है। ऐसे में उनका कोई भी राजनीतिक फैसला उपचुनाव के समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।

    दूसरी ओर भाजपा भी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेताओं और मंत्रियों की भी अवधेश नायक से पहले मुलाकात हो चुकी है। हालांकि किसी भी दल की ओर से इन मुलाकातों को लेकर आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। इसके बावजूद दोनों प्रमुख दलों की सक्रियता यह संकेत देती है कि अवधेश नायक का राजनीतिक रुख उपचुनाव में अहम भूमिका निभा सकता है।

    अवधेश नायक ने फिलहाल अपने अगले कदम को लेकर कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि वह किसी भी राजनीतिक निर्णय से पहले अपने समर्थकों, कार्यकर्ताओं और शुभचिंतकों से व्यापक चर्चा करेंगे। उनका कहना है कि अंतिम फैसला व्यक्तिगत नहीं बल्कि सामूहिक राय के आधार पर लिया जाएगा। इस बयान के बाद यह साफ हो गया है कि फिलहाल उन्होंने अपने राजनीतिक विकल्प खुले रखे हैं।

    दतिया विधानसभा उपचुनाव पहले से ही प्रदेश की प्रमुख राजनीतिक लड़ाइयों में शामिल माना जा रहा है। ऐसे समय में किसी प्रभावशाली नेता का दल बदलना, चुनाव प्रचार से दूरी बनाना या किसी उम्मीदवार के समर्थन में खुलकर उतरना चुनावी मुकाबले को नई दिशा दे सकता है। यही कारण है कि कांग्रेस और भाजपा दोनों ही अवधेश नायक के रुख पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

    फिलहाल दतिया की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि अवधेश नायक आने वाले दिनों में कौन सा फैसला लेते हैं। उनके निर्णय का असर केवल एक नेता के राजनीतिक भविष्य तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि विधानसभा उपचुनाव की रणनीति, चुनावी माहौल और दोनों प्रमुख दलों के समीकरणों पर भी पड़ सकता है। अब सभी की निगाहें उनके अगले आधिकारिक बयान और समर्थकों के साथ होने वाली बैठक पर टिकी हुई हैं, जिससे दतिया उपचुनाव की तस्वीर और अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

  • बदायूं में संदिग्ध बुखार का कहर: चार दिन में दो सगे भाइयों की मौत, गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम तैनात

    बदायूं में संदिग्ध बुखार का कहर: चार दिन में दो सगे भाइयों की मौत, गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम तैनात


    बदायूं। उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में संदिग्ध बुखार ने एक ही परिवार के दो युवकों की जान ले ली। दहगवां स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्र के नसीरपुर टप्पा मलसई गांव में चार दिनों के भीतर दो सगे भाइयों की मौत से पूरे गांव में भय का माहौल है। घटना की जानकारी मिलते ही स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया और अधिकारियों के निर्देश पर मेडिकल टीम ने गांव पहुंचकर जांच और उपचार का अभियान शुरू कर दिया।

    तेज बुखार के बाद बिगड़ी हालत
    जानकारी के अनुसार, गांव निवासी होरीलाल के 20 वर्षीय बेटे मोरपाल और 18 वर्षीय बेटे ब्रजेश को करीब चार दिन पहले अचानक तेज बुखार आया था। परिजनों का कहना है कि दोनों को बुखार के साथ अत्यधिक कमजोरी और उल्टी की शिकायत भी थी।

    शुरुआत में स्थानीय स्तर पर इलाज कराया गया, लेकिन दोनों की तबीयत लगातार बिगड़ती गई और उपचार के बावजूद उनकी मौत हो गई। एक ही परिवार के दो जवान बेटों के निधन से घर में मातम पसरा है।

    गांव में मेडिकल कैंप, घर-घर सर्वे शुरू
    ग्रामीणों के मुताबिक, गांव में कई अन्य लोग भी बुखार से पीड़ित हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) ने गांव में तत्काल मेडिकल कैंप लगाने और घर-घर सर्वे कराने के निर्देश दिए हैं।

    दहगवां स्वास्थ्य केंद्र की टीम शुक्रवार सुबह से गांव में मौजूद है। स्वास्थ्यकर्मी बीमार लोगों की जांच, रक्त के नमूने लेने और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराने में जुटे हैं।

    स्वास्थ्य विभाग ने जारी की सलाह
    स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीणों से अफवाहों से बचने और घबराने के बजाय सावधानी बरतने की अपील की है। अधिकारियों ने कहा है कि बुखार या अन्य लक्षण दिखाई देने पर तुरंत सरकारी अस्पताल में चिकित्सकीय जांच कराएं और झोलाछाप या अप्रमाणित उपचार से बचें।

    इसके साथ ही लोगों को उबालकर पानी पीने, घर और आसपास साफ-सफाई बनाए रखने तथा जलभराव नहीं होने देने की सलाह दी गई है, ताकि संक्रमण फैलने का खतरा कम किया जा सके। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांव की स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं और संक्रमण के कारणों का पता लगाने के लिए जांच जारी है।

  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को अंतरिम रिपोर्ट पेश करेगी SIT, सरकार से मांग सकती है और समय

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को अंतरिम रिपोर्ट पेश करेगी SIT, सरकार से मांग सकती है और समय


    लखनऊ। राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अपनी अंतरिम रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। सूत्रों के मुताबिक, शीर्ष अदालत के निर्देशों के तहत यह रिपोर्ट सीधे सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की जाएगी। साथ ही, जांच पूरी करने के लिए एसआईटी उत्तर प्रदेश सरकार से अतिरिक्त समय की मांग भी कर सकती है।

    जानकारी के अनुसार, जांच अभी कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर जारी है। एसआईटी चढ़ावा गणना प्रणाली, कथित वित्तीय अनियमितताओं, बैंकिंग लेनदेन, आरोपियों की भूमिका और संबंधित दस्तावेजों की विस्तार से जांच कर रही है। हाल में पुलिस कस्टडी रिमांड के दौरान हुई पूछताछ और बरामदगी से मिले नए सुरागों का भी सत्यापन किया जा रहा है। इन सभी बिंदुओं की जांच पूरी होने के बाद अंतिम रिपोर्ट अदालत में पेश की जाएगी।

    23 जून को शासन को सौंपी गई थी प्रारंभिक रिपोर्ट


    एसआईटी ने 23 जून को राम मंदिर की व्यवस्थाओं और दानराशि प्रबंधन से संबंधित अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी थी। सूत्रों के अनुसार, इस रिपोर्ट में मंदिर की प्रशासनिक, वित्तीय और संचालन व्यवस्था से जुड़ी पांच प्रमुख खामियों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में दानराशि की सुरक्षा, कर्मचारियों की नियुक्ति, खरीद प्रक्रिया, प्रसाद वितरण व्यवस्था और अन्य प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

    दानराशि की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल


    जांच में पाया गया कि श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई गई नकदी को मंदिर परिसर से बैंक तक पहुंचाने और गणना कक्ष में उसकी गिनती के दौरान पर्याप्त सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था नहीं थी। एसआईटी का मानना है कि इसी वजह से दानराशि प्रबंधन प्रणाली में कई स्तरों पर सुधार की आवश्यकता है।

    सोने-चांदी के आभूषणों का रिकॉर्ड भी अधूरा


    रिपोर्ट के अनुसार, श्रद्धालुओं की ओर से भेंट किए गए सोने और चांदी के आभूषणों का समुचित अभिलेखीकरण नहीं किया जा रहा था। जांच में ऐसे कई उदाहरण सामने आए, जहां मूल्यवान धातुओं के संग्रहण और रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई।

    नियुक्तियों और खरीद प्रक्रिया पर भी सवाल


    एसआईटी ने अपनी जांच में यह भी पाया कि कुछ पदों पर नियुक्तियां तय प्रक्रिया और योग्यता के बजाय सिफारिशों के आधार पर की गईं। रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही प्रभावित हुई। इसके अलावा सामग्री खरीद की प्रक्रिया को लेकर भी आपत्तियां दर्ज की गई हैं। रिपोर्ट में उल्लेख है कि कुछ मामलों में टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी नहीं थी और कुछ खरीद में कमीशनखोरी तथा निर्धारित नियमों के पालन में अनियमितताओं के संकेत मिले हैं।

    प्रसाद वितरण और सीता रसोई में भी मिलीं कमियां


    एसआईटी की जांच में प्रसाद वितरण व्यवस्था और सीता रसोई के संचालन में भी कई कमियां सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, खाद्य सामग्री और अन्य सामानों की खरीद कई बार बाजार मूल्य से अधिक दरों पर की गई, जिससे वित्तीय अनुशासन और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए हैं।

    सुधारात्मक कदमों की सिफारिश


    सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में वित्तीय व्यवस्थाओं को अधिक पारदर्शी बनाने, जवाबदेही तय करने और प्रशासनिक सुधार लागू करने की सिफारिश की है। राज्य सरकार रिपोर्ट का अध्ययन कर रही है और इसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।