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  • मध्यप्रदेश के सागर में संदिग्ध जहरीली शराब से मौतों पर सरकार सख्त, कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

    मध्यप्रदेश के सागर में संदिग्ध जहरीली शराब से मौतों पर सरकार सख्त, कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

    मध्यप्रदेश। के सागर जिले के बंडा क्षेत्र में संदिग्ध जहरीली शराब पीने से हुई मौतों का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के मुताबिक हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर 11 तक पहुंच गई है। हालांकि, इस बढ़े हुए आंकड़े की आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। घटना के बाद प्रशासन और सरकार की सक्रियता बढ़ गई है।

    बताया जा रहा है कि संदिग्ध शराब के सेवन के बाद कई लोगों की तबीयत बिगड़ी थी। इसके बाद प्रभावित लोगों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। घटना में कई परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। प्रशासन की ओर से पूरे मामले की जानकारी जुटाई जा रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि संदिग्ध शराब कहां से आई तथा इसके पीछे कौन लोग जिम्मेदार हैं।

    घटना की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जहरीली या अवैध शराब के कारोबार से जुड़े किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। प्रशासन को मामले की तह तक जाकर जिम्मेदार लोगों की पहचान करने और उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

    उपमुख्यमंत्री एवं आबकारी मंत्री जगदीश देवड़ा ने घटना को लेकर अधिकारियों से जानकारी ली। उन्होंने सागर के कलेक्टर और पुलिस अधिकारियों से पूरे घटनाक्रम की जानकारी हासिल की। स्थिति का जायजा लेने और जांच की निगरानी के लिए आबकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी को मौके पर भेजे जाने की जानकारी भी सामने आई है।

    घटना के बाद क्षेत्र में अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई तेज किए जाने की बात कही गई है। प्रशासन की ओर से संदिग्ध ठिकानों पर जांच और छापेमारी की जा रही है। अधिकारियों का उद्देश्य अवैध शराब की आपूर्ति से जुड़े नेटवर्क का पता लगाना और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकना है। मामले में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    इस बीच घटना को लेकर प्रदेश की राजनीति भी गरमा गई है। कांग्रेस ने इस मामले को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस प्रवक्ता अभिनव बारोलिया ने आरोप लगाया कि प्रदेश में भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के कारण अवैध शराब का कारोबार बढ़ रहा है। उन्होंने सरकार के सुशासन के दावों पर भी सवाल उठाए।

    कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मध्यप्रदेश में पहले भी शराब से जुड़े गंभीर हादसे सामने आ चुके हैं और इसके बावजूद अवैध शराब के नेटवर्क पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पाया है। पार्टी ने सरकार से जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने तथा पूरे नेटवर्क की जांच कराने की मांग की है।

    हालांकि, कांग्रेस के इन राजनीतिक आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल प्रशासन का मुख्य फोकस घटना की वास्तविक वजह पता लगाने, संदिग्ध शराब की जांच कराने, प्रभावित लोगों को उपचार उपलब्ध कराने और जिम्मेदार लोगों तक पहुंचने पर है। मौतों के अंतिम आंकड़े और हादसे की पूरी तस्वीर आधिकारिक जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

  • 120 साल से नहीं टूटी देवास की ये शाही परंपरा, पालकी में विराजे लड्डू गोपाल तो जयकारों से गूंजा शहर

    120 साल से नहीं टूटी देवास की ये शाही परंपरा, पालकी में विराजे लड्डू गोपाल तो जयकारों से गूंजा शहर


    देवास । देवास में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व इस बार भी आस्था और वर्षों पुरानी परंपरा के साथ मनाया गया। शहर में जन्माष्टमी के अवसर पर देवास राज परिवार की 120 साल पुरानी दिंडी यात्रा निकाली गई। शनिवार 5 सितंबर की शाम आयोजित इस ऐतिहासिक यात्रा में भगवान लड्डू गोपाल को विशेष रूप से सजाई गई पालकी में विराजित किया गया। पालकी के साथ राज परिवार के सदस्य और बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। यात्रा जिस रास्ते से होकर गुजरी वहां भक्तों का उत्साह और भगवान के दर्शन की लालसा साफ दिखाई दी।

    देवास में दिंडी यात्रा की यह परंपरा संत तुकाराम महाराज की प्रेरणा से शुरू होने की बात कही जाती है। राज परिवार द्वारा पिछले 119 वर्षों से इस परंपरा को लगातार निभाया जाता रहा है और इस वर्ष यह यात्रा 120वीं बार आयोजित की गई। इतनी लंबी अवधि से चली आ रही यह परंपरा देवास की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। हर वर्ष जन्माष्टमी के अवसर पर श्रद्धालु इस यात्रा का बेसब्री से इंतजार करते हैं।

    जन्माष्टमी के दिन शाम करीब 6 बजे सीनियर राजवाड़े स्थित मंदिर में भगवान लड्डू गोपाल की विधिवत पूजा अर्चना की गई। इसके बाद उन्हें पालकी में विराजित किया गया। जन्माष्टमी को देखते हुए राजवाड़े के मंदिर परिसर को विशेष रूप से सजाया गया था। पूजा के बाद जैसे ही भगवान लड्डू गोपाल की पालकी यात्रा के लिए निकली तो श्रद्धालुओं में उत्साह बढ़ गया। लोगों ने भगवान के दर्शन किए और सुख समृद्धि की कामना की।

    इस धार्मिक यात्रा में राज परिवार के सदस्य विक्रमसिंह पवार सहित शाही परिवार के अन्य सदस्य भी शामिल हुए। उनके साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु और धर्मप्रेमी नागरिक यात्रा का हिस्सा बने। शहर के विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए दिंडी यात्रा आगे बढ़ी। रास्ते में श्रद्धालुओं ने भगवान लड्डू गोपाल के दर्शन किए और धार्मिक भाव के साथ यात्रा का स्वागत किया। पालकी के साथ चल रहे श्रद्धालुओं के कारण पूरे मार्ग पर भक्तिमय माहौल बना रहा।

    दिंडी यात्रा सीनियर राजवाड़े से शुरू होकर शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए मीठा तालाब पहुंची। यहां भगवान लड्डू गोपाल की दोबारा पूजा अर्चना की गई। इसके बाद धार्मिक आयोजन का समापन हुआ। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे और लोगों ने भगवान के दर्शन कर आशीर्वाद लिया।

    देवास की यह 120वीं दिंडी यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही ऐतिहासिक परंपरा की झलक भी है। बदलते समय के बावजूद राज परिवार और श्रद्धालुओं द्वारा इस परंपरा को निरंतर आगे बढ़ाया जाना शहर की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए हुए है। जन्माष्टमी के मौके पर निकली इस यात्रा ने एक बार फिर देवास में भक्ति और परंपरा का अनोखा संगम देखने को मिला।

  • सूडान में रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल का आरोप, गोपनीय दस्तावेजों में सेना पर क्लोरीन गैस हमलों की गंभीर जानकारी सामने आई

    सूडान में रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल का आरोप, गोपनीय दस्तावेजों में सेना पर क्लोरीन गैस हमलों की गंभीर जानकारी सामने आई

    नई दिल्ली । तपते रेगिस्तान में चोरी-छिपे बम परीक्षण, हथियारों की सीक्रेट फैक्टरी के फर्श पर दम घुटने से मरे पड़े बिच्छू और कीड़े-मकोड़े, और जंग के बीच राजधानी खारतूम के वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट से क्लोरीन के बड़े-बड़े सिलिंडरों की चोरी…गोपनीय डोजियर से सामने आई ऐसी कुछ जानकारियां सूडान सरकार के इन दावों को नकारने के लिए काफी है कि उसने गृह युद्ध के दौरान रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल नहीं किया।

    खुफिया रिपोर्ट में हुआ खुलासा

    सूडान में पिछले तीन साल से जारी खूनी गृहयुद्ध के बीच एक पश्चिम एशियाई खुफिया एजेंसी की ओर से जुटाए गए 150 से अधिक दस्तावेजों, वीडियो, तस्वीरों और हजारों इंटरसेप्टेड फोन कॉल्स से चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। इससे पता चलता है कि सूडानी सेना ने अपने खिलाफ मोर्चा खोलने वाली रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (आरएसएफ) को पस्त करने के लिए 2024 में बड़े पैमाने पर क्लोरीन गैस आधारित रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल किया था। इस केमिकल प्रोजेक्ट की कमान ब्रिगेडियर जनरल तारिक हुसैन के हाथों में थी।

    पारंपरिक वॉरहेड के साथ क्लोरीन का उपयोग

    लीक ब्लूप्रिंट के अनुसार, पारंपरिक वॉरहेड के साथ 33 पाउंड क्लोरीन गैस का इस्तेमाल किया गया। योजना यह थी कि धमाके के छर्रों से दुश्मन घायल हो और बची-खुची जान जहरीली गैस ले लेगी। साथ ही धमाके के चलते मौके पर केमिकल के सबूत भी नष्ट हो जाएंगे।

    राहत एजेंसियों की मदद का किया दुरुपयोग

    राजधानी खारतूम पर जब आरएसएफ का कब्जा होने लगा, तो जुलाई 2024 में जनरल तारिक ने सेना को क्लोरीन बम बनाने का सुझाव दिया। सेना ने ओमडुरमैन स्थित अल-मनारा वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट से बड़े पीले सिलिंडर जब्त किए। विडंबना यह है कि युद्धग्रस्त इलाकों में हैजा महामारी को रोकने और पानी साफ करने के लिए ये सिलिंडर अंतरराष्ट्रीय राहत एजेंसियों ने दान में दिए थे। अगस्त 2024 में जनरल हुसैन के भेजे एक संदेश से पता चलता है कि मिस्र से 20 क्लोरीन सिलिंडर मंगवाए गए थे, जो 1,100 रासायनिक बम बनाने के लिए पर्याप्त थे।

    सेना प्रमुख ने दिए सबूत मिटाने के निर्देश

    अमेरिकी प्रशासन ने कुछ सबूतों के आधार पर जनवरी 2025 से सूडानी सेना प्रमुख जनरल अब्देल फतह अल-बुरहान पर कड़े प्रतिबंध लगाने शुरू किए थे। अब सामने आए डोजियर से साफ हुआ है कि जनरल बुरहान को इस पूरे प्रोजेक्ट की सीधी जानकारी थी और उन्होंने अमेरिकी खुलासे के बाद इसके सभी सबूत मिटाने के निर्देश दिए थे।

    दुश्मनों ने पी ली जहरीली गैस…सच कैसे सामने आया?

    अक्तूबर 2024 तक मेरोवे एयरपोर्ट के बेस पर करीब 300 केमिकल बम तैयार करके रख दिए गए थे। 22 जुलाई 2024 को मेरोवे एयरपोर्ट से एंटोनोव विमान ने उड़ान भरी और रेगिस्तान में पहला सफल टेस्ट किया। लीक डोजियर से पता चलता है कि उसी समय जनरल हुसैन ने मैसेज भेजा था, परीक्षण 100% सफल रहा, बम निशाने पर गिरा और गैस फैल गई। सितंबर 2024 को अल-जैली तेल रिफाइनरी पर रासायनिक हमला किया गया। हुसैन के इंटरसेप्ट किए गए संदेश में लिखा था, उन्होंने गैस पी ली है। उस समय सोशल मीडिया पर विद्रोहियों को ऑक्सीजन मास्क पहने देखा गया था।

    सबूत मिटाने का खेल

    मई 2025 में जब अमेरिका ने रासायनिक हथियारों के संदेह पर सूडान पर प्रतिबंध लगाए, तो सेना प्रमुख जनरल बुरहान ने तुरंत जनरल हुसैन को मैसेज भेजकर सबूत मिटाने का फरमान सुनाया। जवाब मिला. ऑपरेशन एक महीने पहले ही पूरा कर दिया गया है। बाद में दुनिया की आंखों में धूल झोंकने के लिए बुरहान ने आरोपों की जांच के लिए एक आंतरिक कमेटी गठित की। इसका मुख्य सलाहकार ब्रिगेडियर जनरल तारिक हुसैन को ही बना दिया गया।

  • निशान और भव्य झांकियों के साथ निकला गोगादेव महाराज का चल समारोह, दर्शन को उमड़े श्रद्धालु

    निशान और भव्य झांकियों के साथ निकला गोगादेव महाराज का चल समारोह, दर्शन को उमड़े श्रद्धालु


    देवास । देवास में गोगा नवमी के अवसर पर शनिवार रात लोक आराध्य जाहरवीर गोगादेव महाराज के सम्मान में भव्य चल समारोह निकाला गया। धार्मिक आस्था और उत्साह से भरे इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और समाजजन शामिल हुए। पूरे मार्ग पर गोगादेव महाराज के जयकारों से माहौल भक्तिमय नजर आया। समारोह में पारंपरिक निशानों के साथ कई आकर्षक झांकियां शामिल की गईं जिन्हें देखने के लिए शहर के अलग अलग हिस्सों से लोग पहुंचे।

    चल समारोह का आयोजन वाल्मीकि समाज छोटी पाती देवास की ओर से किया गया। आयोजन की शुरुआत उज्जैन रोड स्थित गुरु गोरखनाथ मंदिर से हुई। यहां से श्रद्धालुओं और समाजजनों के साथ चल समारोह शहर के प्रमुख मार्गों की ओर रवाना हुआ। जुलूस के आगे और पीछे बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। जैसे जैसे समारोह शहर के बीच पहुंचा वैसे वैसे झांकियों के दर्शन करने के लिए लोगों की भीड़ बढ़ती गई।

    इस दौरान माता बाछल की गोद में बाल स्वरूप में विराजित वीर गोगादेव महाराज की झांकी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। झांकी में गोगादेव महाराज के बाल स्वरूप को बेहद मनमोहक तरीके से प्रस्तुत किया गया था। माता बाछल की गोद में विराजित बाल गोगादेव की छवि देखकर श्रद्धालु भावविभोर नजर आए। बड़ी संख्या में लोगों ने झांकी के दर्शन किए और गोगादेव महाराज से सुख समृद्धि की कामना की।

    चल समारोह में भगवान सांवलिया सेठ की झांकी भी शामिल की गई थी। इस झांकी ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया। शहर के जिन जिन मार्गों से समारोह गुजरा वहां श्रद्धालु पहले से ही झांकियों के स्वागत और दर्शन के लिए मौजूद रहे। कई स्थानों पर लोगों ने धार्मिक भाव के साथ चल समारोह का स्वागत किया। गोगादेव महाराज के जयकारों और भक्ति गीतों के बीच पूरा वातावरण उत्सवमय बना रहा।

    गोगादेव महाराज को लोक आस्था में जाहरवीर के नाम से भी जाना जाता है। गोगा नवमी के अवसर पर देश के कई हिस्सों में उनकी पूजा और धार्मिक आयोजन किए जाते हैं। देवास में भी इस परंपरा के तहत हर वर्ष श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिलता है। इस बार भी चल समारोह में समाज के लोगों के साथ अन्य धर्मप्रेमी नागरिकों ने भाग लेकर आयोजन को भव्यता प्रदान की।

    गुरु गोरखनाथ मंदिर से शुरू हुआ यह चल समारोह एमजी रोड सहित शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए देर रात मीठा तालाब पहुंचा। यहां धार्मिक उत्साह के बीच समारोह का समापन किया गया। पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं की मौजूदगी और झांकियों की भव्यता ने गोगा नवमी के पर्व को खास बना दिया। माता बाछल की गोद में बाल गोगादेव की झांकी विशेष रूप से लोगों के बीच चर्चा का विषय रही और श्रद्धालु बड़ी संख्या में इसके दर्शन के लिए जुटे।

  • कभी राजा-महाराजाओं का ठिकाना थे ये पानी पर तैरते महल, आज भी शाही खूबसूरती देख खिंचे चले आते हैं पर्यटक

    कभी राजा-महाराजाओं का ठिकाना थे ये पानी पर तैरते महल, आज भी शाही खूबसूरती देख खिंचे चले आते हैं पर्यटक


    नई दिल्ली । भारत अपनी विविधता और समृद्ध इतिहास के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। यहां पहाड़ों से लेकर समुद्र तक और रेगिस्तान से लेकर घने जंगलों तक घूमने के लिए अनगिनत जगहें हैं। लेकिन देश में कुछ ऐसी ऐतिहासिक इमारतें भी हैं जिनकी खूबसूरती पानी के बीच और भी ज्यादा निखर जाती है। झीलों के बीच बने ये शाही महल दूर से ऐसे नजर आते हैं जैसे पानी पर तैर रहे हों। इनकी वास्तुकला इतिहास की भव्यता को दिखाती है और आज भी देश विदेश से आने वाले पर्यटकों को आकर्षित करती है।

    इन वाटर पैलेस में सबसे मशहूर नाम जयपुर के जल महल का है। मानसागर झील के बीच स्थित यह महल दूर से बेहद आकर्षक दिखाई देता है। इसका निर्माण 18वीं सदी में महाराजा माधो सिंह प्रथम के समय कराया गया था। ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार इसका इस्तेमाल शाही परिवार आराम और शिकार के लिए करता था। महल की पांच मंजिलों वाली संरचना इसकी सबसे खास विशेषताओं में शामिल है। झील में पानी का स्तर बढ़ने पर इसकी ऊपरी मंजिलें ही दिखाई देती हैं जबकि बाकी हिस्सा पानी में डूबा रहता है। यही वजह है कि जल महल को भारत के सबसे अनोखे जल महलों में गिना जाता है।

    राजस्थान के बाद अगर किसी जगह के वाटर पैलेस की खूबसूरती सबसे ज्यादा चर्चा में रहती है तो वह उदयपुर है। पिछोला झील के बीच बना लेक पैलेस सफेद संगमरमर की खूबसूरत इमारत है। इसे पहले जग निवास के नाम से जाना जाता था और इसका निर्माण 18वीं सदी में महाराणा जगत सिंह द्वितीय के समय हुआ था। झील के नीले पानी के बीच चमकता सफेद महल और पीछे दिखाई देती अरावली की पहाड़ियां इसे बेहद खास बनाती हैं। आज यह एक लग्जरी होटल के रूप में भी प्रसिद्ध है।

    उदयपुर में ही पिछोला झील के बीच जग मंदिर भी मौजूद है। यह एक खूबसूरत द्वीपीय महल है जिसकी निर्माण प्रक्रिया 16वीं सदी में शुरू हुई थी और बाद में इसे शाही संरक्षण में पूरा किया गया। कभी राजपरिवार के आराम के लिए इस्तेमाल होने वाला यह स्थान आज अपनी वास्तुकला और शांत वातावरण के कारण पर्यटकों को आकर्षित करता है। झील के चारों तरफ फैला पानी और महल की भव्य संरचना इसे यादगार पर्यटन स्थल बनाती है।

    मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक शहर मांडू में स्थित जहाज महल भी इस सूची में खास जगह रखता है। यह महल मुंज तालाब और कपूर तालाब के बीच इस तरह बनाया गया है कि दूर से देखने पर यह पानी में तैरते जहाज जैसा दिखाई देता है। इसी वजह से इसे जहाज महल नाम मिला। इसका निर्माण 15वीं सदी में सुल्तान गियासुद्दीन खिलजी के शासनकाल से जोड़ा जाता है। महल की संरचना के साथ यहां की जल व्यवस्था भी बेहद दिलचस्प है। पानी को जमा करने और महल के वातावरण को ठंडा रखने के लिए तालाबों और जल चैनलों का इस्तेमाल किया जाता था।

    इस सूची में त्रिपुरा का नीरमहल भी बेहद खास है। रुद्रसागर झील के बीच बना यह महल अपनी खूबसूरत वास्तुकला के कारण पूर्वोत्तर भारत की पहचान बन चुका है। इसका निर्माण 20वीं सदी में राजा बीर बिक्रम किशोर माणिक्य बहादुर ने गर्मियों में रहने के लिए कराया था। नीरमहल की वास्तुकला में भारतीय और मुगल शैली का सुंदर मेल देखने को मिलता है। महल की बालकनियां मंडप और ऊंचे टावर झील के बीच इसकी खूबसूरती को और बढ़ा देते हैं।

    भारत के ये वाटर पैलेस सिर्फ घूमने की जगहें नहीं हैं बल्कि देश के गौरवशाली इतिहास शाही जीवनशैली और अद्भुत वास्तुकला की जीवंत तस्वीर भी पेश करते हैं। अगर आपको इतिहास प्रकृति और खूबसूरत नजारों का संगम पसंद है तो इन पांचों जगहों को अपनी ट्रैवल लिस्ट में जरूर शामिल किया जा सकता है।

  • बिग बॉस 20 से पहले जानें पिछले 19 सीजन के विजेताओं की पूरी सूची, राहुल रॉय से गौरव खन्ना तक किसने जीती ट्रॉफी

    बिग बॉस 20 से पहले जानें पिछले 19 सीजन के विजेताओं की पूरी सूची, राहुल रॉय से गौरव खन्ना तक किसने जीती ट्रॉफी

    नई दिल्ली ।रियलिटी शो बिग बॉस भारतीय टेलीविजन के सबसे चर्चित और लंबे समय से दर्शकों का मनोरंजन करने वाले कार्यक्रमों में शामिल है। साल 2006 में शुरू हुआ यह शो अब अपने 20वें सीजन में प्रवेश करने जा रहा है। छह सितंबर से शुरू होने वाले नए सीजन को लेकर दर्शकों के बीच उत्सुकता बनी हुई है। शो की मेजबानी एक बार फिर सलमान खान करते नजर आएंगे। नए सीजन की थीम और कुछ नियमों में बदलाव की भी चर्चा है। ऐसे में बिग बॉस 20 की शुरुआत से पहले पिछले 19 सीजन के विजेताओं पर नजर डालना दिलचस्प है।

    बिग बॉस के पहले सीजन की ट्रॉफी अभिनेता राहुल रॉय ने अपने नाम की थी। आशिकी जैसी फिल्मों से पहचान बनाने वाले राहुल रॉय ने कैरोल ग्रेशियास और रवि किशन को पीछे छोड़ते हुए खिताब जीता था। इस सीजन को अरशद वारसी ने होस्ट किया था और विजेता को एक करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि मिली थी।

    दूसरे सीजन में आशुतोष कौशिक विजेता बने। उन्होंने राजा चौधरी को पीछे छोड़कर ट्रॉफी अपने नाम की थी। इस सीजन की मेजबानी शिल्पा शेट्टी ने की थी और विजेता को ट्रॉफी के साथ एक करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि मिली थी।

    तीसरे सीजन में अभिनेता विंदु दारा सिंह ने खिताब जीता। उन्होंने फाइनल में प्रवेश राणा को मात दी थी। अमिताभ बच्चन ने इस सीजन की मेजबानी की थी। चौथे सीजन में अभिनेत्री श्वेता तिवारी विजेता बनीं और बिग बॉस की पहली महिला विजेता के रूप में पहचान बनाई। उन्होंने फाइनल में द ग्रेट खली को पीछे छोड़ा था।

    पांचवें सीजन की ट्रॉफी अभिनेत्री जूही परमार ने जीती। फाइनल में उनका मुकाबला महक चहल से था। इसके बाद छठे सीजन में उर्वशी ढोलकिया विजेता बनीं। उन्होंने इमाम सिद्दीकी को हराया था। सातवें सीजन में गौहर खान ने तनिषा मुखर्जी को पीछे छोड़कर ट्रॉफी जीती।

    आठवें सीजन के विजेता गौतम गुलाटी रहे। उन्होंने फाइनल में करिश्मा तन्ना को मात दी। नौवें सीजन में प्रिंस नरूला विजेता बने और ऋषभ सिन्हा उपविजेता रहे। दसवें सीजन में पहली बार आम आदमी के तौर पर शामिल हुए मनवीर गुर्जर ने वीजे बानी को पीछे छोड़कर खिताब अपने नाम किया।

    इसके बाद बिग बॉस के 11वें सीजन में शिल्पा शिंदे विजेता बनीं। टीवी धारावाहिक में अंगूरी भाभी के किरदार से लोकप्रिय शिल्पा ने फाइनल में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई। 12वें सीजन की ट्रॉफी दीपिका कक्कड़ ने जीती।

    13वां सीजन शो के सबसे चर्चित सीजन में गिना जाता है। इसकी ट्रॉफी अभिनेता सिद्धार्थ शुक्ला ने अपने नाम की थी। साल 2021 में उनके निधन के बाद यह सीजन और उनका सफर दर्शकों की यादों का हिस्सा बना रहा।

    14वें सीजन में रुबीना दिलैक विजेता बनीं। इसके बाद 15वें सीजन की ट्रॉफी तेजस्वी प्रकाश ने जीती। 16वें सीजन में एमसी स्टैन विजेता बने, जबकि 17वें सीजन का खिताब मुनव्वर फारूकी ने अपने नाम किया। 18वें सीजन में करणवीर मेहरा विजेता बनकर सामने आए।

    बिग बॉस के 19वें सीजन की ट्रॉफी गौरव खन्ना ने अपने नाम की। उन्होंने फिनाले में फरहाना भट्ट को पीछे छोड़कर खिताब हासिल किया। अब 20वें सीजन की शुरुआत के साथ दर्शकों की नजर नए प्रतिभागियों, बदले नियमों और इस बार ट्रॉफी जीतने वाले नए नाम पर होगी। लंबे सफर में अलग अलग क्षेत्रों से आए प्रतियोगियों ने शो को नई पहचान दी है और हर सीजन ने दर्शकों के बीच अपनी अलग चर्चा बनाई है।

  • अक्षय कुमार ने अमिताभ बच्चन से जुड़ा सुनाया बचपन का मजेदार किस्सा, अंगूर चुराने पर बिग बी ने दिया था ऐसा दिलचस्प रिएक्शन

    अक्षय कुमार ने अमिताभ बच्चन से जुड़ा सुनाया बचपन का मजेदार किस्सा, अंगूर चुराने पर बिग बी ने दिया था ऐसा दिलचस्प रिएक्शन

    नई दिल्ली । हाल ही में अक्षय कुमार और सैफ अली खान कौन बनेगा करोड़पति में अपनी आने वाली फिल्म हैवान के प्रमोशन के लिए पहुंचे थे। इस दौरान अक्षय ने एक ऐसा किस्सा शेयर किया, जिसे सुनकर सब हैरान रह गए।बॉलीवुड के खिलाड़ी अक्षय कुमार अपने प्रैंक्स और शरारती अंदाज के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में उन्होंने केबीसी के सेट पर अपने बचपन का एक शरारती किस्सा शेयर किया, जिसे सुनकर सैफ तक हैरान रह गए।

    अक्षय ने सुनाया चोरी का किस्सा

    केबीसी के सामने आए प्रोमो में अक्षय और सैफ हॉटसीट पर नजर आ रहे हैं। इस दौरान अक्षय, अमिताभ बच्चन से बचपन के अंगूर वाली कहानी का जिक्र करते हैं। इस बीच सैफ इस कहानी के बारे में पूछते हैं।तो अक्षय ने कहा, ‘अमिताभ बच्चन जब पहलगांव में बेमिसाल की शूटिंग कर रहे थे। तो मैं अपने माता-पिता के साथ वहां मौजूद था। मेरे मम्मी-पापा भी सर के बहुत बड़े फैन हैं। तो उन्होंने मुझसे कहा कि जाओ तुम बच्चे हो, तो सर का ऑटोग्राफ लेकर आओ, तुम्हें सिक्योरिटी वाले नहीं रोकेंगे। तो मैं गया और मैंने देखा कि सर अंगूर खा रहे थे।’

    अक्षय ने आगे कहा, ‘मैंने जाकर उन्हें पेपर दिया साइन करने के लिए और चुपके से अंगूर का एक छोटा सा गुच्छा चुरा लिया, और सर ने मुझे देख लिया था। जब मैं साइन करवाकर जाने लगा, तो सर ने मुझे बुलाकर एक और बड़ा गुच्छा दिया और कहा कि ये लो बेटे ये भी ले जाओ।’ अक्षय का ये किस्सा सुनकर अमिताभ बच्चन और सैफ अली खान के साथ वहां मौजूद सभी लोग जोर-जोर से हंसने लगे।

    13 साल बाद साथ आएंगे अक्षय और सैफ

    प्रियदर्शन के निर्देशन में बनी फिल्म ‘हैवान’ में अक्षय कुमार और सैफ अली खान एक बार फिर साथ नजर आने वाले हैं। दोनों की जोड़ी को आखिरी बार साल 2008 में रिलीज हुई फिल्म ‘टशन’ में देखा गया था। यानी करीब 18 साल बाद दोनों कलाकार पर्दे पर साथ दिखाई देंगे। ‘हैवान’ 11 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है।

  • हर बीमारी में घरेलू नुस्खे आजमाना पड़ सकता है भारी, सांस की परेशानी, बेहोशी और खून आने पर तुरंत डॉक्टर से लें सलाह

    हर बीमारी में घरेलू नुस्खे आजमाना पड़ सकता है भारी, सांस की परेशानी, बेहोशी और खून आने पर तुरंत डॉक्टर से लें सलाह

    नई दिल्ली ।  घरेलू उपचार सर्दी-खांसी, पेट दर्द जैसी आम समस्याओं में हम सभी अक्सर खुद से ही घरेलू उपचार करना शुरू कर देते हैं। खांसी में शहद, अदरक, हल्दी या काढ़े की सलाह दी जाती है। पेट खराब हुआ तो अजवाइन और गले में दर्द हुआ तो नमक के पानी से गरारे जैसे उपाय भारतीय घरों में लंबे समय से इस्तेमाल होते रहे हैं। वैसे तो कुछ समस्याओं में ये आराम देने वाले भी हो सकते हैं, लेकिन सबसे बड़ी गलती तब होती है जब घरेलू नुस्खे को हर बीमारी का इलाज समझ लिया जाता है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार इस बात को लेकर अलर्ट करते रहे हैं कि हर आम दिखने वाली बीमारी में खुद से ही दवा या घरेलू उपचार नहीं शुरू कर देना चाहिए। सांस लेने में परेशानी, बेहोशी, भ्रम, बहुत तेज दर्द या अचानक बिगड़ती हालत को केवल घरेलू उपचार से ठीक करने की कोशिश आपके लिए बड़ी मुश्किलों का कारण बन सकती है।

    आइए समझते हैं कि किन समस्याओं में हमें घरेलू उपायों में फंसने की जगह समय रहते डॉक्टर के पास जाना जरूरी है?

    सांस की समस्या

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, वायरल बुखार, हल्के पेट दर्द या गैस जैसी कभी-कभार होने वाली समस्याओं में कुछ उपाय लाभ दे सकते हैं। पर अगर लक्षण लंबे समय तक बने रहें या बार-बार वही समस्या हो रही है तो इसके कारणों का पता लगाने के लिए जांच कराना और समय रहते डॉक्टर की मदद लेना जरूरी हो जाता है।

    सांस लेने में परेशानी या सीने में दिक्कत

    सांस लेने में अचानक या गंभीर परेशानी को केवल भाप, अदरक की चाय या काढ़े से ठीक करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। सांस फूलना कई अलग-अलग स्थितियों का संकेत हो सकता है और कई बार ये गंभीर समस्याओं की ओर इशारा भी कर सकता है।

    अगर सांस लेने में कठिनाई हो रही है तो इसमें आपातकालीन मदद की जरूरत होती है। इसी तरह सीने में तेज और असामान्य दर्द, बेहोशी या हालत तेजी से बिगड़ने में भी घरेलू इलाज की जगह विशेषज्ञ की सलाह जरूरी है।

    बेहोशी या बहुत ज्यादा कमजोरी

    अगर आपके आसपास या घर में कोई अचानक बेहोश हो जाए या अत्यधिक कमजोर महसूस करे तो इसे सामान्य थकान मानकर इग्नोर करना या खुद से कोई उपाय शुरू कर देना ठीक नहीं है।

    सांस लेने में परेशानी, दौरे पड़ना या त्वचा-होंठों के रंग में बदलाव जैसे संकेत गंभीर हो सकते हैं। कई बार हार्ट अटैक या शरीर में ऑक्सीजन की कमी में भी ऐसी दिक्कतें देखी जाती हैं। इन स्थितियों में तुरंत डॉक्टरी मदद की जरूरत होती है।

    बहुत तेज बुखार या लगातार बिगड़ते लक्षण

    हर बुखार में डॉक्टर के पास जाना जरूरी नहीं होता, लेकिन बहुत तेज बुखार, लगातार बिगड़ते लक्षण या कई दिनों तक सुधार न होने जैसी स्थिति में घरेलू उपचार करते रहना नुकसानदायक हो सकता है।

    दिल्ली-एनसीआर में इन दिनों स्वाइन फ्लू का खतरा देखा जा रहा है जिसमें होने वाला बुखार भी सामान्य लग सकता है। पर इसमें समय रहते डॉक्टरी सलाह जरूरी है। घरेलू उपाय कुछ लक्षणों में अस्थायी आराम दे सकते हैं, लेकिन अगर समय के साथ हालत सुधरने के बजाय बिगड़ रही हो तो विशेषज्ञ की सलाह जरूरी है।

    खून की उल्टी या मल में खून

    शरीर से किसी भी तरह की ब्लीडिंग में सिर्फ खानपान या घरेलू उपचार के भरोसे बैठे रहना ठीक नहीं है। खून वाली उल्टी और मल में खून जैसे लक्षणों में तुरंत डॉक्टर की सलाह और जांच जरूरी है।

    लिवर या फेफड़ों की गंभीर बीमारियों में उल्टी के साथ खून आने की दिक्कत देखी जाती है। इसी तरह से डेंगू के गंभीर मामले में मल से खून आ सकता है। इन बीमारियों में समय रहते डॉक्टरी मदद जरूरी है। बिना कारण समझे घरेलू उपाय करते रहना स्थिति को और बिगाड़ सकता है।

  • बुध की कमजोरी से लेकर केतु के प्रभाव तक, गणेश चतुर्थी पर ये आसान उपाय बदल सकते हैं आपकी किस्मत का रुख

    बुध की कमजोरी से लेकर केतु के प्रभाव तक, गणेश चतुर्थी पर ये आसान उपाय बदल सकते हैं आपकी किस्मत का रुख


    नई दिल्ली । भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा कर लोग सुख समृद्धि बुद्धि और सफलता की कामना करते हैं। वर्ष 2026 में गणेश चतुर्थी 14 सितंबर को मनाई जाएगी। महाराष्ट्र समेत देश के कई हिस्सों में इस पर्व का विशेष उत्साह देखने को मिलता है। घरों और सार्वजनिक पंडालों में गणपति की प्रतिमा स्थापित की जाती है और विधि विधान से पूजा अर्चना की जाती है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और प्रथम पूजनीय देव माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत गणेश जी की पूजा से करने पर कार्यों में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।

    ज्योतिषीय मान्यताओं में भगवान गणेश का संबंध बुध और केतु से भी जोड़ा जाता है। बुध को बुद्धि वाणी तर्क शिक्षा व्यापार और निर्णय क्षमता का कारक ग्रह माना जाता है। वहीं केतु को आध्यात्मिकता ज्ञान वैराग्य और जीवन में अचानक आने वाले बदलावों से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता के अनुसार यदि कुंडली में बुध कमजोर हो या केतु का अशुभ प्रभाव महसूस हो रहा हो तो गणेश जी की आराधना को लाभकारी माना जाता है।

    केतु के साथ भगवान गणेश का संबंध धार्मिक कथाओं से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि भगवान शिव ने गणेश जी का सिर काटने के बाद उन्हें हाथी का सिर प्रदान किया था। ज्योतिषीय प्रतीकवाद में केतु को बिना सिर वाले ग्रह के रूप में देखा जाता है। इसी वजह से कुछ ज्योतिषीय परंपराओं में गणेश जी की उपासना को केतु से जुड़ी बाधाओं को शांत करने वाला उपाय माना गया है। जब व्यक्ति को बार बार भ्रम की स्थिति का सामना करना पड़े काम अटकते रहें या बिना स्पष्ट कारण के परेशानियां बढ़ती महसूस हों तो गणेश आराधना करने की सलाह दी जाती है।

    बुध ग्रह से जुड़ी मान्यताओं में भी गणेश पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। भगवान गणेश को बुद्धि और विवेक का देवता माना जाता है और बुध ग्रह का संबंध भी बुद्धि वाणी तथा तर्क से है। इसलिए बुधवार के दिन गणपति की पूजा करना ज्योतिषीय उपायों में शामिल किया जाता है। पूजा के दौरान गणेश जी को हरी दूर्वा अर्पित करना विशेष शुभ माना जाता है। धार्मिक परंपरा में 21 दूर्वा अर्पित करने का भी उल्लेख मिलता है। इसके साथ गणपति को मोदक या लड्डू का भोग लगाया जा सकता है।

    बुधवार की सुबह स्नान के बाद भगवान गणेश की विधि पूर्वक पूजा करें और श्रद्धा के साथ दूर्वा अर्पित करें। इस दौरान ॐ गं गणपतये नमः मंत्र का जाप किया जा सकता है। बुध ग्रह से संबंधित ज्योतिषीय मान्यता रखने वाले लोग ॐ बुं बुधाय नमः मंत्र का जाप भी करते हैं। हरी मूंग का दान और हरे रंग के वस्त्र धारण करना भी बुध से जुड़े पारंपरिक उपायों में बताया जाता है।

    गणेश चतुर्थी के अवसर पर भगवान गणेश की पूजा केवल ज्योतिषीय उपाय के तौर पर ही नहीं बल्कि श्रद्धा और सकारात्मकता के पर्व के रूप में भी की जाती है। मान्यता है कि विघ्नहर्ता की आराधना व्यक्ति को धैर्य विवेक और सही निर्णय लेने की प्रेरणा देती है। हालांकि ज्योतिषीय उपाय धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं इन्हें वैज्ञानिक रूप से सिद्ध उपचार नहीं माना जाता।

  • टेस्टोस्टेरोन कम होने पर पुरुषों के शरीर में दिख सकते हैं कई बदलाव, जानिए कमी के कारण, लक्षण और जांच का सही तरीका

    टेस्टोस्टेरोन कम होने पर पुरुषों के शरीर में दिख सकते हैं कई बदलाव, जानिए कमी के कारण, लक्षण और जांच का सही तरीका


    नई दिल्ली ।पुरुषों की सेहत की बात आते ही टेस्टोस्टेरोन हार्मोन की चर्चा शुरू हो जाती है। इसे आमतौर पर मेल हार्मोन के तौर पर जाना जाता है। मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि टेस्टोस्टेरोन यौन शक्ति के साथ स्पर्म बनाने, मांसपेशियों- हड्डियों को मजबूत रखने और शरीर में ऊर्जा के स्तर को बढ़ाने के लिए जरूरी होता है। जब किसी में इसका स्तर कम हो जाता है, तो इसका शरीर के कामकाज पर सीधा असर दिखने लगता है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन शारीरिक विकास और ऊर्जा के लिए जरूरी होता है, लेकिन केवल थकान-कमजोरी या यौन की इच्छा कम होने का मतलब यह नहीं है कि आपमें टेस्टोस्टेरोन कम है। लो टेस्टोस्टेरोन यानी हाइपोगोनाडिज्म की स्थिति कई बार गंभीर समस्याओं का कारण भी बन सकती है, इसलिए इसके लक्षणों पर निरंतर ध्यान देते रहना और टेस्टोस्टेरोन को बढ़ाने के लिए उपाय करते रहना जरूरी है।

    आइए जानते हैं कि कैसे पता किया जाए कि कहीं आपमें इसकी कमी तो नहीं?

    पुरुषों के लिए जरूरी हार्मोन- टेस्टोस्टेरोन

    टेस्टोस्टेरोन पुरुषों का मुख्य हार्मोन है, जिसका निर्माण मुख्य रूप से अंडकोष में होता है। यह पुरुषों में चेहरे और शरीर के बाल, मांसपेशियों के विकास, यौन इच्छा, स्पर्म उत्पादन और हड्डियों के स्वास्थ्य में भूमिका निभाता है।

    टेस्टोस्टेरोन का स्तर दिनभर एक जैसा नहीं रहता। आमतौर पर सुबह इसका स्तर सबसे अधिक होता है। जिन पुरुषों में अंडकोष की समस्या, पिट्यूटरी ग्रंथि से जुड़ी परेशानी, मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज या कुछ क्रॉनिक बीमारियां होती हैं, उनमें टेस्टोस्टेरोन की कमी का खतरा अधिक हो सकता है। इसके अलावा उम्र बढ़ने के साथ भी टेस्टोस्टेरोन में धीरे-धीरे कमी आ सकती है।

    टेस्टोस्टेरोन कम होने के क्या कारण हैं?

    टेस्टोस्टेरोन की कमी केवल उम्र बढ़ने से नहीं होती। अंडकोष में चोट या संक्रमण, कैंसर के इलाज में रेडिएशन या कीमोथेरेपी, पिट्यूटरी ग्रंथि की बीमारी और कुछ दवाएं भी लो टेस्टोस्टेरोन का कारण हो सकती हैं।

    इसके अलावा अगर आप मोटापे, टाइप-2 डायबिटीज, किडनी या लिवर की पुरानी बीमारी का शिकार हैं या फिर नींद से जुड़ी समस्याएं रहती हैं तो इसके कारण भी टेस्टोस्टेरोन की कमी हो सकती है।

    कैसे पता चलेगा कि टेस्टोस्टेरोन कम तो नहीं?

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, थकान या यौन इच्छा में कमी को देखकर खुद से टेस्टोस्टेरोन की कमी मान लेना सही नहीं है।

    इसका पता लगाने के लिए लक्षणों के साथ डॉक्टर कुछ जांच की सलाह दे सकते हैं। आमतौर पर सुबह जब टेस्टोस्टेरोन का स्तर अपेक्षाकृत अधिक होता है तब खून की जांच की जाती है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर कुछ अन्य हार्मोन की जांच करने की भी सलाह दे सकते हैं।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अगर टेस्टोस्टेरोन की कमी का कारण मोटापा, कोई बीमारी या ऐसी स्थिति है जिसे सुधारा जा सकता है, तो उसका इलाज जरूरी है। हाइपोगोनाडिज्म में कुछ लोगों को डॉक्टर टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट थेरेपी की सलाह दे सकते हैं।

    लाइफस्टाइल और खान-पान में सुधार के साथ पौष्टिक चीजों का नियमित सेवन भी टेस्टोस्टेरोन के स्तर को बढ़ाने में मददगार हो सकता है।