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  • जबलपुर में बड़ा हादसा टला: प्लेटफॉर्म और ट्रेन के बीच फंसा होमगार्ड, RPF ने दिखाया साहस

    जबलपुर में बड़ा हादसा टला: प्लेटफॉर्म और ट्रेन के बीच फंसा होमगार्ड, RPF ने दिखाया साहस


    जबलपुर । जबलपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-5 पर सोमवार शाम एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया, जब रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के जवानों की तत्परता से एक होमगार्ड सैनिक की जान बचा ली गई। यह घटना 25 मई की बताई जा रही है, जिसका वीडियो अब सामने आया है और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

    जानकारी के अनुसार, शाम करीब 5 बजे गाड़ी संख्या 22189 जबलपुर-रीवा इंटरसिटी एक्सप्रेस प्लेटफॉर्म से रवाना हो रही थी। इसी दौरान एक यात्री चलती ट्रेन में चढ़ने की कोशिश कर रहा था। ट्रेन की गति बढ़ने और संतुलन बिगड़ने के कारण उसका पैर फिसल गया और वह सीधे प्लेटफॉर्म और ट्रेन के बीच खतरनाक जगह पर गिर गया।

    जैसे ही यह घटना हुई, मौके पर मौजूद RPF जवानों ने तुरंत स्थिति को भांप लिया। ड्यूटी पर तैनात सहायक उप निरीक्षक धीरज कुमार और प्रधान आरक्षक भाग सिंह ने बिना देर किए यात्री की ओर दौड़ लगाई और उसे पकड़कर सुरक्षित बाहर खींच लिया। उनकी तेज प्रतिक्रिया और सूझबूझ के कारण एक बड़ा हादसा टल गया।

    गिरने वाले यात्री की पहचान गुनागार तिवारी (56) के रूप में हुई है, जो वार्ड नंबर-16, खितोला बाजार, सिहोरा, जिला जबलपुर के निवासी हैं। उन्होंने बताया कि वे होमगार्ड मुख्यालय, जबलपुर में पदस्थ हैं और उसी दौरान सिहोरा की ओर यात्रा कर रहे थे।

    घटना के दौरान यात्री को किसी प्रकार की गंभीर चोट नहीं आई, लेकिन वह कुछ देर तक घबराया हुआ था। RPF जवानों ने तुरंत उसे सुरक्षित प्लेटफॉर्म पर लाकर प्राथमिक सहायता दी और उसकी स्थिति सामान्य की।

    पूरी घटना स्टेशन पर लगे CCTV कैमरे में रिकॉर्ड हो गई है, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि कैसे यात्री ट्रेन में चढ़ते समय फिसलता है और RPF जवान तुरंत उसे बचाने के लिए दौड़ पड़ते हैं।

    स्टेशन पर मौजूद अन्य यात्रियों ने भी RPF जवानों की त्वरित कार्रवाई और बहादुरी की सराहना की। लोगों का कहना है कि यदि कुछ सेकंड की भी देरी होती तो यह हादसा जानलेवा साबित हो सकता था।

    फिलहाल रेलवे प्रशासन ने भी जवानों की इस सतर्कता की प्रशंसा की है और यात्रियों से अपील की है कि चलती ट्रेन में चढ़ने या उतरने की कोशिश न करें, क्योंकि यह जानलेवा हो सकता है।

  • जबलपुर में दिल दहला देने वाली वारदात: बेटे ने मां की हत्या की, टेबल फैन से सिर कुचला

    जबलपुर में दिल दहला देने वाली वारदात: बेटे ने मां की हत्या की, टेबल फैन से सिर कुचला


    जबलपुर। जबलपुर जिले के सिहोरा थाना क्षेत्र के वार्ड नंबर-7 स्थित गढ़िया मोहल्ले में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां घरेलू विवाद के दौरान एक बेटे ने अपनी ही मां की हत्या कर दी। यह पूरी वारदात सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात करीब 3 बजे की बताई जा रही है।

    जानकारी के अनुसार, आरोपी करण कोल देर रात शराब के नशे में घर लौटा था। घर पहुंचते ही उसने अपनी पत्नी कांति बाई कोल से खाना बनाने को कहा। पत्नी ने देर रात होने के कारण खाना बनाने से मना कर दिया, जिस पर वह गुस्से में आ गया और पत्नी के साथ मारपीट करने लगा।

    इस दौरान घर के दूसरे कमरे में सो रही उसकी मां गिरानी बाई कोल (65) ने आवाज सुनकर बीच-बचाव करने की कोशिश की। वह मौके पर पहुंचीं और बेटे को डांटते हुए शांत रहने और सोने को कहा। लेकिन स्थिति और बिगड़ गई।

    बताया जाता है कि मां ने जब उसे बार-बार समझाने की कोशिश की, तो आरोपी और अधिक आक्रोशित हो गया। दोनों के बीच कहासुनी बढ़ती गई और देखते ही देखते विवाद हिंसक रूप ले लिया। इसी दौरान गुस्से में आरोपी ने पास में रखा टेबल फैन उठाया और अपनी मां के सिर पर जोरदार वार कर दिया।

    हमले के बाद भी आरोपी लगातार मां पर हमला करता रहा, जिससे वह गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर पड़ीं। इस बीच पत्नी ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, लेकिन आरोपी ने उसके साथ भी मारपीट की। वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया।

    घटना की जानकारी मिलने पर मृतका के बड़े बेटे दशरथ को सूचना दी गई। वह तुरंत मौके पर पहुंचा और अपनी मां को खून से लथपथ हालत में पाया। परिजन उन्हें तत्काल सिहोरा स्वास्थ्य केंद्र ले गए, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।

    घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी करण कोल की तलाश शुरू कर दी है। एएसपी सूर्यकांत शर्मा ने बताया कि शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि पति-पत्नी के बीच विवाद के दौरान मां बीच-बचाव करने आई थीं, जिसके चलते आरोपी ने गुस्से में आकर हमला कर दिया।

    पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया है और आरोपी की गिरफ्तारी के लिए टीम गठित कर दी गई है। फिलहाल पूरा मामला घरेलू हिंसा और नशे के कारण हुई त्रासदी के रूप में सामने आ रहा है।

  • Su-57D स्टील्थ जेट: रूस का नया दो-सीट फाइटर, भविष्य के युद्धों में बन सकता है फ्लाइंग कमांड सेंटर

    Su-57D स्टील्थ जेट: रूस का नया दो-सीट फाइटर, भविष्य के युद्धों में बन सकता है फ्लाइंग कमांड सेंटर




    नई दिल्ली। रूस के सुखोई डिजाइन ब्यूरो के मुख्य टेस्ट पायलट सर्गेई बोगदान ने नए Su-57D दो-सीट स्टील्थ फाइटर जेट को लेकर कई अहम जानकारियां साझा की हैं। यह विमान 19 मई को अपनी पहली उड़ान भर चुका है और इसे भविष्य के युद्धों में एक मल्टी-रोल एयरबोर्न कमांड सेंटर के रूप में विकसित किया जा रहा है। रक्षा विशेषज्ञों के बीच इस विमान को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है, खासकर भारत की संभावित जरूरतों के संदर्भ में।

    दूसरा पायलट बनेगा “कमांड पोस्ट”
    पायलट सर्गेई बोगदान के अनुसार Su-57D का सबसे महत्वपूर्ण फीचर इसका ट्विन-सीट कॉन्फिगरेशन है। इसमें दूसरा पायलट केवल सह-उड़ान नहीं करेगा, बल्कि हवा में रहते हुए पूरे मिशन का कमांड और कंट्रोल संभाल सकता है। यह स्थिति खासकर बड़े सैन्य अभियानों में महत्वपूर्ण होगी, जहां ग्राउंड कम्युनिकेशन बाधित होने की संभावना रहती है।

    उन्होंने बताया कि यदि रेडियो या नेटवर्क कम्युनिकेशन में बाधा आती है, तो अनुभवी पायलट हवा में ही निर्णय लेकर ऑपरेशन को आगे बढ़ा सकता है, जिससे मिशन की सफलता की संभावना बढ़ जाती है।

    ड्रोन और AI नेटवर्क से लैस क्षमता
    Su-57D को केवल फाइटर जेट नहीं बल्कि एक नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर प्लेटफॉर्म माना जा रहा है। इसमें एडवांस एआई और ‘लॉयल विंगमैन’ ड्रोन सिस्टम को कंट्रोल करने की क्षमता विकसित की जा रही है। यह जेट दुश्मन के रडार को जाम करने और स्टील्थ ड्रोन स्क्वाड्रन को गाइड करने में सक्षम बताया जा रहा है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, यह तकनीक भविष्य में युद्ध के स्वरूप को बदल सकती है, जहां एक ही विमान कई ड्रोन और यूनिट्स को नियंत्रित करेगा।

    भारत के संदर्भ में रणनीतिक अहमियत
    रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि Su-57D भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है, खासकर लद्दाख और तवांग जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में। यहां चीन द्वारा तैनात एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम को चुनौती देने के लिए ऐसे एयरबोर्न कमांड प्लेटफॉर्म की आवश्यकता मानी जाती है।

    यह विमान भारतीय स्वदेशी CATS (Combat Air Teaming System) और ‘वारियर’ ड्रोन प्रोजेक्ट के साथ इंटीग्रेट होकर एक मजबूत नेटवर्क वॉरफेयर क्षमता दे सकता है।

    चीन की रणनीति और क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा
    चीन पहले से ही दो-सीट 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट और ड्रोन-आधारित नेटवर्क वॉरफेयर पर तेजी से काम कर रहा है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को भी इसी तरह की क्षमता विकसित करनी होगी ताकि किसी भी संभावित खतरे का प्रभावी जवाब दिया जा सके।

    FGFA प्रोजेक्ट और आगे की चर्चा
    भारत और रूस ने पहले FGFA (Fifth Generation Fighter Aircraft) प्रोजेक्ट पर मिलकर काम शुरू किया था, जिसमें ट्विन-सीट स्टील्थ जेट की मांग भी शामिल थी। हालांकि 2018 में भारत इस प्रोजेक्ट से अलग हो गया था। अब Su-57D के परीक्षण के बाद एक बार फिर इस प्लेटफॉर्म को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

  • भारत-बांग्लादेश सीमा पर बढ़ा तनाव: असम से बंगाल तक BSF-BGB में टकराव, ग्रामीणों को लेकर स्थिति संवेदनशील

    भारत-बांग्लादेश सीमा पर बढ़ा तनाव: असम से बंगाल तक BSF-BGB में टकराव, ग्रामीणों को लेकर स्थिति संवेदनशील




    नई दिल्ली। भारत और बांग्लादेश की 4,096 किलोमीटर लंबी सीमा पर तनाव लगातार तीसरे हफ्ते भी जारी है। असम से लेकर पश्चिम बंगाल तक फैले सीमावर्ती इलाकों में बीएसएफ (BSF) और बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) के बीच झड़प और टकराव की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे हालात संवेदनशील बने हुए हैं।

    जानकारी के अनुसार, 6 मई के बाद से सीमा पर तनाव बढ़ा है और पिछले लगभग 17 दिनों में आठ से अधिक बार दोनों देशों की सुरक्षा बलों के बीच झड़प की घटनाएं दर्ज की गई हैं। कई जगहों पर अवैध घुसपैठ रोकने और सीमा पार गतिविधियों को लेकर स्थिति तनावपूर्ण बनी रही है।

    कई इलाकों में झड़प और आरोप-प्रत्यारोप
    बांग्लादेशी पक्ष का दावा है कि बीएसएफ की कार्रवाई के दौरान कुछ नागरिकों को सीमा पार धकेलने की कोशिश की गई, जबकि भारतीय पक्ष का कहना है कि वह अवैध घुसपैठ और तस्करी रोकने के लिए कार्रवाई कर रहा है। इस दौरान कई स्थानों पर गोलीबारी और टकराव की स्थिति भी बनी।करीमगंज (असम) और ब्राह्मणबारिया (बांग्लादेश) जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों में हालात ज्यादा तनावपूर्ण बताए जा रहे हैं। वहीं, ‘जीरो पॉइंट’ नियमों के उल्लंघन को लेकर भी दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।

    BGB का जन-जागरूकता अभियान
    तनाव के बीच बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) ने सीमावर्ती इलाकों में लाउडस्पीकर के जरिए जन-जागरूकता अभियान शुरू किया है। इसमें स्थानीय लोगों को अवैध घुसपैठ, मानव तस्करी और सीमा पार अपराधों से दूर रहने की अपील की जा रही है।

    BGB की 60वीं बटालियन ने इस अभियान की शुरुआत ब्राह्मणबारिया क्षेत्र से की है, जिसका उद्देश्य ग्रामीणों को सतर्क करना और सीमा सुरक्षा में सहयोग बढ़ाना बताया गया है।

    ग्रामीणों की भूमिका पर भी सवाल
    रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई सीमावर्ती इलाकों में स्थानीय ग्रामीणों की भूमिका को लेकर भी विवाद सामने आया है। कुछ स्थानों पर ग्रामीणों के सुरक्षा बलों के साथ आगे बढ़ने और टकराव के दौरान ढाल की तरह इस्तेमाल होने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं।

    जानकारों की राय
    विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा पर यह तनाव केवल बाड़ या घुसपैठ तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे तस्करी और स्थानीय विवाद भी एक बड़ा कारण हो सकते हैं। कई बार सीमा पार गतिविधियों को रोकने के दौरान स्थिति अचानक हिंसक रूप ले लेती है।

    फिलहाल दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और सीमावर्ती क्षेत्रों में गश्त और निगरानी बढ़ा दी गई है।

  • Su-57D फाइटर जेट: रूस का नया दो-सीट स्टील्थ विमान, भारत के लिए क्यों माना जा रहा है संभावित गेमचेंजर

    Su-57D फाइटर जेट: रूस का नया दो-सीट स्टील्थ विमान, भारत के लिए क्यों माना जा रहा है संभावित गेमचेंजर


    नई दिल्ली। रूस के सुखोई डिजाइन ब्यूरो के मुख्य टेस्ट पायलट सर्गेई बोगदान ने Su-57D दो-सीट स्टील्थ फाइटर जेट को लेकर कई अहम जानकारियां साझा की हैं। इस विमान ने 19 मई को अपनी पहली उड़ान भरी है और इसे भविष्य के युद्धों में कमांड और कंट्रोल क्षमता वाला एक एडवांस प्लेटफॉर्म बताया जा रहा है।

    पायलट के अनुसार, Su-57D में दूसरा कॉकपिट केवल सह-पायलट के लिए नहीं बल्कि एक ऐसे कमांडर के लिए है जो हवा में रहते हुए पूरे ऑपरेशन को नियंत्रित कर सकता है। यह विमान युद्ध के दौरान कम्युनिकेशन बाधित होने पर भी मिशन को स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ाने में सक्षम माना जा रहा है।

    एयरबोर्न कमांड सेंटर की तरह काम करेगा विमान
    Su-57D को केवल फाइटर जेट नहीं बल्कि एक फ्लाइंग कमांड सेंटर के रूप में देखा जा रहा है, जो ड्रोन और अन्य युद्ध प्रणालियों को नियंत्रित करने की क्षमता रखता है। इसे ‘लॉयल विंगमैन’ ड्रोन नेटवर्क के साथ जोड़कर बड़े पैमाने पर ऑपरेशन चलाने के लिए डिजाइन किया जा रहा है।

    रूसी विशेषज्ञों का दावा है कि यह जेट भविष्य में जटिल मिशनों में तेजी से निर्णय लेने और दुश्मन की रक्षा प्रणालियों को बाधित करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

    भारत के संदर्भ में रणनीतिक महत्व
    रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह विमान भारतीय वायुसेना के साथ जुड़ता है तो लद्दाख और तवांग जैसे संवेदनशील इलाकों में चीनी एयर डिफेंस सिस्टम के खिलाफ गहरे हमलों में मदद मिल सकती है। यह भारतीय स्वदेशी ड्रोन प्रोजेक्ट CATS के साथ भी इंटीग्रेट होकर नेटवर्क-सेंट्रिक युद्ध क्षमता को मजबूत कर सकता है।हालांकि भारत पहले ही रूस के FGFA प्रोजेक्ट से बाहर हो चुका है, लेकिन दो-सीट Su-57D के आने के बाद रक्षा हलकों में एक बार फिर इस प्लेटफॉर्म को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

    चीन की रणनीति और क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा
    चीन पहले से ही दो-सीट 5th जनरेशन फाइटर और ड्रोन-नेटवर्क आधारित एयर वॉरफेयर सिस्टम पर काम कर रहा है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को भी इसी तरह की क्षमता विकसित करनी होगी ताकि तिब्बत क्षेत्र में किसी भी रणनीतिक चुनौती का जवाब दिया जा सके।

  • मुजफ्फरनगर में फेरीवालों की पिटाई, भीड़ ने चाचा-भतीजे को पीटा; पुलिस ने बचाई जान

    मुजफ्फरनगर में फेरीवालों की पिटाई, भीड़ ने चाचा-भतीजे को पीटा; पुलिस ने बचाई जान




    नई दिल्ली। मुजफ्फरनगर (नई मंडी कोतवाली क्षेत्र) की वसुंधरा कॉलोनी में रविवार देर शाम उस समय हड़कंप मच गया जब कपड़े की फेरी लगाने पहुंचे आमिर मलिक और जावेद को स्थानीय लोगों ने संदिग्ध समझकर पीट दिया। दोनों रिश्ते में चाचा-भतीजे हैं और फेरी लगाकर कपड़े बेचने का काम करते हैं।

    जानकारी के अनुसार, दोनों पहले भी कॉलोनी में सामान बेचने आ चुके थे और कुछ लोगों के बुलाने पर ही दोबारा वहां पहुंचे थे। लेकिन देर शाम और रात होने के कारण कुछ लोगों को उन पर शक हुआ, जिसके बाद भीड़ इकट्ठा हो गई और दोनों के साथ मारपीट शुरू कर दी गई।

    मारपीट में दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें घायल अवस्था में दोनों दिखाई दे रहे हैं।सूचना मिलने पर नई मंडी पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों को भीड़ से बचाकर अपनी हिरासत में लिया। इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।

    पुलिस जांच में क्या आया सामने
    सीओ नई मंडी राजू कुमार साव के अनुसार, शुरुआती जांच में दोनों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं मिला है। वे फेरी लगाकर कपड़े बेचने का काम करते हैं और पहले भी इलाके में आ चुके हैं। पुलिस अब स्थानीय लोगों से पूछताछ कर रही है और पूरे मामले की जांच जारी है।

  • रामचरितमानस पर सपा का बदला रुख: अखिलेश यादव ने इसे बताया ‘सांस्कृतिक संविधान’, यूपी की राजनीति में फिर गरमाई बहस

    रामचरितमानस पर सपा का बदला रुख: अखिलेश यादव ने इसे बताया ‘सांस्कृतिक संविधान’, यूपी की राजनीति में फिर गरमाई बहस




    लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर रामचरितमानस को लेकर समाजवादी पार्टी का रुख चर्चा में है। लोकसभा चुनाव से पहले जिस मुद्दे पर सपा के भीतर विवाद और राजनीतिक टकराव देखने को मिला था, अब उसी पर पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव का रुख काफी नरम और अलग नजर आ रहा है।

    हाल ही में लखनऊ में अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान एक वकील के साथ हुई मारपीट की घटना के बाद मामला फिर सुर्खियों में आया। बताया गया कि वकील के हाथ में रामचरितमानस की प्रति थी। इसी घटना के बाद अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए रामचरितमानस को “सांस्कृतिक संविधान का एक रूप” और “नैतिक आचार संहिता” बताया, जिससे राजनीतिक हलकों में नई बहस छिड़ गई है।

    पहले विवाद, अब नया रुख
    लोकसभा चुनाव 2024 से पहले समाजवादी पार्टी के तत्कालीन राष्ट्रीय महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्य ने रामचरितमानस के कुछ दोहों को लेकर विवादित बयान दिया था। उन्होंने इन दोहों को महिलाओं, दलितों और पिछड़ों के प्रति अपमानजनक बताते हुए उन्हें हटाने की मांग की थी। इस बयान के बाद बीजेपी ने सपा पर तीखा हमला बोला था और मामला राजनीतिक रूप से काफी गरमा गया था।

    बाद में यह विवाद इतना बढ़ा कि स्वामी प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। उस समय अखिलेश यादव ने इस पूरे विवाद पर खुलकर कोई सख्त रुख नहीं अपनाया था, लेकिन अब उनका बदला हुआ स्टैंड राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

    चुनावी रणनीति या जनभावना का असर?
    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगले विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी अपनी छवि को व्यापक जनसमर्थन के अनुरूप ढालने की कोशिश कर रही है। रामचरितमानस जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर नरम रुख अपनाकर सपा आम मतदाताओं के बीच अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है।

    वहीं बीजेपी का आरोप है कि सपा राजनीतिक अस्तित्व बचाने के लिए अब धार्मिक प्रतीकों का सहारा ले रही है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि जो लोग पहले भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाते रहे हैं, वे अब धार्मिक ग्रंथों का सम्मान दिखा रहे हैं।

    विपक्ष और सहयोगी दलों की प्रतिक्रिया
    इस मुद्दे पर कांग्रेस ने अखिलेश यादव के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि रामचरितमानस भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का हिस्सा है और इसे राजनीति से अलग रखकर देखा जाना चाहिए। वहीं बसपा ने इस पूरे मामले पर टिप्पणी से दूरी बनाए रखी है।

    यूपी की सियासत में नया मोड़
    रामचरितमानस को लेकर सपा के बदले सुर ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सांस्कृतिक और धार्मिक विमर्श को केंद्र में ला दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले चुनावों में यह मुद्दा सियासी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।फिलहाल यह साफ है कि यूपी की राजनीति में धर्म और संस्कृति एक बार फिर रणनीतिक बहस का बड़ा हिस्सा बनते जा रहे हैं।

  • ममता सरकार पर बढ़ा दबाव: 91 पार्षदों के इस्तीफे के दावे ने बदला बंगाल की राजनीति का समीकरण

    ममता सरकार पर बढ़ा दबाव: 91 पार्षदों के इस्तीफे के दावे ने बदला बंगाल की राजनीति का समीकरण

    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया और बड़ा सियासी घटनाक्रम चर्चा का विषय बना हुआ है। राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को लेकर उठे एक बड़े दावे ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। दावा किया जा रहा है कि पार्टी के 91 पार्षदों ने एक साथ इस्तीफा दे दिया है, जिसके बाद स्थानीय निकायों से लेकर राज्य की राजनीति तक कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। इस घटनाक्रम को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज होता दिखाई दे रहा है।

    बताया जा रहा है कि विधानसभा चुनाव के बाद राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहे हैं। इसी बीच बड़ी संख्या में पार्षदों के सामूहिक इस्तीफे का दावा सामने आने से राजनीतिक समीकरणों को लेकर अटकलें बढ़ गई हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि स्थानीय स्तर पर पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ रहा है और इसका असर अब संगठनात्मक ढांचे पर भी दिखाई देने लगा है।

    राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार, स्थानीय निकायों में प्रशासनिक और वित्तीय मामलों की समीक्षा तथा विभिन्न स्तरों पर जांच की प्रक्रिया तेज होने के बाद कई नेताओं में असहजता बढ़ी है। इसी वजह से स्थानीय स्तर पर राजनीतिक हलचल और तेज होती दिखाई दे रही है। कई दावे ऐसे भी सामने आए हैं जिनमें कहा जा रहा है कि आने वाले समय में और बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी माना जा रहा है।

    इस पूरे घटनाक्रम के बाद नगर निकायों की कार्यप्रणाली को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। यदि बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों के इस्तीफे की स्थिति बनती है तो प्रशासनिक व्यवस्था पर उसका असर पड़ना स्वाभाविक माना जा रहा है। स्थानीय स्तर पर कई विकास परियोजनाओं और नागरिक सुविधाओं से जुड़े काम प्रभावित होने की आशंका भी जताई जा रही है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति लंबे समय से स्थानीय निकायों की मजबूत संरचना के इर्द-गिर्द घूमती रही है। ऐसे में यदि जमीनी स्तर पर राजनीतिक बदलाव के संकेत दिखाई देते हैं तो इसका असर बड़े चुनावी समीकरणों पर भी पड़ सकता है। यही कारण है कि इस पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक दलों के साथ-साथ आम लोगों की भी नजर बनी हुई है।

    वहीं दूसरी ओर इस पूरे मामले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे बड़े राजनीतिक बदलाव की शुरुआत मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे राजनीतिक रणनीति और दबाव की राजनीति से जोड़कर देख रहे हैं। राजनीतिक माहौल में बढ़ी इस हलचल ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति आने वाले दिनों में और अधिक दिलचस्प मोड़ ले सकती है।

    फिलहाल इस दावे को लेकर चर्चा और बहस का दौर जारी है। आने वाले समय में यदि इस पूरे घटनाक्रम पर अधिक स्पष्ट जानकारी सामने आती है तो राज्य की राजनीति में इसके व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं। बंगाल का सियासी तापमान फिलहाल बढ़ा हुआ है और सभी की नजर अब अगले घटनाक्रम पर टिकी हुई है।

  • बिजली कटौती से नहीं रुकेगी नमो भारत ट्रेन, NCRTC ने बताया, मजबूत मल्टी-लेयर बैकअप सिस्टम से पूरी तरह सुरक्षित संचालन

    बिजली कटौती से नहीं रुकेगी नमो भारत ट्रेन, NCRTC ने बताया, मजबूत मल्टी-लेयर बैकअप सिस्टम से पूरी तरह सुरक्षित संचालन




    नई दिल्ली। दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ कॉरिडोर पर चल रही नमो भारत (RRTS) ट्रेन को लेकर यात्रियों के बीच बिजली कटौती के दौरान सेवा बाधित होने की आशंका जताई जा रही थी, खासकर गुड़गांव में हाल ही में मेट्रो सेवा प्रभावित होने की घटना के बाद। लेकिन नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) ने साफ किया है कि नमो भारत ट्रेन का सिस्टम सामान्य मेट्रो या ट्रेनों की तुलना में कहीं अधिक आधुनिक और सुरक्षित है, जिससे बिजली फेल होने की स्थिति में भी संचालन रुकने की संभावना बेहद कम है।

    NCRTC के अनुसार नमो भारत ट्रेनें 25 केवी (किलोवोल्ट) 50 हर्ट्ज ओवरहेड इलेक्ट्रिक सिस्टम से चलती हैं, जिसे ओवरहेड कैटेनरी सिस्टम (OCS) के जरिए सप्लाई दी जाती है। पूरा कॉरिडोर अलग-अलग बड़े सब-स्टेशनों और मल्टी-ग्रिड नेटवर्क से जुड़ा हुआ है, जिससे किसी एक स्थान पर फॉल्ट आने पर दूसरा ग्रिड तुरंत पावर सपोर्ट संभाल लेता है और ट्रेन संचालन बाधित नहीं होता।

    रीजनरेटिव ब्रेकिंग से खुद बनती है बिजली
    इस ट्रेन की एक खास तकनीक रीजनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम है, जिसमें ट्रेन ब्रेक लगाने के दौरान अपनी गतिज ऊर्जा को बिजली में बदलकर वापस ग्रिड में भेजती है। इससे लगभग 30 प्रतिशत तक ऊर्जा की बचत होती है और सिस्टम को अतिरिक्त पावर सपोर्ट भी मिलता है, जो आपात स्थिति में मददगार साबित होता है।

    SCADA सिस्टम से रियल टाइम निगरानी
    पूरे 82 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर की निगरानी के लिए SCADA (Supervisory Control and Data Acquisition) सिस्टम लगाया गया है। यह सिस्टम हर सब-स्टेशन और पावर फ्लो पर लगातार नजर रखता है और किसी भी तकनीकी खराबी की स्थिति में तुरंत पावर को दूसरे स्रोत की ओर डायवर्ट कर देता है, जिससे सेवा बिना रुके जारी रहती है।

    पूरी तरह बिजली गुल होने पर भी सुरक्षित संचालन
    NCRTC के अनुसार, यदि किसी वजह से मुख्य बिजली आपूर्ति पूरी तरह बाधित हो जाती है, तब भी ट्रेनों और स्टेशनों में लगी बैकअप बैटरियां जरूरी सिस्टम जैसे लाइट, एयर कंडीशनिंग, कंट्रोल सिस्टम और इमरजेंसी गेट को चालू रखती हैं। इससे यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित रहती है और किसी भी तरह की आपात स्थिति में ट्रेन को सुरक्षित तरीके से रोका जा सकता है।

    गुड़गांव घटना से तुलना नहीं संभव
    हाल ही में गुड़गांव में बिजली बाधित होने से रैपिड मेट्रो सेवा प्रभावित हुई थी, लेकिन NCRTC का दावा है कि नमो भारत का पावर इंफ्रास्ट्रक्चर मल्टी-लेयर बैकअप सिस्टम पर आधारित है, इसलिए ऐसी स्थिति यहां बनने की संभावना बेहद कम है। इस तकनीकी मजबूती के चलते दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ कॉरिडोर पर यात्रा करने वाले लाखों यात्रियों को भरोसेमंद और निर्बाध सेवा मिलने का दावा किया गया है।

  • पंजाब निकाय चुनाव में तनाव की एंट्री: प्रत्याशी पर हमला, बूथ कैप्चरिंग के आरोप और सुरक्षा पर सवाल

    पंजाब निकाय चुनाव में तनाव की एंट्री: प्रत्याशी पर हमला, बूथ कैप्चरिंग के आरोप और सुरक्षा पर सवाल

    नई दिल्ली। पंजाब में निकाय चुनाव के लिए मतदान के दौरान राज्य का राजनीतिक माहौल लगातार गर्माता नजर आया। सुबह मतदान शुरू होने के साथ ही कई क्षेत्रों में मतदाताओं की लंबी कतारें दिखाई दीं, लेकिन दिन बढ़ने के साथ कुछ इलाकों से विवाद, झड़प और आरोप-प्रत्यारोप की खबरें सामने आने लगीं। चुनावी प्रक्रिया के बीच कई घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए। हालांकि प्रशासन ने दावा किया कि अधिकांश क्षेत्रों में मतदान शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहा और सुरक्षा एजेंसियां हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

    राज्य के विभिन्न नगर निगम, नगर कौंसिल और नगर पंचायतों में हजारों उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं और लाखों मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। चुनाव को लेकर इस बार विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। संवेदनशील और अतिसंवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया तथा मतदान केंद्रों पर विशेष निगरानी रखी गई। इसके बावजूद कुछ स्थानों पर घटनाओं ने चुनावी माहौल को तनावपूर्ण बना दिया।

    सबसे अधिक चर्चा उस घटना की रही जिसमें एक कांग्रेस उम्मीदवार पर कथित हमले की बात सामने आई। इस घटना के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई। विपक्षी नेताओं ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि चुनावी माहौल में हिंसा और डर का माहौल पैदा करने की कोशिश की जा रही है। घटना के बाद राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं में भी नाराजगी देखने को मिली और कई नेताओं ने तत्काल कार्रवाई की मांग की।

    इसके अलावा कुछ क्षेत्रों में बूथ कैप्चरिंग के आरोप भी लगाए गए। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने एक-दूसरे पर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने का आरोप लगाया। कई जगहों पर कार्यकर्ताओं के बीच कहासुनी और धक्का-मुक्की की घटनाएं भी सामने आईं। कुछ स्थानों पर पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा ताकि स्थिति को नियंत्रण में रखा जा सके। हालांकि प्रशासन ने अधिकांश आरोपों को जांच का विषय बताते हुए शांतिपूर्ण मतदान का भरोसा जताया।

    मतदान के दौरान राज्य में लोगों का उत्साह भी देखने को मिला। सुबह से ही कई मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें नजर आईं। महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग लाइन की व्यवस्था की गई थी ताकि मतदान प्रक्रिया सुचारु बनी रहे। दिव्यांग मतदाताओं के लिए भी विशेष व्यवस्थाओं की बात कही गई थी, हालांकि कुछ स्थानों पर सुविधाओं की कमी की शिकायतें भी सामने आईं।

    चुनाव आयोग की ओर से मतदान प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए रिकॉर्डिंग और निगरानी की विशेष व्यवस्था की गई। प्रशासन का कहना है कि मतदान केंद्रों के अंदर और बाहर गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है और किसी भी शिकायत पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि शाम तक मतदान प्रक्रिया पूरी होने के बाद परिणामों और मतदान प्रतिशत पर भी विशेष नजर रहेगी।

    पंजाब की राजनीति के लिए यह चुनाव बेहद अहम माना जा रहा है। स्थानीय निकाय चुनावों के परिणाम आने वाले समय में राजनीतिक दलों की ताकत और जनसमर्थन की दिशा तय कर सकते हैं। फिलहाल पूरे राज्य की नजर मतदान प्रक्रिया और उससे जुड़ी गतिविधियों पर बनी हुई है, जबकि राजनीतिक दल अपने-अपने दावों और आरोपों के साथ चुनावी माहौल को और अधिक सक्रिय बनाए हुए हैं।