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  • बारिश में पचमढ़ी बन जाती है स्वर्ग की तस्वीर घूमने से पहले जान लें मौसम से लेकर जरूरी सावधानियां तक पूरी जानकारी

    बारिश में पचमढ़ी बन जाती है स्वर्ग की तस्वीर घूमने से पहले जान लें मौसम से लेकर जरूरी सावधानियां तक पूरी जानकारी


    नई दिल्ली ।
     मध्यप्रदेश की सतपुड़ा पहाड़ियों के बीच बसा पचमढ़ी बारिश के मौसम में अपनी खूबसूरती के चरम पर पहुंच जाता है। चारों तरफ फैली हरियाली पहाड़ियों से उतरते झरने बादलों से ढकी चोटियां और जंगलों के बीच छाई धुंध यहां आने वाले पर्यटकों को अलग ही अनुभव देती है। पचमढ़ी को मानसून में घूमने की खास वजह यहां के झरने और प्राकृतिक नजारे हैं। मध्यप्रदेश पर्यटन भी बारिश के मौसम में पचमढ़ी के धूपगढ़ और आसपास के प्राकृतिक स्थलों को खास आकर्षण के तौर पर बताता है।

    बारिश के मौसम में पचमढ़ी की सबसे खास बात यहां कऔर ठंडा मौसम है। सितंबर की शुरुआत में भी मौसम विभाग के पर्यटन पूर्वानुमान में पचमढ़ी में बादल और बारिश या गरज के साथ बौछारों की संभावना दर्ज की गई है। 3 सितंबर को यहां अधिकतम तापमान 24 डिग्री और न्यूनतम तापमान 19.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था जबकि पिछले 24 घंटे में 9 मिलीमीटर बारिश हुई थी। आने वाले दिनों में भी बादलों और बारिश का दौर बने रहने के संकेत मिले हैं।

    मानसून में पचमढ़ी घूमने वालों के लिए बी फॉल्स राजत प्रपात और अप्सरा विहार खास आकर्षण बने रहते हैं। बारिश के बाद इन झरनों में पानी का प्रवाह बढ़ जाता है जिससे इनका नजारा बेहद शानदार दिखाई देता है। राजत प्रपात करीब 350 फीट की ऊंचाई से गिरता है और धूप पड़ने पर पानी की धार चांदी की पट्टी जैसी नजर आती है। अप्सरा विहार भी पर्यटकों के बीच लोकप्रिय है और यहां तक पहुंचने के लिए छोटा पैदल रास्ता तय करना पड़ता है।

    इसके अलावा धूपगढ़ मानसून में पचमढ़ी की यात्रा का सबसे यादगार पड़ाव बन सकता है। बारिश के बाद पहाड़ों पर छाई धुंध और बादलों के बीच से दिखाई देने वाला नजारा पर्यटकों को आकर्षित करता है। सतपुड़ा की पहाड़ियों पर हरियाली की चादर बिछ जाती है और कई जगहों पर बादल इतने नीचे नजर आते हैं कि ऐसा लगता है जैसे पर्यटक बादलों के बीच खड़े हों। पचमढ़ी समुद्र तल से करीब 1067 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और इसी वजह से बारिश के दौरान यहां का वातावरण मैदानी इलाकों की तुलना में काफी ठंडा और खुशनुमा रहता है।

    हालांकि बारिश के मौसम में पचमढ़ी घूमने का अपना रोमांच है लेकिन यात्रा के दौरान सावधानी भी बेहद जरूरी है। लगातार बारिश के बाद पहाड़ी रास्ते और ट्रैक फिसलन भरे हो सकते हैं इसलिए मजबूत ग्रिप वाले जूते पहनना बेहतर रहेगा। झरनों और गहरी घाटियों के आसपास सुरक्षा घेरा पार करने से बचना चाहिए। मौसम अचानक खराब होने पर ऊंचे और खुले स्थानों पर जाने से भी बचना जरूरी है। जंगल या ट्रैकिंग वाले क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन और गाइड के निर्देशों का पालन करना चाहिए।

    बारिश में पचमढ़ी जाने वालों को छाता या रेनकोट के साथ अतिरिक्त कपड़े और मोबाइल को सुरक्षित रखने के लिए वाटरप्रूफ कवर भी रखना चाहिए। अगर यात्रा का उद्देश्य झरनों और हरियाली का आनंद लेना है तो सुबह का समय बेहतर रह सकता है क्योंकि बाद में बारिश तेज होने पर कुछ रास्तों पर आवाजाही प्रभावित हो सकती है। मौसम विभाग का ताजा पूर्वानुमान देखकर ही दिन की यात्रा तय करना समझदारी होगी।

    कुल मिलाकर बारिश के मौसम में पचमढ़ी उन लोगों के लिए शानदार पर्यटन स्थल है जो भीड़भाड़ से दूर पहाड़ हरियाली झरने और बादलों के बीच कुछ सुकून भरे पल बिताना चाहते हैं। मानसून में यहां की प्रकृति का रंग पूरी तरह बदल जाता है और यही वजह है कि बारिश के दिनों में पचमढ़ी की यात्रा सामान्य पर्यटन से कहीं ज्यादा यादगार बन जाती है।

  • हनुमान भक्ति, सादगी और रहस्यमयी किस्से… क्यों दुनिया भर में प्रसिद्ध हुए बाबा नीम करौली, जानिए उनकी पूरी कहानी

    हनुमान भक्ति, सादगी और रहस्यमयी किस्से… क्यों दुनिया भर में प्रसिद्ध हुए बाबा नीम करौली, जानिए उनकी पूरी कहानी


    नई दिल्ली । बाबा नीम करौली का नाम आज सिर्फ एक संत के रूप में नहीं बल्कि गहरी आस्था और आध्यात्मिक प्रेरणा के प्रतीक के तौर पर लिया जाता है। उत्तराखंड के कैंची धाम से लेकर देश विदेश तक उनके अनुयायियों की बड़ी संख्या है। कंबल ओढ़े रहने वाले बाबा को भक्त प्यार से महाराजजी कहकर बुलाते थे। उनकी सादगी हनुमान भक्ति और मानव सेवा से जुड़ी शिक्षाओं ने उन्हें दूसरे संतों से अलग पहचान दी। हाल के समय में फिल्म हनुमान अंश की चर्चा के बीच एक बार फिर बाबा नीम करौली के जीवन और उनकी आध्यात्मिक यात्रा को जानने में लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है।

    बाबा नीम करौली का मूल नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा बताया जाता है। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के टुंडला क्षेत्र के अकबरपुर गांव में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। बाद में उनका संबंध फर्रुखाबाद जिले के नीब करोरी गांव से जुड़ा और इसी वजह से उन्हें बाबा नीब करोरी के नाम से जाना जाने लगा। समय के साथ नीब करोरी का प्रचलित रूप नीम करौली हो गया और आज दोनों नाम इसी संत के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। कहा जाता है कि उन्होंने नीब करोरी में गुफा के भीतर कठिन साधना की थी और बाद में उसी स्थान पर हनुमान मंदिर का निर्माण हुआ।

    बाबा के जीवन से जुड़ी ट्रेन वाली कहानी भी बेहद प्रसिद्ध है। भक्तों के बीच प्रचलित कथा के अनुसार बाबा बिना टिकट ट्रेन के फर्स्ट क्लास डिब्बे में यात्रा कर रहे थे। टिकट जांच के दौरान उन्हें नीब करोरी के पास ट्रेन से उतार दिया गया। बाबा पास ही एक नीम के पेड़ के नीचे जाकर बैठ गए। मान्यता है कि इसके बाद ट्रेन आगे नहीं बढ़ी। कई कोशिशों के बाद भी इंजन नहीं चला तो अधिकारियों और यात्रियों ने बाबा से क्षमा मांगी और उन्हें वापस ट्रेन में बैठाया गया। बाबा के ट्रेन में बैठने के बाद ट्रेन चल पड़ी। इस घटना को लेकर कई तरह की मान्यताएं हैं और इसे बाबा से जुड़े चमत्कारों में गिना जाता है।

    बाबा का बचपन और गृहस्थ जीवन भी उनकी कहानी का अहम हिस्सा है। बताया जाता है कि कम उम्र में ही उनका विवाह हुआ था और आध्यात्म के प्रति गहरा आकर्षण होने के कारण उन्होंने घर छोड़ दिया था। इसके बाद उन्होंने अलग अलग स्थानों पर साधना की। गुजरात के बावनिया गांव में तालाब के पास साधना करने के कारण उन्हें तलैया बाबा भी कहा गया। बाद में वे परिवार के पास लौटे और गृहस्थ जीवन की जिम्मेदारियां निभाईं। उनके दो बेटे और एक बेटी होने की जानकारी मिलती है।

    बाबा नीम करौली की सबसे बड़ी पहचान उनकी हनुमान भक्ति रही। उनके भक्त उन्हें हनुमान जी का अंश या अवतार तक मानते हैं। हालांकि यह आस्था और धार्मिक मान्यता का विषय है इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। बाबा की शिक्षाओं में प्रेम सेवा सादगी और सभी को समान दृष्टि से देखने का भाव प्रमुख था। वे लोगों को ईश्वर का स्मरण करने दूसरों की सेवा करने और सत्य के रास्ते पर चलने की प्रेरणा देते थे। उनका संदेश सब एक यानी सभी में एक ही ईश्वर का अंश देखने की भावना से जुड़ा माना जाता है।

    बाबा से जुड़े अनेक चमत्कारिक किस्से भी भक्तों के बीच प्रचलित रहे हैं। उनके बारे में कहा जाता है कि वे लोगों की परेशानियों को बिना बताए समझ लेते थे और कई बार अलग अलग स्थानों पर एक साथ दिखाई देने जैसी घटनाओं का भी उल्लेख मिलता है। इन कथाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं है लेकिन उनके अनुयायियों की आस्था में इनका विशेष स्थान है। अमीर हो या गरीब अलग धर्म का हो या अलग सामाजिक वर्ग का बाबा के पास आने वाले लोगों के साथ समान व्यवहार की बातें उनके संस्मरणों में मिलती हैं।

    यही वजह है कि बाबा नीम करौली की लोकप्रियता केवल भारत तक सीमित नहीं रही। कैंची धाम आज उनकी सबसे प्रसिद्ध पहचान बन चुका है जहां हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। उनकी सादगी हनुमान भक्ति और प्रेम सेवा का संदेश आज भी लोगों को आकर्षित करता है। बाबा का जीवन इस बात का उदाहरण माना जाता है कि किसी संत की पहचान केवल उसके चमत्कारों की कहानियों से नहीं बल्कि उसकी शिक्षाओं और लोगों के जीवन पर पड़े प्रभाव से भी बनती है।

  • 6 महीने तक पसीना बहाया और 65 की उम्र में रच दिया कमाल! हैदराबाद मैराथन में इंदौर के धावक ने जीता गोल्ड

    6 महीने तक पसीना बहाया और 65 की उम्र में रच दिया कमाल! हैदराबाद मैराथन में इंदौर के धावक ने जीता गोल्ड


    नई दिल्ली ।उम्र अगर सिर्फ एक संख्या है तो इंदौर के 65 वर्षीय वरिष्ठ धावक प्रेम नारायण शर्मा ने इसे अपने प्रदर्शन से साबित कर दिया है। जिस उम्र में अधिकांश लोग आराम और सेहत को लेकर अधिक सावधानी बरतते हैं उस उम्र में प्रेम नारायण शर्मा ने दौड़ के मैदान में अपनी फिटनेस और मजबूत इरादों का शानदार परिचय दिया। तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में आयोजित हैदराबाद मैराथन 2026 में उन्होंने 10 किलोमीटर दौड़ की अपनी आयु वर्ग श्रेणी में पहला स्थान हासिल कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उनकी यह उपलब्धि न केवल इंदौर बल्कि उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है जो उम्र को अपने सपनों और जुनून के रास्ते में बाधा मान लेते हैं।

    हैदराबाद मैराथन 2026 में इंदौर के करीब 30 धावकों ने हिस्सा लिया और अलग अलग श्रेणियों में अपनी क्षमता का प्रदर्शन करते हुए शहर का नाम रोशन किया। प्रतियोगिता में 42 किलोमीटर फुल मैराथन 21 किलोमीटर हाफ मैराथन और 10 किलोमीटर दौड़ का आयोजन किया गया। इंदौर के धावकों ने हर श्रेणी में पूरे उत्साह और तैयारी के साथ भाग लिया और कठिन चुनौती को सफलतापूर्वक पूरा किया।

    10 किलोमीटर दौड़ में प्रेम नारायण शर्मा का प्रदर्शन सबसे खास रहा। 65 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपने आयु वर्ग के अन्य प्रतिभागियों को पीछे छोड़ते हुए पहला स्थान हासिल किया और गोल्ड मेडल जीत लिया। उनके साथ इस श्रेणी में इंदौर के विकास बांगर विशाल बांगर और नेतिक जायसवाल ने भी हिस्सा लिया और सफलतापूर्वक अपनी दौड़ पूरी की। प्रेम नारायण शर्मा की सफलता ने यह संदेश दिया कि फिटनेस और खेल के प्रति समर्पण के लिए उम्र कोई सीमा नहीं होती।

    मैराथन की सबसे कठिन श्रेणी 42 किलोमीटर फुल मैराथन मानी जाती है। इस चुनौतीपूर्ण दौड़ में भी इंदौर के खिलाड़ियों ने अपनी मजबूत तैयारी का परिचय दिया। विनोद चौधरी राजीव लाठ सौरभ जुनेजा दीपक जायसवाल अरविंद दुबे अमृतेश मोदी और अम्वेश कुमार राजपूत ने फुल मैराथन में हिस्सा लेकर शानदार प्रदर्शन किया। लंबी दूरी और लगातार शारीरिक क्षमता की मांग करने वाली इस दौड़ को पूरा करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है।

    21 किलोमीटर हाफ मैराथन में भी इंदौर के धावकों ने जबरदस्त दमखम दिखाया। जयश्री नाहटा हार्दिक पांडे मोहन पांडे यवल लड्ढा पीयूस लड्ढा अर्पित मुंदड़ा कपिल सोनी और ज्योत्सना वाडिया ने अपनी गति और सहनशक्ति के दम पर दौड़ पूरी की। इन धावकों के प्रदर्शन ने साबित किया कि इंदौर में मैराथन और फिटनेस को लेकर लोगों का जुनून लगातार बढ़ रहा है।

    इस सफलता के पीछे खिलाड़ियों की महीनों की कड़ी मेहनत भी शामिल रही। धावकों के कोच मनीष गौड़ के अनुसार सभी खिलाड़ियों ने हैदराबाद मैराथन के लिए लगभग छह महीने तक लगातार कठिन प्रशिक्षण लिया था। नियमित अभ्यास लंबी दूरी की दौड़ फिटनेस और सहनशक्ति पर काम करने के बाद खिलाड़ियों ने प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। इसी अनुशासन और मेहनत का परिणाम है कि इंदौर के धावकों ने अलग अलग श्रेणियों में शानदार प्रदर्शन किया।

    प्रेम नारायण शर्मा की स्वर्णिम सफलता खास तौर पर इसलिए भी प्रेरक है क्योंकि उन्होंने 65 साल की उम्र में यह उपलब्धि हासिल की है। उनका प्रदर्शन उन लोगों के लिए एक बड़ा संदेश है जो बढ़ती उम्र के साथ अपने शरीर और सपनों को सीमित मानने लगते हैं। सही दिनचर्या लगातार मेहनत और मजबूत इच्छाशक्ति के साथ किसी भी उम्र में नई उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।

    हैदराबाद मैराथन में इंदौर के धावकों की इस उपलब्धि पर शहर के खेल प्रेमियों ने खुशी जताई है। 65 वर्षीय प्रेम नारायण शर्मा का गोल्ड मेडल और अन्य धावकों का शानदार प्रदर्शन इंदौर के लिए गर्व का क्षण बन गया है। छह महीने की मेहनत के बाद मिली यह सफलता एक बार फिर साबित करती है कि मंजिल तक पहुंचने के लिए उम्र नहीं बल्कि हौसले की जरूरत होती है।

  • गांव में लोग बात करने से कतराते थे, आज ‘हनुमान अंश’ के गाने से मिली पहचान! भावुक हुए नेत्रहीन बुंदेली सिंगर सुनील लोधी

    गांव में लोग बात करने से कतराते थे, आज ‘हनुमान अंश’ के गाने से मिली पहचान! भावुक हुए नेत्रहीन बुंदेली सिंगर सुनील लोधी


    नई दिल्ली । कभी गांव में लोग उनसे बात करने से भी कतराते थे लेकिन आज उनकी आवाज ने उन्हें एक अलग पहचान दिला दी है। बुंदेलखंड के नेत्रहीन सिंगर सुनील लोधी इन दिनों फिल्म हनुमान अंश में गाए अपने भजन की वजह से चर्चा में हैं। उनकी मधुर आवाज लोगों के दिलों में उतर रही है और फिल्म की सफलता के साथ उनकी जिंदगी की कहानी भी लोगों को प्रेरित कर रही है। अपनी इस नई पहचान और सफलता से सुनील लोधी बेहद भावुक हैं। उनका कहना है कि उनकी जिंदगी में जो कुछ भी अच्छा हुआ है वह पूरी तरह हनुमान जी के आशीर्वाद का परिणाम है।

    बताया जाता है कि कम बजट में बनी फिल्म हनुमान अंश ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन करते हुए दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। फिल्म की कहानी और इसके भजनों को भी लोगों का खूब प्यार मिल रहा है। इन्हीं भजनों में सुनील लोधी की आवाज में गाया गया मैंने तेरे ही भरोसे विशेष रूप से चर्चा में है। सुनील के लिए यह मौका केवल एक फिल्म में गाना गाने का अवसर नहीं बल्कि उनके लंबे संघर्ष और संगीत के प्रति समर्पण की बड़ी पहचान बन गया है।

    सुनील लोधी बचपन से ही देख नहीं सकते हैं। इसके बावजूद उन्होंने कभी अपनी इस चुनौती को अपने सपनों के सामने रुकावट नहीं बनने दिया। खास बात यह है कि उन्होंने संगीत की कोई औपचारिक ट्रेनिंग भी नहीं ली और न ही किसी गुरु से संगीत की शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने अपनी सुनने की क्षमता को ही सीखने का सबसे बड़ा माध्यम बनाया। सुनील बताते हैं कि वह महान गायिका लता मंगेशकर के गाने सुनते थे और उन्हें सुन सुनकर गाने का अभ्यास करते थे। धीरे धीरे संगीत उनके जीवन का अहम हिस्सा बन गया।

    गांव में होने वाले भजन कीर्तन और धार्मिक आयोजनों में गाते हुए सुनील ने अपनी गायकी को निखारा। बाद में उन्होंने सोशल मीडिया का सहारा लिया और बुंदेली लोकगीतों के साथ भजन गाकर लोगों तक अपनी आवाज पहुंचानी शुरू की। शुरुआत में शायद ही किसी ने सोचा होगा कि यही आवाज एक दिन उन्हें इतनी बड़ी पहचान दिलाएगी लेकिन धीरे धीरे लोगों ने उनकी प्रतिभा को पहचाना।

    साल 2019 में उनका एक बुंदेली गीत लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हुआ। इसके बाद उनकी जिंदगी में एक नया मोड़ आया और वह मुंबई पहुंचे। वहां उनकी मुलाकात फिल्म हनुमान अंश के निर्देशक विशाल चतुर्वेदी से हुई। इसी मुलाकात ने सुनील को बड़े पर्दे के लिए गाने का अवसर दिया। हालांकि इससे पहले भी उनका भजन मोरे संकट के कटैया लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हो चुका था।

    इस भजन के वायरल होने से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा भी सुनील ने साझा किया। वह एक बार झांसी जाने वाली ट्रेन में यात्रा कर रहे थे और उनके पास तानपुरा था। ट्रेन में मौजूद कुछ लोगों ने उन्हें पहचाना और उनसे गाना सुनाने की इच्छा जताई। सुनील ने वहीं अपना भजन गाया। बाद में यह गीत रिकॉर्ड हुआ और लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो गया। सोशल मीडिया ने उनकी आवाज को दूर दूर तक पहुंचाया और धीरे धीरे उनकी पहचान बनती चली गई।

    आज जब फिल्म हनुमान अंश को सफलता मिल रही है तो सुनील लोधी भी अपनी जिंदगी में आए बदलाव को महसूस कर रहे हैं। वह बताते हैं कि पहले उनके गांव में कुछ लोग उनसे बातचीत करने से भी बचते थे लेकिन अब वही लोग उन्हें देखकर मुस्कुराते हैं और प्यार से बात करते हैं। यह बदलाव उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा है।

    अपनी सफलता को लेकर सुनील बेहद विनम्र नजर आते हैं। उनका कहना है कि यह उनकी मेहनत से ज्यादा हनुमान जी की कृपा है। उन्होंने अपनी सफलता को 100 प्रतिशत हनुमान जी का चमत्कार बताया है। सुनील का मानना है कि जिस तरह फिल्म को शुरुआत में अपेक्षाकृत कम दर्शक मिले और बाद में उसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी उसी तरह उनके भजन को भी शुरुआत में ज्यादा व्यूज नहीं मिले थे। लेकिन बाद में एक रील के जरिए लोगों का ध्यान उनकी आवाज तक पहुंचा और सब कुछ बदल गया।

    अब सुनील लोधी की इच्छा है कि उन्हें आगे भी हनुमान जी और धार्मिक विषयों पर बनने वाली फिल्मों और कार्यक्रमों में भजन गाने के अवसर मिलें। उनकी कहानी केवल एक सिंगर की सफलता की कहानी नहीं है बल्कि यह उस जिद और विश्वास की कहानी है जो मुश्किल परिस्थितियों में भी इंसान को अपने सपनों की ओर बढ़ने की ताकत देती है। बिना औपचारिक संगीत प्रशिक्षण और जीवन की बड़ी चुनौती के बावजूद सुनील ने अपनी आवाज को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया और आज वही आवाज उन्हें लोगों के दिलों तक पहुंचा रही है।

  • सागर में जहरीली शराब का कहर: 12 लोगों की मौत, 20 से ज्यादा बीमार, 8 की हालत गंभीर

    सागर में जहरीली शराब का कहर: 12 लोगों की मौत, 20 से ज्यादा बीमार, 8 की हालत गंभीर


    सागर।
    मध्य प्रदेश के सागर जिले में जहरीली शराब पीने से मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बंडा तहसील के घूघर, नौराज, गूगरा खुर्द, बराज और आसपास के गांवों में शराब पीने के बाद अब तक 12 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं करीब 24 मरीजों का इलाज चल रहा है, जिनमें आठ की हालत गंभीर बताई जा रही है। गंभीर मरीजों को बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (बीएमसी), सागर रेफर किया गया है। घटना के बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।

    शराब पीने के बाद अचानक बिगड़ी तबीयत

    जानकारी के मुताबिक शनिवार रात कई गांवों में कुछ लोगों ने शराब का सेवन किया था। इसके कुछ ही समय बाद लोगों की तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी। परिजन मरीजों को बंडा सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां कुछ लोगों को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। गंभीर स्थिति वाले मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद सागर भेजा गया।

    अस्पताल पहुंचे कुछ मरीजों के शरीर नीले पड़ने और अकड़न जैसी शिकायतें भी सामने आईं। डॉक्टरों की निगरानी में उनका उपचार जारी है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित गांवों में पहुंचकर शराब पीने वाले लोगों की स्क्रीनिंग कर रही हैं।

    प्रशासन ने छह शराब दुकानें कराईं सील

    घटना की सूचना मिलते ही कलेक्टर प्रतिभा पाल, एसपी अनुराग सुजानिया समेत वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी प्रभावित इलाकों में पहुंचे। अधिकारियों ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और अस्पताल में भर्ती मरीजों के इलाज की स्थिति की जानकारी ली।

    एहतियात के तौर पर क्षेत्र की छह शराब दुकानों को सील कर दिया गया है। शराब के नमूने लेने और उनकी जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं। बंडा क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया है। प्रशासन ने अवैध शराब के कारोबार से जुड़े लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

    24 से 48 घंटे में शराब पीने वालों की स्क्रीनिंग

    कलेक्टर प्रतिभा पाल ने लोगों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि जिन लोगों ने पिछले 24 से 48 घंटे में किसी भी तरह की शराब का सेवन किया है, वे किसी तरह के लक्षण नहीं होने पर भी स्क्रीनिंग जरूर कराएं।

    उल्टी, सिरदर्द, बुखार या तबीयत बिगड़ने जैसे लक्षण दिखाई देने पर तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या सिविल अस्पताल पहुंचने की सलाह दी गई है। प्रशासन को आशंका है कि जांच आगे बढ़ने पर प्रभावित लोगों की संख्या बढ़ सकती है।

    ग्रामीण ने सुनाई खौफनाक कहानी

    बमुराबेड़ा गांव के रामकुमार दांगी के मुताबिक उनके गांव में भी चार लोगों की मौत हुई है। उन्होंने बताया कि कुछ लोगों ने साथ बैठकर शराब पी थी, जिसके बाद उनकी हालत तेजी से खराब होने लगी। शरीर ठंडा पड़ने और तबीयत बिगड़ने के बाद कुछ लोगों की जल्द ही मौत हो गई।

    आबकारी विभाग पर भी उठे सवाल

    घटना के बाद आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय सूत्रों और कुछ शराब ठेकेदारों का दावा है कि इलाके में नकली और अवैध शराब की बिक्री को लेकर पहले भी शिकायतें की गई थीं। हालिया बैठक में लाइसेंसी ठेकेदारों की ओर से भी अवैध शराब के कारोबार का मुद्दा उठाए जाने की बात कही जा रही है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

    मृतकों में 45 वर्षीय गोलू उर्फ चमन भी शामिल

    पुलिस के मुताबिक मृतकों में गोलू उर्फ चमन लोधी (45), दिग्विजय लोधी (28), करतार सिंह लोधी (30), उजियार सिंह लोधी (56), रोशन लोधी (30), राजेंद्र लोधी (32), हरनाम राय (42), उत्तम नत्थू नायक (42), सुमेर सिंह दांगी (47), राजकुमार लोधी (47) और सुरेंद्र अहिरवार (35) समेत अन्य लोग शामिल हैं। गोलू उर्फ चमन के पहले से कैंसर से पीड़ित होने की जानकारी भी सामने आई है।

    गंभीर मरीजों का बीएमसी में इलाज

    गंभीर हालत वाले मरीजों में हरनाम राय, उत्तम नत्थू नायक, मंगल रजक, परम आदिवासी, धनसिंह आदिवासी, चंद्रभान लोधी, अजय लोधी, विनोद और राघवेंद्र लोधी समेत अन्य शामिल हैं। इन्हें बेहतर इलाज के लिए बीएमसी सागर रेफर किया गया है।

    फिलहाल प्रशासन शराब के स्रोत और उसमें किसी जहरीले पदार्थ की मौजूदगी की जांच में जुटा है। मौतों की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम और शराब के सैंपल की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

  • तनाव, उलझन और काम में रुकावटें! सूर्य-शनि के षडाष्टक योग से अगले 4 दिन इन 4 राशियों को बरतनी होगी खास सावधानी

    तनाव, उलझन और काम में रुकावटें! सूर्य-शनि के षडाष्टक योग से अगले 4 दिन इन 4 राशियों को बरतनी होगी खास सावधानी


    नई दिल्ली । ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार 6 सितंबर 2026 से सूर्य और शनि के बीच बना षडाष्टक योग सक्रिय हो गया है। ग्रहों के राजा सूर्य इस समय सिंह राशि में स्थित हैं जबकि कर्मफलदाता शनि मीन राशि में गोचर कर रहे हैं। ज्योतिष में सूर्य और शनि को एक दूसरे का विरोधी ग्रह माना जाता है और जब दोनों ग्रह एक दूसरे से लगभग 150 डिग्री की दूरी पर आ जाते हैं या छठे और आठवें भाव का संबंध बनाते हैं तब षडाष्टक योग का निर्माण होता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यह योग कुछ लोगों के लिए मानसिक दबाव, कामकाज में रुकावट और रिश्तों में तनाव की स्थिति पैदा कर सकता है।

    मान्यता है कि सूर्य और शनि का यह योग अगले तीन से चार दिनों तक अपना प्रभाव दिखा सकता है। सूर्य आत्मविश्वास, प्रतिष्ठा और नेतृत्व क्षमता का प्रतिनिधित्व करते हैं जबकि शनि कर्म, अनुशासन और संघर्ष से जुड़ा ग्रह माना जाता है। ऐसे में दोनों ग्रहों के बीच बनने वाला यह चुनौतीपूर्ण संबंध कुछ लोगों की निजी और पेशेवर जिंदगी में असमंजस पैदा कर सकता है। खासतौर पर जल्दबाजी में लिए गए फैसले और बेवजह के विवाद इस दौरान परेशानी बढ़ा सकते हैं।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस षडाष्टक योग का प्रभाव कन्या, मकर, कुंभ और मीन राशि के लोगों पर अपेक्षाकृत अधिक पड़ सकता है। इन चार राशियों के जातकों को अगले कुछ दिनों तक अपने व्यवहार और फैसलों में अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत हो सकती है। तनाव और नकारात्मक विचारों से बचना इस समय सबसे जरूरी माना जा रहा है। छोटी सी बात को लेकर मन में चिंता बढ़ाने के बजाय परिस्थितियों को शांत रहकर संभालने की कोशिश करनी चाहिए।

    कन्या राशि के लोगों को कार्यस्थल पर सहकर्मियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बातचीत में संयम रखने की सलाह दी जाती है। किसी भी बात पर तुरंत प्रतिक्रिया देना या बहस में पड़ना परेशानी बढ़ा सकता है। मकर राशि के जातकों को काम और आर्थिक मामलों में जल्दबाजी से बचना चाहिए। कोई नया जोखिम लेने से पहले परिस्थितियों को अच्छी तरह समझ लेना बेहतर हो सकता है।

    कुंभ राशि के लोगों के लिए भी यह समय मानसिक रूप से थोड़ा चुनौतीपूर्ण माना जा सकता है। कामकाज की जिम्मेदारियों के कारण दबाव महसूस हो सकता है और किसी पुराने मामले को लेकर चिंता बढ़ सकती है। ऐसे में अपने विचारों को सकारात्मक रखना और अनावश्यक विवादों से दूरी बनाना लाभदायक हो सकता है। वहीं मीन राशि के जातकों को निजी रिश्तों और आर्थिक लेन देन में विशेष सतर्कता रखने की जरूरत है। भावनाओं में बहकर कोई बड़ा फैसला लेना इस समय उचित नहीं माना जा रहा है।

    इन चारों राशि के जातकों को खासतौर पर कार्यस्थल पर अपने वरिष्ठ अधिकारियों या बॉस से बेवजह की बहस से बचना चाहिए। कम बोलना और सोच समझकर प्रतिक्रिया देना कई समस्याओं से बचा सकता है। पैसों के मामले में भी सावधानी जरूरी है। यदि कोई बड़ा निवेश या बड़ा आर्थिक लेन देन बहुत जरूरी नहीं है तो उसे कुछ दिनों के लिए टालना बेहतर हो सकता है। जोखिम वाले फैसले लेने से पहले विशेषज्ञ की सलाह और सभी पहलुओं की जांच करना जरूरी है।

    ज्योतिषीय उपायों में शनिवार की शाम शनि देव के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाने की मान्यता भी बताई जाती है। यदि मंदिर जाना संभव न हो तो पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाने का उपाय किया जाता है। हालांकि इन ज्योतिषीय प्रभावों को आस्था और मान्यताओं के आधार पर ही देखा जाना चाहिए।

    कुल मिलाकर सूर्य और शनि का षडाष्टक योग अगले कुछ दिनों में कन्या, मकर, कुंभ और मीन राशि के लोगों से धैर्य और सावधानी की मांग कर सकता है। विवाद से दूरी, सोच समझकर लिया गया फैसला, आर्थिक मामलों में सतर्कता और मानसिक शांति बनाए रखना इस समय सबसे महत्वपूर्ण हो सकता है। घबराने के बजाय संयम और सकारात्मक सोच के साथ परिस्थितियों का सामना करना बेहतर रहेगा।

  • सिंगापुर में भारतीयों पर घटिया और नस्ली टिप्पणियां….. सरकार ने दिए जांच के आदेश

    सिंगापुर में भारतीयों पर घटिया और नस्ली टिप्पणियां….. सरकार ने दिए जांच के आदेश


    सिंगापुर।
    सिंगापुर (Singapore ) के गृह मंत्री के. शनमुगम (Home Minister K. Shanmugam) ने भारतीयों (Indians) को लेकर इंटरनेट पर की जा रही नस्ली और आपत्तिजनक टिप्पणियों पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि चीन-नेपाल (China-Nepal) में आई भीषण बाढ़ और एयर इंडिया (Air India) में सिंगापुर एयरलाइंस (Singapore Airlines- SIA) के निवेश से जुड़े मामलों को लेकर कुछ लोगों ने बेहद घटिया और नस्ली टिप्पणियां की हैं। शनमुगम ने कहा कि उन्होंने पुलिस से इन टिप्पणियों की जांच करने को कहा है। उनका कहना था कि ऐसे लोगों को इंटरनेट की गुमनामी के पीछे छिपने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए, बल्कि उनकी पहचान कर कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने इन टिप्पणियों को शर्मनाक, घटिया और पूरी तरह अस्वीकार्य बताया।

    शनमुगम ने कहा कि नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद जब कई सिंगापुरवासी लापता हैं, तब भी सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ नस्ली टिप्पणियां की गईं। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि कुछ लोगों ने लापता सिंगापुरवासियों को लेकर भी बेहद आपत्तिजनक बातें लिखीं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति तब और गंभीर हो जाती है, जब 1000 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है और कई लोग अब भी लापता हैं। शनमुगम ने कहा कि ज्यादातर सिंगापुरवासी ऐसी सोच नहीं रखते। उन्होंने बताया कि सिंगापुर रेड क्रॉस ने नेपाल में राहत कार्यों के लिए 30 लाख सिंगापुर डॉलर से ज्यादा जुटाए हैं। सिंगापुर के लोग अलग-अलग समुदायों से होने के बावजूद जरूरत के समय एक-दूसरे और दूसरे देशों के लोगों की मदद करते हैं।


    एयर इंडिया से जुड़ा क्या है मामला

    एयर इंडिया में सिंगापुर एयरलाइंस के निवेश को लेकर भी सोशल मीडिया पर भारतीयों के खिलाफ नस्ली टिप्पणियों की नई लहर देखने को मिली। शनमुगम ने कहा कि कुछ लोगों ने भारतीयों को लेकर सांप, करी, पराठा और काले जादू जैसी टिप्पणियां कीं। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर टेमासेक के सीईओ और सीनियर अधिकारियों को भी उनकी जातीय पहचान के आधार पर निशाना बनाया। यह कहना कि किसी अधिकारी की भारतीय मूल की वजह से वह एयर इंडिया के पक्ष में फैसला करेगा, गलत और बदनाम करने वाली बात है।

    के. शनमुगम ने जोर देकर कहा कि संबंधित अधिकारी सिंगापुर में पैदा हुए, वहीं पढ़े और पूरी तरह सिंगापुरवासी हैं। किसी व्यक्ति को उसकी जातीय पहचान के आधार पर निशाना बनाना स्वीकार नहीं किया जा सकता। एयर इंडिया की ओर से अपने शेयरधारकों से करीब 1.5 अरब डॉलर की अतिरिक्त पूंजी मांगे जाने की खबरों के बीच सिंगापुर एयरलाइंस को निवेश पर फैसला करना है। शनमुगम ने साफ कहा कि एयर इंडिया में निवेश जारी रखना है या नहीं, इसका फैसला सिंगापुर एयरलाइंस के निदेशक मंडल और मैनेजमेंट को करना चाहिए।

  • अक्षय कुमार और शिल्पा शेट्टी का रिश्ता क्यों टूटा? सुनील दर्शन का दावा- गलतफहमियां न होतीं तो शायद हो जाती शादी

    अक्षय कुमार और शिल्पा शेट्टी का रिश्ता क्यों टूटा? सुनील दर्शन का दावा- गलतफहमियां न होतीं तो शायद हो जाती शादी


    नई दिल्ली । बॉलीवुड में कई ऐसी प्रेम कहानियां रही हैं जो अपने दौर में खूब चर्चा में रहीं लेकिन किसी कारण शादी तक नहीं पहुंच सकीं। अक्षय कुमार और शिल्पा शेट्टी का रिश्ता भी ऐसी ही चर्चित जोड़ियों में शामिल रहा है। ट्विंकल खन्ना से शादी से पहले अक्षय कुमार और शिल्पा शेट्टी के बीच नजदीकियों की खबरें लंबे समय तक सुर्खियों में रहीं। अब फिल्ममेकर और प्रोड्यूसर सुनील दर्शन ने दोनों के रिश्ते को लेकर एक पुराना किस्सा साझा किया है। उनका दावा है कि अक्षय और शिल्पा का रिश्ता इतना मजबूत था कि उन्हें लगता था कि दोनों आखिरकार शादी कर लेंगे लेकिन कुछ गलतफहमियों ने इस रिश्ते का अंत कर दिया।

    सुनील दर्शन ने हाल ही में एक बातचीत के दौरान अक्षय कुमार के करियर और निजी जिंदगी के उस दौर को याद किया जब वह फिल्म जानवर पर काम कर रहे थे। फिल्ममेकर के मुताबिक उस समय अक्षय कुमार और शिल्पा शेट्टी के बीच एक गंभीर रिश्ता था। दोनों एक दूसरे के काफी करीब थे और उनका रिश्ता सामान्य अफवाहों से कहीं ज्यादा मजबूत नजर आता था। सुनील दर्शन को भी उस समय यही लगता था कि दोनों अपने रिश्ते को शादी के मुकाम तक ले जाएंगे।

    उन्होंने बताया कि जानवर के समय दोनों के बीच सब कुछ ठीक चल रहा था लेकिन बाद में कुछ गलतफहमियां पैदा हो गईं। इन्हीं गलतफहमियों के कारण दोनों के रिश्ते में दूरी बढ़ी और आखिरकार उनका ब्रेकअप हो गया। हालांकि सुनील दर्शन ने इन गलतफहमियों के बारे में विस्तार से जानकारी नहीं दी लेकिन उनके बयान ने एक बार फिर बॉलीवुड के इस पुराने रिश्ते को चर्चा में ला दिया है।

    अक्षय कुमार के करियर का वह दौर भी काफी मुश्किलों भरा था। सुनील दर्शन ने बताया कि एक समय ऐसा आया था जब अक्षय कुमार की कई फिल्में लगातार सफल नहीं हो रही थीं। हालात ऐसे बन गए थे कि कई प्रोड्यूसर्स उनके साथ नई फिल्में बनाने से भी हिचकने लगे थे क्योंकि उनकी फिल्मों को बाजार में उम्मीद के मुताबिक प्रतिक्रिया नहीं मिल रही थी। यह दौर अक्षय के करियर के लिए किसी बड़े इम्तिहान से कम नहीं था।

    इसी बीच फिल्म जानवर उनके करियर के लिए एक बड़ा मोड़ साबित हुई। फिल्म की सफलता ने अक्षय कुमार की किस्मत बदल दी और उनके करियर को नई दिशा मिली। सुनील दर्शन के अनुसार जानवर की कामयाबी के बाद अक्षय के स्टारडम में जबरदस्त उछाल आया। इसके बाद जिन फिल्मों के प्रोजेक्ट पहले से तैयार थे या किसी कारण रुके हुए थे उनमें भी तेजी आई। हेरा फेरी और धड़कन जैसी फिल्मों ने आगे चलकर अक्षय कुमार को बॉलीवुड के सबसे सफल सितारों में शामिल करने में अहम भूमिका निभाई।

    सुनील दर्शन ने अक्षय कुमार से जुड़ा एक और दिलचस्प किस्सा भी साझा किया। उन्होंने बताया कि जानवर की सफलता के बाद अक्षय कुमार को एक अफवाह सुनने को मिली थी कि सुनील दर्शन अपनी अगली फिल्म के लिए ऋतिक रोशन को साइन करने जा रहे हैं। यह बात सुनकर अक्षय कुमार सीधे सुनील दर्शन से मिलने पहुंचे और उन्होंने पूछा कि क्या उनसे कोई गलती हुई है। सुनील दर्शन ने उन्हें समझाया कि वह ऋतिक रोशन के घर जरूर गए थे लेकिन कोई फिल्म साइन नहीं हुई थी और यह पूरी बात एक गलतफहमी का नतीजा थी।

    दिलचस्प बात यह है कि अक्षय और शिल्पा के रिश्ते की कहानी में भी गलतफहमियों का जिक्र किया जा रहा है। जहां करियर से जुड़े एक मामले में बातचीत से स्थिति साफ हो गई वहीं निजी रिश्ते में पैदा हुई गलतफहमियां दोनों को अलग कर गईं। इसके बाद अक्षय कुमार की जिंदगी ने नया मोड़ लिया और उन्होंने ट्विंकल खन्ना से शादी कर ली।

    अक्षय कुमार और ट्विंकल खन्ना ने 17 जनवरी 2001 को शादी की थी। आज दोनों बॉलीवुड के चर्चित कपल्स में शामिल हैं और उनके दो बच्चे हैं। हालांकि अक्षय कुमार और शिल्पा शेट्टी का रिश्ता बहुत पहले खत्म हो चुका है लेकिन सुनील दर्शन के इस बयान ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि अगर उस समय दोनों के बीच गलतफहमियां पैदा नहीं हुई होतीं तो क्या बॉलीवुड की यह चर्चित प्रेम कहानी शादी तक पहुंच सकती थी। इसका जवाब शायद समय के साथ ही पीछे छूट गया लेकिन यह किस्सा आज भी लोगों की दिलचस्पी बनाए रखता है।

  • BJP : संगठन में फेरबदल के बाद मंत्रिमंडल में विस्तार की उम्मीद… सांसदों ने दिल्ली में डाला डेरा

    BJP : संगठन में फेरबदल के बाद मंत्रिमंडल में विस्तार की उम्मीद… सांसदों ने दिल्ली में डाला डेरा


    नई दिल्ली।
    भाजपा संगठन (BJP Organization) की टीम गठन के बाद केंद्र सरकार (Central Government) में संभावित विस्तार और फेरबदल (Reshuffle) को लेकर उम्मीद लगाए सांसदों की ऊहापोह बढ़ती जा रही है। सांसद अपने क्षेत्रों से ज्यादा दिल्ली में समय बिता रहे हैं। संसद के मॉनसून सत्र (Monsoon Session) का अभी तक सत्रावसान भी नहीं हुआ है, ऐसे में सत्र के फिर से कभी भी आहूत होने की संभावना है। दूसरी तरफ मंत्रिमंडल विस्तार की भी संभावना बनी हुई है।


    मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलें

    भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन (BJP President Nitin Navin) की टीम के गठन के बाद से ही इस बात की अटकलें रही हैं कि केंद्रीय मंत्रिपरिषद का भी अब जल्द ही विस्तार किया जाएगा। सरकार में कई मंत्री पद खाली भी हैं। संगठन की टीम से बाहर हुए और उसमें जगह न पा सके नेताओं को अब सरकार के विस्तार को लेकर काफी उम्मीदें हैं। अटकलों के बाजार में कोई न कोई तारीख के आ जाने से इन सांसदों की उम्मीदें भी बढ़ जाती हैं।


    संसद का सत्र भी बुलाया जा सकता है

    संगठन और सरकार में किसका पहले विस्तार होगा, पहले इसकी चर्चा थी, तो अब संसद सत्र को फिर से बुलाने और सरकार के विस्तार में क्या पहले होगा, इसकी अटकलें लगाई जा रही हैं। इस बात की संभावना बनी हुई है कि कभी भी फिर से संसद सत्र आयोजित हो सकता है। इसमें महिला आरक्षण संशोधन और परिसीमन विधेयक लाए जा सकते हैं। ये विधेयक पिछले बजट सत्र में सरकार पारित नहीं करा सकी थी। चूंकि, इसके लिए सरकार को अन्य दलों का भी समर्थन जरूरी है।

    2027 की शुरुआत में उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों में विधानसभा के चुनाव भी होने हैं। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि मंत्रिमंडल विस्तार में भी यूपी का ध्यान रखा जाएगा। फिलहाल अगर पीएम मोदी को भी जोड़ लें तो उत्तर प्रदेश से 11 मंत्री हैं। लखनऊ से सांसद राजनाथ सिंह रक्षा मंत्रालय की बड़ी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इसके अलावा पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी भी उत्तर प्रदेश से ही चुनकर राज्यसभा आए हैं। इस लिस्ट में बीएल वर्मा, एसपी सिंह बघेल, अनुप्रिया पटेल, जितिन प्रसाद, पंकज चौधरी, कमलेश पासवान और कीर्तिवर्धन सिंह का नाम है।

    पार्टी में चर्चा यही है कि जिन बड़े नेताओं को केंद्रीय कार्यकारिणी में जगह नहीं मिल पाई हैं, उन्हें मंत्रिमंडल में मौका मिल सकता है। कयास लगाए जा रहे हैं कि यूपी से लक्ष्मीकांत वाजपेयी को भी मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। कयास पूर्व उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा को लेकर भी थे। हालांकि अब उन्हें अडमान निकोबार का उपराज्यपाल नियुक्त कर दिया गया है।

  • महिला एशिया कप 2026: पाकिस्तान को धूल चटाकर सेमीफाइनल में टीम इंडिया, बने कई रिकॉर्ड

    महिला एशिया कप 2026: पाकिस्तान को धूल चटाकर सेमीफाइनल में टीम इंडिया, बने कई रिकॉर्ड


    दुबई।
    महिला एशिया कप 2026 (Women’s Asia Cup 2026) में भारतीय महिला क्रिकेट टीम (Indian Women’s Cricket team) का जलवा बरकरार है. दुबई के मैदान पर खेले गए मुकाबले में भारत (India ने पाकिस्तान टीम (Pakistan team) को चारों खाने चित करते हुए टूर्नामेंट में लगातार तीसरी जीत दर्ज की. इस धमाकेदार जीत के साथ ही हरमनप्रीत कौर की अगुआई वाली भारतीय टीम ने सेमीफाइनल का टिकट पक्का कर लिया।

    पहले बल्लेबाजी करने उतरी पाकिस्तानी टीम भारतीय स्पिनरों की घातक गेंदबाजी के आगे पस्त हो गई. पाकिस्तान की टीम 18.1 ओवर में महज 55 रनों पर ढेर हो गई. यह टी20 अंतरराष्ट्रीय में पाकिस्तान का अब तक का सबसे कम स्कोर रहा.

    पाकिस्तान को सस्ते में समेटने में भारत की दो युवा स्पिनरों का सबसे बड़ा हाथ रहा. श्री चरणी ने कातिलाना गेंदबाजी करते हुए अपने 4 ओवर में सिर्फ 7 रन देकर 3 विकेट झटके, जिसमें एक ही ओवर में 2 झटके शामिल थे.

    वहीं लेग स्पिनर प्रेमा रावत ने भी अपनी फिरकी का कमाल दिखाते हुए 4 ओवर में केवल 9 रन दिए और 3 बल्लेबाजों को पवेलियन भेजा. पाकिस्तान की तरफ से शावल जुल्फिकार (14) और मुनीबा अली (13) ही दहाई का आंकड़ा छू सकीं, जबकि कप्तान फातिमा सना समेत चार खिलाड़ी खाता भी नहीं खोल पाईं.


    शेफाली वर्मा ने बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड

    56 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम के शुरुआती तीन विकेट जल्दी गिर गए, लेकिन शेफाली वर्मा ने आउट होने से पहले 12 रनों की पारी खेल इतिहास रच दिया. शेफाली अब टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 3,000 रन बनाने वाली दुनिया की सबसे युवा खिलाड़ी बन गई हैं.

    उन्होंने महज 22 साल और 220 दिन की उम्र में यह कारनामा कर आयरलैंड की गेबी लुईस का रिकॉर्ड तोड़ दिया. शेफाली वर्मा, स्मृति मंधाना और हरमनप्रीत कौर के बाद 3,000 टी20I रन बनाने वाली तीसरी भारतीय महिला बल्लेबाज भी बन गई हैं.


    कप्तान हरमनप्रीत कौर ने रचा इतिहास

    भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर के नाम भी इस मैच में बड़ी उपलब्धि जुड़ गई. वह 150 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में कप्तानी करने वाली दुनिया की पहली खिलाड़ी बन गईं. इस मामले में उन्होंने श्रीलंका की चमारी अट्टापट्टू (120 मैच) और ऑस्ट्रेलिया की दिग्गज मेग लैनिंग (100 मैच) को काफी पीछे छोड़ दिया है. शुरुआती झटकों के बाद कप्तान हरमनप्रीत (18 रन*) और दीप्ति शर्मा (12 रन*) ने बिना कोई और नुकसान पहुंचाए भारत को आसान जीत दिला दी.