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  • भाजपा में बड़े संगठनात्मक बदलाव की तैयारी, नितिन नवीन की टीम में अनुभवी नेताओं को मिल सकती है अहम जिम्मेदारी

    भाजपा में बड़े संगठनात्मक बदलाव की तैयारी, नितिन नवीन की टीम में अनुभवी नेताओं को मिल सकती है अहम जिम्मेदारी


    नई दिल्ली। भाजपा संगठन में जल्द ही बड़े स्तर पर बदलाव देखने को मिल सकता है। पार्टी नेतृत्व राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम को युवा चेहरों के साथ अनुभवी नेताओं के संतुलन से तैयार करने की कवायद में जुटा है। सूत्रों के मुताबिक, कुछ केंद्रीय मंत्रियों, पूर्व केंद्रीय मंत्रियों और संगठन में लंबे समय तक काम कर चुके नेताओं को राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं।

    भाजपा का फोकस आने वाले चुनावों को देखते हुए संगठन को और मजबूत करने पर है। अगले छह महीने में पार्टी को पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों का सामना करना है, जिनमें चार राज्यों में भाजपा की सरकारें हैं। ऐसे में नेतृत्व संगठनात्मक ढांचे को अधिक सक्रिय और प्रभावी बनाने की तैयारी कर रहा है। पार्टी की रणनीति नए नेतृत्व को आगे बढ़ाने के साथ-साथ अनुभवी नेताओं के मार्गदर्शन में उन्हें तैयार करने की है। इसी दिशा में राज्यों में संगठनात्मक बदलाव के बाद अब राष्ट्रीय स्तर पर नई टीम के गठन की प्रक्रिया चल रही है।

    नितिन नवीन के साथ अनुभवी चेहरों को मिलेगी जगह
    भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन राष्ट्रीय राजनीति में अपेक्षाकृत नए हैं, इसलिए पार्टी उनके साथ संगठन का अनुभव रखने वाले नेताओं को जोड़ना चाहती है। सूत्रों के अनुसार, पूर्व में संगठन में जिम्मेदारी संभाल चुके कई सांसदों को भी राष्ट्रीय टीम में शामिल किया जा सकता है। मौजूदा संगठन में काम कर रहे करीब 4 से 5 नेताओं को पदोन्नति देकर नई जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना है। वहीं, लगभग आधा दर्जन ऐसे सांसदों पर भी विचार चल रहा है, जिनका संगठनात्मक अनुभव पार्टी के लिए उपयोगी हो सकता है।

    प्रधानमंत्री और वरिष्ठ नेताओं की नजर
    नई टीम को लेकर पार्टी के शीर्ष स्तर पर मंथन जारी है। सूत्रों के मुताबिक, इस प्रक्रिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य वरिष्ठ नेता भी शामिल हैं। चूंकि आने वाले समय में सरकार में भी बदलाव की संभावना जताई जा रही है, इसलिए कुछ प्रमुख नेताओं को संगठन की जिम्मेदारी सौंपने की रणनीति पर भी विचार किया जा रहा है।

    महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर
    भाजपा के नए संगठन में केंद्रीय पदाधिकारियों के साथ-साथ राज्यों के प्रभारी, मोर्चों के अध्यक्ष और राष्ट्रीय कार्यकारिणी का भी गठन किया जाना है। इसी वजह से नामों को अंतिम रूप देने में समय लग रहा है। भाजपा के संविधान के अनुसार राष्ट्रीय कार्यकारिणी में कम से कम 25 प्रतिशत नए सदस्यों को शामिल करना होता है। हालांकि पार्टी इससे अधिक नए चेहरों को भी मौका दे सकती है।

    महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी पार्टी विशेष ध्यान दे रही है। भाजपा संविधान के अनुसार केंद्रीय पदाधिकारियों में 33 प्रतिशत महिलाओं की हिस्सेदारी का प्रावधान है। हालांकि यदि यह लक्ष्य पूरा नहीं हो पाता है, तब भी इस बार पहले की तुलना में अधिक महिलाओं को जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना है। अनुमान है कि संगठन में महिलाओं की भागीदारी 20 से 25 प्रतिशत तक हो सकती है।

    नई टीम के गठन के जरिए भाजपा एक तरफ अनुभवी नेताओं का सहारा लेना चाहती है, वहीं दूसरी ओर भविष्य के नेतृत्व को तैयार करने की रणनीति पर भी काम कर रही है।

  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: गणना टीम में शामिल होते ही मनीष बना गिरोह का सरगना, CCTV से खुल रहे राज

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: गणना टीम में शामिल होते ही मनीष बना गिरोह का सरगना, CCTV से खुल रहे राज


    अयोध्या। श्रीराम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ ही आरोपियों की भूमिका को लेकर नए खुलासे सामने आ रहे हैं। जांच में सामने आया है कि रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू का भतीजा मनीष यादव गणना टीम में शामिल होने के बाद चोरी करने वाले गिरोह का अहम हिस्सा बन गया था।

    एसआईटी जांच के मुताबिक, सीसीटीवी फुटेज में चढ़ावे की नोटों की गड्डियां ले जाते हुए तीन लोगों की भूमिका स्पष्ट रूप से सामने आई है। इनमें अविनाश शुक्ला, मनीष यादव और रमाशंकर मिश्रा शामिल हैं। आरोप है कि ये लोग चढ़ावे की रकम बाहर ले जाते थे, जबकि तीन अन्य लोग घेरा बनाकर सीसीटीवी कैमरों की नजर से बचाने में मदद करते थे।

    भर्ती के कुछ ही दिनों बाद CCTV में कैद हुआ मनीष
    एसआईटी रिपोर्ट के अनुसार, मनीष यादव की गणनाकर्मी पद पर नियुक्ति उसके ताऊ रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू की सिफारिश पर हुई थी। बताया गया है कि टिन्नू ने मनीष की भर्ती के लिए दस्तावेज एसबीआई के रत्नेश चतुर्वेदी को उपलब्ध कराए थे। इसके बाद सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज के माध्यम से संविदा प्रक्रिया पूरी की गई। रिकॉर्ड के अनुसार, मनीष यादव की भर्ती 15 अप्रैल 2026 को हुई थी। इसके करीब 50 दिन के भीतर ही 11 मई 2026 की सीसीटीवी फुटेज में वह चढ़ावे की गड्डियां ले जाते हुए दिखाई दिया।

    50 दिन में मिली बड़ी भूमिका पर उठे सवाल
    जांच में यह भी सामने आया है कि रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू को सीधे तौर पर चोरी करते हुए नहीं पकड़ा गया है, लेकिन आशंका जताई जा रही है कि उसने अपने भतीजे मनीष को इस काम में आगे किया। जांच एजेंसियों का कहना है कि सामान्य तौर पर किसी नए कर्मचारी को किसी व्यवस्था को समझने में समय लगता है, लेकिन मनीष के मामले में भर्ती के कुछ ही दिनों बाद चोरी की गतिविधियों में शामिल होने के आरोप सामने आए हैं। इसी वजह से उसकी नियुक्ति को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

    अविनाश के पास मिली सबसे ज्यादा संपत्ति
    एसआईटी को 27 अप्रैल से 5 जून तक की सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध हुई, जिसकी जांच के बाद चढ़ावा चोरी के कई पहलुओं का खुलासा हुआ। जांच के अनुसार, सबसे अधिक संपत्ति और नकदी अविनाश शुक्ला के पास से बरामद हुई।

    बताया गया है कि मनीष यादव अविनाश के सहयोगी के रूप में काम कर रहा था, जबकि अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडेय पर भी मदद करने का आरोप है। एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, जांच से संकेत मिलते हैं कि मनीष को गणना कक्ष की जिम्मेदारी मिलने के बाद गिरोह में शामिल किया गया और कुछ समय बाद उसने चोरी की गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू कर दी।

    टिन्नू की भूमिका भी जांच के दायरे में
    जांच के मुताबिक, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां पहले रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू के पास थीं। परिवारिक संबंधों के कारण मनीष की गणना कक्ष में पहुंच आसान हुई और पहले से सक्रिय आरोपियों के संपर्क में आने के बाद वह कथित तौर पर गिरोह का हिस्सा बन गया।

    टिन्नू और मनीष की पुलिस रिमांड की मांग
    अब पुलिस ने रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू और मनीष यादव की सात दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड मांगी है। मामले के विवेचक और अयोध्या क्षेत्राधिकारी आशुतोष तिवारी ने विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की अदालत में विशेष अभियोजन अधिकारी के माध्यम से आवेदन दिया है। पुलिस का कहना है कि दोनों आरोपियों से पूछताछ के दौरान मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्यों और संभावित बरामदगी की जानकारी मिल सकती है। अदालत ने इस आवेदन पर सुनवाई के लिए शुक्रवार की तारीख तय की है।

    79 लाख बरामदगी और 3 करोड़ की आशंका के बीच सवाल
    राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में बरामद रकम को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। शुरुआती जानकारी में करीब 79 लाख रुपये बरामद होने की बात सामने आई थी, जिसे पुलिस को सौंपा गया था। वहीं, राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने बाद में करीब 3 करोड़ रुपये की चोरी की आशंका जताई थी। अब जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि तीन करोड़ रुपये के अनुमान का आधार क्या था।

    जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह आंकड़ा दानपात्र की गिनती, ऑडिट रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज, आरोपियों से पूछताछ या किसी अन्य साक्ष्य के आधार पर सामने आया था। इस मामले में आगे की जांच के बाद ही पूरी तस्वीर साफ हो सकेगी।

  • अमेरिका में भारतीय छात्रों को बड़ा झटका, F-1 वीजा पर रहने की अवधि 4 साल तक सीमित करने की तैयारी

    अमेरिका में भारतीय छात्रों को बड़ा झटका, F-1 वीजा पर रहने की अवधि 4 साल तक सीमित करने की तैयारी


    नई दिल्ली। अमेरिका में उच्च शिक्षा हासिल करने का सपना देख रहे लाखों विदेशी छात्रों, खासकर भारतीय विद्यार्थियों के लिए नई चुनौती सामने आ सकती है। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग ने F-1 छात्र वीजा नियमों में बदलाव का प्रस्ताव तैयार किया है। इसके तहत अमेरिका में विदेशी छात्रों के रहने की अवधि अधिकतम चार साल तक सीमित की जा सकती है।

    यदि यह नियम लागू होता है, तो दशकों से चली आ रही ‘ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस’ (Duration of Status) व्यवस्था समाप्त हो जाएगी। वर्तमान व्यवस्था के तहत F-1 वीजा वाले छात्र तब तक अमेरिका में रह सकते हैं, जब तक वे अपने शैक्षणिक कार्यक्रम में सक्रिय हैं और वीजा की सभी शर्तों का पालन कर रहे हैं।

    चार साल से ज्यादा पढ़ाई के लिए लेनी होगी मंजूरी
    रिपोर्ट्स के अनुसार, नए नियम के तहत F-1 वीजा पर अमेरिका जाने वाले छात्रों को सामान्य तौर पर अधिकतम चार साल तक रहने की अनुमति मिलेगी। अगर किसी छात्र का कोर्स, रिसर्च या प्रशिक्षण चार साल से अधिक समय तक चलता है, तो उसे अपनी वैध अवधि समाप्त होने से पहले DHS से एक्सटेंशन की मंजूरी लेनी होगी। समय पर अनुमति नहीं मिलने की स्थिति में छात्र की कानूनी स्थिति प्रभावित हो सकती है।

    यह बदलाव सिर्फ F-1 वीजा तक सीमित नहीं रहेगा। प्रस्तावित नियम J-1 एक्सचेंज विजिटर वीजा और विदेशी मीडिया प्रतिनिधियों को दिए जाने वाले I वीजा पर भी निश्चित अवधि लागू कर सकता है। हालांकि, लागू होने से पहले इस नियम को अमेरिकी कांग्रेस की समीक्षा प्रक्रिया से गुजरना होगा।

    सरकार ने बताई राष्ट्रीय सुरक्षा वजह
    ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य छात्र वीजा प्रणाली की निगरानी को मजबूत करना और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों को प्रभावी बनाना है। वहीं, अमेरिकी विश्वविद्यालयों और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े संगठनों ने चिंता जताई है कि नए नियमों से चार साल से अधिक अवधि वाले शैक्षणिक कार्यक्रमों में पढ़ने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

    भारतीय छात्रों पर सबसे ज्यादा असर की आशंका
    इस बदलाव का प्रभाव भारतीय छात्रों पर खास तौर पर पड़ सकता है। ‘ओपन डोर्स 2024’ रिपोर्ट के अनुसार, शैक्षणिक वर्ष 2023-24 में अमेरिका के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में 3.31 लाख से अधिक भारतीय छात्र अध्ययन कर रहे थे। यह संख्या अमेरिका में पढ़ने वाले कुल अंतरराष्ट्रीय छात्रों का करीब 30 प्रतिशत है।

    भारतीय छात्रों का एक बड़ा हिस्सा पीएचडी, रिसर्च आधारित मास्टर्स, मेडिकल ट्रेनिंग, इंजीनियरिंग रिसर्च और अन्य पेशेवर पाठ्यक्रमों में दाखिला लेता है, जिनकी अवधि कई बार चार साल से ज्यादा हो जाती है। ऐसे छात्रों को अब पढ़ाई जारी रखने के लिए समय रहते DHS से अतिरिक्त समय की अनुमति लेनी पड़ सकती है।

    एक्सटेंशन में देरी से बढ़ सकती हैं कानूनी मुश्किलें
    विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी छात्र का एक्सटेंशन आवेदन समय पर मंजूर नहीं होता या दस्तावेजों की कमी, प्रशासनिक देरी अथवा अन्य कारणों से उसकी वैध अवधि खत्म हो जाती है, तो वह अमेरिका में ‘अनलॉफुल प्रेजेंस’ (अवैध रूप से रहने) की स्थिति में आ सकता है।

    इसका असर भविष्य में वीजा आवेदन, रोजगार के अवसर और अमेरिका में दोबारा प्रवेश पर पड़ सकता है। हालांकि, फिलहाल यह नियम तत्काल प्रभाव से लागू नहीं होगा। अमेरिकी कांग्रेस की समीक्षा पूरी होने और अंतिम प्रभावी तारीख घोषित होने तक F-1 छात्रों के लिए मौजूदा ‘ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस’ व्यवस्था ही जारी रहेगी।

  • सिलेंडरों में बची रहने वाली गैस की बर्बादी रोकने का नया मास्टरप्लान…. हर साल होगी ₹21900 करोड़ की बचत

    सिलेंडरों में बची रहने वाली गैस की बर्बादी रोकने का नया मास्टरप्लान…. हर साल होगी ₹21900 करोड़ की बचत


    नई दिल्ली।
    देशभर में रोजाना लगभग 40 लाख कमर्शियल सिलेंडरों (40 Lakh Commercial Cylinders) का इस्तेमाल होता है। इनमें से अधिकांश पारंपरिक वाष्प आधारित सिलेंडर (Vapour Of Take) हैं। इन सिलेंडरों की सबसे बड़ी समस्या प्रॉब्लम यह है कि पूरी गैस का इस्तेमाल हो ही नहीं पाता। कुछ न कुछ गैस रह जाती है और लगता है कि सिलेंडर में गैस खत्म हो गई। इसे ऐसे समझें, प्रत्येक 19 किलोग्राम वाले पारंपरिक सिलेंडर में लगभग 1 किलोग्राम गैस रह जाती है, जो बर्बाद हो जाती है। यानी रोजाना करीब 4,000 टन एलपीजी (LPG) का नुकसान हो जाता है। यह सालाना 1.46 मिलियन टन के बराबर है।


    अब क्या बदल गया है

    भारत की ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (Oil Marketing Companies) अब कमर्शियल और इंडस्ट्रियल यूजर्स को तरल एलपीजी सिलेंडरों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करने में जुटी हैं। यह कदम देश में ईंधन की बर्बादी को कम करने और दक्षता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, खासकर जब पूरी दुनिया पर सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं।

    लिक्विड निकलने वाले सिलेंडरों में यह खासियत है कि इनमें लगभग कोई गैस नहीं बचती। इसका मतलब है कि यूजर को अपनी खरीदी गई हर बूंद गैस का पूरा लाभ मिलता है। यह तकनीकी बदलाव न केवल अधिक किफायती है, बल्कि अधिक सुरक्षित भी माना जाता है।

    अगर सभी कमर्शियल यूजर इस नई व्यवस्था को अपना लें, तो देश को सालाना लगभग 21,900 करोड़ रुपये की बचत हो सकती है। यह आंकड़ा पुणे गैस सिस्टम्स ने पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी को लिखे पत्र में उजागर किया है।


    LOT और VOT के दाम में क्या है अंतर

    दोनों सिलेंडरों के दाम में कोई अंतर नहीं है। इंडियन ऑयल की बेवसाइट पर दिए गए लेटेस्ट रेट के मुताबिक दिल्ली में 47.5 किलो वाले दोनों सिलेंडर के दाम 7332 रुपये है। वहीं 19 किलो वाले LOT सिलेंडर की कीमत सामान्य सिलेंडर भी एक ही रेट 2930 रुपये पर मिल रहे हैं।


    क्या है सरकार और कंपनियों का रुख?

    ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने 47.5 किलोग्राम वाले लिक्विड सिलेंडरों को 2007 में ही अपनी प्रोडक्ट लिस्ट में शामिल कर लिया था। हालांकि, इन्हें पहले कभी जोर-शोर से प्रमोट नहीं किया गया। अब स्थिति बदल रही है। कंपनियां इन सिलेंडरों की सप्लाई को प्राथमिकता दे रही हैं और देशभर में 1,000 से अधिक संस्थानों ने इसे अपनाना शुरू कर दिया है।

    पुणे गैस सिस्टम्स की कार्यकारी निदेशक जेसल संपत के अनुसार, जब उन्होंने तेल कंपनियों के सहयोग से इसे लागू करना शुरू किया, तो ग्राहकों के बीच इसकी काफी मांग बढ़ी है। अब यह बदलाव पूरे देश में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

  • J&K: SOG जवानों से सर्विस राइफल छीनने का प्रयास… फायरिंग में 1 की मौत, 3 घायल

    J&K: SOG जवानों से सर्विस राइफल छीनने का प्रयास… फायरिंग में 1 की मौत, 3 घायल


    डोडा।
    जम्मू और कश्मीर (Jammu and Kashmir) के डोडा जिले (Doda district) के भद्रवाह इलाके में एक युवक ने स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (एसओजी) के जवानों से सर्विस राइफल (Service rifle) छीनने की कोशिश की, जिसके बाद हुई फायरिंग में युवक की मौत हो गई और तीन एसओजी के जवान घायल हो गए।

    पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस घटना के संबंध में एक धार्मिक उपदेशक को हिरासत में लिया गया है। हिरासत में लिए गए व्यक्ति का घटना से क्या संबंध है, यह अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है।

    यह घटना गुरुवार देर रात को हुई। एसओजी की एक टीम को उच्च-ऊंचाई वाले क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधि की रिपोर्ट मिलने के बाद गुरुवार को जाई-गंडोह सड़क रोड पर घात लगाकर बैठी थी। यह स्थान भद्रवाह शहर से लगभग 35 किलोमीटर दूर है।

    लगभग रात 11:30 बजे एसओजी टीम ने एक युवक को रोका, जिसने कथित तौर पर जवानों पर हमला किया और उनकी सर्विस राइफल छीनने का प्रयास किया। इस धक्का-मुक्की के दौरान एक एसओजी जवान ने गोली चला दी। गोली लगने से युवक गंभीर रूप से घायल हो गया, जबकि इस घटना में तीन पुलिसकर्मी भी जख्मी हो गए।

    घायलों को भद्रवाह के उप-जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां से विशेष उपचार के लिए उन्हें राजकीय मेडिकल कॉलेज, डोडा रेफर कर दिया गया। अधिकारियों के अनुसार, युवक, आरिफ हुसैन (30) निवासी चीका गांव, ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया।

    इस घटना के मद्देनजर, ऐहतियात के तौर पर भद्रवाह शहर में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और पुलिस की अतिरिक्त तैनाती की गई है। सेना ने जाई क्षेत्र में तलाशी अभियान शुरू कर दिया है।

  • दोबारा हुई नीट UG 2026 परीक्षा का रिजल्ट जारी, 11.21 लाख विद्यार्थी हुए सफल

    दोबारा हुई नीट UG 2026 परीक्षा का रिजल्ट जारी, 11.21 लाख विद्यार्थी हुए सफल


    नई दिल्ली।
    नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (National Testing Agency-NTA) ने गुरुवार देर शाम NEET UG 2026 का रिजल्ट घोषित कर दिया. रिजल्ट समय पर जारी होने से मेडिकल कॉलेजों (Medical colleges) में दाखिले और काउंसलिंग की प्रक्रिया तय कार्यक्रम के अनुसार शुरू हो सकेगी. उम्मीदवार अपना स्कोरकार्ड आधिकारिक वेबसाइट neet.nta.nic.in पर जाकर देख सकते हैं।

    दरअसल, इस वर्ष NEET UG 2026 परीक्षा लीक होने के कारण दोबारा कराई गई थी. री-नीट परीक्षा में देश और विदेश के करीब 20 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए थे. परीक्षा भारत के 551 शहरों और विदेश के 14 शहरों में स्थित 5,440 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की गई थी. इनमें से 11.21 लाख उम्मीदवार एमबीबीएस, बीडीएस, आयुष और अन्य संबद्ध मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए क्वालिफाई हुए हैं।

    .NTA के अनुसार, क्वालिफाई करने वाले उम्मीदवारों में 58 प्रतिशत से अधिक छात्राएं शामिल हैं. छात्राओं की सफलता दर भी पुरुषों से बेहतर रही. परीक्षा में शामिल हुई 56.8 प्रतिशत छात्राएं सफल रहीं, जबकि छात्रों की सफलता दर 55.1 प्रतिशत रही।


    पंजाब के आर्यन और हरियाणा के पांशुल ने किया टॉप

    इस बार 138 उम्मीदवारों ने 720 में से 690 से अधिक अंक हासिल किए हैं. इनमें से 93 प्रतिशत से अधिक अभ्यर्थी पहली बार NEET परीक्षा में शामिल हुए थे, जबकि 99 प्रतिशत टॉपर्स की उम्र 17 से 19 वर्ष के बीच है. देशभर में 19 उम्मीदवारों ने 700 से अधिक अंक प्राप्त किए. सबसे अधिक 715 अंक पंजाब के आर्यन गुप्ता और हरियाणा के पांशुल बंसल ने संयुक्त रूप से हासिल किए।

    वहीं, 1,492 उम्मीदवारों ने 650 या उससे अधिक, 10,160 उम्मीदवारों ने 600 या उससे अधिक और 90,780 उम्मीदवारों ने 500 या उससे अधिक अंक प्राप्त किए.

    सभी राज्यों से सफल अभ्यर्थी
    NTA के मुताबिक, सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से उम्मीदवार क्वालिफाई हुए हैं. उत्तर प्रदेश से सबसे अधिक 1.7 लाख से ज्यादा उम्मीदवार सफल हुए, जबकि लक्षद्वीप से 43 उम्मीदवारों ने परीक्षा पास की. राज्यवार टॉपर्स में लद्दाख की जिग्मेट यांगचेन लामो (530 अंक), अंडमान-निकोबार के ध्रुव त्रिपाठी (606 अंक) और लक्षद्वीप की फहमीदा अनीस (573 अंक) शामिल हैं. कुल 17 राज्यों के टॉपर्स ने 700 या उससे अधिक अंक, जबकि 26 राज्यों के टॉपर्स ने 690 से अधिक अंक हासिल किए।


    श्रेणीवार सफल उम्मीदवार

    सामान्य वर्ग: 2.91 लाख
    OBC-NCL: 5.12 लाख
    SC: 1.59 लाख
    ST: 63,716
    EWS: 95,026
    PwBD: 3,666
    PwD: 303


    13 भाषाओं में हुई परीक्षा

    बता दें कि NEET UG 2026 का आयोजन 13 भाषाओं हिंदी, अंग्रेजी, असमिया, बंगाली, गुजराती, कन्नड़, मलयालम, मराठी, ओड़िया, पंजाबी, तमिल, तेलुगु और उर्दू में कराया गया. NTA ने स्पष्ट किया है कि उसका काम परीक्षा आयोजित करना, परिणाम घोषित करना और ऑल इंडिया रैंक जारी करना है. MBBS और BDS की ऑल इंडिया कोटा काउंसलिंग मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) कराएगी, जबकि राज्य कोटे की काउंसलिंग संबंधित राज्य सरकारें आयोजित करेंगी।

    एजेंसी ने उम्मीदवारों को फर्जी कॉल, मैसेज और सीट दिलाने के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी से सावधान रहने की सलाह दी है. NTA ने कहा है कि वह किसी भी उम्मीदवार से पैसे या व्यक्तिगत जानकारी नहीं मांगती।

  • MP : हाईकोर्ट ने 350 करोड़ के स्कूल यूनिफॉर्म टेंडर पर लगाई रोक…. सरकार से मांगा जवाब

    MP : हाईकोर्ट ने 350 करोड़ के स्कूल यूनिफॉर्म टेंडर पर लगाई रोक…. सरकार से मांगा जवाब


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (Madhya Pradesh High Court) ने राज्य के सरकारी प्राइमरी और मिडिल स्कूलों (Government Primary and Middle Schools) में पढ़ने वाले 52 लाख से ज्यादा छात्र-छात्राओं को यूनिफॉर्म (Uniform) सप्लाई करने के लिए जारी 350 करोड़ रुपए के टेंडर पर रोक लगा दी है। यह रोक एक लोकल अपैरल एसोसिएशन द्वारा निविदा प्रक्रिया (बिडिंग प्रोसेस) में योग्यता की शर्तों को चुनौती देने के बाद लगाई गई है।

    कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजनल बेंच ने बुधवार को मामले की सुनवाई की और राज्य सरकार को एक हफ्ते के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा, ‘तब तक संबंधित टेंडर को अंतिम रूप नहीं दिया जाएगा।’

    यह याचिका जबलपुर अपैरल इनोवेशन एंड मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन (JAIMA) ने टेंडर डॉक्यूमेंट में ‘प्रतिबंधात्मक शर्तों’ को चुनौती देते हुए दायर की थी। JAIMA की ओर से पेश वकील विमल कांत जैन ने कोर्ट को बताया कि मध्य प्रदेश टेक्स्टबुक कॉर्पोरेशन द्वारा टेंडर के लिए तय किए गए योग्यता मानदंड असल में लोकल इंडस्ट्रीज को बाहर कर देते हैं।

    उन्होंने कहा यूनिफॉर्म सप्लाई करने के लिए निविदा प्रपत्र में जो शर्तें दी गई थीं, उसके अनुसार, ‘स्पिनिंग मिलों के लिए 700 करोड़ और गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स के लिए 233 करोड़ रुपए का अनिवार्य सालाना टर्नओवर, प्रति वर्ष 50 लाख यूनिफ़ॉर्म की प्रोडक्शन क्षमता, और पिछले तीन वर्षों में 105 करोड़ रुपए के समान काम का पिछला अनुभव जैसी शर्तें माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSMEs), पावरलूम यूनिट्स, बुनकरों, महिलाओं के स्वयं-सहायता समूहों और छोटे पैमाने की इंडस्ट्रीज को इस प्रक्रिया से बाहर कर देती हैं।’

    JAIMA के सेक्रेटरी अजीत मोदी ने कहा कि ये शर्तें ‘मध्य प्रदेश स्टोर परचेज एंड सर्विस प्रोक्योरमेंट रूल्स, 2023’ के खिलाफ हैं, जिन्हें MSMEs के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने और लोकल इंडस्ट्रीज को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया था। उन्होंने आरोप लगाया, ‘इसके बजाय, ये मानदंड राज्य के बाहर की कुछ बड़ी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाए गए लगते हैं।’

    इससे पहले 6 जुलाई को प्रकाशित एक रिपोर्ट में, MSME मंत्री चेतन कश्यप ने कहा था कि सेंट्रलाइज्ड प्रोक्योरमेंट सिस्टम का मकसद उद्योगपतियों और MSME व्यापारियों को सपोर्ट करना था और वे MSME व्यापारियों द्वारा उठाई गई चिंताओं पर गौर करेंगे।

    रिपोर्ट में स्वयं-सहायता समूहों के कई सदस्यों और MSME गारमेंट यूनिट मालिकों का भी जिक्र किया गया था, जिन्होंने दावा किया था कि स्वयं-सहायता समूहों से स्कूल यूनिफॉर्म बनाने का काम छीनने के सरकारी फैसले से राज्य भर में हजारों लोगों की आजीविका पर असर पड़ेगा।

    उधर कुछ दिन पहले स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने कहा था कि नया सेंट्रलाइज्ड सिस्टम यूनिफॉर्म की एक जैसी क्वालिटी और समय पर डिलीवरी सुनिश्चित करेगा। उन्होंने कहा, ‘महिलाओं को समय पर सप्लाई करने में दिक्कतें आ रही थीं और इस्तेमाल हो रहे कपड़े की क्वालिटी को लेकर भी समस्याएँ थीं।’

    मध्य प्रदेश में SHG (स्व-सहायता समूहों) की 1.4 लाख से ज्यादा महिलाओं को IIM इंदौर ने यूनिफॉर्म की सिलाई और सप्लाई के मैनेजमेंट की ट्रेनिंग दी थी। यह प्रोग्राम 2018 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुरू किया था।

  • राजस्थान: ओपन जेल में रचेगी शादी, उम्रकैद की सजा काट रहे दो बंदियों को हाई कोर्ट से मिली अनुमति

    राजस्थान: ओपन जेल में रचेगी शादी, उम्रकैद की सजा काट रहे दो बंदियों को हाई कोर्ट से मिली अनुमति


    जोधपुर। राजस्थान की जोधपुर स्थित मंडोर ओपन जेल जल्द एक अनोखे विवाह की साक्षी बनेगी। हत्या के अलग-अलग मामलों में आजीवन कारावास की सजा काट रहे दो बंदी आपसी सहमति से विवाह बंधन में बंधेंगे। राजस्थान हाई कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद जेल प्रशासन ने विवाह की तैयारियां शुरू कर दी हैं।

    जानकारी के अनुसार, नागौर निवासी मूलाराम पड़ोसी की हत्या के मामले में दोषी है और 16 जनवरी 2017 से उम्रकैद की सजा काट रहा है। वर्तमान में वह मंडोर ओपन जेल में बंद है। वहीं सीमा अपने पति की हत्या के मामले में दोषी ठहराई जा चुकी है और फिलहाल 40 दिन की पैरोल पर जेल से बाहर है।

    पुनर्वास के आधार पर मांगी गई थी अनुमति
    मूलाराम की ओर से राजस्थान हाई कोर्ट में अस्थायी सजा निलंबन की याचिका दायर की गई थी। न्यायमूर्ति पुष्पेंद्र सिंह भाटी और न्यायमूर्ति प्रवीर भटनागर की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। अदालत को बताया गया कि मूलाराम और सीमा दोनों अपनी इच्छा से विवाह करना चाहते हैं।

    मूलाराम के अधिवक्ता कालूराम भाटी ने दलील दी कि विवाह से दोनों के पुनर्वास और सामाजिक सुधार की प्रक्रिया को मजबूती मिलेगी तथा भविष्य में वे सामान्य पारिवारिक जीवन जी सकेंगे। उन्होंने बंदियों के वैवाहिक और संतानोत्पत्ति संबंधी अधिकारों से जुड़े हाई कोर्ट के एक पूर्व फैसले का भी हवाला दिया।

    सरकार ने भी नहीं जताई आपत्ति
    राज्य सरकार की ओर से अदालत में पेश रिपोर्ट में स्वीकार किया गया कि दोनों विवाह करना चाहते हैं। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि दोनों पहले लिव-इन रिलेशनशिप में रह चुके हैं। सुनवाई के दौरान लोक अभियोजकों ने कहा कि ओपन जेल के नियमों के तहत यदि दोनों विवाह करना चाहते हैं तो सरकार को इस पर कोई आपत्ति नहीं है।

    कोर्ट ने दिए विवाह संबंधी निर्देश
    खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि विवाह समाज की एक महत्वपूर्ण संस्था है और केवल दोषसिद्धि के आधार पर किसी बंदी को उसकी सहमति से विवाह करने के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।

    अदालत ने निर्देश दिया कि विवाह समारोह मंडोर ओपन जेल परिसर में ही आयोजित किया जाएगा। समारोह में दोनों पक्षों के अधिकतम 21-21 लोगों को शामिल होने की अनुमति होगी। विवाह संपन्न कराने के लिए एक पंडित भी मौजूद रहेगा। आवश्यकता पड़ने पर मेहमानों की संख्या बढ़ाने का निर्णय जेल प्रशासन ले सकेगा।

    हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि विवाह की तिथि की सूचना पहले से जेल प्रशासन को देना अनिवार्य होगा, जबकि पूरे समारोह का खर्च मूलाराम वहन करेगा। अधिवक्ता कालूराम भाटी के अनुसार, यह विवाह 22 जुलाई को आयोजित किया जा सकता है।

  • फडणवीस और शिंदे से मुलाकात के बाद तेज हुई सियासी चर्चा, शरद गुट ने NDA में शामिल होने की अटकलों को बताया निराधार

    फडणवीस और शिंदे से मुलाकात के बाद तेज हुई सियासी चर्चा, शरद गुट ने NDA में शामिल होने की अटकलों को बताया निराधार


    मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल और जितेंद्र आव्हाड ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से उनके सरकारी आवास ‘नंदनवन’ में करीब 45 मिनट तक बंद कमरे में मुलाकात की। इससे पहले जयंत पाटिल मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से भी देर रात मुलाकात कर चुके थे।

    लगातार हुई इन बैठकों के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या शरद पवार की पार्टी सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन के करीब आ रही है। हालांकि दोनों नेताओं ने इन अटकलों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि मुलाकात का राजनीतिक गठबंधन से कोई संबंध नहीं है।

    जयंत पाटिल ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि उनकी शिंदे से मुलाकात क्षेत्र के विकास कार्यों और शहरी विकास विभाग से जुड़े लंबित मामलों को लेकर थी। उन्होंने बताया कि एक नगर परिषद अध्यक्ष की अयोग्यता के खिलाफ दायर अपील पर भी चर्चा की गई।

    वहीं, जितेंद्र आव्हाड ने भी कहा कि इतने लंबे राजनीतिक अनुभव वाला कोई भी नेता यदि किसी बड़े राजनीतिक गठबंधन पर चर्चा करना चाहता है, तो वह इस तरह सार्वजनिक रूप से मुलाकात नहीं करेगा। उनके मुताबिक, इन बैठकों को लेकर लगाए जा रहे राजनीतिक कयास बेबुनियाद हैं।

    आव्हाड ने आरोप लगाया कि उनके क्षेत्र के नगर परिषद अध्यक्ष को अयोग्य ठहराने की कार्रवाई सत्तारूढ़ गठबंधन की दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है। उनका कहना है कि इस फैसले के जरिए उन्हें राजनीतिक रूप से झुकाने की कोशिश की जा रही है।

    उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल जानबूझकर ऐसी अफवाहें फैला रहे हैं ताकि जयंत पाटिल की साफ-सुथरी छवि को नुकसान पहुंचे और पार्टी अध्यक्ष शरद पवार के प्रति उनकी निष्ठा पर सवाल खड़े किए जा सकें। आव्हाड ने कहा कि वे केवल इस पूरे मामले को राज्य के शीर्ष नेतृत्व के सामने रख रहे हैं, क्योंकि इतना बड़ा प्रशासनिक फैसला मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री की जानकारी के बिना संभव नहीं हो सकता।

  • कुंभ राशि वालों के लिए अहम समय, 3 जून 2027 तक शनि की साढ़ेसाती का अंतिम चरण, इन गलतियों से रहें दूर

    कुंभ राशि वालों के लिए अहम समय, 3 जून 2027 तक शनि की साढ़ेसाती का अंतिम चरण, इन गलतियों से रहें दूर


    नई दिल्ली। कुंभ राशि के जातक इस समय शनि की साढ़ेसाती के तीसरे और अंतिम चरण से गुजर रहे हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह चरण बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इस दौरान शनि देव व्यक्ति के कर्मों के आधार पर अंतिम परिणाम देते हैं। 3 जून 2027 को शनि मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करेंगे, जिसके साथ ही कुंभ राशि के लोगों को साढ़ेसाती से पूरी तरह राहत मिलेगी।

    ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि जून 2027 तक कुंभ राशि के जातकों को अपने व्यवहार, निर्णय और जीवनशैली में विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। इस अवधि में छोटी-सी लापरवाही भी नुकसान का कारण बन सकती है।

    साढ़ेसाती का अंतिम चरण क्यों माना जाता है खास?
    मान्यता है कि साढ़ेसाती का अंतिम चरण केवल चुनौतियां ही नहीं देता, बल्कि व्यक्ति को अनुभवों के माध्यम से परिपक्व भी बनाता है। यह समय अपनी पुरानी गलतियों से सीख लेकर अनुशासित जीवन अपनाने का अवसर होता है। यदि इस दौरान संयम और जिम्मेदारी के साथ जीवन जिया जाए, तो 3 जून 2027 के बाद स्थिरता, मानसिक शांति और प्रगति के नए अवसर मिल सकते हैं।

    इन गलतियों से बचने की सलाह

    अनैतिक तरीकों से कमाई से रहें दूर
    शनि देव को न्याय का प्रतीक माना जाता है। इसलिए इस अवधि में जुआ, सट्टा, गलत तरीके से धन कमाने या किसी भी गैर-कानूनी गतिविधि से दूरी बनाए रखें। ऐसे कार्य आर्थिक और सामाजिक नुकसान का कारण बन सकते हैं।

    कमजोर और जरूरतमंद लोगों का सम्मान करें
    कर्मचारियों, मजदूरों या आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के साथ दुर्व्यवहार या उनका अधिकार छीनने से बचें। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार ऐसा व्यवहार शनि के प्रतिकूल प्रभाव को बढ़ा सकता है।

    अहंकार और कठोर वाणी से बचें
    इस दौरान स्वभाव में चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है। इसलिए बोलचाल में संयम रखें और किसी का अपमान करने या अहंकार दिखाने से बचें। ऐसा करने से रिश्तों और सामाजिक प्रतिष्ठा पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

    कर्ज और बड़े निवेश में सोच-समझकर फैसला लें
    बिना पर्याप्त विचार किए न तो किसी को बड़ी रकम उधार दें और न ही खुद भारी कर्ज लें। प्रॉपर्टी, शेयर बाजार या अन्य बड़े निवेश करने से पहले अनुभवी लोगों की सलाह लेना बेहतर रहेगा।

    स्वास्थ्य की अनदेखी न करें
    साढ़ेसाती के अंतिम चरण में मानसिक तनाव और शारीरिक थकान महसूस हो सकती है। पैरों, घुटनों और हड्डियों से जुड़ी समस्याओं को नजरअंदाज न करें। वाहन चलाते समय भी पूरी सावधानी बरतें।

    शुभ फल के लिए बताए गए उपाय
    – प्रत्येक शनिवार पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
    – नियमित रूप से हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ करें। मान्यता है कि हनुमान जी की आराधना करने वालों पर शनि देव की विशेष कृपा रहती है।
    – शनिवार के दिन काली उड़द, काले तिल या छाते का दान किसी जरूरतमंद व्यक्ति को करें।