Blog

  • दुबई में गूंजी मध्यप्रदेश की शिल्प कला, मोहन यादव ने वैश्विक निवेशकों के सामने रखा MP का मॉडल

    दुबई में गूंजी मध्यप्रदेश की शिल्प कला, मोहन यादव ने वैश्विक निवेशकों के सामने रखा MP का मॉडल


    भोपाल।
    मध्यप्रदेश को वैश्विक निवेश और व्यापार के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल संयुक्त अरब अमीरात के दुबई पहुंचा है। चार दिवसीय दौरे के पहले दिन निवेश, व्यापार और औद्योगिक साझेदारी के साथ मध्यप्रदेश की पारंपरिक शिल्प एवं हथकरघा कला को भी अंतरराष्ट्रीय मंच मिला।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दुबई के ताज होटल, बिजनेस बे में आयोजित वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) और जीआई उत्पाद प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। प्रदर्शनी में मध्यप्रदेश की पारंपरिक कला, हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों को वैश्विक समुदाय के सामने पेश किया गया।

    छह विरासत उत्पादों ने खींचा ध्यान

    प्रदर्शनी में मध्यप्रदेश के छह प्रमुख उत्पाद प्रदर्शित किए गए। इनमें बैतूल का बेल मेटल क्राफ्ट, अशोकनगर की चंदेरी साड़ी, खरगोन के महेश्वर की महेश्वरी साड़ी, उज्जैन का बाटिक प्रिंट, भोपाल की जरी-जरदोजी और ग्वालियर कारपेट शामिल हैं।

    इन उत्पादों के जरिए राज्य की सांस्कृतिक विविधता और पारंपरिक कारीगरों के हुनर को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य विदेशी खरीदारों तक इन उत्पादों की पहुंच बढ़ाने और स्थानीय कारीगरों के लिए नए कारोबारी अवसर तैयार करना है।

    प्रवासी भारतीयों ने किया मुख्यमंत्री का स्वागत

    दुबई पहुंचने पर भारतीय मिशन के अधिकारियों ने मध्यप्रदेश के प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया। इसके बाद होटल फॉर्च्यून एट्रियम में यूएई में रहने वाले प्रवासी भारतीयों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात की। जितेंद्र वैद्य के नेतृत्व में करीब 50 प्रवासी भारतीय इस कार्यक्रम में शामिल हुए।

    मुख्यमंत्री ने प्रवासी भारतीय समुदाय को मध्यप्रदेश के विकास और राज्य की वैश्विक ब्रांडिंग का महत्वपूर्ण साझेदार बताया।

    भारतीय राजनयिकों के साथ निवेश पर चर्चा

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यूएई में भारत के राजदूत डॉ. दीपक मित्तल और दुबई एवं नॉर्थ अमीरात में भारत के महावाणिज्य दूत डॉ. ई. विष्णु वर्धन रेड्डी के साथ भी बैठक की। इसमें मध्यप्रदेश में निवेश आकर्षित करने और भारत-यूएई आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

    बैठक में राज्य की औद्योगिक भूमि, कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक्स, निवेशक-अनुकूल नीतियों और औद्योगिक अधोसंरचना को प्रमुखता से रखा गया। मुख्यमंत्री ने यूएई के सॉवरेन वेल्थ फंड, बड़े कॉरपोरेट समूहों और संस्थागत निवेशकों के साथ संपर्क बढ़ाने में भारतीय मिशन से सहयोग का आग्रह किया। साथ ही उन्हें ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2027 में भाग लेने का न्योता दिया।

    अरब संसद के अध्यक्ष से भी हुई मुलाकात

    दौरे के दौरान अरब संसद के अध्यक्ष मोहम्मद अहमद अल यामाही के सम्मान में आयोजित विशेष भोज में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हिस्सा लिया। इस दौरान मध्यप्रदेश और अरब देशों के बीच व्यापार, निवेश, कृषि, पर्यटन तथा शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर बातचीत हुई।

    मुख्यमंत्री ने अरब निवेशकों को मध्यप्रदेश में नवकरणीय ऊर्जा, फार्मा, मेडिकल डिवाइस, टेक्सटाइल, लॉजिस्टिक्स, उन्नत विनिर्माण और शहरी अधोसंरचना से जुड़े निवेश अवसरों की जानकारी दी।

    खाद्य प्रसंस्करण, कृषि मूल्य श्रृंखला, कोल्ड चेन और कृषि लॉजिस्टिक्स को लेकर भी संभावित साझेदारी पर चर्चा हुई।

    22 देशों के संसदीय नेताओं को GIS-2027 का न्योता

    ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2027 के लिए मध्य पूर्व और अफ्रीका के कई देशों के संसदीय नेताओं को आमंत्रित करने की पहल भी की गई। इनमें अल्जीरिया, बहरीन, कोमोरोस, जिबूती, मिस्र, इराक, जॉर्डन, कुवैत, लेबनान, लीबिया, मॉरिटानिया, मोरक्को, ओमान, फिलिस्तीन, कतर, सऊदी अरब, सोमालिया, सूडान, सीरिया, ट्यूनीशिया, यूएई और यमन शामिल हैं।

    इस पहल का उद्देश्य निवेश, उद्योग, व्यापार, अवसंरचना, नवाचार और आर्थिक सहयोग के लिए मध्यप्रदेश के साथ इन देशों के रिश्तों को और मजबूत करना है।

    वैश्विक मीडिया के सामने रखा निवेश का रोडमैप

    मुख्यमंत्री ने मीडिया संवाद के दौरान मध्यप्रदेश की औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स क्षमता के साथ पर्यटन एवं अवसंरचना क्षेत्र की संभावनाओं को भी सामने रखा। उन्होंने कहा कि राज्य का लक्ष्य केवल निवेश हासिल करना नहीं, बल्कि निवेशकों के साथ लंबे समय की विकास साझेदारी स्थापित करना है।

    उन्होंने सिंगल विंडो सिस्टम, तेज स्वीकृति प्रक्रिया, प्रगतिशील औद्योगिक नीतियों और रणनीतिक भौगोलिक स्थिति को मध्यप्रदेश की प्रमुख ताकत बताया।

    AIM कांग्रेस के ‘टाइकून्स डिनर’ में वैश्विक निवेशकों से संवाद

    दुबई दौरे के पहले दिन का समापन AIM कांग्रेस 2026 के ‘टाइकून्स रात्रि भोज’ में मुख्यमंत्री की भागीदारी के साथ हुआ। कार्यक्रम की मेजबानी AIM कांग्रेस के अध्यक्ष डॉ. थानी बिन अहमद अल ज़ेयूदी ने की।

    इस हाई-प्रोफाइल कार्यक्रम में सॉवरेन वेल्थ फंड, फैमिली ऑफिस, संस्थागत निवेशकों, वित्तीय संस्थानों, वैश्विक कंपनियों और विभिन्न देशों के नीति-निर्माताओं ने हिस्सा लिया।

    मुख्यमंत्री ने इस दौरान वैश्विक निवेशकों और नीति-निर्माताओं के साथ मध्यप्रदेश की निवेश संभावनाओं पर चर्चा की। उन्होंने विनिर्माण, खाद्य प्रसंस्करण, नवीकरणीय ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, शहरी अधोसंरचना, टेक्नोलॉजी और निर्यात आधारित उद्योगों में निवेश के अवसरों को रेखांकित किया।

    दुबई दौरे के पहले ही दिन मध्यप्रदेश ने एक तरफ अपनी पारंपरिक शिल्प विरासत को वैश्विक बाजार के सामने रखा, वहीं दूसरी ओर निवेशकों और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ आर्थिक साझेदारी का रोडमैप भी पेश किया। अब नजर इस बात पर रहेगी कि इन बैठकों और संवादों से मध्यप्रदेश में निवेश के कितने नए रास्ते खुलते हैं।

  • रूखे और फ्रिजी बालों को मुलायम बनाने के लिए घर पर बनाएं ये 5 आसान हेयर मास्क, जानिए इस्तेमाल का तरीका

    रूखे और फ्रिजी बालों को मुलायम बनाने के लिए घर पर बनाएं ये 5 आसान हेयर मास्क, जानिए इस्तेमाल का तरीका

    नई दिल्ली । रूखे, बेजान और उलझे बाल अक्सर पूरे लुक को प्रभावित करते हैं। धूल मिट्टी, प्रदूषण, बार बार शैंपू करना, गर्म पानी, हीट स्टाइलिंग और बालों में नमी की कमी जैसी वजहों से बालों की प्राकृतिक चमक कम हो सकती है। ऐसे में बालों को मुलायम बनाए रखने के लिए नियमित देखभाल जरूरी है। इसके लिए हर बार महंगे हेयर ट्रीटमेंट कराने की जरूरत नहीं होती। घर में मौजूद कुछ सामान्य चीजों से भी आसान हेयर मास्क तैयार किए जा सकते हैं।

    बालों की जरूरत हर व्यक्ति में अलग होती है। किसी के बाल बहुत ज्यादा रूखे हो सकते हैं तो किसी का स्कैल्प तैलीय हो सकता है। इसलिए कोई भी घरेलू हेयर मास्क इस्तेमाल करने से पहले अपनी हेयर टाइप और संवेदनशीलता को ध्यान में रखना चाहिए। अगर किसी सामग्री से पहले एलर्जी या जलन हुई है तो उसका इस्तेमाल करने से बचना बेहतर है।

    एलोवेरा और दही का मास्क रूखे बालों के लिए एक आसान विकल्प हो सकता है। इसे तैयार करने के लिए दो चम्मच एलोवेरा जेल और दो चम्मच सादा दही मिलाकर चिकना पेस्ट बना लें। इस मिश्रण को बालों की लंबाई पर लगाएं और करीब 20 मिनट के लिए छोड़ दें। इसके बाद पानी से बाल धोकर जरूरत के अनुसार हल्का शैंपू किया जा सकता है। यह मास्क बालों को कंडीशनिंग देने और मुलायम महसूस कराने में मदद कर सकता है।

    केला और शहद भी बालों की देखभाल में इस्तेमाल किए जा सकते हैं। एक पके केले को अच्छी तरह मैश करके उसमें एक चम्मच शहद मिलाएं। तैयार मिश्रण को बालों की लंबाई पर लगाकर करीब 15 से 20 मिनट तक रहने दें। इसके बाद बालों को अच्छी तरह धो लें। केला बालों को कंडीशनिंग देने में मदद कर सकता है, जबकि शहद नमी बनाए रखने में सहायक माना जाता है।

    नारियल तेल और एलोवेरा का मास्क भी रूखे बालों के लिए उपयोगी विकल्प हो सकता है। थोड़ी मात्रा में नारियल तेल लेकर उसमें एलोवेरा जेल मिलाएं और इसे बालों की लंबाई तथा खासकर सूखे सिरों पर लगाएं। करीब 20 से 30 मिनट बाद बाल धो लें। ऑयली स्कैल्प वाले लोग इस मिश्रण को मुख्य रूप से बालों की लंबाई तक सीमित रख सकते हैं। ज्यादा तेल लगाने से बाल भारी या चिपचिपे महसूस हो सकते हैं।

    अंडे और दही से भी एक साधारण हेयर मास्क तैयार किया जा सकता है। एक अंडे को अच्छी तरह फेंटकर उसमें दो चम्मच सादा दही मिलाएं। इसे बालों की लंबाई पर लगाकर लगभग 15 मिनट के लिए छोड़ दें। इसके बाद ठंडे या सामान्य तापमान के पानी से बालों को अच्छी तरह साफ करें और हल्के शैंपू का इस्तेमाल करें। अंडे में प्रोटीन होता है और दही कंडीशनिंग में मदद कर सकता है। अंडे से एलर्जी या संवेदनशीलता होने पर इसे इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

    ओट्स और दही का मास्क भी कम सामग्री वाला विकल्प है। दो चम्मच बारीक पिसे ओट्स में दो चम्मच दही मिलाकर गाढ़ा पेस्ट बनाएं। इसे बालों की लंबाई पर लगाएं और 15 से 20 मिनट बाद धो लें। इस मिश्रण को स्कैल्प पर जोर से रगड़ने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे जलन या रूखापन बढ़ सकता है।

    इन घरेलू उपायों का असर हर व्यक्ति में अलग हो सकता है। किसी भी मास्क को पहली बार इस्तेमाल करने से पहले त्वचा के छोटे हिस्से पर पैच टेस्ट करना उपयोगी हो सकता है। बालों को स्वस्थ रखने के लिए पर्याप्त पोषण, संतुलित खानपान, नियमित सफाई और अत्यधिक हीट स्टाइलिंग से बचना भी जरूरी है। अगर बाल लगातार टूट रहे हों, बहुत ज्यादा झड़ रहे हों या स्कैल्प में खुजली और जलन बनी रहे तो विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर रहेगा।

  • दूध खरीदने से पहले ऐसे पहचानें संभावित मिलावट, बुलबुले और झाग देखकर शुरुआती जांच करने का तरीका जानिए

    दूध खरीदने से पहले ऐसे पहचानें संभावित मिलावट, बुलबुले और झाग देखकर शुरुआती जांच करने का तरीका जानिए

    नई दिल्ली । दूध भारतीय खानपान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक बड़ी संख्या में लोग रोजाना दूध या उससे बने उत्पादों का सेवन करते हैं। दूध को कैल्शियम और प्रोटीन जैसे पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत माना जाता है, लेकिन बाजार में मिलावट की चिंता के कारण इसकी गुणवत्ता को लेकर सावधानी बरतना भी जरूरी है। पानी के अलावा कुछ मामलों में दूध में डिटर्जेंट जैसे पदार्थ मिलाए जाने की आशंका भी सामने आती रही है।

    दूध में मिलावट होने पर उसकी बनावट, स्वाद और झाग बनने के तरीके में अंतर दिखाई दे सकता है। हालांकि केवल देखने या स्वाद से किसी दूध को मिलावटी घोषित करना सही नहीं है। इसी वजह से खाद्य सुरक्षा से जुड़ी संस्था ने दूध में डिटर्जेंट की संभावित मौजूदगी का शुरुआती संकेत पाने के लिए एक आसान घरेलू तरीका बताया है। इस जांच के लिए किसी महंगे उपकरण की आवश्यकता नहीं होती।

    घरेलू स्तर पर जांच करने के लिए सबसे पहले एक साफ छोटे गिलास में करीब 5 से 10 मिलीलीटर दूध लें। इसके बाद गिलास में मौजूद दूध को अच्छी तरह और तेजी से हिलाएं। कुछ देर तक दूध को हिलाने के बाद उसके ऊपर बनने वाले झाग और बुलबुलों को ध्यान से देखें। इस प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि झाग कितनी मात्रा में बन रहा है और कितनी देर तक बना रहता है।

    यदि दूध को हिलाने के बाद थोड़े बुलबुले बनते हैं और वे जल्दी खत्म हो जाते हैं तो इसे सामान्य स्थिति का संकेत माना जा सकता है। दूसरी ओर, यदि दूध को हिलाने पर काफी मात्रा में झाग बनता है और वह लंबे समय तक बना रहता है तो डिटर्जेंट या किसी अन्य सर्फैक्टेंट की मौजूदगी की आशंका हो सकती है। ऐसे पदार्थ दूध में झाग को ज्यादा स्थिर बना सकते हैं।

    इसका कारण दूध और डिटर्जेंट के रासायनिक गुणों में अंतर है। सामान्य दूध को हिलाने पर हवा के छोटे बुलबुले बन सकते हैं, लेकिन वे अपेक्षाकृत जल्दी टूट जाते हैं। डिटर्जेंट में मौजूद सर्फैक्टेंट सतही तनाव को कम कर सकते हैं। इसके कारण बुलबुलों के आसपास एक स्थिर परत बन सकती है और झाग अपेक्षाकृत अधिक समय तक दिखाई दे सकता है।

    फिर भी इस घरेलू तरीके को अंतिम या प्रमाणित मिलावट जांच नहीं माना जाना चाहिए। दूध को हिलाने पर झाग बनने की मात्रा कई अन्य परिस्थितियों से भी प्रभावित हो सकती है। इसलिए यदि इस परीक्षण के बाद दूध की गुणवत्ता को लेकर संदेह बना रहता है तो उसे प्रयोगशाला जांच के लिए भेजना अधिक भरोसेमंद तरीका है। घरेलू परीक्षण को केवल शुरुआती संकेत के रूप में देखना चाहिए।

    दूध खरीदते समय भी कुछ सावधानियां बरतकर मिलावट या खराब गुणवत्ता वाले उत्पाद से बचने की कोशिश की जा सकती है। पैकेट वाला दूध खरीदते समय पैकिंग की सील, लेबल, निर्माण और उपयोग की तारीख तथा अन्य जरूरी जानकारी जरूर देखें। पैकेट फटा हुआ हो, सील से छेड़छाड़ दिखाई दे या पैकिंग असामान्य लगे तो उसे खरीदने से बचना बेहतर है।

    दूध को खरीदने के बाद निर्धारित तापमान पर रखना भी जरूरी है। पैकेट पर दिए गए भंडारण संबंधी निर्देशों का पालन करें और उपयोग से पहले उसकी स्थिति जांच लें। भरोसेमंद विक्रेता या निर्धारित मानकों का पालन करने वाले उत्पाद को प्राथमिकता देना भी सुरक्षित विकल्प हो सकता है। दूध की शुद्धता को लेकर गंभीर संदेह होने पर घरेलू जांच पर निर्भर रहने के बजाय प्रमाणित खाद्य जांच सुविधा से परीक्षण कराना सबसे उचित तरीका है।

  • यूरोप के डीजल बाजार में भारत की पकड़ मजबूत, बाब-अल-मंदेब मार्ग से अगस्त में 60 प्रतिशत कार्गो भारतीय रिफाइनरियों से

    यूरोप के डीजल बाजार में भारत की पकड़ मजबूत, बाब-अल-मंदेब मार्ग से अगस्त में 60 प्रतिशत कार्गो भारतीय रिफाइनरियों से


    नई दिल्ली ।
    वैश्विक ऊर्जा व्यापार में भारत की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है। रूस से डीजल आपूर्ति में आई बड़ी गिरावट और अमेरिका से निर्यात कमजोर पड़ने के बीच भारतीय रिफाइनरियां यूरोप की ईंधन जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता बनकर उभरी हैं। ऊर्जा बाजार से जुड़े आंकड़ों के अनुसार अगस्त 2026 में बाब-अल-मंदेब समुद्री मार्ग से यूरोप पहुंचने वाले डीजल कार्गो का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा भारत की रिफाइनरियों से आया।

    अगस्त के दौरान यूरोप की ओर जाने वाले करीब दो लाख बैरल प्रतिदिन डीजल और गैसऑयल कार्गो ने बाब-अल-मंदेब मार्ग का इस्तेमाल किया। यह मात्रा पिछले वर्ष के आसपास ही रही। हालांकि इसी रणनीतिक समुद्री मार्ग पर मार्च और अप्रैल 2026 में आवाजाही लगभग ठप हो गई थी। ऐसे समय में भारतीय रिफाइनरियों ने यूरोप की पूर्वी ईंधन आपूर्ति शृंखला में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और वैकल्पिक स्रोत की जरूरत को पूरा करने में योगदान दिया।

    भारत की बढ़ती भूमिका का प्रमुख आधार उसका विशाल रिफाइनिंग नेटवर्क है। देश में वर्तमान में करीब 258.1 मिलियन टन सालाना की स्थापित तेल शोधन क्षमता है। इस क्षमता के मामले में भारत दुनिया के प्रमुख रिफाइनिंग केंद्रों में शामिल है। देश की रिफाइनिंग क्षमता घरेलू ईंधन मांग से अधिक होने के कारण भारतीय कंपनियों के पास पेट्रोलियम उत्पादों के बड़े पैमाने पर निर्यात की पर्याप्त गुंजाइश रहती है।

    वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत ने करीब 6.15 करोड़ टन पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात किया। इससे वैश्विक परिष्कृत ईंधन बाजार में भारत की स्थिति और मजबूत हुई है। यूरोप में डीजल की मांग के बीच प्रतिबंधों, रिफाइनरी व्यवधानों और व्यापार मार्गों में बदलाव ने वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं की जरूरत बढ़ाई है। भारतीय रिफाइनरियों को इसका सीधा लाभ मिल रहा है।

    हालांकि यूरोपीय बाजार में भारत की बढ़ती हिस्सेदारी के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं। सबसे बड़ी चिंता देश को मिलने वाले कच्चे तेल की उपलब्धता को लेकर है। अगस्त में भारत को मिलने वाले कच्चे तेल और कंडेनसेट की आपूर्ति लगातार दूसरे महीने घटकर करीब 38 लाख बैरल प्रतिदिन रह गई। एक साल पहले यह मात्रा लगभग 48 लाख बैरल प्रतिदिन थी। कच्चे तेल की उपलब्धता घटने पर निर्यात के लिए तैयार किए जाने वाले पेट्रोलियम उत्पादों पर भी असर पड़ सकता है।

    दूसरी ओर रूस से यूरोप जाने वाले डीजल और गैसऑयल निर्यात में भारी गिरावट आई है। अगस्त के शुरुआती 25 दिनों में रूस का समुद्री ईंधन निर्यात औसतन करीब 1.5 लाख बैरल प्रतिदिन रहा। यह पिछले वर्ष के स्तर से लगभग 6.1 लाख बैरल प्रतिदिन कम है। रूस की रिफाइनिंग और निर्यात क्षमता पर ऊर्जा अवसंरचना को निशाना बनाकर किए गए हमलों का भी असर पड़ा है।

    रूस की ओर से सितंबर की शुरुआत से डीजल निर्यात संबंधी कुछ प्रतिबंधों में राहत दिए जाने के बावजूद यूरोप को तत्काल बड़ी मात्रा में अतिरिक्त रूसी आपूर्ति मिलने की संभावना सीमित मानी जा रही है। ऐसे में यदि रूसी आपूर्ति लंबे समय तक प्रभावित रहती है और यूरोप में डीजल की मांग मजबूत बनी रहती है तो भारतीय रिफाइनरियों के लिए निर्यात के अवसर और बढ़ सकते हैं।

    हालांकि भारत के सामने कच्चे तेल की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने और प्रतिस्पर्धी रिफाइनिंग मार्जिन कायम रखने की चुनौती होगी। यदि दोनों परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं तो यूरोप के ईंधन बाजार में भारतीय कंपनियों की हिस्सेदारी बढ़ सकती है। यह बदलाव भारत की उस बदलती भूमिका को भी दर्शाता है जिसमें देश केवल बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति शृंखला का महत्वपूर्ण केंद्र बनता जा रहा है।

  • सेंसेक्स और निफ्टी के लिए अगले सप्ताह अहम रहेंगे ये स्तर, जानिए सपोर्ट रेजिस्टेंस और बाजार की संभावित दिशा

    सेंसेक्स और निफ्टी के लिए अगले सप्ताह अहम रहेंगे ये स्तर, जानिए सपोर्ट रेजिस्टेंस और बाजार की संभावित दिशा

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार के लिए आने वाला सप्ताह उतार चढ़ाव वाला और सतर्क कारोबार का रह सकता है। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, पश्चिम एशिया में बढ़ता भू राजनीतिक तनाव, वैश्विक ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों की बिकवाली बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक होंगे। ऐसे माहौल में निवेशकों की नजर सेंसेक्स और निफ्टी के महत्वपूर्ण तकनीकी स्तरों पर रहेगी।

    पिछले सप्ताह घरेलू शेयर बाजार दबाव में रहा, हालांकि सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन दोनों प्रमुख सूचकांकों ने गिरावट का सिलसिला तोड़ते हुए बढ़त दर्ज की। शुक्रवार को सेंसेक्स 362.57 अंक यानी 0.48 प्रतिशत की मजबूती के साथ 76,515.43 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 24.25 अंक यानी 0.10 प्रतिशत बढ़कर 23,897.70 के स्तर पर पहुंचा। कारोबार के दौरान निफ्टी ने 24,000 का स्तर पार किया, लेकिन अंतिम चरण में इसकी ज्यादातर बढ़त कम हो गई।

    तकनीकी संकेतों के लिहाज से सेंसेक्स के लिए 77,000 से 77,500 का क्षेत्र शुरुआती रेजिस्टेंस माना जा रहा है। इसके ऊपर 77,700 से 78,000 का दायरा महत्वपूर्ण बाधा बन सकता है। यदि सूचकांक 78,000 के ऊपर मजबूती से टिकने में कामयाब रहता है तो बाजार में तेजी का नया दौर देखने को मिल सकता है। ऐसी स्थिति में सेंसेक्स 78,500 से 78,800 की दिशा में आगे बढ़ने की कोशिश कर सकता है।

    हालांकि मौजूदा परिस्थितियों में सेंसेक्स अभी सुधार और समेकन के दौर में दिखाई दे रहा है। यदि ऊपरी स्तरों पर खरीदारी का समर्थन कमजोर रहता है तो मुनाफावसूली बढ़ सकती है। इससे सूचकांक सीमित दायरे में रह सकता है और निवेशकों को हर तेजी के दौरान सावधानी बरतने की जरूरत होगी।

    निफ्टी के लिए 23,800 का स्तर सबसे महत्वपूर्ण सपोर्ट के तौर पर देखा जा रहा है। इस स्तर के ऊपर टिके रहना बाजार की मजबूती के लिए अहम होगा। यदि निफ्टी लगातार 23,800 के नीचे बंद होता है तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है और सूचकांक 23,600 के आसपास पहुंच सकता है। इसके विपरीत ऊपर की ओर 24,000 से 24,200 का क्षेत्र प्रमुख रेजिस्टेंस रहेगा।

    विशेषज्ञों के मुताबिक जब तक निफ्टी 24,000 से 24,200 के दायरे को निर्णायक रूप से पार नहीं करता, तब तक बाजार में पूरी तरह मजबूत तेजी की पुष्टि नहीं मानी जा सकती। इस दौरान निवेशक ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली कर सकते हैं और कारोबार में उतार चढ़ाव बना रह सकता है।

    बाजार की धारणा पर कच्चे तेल की कीमतों का असर भी महत्वपूर्ण रहेगा। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिका तथा ईरान के बीच जारी टकराव से ऊर्जा बाजार में आपूर्ति को लेकर चिंता बनी हुई है। होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति को लेकर किसी भी तरह की बाधा की आशंका कच्चे तेल की कीमतों को और प्रभावित कर सकती है। ऊंची तेल कीमतें भारत के लिए महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ा सकती हैं।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली भी घरेलू बाजार के लिए चुनौती बनी हुई है। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी बाजार को सहारा दे रही है और बड़ी गिरावट को सीमित करने में मदद कर रही है। आने वाले सप्ताह में निवेशकों की नजर विदेशी निवेश प्रवाह, रुपये की चाल, अमेरिकी ब्याज दरों के संकेत और वैश्विक बॉन्ड यील्ड पर भी रहेगी।

    यदि वैश्विक परिस्थितियों में सुधार आता है और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी होती है तो भारतीय बाजार को राहत मिल सकती है। इसके विपरीत नकारात्मक वैश्विक संकेतों से निफ्टी के 23,800 और सेंसेक्स के 76,000 के आसपास के स्तरों की मजबूती की परीक्षा हो सकती है। ऐसे में अगले सप्ताह बाजार की दिशा तय करने में तकनीकी स्तरों के साथ वैश्विक घटनाक्रम की भूमिका अहम रहने की संभावना है।

  • क्योंकि सास भी कभी बहू थी के 1833 एपिसोड ने बनाया इतिहास, तुलसी-मिहिर की जोड़ी आज भी दर्शकों को याद

    क्योंकि सास भी कभी बहू थी के 1833 एपिसोड ने बनाया इतिहास, तुलसी-मिहिर की जोड़ी आज भी दर्शकों को याद

    नई दिल्ली । टीवी धारावाहिकों की दुनिया में कुछ कहानियां ऐसी होती हैं, जो प्रसारण खत्म होने के वर्षों बाद भी दर्शकों की यादों में बनी रहती हैं। ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ भी ऐसा ही धारावाहिक रहा, जिसने पारिवारिक रिश्तों और बदलते सामाजिक परिवेश को टेलीविजन पर लंबे समय तक प्रमुखता से पेश किया। एकता कपूर के निर्माण में तैयार यह शो साल 2000 में शुरू हुआ था और करीब आठ वर्षों तक दर्शकों के बीच लोकप्रिय बना रहा।

    3 जुलाई 2000 को शुरू हुए इस धारावाहिक का प्रसारण 6 नवंबर 2008 तक चला। इस दौरान शो के कुल 1833 एपिसोड प्रसारित हुए। इतनी लंबी अवधि तक लगातार दर्शकों से जुड़े रहना इसकी लोकप्रियता का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। कहानी का केंद्र विरानी परिवार और उनका घर शांति निकेतन था, जहां परिवार के सदस्यों के रिश्तों, परंपराओं, मतभेदों और बदलते समय के साथ आने वाले बदलावों को कहानी का हिस्सा बनाया गया।

    धारावाहिक में स्मृति ईरानी ने तुलसी विरानी का किरदार निभाया था, जबकि अमर उपाध्याय मिहिर विरानी की भूमिका में नजर आए थे। तुलसी के किरदार ने स्मृति ईरानी को टेलीविजन की दुनिया में अलग पहचान दिलाई। दर्शकों के बीच उनका नाम लंबे समय तक तुलसी के किरदार के साथ जुड़ा रहा। वहीं मिहिर के रूप में अमर उपाध्याय भी खासे लोकप्रिय हुए। दोनों की जोड़ी छोटे पर्दे की चर्चित जोड़ियों में शामिल हुई।

    शो की एक बड़ी खासियत इसका टाइटल सॉन्ग भी था। धारावाहिक के शीर्षक गीत ने अपनी धुन, बोल और प्रस्तुति के जरिए दर्शकों के बीच खास जगह बनाई। इसे प्रिय भट्टाचार्य ने अपनी आवाज दी थी। गीत के बोल नवाब आरजू ने लिखे थे और संगीत ललित सेन ने तैयार किया था। समय बीतने के बावजूद यह टाइटल सॉन्ग धारावाहिक की पहचान के तौर पर याद किया जाता है।

    कहानी में सास-बहू के रिश्ते के साथ परिवार की कई पीढ़ियों के बीच बदलते संबंधों को भी दिखाया गया। समय के साथ नए किरदार कहानी में शामिल होते गए और परिवार के भीतर रिश्तों के समीकरण बदलते रहे। तुलसी का परिवार के प्रति समर्पण, जिम्मेदारियों के बीच संघर्ष और रिश्तों को संभालने की कोशिश कहानी के महत्वपूर्ण हिस्सों में शामिल रहे।

    धारावाहिक की लोकप्रियता का असर इसके कलाकारों और किरदारों की पहचान पर भी दिखाई दिया। तुलसी और मिहिर की जोड़ी दर्शकों के बीच इतनी चर्चित हुई कि दोनों किरदार लंबे समय तक टीवी संस्कृति का हिस्सा बने रहे। शांति निकेतन भी शो की कहानी के साथ दर्शकों की स्मृतियों में अपनी जगह बनाने में सफल रहा।

    इस धारावाहिक की लोकप्रियता को बाद के वर्षों में भी आगे बढ़ाने की कोशिश हुई। 25 साल पूरे होने के मौके पर इसका दूसरा सीजन शुरू किया गया, जिसमें स्मृति ईरानी फिर तुलसी विरानी के किरदार में लौटीं और अमर उपाध्याय ने मिहिर की भूमिका निभाई। नया सीजन 29 जुलाई 2025 को शुरू हुआ। पुराने किरदारों और नई पीढ़ी की कहानी के मेल ने इस लोकप्रिय धारावाहिक की पुरानी यादों को फिर से दर्शकों के सामने ला दिया।

  • इंडियाज गॉट लैटेंट 2 में समय रैना ने मेधा शंकर को बताया अपना सबसे अच्छा दोस्त, डेटिंग रूमर्स फिर चर्चा में

    इंडियाज गॉट लैटेंट 2 में समय रैना ने मेधा शंकर को बताया अपना सबसे अच्छा दोस्त, डेटिंग रूमर्स फिर चर्चा में

    नई दिल्ली । कॉमेडियन समय रैना और अभिनेत्री मेधा शंकर को लेकर पिछले कुछ समय से डेटिंग की चर्चाएं सोशल मीडिया पर बनी हुई हैं। दोनों को अलग-अलग मौकों पर साथ देखे जाने के बाद उनके रिश्ते को लेकर कयास लगाए गए, लेकिन दोनों की ओर से अब तक डेटिंग को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इसी बीच इंडियाज गॉट लैटेंट 2 के एक एपिसोड में समय ने मेधा को अपना सबसे अच्छा दोस्त बताया, जिसके बाद दोनों को लेकर चर्चा एक बार फिर तेज हो गई।

    मेधा शंकर इस एपिसोड में पैनल का हिस्सा बनी थीं। उनके साथ वरुण धवन, निशांत तंवर और शेरोन वर्मा भी नजर आए। कार्यक्रम के दौरान जादूगर कबीर शर्मा ने एक मैजिक ट्रिक पेश की। उन्होंने समय रैना का मोबाइल फोन लेकर उसे तीन लिफाफों में से एक में रखा। इसके बाद ट्रिक के दौरान गलत विकल्पों वाले लिफाफों को हथौड़े से तोड़ा जा रहा था।

    इसी दौरान कबीर शर्मा ने समय से पैनल में मौजूद उनके सबसे अच्छे दोस्त के बारे में पूछा। समय ने बिना ज्यादा सोच-विचार के मेधा शंकर का नाम लिया। इसके बाद मेधा को लिफाफों में से एक चुनने के लिए कहा गया। इस घटनाक्रम ने शो में मौजूद लोगों का ध्यान खींचा और दोनों के बीच दोस्ती को लेकर बातचीत का माहौल बना।

    इसके बाद एक अन्य मैजिक ट्रिक के दौरान भी समय ने मेधा को गिफ्ट पाने के लिए चुना। उनके सामने कार, मैकबुक, एक हजार डॉलर और आईफोन जैसे विकल्प रखे गए थे। हालांकि ट्रिक के अंत में मेधा को इनमें से कोई सामान नहीं मिला, बल्कि जादूगर की तरफ से उन्हें गले लगाया गया। इस पर समय और वरुण धवन की प्रतिक्रिया भी देखने लायक रही।

    समय ने मजाक करते हुए कहा कि गिफ्ट उनके लिए था, लेकिन उन्हें सबसे खराब चीज मिली। वहीं मेधा ने जादूगर के इस हग को अच्छा बताया। शो के इस हल्के-फुल्के हिस्से में समय और मेधा की बातचीत ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया।

    दोनों के डेटिंग रूमर्स की बात करें तो इस साल जून से उनके साथ देखे जाने की चर्चाएं बढ़ी थीं। इसके बाद जुलाई में भी दोनों के एक साथ नजर आने की खबरें सामने आईं। हाल में एयरपोर्ट पर साथ दिखाई देने के बाद सोशल मीडिया पर उनके रिश्ते को लेकर फिर से अटकलें लगाई गईं। हालांकि, सार्वजनिक रूप से दोनों ने अपने संबंध को लेकर कोई पुष्टि नहीं की है।

    ऐसे में समय का मेधा को सबसे अच्छा दोस्त कहना उनकी करीबी दोस्ती का संकेत जरूर देता है, लेकिन इसे उनके रिश्ते की आधिकारिक पुष्टि नहीं माना जा सकता। फिलहाल दोनों के बीच संबंधों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है और सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाएं मुख्य रूप से उनके साथ नजर आने और कार्यक्रम में हुई बातचीत पर आधारित हैं।

    एपिसोड में समय ने वरुण धवन के साथ भी मजाक किया। उन्होंने वरुण को पैनल में सबसे स्मार्ट बताते हुए इसकी वजह उनका स्टूडेंट ऑफ द ईयर होना बताई। इसके अलावा उन्होंने वरुण की फिल्म बॉर्डर 2 को लेकर भी मजाकिया अंदाज में टिप्पणी की।

    इंडियाज गॉट लैटेंट पहले भी विवादों के कारण चर्चा में रह चुका है। पिछले साल रणवीर इलाहाबादिया, अपूर्वा मखीजा, आशीष चंचलानी और जसप्रीत सिंह से जुड़े एपिसोड पर आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर विवाद हुआ था। इसके बाद कानूनी कार्रवाई हुई और कार्यक्रम को यूट्यूब से हटा दिया गया था। अब इसका दूसरा सीजन नेटफ्लिक्स पर प्रसारित हो रहा है।

  • इंडियाज गॉट लैटेंट 2 में अहमदाबाद विमान हादसे पर मजाक को समय रैना ने रोका, कंटेस्टेंट को दिया दूसरा जवाब

    इंडियाज गॉट लैटेंट 2 में अहमदाबाद विमान हादसे पर मजाक को समय रैना ने रोका, कंटेस्टेंट को दिया दूसरा जवाब


    नई दिल्ली । 
    कॉमेडियन समय रैना का चर्चित शो इंडियाज गॉट लैटेंट 2 इन दिनों दर्शकों के बीच चर्चा में है। शो के नए एपिसोड में वरुण धवन, मेधा शंकर, निशांत तंवर और शेरोन वर्मा पैनल में नजर आए। इस दौरान अहमदाबाद से आए कंटेस्टेंट विजय पोरिया ने फ्लाइट को लेकर एक मजाक शुरू किया, लेकिन उनकी बात जैसे ही पिछले साल हुए अहमदाबाद विमान हादसे की तरफ बढ़ती दिखाई दी, समय रैना ने उन्हें बीच में ही रोक दिया।

    एपिसोड में समय रैना ने विजय से सवाल किया कि उन्हें फ्लाइट से इतना डर क्यों लगता है। उन्होंने मजाकिया अंदाज में यह भी पूछा कि क्या फ्लाइट बहुत महंगी होती हैं। इसके जवाब में विजय ने बताया कि वह अहमदाबाद से हैं। इसके बाद उन्होंने करीब एक साल पहले हुई घटना का जिक्र करते हुए अपनी बात आगे बढ़ाने की कोशिश की।

    विजय ने बताया कि वह छत पर बैठे थे, तभी उनके दोस्त का फोन आया और उसने उनसे अपने बाएं तरफ देखने को कहा। कंटेस्टेंट की बात आगे बढ़ती, उससे पहले ही समय रैना ने उन्हें रोक दिया। उन्होंने संकेत दिया कि ऐसा जवाब दिया जाए जिसे कार्यक्रम में आगे रखा जा सके। इसके बाद उन्होंने सवाल दोबारा पूछा।

    इस बार विजय ने अपना जवाब बदलते हुए कहा कि फ्लाइट काफी महंगी होती है। उनका यह जवाब सुनकर समय रैना, वरुण धवन और पैनल में मौजूद अन्य लोग हंस पड़े। इस तरह बातचीत को संवेदनशील घटना की दिशा में जाने से रोक दिया गया और मजाक को दूसरे अंदाज में आगे बढ़ाया गया।

    विजय की शुरुआती बात का संकेत 12 जून 2025 को हुए अहमदाबाद विमान हादसे की ओर माना गया। इस दुर्घटना में एयर इंडिया का विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था और बड़ी संख्या में लोगों की जान गई थी। हादसे के कारण यह घटना देश में लंबे समय तक चर्चा में रही। ऐसे में कार्यक्रम के दौरान समय रैना का उस संदर्भ को आगे नहीं बढ़ने देना खास तौर पर ध्यान खींच रहा है।

    इसी एपिसोड में समय रैना ने अहमदाबाद में अपने लाइव शो को लेकर भी बात की। विजय ने दर्शकों से अहमदाबाद में होने वाले लाइव कॉमेडी कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की और समय रैना से शो के लिए शाउटआउट देने को कहा। इस पर समय ने बताया कि फिलहाल उनका अपना शो अहमदाबाद में नहीं हो पा रहा है।

    समय रैना ने गुजरात में कार्यक्रम करने की इच्छा भी जाहिर की। उन्होंने बताया कि पिछले करीब एक साल से उन्हें अहमदाबाद में शो करने की अनुमति नहीं मिली है। उन्होंने स्थानीय अधिकारियों से कार्यक्रम की अनुमति देने की अपील भी की। इस बातचीत के दौरान उनके बयान ने शो से जुड़े पुराने विवादों की याद भी ताजा कर दी।

    इंडियाज गॉट लैटेंट इससे पहले भी गंभीर विवाद का हिस्सा रह चुका है। वर्ष 2025 में रणवीर इलाहाबादिया की एक आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद शो से जुड़े लोगों के खिलाफ शिकायत और प्राथमिकी का मामला सामने आया था। विवाद बढ़ने के बाद कार्यक्रम के वीडियो और शो को प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया था। उस घटनाक्रम के बाद नए सीजन में समय रैना का संवेदनशील विषय पर मजाक को रोकना दर्शकों के बीच चर्चा का कारण बन गया है।

    नए एपिसोड की यह घटना यह भी दिखाती है कि कॉमेडी कार्यक्रमों में संवेदनशील घटनाओं और त्रासदियों से जुड़े विषयों को लेकर सावधानी कितनी महत्वपूर्ण हो गई है। समय रैना द्वारा कंटेस्टेंट को रोकने का फैसला इसी संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि शो का मूल अंदाज हास्य और व्यंग्य पर आधारित है, लेकिन किसी बड़े हादसे से जुड़े संदर्भ पर दर्शकों की भावनाओं का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी माना जाता है।

  • दिल्ली में स्टार्टअप इकोसिस्टम मजबूत करने की तैयारी, स्कूलों और कॉलेजों में इनक्यूबेशन केंद्रों के विस्तार पर सरकार का जोर

    दिल्ली में स्टार्टअप इकोसिस्टम मजबूत करने की तैयारी, स्कूलों और कॉलेजों में इनक्यूबेशन केंद्रों के विस्तार पर सरकार का जोर

    नई दिल्ली ।दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी को देश के प्रमुख स्टार्टअप केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में स्टार्टअप और इनक्यूबेशन नीति 2026 के क्रियान्वयन को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने रविवार को स्टार्टअप संस्थापकों, उद्यमियों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में नीति को अधिक प्रभावी, व्यावहारिक और उद्यमियों के अनुकूल बनाने को लेकर सुझाव लिए गए।

    सरकार की योजना दिल्ली में ऐसा स्टार्टअप इकोसिस्टम तैयार करने की है, जिसमें युवाओं को अपने कारोबारी विचारों को विकसित करने के साथ शुरुआती स्तर पर आवश्यक मार्गदर्शन और संस्थागत सहयोग मिल सके। इसके लिए विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और स्कूलों में स्टार्टअप से संबंधित बुनियादी ढांचा विकसित करने तथा इनक्यूबेशन केंद्र स्थापित करने की दिशा में रोडमैप तैयार किया गया है।

    मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल नई कंपनियों की संख्या बढ़ाना नहीं है। इसके साथ युवाओं के लिए नवाचार, उद्यमिता और रोजगार के अवसर तैयार करना भी नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उद्योग जगत से मिले सुझावों को नीति के प्रभावी क्रियान्वयन और जमीनी जरूरतों के अनुरूप व्यवस्था विकसित करने में उपयोगी माना जा रहा है।

    शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने बताया कि दिल्ली सरकार अपने कार्यकाल के दौरान 10 हजार से अधिक स्टार्टअप को समर्थन और प्रोत्साहन देने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है। इसके माध्यम से युवाओं के लिए चार लाख से अधिक रोजगार अवसर पैदा करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का मानना है कि स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा मिलने से रोजगार के साथ नवाचार आधारित आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूती मिलेगी।

    बैठक में शामिल स्टार्टअप प्रतिनिधियों ने नीति निर्माण में उद्यमियों की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया। जिप इलेक्ट्रिक के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी आकाश गुप्ता ने कहा कि नए संस्थापकों को मार्गदर्शन और इनक्यूबेशन सहायता उपलब्ध कराने से युवाओं को अपने व्यावसायिक विचारों को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है। उन्होंने कॉलेजों में पढ़ने वाले युवाओं के लिए ऐसी सुविधाओं को विशेष रूप से उपयोगी बताया।

    एस्ट्रोटॉक के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी पुनीत गुप्ता ने भी सरकार द्वारा स्टार्टअप संस्थापकों से सीधे सुझाव लेने की प्रक्रिया की सराहना की। उनके अनुसार, कारोबार से जुड़े लोगों के अनुभवों को नीति निर्माण में शामिल करने से सरकारी योजनाओं को अधिक व्यावहारिक बनाया जा सकता है। उन्होंने रोजगार सृजन को आर्थिक विकास से जोड़ते हुए स्टार्टअप क्षेत्र को शुरुआती स्तर पर सहयोग देने की आवश्यकता पर जोर दिया।

    कैशकरो और अर्नकरो की सह-संस्थापक स्वाति भार्गवा ने कहा कि नीति निर्माण में वास्तविक उद्यमियों की भागीदारी से उनकी चुनौतियों और जरूरतों को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है। इससे नीतियों को जमीन पर लागू करने में भी मदद मिल सकती है।

    दिल्ली सरकार की योजना में शिक्षा संस्थानों को स्टार्टअप गतिविधियों से जोड़ना अहम है। स्कूलों और कॉलेजों में इनक्यूबेशन सुविधाएं विकसित होने से विद्यार्थियों को शुरुआती स्तर पर उद्यमिता की जानकारी और अपने विचारों पर काम करने का अवसर मिल सकता है। इससे नए संस्थापकों के लिए मार्गदर्शन और नेटवर्किंग का आधार भी तैयार होगा।

    10 हजार स्टार्टअप और चार लाख से अधिक रोजगार का लक्ष्य हासिल करने के लिए सरकारी तंत्र और उद्योग जगत के बीच निरंतर समन्वय जरूरी होगा। वित्तीय सहायता, विशेषज्ञ मार्गदर्शन, बुनियादी ढांचा और बाजार तक पहुंच जैसी सुविधाओं को मजबूत करना इस नीति की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। दिल्ली सरकार की पहल का उद्देश्य आने वाले वर्षों में राजधानी को नवाचार और उद्यमिता के लिए मजबूत केंद्र के रूप में विकसित करना है।

  • भोपाल में चाबी की चाल से चोरी का बड़ा खुलासा! किरायेदार युवती और नाबालिग पर 4 लाख उड़ाने का आरोप, 3.79 लाख

    भोपाल में चाबी की चाल से चोरी का बड़ा खुलासा! किरायेदार युवती और नाबालिग पर 4 लाख उड़ाने का आरोप, 3.79 लाख


    भोपाल । भोपाल के निशातपुरा इलाके में डुप्लीकेट चाबी के जरिए घर में घुसकर लाखों रुपए की चोरी करने के मामले का पुलिस ने महज 48 घंटे के भीतर खुलासा कर दिया है। जिस घर में आने जाने और रहने वाले लोगों पर भरोसा किया जाता था उसी दायरे से चोरी की वारदात का सुराग मिलने के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई की। पुलिस ने चोरी के आरोप में 20 वर्षीय किरायेदार युवती अरसी को गिरफ्तार किया है जबकि उसके साथ एक विधि विरुद्ध बालिका को भी पकड़ा गया है। पुलिस ने दोनों के कब्जे से 3 लाख 79 हजार 500 रुपए नकद और चोरी हुआ सोने का हार बरामद किया है। बरामद संपत्ति की कुल कीमत करीब 4 लाख 30 हजार रुपए बताई जा रही है।
    मामला निशातपुरा थाना क्षेत्र का है जहां एकता बिलाल कॉलोनी करोंद निवासी आवेश खान ने 3 सितंबर को थाने पहुंचकर घर से नकदी और सोने का हार चोरी होने की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार घर में रखे करीब 4 लाख रुपए नकद और सोने का हार गायब था। चोरी की यह वारदात इसलिए भी पुलिस के लिए चुनौतीपूर्ण थी क्योंकि घर में जबरन प्रवेश या ताला तोड़ने जैसी कोई स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आई थी। ऐसे में जांच का फोकस उन लोगों पर गया जिन्हें घर में आने जाने की जानकारी थी और जिन्हें मेन गेट तथा घर की व्यवस्था के बारे में जानकारी हो सकती थी।

    पुलिस जांच के दौरान सामने आया कि फरियादी की भतीजी लायबा और किरायेदार अरसी ने कथित तौर पर मेन गेट के ताले की डुप्लीकेट चाबी बनवाई थी। आरोप है कि इसी डुप्लीकेट चाबी का इस्तेमाल कर दोनों घर के अंदर पहुंचीं और कमरे में रखी अलमारी के लॉकर तक पहुंचकर उसमें रखी नकदी और सोने का हार निकाल लिया। चोरी की वारदात को इस तरह अंजाम दिया गया कि शुरुआती तौर पर किसी को घर में जबरन घुसने का शक नहीं हुआ।

    शिकायत दर्ज होने के बाद निशातपुरा पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। थाना प्रभारी मनोज पटवा के नेतृत्व में पुलिस टीम ने तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर तंत्र की मदद से संदिग्धों की गतिविधियों की जानकारी जुटाई। पुलिस ने घर से जुड़े लोगों और वारदात के बाद की परिस्थितियों की भी पड़ताल की। जांच के दौरान मिले महत्वपूर्ण सुरागों के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंची और किरायेदार युवती अरसी के साथ एक विधि विरुद्ध बालिका को पकड़ लिया।

    पूछताछ और आगे की कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 3 लाख 79 हजार 500 रुपए नकद बरामद किए। इसके साथ ही चोरी हुआ सोने का हार भी पुलिस ने जब्त कर लिया। बरामद संपत्ति की कुल कीमत करीब 4 लाख 30 हजार रुपए बताई गई है। हालांकि पुलिस अब भी इस बात की जांच कर रही है कि चोरी की गई कुल रकम में से बाकी राशि कहां गई और क्या उसे खर्च कर दिया गया है या किसी अन्य व्यक्ति के पास पहुंचाया गया है।

    पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस पूरी वारदात में किसी और व्यक्ति की भूमिका तो नहीं थी। डुप्लीकेट चाबी कब और कहां बनवाई गई तथा चोरी की योजना किस तरह तैयार की गई इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर की सूचना के बेहतर तालमेल से इस मामले का तेजी से खुलासा किया गया है। फिलहाल पुलिस आगे की जांच कर रही है और चोरी से जुड़े सभी तथ्यों को जुटाने में लगी हुई है।