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  • माइग्रेन के दर्द में क्यों फायदेमंद मानी जाती है अजवाइन? तनाव, गैस और सूजन के असर को समझिए, जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ

    माइग्रेन के दर्द में क्यों फायदेमंद मानी जाती है अजवाइन? तनाव, गैस और सूजन के असर को समझिए, जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ

    नई दिल्ली । माइग्रेन सामान्य सिरदर्द से अलग और अधिक जटिल न्यूरोलॉजिकल समस्या मानी जाती है। इस स्थिति में सिर के एक हिस्से में तेज धड़कन जैसा दर्द महसूस हो सकता है, जो कई घंटों से लेकर तीन दिनों तक भी बना रह सकता है। कई लोगों को इसके साथ मतली, उल्टी, तेज रोशनी या तेज आवाज से परेशानी जैसी समस्याएं भी होती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि माइग्रेन के प्रभावी प्रबंधन के लिए केवल दवाओं पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि जीवनशैली, खानपान और संभावित ट्रिगर को पहचानना भी जरूरी है।

    माइग्रेन के पीछे कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। मानसिक तनाव, हार्मोनल बदलाव, पर्याप्त नींद न लेना, लंबे समय तक भूखे रहना, शरीर में पानी की कमी और कुछ विशेष खाद्य पदार्थ इसके प्रमुख ट्रिगर माने जाते हैं। इसके अलावा पाचन संबंधी समस्याएं, जैसे गैस, अपच और पेट फूलना भी कुछ लोगों में माइग्रेन की समस्या को बढ़ा सकती हैं। यही कारण है कि डॉक्टर माइग्रेन के मरीजों को संतुलित दिनचर्या अपनाने और ट्रिगर करने वाले कारणों से बचने की सलाह देते हैं।

    घरेलू उपायों की बात करें तो अजवाइन को लंबे समय से पाचन सुधारने वाले मसाले के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसमें थाइमोल नामक सक्रिय तत्व पाया जाता है, जिसे सूजन कम करने और शरीर को संक्रमण से बचाने वाले गुणों के लिए जाना जाता है। कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों में यह भी संकेत मिले हैं कि थाइमोल शरीर में सूजन से जुड़ी प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। चूंकि कई मामलों में सूजन माइग्रेन के दर्द की तीव्रता बढ़ाने में भूमिका निभा सकती है, इसलिए अजवाइन कुछ लोगों में राहत देने में सहायक हो सकती है।

    आयुर्वेद में भी अजवाइन को पाचन तंत्र के लिए लाभकारी माना गया है। विशेषज्ञ बताते हैं कि पाचन तंत्र और मस्तिष्क के बीच गहरा संबंध होता है, जिसे गट-ब्रेन कनेक्शन कहा जाता है। यदि किसी व्यक्ति में गैस, अपच या पेट की अन्य समस्याएं माइग्रेन को ट्रिगर करती हैं, तो पाचन में सुधार से सिरदर्द की आवृत्ति या तीव्रता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि इसका असर हर व्यक्ति में एक जैसा नहीं होता क्योंकि माइग्रेन के कारण अलग-अलग हो सकते हैं।

    अजवाइन में प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट भी मौजूद होते हैं, जो शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने में मदद कर सकते हैं। ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कई स्वास्थ्य समस्याओं से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए संतुलित मात्रा में अजवाइन का सेवन शरीर के लिए लाभकारी माना जाता है, हालांकि इसे किसी बीमारी के निश्चित उपचार के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

    कई लोग माइग्रेन के दौरान गर्म अजवाइन की पोटली या उसकी भाप का भी उपयोग करते हैं। माना जाता है कि इसकी तेज सुगंध कुछ लोगों में सिर के भारीपन और बेचैनी को कम करने में मदद कर सकती है। वहीं, अजवाइन का पानी भी पाचन बेहतर बनाने के लिए घरेलू उपाय के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। यदि माइग्रेन का संबंध पाचन संबंधी गड़बड़ियों से है, तो इससे कुछ राहत मिल सकती है।

    विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि माइग्रेन एक चिकित्सकीय समस्या है और बार-बार होने वाले या गंभीर सिरदर्द की स्थिति में डॉक्टर से परामर्श लेना आवश्यक है। अजवाइन जैसे घरेलू उपाय केवल सहायक भूमिका निभा सकते हैं, लेकिन इन्हें दवा या चिकित्सकीय उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। सही निदान, संतुलित जीवनशैली, पर्याप्त पानी, नियमित नींद और चिकित्सकीय सलाह का पालन ही माइग्रेन को नियंत्रित करने का सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है।

  • जहां हर मिनट फूटता था 25 हजार लीटर पानी, वहीं बनी देश की सबसे लंबी जल सुरंग, सीएम मोहन यादव ने किया ड्रीम प्रोजेक्ट का निरीक्षण

    जहां हर मिनट फूटता था 25 हजार लीटर पानी, वहीं बनी देश की सबसे लंबी जल सुरंग, सीएम मोहन यादव ने किया ड्रीम प्रोजेक्ट का निरीक्षण

    मध्य प्रदेश के कटनी जिले में लगभग तैयार हो चुकी स्लीमनाबाद जल सुरंग राज्य की सबसे महत्वाकांक्षी सिंचाई परियोजनाओं में शामिल हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को इस परियोजना का निरीक्षण करते हुए इसे प्रदेश के किसानों और विंध्य-महाकौशल क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। करीब 17 वर्षों के लंबे निर्माण कार्य के बाद अंतिम चरण में पहुंची यह परियोजना नर्मदा के पानी को गुरुत्वाकर्षण के आधार पर सोन नदी क्षेत्र तक पहुंचाएगी, जिससे हजारों किसानों को स्थायी सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी।

    करीब 11.95 किलोमीटर लंबी यह जल सुरंग देश की सबसे लंबी जल सुरंगों में गिनी जा रही है। इसके माध्यम से जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, रीवा और पन्ना सहित छह जिलों के लगभग 1450 गांवों की करीब 2.45 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई का लाभ मिलेगा। सरकार का मानना है कि इस परियोजना के शुरू होने से विंध्य और महाकौशल क्षेत्र में कृषि उत्पादन बढ़ेगा, किसानों की आय में सुधार होगा और जल संकट से प्रभावित इलाकों को स्थायी राहत मिलेगी।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि परियोजना का निर्माण आसान नहीं था। शुरुआती वर्षों में कार्य अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ सका, लेकिन बाद में आधुनिक तकनीक और विदेशी मशीनों की मदद से खुदाई का काम तेज किया गया। कठिन भूगर्भीय परिस्थितियों, कठोर चट्टानों, भूमिगत गुफाओं और लगातार हो रहे जल रिसाव के बीच इंजीनियरों तथा तकनीकी विशेषज्ञों ने सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए कार्य को आगे बढ़ाया। कई स्थानों पर सुरंग जमीन की सतह से लगभग 120 फीट नीचे बनाई गई है।

    निर्माण के दौरान सबसे बड़ी चुनौती प्रति मिनट लगभग 25 हजार लीटर तक भूमिगत पानी का तेज प्रवाह था। इसके कारण सुरंग के भीतर लगातार जलभराव और मिट्टी धंसने जैसी परिस्थितियां पैदा होती रहीं। प्रारंभिक मशीनों को भी नुकसान पहुंचा, जिसके बाद अत्याधुनिक जर्मन तकनीक और विशेष ग्राउटिंग पद्धति का उपयोग किया गया। इन तकनीकी उपायों की मदद से निर्माण कार्य को सुरक्षित ढंग से पूरा किया गया। सुरंग राष्ट्रीय राजमार्ग, रेलवे ट्रैक और घनी आबादी वाले क्षेत्रों के नीचे से गुजरती है, लेकिन निर्माण के दौरान किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं मिली।

    परियोजना की अनुमानित लागत समय के साथ बढ़ती गई। वर्ष 2008 में शुरू हुई इस योजना की शुरुआती लागत लगभग 799 करोड़ रुपये थी, जो तकनीकी चुनौतियों और अतिरिक्त निर्माण कार्यों के कारण बढ़कर 1600 करोड़ रुपये से अधिक हो गई। अधिकारियों के अनुसार परियोजना का अधिकांश कार्य पूरा हो चुका है और इससे जुड़ी नहरों का निर्माण भी लगभग समाप्ति पर है। आने वाले महीनों में चरणबद्ध तरीके से सिंचाई नेटवर्क को पूरी तरह क्रियाशील किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यह परियोजना केवल सिंचाई तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि क्षेत्र में पेयजल उपलब्धता, कृषि उत्पादन, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति देगी। उन्होंने विश्वास जताया कि परियोजना के पूर्ण रूप से शुरू होने के बाद विंध्य और महाकौशल क्षेत्र की कृषि व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन देखने को मिलेगा। सरकार का लक्ष्य आगामी चरणों में सिंचाई क्षमता का लगातार विस्तार करते हुए अधिक से अधिक किसानों तक इसका लाभ पहुंचाना है, जिससे प्रदेश का कृषि विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों मजबूत हो सकें।

  • सीएम योगी का विपक्ष पर हमला, बोले- 'उन्हें जिन्ना पसंद, हमें गन्ना'; विकास परियोजनाओं की दी सौगात

    सीएम योगी का विपक्ष पर हमला, बोले- 'उन्हें जिन्ना पसंद, हमें गन्ना'; विकास परियोजनाओं की दी सौगात


    बिजनौर/शामली। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को शामली और बिजनौर का दौरा कर कई विकास परियोजनाओं की सौगात दी। शामली में उन्होंने 617.70 करोड़ रुपये की लागत वाली 90 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया, जबकि बिजनौर में जनसभा को संबोधित करते हुए विपक्ष पर तीखा राजनीतिक हमला बोला और प्रदेश सरकार की विकास योजनाओं का उल्लेख किया।

    ‘समाज को बांटने वालों से रहें सतर्क’
    मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि कुछ राजनीतिक दल जाति और वर्ग के आधार पर समाज को बांटने का प्रयास करते हैं। उन्होंने लोगों से ऐसे तत्वों से सावधान रहने की अपील करते हुए कहा कि सरकार की प्राथमिकता समाज को जोड़ना, सामाजिक समरसता को मजबूत करना और सभी वर्गों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है।

    बिजनौर-चांदपुर के लिए करीब 1000 करोड़ की परियोजनाएं
    सीएम योगी ने कहा कि महात्मा विदुर की धरती बिजनौर लगातार विकास की नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि बिजनौर और चांदपुर विधानसभा क्षेत्रों के लिए करीब 1000 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया जा रहा है।

    विस्थापित परिवारों का भी किया जिक्र
    मुख्यमंत्री ने अपने पिछले दौरे को याद करते हुए कहा कि पड़ापुर क्षेत्र में पाकिस्तान और बांग्लादेश से आए करीब 3000 विस्थापित लोगों को जमीन के पट्टे दिए गए थे। उन्होंने कहा कि वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे इन परिवारों को सरकार ने अधिकार दिलाने का काम किया है।

    2017 से पहले की कानून-व्यवस्था पर साधा निशाना
    मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले बिजनौर में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब थी और अपराधियों व माफिया का प्रभाव था। उन्होंने दावा किया कि सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के चलते अब जिले में कानून का राज स्थापित हुआ है और विकास कार्यों को गति मिली है।

    इसी दौरान उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा, “कुछ लोग ऐसा बिजनौर चाहते थे, जहां गुंडों और माफियाओं का कब्जा हो। वे समाज को बांटने की राजनीति करते हैं। उन्हें जिन्ना पसंद है, लेकिन हमें गन्ना पसंद है। हमारी सरकार की प्राथमिकता गन्ना किसानों का हित और गन्ने का बेहतर मूल्य सुनिश्चित करना है।”

    गंगा एक्सप्रेसवे हरिद्वार तक बढ़ाने की घोषणा
    मुख्यमंत्री ने कहा कि डबल इंजन सरकार प्रदेश में बेहतर कनेक्टिविटी पर लगातार काम कर रही है। उन्होंने घोषणा की कि गंगा एक्सप्रेसवे का विस्तार हरिद्वार तक किया जाएगा, जिससे बिजनौर सहित आसपास के क्षेत्रों को बेहतर सड़क संपर्क का लाभ मिलेगा।

    बिजनौर में बनेगा नर्सिंग कॉलेज
    योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मेडिकल कॉलेज के बाद अब बिजनौर में नर्सिंग कॉलेज का निर्माण भी तेजी से कराया जा रहा है। इससे जिले की बेटियों को नर्सिंग की पढ़ाई के लिए दूसरे शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा और स्थानीय स्तर पर शिक्षा के साथ रोजगार के नए अवसर भी उपलब्ध होंगे।

  • बारिश में बाल झड़ना, डैंड्रफ और फ्रिज से हैं परेशान? मॉनसून में अपनाएं ये 8 आसान आदतें, बाल रहेंगे मजबूत और हेल्दी

    बारिश में बाल झड़ना, डैंड्रफ और फ्रिज से हैं परेशान? मॉनसून में अपनाएं ये 8 आसान आदतें, बाल रहेंगे मजबूत और हेल्दी

    नई दिल्ली ।बारिश का मौसम जहां गर्मी से राहत लेकर आता है, वहीं बालों की सेहत के लिए कई नई चुनौतियां भी पैदा कर देता है। वातावरण में बढ़ी नमी, प्रदूषण और बार-बार बालों के भीगने की वजह से बाल कमजोर, बेजान और रूखे दिखाई देने लगते हैं। इस दौरान हेयर फॉल, डैंड्रफ, फ्रिज और स्कैल्प से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ सकती हैं। ऐसे में केवल महंगे हेयर प्रोडक्ट्स पर निर्भर रहने के बजाय सही हेयर केयर रूटीन अपनाना अधिक प्रभावी माना जाता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार मॉनसून में सबसे पहले बालों को बारिश के पानी से बचाने की कोशिश करनी चाहिए। बारिश के पानी में धूल, प्रदूषण और अन्य अशुद्धियां हो सकती हैं, जो स्कैल्प और बालों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। यदि बाल भीग जाएं तो घर पहुंचकर माइल्ड और सल्फेट-फ्री शैंपू से उन्हें साफ करना बेहतर माना जाता है।

    बारिश के मौसम में स्कैल्प को लंबे समय तक गीला नहीं रहने देना चाहिए। नमी के कारण फंगल संक्रमण और डैंड्रफ का खतरा बढ़ सकता है। बाल धोने या भीगने के बाद उन्हें माइक्रोफाइबर तौलिये से हल्के हाथों से सुखाना या हेयर ड्रायर के कूल मोड का सीमित उपयोग करना फायदेमंद हो सकता है। गीले बालों को लंबे समय तक बांधकर रखना भी नुकसानदायक माना जाता है।

    हवा में अधिक नमी होने के कारण इस मौसम में बाल आसानी से फ्रिजी हो जाते हैं। ऐसे में बाल धोने के बाद हल्का एंटी-फ्रिज हेयर सीरम लगाने से बाल स्मूद रहते हैं और उलझने की समस्या कम हो सकती है। साथ ही गीले बालों में बहुत टाइट पोनीटेल या जूड़ा बनाने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे बालों की जड़ों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और टूटने की संभावना बढ़ जाती है।

    बालों को सुलझाने के लिए हमेशा चौड़े दांतों वाली कंघी का इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है। गीले बालों में बारीक कंघी या ब्रश का उपयोग करने से बाल अधिक टूट सकते हैं। इसलिए नीचे से ऊपर की ओर धीरे-धीरे कंघी करने की आदत बालों को सुरक्षित रखने में मदद करती है।

    कई लोग मॉनसून में कंडीशनर लगाना बंद कर देते हैं, जबकि इस मौसम में इसकी जरूरत और बढ़ जाती है। कंडीशनर केवल बालों की लंबाई और सिरों पर लगाना चाहिए, स्कैल्प पर नहीं। इससे बाल मुलायम रहते हैं और उनमें उलझन कम होती है। इसके अलावा लंबे समय तक तेल लगाकर रखने से भी बचना चाहिए। सप्ताह में एक बार हल्के नारियल या आर्गन ऑयल से 15 से 20 मिनट तक मसाज करने के बाद बाल धोना पर्याप्त माना जाता है।

    विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि मॉनसून में स्ट्रेटनर, कर्लर और अत्यधिक गर्म ब्लो ड्रायर जैसी हीट स्टाइलिंग मशीनों का कम से कम उपयोग करें। लगातार गर्मी मिलने से बाल कमजोर और दोमुंहे हो सकते हैं। जहां तक संभव हो, बालों को प्राकृतिक तरीके से सूखने देना बेहतर विकल्प है।

    नियमित सफाई, संतुलित पोषण, पर्याप्त पानी का सेवन और सही हेयर केयर रूटीन अपनाकर बारिश के मौसम में बालों को स्वस्थ, मजबूत और चमकदार बनाए रखा जा सकता है। छोटी-छोटी सावधानियां अपनाने से हेयर फॉल, फ्रिज और डैंड्रफ जैसी सामान्य समस्याओं का जोखिम काफी हद तक कम किया जा सकता है।

  • 20 दिन की भूख हड़ताल के बीच सोनम वांगचुक का भावुक संदेश, बोले- ‘20 जुलाई तक जिंदा रहूंगा, फिर जरूरत पड़ी तो भूत बनकर भी लौटूंगा’

    20 दिन की भूख हड़ताल के बीच सोनम वांगचुक का भावुक संदेश, बोले- ‘20 जुलाई तक जिंदा रहूंगा, फिर जरूरत पड़ी तो भूत बनकर भी लौटूंगा’

    नई दिल्ली । जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शन के समर्थन में पिछले 20 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक का एक नया वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में है। वीडियो में उन्होंने 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च का उल्लेख करते हुए हल्के-फुल्के और मजाकिया अंदाज में कहा कि वह किसी भी हालत में उस दिन तक जीवित रहने की कोशिश करेंगे और यदि मार्च सफल नहीं हुआ तो “भूत बनकर” लोगों के बीच वापस आएंगे। उनके इस बयान को सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया जा रहा है।

    सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन में शामिल हैं। यह प्रदर्शन शिक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर किया जा रहा है। आंदोलन में शामिल विभिन्न संगठनों और समर्थकों के बीच वांगचुक की मौजूदगी लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है। कई राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी उनसे मुलाकात कर आंदोलन के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया है।

    वायरल वीडियो में वांगचुक ने कहा कि उनका प्रयास रहेगा कि वह 20 जुलाई तक स्वस्थ रहकर प्रस्तावित संसद मार्च में शामिल हो सकें। उन्होंने आगे मुस्कुराते हुए कहा कि यदि किसी कारण से यह लक्ष्य पूरा नहीं हुआ तो वह “भूत बनकर” वापस आएंगे। उनका यह बयान गंभीर घोषणा के बजाय एक हल्का-फुल्का और प्रतीकात्मक संदेश माना जा रहा है, जिसे वहां मौजूद लोगों ने भी मुस्कुराते हुए सुना।

    लंबे समय से जारी भूख हड़ताल का असर उनके स्वास्थ्य पर भी दिखाई देने लगा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार पिछले 20 दिनों में उनका वजन लगभग नौ किलोग्राम तक कम हो चुका है। बीते 24 घंटों में भी वजन में गिरावट दर्ज की गई है। चिकित्सकों की टीम लगातार उनके स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है और समय-समय पर आवश्यक जांच की जा रही है। डॉक्टरों ने लंबे समय तक भोजन न लेने के कारण शरीर पर पड़ने वाले संभावित दुष्प्रभावों को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक भूख हड़ताल जारी रहने पर शरीर में ऊर्जा की कमी, कमजोरी, डिहाइड्रेशन और अंगों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि उपलब्ध चिकित्सकीय जानकारी के अनुसार वांगचुक के शरीर में पानी का स्तर फिलहाल नियंत्रित है, लेकिन हल्के डिहाइड्रेशन के संकेत भी सामने आए हैं। चिकित्सक लगातार उनकी स्थिति का आकलन कर रहे हैं और आवश्यक चिकित्सकीय सलाह दे रहे हैं।

    इस बीच 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च को लेकर आंदोलनकारी अपनी तैयारियां जारी रखे हुए हैं। प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर सरकार तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। आंदोलन के कारण जंतर-मंतर पर लगातार समर्थकों की आवाजाही बनी हुई है और विभिन्न सामाजिक व राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधि भी समय-समय पर वहां पहुंच रहे हैं।

    सोनम वांगचुक का ताजा वीडियो ऐसे समय सामने आया है जब उनके स्वास्थ्य और आंदोलन, दोनों पर लोगों की नजर बनी हुई है। उनका संदेश समर्थकों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। वहीं, चिकित्सकीय निगरानी के बीच उनकी सेहत पर भी लगातार ध्यान दिया जा रहा है। आने वाले दिनों में आंदोलन और प्रस्तावित संसद मार्च की दिशा पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।

  • शहर के कमिश्नर तो हम ही हैं' कहकर बनाई वायरल रील पड़ी भारी, नागपुर पुलिस ने तीन युवकों को किया गिरफ्तार, माफी के बाद भी नहीं हटी कार्रवाई

    शहर के कमिश्नर तो हम ही हैं' कहकर बनाई वायरल रील पड़ी भारी, नागपुर पुलिस ने तीन युवकों को किया गिरफ्तार, माफी के बाद भी नहीं हटी कार्रवाई


    नई दिल्ली ।
    महाराष्ट्र के नागपुर में सोशल मीडिया पर फिल्मी डायलॉग के साथ बनाई गई एक रील तीन युवकों के लिए कानूनी परेशानी का कारण बन गई। पुलिस को चुनौती देने वाले अंदाज में तैयार किया गया यह वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद पुलिस ने मामले का संज्ञान लेते हुए तीनों आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई के बाद आरोपियों ने सार्वजनिक रूप से कान पकड़कर माफी भी मांगी, लेकिन पुलिस ने स्पष्ट किया कि कानूनी प्रक्रिया अपने निर्धारित नियमों के अनुसार जारी रहेगी।

    पुलिस के अनुसार यह मामला सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो से जुड़ा है, जिसमें तीन युवक फिल्मी डायलॉग बोलते हुए स्वयं को शहर का वास्तविक “कमिश्नर” बताते दिखाई दे रहे थे। वीडियो में प्रयुक्त संवाद को पुलिस ने कानून-व्यवस्था और पुलिस प्रशासन की छवि को प्रभावित करने वाला माना। जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि यह सामग्री सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच चुकी थी और इसे व्यापक रूप से साझा भी किया गया था।

    प्रारंभिक जांच में सामने आया कि वायरल वीडियो पिछले कुछ समय से विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित हो रहा था। वीडियो में शामिल तीनों युवकों की पहचान शाहिद अब्जल शकील खान, मोहम्मद साहिल मोहम्मद शकील शेख और रिजवान मोहम्मद अजीज के रूप में की गई। पुलिस ने डिजिटल साक्ष्यों और उपलब्ध तकनीकी जानकारी के आधार पर आरोपियों का पता लगाकर उन्हें हिरासत में लिया और आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू की।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करने के उद्देश्य से ऐसी सामग्री तैयार करना, जो कानून व्यवस्था या सरकारी संस्थाओं की प्रतिष्ठा को प्रभावित करे, गंभीर विषय है। अधिकारियों के अनुसार इस प्रकार के वीडियो कुछ लोगों को व्यवस्था के प्रति गलत संदेश दे सकते हैं और कानून का सम्मान कम करने वाली मानसिकता को बढ़ावा दे सकते हैं। इसी कारण मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की गई।

    पुलिस उपनिरीक्षक की शिकायत के आधार पर आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि डिजिटल सामग्री, सोशल मीडिया गतिविधियों और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की वैधानिक प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

    कार्रवाई के बाद तीनों आरोपियों का एक और वीडियो सामने आया, जिसमें वे कान पकड़कर माफी मांगते दिखाई दिए। उन्होंने अपने व्यवहार पर खेद जताया और भविष्य में ऐसी गलती दोबारा न करने की बात कही। हालांकि पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि केवल माफी मांगने से दर्ज आपराधिक मामला स्वतः समाप्त नहीं हो जाता। कानून के अनुसार जांच और न्यायिक प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत आगे बढ़ेगी।

    यह घटना सोशल मीडिया का उपयोग करने वाले लोगों के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल मंचों पर मनोरंजन या लोकप्रियता के उद्देश्य से बनाई जाने वाली सामग्री भी कानूनी दायरे में आती है। यदि किसी पोस्ट, वीडियो या रील से सार्वजनिक व्यवस्था, सरकारी संस्थाओं की प्रतिष्ठा या सामाजिक शांति प्रभावित होने की आशंका हो, तो संबंधित एजेंसियां कानून के अनुसार कार्रवाई कर सकती हैं। ऐसे में सोशल मीडिया पर सामग्री साझा करते समय जिम्मेदारी और कानूनी सीमाओं का ध्यान रखना आवश्यक है।

  • तीस्ता परियोजना पर बांग्लादेश ने चीन के साथ बढ़ाई साझेदारी, भारत के पुराने प्रस्ताव के बीच नए समझौते से क्षेत्रीय रणनीति पर चर्चा तेज

    तीस्ता परियोजना पर बांग्लादेश ने चीन के साथ बढ़ाई साझेदारी, भारत के पुराने प्रस्ताव के बीच नए समझौते से क्षेत्रीय रणनीति पर चर्चा तेज

    नई दिल्ली । बांग्लादेश द्वारा तीस्ता नदी परियोजना के लिए चीन की सरकारी कंपनी के साथ समझौता किए जाने की खबरों ने दक्षिण एशिया की क्षेत्रीय राजनीति और सुरक्षा पर नई चर्चा शुरू कर दी है। यह परियोजना लंबे समय से बांग्लादेश की प्राथमिक जल संसाधन योजनाओं में शामिल रही है और भारत भी पूर्व में इसमें सहयोग की इच्छा जता चुका था। अब चीन के साथ आगे बढ़ती इस साझेदारी को दोनों देशों के बदलते रणनीतिक समीकरणों के रूप में देखा जा रहा है।

    रिपोर्टों के अनुसार बांग्लादेश ने तीस्ता परियोजना के लिए चीन की सरकारी कंपनी पावर चाइना के साथ सरकार-से-सरकार समझौता किया है। इसके तहत परियोजना के लिए दीर्घकालिक रियायती ऋण व्यवस्था की गई है, जिसकी पुनर्भुगतान अवधि लगभग 50 वर्ष बताई जा रही है। समझौते के बाद चीन के इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों का एक दल परियोजना क्षेत्र में प्रारंभिक सर्वेक्षण के लिए पहुंचा है।

    बताया जा रहा है कि मानसून के दौरान तीस्ता नदी के प्रवाह, तलछट और कैचमेंट क्षेत्र का अध्ययन किया जाएगा ताकि बांध, तट संरक्षण, जल प्रबंधन और अन्य बुनियादी ढांचे की विस्तृत योजना तैयार की जा सके। बांग्लादेश की प्राथमिकता नदी के अतिरिक्त बहाव के बेहतर उपयोग और कृषि के लिए जल उपलब्धता बढ़ाने पर केंद्रित बताई जा रही है।

    तीस्ता नदी भारत और बांग्लादेश दोनों के लिए महत्वपूर्ण जल संसाधन है। नदी का उद्गम भारत के सिक्किम में है और यह पश्चिम बंगाल से होकर बांग्लादेश में प्रवेश करती है। इसी कारण इससे जुड़ी किसी भी बड़ी परियोजना का प्रभाव केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं माना जाता, बल्कि इसे द्विपक्षीय जल सहयोग और क्षेत्रीय रणनीति के व्यापक संदर्भ में भी देखा जाता है।

    सुरक्षा विशेषज्ञों की चिंता मुख्य रूप से परियोजना क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति को लेकर है। यह इलाका भारतीय सीमा और सिलीगुड़ी कॉरिडोर के अपेक्षाकृत निकट माना जाता है। सिलीगुड़ी कॉरिडोर भारत की मुख्य भूमि को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ने वाला अत्यंत महत्वपूर्ण भू-भाग है, इसलिए वहां किसी बाहरी देश की दीर्घकालिक तकनीकी और अवसंरचनात्मक मौजूदगी पर स्वाभाविक रूप से रणनीतिक चर्चा होती है।

    पावर चाइना चीन की प्रमुख सरकारी अवसंरचना कंपनियों में से एक है और एशिया तथा अफ्रीका में कई बड़े ऊर्जा और जल प्रबंधन परियोजनाओं में सक्रिय रही है। हालांकि कंपनी को लेकर लगाए जा रहे सैन्य संबंधी दावों की स्वतंत्र पुष्टि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। फिर भी भारत में कुछ रणनीतिक विश्लेषक चीन की बढ़ती आर्थिक और तकनीकी मौजूदगी को व्यापक भू-राजनीतिक दृष्टिकोण से देख रहे हैं।

    इसी बीच बांग्लादेश और चीन के बीच रक्षा सहयोग बढ़ने की अटकलों ने भी चर्चा को और तेज कर दिया है। हालांकि संभावित लड़ाकू विमानों की आपूर्ति या अन्य सैन्य समझौतों को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले दोनों देशों के आधिकारिक बयानों और औपचारिक समझौतों का इंतजार करना जरूरी होगा।

    कुल मिलाकर तीस्ता परियोजना केवल एक जल संसाधन योजना नहीं रह गई है, बल्कि यह दक्षिण एशिया में बदलते आर्थिक, रणनीतिक और कूटनीतिक समीकरणों का संकेतक बनती दिखाई दे रही है। आने वाले महीनों में परियोजना के सर्वेक्षण, वित्तीय शर्तों और निर्माण प्रक्रिया से जुड़े आधिकारिक विवरण सामने आने के बाद इसके वास्तविक प्रभाव का अधिक स्पष्ट आकलन संभव हो सकेगा।

  • कोलकाता एयरपोर्ट परिसर की मस्जिद में जुमे की नमाज पर रोक से बढ़ा विवाद, सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, प्रशासन और धार्मिक संगठनों के बीच बढ़ी तनातनी

    कोलकाता एयरपोर्ट परिसर की मस्जिद में जुमे की नमाज पर रोक से बढ़ा विवाद, सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, प्रशासन और धार्मिक संगठनों के बीच बढ़ी तनातनी

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में एयरपोर्ट परिसर स्थित गौरीपुर मस्जिद को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए प्रशासन ने मस्जिद में जुमे की नमाज पर अस्थायी रोक लगा दी है, जिसके बाद इलाके में तनावपूर्ण स्थिति बन गई है। एहतियात के तौर पर बड़ी संख्या में पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है तथा पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर दिया गया है।

    प्रशासन के अनुसार, एयरपोर्ट परिसर में स्थित इस मस्जिद के आसपास अगले कुछ दिनों तक निर्माण और सुरक्षा संबंधी कार्य किए जाने हैं। अधिकारियों का कहना है कि मस्जिद दो रनवे के बीच स्थित होने के कारण यहां लोगों की आवाजाही से सुरक्षा संबंधी जोखिम पैदा हो सकता है। इसी वजह से सीमित अवधि के लिए नमाज के लिए लोगों के प्रवेश पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह फैसला पूरी तरह सुरक्षा और संचालन संबंधी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

    मस्जिद को स्थानांतरित किए जाने का प्रस्ताव भी चर्चा में है। बताया जा रहा है कि मस्जिद प्रबंधन के कुछ सदस्य इस विषय पर प्रशासन के साथ बातचीत के पक्ष में हैं और किसी सहमति वाले समाधान की संभावना तलाश रहे हैं। हालांकि, दूसरे पक्ष ने इस प्रस्ताव का विरोध जताया है और मस्जिद को उसके वर्तमान स्थान पर बनाए रखने की मांग की है। इसी मतभेद के कारण विवाद और अधिक बढ़ गया है।

    इस बीच जमीयत उलेमा-ए-हिंद से जुड़े नेता सिद्दिकुल्लाह चौधरी ने पहले मस्जिद में जुमे की नमाज अदा करने की बात कही थी। उन्होंने यह भी कहा कि जब इस विषय पर प्रशासन के साथ बातचीत जारी है, तब नमाज पर रोक लगाने की आवश्यकता नहीं थी। बाद में उन्होंने पुलिस अधिकारियों से मुलाकात के लिए जाने की जानकारी दी। उनके बयान के बाद प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था और अधिक सख्त कर दी तथा पूरे इलाके में निगरानी बढ़ा दी।

    स्थानीय पुलिस ने मस्जिद से जुड़े धार्मिक प्रतिनिधियों को सूचित किया कि क्षेत्र में भारतीय न्याय संहिता की धारा 163 लागू है और फिलहाल मस्जिद में सामूहिक नमाज की अनुमति नहीं दी जा सकती। इसके बाद कुछ स्थानीय धार्मिक प्रतिनिधियों ने वैकल्पिक स्थान पर नमाज अदा करने की बात कही। इसके बावजूद प्रशासन किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए पूरी तरह सतर्क बना हुआ है।

    एयरपोर्ट परिसर की ओर जाने वाले सभी प्रमुख मार्गों, गलियों और प्रवेश बिंदुओं पर सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। पुरुष और महिला पुलिसकर्मियों के अलावा केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के जवान भी लगातार निगरानी कर रहे हैं। आने-जाने वाले लोगों पर नजर रखी जा रही है ताकि कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो और एयरपोर्ट का संचालन सामान्य रूप से जारी रह सके।

    फिलहाल प्रशासन का कहना है कि उसकी प्राथमिकता सार्वजनिक सुरक्षा, कानून-व्यवस्था बनाए रखना और एयरपोर्ट संचालन में किसी भी प्रकार की बाधा को रोकना है। दूसरी ओर, मस्जिद से जुड़े पक्षों और प्रशासन के बीच बातचीत की संभावनाएं भी बनी हुई हैं। ऐसे में सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संवाद के जरिए इस विवाद का शांतिपूर्ण और सर्वसम्मत समाधान किस प्रकार निकाला जाता है।

  • दिल्ली में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मिली नई रफ्तार, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 45 नए आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का किया शुभारंभ

    दिल्ली में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मिली नई रफ्तार, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 45 नए आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का किया शुभारंभ

    नई दिल्ली ।राजधानी दिल्ली में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सरकार ने 45 नए आयुष्मान जन आरोग्य मंदिरों को जनता के लिए समर्पित किया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शकूरपुर से इन स्वास्थ्य केंद्रों का शुभारंभ करते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रत्येक नागरिक को उसके घर और कॉलोनी के नजदीक बेहतर, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है। नए केंद्रों के शुरू होने से राजधानी में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और क्षमता दोनों में विस्तार होगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को केवल बड़े अस्पतालों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें स्थानीय स्तर तक पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। इसी सोच के तहत आयुष्मान जन आरोग्य मंदिरों का लगातार विस्तार किया जा रहा है, ताकि लोगों को छोटी बीमारियों और नियमित स्वास्थ्य जांच के लिए लंबी दूरी तय न करनी पड़े। उन्होंने विश्वास जताया कि इन केंद्रों के माध्यम से समय पर उपचार और बेहतर स्वास्थ्य प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सकेगा।

    सरकार के अनुसार, राजधानी में वर्तमान समय में 415 से अधिक आयुष्मान जन आरोग्य मंदिर संचालित हो रहे हैं। आने वाले समय में इनकी संख्या बढ़ाकर 1,100 से अधिक करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस योजना के विस्तार के साथ दिल्ली के अधिक से अधिक क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं का मजबूत नेटवर्क विकसित करने की तैयारी की जा रही है।

    इन स्वास्थ्य केंद्रों में ओपीडी सेवाओं के साथ मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य देखभाल, टीकाकरण, आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता तथा लगभग 80 प्रकार की निशुल्क जांच जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके अलावा सामान्य बीमारियों का उपचार, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए आवश्यक परामर्श भी दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि स्थानीय स्तर पर ऐसी सुविधाएं उपलब्ध होने से बड़े अस्पतालों पर मरीजों का दबाव भी कम होगा।

    स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने कहा कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर केवल उपचार केंद्र नहीं होंगे, बल्कि बीमारी की रोकथाम, स्वास्थ्य जागरूकता और शुरुआती स्तर पर रोगों की पहचान के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने बताया कि इन केंद्रों के माध्यम से नागरिकों को समय पर चिकित्सा सलाह और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे गंभीर बीमारियों की संभावना को शुरुआती स्तर पर ही कम किया जा सके।

    सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक स्थापित आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में बड़ी संख्या में अर्बन सब हेल्थ सेंटर और अर्बन प्राइमरी हेल्थ सेंटर शामिल हैं। इन केंद्रों का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को प्रत्येक मोहल्ले और कॉलोनी तक पहुंचाना है, ताकि लोगों को रोजमर्रा की स्वास्थ्य जरूरतों के लिए दूरस्थ अस्पतालों पर निर्भर न रहना पड़े। इससे बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है।

    सरकार का कहना है कि दिल्ली में आधुनिक, समावेशी और नागरिक-केंद्रित सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली विकसित करने के लिए लगातार बुनियादी ढांचे का विस्तार किया जा रहा है। आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का नेटवर्क इसी व्यापक योजना का हिस्सा है, जिसके माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी, सुलभ और भरोसेमंद बनाया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले वर्षों में इन केंद्रों का विस्तार राजधानी की प्राथमिक स्वास्थ्य व्यवस्था को नई मजबूती देगा और लोगों को उनके घर के आसपास ही गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

  • पूर्वी यूरोप से रिश्तों को नई मजबूती देने निकलेंगी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, तीन देशों के ऐतिहासिक दौरे में व्यापार, निवेश और सहयोग पर रहेगा विशेष जोर

    पूर्वी यूरोप से रिश्तों को नई मजबूती देने निकलेंगी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, तीन देशों के ऐतिहासिक दौरे में व्यापार, निवेश और सहयोग पर रहेगा विशेष जोर

    नई दिल्ली । राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 19 से 25 जुलाई 2026 तक मोल्दोवा, उत्तरी मैसेडोनिया और रोमानिया के महत्वपूर्ण राजकीय दौरे पर जाएंगी। यह यात्रा भारत की पूर्वी यूरोप के देशों के साथ बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता और बहुआयामी सहयोग को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। इस दौरान राष्ट्रपति विभिन्न देशों के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात करेंगी और राजनीतिक, आर्थिक, व्यापारिक तथा सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत बनाने पर चर्चा करेंगी।

    राष्ट्रपति अपने दौरे की शुरुआत 20 जुलाई को मोल्दोवा से करेंगी। यह किसी भारतीय राष्ट्रपति की मोल्दोवा की पहली आधिकारिक यात्रा होगी, जिससे दोनों देशों के संबंधों में एक नया अध्याय जुड़ने की उम्मीद है। यात्रा के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु मोल्दोवा की राष्ट्रपति माइया सैंडू के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता करेंगी। इसके अलावा वह वहां की संसद के अध्यक्ष इगोर ग्रोसु से मुलाकात करेंगी और भारत-मोल्दोवा संसदीय मैत्री समूह के सदस्यों से भी संवाद करेंगी। राष्ट्रपति बिजनेस फोरम को संबोधित करने के साथ भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात करेंगी।

    भारत और मोल्दोवा के बीच कृषि, स्वास्थ्य सेवाओं, औषधि उद्योग, सूचना प्रौद्योगिकी और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। सरकार का मानना है कि यह यात्रा इन क्षेत्रों में नए समझौतों और व्यावहारिक सहयोग का मार्ग प्रशस्त कर सकती है। साथ ही दोनों देशों के बीच आर्थिक और निवेश संबंधों को भी नई मजबूती मिलने की संभावना है।

    इसके बाद राष्ट्रपति 21 और 22 जुलाई को उत्तरी मैसेडोनिया की यात्रा करेंगी। यह भी किसी भारतीय राष्ट्रपति का पहला आधिकारिक दौरा होगा। इस दौरान वह राष्ट्रपति गोरडाना सिलजानोव्स्का-दावकोवा के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगी। इसके अलावा प्रधानमंत्री ह्रिस्टिजान मिकोस्की तथा वहां की संसद के शीर्ष नेतृत्व से भी उनकी मुलाकात निर्धारित है। राष्ट्रपति उत्तरी मैसेडोनिया की संसद को संबोधित करेंगी और भारत-उत्तरी मैसेडोनिया बिजनेस फोरम में भी हिस्सा लेंगी।

    दोनों देशों के बीच कृषि, फार्मास्यूटिकल्स, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, सूचना प्रौद्योगिकी तथा आईटी आधारित सेवाओं में सहयोग बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। दोनों पक्ष आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने और निवेश के अवसरों को बढ़ावा देने के लिए भी आपसी सहयोग मजबूत करने पर विचार करेंगे।

    दौरे के अंतिम चरण में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 23 से 25 जुलाई तक रोमानिया की यात्रा करेंगी। तीन दशक से अधिक समय बाद किसी भारतीय राष्ट्रपति का यह पहला आधिकारिक दौरा होगा। इस दौरान वह रोमानिया के राष्ट्रपति निकुशोर डैन, अंतरिम प्रधानमंत्री इली बोलोजान, सीनेट के अध्यक्ष, चैंबर ऑफ डेप्युटीज के अध्यक्ष और भारत-रोमानिया संसदीय मैत्री समूह के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगी। राष्ट्रपति भारत-रोमानिया बिजनेस फोरम को संबोधित करने के साथ वहां रह रहे भारतीय समुदाय के सदस्यों से भी संवाद करेंगी।

    रोमानिया को यूरोपीय संघ में भारत का एक महत्वपूर्ण साझेदार माना जाता है। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, ऊर्जा, शिक्षा और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते से भविष्य में आर्थिक संबंधों को और मजबूती मिलने की संभावना भी जताई जा रही है। राष्ट्रपति का यह तीन देशों का राजकीय दौरा भारत की सक्रिय कूटनीति, पूर्वी यूरोप के साथ गहरे होते संबंधों और वैश्विक स्तर पर रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।