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  • ओरिजिनल कॉन्सेप्ट का क्रेडिट न मिलने पर भड़का परेश रावल का गुस्सा, 'ओएमजी 2' के पीछे की कहानी का किया सनसनीखेज खुलासा

    ओरिजिनल कॉन्सेप्ट का क्रेडिट न मिलने पर भड़का परेश रावल का गुस्सा, 'ओएमजी 2' के पीछे की कहानी का किया सनसनीखेज खुलासा

    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता परेश रावल ने फिल्म ‘ओएमजी 2’ की स्क्रिप्टिंग और इसके ओरिजिनल कॉन्सेप्ट को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला दावा किया है। उन्होंने सार्वजनिक मंच पर अपना दर्द बयां करते हुए कहा है कि इस फिल्म का मूल विचार उनका था, जिसे उन्होंने निर्देशक अमित राय के साथ मिलकर तैयार किया था। अभिनेता का आरोप है कि बाद में जब इस प्रोजेक्ट में बदलाव किए गए तो उन्हें इस बात का क्रेडिट तक नहीं दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम और रचनात्मक मतभेदों के बाद ही उन्होंने खुद को इस बेहद सफल फ्रेंचाइजी के दूसरे हिस्से से पूरी तरह अलग कर लिया था।

    एक विशेष बातचीत के दौरान परेश रावल ने स्पष्ट किया कि उनकी मूल कहानी मुख्य रूप से पिता और पुत्र के संवेदनशील रिश्ते के इर्द-गिर्द बुने गए एक सामाजिक ड्रामा पर आधारित थी। इस ड्रामा में स्कूली शिक्षा, सेक्स एजुकेशन, सामाजिक बदनामी और अपने बच्चे के न्याय के लिए माता-पिता द्वारा लड़ी जाने वाली कानूनी व मानसिक लड़ाई को केंद्र में रखा गया था। उन्होंने बताया कि इस कहानी के शुरुआती प्रारूप में किसी भी प्रकार के दैवीय या भगवान के किरदार का कोई स्थान नहीं था। इसे कभी भी साल 2012 में आई सुपरहिट फिल्म ‘ओएमजी’ के सीधे सीक्वल या आध्यात्मिक उत्तराधिकारी के रूप में नहीं देखा गया था।

    अभिनेता ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि उनके लिए सबसे अधिक पीड़ादायक बात यह रही कि उनके इस मूल विचार को फिल्म की क्रेडिट लाइन में कोई स्थान नहीं मिला। पूरी फिल्म की टीम और इंडस्ट्री में उनका नाम तक कहीं नहीं लिया गया, जबकि फिल्म के मुख्य पहलुओं की नींव उन्होंने ही रखी थी। उनके अनुसार फिल्म जगत के कई प्रभावशाली लोग और निर्माता-निर्देशक इस सच से भलीभांति वाकिफ हैं कि इस कहानी का मुख्य विचार कहां से उत्पन्न हुआ था। उन्होंने दावा किया कि अमित राय और अक्षय कुमार के अलावा अजय देवगन, करण जौहर और सलमान खान जैसे बड़े सितारे भी जानते थे कि यह उनका विचार था।

    कहानी की पृष्ठभूमि को साझा करते हुए परेश रावल ने बताया कि उन्होंने फिल्म ‘रोड टू संगम’ के निर्देशक अमित राय के काम से प्रभावित होकर उनसे संपर्क किया था। उन्होंने अमित को एक ऐसे स्कूली छात्र की कहानी पर काम करने का सुझाव दिया था, जिसकी एक निजी हरकत का वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो जाता है। इसके बाद समाज और स्कूल प्रशासन उस बच्चे का बहिष्कार कर देते हैं। इस विषम परिस्थिति में बच्चे का पिता पूरी ताकत के साथ उसके सम्मान की रक्षा करने और समाज की संकीर्ण मानसिकता को अदालत में चुनौती देने के लिए खड़ा होता है।

    बाद में जब इस प्रोजेक्ट में अक्षय कुमार की एंट्री हुई, तो पूरी कहानी का ढांचा बदल दिया गया। परेश रावल के अनुसार अक्षय कुमार ने खुद उन्हें इस फिल्म में मुख्य भूमिका निभाने के लिए आमंत्रित किया था। हालांकि, स्क्रिप्ट में हुए बड़े बदलावों और मूल भावना के खत्म हो जाने के कारण उन्होंने इस प्रस्ताव को बेहद शालीनता से ठुकरा दिया। अभिनेता ने अक्षय कुमार को साफ कह दिया था कि यह वह फिल्म नहीं है जिसकी उन्होंने कल्पना की थी। अंततः फिल्म में परेश रावल की जगह पंकज त्रिपाठी को लिया गया और अक्षय कुमार ने फिल्म में भगवान शिव के दूत की भूमिका निभाई।

  • UN में भारत की मेंबरशिप की बात पर क्या बोला चीन, 4 ताकतवर देश पहले से ही साथ

    UN में भारत की मेंबरशिप की बात पर क्या बोला चीन, 4 ताकतवर देश पहले से ही साथ

    नई दिल्‍ली। भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की अस्थायी सदस्यता के लिए प्रचार अभियान की शुरुआत कर चुके हैं। अब भारत की इस दावेदारी पर चीन ने भी प्रतिक्रिया दे दी है। खास बात है कि चीन वीटो अधिकार प्राप्त सदस्य है।

    UNSC यानी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की अस्थायी सदस्यता के दावे पर अब चीन ने भी प्रतिक्रिया दे दी है। पड़ोसी मुल्क ने कहा है कि वह इस तरह की खबरों पर गौर कर रहा है। खास बात है कि पहले ही कई बड़े देश भारत का साथ दे रहे हैं।

    चीन की तरफ से यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर प्रचार अभियान की शुरुआत कर चुके हैं।
    क्या बोला चीन

    चीन ने गुरुवार को कहा कि उसने 2028-29 की अवधि के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की अस्थायी सदस्यता हासिल करने की भारत की दावेदारी से जुड़ी खबरों पर गौर किया है। सुरक्षा परिषद की अस्थायी सदस्यता के लिए चुनाव लड़ने की भारत की घोषणा पर चीन के रुख के बारे में पूछे जाने पर चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘चीन ने इससे जुड़ी खबरों पर गौर किया है।’
    क्या बोले जयशंकर

    विदेश मंत्री जयशंकर ने सोमवार को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में सुरक्षा परिषद की अस्थायी सदस्यता के लिए भारत के आधिकारिक प्रचार अभियान की शुरुआत की। इस कार्यक्रम में विभिन्न देशों के राजदूत, राजनयिक और अधिकारी शामिल हुए थे।

    जयशंकर ने अपने संबोधन में कहा था कि संयुक्त राष्ट्र के प्रति भारत का दृष्टिकोण ‘शांति अर्थात मानदंडों, विश्वास और सत्यनिष्ठा के जरिये समग्र प्रगति सुनिश्चित करने’ पर आधारित है।

    उन्होंने सुरक्षा परिषद में भारत के संभावित कार्यकाल की प्राथमिकताओं का भी विस्तार से उल्लेख किया था।
    चीन नहीं करता भारत का समर्थन

    चीन सुरक्षा परिषद के वीटो अधिकार प्राप्त पांच स्थायी सदस्यों में शामिल है लेकिन उसने अभी तक भारत की दावेदारी का समर्थन नहीं किया है। इसके विपरीत, पांच स्थायी सदस्यों में शामिल अन्य चार देश-अमेरिका, ब्रिटेन, रूस और फ्रांस-सुधार के बाद गठित होने वाली संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का स्पष्ट रूप से समर्थन कर चुके हैं।
    किस देश से है मुकाबला

    सुरक्षा परिषद में 2028-29 के कार्यकाल के लिए चुनाव अगले साल जून में होंगे। इसमें एशिया-प्रशांत समूह की एकमात्र सीट के लिए भारत और ताजिकिस्तान के बीच मुकाबला होगा।

    भारत पिछली बार 2021-22 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य बना था।

    यह संयुक्त राष्ट्र के 15 सदस्यीय इस शक्तिशाली निकाय में भारत का आठवां कार्यकाल था। इससे पहले भारत 1950-1951, 1967-1968, 1972-1973, 1977-1978, 1984-1985, 1991-1992 और 2011-2012 में सुरक्षा परिषद का सदस्य रह चुका है।
    सुरक्षा परिषद में नहीं हुआ खास सुधार

    भारत का कहना है कि UNSC का 80 साल पुराना ढांचा मौजूदा चुनौतियों से निपटने के लिहाज से उपयुक्त नहीं है। और इसी वजह से यह वैश्विक संस्था दुनिया भर में जारी संघर्षों से हो रही मानवीय पीड़ा को खत्म करने में प्रभावी साबित नहीं हुई।

    भारत ने यह भी कहा कि विकासशील देशों की प्राथमिकताओं को बेहतर ढंग से पूरा करने के लिए वैश्विक वित्तीय ढांचे में भी बदलाव होना चाहिए।

    स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने मंगलवार को कहा, ‘हाल के वर्षों में संयुक्त राष्ट्र को लेकर लोगों की धारणा नकारात्मक हुई है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में जारी संघर्षों में सुरक्षा परिषद प्रभावी ढंग से हस्तक्षेप नहीं कर पाई है।’

  • चीन पर निर्भरता होगी कम: 51 अरब डॉलर के उत्पाद देश में बनाने की तैयारी, क्या है सरकार का प्लान?

    चीन पर निर्भरता होगी कम: 51 अरब डॉलर के उत्पाद देश में बनाने की तैयारी, क्या है सरकार का प्लान?


    नई दिल्ली। सरकार ने घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और चीन पर आयात निर्भरता घटाने के लिए 51 अरब डॉलर मूल्य के ऐसे प्रमुख आयातित उत्पादों की पहचान की है, जिनका उत्पादन देश में किया जा सकता है। मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान को गति देने के लिए आयातित वस्तुओं का व्यापक आकलन किया गया।

    मार्च, 2026 को समाप्त वित्त वर्ष में भारत ने 775 अरब डॉलर का आयात किया। इसमें करीब 398 अरब डॉलर के उत्पाद देश में बनाए जा सकते थे। सत्रों के मुताबिक, उत्पादों का चयन आर्थिक मजबूती, आपूर्ति शृंखला और चीन जैसे देशों पर निर्भरता कम करने को ध्यान में रखकर किया गया है।
    विनिर्माण के लिए किन उत्पादों की हुई पहचान?
    विनिर्माण क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण जिन उत्पादों की पहचान की गई है, उनमें कपड़े, जूते-चप्पल, इलेक्ट्रिक वाहन, सौर पैनल और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में उपयोग वाले कच्चे माल एवं कलपुर्जे शामिल हैं। इस सूची में शामिल करीब 100 उत्पादों पर तत्काल कार्रवाई होगी। इनका घरेलू उत्पादन बढ़ाने, निवेश आकर्षित करने और प्रोत्साहन योजनाओं के जरिये विनिर्माण क्षमता विकसित करने की रणनीति बनाई जा रही है।

    सिरदर्द बन रहा चीन से होने वाला आयात?
    भारत का 2025-26 में चीन से आयात 132 अरब डॉलर था। यह अन्य देशों के मुकाबले सबसे अधिक है। इसमें फैक्टरियों के लिए जरूरी इनपुट और मशीनरी भी शामिल हैं। सरकार ने पाया, पिछले साल आयातित 48.3 करोड़ डॉलर के जूतों का सोल भारत में बनने में दो हफ्ते लगते हैं, जबकि चीन में तीन से पांच दिन लगते हैं।

    केंद्र का मकसद ताइवान, दक्षिण कोरिया, जर्मनी और इटली की फर्मों संग संयुक्त उद्यम बनाकर इस अंतर को पाटना है। अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में भी ऐसे ही हालात हैं। चीनी सोलर फोटोवोल्टिक सेल घरेलू निर्माताओं पर भारी पड़ रहे हैं।

  • SpaceX: लॉन्चिंग से 1 सेकंड पहले थमा मस्क की कंपनी का मिशन… पैड पर रुकी स्टारशिप की उड़ान

    SpaceX: लॉन्चिंग से 1 सेकंड पहले थमा मस्क की कंपनी का मिशन… पैड पर रुकी स्टारशिप की उड़ान


    वाशिंगटन।
    एलन मस्क (Elon Musk) की कंपनी स्पेसएक्स (SpaceX) की मेगा रॉकेट स्टारशिप (Mega Rocket Starship) गुरुवार को अपने 13वें परीक्षण मिशन के लिए उड़ान भरने से महज एक सेकंड पहले ही रुक गई। लॉन्च से ठीक पहले कुछ इंजनों के सही तरीके से चालू न होने के कारण सिस्टम ने स्वतः लॉन्च को निरस्त कर दिया। इसके बाद रॉकेट को लॉन्च पैड पर ही सुरक्षित रखा गया और ईंधन निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।


    आखिर लॉन्च से ठीक पहले क्या गड़बड़ी हुई?

    स्पेसएक्स ने बताया कि अब यह पता लगाया जाएगा कि आखिर तकनीकी खराबी कहां हुई, उसके बाद ही अगली लॉन्च की तारीख तय की जाएगी। 407 फीट (124 मीटर) ऊंची स्टारशिप 33 मुख्य इंजनों से लैस दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे शक्तिशाली रॉकेट है। यह इसका 13वां परीक्षण मिशन था।


    इंजन स्टार्ट होने के बाद अचानक क्यों रुक गया मिशन?

    स्पेसएक्स के लाइव वेबकास्ट में देखा गया कि निर्धारित उड़ान से तीन सेकंड पहले इंजनों के प्रज्वलन (इग्निशन) की प्रक्रिया शुरू हुई। लॉन्च पैड के ऊपर उड़ रहे ड्रोन कैमरे में यह दृश्य साफ दिखाई दिया। हालांकि, जिन इंजनों ने काम करना शुरू किया था, वे अचानक बंद हो गए और रॉकेट लॉन्च पैड से बंधा ही रह गया। इसके तुरंत बाद लॉन्च टीम ने रॉकेट से ईंधन निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी।


    एलन मस्क ने अगली लॉन्च कोशिश को लेकर क्या कहा?

    एलन मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि उम्मीद है कि अगली लॉन्च कोशिश कुछ ही दिनों में की जाएगी।


    मिशन में क्या-क्या भेजा जाना था?

    लॉन्च से पहले तक सब कुछ स्पेसएक्स के पक्ष में दिखाई दे रहा था। मौसम भी पूरी तरह अनुकूल था, लेकिन आंशिक इंजन इग्निशन के बाद मिशन रोकना पड़ा। इस उड़ान के दौरान स्पेसएक्स के 20 नए और सबसे उन्नत स्टारलिंक उपग्रह अंतरिक्ष में छोड़े जाने थे। लगभग एक घंटे की इस उड़ान में इन उपग्रहों को पहले से कक्षा में मौजूद स्टारलिंक उपग्रहों से संपर्क स्थापित करने के साथ-साथ स्टारशिप की हीट शील्ड की तस्वीरें भी लेनी थीं। इस मिशन में न तो पहले चरण के बूस्टर और न ही अंतरिक्ष यान को वापस लाने की योजना थी। दोनों को अंततः समुद्र में गिरना था।


    नासा के लिए स्टारशिप क्यों है बेहद अहम?

    नासा आने वाले वर्षों में अपने अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर उतारने के लिए स्टारशिप पर भरोसा कर रहा है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने स्पेसएक्स और जेफ बेजोस की कंपनी ब्लू ओरिजिन को ऐसे लूनर लैंडर विकसित करने और उड़ाने का जिम्मा दिया है, जिनकी मदद से आधी सदी से अधिक समय बाद इंसानों की चंद्रमा पर वापसी कराई जाएगी।


    आर्टेमिस मिशन की तैयारी पर क्या पड़ेगा असर?

    दोनों कंपनियों को अगले वर्ष तक अपने-अपने लूनर लैंडर, स्टारशिप और ब्लू मून उड़ान के लिए तैयार रखने होंगे, ताकि हाल ही में घोषित आर्टेमिस-III मिशन के अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी की कक्षा में अपने कैप्सूल की इन लैंडरों के साथ डॉकिंग का अभ्यास कर सकें। इसके बाद आर्टेमिस-IV मिशन, जिसकी योजना 2028 से पहले नहीं है, में इन्हीं लैंडरों में से किसी एक की मदद से दो अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में उतारा जाएगा।

  • तपती रातें बन रहीं गंभीर स्वास्थ्य संकट…. हर व्यक्ति सालाना गंवा रहा 93 घंटे की नींद

    तपती रातें बन रहीं गंभीर स्वास्थ्य संकट…. हर व्यक्ति सालाना गंवा रहा 93 घंटे की नींद

    नई दिल्ली। दिन के बढ़ते तापमान (Rising Temperatures) के साथ अब रातों की गर्मी (Heat) भी गंभीर स्वास्थ्य संकट (Health crisis) बनती जा रही है। क्लाइमेट सेंट्रल (Climate Central) की नई वैश्विक रिपोर्ट के अनुसार, गर्म और उमस भरी रातों के कारण देश के कई हिस्सों में लोग हर साल दर्जनों घंटे की नींद गंवा रहे हैं। दक्षिण भारत इस समस्या का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि जलवायु परिवर्तन अब केवल मौसम का विषय नहीं रह गया, बल्कि यह लोगों की नींद, स्वास्थ्य और कार्यक्षमता को प्रभावित कर रहा है।

    रिपोर्ट के मुताबिक पुडुचेरी के लोग वर्षभर में औसतन 92 घंटे की नींद खो रहे हैं। आंध्र प्रदेश में 88.6 घंटे और केरल में 88.3 घंटे की नींद का नुकसान दर्ज किया गया है। तमिलनाडु, कर्नाटक और तेलंगाना में भी स्थिति चिंताजनक है, जहां लगातार बढ़ती रात्रिकालीन गर्मी लोगों को पर्याप्त आराम नहीं करने दे रही। तमिलनाडु में हर व्यक्ति की लगभग 7.9 घंटे और कर्नाटक में 7.8 घंटे की अतिरिक्त नींद केवल बदलती जलवायु के कारण कम हो रही है।


    बड़े शहरों में भी गर्म रातों का दिख रहा प्रभाव

    बड़े शहरों में भी गर्म रातों का प्रभाव तेजी से बढ़ा है। चेन्नई इस सूची में सबसे ऊपर है, जहां एक व्यक्ति सालाना औसतन 93 घंटे तक कम सो पा रहा है। मुंबई में यह आंकड़ा 84 घंटे, कोलकाता में 80 घंटे और दिल्ली में 66 घंटे है। बंगलूरू में जलवायु परिवर्तन के कारण अतिरिक्त नींद की कमी सबसे अधिक दर्ज की गई है, जबकि हैदराबाद, अहमदाबाद और पुणे में भी इसका उल्लेखनीय प्रभाव सामने आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण और कंक्रीट के फैलाव ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है।

    नींद की कमी से हो सकती है गंभीर बीमारियां
    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि वयस्कों के लिए प्रतिदिन 7 से 9 घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद आवश्यक है। जब रात का तापमान अधिक रहता है तो शरीर दिनभर की गर्मी से उबर नहीं पाता और गहरी नींद लेने में कठिनाई होती है। लंबे समय तक ऐसी स्थिति बने रहने पर उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, स्ट्रोक, मधुमेह, मोटापा, मानसिक तनाव, अवसाद, याददाश्त में कमी तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। पर्याप्त नींद नहीं मिलने से कार्यक्षमता और निर्णय लेने की क्षमता भी प्रभावित होती है।


    पांच दशकों में तेजी से बढ़ा खतरा

    रिपोर्ट में भारत सहित दुनिया के 1,338 शहरों का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन के अनुसार 1970 के दशक की तुलना में जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाली नींद की कमी लगभग दोगुनी हो चुकी है। वर्ष 2020 से 2025 के बीच दुनिया भर में प्रत्येक व्यक्ति ने औसतन 56 घंटे की नींद गर्म रातों के कारण खोई, जिसमें 10 प्रतिशत से अधिक कमी का संबंध सीधे जलवायु परिवर्तन से पाया गया। वैज्ञानिकों का कहना है कि जीवाश्म ईंधनों के बढ़ते उपयोग और ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन ने तापमान में लगातार वृद्धि की है। यदि उत्सर्जन पर प्रभावी नियंत्रण नहीं किया तो आने वाले वर्षों में यह समस्या और गंभीर होगी।

  • त्योहारी सीजन में बिगड़ा रसोई का बजट….! एक माह में 8% महंगा हुआ गेहूं, खाद्य तेल में भी तेजी के आसार….

    त्योहारी सीजन में बिगड़ा रसोई का बजट….! एक माह में 8% महंगा हुआ गेहूं, खाद्य तेल में भी तेजी के आसार….


    नई दिल्ली।
    त्योहारी सीजन (Festive Season) से ठीक पहले रसोई का बजट (Kitchen Budget) फिर बिगड़ सकता है। घरेलू बाजार (Domestic Market) में पिछले एक माह में गेहूं की कीमतें (Wheat prices) 8 फीसदी से ज्यादा बढ़ चुकी हैं। खाद्य तेलों की कीमतों में भी तेजी आने की पूरी आशंका है।

    काले सागर में आपूर्ति के बढ़ते जोखिमों के कारण शिकागो गेहूं वायदा पिछले सत्र में 5 फीसदी उछलने के बाद दो महीने के उच्चतम स्तर के करीब पहुंच गया है। यूक्रेन के बंदरगाह पर हुए हमलों से गेहूं निर्यात प्रभावित हुआ है। दूसरी ओर, अजोव सागर और केर्च जलडमरूमध्य में प्रतिबंध से रूस का गेहूं निर्यात भी मुश्किल में आ गया है। इन व्यवधानों ने वैश्विक गेहूं बाजारों में एक जोखिम प्रीमियम जोड़ दिया है।

    गेहूं की वैश्विक कीमतों में आए इस उछाल का असर भारतीय बाजार पर भी हुआ है। इस दौरान इंदौर मंडी में गेहूं के दाम सबसे अधिक 8.44 फीसदी तक बढ़े हैं। दिल्ली, कानपुर और कोटा जैसी प्रमुख मंडियों में कीमतें औसतन 3.5-4 फीसदी के बीच बढ़ी हैं।


    गेहूं उत्पादन हो सकता है प्रभावित

    गेहूं उत्पादन का परिदृश्य प्रतिकूल मौसम की स्थिति के प्रति संवेदनशील बना हुआ है, क्योंकि बढ़ता तापमान, बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि पैदावार एवं अनाज की गुणवत्ता के लिए जोखिम पैदा कर रहे हैं। मौसम में हालिया व्यवधानों के कारण व्यापारियों ने अगले रबी सीजन के उत्पादन पूर्वानुमान को 11.35 करोड़ टन से घटाकर 11.40 करोड़ टन कर दिया है। यह पिछले वर्ष की तुलना में अधिक उत्पादन के बावजूद शुरुआती उम्मीदों से कम है।


    खाद्य तेलों में तेजी के चार कारण

    – इस साल सोयाबीन की खेती 6 फीसदी तक कम रहने की आशंका है। 15 दिनों में बारिश में सुधार नहीं हुआ, तो प्रति हेक्टेयर उत्पादन भी 5 से 7 फीसदी घट सकता है। 
    – वैश्विक बाजारों में पाम तेल की उपलब्धता में कमी और घरेलू बाजार में सरसों व सोयाबीन के पर्याप्त स्टॉक के चलते भारत ने आयात कम किया है, जिससे आने वाले समय में घरेलू स्टॉक पर दबाव बढ़ेगा।
    – एफएमसीजी कंपनियों और स्टॉकिस्टों की मांग थोड़ी सुस्त जरूर है। लेकिन, अगस्त के पहले पखवाड़े से बाजार में रिकवरी आएगी और दिवाली तक त्योहारी मांग चरम पर होगी। यह मांग कीमतों को और ऊपर धकेलेगी।
    – वैश्विक स्तर पर बायोफ्यूल में पाम तेल का इस्तेमाल बढ़ने से सोया तेल और सूरजमुखी तेल महंगा हुआ है। रुपये की कमजोरी ने रिफाइनर्स के लिए आयात लागत बढ़ा दिया है।


    कितने बढ़ सकते हैं खाद्य तेल के दाम?

    विशेषज्ञों के मुताबिक, कीमतों में अचानक कोई बड़ा विस्फोट भले न हो, लेकिन आने वाले दिनों में कीमतों में तेजी बनी रहेगी। सूरजमुखी तेल 1,580 से 1,600 प्रति क्विंटल के स्तर पर बनी रहेगी। यानी इसके दाम 160 रुपये प्रति लीटर से ऊपर बने रहने के आसार है। सोयाबीन तेल का दाम 1,420 रुपये के मजबूत स्तर पर बरकरार रहने की उम्मीद है, जिससे इसमें मंदी की गुंजाइश खत्म हो गई है। पाम तेल काफी अच्छे डिस्काउंट पर आ चुका है, इसलिए 1,340 से 1,350 के स्तर पर इसमें तगड़ी खरीदारी लौटती दिख रही है।

  • भूकंप के तेज झटकों से हिली न्यूजीलैंड की धरती, 5.9 रही तीव्रता….. सुनामी का अलर्ट

    भूकंप के तेज झटकों से हिली न्यूजीलैंड की धरती, 5.9 रही तीव्रता….. सुनामी का अलर्ट


    आकलैंड।
    दक्षिणी-पश्चिमी प्रशांत महासागर (Southwestern Pacific Ocean) में स्थित न्यूजीलैंड (New Zealand) में गुरुवार, 16 जुलाई को) भूकंप (Earthquake) के तेज झटके महसूस किए गए हैं। अधिकारियों ने बताया है कि रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 5.9 (Earthquake magnitude 5.9) थी। अधिकारियों के मुताबिक, गुरुवार को साउथ आइलैंड के पश्चिमी तट पर 5.9 तीव्रता के भूकंप के बाद सुनामी की चेतावनी जारी की गई है और लोगों से तुरंत ऊंचे इलाकों में जाने को कहा गया है। जानकारी के मुताबिक भूकंप का केंद्र ते अनाउ शहर से करीब 40 किलोमीटर उत्तर में था। यह इलाका फियोर्डलैंड जैसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थल का प्रवेश द्वार माना जाता है।

    न्यूजीलैंड के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी (NEMA) ने लोगों से समुद्री तट और तटीय इलाकों से दूर जाने की सलाह दी है और कहै है कि जितना जल्दी संभव हो सके सबसे नजदीकी ऊंचे स्थान पर जाकर शरण ले लें। फिलहाल, इस भूकंप से किसी तरह का जनहानि की खबर नहीं है। इस बीच, अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) और जर्मनी के जियोसाइंस रिसर्च सेंटर (GFZ) ने इस भूकंप की तीव्रता 5.9 दर्ज की है। दोनों एजेंसियों के अनुसार भूकंप का केंद्र 50 किलोमीटर से अधिक गहराई में था। सुनामी के इस अलर्ट का भारत पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है क्योंकि वह भारतीय तट से करीब 12000 किलोमीटर की दूरी है।


    अब सुनामी अलर्ट भी कैंसिल

    रॉयटर्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि एजेंसी ने शुरू में भूकंप की तीव्रता 6.3 आंकी थी, जो लोकल टाइम के हिसाब से रात 9.14 बजे (0914 GMT) आया था, फिर इसे घटाकर 5.9 कर दिया गया। अब एजेंसी ने सुनामी अलर्ट भी कैंसिल कर दिया है, NEMA ने कहा कि उसे उम्मीद है कि तटीय इलाकों में “तेज़ और अजीब लहरें और किनारे पर अचानक लहरें” आएंगी। उसने कहा कि लोगों को पानी से, बीच से दूर चले जाना चाहिए, और बंदरगाहों, मरीना और नदियों से दूर रहना चाहिए।


    झटका लंबा और तेज था

    लोकल रहने वाली मेलिन पुयात, जो ते आनु के फियोर्डलैंड होटल की ड्यूटी मैनेजर हैं ने बताया कि भूकंप “थोड़ा तेज़” था और उन्हें एक मिनट तक कंपन महसूस हुआ। उन्होंने कहा, “होटल में कंपन हो रहा है, लेकिन होटल में कुछ भी हिला नहीं।” एक और स्थानीय निवासी ने लोकल आउटलेट ओटागो डेली टाइम्स को बताया कि भूकंप का झटका लंबा और तेज़ था और ट्रेन जैसा लग रहा था। उन्होंने कहा, “दीवारें ज़रूर हिल रही थीं।”

  • यूक्रेन में जेलेंस्की सरकार में बड़ा फेरबदल…. सेरगी कोरेट्स्की बने नए प्रधानमंत्री

    यूक्रेन में जेलेंस्की सरकार में बड़ा फेरबदल…. सेरगी कोरेट्स्की बने नए प्रधानमंत्री


    कीव।
    रूस (Russia) संग जारी युद्ध (War) के बीच यूक्रेन (Ukraine) में एक बार फिर बड़ा सियासी बदलाव हुआ है। राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की (President Volodymyr Zelenskyy) के भरोसेमंद और ऊर्जा क्षेत्र के दिग्गज सेरगी कोरेत्स्की (48) (Sergi Koretsky) को देश का नया प्रधानमंत्री (Prime Minister) बना दिया गया है। यूक्रेन की संसद ने गुरुवार को व्यापक मतदान के बाद कोरेत्स्की को 289 वोटों से मंजूरी दे दी। यह नियुक्ति जेलेंस्की सरकार के उस बड़े फेरबदल का हिस्सा है, जिसका मकसद युद्ध के बीच ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और यूरोपीय संघ की राह को मजबूत करना है।

    बता दें कि राष्ट्रपति जेलेंस्की ने पिछले कुछ महीनों से सरकार में बड़े स्तर पर फेरबदल शुरू किया है। कोरेत्स्की को नामित करते हुए जेलेंस्की ने कहा था कि ऊर्जा क्षेत्र में उनके प्रदर्शन को देखते हुए वे आगामी सर्दियों में युद्ध प्रभावित देश की मदद के लिए सबसे सही विकल्प हैं। संसद में मतदान से पहले कोरेत्स्की ने सांसदों को संबोधित करते हुए अपनी प्राथमिकताओं का खुलासा किया।


    कोरेत्स्की की तीन बड़ी प्राथमिकताएं

    – यूक्रेन की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करना
    – आर्थिक स्थिरता को पक्का करना
    – यूरोपीय संघ में शामिल होने की प्रक्रिया को तेज करना


    कौन हैं कोरेत्स्की?

    ट्रेनिंग से इंजीनियर और अर्थशास्त्री सेरगी कोरेत्स्की राजनीतिक दलों से पूरी तरह दूर रहे हैं और उनके पास कोई पूर्व सरकारी अनुभव नहीं है। लेकिन ऊर्जा क्षेत्र में दो दशक से ज्यादा का उनका अनुभव उन्हें इस पद के लिए खास बनाता है।


    करियर

    मई 2025 से नैफ्तोगाज कंपनी के सीईओ के रूप में कार्यरत, जहां वे देश के गैस उत्पादन, आयात और वितरण की पूरी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इससे पहले यूक्रेन की सबसे बड़ी तेल उत्पादक कंपनी उक्रनाफ्टा के प्रमुख रहे। शुरुआती दौर में वेस्टर्न ऑयल ग्रुप का नेतृत्व, कॉन्टिनम ग्रुप के सीईओ और देश की प्रमुख ईंधन स्टेशन चेन WOG का प्रबंधन किया। पश्चिमी शहर लुत्स्क में जन्मे कोरेत्स्की ने निजी क्षेत्र में एक सफल कॉफी चेन व्यवसाय भी शुरू किया था।


    सबसे बड़ी चुनौती

    नए प्रधानमंत्री के सामने सबसे कठिन चुनौती देश के ऊर्जा ढांचे को आगामी सर्दियों के लिए तैयार करना है। पिछले कई महीनों से रूसी मिसाइल और ड्रोन हमलों ने यूक्रेन के बिजली उत्पादन केंद्रों, सबस्टेशनों और गैस पाइपलाइनों को भारी नुकसान पहुंचाया है। राष्ट्रपति जेलेंस्की ने सर्दियों की तैयारी को सरकार की सबसे ऊंची प्राथमिकता बताया है। कोरेत्स्की को उम्मीद है कि उनके ऊर्जा क्षेत्र के गहरे अनुभव से बिजली और गैस आपूर्ति को स्थिर रखा जा सकेगा, ताकि आम लोगों को सर्दी के मौसम में और कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।

  • भाजपा में बड़े संगठनात्मक बदलाव की तैयारी, नितिन नवीन की टीम में अनुभवी नेताओं को मिल सकती है अहम जिम्मेदारी

    भाजपा में बड़े संगठनात्मक बदलाव की तैयारी, नितिन नवीन की टीम में अनुभवी नेताओं को मिल सकती है अहम जिम्मेदारी


    नई दिल्ली। भाजपा संगठन में जल्द ही बड़े स्तर पर बदलाव देखने को मिल सकता है। पार्टी नेतृत्व राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम को युवा चेहरों के साथ अनुभवी नेताओं के संतुलन से तैयार करने की कवायद में जुटा है। सूत्रों के मुताबिक, कुछ केंद्रीय मंत्रियों, पूर्व केंद्रीय मंत्रियों और संगठन में लंबे समय तक काम कर चुके नेताओं को राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं।

    भाजपा का फोकस आने वाले चुनावों को देखते हुए संगठन को और मजबूत करने पर है। अगले छह महीने में पार्टी को पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों का सामना करना है, जिनमें चार राज्यों में भाजपा की सरकारें हैं। ऐसे में नेतृत्व संगठनात्मक ढांचे को अधिक सक्रिय और प्रभावी बनाने की तैयारी कर रहा है। पार्टी की रणनीति नए नेतृत्व को आगे बढ़ाने के साथ-साथ अनुभवी नेताओं के मार्गदर्शन में उन्हें तैयार करने की है। इसी दिशा में राज्यों में संगठनात्मक बदलाव के बाद अब राष्ट्रीय स्तर पर नई टीम के गठन की प्रक्रिया चल रही है।

    नितिन नवीन के साथ अनुभवी चेहरों को मिलेगी जगह
    भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन राष्ट्रीय राजनीति में अपेक्षाकृत नए हैं, इसलिए पार्टी उनके साथ संगठन का अनुभव रखने वाले नेताओं को जोड़ना चाहती है। सूत्रों के अनुसार, पूर्व में संगठन में जिम्मेदारी संभाल चुके कई सांसदों को भी राष्ट्रीय टीम में शामिल किया जा सकता है। मौजूदा संगठन में काम कर रहे करीब 4 से 5 नेताओं को पदोन्नति देकर नई जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना है। वहीं, लगभग आधा दर्जन ऐसे सांसदों पर भी विचार चल रहा है, जिनका संगठनात्मक अनुभव पार्टी के लिए उपयोगी हो सकता है।

    प्रधानमंत्री और वरिष्ठ नेताओं की नजर
    नई टीम को लेकर पार्टी के शीर्ष स्तर पर मंथन जारी है। सूत्रों के मुताबिक, इस प्रक्रिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य वरिष्ठ नेता भी शामिल हैं। चूंकि आने वाले समय में सरकार में भी बदलाव की संभावना जताई जा रही है, इसलिए कुछ प्रमुख नेताओं को संगठन की जिम्मेदारी सौंपने की रणनीति पर भी विचार किया जा रहा है।

    महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर
    भाजपा के नए संगठन में केंद्रीय पदाधिकारियों के साथ-साथ राज्यों के प्रभारी, मोर्चों के अध्यक्ष और राष्ट्रीय कार्यकारिणी का भी गठन किया जाना है। इसी वजह से नामों को अंतिम रूप देने में समय लग रहा है। भाजपा के संविधान के अनुसार राष्ट्रीय कार्यकारिणी में कम से कम 25 प्रतिशत नए सदस्यों को शामिल करना होता है। हालांकि पार्टी इससे अधिक नए चेहरों को भी मौका दे सकती है।

    महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी पार्टी विशेष ध्यान दे रही है। भाजपा संविधान के अनुसार केंद्रीय पदाधिकारियों में 33 प्रतिशत महिलाओं की हिस्सेदारी का प्रावधान है। हालांकि यदि यह लक्ष्य पूरा नहीं हो पाता है, तब भी इस बार पहले की तुलना में अधिक महिलाओं को जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना है। अनुमान है कि संगठन में महिलाओं की भागीदारी 20 से 25 प्रतिशत तक हो सकती है।

    नई टीम के गठन के जरिए भाजपा एक तरफ अनुभवी नेताओं का सहारा लेना चाहती है, वहीं दूसरी ओर भविष्य के नेतृत्व को तैयार करने की रणनीति पर भी काम कर रही है।

  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: गणना टीम में शामिल होते ही मनीष बना गिरोह का सरगना, CCTV से खुल रहे राज

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: गणना टीम में शामिल होते ही मनीष बना गिरोह का सरगना, CCTV से खुल रहे राज


    अयोध्या। श्रीराम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ ही आरोपियों की भूमिका को लेकर नए खुलासे सामने आ रहे हैं। जांच में सामने आया है कि रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू का भतीजा मनीष यादव गणना टीम में शामिल होने के बाद चोरी करने वाले गिरोह का अहम हिस्सा बन गया था।

    एसआईटी जांच के मुताबिक, सीसीटीवी फुटेज में चढ़ावे की नोटों की गड्डियां ले जाते हुए तीन लोगों की भूमिका स्पष्ट रूप से सामने आई है। इनमें अविनाश शुक्ला, मनीष यादव और रमाशंकर मिश्रा शामिल हैं। आरोप है कि ये लोग चढ़ावे की रकम बाहर ले जाते थे, जबकि तीन अन्य लोग घेरा बनाकर सीसीटीवी कैमरों की नजर से बचाने में मदद करते थे।

    भर्ती के कुछ ही दिनों बाद CCTV में कैद हुआ मनीष
    एसआईटी रिपोर्ट के अनुसार, मनीष यादव की गणनाकर्मी पद पर नियुक्ति उसके ताऊ रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू की सिफारिश पर हुई थी। बताया गया है कि टिन्नू ने मनीष की भर्ती के लिए दस्तावेज एसबीआई के रत्नेश चतुर्वेदी को उपलब्ध कराए थे। इसके बाद सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज के माध्यम से संविदा प्रक्रिया पूरी की गई। रिकॉर्ड के अनुसार, मनीष यादव की भर्ती 15 अप्रैल 2026 को हुई थी। इसके करीब 50 दिन के भीतर ही 11 मई 2026 की सीसीटीवी फुटेज में वह चढ़ावे की गड्डियां ले जाते हुए दिखाई दिया।

    50 दिन में मिली बड़ी भूमिका पर उठे सवाल
    जांच में यह भी सामने आया है कि रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू को सीधे तौर पर चोरी करते हुए नहीं पकड़ा गया है, लेकिन आशंका जताई जा रही है कि उसने अपने भतीजे मनीष को इस काम में आगे किया। जांच एजेंसियों का कहना है कि सामान्य तौर पर किसी नए कर्मचारी को किसी व्यवस्था को समझने में समय लगता है, लेकिन मनीष के मामले में भर्ती के कुछ ही दिनों बाद चोरी की गतिविधियों में शामिल होने के आरोप सामने आए हैं। इसी वजह से उसकी नियुक्ति को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

    अविनाश के पास मिली सबसे ज्यादा संपत्ति
    एसआईटी को 27 अप्रैल से 5 जून तक की सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध हुई, जिसकी जांच के बाद चढ़ावा चोरी के कई पहलुओं का खुलासा हुआ। जांच के अनुसार, सबसे अधिक संपत्ति और नकदी अविनाश शुक्ला के पास से बरामद हुई।

    बताया गया है कि मनीष यादव अविनाश के सहयोगी के रूप में काम कर रहा था, जबकि अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडेय पर भी मदद करने का आरोप है। एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, जांच से संकेत मिलते हैं कि मनीष को गणना कक्ष की जिम्मेदारी मिलने के बाद गिरोह में शामिल किया गया और कुछ समय बाद उसने चोरी की गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू कर दी।

    टिन्नू की भूमिका भी जांच के दायरे में
    जांच के मुताबिक, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां पहले रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू के पास थीं। परिवारिक संबंधों के कारण मनीष की गणना कक्ष में पहुंच आसान हुई और पहले से सक्रिय आरोपियों के संपर्क में आने के बाद वह कथित तौर पर गिरोह का हिस्सा बन गया।

    टिन्नू और मनीष की पुलिस रिमांड की मांग
    अब पुलिस ने रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू और मनीष यादव की सात दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड मांगी है। मामले के विवेचक और अयोध्या क्षेत्राधिकारी आशुतोष तिवारी ने विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की अदालत में विशेष अभियोजन अधिकारी के माध्यम से आवेदन दिया है। पुलिस का कहना है कि दोनों आरोपियों से पूछताछ के दौरान मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्यों और संभावित बरामदगी की जानकारी मिल सकती है। अदालत ने इस आवेदन पर सुनवाई के लिए शुक्रवार की तारीख तय की है।

    79 लाख बरामदगी और 3 करोड़ की आशंका के बीच सवाल
    राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में बरामद रकम को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। शुरुआती जानकारी में करीब 79 लाख रुपये बरामद होने की बात सामने आई थी, जिसे पुलिस को सौंपा गया था। वहीं, राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने बाद में करीब 3 करोड़ रुपये की चोरी की आशंका जताई थी। अब जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि तीन करोड़ रुपये के अनुमान का आधार क्या था।

    जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह आंकड़ा दानपात्र की गिनती, ऑडिट रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज, आरोपियों से पूछताछ या किसी अन्य साक्ष्य के आधार पर सामने आया था। इस मामले में आगे की जांच के बाद ही पूरी तस्वीर साफ हो सकेगी।