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  • भिंड विवाद: TI नशे में पकड़े गए, कर्नल ने एसपी से सख्त कार्रवाई की मांग की

    भिंड विवाद: TI नशे में पकड़े गए, कर्नल ने एसपी से सख्त कार्रवाई की मांग की



    नई दिल्ली। मिहोना थाना प्रभारी टीआई विजय केन और रिटायर्ड सूबेदार मेज़र राकेश सिंह कुशवाहा के बीच विवाद अब तूल पकड़ चुका है। यह मामला तब सामने आया जब आर्मी के पूर्व जवान और वर्तमान पुलिस अधिकारी के बीच कथित दुर्व्यवहार की खबर आर्मी अधिकारियों तक पहुंची। शनिवार को ग्वालियर से आर्मी के डिप्टी कमांडेंट कर्नल विशाल मिहोना थाने पहुंचे और पुलिस जवानों से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली।

    कर्नल ने थाने में मौजूद पुलिस कर्मियों से विवाद के विवरण के साथ कुछ जवानों के बयान भी दर्ज किए। इसके बाद कर्नल ने सीधे टीआई विजय केन के आवास का दौरा किया। वहां उन्होंने पाया कि टीआई नशे की हालत में थे और ठीक से संवाद करने की स्थिति में नहीं थे। कर्नल ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता बताया और कहा कि ड्यूटी के दौरान शराब पीना किसी भी अधिकारी के लिए स्वीकार्य नहीं है।

    इस गंभीर मामले को लेकर कर्नल ने भिंड के एसपी असित यादव से करीब 35 मिनट तक मुलाकात की और सख्त कार्रवाई की मांग की। कर्नल ने स्पष्ट कहा कि आर्मी के पूर्व जवान के साथ दुर्व्यवहार और ड्यूटी के दौरान शराब पीने जैसी घटनाओं को गंभीरता से लेना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इस मामले की रिपोर्ट आर्मी के वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी जाएगी और पुलिस की कार्रवाई पर निगरानी रखी जाएगी।

    एसपी असित यादव ने बताया कि टीआई विजय केन को फिलहाल लाइन अटैच कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि पहले भी टीआई के शराब पीने की शिकायतें आ चुकी हैं और पूरे मामले की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने पर दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

    मिहोना थाना में इस विवाद ने स्थानीय प्रशासन और आर्मी अधिकारियों दोनों की चिंता बढ़ा दी है। कर्नल विशाल ने कहा कि आर्मी के किसी भी पूर्व जवान के साथ दुर्व्यवहार को नज़रअंदाज नहीं किया जाएगा और इसे गंभीरता से लिया जा रहा है। कर्नल की मांग है कि पुलिस विभाग भी ऐसे मामलों में अनुशासनहीन अधिकारियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करे।

    किसी भी संगठन में अनुशासन और जिम्मेदारी की भावना बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण है। यह मामला यह साबित करता है कि चाहे कोई अधिकारी कितना भी वरिष्ठ क्यों न हो, उसके कार्यों की निगरानी की जाती है और अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। स्थानीय प्रशासन और आर्मी दोनों मिलकर इस मामले की निष्पक्ष जांच कर रहे हैं।

    इस विवाद ने यह भी उजागर किया है कि शराब और ड्यूटी का मेल किसी भी विभाग में गंभीर परिणाम ला सकता है। मिहोना थाना और भिंड जिले में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। फिलहाल, टीआई को लाइन अटैच किया गया है, रिटायर्ड सूबेदार मेजर राकेश सिंह कुशवाहा अपनी बात प्रशासन के सामने रख चुके हैं, और पूरे मामले की निगरानी आर्मी द्वारा की जा रही है।

    स्थानीय लोग और आर्मी अधिकारी इस मामले की निष्पक्षता और उचित कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं। यह घटना पुलिस विभाग के लिए भी एक चेतावनी है कि अनुशासनहीनता के मामलों में कोई छूट नहीं होगी और हर अधिकारी अपने कर्तव्य के प्रति जिम्मेदार रहेगा।

  • हाईवे यात्रियों के लिए अपडेट: फास्टैग वार्षिक पास हुआ महंगा

    हाईवे यात्रियों के लिए अपडेट: फास्टैग वार्षिक पास हुआ महंगा


    नई दिल्ली। देशभर के राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर करने वालों के लिए महत्वपूर्ण खबर है। National Highways Authority of India (एनएचएआई) ने फास्टैग एनुअल पास की फीस में 75 रुपये की बढ़ोतरी करने की घोषणा की है। अब वाहन मालिकों को वार्षिक पास के लिए 3,075 रुपये चुकाने होंगे, जबकि पहले इसकी कीमत 3,000 रुपये थी। यह नई दर 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी। यह घोषणा Ministry of Road Transport and Highways की ओर से जारी जानकारी में की गई है। मंत्रालय के अनुसार यह संशोधन नियमों के अनुसार किया गया है।

    नियमों के तहत किया गया शुल्क संशोधन
    एनएचएआई ने बताया कि वार्षिक पास की फीस में यह बढ़ोतरी राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क (दर निर्धारण एवं संग्रह) नियम, 2008 के प्रावधानों के तहत की गई है। इन नियमों के अनुसार समय-समय पर टोल से जुड़े शुल्क में बदलाव किया जा सकता है। फास्टैग एनुअल पास का उद्देश्य नियमित रूप से राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रा करने वाले लोगों को आसान और किफायती सुविधा देना है। इस योजना के जरिए वाहन मालिकों को बार-बार टोल भुगतान या रिचार्ज करने की परेशानी से राहत मिलती है।

    56 लाख से ज्यादा लोग उठा रहे लाभ
     यह सुविधा तेजी से लोकप्रिय हो रही है। फिलहाल 56 लाख से अधिक उपयोगकर्ता इस वार्षिक पास का फायदा उठा रहे हैं। यह पास विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी है जो रोजाना या अक्सर लंबी दूरी की यात्रा करते हैं। यह पास केवल गैर-वाणिज्यिक निजी वाहनों के लिए उपलब्ध है, जिनके पास वैध फास्टैग लगा हुआ हो। इससे टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं पड़ती और यात्रा अधिक तेज व सुविधाजनक हो जाती है।

    1,150 से ज्यादा टोल प्लाजा पर मिलेगा लाभ
    फास्टैग वार्षिक पास का उपयोग देशभर में मौजूद लगभग 1,150 टोल प्लाजा पर किया जा सकता है। इनमें राष्ट्रीय राजमार्गों के साथ-साथ कई प्रमुख एक्सप्रेसवे भी शामिल हैं। इस पास की वैधता एक वर्ष या अधिकतम 200 टोल क्रॉसिंग तक होती है, जो भी पहले पूरा हो जाए। यानी नियमित यात्रा करने वालों के लिए यह व्यवस्था काफी सुविधाजनक मानी जाती है।

    भुगतान के दो घंटे के भीतर सक्रिय हो जाता है पास
     वार्षिक पास खरीदने या नवीनीकरण करने के बाद यह दो घंटे के भीतर सक्रिय हो जाता है। इसके लिए वाहन मालिकों को एकमुश्त भुगतान करना होता है। यूजर्स इस पास को Rajmarg Yatra App या एनएचएआई की आधिकारिक वेबसाइट के जरिए आसानी से खरीद या रिन्यू कर सकते हैं।

    स्वतंत्रता दिवस 2025 पर लॉन्च हुआ था पास
    फास्टैग वार्षिक पास को 15 अगस्त 2025 को लॉन्च किया गया था। इसके बाद से ही यह योजना तेजी से लोकप्रिय होती जा रही है। एनएचएआई का कहना है कि इस पास की बढ़ती मांग बताती है कि लोग राष्ट्रीय राजमार्गों पर स्मार्ट और डिजिटल टोल सिस्टम को तेजी से अपना रहे हैं।

    क्या फायदा मिलता है यात्रियों को
    फास्टैग वार्षिक पास के जरिए यात्रियों को कई फायदे मिलते हैं। सबसे बड़ा फायदा यह है कि बार-बार टोल भुगतान की झंझट खत्म हो जाती है। इसके अलावा टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे समय और ईंधन दोनों की बचत होती है।

  • उज्जैन–जावरा ग्रीनफील्ड हाईवे: किसानों की जीत, मुआवजे की लड़ाई जारी

    उज्जैन–जावरा ग्रीनफील्ड हाईवे: किसानों की जीत, मुआवजे की लड़ाई जारी


    नई दिल्ली। उज्जैन–जावरा ग्रीनफील्ड हाईवे परियोजना को अब नॉर्मल हाईवे के रूप में स्वीकृति मिल गई है। यह फैसला प्रभावित 62 गांवों के करीब 400 किसानों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। शनिवार देर रात किसानों ने भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात कर इस निर्णय के लिए उनका आभार जताया।

    किसानों ने मुख्यमंत्री से अपनी दो प्रमुख मांगों पर चर्चा की। पहली मांग थी कि हाईवे को एक्सेस कंट्रोल रोड के बजाय नॉर्मल हाईवे के रूप में बनाया जाए ताकि गांवों की कनेक्टिविटी और आवागमन प्रभावित न हो। मुख्यमंत्री ने इस मांग को स्वीकार कर किसानों को संतोष दिया।

    दूसरी और सबसे महत्वपूर्ण मांग थी भूमि अधिग्रहण के लिए वास्तविक बाजार मूल्य पर मुआवजा देने की। किसानों का आरोप है कि जिला प्रशासन द्वारा तय मुआवजा दरें बेहद कम हैं। 2024–25 की गाइडलाइन के अनुसार केवल 1,700 रुपये से 10,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, उज्जैन–इंदौर ग्रीनफील्ड रोड परियोजना में किसानों को कई जगह 45 लाख रुपये प्रति बीघा तक का मुआवजा मिला था। इसके मुकाबले उज्जैन–जावरा परियोजना में केवल 2–4 लाख रुपये प्रति बीघा का प्रस्ताव है, जिसे किसान अन्यायपूर्ण मान रहे हैं।

    मुख्यमंत्री ने किसानों को भरोसा दिलाया कि उचित मुआवजा दिया जाएगा और उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने किसानों से संयम और भरोसा बनाए रखने की अपील भी की।

    इस निर्णय से प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों में हल्की राहत की स्थिति है, लेकिन मुआवजे को लेकर संघर्ष अभी जारी है।

  • दतिया में मासूमियत का कत्ल: प्रेम में मिला धोखा तो 14 वर्षीय किशोरी ने चुन ली मौत, प्रेमी पर दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज

    दतिया में मासूमियत का कत्ल: प्रेम में मिला धोखा तो 14 वर्षीय किशोरी ने चुन ली मौत, प्रेमी पर दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज


    दतिया । मध्य प्रदेश के दतिया जिले से एक रूह कंपा देने वाली खबर सामने आई है जहाँ एक 14 वर्षीय नाबालिग किशोरी की खुदकुशी के मामले में पुलिस ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। बड़ोनी थाना क्षेत्र के जौन्हार गांव में हुई इस त्रासदी ने न केवल एक परिवार को उजाड़ दिया बल्कि समाज में फैल रहे डिजिटल प्रेम और उसके घातक परिणामों को भी उजागर किया है। शनिवार रात पुलिस ने मामले की गहन जांच के बाद मृतका के प्रेमी युवक के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है।

    शादी से इनकार बना मौत की वजह

    पुलिस जांच और कॉल डिटेल्स से जो सच निकलकर सामने आया है वह बेहद विचलित करने वाला है। जानकारी के अनुसार जौन्हार निवासी इस नाबालिग किशोरी का जिगना क्षेत्र के रहने वाले नीरज पाल नामक युवक से पिछले करीब दो साल से प्रेम प्रसंग चल रहा था। किशोरी उस पर अटूट विश्वास करती थी और उससे विवाह करना चाहती थी। लेकिन जब किशोरी ने शादी का प्रस्ताव रखा तो नीरज पाल ने अपनी असलियत दिखाते हुए उसे ठुकरा दिया। आरोपी ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि उसकी सगाई कहीं और हो चुकी है और वह उससे शादी नहीं कर सकता। धोखे और उपेक्षा के इसी सदमे को मासूम किशोरी बर्दाश्त नहीं कर पाई।

    मोबाइल कॉल डिटेल और FSL रिपोर्ट ने खोले राज

    यह घटना 26 दिसंबर की है जब किशोरी अपने ही घर के कमरे में पंखे के फंदे से लटकी पाई गई थी। शुरुआत में यह केवल आत्महत्या का मामला लग रहा था लेकिन पुलिस की वैज्ञानिक जांच ने कहानी बदल दी। पुलिस ने मृतका के मोबाइल की कॉल डिटेल निकलवाई जिससे नीरज पाल के साथ उसके लंबे संबंधों की पुष्टि हुई। सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य फॉरेंसिक साइंस लैब की रिपोर्ट से मिला। एफएसएल रिपोर्ट में पीड़िता की वैजाइनल स्लाइड में पुरुष डीएनए मिलने की पुष्टि हुई जिससे यह साबित हो गया कि आत्महत्या से पहले किशोरी के साथ शारीरिक संबंध बनाए गए थे।

    कानूनी शिकंजे में आरोपी नीरज पाल

    इन पुख्ता वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर बड़ोनी थाना पुलिस ने नीरज पाल को इस मौत का जिम्मेदार माना है। पुलिस के मुताबिक आरोपी ने न केवल एक नाबालिग का शारीरिक शोषण किया बल्कि उसे मानसिक रूप से इस कदर प्रताड़ित किया कि उसने मौत को गले लगाना बेहतर समझा। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं सहित पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर उसकी तलाश तेज कर दी है। इस घटना ने एक बार फिर साबित किया है कि कानून के हाथ लंबे होते हैं और वैज्ञानिक साक्ष्यों के जरिए अपराधी कितना भी बचने की कोशिश करे वह बच नहीं सकता।

  • खंडवा में प्रशासन का बड़ा अभियान: होटल एप्पल और हरिओम दूध भंडार से 22 घरेलू गैस सिलेंडर और 5 गैस भट्टी जब्त, अवैध भंडारण पर सख्त कार्रवाई

    खंडवा में प्रशासन का बड़ा अभियान: होटल एप्पल और हरिओम दूध भंडार से 22 घरेलू गैस सिलेंडर और 5 गैस भट्टी जब्त, अवैध भंडारण पर सख्त कार्रवाई


    नई दिल्ली। खंडवा जिले के पंधाना क्षेत्र में प्रशासन ने शनिवार देर शाम से रविवार सुबह तक घरेलू गैस के अवैध भंडारण और कालाबाजारी के खिलाफ बड़ा छापा मारा। खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग और तहसील प्रशासन की संयुक्त टीम ने बोरगांव बुजुर्ग स्थित होटल एप्पल और हरिओम दूध भंडार पर कार्रवाई करते हुए कुल 22 घरेलू गैस सिलेंडर और 5 गैस भट्टी जब्त की। इस कार्रवाई के दौरान राजस्व विभाग और पुलिस बल भी मौजूद रहे।

    टीम के मुताबिक, होटल एप्पल में सिलेंडरों को इस तरह जमा किया गया था जैसे किसी गोदाम में रखा गया हो। ये सिलेंडर आरुद स्थित सुमन एचपी गैस एजेंसी से जुड़े हुए पाए गए। पंधाना तहसील प्रशासन ने बताया कि नियमों के अनुसार किसी भी परिसर में 100 किलोग्राम से अधिक गैस भंडारण करना प्रतिबंधित है, लेकिन यहां 20 से अधिक सिलेंडर रखे गए थे, जो गंभीर अनियमितता मानी जा रही है।

    हरिओम दूध भंडार पर भी इसी तरह की जांच की गई। यहां घरेलू गैस सिलेंडरों का व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा था, जिसे मौके पर ही जब्त कर लिया गया। खाद्य विभाग के अधिकारी रोहित देवल ने कहा कि प्रशासन ऐसे मामलों के खिलाफ लगातार अभियान जारी रखेगा ताकि उपभोक्ताओं को गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

    पंधाना तहसीलदार दिवाकर सुल्या, नायब तहसीलदार वैशाली बघेल और पटवारी अजय रघुवंशी के साथ पुलिस बल कार्रवाई में शामिल था। अधिकारियों का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य न केवल अवैध भंडारण रोकना है, बल्कि कालाबाजारी और अनियमित वितरण पर भी सख्त नजर रखना है।

    यह कार्रवाई उपभोक्ताओं के हित में प्रशासन की सजगता और कानून व्यवस्था में कड़े कदम का प्रतीक है, जिससे यह संदेश भी जाता है कि किसी भी व्यवसायिक प्रतिष्ठान में घरेलू गैस का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

  • भोपाल के काटजू अस्पताल में 20 मार्च से शुरू होगा स्टेट ऑफ द आर्ट सेंटर, नि:संतानता और स्त्री रोग की सभी सुविधाएं एक ही छत के नीचे

    भोपाल के काटजू अस्पताल में 20 मार्च से शुरू होगा स्टेट ऑफ द आर्ट सेंटर, नि:संतानता और स्त्री रोग की सभी सुविधाएं एक ही छत के नीचे


    भोपाल । भोपाल के कैलाश नाथ काटजू अस्पताल में 20 मार्च से महिलाओं के लिए हाईटेक स्वास्थ्य सुविधा शुरू होने जा रही है। इस सेंटर का नाम है स्टेट ऑफ द आर्ट सेंटर फॉर प्रिवेंटिव गायनाकोलॉजी एंड इन्फर्टिलिटी । यह प्रदेश का पहला सरकारी इन्फर्टिलिटी सेंटर होगा जहां महिलाओं को नि:संतानता इन्फर्टिलिटी पीसीओएस हार्मोनल असंतुलन मेनोपॉज फाइब्रॉइड अनियमित मासिक धर्म और सर्वाइकल कैंसर जैसी स्त्री रोग संबंधी समस्याओं का इलाज मिलेगा।

    करीब दो करोड़ रुपए की लागत से तैयार इस सेंटर में जांच से लेकर उपचार तक सभी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। सेंटर की स्टेट नोडल अधिकारी और स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रचना दुबे के अनुसार यहां आईयूआई जैसी आधुनिक तकनीक के जरिए इन्फर्टिलिटी का इलाज भी होगा। इसके अलावा सर्वाइकल कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए वीआईए तकनीक का उपयोग किया जाएगा जिससे समय रहते इलाज संभव हो सके और महिलाओं की जान बचाई जा सके।

    सरकारी सेंटर में नि:संतानता का इलाज 40, 000 से 80, 000 रुपए तक में हो सकेगा जबकि प्राइवेट अस्पतालों में यही इलाज 3 लाख रुपए तक का खर्च मांगता है। भारत में महिलाओं में नि:संतानता की दर लगभग 10-14% है जो खराब जीवनशैली और देर से शादी करने के कारण बढ़ रही है।

    महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर देश में दूसरा सबसे बड़ा कैंसर है भोपाल इस मामले में 15वें स्थान पर है। ब्रेस्ट कैंसर सबसे अधिक आम है और भोपाल देश में 8वें नंबर पर है। गर्भाशय में गांठ या फाइब्रॉइड महिलाओं के जीवनकाल में 30-50% में विकसित होते हैं और 40 वर्ष के बाद अधिक आम हैं। पॉलीसिस्टिक ओवरी डिजीज पीसीओडी से 10-27% महिलाएं प्रभावित हैं जिससे अनियमित पीरियड्स और बांझपन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

    काटजू अस्पताल में शुरू हो रहे इस स्टेट ऑफ द आर्ट सेंटर के जरिए प्रदेश की महिलाओं को एक ही छत के नीचे सुरक्षित आधुनिक और किफायती स्वास्थ्य सेवा मिलेगी। एम्स में भी जल्द ही आईवीएफ की सुविधा शुरू होने वाली है लेकिन सरकारी सेंटर की तुलना में यहां खर्च अधिक है।

  • DRI का बड़ा खुलासा: गोल्ड स्मगलिंग गिरोह बेनकाब, करोड़ों की एसेट्स सीज

    DRI का बड़ा खुलासा: गोल्ड स्मगलिंग गिरोह बेनकाब, करोड़ों की एसेट्स सीज


    नई दिल्ली। डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (डीआरआई) ने संगठित सोने की तस्करी के नेटवर्क को बेनकाब किया है और 14.13 करोड़ रुपए मूल्य के सोने, चांदी और भारतीय मुद्रा को जब्त किया है। यह जानकारी वित्त मंत्रालय द्वारा रविवार को दी गई। अधिकारियों ने कहा कि इस नेटवर्क में शामिल 6 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

     यह गिरोह विदेशी मूल के सोने की भारत में तस्करी करने, उसे ट्रेनों के माध्यम से परिवहन करने, पहचान चिह्नों को हटाने के लिए अवैध संयंत्रों में उसे पिघलाने और फिर घरेलू बुलियन बाजार में बेचने में लगा हुआ था।

    इस अभियान के दौरान, डीआरआई अधिकारियों ने लगभग 13.41 करोड़ रुपए मूल्य का 8,286.81 ग्राम सोना, 19.67 लाख रुपए मूल्य की 7,350.4 ग्राम चांदी और 51.74 लाख रुपए की भारतीय मुद्रा जब्त की। यह जब्ती सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के प्रावधानों के तहत की गई।

    यह मामला तब सामने आया जब डीआरआई अधिकारियों ने विशिष्ट खुफिया जानकारी के आधार पर कार्रवाई करते हुए कोलकाता से ट्रेन से नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंचे एक यात्री को रोका।

    यात्री के पास विदेशी मुहरों वाला सोना था, जिसे स्टेशन के बाहर किसी अन्य व्यक्ति को पहुंचाना था। अधिकारियों ने तुरंत ही वाहक और प्राप्तकर्ता दोनों को पकड़ लिया।उनकी जानकारी के आधार पर, डीआरआई टीमों ने दिल्ली में तलाशी अभियान चलाया और एक अवैध सोना पिघलाने की सुविधा का पता लगाया।

    जांचकर्ताओं ने पाया कि इस इकाई का उपयोग विदेशी मूल के सोने को पिघलाने और उस पर से पहचान चिह्नों को हटाने के लिए किया जा रहा था, ताकि इसे स्थानीय बाजार में बेचा जा सके।

    परिसर से अतिरिक्त सोना, चांदी और नकदी बरामद की गई, और सुविधा का संचालन करने वाले प्रबंधक को भी हिरासत में ले लिया गया। आगे की जांच के बाद अधिकारी कोलकाता पहुंचे, जहां गिरोह के कथित सरगना का पता एक अन्य अवैध सोना पिघलाने वाली इकाई से चला।

    इस अभियान के दौरान और अधिक मिलावटी सोना बरामद किया गया। सरगना को दो वाहकों के साथ गिरफ्तार किया गया, जिन्होंने स्वीकार किया कि उन्होंने तस्करी किया हुआ विदेशी चिह्नों वाला सोना प्राप्त किया था, उस पर से चिह्नों को हटाने के लिए उसे पिघलाया और फिर वितरण के लिए ट्रेन से दिल्ली भेजा था। अधिकारियों ने बताया कि सोने की तस्करी, परिवहन, पिघलाने और बिक्री में शामिल सभी छह लोगों को गिरफ्तार कर सक्षम न्यायालय के समक्ष पेश किया गया है।

    एजेंसी ने कहा कि नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान करने और तस्करी किए गए सोने के स्रोत का पता लगाने के लिए जांच जारी है।

  • MP के 22 लाख पेंशनर्स के लिए झटका: केंद्र ने पेंशन राशि बढ़ाने से किया इंकार, महंगाई के बीच आर्थिक मदद पर संकट

    MP के 22 लाख पेंशनर्स के लिए झटका: केंद्र ने पेंशन राशि बढ़ाने से किया इंकार, महंगाई के बीच आर्थिक मदद पर संकट


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के करीब 22.5 लाख पेंशनर्स के लिए दिल्ली से निराशाजनक खबर है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) के तहत दी जाने वाली पेंशन राशि में फिलहाल कोई बढ़ोतरी नहीं होगी। यह निर्णय नीति आयोग की सिफारिशों और विभिन्न मूल्यांकन अध्ययनों के बावजूद लिया गया है, जिनमें पेंशन राशि बढ़ाने और भुगतान प्रणाली को मजबूत करने की सलाह दी गई थी।

    राज्यसभा में प्रस्तुत आंकड़ों के मुताबिक, मध्य प्रदेश सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। विशेष रूप से विकलांगता पेंशन (IGNDPS) के मामले में मध्य प्रदेश 1,01,470 लाभार्थियों के साथ देश में दूसरे स्थान पर है, केवल बिहार इससे आगे है। चालू वित्तीय वर्ष में केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश को 889.77 करोड़ रुपए की निधि जारी की है, जो उत्तर प्रदेश और बिहार से भी अधिक है।

    पेंशन की वर्तमान व्यवस्था:

    इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन (IGNOAPS):

    60-79 वर्ष के बुजुर्ग: 600 रुपए/माह (केंद्र 200 + राज्य 400)

    80 वर्ष या उससे अधिक: 600 रुपए/माह (केंद्र 500 + राज्य 100)

    इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन (IGNWPS):

    40-79 वर्ष की BPL विधवाओं को 600 रुपए/माह (केंद्र 300 + राज्य 300)

    इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विकलांगता पेंशन (IGNDPS):

    18-79 वर्ष के 80% या अधिक दिव्यांग: 600 रुपए/माह (केंद्र 300 + राज्य 300)

    80 वर्ष के बाद: केंद्र 500 + राज्य 100 रुपए/माह

    इस फैसले से लाखों बुजुर्ग, विधवा और दिव्यांग पेंशनर्स को महंगाई के इस दौर में आर्थिक मदद मिलने की उम्मीद नहीं पूरी होगी। हालांकि मध्य प्रदेश सरकार ने पहले ही अपनी ओर से पेंशन राशि का योगदान सुनिश्चित किया है, लेकिन केंद्रीय हिस्से में वृद्धि न होने से कुल राशि में बदलाव नहीं होगा।

    सरकार का निर्णय और प्रभाव:

    केंद्र ने पेंशन बढ़ोतरी से इनकार किया, बावजूद इसके कि नीति आयोग और अध्ययन पेंशन राशि बढ़ाने की सलाह दे चुके थे।

    इसका असर सीधे उन 22.5 लाख लाभार्थियों पर पड़ेगा, जो इस राशि का उपयोग भोजन, स्वास्थ्य और दैनिक जरूरतों के लिए करते हैं।

    मध्य प्रदेश सामाजिक सुरक्षा के मामले में अग्रणी है, लेकिन पेंशन राशि स्थिर रहने से आर्थिक दबाव बना रहेगा।

    राज्य और केंद्र सरकार की संयुक्त व्यवस्था के बावजूद अब पेंशन बढ़ाने की मांग लाभार्थियों और सामाजिक संगठनों की तरफ से तेज हो सकती है।

  • हरदा के आईआईटीयन श्रेयांश ने 2.3 करोड़ का पैकेज ठुकराया, पहले प्रयास में यूपीएससी क्लियर कर प्रदेश का नाम रोशन

    हरदा के आईआईटीयन श्रेयांश ने 2.3 करोड़ का पैकेज ठुकराया, पहले प्रयास में यूपीएससी क्लियर कर प्रदेश का नाम रोशन


    हरदा । मध्यप्रदेश के हरदा जिले के आईआईटी मुंबई के पूर्व छात्र श्रेयांश बड़ोदिया ने अपनी मेहनत और साहस से प्रदेश का नाम रोशन किया है। श्रेयांश ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 194वीं रैंक हासिल की। खास बात यह है कि उन्होंने सालाना 2.3 करोड़ रुपए के पैकेज वाली आईटी नौकरी छोड़कर पहली ही कोशिश में यूपीएससी परीक्षा पास कर ली।

    श्रेयांश ने बताया कि नौकरी से आर्थिक सुविधा तो मिल रही थी लेकिन मन को संतुष्टि नहीं मिल रही थी। उनका मानना था कि उन्हें समाज और देश के लिए कुछ बेहतर करना चाहिए। उन्होंने कहा जब मैंने जॉब छोड़ने का फैसला किया तो मेरी स्थिति अंग्रेजी कहावत आई वास इन टू माइंड जैसी थी। एक तरफ आराम था दूसरी तरफ संतुष्टि नहीं। मैं चाहता था कि जीवन में ऐसा काम करूं जिससे समाज और देश के लिए योगदान हो।

    श्रेयांश ने वर्ष 2018 में आईआईटी मुंबई से बीटेक पूरी की और गुरुग्राम की कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में कार्य करने लगे। नौकरी के दौरान ही उन्हें सिविल सेवा में जाने की प्रेरणा मिली। अगस्त 2024 में उन्होंने परिवार को सूचित करने के बाद नौकरी छोड़ दी और मुंबई में रहकर पूरी तरह यूपीएससी की तैयारी में जुट गए।

    श्रेयांश ने मई 2025 में प्रीलिम्स अगस्त में मेंस और जनवरी 2026 में इंटरव्यू पास किया। नौ महीने की कड़ी मेहनत और रणनीति से उन्होंने देश की सबसे कठिन परीक्षा में सफलता पाई। उन्होंने कहा कि आईटी सेक्टर में कंफर्ट जोन जरूर था लेकिन संतुष्टि नहीं। प्रशासनिक सेवा में जाकर वे अपनी क्षमताओं का बेहतर उपयोग करना चाहते थे।

    भविष्य में श्रेयांश शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार के लिए काम करना चाहते हैं। प्राथमिक शिक्षा को मजबूत करने और स्वास्थ्य क्षेत्र में आउट ऑफ पॉकेट एक्सपेंडिचर कम करने पर उनका विशेष ध्यान रहेगा।

    श्रेयांश का परिवार मुंबई में रहता है। उनके पिता जी.डी. बड़ोदिया नर्मदापुरम में जिला कोषालय अधिकारी रह चुके हैं और मेहर गढ़वाल समाज के अध्यक्ष भी रहे। 2023 में उन्होंने विधायक पद के लिए चुनाव भी लड़ा था। परिणाम घोषित होने के बाद श्रेयांश परिवार के साथ मध्यप्रदेश लौटे और अपने गृह जिले हरदा पहुंचे।

    यूपीएससी सिविल सर्विसेज एग्जाम 2025 में कुल 958 उम्मीदवार क्वालिफाई हुए। राजस्थान के चित्तौड़गढ़ के अनुज अग्निहोत्री ने ऑल इंडिया टॉप किया भोपाल के ईशान भटनागर टॉप 5 में रहे जबकि धार जिले के पक्षल सेक्रेटरी ने 8वीं रैंक हासिल की।

  • गैस सिलेंडर की कमी, कतारों में खड़े उपभोक्ता, रविवार को बंद रहेंगे बाटलिंग प्लांट

    गैस सिलेंडर की कमी, कतारों में खड़े उपभोक्ता, रविवार को बंद रहेंगे बाटलिंग प्लांट

    नई दिल्ली: रायपुर समेत छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में एलपीजी गैस सिलेंडरों की किल्लत बढ़ती जा रही है। तेल कंपनियों ने इस संकट के बीच गैस एजेंसियों को आपूर्ति पर 20 से 25 प्रतिशत तक का कोटा निर्धारित कर दिया है। इसका मतलब यह है कि अब सिलेंडर की आपूर्ति मांग के अनुसार नहीं होगी बल्कि तय कोटे के आधार पर ही होगी। इस स्थिति का असर आम आदमी की रसोई तक सीधे पहुंच रहा है और घरेलू बजट पर दबाव बढ़ गया है।

    सूत्रों के अनुसार, जिन एजेंसियों की मासिक बिक्री औसतन 10,000 सिलेंडर होती थी, उन्हें अब केवल 7,500 सिलेंडर ही उपलब्ध कराए जा रहे हैं। वहीं, कई वितरण केंद्रों पर जहां रोजाना लगभग 2,500 सिलेंडरों की मांग होती है, वहां अब आपूर्ति घटकर महज 500 सिलेंडर तक रह गई है। इस भारी अंतर के कारण उपभोक्ताओं को रिफिल के लिए पांच से सात दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है।

    राजधानी रायपुर में एलपीजी एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें बन गई हैं। लोग सिलेंडरों के लिए कई घंटों तक इंतजार कर रहे हैं, जिससे रोजमर्रा की घरेलू गतिविधियों पर असर पड़ा है। इस संकट का मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध की स्थिति है, जिसका सीधा असर तेल कीमतों और गैस आपूर्ति पर पड़ा है।

    इस बीच स्थिति और गंभीर हो सकती है क्योंकि रविवार को बाटलिंग प्लांट बंद रहेंगे। इससे सिलेंडरों की आपूर्ति और कम हो जाएगी और दबाव और बढ़ने की संभावना है। तेल कंपनियां उपभोक्ताओं को यह सलाह दे रही हैं कि आपात स्थिति के लिए बचत सिलेंडर का उपयोग करें और गैर-जरूरी सिलेंडर का उपयोग टालें।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यह संकट अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक राजनीतिक तनाव के कारण पैदा हुआ है। घरेलू स्तर पर तेल कंपनियां कोटा प्रणाली लागू कर रही हैं ताकि सीमित आपूर्ति को अधिकतम संख्या में उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जा सके।

    गृहिणियों और आम नागरिकों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण हो गई है। रसोई के रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं और सिलेंडर रिफिल के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। उपभोक्ताओं को सलाह दी जा रही है कि सिलेंडर के लिए किसी एक वितरण केंद्र पर लगातार न रहें और अपने नजदीकी एजेंसी से समय-समय पर जानकारी लेते रहें।

    इस संकट से निपटने के लिए प्रशासन और तेल कंपनियां लगातार उपाय कर रही हैं। बैकअप आपूर्ति सुनिश्चित करने और आपूर्ति श्रृंखला को दुरुस्त करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन रविवार को बाटलिंग प्लांट बंद रहने से स्थिति अस्थायी रूप से और गंभीर हो जाएगी।

     रायपुर में एलपीजी सिलेंडर संकट उपभोक्ताओं के लिए चिंता का विषय बन गया है। तेल कंपनियों द्वारा कोटा लागू करने के बाद भी सिलेंडरों की उपलब्धता सीमित है और घरेलू रसोई के बजट पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। उपभोक्ताओं को सतर्क रहने और आपूर्ति की स्थिति के अनुसार योजना बनाने की आवश्यकता है।