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  • MP: शाजापुर में बड़ा हादसा… NH-52 पर दुर्घटनाग्रस्त हुई यात्रियों से भरी बस, 29 घायल

    MP: शाजापुर में बड़ा हादसा… NH-52 पर दुर्घटनाग्रस्त हुई यात्रियों से भरी बस, 29 घायल


    शाजापुर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के शाजापुर जिले (Shajapur district) में रविवार तड़के हुए एक भीषण बस हादसे में 29 यात्री घायल हो गए। नेशनल हाईवे-52 ( नेशनल हाईवे-52 ) पर रविवार सुबह टूकराना जोड़ के पास यात्रियों से भरी एक बस (Bus) अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस हादसे में बस में सवार 29 यात्री घायल हो गए।

    ​प्राप्त जानकारी के अनुसार, यात्रियों से भी यह बस सारंगपुर की तरफ से आ रही थी और इंदौर की ओर जा रही थी। जैसे ही बस शाजापुर के टूकराना जोड़ के पास पहुंची, वह हादसे का शिकार हो गई। दुर्घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और चीख-पुकार शुरू हो गई।

    ​प्रशासनिक मदद और अस्पताल में भर्ती
    घटना की सूचना मिलते ही आपातकालीन सेवा 112 और 108 की टीम तुरंत हरकत में आई और मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। सभी 29 घायलों को एम्बुलेंस की मदद से तुरंत जिला अस्पताल भेजा गया। अस्पताल में सभी घायलों का इलाज जारी है, जिनमें से 2 यात्रियों की हालत गंभीर बनी हुई है, जिन्हें बेहतर इलाज के लिए निगरानी में रखा गया है।

    ​घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस ने भी मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और हादसे के असल कारणों की जांच में जुटी है कि यह दुर्घटना किन परिस्थितियों में हुई।

  • फिर आ गई 9/11 की बरसी…. 25 साल में US में बहुत कुछ बदल गया.. मगर मुस्लिमों की छवि जस की तस

    फिर आ गई 9/11 की बरसी…. 25 साल में US में बहुत कुछ बदल गया.. मगर मुस्लिमों की छवि जस की तस


    न्यूयॉर्क।
    अमेरिका (America) अगले हफ्ते 9/11 हमले की 25वीं बरसी मनाएगा। इस लंबी अवधि ने बहुत कुछ बदल दिया है। लेकिन आज भी अमेरिकी समाज (American Society) में मुस्लिमों की छवि नहीं बदल पाई है। प्यू रिसर्च सेंटर (Pew Research Center) के सर्वे के मुताबिक, 51% अमेरिकी अब भी मुस्लिमों को संदेह की नजर से ही देखते हैं। अमेरिका में मुस्लिम आबादी, मस्जिदों की संख्या बढ़ी है और राजनीतिक स्तर पर भी समुदाय की सक्रियता बढ़ी है। लेकिन हिंसक समुदाय होने की उसकी छवि जस की तस बनी है।

    प्यू रिसर्च सेंटर अमेरिका में मुस्लिमों की स्थिति, अमेरिकियों की सोच और खुद मुस्लिमों की राय पर समय-समय पर सर्वे करता रहा है। इस साल के सर्वे में 43% अमेरिकी वयस्कों ने माना कि मुसलमान अन्य नागरिकों की तुलना में कम देशप्रेमी हैं, जबकि 42% का मानना था कि अमेरिकी मुसलमानों का देश पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। इसके पीछे 9/11 का खौफ साफ झलकता है। एफबीआई के मुताबिक, 2001 में मुस्लिमों के खिलाफ घृणा अपराध मामले 481 तक पहुंच गए थे, जो 2000 में मात्र 28 थे। तबसे इनमें उतार-चढ़ाव आता रहा है (2021 में 95 थे और 2016 में 307) लेकिन आंकड़ा 9/11 से पूर्व के स्तर पर नहीं लौट सका। डेमोक्रेट्स की तुलना में रिपब्लिकन पार्टी से जुड़े लोग अधिकतर यह राय रखते हैं कि मुस्लिम धर्म को मानने वाले अधिक हिंसक होते हैं।


    ढाई दशक में 38% से कम नहीं रही नकारात्मक प्रक्रिया

    अल-कायदा के हमलों के महज छह महीने बाद मार्च 2002 में, 25% अमेरिकी वयस्कों का कहना था कि मुस्लिम के अन्य धर्मों के लोगों की तुलना में हिंसा को बढ़ावा मिलने की संभावना अधिक होती है। इसके बाद 11 अलग-अलग सर्वे में यह आंकड़ा कभी 38% से कम नहीं हुआ। पिछले एक दशक में यह 45% से 52% के बीच बना रहा है।

    इस साल की शुरू में एक सर्वे में शामिल लगभग आधे (51%) अमेरिकी वयस्कों ने कहा कि मुस्लिम हिंसा को अधिक बढ़ावा देते हैं। अमेरिका में मुस्लिम समुदाय की आबादी और मस्जिदों की संख्या पिछले वर्षों में बढ़ी है। वर्ष 2007 में अमेरिका में करीब 24 लाख मुस्लिम थे, जबकि अब यह संख्या बढ़कर 55 लाख हो गई है। इसी तरह, वर्ष 2000 में अमेरिका में करीब 1,200 मस्जिदें थीं, जिनकी संख्या अब बढ़कर 2,800 हो गई है।


    मुस्लिमों का अमेरिका पर प्रभाव

    42% काफी नकारात्मक
    17% थोड़ा नकारात्मक
    40% कोई प्रभाव नहीं

    मुस्लिमों ने कहा भेदभाव होता है
    2026 - 59%
    2017  - 48%
    2011 - 43%
    2007 - 40%


    अमेरिकियों के साथ तुलना

    43% कम देशभक्त
    4% अधिक देशभक्त
    51% न कम न ज्यादा


    टीवी-फिल्मों में गलत छवि दिखाई जा रही

    2026- 59%
    2017- 60%
    2011- 55%
    2007- 57%
    2026-  34%
    2017-  49%
    2011-  37%
    2007-  32%

  • देशभर में 11 सितंबर तक भारी बारिश के आसार… उत्तराखंड-हिमाचल में फ्लैश फ्लड की चेतावनी

    देशभर में 11 सितंबर तक भारी बारिश के आसार… उत्तराखंड-हिमाचल में फ्लैश फ्लड की चेतावनी


    नई दिल्ली।
    देशभर में मौसम प्रणालियों (Weather systems) की सक्रियता के चलते उत्तर-पश्चिम, मध्य, पूर्व, पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत के तमाम हिस्सों में 11 सितंबर तक तेज बारिश (Heavy rain), आंधी-तूफान की संभावना है। कुछ इलाकों में बिजली भी गिर सकती है। पहाड़ी राज्यों उत्तराखंड (Uttarakhand) के आठ और हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के एक जिले में अगले 24 घंटे के दौरान अचानक बाढ़ (Flash flood) का खतरा है। बिहार में प्रमुख नदियों के खतरे के निशान से ऊपर बहने से बाढ़ का कहर बरकरार है और 16 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। वहीं, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की ऊंची चोटियों पर सीजन की पहली बर्फबारी हुई है।


    आईएमडी की बुलेटिन में क्या?

    भारत मौसम विज्ञान विभाग की ओर से शनिवार को जारी बुलेटिन के अनुसार, उत्तराखंड के बागेश्वर, चमोली, चंपावत, नैनीताल, रुद्रप्रयाग, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल और उत्तरकाशी जिलों व हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में 6 सितंबर सुबह 11:30 बजे तक अचानक बाढ़ आ सकती है। पूर्वी राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 6 सितंबर और पूर्वी उत्तर प्रदेश में 8 सितंबर तक व्यापक वर्षा के आसार हैं।

    एमपी में बारिश का कहर जारी: आज 15 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
    मध्यप्रदेश में मानसून अब बाढ़ और उफनती नदियों वाला दौर दिखा रहा है। पूर्वी हिस्से में लगातार बारिश के बाद अब पश्चिम और उत्तरी जिलों में भी मानसून सक्रिय है। नर्मदा समेत कई नदियों का जलस्तर बढ़ गया है। भोपाल के भदभदा और कलियासोत के साथ बरगी बांध के गेट भी खोले गए हैं। नदी-नालों के उफान और बांधों से छोड़े जा रहे पानी के कारण कई इलाकों में लोगों को सतर्क किया गया है। मौसम केंद्र ने रविवार को ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, राजगढ़, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, सागर, दमोह, पन्ना और सतना में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इसके अलावा भोपाल, रायसेन, सीहोर, विदिशा, इंदौर, धार, उज्जैन, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, श्योपुर, जबलपुर, मंडला, रीवा, सीधी, सिंगरौली समेत कई जिलों में हल्की से तेज बारिश हो सकती है।


    राजस्थान में मानसून फिर एक्टिव, 20 जिलों में तेज बारिश का अलर्ट

    राजस्थान में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। शनिवार को जयपुर समेत कई जिलों में दिनभर बारिश हुई। आज भी 20 जिलों में तेज बारिश का अलर्ट है। लगातार बारिश के कारण कई नदियों और नालों का जलस्तर बढ़ गया है। सवाई माधोपुर, बारां, बूंदी और कोटा में कई जगह नदी की रपट डूब गईं। बारिश के कारण पूर्वी राजस्थान के कई जिलों में दिन के तापमान में 6 डिग्री तक गिरावट दर्ज की गई। जयपुर, अलवर, भरतपुर, धौलपुर, करौली, दौसा और सवाई माधोपुर समेत कई जिलों में अधिकतम तापमान 30 डिग्री से नीचे रहा। इससे दिन में भी मौसम ठंडा हो गया। मौसम विभाग के अनुसार बारिश का दौर 8 सितंबर तक जारी रह सकता है। इसके बाद करीब एक सप्ताह तक प्रदेश में बारिश की गतिविधियां कम रहने की संभावना है।


    हिमाचल में परियोजना को नुकसान

    हिमाचल प्रदेश में शिमला जिले के काशापाट पंचायत के कंडे में शुक्रवार रात बादल फटने से नोगली खड्ड में बाढ़ आ गई। इससे सेरीपुल स्थित गंगाधारी जलविद्युत परियोजना के भारी नुकसान पहुंचा है। बाढ़ का पानी अपने साथ बड़ी मात्रा में मलबा लेकर आया, जो प्रोजेक्ट की संरचनाओं के आसपास जमा हो गया है। प्रदेश में 85 सड़कें, 51 पेयजल योजनाएं और 29 बिजली ट्रांसफार्मर भी बारिश और बाढ़ से प्रभावित हैं। वहीं, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के ऊंचे इलाकों में शनिवार को मौसम की पहली बर्फबारी हुई। गुमरी-जोजिला मार्ग के ऊंचे पहाड़ों, गुलमर्ग के ऊंचे इलाकों और पीर पंजाल रेंज में ऊंचे इलाके बर्फ से चमक उठे। ताटाकूटी पीक की चोटी और ऊपरी ढलानों पर भी हल्की बर्फबारी दर्ज की गई।


    मध्य और पूर्वी भारत में बढ़ा खतरा

    आईएमडी के अनुसार, मध्य भारत में पश्चिमी मध्य प्रदेश में 6-7 सितंबर को भारी बारिश की संभावना है, जबकि पूर्वी मध्य प्रदेश में 5-8 सितंबर, छत्तीसगढ़ में 8-11 सितंबर और विदर्भ में 11 सितंबर को व्यापक वर्षा का अनुमान है। पूर्वी भारत के अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह तथा उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 11 सितंबर तक व्यापक वर्षा होगी। बिहार में 7 से 11 सितंबर तक भारी बारिश होगी।


    क्यों हो रही है इतनी बारिश?

    मौसम विज्ञानियों के अनुसार, उत्तरी मध्य प्रदेश और दक्षिणी उत्तर प्रदेश के ऊपर बना निम्न दबाव का क्षेत्र शनिवार सुबह कमजोर होकर उत्तर-पश्चिम मध्य प्रदेश व दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश के ऊपर स्थित हो गया है, जिसके अगले दो दिनों में पूर्व-उत्तर-पूर्व की ओर बढ़ने की संभावना है। इसके साथ ही निचले क्षोभमंडल में दक्षिणी हरियाणा से दक्षिणी असम तक और दक्षिणी गुजरात से उत्तरी बांग्लादेश तक दो अलग-अलग निम्न दबाव के क्षेत्र सक्रिय हैं।

  • MP में कंप्यूटर खरीदी घोटाला…. टेंडर प्रक्रिया पर उठे सवाल, EOW ने FIR दर्ज कर शुरू की जांच

    MP में कंप्यूटर खरीदी घोटाला…. टेंडर प्रक्रिया पर उठे सवाल, EOW ने FIR दर्ज कर शुरू की जांच


    भोपाल।
    मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में सरकारी खरीद (Public Procurement) की ऑनलाइन प्रक्रिया GeM (Government e-Marketplace) पर सवाल खड़े उठाने वाला मामला सामने आया है. EOW को करीब 10.99 करोड़ रुपए की कंप्यूटर खरीदी की जांच में ऐसी जानकारियां मिली हैं, जिनसे टेंडर प्रक्रिया में कथित तौर पर मिलीभगत की आशंका जताई गई है. जांच में टेंडर में शामिल चार कंपनियों के बीच कई ऐसी समानताएं सामने आईं, जो सामान्य तौर पर अलग-अलग प्रतिस्पर्धी कंपनियों के बीच नहीं दिखतीं. EOW के मुताबिक, इन कंपनियों का संबंध एक ही व्यक्ति से पाया गया है।

    EOW DG उपेंद्र जैन के अनुसार, जांच में चारों कंपनियों के मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और पते में समानता मिली. इसके अलावा एक ही GST अकाउंट के इस्तेमाल की बात भी सामने आई है।

    जैन का मानना है कि अलग-अलग कंपनियों के नाम से टेंडर में भाग लेकर वास्तविक प्रतिस्पर्धा का माहौल बनाया गया हो सकता है. कंपनियों ने पात्रता साबित करने के लिए कंप्यूटर निर्माताओं के ऑथराइजेशन लेटर भी प्रस्तुत किए थे।

    मामले की जांच में कंप्यूटरों की सप्लाई को लेकर भी गंभीर सवाल उठे हैं. EOW का दावा है कि कुछ पुराने कंप्यूटरों को नया बताकर सप्लाई किए जाने के साक्ष्य मिले हैं. जांच में एक ऐसा मामला सामने आया, जिसमें 22 जुलाई 2024 को लगाए गए कंप्यूटरों को 23 सितंबर 2024 के टेंडर में नया उपकरण बताया गया. यानी जिस कंप्यूटर की स्थापना पहले ही हो चुकी थी, उसे करीब दो महीने बाद हुए टेंडर में नए उपकरण के तौर पर पेश किए जाने का आरोप है।

    स्पेसिफिकेशन भी बदले जाने का आरोप
    जांच के दौरान सप्लाई किए गए कंप्यूटरों के तकनीकी मानकों की भी पड़ताल की गई. इसमें निर्धारित स्पेसिफिकेशन और वास्तविक उपकरणों के बीच अंतर मिलने की बात सामने आई है. आरोप है कि कुछ कंप्यूटरों में स्थानीय स्तर पर खरीदे गए SSD और RAM लगाए गए, जो टेंडर में निर्धारित तकनीकी मानकों से मेल नहीं खाते थे।


    मल्टीनेशनल कंपनी के नाम पर फर्जी ऑथराइजेशन

    EOW जांच में एक और अहम बिंदु सामने आया. एक कंपनी ने टेंडर की पात्रता पूरी करने के लिए एक मल्टीनेशनल कंप्यूटर निर्माता कंपनी के नाम से कथित तौर पर ऑथराइजेशन लेटर जमा किया था. EOW के मुताबिक, इस दस्तावेज की सत्यता को लेकर भी जांच में गंभीर सवाल सामने आए हैं।


    UPS की कीमत ने भी चौंकाया

    कंप्यूटरों के अलावा UPS की खरीद में भी कीमत को लेकर बड़ा अंतर सामने आया है. EOW के अनुसार, जिस UPS की प्रिंटेड कीमत 6,086 रुपए थी, उसे 11,247 रुपए में खरीदा गया। वहीं GeM पर उसी UPS की कीमत करीब 3,754 रुपए बताई गई थी. इतना ही नहीं, एक निर्माता ने EOW को बताया कि टेंडर में जिस मॉडल के UPS का उल्लेख था, उसकी सप्लाई ही नहीं की गई।


    चार लोगों पर FIR, कंपनियों पर कार्रवाई की सिफारिश

    जांच के आधार पर EOW ने मामले में चार लोगों के खिलाफ BNS की संबंधित धाराओं में FIR दर्ज की है. साथ ही कथित अनियमितताओं से जुड़ी कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई और उन्हें ब्लैकलिस्ट करने की सिफारिश भी की गई है। अब जांच का बड़ा सवाल यही है कि 10.99 करोड़ रुपए की इस सरकारी खरीद में टेंडर प्रक्रिया किस तरह संचालित हुई, चार कंपनियों के बीच इतना गहरा कनेक्शन कैसे रहा और कथित तौर पर पुराने या अलग स्पेसिफिकेशन वाले उपकरणों की सप्लाई कैसे स्वीकार की गई?

  • PM मोदी का आलोचकों पर पलटवार…. बोले- होम्योपैथी की गोली दी.. सारे दिमागी नक्सल बाहर आ गए…

    PM मोदी का आलोचकों पर पलटवार…. बोले- होम्योपैथी की गोली दी.. सारे दिमागी नक्सल बाहर आ गए…


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के स्वतंत्रता दिवस (Independence Day) पर दिए गए भाषण में दिमागी नक्सल (‘Urban Naxal’) शब्द के इस्तेमाल को लेकर जमकर विवाद हुआ था. अब पीएम मोदी ने अपने उस बयान का जिक्र करते हुए आलोचकों पर पलटवार किया है. उन्होंने कहा कि उन्होंने ‘दिमागी नक्सल’ नाम से जो होम्योपैथिक गोली दी थी, उसका असर अब साफ दिखने लगा है।

    दरअसल पीएम मोदी शनिवार को श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (Shri Ram College of Commerce- SRCC) के शताब्दी समारोह में पहुंचे थे. इस दौरान उन्होंने होम्योपैथी के सिद्धांत का उदाहरण देते हुए अपनी बात रखी. पीएम मोदी ने कहा, ‘आज 2013 के मुकाबले, देश आर्थिक रूप से, सामाजिक रूप से कहीं ज्यादा सुरक्षित है. लेकिन ये देखकर कुछ लोगों की छटपटाहट बढ़ रही है, बौखलाहट बढ़ रही है।

    उन्होंने आगे कहा, ‘अभी 15 अगस्त का मेरा भाषण आपने सुना होगा, ऐसे लोगों के लिए अभी मैंने लाल किले से, एक होम्योपैथी का डोज दिया था. होम्योपैथी की गोली एक छोटी सी गोली दी थी लाल किले से।


    ‘जैसे ही मैंने दिमागी नक्सल की होम्योपैथिक गोली…’

    प्रधानमंत्री ने कहा, ‘आप जानते हैं होम्योपैथी के लिए कहते हैं कि इसका स्वभाव ऐसा है कि जब होम्योपैथी की दवाई शुरू करते हैं, तो शुरू के दौर में बीमारी एक दम से ज्यादा बढ़ जाती है, ये होम्योपैथी का स्वभाव है. ठीक वैसे ही, जैसे ही मैंने दिमागी नक्सल की होम्योपैथिक गोली दी, सारे दिमागी नक्सल एक-एक करके बाहर आने लगे. अब देश की जनता भी इस बीमारी को बढ़ावा देने वालों का असली चेहरा देख रही है।


    पुरानी सरकारों पर हमला

    इस दौरान पीएम मोदी ने देश की पुराने हालात का जिक्र किया. उन्होंने पिछली सरकारों पर सवाल उठाते हुए कहा, ‘कुछ लोगों को लग सकता है कि ये 140 करोड़ लोगों का देश है, सब बहुत आसान था और मोदी ने नया क्या किया? लेकिन क्या ये सच में इतना आसान था? मैं आपको पुराने दिनों में ले जाना चाहता हूं. साल 2013 में जब केदारनाथ में आपदा आई थी, तब पूरी सरकार हिल गई थी. उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें और कैसे निपटे।

    प्रधानमंत्री ने 2008 के दौर को याद दिलाते हुए कहा कि जब 2008 में बैंकिंग संकट आया, तो उस समय की सरकार सालों तक उसके पीछे छुपती रही. संकट से निपटने का साहस उनमें नहीं था, जिससे देश का पूरा बैंकिंग सिस्टम तबाही के कगार पर पहुंच गया था. साल 2008 में ही मुंबई में भयानक आतंकी हमला हुआ. तब की सरकार बाहरी दबाव में आ गई और पाकिस्तान को सबक सिखाने की हिम्मत नहीं जुटा सकी।

  • ग्रीस में F-4 फाइटर जेट क्रैश…. एयर शो में करतब दिखाते समय हुआ हादसा, दोनों पायलटों की मौत

    ग्रीस में F-4 फाइटर जेट क्रैश…. एयर शो में करतब दिखाते समय हुआ हादसा, दोनों पायलटों की मौत


    एथेन्स।
    ग्रीस (Greece) में शनिवार, 5 सितंबर को एयर शो (Air Show) के दौरान दो सीटों वाला F-4 फैंटम फाइटर जेट (F-4 Phantom Fighter Jet) क्रैश हो गया. इस हादसे में विमान में सवार दोनों पायलटों की मौत हो गई. सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में फाइटर जेट को नीचे गिरते हुए देखा गया. इसके बाद आसमान में काले धुएं का गुबार उठता दिखाई दिया. यह घटना एयर शो देखने पहुंचे दर्शकों से कुछ सौ मीटर की दूरी पर हुई।

    यह हादसा एथेंस के उत्तर में स्थित तानाग्रा एयर बेस पर हुआ, जहां एयर शो आयोजित किया जा रहा था. रॉयटर्स ने लेन के लेआउट, आसपास के इंफ्रास्ट्रक्चर और पहाड़ों के आधार पर घटना की जगह की पुष्टि की, जो आर्काइव और सैटेलाइट तस्वीरों से मेल खाते थे. घटना की तारीख की पुष्टि फाइल के मेटाडेटा और इलाके में विमान हादसे की रिपोर्ट से की गई।

    एयर बेस पर लगे लाउडस्पीकर के जरिए लोगों से इलाके को छोड़ने की अपील की जा रही थी. क्रैश हुआ F-4 विमान एथेंस फ्लाइंग वीक में हिस्सा ले रहा था. यह एक वार्षिक कार्यक्रम है, जिसमें कई देशों की सैन्य और नागरिक विमानन टीमें हिस्सा लेती हैं।

    ग्रीस के एयरफोर्स अधिकारियों के मुताबिक, रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान दोनों पायलटों के शव बरामद कर लिए गए. यह अभियान शुरुआती दौर में तानाग्रा एयरफोर्स बेस के परिसर में लगी आग के कारण प्रभावित हुआ था. यह एयरबेस एथेंस से करीब 60 किलोमीटर उत्तर में स्थित है.

    आग पर काबू पाने के लिए 85 दमकलकर्मियों के साथ 11 पानी गिराने वाले विमान और हेलीकॉप्टर लगाए गए थे. आग एथेंस फ्लाइंग वीक में दर्शकों के लिए बनाए गए क्षेत्र से कुछ दूरी पर थी.हादसे के बाद आयोजकों ने सप्ताहांत में होने वाले बाकी सभी कार्यक्रम रद्द कर दिए. वहीं, एयरबेस के पास के एक इलाके में लगी आग के कारण लोगों को वहां से निकलने का आदेश भी दिया गया था।

  • शाहरुख खान को मिली अंडरवर्ल्ड से धमकी तो मिला करारा जवाब, बोले- मैं पठान हूं, गोली मार दो लेकिन तुम्हारे लिए काम नहीं करूंगा

    शाहरुख खान को मिली अंडरवर्ल्ड से धमकी तो मिला करारा जवाब, बोले- मैं पठान हूं, गोली मार दो लेकिन तुम्हारे लिए काम नहीं करूंगा


    नई दिल्ली । बॉलीवुड की दुनिया में एक समय ऐसा भी था जब फिल्मों और सितारों पर अंडरवर्ल्ड के प्रभाव की खूब चर्चा होती थी। 80 और 90 के दशक में कई बड़े फिल्म कलाकारों और निर्माताओं को कथित तौर पर धमकियों और दबाव का सामना करना पड़ा। उस दौर में फिल्मों में पैसा लगाने से लेकर कलाकारों पर अपनी पसंद के प्रोजेक्ट करने का दबाव बनाने तक अंडरवर्ल्ड से जुड़े कई किस्से सामने आते रहे। बॉलीवुड के सबसे बड़े सितारों में शामिल शाहरुख खान का नाम भी ऐसे ही एक कथित घटनाक्रम से जुड़ा रहा है। लेकिन इस मामले में शाहरुख के बेखौफ रवैये की कहानी आज भी लोगों को हैरान करती है।

    एक पॉडकास्ट बातचीत के दौरान फिल्ममेकर संजय गुप्ता ने दावा किया कि शाहरुख खान उन लोगों में शामिल थे जिन्होंने अंडरवर्ल्ड से जुड़े दबाव के सामने डरने के बजाय अपना फैसला साफ शब्दों में रखा। संजय गुप्ता के मुताबिक शाहरुख खान ने उन लोगों के लिए फिल्में और शो करने से इनकार कर दिया था और किसी भी तरह के दबाव में आने को तैयार नहीं थे।

    कथित तौर पर जब शाहरुख खान पर फिल्म करने और शो करने का दबाव बनाया गया तो उन्होंने बेहद बेखौफ जवाब दिया। उनका कहना था कि अगर किसी को उन्हें नुकसान पहुंचाना है तो वह पहुंचा सकता है लेकिन डर के कारण वह अपनी मर्जी के खिलाफ काम नहीं करेंगे। फिल्ममेकर के अनुसार शाहरुख ने साफ कहा था कि वह दबाव से डरने वाले नहीं हैं और किसी के कहने पर अपने करियर के फैसले नहीं बदलेंगे।

    संजय गुप्ता ने इस घटना का जिक्र करते हुए दावा किया कि शाहरुख के इस रवैये ने सामने वाले लोगों को भी हैरान कर दिया था। उनका मानना था कि शाहरुख ने अपनी बेखौफ सोच के कारण अलग तरह का सम्मान हासिल किया। हालांकि ऐसी कथित धमकियों और सुरक्षा से जुड़े मामलों को लेकर शाहरुख खान को कुछ समय तक भारी पुलिस सुरक्षा के बीच भी रहना पड़ा था।

    शाहरुख खान की सुरक्षा को लेकर पुराने समय की एक और घटना का जिक्र फिल्म समीक्षक और लेखिका अनुपमा चोपड़ा की किताब King of Bollywood: Shah Rukh Khan में भी मिलता है। किताब के अनुसार जब शाहरुख खान फिल्म Duplicate पर काम कर रहे थे तब उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई गई थी। उस समय एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कथित तौर पर निर्देशक महेश भट्ट को चेतावनी दी थी कि शाहरुख खान की जान को खतरा हो सकता है। इसके बाद उनकी सुरक्षा बढ़ाई गई और उन्हें निजी सुरक्षा भी उपलब्ध कराई गई।

    शाहरुख खान से जुड़े एक अन्य कथित किस्से में अंडरवर्ल्ड से जुड़े गैंगस्टर अबू सलेम के फोन कॉल का भी जिक्र मिलता है। किताब में वर्णित घटना के अनुसार शाहरुख पर एक खास प्रोड्यूसर के साथ काम करने का दबाव बनाया जा रहा था। कथित तौर पर फोन पर गुस्से और दबाव के बावजूद शाहरुख खान ने स्थिति को शांत तरीके से संभालने की कोशिश की।

    इस दौरान शाहरुख खान से जुड़ा एक जवाब भी काफी चर्चित रहा। कथित तौर पर उन्होंने साफ कहा था कि जैसे वह किसी दूसरे व्यक्ति को यह नहीं बताते कि उसे किसके खिलाफ क्या करना चाहिए वैसे ही कोई दूसरा व्यक्ति उन्हें यह निर्देश नहीं दे सकता कि उन्हें कौन सी फिल्म करनी चाहिए। इस जवाब में उनका आत्मविश्वास और अपने फैसलों पर कायम रहने वाला स्वभाव साफ दिखाई देता है।

    बेशक इन घटनाओं और दावों को अलग अलग लोगों द्वारा वर्षों बाद साझा किए गए अनुभवों के आधार पर देखा जाना चाहिए। लेकिन इन किस्सों से शाहरुख खान की उस छवि की झलक जरूर मिलती है जो मुश्किल परिस्थितियों में भी खुद को कमजोर दिखाने के बजाय मजबूती से अपने फैसले पर टिके रहने के लिए जानी जाती है। आज करोड़ों फैंस के लिए किंग खान बनने वाले शाहरुख का यह पुराना किस्सा बताता है कि सफलता के सफर में उन्होंने केवल फिल्मों की चुनौतियों का ही सामना नहीं किया बल्कि कई मुश्किल परिस्थितियों से भी गुजरना पड़ा।

  • भारत में फ्लॉप तो पाकिस्तान में नंबर 1! Netflix पर बॉलीवुड फिल्मों का दबदबा, 56 दिनों से ट्रेंड कर रही ये फिल्म

    भारत में फ्लॉप तो पाकिस्तान में नंबर 1! Netflix पर बॉलीवुड फिल्मों का दबदबा, 56 दिनों से ट्रेंड कर रही ये फिल्म


    नई दिल्ली । पाकिस्तान में इन दिनों ओटीटी प्लेटफॉर्म Netflix पर बॉलीवुड फिल्मों का जबरदस्त दबदबा देखने को मिल रहा है। मनोरंजन की दुनिया में भारत और पाकिस्तान के बीच फिल्मों को लेकर हमेशा से एक अलग तरह की दिलचस्पी रही है और अब Netflix की ट्रेंडिंग लिस्ट ने इसे एक बार फिर साबित कर दिया है। पाकिस्तान की Netflix Top 10 सूची में चार बॉलीवुड फिल्में अपनी जगह बनाए हुए हैं। खास बात यह है कि इन फिल्मों में स्पाई थ्रिलर से लेकर रोमांटिक ड्रामा और कोर्टरूम क्राइम थ्रिलर तक अलग अलग जॉनर शामिल हैं। इनमें एक फिल्म तो लगातार 56 दिनों यानी पूरे 8 हफ्तों से ट्रेंडिंग लिस्ट में बनी हुई है।

    इस सूची में सबसे ज्यादा चर्चा आलिया भट्ट और शरवरी वाघ की फिल्म Alpha की हो रही है। पाकिस्तान में Netflix Top 10 में यह फिल्म नंबर एक पर पहुंचने में सफल रही है। फिल्म यश राज फिल्म्स के चर्चित Spy Universe का हिस्सा है और इसमें एक्शन तथा स्पाई थ्रिलर का जबरदस्त मिश्रण देखने को मिलता है। फिल्म में बॉबी देओल निगेटिव भूमिका में नजर आए हैं जबकि अनिल कपूर भी महत्वपूर्ण किरदार में शामिल हैं। इसके अलावा ऋतिक रोशन के कैमियो ने भी फिल्म को चर्चा में बनाए रखा। दिलचस्प बात यह है कि भारत में बॉक्स ऑफिस पर फिल्म को उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिली लेकिन पाकिस्तान में Netflix पर दर्शक इसे जमकर देख रहे हैं।

    पाकिस्तान की ट्रेंडिंग सूची में दूसरी चर्चित बॉलीवुड फिल्म Cocktail 2 है। शाहिद कपूर की यह रोमांटिक ड्रामा फिल्म भी Netflix पर दर्शकों को आकर्षित कर रही है और कई दिनों से Top 10 सूची का हिस्सा बनी हुई है। फिल्म में शाहिद कपूर के साथ रश्मिका मंदाना और कृति सेनन नजर आई हैं। यह फिल्म साल 2012 में आई Cocktail का सीक्वल है और इसके निर्देशन की जिम्मेदारी होमी अदजानिया ने संभाली है। रोमांस और रिश्तों की उलझनों पर आधारित इस फिल्म को पाकिस्तान के दर्शकों से भी अच्छी प्रतिक्रिया मिलती दिखाई दे रही है।

    तीसरे नंबर पर चर्चा में है फिल्म Main Vaapas Aaunga। इम्तियाज अली के निर्देशन में बनी यह फिल्म भारतीय बॉक्स ऑफिस पर सफल रही और अब पाकिस्तान में Netflix पर भी इसका असर दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट के अनुसार यह फिल्म लगातार 28 दिनों यानी करीब चार हफ्तों से पाकिस्तान की ट्रेंडिंग सूची में बनी हुई है। फिल्म में शरवरी वाघ, दिलजीत दोसांझ, नसीरुद्दीन शाह और वेदांग रैना जैसे कलाकार नजर आए हैं। इसकी कहानी भारत पाकिस्तान विभाजन के दौर में बिछड़ने वाले दो प्यार करने वाले लोगों के इर्द गिर्द घूमती है। फिल्म का भावनात्मक विषय और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि दर्शकों को अपनी ओर खींच रही है।

    इस सूची में सबसे लंबे समय से टिके रहने वाली फिल्म Ikka है। अक्षय खन्ना और सनी देओल की यह कोर्टरूम ड्रामा और क्राइम थ्रिलर फिल्म लगातार 56 दिनों से पाकिस्तान में Netflix की ट्रेंडिंग सूची में बनी हुई है। यानी करीब 8 हफ्तों से फिल्म दर्शकों की पसंद बनी हुई है। भारत में भी इसे Netflix पर रिलीज किया गया था। सिद्धार्थ पी मल्होत्रा के निर्देशन में बनी इस फिल्म में कोर्टरूम ड्रामा के साथ क्राइम और सस्पेंस का तड़का देखने को मिलता है।

    Netflix की यह ट्रेंडिंग लिस्ट दिखाती है कि अच्छी कहानी और अलग अलग जॉनर की फिल्मों के लिए दर्शकों की पसंद सीमाओं से आगे बढ़ जाती है। एक तरफ भारत में बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं करने वाली Alpha पाकिस्तान में नंबर एक बन गई है तो दूसरी तरफ रोमांटिक ड्रामा और विभाजन की भावनात्मक कहानी वाली फिल्में भी दर्शकों का ध्यान खींच रही हैं। वहीं 56 दिनों तक ट्रेंडिंग बने रहकर Ikka ने यह साबित कर दिया है कि ओटीटी की दुनिया में किसी फिल्म की लोकप्रियता कई बार थिएटर के बॉक्स ऑफिस नतीजों से बिल्कुल अलग हो सकती है।

  • मलाइका करना चाहती थीं शादी और अर्जुन नहीं थे तैयार? इसी वजह से टूटा था दोनों का रिश्ता, ब्रेकअप पर बड़ा दावा

    मलाइका करना चाहती थीं शादी और अर्जुन नहीं थे तैयार? इसी वजह से टूटा था दोनों का रिश्ता, ब्रेकअप पर बड़ा दावा


    नई दिल्ली । बॉलीवुड के चर्चित कपल रहे अर्जुन कपूर और मलाइका अरोड़ा का रिश्ता लंबे समय तक सुर्खियों में रहा। दोनों ने अपने रिश्ते को कभी किसी फिल्मी अंदाज में छिपाने की कोशिश नहीं की और कई मौकों पर साथ नजर आए। सोशल मीडिया से लेकर पार्टी और फैमिली फंक्शन तक अर्जुन और मलाइका की जोड़ी अक्सर चर्चा में रहती थी। दोनों के बीच उम्र के अंतर को लेकर भी खूब बातें हुईं लेकिन उन्होंने अपने रिश्ते को मजबूती से आगे बढ़ाया। हालांकि कई साल तक साथ रहने के बाद साल 2024 में दोनों के रास्ते अलग हो गए और उनके ब्रेकअप ने फैंस को हैरान कर दिया।

    अर्जुन कपूर ने साल 2024 में अपने और मलाइका अरोड़ा के ब्रेकअप की खबरों की पुष्टि की थी। इसके बाद से ही सोशल मीडिया पर लगातार सवाल उठने लगे कि आखिर दोनों का रिश्ता क्यों टूटा। कई तरह के कयास लगाए गए लेकिन दोनों की तरफ से ब्रेकअप की विस्तृत वजह सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई। अब एक एंटरटेनमेंट जर्नलिस्ट के दावे ने इस पुराने रिश्ते और उसके टूटने की वजह को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।

    एक पॉडकास्ट बातचीत के दौरान एंटरटेनमेंट जर्नलिस्ट विकी लालवानी ने दावा किया कि अर्जुन और मलाइका के रिश्ते में शादी को लेकर मतभेद हो सकते थे। उनके अनुसार दोनों के बीच प्यार की कोई कमी नहीं थी और यह कोई हल्का या अस्थायी रिश्ता नहीं था। दोनों लंबे समय तक एक दूसरे के साथ रहे और उनके बीच गहरा लगाव था। लेकिन शादी को लेकर दोनों की सोच एक जैसी नहीं होने की बात सामने आई।

    जर्नलिस्ट के दावे के मुताबिक मलाइका अरोड़ा उस समय शादी करना चाहती थीं जबकि अर्जुन कपूर शायद इसके लिए पूरी तरह तैयार नहीं थे। यह भी कहा गया कि संभव है अर्जुन ने शादी को कुछ समय के लिए टालने की बात कही हो। ऐसे में जब एक व्यक्ति रिश्ते को शादी के अगले पड़ाव तक ले जाना चाहता हो और दूसरा इसके लिए तैयार न हो तो रिश्ते में दूरी और मतभेद पैदा होना स्वाभाविक है। इसी वजह को अर्जुन और मलाइका के अलग होने के संभावित कारण के रूप में बताया गया है।

    हालांकि यह बात ध्यान रखने वाली है कि शादी को ब्रेकअप की वजह बताने वाला यह दावा जर्नलिस्ट के सूत्रों और उनके व्यक्तिगत आकलन पर आधारित है। अर्जुन कपूर और मलाइका अरोड़ा ने सार्वजनिक रूप से यह नहीं कहा है कि उनके रिश्ते के खत्म होने की निश्चित वजह शादी को लेकर मतभेद थे। इसलिए इसे आधिकारिक पुष्टि के बजाय एक दावा और चर्चा के रूप में देखा जा रहा है।

    अर्जुन और मलाइका के रिश्ते की शुरुआत साल 2018-19 के आसपास मानी जाती है। धीरे धीरे दोनों ने अपने रिश्ते को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया और कई मौकों पर एक दूसरे के लिए प्यार जाहिर किया। लगभग पांच से छह साल तक चले इस रिश्ते को बॉलीवुड के मजबूत रिश्तों में गिना जाता था। यही वजह थी कि जब दोनों के ब्रेकअप की खबर सामने आई तो फैंस के लिए इसे स्वीकार करना आसान नहीं था।

    ब्रेकअप के बाद भी दोनों ने एक दूसरे के बारे में सार्वजनिक रूप से सम्मानजनक बातें कीं। मलाइका ने भी अपने एक इंटरव्यू में अर्जुन को अपने जीवन का बेहद अहम हिस्सा बताया था। वहीं अब जर्नलिस्ट का दावा है कि दोनों के बीच प्यार सच्चा था और उनका रिश्ता किसी अस्थायी आकर्षण या फ्लिंग जैसा नहीं था। उनका मानना है कि अर्जुन के मन में आज भी मलाइका के लिए भावनाएं हो सकती हैं।

    कुल मिलाकर अर्जुन कपूर और मलाइका अरोड़ा का रिश्ता बॉलीवुड के उन रिश्तों में शामिल रहा जिसे फैंस ने करीब से देखा। सालों तक साथ रहने के बाद दोनों का अलग होना आज भी लोगों के लिए चर्चा का विषय है। शादी को लेकर मतभेद की यह नई थ्योरी एक बार फिर सवाल खड़े कर रही है कि क्या प्यार के बावजूद भविष्य को लेकर अलग सोच ने इस रिश्ते को खत्म कर दिया था। हालांकि असली वजह क्या थी इसका निश्चित जवाब सिर्फ अर्जुन और मलाइका ही दे सकते हैं।

  • सिंधु के पानी के इस्तेमाल की भारत की नई तैयारी, लद्दाख में पहला रॉक चेक डैम तैयार, पाक को दिया झटका

    सिंधु के पानी के इस्तेमाल की भारत की नई तैयारी, लद्दाख में पहला रॉक चेक डैम तैयार, पाक को दिया झटका


    लेह। सिंधु नदी के पानी का स्थानीय स्तर पर अधिक से अधिक उपयोग करने की दिशा में लद्दाख में एक अहम परियोजना शुरू की गई है। उपशी में सिंधु नदी पर देश का पहला रॉक चेक डैम तैयार किया गया है। डैम में फिलहाल 10 फीट तक पानी जमा हो चुका है। परियोजना का उद्देश्य लद्दाख में जल उपलब्धता बढ़ाने के साथ खेती और स्थानीय जरूरतों के लिए पानी का बेहतर इस्तेमाल करना है।

    यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया था। इसके बाद भारत संधि के तहत आने वाली छह नदियों के जल का अपने हिस्से में अधिकतम उपयोग करने की दिशा में काम कर रहा है। सिंधु नदी भी इन्हीं नदियों में शामिल है।

    उपशी में तैयार डैम के जरिए स्थानीय स्तर पर पानी रोककर उसे लद्दाख की जरूरतों में इस्तेमाल किया जाएगा। इससे सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है और नदी का जो पानी बहाव के जरिए आगे चला जाता था, उसका एक हिस्सा स्थानीय उपयोग में आ सकेगा।

    56 करोड़ से ज्यादा की लागत, 36 और डैम प्रस्तावित

    उपशी का प्रोजेक्ट लद्दाख में प्रस्तावित बड़े जल संरक्षण अभियान का शुरुआती मॉडल है। सूत्रों के मुताबिक, सिंधु नदी पर 36 और रॉक चेक डैम बनाए जाने की योजना है। इसके लिए केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा गया है।

    प्रस्तावित परियोजना के तहत लेह में 7 हिमालयन रॉक चेक डैम और कारगिल में 29 चेक डैम बनाए जाएंगे। कारगिल जिले में सिंधु नदी बटालिक सेक्टर से होकर गुजरती है। सभी प्रस्तावित परियोजनाओं पर 56 करोड़ रुपए से अधिक खर्च होने का अनुमान है।

    सीमेंट-चूने के बजाय नदी के पत्थरों से निर्माण

    उपशी के रॉक चेक डैम की निर्माण तकनीक इसे पारंपरिक बांधों से अलग बनाती है। इसे तैयार करने में सीमेंट या चूने का इस्तेमाल नहीं किया गया है। नदी के तल से निकाले गए बड़े प्राकृतिक पत्थरों को आपस में इंटरलॉक कर संरचना तैयार की गई है।

    इस डैम की पानी जमा करने की क्षमता करीब 4 करोड़ लीटर है। अधिकारियों के मुताबिक, स्थानीय संसाधनों का इस्तेमाल कर तैयार की गई ऐसी संरचनाएं लद्दाख जैसे क्षेत्र में जल संरक्षण के लिए उपयोगी मॉडल साबित हो सकती हैं।

    10 फीट पानी जमा, नहर से खेतों तक पहुंचेगा

    लद्दाख में खेती के लिए पानी की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती रही है। खासकर वसंत ऋतु में बुवाई के दौरान किसानों को पानी की कमी का सामना करना पड़ता है।

    उपशी डैम में जलस्तर 10 फीट तक पहुंचने के बाद इसे इगू फे नहर के जरिए आसपास के खेतों तक पहुंचाने की योजना है। इससे सिंचाई की सुविधा बढ़ेगी और खेती योग्य जमीन को पर्याप्त पानी मिलने की उम्मीद है।

    परियोजना के आगे बढ़ने के साथ लद्दाख के दूसरे इलाकों में भी इसी तरह की जल संरक्षण संरचनाएं विकसित करने की तैयारी है।

    पानी के स्थानीय इस्तेमाल पर बढ़ा फोकस

    उपशी का यह डैम केवल एक स्थानीय जल संरक्षण परियोजना नहीं, बल्कि सिंधु नदी तंत्र में भारत के अपने हिस्से के पानी के इस्तेमाल को बढ़ाने की दिशा में उठाया गया कदम भी है। आने वाले समय में प्रस्तावित 36 अन्य डैमों पर काम आगे बढ़ता है तो लद्दाख में सिंचाई, स्थानीय जल उपलब्धता और कृषि गतिविधियों को इसका लाभ मिल सकता है।