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  • दिग्विजय बोले- 'मुझसे बड़ा सनातनी बताओ', राम मंदिर और EVM मुद्दे को लेकर BJP पर साधा निशाना

    दिग्विजय बोले- 'मुझसे बड़ा सनातनी बताओ', राम मंदिर और EVM मुद्दे को लेकर BJP पर साधा निशाना


    राजगढ़। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने शनिवार को राजगढ़ में अपनी ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ के दौरान भाजपा पर चंदा चोरी, वोट चोरी और धार्मिक स्थलों में कथित अनियमितताओं को लेकर निशाना साधा। उन्होंने राम मंदिर ट्रस्ट की जमीन की खरीद-फरोख्त पर सवाल उठाते हुए पारदर्शिता की मांग की। ईवीएम के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि चुनाव हारने से उन्हें फर्क नहीं पड़ता, लेकिन चुनाव बैलेट पेपर से कराए जाने चाहिए। आजम खान से अपनी मित्रता का जिक्र करते हुए उन्होंने उन्हें अच्छा राजनेता भी बताया।

    जिला मुख्यालय पर रात्रि विश्राम के बाद दिग्विजय सिंह ने मां जालपा देवी के दर्शन किए और नेवज नदी की पूजा की। इसके बाद उनकी यात्रा कालीपीठ मार्ग स्थित दंड जोड़ के भगवान बाबा रामदेव मंदिर पहुंची, जहां उन्होंने प्रेस वार्ता की। सिंह ने कहा कि यात्रा का उद्देश्य सनातन धर्म की मूल भावना, धार्मिक आस्था, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण करना है। उनके मुताबिक, चंदा चोरी और वोट चोरी के मुद्दे भी इसी लड़ाई का हिस्सा हैं।

    राम मंदिर ट्रस्ट की जमीन की खरीद पर उठाए सवाल

    दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर के चंदे और ट्रस्ट की जमीन से जुड़े मामलों में कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि मंदिर के आसपास जमीनों की कीमतें बढ़ने के दौरान कुछ मामलों में भाजपा नेताओं ने सस्ती कीमत पर जमीन खरीदी और 24 घंटे के भीतर उसे राम मंदिर ट्रस्ट को बेच दिया।

    एक मामले का जिक्र करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि दो करोड़ रुपये में खरीदी गई जमीन अगले ही दिन ट्रस्ट को 18 करोड़ रुपये में बेच दी गई। सिंह ने कहा कि इस मामले में जांच की मांग की गई थी और एसआईटी को प्रमाण सौंपे जाने की बात भी सामने आई, लेकिन जांच नहीं हुई।

    उन्होंने चंदा संग्रह में गड़बड़ी की शिकायत करने वाले आरएसएस के पूर्व प्रचारक महिपाल सिंह का भी उल्लेख किया। वैष्णोदेवी ट्रस्ट, केदारनाथ, ओरछा और उज्जैन के धार्मिक स्थलों का जिक्र करते हुए उन्होंने दान की राशि के पारदर्शी इस्तेमाल की जरूरत बताई।

    EVM पर बोले- हार गए तो हार गए, बैलेट पेपर से चुनाव कराइए

    ईवीएम के विरोध और बैलेट पेपर से चुनाव कराने पर कांग्रेस की हार से जुड़े सवाल पर दिग्विजय सिंह ने कहा कि उनका मुद्दा चुनाव में जीत या हार नहीं, बल्कि मतदान प्रक्रिया में पारदर्शिता है। उन्होंने कहा कि भारत के नागरिक के रूप में मतदाता का नाम वोटर लिस्ट में होना और अपनी पसंद के उम्मीदवार को वोट देना उसका अधिकार है।

    उन्होंने वीवीपैट की पर्ची मतदाता को हाथ में नहीं दिए जाने पर सवाल उठाया और बैलेट पेपर से चुनाव कराने की चुनौती दी। सिंह ने कहा, “चुनाव हार गए तो हार गए, चलेगा, कोई बात नहीं। आप बैलेट पेपर से पूरा चुनाव करा दीजिए। जब आप कह रहे हैं कि बैलेट पेपर से कांग्रेस हार रही है, तो हराइए।”

    बोले- भाजपा में मुझसे बड़ा सनातनी बताओ

    भाजपा नेताओं के इस सवाल पर कि उनकी सरकार के समय उन्हें भगवान राम की याद क्यों नहीं आई, दिग्विजय सिंह ने कहा कि उन्होंने रामलीला पूजन में चंदा दिया था और गौ सेवा आयोग का गठन किया था। उन्होंने अपने गृह क्षेत्र राघौगढ़ के 400 साल पुराने राघवजी मंदिर का भी उल्लेख किया।

    इसके बाद उन्होंने भाजपा को चुनौती देते हुए कहा कि कोई ऐसा व्यक्ति बताया जाए, जो उनसे ज्यादा धार्मिक हो। उन्होंने आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद में भी ऐसा व्यक्ति बताने की बात कही।

    सिंह ने दावा किया कि उनकी यात्रा में ऐसे लोग भी शामिल हो रहे हैं, जो किसी राजनीतिक दल से जुड़े नहीं हैं। उनके मुताबिक, कुछ भाजपा कार्यकर्ताओं और आरएसएस के लोगों के संदेश भी आए हैं। उन्होंने कहा कि वैचारिक मतभेद के बावजूद इन लोगों ने राम मंदिर में चंदे की कथित गड़बड़ी को लेकर उनके सवालों का समर्थन किया है।

    आजम खान को बताया मित्र, बोले- अच्छा राजनेता मानता हूं

    समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान के कांग्रेस में आने की संभावना से जुड़े सवाल पर दिग्विजय सिंह ने कहा कि आजम खान से उनकी अच्छी मित्रता है और वह उन्हें अच्छा राजनेता मानते हैं।

    उन्होंने कहा कि आजम खान ने विश्वविद्यालय शुरू किया और अपनी संपत्ति उसमें लगा दी। यूपीए सरकार के दौरान विश्वविद्यालय को मंजूरी दिलाने में उन्होंने अपनी ओर से जितनी मदद संभव थी, की थी। सिंह ने कहा कि आजम खान जिस पार्टी में रहना चाहें, रह सकते हैं। समाजवादी पार्टी उनके गठबंधन का हिस्सा है और वे एक-दूसरे के मामलों में हस्तक्षेप नहीं करते।

    नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बारे में पूछे गए सवाल पर भी दिग्विजय सिंह ने उन्हें अपना मित्र बताया। उन्होंने कहा कि वे विजयवर्गीय को काफी समय से जानते हैं।

    राहुल गांधी की महारैली पर भी रखी बात

    दिल्ली में एक नवंबर को प्रस्तावित राहुल गांधी की ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ महारैली को लेकर दिग्विजय सिंह ने कहा कि जो नेता दिल्ली जा सकते हैं, वे वहां जाएं और जो नहीं जा सकते, वे उनकी यात्रा में शामिल हों। उन्होंने बताया कि उनकी यात्रा पहले से निर्धारित थी, इसलिए वह दिल्ली नहीं जा रहे हैं। सिंह ने वोट चोरी को गंभीर मुद्दा बताते हुए कहा कि इसका असर नागरिकों के अधिकारों पर पड़ता है।

    राजगढ़ में भैंस चोरी का मुद्दा भी उठाया

    प्रेस वार्ता के दौरान दिग्विजय सिंह ने राजगढ़ जिले में भैंस चोरी की घटनाओं का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि जिले में भैंस चोरी के मामले बढ़ रहे हैं और जिन लोगों की भैंस चोरी हुई हैं, उनमें अधिकतर कांग्रेसी हैं। इस पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि चोरी हर जगह बढ़ रही है।

    सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा में दिग्विजय सिंह के साथ उनकी पत्नी अमृता सिंह, पूर्व ऊर्जा मंत्री एवं कांग्रेस जिला अध्यक्ष प्रियव्रत सिंह, पूर्व विधायक हेमराज कल्पोनी, बापू सिंह तंवर, यात्रा प्रभारी चंदर सिंह सौंधिया, रामचंद्र दांगी सहित अन्य कांग्रेस नेता मौजूद रहे। यात्रा का जगह-जगह फूलों से स्वागत किया गया।

  • जर्मनी में Gen Z का प्रदर्शन हिंसक हुआ, फ्रैंकफर्ट में दुकानों में तोड़फोड़ और लूटपाट

    जर्मनी में Gen Z का प्रदर्शन हिंसक हुआ, फ्रैंकफर्ट में दुकानों में तोड़फोड़ और लूटपाट


    नई दिल्ली। जर्मनी में बढ़ती महंगाई, शिक्षा के लिए पर्याप्त फंडिंग और अनिवार्य सैन्य सेवा के विरोध में हजारों युवा सड़कों पर उतर आए। शनिवार को बर्लिन, फ्रैंकफर्ट और म्यूनिख समेत 34 शहरों में प्रदर्शन हुए। फ्रैंकफर्ट में प्रदर्शन के दौरान कुछ नकाबपोश लोगों ने दुकानों में लूटपाट की और कई जगह तोड़फोड़ की। पुलिस के मुताबिक, शहर के केंद्र में हिंसा हुई और आपातकालीन सेवाओं पर पेट्रोल बम भी फेंके गए।

    ये प्रदर्शन ‘जेन Z रेगेल्ट’ नामक समूह की ओर से आयोजित किए गए थे। युवाओं ने बेहतर रोजगार, आर्थिक सुरक्षा, शिक्षा के लिए अधिक सरकारी फंडिंग और सार्वजनिक सुविधाओं में सुधार की मांग उठाई। साथ ही, अनिवार्य सैन्य सेवा के खिलाफ भी विरोध जताया। ये आंदोलन यूरोप के कई हिस्सों में युवाओं की अगुवाई में चल रहे प्रदर्शनों का हिस्सा हैं।

    फ्रैंकफर्ट में हिंसा, दुकानों के शीशे तोड़े

    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, फ्रैंकफर्ट में प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया। कुछ नकाबपोश प्रदर्शनकारियों ने दुकानों में लूटपाट की, जबकि कई अन्य दुकानों को नुकसान पहुंचाया गया। पुलिस को स्थिति नियंत्रित करने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी।

    फ्रैंकफर्ट पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बताया कि शहर के केंद्र में हिंसक उपद्रव जारी हैं। कई दुकानों की खिड़कियां तोड़ दी गई हैं और आपातकालीन सेवाओं पर मोलोटोव कॉकटेल यानी पेट्रोल बम फेंके जा रहे हैं। पुलिस ने लोगों से शहर के केंद्र में जाने से बचने और वहां मौजूद लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की।

    हैम्बर्ग में भी कुछ बैरिकेड्स में आग लगा दी गई। जर्मन अधिकारियों के मुताबिक, अधिकांश प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, लेकिन उन्होंने आशंका जताई कि चरमपंथी समूह भीड़ का फायदा उठाकर हिंसा फैला सकते हैं।

    महंगाई और आर्थिक असुरक्षा से नाराज युवा

    प्रदर्शन में शामिल युवाओं का कहना है कि यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था जर्मनी में भी जीवन-यापन का खर्च लगातार बढ़ रहा है। महंगाई के कारण आम लोगों और खासकर युवाओं के सामने आर्थिक चुनौतियां खड़ी हो रही हैं। वे बेहतर रोजगार के अवसर, भविष्य की आर्थिक सुरक्षा और सरकारी सुविधाओं में सुधार चाहते हैं। बर्लिन में आयोजित एक रैली के दौरान ‘जेन Z रेगेल्ट’ की प्रवक्ता ने कहा कि युवा युद्ध के लिए नहीं, बल्कि शांति और आजादी के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

    यूरोप के कई देशों में युवा आंदोलन

    जर्मनी में हुए ये प्रदर्शन यूरोप के विभिन्न देशों में युवाओं की बढ़ती सक्रियता के बीच हुए हैं। सर्बिया में छात्र आंदोलनों ने राजनीति और चुनावी माहौल को प्रभावित किया है। वहीं, फ्रांस में युवाओं के विरोध प्रदर्शनों के दौरान कई जगह हिंसा और लूटपाट की घटनाएं सामने आई थीं। शिक्षा, रोजगार, महंगाई और सरकारी नीतियों को लेकर युवाओं की नाराजगी यूरोप के कई हिस्सों में प्रदर्शनों के रूप में सामने आ रही है।

  • पेट्रोल के निर्यात पर एक्सपोर्ट ड्यूटी शून्य, डीजल और ATF पर बढ़ाया टैक्स, घरेलू कीमतों पर असर नहीं

    पेट्रोल के निर्यात पर एक्सपोर्ट ड्यूटी शून्य, डीजल और ATF पर बढ़ाया टैक्स, घरेलू कीमतों पर असर नहीं


    नई दिल्ली। दिवाली से पहले केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लगने वाले टैक्स की दरों में बदलाव किया है। वित्त मंत्रालय ने पेट्रोल के निर्यात पर एक्सपोर्ट ड्यूटी 2.50 रुपये प्रति लीटर से घटाकर शून्य कर दी है। वहीं, डीजल और विमान ईंधन (ATF) के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स बढ़ा दिया गया है। नए आदेश 31 अक्टूबर से लागू होकर अगले दो सप्ताह तक प्रभावी रहेंगे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन बदलावों का घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतों या उन पर लगने वाली मौजूदा ड्यूटी पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

    पेट्रोल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी खत्म

    वित्त मंत्रालय ने शनिवार, 31 अक्टूबर को इस संबंध में अधिसूचना जारी की। इसके मुताबिक, पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाली 2.50 रुपये प्रति लीटर की एक्सपोर्ट ड्यूटी को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। अब पेट्रोल के निर्यात पर यह टैक्स शून्य रहेगा।

    दूसरी ओर, सरकार ने एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) को 10.50 रुपये से बढ़ाकर 11 रुपये प्रति लीटर कर दिया है। डीजल के निर्यात पर लगने वाली SAED और रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस की संयुक्त दर भी 8.50 रुपये से बढ़ाकर 11.50 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है। यानी डीजल के निर्यात पर प्रति लीटर 3 रुपये टैक्स बढ़ा है।

    पश्चिम एशिया में तनाव के बीच फैसला

    सरकार ने ये बदलाव ऐसे समय किए हैं, जब वैश्विक ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल तथा पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों पर असर पड़ रहा है। वित्त मंत्रालय के मुताबिक, डीजल और ATF पर बढ़ाई गई दरें अगले दो सप्ताह के लिए लागू रहेंगी। इसके बाद बाजार की परिस्थितियों के अनुसार समीक्षा की जाएगी।

    घरेलू बाजार में नहीं होगा बदलाव

    पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि विंडफॉल टैक्स में किए गए ये बदलाव केवल पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लागू होंगे। घरेलू इस्तेमाल के लिए पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा ड्यूटी दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। ऐसे में इस फैसले से देश में पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों पर सीधे असर की संभावना नहीं है।

    क्या होता है विंडफॉल टैक्स?

    विंडफॉल टैक्स वह अतिरिक्त कर है, जो कंपनियों को असाधारण बाजार परिस्थितियों में सामान्य से अधिक मुनाफा होने पर लगाया जाता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतें बढ़ने पर रिफाइनरी कंपनियों को विदेशों में पेट्रोल और डीजल बेचकर ज्यादा कमाई हो सकती है। ऐसे में सरकार निर्यात पर टैक्स लगाकर इस अतिरिक्त मुनाफे का एक हिस्सा हासिल करती है।

    निर्यात पर शुल्क बढ़ाने का एक उद्देश्य विदेशों में ईंधन बेचना कम आकर्षक बनाना और घरेलू बाजार में इसकी उपलब्धता बनाए रखने के लिए रिफाइनरी कंपनियों को प्रोत्साहित करना भी है।

    2022 में पहली बार लगाया गया था टैक्स

    भारत ने जुलाई 2022 में पहली बार पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स लगाया था। करीब दो साल बाद दिसंबर 2024 में इसे हटा दिया गया। इसके बाद मार्च 2026 में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच सरकार ने इसे दोबारा लागू किया। तब से बाजार की स्थितियों के अनुसार इसकी दरों में बदलाव किया जा रहा है।

    सरकार आमतौर पर हर दो सप्ताह में इन टैक्स दरों की समीक्षा करती है। इस दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतों और घरेलू रिफाइनरी कंपनियों को निर्यात से होने वाले मुनाफे को ध्यान में रखा जाता है।

  • जेल से रिहा होते ही आजम खान को ED ने किया गिरफ्तार, आज कोर्ट में पेशी

    जेल से रिहा होते ही आजम खान को ED ने किया गिरफ्तार, आज कोर्ट में पेशी


    लखनऊ। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद शनिवार शाम रामपुर जेल से रिहा होते ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। ईडी की टीम उन्हें अपने साथ ले गई। अब एजेंसी रविवार सुबह करीब 10 बजे आजम खान को कोर्ट में पेश कर कस्टडी की मांग करेगी।

    दरअसल, ईडी ने आजम खान के खिलाफ 14 अक्टूबर को मुकदमा दर्ज किया था। दूसरी ओर, हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम की जेल से रिहाई की उम्मीद थी। इसी बीच ईडी की टीम सीआरपीएफ जवानों के साथ रामपुर जेल के बाहर पहुंच गई। जेल से बाहर आते ही टीम ने आजम खान को हिरासत में ले लिया और बाद में गिरफ्तार कर अपने साथ ले गई। अब्दुल्ला आजम की रिहाई को लेकर फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है।

    दो पैन कार्ड मामले में हाईकोर्ट से मिली थी राहत

    आजम खान और अब्दुल्ला आजम ने दो पैन कार्ड मामले में ट्रायल कोर्ट के फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। दोनों ने क्रिमिनल रिवीजन याचिका दाखिल कर दोषसिद्धि पर रोक लगाने, सजा निलंबित करने और अंतरिम जमानत पर रिहा करने की मांग की थी।

    15 अक्टूबर को मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। इसके बाद जस्टिस समित गोपाल की एकल पीठ ने दोनों की जमानत याचिका मंजूर करते हुए सजा निलंबित कर दी। हालांकि, दोषसिद्धि पर रोक लगाने की मांग अदालत ने खारिज कर दी थी।

    रिहाई के बाद आजम खान ने उठाए सवाल

    रामपुर जेल से बाहर आने के बाद आजम खान ने कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अब कहने के लिए क्या बचा है और वह क्या कह सकते हैं। उनके मुताबिक, कानून का अस्तित्व ही खत्म हो गया है।

    आजम खान ने सवाल किया, ‘क्या मुस्लिम होने की यही सजा है?’ उन्होंने कहा कि उनकी गलती सिर्फ इतनी थी कि एक मुस्लिम ने यूनिवर्सिटी बनाई। उन्होंने बच्चों के लिए स्कूल बनाए और क्या यही उनका अपराध है?

    ED ने 1,170 करोड़ की संपत्तियां अटैच करने का किया था दावा

    प्रवर्तन निदेशालय ने बुधवार को बताया था कि उसने मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत रामपुर स्थित आजम खान की मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन और भवनों को अटैच किया है। एजेंसी के मुताबिक, इन संपत्तियों की मौजूदा बाजार कीमत करीब 1,170 करोड़ रुपये है।

    ईडी का आरोप है कि सार्वजनिक कार्यों के लिए आवंटित सरकारी फंड का इस्तेमाल निजी यूनिवर्सिटी के निर्माण में किया गया। एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया था कि आजम खान ने उत्तर प्रदेश के शहरी विकास मंत्री और जल निगम में कैबिनेट मंत्री रहते हुए अपने प्रभाव का इस्तेमाल कथित अनियमितताओं के लिए किया।

    वहीं, रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) ने जुलाई में यूनिवर्सिटी परिसर की 38 इमारतों को गिराने का आदेश दिया था। इस आदेश के खिलाफ यूनिवर्सिटी की ओर से अपील दायर की गई थी। ईडी ने इस मामले में अगस्त में छापेमारी कर आजम खान से पूछताछ भी की थी।

    अखिलेश यादव बोले- वक्त बदलता है तो तख्त भी बदल जाता है

    समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आजम खान के समर्थन में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा, ‘आज के हुक्मरानों को याद रहे, जब वक्त बदल जाता है तो तख्त बदल जाता है।’

    अखिलेश यादव ने कहा कि आजम खान के खिलाफ मुकदमों की जो साजिश की जा रही है, उसे पूरा देश ही नहीं, बल्कि दुनिया देख रही है। उन्होंने एक उम्रदराज व्यक्ति को बार-बार मुकदमों में फंसाकर जेल भेजने को बेहद कायराना हरकत बताया।

    सपा प्रमुख ने कहा कि सत्ता जिस गलत रवायत को बढ़ावा दे रही है, हवा बदलने पर उसे खुद भी इसका सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जब नाइंसाफी हद से गुजर जाती है तो वह जुल्म करने वालों के लिए ही कहर बन जाती है। अखिलेश ने इस पूरी कार्रवाई को बेहद निंदनीय बताया।

    इससे पहले अखिलेश यादव ने जेल में आजम खान से मुलाकात की थी। उन्होंने बीजेपी सरकार पर आजम खान के खिलाफ राजनीतिक बदले की कार्रवाई करने का आरोप लगाया था। अखिलेश ने यह भी दावा किया था कि उनके खिलाफ झूठे मामले दर्ज किए गए हैं।

  • MP में दिन के तापमान में गिरावट, रात का पारा अब भी सामान्य से अधिक, 4 दिन बारिश-आंधी का अलर्ट

    MP में दिन के तापमान में गिरावट, रात का पारा अब भी सामान्य से अधिक, 4 दिन बारिश-आंधी का अलर्ट


    भोपाल। ‘अर्नब’ तूफान के असर से मध्य प्रदेश में मौसम का मिजाज बदल गया है। बारिश और ठंडी हवाओं के कारण दिन के तापमान में 6.6 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज की गई है, जबकि रात का पारा अब भी सामान्य से 4.8 डिग्री तक ज्यादा बना हुआ है। मौसम विभाग ने अगले चार दिन प्रदेश में आंधी, बारिश और गरज-चमक का दौर जारी रहने की संभावना जताई है। नवंबर के दूसरे सप्ताह से ठंड बढ़ने के आसार हैं।

    भोपाल मौसम केंद्र के मुताबिक, उत्तराखंड में हो रही बर्फबारी के कारण ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में ठंडी हवाओं का असर देखने को मिल रहा है। यहां अधिकतम तापमान में 6.2 से 6.6 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई है। अमरकंटक, रीवा, सतना, पचमढ़ी, करौंदी, उमरिया, ग्वालियर और दतिया में दिन का तापमान 25 डिग्री सेल्सियस से नीचे रहा।

    इसके उलट प्रदेश के कई संभागों में रात का तापमान सामान्य से अधिक बना हुआ है। इंदौर, चंबल, रीवा और सागर-जबलपुर संभाग में न्यूनतम तापमान सामान्य से 2.3 डिग्री तक ज्यादा दर्ज किया गया। वहीं भोपाल, नर्मदापुरम, उज्जैन और ग्वालियर संभाग में यह अंतर 4.8 डिग्री तक पहुंच गया है।

    विदिशा में दृश्यता घटकर 50 मीटर रह गई

    विदिशा में रविवार सुबह घना कोहरा छाया रहा। इसके चलते दृश्यता घटकर महज 50 मीटर रह गई। सड़कों पर आगे का रास्ता साफ दिखाई नहीं देने से वाहन चालकों को हेडलाइट जलाकर धीमी गति से चलना पड़ा। हाईवे और खुले रास्तों पर भी लोगों को विशेष सावधानी बरतनी पड़ी।

    अगले चार दिन ऐसा रहेगा मौसम

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नाइक के अनुसार, अगले चार दिन प्रदेश में मौसम का यही मिजाज बना रह सकता है। दिन के तापमान में गिरावट जारी रहने की संभावना है, जबकि रातें अपेक्षाकृत गर्म रहेंगी। इस दौरान कई इलाकों में आंधी, बारिश और गरज-चमक की स्थिति बन सकती है।

    रविवार को सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला, बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा और पांढुर्णा में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। दूसरी ओर भोपाल, इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर सहित कई जिलों में धूप खिलने का अनुमान है।

    24 घंटे में 26 जिलों में हुई बारिश

    चक्रवात के असर से बीते 24 घंटे के दौरान प्रदेश के 26 जिलों में बारिश दर्ज की गई। इनमें जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़, नर्मदापुरम, राजगढ़, शिवपुरी, ग्वालियर, भिंड और दतिया शामिल हैं। इस दौरान मुरैना में हवा की रफ्तार 31 किलोमीटर प्रति घंटा दर्ज की गई।

  • विदेशी निवेशकों की खरीदारी और बॉन्ड यील्ड में नरमी से सेंसेक्स-निफ्टी में करीब 2 प्रतिशत की साप्ताहिक बढ़त

    विदेशी निवेशकों की खरीदारी और बॉन्ड यील्ड में नरमी से सेंसेक्स-निफ्टी में करीब 2 प्रतिशत की साप्ताहिक बढ़त

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार के लिए 26 से 30 अक्टूबर तक का कारोबारी सप्ताह बढ़त वाला रहा। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की खरीदारी, बॉन्ड यील्ड में नरमी और कंपनियों के मजबूत तिमाही नतीजों से बाजार को समर्थन मिला। इस दौरान प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में करीब दो प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन तक बाजार ने अपनी साप्ताहिक बढ़त बनाए रखी, हालांकि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण निवेशकों के बीच सतर्कता भी देखने को मिली।

    सप्ताह के पांच कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स 1,335.70 अंक यानी 1.83 प्रतिशत बढ़कर 74,459.53 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी में 453.10 अंकों यानी 2 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई और यह 23,053.10 पर पहुंच गया। बॉन्ड यील्ड में कमी आने से निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता में सुधार हुआ, जिसका असर शेयर बाजार की खरीदारी पर दिखाई दिया।

    इस दौरान अमेरिकी फेडरल रिजर्व, यूरोपीय सेंट्रल बैंक और बैंक ऑफ जापान ने अपनी ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया। हालांकि, तीनों केंद्रीय बैंकों ने महंगाई को लेकर सतर्क रुख बनाए रखा। इसके कारण जल्द मौद्रिक नरमी की उम्मीदों को सीमित समर्थन मिला। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, बॉन्ड यील्ड में नरमी और बेहतर आर्थिक परिस्थितियों ने शेयर बाजार में व्यापक खरीदारी को प्रोत्साहित किया।

    सप्ताह के दौरान मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों का प्रदर्शन प्रमुख सूचकांकों से बेहतर रहा। निफ्टी मिडकैप 100 में 2.69 प्रतिशत की तेजी आई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 चार प्रतिशत चढ़ा। इससे पता चलता है कि बाजार में खरीदारी केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि छोटे और मध्यम आकार की कंपनियों के शेयरों में भी निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही।

    विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी ने भी बाजार को मजबूती दी। इस सप्ताह विदेशी संस्थागत निवेशकों ने कुल 6,304.67 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों ने भी 3,109.79 करोड़ रुपये की खरीदारी की। विदेशी निवेशकों की वापसी को बाजार में सकारात्मक संकेत के तौर पर देखा गया।

    सेक्टर के लिहाज से फार्मा और हेल्थकेयर कंपनियों के शेयरों में अच्छी तेजी दर्ज की गई। इसकी प्रमुख वजह कंपनियों के सकारात्मक वित्तीय नतीजे रहे। बॉन्ड यील्ड में नरमी से रियल एस्टेट शेयरों को भी फायदा मिला। वहीं, इनपुट लागत कम होने की उम्मीदों के चलते मेटल, एफएमसीजी और ऑटो सेक्टर के शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। इसके विपरीत सीमेंट और ऑयल एंड गैस सेक्टर के शेयरों का प्रदर्शन कमजोर रहा।

    हालांकि, सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिनों में बाजार का रुख कुछ सतर्क हो गया। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई। इससे व्यापक बाजार में निवेशकों ने मुनाफावसूली की, लेकिन सेंसेक्स और निफ्टी अपनी साप्ताहिक बढ़त बनाए रखने में सफल रहे।

    सप्ताह के अंत में ब्रेंट क्रूड का भाव करीब 117 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना रहा। अब निवेशकों की नजर ओपेक प्लस की आगामी समीक्षा पर है। इस बैठक में तेल उत्पादन और आपूर्ति को लेकर कोई महत्वपूर्ण फैसला सामने आ सकता है, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और शेयर बाजार की दिशा पर पड़ सकता है।

  • सरकार ने पेट्रोल निर्यात शुल्क शून्य किया, डीजल और विमान ईंधन पर बढ़ाई एक्सपोर्ट ड्यूटी..

    सरकार ने पेट्रोल निर्यात शुल्क शून्य किया, डीजल और विमान ईंधन पर बढ़ाई एक्सपोर्ट ड्यूटी..

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) के निर्यात पर लागू शुल्कों में बदलाव किया है। वित्त मंत्रालय की ओर से शनिवार, 31 अक्टूबर को जारी अधिसूचना के अनुसार, पेट्रोल के निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क घटाकर शून्य कर दिया गया है। वहीं, डीजल और एटीएफ के निर्यात पर शुल्क में बढ़ोतरी की गई है। सरकार के इस फैसले के बाद पेट्रोल पर पहले लागू 2.50 रुपये प्रति लीटर का शुल्क समाप्त हो गया है।

    संशोधित दरों के तहत डीजल के निर्यात पर शुल्क 8.50 रुपये से बढ़ाकर 11.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इसमें तीन रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई है। इसी तरह, एटीएफ के निर्यात पर शुल्क 10.50 रुपये से बढ़ाकर 11 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इस तरह विमान ईंधन पर निर्यात शुल्क में 50 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। पेट्रोल पर शुल्क शून्य होने के साथ तीनों पेट्रोलियम उत्पादों के लिए अलग-अलग दरें लागू हो गई हैं।

    सरकार ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में बने हालात के बीच इन शुल्कों की समीक्षा की है। मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने के बाद मार्च के अंत में पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर शुल्क लागू किए गए थे। इन दरों की समीक्षा केंद्र सरकार हर 15 दिन में करती है, ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों के अनुसार शुल्कों में बदलाव किया जा सके।

    निर्यात शुल्क लागू करने का प्रमुख उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि तेल रिफाइनरियां घरेलू बाजार में आपूर्ति करने के बजाय अधिक मुनाफे के लिए विदेशी बाजारों को प्राथमिकता न दें। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें घरेलू बाजार की तुलना में अधिक आकर्षक होती हैं, तब निर्यात से बेहतर कमाई की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे हालात में निर्यात शुल्क के माध्यम से घरेलू खरीदारों के लिए पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने की कोशिश की जाती है।

    इस बीच, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड का भाव बढ़कर 113.10 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। बीते एक सप्ताह में इसकी कीमत में 1.55 प्रतिशत और एक महीने के दौरान 15.71 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछले तीन महीनों में ब्रेंट क्रूड करीब 26 प्रतिशत महंगा हुआ है।

    भारत के लिए हॉर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व भी काफी अधिक है। मध्य पूर्व में संघर्ष शुरू होने से पहले देश के कच्चे तेल के आयात का लगभग 45 प्रतिशत हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर आता था। यह मार्ग फारस की खाड़ी को वैश्विक बाजारों से जोड़ता है और तेल व्यापार के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने के कारण भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति के लिए दूसरे विकल्प तलाशने पड़े हैं।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और आपूर्ति से जुड़े इन घटनाक्रमों के बीच सरकार पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्यात शुल्क की समीक्षा कर रही है। नई दरों के तहत पेट्रोल पर निर्यात शुल्क समाप्त हो गया है, जबकि डीजल और एटीएफ पर शुल्क बढ़ाया गया है। इन बदलावों का उद्देश्य घरेलू आपूर्ति और निर्यात से जुड़े आर्थिक हितों के बीच संतुलन बनाए रखना है।

  • शिवपुरी में कोर्ट में गवाही देने नहीं पहुंचे आरक्षक पर कार्रवाई, 5 हजार रुपये का बंधपत्र जब्त, सात दिन में जमा करनी होगी राशि

    शिवपुरी में कोर्ट में गवाही देने नहीं पहुंचे आरक्षक पर कार्रवाई, 5 हजार रुपये का बंधपत्र जब्त, सात दिन में जमा करनी होगी राशि


    शिवपुरी: में निर्धारित तारीख पर न्यायालय में गवाही के लिए उपस्थित नहीं होना करैरा थाने में पदस्थ आरक्षक मनोज कतरोलिया को महंगा पड़ गया। एनडीपीएस एक्ट के विशेष सत्र प्रकरण में गवाही देने के लिए अदालत में उपस्थित नहीं होने पर न्यायालय ने उसके 5 हजार रुपये के बंधपत्र की राशि जब्त कर ली है। विशेष न्यायाधीश दिनेश कुमार शर्मा ने 30 अक्टूबर 2026 को आदेश जारी करते हुए आरक्षक को सात दिन के भीतर यह राशि जमा कराने के निर्देश दिए हैं।

    जानकारी के अनुसार, आरक्षक मनोज कतरोलिया करैरा थाने में पदस्थ है। वह विशेष सत्र प्रकरण क्रमांक 24/2025 में मध्य प्रदेश राज्य विरुद्ध कमल सिंह व अन्य मामले में साक्षी के रूप में नामित था। इस मामले में उसकी गवाही दर्ज की जानी थी। न्यायालय ने उसकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए 5 हजार रुपये का जमानती वारंट जारी किया था। संबंधित वारंट की तामील भी कराई जा चुकी थी।

    न्यायालय में निर्धारित तारीख पर उपस्थित रहने के लिए आरक्षक ने 11 सितंबर 2026 को 5 हजार रुपये का बंधपत्र निष्पादित किया था। इसके तहत उसे तय तारीख पर अदालत में उपस्थित होना था, लेकिन वह निर्धारित समय पर न्यायालय में पेश नहीं हुआ। उसकी अनुपस्थिति के संबंध में कोई उचित कारण भी प्रस्तुत नहीं किया गया। इसके बाद न्यायालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए बंधपत्र की राशि जब्त करने का आदेश दिया।

    विशेष न्यायाधीश, एनडीपीएस एक्ट, शिवपुरी ने एमजेसी प्रकरण क्रमांक 409/2026 में 30 अक्टूबर को आदेश पारित किया। इसमें भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 491 के तहत आरक्षक के 5 हजार रुपये के बंधपत्र को जब्त करने की कार्रवाई की गई। न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि संबंधित राशि सात दिन के भीतर जमा कराई जाए।

    आदेश के मुताबिक, आरक्षक मनोज कतरोलिया को 5 हजार रुपये की राशि अनुविभागीय अधिकारी करैरा के माध्यम से न्यायालय में जमा करनी होगी। निर्धारित अवधि के भीतर राशि जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं। यह कार्रवाई न्यायालय में उपस्थित रहने के लिए दिए गए बंधपत्र की शर्तों का पालन नहीं करने के मामले में की गई है।

    इस प्रकरण में न्यायालय की ओर से जारी आदेश के तहत आरक्षक को तय समयसीमा में राशि जमा करानी होगी। मामला एनडीपीएस एक्ट से जुड़े विशेष सत्र प्रकरण में गवाही के लिए उपस्थित नहीं होने से संबंधित है। अदालत ने पहले उसकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए जमानती वारंट जारी किया था और बंधपत्र भी निष्पादित कराया गया था। इसके बावजूद निर्धारित तारीख पर उपस्थित नहीं होने और अनुपस्थिति का उचित कारण नहीं बताए जाने के बाद बंधपत्र की राशि जब्त करने का आदेश दिया गया।

  • शिवपुरी में रास्ते के पुराने विवाद ने लिया हिंसक रूप, मारपीट में 35 वर्षीय महिला की मौत..

    शिवपुरी में रास्ते के पुराने विवाद ने लिया हिंसक रूप, मारपीट में 35 वर्षीय महिला की मौत..

    शिवपुरी जिले: में रास्ते को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवाद ने शुक्रवार को हिंसक रूप ले लिया। बदरवास थाना क्षेत्र के ग्राम खजूरी में दो पक्षों के बीच हुए झगड़े और मारपीट में 35 वर्षीय महिला की मौत हो गई। घटना में महिला का बेटा और उसकी सास भी घायल हुए हैं। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। घटना के बाद गांव में सनसनी फैल गई है। पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है।

    जानकारी के अनुसार, ग्राम खजूरी में रास्ते को लेकर दोनों पक्षों के बीच पिछले करीब 10 वर्षों से विवाद चला आ रहा था। लंबे समय से जारी इस विवाद को लेकर शुक्रवार को एक बार फिर दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। शुरुआत में उनके बीच कहासुनी हुई, लेकिन देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और मामला मारपीट तक पहुंच गया। इस दौरान हुई हिंसा में भूरिया पत्नी फेरन जाटव, उम्र 35 वर्ष, गंभीर रूप से घायल हो गईं।

    मारपीट के दौरान भूरिया के सिर में चोट लगी। चोट इतनी गंभीर थी कि उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना में उनके परिवार के दो अन्य सदस्य भी घायल हुए हैं। इनमें उनकी सास रामवती पत्नी गंगाराम जाटव और पुत्र राहुल, जो फेरन जाटव के बेटे हैं, शामिल हैं। दोनों को चोटें आने के बाद उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में घायलों की स्थिति के बारे में विस्तृत विवरण सामने नहीं आया है।

    घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस सक्रिय हुई और मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि रास्ते को लेकर चल रहा पुराना विवाद शुक्रवार को किस परिस्थिति में दोबारा भड़का और मारपीट की नौबत कैसे आई। साथ ही घटना में शामिल लोगों की भूमिका और विवाद के दौरान हुई घटनाओं के क्रम की भी जांच की जा रही है।

    ग्राम खजूरी में रास्ते को लेकर करीब एक दशक से विवाद चला आ रहा था। इतने लंबे समय से जारी विवाद का इस तरह हिंसक घटना में बदल जाना गंभीर मामला है। शुक्रवार को हुए झगड़े में एक महिला की जान चली गई, जबकि परिवार के दो अन्य सदस्य घायल हो गए। घटना के बाद गांव में चर्चा का माहौल है और लोग पूरे घटनाक्रम को लेकर जानकारी जुटा रहे हैं।

    फिलहाल पुलिस की जांच से ही स्पष्ट हो सकेगा कि विवाद के दौरान किन परिस्थितियों में मारपीट हुई और महिला के सिर में चोट कैसे लगी। मामले में आरोपियों की भूमिका तथा घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, रास्ते के पुराने विवाद को ही इस झगड़े की वजह बताया गया है। जांच पूरी होने के बाद घटना से संबंधित विस्तृत तथ्य सामने आने की उम्मीद है।

    गांव में रास्ते जैसे स्थानीय विवादों को लेकर लंबे समय तक तनाव बने रहने से आपसी टकराव की आशंका बनी रहती है। खजूरी की इस घटना में विवाद का परिणाम एक महिला की मौत और दो लोगों के घायल होने के रूप में सामने आया है। हालांकि, घटना से जुड़े सभी तथ्यों की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल पुलिस मामले की पड़ताल कर रही है।

  • शिवपुरी में मां-बेटे की मौत के बाद तीन बच्चियों की जिम्मेदारी प्रशासन ने संभाली, दादी की देखरेख में रहेंगी बेटियां

    शिवपुरी में मां-बेटे की मौत के बाद तीन बच्चियों की जिम्मेदारी प्रशासन ने संभाली, दादी की देखरेख में रहेंगी बेटियां


    शिवपुरी जिले: के पोहरी अनुविभाग की बैराड़ तहसील के गूगर गांव में मां और बेटे की मौत के बाद अनाथ हुईं तीन बच्चियों की देखभाल की जिम्मेदारी प्रशासन ने संभाली है। परिवार पर एक के बाद एक दुखों का पहाड़ टूटने के बाद प्रशासन ने बच्चियों को उनकी दादी की देखरेख में रखने की व्यवस्था की है। साथ ही उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए आवश्यक कार्रवाई शुरू की गई है।

    जानकारी के अनुसार, गूगर गांव निवासी अंजली रावत, उम्र 33 वर्ष, आठ महीने की गर्भवती थीं। 28 अक्टूबर को घर के पीछे बने कुएं में कूदने से अंजली और उनके छह वर्षीय बेटे प्रशांत रावत की मौत हो गई थी। बताया गया है कि अंजली के पति धर्मवीर रावत की करीब एक महीने पहले सड़क हादसे में मौत हो गई थी। पति की मौत के बाद परिवार पहले से ही मुश्किल दौर से गुजर रहा था। अब अंजली और उनके बेटे की मौत के बाद परिवार में धर्मवीर की तीन बेटियां ही रह गई हैं।

    घटना के बाद तीनों बच्चियों की देखभाल और भविष्य को लेकर प्रशासन ने कदम उठाए हैं। कलेक्टर अर्पित वर्मा के निर्देश पर बैराड़ तहसीलदार दृगपाल सिंह बैस गांव पहुंचे और परिवार की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने बच्चियों की देखभाल की व्यवस्था सुनिश्चित करते हुए उन्हें उनकी दादी दुलारी रावत की निगरानी में रखने के निर्देश दिए। इससे बच्चियों को परिवार के बीच देखभाल मिल सकेगी।

    प्रशासन ने बच्चियों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए भी प्रक्रिया शुरू की है। तहसीलदार ने संबंधित पटवारी को परिवार का बीपीएल राशन कार्ड बनवाने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही दादी को परिवार का मुखिया बनाने की कार्रवाई करने को कहा गया है, ताकि परिवार को पात्रता के अनुसार शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ मिल सके।

    तीनों बच्चियों को मुख्यमंत्री बाल आशीर्वाद योजना के तहत आर्थिक सहायता दिलाने की पहल भी की जा रही है। इस योजना के अंतर्गत माता-पिता दोनों को खो चुके बच्चों को पात्रता के अनुसार प्रतिमाह चार हजार रुपये की सहायता देने का प्रावधान है। प्रशासन बच्चियों को योजना का लाभ दिलाने के लिए आवश्यक कदम उठा रहा है, ताकि उनके पालन-पोषण में आर्थिक मदद मिल सके।

    तहसीलदार दृगपाल सिंह बैस ने पोहरी जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी से भी चर्चा की और बच्चियों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। प्रशासन की ओर से राशन कार्ड, परिवार के मुखिया से संबंधित प्रक्रिया और आर्थिक सहायता जैसी व्यवस्थाओं पर ध्यान दिया जा रहा है। मां और भाई को खो चुकी तीनों बच्चियों के लिए अब उनकी दादी की देखरेख और सरकारी योजनाओं से मिलने वाली मदद महत्वपूर्ण होगी।