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  • रविवार की सुबह सूर्य पूजा से चमक सकती है किस्मत! जानें अर्घ्य देने की विधि और जरूरी धार्मिक नियम

    रविवार की सुबह सूर्य पूजा से चमक सकती है किस्मत! जानें अर्घ्य देने की विधि और जरूरी धार्मिक नियम


    नई दिल्ली । आज 6 सितंबर 2026 का दिन सभी 12 राशियों के लिए नए अवसरों और चुनौतियों के संकेत लेकर आया है। किसी राशि के जातकों को करियर और कारोबार में बड़ी सफलता मिल सकती है तो कुछ लोगों को धन संबंधी मामलों में सावधानी बरतनी होगी। रिश्तों में मधुरता बढ़ाने के लिए संवाद और धैर्य जरूरी रहेगा। आइए जानते हैं मेष से लेकर मीन राशि तक आज का विस्तृत राशिफल।
    मेष राशि के जातकों के लिए दिन ऊर्जा और उत्साह से भरा रह सकता है। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत की सराहना होगी और कोई नई जिम्मेदारी भी मिल सकती है। आर्थिक मामलों में सोच समझकर फैसला करें। परिवार के साथ समय बिताने का मौका मिलेगा और किसी पुराने मित्र से मुलाकात मन को प्रसन्न कर सकती है।

    वृषभ राशि वालों को आज धैर्य के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है। कामकाज में छोटी बाधाएं आ सकती हैं लेकिन समझदारी से परिस्थितियों पर नियंत्रण पा लेंगे। धन खर्च करते समय बजट का ध्यान रखें। पारिवारिक मामलों में किसी की सलाह आपके काम आ सकती है।

    मिथुन राशि के जातकों के लिए आज का दिन नई संभावनाएं लेकर आ सकता है। नौकरी और कारोबार में आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे। रुका हुआ काम पूरा होने से राहत मिलेगी। बातचीत में संयम रखें और जल्दबाजी में कोई बड़ा फैसला न लें।

    कर्क राशि वालों को आज परिवार और काम के बीच संतुलन बनाकर चलना होगा। करियर में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। आर्थिक स्थिति सामान्य रहेगी लेकिन अनावश्यक खर्च बढ़ सकता है। स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही न करें और पर्याप्त आराम करें।

    सिंह राशि के जातकों के लिए दिन शुभ संकेत दे रहा है। आत्मविश्वास के दम पर आप मुश्किल काम को भी आसानी से पूरा कर सकते हैं। नौकरी में अधिकारियों का सहयोग मिलेगा और कारोबार में लाभ की संभावना है। परिवार में खुशियों का माहौल बना रहेगा।

    कन्या राशि वालों को आज मेहनत का अच्छा परिणाम मिल सकता है। लंबे समय से अटका कोई काम आगे बढ़ सकता है। धन संबंधी मामलों में स्थिति बेहतर रहेगी। हालांकि किसी भी दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से पहले उसे अच्छी तरह पढ़ लें।

    तुला राशि के जातकों के लिए आज रिश्तों और साझेदारी के मामलों में अच्छा दिन है। परिवार और जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा। कारोबार में नई योजना पर काम शुरू हो सकता है। खर्च बढ़ने की संभावना है इसलिए आर्थिक संतुलन बनाए रखें।

    वृश्चिक राशि वालों को आज भावनाओं में बहकर निर्णय लेने से बचना चाहिए। कार्यक्षेत्र में मेहनत बढ़ सकती है लेकिन परिणाम आपके पक्ष में रहेंगे। किसी पुराने विवाद का समाधान निकल सकता है। स्वास्थ्य के प्रति सजग रहें।

    धनु राशि के जातकों के लिए आज यात्रा या नए लोगों से मुलाकात के योग बन सकते हैं। करियर में प्रगति के अवसर मिलेंगे और कारोबार में नई डील फायदेमंद साबित हो सकती है। परिवार में किसी शुभ समाचार से खुशी का माहौल रहेगा।

    मकर राशि वालों को आज जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं। कामकाज में अनुशासन और धैर्य बनाए रखना जरूरी होगा। आर्थिक मामलों में सोच समझकर निवेश करें। परिवार के किसी सदस्य की सलाह भविष्य में लाभदायक साबित हो सकती है।

  • दुनिया के 64 देशों में आबादी का ग्राफ नीचे, चीन-जापान से लेकर यूरोप तक असर, भारत के लिए भी बड़ा संकेत

    दुनिया के 64 देशों में आबादी का ग्राफ नीचे, चीन-जापान से लेकर यूरोप तक असर, भारत के लिए भी बड़ा संकेत


    नई दिल्ली। कभी बढ़ती आबादी को दुनिया की सबसे बड़ी चुनौती माना जाता था। आशंका थी कि लगातार बढ़ते इंसानों के दबाव में धरती के संसाधन कम पड़ जाएंगे। लेकिन अब जनसंख्या को लेकर तस्वीर तेजी से बदल रही है। दुनिया के 64 देश और क्षेत्र ऐसे हैं, जहां आबादी अपने उच्चतम स्तर यानी ‘पीक पॉपुलेशन’ को पार कर चुकी है और अब लगातार घट रही है। यह बदलाव किसी महामारी, युद्ध या प्राकृतिक आपदा का नतीजा नहीं, बल्कि लोगों की जीवनशैली, परिवार और बच्चों को लेकर बदलती सोच का परिणाम है।

    इन 64 देशों में केवल छोटे या संकटग्रस्त देश ही नहीं हैं। चीन जैसी दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्था भी इस बदलाव का सामना कर रही है। दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाला चीन अपने जनसंख्या शिखर को पार कर चुका है और अब वहां आबादी हर साल कम हो रही है। दक्षिण कोरिया में फर्टिलिटी रेट करीब 0.72 रह गई है। मौजूदा रुझान जारी रहा तो इस सदी के अंत तक उसकी आबादी आधे से भी कम रह सकती है। जापान और थाईलैंड भी इसी दिशा में तेजी से बढ़ रहे हैं।

    कौन-कौन से देश आबादी के शिखर से आगे निकल चुके?

    महाद्वीपों के हिसाब से देखें तो पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी एशिया में चीन, हांगकांग, ताइवान, जापान, दक्षिण कोरिया और थाईलैंड इस चरण में पहुंच चुके हैं।

    यूरोप में इटली, जर्मनी, स्पेन, पोलैंड, यूक्रेन, रूस और ऑस्ट्रिया की आबादी अपने उच्चतम स्तर को पार कर चुकी है। कैरिबियन और लैटिन अमेरिका में क्यूबा, प्यूर्टो रिको, जमैका, उरुग्वे, डोमिनिका, मार्टिनिक, गुआदेलूप, कुराकाओ, मोंटसेराट, सेंट किट्स एंड नेविस, सेंट मार्टिन, सेंट विंसेंट एंड द ग्रेनेडींस, यूएस वर्जिन आइलैंड्स और फॉकलैंड आइलैंड्स जैसे क्षेत्र भी इस सूची में शामिल हैं।

    यूरोप और जापान इस बदलाव को काफी पहले महसूस करना शुरू कर चुके थे। जापान में बुजुर्गों की बढ़ती संख्या का असर बाजार तक में दिखाई देता है। वहां बच्चों के खिलौनों और डायपर की तुलना में बुजुर्गों के डायपर की बिक्री अधिक हो गई है। बच्चों की संख्या घटने से हजारों स्कूल बंद हो चुके हैं। पोलैंड, रोमानिया और बुल्गारिया जैसे पूर्वी यूरोपीय देशों में कम जन्मदर के साथ युवाओं का दूसरे देशों की ओर पलायन भी आबादी घटने की बड़ी वजह है।

    2.1 बच्चे भी नहीं हो रहे पैदा

    किसी देश की आबादी को लंबे समय तक स्थिर बनाए रखने के लिए प्रति महिला औसतन 2.1 बच्चों की जरूरत मानी जाती है। इसे ‘रिप्लेसमेंट रेट’ कहा जाता है। लेकिन दुनिया की आधी से ज्यादा आबादी ऐसे देशों में रह रही है, जहां प्रजनन दर इस स्तर से काफी नीचे जा चुकी है।

    इसके पीछे आर्थिक और सामाजिक दोनों कारण हैं। महानगरों में घर, बच्चों की परवरिश, शिक्षा और स्वास्थ्य पर बढ़ता खर्च परिवारों के फैसलों को प्रभावित कर रहा है। कई दंपती एक से ज्यादा बच्चे की जिम्मेदारी उठाने से बच रहे हैं। दूसरी ओर महिलाओं की शिक्षा और रोजगार के अवसर बढ़े हैं। करियर को प्राथमिकता देना, देर से शादी करना या बच्चे न पैदा करने का फैसला अब पहले की तुलना में अधिक स्वीकार्य हो रहा है। इन सामाजिक बदलावों का सीधा असर जनसंख्या के आंकड़ों पर पड़ रहा है।

    बाकी दुनिया के लिए खतरे की घंटी

    आज जिन देशों में आबादी बढ़ रही है, उनके लिए यह बदलाव भविष्य का संकेत है। संयुक्त राष्ट्र के अनुमानों के अनुसार 2050 का दशक आते-आते ब्राजील, मैक्सिको और अर्जेंटीना जैसे दक्षिण अमेरिकी देश भी अपने जनसंख्या शिखर के करीब पहुंच जाएंगे।

    भारत के लिए यह मोड़ 2060 के दशक में आने का अनुमान है। वर्तमान में दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश भारत उस दशक में करीब 170 करोड़ की आबादी के साथ अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच सकता है। इसके बाद यहां भी आबादी घटने का दौर शुरू होने का अनुमान है।

    पूरी दुनिया के स्तर पर जनसंख्या का शिखर करीब 2084 में दिखाई दे सकता है। तब वैश्विक आबादी लगभग 10.3 अरब तक पहुंचकर अपने उच्चतम स्तर पर होगी और इसके बाद मानव इतिहास में पहली बार दुनिया की कुल आबादी का ग्राफ लगातार नीचे जाने लगेगा।

    अमेरिका की आबादी क्यों नहीं घट रही?

    कम जन्मदर के बावजूद अमेरिका फिलहाल इस संकट से उसी तरह प्रभावित नहीं है। संयुक्त राष्ट्र के अनुमानों के मुताबिक इस सदी के अंत तक भी अमेरिका अपनी आबादी के शिखर पर नहीं पहुंचेगा। इसकी बड़ी वजह इमिग्रेशन है। अमेरिका में हर साल बड़ी संख्या में विदेशी युवा पहुंचते हैं और वहां बसते हैं। इससे कम जन्मदर के कारण पैदा हुई आबादी की कमी काफी हद तक पूरी हो जाती है।

    कम लोग, लेकिन ज्यादा बुजुर्ग

    आबादी घटने का सबसे बड़ा असर रोजगार बाजार पर पड़ेगा। कामकाजी उम्र की आबादी कम होने पर कंपनियों को कर्मचारियों की कमी का सामना करना पड़ेगा। ऐसे में रोबोटिक्स, ऑटोमेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल तेजी से बढ़ेगा।

    दूसरी चुनौती पेंशन और हेल्थकेयर की होगी। टैक्स देने वाले युवा कम होंगे, जबकि पेंशन और इलाज पर निर्भर बुजुर्गों की संख्या बढ़ेगी। इसका मतलब सरकारों के राजस्व पर दबाव और सामाजिक सुरक्षा पर बढ़ता खर्च होगा।

    इमिग्रेशन बनेगा आर्थिक ताकत का आधार

    भविष्य में वे देश ज्यादा मजबूत स्थिति में रह सकते हैं, जो विदेशी युवाओं और कुशल कामगारों को अपने यहां आने और बसने के अवसर देंगे। इसके उलट जिन देशों की सीमाएं प्रवासियों के लिए बंद रहेंगी, उन्हें कामकाजी आबादी की कमी और आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है।

    भारत के पास डेमोग्राफिक डिविडेंड का सीमित समय

    भारत और अफ्रीकी देशों के लिए यह बदलाव खास संदेश लेकर आया है। युवा आबादी इन देशों की सबसे बड़ी ताकत है, लेकिन इस ताकत का फायदा हमेशा नहीं रहेगा। अगले 20-30 साल डेमोग्राफिक डिविडेंड का लाभ उठाने के लिहाज से बेहद अहम हैं।

    अगर इस अवधि में युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, जरूरी स्किल और पर्याप्त रोजगार नहीं मिल पाया, तो आबादी घटने का दौर शुरू होने से पहले देश अपेक्षित आर्थिक समृद्धि हासिल नहीं कर पाएंगे।

    दुनिया के 64 देशों में खाली होते स्कूल, बुजुर्ग होती आबादी और बदलती शहरों की तस्वीर बता रही है कि 21वीं सदी की चुनौती अब केवल जनसंख्या को नियंत्रित करना नहीं है। असली चुनौती ऐसी दुनिया के लिए तैयारी करना है, जहां इंसान कम और उम्रदराज आबादी ज्यादा होगी। जिन देशों की नीतियां इस बदलाव के मुताबिक समय रहते बदल जाएंगी, उनके लिए घटती आबादी संकट के बजाय नई आर्थिक ताकत बन सकती है।

  • एमपी में बारिश से नदियां उफान पर, तीन डैम के गेट खुले, आज 15 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

    एमपी में बारिश से नदियां उफान पर, तीन डैम के गेट खुले, आज 15 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट


    भोपाल। मध्यप्रदेश में मानसून का असर अब पूर्वी हिस्से से आगे बढ़कर पश्चिमी क्षेत्रों में भी दिखाई दे रहा है। लगातार बारिश से कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं और नर्मदा समेत प्रदेश की कई नदियां उफान पर हैं। बरगी, भदभदा और कलियासोत डैम के गेट खोले जा चुके हैं। प्रदेश के 12 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है, जबकि सीजन में अब तक बारिश का आंकड़ा 30 इंच से ज्यादा पहुंच गया है।

    रविवार को ग्वालियर, चंबल और सागर संभाग के 15 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी है। मौसम का असर जनजीवन पर भी पड़ा है। शनिवार को सीधी के कैमूर पहाड़ स्थित मूड़ा घाटी में लैंडस्लाइड के बाद सीधी-उत्तर प्रदेश मार्ग बंद हो गया। बारिश के कारण सड़क पर बड़े पत्थर और पेड़ गिर गए। सड़क के नीचे 100 फीट से ज्यादा गहरी खाई होने के कारण इस हिस्से में दुर्घटना का खतरा भी बढ़ गया है।

    छतरपुर में स्कूल बंद, उमरिया में महिला बही

    लगातार मूसलाधार बारिश के चलते छतरपुर में सभी स्कूल बंद रहे। लवकुशनगर में एक कच्चा मकान बारिश के बीच ढह गया। उमरिया में बाढ़ के पानी में एक महिला के बहने की घटना सामने आई है। मैहर में पुलों के ऊपर से पानी बहने के कारण मुकुंदपुर मार्ग बंद है।

    भोपाल में पहले भदभदा डैम के गेट खोले गए और अब कलियासोत डैम से भी पानी छोड़ा जा रहा है। इसके बाद कलियासोत नदी के किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    इन 15 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी

    मौसम केंद्र भोपाल (IMD) ने रविवार को ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, राजगढ़, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, सागर, दमोह, पन्ना और सतना में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।

    इसके अलावा भोपाल, रायसेन, सीहोर, विदिशा, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, रीवा, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश होने का अनुमान है।

    6 सितंबर को भी सक्रिय रहेगा सिस्टम

    मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक 6 सितंबर को भी मानसूनी सिस्टम सक्रिय रहेगा। हालांकि इंदौर में इस दौरान तेज बारिश की संभावना नहीं है। इसके बाद 7, 8 और 9 सितंबर को भी प्रदेश के कुछ हिस्सों में तेज बारिश का दौर देखने को मिल सकता है।

    23 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश

    IMD के आंकड़ों के अनुसार अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मंडला, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में औसत से अधिक बारिश दर्ज हुई है।

    पूर्वी हिस्से में सुधरा बारिश का आंकड़ा

    प्रदेश के पूर्वी हिस्से में जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश का आंकड़ा सामान्य से करीब 1% कम बताया गया है। वहीं बालाघाट, डिंडौरी, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 1% से 22% तक कम बारिश हुई है।

    हालांकि पिछले एक सप्ताह में स्थिति में काफी सुधार आया है। बीते सात दिनों से पूर्वी हिस्से के कई जिलों में लगातार बारिश और बाढ़ के हालात बने हुए हैं। इसका असर सीजन के आंकड़ों पर भी पड़ा है और पहली बार पूर्वी हिस्सा बारिश के मामले में बेहतर स्थिति में आया है। यहां बारिश का आंकड़ा अब सामान्य से 3% ज्यादा हो गया है।

    पश्चिमी हिस्से में 53% तक कम बारिश

    इसके उलट पश्चिमी मध्यप्रदेश के कई जिले अब भी बारिश की कमी से जूझ रहे हैं। आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, खंडवा, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य के मुकाबले 2% से 53% तक कम बारिश दर्ज की गई है।

  • Aaj Ka Rashifal 6 September 2026: मेष से मीन तक कैसा रहेगा आज का दिन? पढ़ें नौकरी, कारोबार, धन और प्रेम का राशिफल

    Aaj Ka Rashifal 6 September 2026: मेष से मीन तक कैसा रहेगा आज का दिन? पढ़ें नौकरी, कारोबार, धन और प्रेम का राशिफल


    नई दिल्ली । आज 6 सितंबर 2026 का दिन सभी 12 राशियों के लिए नए अवसरों और चुनौतियों के संकेत लेकर आया है। किसी राशि के जातकों को करियर और कारोबार में बड़ी सफलता मिल सकती है तो कुछ लोगों को धन संबंधी मामलों में सावधानी बरतनी होगी। रिश्तों में मधुरता बढ़ाने के लिए संवाद और धैर्य जरूरी रहेगा। आइए जानते हैं मेष से लेकर मीन राशि तक आज का विस्तृत राशिफल।

    मेष राशि के जातकों के लिए दिन ऊर्जा और उत्साह से भरा रह सकता है। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत की सराहना होगी और कोई नई जिम्मेदारी भी मिल सकती है। आर्थिक मामलों में सोच समझकर फैसला करें। परिवार के साथ समय बिताने का मौका मिलेगा और किसी पुराने मित्र से मुलाकात मन को प्रसन्न कर सकती है।

    वृषभ राशि वालों को आज धैर्य के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है। कामकाज में छोटी बाधाएं आ सकती हैं लेकिन समझदारी से परिस्थितियों पर नियंत्रण पा लेंगे। धन खर्च करते समय बजट का ध्यान रखें। पारिवारिक मामलों में किसी की सलाह आपके काम आ सकती है।

    मिथुन राशि के जातकों के लिए आज का दिन नई संभावनाएं लेकर आ सकता है। नौकरी और कारोबार में आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे। रुका हुआ काम पूरा होने से राहत मिलेगी। बातचीत में संयम रखें और जल्दबाजी में कोई बड़ा फैसला न लें।

    कर्क राशि वालों को आज परिवार और काम के बीच संतुलन बनाकर चलना होगा। करियर में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। आर्थिक स्थिति सामान्य रहेगी लेकिन अनावश्यक खर्च बढ़ सकता है। स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही न करें और पर्याप्त आराम करें।

    सिंह राशि के जातकों के लिए दिन शुभ संकेत दे रहा है। आत्मविश्वास के दम पर आप मुश्किल काम को भी आसानी से पूरा कर सकते हैं। नौकरी में अधिकारियों का सहयोग मिलेगा और कारोबार में लाभ की संभावना है। परिवार में खुशियों का माहौल बना रहेगा।

    कन्या राशि वालों को आज मेहनत का अच्छा परिणाम मिल सकता है। लंबे समय से अटका कोई काम आगे बढ़ सकता है। धन संबंधी मामलों में स्थिति बेहतर रहेगी। हालांकि किसी भी दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से पहले उसे अच्छी तरह पढ़ लें।

    तुला राशि के जातकों के लिए आज रिश्तों और साझेदारी के मामलों में अच्छा दिन है। परिवार और जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा। कारोबार में नई योजना पर काम शुरू हो सकता है। खर्च बढ़ने की संभावना है इसलिए आर्थिक संतुलन बनाए रखें।

    वृश्चिक राशि वालों को आज भावनाओं में बहकर निर्णय लेने से बचना चाहिए। कार्यक्षेत्र में मेहनत बढ़ सकती है लेकिन परिणाम आपके पक्ष में रहेंगे। किसी पुराने विवाद का समाधान निकल सकता है। स्वास्थ्य के प्रति सजग रहें।

    धनु राशि के जातकों के लिए आज यात्रा या नए लोगों से मुलाकात के योग बन सकते हैं। करियर में प्रगति के अवसर मिलेंगे और कारोबार में नई डील फायदेमंद साबित हो सकती है। परिवार में किसी शुभ समाचार से खुशी का माहौल रहेगा।

    मकर राशि वालों को आज जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं। कामकाज में अनुशासन और धैर्य बनाए रखना जरूरी होगा। आर्थिक मामलों में सोच समझकर निवेश करें। परिवार के किसी सदस्य की सलाह भविष्य में लाभदायक साबित हो सकती है।

    कुंभ राशि के जातकों के लिए आज का दिन सकारात्मक रहेगा। नए विचार और योजनाएं सफलता की दिशा में ले जा सकती हैं। मित्रों और सहयोगियों का साथ मिलेगा। प्रेम संबंधों में मधुरता बढ़ेगी और मन प्रसन्न रहेगा।

    मीन राशि वालों को आज अपने लक्ष्य पर पूरा ध्यान केंद्रित करना चाहिए। मेहनत का परिणाम मिलने में थोड़ा समय लग सकता है लेकिन निराश होने की जरूरत नहीं है। आर्थिक स्थिति में धीरे धीरे सुधार होगा। परिवार के साथ बिताया गया समय मानसिक शांति देगा। कुल मिलाकर रविवार का दिन समझदारी धैर्य और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने का संदेश दे रहा है।

  • एयर शो में दिखा मौत का खौफनाक मंजर, आग के गोले में बदला F-4 फैंटम; दोनों पायलटों की मौत

    एयर शो में दिखा मौत का खौफनाक मंजर, आग के गोले में बदला F-4 फैंटम; दोनों पायलटों की मौत


    एथेंस।
    ग्रीस में एक एयर शो के दौरान शनिवार को बड़ा हादसा हो गया। एथेंस के पास स्थित तानाग्रा एयर बेस पर प्रदर्शन कर रहा दो सीटों वाला F-4 फैंटम फाइटर जेट अचानक दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में विमान में सवार दोनों पायलटों की मौत हो गई।

    दुर्घटना उस समय हुई जब लड़ाकू विमान एयर शो में करतब दिखा रहा था। विमान जमीन से महज कुछ मीटर की ऊंचाई पर उड़ रहा था। अचानक उसने नीचे की ओर गोता लगाया और कुछ ही पलों में आग के विशाल गोले में बदल गया। हादसे का दृश्य देखकर मौके पर मौजूद लोग दहशत में आ गए।

    उड़ान के कुछ मिनट बाद ही हुआ क्रैश

    यह हादसा एथेंस फ्लाइंग वीक के दौरान हुआ। यह ग्रीस का वार्षिक एयर शो है, जिसमें विभिन्न देशों की सैन्य और नागरिक विमानन टीमें हिस्सा लेती हैं।

    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, F-4 फैंटम ने उड़ान भरने के करीब तीन मिनट बाद ही खतरनाक तरीके से नीचे की ओर झुकना शुरू कर दिया। विमान जमीन के बेहद करीब दाईं तरफ मुड़ता दिखाई दिया और इसके तुरंत बाद वह क्रैश हो गया।

    ग्रीस के सरकारी प्रसारक ईआरटी की तस्वीरों में भी विमान को जमीन से बेहद कम ऊंचाई पर तेज मोड़ लेते हुए देखा गया। इसके बाद विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया और उसमें भीषण आग लग गई।

    क्रैश के बाद जंगल में फैली आग

    फाइटर जेट के जमीन से टकराते ही आग की लपटें तेजी से फैलने लगीं। दुर्घटना के बाद लगी आग आसपास के जंगल तक पहुंच गई, जिससे बचाव दल के सामने चुनौती और बढ़ गई।

    आग बुझाने के लिए 11 दमकल विमान और हेलीकॉप्टर मौके पर लगाए गए। एयर बेस के लाउडस्पीकर के जरिए लोगों को इलाके से बाहर निकलने की अपील भी की जाती रही।

    नागरिकों को नहीं पहुंचा नुकसान

    हादसे में F-4 फैंटम पर सवार दोनों पायलटों की जान चली गई। हालांकि, दुर्घटना के दौरान आसपास मौजूद नागरिकों या स्थानीय लोगों के घायल होने की कोई खबर नहीं है।

    हादसे के बाद एयर शो की सुरक्षा और दुर्घटना के कारणों को लेकर जांच शुरू किए जाने की बात सामने आई है। फिलहाल यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि विमान इतनी कम ऊंचाई पर उड़ान भरते समय अचानक नियंत्रण से बाहर कैसे हुआ।

  • कंगना रनौत ने अधिकारियों को दी नसीहत, कहा जनता के पैसे का दुरुपयोग रोककर योजनाओं का लाभ व्यक्ति तक पहुंचाएं

    कंगना रनौत ने अधिकारियों को दी नसीहत, कहा जनता के पैसे का दुरुपयोग रोककर योजनाओं का लाभ व्यक्ति तक पहुंचाएं

    नई दिल्ली । हिमाचल प्रदेश के मंडी से भाजपा सांसद कंगना रनौत ने जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति यानी दिशा की बैठक में अधिकारियों के कामकाज को लेकर सख्त रुख अपनाया। केंद्र प्रायोजित योजनाओं और सांसद निधि से जुड़े विकास कार्यों की समीक्षा के दौरान उन्होंने सरकारी धन के इस्तेमाल, योजनाओं की प्रगति और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर अधिकारियों से स्पष्ट जवाब मांगा।

    बैठक के दौरान कंगना रनौत ने इस बात पर जोर दिया कि जनता से जुड़े विकास कार्य केवल सरकारी रिकॉर्ड और कागजों तक सीमित नहीं रहने चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि केंद्र सरकार की योजनाओं का वास्तविक लाभ पात्र और जरूरतमंद लोगों तक पहुंचना सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए योजनाओं की नियमित निगरानी और जमीनी स्तर पर प्रगति की समीक्षा जरूरी है।

    सांसद ने सरकारी धन के उपयोग को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जनता का पैसा गलत हाथों में नहीं जाना चाहिए और किसी भी स्तर पर धन के दुरुपयोग या अनियमितता की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। बैठक में उन्होंने व्यवस्था में निगरानी को मजबूत करने की जरूरत बताई और अधिकारियों से विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बनाए रखने को कहा।

    कंगना ने अधिकारियों से कहा कि सांसद निधि और केंद्र प्रायोजित योजनाओं के तहत स्वीकृत कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए। उनके मुताबिक विकास कार्यों की गति के साथ उनकी गुणवत्ता पर भी बराबर ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह सुनिश्चित करने को कहा कि योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचे और किसी पात्र व्यक्ति को केवल प्रशासनिक देरी के कारण परेशानी न हो।

    बैठक में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति पर चर्चा के दौरान सांसद ने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की साझा जिम्मेदारी पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि जनता के पैसे से होने वाले हर काम में जवाबदेही जरूरी है। यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते सुधारात्मक कदम उठाए जाने चाहिए।

    कंगना रनौत का रुख इस बात पर केंद्रित रहा कि विकास योजनाओं की निगरानी केवल बैठकों तक सीमित न रहे। उन्होंने अधिकारियों से जमीनी स्थिति की जानकारी लेने, लंबित कार्यों की समीक्षा करने और निर्धारित समयसीमा के भीतर काम पूरा कराने पर ध्यान देने को कहा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों और जरूरतमंद परिवारों तक सरकारी योजनाओं का प्रभावी लाभ पहुंचाने की कोशिश को गति मिल सकती है।

    सांसद ने बैठक में यह भी संकेत दिया कि प्रशासनिक स्तर पर काम में ढिलाई को लेकर जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही बढ़ती है। उनका कहना था कि लोगों को यह भरोसा होना चाहिए कि उनके लिए स्वीकृत धन और योजनाओं का इस्तेमाल निर्धारित उद्देश्य के लिए ही किया जा रहा है। उन्होंने अधिकारियों से समन्वय बनाकर काम करने और विकास कार्यों की नियमित समीक्षा की व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया।

    कंगना रनौत इससे पहले भी मंडी की दिशा बैठकों में अधिकारियों के कामकाज को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर कर चुकी हैं। अक्टूबर 2025 में हुई बैठक के दौरान भी उन्होंने अधिकारियों को विकास कार्यों को गंभीरता से लेने और लापरवाही से बचने की नसीहत दी थी। इस बार की बैठक में भी उनका मुख्य जोर सरकारी योजनाओं की निगरानी, सांसद निधि के प्रभावी इस्तेमाल और प्रशासनिक जवाबदेही पर रहा।

  • मध्यप्रदेश में बदले अफसरों के विभाग और पद, 16 IAS का ट्रांसफर, सागर से मंत्रालय तक हुआ बड़ा बदलाव

    मध्यप्रदेश में बदले अफसरों के विभाग और पद, 16 IAS का ट्रांसफर, सागर से मंत्रालय तक हुआ बड़ा बदलाव


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश में प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल किया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने 5 सितंबर 2026 को 16 IAS अफसरों की जिम्मेदारियों में बदलाव करते हुए तबादला आदेश जारी किया है। जारी आदेश के मुताबिक 11 अधिकारियों को नई पदस्थापना दी गई है जबकि 5 IAS अधिकारियों को उनके मौजूदा पद पर बनाए रखते हुए अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। इस फेरबदल में सबसे अहम बदलाव सागर संभाग के आयुक्त पद पर हुआ है जहां दिलीप कुमार को नया संभागायुक्त बनाया गया है। इससे पहले यह जिम्मेदारी अनिल सुचारी संभाल रहे थे जिन्हें अब मध्यप्रदेश भण्डार गृह निगम का प्रबंध संचालक बनाया गया है।

    दिलीप कुमार वर्ष 2008 बैच के IAS अधिकारी हैं और इससे पहले आयुक्त उद्योग तथा प्रबंध संचालक लघु उद्योग निगम भोपाल की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। अब उन्हें सागर संभाग का आयुक्त बनाया गया है। उनके सामने संभाग में प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने के साथ विकास कार्यों और शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की जिम्मेदारी होगी। वहीं वर्ष 2006 बैच के IAS अधिकारी अनिल सुचारी को मध्यप्रदेश भण्डार गृह निगम भोपाल का प्रबंध संचालक बनाया गया है। उनके पद को सचिव मध्यप्रदेश शासन के समकक्ष घोषित किया गया है।

    तबादला सूची में अनुभा श्रीवास्तव की जिम्मेदारी भी बदली गई है। वर्ष 2009 बैच की IAS अधिकारी अनुभा श्रीवास्तव को प्रमुख राजस्व आयुक्त तथा आयुक्त भू अभिलेख एवं बंदोबस्त ग्वालियर की जिम्मेदारी से हटाकर राजस्व विभाग मंत्रालय भोपाल में सचिव बनाया गया है। इसी बैच के सतेन्द्र सिंह को भी सचिव पद की जिम्मेदारी दी गई है। वे पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में सचिव के रूप में काम करेंगे। इसके साथ ही उन्हें अनुसूचित जाति कल्याण और अनुसूचित जाति विकास से जुड़े कई अतिरिक्त प्रभार भी सौंपे गए हैं।

    नेहा मारव्या सिंह को अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम भोपाल का प्रबंध संचालक बनाया गया है जबकि निधि निवेदिता को प्रमुख राजस्व आयुक्त की जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें आयुक्त भू अभिलेख एवं बंदोबस्त ग्वालियर का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है। अनुराग वर्मा को राज्य नागरिक आपूर्ति निगम भोपाल का प्रबंध संचालक बनाया गया है। वहीं मयंक अग्रवाल को विकसित भारत रोजगार गारंटी आजीविका मिशन का मुख्य कार्यपालन अधिकारी बनाया गया है। उन्हें समग्र नर्मदा मिशन के मिशन संचालक का अतिरिक्त प्रभार भी मिला है।

    महिला एवं बाल विकास विभाग में भी बदलाव किया गया है। संदीप जीआर को विभाग में विकास आयुक्त सह आयुक्त की जिम्मेदारी दी गई है। अवि प्रसाद को मध्यप्रदेश पब्लिक हेल्थ सर्विसेस कॉर्पोरेशन का प्रबंध संचालक बनाया गया है। वहीं नेहा जैन को स्मार्ट सिटी उज्जैन का मुख्य कार्यपालन अधिकारी बनाया गया है और उन्हें नगर निगम उज्जैन के अपर आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है।

    इसके अलावा रघुराज एमआर तरुण राठी कुमार पुरुषोत्तम शीतला पटले और अनिशा श्रीवास्तव को उनके मौजूदा पदों पर बरकरार रखते हुए अलग अलग विभागों का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। इस व्यापक प्रशासनिक फेरबदल से प्रदेश के राजस्व महिला एवं बाल विकास उद्योग श्रम आदिवासी कल्याण स्वास्थ्य और नगरीय प्रशासन से जुड़े विभागों में कामकाज की जिम्मेदारियां नए सिरे से तय हुई हैं।

  • इथेनॉल उत्पादन बढ़ाने से पहले खाद्य सुरक्षा, पानी और किसानों की आय पर असर का आकलन जरूरी, विशेषज्ञ ने नीति बदलाव सुझाए

    इथेनॉल उत्पादन बढ़ाने से पहले खाद्य सुरक्षा, पानी और किसानों की आय पर असर का आकलन जरूरी, विशेषज्ञ ने नीति बदलाव सुझाए

    नई दिल्ली । कृषि विशेषज्ञ देविंदर शर्मा ने भारत की कृषि नीति में व्यापक बदलाव की जरूरत बताते हुए कहा है कि इथेनॉल उत्पादन, उर्वरक सब्सिडी और कृषि व्यापार जैसे मुद्दों पर केवल तत्काल आर्थिक लाभ को आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। उनके अनुसार नीति निर्माण में खाद्य सुरक्षा, किसानों की आय और पर्यावरणीय स्थिरता को समान प्राथमिकता देना जरूरी है।

    शर्मा ने इथेनॉल उत्पादन के तेजी से विस्तार को लेकर विशेष चिंता जताई है। उनका कहना है कि गन्ने के साथ मक्का और चावल जैसी फसलों का इस्तेमाल भी इथेनॉल उत्पादन में बढ़ रहा है। ऐसे में यह आकलन जरूरी है कि कृषि उपज का कितना हिस्सा भोजन से ईंधन की ओर सुरक्षित रूप से मोड़ा जा सकता है। उनके मुताबिक इस बदलाव का असर खाद्य उपलब्धता, पानी की मांग और देश के अलग-अलग क्षेत्रों में फसल पैटर्न पर पड़ सकता है।

    उनका तर्क है कि चीनी क्षेत्र में मौजूदा परिस्थितियों को केवल मौसम, सूखे या फसल संबंधी बीमारियों से नहीं जोड़ा जा सकता। चीनी को इथेनॉल उत्पादन की ओर मोड़ने की नीति को भी व्यापक तस्वीर में देखना होगा। भारत में इथेनॉल मिश्रण को ऊर्जा सुरक्षा और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने के उपाय के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन किसानों को इससे मिलने वाले प्रत्यक्ष लाभ पर भी स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए।

    शर्मा ने मक्का की कीमतों का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि किसी कृषि उत्पाद की मांग इथेनॉल के कारण बढ़ती है, तो उसका लाभ किसानों तक पहुंचना चाहिए। उनका कहना है कि कई मौकों पर किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पाता। इसलिए इथेनॉल नीति में किसानों की आय और न्यूनतम समर्थन मूल्य की सुरक्षा को भी शामिल किया जाना चाहिए।

    उन्होंने ब्राजील के मॉडल को भारत में बिना परिस्थितियों का आकलन किए लागू करने से सावधान किया है। उनके अनुसार भारत में जमीन, पानी और खाद्य जरूरतों की स्थिति अलग है। इसलिए ऐसी इथेनॉल रणनीति बननी चाहिए जो ऊर्जा सुरक्षा के साथ खाद्य सुरक्षा और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलन को बनाए रखे।

    फर्टिलाइजर सब्सिडी को लेकर भी शर्मा ने पुनर्विचार की जरूरत बताई। उनका कहना है कि रासायनिक उर्वरकों पर लंबे समय तक निर्भरता ने पोषक तत्वों के असंतुलित इस्तेमाल को बढ़ावा दिया है। उनका सुझाव है कि सब्सिडी व्यवस्था को अचानक समाप्त करने के बजाय धीरे-धीरे टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल खेती की दिशा में बढ़ाया जाए।

    उन्होंने प्रत्यक्ष आय सहायता को कृषि नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की वकालत की। हालांकि, इसके लिए किराए पर जमीन लेकर खेती करने वाले किसानों की पहचान और उन्हें योजनाओं का लाभ पहुंचाना बड़ी चुनौती है। उनका मानना है कि सरकारी सहायता वास्तविक खेती करने वाले व्यक्ति तक पहुंचनी चाहिए।

    न्यूनतम समर्थन मूल्य के मुद्दे पर शर्मा ने किसानों के लिए भरोसेमंद मूल्य सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत बताई। उनके अनुसार केवल बाजार की शक्तियों पर निर्भर रहने से किसानों की आय में स्थिरता नहीं आ सकती। उत्पादन बढ़ने के बावजूद यदि किसान को बाजार में उचित कीमत नहीं मिलती, तो रिकॉर्ड उत्पादन का लाभ उसकी आमदनी में दिखाई नहीं देता।

    उन्होंने कहा कि भारत की कृषि नीति का लक्ष्य केवल अधिक उत्पादन हासिल करना नहीं होना चाहिए। किसानों की वास्तविक कमाई, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और खाद्य सुरक्षा को केंद्र में रखकर नीतियां तैयार करना जरूरी है। उनके मुताबिक दीर्घकालिक कृषि विकास के लिए इथेनॉल, सब्सिडी और व्यापार नीतियों के बीच बेहतर संतुलन बनाना समय की जरूरत है।

  • इंदौर पहुंचे मुख्यमंत्री मोहन यादव, मेट्रो का विस्तार 17 किलोमीटर तक, कांग्रेस पर युवाओं के मुद्दे को लेकर साधा निशाना

    इंदौर पहुंचे मुख्यमंत्री मोहन यादव, मेट्रो का विस्तार 17 किलोमीटर तक, कांग्रेस पर युवाओं के मुद्दे को लेकर साधा निशाना

    इंदौर:  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शनिवार को इंदौर पहुंचे, जहां वे विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होने के साथ शहर में मेट्रो सेवा के विस्तारित चरण की शुरुआत करेंगे। इंदौर मेट्रो का संचालन अब तक करीब छह किलोमीटर के दायरे में किया जा रहा था, लेकिन विस्तार के बाद यह सेवा लगभग 17 किलोमीटर के क्षेत्र तक पहुंच जाएगी। मुख्यमंत्री इस विस्तारित सेवा का विधिवत शुभारंभ करेंगे।

    इंदौर पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि शहर को मेट्रो के विस्तार के रूप में एक महत्वपूर्ण सौगात मिल रही है। उन्होंने कहा कि शुरुआती चरण में मेट्रो संचालन के बाद अब इसके दायरे को बढ़ाकर करीब 17 किलोमीटर किया जा रहा है। उनके मुताबिक, आर्थिक गतिविधियों के लिहाज से इंदौर मध्य प्रदेश का महत्वपूर्ण शहर है और यहां बेहतर सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की जरूरत लगातार बढ़ रही है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि मेट्रो सेवा के विस्तार से इंदौर के स्थानीय निवासियों के साथ-साथ दूसरे शहरों और क्षेत्रों से आने वाले लोगों को भी आवागमन में सुविधा मिलेगी। बढ़ते यातायात दबाव के बीच सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करना शहर के विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने इंदौर के लोगों को मेट्रो के विस्तारित चरण की शुरुआत के लिए शुभकामनाएं दीं।

    इंदौर दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने राजनीतिक मुद्दों पर भी कांग्रेस को घेरा। शहर में कांग्रेस के प्रस्तावित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम और इसमें राहुल गांधी के शामिल होने की चर्चा के बीच उन्होंने विपक्षी दल पर निशाना साधा। मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष के नेता के रूप में राहुल गांधी मध्य प्रदेश आ रहे हैं तो उनका स्वागत है, लेकिन कांग्रेस को अपने शासनकाल में युवाओं के साथ हुए कथित अन्याय के लिए माफी मांगनी चाहिए।

    मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के लंबे शासनकाल का उल्लेख करते हुए किसान, महिला और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अपने पुराने शासन के दौरान प्रदेश की स्थिति को लेकर जवाब देना चाहिए। मुख्यमंत्री ने बिजली उत्पादन और प्रति व्यक्ति आय के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए वर्तमान स्थिति की तुलना कांग्रेस के पुराने शासनकाल से की।

    मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रदेश में वर्ष 1955 से 2003 तक कांग्रेस की सरकारें रहीं और उस दौरान बिजली उत्पादन क्षमता करीब पांच हजार मेगावाट के स्तर पर थी। उन्होंने कहा कि बाद के वर्षों में यह क्षमता बढ़ी और वर्तमान सरकार के कार्यकाल में भी इसमें वृद्धि हुई है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि राज्य की बिजली उत्पादन क्षमता अब करीब 31 हजार मेगावाट तक पहुंच चुकी है।

    उन्होंने प्रति व्यक्ति आय का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री के मुताबिक, लंबे कांग्रेस शासन के दौरान प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय करीब 11,700 रुपये थी, जबकि अब यह बढ़कर लगभग एक लाख 67 हजार रुपये हो गई है। उन्होंने इन आंकड़ों के आधार पर कांग्रेस से अपने शासनकाल के प्रदर्शन पर स्पष्टीकरण और माफी की मांग की।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राजनीतिक दलों को वर्तमान मुद्दों के साथ अपने पुराने कार्यकाल का भी मूल्यांकन करना चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी के मध्य प्रदेश दौरे का स्वागत करते हुए कांग्रेस से युवाओं से जुड़े पुराने सवालों का जवाब देने को कहा। उनके बयान से इंदौर में होने वाले कांग्रेस के कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने के संकेत मिले हैं।

    इसी बीच शिक्षक दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के सभी शिक्षकों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए उनके योगदान का सम्मान किया। इंदौर में मेट्रो विस्तार और राजनीतिक कार्यक्रमों के बीच मुख्यमंत्री का दौरा प्रशासनिक तथा राजनीतिक, दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा।

  • कर्मचारी संगठनों की 40 प्रतिशत HRA मांग से बढ़ी उम्मीद, नए फिटमेंट फैक्टर के बाद भत्ते में बदलाव की संभावना

    कर्मचारी संगठनों की 40 प्रतिशत HRA मांग से बढ़ी उम्मीद, नए फिटमेंट फैक्टर के बाद भत्ते में बदलाव की संभावना


    नई दिल्ली । केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग को लेकर वेतन और भत्तों में संभावित बदलाव की चर्चा तेज है। इसी क्रम में House Rent Allowance यानी HRA में भी बढ़ोतरी की मांग सामने आई है। कर्मचारी संगठनों ने नए वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर बढ़ाने के साथ X श्रेणी के शहरों में HRA की मौजूदा दर 30 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत करने की मांग रखी है।

    अगर प्रस्तावित बदलावों को मंजूरी मिलती है तो कुछ वेतन स्तरों पर कर्मचारियों को मौजूदा व्यवस्था की तुलना में अधिक आवास भत्ता मिल सकता है। हालांकि अभी 8वें वेतन आयोग की अंतिम सिफारिशें सामने नहीं आई हैं और HRA की नई दर को लेकर कोई अंतिम सरकारी फैसला नहीं हुआ है। इसलिए सामने आ रहे आंकड़ों को संभावित गणना के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

    मौजूदा 7वें वेतन आयोग की व्यवस्था में Level 5 कर्मचारी का शुरुआती बेसिक पे 29,200 रुपये है। X श्रेणी के शहरों में 30 प्रतिशत HRA के हिसाब से इस स्तर के कर्मचारी को हर महीने 8,760 रुपये का आवास भत्ता मिलता है।

    कर्मचारी संगठनों की मांग के अनुसार यदि नए वेतन ढांचे में Level 5 का बेसिक पे बढ़कर करीब 61,320 रुपये होता है और X श्रेणी के शहरों के लिए HRA की दर 40 प्रतिशत निर्धारित की जाती है, तो मासिक HRA की गणना 24,528 रुपये तक पहुंच सकती है।

    इस हिसाब से मौजूदा 8,760 रुपये के मुकाबले संभावित HRA में करीब 15,768 रुपये प्रति माह की बढ़ोतरी हो सकती है। सालाना आधार पर देखें तो यह अंतर 1.89 लाख रुपये से अधिक बैठ सकता है। हालांकि यह केवल प्रस्तावित बेसिक पे और HRA दर के आधार पर की गई गणना है। वास्तविक राशि सरकार के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगी।

    HRA सरकारी कर्मचारियों को किराए के मकान से जुड़े खर्च में सहायता देने के लिए दिया जाने वाला भत्ता है। इसकी दर कर्मचारी के वेतन और शहर की श्रेणी के आधार पर तय होती है। मौजूदा व्यवस्था में X श्रेणी के शहरों के लिए 30 प्रतिशत, Y श्रेणी के शहरों के लिए 20 प्रतिशत और Z श्रेणी के शहरों के लिए 10 प्रतिशत HRA की दर बताई गई है।

    8वें वेतन आयोग में यदि बेसिक पे में बदलाव होता है तो उससे HRA समेत दूसरे वेतन घटकों की गणना पर भी असर पड़ सकता है। इसी वजह से कर्मचारी संगठनों की नजर फिटमेंट फैक्टर और नई वेतन संरचना पर है। फिटमेंट फैक्टर बढ़ने की स्थिति में मूल वेतन में वृद्धि का आधार तैयार हो सकता है, जिसका असर संबंधित भत्तों पर भी पड़ सकता है।

    HRA से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण पहलू आयकर नियम हैं। पात्र कर्मचारी पुरानी कर व्यवस्था में आयकर अधिनियम की धारा 10(13A) के तहत निर्धारित शर्तों के अनुसार HRA पर कर छूट का लाभ ले सकते हैं। हालांकि कर लाभ और वास्तविक HRA की गणना अलग-अलग नियमों पर निर्भर करती है।

    8वें वेतन आयोग की अंतिम सिफारिशों के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कर्मचारियों के बेसिक पे, फिटमेंट फैक्टर और HRA की दरों में कितना बदलाव किया जाएगा। फिलहाल 24,528 रुपये का आंकड़ा किसी सरकारी घोषणा के बजाय प्रस्तावित वेतन और HRA दर के आधार पर निकाली गई संभावित राशि है।