Blog

  • मंत्री सारंग ने मप्र की बेटी भारतीय महिला क्रिकेटर क्रांति गौड़ का किया सम्मान

    मंत्री सारंग ने मप्र की बेटी भारतीय महिला क्रिकेटर क्रांति गौड़ का किया सम्मान


    भोपाल । मध्‍य प्रदेश के खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने राजधानी भोपाल के टीटी नगर स्टेडियम में मध्य प्रदेश एवं देश का गौरव बढ़ाने वाली भारतीय महिला क्रिकेट टीम की तेज गेंदबाज क्रांति गौड़ से मुलाकात कर इंग्लैंड के ऐतिहासिक लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड पर उनके शानदार प्रदर्शन के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

    मंत्री सारंग ने कहा कि क्रांति गौड़ ने अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से न केवल मध्य प्रदेश बल्कि पूरे देश का नाम विश्व पटल पर रोशन किया है। उनकी उपलब्धि प्रदेश की बेटियों और युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार खेल प्रतिभाओं को निरंतर प्रोत्साहन दे रही है। आधुनिक खेल अधोसंरचना, बेहतर प्रशिक्षण सुविधाओं और ग्रामीण क्षेत्रों तक खेल अवसरों के विस्तार का ही परिणाम है कि आज प्रदेश के ग्रामीण अंचलों के बच्चे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। बता दें कि क्रांति गौड़ मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के घुवारा की रहने वाली है।

    क्रिकेटर क्रांति गौड़ ने कहा कि “लॉर्ड्स में भारत की जीत का हिस्सा बनना मेरे और मेरे परिवार के लिए जीवन का सबसे बड़ा पल था।” उन्होंने बताया कि लॉर्ड्स के प्रतिष्ठित ऑनर्स बोर्ड पर अपना नाम दर्ज होते देख उन्होंने उसी समय परिवार को वीडियो कॉल कर वह ऐतिहासिक क्षण साझा किया। उन्होंने कहा कि “ऑनर्स बोर्ड पर नाम दर्ज कराना हर क्रिकेटर का सपना होता है। पहली भारतीय महिला क्रिकेटर के रूप में वहां अपना नाम दर्ज होना मेरे लिए गर्व की बात है। यह उपलब्धि केवल मेरी नहीं, बल्कि मेरे परिवार, मेरे कोचों, मध्यप्रदेश और पूरे देश की है।”

    मंत्री सारंग ने विश्वास व्यक्त किया कि क्रांति गौड़ की यह ऐतिहासिक उपलब्धि प्रदेश की हजारों बेटियों को खेलों में आगे बढ़ने की प्रेरणा देगी और आने वाले समय में मध्य प्रदेश के खिलाड़ी अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत का गौरव इसी तरह बढ़ाते रहेंगे।

    गौरतलब है कि मध्य प्रदेश की तेज गेंदबाज क्रांति गौड़ ने इंग्लैंड के खिलाफ ऐतिहासिक लॉर्ड्स टेस्ट में दोनों पारियों में कुल 7 विकेट चटकाए। मैच की पहली पारी में शानदार गेंदबाजी करते हुए 37 रन देकर 5 विकेट लिए। मैच की दूसरी पारी में 2 विकेट चटकाए। इस तरह मैच में 7 विकेट लेने पर उन्हें ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुना गया। इसके साथ ही क्रांति गौड़ प्रतिष्ठित लॉर्ड्स के ‘ऑनर बोर्ड’ (सम्मान पट्टिका) पर अपना नाम दर्ज कराने वाली दुनिया की पहली महिला क्रिकेटर बनीं।

  • अंक ज्योतिष का दावा, गुप्त नवरात्रि में मूलांक 2, 7 और 9 के जातक विशेष पूजा और मंत्रों से पा सकते हैं सकारात्मक परिणाम

    अंक ज्योतिष का दावा, गुप्त नवरात्रि में मूलांक 2, 7 और 9 के जातक विशेष पूजा और मंत्रों से पा सकते हैं सकारात्मक परिणाम

    नई दिल्ली । आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि को सनातन परंपरा में साधना, उपासना और आध्यात्मिक अनुष्ठानों के लिए विशेष महत्व दिया जाता है। इसी अवधि को लेकर अंक ज्योतिष में भी कुछ विशेष मान्यताएं प्रचलित हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस समय मूलांक 2, 7 और 9 वाले लोगों के लिए कुछ विशेष उपाय लाभकारी माने जाते हैं। कहा जाता है कि इन उपायों को श्रद्धा और विधि-विधान से करने पर आर्थिक चुनौतियों में राहत, मानसिक शांति तथा कार्यक्षेत्र में सकारात्मक बदलाव के योग बन सकते हैं। हालांकि यह सभी बातें धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं।

    अंक ज्योतिष में व्यक्ति की जन्मतिथि के अंकों के योग से प्राप्त एकल अंक को मूलांक कहा जाता है। यदि किसी व्यक्ति का जन्म 2, 11, 20 या 29 तारीख को हुआ है तो उसका मूलांक 2 माना जाता है। इसी प्रकार 7, 16 या 25 तारीख को जन्म लेने वालों का मूलांक 7 तथा 9, 18 या 27 तारीख को जन्म लेने वालों का मूलांक 9 होता है। प्रत्येक मूलांक का संबंध किसी विशेष ग्रह से माना जाता है और उसी आधार पर अलग-अलग उपाय बताए जाते हैं।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार मूलांक 2 का संबंध चंद्रमा से माना जाता है। ऐसे लोगों को गुप्त नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा की आराधना करने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि शाम के समय घी का दीपक जलाकर माता को मखाने और चिरौंजी से बनी सफेद खीर का भोग लगाने तथा सफेद पुष्प अर्पित करने से मानसिक तनाव कम होने और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होने का भाव प्रबल होता है। पूजा के दौरान “ॐ दुं दुर्गायै नमः” अथवा “ॐ चमं चन्द्रमसे नमः” मंत्र का जाप भी शुभ माना गया है।

    मूलांक 7 का संबंध केतु ग्रह से जोड़ा जाता है। अंक ज्योतिष के अनुसार इस मूलांक के लोगों के लिए गुप्त नवरात्रि की रात्रि में कपूर और दो साबुत लौंग का विशेष उपाय करने की परंपरा बताई जाती है। मान्यता है कि इसे श्रद्धा के साथ करते हुए माता दुर्गा से आर्थिक स्थिरता और कर्ज से मुक्ति की प्रार्थना की जाए। साथ ही “ॐ कें केतवे नमः” मंत्र का मानसिक जाप भी शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इससे नकारात्मक प्रभावों में कमी और आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत मिल सकते हैं।

    वहीं मूलांक 9 का स्वामी ग्रह मंगल माना जाता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस मूलांक के लोग गुप्त नवरात्रि में घी का दीपक जलाकर नौ बताशों पर दो-दो साबुत लौंग रखकर माता दुर्गा को अर्पित कर सकते हैं। इसके साथ लाल गुड़हल या लाल गुलाब का फूल चढ़ाने की भी परंपरा बताई गई है। पूजा के दौरान “ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः” अथवा “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” मंत्र का जाप शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे आत्मविश्वास बढ़ता है और कार्यों में आने वाली बाधाएं कम हो सकती हैं।

    धार्मिक परंपराओं में गुप्त नवरात्रि को साधना और आत्मिक उन्नति का विशेष अवसर माना जाता है। अंक ज्योतिष के इन उपायों का उद्देश्य व्यक्ति में सकारात्मक सोच, श्रद्धा और आत्मविश्वास का संचार करना माना जाता है। हालांकि इन उपायों के परिणाम व्यक्ति की आस्था और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित होते हैं तथा इन्हें किसी वैज्ञानिक या प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। श्रद्धा, सकारात्मक प्रयास और निरंतर कर्म ही जीवन में स्थायी सफलता और आर्थिक प्रगति के प्रमुख आधार माने जाते हैं।

  • भोपाल का निशातपुरा रेलवे स्टेशन तीन साल से संचालन का इंतजार कर रहा, करोड़ों की परियोजना अब भी बनी अधूरी तस्वीर

    भोपाल का निशातपुरा रेलवे स्टेशन तीन साल से संचालन का इंतजार कर रहा, करोड़ों की परियोजना अब भी बनी अधूरी तस्वीर

     मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित निशातपुरा रेलवे स्टेशन निर्माण पूरा होने के बावजूद अब तक नियमित संचालन शुरू नहीं हो सका है। आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित यह स्टेशन पिछले लगभग तीन वर्षों से ट्रेनों के ठहराव का इंतजार कर रहा है। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार इस परियोजना का उपयोग शुरू न होने के कारण रेलवे की योजना और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।

    करीब छह करोड़ रुपये की लागत से जून 2023 में तैयार किए गए इस रेलवे स्टेशन को यात्रियों की सुविधा और भोपाल जंक्शन पर बढ़ते परिचालन दबाव को कम करने के उद्देश्य से विकसित किया गया था। स्टेशन पर प्लेटफॉर्म, टिकट काउंटर, प्रतीक्षालय, शौचालय, प्रकाश व्यवस्था और अन्य आवश्यक बुनियादी सुविधाएं पूरी तरह तैयार हैं। इसके बावजूद यहां न तो किसी यात्री ट्रेन का नियमित ठहराव शुरू हुआ है और न ही स्टेशन पर सामान्य रेल गतिविधियां दिखाई देती हैं।

    दिनभर स्टेशन परिसर लगभग सुनसान रहता है। विभिन्न दिशाओं से आने-जाने वाली ट्रेनें स्टेशन के सामने से गुजरती जरूर हैं, लेकिन उनका यहां ठहराव नहीं होता। परिणामस्वरूप स्टेशन का उपयोग नहीं हो पा रहा है और तैयार बुनियादी ढांचा निष्क्रिय बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि स्टेशन का संचालन शुरू हो जाए तो आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों को भी बड़ी सुविधा मिल सकती है।

    रेलवे की मूल योजना के अनुसार निशातपुरा स्टेशन को विकसित कर भोपाल जंक्शन पर ट्रेनों का दबाव कम करना था। इसके साथ ही लंबी दूरी की ट्रेनों के परिचालन को अधिक व्यवस्थित बनाने, प्लेटफॉर्म उपलब्धता में सुधार करने और इंजन बदलने अथवा परिचालन संबंधी प्रक्रियाओं में लगने वाले समय को कम करने का लक्ष्य रखा गया था। इससे ट्रेनों की समयबद्धता में भी सुधार की संभावना जताई गई थी।

    वर्तमान में पश्चिमी दिशा से आने वाली कई ट्रेनों को भोपाल जंक्शन पर प्लेटफॉर्म उपलब्ध होने का इंतजार करना पड़ता है। रेलवे विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निशातपुरा स्टेशन पूरी तरह चालू हो जाए तो कुछ परिचालन गतिविधियों को वहां स्थानांतरित किया जा सकता है। इससे मुख्य स्टेशन पर दबाव कम होगा और रेल संचालन अधिक सुचारु बनाया जा सकेगा।

    हालांकि रेलवे अधिकारियों का कहना है कि स्टेशन का निर्माण पूरा होने के बाद भी कुछ महत्वपूर्ण औपचारिकताएं शेष हैं। इनमें सुरक्षा संबंधी स्वीकृतियां, अंतिम निरीक्षण, आवश्यक कर्मचारियों की तैनाती और परिचालन से जुड़ी प्रक्रियाएं शामिल हैं। इसके अलावा स्टेशन परिसर से जुड़े ड्रेनेज सिस्टम और पहुंच मार्ग के कुछ कार्य भी अभी पूरे किए जाने बाकी हैं।

    अधिकारियों के अनुसार इन सभी प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद स्टेशन से ट्रेनों का संचालन शुरू किया जाएगा। रेलवे का दावा है कि शेष कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जा रहा है ताकि यात्रियों को इस नए स्टेशन का लाभ मिल सके। हालांकि संचालन शुरू होने की कोई निश्चित तिथि अभी घोषित नहीं की गई है।

    फिलहाल निशातपुरा रेलवे स्टेशन आधुनिक सुविधाओं से लैस होने के बावजूद यात्रियों की आवाजाही से दूर है। स्थानीय नागरिकों और यात्रियों की उम्मीद है कि लंबित औपचारिकताएं जल्द पूरी होंगी और यह स्टेशन अपने निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप रेल नेटवर्क का सक्रिय हिस्सा बनकर भोपाल जंक्शन का भार कम करने के साथ क्षेत्र के लोगों को बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध कराएगा।

  • धन और सफलता का मार्ग दिखाते हैं चाणक्य के नौ सूत्र, सही सोच और अनुशासन से बदल सकती है जीवन की दिशा

    धन और सफलता का मार्ग दिखाते हैं चाणक्य के नौ सूत्र, सही सोच और अनुशासन से बदल सकती है जीवन की दिशा

    नई दिल्ली । आचार्य चाणक्य को भारत के महान अर्थशास्त्रियों, कूटनीतिज्ञों और नीति-निर्माताओं में प्रमुख स्थान प्राप्त है। उनके विचार आज भी व्यक्तिगत विकास, आर्थिक प्रबंधन और सफल जीवन के लिए प्रासंगिक माने जाते हैं। चाणक्य का मानना था कि केवल धन अर्जित करना ही समृद्धि का आधार नहीं है, बल्कि सही सोच, अनुशासित जीवन, दूरदर्शिता और विवेकपूर्ण निर्णय ही व्यक्ति को स्थायी सफलता दिलाते हैं। उनके बताए गए सिद्धांत आज के प्रतिस्पर्धी दौर में भी लोगों को जीवन की सही दिशा चुनने की प्रेरणा देते हैं।

    चाणक्य के अनुसार सफलता की शुरुआत स्पष्ट लक्ष्य से होती है। यदि व्यक्ति को यह पता ही न हो कि उसे किस दिशा में आगे बढ़ना है, तो उसकी मेहनत बिखर जाती है। स्पष्ट उद्देश्य व्यक्ति को योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ने और अपने प्रयासों को सही दिशा देने में मदद करता है। यही कारण है कि लक्ष्य निर्धारण को उन्होंने सफलता का पहला आधार माना।

    समय के महत्व को भी चाणक्य ने विशेष रूप से रेखांकित किया है। उनका मानना था कि समय सबसे मूल्यवान संसाधन है और जो व्यक्ति इसका सदुपयोग करना सीख लेता है, उसके लिए प्रगति के नए अवसर स्वयं बनने लगते हैं। समय पर निर्णय लेना, आलस्य से बचना और अवसरों का सही उपयोग करना सफलता की महत्वपूर्ण शर्त मानी गई है।

    आर्थिक प्रबंधन को लेकर भी चाणक्य की सोच अत्यंत व्यावहारिक थी। उनका कहना था कि जितना आवश्यक धन कमाना है, उतना ही जरूरी उसे समझदारी से खर्च करना और भविष्य के लिए बचत करना भी है। अनावश्यक खर्च आर्थिक अस्थिरता का कारण बन सकता है, जबकि संतुलित वित्तीय व्यवहार व्यक्ति को सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाता है।

    चाणक्य ने ज्ञान को सबसे बड़ी पूंजी बताया है। उनका मानना था कि बदलते समय के साथ नई जानकारी और कौशल सीखते रहना आवश्यक है। जो व्यक्ति स्वयं को लगातार विकसित करता रहता है, वही प्रतिस्पर्धा में आगे निकलता है। सीखने की यह प्रवृत्ति व्यक्ति के आत्मविश्वास और कार्यक्षमता दोनों को मजबूत बनाती है।

    उन्होंने यह भी कहा कि व्यक्ति की संगति उसके विचारों और भविष्य को प्रभावित करती है। सकारात्मक सोच रखने वाले और प्रेरित करने वाले लोगों के साथ रहने से व्यक्तित्व का विकास होता है, जबकि नकारात्मक वातावरण प्रगति में बाधा बन सकता है। इसलिए सही लोगों का साथ चुनना भी सफलता का महत्वपूर्ण आधार माना गया है।

    चाणक्य जोखिम लेने की क्षमता को भी आवश्यक मानते थे, लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट किया कि हर निर्णय सोच-समझकर और परिस्थितियों का आकलन करने के बाद ही लेना चाहिए। बिना तैयारी के उठाया गया जोखिम नुकसान पहुंचा सकता है, जबकि विवेकपूर्ण निर्णय बड़े अवसरों का मार्ग खोल सकता है।

    उनके विचारों में गोपनीयता, धैर्य और अनुशासन का भी विशेष महत्व है। चाणक्य के अनुसार अपनी योजनाओं को समय से पहले सार्वजनिक करने के बजाय उन्हें सफलतापूर्वक पूरा करना अधिक उचित है। साथ ही, उन्होंने यह भी बताया कि सफलता एक दिन में नहीं मिलती, बल्कि लगातार प्रयास, संयम और अनुशासित जीवनशैली से ही स्थायी उपलब्धियां प्राप्त होती हैं।

    चाणक्य ने विनम्रता को भी सफल व्यक्तित्व का महत्वपूर्ण गुण बताया है। उनका मानना था कि ऊंचाइयों पर पहुंचने के बाद भी व्यवहार में सरलता और सम्मान बनाए रखना व्यक्ति की वास्तविक पहचान होती है। यही गुण लोगों का विश्वास जीतते हैं और दीर्घकालिक सफलता की मजबूत नींव तैयार करते हैं।

  • सावन 2026 की तारीखों को लेकर दूर हुआ भ्रम, जानिए कब शुरू होगा पवित्र महीना और कितने होंगे सोमवार

    सावन 2026 की तारीखों को लेकर दूर हुआ भ्रम, जानिए कब शुरू होगा पवित्र महीना और कितने होंगे सोमवार

    नई दिल्ली । भगवान शिव को समर्पित सावन का महीना हिंदू धर्म में विशेष आस्था और श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है। इस पूरे महीने शिव भक्त व्रत, जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। हर वर्ष सावन शुरू होने से पहले सबसे अधिक चर्चा इस बात को लेकर होती है कि इस बार सावन में कुल कितने सोमवार पड़ेंगे। वर्ष 2026 के पंचांग के अनुसार उत्तर भारत में सावन का पवित्र महीना 30 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलेगा और इस दौरान कुल चार सावन सोमवार आएंगे।

    पंचांग के अनुसार सावन का पहला सोमवार 3 अगस्त को होगा। इसके बाद दूसरा सोमवार 10 अगस्त, तीसरा सोमवार 17 अगस्त और चौथा तथा अंतिम सावन सोमवार 24 अगस्त को पड़ेगा। इन चारों सोमवार को शिव भक्त बड़ी संख्या में मंदिरों में पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे और व्रत रखकर विशेष पूजा करेंगे। सावन पूर्णिमा 28 अगस्त को होने के साथ ही इस पवित्र महीने का समापन होगा।

    हर वर्ष सावन की शुरुआत और सोमवार की संख्या को लेकर लोगों में भ्रम की स्थिति बन जाती है। इसका प्रमुख कारण देश में प्रचलित दो अलग-अलग पंचांग पद्धतियां हैं। उत्तर भारत में पूर्णिमांत पंचांग का पालन किया जाता है, जबकि दक्षिण और पश्चिम भारत के कई हिस्सों में अमांत पंचांग मान्य है। दोनों पंचांगों की गणना पद्धति अलग होने के कारण सावन की तिथियों और सोमवारों की संख्या में अंतर दिखाई देता है।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार सावन का प्रत्येक सोमवार भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु प्रातःकाल स्नान कर शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करते हैं। कई श्रद्धालु दिनभर उपवास रखकर शिव मंत्रों का जाप और रुद्राभिषेक भी करते हैं। मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से की गई पूजा से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।

    सावन सोमवार के व्रत का विशेष महत्व अविवाहित और विवाहित दोनों के लिए बताया गया है। धार्मिक विश्वास के अनुसार अविवाहित युवक-युवतियां मनचाहे जीवनसाथी की कामना से यह व्रत रखते हैं, जबकि विवाहित दंपति परिवार की सुख-शांति, वैवाहिक जीवन की खुशहाली और समृद्धि के लिए भगवान शिव का पूजन करते हैं। कई स्थानों पर पूरे सावन महीने में शिवालयों में विशेष धार्मिक आयोजन और भजन-कीर्तन भी आयोजित किए जाते हैं।

    सावन का महीना केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं माना जाता, बल्कि यह संयम, श्रद्धा और आध्यात्मिक साधना का भी प्रतीक है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु नियमित रूप से मंदिरों में दर्शन करते हैं और भगवान शिव की आराधना में समय बिताते हैं। वर्ष 2026 में उत्तर भारतीय पंचांग के अनुसार सावन के चार सोमवार शिव भक्तों को विशेष पूजा और व्रत का अवसर प्रदान करेंगे, जबकि अलग-अलग क्षेत्रों में स्थानीय पंचांग के अनुसार तिथियों में कुछ अंतर देखने को मिल सकता है।

  • आज रात सिंह राशि में होगा चंद्रमा का महागोचर, मेष समेत 4 राशियों के लिए धन लाभ, तरक्की और भाग्योदय के प्रबल योग

    आज रात सिंह राशि में होगा चंद्रमा का महागोचर, मेष समेत 4 राशियों के लिए धन लाभ, तरक्की और भाग्योदय के प्रबल योग

    नई दिल्ली । वैदिक ज्योतिष के अनुसार चंद्रमा को मन, भावनाओं, माता, मानसिक संतुलन और धन प्रवाह का कारक ग्रह माना जाता है। सबसे तेज गति से राशि परिवर्तन करने वाले चंद्रमा 16 जुलाई 2026 की रात 7 बजकर 53 मिनट पर कर्क राशि से निकलकर सूर्य की राशि सिंह में प्रवेश करेंगे। ज्योतिषीय मान्यताओं के मुताबिक यह गोचर कई राशियों के लिए शुभ परिणाम लेकर आ सकता है। विशेष रूप से मेष, मिथुन, तुला और सिंह राशि के जातकों को इस अवधि में करियर, आर्थिक स्थिति और पारिवारिक जीवन में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं।

    मेष राशि के लिए चंद्रमा का यह गोचर पंचम भाव में होगा। ज्योतिषीय दृष्टि से यह समय निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत करने वाला माना गया है। लंबे समय से रुके कार्यों में गति आने के संकेत हैं। विद्यार्थियों को शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। आर्थिक मामलों में भी लाभ की संभावना बन सकती है। निवेश या नए अवसरों से जुड़ी योजनाओं में सकारात्मक परिणाम मिलने के योग बताए गए हैं। परिवार से भी सुखद समाचार प्राप्त हो सकता है।

    मिथुन राशि के जातकों के लिए चंद्रमा का गोचर तीसरे भाव में रहेगा। यह स्थिति आत्मविश्वास, साहस और कार्यक्षमता में वृद्धि का संकेत मानी जाती है। नौकरी और कारोबार से जुड़े लोगों को रुके हुए कार्य पूरे करने में सफलता मिल सकती है। भाई-बहनों का सहयोग प्राप्त होने के साथ छोटी दूरी की यात्रा भी लाभदायक साबित हो सकती है। नए संपर्क भविष्य में करियर और व्यवसाय के लिए उपयोगी हो सकते हैं।

    तुला राशि वालों के लिए यह गोचर लाभ भाव में होने जा रहा है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार इस दौरान आय के नए स्रोत बन सकते हैं। अटका हुआ धन वापस मिलने की संभावना है। नौकरीपेशा लोगों को प्रोत्साहन, बोनस या नई जिम्मेदारी मिलने के संकेत हैं। व्यापार में भी लाभ के अवसर बन सकते हैं। सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ने और प्रभावशाली लोगों से संपर्क मजबूत होने की संभावना जताई गई है, जिसका लाभ भविष्य में मिल सकता है।

    सिंह राशि के जातकों के लिए चंद्रमा का अपनी ही राशि में गोचर विशेष महत्व रखता है। इस अवधि में मानसिक तनाव कम होने और आत्मविश्वास बढ़ने की संभावना मानी जाती है। कार्यस्थल पर आपकी छवि मजबूत हो सकती है और सामाजिक सम्मान में वृद्धि के योग बन सकते हैं। वैवाहिक जीवन में मधुरता आने तथा परिवार के साथ संबंध बेहतर होने की संभावना भी व्यक्त की गई है। नई योजनाओं पर काम शुरू करने के लिए भी यह समय अनुकूल माना गया है।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार चंद्रमा के शुभ प्रभाव को बढ़ाने के लिए रात्रि में चंद्रदेव को जल अर्पित करना लाभकारी माना जाता है। जल में थोड़ा दूध और अक्षत मिलाकर अर्घ्य देने तथा “ॐ सों सोमाय नमः” मंत्र का 108 बार जाप करने की परंपरा बताई गई है। माना जाता है कि इससे मानसिक शांति प्राप्त होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। हालांकि ज्योतिषीय फल और उपाय पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित होते हैं, इसलिए इन्हें व्यक्तिगत आस्था के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

  • यूपी आईटीआई में बिना परीक्षा मिलेगा दाखिला, 8वीं, 10वीं और 12वीं पास युवाओं के लिए शुरू हुई ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया

    यूपी आईटीआई में बिना परीक्षा मिलेगा दाखिला, 8वीं, 10वीं और 12वीं पास युवाओं के लिए शुरू हुई ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश में तकनीकी शिक्षा और रोजगार से जुड़े अवसर तलाश रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर है। राज्य में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान यानी आईटीआई में वर्ष 2026-27 सत्र के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो गई है। खास बात यह है कि इस बार भी उम्मीदवारों को किसी लिखित प्रवेश परीक्षा से नहीं गुजरना होगा। छात्रों का चयन उनकी पिछली कक्षा के अंकों के आधार पर तैयार की जाने वाली मेरिट सूची के माध्यम से किया जाएगा।

    उत्तर प्रदेश के आईटीआई संस्थानों में 8वीं, 10वीं और 12वीं पास छात्र अपनी योग्यता के अनुसार विभिन्न तकनीकी ट्रेड में प्रवेश ले सकते हैं। इन संस्थानों में युवाओं को रोजगार से जुड़े व्यावसायिक प्रशिक्षण दिए जाते हैं, जिससे वे कम समय में तकनीकी कौशल हासिल कर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। आईटीआई में इलेक्ट्रीशियन, फिटर, वेल्डर, मैकेनिक, प्लंबर, वायरमैन, टर्नर, ड्राफ्ट्समैन और कंप्यूटर ऑपरेटर एंड प्रोग्रामिंग असिस्टेंट जैसे कई ट्रेड उपलब्ध हैं।

    उत्तर प्रदेश में आईटीआई प्रवेश और प्रशिक्षण व्यवस्था का संचालन राज्य व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद (एससीवीटी), लखनऊ द्वारा किया जाता है। यह संस्था सरकारी और निजी दोनों तरह के आईटीआई संस्थानों की निगरानी करती है। इसके अलावा पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत संचालित संस्थान भी प्रवेश प्रक्रिया में शामिल होते हैं।

    वर्ष 2026-27 के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 11 जुलाई 2026 से शुरू हो चुकी है और उम्मीदवार 4 अगस्त 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन रखी गई है और इच्छुक अभ्यर्थियों को निर्धारित पोर्टल के माध्यम से ही अपना पंजीकरण कराना होगा। ऑफलाइन आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे।

    आईटीआई प्रवेश के लिए चयन प्रक्रिया पूरी तरह मेरिट आधारित होगी। उम्मीदवारों का चयन संबंधित ट्रेड और पाठ्यक्रम की योग्यता के अनुसार 8वीं, 10वीं या 12वीं कक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर किया जाएगा। किसी भी प्रकार की लिखित प्रवेश परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी। मेरिट सूची जारी होने के बाद उपलब्ध सीटों के आधार पर काउंसलिंग और सीट आवंटन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

    आवेदक सरकारी आईटीआई, निजी आईटीआई या दोनों विकल्पों के लिए आवेदन कर सकते हैं। उम्मीदवारों की न्यूनतम आयु 14 वर्ष निर्धारित की गई है, जबकि अधिकतम आयु सीमा तय नहीं की गई है। अधिकांश तकनीकी ट्रेड के लिए 10वीं पास होना आवश्यक है, जबकि कुछ शुरुआती स्तर के ट्रेड में 8वीं पास उम्मीदवार भी आवेदन कर सकते हैं।

    प्रवेश के लिए उम्मीदवार का उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी होना जरूरी है। दस्तावेज सत्यापन के समय वैध निवास प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा। आवेदन के दौरान उम्मीदवारों को अपनी व्यक्तिगत जानकारी, शैक्षणिक विवरण, श्रेणी संबंधी जानकारी, फोटो, हस्ताक्षर और अन्य जरूरी दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड करने होंगे।

    आवेदन शुल्क के रूप में सामान्य और अन्य पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों को 250 रुपये का ऑनलाइन भुगतान करना होगा। भुगतान नेट बैंकिंग, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या यूपीआई माध्यम से किया जा सकता है। आवेदन जमा करने और शुल्क भुगतान के बाद उम्मीदवारों को फॉर्म में सुधार के लिए 48 घंटे की अवधि भी उपलब्ध कराई जाएगी।

    प्रवेश प्रक्रिया में पहले ऑनलाइन पंजीकरण, मोबाइल सत्यापन, आवेदन फॉर्म भरना, दस्तावेज अपलोड करना और शुल्क भुगतान जैसे चरण पूरे किए जाएंगे। इसके बाद योग्यता परीक्षा के अंकों के आधार पर मेरिट सूची जारी होगी। सीट उपलब्धता के अनुसार कई चरणों में काउंसलिंग आयोजित की जाएगी, जिससे पहले चरण में सीट नहीं पाने वाले उम्मीदवारों को आगे के अवसर मिल सकें।

    आईटीआई प्रवेश प्रक्रिया में राज्य सरकार के नियमों के अनुसार आरक्षण व्यवस्था भी लागू होगी। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों को निर्धारित नियमों के तहत लाभ मिलेगा। उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि आवेदन करने से पहले पात्रता, शुल्क और अन्य जरूरी जानकारियों की पुष्टि संबंधित आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार जरूर कर लें, क्योंकि नियमों में समय-समय पर बदलाव संभव हैं।

  • गांवों के विकास से मजबूत होगा विकसित भारत का सपना, केशव मौर्य ने पंचायतों को बनाया भविष्य की प्रगति का आधार

    गांवों के विकास से मजबूत होगा विकसित भारत का सपना, केशव मौर्य ने पंचायतों को बनाया भविष्य की प्रगति का आधार

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा है कि गांवों का सर्वांगीण विकास सरकार की प्राथमिकता है और मजबूत एवं विकसित पंचायतों के बिना विकसित भारत की कल्पना पूरी नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि आने वाला समय भारत, उत्तर प्रदेश और पूरे उत्तर भारत के विकास का है, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी।

    वाराणसी के रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में आयोजित पंच सम्मेलन को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री ने ग्रामीण विकास को देश की प्रगति का आधार बताया। यह सम्मेलन ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार और उत्तर प्रदेश ग्राम्य विकास विभाग की ओर से आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीण विकास से जुड़े अधिकारियों को गांवों को आत्मनिर्भर और सुविधाओं से संपन्न बनाने की दिशा में काम करने का संदेश दिया गया।

    केशव मौर्य ने कहा कि सरकार की ग्रामीण विकास योजनाओं का उद्देश्य केवल बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि गांवों में रोजगार के अवसर बढ़ाना, शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाना भी है। उन्होंने कहा कि विकसित पंचायतों की अवधारणा के तहत योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी विकास को गति मिल सके।

    उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना, मुफ्त राशन व्यवस्था, सड़क निर्माण और अन्य विकास कार्यों से बड़ी संख्या में लोगों के जीवन स्तर में सुधार आया है। उन्होंने दावा किया कि सरकार की नीतियों के कारण करोड़ों लोगों को गरीबी से बाहर निकलने का अवसर मिला है और ग्रामीण क्षेत्रों में सुविधाओं का विस्तार हुआ है।

    उपमुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित उत्तर प्रदेश ही विकसित भारत की मजबूत नींव बनेगा। उन्होंने प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति, नक्सलवाद पर नियंत्रण और अन्य बड़े फैसलों का भी जिक्र किया। उनका कहना था कि विकास के साथ-साथ सुरक्षा और सुशासन भी किसी भी क्षेत्र की प्रगति के लिए जरूरी है।

    सम्मेलन में केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्यमंत्री कमलेश पासवान ने भी ग्रामीण विकास को देश के भविष्य से जोड़ते हुए कहा कि भारत की बड़ी आबादी गांवों में निवास करती है, इसलिए ग्रामीण क्षेत्रों का विकास राष्ट्र निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। उन्होंने ग्राम प्रधानों से अपील की कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में विकसित पंचायतों के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं।

    कमलेश पासवान ने कहा कि ग्रामीण विकास मंत्रालय देश के प्रमुख मंत्रालयों में शामिल है और आने वाले 25 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए योजनाएं तैयार की जा रही हैं। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों को मजबूत करने, ग्रामीण उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने और सरस मेलों जैसे आयोजनों के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

    कार्यक्रम के दौरान काशी के विकास का भी उल्लेख किया गया। वक्ताओं ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में वाराणसी में बड़े स्तर पर बदलाव देखने को मिला है। काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर, बेहतर सड़क सुविधाओं और हवाई संपर्क में सुधार के कारण यहां पर्यटन और स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिला है। उन्होंने कहा कि शहरों के साथ-साथ गांवों का विकास भी समान गति से होना जरूरी है, तभी प्रदेश और देश समग्र विकास के लक्ष्य को हासिल कर पाएंगे।

  • राजा भैया ने शूटिंग में दिखाया दम, यूपी स्टेट चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर दर्ज कराई नई उपलब्धि

    राजा भैया ने शूटिंग में दिखाया दम, यूपी स्टेट चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर दर्ज कराई नई उपलब्धि

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी अलग पहचान रखने वाले कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने इस बार राजनीतिक गतिविधियों से अलग खेल के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। उन्होंने 49वीं यूपी स्टेट शूटिंग चैंपियनशिप में शानदार निशानेबाजी करते हुए कांस्य पदक हासिल किया है। प्रतियोगिता में उनके प्रदर्शन ने यह साबित किया कि वह केवल राजनीति ही नहीं, बल्कि खेलों में भी अपनी रुचि और क्षमता के लिए पहचाने जाते हैं।

    राजा भैया ने नई दिल्ली स्थित डॉ. करणी सिंह शूटिंग रेंज में आयोजित प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था। यह प्रतियोगिता 21 से 30 जून तक आयोजित की गई थी, जिसमें उन्होंने प्रतियोगी संख्या 71 के रूप में भाग लिया। एस-25 क्ले पिजन ट्रैप शूटिंग (एनआर) स्पर्धा में उन्होंने 25 पॉइंट का स्कोर हासिल किया और इसी प्रदर्शन के आधार पर कांस्य पदक अपने नाम किया। प्रतियोगिता के परिणाम बुधवार को घोषित किए गए।

    निशानेबाजी के प्रति राजा भैया की रुचि काफी पुरानी रही है। वह लंबे समय से शूटिंग खेल से जुड़े हुए हैं और हथियारों तथा निशानेबाजी में उनकी दिलचस्पी सार्वजनिक रूप से भी चर्चा में रही है। वह नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के लाइफटाइम सदस्य भी हैं। निशानेबाजी के क्षेत्र में उनकी रुचि के पीछे पारिवारिक प्रेरणा भी बताई जाती है।

    राजा भैया ने पहले भी बताया था कि उनके पिता उदय प्रताप सिंह स्वयं शूटर रहे हैं और उन्हीं से प्रेरित होकर उन्होंने निशानेबाजी की शुरुआत की थी। परिवार से मिली इस प्रेरणा ने उन्हें इस खेल से लंबे समय तक जोड़े रखा। समय के साथ उन्होंने अभ्यास जारी रखा और अब राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में पदक जीतकर अपनी खेल प्रतिभा का प्रदर्शन किया है।

    शूटिंग के अलावा राजा भैया अपने पारंपरिक शस्त्रों के प्रति लगाव को लेकर भी कई बार चर्चा में रहे हैं। हर वर्ष दशहरे के अवसर पर वह अपने शस्त्रागार में रखे हथियारों की पूजा करते हैं। उनके शस्त्र संग्रह को लेकर भी समय-समय पर चर्चाएं होती रही हैं। हालांकि, कुछ मौकों पर इससे जुड़े विवाद भी सामने आए हैं, जिनका संबंध पारिवारिक और कानूनी मामलों से रहा है।

    राजनीतिक जीवन की बात करें तो रघुराज प्रताप सिंह प्रतापगढ़ जिले की कुंडा विधानसभा सीट से लगातार सातवीं बार विधायक हैं। वह जनसत्ता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उनकी छवि एक प्रभावशाली क्षेत्रीय नेता के रूप में रही है।

    शूटिंग प्रतियोगिता में पदक जीतने के बाद उनके समर्थकों में उत्साह देखा जा रहा है। समर्थक इसे उनके व्यक्तित्व के एक अलग पहलू के रूप में देख रहे हैं, जहां उन्होंने राजनीति के साथ-साथ खेल के क्षेत्र में भी अपनी पहचान बनाई है। राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में हासिल किया गया यह पदक उनके लिए खेल उपलब्धियों की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।

  • मथुरा में स्कूल बस से उतरते समय दर्दनाक हादसा, सात साल के छात्र की पहिए के नीचे आने से मौत

    मथुरा में स्कूल बस से उतरते समय दर्दनाक हादसा, सात साल के छात्र की पहिए के नीचे आने से मौत

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में एक दर्दनाक सड़क हादसे में सात वर्षीय छात्र की मौत हो गई। घटना उस समय हुई जब छात्र स्कूल बस से उतर रहा था। आरोप है कि बस चालक ने लापरवाही बरतते हुए उसी समय वाहन आगे बढ़ा दिया, जिससे बच्चा असंतुलित होकर सड़क पर गिर गया और बस के पहिए की चपेट में आ गया। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश फैल गया।

    मृतक छात्र की पहचान नितिन के रूप में हुई है। वह मथुरा जिले के राल क्षेत्र स्थित तिलक सिंह इंटर कॉलेज में दूसरी कक्षा का छात्र था। बताया जा रहा है कि वह रोज की तरह गुरुवार सुबह स्कूल बस से विद्यालय पहुंचा था। बस से उतरते समय अचानक वाहन आगे बढ़ने से वह नीचे गिर गया और गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसा इतना भयावह था कि उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

    घटना के बाद बस चालक मौके से फरार हो गया। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत घटना की जानकारी पुलिस और स्कूल प्रबंधन को दी। कुछ ही देर में बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और मासूम की मौत को लेकर उनका गुस्सा फूट पड़ा। ग्रामीणों ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ नाराजगी जताते हुए प्रदर्शन किया और लापरवाही का आरोप लगाया।

    हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। आक्रोशित लोगों को समझाकर शांत कराया गया। पुलिस ने बच्चे के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले की जांच शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक जांच में बस चालक की लापरवाही की बात सामने आई है, हालांकि पूरी स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। पुलिस फरार चालक की तलाश कर रही है और घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।

    स्कूल बसों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर समय-समय पर दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं, लेकिन इस तरह की घटनाएं सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों को स्कूल ले जाने और वापस छोड़ने वाली बसों में चालकों की सतर्कता और सुरक्षा नियमों का पालन बेहद जरूरी है।

    मासूम छात्र की मौत के बाद क्षेत्र में शोक का माहौल है। ग्रामीणों ने मांग की है कि दोषी चालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी भी तय की जाए। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच आगे बढ़ा रही है।