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  • एमपी में बारिश के बीच NDRF-SDRF तैनात, अचानक बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी

    एमपी में बारिश के बीच NDRF-SDRF तैनात, अचानक बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी

    मध्य प्रदेश: में लगातार हो रही बारिश को देखते हुए राज्य सरकार ने आपदा प्रबंधन और राहत व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में इन दिनों बारिश दर्ज की जा रही है। पश्चिमी मध्य प्रदेश को छोड़कर कई क्षेत्रों में अच्छी बारिश हुई है। मौसम की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाने के साथ राष्ट्रीय आपदा मोचन बल और राज्य आपदा मोचन बल की टीमों को अलग-अलग स्थानों पर तैनात किया है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आने वाले दिनों में बारिश की स्थिति को देखते हुए अधिकारियों के साथ तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में संभावित जलभराव, अचानक बाढ़ और अन्य आपदा जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए राहत एवं बचाव व्यवस्था पर चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसी भी आकस्मिक स्थिति में प्रभावित लोगों तक राहत और सहायता तेजी से पहुंचाई जा सके।

    सरकार के अनुसार, पिछले एक महीने के दौरान आपदा प्रबंधन से जुड़ी राहत और बचाव टीमों ने 2,783 से अधिक लोगों को विभिन्न परिस्थितियों में सुरक्षित बाहर निकाला है। लगातार बारिश के कारण प्रदेश के कई इलाकों में जलस्तर बढ़ने और आवागमन प्रभावित होने जैसी स्थितियां बनी हैं। ऐसे में राहत दलों को जरूरत के अनुसार तत्काल कार्रवाई के लिए तैयार रखा गया है।

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि अब तक बारिश के कारण प्रदेश में जान-माल का कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है। उन्होंने राहत एवं बचाव कार्य में पुलिस और संबंधित टीमों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करना होगा। उनका जोर इस बात पर रहा कि मौसम की स्थिति अचानक बदलने पर प्रशासन के पास तत्काल प्रतिक्रिया देने की क्षमता बनी रहे।

    मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार अगले दो से चार दिनों के दौरान किसी बड़ी परेशानी की आशंका नहीं बताई गई है। इसके बावजूद सरकार ने एहतियाती स्तर पर तैयारियों को मजबूत रखने का फैसला किया है। खासतौर पर निचले इलाकों, जलभराव वाले क्षेत्रों और ऐसे स्थानों पर निगरानी बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है, जहां अचानक पानी बढ़ने की संभावना रहती है।

    NDRF और SDRF की टीमें जरूरत के अनुसार राहत और बचाव अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इन टीमों को संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात रखने का उद्देश्य किसी भी आपात स्थिति में लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना है। प्रशासन की ओर से स्थानीय स्तर पर भी संसाधनों और राहत व्यवस्थाओं को तैयार रखने पर जोर दिया गया है।

    बारिश के दौरान नदी-नालों और जलाशयों के आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा भी प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण विषय है। जलस्तर में अचानक वृद्धि होने की स्थिति में लोगों को समय पर चेतावनी देने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था पर ध्यान दिया जा रहा है। अधिकारियों को स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

    सरकार का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन बारिश के दौरान उत्पन्न होने वाली आकस्मिक परिस्थितियों को देखते हुए राहत दलों को सक्रिय रखा गया है। मुख्यमंत्री की समीक्षा के बाद प्रशासनिक मशीनरी को मौसम से जुड़े बदलावों पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर तेजी से कार्रवाई करने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।

    राज्य में मानसून के दौरान हर वर्ष अलग-अलग क्षेत्रों में अतिवृष्टि, जलभराव और अचानक बाढ़ जैसी परिस्थितियां सामने आती हैं। ऐसे में पहले से की गई तैयारी नुकसान को कम करने में अहम भूमिका निभाती है। इसी उद्देश्य से सरकार ने राहत एवं बचाव दलों की तैनाती, अधिकारियों के समन्वय और स्थानीय स्तर पर संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता बारिश के दौरान लोगों की सुरक्षा बनाए रखना और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत पहुंचाना है।

  • मुरादाबाद सर्किट हाउस में नमाज पढ़ने के मामले में सपा विधायक के चाचा पर मुकदमा दर्ज, वीडियो वायरल

    मुरादाबाद सर्किट हाउस में नमाज पढ़ने के मामले में सपा विधायक के चाचा पर मुकदमा दर्ज, वीडियो वायरल

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में सर्किट हाउस परिसर में नमाज पढ़ने से जुड़े मामले में समाजवादी पार्टी के नेता मोहम्मद उस्मान के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है। मोहम्मद उस्मान बिलारी से सपा विधायक मोहम्मद फहीम के चाचा बताए जा रहे हैं और पार्टी में जिला उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालते हैं। मामला सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो के सामने आने के बाद पुलिस तक पहुंचा।

    वायरल वीडियो में मोहम्मद उस्मान के सर्किट हाउस परिसर में सड़क पर नमाज पढ़ने का दावा किया जा रहा है। आरोप है कि इस दौरान सड़क पर वाहन खड़ा किया गया था, जिससे वहां से आने-जाने वाले लोगों को परेशानी हुई। वीडियो सामने आने के बाद मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा शुरू हुई और पुलिस से कार्रवाई की मांग की गई।

    पुलिस के अनुसार, सर्किट हाउस के प्रभारी अवर अभियंता अनिल कुमार की ओर से दी गई शिकायत के आधार पर मझोला थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि शिकायत में सामने आए तथ्यों के आधार पर कार्रवाई शुरू की गई है। पुलिस अब पूरे मामले की जांच कर रही है और वायरल वीडियो से जुड़े तथ्यों की भी पड़ताल की जा रही है।

    मुरादाबाद के पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, कुछ हिंदू संगठन के लोगों ने भी इस मामले में पुलिस अधिकारियों से मुलाकात कर कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद शिकायत और उपलब्ध जानकारी के आधार पर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। पुलिस का कहना है कि मामले में जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    यह मामला उस समय सामने आया जब सर्किट हाउस में समाजवादी पार्टी के नेताओं की राजनीतिक गतिविधियां चल रही थीं। जानकारी के मुताबिक, विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव गुरुवार को एमएलसी चुनाव से संबंधित कार्यक्रम के लिए सर्किट हाउस पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने सपा नेताओं के साथ चुनाव को लेकर बैठक भी की थी।

    बताया गया कि लाल बिहारी यादव शुक्रवार को सर्किट हाउस से रवाना हो गए थे। इसके बाद नमाज से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने लगा। वीडियो वायरल होने के बाद मामले ने राजनीतिक और स्थानीय स्तर पर ध्यान खींचा। हालांकि वीडियो में दिखाई दे रही घटना के सभी पहलुओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि घटना किस समय हुई, उस दौरान वहां यातायात और आवाजाही की वास्तविक स्थिति क्या थी तथा वीडियो में दिखाई दे रहे व्यक्ति और घटनास्थल से जुड़े अन्य तथ्यों की पुष्टि कैसे होती है। जांच में शिकायत, वीडियो और मौके से संबंधित जानकारी को आधार बनाया जा रहा है।

    सर्किट हाउस सरकारी उपयोग का महत्वपूर्ण परिसर होता है, जहां अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और अन्य विशिष्ट लोगों की आवाजाही रहती है। ऐसे स्थान पर किसी गतिविधि से यातायात या आम लोगों की आवाजाही प्रभावित होने की शिकायत मिलने पर प्रशासन और पुलिस द्वारा संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की जाती है।

    मामले में पुलिस की ओर से मुकदमा दर्ज किए जाने के बाद अब जांच आगे बढ़ रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आवश्यक कानूनी कदम उठाए जाएंगे। वहीं सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर भी लोगों से बिना पुष्टि के किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचने की अपील की जा सकती है, क्योंकि वीडियो के आधार पर घटना के पूरे संदर्भ का निर्धारण हमेशा संभव नहीं होता।

    फिलहाल मोहम्मद उस्मान के खिलाफ मझोला थाने में दर्ज मामले को लेकर पुलिस जांच कर रही है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि और घटना की परिस्थितियों को स्पष्ट करने के लिए पुलिस उपलब्ध साक्ष्यों की जांच में जुटी है।

  • दिल्ली में भारी बारिश से हवाई यातायात प्रभावित, आईजीआई एयरपोर्ट पर 200 से अधिक उड़ानें हुईं लेट, यात्रियों को एडवाइजरी जारी

    दिल्ली में भारी बारिश से हवाई यातायात प्रभावित, आईजीआई एयरपोर्ट पर 200 से अधिक उड़ानें हुईं लेट, यात्रियों को एडवाइजरी जारी

    नई दिल्ली । दिल्ली में शनिवार को तेज बारिश और खराब मौसम का असर हवाई यातायात पर भी देखने को मिला। इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 5 सितंबर को 200 से अधिक उड़ानों के देरी से संचालित होने की जानकारी सामने आई। मौसम की स्थिति के कारण आने और जाने वाली कई उड़ानों के समय में बदलाव हुआ, जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

    खराब मौसम के चलते कुछ उड़ानों के दिल्ली पहुंचने में एक घंटे से अधिक की देरी हुई, जबकि कई प्रस्थान करने वाली उड़ानें करीब डेढ़ घंटे तक विलंबित रहीं। बारिश की स्थिति को देखते हुए एयरलाइंस की ओर से यात्रियों को यात्रा से पहले अपनी उड़ान की ताजा स्थिति जांचने की सलाह दी गई है।

    एयरलाइंस ने यात्रियों से कहा है कि वे घर से एयरपोर्ट के लिए निकलने से पहले अपनी फ्लाइट का स्टेटस जरूर देख लें। मौसम में बदलाव के कारण उड़ानों के समय में अचानक परिवर्तन हो सकता है। ऐसे में यात्रियों को एयरपोर्ट पहुंचने से पहले संबंधित एयरलाइन की वेबसाइट या मोबाइल ऐप पर जानकारी हासिल करने की सलाह दी गई है।

    इंडिगो ने भी खराब मौसम को लेकर यात्रियों के लिए ट्रैवल एडवाइजरी जारी की। एयरलाइन ने बताया कि दिल्ली से आने-जाने वाली उड़ानों पर मौसम का असर पड़ सकता है और कुछ फ्लाइट्स देरी से संचालित हो सकती हैं। यात्रियों से अपील की गई कि वे यात्रा शुरू करने से पहले अपनी उड़ान की स्थिति की पुष्टि कर लें।

    बारिश का असर केवल एयरपोर्ट के रनवे और हवाई संचालन तक सीमित नहीं है। दिल्ली में कई इलाकों में तेज बारिश के कारण सड़कों पर यातायात की रफ्तार भी प्रभावित हुई है। एयरपोर्ट की ओर जाने वाले रास्तों पर वाहनों की संख्या बढ़ने और ट्रैफिक धीमा होने की स्थिति में यात्रियों को सामान्य से अधिक समय लग सकता है।

    यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे एयरपोर्ट के लिए घर से पर्याप्त समय लेकर निकलें। रास्ते में बारिश और ट्रैफिक के कारण होने वाली संभावित देरी को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त समय रखना जरूरी है। इससे उड़ान के लिए निर्धारित चेक-इन और बोर्डिंग समय पर एयरपोर्ट पहुंचने में मदद मिल सकती है।

    एयरलाइंस और एयरपोर्ट से जुड़ी टीमें मौसम की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। परिस्थितियों के अनुसार उड़ानों के संचालन और समय में आवश्यक बदलाव किए जा रहे हैं। खराब मौसम की स्थिति में यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उड़ानों के संचालन से जुड़े फैसले लिए जाते हैं।

    दिल्ली में बारिश के कारण शनिवार को हवाई यात्रियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सलाह यही है कि वे केवल टिकट पर दिए गए निर्धारित समय के आधार पर यात्रा की योजना न बनाएं। एयरपोर्ट रवाना होने से पहले फ्लाइट का लाइव स्टेटस जांचना और मौसम तथा सड़क यातायात की स्थिति को ध्यान में रखना जरूरी है।

    यात्रियों से एयरलाइंस ने सहयोग और धैर्य बनाए रखने की अपील की है। मौसम सामान्य होने के साथ उड़ानों का संचालन भी धीरे-धीरे नियमित होने की उम्मीद है, लेकिन जिन यात्रियों की शनिवार को दिल्ली से उड़ान है, उन्हें एयरपोर्ट जाने से पहले ताजा अपडेट जरूर देखना चाहिए।

  • इस हफ्ते सोने के भाव में 4,694 रुपये और चांदी में 8,436 रुपये की बड़ी गिरावट, निवेशकों को राहत

    इस हफ्ते सोने के भाव में 4,694 रुपये और चांदी में 8,436 रुपये की बड़ी गिरावट, निवेशकों को राहत

    नई दिल्ली । सोने और चांदी की कीमतों में इस सप्ताह बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। घरेलू सर्राफा बाजार में 24 कैरेट सोने का भाव 4,694 रुपये घटकर 1,54,884 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया। सप्ताह की शुरुआत में इसकी कीमत 1,59,578 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। इस तरह कुछ ही कारोबारी सत्रों में सोने के भाव में करीब 4,700 रुपये की कमी दर्ज की गई है।

    इसी तरह 22 कैरेट सोने की कीमत भी कम हुई है। सप्ताह की शुरुआत में 1,46,173 रुपये प्रति 10 ग्राम के मुकाबले इसका भाव घटकर 1,41,874 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया। वहीं 18 कैरेट सोने की कीमत 1,19,684 रुपये से घटकर 1,16,163 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई। यानी अलग-अलग शुद्धता वाले सोने के भाव में भी उल्लेखनीय गिरावट देखने को मिली है।

    सप्ताह के दौरान 24 कैरेट सोने का सबसे ऊंचा भाव 31 अगस्त को शाम के सत्र में दर्ज किया गया। उस समय कीमत 1,55,835 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। इसके बाद बाजार में गिरावट का दौर देखने को मिला। 2 सितंबर को शाम के सत्र में सोने का भाव इस सप्ताह के निचले स्तर 1,51,184 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया।

    चांदी की कीमत में भी इस सप्ताह सोने की तरह बड़ी गिरावट रही। चांदी का भाव 8,436 रुपये घटकर 2,35,456 रुपये प्रति किलोग्राम रह गया। सप्ताह की शुरुआत में इसकी कीमत 2,43,892 रुपये प्रति किलोग्राम थी। इस तरह एक सप्ताह के भीतर चांदी के भाव में 8,000 रुपये से अधिक की कमी आई है।

    चांदी का सप्ताह का उच्चतम भाव 31 अगस्त को शाम के सत्र में 2,37,199 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया। इसके बाद कीमतों में उतार-चढ़ाव रहा और 3 सितंबर को सुबह के सत्र में चांदी का भाव 2,28,360 रुपये प्रति किलोग्राम के निचले स्तर तक पहुंच गया। बाद में इसमें कुछ सुधार देखने को मिला।

    घरेलू बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव को कई अंतरराष्ट्रीय कारक प्रभावित करते हैं। सप्ताह के दौरान वैश्विक बाजार में भी कीमती धातुओं की कीमतों पर दबाव देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव करीब 4,500 डॉलर प्रति औंस और चांदी करीब 66 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर रही।

    बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक वित्तीय बाजारों पर पड़ा है। तनाव बढ़ने के बीच डॉलर, बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती आई, जिसका असर सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं पर पड़ा। आम तौर पर डॉलर और बॉन्ड यील्ड में मजबूती आने पर सोने की मांग और कीमतों पर दबाव बन सकता है।

    सर्राफा बाजार में कीमतों की निगरानी करने वाले इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की ओर से सोने और चांदी के भाव दिन में दो बार जारी किए जाते हैं। सुबह और शाम के सत्र में जारी होने वाली कीमतों से बाजार में चल रहे उतार-चढ़ाव का पता चलता है। हालांकि आभूषण खरीदने वाले ग्राहकों के लिए वास्तविक कीमत शुद्धता, मेकिंग चार्ज, टैक्स और अन्य शुल्क के कारण अलग हो सकती है।

  • अमेरिकी सैनिक मोबाइल फोन सुरक्षा, अमेरिकी वायु सेना सैनिक, पेंटागन साइबर सुरक्षा, लोकेशन डेटा सुरक्षा, अमेरिकी सैन्य कंप्यूटर

    अमेरिकी सैनिक मोबाइल फोन सुरक्षा, अमेरिकी वायु सेना सैनिक, पेंटागन साइबर सुरक्षा, लोकेशन डेटा सुरक्षा, अमेरिकी सैन्य कंप्यूटर

    नई दिल्ली । अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों में इस्तेमाल होने वाले मोबाइल फोन और कंप्यूटरों की डिजिटल सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। अमेरिकी वायु सेना और अमेरिकी स्पेशल ऑपरेशंस कमांड ने अपने कुछ उपकरणों में विज्ञापन पहचानकर्ताओं को बंद कर दिया है। यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है जब व्यावसायिक रूप से उपलब्ध लोकेशन डेटा के संभावित दुरुपयोग से मध्य पूर्व में तैनात अमेरिकी सैनिकों की गतिविधियों और सुरक्षा को लेकर सवाल उठे हैं।

    अमेरिकी सीनेटर रॉन वाइडन की ओर से जारी पत्रों और सैन्य अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, अमेरिकी वायु सेना ने करीब दो महीने पहले अपने कंप्यूटर और मोबाइल फोन में विज्ञापन पहचानकर्ताओं को बंद करने की प्रक्रिया पूरी की। दूसरी ओर, अमेरिकी स्पेशल ऑपरेशंस कमांड ने भी अपने विंडोज उपकरणों में ऐसे पहचानकर्ताओं को हाल में निष्क्रिय किया है।

    विज्ञापन पहचानकर्ता ऐसे डिजिटल संकेतक होते हैं जिनका इस्तेमाल आम तौर पर मोबाइल और कंप्यूटर उपयोगकर्ताओं की गतिविधियों से संबंधित विज्ञापन और डेटा विश्लेषण के लिए किया जा सकता है। इनसे जुड़े डेटा में स्थान संबंधी जानकारी भी शामिल हो सकती है। सुरक्षा विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय यह है कि यदि संवेदनशील स्थानों या सैन्य गतिविधियों से जुड़ी जानकारी गलत हाथों में पहुंचती है तो उसका इस्तेमाल सुरक्षा जोखिम पैदा करने के लिए किया जा सकता है।

    मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य गतिविधियों को लेकर सामने आई रिपोर्टों ने इसी खतरे की ओर ध्यान आकर्षित किया है। रिपोर्टों में दावा किया गया था कि व्यावसायिक रूप से उपलब्ध लोकेशन डेटा का इस्तेमाल अमेरिकी सैनिकों की गतिविधियों को ट्रैक करने और संभावित रूप से उन्हें निशाना बनाने के लिए किया गया। हालांकि, ऐसे डेटा के इस्तेमाल और किसी विशेष हमले के बीच सीधा संबंध हर मामले में स्थापित होना अलग जांच का विषय है।

    इसी पृष्ठभूमि में अमेरिकी सांसदों ने सैन्य प्रतिष्ठानों में इस्तेमाल होने वाली डिजिटल तकनीक से जुड़े सुरक्षा उपायों पर सवाल उठाए हैं। सीनेटर रॉन वाइडन और प्रतिनिधि पैट हैरिगन ने सैन्य अधिकारियों से जुड़े सुरक्षा उपायों की समीक्षा के लिए पेंटागन से जांच की मांग की थी। उनका मुख्य concern यह है कि सामान्य व्यावसायिक तकनीक से एकत्र होने वाला डेटा संवेदनशील सैन्य गतिविधियों के बारे में अनजाने में महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध करा सकता है।

    अमेरिकी वायु सेना द्वारा विज्ञापन पहचानकर्ताओं को बंद करने का फैसला इसी व्यापक सुरक्षा चिंता से जुड़ा माना जा रहा है। सैन्य उपकरणों पर इस तरह की तकनीकी पाबंदी का उद्देश्य उन डिजिटल संकेतों को कम करना है जिनका उपयोग डिवाइस या उपयोगकर्ता से संबंधित जानकारी जुटाने के लिए किया जा सकता है।

    स्पेशल ऑपरेशंस कमांड ने भी अपने विंडोज उपकरणों के संबंध में इसी दिशा में कदम उठाया है। विशेष अभियान चलाने वाले सैन्य बलों के लिए स्थान और संचार से जुड़ी जानकारी की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि ऐसी इकाइयों की गतिविधियां अक्सर संवेदनशील सैन्य अभियानों से जुड़ी होती हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम ने सैन्य क्षेत्र में निजी कंपनियों से मिलने वाले डेटा और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन पर बहस को भी तेज किया है। स्मार्टफोन, कंप्यूटर और विभिन्न डिजिटल सेवाओं से बड़ी मात्रा में डेटा उत्पन्न होता है। यदि इस जानकारी तक अनधिकृत लोगों या संगठनों की पहुंच बनती है तो संवेदनशील गतिविधियों की पहचान करने का जोखिम बढ़ सकता है।

    अमेरिकी सैन्य अधिकारियों द्वारा विज्ञापन पहचानकर्ताओं को बंद करना इस खतरे को कम करने की दिशा में उठाया गया एहतियाती कदम माना जा रहा है। हालांकि, केवल एक सेटिंग बंद करने से डिजिटल सुरक्षा से जुड़े सभी जोखिम समाप्त नहीं होते। सैन्य उपकरणों, नेटवर्क, एप्लीकेशन और डेटा साझाकरण से जुड़े व्यापक सुरक्षा उपाय भी महत्वपूर्ण बने रहते हैं। इस मामले ने यह स्पष्ट किया है कि आधुनिक युद्ध और सैन्य अभियानों में डिजिटल लोकेशन डेटा भी सुरक्षा का अहम हिस्सा बन चुका है।

  • गोरखपुर स्टेशन पर DRI की कार्रवाई, अमरनाथ एक्सप्रेस से 5.88 किलोग्राम चरस बरामद, दो महिलाओं समेत तीन गिरफ्तार

    गोरखपुर स्टेशन पर DRI की कार्रवाई, अमरनाथ एक्सप्रेस से 5.88 किलोग्राम चरस बरामद, दो महिलाओं समेत तीन गिरफ्तार

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश के गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर राजस्व खुफिया निदेशालय यानी डीआरआई ने मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए दो महिलाओं समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों के मुताबिक, आरोपियों के कब्जे से 5.88 किलोग्राम चरस बरामद हुई है। बरामद मादक पदार्थ की अंतरराष्ट्रीय अवैध बाजार में अनुमानित कीमत करीब 5.88 करोड़ रुपये बताई गई है। तीनों आरोपी अमरनाथ एक्सप्रेस से बिहार से पंजाब की ओर जा रहे थे।

    डीआरआई को सूचना मिली थी कि कुछ लोग बिहार के सुगौली से ट्रेन में सवार हुए हैं और उनके पास बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ है। इन लोगों का कथित गंतव्य पंजाब का लुधियाना बताया गया था। सूचना मिलने के बाद डीआरआई की टीम गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर पहुंची और ट्रेन के आने का इंतजार करने लगी।

    ट्रेन के स्टेशन पर पहुंचने के बाद टीम संबंधित कोच में पहुंची। संदेह के आधार पर दो महिलाओं और एक पुरुष को हिरासत में लेकर पूछताछ और तलाशी की गई। जांच के दौरान महिलाओं के पास से कुल 11 पैकेट बरामद किए गए। इन पैकेटों में मौजूद काले रंग के पदार्थ की जांच की गई तो वह चरस पाया गया।

    जांच एजेंसी के अनुसार, महिलाओं ने मादक पदार्थ को शरीर के आसपास छिपाकर रखा था। चरस के पैकेट जांघों के चारों ओर घुटने के कैप में लपेटकर और कपड़ों के भीतर छिपाए गए थे। तलाशी के दौरान बरामद सभी पैकेटों को जब्त कर लिया गया। बरामदगी के बाद तीनों आरोपियों को मादक पदार्थों की तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया गया।

    डीआरआई ने बरामद चरस को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटांसेज यानी एनडीपीएस अधिनियम के तहत जब्त किया। अधिकारियों ने मामले में आगे की जांच शुरू करते हुए यह पता लगाने का प्रयास किया कि मादक पदार्थ कहां से हासिल किया गया था और इसे पंजाब तक पहुंचाने की जिम्मेदारी किसे दी गई थी।

    गिरफ्तारी के बाद तीनों आरोपियों के खिलाफ तस्करी से संबंधित मामला दर्ज किया गया। शुक्रवार को उन्हें न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, जहां से तीनों को जेल भेज दिया गया। जांच एजेंसी अब कथित तस्करी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और मादक पदार्थ की आपूर्ति के स्रोत की जानकारी जुटा रही है।

    मामला ऐसे समय सामने आया है जब पूर्वी उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में विभिन्न सामानों की अवैध आवाजाही को लेकर सुरक्षा एजेंसियां लगातार निगरानी बढ़ा रही हैं। सिद्धार्थनगर जिले में भारत-नेपाल सीमा से जुड़े कुछ इलाकों में यूरिया खाद और चीनी समेत अन्य सामानों की कथित तस्करी की शिकायतें भी सामने आती रही हैं।

    मोहाना थाना क्षेत्र के ककरहवा पुलिस चौकी के आसपास के गांवों से सीमापार सामान पहुंचाने की गतिविधियों की जानकारी पुलिस और सुरक्षा बलों को मिलती रही है। सीमा क्षेत्र में कई पगडंडी मार्ग होने के कारण निगरानी सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बनी रहती है। आरोप है कि तस्कर जवानों की गश्त के बीच खाली समय का फायदा उठाकर पहले से जमा सामान सीमापार पहुंचाने का प्रयास करते हैं।

    स्थानीय पुलिस के अनुसार, तस्करी पर रोक लगाने के लिए सिविल पुलिस और सशस्त्र सीमा बल की संयुक्त गश्त की जाती है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अवैध सामान के साथ पकड़े जाने वाले लोगों के खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। गोरखपुर की कार्रवाई के बाद जांच एजेंसियों का ध्यान मादक पदार्थों की आपूर्ति और परिवहन से जुड़े नेटवर्क पर भी है।

  • विवाद के बाद अधिवक्ता से मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल, पुलिस ने दो नामजद समेत सात अज्ञात पर केस दर्ज किया

    विवाद के बाद अधिवक्ता से मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल, पुलिस ने दो नामजद समेत सात अज्ञात पर केस दर्ज किया

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश के महोबा में एक अधिवक्ता के साथ कथित मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। करीब दो मिनट से अधिक समय के इस वीडियो में कुछ युवतियां और महिलाएं एक अधिवक्ता को घेरती और पकड़ती दिखाई दे रही हैं। वीडियो में उनके साथ जूते-चप्पलों से मारपीट किए जाने का दावा किया जा रहा है। हालांकि वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    मामले में अधिवक्ता की ओर से पुलिस को दी गई तहरीर के आधार पर दो नामजद युवतियों और सात अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपितों की पहचान और घटना से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, यह मामला किसी पुराने विवाद से जुड़ा बताया जा रहा है।

    कोतवाली प्रभारी निरीक्षक बीरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि अधिवक्ता की शिकायत के आधार पर कुल नौ लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। इनमें दो लोगों को नामजद किया गया है, जबकि सात अन्य की पहचान अभी की जानी है। पुलिस मामले की जांच के साथ आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए भी प्रयास कर रही है।

    पुलिस के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच पहले भी विवाद हुआ था। उस समय दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया था और मामला शांत हो गया था। आरोप है कि बाद में उसी पुराने विवाद को लेकर दोबारा कहासुनी हुई। इसके बाद स्थिति बिगड़ गई और अधिवक्ता के साथ कथित तौर पर मारपीट की घटना हुई।

    घटना से जुड़ा वीडियो सामने आने के बाद यह मामला चर्चा में आ गया। वीडियो में कई महिलाएं और युवतियां अधिवक्ता के आसपास दिखाई देती हैं। कुछ लोग उन्हें पकड़ते हुए नजर आते हैं और उनके साथ जूते-चप्पलों से मारपीट किए जाने का दृश्य भी दिखाई देता है। वीडियो की अवधि करीब दो मिनट 12 सेकेंड बताई गई है। पुलिस अब वीडियो में दिखाई देने वाले लोगों की पहचान और घटना की वास्तविक परिस्थितियों की जांच कर रही है।

    सोशल मीडिया पर किसी घटना का वीडियो तेजी से प्रसारित होने के बाद पुलिस के सामने उसकी सत्यता और घटनाक्रम की पुष्टि करना महत्वपूर्ण हो जाता है। इसी वजह से पुलिस वायरल वीडियो के साथ शिकायत में लगाए गए आरोपों और उपलब्ध अन्य साक्ष्यों की भी जांच कर रही है। जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    मामले में पुलिस ने अभी घटना के पीछे के पूरे विवाद और मारपीट की वजह को लेकर अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक स्तर पर पुराने विवाद के बाद दोबारा कहासुनी होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस दोनों पक्षों से संबंधित तथ्यों को जांच में शामिल कर रही है।

    वहीं, महोबा के अलावा जालौन में भी दो परिवारों के बीच मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। कोतवाली जालौन क्षेत्र के मोहल्ला पहलवान बड़ा में दो परिवारों के बीच पुरानी रंजिश को लेकर कथित तौर पर लाठी-डंडों और रॉड से मारपीट हुई। पीड़ित सुलखान यादव ने पुलिस को शिकायत देकर आरोप लगाया कि उसके साथ और बीच-बचाव करने पहुंचे उसके भतीजे के साथ भी मारपीट की गई।

    शिकायत के अनुसार घटना रात करीब 10 बजे हुई। आरोप है कि गाली-गलौज के बाद विवाद बढ़ा और दोनों पर हमला किया गया। पीड़ित ने गंभीर चोट लगने और जान से मारने की धमकी दिए जाने का भी आरोप लगाया है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

  • अकेलापन सेहत के लिए बन सकता है गंभीर खतरा, डॉक्टर ने मोटापा, शराब और शारीरिक निष्क्रियता से जुड़े जोखिमों पर चेताया

    अकेलापन सेहत के लिए बन सकता है गंभीर खतरा, डॉक्टर ने मोटापा, शराब और शारीरिक निष्क्रियता से जुड़े जोखिमों पर चेताया


    नई दिल्ली । 
    स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले जोखिमों की चर्चा में आमतौर पर धूम्रपान, शराब, मोटापा और शारीरिक निष्क्रियता को प्रमुख कारण माना जाता है। हालांकि, लंबे समय तक बना रहने वाला अकेलापन भी शरीर और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकता है। हेल्थ एजुकेटर और डॉक्टर एरिक बर्ग ने अकेलेपन को लेकर लोगों को सावधान किया है और इसके संभावित स्वास्थ्य प्रभावों पर ध्यान देने की बात कही है।

    अकेलापन केवल किसी व्यक्ति का कुछ समय के लिए अकेले रहना नहीं है। समस्या तब बढ़ सकती है जब व्यक्ति लंबे समय तक सामाजिक संपर्क से दूर रहे, उसके पास बातचीत करने वाले लोग कम हों या उसे भावनात्मक रूप से अलग-थलग महसूस हो। ऐसी स्थिति लगातार बनी रहने पर तनाव और मानसिक दबाव बढ़ सकता है, जिसका असर शरीर के अलग-अलग तंत्रों पर पड़ सकता है।

    डॉक्टर एरिक बर्ग के अनुसार, लंबे समय तक सामाजिक अलगाव स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकता है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में अकेलेपन की तुलना कई अन्य स्वास्थ्य जोखिमों से करते हुए इसे गंभीरता से लेने की जरूरत बताई। हालांकि, अकेलेपन को सीधे तौर पर प्रतिदिन 15 सिगरेट पीने के बराबर नुकसान पहुंचाने वाला बताना एक लोकप्रिय स्वास्थ्य दावा है, जिसे संदर्भ और वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर सावधानी से समझना जरूरी है।

    लगातार अकेलेपन और तनाव की स्थिति में शरीर का तनाव प्रतिक्रिया तंत्र सक्रिय रह सकता है। इससे तनाव से जुड़े हार्मोन और रक्तचाप प्रभावित हो सकते हैं। लंबे समय तक बढ़ा हुआ तनाव हृदय स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकता है और हृदय रोग तथा स्ट्रोक जैसे रोगों से जुड़े अन्य जोखिमों को बढ़ाने में भूमिका निभा सकता है।

    अकेलेपन का असर प्रतिरक्षा प्रणाली पर भी पड़ सकता है। लगातार मानसिक तनाव शरीर की सामान्य प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया और सूजन से जुड़ी प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकता है। इससे संक्रमण के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया और बीमारी से उबरने की प्रक्रिया पर असर पड़ने की संभावना रहती है।

    मानसिक स्वास्थ्य के स्तर पर सामाजिक संपर्क की कमी चिंता और अवसाद जैसी समस्याओं के जोखिम से जुड़ी हुई है। परिवार, दोस्तों और समाज के साथ स्वस्थ संवाद व्यक्ति को भावनात्मक समर्थन देता है। जब यह संपर्क लगातार कम हो जाता है तो तनाव से निपटने की क्षमता प्रभावित हो सकती है और नकारात्मक भावनाएं लंबे समय तक बनी रह सकती हैं।

    अकेलेपन का संबंध नींद की गुणवत्ता से भी देखा गया है। लगातार चिंता, असुरक्षा या तनाव के कारण कुछ लोगों को सोने में परेशानी हो सकती है। पर्याप्त और अच्छी नींद नहीं मिलने पर दिनभर थकान, चिड़चिड़ापन और एकाग्रता में कमी जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं।

    लंबे समय तक सामाजिक अलगाव का असर सोचने और समझने की क्षमता पर भी पड़ सकता है। सामाजिक गतिविधियों और बातचीत से दिमाग लगातार सक्रिय रहता है। उम्र बढ़ने के साथ सामाजिक अलगाव और संज्ञानात्मक गिरावट के बीच संबंध को लेकर भी शोध हुआ है। हालांकि, अकेलापन अकेले ही डिमेंशिया का कारण है, ऐसा निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा।

    विशेषज्ञों के मुताबिक, अकेलेपन को नजरअंदाज करने के बजाय नियमित सामाजिक संपर्क बनाए रखना उपयोगी हो सकता है। परिवार और दोस्तों से बातचीत, सामुदायिक गतिविधियों में भागीदारी, पसंदीदा गतिविधियों के लिए समय निकालना और जरूरत पड़ने पर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना मददगार कदम हो सकते हैं। लंबे समय तक अकेलापन महसूस करने वाले व्यक्ति को इसे केवल व्यक्तिगत कमजोरी मानने के बजाय स्वास्थ्य से जुड़ी स्थिति के रूप में गंभीरता से लेना चाहिए।

  • ईओएस-05 की सफलता के बाद इसरो ने गगनयान की तैयारी तेज की, इसी साल पहले मानवरहित मिशन के प्रक्षेपण की योजना

    ईओएस-05 की सफलता के बाद इसरो ने गगनयान की तैयारी तेज की, इसी साल पहले मानवरहित मिशन के प्रक्षेपण की योजना


    नई दिल्ली ।
    भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने ईओएस-05 उपग्रह के सफल प्रक्षेपण के बाद अपने अगले बड़े लक्ष्य की दिशा में तैयारियां तेज कर दी हैं। इसरो प्रमुख वी नारायणन ने कहा है कि इसी कैलेंडर वर्ष में देश के पहले मानवरहित गगनयान मिशन के प्रक्षेपण के लिए व्यवस्थित तरीके से काम किया जा रहा है। इस मिशन को भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है।

    ईओएस-05 को जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट तक पहुंचाने में मिली सफलता इसरो के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। जीएसएलवी-एफ17 रॉकेट ने प्रक्षेपण के करीब 18 मिनट बाद उपग्रह को सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित किया। यह कक्षा निर्धारित जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से लगभग 5,000 किलोमीटर नीचे है। यहां से उपग्रह अपने निर्धारित अंतिम कक्षीय स्थान तक पहुंचने की प्रक्रिया पूरी करेगा।

    इस मिशन में रॉकेट ने निर्धारित लक्ष्य से अधिक ऊंचाई हासिल की। उसे जीटीओ में 28,934 किलोमीटर के उच्चतम बिंदु तक पहुंचना था, लेकिन वह 31,026 किलोमीटर तक पहुंचा। इस तरह रॉकेट ने तय ऊंचाई से 2,092 किलोमीटर अधिक दूरी तय की।

    ईओएस-05 का वजन 2,367 किलोग्राम है और यह जीएसएलवी रॉकेट से प्रक्षेपित किया गया अब तक का सबसे भारी पेलोड बताया गया है। इस उपलब्धि से इसरो की भारी उपग्रहों को निर्धारित कक्षाओं में स्थापित करने की क्षमता को मजबूती मिली है।

    इसरो प्रमुख वी नारायणन ने बताया कि पहले मानवरहित गगनयान मिशन की तैयारी में संगठन के साथ उद्योग जगत और अन्य संस्थाएं भी काम कर रही हैं। उन्होंने इस वित्त वर्ष में नौवहन उपग्रह एनवीएस-03 सहित छह और प्रक्षेपणों का लक्ष्य भी बताया। उन्होंने ईओएस-05 को जासूसी उपग्रह बताए जाने की धारणा को खारिज किया।

    गगनयान की तैयारी ऐसे समय आगे बढ़ रही है जब इसरो को पिछले कुछ वर्षों में कुछ मिशनों में तकनीकी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। जीएसएलवी-एफ10 और ईओएस-03 मिशन अगस्त 2021 में क्रायोजेनिक चरण में तकनीकी समस्या के कारण सफल नहीं हो सका था। इसके बाद जनवरी 2026 में पीएसएलवी-सी62 और ईओएस-एन1 मिशन भी तीसरे चरण के अंत में नियंत्रण प्रणाली में आई खराबी के कारण निर्धारित उड़ान पथ से भटक गया था।

    इन घटनाओं के बाद इसरो ने जांच और तकनीकी समीक्षा के आधार पर आवश्यक बदलाव किए। ईओएस-05 का सफल प्रक्षेपण इसी सुधार प्रक्रिया के बाद हासिल हुई महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल है। इससे आगामी अभियानों के लिए संगठन का आत्मविश्वास भी मजबूत हुआ है।

    गगनयान मिशन के तहत भारत का उद्देश्य मानव अंतरिक्ष उड़ान की क्षमता विकसित करना है। उससे पहले मानवरहित मिशनों के माध्यम से रॉकेट, अंतरिक्ष यान, जीवन समर्थन प्रणाली और अन्य महत्वपूर्ण तकनीकों का परीक्षण किया जाना है। इसलिए पहला मानवरहित मिशन आगे के मानवयुक्त मिशन की तैयारी में अहम भूमिका निभाएगा।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ईओएस-05 के सफल प्रक्षेपण को भारत की अंतरिक्ष क्षमता के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। उन्होंने इस सफलता को नवाचार, तकनीकी दक्षता और देश के बढ़ते अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र से जोड़ा।

    ईओएस-05 मिशन की सफलता के बाद इसरो के सामने अब लगातार सफल प्रक्षेपण बनाए रखने और गगनयान की समयसीमा के अनुसार तैयारियां पूरी करने की चुनौती है। यदि मानवरहित गगनयान मिशन इस वर्ष सफलतापूर्वक पूरा होता है, तो यह भारत के मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम को अगले महत्वपूर्ण चरण की ओर ले जाएगा।

  • पीएम मोदी के जन्मदिन से भाजपा का सेवा संकल्प अभियान, एक महीने में 13 कार्यक्रमों के जरिए देशभर में जनसंपर्क की तैयारी

    पीएम मोदी के जन्मदिन से भाजपा का सेवा संकल्प अभियान, एक महीने में 13 कार्यक्रमों के जरिए देशभर में जनसंपर्क की तैयारी

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन 17 सितंबर से भारतीय जनता पार्टी देशभर में एक महीने का सेवा संकल्प अभियान शुरू करने जा रही है। यह अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलाने की योजना है। पार्टी के अनुसार, इसके जरिए सेवा, सुशासन, गरीब कल्याण, विकास और विकसित भारत से जुड़े संदेशों को जनता तक पहुंचाया जाएगा। अभियान को प्रधानमंत्री मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने से भी जोड़ा गया है।

    भाजपा सामान्य तौर पर प्रधानमंत्री के जन्मदिन के अवसर पर सेवा पखवाड़े का आयोजन करती रही है, लेकिन इस बार कार्यक्रम का विस्तार एक महीने तक किया गया है। नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में पहली बार शपथ ली थी। इस आधार पर अक्टूबर 2026 में उनके सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। पार्टी इस अवसर को भी व्यापक जनसंपर्क कार्यक्रमों के माध्यम से रेखांकित करने की तैयारी कर रही है।

    अभियान के तहत करीब 13 प्रमुख कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। इसकी शुरुआत 17 सितंबर को आशीर्वाद का दीया कार्यक्रम से होगी। इसके माध्यम से देशभर में विभिन्न स्थानों और घरों में दीप प्रज्वलन किया जाएगा। बच्चों के लिए चित्रकला और भाषण प्रतियोगिताओं का आयोजन भी प्रस्तावित है, जिनका विषय देश के भविष्य और सपनों से जुड़ा होगा।

    नमो सेवा गाथा के तहत नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से लोगों तक विभिन्न संदेश पहुंचाने की योजना है। वहीं कहानी बदलाव की कार्यक्रम में सरकारी योजनाओं से लाभ पाने वाले लोगों की सफलता की कहानियां सामने रखी जाएंगी। इसका उद्देश्य कल्याणकारी योजनाओं के असर को सीधे लाभार्थियों के अनुभवों के माध्यम से लोगों तक पहुंचाना है।

    अभियान में आंगन का उत्सव भी शामिल किया गया है। इसके तहत आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और लाभार्थी माताओं को सम्मानित करने के साथ पोषण तथा मातृ कल्याण से जुड़े विषयों पर संवाद की योजना है। भाजपा का लक्ष्य देशभर में करीब 14 लाख आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं तक पहुंच बनाने का है।

    प्रधानमंत्री मोदी की जन्मभूमि गुजरात के वडनगर और उनकी संसदीय कर्मभूमि वाराणसी को भी अभियान में विशेष स्थान दिया गया है। जल, जन और सेवा संकल्प यात्रा के जरिए दोनों स्थानों से जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। गुजरात में वडनगर से वाराणसी और फिर वापस वडनगर तक बाइक यात्राओं की भी योजना है। इन यात्राओं के दौरान जनसंवाद के साथ सेवा और सांस्कृतिक गतिविधियां होंगी।

    सेवा मेरा योगदान कार्यक्रम के तहत रक्तदान शिविर, स्वच्छता अभियान, पौधरोपण और डिजिटल साक्षरता जैसी गतिविधियां प्रस्तावित हैं। सेवा सेतु अभियान के जरिए ब्लॉक और विधानसभा स्तर पर शिविर लगाए जाएंगे, जहां लोगों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में सहायता दी जाएगी। संबंधित विभागों के अधिकारियों की मौजूदगी में पात्र लोगों के दस्तावेजों की प्रक्रिया पूरी कराने की योजना है।

    अभियान के दौरान 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी जयंती और 7 अक्टूबर को प्रधानमंत्री मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर विशेष कार्यक्रम होंगे। अंतिम चरण में जनसेवा महाकुंभ आयोजित करने की योजना है, जिसमें जनप्रतिनिधियों और पार्टी कार्यकर्ताओं की भागीदारी होगी।

    भाजपा इस अभियान को केवल सेवा गतिविधियों तक सीमित नहीं रखना चाहती। पार्टी सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने के साथ विपक्ष के राजनीतिक मुद्दों का जवाब देने के लिए भी इसका इस्तेमाल कर सकती है। इस तरह अभियान को संगठनात्मक जनसंपर्क, लाभार्थी संपर्क और राजनीतिक संवाद के संयुक्त कार्यक्रम के रूप में देखा जा रहा है।