Blog

  • बैंक की नौकरी छोड़ी तो गरीब बच्चों को बनाया मिशन, 12 से 500 तक पहुंचा कारवां, ग्वालियर के मैनेजर की कहानी

    बैंक की नौकरी छोड़ी तो गरीब बच्चों को बनाया मिशन, 12 से 500 तक पहुंचा कारवां, ग्वालियर के मैनेजर की कहानी


    ग्वालियर । रिटायरमेंट के बाद आमतौर पर लोग अपने परिवार और निजी जिंदगी के लिए समय निकालते हैं लेकिन ग्वालियर के रिटायर्ड बैंक मैनेजर एमएल अहिरवार ने अपनी जिंदगी का रास्ता ही बदल दिया। पत्नी के निधन के बाद जब उनके जीवन में अकेलापन और गहरा दुख आया तो उन्होंने खुद को उस दर्द में समेटने के बजाय जरूरतमंद बच्चों की जिंदगी संवारने का फैसला किया। आज करीब छह साल से वे झुग्गी बस्तियों और मजदूर परिवारों के बच्चों को पढ़ाने में जुटे हैं। उनकी यह पहल अब 400 से 500 बच्चों तक पहुंच चुकी है।

    अहिरवार के जीवन में यह बदलाव कोरोना की दूसरी लहर के दौरान आया। करीब 2 मई 2021 को उनकी पत्नी का निधन हो गया था। इस घटना ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया। जीवन में अचानक ऐसा खालीपन आया जिसे भरना आसान नहीं था। इसी दौर में उनकी मुलाकात शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त ओपी दीक्षित से हुई। दीक्षित पहले से ही झुग्गी बस्तियों के बच्चों को पढ़ाने का काम कर रहे थे। पत्नी के निधन के करीब चार से पांच महीने बाद अहिरवार भी उनके साथ बच्चों को पढ़ाने लगे। शुरुआत में उनके पास सिर्फ 12 से 13 बच्चे आते थे लेकिन धीरे-धीरे यह संख्या बढ़ती चली गई।

    अहिरवार का फोकस उन बच्चों पर है जिनके माता-पिता मजदूरी या दूसरे छोटे-मोटे कामों में व्यस्त रहते हैं। आर्थिक मजबूरियों के कारण कई परिवार बच्चों की पढ़ाई पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे पाते। ऐसे बच्चे स्कूल से दूर होने के साथ गलत संगत में पड़ने के खतरे का भी सामना करते हैं। अहिरवार का प्रयास है कि इन बच्चों को शिक्षा से जोड़े रखा जाए और उन्हें ऐसा माहौल दिया जाए जिसमें वे अपने भविष्य के बारे में सोच सकें।

    ग्वालियर में काम की तलाश में आने वाले प्रवासी मजदूरों के बच्चे भी उनकी कक्षा का हिस्सा हैं। टीकमगढ़ और छतरपुर जैसे इलाकों से परिवार रोजी-रोटी के लिए दूसरे शहरों में आते हैं। बार-बार जगह बदलने के कारण बच्चों की पढ़ाई टूट जाती है। ऐसे बच्चों को लगातार पढ़ाई से जोड़े रखना अहिरवार की पहल का अहम हिस्सा है।

    सिर्फ पढ़ाने तक ही उनकी जिम्मेदारी सीमित नहीं है। वे जरूरतमंद बच्चों को कॉपी किताब और स्टेशनरी जैसी पढ़ाई की सामग्री भी उपलब्ध कराते हैं। जिन बच्चों के सामने स्कूल की फीस भरने की समस्या आती है वहां वे अपनी क्षमता के अनुसार मदद करते हैं। समाजसेवी और कुछ संगठन भी समय-समय पर इस काम में सहयोग करते हैं। कई बच्चों का स्कूल में दाखिला कराने में भी उन्होंने मदद की है ताकि उनकी शिक्षा बीच में न छूटे।

    शुरुआत में परिवार को भी चिंता थी कि अहिरवार अपना इतना समय बच्चों के बीच क्यों दे रहे हैं लेकिन जब इस पहल का असर दिखाई देने लगा तो परिवार ने उनका साथ देना शुरू कर दिया। अब उनके बच्चे भी इस काम में उनका समर्थन करते हैं। अहिरवार के लिए किसी बच्चे का पढ़ाई जारी रखना और आगे बढ़ना ही सबसे बड़ी खुशी है।

    उनका मानना है कि जरूरतमंद की आर्थिक मदद करना निश्चित रूप से जरूरी है लेकिन शिक्षा का दान किसी व्यक्ति की पूरी जिंदगी बदल सकता है। इसी सोच के साथ रिटायर्ड बैंक मैनेजर ने अपने जीवन के खालीपन को बच्चों के भविष्य की रोशनी से भर दिया। 12 बच्चों से शुरू हुई उनकी छोटी सी पहल आज सैकड़ों बच्चों तक पहुंच चुकी है और यही उनके लिए पत्नी की याद को एक सार्थक दिशा देने का सबसे बड़ा जरिया बन गई है।

  • चंपत राय से हुई पहचान की चूक? राम मंदिर ट्रस्ट के नए महासचिव ने बताई गलती, अब व्यवस्था में होगा बड़ा बदलाव

    चंपत राय से हुई पहचान की चूक? राम मंदिर ट्रस्ट के नए महासचिव ने बताई गलती, अब व्यवस्था में होगा बड़ा बदलाव


    उत्तर प्रदेश। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में नई जिम्मेदारी संभालने के बाद महासचिव गोविंद देव गिरि महाराज ने मंदिर की व्यवस्था और भविष्य की प्राथमिकताओं को लेकर खुलकर बात की है। उन्होंने पूर्व महासचिव चंपत राय के कामकाज और व्यक्तित्व पर भी अपनी राय रखी। गोविंद देव गिरि ने कहा कि उनके अनुभव के आधार पर चंपत राय बेदाग और निष्कलंक व्यक्ति हैं। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि उनका भोलापन उनके लिए परेशानी का कारण बना और सब पर विश्वास करने की वजह से लोगों को पहचानने में उनसे चूक हुई। उनके मुताबिक ट्रस्ट की व्यवस्थाओं में कुछ कमियां रही हैं और इन्हीं कमियों को दूर करने की जरूरत है।

    चढ़ावे की कथित चोरी के मामले पर गोविंद देव गिरि ने साफ कहा कि यदि घटना हुई है तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और चोरी करने वालों को सजा मिलनी चाहिए। साथ ही उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को जिस तरह सामने रखा गया उस पर भी गंभीरता से विचार करने की बात कही। उन्होंने संकेत दिया कि इस मामले में किसी संभावित षड्यंत्र की आशंका को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनका कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की गुंजाइश खत्म करने के लिए व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाया जाएगा।

    महासचिव के रूप में अपनी प्राथमिकताओं को बताते हुए उन्होंने तीन प्रमुख बिंदुओं पर जोर दिया। पहला मंदिर को देव सेवा का ऐसा केंद्र बनाना है जिससे देश के दूसरे मंदिर भी प्रेरणा ले सकें। दूसरी प्राथमिकता मंदिर की पूरी व्यवस्था में पारदर्शिता लाना है। तीसरी चुनौती अयोध्या के लोगों और मंदिर के बीच संवाद को मजबूत करना है। उनका मानना है कि स्थानीय लोगों की भावनाओं और अपेक्षाओं को समझकर बेहतर संवाद व्यवस्था तैयार की जानी चाहिए।

    गोविंद देव गिरि इससे पहले ट्रस्ट में कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। महासचिव का पद संभालने के बाद उनकी भूमिका और समय दोनों बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि उनके लिए पद से ज्यादा महत्वपूर्ण रामलला की सेवा है। सालभर पहले से तय कार्यक्रमों के बीच अयोध्या के लिए समय निकालना चुनौती जरूर है लेकिन उन्होंने इसे अपनी जिम्मेदारी मानकर स्वीकार किया है।

    ट्रस्ट में पहली बार निर्मला यादव को महिला ट्रस्टी बनाए जाने पर भी उन्होंने सकारात्मक रुख जताया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को साथ लेकर चलना जरूरी है और निर्मला यादव का शिक्षा क्षेत्र में अनुभव ट्रस्ट के काम आ सकता है। उनकी संस्कृत और हिंदी की शैक्षणिक पृष्ठभूमि और शिक्षा के क्षेत्र में किए गए काम को भी उन्होंने उपयोगी बताया।

    मंदिर में आने वाले चढ़ावे की निगरानी और पारदर्शिता के सवाल पर उन्होंने बताया कि कई बैंकों के प्रतिनिधियों ने ट्रस्ट को सुझाव दिए हैं। विचार-विमर्श के बाद नई व्यवस्था तय की जाएगी। उनकी योजना है कि श्रद्धालुओं की संख्या और मंदिर में आने वाले चढ़ावे की जानकारी रोजाना वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाए। इसके लिए काम चल रहा है और आने वाले समय में व्यवस्थाओं को लगातार अपडेट किया जाएगा।

    ट्रस्ट में पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को CEO बनाए जाने को लेकर भी उन्होंने भूमिका स्पष्ट की। उनके मुताबिक महासचिव और CEO की जिम्मेदारियां अलग होंगी लेकिन दोनों का लक्ष्य एक ही रहेगा। नीति और निर्णय ट्रस्ट लेगा जबकि उसे जमीन पर लागू कराने की जिम्मेदारी CEO की होगी। ऐसे में दोनों पदों के बीच बेहतर तालमेल को जरूरी माना गया है।

    गोविंद देव गिरि ने संकेत दिया कि आने वाले समय में राम मंदिर ट्रस्ट की व्यवस्थाएं अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित दिखाई देंगी। चढ़ावे से लेकर श्रद्धालुओं की संख्या और खर्च से जुड़ी जानकारी को सार्वजनिक करने की दिशा में काम आगे बढ़ाया जाएगा। उनका जोर यही है कि राम मंदिर केवल आस्था का केंद्र ही नहीं बल्कि देशभर के मंदिरों के लिए व्यवस्था और पारदर्शिता का आदर्श भी बने।

  • गंगा उफनीं तो डूबे 84 घाट, आगरा में चारपाई बनी सहारा… यूपी में बारिश-बाढ़ ने बढ़ाई लोगों की मुश्किलें

    गंगा उफनीं तो डूबे 84 घाट, आगरा में चारपाई बनी सहारा… यूपी में बारिश-बाढ़ ने बढ़ाई लोगों की मुश्किलें


    उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश में मानसूनी बारिश का दौर लगातार लोगों की मुश्किलें बढ़ा रहा है। शनिवार सुबह राजधानी लखनऊ समेत नोएडा और गोरखपुर सहित कई शहरों में रुक-रुककर बारिश होती रही। कहीं हल्की बूंदाबांदी हुई तो कहीं आसमान में बादल छाए रहे। मौसम विभाग ने प्रदेश के 71 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर के कारण प्रदेश के कई हिस्सों में जनजीवन प्रभावित है। वाराणसी और प्रयागराज समेत 26 जिलों में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं और करीब 3.53 लाख लोग इससे प्रभावित बताए जा रहे हैं। प्रशासन की ओर से अब तक 17 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है जबकि करीब 5 हजार लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं।
    आगरा में बारिश के बाद जलभराव ने स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को मुश्किल बना दिया। शुक्रवार देर रात पानी में एक एंबुलेंस फंस गई। इसी दौरान प्रसव पीड़ा से जूझ रही गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने की जरूरत पड़ी तो स्थानीय लोगों ने मदद के लिए चारपाई का सहारा लिया। लोगों ने महिला को चारपाई पर लादकर करीब 500 मीटर तक पानी और जलभराव के बीच पहुंचाया जिसके बाद उसे एंबुलेंस तक ले जाया जा सका। यह तस्वीर बताती है कि कई इलाकों में बारिश के बाद सड़क और आवागमन की स्थिति कितनी चुनौतीपूर्ण हो गई है।

    उधर मेरठ और बाराबंकी में भी भारी बारिश के बीच मकान गिरने की घटनाएं सामने आईं। इन हादसों में दो बच्चों समेत तीन लोगों के घायल होने की जानकारी है। महोबा में लगातार बारिश के कारण कच्चे मकानों पर खतरा बढ़ गया है। कुड़ार गांव में एक कच्चा मकान देखते ही देखते ढह गया। बताया गया कि मकान कुछ ही सेकंड में जमींदोज हो गया और पास से गुजर रहा एक युवक बाल-बाल बच गया।

    वाराणसी में गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से हालात बेहद चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। शहर के सभी 84 घाट पानी में डूब गए हैं और घाटों के बीच संपर्क प्रभावित हुआ है। मणिकर्णिका घाट का शवदाह गृह भी जलमग्न होने के कारण अंतिम संस्कार के लिए लोगों को अलग व्यवस्था करनी पड़ रही है। कई जगह लोग कमर तक पानी के बीच से गुजरते नजर आए।

    ललितपुर में गोविंद सागर बांध से पानी छोड़े जाने के बाद शहजाद नदी का जलस्तर बढ़ गया। छोटे पुलों के ऊपर से पानी बहने लगा जिससे आवागमन प्रभावित हुआ। रामपुर में भी बाढ़ से घिरे भैया नगला गांव का जिला मुख्यालय से संपर्क टूट गया है। पुल टूटने के बाद ग्रामीणों के सामने रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी जोखिम उठाने की मजबूरी बनी हुई है। चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर अब घटने लगा है लेकिन पानी उतरने के बाद कीचड़ और कचरे ने नई चुनौती खड़ी कर दी है। प्रशासन सफाई अभियान में जुटा है।

    मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक अगले कुछ दिनों तक पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश का असर बना रह सकता है। 6 से 8 सितंबर के बीच कुछ इलाकों में भारी बारिश होने की संभावना है। इसके बाद बारिश कराने वाला सिस्टम कमजोर पड़ने का अनुमान है। हालांकि प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की बारिश और बौछारों का सिलसिला इसके बाद भी जारी रह सकता है। ऐसे में प्रशासन के सामने राहत और बचाव के साथ जलभराव वाले इलाकों में आवागमन और स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारु बनाए रखने की बड़ी चुनौती बनी हुई है।

  • सड़क-लाइट के फंड पर कमीशन की मांग? भास्कर के स्टिंग में कैश लेनदेन और विधायक निधि की डील का दावा

    सड़क-लाइट के फंड पर कमीशन की मांग? भास्कर के स्टिंग में कैश लेनदेन और विधायक निधि की डील का दावा


    उत्तर प्रदेश । उत्तर प्रदेश में विधायक निधि से विकास कार्य कराने की व्यवस्था को लेकर दैनिक भास्कर की इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक सड़क नाली स्ट्रीट लाइट और दूसरे विकास कार्यों के लिए विधायक निधि जारी कराने के बदले कमीशन मांगने के आरोप सामने आए हैं। दैनिक भास्कर ने दो विधायकों पर स्टिंग ऑपरेशन के जरिए कमीशन की डील करने और कैश लेने के बाद अनुशंसा-पत्र जारी करने का दावा किया है। इन विधायकों में एक भाजपा और एक समाजवादी पार्टी से जुड़े हैं। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्षों का जवाब सामने आना महत्वपूर्ण होगा।

    रिपोर्ट के मुताबिक भास्कर की टीम ने NGO मैनेजर बनकर पहले भाजपा विधायक जय मंगल कन्नौजिया से संपर्क किया। सोलर लाइट लगाने के लिए विधायक निधि से राशि स्वीकृत कराने की बात हुई। इसके बाद कई दौर की बातचीत के बाद कथित तौर पर 35 प्रतिशत कमीशन पर सहमति बनने का दावा किया गया। रिपोर्ट में बातचीत का हवाला देते हुए बताया गया कि 10.50 लाख रुपए के प्रस्ताव पर कमीशन की रकम को लेकर चर्चा हुई और बाद में कैश लेनदेन भी हुआ।

    इन्वेस्टिगेशन के अनुसार पहले 50 हजार रुपए दिए गए और इसके बाद बाकी रकम को लेकर बातचीत हुई। रिपोर्ट में दावा है कि बाद की मुलाकात में अतिरिक्त रकम भी दी गई। कुल मिलाकर 83 हजार 500 रुपए लिए जाने का दावा किया गया है। इसके अगले दिन विधायक की ओर से 10.50 लाख रुपए की सोलर लाइट के काम के लिए अनुशंसा-पत्र दिए जाने की बात रिपोर्ट में कही गई है। इस पूरे मामले ने विधायक निधि से जुड़े कामों में पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    इसके बाद भास्कर की टीम ने आजमगढ़ जिले की मेंहनगर सीट से सपा विधायक पूजा सरोज से जुड़े मामले की पड़ताल की। रिपोर्ट के मुताबिक सोलर लाइट और वाटर कूलर लगाने का प्रस्ताव लेकर विधायक से संपर्क किया गया। कई दौर की बातचीत के बाद कथित तौर पर कमीशन को लेकर चर्चा हुई। रिपोर्ट में विधायक के हवाले से 50 प्रतिशत कमीशन एडवांस लेने की मांग किए जाने का दावा किया गया है। प्रस्तावित कामों का कुल बजट करीब 31 लाख रुपए बताया गया और 35 प्रतिशत कमीशन के हिसाब से रकम का हिसाब लगाया गया।

    रिपोर्ट के अनुसार विधायक की ओर से पहले करीब पांच लाख रुपए देने की मांग की गई। बातचीत के दौरान एक लाख रुपए दिए जाने का भी दावा किया गया है लेकिन कथित तौर पर पूरी रकम एक साथ देने की बात कहते हुए वह पैसा वापस कर दिया गया। बाद में विधायक के प्रतिनिधि की ओर से चार अनुशंसा-पत्र भेजे जाने का दावा किया गया। रिपोर्ट में इन पत्रों में कुल 81 लाख रुपए के कामों की विधायक निधि से स्वीकृति का उल्लेख किया गया है। हालांकि भास्कर टीम का दावा है कि स्टिंग के बाद इन अनुशंसा-पत्रों की हार्ड कॉपी लेने के लिए वह वापस नहीं गई।

    इन दोनों मामलों में सिर्फ विधायकों पर ही नहीं बल्कि उनके करीबी लोगों पर भी कथित रूप से पैसे लेने के आरोप लगाए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक एक विधायक के प्रतिनिधि ने अलग-अलग मौकों पर रकम ली जबकि दूसरे मामले में विधायक के करीबी व्यक्ति पर भी पैसे लेने का आरोप है। इससे यह सवाल और गंभीर हो जाता है कि अगर विधायक निधि के कामों में इस तरह का कथित कमीशन तंत्र मौजूद है तो विकास कार्यों की गुणवत्ता और वास्तविक लागत पर इसका क्या असर पड़ सकता है।

    उत्तर प्रदेश में प्रत्येक विधायक को हर साल विधायक निधि के तौर पर पांच करोड़ रुपए उपलब्ध होने की बात रिपोर्ट में कही गई है। इस राशि का इस्तेमाल सड़क नाली पेयजल स्ट्रीट लाइट सामुदायिक भवन और अन्य स्थानीय विकास कार्यों में किया जा सकता है। ऐसे में इस फंड से जुड़ी किसी भी कथित अनियमितता का असर सीधे जनता के विकास कार्यों पर पड़ता है।

    कानूनी जानकारों के मुताबिक सरकारी काम के बदले रिश्वत या कमीशन लेना गंभीर अपराध की श्रेणी में आ सकता है और भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत कार्रवाई संभव है। अब इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि स्टिंग में सामने आए कथित लेनदेन की आधिकारिक जांच होती है या नहीं और संबंधित विधायकों पर क्या कार्रवाई की जाती है। दैनिक भास्कर ने इस इन्वेस्टिगेशन के अगले हिस्से में CDO कार्यालय में कथित कमीशन व्यवस्था से जुड़े और खुलासे करने की बात कही है। ऐसे में इस मामले की अगली कड़ी पर भी नजर रहेगी।

  • 3 साल से अधूरी घोषणाओं पर फूटा अतिथि शिक्षकों का गुस्सा, शिक्षक दिवस पर भोपाल में होगा बड़ा प्रदर्शन

    3 साल से अधूरी घोषणाओं पर फूटा अतिथि शिक्षकों का गुस्सा, शिक्षक दिवस पर भोपाल में होगा बड़ा प्रदर्शन


    भोपाल । शिक्षक दिवस के मौके पर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में अतिथि शिक्षक अपनी मांगों को लेकर बड़ा प्रदर्शन करने जा रहे हैं। प्रदेशभर के हजारों अतिथि शिक्षक शनिवार 5 सितंबर को शाहजहानी पार्क में जुटेंगे और सरकार से लंबे समय से की जा रही घोषणाओं को लागू करने की मांग करेंगे। आंदोलन का सबसे बड़ा मुद्दा अतिथि शिक्षकों को स्थायी रोजगार देने और उनके भविष्य को सुरक्षित करने का है। संगठन का कहना है कि कई सालों से स्कूलों में सेवाएं देने के बावजूद अतिथि शिक्षकों के सामने हर साल रोजगार का संकट बना रहता है और सरकार की ओर से किए गए वादे अब तक जमीन पर नहीं उतर पाए हैं।

    अतिथि शिक्षक समन्वय समिति के प्रदेश अध्यक्ष सुनील सिंह परिहार के मुताबिक 2 सितंबर 2023 को भोपाल के लाल परेड मैदान में अतिथि शिक्षक पंचायत आयोजित हुई थी। इस दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अतिथि शिक्षकों के हित में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की थीं। इनमें वार्षिक अनुबंध लागू करने बीच सत्र में अतिथि शिक्षकों को बेरोजगार नहीं करने गुरुजियों की तर्ज पर नीति बनाकर नियमित करने और सीधी भर्ती में बोनस अंक देकर स्थायी रोजगार देने जैसी बातें शामिल थीं। संगठन का दावा है कि इन घोषणाओं को तीन साल पूरे होने के बावजूद अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है।

    अतिथि शिक्षक संगठन का कहना है कि वे लंबे समय से स्कूलों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में अब केवल आश्वासन के बजाय सरकार से ठोस नीति की उम्मीद है। संगठन के मुताबिक प्रदेश में करीब 70 हजार अतिथि शिक्षकों को सरकार की घोषणाओं पर अमल होने का सीधा फायदा मिल सकता है। उनका सवाल है कि अगर सरकार ने शिक्षकों के हित में घोषणाएं की थीं तो उन्हें लागू करने में इतनी देरी क्यों हो रही है। अतिथि शिक्षक इसे अपने रोजगार और भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा बता रहे हैं।

    संगठन की ओर से यह भी कहा गया है कि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री मोहन यादव भी अलग-अलग मौकों पर अतिथि शिक्षकों को स्थायी करने के समर्थन में अपनी बात रख चुके हैं। ऐसे में संगठन सरकार से मांग कर रहा है कि वर्षों से काम कर रहे अतिथि शिक्षकों के लिए ऐसी नीति बनाई जाए जिससे उनका रोजगार सुरक्षित हो सके और उन्हें हर सत्र में अनिश्चितता का सामना न करना पड़े।

    इसी बीच स्कूल शिक्षा विभाग में सात हजार से ज्यादा पदों पर होने वाली नई नियुक्तियों को लेकर भी अतिथि शिक्षकों के बीच चिंता है। हालांकि संगठन के प्रदेश अध्यक्ष का दावा है कि विभाग ने नई नियुक्तियों और वर्तमान व्यवस्था के बीच ऐसा तालमेल बैठाया है जिससे जिलों में पहले से काम कर रहे अतिथि शिक्षकों के रोजगार पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। इसके बावजूद संगठन चाहता है कि सरकार स्थिति को स्पष्ट करे और लंबे समय से सेवाएं दे रहे अतिथि शिक्षकों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करे।

    आंदोलन को मजबूत बनाने के लिए संगठन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। पुनर्गठन के तहत स्वाति श्रीवास्तव को अतिथि शिक्षक समन्वय समिति के महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। संगठन का कहना है कि महिला अतिथि शिक्षकों की आवाज को भी आंदोलन में मजबूती से उठाया जाएगा।

    अब शिक्षक दिवस के दिन होने वाला यह प्रदर्शन सरकार के लिए भी अहम माना जा रहा है। अतिथि शिक्षक लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाते रहे हैं और इस बार तीन साल पुरानी घोषणाओं को केंद्र में रखकर आंदोलन किया जा रहा है। ऐसे में शाहजहानी पार्क में जुटने वाले अतिथि शिक्षकों की संख्या और सरकार की ओर से आने वाली प्रतिक्रिया पर सभी की नजर रहेगी। सबसे बड़ा सवाल यही है कि शिक्षक दिवस पर आंदोलन के बाद क्या अतिथि शिक्षकों को उनके भविष्य को लेकर कोई ठोस आश्वासन मिलता है या फिर एक बार फिर उन्हें इंतजार करना पड़ेगा।

  • बेल्जियम के प्रधानमंत्री बोले- PM मोदी ने पहले ही चेताया था… अब हम अच्छे और सच्चे साझेदार तलाश रहे

    बेल्जियम के प्रधानमंत्री बोले- PM मोदी ने पहले ही चेताया था… अब हम अच्छे और सच्चे साझेदार तलाश रहे


    नई दिल्ली।
    बेल्जियम (Belgium) के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर (Belgian Prime Minister Bart D Wever) ने कहा कि ‘कुछ देशों’ पर आर्थिक और सामरिक निर्भरता का यूरोपीय देशों (European Countries) का निर्णय उनके लिए नुकसानदायक साबित हुआ। उन्होंने कहा कि आपके प्रधानमंत्री (Prime Minister) ने बहुत पहले यूरोप को इसके बारे में आगाह किया था, लेकिन तब उनकी बात अनसुनी कर दी गई। वेवर ने कहा कि अब यूरोप उनकी बात को समझ रहा है। यह जागरूकता देरी से आई है, लेकिन अब हम अच्छे और सच्चे साझेदार तलाश रहे हैं।

    बेल्जियम के प्रधानमंत्री भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यूरोप ने लंबे समय तक सस्ते विदेशी सामान को अपने यहां बेरोकटोक आने दिया। कम कीमत पर आने वाले विदेशी सामान ने धीरे-धीरे यूरोप की कंपनियों के लिए मुश्किलें बढ़ाने के साथ इन्हें कमजोर कर दिया।


    चीन की ओर इशारा

    वेवर ने किसी देश का नाम नहीं लिया, लेकिन माना जा रहा है कि उनका इशारा चीन की ओर था। उन्होंने कहा कि यूरोप को किसी देश के सामान के लिए डंपिंग जोन नहीं बनने दिया जा सकता। उन्होंने साफ कहा कि यूरोप को अब कड़वी सच्चाई का अहसास हो रहा है। भारत ने यूरोप को इन जोखिमों के बारे में तब ही आगाह कर दिया था, जब यूरोप ने खुद इन्हें समझा भी नहीं था।


    टैरिफ का डर नहीं, सहयोग करने वाले साथी चाहिए

    वेवर ने अमेरिका का नाम लिए बिना कहा कि यूरोप को ऐसे साझेदार चाहिए, जो दबाव नहीं सम्मान से सहयोग कर सकें। उन्होंने कहा कि हमें ऐसे साथियों के बारे में सोचना होगा, जो एक दिन हम पर टैरिफ लगाएं, दूसरे दिन हटा दें और अगर हम कोई ऐसी बात कहें जो उन्हें पसंद न आए, तो दोबारा टैरिफ लगा दें।


    भारत को सूची से हटाना भारी पड़ेगा: वेवर

    वेवर ने कहा, ‘दुनिया में किसके साथ, दुनिया की किस बड़ी अर्थव्यवस्था के साथ हम ऐसे रिश्ते बना सकते हैं? तो, अगर इस सूची में भारत का नाम नहीं है, तो आप एक बहुत ही बुनियादी बात खो रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि यूरोपीय काउंसिल की बैठकों में अब सभी मुद्दों पर चर्चा हो रही है। हम ऐसे साथियों को ढूंढ रहे हैं, जो हमारी तरह ही हों और बहुपक्षवाद में विश्वास रखते हों। ‘भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौते के लागू होने से ठीक पूर्व यह महत्वपूर्ण संकेत है।’


    यूरोप के बाजारों में काबिज चीन

    यूरोप के बाजारों पर आज चीन बुरी तरह से काबिज है। वह करीब 560 अरब यूरो का निर्यात यूरोप करता है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक्स और मशीनरी आदि प्रमुख रूप से शामिल हैं। वहीं, यूरोप का चीन को निर्यात सिर्फ 200 अरब यूरो है। 1360 अरब यूरो के व्यापार घाटे का सामना यूरोप कर रहा है।

    जानकारी के मुताबिक यूरोप ने चीन के साथ व्यापारिक मामलों को लेकर अक्टूबर तक को डेडलाइन तय की है। यूरोपीय देश चीन से व्यापार में कुछ बुनियादी बदलावों पर जोर दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि अगर यूरोप में चीनी सामान की ‘डंपिंग’ नहीं रुकी, तो वह चीन पर टैरिफ लगा सकता है। इसके पीछे यूरोपीय संघ कथित तौर पर आपूर्ति के मामले में किसी एक देश (यानी चीन) पर से निर्भरता कम करना चाहता है। दूसरे सस्ते एवं निम्न गुणवत्ता के सामानों को यूरोप के बाजार से रोकना चाहता है।


    भारत के लिए बढ़ सकते हैं अवसर

    भारत के लिए यह अवसर हो सकता है। यूरोपीय संघ चीन से आगे बढ़कर आपूर्ति श्रृंखला में अन्य देशों की ओर रुख बदलने का प्रयास कर रहा है। दरअसल, यूरोपीय संघ के 27 देशों की मांग की पूर्ति भारत बखूबी कर सकता है। बता दें कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच इसी साल के शुरू में मुक्त व्यापार समझौता हुआ है। दोनों पक्षों को उम्मीद है कि साल के आखिर तक उसका क्रियान्वयन शुरू हो जाएगा।

    भारत के लिए, यूरोप के बाजार में अवसर बन सकते हैं। भारत कई और मशीनरी, कपड़ा, रसायन आदि यूरोप को निर्यात करता है लेकिन कई और क्षेत्रों में मौके हैं। यूरोप के साथ भारत का द्विपक्षीय कारोबार 136 अरब डॉलर है, जिसमें भारत का निर्यात 75 अरब डॉलर और आयात 61 अरब डॉलर के करीब है। विशेषज्ञ मानते हैं कि जिस प्रकार चीनी सामानों को लेकर सख्ती दिख रही है उसका लाभ भारतीय निर्यातकों को मिल सकता है।

  • Mumbai : गोरेगांव ईस्ट मेट्रो स्टेशन के नीचे पर्यटक बस में लगी आग, सभी यात्री सुरक्षित

    Mumbai : गोरेगांव ईस्ट मेट्रो स्टेशन के नीचे पर्यटक बस में लगी आग, सभी यात्री सुरक्षित


    मुंबई।
    मुंबई (Mumbai) में शुक्रवार शाम एक पर्यटक बस (Tourist bus) में अचानक आग (Fire) लग गई. हादसा गोरेगांव ईस्ट मेट्रो स्टेशन (Goregaon East Metro Station) के नीचे हुआ. आग लगते ही बस से धुआं निकलने लगा और कुछ ही देर में पूरा वाहन आग की लपटों में घिर गया। घटना के वक्त बस गुजरात की ओर जा रही थी. राहत की बात रही कि बस में सवार सभी पांच यात्री और ड्राइवर सुरक्षित हैं. हादसे में किसी के घायल होने या जान जाने की खबर नहीं है।

    जानकारी के मुताबिक, घटना शुक्रवार शाम करीब 6.15 बजे चेकनाका सिग्नल के पास हुई. यह जगह ओबेरॉय गार्डन सिटी मेट्रो स्टेशन के नीचे है. आग लगने वाली बस की पहचान महादेव ट्रैवलर के रूप में हुई है. इसका रजिस्ट्रेशन नंबर MJ 01 AN 1695 बताया गया है. बस में पांच यात्री सवार थे. ड्राइवर निजार कपाड़िया भी बस में मौजूद थे।


    किडनी इंफेक्शन के बाद अन्ना हजारे का हेल्थ अपडेट

    अचानक बस में आग भड़क उठी. देखते ही देखते आग ने पूरे वाहन को अपनी चपेट में ले लिया. मौके से सामने आए वीडियो में बस धू-धूकर जलती नजर आ रही है. आग से निकलता घना धुआं भी काफी दूर तक दिखाई दिया. घटना के कारण सड़क पर कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।


    फायर ब्रिगेड और पुलिस मौके पर पहुंची

    बस में आग की सूचना मिलते ही मुंबई फायर ब्रिगेड की टीम को मौके पर भेजा गया. पुलिस भी घटनास्थल पर पहुंची. इसके अलावा 108 एंबुलेंस सेवा और मेट्रो प्रशासन की टीमों को भी मौके पर बुलाया गया। फायर ब्रिगेड के कर्मचारियों ने तुरंत आग बुझाने का काम शुरू किया. काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया. इसके बाद सड़क से जली हुई बस को हटाया गया. प्रभावित हिस्से को साफ किया गया. इसके बाद वहां ट्रैफिक फिर से शुरू हो गया।

    शुरुआती जांच में बस में आग लगने की वजह तकनीकी खराबी बताई जा रही है. हालांकि अभी आग लगने का सही कारण साफ नहीं हुआ है. पुलिस और फायर विभाग मामले की जांच कर रहे हैं. अधिकारियों की ओर से बस की विस्तृत जांच की जाएगी. इसके बाद पता चलेगा कि आग किस वजह से लगी. फिलहाल इस घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है. पुलिस और दमकल विभाग की शुरुआती जांच पूरी होने के बाद मामले में और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

  • MP में सियासत से लेकर नदी तक ‘आपदा में अवसर’! नरोत्तम का शक्ति प्रदर्शन, नेता जी की पिटाई की चर्चा

    MP में सियासत से लेकर नदी तक ‘आपदा में अवसर’! नरोत्तम का शक्ति प्रदर्शन, नेता जी की पिटाई की चर्चा


    भोपाल । मध्य प्रदेश की सियासत में इन दिनों तस्वीरों और चर्चाओं का दौर फिर तेज होता दिखाई दे रहा है। दतिया में पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के निवास पर उमड़ी समर्थकों की भीड़ ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। जन्माष्टमी के मौके पर दिल्ली से लौटे नरोत्तम मिश्रा का समर्थकों ने जोरदार स्वागत किया। नरोत्तम मिश्रा ने भी कार्यकर्ताओं के बीच पहुंचकर उनका उत्साह बढ़ाया और अपने हाथों से मिठाई खिलाकर जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान कृष्ण जन्म से जुड़े भजनों और नारों से माहौल भक्तिमय नजर आया। हालांकि राजनीतिक नजरिए से देखें तो इस पूरी तस्वीर को उनके समर्थक शक्ति प्रदर्शन के तौर पर भी देख रहे हैं।

    दरअसल दतिया उपचुनाव में भाजपा की हार के बाद नरोत्तम मिश्रा की सक्रियता और राजनीतिक भविष्य को लेकर कई तरह की चर्चाएं सामने आई थीं। लेकिन पिछले कुछ समय में उनकी कई राजनीतिक मुलाकातों और सार्वजनिक मौजूदगी ने इन चर्चाओं को फिर हवा दे दी है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से मुलाकात हो या ओरछा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ उनकी मौजूदगी या फिर भोपाल में सत्ता और संगठन से जुड़े नेताओं के साथ मेल-मुलाकात इन तस्वीरों को उनके समर्थक अलग संकेत के तौर पर देख रहे हैं। अब दतिया में समर्थकों का जुटना और उनका उत्साह यह संदेश देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है कि दादा की राजनीतिक पकड़ अभी भी कमजोर नहीं हुई है।

    उधर छतरपुर से सामने आई एक तस्वीर प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है। देरी रोड पर उर्मिल नदी उफान पर है और तेज बहाव के कारण पानी पुल के ऊपर से गुजर रहा है। इसके बावजूद लोगों को नदी पार करने की मजबूरी बनी हुई है। इसी मजबूरी के बीच कुछ लोगों के लिए यह स्थिति कमाई का जरिया बन गई है। दावा है कि राहगीरों से 50-50 रुपए लेकर उन्हें उफनती नदी पार कराई जा रही है। जान जोखिम में डालकर लोग तेज बहाव के बीच रास्ता पार करने को मजबूर हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि ऐसी खतरनाक स्थिति में प्रशासन की ओर से पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम क्यों नजर नहीं आए। लोगों की मजबूरी और खतरे के बीच चल रहा यह कथित कारोबार व्यवस्था की गंभीर तस्वीर सामने रखता है।

    वहीं मध्य प्रदेश की राजनीति से जुड़ी एक और दिलचस्प चर्चा पूर्व सांसद लक्ष्मण सिंह को लेकर है। कांग्रेस से निष्कासित चल रहे लक्ष्मण सिंह इन दिनों राजनीति से इतर संगीत की ओर बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। जन्माष्टमी के मौके पर उन्होंने खुद वीडियो जारी कर बताया कि वे गाना सीख रहे हैं और इस दौरान भजन भी सुनाए। राहुल गांधी पर टिप्पणी के बाद कांग्रेस से निष्कासन और उसके बाद नई पार्टी बनाने के संकेतों के बीच उनकी राजनीतिक राह को लेकर काफी चर्चा हुई थी। लेकिन फिलहाल उनके सुर राजनीति से ज्यादा संगीत में साधे जा रहे हैं। अब देखना यह होगा कि छोटे राजा साहब के सुर आगे किस दिशा में जाते हैं।

    इसी बीच राजधानी भोपाल और आसपास के राजनीतिक गलियारों में एक नेता जी की कथित पिटाई की चर्चा भी गर्म है। सूत्रों के हवाले से चर्चा है कि नेता जी के साथ दो अलग-अलग मौकों पर मारपीट हुई। दावा किया जा रहा है कि पहली घटना एक बिल्डिंग में हुई जबकि दूसरी बार उन्हें रास्ते में रोककर पीटा गया। यहां तक चर्चा है कि इस कथित मारपीट में उनके कुछ दांत भी टूट गए। हालांकि नेता जी और उनके करीबियों ने ऐसी किसी घटना से इनकार किया है और मामला पुलिस थाने तक पहुंचने की भी जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में इस चर्चा की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। बावजूद इसके सियासी और स्थानीय गलियारों में यह मामला फिलहाल खूब चर्चा में है।

    कुल मिलाकर दतिया में नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों की भीड़ से लेकर छतरपुर की उफनती नदी और भोपाल के सियासी गलियारों में चल रही चर्चाओं तक मध्य प्रदेश में इन दिनों घटनाएं अलग-अलग रंग दिखा रही हैं। कहीं शक्ति प्रदर्शन के मायने निकाले जा रहे हैं तो कहीं व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं और कहीं राजनीति से दूर संगीत के सुर सुनाई दे रहे हैं। मध्य प्रदेश की सियासत में इन तस्वीरों और चर्चाओं का असर आने वाले दिनों में किस रूप में दिखाई देता है यह देखना दिलचस्प होगा।

  • जन्माष्टमी पर था द्वापर जैसा नजारा…. मध्यरात्रि मथुरा में जन्मे भगवान श्रीकृष्ण, देशभर में गूंज उठे जयकारे

    जन्माष्टमी पर था द्वापर जैसा नजारा…. मध्यरात्रि मथुरा में जन्मे भगवान श्रीकृष्ण, देशभर में गूंज उठे जयकारे


    मथुरा।
    इस भाद्रपद माह में कृष्ण पक्ष की अष्टमी (Krishna Paksha, Ashtami) तिथि की मध्यरात्रि नजारा बिल्कुल द्वापर (Dvapar) सरीखा ही था। दिन में खूब बदरा बरसे और रात को भी काली घटाएं छाईं थीं। हर पल जोर जोर से बरसने को आतुर। आसमान में बिजली भी खूब चमकी। जैसे ही घड़ी की सुइयों ने शुक्रवार को रात के 12 बजाए, संपूर्ण ब्रजमंडल नंद घर आनंद भए, जय कन्हैया लाल की के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। अलौकिक आभा, अपार जनसैलाब, ढोल-नगाड़ों की थाप और घंटे-घड़ियालों की गूंज के बीच भगवान श्रीकृष्ण (Lord Sri Krishna) का घर-घर और मंदिरों में जन्म हुआ। लाखों श्रद्धालु इसके साक्षी बने।

    मुख्य आयोजन श्रीकृष्ण जन्मस्थान (Shri Krishna Janmasthan) पर हुआ। श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर भक्तों का उल्लास देखते ही बन रहा था। घड़ी में जैसे ही 11 बजे तत्काल नवगृह स्थापना के साथ पूजन शुरू हो गया। 11.55 बजे तक कमल पुष्प एवं तुलसीदल से सहस्त्रार्चन हुआ। 11.59 बजते ही भागवत भवन स्थित युगल सरकार के पट बंद हो गए।

    इस एक मिनट के पल में श्रद्धालुओं को लगा मानो घंटों बीत रहे हों। ठीक 12 बजे लीलाधर के चलित श्रीविग्रह को भागवत भवन लाया गया। यहां रजत कमल पुष्प में विराजमान भगवान श्रीकृष्ण का अभिषेक किया गया। श्रीकृष्ण जन्मस्थान के ट्रस्टी अनुराग डालमिया, सचिव कपिल शर्मा और सदस्य गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी ने सोने-चांदी से निर्मित 100 किग्रा की कामधेनु गाय की मूर्ति में गंगाजल सहित पंचामृत भरकर लल्ला का अभिषेक किया।

    इस दौरान जन्मस्थान पर ढोल-नगाड़े और घंटे-घड़ियाल गूंजते रहे। झांझ-मजीरे, मृदंग और शंख की मंगलध्वनि के बीच कान्हा के बधाई गीत गुंजायमान हो उठे। दर्शन का दौर 1:30 बजे तक चलता रहा।

    श्रीकृष्ण के 5253वें जन्मोत्सव पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि स्थित मूल श्रीगर्भगृह (कारागार) से अभिषेक व पूजा-अर्चना की लाइव स्ट्रीमिंग कराई गई। गर्भगृह में श्रीकृष्ण बाल-गोपाल रूप में विराजते हैं। अब तक केवल भागवत भवन से ही लाइव प्रसारण होता रहा है, शुक्रवार मध्यरात्रि करोड़ों श्रद्धालुओं ने घर बैठे टीवी स्क्रीन पर सीधा प्रसारण देखा। इसके लिए श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान द्वारा अत्याधुनिक कैमरे लगाकर डिजिटल प्रसारण की व्यवस्था की गई।

  • MP: जबलपुर के गौरीघाट में इंजन फेल होने से नर्मदा नदी में डूबी होमगार्ड की मोटरबोट, सभी सुरक्षित

    MP: जबलपुर के गौरीघाट में इंजन फेल होने से नर्मदा नदी में डूबी होमगार्ड की मोटरबोट, सभी सुरक्षित


    जबलपुर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में भारी वर्षा (Heavy rainfall) से जबलपुर स्थित बरगी बांध के 13 जलद्वार खोले जाने से उफनती नर्मदा नदी (Surging Narmada River) के गौरीघाट में शुक्रवार शाम को होमगार्ड की पेट्रोलिंग मोटरबोट (Home Guard patrol motorboat) पलट गई। हादसे के समय मोटर बोट में क्षमता से अधिक बचाव दल के सदस्य सवार थे। नर्मदा में दल के सदस्य मोटरबोट से गश्त कर रहे थे, तभी तेज बहाव के कारण नाव अनियंत्रित होकर बहने लगी।

    कुछ होमगार्ड जवान तैरकर बाहर आए, जबकि बाकी को मौके पर मौजूद स्थानीय नाविकों और गोताखोरों ने अपनी नावों की मदद से सुरक्षित निकाला। पुलिस ने भी बचाव अभियान चलाकर जवानों को निकाला।

    सामने आया है कि मोटरबोट की क्षमता चार से पांच होती है, लेकिन उस पर चालक सहित 12 होमगार्ड जवान सवार थे। जो मोटरबोट पलटी, उसमें बैठने की व्यवस्था नहीं रहती है, फिर भी जवानों को उसमें बैठाकर तेज प्रवाह के बीच ले जाया गया।

    मझधार में इंजन खराब होने की बात सामने आई है। इससे गश्ती बोट की तकनीकी फिटनेस और जांच में लापरवाही माना जा रहा है। हालांकि चालक को छोड़कर बाकी सभी ने लाइफ जैकेट पहन रखी थी। बताया जा रहा है कि मोटरबोट श्रद्धालुओं की सुरक्षा और घाट पर निगरानी के लिए पेट्रोलिंग कर रही थी। इसी दौरान बोट नदी में डूब गई। चालक की लापरवाही की बात भी कही जा रही है।

    होमगार्ड कमांडेंट नीरज सिंह ने मामले की जांच कराने बात कही है। याद आया बरगी डैम हादसागौरीघाट में नाव पलटने की घटना ने जबलपुर के बरगी डैम में क्रूज हादसे की याद दिला दी।

    30 अप्रैल की शाम बरगी डैम के क्रूज में सवार 32 में नौ लोगों की मौत हो गई थी। लापता लोगों की तीन दिन तक तलाश चलने के बाद मृतकों की संख्या 13 हो गई थी। शेष को बचा लिया गया था। हादसे की जांच एकल सदस्यीय आयोग कर रहा है।