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  • पीएम मोदी के जन्मदिन से भाजपा का सेवा संकल्प अभियान, एक महीने में 13 कार्यक्रमों के जरिए देशभर में जनसंपर्क की तैयारी

    पीएम मोदी के जन्मदिन से भाजपा का सेवा संकल्प अभियान, एक महीने में 13 कार्यक्रमों के जरिए देशभर में जनसंपर्क की तैयारी

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन 17 सितंबर से भारतीय जनता पार्टी देशभर में एक महीने का सेवा संकल्प अभियान शुरू करने जा रही है। यह अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलाने की योजना है। पार्टी के अनुसार, इसके जरिए सेवा, सुशासन, गरीब कल्याण, विकास और विकसित भारत से जुड़े संदेशों को जनता तक पहुंचाया जाएगा। अभियान को प्रधानमंत्री मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने से भी जोड़ा गया है।

    भाजपा सामान्य तौर पर प्रधानमंत्री के जन्मदिन के अवसर पर सेवा पखवाड़े का आयोजन करती रही है, लेकिन इस बार कार्यक्रम का विस्तार एक महीने तक किया गया है। नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में पहली बार शपथ ली थी। इस आधार पर अक्टूबर 2026 में उनके सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। पार्टी इस अवसर को भी व्यापक जनसंपर्क कार्यक्रमों के माध्यम से रेखांकित करने की तैयारी कर रही है।

    अभियान के तहत करीब 13 प्रमुख कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। इसकी शुरुआत 17 सितंबर को आशीर्वाद का दीया कार्यक्रम से होगी। इसके माध्यम से देशभर में विभिन्न स्थानों और घरों में दीप प्रज्वलन किया जाएगा। बच्चों के लिए चित्रकला और भाषण प्रतियोगिताओं का आयोजन भी प्रस्तावित है, जिनका विषय देश के भविष्य और सपनों से जुड़ा होगा।

    नमो सेवा गाथा के तहत नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से लोगों तक विभिन्न संदेश पहुंचाने की योजना है। वहीं कहानी बदलाव की कार्यक्रम में सरकारी योजनाओं से लाभ पाने वाले लोगों की सफलता की कहानियां सामने रखी जाएंगी। इसका उद्देश्य कल्याणकारी योजनाओं के असर को सीधे लाभार्थियों के अनुभवों के माध्यम से लोगों तक पहुंचाना है।

    अभियान में आंगन का उत्सव भी शामिल किया गया है। इसके तहत आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और लाभार्थी माताओं को सम्मानित करने के साथ पोषण तथा मातृ कल्याण से जुड़े विषयों पर संवाद की योजना है। भाजपा का लक्ष्य देशभर में करीब 14 लाख आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं तक पहुंच बनाने का है।

    प्रधानमंत्री मोदी की जन्मभूमि गुजरात के वडनगर और उनकी संसदीय कर्मभूमि वाराणसी को भी अभियान में विशेष स्थान दिया गया है। जल, जन और सेवा संकल्प यात्रा के जरिए दोनों स्थानों से जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। गुजरात में वडनगर से वाराणसी और फिर वापस वडनगर तक बाइक यात्राओं की भी योजना है। इन यात्राओं के दौरान जनसंवाद के साथ सेवा और सांस्कृतिक गतिविधियां होंगी।

    सेवा मेरा योगदान कार्यक्रम के तहत रक्तदान शिविर, स्वच्छता अभियान, पौधरोपण और डिजिटल साक्षरता जैसी गतिविधियां प्रस्तावित हैं। सेवा सेतु अभियान के जरिए ब्लॉक और विधानसभा स्तर पर शिविर लगाए जाएंगे, जहां लोगों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में सहायता दी जाएगी। संबंधित विभागों के अधिकारियों की मौजूदगी में पात्र लोगों के दस्तावेजों की प्रक्रिया पूरी कराने की योजना है।

    अभियान के दौरान 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी जयंती और 7 अक्टूबर को प्रधानमंत्री मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर विशेष कार्यक्रम होंगे। अंतिम चरण में जनसेवा महाकुंभ आयोजित करने की योजना है, जिसमें जनप्रतिनिधियों और पार्टी कार्यकर्ताओं की भागीदारी होगी।

    भाजपा इस अभियान को केवल सेवा गतिविधियों तक सीमित नहीं रखना चाहती। पार्टी सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने के साथ विपक्ष के राजनीतिक मुद्दों का जवाब देने के लिए भी इसका इस्तेमाल कर सकती है। इस तरह अभियान को संगठनात्मक जनसंपर्क, लाभार्थी संपर्क और राजनीतिक संवाद के संयुक्त कार्यक्रम के रूप में देखा जा रहा है।

  • जंतर-मंतर पर छात्रों पर लाठीचार्ज को जस्टिस उज्जल भुइयां ने बताया चिंताजनक, पुलिस से निष्पक्षता और संयम बरतने की अपील

    जंतर-मंतर पर छात्रों पर लाठीचार्ज को जस्टिस उज्जल भुइयां ने बताया चिंताजनक, पुलिस से निष्पक्षता और संयम बरतने की अपील

    नई दिल्ली ।जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों और युवाओं पर पुलिस कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस उज्जल भुइयां ने चिंता जताई है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज को परेशान करने वाली घटना बताया और कहा कि अलग विचार रखने वाले छात्रों के खिलाफ दंडात्मक रवैया नहीं अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने पुलिस की भूमिका को लेकर निष्पक्षता, संयम और जनता के भरोसे को बेहद महत्वपूर्ण बताया।

    जस्टिस भुइयां ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में छात्रों और युवाओं को अपने विचार रखने तथा विरोध दर्ज कराने का अधिकार है। यदि कोई छात्र किसी मुद्दे पर अलग राय रखता है तो उसके साथ ऐसी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए, जिससे उसके अधिकार प्रभावित हों। उन्होंने प्रदर्शन कर रहे लोगों के साथ कथित कठोर व्यवहार को निराशाजनक बताया।

    उन्होंने पुलिस अधिकारियों की निष्पक्षता को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उनके मुताबिक पुलिस से यह अपेक्षा की जाती है कि वह कानून को समान रूप से लागू करे और किसी भी परिस्थिति में निष्पक्षता बनाए रखे। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पुलिस की इस भूमिका पर सवाल उठना गंभीर चिंता का विषय है।

    जस्टिस भुइयां ने कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है, लेकिन इसके लिए जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। पुलिस को परिस्थितियों को समझते हुए संयमित तरीके से कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पुलिस और आम नागरिकों के बीच विश्वास बना रहना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए जरूरी है।

    उन्होंने कहा कि आम लोगों के लिए वर्दी पहने पुलिसकर्मी सरकार की शक्ति और अधिकार का प्रत्यक्ष प्रतिनिधि होता है। जब किसी नागरिक को परेशानी होती है तो वह सहायता के लिए पुलिस के पास जाता है। ऐसे में पुलिस की विश्वसनीयता कमजोर होना समाज और कानून व्यवस्था दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

    जस्टिस भुइयां ने यह भी कहा कि यदि सरकार के अधिकारी ही कानून का उल्लंघन करने लगें तो इसका व्यापक असर पड़ता है। ऐसी स्थिति में लोगों के बीच कानून के प्रति सम्मान कम हो सकता है और अराजकता को बढ़ावा मिलने का खतरा रहता है। उन्होंने कहा कि किसी भी सभ्य लोकतांत्रिक देश में सरकारी अधिकारियों से कानून का पालन करने की अपेक्षा की जाती है।

    उन्होंने यह भी बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने मानवाधिकारों के उल्लंघन से जुड़े मामलों में पीड़ितों को मुआवजा दिए जाने की आवश्यकता को स्वीकार किया है। उनके मुताबिक, राज्य की संस्थाओं की जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि नागरिकों के अधिकारों की रक्षा हो सके।

    जस्टिस भुइयां ने ये बातें पूर्व सुरक्षा सचिव यशोवर्धन आजाद की पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम में कहीं। राजधानी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने भारतीय पुलिस सेवा के युवा अधिकारियों का उल्लेख करते हुए कहा कि जब ऐसे अधिकारी प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट करते दिखाई देते हैं तो यह निराशाजनक स्थिति होती है।

    छात्रों के विरोध के अधिकार को लेकर इससे पहले मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत भी टिप्पणी कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि छात्रों को किसी भी मुद्दे पर विरोध करने का अधिकार है। लॉ संस्थान के छात्रों के पंजीकरण पर रोक लगाने से जुड़े एक मामले में भी उन्होंने छात्रों के अधिकारों के संरक्षण पर जोर दिया था।

    जस्टिस भुइयां की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब सार्वजनिक प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की भूमिका, बल प्रयोग और प्रदर्शनकारियों के अधिकारों को लेकर बहस जारी है। उनकी टिप्पणियों में कानून व्यवस्था और नागरिक अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखने तथा पुलिस की निष्पक्षता पर विशेष जोर दिया गया।

  • जबरन धर्मांतरण के आरोपों के बीच बंगाल में प्रार्थना सभाओं को लेकर विवाद बढ़ा, सरकार ने कानून के अनुसार कार्रवाई का भरोसा दिया

    जबरन धर्मांतरण के आरोपों के बीच बंगाल में प्रार्थना सभाओं को लेकर विवाद बढ़ा, सरकार ने कानून के अनुसार कार्रवाई का भरोसा दिया

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल के कई जिलों में घरों के भीतर आयोजित होने वाली ईसाई प्रार्थना सभाओं को लेकर विवाद बढ़ गया है। प्रार्थना सभाओं पर कथित हमले, मारपीट और तोड़फोड़ की घटनाओं के बाद ईसाई समूहों ने कुछ इलाकों में ऐसी बैठकें और लोगों से नियमित मुलाकात का सिलसिला फिलहाल रोक दिया है। दूसरी ओर, कुछ संगठनों ने इन गतिविधियों के दौरान जबरन धर्मांतरण किए जाने के आरोप लगाए हैं। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि धार्मिक प्रार्थना निजी आस्था का विषय है, लेकिन जबरन धर्मांतरण की पुष्टि होने पर कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।

    हावड़ा जिले के उलूबेरिया में 23 अगस्त को एक किराए के मकान में रविवार की प्रार्थना सभा के दौरान विवाद की शुरुआत हुई। वहां करीब 60 पुरुष और महिलाएं मौजूद थे। पादरी मिथुन हाजरा के अनुसार, दोपहर करीब तीन बजे नारे लगाती हुई भीड़ मकान में पहुंची और वहां मौजूद लोगों पर जबरन धर्मांतरण कराने का आरोप लगाया। इसके बाद कथित तौर पर मारपीट और तोड़फोड़ हुई।

    हाजरा ने आरोप लगाया कि उनके साथ भी मारपीट की गई। प्रार्थना स्थल पर रखा साउंड सिस्टम, पोडियम, मेज, कुर्सियां और पंखे क्षतिग्रस्त कर दिए गए। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने पादरी और अन्य लोगों को वहां से सुरक्षित निकाला तथा उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया। इलाज के बाद शिकायत दर्ज कराई गई। हावड़ा ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक अमित वर्मा ने प्राथमिकी दर्ज होने और जांच जारी रहने की पुष्टि की है। इस मामले में उस समय तक किसी गिरफ्तारी की जानकारी नहीं थी।

    ईसाई संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि उलूबेरिया की घटना अकेली नहीं है। उनके अनुसार, 30 अगस्त को हावड़ा के जगतबल्लवपुर और उत्तर 24 परगना के हिंगलगंज में भी घरों में चल रही प्रार्थना सभाओं के दौरान विवाद की घटनाएं सामने आईं। 25 अगस्त को हावड़ा के घुसुड़ी में आयोजित प्रार्थना सभा में कथित मारपीट की शिकायत सामने आई, जबकि 26 अगस्त को पूर्व मेदिनीपुर के चेक माइलपोस्ट गांव में पादरी और उनकी पत्नी के साथ कथित मारपीट का आरोप लगाया गया।

    पूर्व बर्धमान जिले के सहानगर में 14 अगस्त को अंतिम संस्कार को लेकर भी विवाद हुआ। चर्च के प्रभारी पादरी सैमुअल हेम्ब्रम के अनुसार, कुछ लोगों ने दफन स्थल से संबंधित दस्तावेज मांगे और अंतिम संस्कार रोक दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि दफनाए जाने के बाद शव को कब्र से बाहर निकाल दिया गया और बाद में दूसरे कब्रिस्तान में अंतिम संस्कार करना पड़ा।

    पूर्व बर्धमान की पुलिस अधीक्षक पुष्पा ने बताया कि मृत महिला स्थानीय निवासी नहीं थी और स्थानीय लोगों ने दफन स्थल को लेकर आपत्ति जताई थी। उनका दावा था कि संबंधित जमीन निजी है और कब्रिस्तान नहीं है। पुलिस जमीन के रिकॉर्ड की जांच कर रही है। शोक मनाने आए लोगों के साथ मारपीट के आरोप की भी स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाई जा रही है।

    हिंदू संगठन सिंघा वाहिनी के अध्यक्ष देबदत्त माझी ने आरोप लगाया कि कुछ स्थानों पर पैसे का लालच देकर धर्मांतरण कराया जा रहा है। वहीं राज्य के आदिवासी विकास और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री क्षुदिराम टुडू ने कहा कि प्रार्थना करना व्यक्ति की धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि अगर किसी मामले में जबरन धर्मांतरण साबित होता है तो कानून के अनुसार कार्रवाई होगी।

    सीपीआई(एम) के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा की बात कही। टीएमसी प्रवक्ता प्रदीप्त मुखर्जी ने भाजपा पर डर की राजनीति करने का आरोप लगाया। वहीं भाजपा के राज्यसभा सांसद राहुल सिन्हा ने कहा कि उन्हें इन घटनाओं की जानकारी नहीं है और उन्होंने मामले पर टिप्पणी करने से इनकार किया।

  • सीजेआई सूर्यकांत ने ब्रिक्स देशों में कारोबारी विवाद निपटाने के लिए मध्यस्थता और सुलह का साझा मंच बनाने का प्रस्ताव दिया

    सीजेआई सूर्यकांत ने ब्रिक्स देशों में कारोबारी विवाद निपटाने के लिए मध्यस्थता और सुलह का साझा मंच बनाने का प्रस्ताव दिया

    नई दिल्ली ।ब्रिक्स देशों के बीच न्यायिक सहयोग को मजबूत करने और व्यापार तथा निवेश के लिए बेहतर वातावरण तैयार करने की दिशा में भारत ने महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने ब्रिक्स चीफ जस्टिस फोरम में वाणिज्यिक विवादों के समाधान के लिए मध्यस्थता और सुलह का साझा मंच बनाने की जरूरत बताई।

    शुक्रवार को आयोजित फोरम में ब्रिक्स सदस्य देशों के साथ सहयोगी देशों के मुख्य न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट के अध्यक्ष और वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी शामिल हुए। सम्मेलन के दौरान न्यायपालिका की भूमिका को केवल अदालती मामलों के निपटारे तक सीमित रखने के बजाय देशों के बीच सहयोग और आपसी संबंधों को मजबूत करने के व्यापक माध्यम के रूप में देखने पर जोर दिया गया।

    जस्टिस सूर्यकांत ने फोरम के दौरान विभिन्न देशों के न्यायिक प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी कीं। इन बैठकों में न्यायिक सहयोग से जुड़े समझौतों, व्यापारिक और कॉरपोरेट विवादों के समाधान तथा मध्यस्थता और सुलह-समझौते जैसे वैकल्पिक विवाद निपटारा तरीकों पर चर्चा हुई।

    वाणिज्यिक गतिविधियों के बढ़ते अंतरराष्ट्रीय स्वरूप को देखते हुए अलग-अलग देशों की न्यायिक व्यवस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सीमा पार कारोबार में विवाद उत्पन्न होने पर उनके शीघ्र और प्रभावी समाधान से कंपनियों तथा निवेशकों का भरोसा बढ़ सकता है। इसी संदर्भ में साझा मध्यस्थता और सुलह मंच का प्रस्ताव महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    फोरम में विदेशी निवेशकों के विश्वास को मजबूत करने के लिए कुशल वाणिज्यिक अदालतों की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। कारोबार से जुड़े विवादों का समयबद्ध निपटारा निवेश के लिए अनुकूल वातावरण बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसके साथ ही विभिन्न देशों में दिए गए न्यायिक फैसलों और आदेशों को आपसी स्तर पर मान्यता देने की संभावनाओं पर भी विचार किया गया।

    बैठकों में न्यायिक सहयोग को संस्थागत रूप देने के लिए समझौता ज्ञापनों की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। इसका उद्देश्य न्यायिक संस्थानों के बीच संवाद और अनुभव साझा करने की प्रक्रिया को मजबूत करना है। न्यायिक अधिकारियों के बीच नियमित संपर्क से अलग-अलग देशों की कानूनी व्यवस्थाओं और विवाद समाधान प्रक्रियाओं को समझने में मदद मिल सकती है।

    फोरम के दौरान प्रोफेशनल एक्सचेंज कार्यक्रमों को बढ़ावा देने का मुद्दा भी सामने आया। इसके लिए भोपाल स्थित नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी जैसे संस्थानों के इस्तेमाल की संभावनाओं पर चर्चा हुई। ऐसे कार्यक्रमों के जरिए विभिन्न देशों के न्यायिक अधिकारियों को प्रशिक्षण, अनुभव और कार्यप्रणाली साझा करने का अवसर मिल सकता है।

    ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार और निवेश लगातार सहयोग का प्रमुख क्षेत्र रहा है। ऐसे में कारोबारी विवादों के निपटारे के लिए प्रभावी न्यायिक तंत्र आर्थिक संबंधों को सुगम बनाने में मदद कर सकता है। मध्यस्थता और सुलह जैसे तरीकों से लंबे समय तक चलने वाली अदालती प्रक्रिया के विकल्प उपलब्ध हो सकते हैं।

    तीन दिवसीय सम्मेलन के पहले दिन जस्टिस सूर्यकांत ने रूस, चीन, मिस्र, इंडोनेशिया, संयुक्त अरब अमीरात, दक्षिण अफ्रीका, बेलारूस, कजाकिस्तान, ईरान और उज्बेकिस्तान के न्यायिक अधिकारियों से मुलाकात की। इन बैठकों में न्यायिक सहयोग के साथ व्यापार, कॉरपोरेट विवाद और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए अनुकूल वातावरण जैसे विषय प्रमुख रहे।

    फोरम के प्रस्तावों का व्यापक उद्देश्य ब्रिक्स देशों की न्यायिक व्यवस्थाओं के बीच सहयोग बढ़ाना और कारोबारी संबंधों को अधिक भरोसेमंद कानूनी आधार देना है। साझा विवाद समाधान व्यवस्था पर आगे की चर्चा से विभिन्न देशों के बीच व्यापारिक विवादों के निपटारे की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने की दिशा में रास्ता खुल सकता है।

  • जंतर-मंतर प्रदर्शन में संजय कुमार से मारपीट के आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज गिरफ्तार, एससी-एसटी और पॉक्सो कानून के तहत कार्रवाई

    जंतर-मंतर प्रदर्शन में संजय कुमार से मारपीट के आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज गिरफ्तार, एससी-एसटी और पॉक्सो कानून के तहत कार्रवाई

    नई दिल्ली । जंतर-मंतर पर 23 जून को कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान हुई झड़प के मामले में आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज को पुलिस ने बुलंदशहर से गिरफ्तार कर लिया है। आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान छात्रा निशु आजाद के पिता संजय कुमार के सिर में चोट लगी थी। इस घटना के बाद से ही स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जा रही थी।

    बताया गया है कि झड़प के दौरान स्वतंत्र भारद्वाज के हाथ में पहने कड़े से संजय कुमार के सिर पर चोट लगी। चोट लगने के बाद उन्हें उपचार के लिए राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले जाया गया था। घटना को लेकर पुलिस ने मामला दर्ज किया था और इसके बाद जांच आगे बढ़ाई जा रही थी।

    मामले में उस समय नया मोड़ आया जब स्वतंत्र भारद्वाज का एक पॉडकास्ट वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया। वीडियो में वह जंतर-मंतर पर हुई घटना और संजय कुमार को लगी चोट का जिक्र करता नजर आया। वीडियो के सार्वजनिक होने के बाद मामले में आरोपी की गिरफ्तारी की मांग फिर तेज हो गई।

    शुक्रवार को कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़े कार्यकर्ताओं ने स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग को लेकर संसद मार्ग थाने के बाहर प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन करीब दो घंटे तक चला। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस से आरोपी के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने की मांग की और मामले में देरी पर सवाल उठाए।

    पुलिस की ओर से प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों को कार्रवाई के लिए 72 घंटे का भरोसा दिया गया था। हालांकि इसके बाद स्वतंत्र भारद्वाज को बुलंदशहर से गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के बाद मामले की जांच में तेजी आने की उम्मीद है और पुलिस अब घटना से जुड़े तथ्यों तथा उपलब्ध साक्ष्यों को खंगालेगी।

    स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में कई कानूनी प्रावधान शामिल किए गए हैं। इनमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के साथ भारतीय न्याय संहिता के तहत पीछा करने और महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने से संबंधित धाराएं शामिल हैं। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की गई है।

    आरोपी के खिलाफ पॉक्सो कानून के तहत भी मामला दर्ज किया गया है। इन धाराओं के आधार पर पुलिस मामले के अलग-अलग पहलुओं की जांच कर रही है। सीजेपी के सह संयोजक सौरभ दास ने भी आरोपी के खिलाफ दर्ज मामलों और गिरफ्तारी की जानकारी दी है।

    हालांकि, इस पूरे मामले को लेकर पुलिस पहले मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर चुकी है। 3 सितंबर को पुलिस ने बताया था कि प्रदर्शन के दौरान किसी व्यक्ति की मेडिकल रिपोर्ट में सिर की हड्डी में फ्रैक्चर या किसी गंभीर चोट की पुष्टि नहीं हुई थी। पुलिस ने कार्रवाई में देरी के पीछे किसी राजनीतिक दबाव से भी इनकार किया था।

    अब गिरफ्तारी के बाद जांच का अगला चरण शुरू होगा। पुलिस घटना के दौरान मौजूद लोगों के बयान, उपलब्ध वीडियो और चिकित्सकीय दस्तावेजों समेत अन्य साक्ष्यों की जांच कर सकती है। इसके आधार पर आरोपों की स्थिति और मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया तय की जाएगी।

    घटना के बाद से प्रदर्शन से जुड़े पक्ष स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे। गिरफ्तारी के साथ अब यह मामला जांच और कानूनी प्रक्रिया के अगले चरण में पहुंच गया है।

  • आईआईटी बीएचयू से पढ़े अनिल चक्रवर्ती बने एडोबी के नए सीईओ, शांतनु नारायण संभालेंगे एग्जीक्यूटिव चेयरमैन की जिम्मेदारी

    आईआईटी बीएचयू से पढ़े अनिल चक्रवर्ती बने एडोबी के नए सीईओ, शांतनु नारायण संभालेंगे एग्जीक्यूटिव चेयरमैन की जिम्मेदारी


    नई दिल्ली ।
    सिलिकॉन वैली की दिग्गज टेक कंपनी एडोबी ने नेतृत्व में बड़ा बदलाव करते हुए अनिल चक्रवर्ती को अपना नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया है। वह करीब 18 वर्षों तक कंपनी का नेतृत्व करने वाले शांतनु नारायण की जगह लेंगे। नेतृत्व परिवर्तन ऐसे समय हुआ है जब एडोबी को जनरेटिव एआई के तेजी से बढ़ते प्रभाव और बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच अपने कारोबार को आगे बढ़ाने की चुनौती है।

    शांतनु नारायण अब एडोबी के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन की भूमिका निभाएंगे। उनके कार्यकाल में कंपनी ने अपने पारंपरिक सॉफ्टवेयर कारोबार को बड़े स्तर पर बदला और फोटोशॉप जैसे प्रमुख उत्पादों को सब्सक्रिप्शन आधारित क्रिएटिव क्लाउड मॉडल की दिशा में आगे बढ़ाया। यह बदलाव शुरुआती दौर में विवाद और विरोध के बावजूद कंपनी के लिए महत्वपूर्ण साबित हुआ।

    अनिल चक्रवर्ती के लिए एडोबी की कमान संभालना उनके लंबे तकनीकी और प्रबंधन अनुभव का अगला बड़ा पड़ाव है। उन्होंने आईआईटी बीएचयू वाराणसी से कंप्यूटर साइंस में बीटेक की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से एमएस और पीएचडी की डिग्री हासिल की।

    एडोबी में आने से पहले चक्रवर्ती इनफॉर्मेटिका के सीईओ रह चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने मैकिन्से, सिमेंटेक और वेरीसाइन जैसी कंपनियों में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। जनवरी 2020 में एडोबी से जुड़ने के बाद उन्होंने कंपनी के डिजिटल एक्सपीरियंस कारोबार की जिम्मेदारी संभाली और एआई आधारित पहलों को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई।

    नई जिम्मेदारी संभालने के बाद चक्रवर्ती के सामने सबसे बड़ी चुनौती जनरेटिव एआई से बदलता क्रिएटिव सॉफ्टवेयर बाजार होगा। मिडजर्नी और ओपनएआई जैसे एआई आधारित टूल्स ने डिजाइन, तस्वीर और वीडियो निर्माण को पहले की तुलना में आसान बनाया है। ऐसे में एडोबी को अपने प्रमुख उत्पादों को एआई के साथ और प्रभावी ढंग से जोड़ना होगा।

    कंपनी को कैनवा और फिग्मा जैसे ब्राउजर आधारित डिजाइन प्लेटफॉर्म से भी कड़ी प्रतिस्पर्धा मिल रही है। इन प्लेटफॉर्म्स ने खासकर नए डिजाइनरों और छोटे कारोबारों के बीच आसान और सहयोगात्मक डिजाइनिंग को लोकप्रिय बनाया है। ऐसे में एडोबी के लिए अपने मौजूदा पेशेवर ग्राहकों को बनाए रखने के साथ नए उपयोगकर्ताओं तक पहुंच बढ़ाना महत्वपूर्ण होगा।

    निवेशकों का भरोसा भी नई नेतृत्व टीम के लिए चुनौती रहेगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार कंपनी के शेयर 2025 में करीब 21 प्रतिशत गिरे थे और 2026 में भी अब तक लगभग 18 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। वित्तीय नेतृत्व में बदलाव के बीच कंपनी को बाजार की चिंताओं का जवाब भी देना होगा।

    चक्रवर्ती ने नई जिम्मेदारी को सम्मान बताते हुए कहा है कि कंपनी अब क्रिएटिविटी और प्रोडक्टिविटी के लिए एजेंटिक सॉफ्टवेयर के अगले दौर में प्रवेश कर रही है। उनके नेतृत्व में एडोबी की रणनीति इस बात पर काफी हद तक निर्भर करेगी कि कंपनी एआई को अपने मौजूदा उत्पादों की ताकत के साथ कितनी प्रभावी तरीके से जोड़ पाती है।

    इस बदलाव के साथ एडोबी में एक युग का अंत और नए दौर की शुरुआत हुई है। भारतीय मूल के चक्रवर्ती के सामने कंपनी की मजबूत विरासत को बनाए रखते हुए तेजी से बदलती एआई अर्थव्यवस्था में विकास की नई दिशा तय करने की जिम्मेदारी होगी।

  • हनुमान अंश की सफलता के बीच निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने बॉलीवुड से समर्थन न मिलने पर खुलकर नाराजगी जताई

    हनुमान अंश की सफलता के बीच निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने बॉलीवुड से समर्थन न मिलने पर खुलकर नाराजगी जताई


    नई दिल्ली । हनुमान अंश इन दिनों दर्शकों के बीच चर्चा में बनी हुई है। फिल्म को सिनेमाघरों में दर्शकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है और बॉक्स ऑफिस पर भी इसके प्रदर्शन में लगातार सुधार देखने को मिला है। इसी बीच फिल्म के निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने रिलीज से पहले सामने आई चुनौतियों और बॉलीवुड से मिले समर्थन को लेकर अपनी बात रखी है।

    विशाल चतुर्वेदी के अनुसार फिल्म को रिलीज के शुरुआती दौर में पर्याप्त स्क्रीन और शो नहीं मिल पाए थे। उन्होंने बताया कि बड़ी फिल्मों को प्राथमिकता दिए जाने के कारण हनुमान अंश के शो की संख्या में काफी कटौती हुई थी। उनके मुताबिक फिल्म के शो करीब 250 से घटकर केवल 25 रह गए थे।

    निर्देशक ने कहा कि फिल्म रिलीज से पहले उन्होंने इंडस्ट्री के कुछ लोगों से मदद की उम्मीद की थी, लेकिन उन्हें वह समर्थन नहीं मिला। हालांकि फिल्म के चलने के बाद कई लोगों ने उन्हें फोन करके बधाई दी। उन्होंने ऐसे लोगों के नाम सार्वजनिक करने से इनकार किया, जिनसे उन्होंने पहले मदद मांगी थी।

    विशाल ने इस दौरान फिल्म इंडस्ट्री की कार्यशैली पर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना था कि कई बार लोग किसी फिल्म को लेकर बिना पूरी जानकारी के अपनी राय बना लेते हैं और फिल्म के सफल होने की संभावना पर सवाल उठाते हैं। उनके मुताबिक कुछ लोग फिल्म निर्माण को लेकर वास्तविक जुनून के साथ काम करते हैं, जबकि कुछ लोग इसे केवल एक विकल्प या प्रयोग के तौर पर देखते हैं।

    निर्देशक ने हालांकि मधुर भंडारकर का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि मधुर भंडारकर ने फिल्म की रिलीज से पहले उनसे किसी तरह का समर्थन मांगे जाने के बावजूद फिल्म देखने के बाद उनकी तारीफ की। उनके अनुसार मधुर भंडारकर उन लोगों में शामिल थे, जिन्होंने फिल्म देखने के बाद उन्हें शुभकामनाएं दीं।

    मधुर भंडारकर ने फिल्म देखने के बाद इसके निर्देशन और कलाकारों के अभिनय की सराहना की थी। उन्होंने फिल्म को सिनेमाई अनुभव बताया और विशाल चतुर्वेदी के निर्देशन की तारीफ की। फिल्म में शोभिनव सत्य ने नीम करौली बाबा की भूमिका निभाई है, जिसे लेकर भी दर्शकों की प्रतिक्रिया सामने आई है।

    फिल्म को अभिनेत्री कंगना रनौत की ओर से भी समर्थन मिला है। उन्होंने दर्शकों से सिनेमाघरों में जाकर फिल्म देखने की अपील की थी और इसे आध्यात्मिक अनुभव से जोड़ते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी थी।

    हनुमान अंश की कहानी नीम करौली बाबा के जीवन से प्रेरित है। फिल्म को विशाल चतुर्वेदी ने लिखा और निर्देशित किया है। रिलीज के शुरुआती दिन फिल्म की कमाई करीब 10 लाख रुपये रही थी, लेकिन दर्शकों के बीच चर्चा बढ़ने के साथ इसके कारोबार में तेजी आई।

    उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार फिल्म ने अब तक करीब 72.88 करोड़ रुपये का कारोबार किया है। शुरुआती सीमित शो के बावजूद फिल्म का प्रदर्शन बेहतर होने को इसके लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। निर्देशक की ताजा टिप्पणी ऐसे समय आई है जब फिल्म को दर्शकों से मिल रही प्रतिक्रिया के कारण इसकी चर्चा लगातार बढ़ रही है।

    फिल्म की सफलता के बीच विशाल चतुर्वेदी की टिप्पणियों ने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में नए और अलग विषयों पर काम करने वाले फिल्मकारों को मिलने वाले समर्थन को लेकर एक नई चर्चा जरूर शुरू कर दी है।

  • मनोज बाजपेयी ने महाराष्ट्र FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे की ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा की तारीफ कर समाज पर सवाल उठाए

    मनोज बाजपेयी ने महाराष्ट्र FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे की ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा की तारीफ कर समाज पर सवाल उठाए

    नई दिल्ली । मनोज बाजपेयी ने तुकाराम मुंढे के काम की तारीफ करते हुए कहा कि आज के दौर में पूरी ईमानदारी और लगन से अपनी जिम्मेदारी निभाने वाला व्यक्ति भी लोगों के लिए असाधारण बन जाता है। उन्होंने कहा कि किसी अधिकारी का अपने कर्तव्य को निष्ठा से निभाना अब लोगों को इतना प्रभावित करता है कि वह व्यक्ति चर्चा में आकर सेलिब्रिटी जैसा बन जाता है।

    महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन के प्रमुख तुकाराम मुंढे इन दिनों अपने काम करने के तरीके और सख्त रवैये को लेकर चर्चा में हैं। खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता से जुड़े मामलों में उनकी सक्रियता की वजह से उन्हें लेकर लोगों के बीच काफी चर्चा देखने को मिल रही है। उनके काम की सराहना करने वालों में अब अभिनेता मनोज बाजपेयी का नाम भी जुड़ गया है।

    मनोज बाजपेयी ने कहा कि समाज में ईमानदारी और निष्ठा से काम करने वाले लोगों को देखकर लोगों का हैरान होना अपने आप में सोचने वाली बात है। उनके मुताबिक जब किसी अधिकारी को एक जिम्मेदारी सौंपी जाती है और वह व्यक्ति बिना किसी समझौते के अपना काम करता है, तो आज के समय में उसका इस तरह चर्चा में आना समाज की बदलती सोच को भी दिखाता है।

    अभिनेता ने उदाहरण देते हुए कहा कि पुलिस अधिकारी या तुकाराम मुंढे जैसे अधिकारी जब अपनी जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी से निभाते हैं, तो लोग उन्हें अलग नजर से देखने लगते हैं। उनका मानना है कि कर्तव्य के प्रति निष्ठा सामान्य व्यवस्था का हिस्सा होनी चाहिए, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में यही बात लोगों को असाधारण लगने लगी है।

    तुकाराम मुंढे को लेकर सोशल मीडिया और आम लोगों के बीच भी लगातार चर्चा रही है। उनके सख्त प्रशासनिक रवैये और काम के प्रति गंभीरता को लेकर उन्हें रियल लाइफ हीरो तक कहा जा रहा है। मनोज बाजपेयी की टिप्पणी इसी चर्चा के बीच सामने आई है और इससे अधिकारी की कार्यशैली को लेकर जारी सार्वजनिक बहस को और बल मिला है।

    वहीं मनोज बाजपेयी इन दिनों अपनी आगामी फिल्म लास्ट मैन इन टावर को लेकर भी चर्चा में हैं। फिल्म का निर्देशन बेन रेखी ने किया है और इसमें मनोज बाजपेयी के साथ दिव्या दत्ता और बोमन ईरानी जैसे कलाकार नजर आएंगे। यह फिल्म लेखक अरविंद अडिगा के इसी नाम के उपन्यास पर आधारित है।

    फिल्म में मनोज बाजपेयी एक सेवानिवृत्त स्कूल शिक्षक का किरदार निभा रहे हैं, जिसे मास्टरजी के नाम से जाना जाता है। कहानी एक ऐसी इमारत के निवासियों के इर्द-गिर्द घूमती है, जहां एक बड़े बदलाव को लेकर लोगों के बीच मतभेद पैदा हो जाते हैं। मनोज बाजपेयी का किरदार अपनी कम्युनिटी की इच्छा के विपरीत फैसला लेता है, जिसके बाद इमारत में रहने वाले लोगों के बीच तनाव बढ़ता है।

    लास्ट मैन इन टावर 11 सितंबर को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। फिल्म को लेकर मनोज बाजपेयी के प्रशंसकों के बीच भी उत्सुकता बनी हुई है। अभिनेता इससे पहले कई अलग-अलग तरह के किरदारों में नजर आ चुके हैं और अपनी अभिनय क्षमता के लिए लंबे समय से दर्शकों के बीच पहचान रखते हैं।

    तुकाराम मुंढे की कार्यशैली पर मनोज बाजपेयी की टिप्पणी ने एक बार फिर इस सवाल को चर्चा में ला दिया है कि क्या आज के समय में ईमानदारी और जिम्मेदारी से काम करना ही किसी अधिकारी को आम लोगों की नजर में खास बना देता है। उनके बयान का केंद्र यही विचार रहा कि अपने कर्तव्य को पूरी निष्ठा से निभाना किसी भी जिम्मेदार अधिकारी की सबसे बड़ी पहचान होनी चाहिए।

  • होटल खाना और सफर की टेंशन खत्म, रेलवे का खास भारत गौरव ट्रेन टूर पैकेज, 12 रातें 13 दिन में घूमिए दक्षिण भारत

    होटल खाना और सफर की टेंशन खत्म, रेलवे का खास भारत गौरव ट्रेन टूर पैकेज, 12 रातें 13 दिन में घूमिए दक्षिण भारत


    नई दिल्ली । दक्षिण भारत की खूबसूरत जगहों और प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों की यात्रा करने का सपना देखने वाले यात्रियों के लिए भारतीय रेलवे खास टूर पैकेज लेकर आया है। भारत गौरव ट्रेन के जरिए यात्रियों को एक ही यात्रा में दक्षिण भारत के कई प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों की सैर कराई जाएगी। खास बात यह है कि इस यात्रा के दौरान यात्रियों को अलग अलग जगहों पर ट्रेन टिकट होटल और स्थानीय परिवहन की व्यवस्था करने की परेशानी नहीं उठानी होगी। रेलवे की ओर से तैयार किए गए इस पैकेज में यात्रा के साथ रहने खाने और साइटसीइंग जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं।

    यह विशेष भारत गौरव ट्रेन उत्तर भारत से दक्षिण भारत की यात्रा के लिए संचालित की जाएगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार ट्रेन 14 नवंबर को अपनी यात्रा शुरू करेगी और 26 नवंबर को वापस जम्मू पहुंचेगी। यानी यात्रियों को करीब 12 रात और 13 दिन की लंबी यात्रा का अनुभव मिलेगा। इस दौरान ट्रेन दक्षिण भारत के पांच प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों को कवर करेगी। यह पैकेज खास तौर पर उन यात्रियों के लिए सुविधाजनक हो सकता है जो एक साथ कई प्रसिद्ध मंदिरों और पर्यटन स्थलों की यात्रा करना चाहते हैं।

    इस यात्रा में रामेश्वरम सबसे प्रमुख पड़ावों में शामिल है। यहां यात्री प्रसिद्ध श्री रामनाथ स्वामी मंदिर के दर्शन कर सकेंगे। इसके बाद मदुरई में ऐतिहासिक और प्रसिद्ध मीनाक्षी मंदिर की यात्रा कराई जाएगी। कन्याकुमारी में यात्रियों को विभिन्न प्रमुख पर्यटन स्थलों को देखने का अवसर मिलेगा। यात्रा का अगला महत्वपूर्ण पड़ाव तिरुपति होगा जहां श्रद्धालु भगवान वेंकटेश्वर स्वामी के दर्शन कर सकेंगे। इसके अलावा मार्कापुर में मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के दर्शन भी इस यात्रा का हिस्सा होंगे।

    रेलवे ने यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस पैकेज में अलग अलग श्रेणियां रखी हैं। यात्री अपनी सुविधा और बजट के अनुसार सेकंड एसी थर्ड एसी और इकोनॉमिक कैटेगरी में बुकिंग कर सकते हैं। सेकंड एसी को कंफर्ट कैटेगरी में रखा गया है जिसका किराया 56830 रुपये बताया गया है। थर्ड एसी स्टैंडर्ड कैटेगरी का किराया 42605 रुपये है जबकि इकोनॉमिक कैटेगरी के लिए यात्रियों को 26895 रुपये खर्च करने होंगे।

    इस टूर पैकेज की खासियत सिर्फ ट्रेन यात्रा नहीं है। बुकिंग कराने वाले यात्रियों को कन्फर्म ट्रेन टिकट के साथ यात्रा के दौरान नाश्ता और दो वक्त का भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अलावा होटल में ठहरने और प्रमुख स्थलों की साइटसीइंग की सुविधा भी पैकेज में शामिल है। इससे यात्रियों को हर शहर में अलग से होटल और वाहन तलाशने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

    दरअसल कई धार्मिक स्थलों की यात्रा करने में सबसे बड़ी परेशानी अलग अलग ट्रेनों की बुकिंग और कनेक्टिंग यात्रा होती है। इसके बाद होटल और स्थानीय परिवहन की व्यवस्था भी यात्रियों के लिए चुनौती बन जाती है। भारत गौरव ट्रेन का यह पैकेज इसी परेशानी को कम करने की कोशिश है। एक तय कार्यक्रम के तहत यात्री कई प्रमुख स्थलों की यात्रा कर सकेंगे और सफर से जुड़ी कई जरूरी व्यवस्थाएं पहले से पैकेज में शामिल रहेंगी। इच्छुक यात्रियों के लिए यह दक्षिण भारत की धार्मिक और पर्यटन यात्रा को आसान बनाने वाला विकल्प साबित हो सकता है।

  • किशोरों में चिड़चिड़ापन और नींद की समस्या को न करें नजरअंदाज, जानें स्ट्रेस और एंग्जाइटी के प्रमुख संकेत

    किशोरों में चिड़चिड़ापन और नींद की समस्या को न करें नजरअंदाज, जानें स्ट्रेस और एंग्जाइटी के प्रमुख संकेत


    नई दिल्ली । किशोरावस्था में बच्चों के व्यवहार में बदलाव को कई बार सामान्य मूड स्विंग मान लिया जाता है, लेकिन लगातार चिड़चिड़ापन, गुस्सा, बेचैनी, नींद में बदलाव और पढ़ाई से दूरी तनाव या एंग्जाइटी के संकेत हो सकते हैं। बच्चों और किशोरों में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां हमेशा सीधे शब्दों में सामने नहीं आतीं। कई बच्चे अपनी भावनाओं और परेशानियों को ठीक से व्यक्त नहीं कर पाते, इसलिए माता-पिता के लिए उनके व्यवहार और रोजमर्रा की गतिविधियों में होने वाले बदलावों पर ध्यान देना जरूरी है।

    किशोरावस्था में पढ़ाई और परीक्षा का दबाव, भविष्य को लेकर चिंता, दोस्तों के बीच स्वीकार्यता की चिंता, पारिवारिक तनाव और बुलिंग जैसी परिस्थितियां मानसिक दबाव बढ़ा सकती हैं। इस उम्र में मूड में बदलाव या कभी-कभी चिड़चिड़ापन होना सामान्य हो सकता है, लेकिन जब ये समस्याएं लगातार बनी रहें और बच्चे की पढ़ाई, नींद, सामाजिक जीवन या दैनिक गतिविधियों को प्रभावित करने लगें, तब इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

    विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों और किशोरों में तनाव और चिंता होना अपने आप में असामान्य नहीं है। चिंता तब चिंता का विषय बनती है, जब वह लंबे समय तक बनी रहे या बच्चे की सामान्य जिंदगी में बाधा डालने लगे। किशोर में लगातार बेचैनी, किसी बात को लेकर अत्यधिक चिंता, बार-बार आश्वासन मांगना या ऐसी परिस्थितियों से बचना जिनमें वह पहले सामान्य रूप से शामिल होता था, एंग्जाइटी से जुड़े संकेत हो सकते हैं।

    माता-पिता को बच्चे के व्यवहार में अचानक आए बदलावों पर विशेष नजर रखनी चाहिए। अगर बच्चा पहले की तुलना में छोटी-छोटी बातों पर अधिक गुस्सा करने या झल्लाने लगा है, तो इसके पीछे केवल अनुशासन या जिद को कारण मानना उचित नहीं है। लगातार चिड़चिड़ापन कई बार बच्चे के भीतर चल रहे तनाव या भावनात्मक परेशानी का संकेत हो सकता है।

    दोस्तों और परिवार से दूरी बनाना भी एक महत्वपूर्ण बदलाव हो सकता है। यदि बच्चा सामाजिक गतिविधियों से बचने लगे, पहले पसंद आने वाली चीजों में रुचि कम हो जाए या वह ज्यादातर समय अकेले रहना पसंद करने लगे, तो माता-पिता को उससे शांत तरीके से बातचीत करने की कोशिश करनी चाहिए।

    नींद में बदलाव भी मानसिक तनाव से जुड़ा हो सकता है। सोने में परेशानी, रात में बार-बार जागना या जरूरत से ज्यादा सोना ऐसे बदलाव हैं जिन पर ध्यान दिया जाना चाहिए। इसी तरह बार-बार सिरदर्द, पेट दर्द, मितली या शरीर से जुड़ी अन्य शिकायतें भी कभी-कभी तनाव और चिंता के साथ दिखाई दे सकती हैं। हालांकि इन शारीरिक लक्षणों के दूसरे कारण भी हो सकते हैं, इसलिए इन्हें केवल मानसिक स्वास्थ्य समस्या मानकर नहीं चलना चाहिए।

    पढ़ाई या स्कूल से अचानक दूरी बनाना भी माता-पिता के लिए संकेत हो सकता है। परीक्षा का डर, पढ़ाई का दबाव, सामाजिक परेशानी या बुलिंग जैसी स्थितियां बच्चे के स्कूल जाने और पढ़ाई करने के तरीके को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे समय में बच्चे को डांटने के बजाय उसकी परेशानी समझने की कोशिश करना अधिक जरूरी है।

    सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बच्चे को यह भरोसा दिलाया जाए कि उसकी बात ध्यान से सुनी जाएगी और उसकी परेशानी के लिए उसे तुरंत दोषी नहीं ठहराया जाएगा। माता-पिता को बिना दबाव बनाए बातचीत करनी चाहिए और बच्चे की भावनाओं को गंभीरता से लेना चाहिए। यदि तनाव या चिंता लंबे समय तक बनी रहती है या बच्चे की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगती है, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ या चिकित्सक से सलाह लेना उचित है। समय पर सहायता मिलने से समस्या को समझने और बच्चे को बेहतर तरीके से संभालने में मदद मिल सकती है।