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  • मध्य प्रदेश में बारिश के बीच मुख्यमंत्री ने लिया आपदा प्रबंधन का जायजा, एसडीआरएफ एनडीआरएफ की मुस्तैदी पर जताया संतोष

    मध्य प्रदेश में बारिश के बीच मुख्यमंत्री ने लिया आपदा प्रबंधन का जायजा, एसडीआरएफ एनडीआरएफ की मुस्तैदी पर जताया संतोष

    मध्य प्रदेश: में लगातार हो रही बारिश और कई क्षेत्रों में अतिवृष्टि की स्थिति के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को भोपाल स्थित होमगार्ड कार्यालय के एसडीआरएफ स्टेट कमांड सेंटर का दौरा किया। मुख्यमंत्री ने यहां प्रदेश में बारिश से उत्पन्न परिस्थितियों, संभावित बाढ़ और राहत एवं बचाव अभियानों की विस्तृत समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन और बचाव दलों की ओर से किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री ने कमांड सेंटर से प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में आपदा प्रबंधन की स्थिति का अवलोकन किया। उन्होंने अधिकारियों और संबंधित टीमों से प्रभावित इलाकों की जानकारी ली तथा राहत कार्यों की लगातार निगरानी सुनिश्चित करने पर जोर दिया। इस दौरान उन्होंने बचाव एवं राहत अभियान में जुटे personnel से संवाद भी किया और उनके कार्यों की जानकारी प्राप्त की।

    डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में फिलहाल बारिश का दौर जारी है। पश्चिमी मध्य प्रदेश को छोड़कर राज्य के अधिकांश हिस्सों में बारिश की आवश्यकता पूरी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि लगातार वर्षा के कारण निचले इलाकों में पानी भरने जैसी परिस्थितियां सामने आती हैं, जिससे नागरिकों के साथ-साथ पशुधन के लिए भी चुनौती उत्पन्न हो सकती है।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले एक महीने के दौरान एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमों ने मिलकर 2783 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया है। अचानक आई बाढ़ और जलभराव जैसी परिस्थितियों में इन टीमों की तत्परता से कई लोगों और मवेशियों को बचाने में मदद मिली है।

    उन्होंने कहा कि पिछले दो से चार दिनों में प्रदेश में ऐसी कोई गंभीर आपात स्थिति सामने नहीं आई है, लेकिन बचाव दलों को लगातार सतर्क रखा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा की स्थिति में कुछ ही समय के भीतर पानी का स्तर बढ़ने से निचले इलाकों में परेशानी पैदा हो सकती है। ऐसे में प्रशासन, पुलिस और बचाव दलों की त्वरित कार्रवाई महत्वपूर्ण हो जाती है।

    डॉ. यादव ने आपदा प्रबंधन में पुलिस और बचाव दलों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि जवानों ने अचानक आई बाढ़ जैसी परिस्थितियों का प्रभावी ढंग से सामना करते हुए नागरिकों और पशुधन की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। राज्य सरकार का प्रयास है कि संकट की स्थिति में प्रभावित लोगों तक समय पर सहायता पहुंचाई जाए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि बारिश का मौसम अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और आने वाले कुछ दिनों में भी वर्षा की संभावना बनी हुई है। ऐसे में लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है। उन्होंने प्रशासन को संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष नजर रखने और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू करने के निर्देश दिए।

    इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के लोगों से सीधा संवाद भी किया और वहां की परिस्थितियों की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि स्थानीय स्तर पर सामने आने वाली समस्याओं पर तत्काल प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जाए। सरकार और प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित नागरिकों की सुरक्षा तथा किसी भी संभावित आपदा में जान-माल के नुकसान को न्यूनतम रखना है।

  • मध्य प्रदेश में ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा, एडीबी सहयोग से ओंकारेश्वर में 600 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर परियोजना की तैयारी

    मध्य प्रदेश में ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा, एडीबी सहयोग से ओंकारेश्वर में 600 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर परियोजना की तैयारी

    मध्य प्रदेश: सरकार नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में अपनी क्षमता बढ़ाने के साथ ग्रीन एनर्जी को राज्य के आर्थिक और औद्योगिक विकास से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार का जोर सौर ऊर्जा समेत स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों के विस्तार पर है। इसके साथ ही निवेश आकर्षित करने और रोजगार के नए अवसर तैयार करने को भी प्राथमिकता दी जा रही है।

    इसी क्रम में रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड और एशियन डेवलपमेंट बैंक के बीच महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। इसके तहत नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की तीन प्रमुख परियोजनाओं के लिए ट्रांजेक्शन एडवाइजरी सर्विसेज उपलब्ध कराई जा रही हैं। खास बात यह है कि इन सलाहकारी सेवाओं के लिए एडीबी की ओर से कोई शुल्क नहीं लिया जा रहा है।

    सरकार की योजना ऐसे व्यावसायिक मॉडल और लेनदेन ढांचे तैयार करने की है, जिससे नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश करना आसान हो और उनका संचालन लंबे समय तक आर्थिक रूप से टिकाऊ बना रहे। इससे निजी और संस्थागत निवेशकों के लिए परियोजनाओं में भागीदारी की संभावनाएं बढ़ने की उम्मीद है।

    ओंकारेश्वर में प्रस्तावित फ्लोटिंग सोलर परियोजना इस योजना का प्रमुख हिस्सा है। जलाशय की सतह पर सौर पैनल स्थापित कर बिजली उत्पादन करने वाली इस तकनीक के जरिए उपलब्ध जल क्षेत्र का उपयोग किया जाएगा। ओंकारेश्वर में 278 मेगावाट क्षमता के एक चरण के लिए परियोजना संबंधी समझौता किया गया है।

    इसके अलावा ओंकारेश्वर में लगभग 300 मेगावाट अतिरिक्त क्षमता विकसित करने के लिए जरूरी जलाशय क्षेत्र और आधारभूत ढांचा उपलब्ध बताया गया है। इस तरह कुल मिलाकर करीब 600 मेगावाट क्षमता वाले फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट की दिशा में तैयारी की जा रही है। परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए सर्वेक्षण, प्री फिजिबिलिटी और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट से संबंधित अध्ययन भी किए जा चुके हैं।

    नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन की प्रकृति को देखते हुए सरकार अब बिजली भंडारण को भी परियोजनाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रही है। सौर ऊर्जा दिन के समय उपलब्ध रहती है, जबकि बिजली की मांग कई बार अलग-अलग समय पर बढ़ती है। ऐसे में ऊर्जा भंडारण प्रणाली उत्पादन और मांग के बीच संतुलन बनाने में उपयोगी हो सकती है।

    ओंकारेश्वर की प्रस्तावित परियोजना में दो घंटे की को-लोकेटेड एनर्जी स्टोरेज सिस्टम व्यवस्था का प्रावधान रखा गया है। इससे सौर ऊर्जा से उत्पादित बिजली को जरूरत के समय इस्तेमाल करने की क्षमता बढ़ाने की योजना है। पीएम सूर्य सरोवर योजना के तहत ऐसे प्रोजेक्ट्स के लिए केंद्रीय वित्तीय सहायता का प्रावधान भी बताया गया है।

    राज्य सरकार का लक्ष्य केवल सौर बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाना नहीं है। सरकार नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को औद्योगिक निवेश, ग्रीन इन्वेस्टमेंट, रोजगार सृजन और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार से जोड़ना चाहती है। इसके लिए परियोजनाओं को वित्तीय और तकनीकी रूप से व्यवहारिक बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

    मध्य प्रदेश में सौर ऊर्जा की उपलब्ध संभावनाओं, जलाशयों और विकसित हो रहे ऊर्जा ढांचे को देखते हुए सरकार आने वाले समय में इस क्षेत्र में बड़े निवेश की संभावना तलाश रही है। एडीबी के साथ सहयोग और ओंकारेश्वर जैसी परियोजनाओं को इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। ऊर्जा उत्पादन, भंडारण और निवेश को एक साथ आगे बढ़ाकर राज्य को ग्रीन और क्लीन एनर्जी के क्षेत्र में मजबूत स्थिति दिलाने की कोशिश की जा रही है।

  • नरसिंहपुर किसानों की जमीन मामले में हाईकोर्ट सख्त, कलेक्टर को तीन दिन में सड़क सामग्री हटाकर खेत लौटाने का आदेश

    नरसिंहपुर किसानों की जमीन मामले में हाईकोर्ट सख्त, कलेक्टर को तीन दिन में सड़क सामग्री हटाकर खेत लौटाने का आदेश

    मध्यप्रदेश। हाईकोर्ट ने नरसिंहपुर जिले के छह किसानों की निजी कृषि भूमि से सड़क निर्माण सामग्री हटाने को लेकर जिला प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं। अदालत ने कलेक्टर को आदेश दिया कि किसानों के खेतों में रखी निर्माण सामग्री तीन दिन के भीतर हटाई जाए और जमीन को उसकी मूल स्थिति में बहाल कर किसानों को वापस सौंपा जाए।

    यह मामला जामुन पानी और भोरपानी गांवों से जुड़ा है। किसानों ने वर्ष 2021 में अपनी निजी कृषि भूमि पर बिना अनुमति सड़क निर्माण से संबंधित गतिविधियां किए जाने का आरोप लगाते हुए न्यायालय का रुख किया था। किसानों की शिकायत थी कि उनकी जमीन का इस्तेमाल उनकी सहमति के बिना किया जा रहा है और लंबे समय से उन्हें अपनी भूमि का सामान्य उपयोग करने में परेशानी हो रही है।

    मामले की सुनवाई के दौरान जिला प्रशासन की ओर से यह दलील रखी गई थी कि संबंधित स्थान पर सड़क निर्माण का काम सीधे तौर पर नहीं किया जा रहा है। प्रशासन के अनुसार लोक निर्माण विभाग ने वहां केवल सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री अस्थायी रूप से रखी थी। अदालत के समक्ष इस स्थिति को प्रशासन की ओर से अपने बचाव में प्रस्तुत किया गया।

    हालांकि हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने प्रशासन की इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि जिला कलेक्टर पूरे जिले के समग्र प्रशासनिक प्रभारी होते हैं। किसी समस्या से संबंधित विभाग अलग होने मात्र से कलेक्टर अपनी जिम्मेदारी से अलग नहीं हो सकते। न्यायालय ने जनहित से जुड़े मामलों में जिला प्रशासन की जवाबदेही को महत्वपूर्ण माना।

    अदालत की सख्ती के बाद कलेक्टर को किसानों की जमीन से निर्माण सामग्री हटाने के लिए स्पष्ट समय सीमा दी गई है। निर्देश के अनुसार तीन दिन के भीतर खेतों से सभी संबंधित सामग्री हटाकर भूमि को पहले जैसी स्थिति में लाना होगा। इसके बाद किसानों को उनकी जमीन वापस सौंपने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

    न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद निर्धारित की है। उस दौरान कलेक्टर को अदालत के निर्देशों के अनुपालन की रिपोर्ट पेश करनी होगी। इससे यह स्पष्ट होगा कि निर्धारित समय सीमा के भीतर निर्माण सामग्री हटाने और जमीन बहाल करने की कार्रवाई पूरी हुई या नहीं।

    किसानों के लिए अदालत का यह आदेश लंबे समय से चल रही कानूनी लड़ाई में महत्वपूर्ण राहत के रूप में सामने आया है। वर्ष 2021 से भूमि के इस्तेमाल को लेकर चल रहे विवाद में अब प्रशासन को निश्चित समय सीमा के भीतर कार्रवाई करनी होगी।

    इस मामले में हाईकोर्ट की टिप्पणी जिला प्रशासन की जिम्मेदारी को लेकर भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अदालत ने संकेत दिया कि किसी विभागीय कार्रवाई या प्रशासनिक व्यवस्था का हवाला देकर जिला स्तर पर नागरिकों की शिकायतों से जिम्मेदारी नहीं टाली जा सकती। कलेक्टर को जिले का समग्र प्रभारी मानते हुए न्यायालय ने समस्या के समाधान की जिम्मेदारी तय की है।

    किसानों की निजी कृषि भूमि से जुड़ा यह विवाद सरकारी निर्माण गतिविधियों और नागरिकों के भूमि अधिकारों के बीच संतुलन का विषय भी सामने लाता है। अदालत के आदेश के बाद अब प्रशासन को न केवल निर्माण सामग्री हटानी होगी, बल्कि जमीन को वास्तविक रूप से उपयोग योग्य स्थिति में वापस करना भी सुनिश्चित करना होगा।

    अगली सुनवाई में पेश होने वाली अनुपालन रिपोर्ट इस मामले में महत्वपूर्ण होगी। इससे यह भी स्पष्ट होगा कि आदेश के अनुरूप तीन दिन की समय सीमा में कार्रवाई पूरी की गई है या नहीं। फिलहाल हाईकोर्ट के निर्देश से छह किसानों को अपनी जमीन वापस मिलने की उम्मीद बनी है और जिला प्रशासन के सामने तय समय में आदेश लागू करने की जिम्मेदारी है।

  • भारत के साथ संयुक्त विकास के वादे से पीछे हटा मालदीव, थिलाफुशी पोर्ट के लिए चीन की CHEC से किया समझौता

    भारत के साथ संयुक्त विकास के वादे से पीछे हटा मालदीव, थिलाफुशी पोर्ट के लिए चीन की CHEC से किया समझौता

    नई दिल्ली । मालदीव ने थिलाफुशी पोर्ट के विकास को लेकर चीन की कंपनी चाइना हार्बर इंजीनियरिंग कंपनी यानी CHEC के साथ समझौता किया है। यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वर्ष 2024 में मालदीव और भारत के बीच थिलाफुशी पोर्ट को संयुक्त रूप से विकसित करने की योजना सामने आई थी। ऐसे में परियोजना के पहले चरण के लिए चीनी कंपनी को जिम्मेदारी देने के फैसले से भारत की रणनीतिक चिंताएं बढ़ सकती हैं।

    मालदीव पोर्ट्स लिमिटेड और CHEC के बीच हुए समझौते के तहत परियोजना का काम सिंगल नॉमिनेशन के आधार पर सौंपा गया है। CHEC चीन की बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी चाइना कम्युनिकेशंस कंस्ट्रक्शन कंपनी यानी CCCC से जुड़ी है। कंपनी पहले भी कई देशों में बंदरगाह और परिवहन से संबंधित बड़े प्रोजेक्ट में काम कर चुकी है।

    CHEC की अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं में श्रीलंका का हंबनटोटा पोर्ट, केन्या का नैवाशा इनलैंड कंटेनर डिपो, गुयाना का एयरपोर्ट प्रोजेक्ट और प्रशांत क्षेत्र में नाउरू पोर्ट का पुनर्विकास शामिल रहा है। कंपनी को लेकर कुछ अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं में वित्तीय प्रबंधन, अनुबंध और परियोजना जोखिम से जुड़े सवाल भी उठते रहे हैं। इसी वजह से मालदीव के मौजूदा आर्थिक हालात के बीच इस फैसले को लेकर रणनीतिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।

    थिलाफुशी पोर्ट परियोजना का उद्देश्य माले पोर्ट पर बढ़ते दबाव को कम करना और मालदीव के औद्योगिक केंद्र थिलाफुशी की कनेक्टिविटी तथा व्यापारिक क्षमता को बढ़ाना है। वर्ष 2024 में राष्ट्रपति मोहम्मद मुइजू की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने माले पोर्ट पर भीड़ कम करने के लिए थिलाफुशी पोर्ट के संयुक्त विकास की योजना की घोषणा की थी। इसलिए अब चीन की कंपनी के साथ समझौते को भारत-मालदीव संबंधों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब मालदीव आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। देश के चालू खाते और राजकोषीय घाटे में बढ़ोतरी का अनुमान है। इसके साथ ही आर्थिक वृद्धि की रफ्तार भी कमजोर रहने की संभावना जताई जा रही है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और उसके व्यापक आर्थिक प्रभावों ने छोटे द्वीपीय देश की अर्थव्यवस्था के सामने अतिरिक्त दबाव पैदा किया है।

    दूसरी ओर, भारत पिछले कई वर्षों से मालदीव में बुनियादी ढांचे और विकास से जुड़ी परियोजनाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। भारत के सहयोग से ग्रेटर माले कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट यानी GMCP का निर्माण हुआ है, जो माले को विलिंगिली, गुल्हिफाल्हु और थिलाफुशी जैसे क्षेत्रों से जोड़ने की दिशा में अहम परियोजना है। इसे मालदीव की सबसे बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में शामिल किया जाता है।

    भारत ने पिछले वर्षों में मालदीव में कई विकास परियोजनाओं को पूरा किया है, जिनका लाभ स्थानीय आबादी को मिला है। ऐसे में थिलाफुशी पोर्ट के लिए चीन की कंपनी का चयन दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग के व्यापक परिदृश्य में अहम घटनाक्रम है। चीन की बढ़ती भागीदारी से हिंद महासागर क्षेत्र में उसकी मौजूदगी को लेकर भारत की चिंताएं भी बढ़ सकती हैं।

    मालदीव के लिए चुनौती यह भी है कि वह आर्थिक जरूरतों, बुनियादी ढांचा विकास और क्षेत्रीय रणनीतिक संतुलन के बीच किस तरह तालमेल कायम करता है। थिलाफुशी पोर्ट समझौता आने वाले समय में मालदीव की विदेश नीति और भारत तथा चीन के साथ उसके संबंधों की दिशा के लिहाज से महत्वपूर्ण संकेत दे सकता है।

  • भारत दौरे पर बेल्जियम के प्रधानमंत्री ने संरक्षणवाद पर जताई चिंता, अमेरिका और चीन की व्यापार रणनीतियों पर साधा निशाना

    भारत दौरे पर बेल्जियम के प्रधानमंत्री ने संरक्षणवाद पर जताई चिंता, अमेरिका और चीन की व्यापार रणनीतियों पर साधा निशाना


    नई दिल्ली । 
    भारत दौरे पर आए बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार नीति और चीन की आर्थिक रणनीतियों को लेकर परोक्ष रूप से तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने बिना किसी देश या नेता का नाम लिए कहा कि व्यापार में मनमाने प्रतिबंध, अचानक लगाए जाने वाले टैरिफ और बाजारों को व्यवस्थित तरीके से प्रभावित करने की कोशिशें वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ-साथ भू-राजनीतिक स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती बन सकती हैं।

    डी वेवर भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते से जुड़ी उच्चस्तरीय चर्चा के दौरान बोल रहे थे। अपने संबोधन में उन्होंने संरक्षणवाद और अप्रत्याशित व्यापारिक फैसलों की आलोचना करते हुए कहा कि दुनिया में ऐसे फैसलों का चलन बढ़ रहा है, जिनमें किसी देश की व्यापार नीति अचानक बदल जाती है। उन्होंने इस स्थिति को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए अस्थिरता पैदा करने वाला बताया।

    बेल्जियम के प्रधानमंत्री ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि कुछ लोग एक दिन व्यापार संबंधी फैसला लेते हैं और कुछ समय बाद उसी फैसले को वापस ले लेते हैं, फिर उसे दोबारा लागू कर देते हैं। उनकी इस टिप्पणी पर कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच हंसी और तालियां भी सुनाई दीं। इसके बाद डी वेवर ने संकेत दिया कि उपस्थित लोग समझ रहे हैं कि उनका इशारा किस दिशा में है।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि वह किसी का नाम नहीं ले रहे हैं। हालांकि, उनके बयान को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति पर परोक्ष टिप्पणी के रूप में देखा गया। ट्रंप प्रशासन की ओर से अलग-अलग देशों और व्यापारिक साझेदारों पर शुल्क लगाने तथा व्यापारिक नीतियों में बदलाव को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार चर्चा होती रही है।

    डी वेवर ने केवल अमेरिकी व्यापार नीति तक अपनी टिप्पणी सीमित नहीं रखी। उन्होंने चीन की आर्थिक गतिविधियों और बाजारों को प्रभावित करने वाली रणनीतियों की ओर भी संकेत किया। उनका कहना था कि कुछ देश जानबूझकर और व्यवस्थित तरीके से बाजारों में ऐसी परिस्थितियां पैदा करते हैं, जिससे उनके व्यापारिक साझेदारों पर आर्थिक दबाव बढ़ता है।

    बेल्जियम के प्रधानमंत्री के अनुसार, इस तरह की रणनीतियों का उद्देश्य दूसरे देशों को आर्थिक रूप से कमजोर करना और उनकी निर्भरता बढ़ाना हो सकता है। उन्होंने संरक्षणवाद और अनुचित प्रतिस्पर्धा को ऐसी दो प्रमुख चुनौतियों के रूप में रेखांकित किया, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था और देशों के बीच राजनीतिक स्थिरता को प्रभावित कर सकती हैं।

    उनकी टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने और मुक्त व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। भारत यूरोपीय बाजारों के साथ व्यापार और निवेश के अवसर बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है, जबकि यूरोपीय संघ भी भारत के साथ आर्थिक संबंधों को महत्वपूर्ण मानता है।

    ऐसे माहौल में बेल्जियम के प्रधानमंत्री का संरक्षणवाद के खिलाफ बयान भारत-यूरोपीय संघ व्यापार वार्ता के व्यापक संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार व्यवस्था में शुल्क और गैर-शुल्क बाधाओं को लेकर विभिन्न देशों के बीच मतभेद बने हुए हैं। ऐसे में स्थिर और पूर्वानुमान योग्य व्यापार नीति की जरूरत लगातार रेखांकित की जा रही है।

    डी वेवर ने अपने संबोधन में यह संदेश देने की कोशिश की कि व्यापारिक साझेदारों के बीच भरोसा तभी मजबूत हो सकता है, जब नीतियों में स्थिरता और आर्थिक तर्क को प्राथमिकता मिले। उनके बयान में अमेरिका और चीन दोनों की ओर संकेत था, लेकिन उन्होंने किसी देश का सीधे तौर पर नाम नहीं लिया।

    भारत यात्रा के दौरान बेल्जियम के प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी वैश्विक व्यापार व्यवस्था में चल रहे बदलावों और बढ़ते संरक्षणवाद के बीच सामने आई है। उनका जोर इस बात पर रहा कि मनमाने व्यापारिक फैसलों और अनुचित प्रतिस्पर्धा से केवल आर्थिक नुकसान नहीं होता, बल्कि इसका असर देशों के बीच संबंधों और व्यापक भू-राजनीतिक स्थिरता पर भी पड़ सकता है।

  • सरकारी जमीन पर अवैध घोषित मस्जिद हटाई गई, सहारनपुर में पीएसी और आरआरएफ तैनाती के बीच प्रशासन ने कार्रवाई की

    सरकारी जमीन पर अवैध घोषित मस्जिद हटाई गई, सहारनपुर में पीएसी और आरआरएफ तैनाती के बीच प्रशासन ने कार्रवाई की


    नई दिल्ली । 
    उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में शनिवार सुबह कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को प्रशासन ने अदालत के आदेश के अनुपालन में ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी रखी गई। प्रशासन की ओर से पहले ही अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया था, ताकि कार्रवाई के दौरान कानून व्यवस्था की स्थिति बनी रहे।

    मस्जिद को लेकर विवाद सरकारी जमीन पर निर्माण किए जाने के आरोप से जुड़ा था। नगर मजिस्ट्रेट की अदालत ने 16 जुलाई 2026 को मामले की सुनवाई के बाद कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित इस निर्माण को अवैध घोषित किया था। अदालत ने संबंधित मामले में 6.41 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया था। इसके बाद मस्जिद पक्ष की ओर से आदेश के खिलाफ जिला जज की अदालत में अपील दाखिल की गई थी।

    मस्जिद कमेटी ने 20 जुलाई 2026 को जिला जज की अदालत का रुख किया था। वहां से भी उसे राहत नहीं मिली। इसके बाद प्रशासन के सामने अदालत के आदेश को लागू करने का रास्ता साफ हुआ। शनिवार को सुबह प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की गई और मस्जिद का निर्माण हटा दिया गया।

    इस विवाद की शुरुआत 24 मार्च 2025 को हुई थी। बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी ने सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में सार्वजनिक परिसर में स्थित निर्माण को लेकर पीपी एक्ट के तहत याचिका दाखिल की थी। मामले की सुनवाई के दौरान निर्माण की वैधता और जमीन के स्वामित्व से जुड़े पहलुओं पर विचार किया गया। अदालत के आदेश के बाद यह मामला लगातार कानूनी प्रक्रिया में बना रहा।

    ध्वस्तीकरण से पहले सहारनपुर में सुरक्षा इंतजाम बढ़ा दिए गए थे। पांच कंपनी पीएसी और आरआरएफ के जवानों की तैनाती की गई। मिश्रित आबादी वाले इलाकों में पुलिस ने गश्त बढ़ाने के साथ फ्लैग मार्च भी किया। कलेक्ट्रेट परिसर के आसपास आने-जाने वालों पर निगरानी रखी गई, जबकि संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त बल को तैनात किया गया।

    इसी बीच कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन को उनके आवास पर रोके जाने की जानकारी सामने आई। बताया गया कि वह सहारनपुर जाने की तैयारी कर रही थीं। इसी दौरान पुलिस की टीम उनके आवास पर पहुंची और उन्हें बाहर जाने की अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद उन्हें घर में नजरबंद रखा गया। सांसद के सहारनपुर जाने के कार्यक्रम को लेकर प्रशासन और पुलिस की ओर से सुरक्षा संबंधी कदम उठाया गया।

    सहारनपुर मंडल के डीआईजी अभिषेक सिंह ने बताया कि ध्वस्तीकरण से पहले नोटिस और अपील सहित निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई। उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी प्रकार की अफवाह पर भरोसा नहीं करने की अपील की। साथ ही सोशल मीडिया पर भ्रामक या अफवाह फैलाने वाली सामग्री प्रसारित करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी।

    प्रशासन की कार्रवाई के बाद भी क्षेत्र में पुलिस बल की तैनाती जारी रखी गई है। अधिकारियों का कहना है कि संवेदनशील इलाकों में निगरानी बनाए रखी जा रही है। पूरे घटनाक्रम के दौरान प्रशासन ने कार्रवाई को न्यायिक आदेश के अनुपालन से जुड़ा बताया है, जबकि मामले को लेकर राजनीतिक स्तर पर भी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

  • रात में अचानक पैर में उठता है तेज दर्द? विटामिन D कैल्शियम और B12 की कमी हो सकती है कारण

    रात में अचानक पैर में उठता है तेज दर्द? विटामिन D कैल्शियम और B12 की कमी हो सकती है कारण


    नई दिल्ली । पैरों में दर्द और ऐंठन की समस्या अक्सर लोगों को सामान्य लगती है। लंबे समय तक खड़े रहने या लगातार बैठे रहने के बाद पैरों में दर्द होना आम बात है और कई बार थोड़े आराम के बाद यह परेशानी खुद ही ठीक भी हो जाती है। लेकिन अगर बिना किसी चोट के या ज्यादा मेहनत किए बिना ही पैरों में अचानक दर्द होने लगे और यह समस्या बार बार सामने आए तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कई मामलों में शरीर में जरूरी विटामिन और मिनरल्स की कमी भी पैरों में दर्द कमजोरी ऐंठन और झनझनाहट का कारण बन सकती है। ऐसे में शरीर के संकेतों को समझना और अपने खानपान पर ध्यान देना बेहद जरूरी हो जाता है।

    पैरों में दर्द की एक वजह शरीर में विटामिन D की कमी भी हो सकती है। विटामिन D शरीर की हड्डियों के साथ मांसपेशियों और नसों के सामान्य कामकाज के लिए जरूरी माना जाता है। इसकी कमी होने पर शरीर में कमजोरी और दर्द महसूस हो सकता है। कुछ लोगों में इसका असर खासतौर पर कमर पीठ और पैरों में दिखाई देता है। शरीर को विटामिन D का प्रमुख प्राकृतिक स्रोत सूर्य की रोशनी से मिलता है। हालांकि अगर शरीर में इसकी कमी है तो इसे पूरा करने के लिए डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

    कैल्शियम की कमी को भी पैरों में होने वाली ऐंठन और खिंचाव से जोड़कर देखा जाता है। आमतौर पर कैल्शियम को सिर्फ हड्डियों की मजबूती के लिए जरूरी माना जाता है लेकिन इसका संबंध मांसपेशियों के सामान्य कामकाज से भी है। शरीर में कैल्शियम का स्तर कम होने पर मांसपेशियों में खिंचाव या ऐंठन जैसी समस्या हो सकती है। अपनी डाइट में दूध दही पनीर और तिल जैसे कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थ शामिल किए जा सकते हैं।

    विटामिन B12 की कमी भी पैरों से जुड़ी परेशानियों की वजह बन सकती है। यह विटामिन नसों के सामान्य स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। इसकी कमी होने पर हाथ और पैरों में सुन्नपन झनझनाहट खिंचाव या असामान्य संवेदनाएं महसूस हो सकती हैं। कुछ लोगों में रात के समय पैरों में ऐंठन की शिकायत भी देखने को मिलती है। अगर इस तरह की समस्या लगातार बनी हुई है तो केवल घरेलू उपाय करने के बजाय विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर होता है।

    पैरों के दर्द और ऐंठन से बचने के लिए संतुलित और पौष्टिक आहार लेना जरूरी है। खाने में हरी सब्जियां दूध दही अंडे मौसमी फल और दूसरे पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थ शामिल किए जा सकते हैं। पर्याप्त पानी पीना और नियमित रूप से हल्की शारीरिक गतिविधि करना भी शरीर को सक्रिय रखने में मदद करता है। हालांकि हर बार पैर में दर्द का मतलब विटामिन या मिनरल्स की कमी ही हो ऐसा जरूरी नहीं है। अगर दर्द बार बार हो रहा है लंबे समय तक बना रहता है या इसके साथ सुन्नपन कमजोरी सूजन जैसी समस्या भी दिखाई देती है तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। बिना जांच के किसी विटामिन या मिनरल का सप्लीमेंट लेना भी उचित नहीं है।

  • शिक्षक दिवस पर सीएम मोहन यादव की बड़ी घोषणा, मध्यप्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा अब ऑफलाइन मोड में आयोजित होगी

    शिक्षक दिवस पर सीएम मोहन यादव की बड़ी घोषणा, मध्यप्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा अब ऑफलाइन मोड में आयोजित होगी

    मध्यप्रदेश: शिक्षक दिवस के अवसर पर मध्यप्रदेश के शिक्षकों को बड़ी राहत देते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी को ऑफलाइन मोड में आयोजित करने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षकों के हित में जरूरी निर्णय लेने के लिए प्रतिबद्ध है और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर लगातार काम किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने यह घोषणा भोपाल स्थित आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में आयोजित राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह में की। समारोह का शुभारंभ राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यक्रम से पहले एनसीसी कैडेट्स ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया।

    समारोह में प्रदेश के 33 उत्कृष्ट शिक्षकों को सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षक केवल कक्षाओं में विद्यार्थियों को पढ़ाने का काम नहीं करते, बल्कि वे आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को आकार देते हैं। उनके अनुसार देश का नक्शा कागज पर तैयार होता है, लेकिन देश की किस्मत कक्षाओं में बनती है।

    डॉ. यादव ने कहा कि भारत की गुरु-शिष्य परंपरा प्राचीन और गौरवशाली रही है। तक्षशिला, नालंदा और विक्रमशिला जैसे शिक्षा केंद्रों ने दुनिया के विद्यार्थियों को ज्ञान दिया। उन्होंने मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक और शैक्षणिक परंपरा का उल्लेख करते हुए उज्जैन के सांदीपनि आश्रम का भी जिक्र किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षकों की मेहनत और योगदान का सम्मान करती है। उन्होंने दावा किया कि बोर्ड परीक्षाओं के परिणामों में मेरिट सूची में बड़ी संख्या सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों की होती है। इसके पीछे शिक्षकों का मार्गदर्शन, परिश्रम और विद्यार्थियों के प्रति उनकी जिम्मेदारी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

    उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि मध्यप्रदेश के शासकीय स्कूल गुणवत्ता के मामले में निजी स्कूलों से बेहतर बनें। शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए आवश्यक सुधारों पर काम किया जा रहा है। इसी क्रम में शिक्षक पात्रता परीक्षा को ऑफलाइन कराने का निर्णय शिक्षकों और अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने शिक्षक सम्मान समारोह में प्रदेश के सभी शिक्षकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि शिक्षक ज्ञान के साथ संस्कार देकर बच्चों को जिम्मेदार नागरिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिक्षा को बदलती वैश्विक जरूरतों और रोजगार के अवसरों के अनुरूप लगातार विकसित करने की आवश्यकता है।

    राज्यपाल ने शिक्षकों से विद्यार्थियों की प्रतिभा पहचानने और उनकी रुचि के अनुसार आगे बढ़ने में सहयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने बच्चों में सहनशीलता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने पर भी जोर दिया। उनके मुताबिक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

    स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि प्रदेश का प्रत्येक शिक्षक शिक्षा व्यवस्था की अहम कड़ी है। उन्होंने शिक्षकों के समर्पण और ग्रामीण तथा चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में उनके योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षकों से जुड़ी कानूनी और प्रशासनिक बाधाओं को दूर करने के लिए प्रयास कर रही है।

    समारोह में सम्मानित शिक्षकों में शिवलाल दांगी, धन्नालाल बिसेन, रितेश कुमार पथाड़े, सुखनंदन साहू, नरेंद्र कुमार भारद्वाज, शिखा शर्मा, ज्योति पाठक, सीमा परमार, पूनम मिश्रा, मनीष तिवारी, अजय कुमार मिश्रा, पूजा पांडे और अन्य चयनित शिक्षक शामिल रहे। शिक्षक दिवस पर टीईटी को ऑफलाइन कराने की घोषणा और उत्कृष्ट शिक्षकों का सम्मान प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार के रुख को सामने लाता है।

  • अखिलेश यादव की पार्टी 5 से 11 सितंबर तक चलाएगी पीडीए जागरुकता अभियान, शिक्षा और रोजगार के मुद्दे होंगे केंद्र में

    अखिलेश यादव की पार्टी 5 से 11 सितंबर तक चलाएगी पीडीए जागरुकता अभियान, शिक्षा और रोजगार के मुद्दे होंगे केंद्र में


    नई दिल्ली । 
    उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी ने छात्र और युवा वर्ग के बीच अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ाने की दिशा में अभियान शुरू करने का ऐलान किया है। शिक्षक दिवस के मौके पर पार्टी की छात्र सभा की ओर से 5 से 11 सितंबर तक छात्र, नौजवान एवं पीडीए जागरुकता अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान का नाम पाठशाला पुकारे रखा गया है।

    समाजवादी पार्टी के अनुसार, अभियान के दौरान प्रदेश में बंद किए गए प्राथमिक, जूनियर और हाईस्कूलों के बाहर शिक्षक सम्मान कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। पार्टी का कहना है कि इन कार्यक्रमों के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को उठाया जाएगा और स्थानीय लोगों को भी संवाद का हिस्सा बनाया जाएगा।

    अभियान के तहत विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में छात्र सम्मेलन तथा शिक्षक सम्मान समारोह भी आयोजित किए जाने हैं। बंद स्कूलों के परिसर के बाहर उपलब्ध स्थानों पर शिक्षक दिवस से जुड़े कार्यक्रम किए जाएंगे। इनमें स्थानीय पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ ग्रामीणों की भागीदारी भी प्रस्तावित है।

    सपा छात्र सभा के कार्यक्रम को अलग अलग चरणों में आयोजित करने की योजना बनाई गई है। 7 सितंबर को पीडीए वृक्षारोपण और पर्चा वितरण का कार्यक्रम होगा। इसके बाद 8 सितंबर को विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में शिविर लगाकर छात्रों से संपर्क किया जाएगा।

    9 सितंबर को छात्रों से सुझाव लिए जाएंगे और उनकी समस्याओं को सुना जाएगा। इस दौरान उनसे संकल्प पत्र भी भरवाए जाने की योजना है। पार्टी का उद्देश्य छात्रों से सीधे संवाद स्थापित करके शिक्षा, रोजगार और अन्य संबंधित विषयों पर उनकी प्राथमिकताओं को समझना बताया गया है।

    10 सितंबर को छात्र छात्राओं और युवाओं की राजनीति में भूमिका को लेकर चर्चा की जाएगी। इसके बाद 11 सितंबर को मेधावी छात्रों और टॉपर्स के सम्मान के साथ अभियान का समापन किया जाएगा। पार्टी ने इस कार्यक्रम को छात्र और युवा वर्ग से जुड़ने के अपने प्रयास के तौर पर सामने रखा है।

    अभियान में शिक्षा और युवाओं से जुड़े कई मुद्दों को प्रमुखता दी गई है। इनमें पेपर लीक, समान पाठ्यक्रम, बढ़ती फीस, रोजगार, आरक्षण और उच्च शिक्षण संस्थानों में नियुक्तियों में कथित भ्रष्टाचार जैसे विषय शामिल हैं। पार्टी आरक्षण व्यवस्था में पारदर्शिता और रोस्टर प्रणाली को लेकर भी सवाल उठाने की तैयारी में है।

    इसके अलावा मुफ्त शिक्षा, छात्रों को डिजिटल उपकरण उपलब्ध कराने, पुस्तकालयों की व्यवस्था मजबूत करने तथा नए विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों के निर्माण जैसे मुद्दों को भी अभियान में शामिल किया गया है। सपा का कहना है कि इन विषयों के माध्यम से छात्रों और युवाओं की वास्तविक समस्याओं को राजनीतिक विमर्श में प्रमुखता दी जाएगी।

    यह अभियान ऐसे समय में शुरू हो रहा है जब उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दल अपनी गतिविधियां तेज कर रहे हैं। समाजवादी पार्टी के लिए छात्र और युवा वर्ग महत्वपूर्ण राजनीतिक आधार माना जाता है। ऐसे में शिक्षा, रोजगार और आरक्षण जैसे मुद्दों के जरिए पार्टी इस वर्ग के साथ संपर्क बढ़ाने की कोशिश कर रही है।

    पाठशाला पुकारे अभियान के माध्यम से बंद सरकारी स्कूलों और ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था का मुद्दा भी राजनीतिक बहस में लाने की तैयारी है। अभियान के दौरान सामने आने वाली छात्र समस्याओं और सुझावों को पार्टी किस तरह अपने आगामी राजनीतिक कार्यक्रम में शामिल करती है, इस पर भी नजर रहेगी।

  • मुरैना में जन्माष्टमी पर मातम: मंदिर से लौट रही तीन महिलाओं को कंटेनर ने रौंदा, सास-बहू सहित एक अन्य की मौत

    मुरैना में जन्माष्टमी पर मातम: मंदिर से लौट रही तीन महिलाओं को कंटेनर ने रौंदा, सास-बहू सहित एक अन्य की मौत


    मुरैना। जन्माष्टमी की खुशी मातम में बदल गई। राष्ट्रीय राजमार्ग 44 पर शनिवार तडक़े तेज रफ्तार कंटेनर ने तीन महिलाओं को कुचल दिया। तीनों महिलाएं घिरोना हनुमान मंदिर में श्रीकृष्ण जन्म के दर्शन कर घर लौट रही थीं। हादसे में तीनों की मौत हो गई। जानकारी के अनुसार हादसा तडक़े करीब 4 बजे का है। हरफूल का पुरा गांव की रहने वाली महिलाएं रात में घिरोना हनुमान मंदिर में आयोजित जन्मोत्सव कार्यक्रम में शामिल होने गई थीं। दर्शन के बाद तीनों पैदल ही हाईवे किनारे से अपने घर लौट रही थीं। तभी दिल्ली की ओर जा रहे तेज रफ्तार कंटेनर ने उन्हें पीछे से टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि एक महिला की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि सास-बहू गंभीर रूप से घायल हो गईं। चीख-पुकार सुनकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी।
    सिविल लाइन थाना पुलिस ने घायलों को तुरंत जिला अस्पताल पहुंचाया, लेकिन उपचार के दौरान दोनों ने दम तोड़ दिया।
    इन महिलाओं की हुई मौत –
    मृतकों की पहचान कमला कुशवाहा पत्नी फूल सिंह (50), कमला कुशवाहा पत्नी बालकिशन (50) और पूनम कुशवाहा पत्नी धर्मवीर (28) के रूप में हुई है। तीनों हरफूल का पुरा, थाना सिविल लाइन की निवासी थीं।
    बताया जा रहा है कि पूनम अपनी दो सास के साथ मंदिर गई थी। हादसे के बाद कंटेनर चालक नियंत्रण खो बैठा और सडक़ किनारे बनी कुछ दुकानों में जा घुसा। इससे दुकानों को भी नुकसान पहुंचा है।
    ग्रामीणों ने कंटेनर को घेर लिया और चालक को पकडक़र पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने कंटेनर को जब्त कर चालक को हिरासत में ले लिया है।
    तीनों शवों का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया गया है। गांव में एक साथ तीन अर्थियां उठने से पूरे इलाके में शोक का माहौल है।
    सरपंच राजपाल सिंह कुशवाहा ने बताया कि तेज रफ्तार ट्रक की टक्कर से 3 महिलाओं की मौत हुई है। जिसमें सास-बहु है। यह बहुत ही दर्दनाक हादसा है। ग्रामीणों ने चालक को पकड़ लिया है। पुलिस को चाहिए कि वाहनों की रफ्तार को कंट्रोल मे करवाएं।
    नगर पुलिस अधीक्षक दीपाल चंदोरिया ने बताया कि थाना सिविल लाइन मे ट्रक की चपेट मे आने से तीन महिलाओं की मौत हो गई है। एक की मौके पर मौत हो गई थी। पुलिस ने ट्रक को जब्त कर लिया है और चालक को भी पकड़ लिया है। मामला दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।