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  • शादी से जुड़े मामलों में अदालत ने तय की अहम सीमा, सामान्य आरोपों पर परिवार के सभी सदस्यों को नहीं घसीटा जा सकता

    शादी से जुड़े मामलों में अदालत ने तय की अहम सीमा, सामान्य आरोपों पर परिवार के सभी सदस्यों को नहीं घसीटा जा सकता


    नई दिल्ली। वैवाहिक विवादों से जुड़े मामलों को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने कहा है कि केवल सामान्य और बिना ठोस तथ्यों वाले आरोपों के आधार पर पति के सभी रिश्तेदारों को आपराधिक मामलों में शामिल करना उचित नहीं माना जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि घरेलू विवादों में पीड़ित पक्ष की शिकायत और सम्मान बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन कानून का इस्तेमाल संतुलित तरीके से होना भी उतना ही जरूरी है।

    वैवाहिक मामलों में बढ़ी न्यायिक चिंता
    हाल के वर्षों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिनमें पारिवारिक विवादों के दौरान पति के साथ-साथ पूरे परिवार के कई सदस्यों को भी आरोपी बनाया गया। अदालत ने माना कि वैवाहिक संबंधों में तनाव और कड़वाहट बढ़ने पर भावनात्मक परिस्थितियों में आरोपों का दायरा भी बढ़ सकता है। ऐसे मामलों में सावधानीपूर्वक जांच जरूरी है ताकि किसी निर्दोष व्यक्ति को अनावश्यक कानूनी प्रक्रिया का सामना न करना पड़े।

    सामान्य आरोपों पर नहीं बन सकता आधार
    अदालत ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ विशेष और स्पष्ट आरोप मौजूद नहीं हैं, तो केवल रिश्तेदारी के आधार पर उसके खिलाफ कार्रवाई उचित नहीं मानी जा सकती। न्यायिक प्रक्रिया में प्रत्येक आरोपी की भूमिका और उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों की अलग-अलग जांच की जानी चाहिए। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि केवल व्यापक और अस्पष्ट दावों के आधार पर मामला आगे बढ़ाना न्याय के मूल सिद्धांतों के अनुरूप नहीं होगा।

    कानून के दुरुपयोग पर जताई चिंता
    सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि यदि जांच और आरोपों की गंभीरता पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आपराधिक प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल उत्पीड़न के साधन के रूप में हो सकता है। अदालत ने संकेत दिया कि न्यायिक संस्थाओं की जिम्मेदारी है कि वे ऐसे मामलों में संवेदनशीलता और सावधानी दोनों के साथ काम करें।

    पीड़ित पक्ष की गरिमा भी उतनी ही जरूरी

    अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि घरेलू हिंसा या उत्पीड़न की शिकायतों को हल्के में नहीं लिया जा सकता। पीड़ितों की सुरक्षा और सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता है। लेकिन इसके साथ यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि कानूनी कार्रवाई तथ्यों और पर्याप्त आधार पर आगे बढ़े। न्याय व्यवस्था का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं बल्कि निष्पक्षता बनाए रखना भी है।

    यह टिप्पणी ऐसे समय में सामने आई है जब पारिवारिक और वैवाहिक विवादों से जुड़े मामलों को लेकर समाज और कानूनी क्षेत्र में लगातार चर्चा हो रही है। अदालत के इस दृष्टिकोण को भविष्य के मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण दिशा माना जा रहा है।
  • चौथा बड़ा मंगल आज, हनुमान जी की आराधना का विशेष दिन, जाने पूजा-व्रत और मांगलिक दोष से राहत के उपाय

    चौथा बड़ा मंगल आज, हनुमान जी की आराधना का विशेष दिन, जाने पूजा-व्रत और मांगलिक दोष से राहत के उपाय


    नई दिल्‍ली । ज्‍येष्‍ठ अधिकमास चल रहा है, इसके मंगलवार बहुत खास होते हैं. बड़ा मंगल का व्रत रखना, हनुमान जी की पूजा करना और उपाय करना बहुत लाभ देगा. इससे तमाम तरह की समस्‍याओं का अंत होता है और जीवन में सुख-सम‍ृद्धि आती है.

    जिन लड़के-लड़कियों को मंगल दोष है, वो बड़ा मंगल के दिन गुड़, चने, लाल मसूर की दाल दान करें. ऐसा करने से विवाह में आ रही बाधाएं दूर होंगी. साथ ही चौथे बड़ा मंगल पर सुंदरकांड का पाठ करें. यहां देखिए आज की तिथि, योग, नक्षत्र, राहुकाल समेत पूरा पंचाग.
    जिन लड़के-लड़कियों को मंगल दोष है, वो बड़ा मंगल के दिन गुड़, चने, लाल मसूर की दाल दान करें. ऐसा करने से विवाह में आ रही बाधाएं दूर होंगी. साथ ही चौथे बड़ा मंगल पर सुंदरकांड का पाठ करें. यहां देखिए आज की तिथि, योग, नक्षत्र, राहुकाल समेत पूरा पंचाग.

    26 मई 2026 का पंचांग
    आज की तिथि – सुबह 05:11 बजे से ज्‍येष्‍ठ शुक्‍ल एकादशी तिथि प्रारंभ होगी, जो अगले दिन 27 मई तक रहेगी. लिहाजा एकादशी तिथि का व्रत 27 मई को रखा जाएगा.

    आज का वार – मंगलवार.
    आज के ग्रह गोचर – आज चंद्रमा कन्‍या राशि में गोचर करेंगे.
    आज का नक्षत्र – 26 मई 04:08 बजे से हस्‍त नक्षत्र रहेगा और पूरा दिन रहेगा.
    आज के योग – 03:15 बजे से सिद्धि योग प्रारंभ होगा और पूरे दिन रहेगा.

    सूर्य व चंद्रमा का समय
    सूर्योदय – सुबह 05:46 बजे
    सूर्यास्त – शाम 07:01 बजे
    चन्द्रोदय – दोपहर 02:54 बजे
    चन्द्रास्त – 26 व 27 मई की तड़के सुबह 02:46 बजे
    (शहर के हिसाब से उदय व अस्त के समय में कुछ मिनट या सेकेंड का अंतर देखा जा सकता है)

    आज के शुभ काल
    ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 04:09 बजे से 04:57 बजे तक
    अभिजीत मुहूर्त – सुबह 11:57 बजे से दोपहर 12:50 बजे तक
    अमृत काल – रात 11:28 बजे से 01:11 बजे तक

    आज के अशुभ काल
    राहुकाल – दोपहर 03:42 बजे से शाम 05:22 बजे तक
    यम गण्ड – सुबह 09:04 बजे से 10:44 बजे तक
    कुलिक – दोपहर 12:23 बजे से 02:03 बजे तक
    दुर्मुहूर्त – सुबह 08:25 बजे से 09:18 बजे तक, रात 11:19 बजे से 12:02 बजे तक
    वर्ज्यम् – दोपहर 01:09 बजे से 02:52 बजे तक

  • 12 मंजिला भव्य मंदिर से सोने की आंखों वाले हनुमान जी तक, बोकारो के इन अद्भुत मंदिरों में बसती है गहरी आस्था

    12 मंजिला भव्य मंदिर से सोने की आंखों वाले हनुमान जी तक, बोकारो के इन अद्भुत मंदिरों में बसती है गहरी आस्था


    नई दिल्ली। झारखंड का Bokaro जिला अपनी औद्योगिक पहचान के साथ-साथ धार्मिक आस्था के लिए भी जाना जाता है। यहां स्थित कई हनुमान मंदिर अपनी भव्यता, विशाल प्रतिमाओं और अनोखी बनावट के कारण विशेष पहचान रखते हैं। इन मंदिरों में हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। कई मंदिर ऐसे हैं जो केवल पूजा का केंद्र नहीं बल्कि पर्यटन आकर्षण के रूप में भी प्रसिद्ध हो चुके हैं।

    विशाल संरचनाओं ने बनाई अलग पहचान
    बोकारो के कई हनुमान मंदिर अपनी ऊंचाई और अनूठी वास्तुकला के कारण लोगों का ध्यान खींचते हैं। यहां बने कुछ मंदिर दूर से ही दिखाई देते हैं और पहली नजर में अपनी भव्यता से प्रभावित कर देते हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि इन मंदिरों में दर्शन करने से मानसिक शांति और आध्यात्मिक अनुभव मिलता है।

    आस्था का प्रमुख केंद्र बने संकटमोचन मंदिर
    जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित कई मंदिर वर्षों से लोगों की आस्था से जुड़े हुए हैं। इनमें संकटमोचन मंदिर विशेष रूप से प्रसिद्ध माना जाता है। यहां हर मंगलवार और शनिवार बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। परिवार की सुख-शांति और जीवन की परेशानियों से मुक्ति की कामना लेकर लोग यहां पूजा-अर्चना करते हैं।

    विशाल हनुमान प्रतिमाएं बनीं आकर्षण

    बोकारो में कई स्थानों पर भगवान हनुमान की विशाल प्रतिमाएं स्थापित हैं। कुछ प्रतिमाएं इतनी ऊंची हैं कि दूर से ही नजर आने लगती हैं। इनकी भव्यता के कारण केवल श्रद्धालु ही नहीं बल्कि घूमने आने वाले पर्यटक भी यहां पहुंचते हैं। लोग दर्शन के साथ-साथ इन स्थानों की सुंदरता को भी करीब से देखना पसंद करते हैं।

    12 मंजिला मंदिर बना विशेष आकर्षण
    बोकारो के सबसे चर्चित धार्मिक स्थलों में एक भव्य 12 मंजिला हनुमान मंदिर भी शामिल है। यह मंदिर अपनी विशाल संरचना और विशेष निर्माण शैली के लिए जाना जाता है। यहां स्थापित हनुमान जी की प्रतिमा लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बनी रहती है। कहा जाता है कि इस मंदिर के निर्माण में कई वर्ष लगे और इसकी भव्यता दूर-दूर से आने वाले लोगों को प्रभावित करती है।

    सोने की आंखों वाली प्रतिमा बनी चर्चा का विषय
    इस मंदिर की सबसे अनोखी बात यहां स्थापित हनुमान जी की प्रतिमा को माना जाता है। प्रतिमा की आंखों को विशेष रूप से तैयार किया गया है, जिसने लोगों की जिज्ञासा और आस्था दोनों को बढ़ाया है। यही वजह है कि यह स्थान धार्मिक महत्व के साथ-साथ अपनी विशेष पहचान के लिए भी चर्चा में रहता है।

  • IPL 2026 क्वालिफायर-1: धर्मशाला में आज RCB-GT की टक्कर, रोचक होने वाला है मुकाबला

    IPL 2026 क्वालिफायर-1: धर्मशाला में आज RCB-GT की टक्कर, रोचक होने वाला है मुकाबला


    नई दिल्ली । IPL 2026 का लीग चरण समाप्त हो चुका है और अब मुकाबला उन मैचों का है, जहां एक छोटी गलती पूरे सीजन की मेहनत पर भारी पड़ सकती है। मंगलवार को धर्मशाला में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) और गुजरात टाइटन्स (GT) आमने-सामने होंगी। इस मुकाबले की अहमियत सिर्फ जीत तक सीमित नहीं है, बल्कि विजेता टीम सीधे फाइनल में अपनी जगह पक्की करेगी।

    दोनों टीमों ने लीग स्टेज 18-18 अंकों के साथ खत्म किया, लेकिन बेहतर नेट रन रेट के आधार पर RCB अंक तालिका में शीर्ष पर रही। हालांकि अब लीग चरण के आंकड़ों का कोई महत्व नहीं है, क्योंकि अगले 40 ओवर ही तय करेंगे कि फाइनल का पहला टिकट किस टीम को मिलेगा।

    RCB ने इस सीजन अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से विरोधी टीमों पर लगातार दबाव बनाया है। विराट कोहली ने अनुभव और निरंतरता से टीम को कई मुश्किल हालात से बाहर निकाला, जबकि फिल सॉल्ट, रजत पाटीदार और मिडिल ऑर्डर के अन्य बल्लेबाजों ने तेजी से रन बनाकर मैचों का रुख बदला। टीम की सबसे बड़ी ताकत उसकी बल्लेबाजी की गहराई रही है, जिसके कारण कई बार 200 से अधिक स्कोर खड़े किए गए।

    इस बार RCB की गेंदबाजी भी पिछले सीजन की तुलना में अधिक संतुलित नजर आई है। जोश हेजलवुड और भुवनेश्वर कुमार ने नई गेंद से शुरुआती विकेट दिलाकर टीम को मजबूत शुरुआत दी है।

    वहीं गुजरात टाइटन्स की सफलता का आधार उसकी अनुशासित और धारदार गेंदबाजी रही है। शुभमन गिल, साई सुदर्शन और जोस बटलर ने बल्लेबाजी में योगदान दिया, लेकिन टीम को सबसे खतरनाक बनाने का काम गेंदबाजों ने किया।

    मोहम्मद सिराज, कगिसो रबाडा और प्रसिद्ध कृष्णा की तेज गेंदबाजी तिकड़ी ने पूरे टूर्नामेंट में बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। नई गेंद से विकेट निकालने के साथ डेथ ओवर्स में भी इन गेंदबाजों ने शानदार नियंत्रण दिखाया। इसके अलावा राशिद खान और साई किशोर ने मिडिल ओवर्स में रन गति पर लगाम लगाकर विरोधी टीमों को दबाव में रखा।

    चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ 89 रन की बड़ी जीत के बाद गुजरात का आत्मविश्वास काफी ऊंचा है।

    इस हाई-वोल्टेज मुकाबले में कई व्यक्तिगत भिड़ंत भी मैच का परिणाम तय कर सकती हैं। पावरप्ले में विराट कोहली और कगिसो रबाडा की टक्कर सबसे अहम मानी जा रही है। वहीं फिल सॉल्ट के आक्रामक अंदाज के सामने मोहम्मद सिराज की रणनीति भी दिलचस्प होगी।

    गुजरात की बल्लेबाजी काफी हद तक शुभमन गिल और साई सुदर्शन पर निर्भर करती है। ऐसे में अगर हेजलवुड और भुवनेश्वर शुरुआती झटके देने में सफल रहे, तो GT दबाव में आ सकती है।

    दूसरी ओर राशिद खान का स्पेल RCB के मिडिल ऑर्डर के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। हालांकि रजत पाटीदार का स्पिन गेंदबाजी के खिलाफ रिकॉर्ड टीम के लिए राहत की बात है।

    अगर बल्लेबाजी की गहराई देखी जाए तो RCB थोड़ी मजबूत दिखाई देती है, लेकिन गेंदबाजी में निरंतरता और नियंत्रण के मामले में गुजरात टाइटन्स पूरे सीजन में सबसे प्रभावशाली टीम रही है।

    यही कारण है कि धर्मशाला में होने वाला यह मुकाबला फाइनल से पहले के फाइनल जैसा माना जा रहा है। मंगलवार की रात एक टीम सीधे फाइनल में पहुंचेगी, जबकि दूसरी टीम को खिताबी दौड़ में बने रहने के लिए एक और कठिन मुकाबला खेलना होगा।

  • फिल्म से निकलने के लिए किशोर कुमार की अनोखी चाल, गंजे होकर ऑफिस पहुंचे और बदल गई पूरी कहानी

    फिल्म से निकलने के लिए किशोर कुमार की अनोखी चाल, गंजे होकर ऑफिस पहुंचे और बदल गई पूरी कहानी

    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा के दिग्गज गायक और अभिनेता Kishore Kumar अपने शानदार गीतों के साथ-साथ अपनी अनोखी आदतों और मजाकिया स्वभाव के लिए भी खूब पहचाने जाते थे। उनके जीवन से जुड़े कई ऐसे किस्से हैं जो आज भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बने रहते हैं। उनके साथ काम करने वाले कलाकार और फिल्मकार अक्सर उनके अलग अंदाज और अप्रत्याशित व्यवहार के बारे में बातें करते रहे हैं। ऐसा ही एक किस्सा एक बड़ी फिल्म से जुड़ा है, जिसने बाद में हिंदी सिनेमा के इतिहास में खास जगह बनाई।

    दोस्ती और दुविधा के बीच फंसे थे किशोर कुमार

    उस दौर में मशहूर फिल्म निर्देशक Hrishikesh Mukherjee और किशोर कुमार के बीच गहरी दोस्ती थी। निर्देशक अपनी नई फिल्म के लिए ऐसे कलाकार की तलाश में थे जो मुख्य किरदार को जीवंत बना सके। उनकी पसंद किशोर कुमार थे और वे चाहते थे कि वही फिल्म के नायक बनें। लेकिन दूसरी तरफ किशोर कुमार इस प्रोजेक्ट का हिस्सा बनने के इच्छुक नहीं थे। परेशानी यह थी कि गहरी दोस्ती के कारण वह सीधे तौर पर मना भी नहीं कर पा रहे थे।

    फिल्म से बचने के लिए अपनाया अनोखा तरीका
    काफी सोच-विचार के बाद किशोर कुमार ने एक अलग रास्ता चुना। फिल्म शुरू होने से पहले जब उन्हें लुक और कॉस्ट्यूम को लेकर चर्चा के लिए बुलाया गया तो वहां मौजूद लोग उन्हें देखकर चौंक गए। वह पूरी तरह गंजे होकर पहुंचे थे। इतना ही नहीं, वह पूरे ऑफिस में घूमते हुए मजाकिया अंदाज में नाचते और गाते रहे। उनका यह रूप देखकर सभी हैरान रह गए।

    एक फैसले ने बदल दी पूरी कहानी
    निर्देशक के लिए यह दृश्य अप्रत्याशित था। फिल्म के मुख्य किरदार के लिए जिस छवि की कल्पना की गई थी, उसके विपरीत किशोर कुमार का यह अंदाज था। आखिरकार बात इतनी आगे बढ़ी कि उन्हें फिल्म से अलग कर दिया गया। बाद में उसी किरदार के लिए दूसरे कलाकार को चुना गया और फिल्म ने आगे चलकर बड़ी सफलता हासिल की।

    फिल्म इतिहास का यादगार अध्याय
    बाद में यह फिल्म बनी Anand, जिसमें मुख्य भूमिका Rajesh Khanna ने निभाई और उनके साथ Amitabh Bachchan भी नजर आए। फिल्म की कहानी और अभिनय को दर्शकों ने खूब पसंद किया। यह फिल्म आज भी हिंदी सिनेमा की सबसे यादगार फिल्मों में गिनी जाती है।

    इस घटना ने यह भी साबित किया कि किशोर कुमार केवल एक महान कलाकार ही नहीं थे, बल्कि उनका जीवन अनोखे और दिलचस्प किस्सों से भी भरा हुआ था, जिनकी चर्चा आज भी उतनी ही दिलचस्पी से होती है।

  • भीषण गर्मी से जनजीवन प्रभावित, देश के कई राज्यों में पानी-बिजली की किल्लत

    भीषण गर्मी से जनजीवन प्रभावित, देश के कई राज्यों में पानी-बिजली की किल्लत

    नई दिल्ली । देशभर में पड़ रही प्रचंड गर्मी ने लोगों का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। कई राज्यों में तापमान 45 से 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने से पानी और बिजली की मांग तेजी से बढ़ गई है। राजधानी दिल्ली सहित उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई शहरों और गांवों में जल संकट और बिजली कटौती की गंभीर स्थिति बन गई है। कहीं लोग पानी के लिए लंबी कतारों में खड़े नजर आ रहे हैं, तो कहीं अनियमित बिजली आपूर्ति ने रोजमर्रा की जिंदगी मुश्किल कर दी है।

    गर्मी बढ़ने के साथ टैंकरों पर निर्भरता बढ़ गई है। कई इलाकों में बोरवेल सूखने लगे हैं और भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। बिजली संकट के चलते पानी की मोटरें भी बंद पड़ रही हैं, जिससे हालात और खराब हो रहे हैं।

    दिल्ली के दक्षिणपुरी और देवली क्षेत्रों में पिछले करीब दो महीने से पानी की सप्लाई प्रभावित बताई जा रही है। ब्लॉक 10 और 11 समेत कई इलाकों में लोगों के घरों के नल सूख चुके हैं। लोग बाल्टी और डिब्बे लेकर घंटों पानी का इंतजार कर रहे हैं। संगम विहार, अंबेडकर नगर, खानपुर, तिगड़ी, मदनगीर और तुगलकाबाद एक्सटेंशन जैसे इलाकों में भी जल संकट गहरा गया है। वहीं पूर्वी दिल्ली के दिलशाद गार्डन में स्थानीय लोगों ने जल बोर्ड कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया।

    महाराष्ट्र में भी गर्मी और पानी की कमी ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मुंबई में पानी की उपलब्धता घटने के बाद 10 प्रतिशत पानी कटौती लागू की गई है। शहर की सात झीलों का जलस्तर 19.22 प्रतिशत से नीचे पहुंच गया है। अमरावती, अकोला, मेलघाट और चंद्रपुर जैसे जिलों में तापमान 45 से 47 डिग्री तक पहुंच गया है। ग्रामीण इलाकों में लोग टैंकरों के सहारे हैं और कई गांवों में महिलाएं दूर-दराज से पानी लाने को मजबूर हैं।

    चंद्रपुर के कुछ गांवों में आज भी लोग सूखे नालों में गड्ढे खोदकर रिसता पानी पीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है।

    मध्य प्रदेश के दतिया और बुरहानपुर जिलों में भी हालात गंभीर बने हुए हैं। दतिया में 3 से 4 दिन में एक बार सीमित समय के लिए पानी की सप्लाई हो रही है, जबकि कई क्षेत्रों में दूषित पानी आने की शिकायतें हैं। बुरहानपुर के धुलकोट इलाके में भी पानी की भारी किल्लत बनी हुई है।

    उत्तर प्रदेश में भी बिजली और पानी दोनों संकट का कारण बने हुए हैं। लखनऊ के फैजुल्लागंज इलाके में बिजली कटौती के चलते पानी की सप्लाई प्रभावित हो रही है। गोरखपुर, प्रयागराज, सहारनपुर और कानपुर में भी लोग जल संकट और बिजली कटौती से परेशान हैं। गाजियाबाद और खोड़ा क्षेत्रों में टैंकरों पर निर्भरता लगातार बढ़ रही है।

    सहारनपुर की अजीज कॉलोनी में करीब 300 परिवार पिछले एक महीने से पानी की समस्या झेल रहे हैं। वहीं कानपुर के 80 फीट रोड इलाके में लंबे समय तक बिजली गुल रहने से लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

    देशभर में बढ़ती गर्मी के बीच पानी और बिजली की समस्या ने आम लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है। कई जगहों पर लोगों में नाराजगी बढ़ रही है और स्थानीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन भी देखने को मिल रहे हैं।

  • एमपी में भीषण गर्मी का कहर, 45 जिले हीटवेव की गिरफ्त में, 28 मई से प्री-मानसून के आसार

    एमपी में भीषण गर्मी का कहर, 45 जिले हीटवेव की गिरफ्त में, 28 मई से प्री-मानसून के आसार

     
    भोपाल । मध्यप्रदेश में इस बार नौतपा की शुरुआत तेज गर्मी के साथ आंधी और बारिश से हुई है। पहले ही दिन भोपाल, उमरिया, दमोह समेत 15 से अधिक जिलों में उमस भरी गर्मी और हल्की बारिश का असर देखने को मिला। मौसम विभाग के अनुसार 28 मई से प्रदेश में प्री-मानसून गतिविधियां शुरू होने के संकेत हैं। इस दौरान उत्तर और दक्षिण क्षेत्र के 14 जिलों में बारिश हो सकती है।

    मंगलवार को निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना और सतना जिलों में तीव्र लू का रेड अलर्ट जारी किया गया है। छतरपुर जिले के खजुराहो और नौगांव सबसे अधिक गर्म रहे, जहां तापमान लगातार 45 डिग्री सेल्सियस के ऊपर बना हुआ है। भोपाल और ग्वालियर सहित प्रदेश के कुल 45 जिले हीटवेव की चपेट में हैं। वहीं इंदौर और नर्मदापुरम में गर्मी से थोड़ी राहत मिलने की संभावना जताई गई है।

    मौसम विभाग ने अगले चार दिनों का पूर्वानुमान जारी करते हुए बताया है कि 28 मई को ग्वालियर, चंबल, सागर और जबलपुर संभाग के 14 जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। इससे पहले 25 मई को भी प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश दर्ज की गई थी। पश्चिमी क्षेत्र से गुजर रहे ट्रफ के कारण मौसम में यह बदलाव देखा जा रहा है।

    भोपाल में बीते 14 वर्षों में नौतपा के दौरान सात बार बारिश रिकॉर्ड की गई है, जबकि दो बार केवल बूंदाबांदी हुई थी। इस बार भी शुरुआत में ही हल्की बारिश दर्ज हो चुकी है। वर्ष 2018 और 2019 में नौतपा के दौरान सबसे अधिक गर्मी पड़ी थी, जब औसत तापमान 43 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया था।

    सोमवार को नौतपा के पहले दिन प्रदेश में कहीं बारिश तो कहीं भीषण गर्मी का असर रहा। खजुराहो में तापमान रिकॉर्ड 47.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो अब तक का सबसे अधिक तापमान माना जा रहा है। नौगांव में 46.8 डिग्री, दतिया में 45.6 डिग्री, मंडला में 45.5 डिग्री और टीकमगढ़ में 45.3 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।

    प्रदेश के बड़े शहरों में ग्वालियर सबसे गर्म रहा, जहां तापमान 44 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। भोपाल में 43.4 डिग्री, जबलपुर में 43.9 डिग्री, उज्जैन में 41.8 डिग्री और इंदौर में 41.4 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया।

    मौसम विभाग के अनुसार 31 मई तक प्रदेश में भीषण गर्मी का दौर जारी रह सकता है। हालांकि 28 मई को ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, निवाड़ी, टीकमगढ़, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला और डिंडौरी जिलों में हल्की बारिश होने की संभावना है।

  • CBSE मूल्यांकन विवाद ने पकड़ा राजनीतिक रंग, राहुल गांधी बोले- सवाल पूछने वाली युवा पीढ़ी से डर रही सरकार

    CBSE मूल्यांकन विवाद ने पकड़ा राजनीतिक रंग, राहुल गांधी बोले- सवाल पूछने वाली युवा पीढ़ी से डर रही सरकार


    नई दिल्ली। CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली को लेकर उठे विवाद ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। परीक्षा परिणामों और मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर छात्रों की शिकायतों के बीच विपक्ष ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर कई सवाल खड़े किए जा रहे हैं। इसी मुद्दे को आधार बनाकर सरकार और विपक्ष के बीच बयानबाजी भी तेज हो गई है।

    शिक्षा व्यवस्था पर बढ़ा राजनीतिक दबाव

    लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi ने CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली में कथित गड़बड़ियों को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े संस्थानों की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर सवाल उठना चिंता का विषय है। उनका कहना था कि लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े मामलों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई होनी चाहिए।

    OSM प्रणाली पर उठे नए सवाल
    कक्षा 12वीं की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली एक डिजिटल प्रक्रिया है, जिसमें छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन कर स्क्रीन पर जांचा जाता है। हाल के दिनों में इस प्रणाली को लेकर कई तरह की शिकायतें सामने आई हैं। कुछ छात्रों ने गलत मूल्यांकन और अंकों में विसंगति जैसे मुद्दे उठाए हैं। इसी के बाद यह मामला चर्चा का विषय बन गया और इसे लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगीं।

    युवाओं और छात्रों की भूमिका पर बहस
    विवाद के दौरान यह मुद्दा भी सामने आया कि नई पीढ़ी अब शिक्षा और व्यवस्था से जुड़े सवालों पर खुलकर अपनी बात रख रही है। छात्रों की आवाज और उनकी शिकायतों को लेकर बहस तेज हुई है। विपक्ष का कहना है कि युवाओं की बात सुनी जानी चाहिए और उनकी चिंताओं को गंभीरता से लिया जाना जरूरी है। शिक्षा से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग लगातार उठ रही है।

    सुधार की मांग हुई तेज
    विपक्षी नेताओं ने शिक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया है। परीक्षा प्रक्रिया से लेकर मूल्यांकन और परिणाम तक पूरे ढांचे को और मजबूत बनाने की बात कही जा रही है। उनका मानना है कि छात्रों का भरोसा बनाए रखने के लिए एक ऐसी व्यवस्था तैयार करनी होगी जिसमें किसी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना कम से कम हो।

    शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर चर्चा

    इस पूरे विवाद के बाद एक बार फिर देश की परीक्षा प्रणाली और मूल्यांकन प्रक्रिया पर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक के इस्तेमाल के साथ-साथ मजबूत निगरानी और स्पष्ट प्रक्रिया भी जरूरी है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर और बहस देखने को मिल सकती है क्योंकि यह सीधे लाखों छात्रों और उनके भविष्य से जुड़ा विषय है।

  • जब एक्टर की भविष्यवाणी सच निकली, बॉलीवुड में मच गया था सनसनी

    जब एक्टर की भविष्यवाणी सच निकली, बॉलीवुड में मच गया था सनसनी


    नई दिल्ली । बॉलीवुड में कई कलाकार अपनी दमदार एक्टिंग और यादगार किरदारों के लिए हमेशा याद किए जाते हैं, लेकिन कुछ सितारों की जिंदगी से जुड़े किस्से उन्हें और भी खास बना देते हैं। हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता संजीव कुमार भी ऐसे ही कलाकारों में शामिल हैं, जिन्होंने अपनी शानदार अदाकारी से दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी। खास बात यह है कि उन्होंने अपनी मौत को लेकर जो भविष्यवाणी की थी, वह बाद में सच साबित हुई।

    1960 के दशक में फिल्मी करियर की शुरुआत करने वाले संजीव कुमार ने अपने अभिनय के दम पर इंडस्ट्री में अलग पहचान बनाई। एक समय ऐसा था जब वे अमिताभ बच्चन और शशि कपूर जैसे बड़े सितारों को कड़ी टक्कर देते थे। उनकी फिल्मों और किरदारों को दर्शकों ने खूब पसंद किया। उन्होंने गंभीर, कॉमिक और भावनात्मक हर तरह के रोल निभाकर खुद को बहुमुखी अभिनेता साबित किया।

    संजीव कुमार की जिंदगी से जुड़ा सबसे चर्चित किस्सा उनकी मौत की भविष्यवाणी से जुड़ा है। बताया जाता है कि एक इंटरव्यू के दौरान उनसे पूछा गया था कि कम उम्र में भी वे फिल्मों में बुजुर्गों के किरदार इतनी सहजता से कैसे निभा लेते हैं। इस पर अभिनेता ने बेहद चौंकाने वाला जवाब दिया था। उन्होंने कहा था कि उन्हें नहीं लगता कि वे कभी बूढ़े हो पाएंगे, क्योंकि उनके परिवार के ज्यादातर पुरुष 50 साल की उम्र से पहले ही दुनिया छोड़ चुके हैं।

    संजीव कुमार का मानना था कि वे भी 50 साल की उम्र तक जीवित नहीं रह पाएंगे। यही वजह थी कि वे कम उम्र में ही बड़े पर्दे पर बुजुर्ग किरदार निभाने में सहज महसूस करते थे। बाद में उनकी यह बात सच साबित हुई। 6 नवंबर 1985 को हार्ट अटैक के कारण उनका निधन हो गया। उस समय उनकी उम्र सिर्फ 47 साल थी।

    बताया जाता है कि उनके दादा, पिता और छोटे भाई का निधन भी कम उम्र में ही हो गया था। परिवार के इस इतिहास का असर संजीव कुमार की सोच पर भी पड़ा था और उन्हें अपनी उम्र को लेकर हमेशा आशंका बनी रहती थी।

    अपने करियर में संजीव कुमार ने कई यादगार फिल्मों में काम किया। शोले, त्रिशूल, अंगूर, पति पत्नी और वो और हीरो जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को आज भी सराहा जाता है। उनकी मौत के बाद भी उनकी कई फिल्में रिलीज हुईं, जो दर्शकों के बीच चर्चा में रहीं। संजीव कुमार भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी अदाकारी और उनसे जुड़े किस्से आज भी बॉलीवुड प्रेमियों के दिलों में जिंदा हैं।

  • बकरा मंडियों में दिखी त्योहार की चमक, लाखों के बकरों ने खींचा ध्यान, खरीदारों के सामने बढ़ी नई चुनौतियां

    बकरा मंडियों में दिखी त्योहार की चमक, लाखों के बकरों ने खींचा ध्यान, खरीदारों के सामने बढ़ी नई चुनौतियां

    नई दिल्ली। बकरीद के त्योहार से पहले देशभर की बकरा मंडियों में रौनक अपने चरम पर पहुंच गई है। उत्तर भारत से लेकर मध्य और पश्चिम भारत तक मंडियों में बड़ी संख्या में खरीदारों और व्यापारियों की भीड़ दिखाई दे रही है। त्योहार के करीब आते ही बाजारों में खरीदारी की रफ्तार बढ़ गई है और खास नस्ल के बकरों की मांग तेजी से बढ़ती नजर आ रही है। इस बार कई ऐसे बकरे लोगों का ध्यान खींच रहे हैं जिनकी कीमत लाखों रुपये तक पहुंच गई है।

    विशेष बकरों ने बढ़ाया आकर्षण

    देश के कई शहरों की मंडियों में दूर-दराज इलाकों से व्यापारी अपने खास बकरे लेकर पहुंचे हैं। कई बकरे अपने भारी वजन, अलग पहचान और विशेष नस्ल के कारण चर्चा में बने हुए हैं। कुछ स्थानों पर ऐसे बकरे भी पहुंचे हैं जिनकी कीमत 11 लाख रुपये तक बताई जा रही है। इन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग मंडियों का रुख कर रहे हैं। कई खरीदार इन बकरों के साथ तस्वीरें लेते भी दिखाई दे रहे हैं।

    त्योहारी बाजार में बढ़ी हलचल
    त्योहार नजदीक आने के साथ बाजारों में खरीदारी का माहौल और अधिक सक्रिय हो गया है। सुबह से देर रात तक मंडियों में भीड़ बनी हुई है। कई लोग अपनी पसंद और बजट के अनुसार बकरों का चयन कर रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों में ग्राहकों की संख्या लगातार बढ़ी है और आने वाले दिनों में इसमें और तेजी आने की उम्मीद है।

    महंगाई बनी बड़ी चुनौती
    इस बार व्यापारियों और खरीदारों दोनों के सामने बढ़ती लागत एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है। चारा, परिवहन और देखभाल का खर्च बढ़ने का असर बकरों की कीमतों पर साफ दिखाई दे रहा है। कई व्यापारियों का कहना है कि पहले की तुलना में खर्च काफी बढ़ चुका है, जिसके कारण कीमतों में भी अंतर दिखाई दे रहा है। दूसरी ओर ग्राहक भी बजट के हिसाब से खरीदारी करने की कोशिश कर रहे हैं।

    भीषण गर्मी ने बढ़ाई परेशानी
    त्योहार की तैयारियों के बीच तेज गर्मी ने भी चिंता बढ़ाई है। लगातार बढ़ते तापमान का असर व्यापारियों और पशुओं दोनों पर देखा जा रहा है। कई जगह व्यापारी बकरों को गर्मी से बचाने के लिए विशेष इंतजाम कर रहे हैं। छाया, पानी और देखभाल पर अतिरिक्त ध्यान दिया जा रहा है ताकि पशुओं की सेहत प्रभावित न हो।

    मंडियों में बढ़ी उम्मीदें
    व्यापारियों को उम्मीद है कि त्योहार से पहले के अंतिम दिनों में बिक्री और बढ़ेगी। खरीदार भी अपने परिवार और परंपराओं के अनुसार तैयारी में जुटे हुए हैं। हर साल की तरह इस बार भी बकरीद की तैयारियों ने बाजारों में अलग उत्साह पैदा किया है और देशभर की मंडियां इस उत्साह का केंद्र बन गई हैं।