Blog

  • संजू की वापसी से बदला टीम इंडिया का ओपनिंग प्लान! अब 15 साल के वैभव के साथ उतर सकते हैं सैमसन

    संजू की वापसी से बदला टीम इंडिया का ओपनिंग प्लान! अब 15 साल के वैभव के साथ उतर सकते हैं सैमसन


    नई दिल्ली । टीम इंडिया के टॉप ऑर्डर में प्रयोग का दौर अभी खत्म होता नजर नहीं आ रहा है। अफगानिस्तान के खिलाफ होने वाली टी20 सीरीज से पहले संजू सैमसन की वापसी ने ओपनिंग कॉम्बिनेशन को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भारतीय टीम मैनेजमेंट 15 साल के युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी के साथ संजू सैमसन को पारी की शुरुआत करने का मौका दे सकता है। खास बात यह है कि भारत के लिए अभिषेक शर्मा के साथ संजू और वैभव दोनों ओपनिंग कर चुके हैं लेकिन संजू और वैभव की जोड़ी को अभी तक आजमाया नहीं गया है।

    टी20 वर्ल्ड कप के बाद भारतीय टीम ने अपनी पारी की शुरुआत को लेकर कई प्रयोग किए हैं। आईपीएल में अपने तूफानी अंदाज से पहचान बनाने वाले वैभव सूर्यवंशी को सीनियर टीम में मौका मिला और उन्हें अभिषेक शर्मा के साथ ओपनिंग करते देखा गया। दूसरी तरफ संजू सैमसन भी अभिषेक के साथ पारी की शुरुआत कर चुके हैं। ऐसे में अब टीम के सामने एक नया विकल्प मौजूद है जिसमें संजू का अनुभव और वैभव का बेखौफ अंदाज एक साथ दिखाई दे सकता है।

    इस संभावना को पूर्व भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज दीप दासगुप्ता ने भी दिलचस्प बताया है। उनका मानना है कि जब अभिषेक वैभव और अभिषेक संजू की जोड़ी को आजमाया जा चुका है तो संजू और वैभव को साथ भेजकर देखने में भी कोई नुकसान नहीं है। हालांकि यह सिर्फ एक संभावित प्रयोग है और अंतिम फैसला टीम मैनेजमेंट की रणनीति पर निर्भर करेगा।

    संजू और वैभव की जोड़ी इसलिए भी खास हो सकती है क्योंकि दोनों बल्लेबाज आक्रामक क्रिकेट खेलने के लिए जाने जाते हैं। संजू के पास अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का लंबा अनुभव है जबकि वैभव बेहद कम उम्र में अपने विस्फोटक बल्लेबाजी अंदाज से सुर्खियां बटोर चुके हैं। अगर दोनों एक साथ पावरप्ले में उतरते हैं तो भारत शुरुआत के छह ओवरों में विपक्षी गेंदबाजों पर जबरदस्त दबाव बनाने की कोशिश कर सकता है।

    हालांकि इस प्रयोग के साथ एक बड़ा सवाल अभिषेक शर्मा की भूमिका को लेकर भी खड़ा होगा। अभिषेक खुद टी20 क्रिकेट में बेहद आक्रामक बल्लेबाज हैं और पावरप्ले में तेजी से रन बनाने की क्षमता रखते हैं। ऐसे में अगर संजू और वैभव को ओपनिंग का मौका मिलता है तो अभिषेक को किस नंबर पर उतारा जाएगा यह भी देखने वाली बात होगी। टीम मैनेजमेंट के पास विकल्पों की कमी नहीं है लेकिन सही संतुलन बनाना चुनौती जरूर होगी।

    वैभव के लिए यह सीरीज खास महत्व रखती है। महज 15 साल की उम्र में सीनियर टीम का हिस्सा बनना ही अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। उनके प्रदर्शन पर हर किसी की नजर है और टीम मैनेजमेंट भी उन्हें लंबे समय के लिए तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है। ऐसे में उन्हें अलग अलग बल्लेबाजी संयोजनों में मौका देना भविष्य की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।

    अफगानिस्तान के खिलाफ तीन टी20 मैचों की सीरीज 13 सितंबर से शुरू होगी। पहला मुकाबला 13 सितंबर को अरुण जेटली स्टेडियम में खेला जाएगा जबकि दूसरा मैच 15 सितंबर और तीसरा मुकाबला 17 सितंबर को होगा। ऐसे में सीरीज शुरू होने से पहले सबसे ज्यादा उत्सुकता इसी बात को लेकर है कि टीम इंडिया पारी की शुरुआत के लिए किस संयोजन पर भरोसा करती है। अभिषेक संजू और वैभव तीनों विकल्प मौजूद हैं लेकिन अगर संजू और वैभव को साथ उतारा गया तो यह टीम इंडिया का एक नया और बेहद आक्रामक ओपनिंग प्रयोग होगा।

  • BRICS Summit: चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग पूरे लाव-लश्कर के साथ आएंगे दिल्ली….

    BRICS Summit: चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग पूरे लाव-लश्कर के साथ आएंगे दिल्ली….


    नई दिल्ली।
    भारत (India) की अध्यक्षता में 12-13 सितंबर को हो रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit) में हिस्सा लेने के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Chinese President Xi Jinping) दिल्ली आएंगे। सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति जिनपिंग की यात्रा का आधिकारिक कार्यक्रम अभी नहीं आया है लेकिन उनके दौरे को अंतिम रूप दिया जा रहा है। वे एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत आ रहे हैं।

    जिनपिंग की भारत यात्रा करीब सात सालों के बाद हो रही है। इससे पहले वे अक्तूबर 2019 में द्विपक्षीय वार्ता के लिए भारत आए थे। सूत्रों ने कहा कि जिनपिंग की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों में द्विपक्षीय वार्ता भी होगी जिसमें सीमा से संबंधित मुद्दों पर भी चर्चा होगी। ब्रिक्स में प्रमुख हस्तियों में जिनपिंग के अलावा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन होंगे। चुनाव के चलते ब्राजील के राष्ट्रपति लूला हिस्सा नहीं लेंगे। उसके भी विदेश मंत्री आएंगे। जबकि ईरान, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति के हिस्सा लेने की संभावना है।


    बांग्लादेशी पीएम के आने की संभावना नहीं

    बिम्स्टेक के अध्यक्ष के रूप में ब्रिक्स में आमंत्रित बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के सम्मेलन में आने के आसार नही हैं। संभावना है कि विदेश मंत्री बांग्लादेश का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। आपको बता दें कि बांग्लादेश शेख हसीना को वापस भेजने की मांग कर रहा है। इस वजह से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक स्तर पर तनाव बढ़ा है।

    तारिक रहमान की यात्रा को लेकर राष्ट्रपति भवन ने एक बार बयान भी जारी कर दिया था जिसे बाद में वापस लेना पड़ा। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि तारिक रहमान की यात्रा के लिए अनुकूल माहौल बनाने की जरूरत है। इस दौरे के रद्द होने के बाद कहा जा रहा था कि रहमान ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान भारत आ सकते हैं।हालांकि वह ब्रिक्स शिखऱ सम्मेलन में हिस्सा लेने भी नहीं आ रहे हैं।


    ब्रिक्स प्रधान न्यायाधीशों की बैठक शुरू

    ब्रिक्स प्रधान न्यायाधीश मंच की बैठक को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने वाणिज्यिक विवादों को सुलझाने के लिए मध्यस्थता एवं सुलह के लिए एक साझा मंच बनाने का प्रस्ताव भी रखा। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को यहां ब्रिक्स प्रधान न्यायाधीश मंच की बैठक का आयोजन किया। इसमें ब्रिक्स के सदस्य देशों और सहयोगी देशों के प्रधान न्यायाधीश, शीर्ष अदालतों के प्रमुख और वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी शामिल हुए।

    ब्रिक्स प्रधान न्यायाधीश मंच की बैठक के उद्घाटन के दिन प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने न्यायिक प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों के साथ कई द्विपक्षीय बैठकें कीं।सीजेआई ने तीन दिवसीय सम्मेलन के पहले दिन रूस, चीन, मिस्र, इंडोनेशिया, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), बेलारूस, कजाकिस्तान, दक्षिण अफ्रीका, ईरान और उज्बेकिस्तान के न्यायिक प्रमुखों से मुलाकात की।

  • ईरान से युद्ध के बीच अमेरिका ने सऊदी अरब के साथ 5 अरब डॉलर के हथियार सौदे को दी मंजूरी

    ईरान से युद्ध के बीच अमेरिका ने सऊदी अरब के साथ 5 अरब डॉलर के हथियार सौदे को दी मंजूरी


    वॉशिंगटन।
    अमेरिका (America) ने सऊदी अरब (Saudi Arabia) को करीब 5 अरब डॉलर ($5 billion) के हथियार (Weapons) और सैन्य उपकरण बेचने की संभावित डील को मंजूरी दे दी है। प्रस्तावित बिक्री में सटीक निशाना लगाने वाली जेडीएएम-ईआर प्रणालियां (JDAM-ER systems), हजारों बम और उनसे जुड़े उपकरण शामिल हैं। अमेरिकी विदेश विभाग ने इसकी जानकारी कांग्रेस को दी है।


    प्रस्तावित हथियार सौदे में क्या-क्या शामिल है?

    अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, सऊदी अरब ने 5,004 केएमयू-572 जेडीएएम गाइडेंस किट और 5,000 केएमयू-556 जेडीएएम गाइडेंस किट की मांग की है। इसके अलावा 5,004 बीएलयू-111 500-पाउंड सामान्य उपयोग वाले बम और 5,000 बीएलयू-117 2,000-पाउंड बम भी प्रस्तावित पैकेज का हिस्सा हैं। डील में फ्यूज सिस्टम, टारगेट डिटेक्टर, कंटेनर, स्पेयर पार्ट्स, सपोर्ट उपकरण और अन्य जरूरी सामान भी शामिल होंगे। इसके साथ अमेरिकी सरकार और ठेकेदारों की इंजीनियरिंग, तकनीकी और लॉजिस्टिक सेवाएं भी प्रस्तावित हैं।


    अमेरिका सऊदी अरब को ये हथियार क्यों देना चाहता है?

    अमेरिकी विदेश विभाग का कहना है कि इस संभावित बिक्री से सऊदी अरब की सुरक्षा मजबूत होगी और खाड़ी क्षेत्र में राजनीतिक स्थिरता तथा आर्थिक प्रगति को बढ़ावा मिलेगा। अमेरिका के मुताबिक, इससे सऊदी अरब की मौजूदा और भविष्य की क्षेत्रीय चुनौतियों से निपटने की क्षमता बेहतर होगी। विभाग ने कहा कि इससे सऊदी अरब की अपनी जमीन की रक्षा करने की क्षमता बढ़ेगी और अमेरिकी तथा खाड़ी क्षेत्र के सहयोगी देशों की सेनाओं के साथ उसकी सैन्य प्रणालियों की बेहतर तालमेल क्षमता विकसित होगी।


    क्या इस सौदे से क्षेत्र का सैन्य संतुलन बदलेगा?

    अमेरिकी आकलन के मुताबिक, प्रस्तावित लेनदेन से क्षेत्रीय सैन्य संतुलन में कोई बदलाव नहीं होगा। अमेरिका का यह भी कहना है कि सऊदी अरब इन हथियारों और सेवाओं को अपनी सैन्य व्यवस्था में आसानी से शामिल कर सकेगा। इस संभावित बिक्री के लिए मुख्य ठेकेदार बोइंग होगा, जिसका मुख्यालय वर्जीनिया में है। अमेरिकी सरकार ने कहा कि फिलहाल इस सौदे के साथ किसी ऑफसेट समझौते की जानकारी नहीं है।


    क्या इस हथियार सौदे का पश्चिम एशिया के तनाव से भी संबंध है?

    यह संभावित हथियार सौदा ऐसे समय सामने आया है, जब पश्चिम एशिया में सुरक्षा स्थिति को लेकर चिंताएं बढ़ी हुई हैं। क्षेत्र में अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष, सऊदी अरब को निशाना बनाकर हुए हमलों और यमन के हूती विद्रोहियों की गतिविधियों ने खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाई है। ऐसे माहौल में सऊदी अरब अपनी जमीन और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को संभावित हवाई तथा मिसाइल खतरों से बचाने की क्षमता मजबूत करना चाहता है।


    क्या अमेरिका और सऊदी अरब के रिश्ते सिर्फ रक्षा तक सीमित हैं?

    अमेरिका और सऊदी अरब के बीच हालिया सहयोग केवल रक्षा क्षेत्र तक सीमित नहीं है। एक महीने से ज्यादा समय पहले दोनों देशों ने शांतिपूर्ण परमाणु सहयोग के लिए भी समझौते किए थे। अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट और सऊदी ऊर्जा मंत्री अब्दुलअजीज बिन सलमान ने शांतिपूर्ण परमाणु सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसे आम तौर पर ‘123 समझौता’ कहा जाता है। इसके साथ द्विपक्षीय सुरक्षा उपायों से जुड़ा समझौता भी हुआ था।

    अमेरिकी ऊर्जा विभाग के मुताबिक, 123 समझौता से अमेरिकी कंपनियों को सऊदी अरब के उभरते नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में ज्यादा पहुंच मिल सकती है। इसके साथ अमेरिकी उद्योग, कामगारों और सप्लाई चेन को भी लाभ पहुंचाने की बात कही गई है। दोनों समझौते परमाणु सुरक्षा, सुरक्षा मानकों और परमाणु अप्रसार को मजबूत करने के साथ अमेरिका और सऊदी अरब के बीच रणनीतिक सहयोग बढ़ाने के लिए आधार तैयार करते हैं।

    क्या हथियार और परमाणु समझौते रिश्तों की नई दिशा दिखाते हैं?
    हालिया हथियार बिक्री की संभावित मंजूरी और परमाणु सहयोग समझौते अमेरिका-सऊदी रणनीतिक रिश्तों के व्यापक दायरे को दिखाते हैं। दोनों देशों के बीच सहयोग रक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और नागरिक परमाणु क्षेत्र तक फैला हुआ है। बदलते क्षेत्रीय सुरक्षा माहौल के बीच वॉशिंगटन और रियाद के बीच यह साझेदारी आने वाले समय में और महत्वपूर्ण हो सकती है।

  • यूरोप में अवैध प्रवासियों पर सख्ती…. बिना कानूनी अनुमति के रह रहे लोगों को डिपोर्ट करेंगे 5 देश

    यूरोप में अवैध प्रवासियों पर सख्ती…. बिना कानूनी अनुमति के रह रहे लोगों को डिपोर्ट करेंगे 5 देश


    कोपेनहेगन।
    यूरोप (Europe) में अवैध प्रवासियों (Illegal Migrants) और बिना कानूनी अनुमति के रह रहे लोगों पर शिकंजा कसने की तैयारी तेज हो गई है। डेनमार्क (Denmark) की मेजबानी में हुई बैठक में जर्मनी, ऑस्ट्रिया, ग्रीस, डेनमार्क और नीदरलैंड के समूहों ने बड़ा कदम उठाया है। इन पांच देशों ने यूरोपीय संघ (European Union) से बाहर के किसी देश में रिटर्न हब (प्रवासी वापसी केंद्र) बनाने को लेकर ठोस सहमति जताई है।

    जर्मनी के गृह मंत्री एलेक्जेंडर डोब्रिंडट ने कोपेनहेगन में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि इन देशों का लक्ष्य इसी साल ऐसे तीसरे देशों के साथ समझौते को अंतिम रूप देना है। हालांकि, अभी उन देशों के नामों का खुलासा नहीं किया गया है जहां ये केंद्र बनाए जाएंगे। यूरोपीय संसद ने जून में नई प्रवासन नीति को मंजूरी दी थी।


    मानवाधिकार संगठनों ने जताई चिंता

    इस योजना को लेकर मानवाधिकार संगठनों ने चिंता जताई है। काउंसिल ऑफ यूरोप ने इन केंद्रों को मानवाधिकारों के लिए जोखिम भरा बताया है। वहीं, डेनिश रिफ्यूजी काउंसिल की महासचिव शार्लोट स्लेंटे का कहना है कि इससे प्रवासियों के खतरनाक रास्ते नहीं रुकेंगे। डेनमार्क के आव्रजन और एकीकरण मंत्री मोर्टन बोद्स्कोव ने उम्मीद जताई है कि साल 2027 के अंत तक प्रवासियों को भेजने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। इस पूरी योजना पर चर्चा के लिए यह समूह सितंबर के अंत में जर्मनी के म्यूनिख में फिर बैठक करेगा।

  • देश में अस्पृश्यता के 891 केस लंबित…. इनमें आधे UP में, महाराष्ट्र दूसरे और गुजरात तीसरे नंबर पर

    देश में अस्पृश्यता के 891 केस लंबित…. इनमें आधे UP में, महाराष्ट्र दूसरे और गुजरात तीसरे नंबर पर


    नई दिल्ली।
    देशभर में अनुसूचित जाति (scheduled caste) के खिलाफ अस्पृश्यता (Untouchability) के 891 से ज्यादा मुकदमे (891 Cases) लंबित हैं। इन मामलों में किसी को कोई सजा नहीं हुई। जबकि 13 मामलों में आरोपी अपराध मुक्त हो गए। सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।

    इसमें साल 2024 के मामलों की स्थिति बताई गई है। इसके मुताबिक 886 मामले 2023 में लंबित हैं जबकि पांच मामले 2024 में और दर्ज हो गए। यह मामले विभिन्न अदालतों (Courts) में अंतिम निर्णय के लिए लंबित हैं। इनमें किसी को कोई सजा तब तक नहीं हो पाई थी। उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में अस्पृश्यता से जुड़े 426, महाराष्ट्र 166 व गुजरात में 98 मामले दर्ज हैं। यह मामले विभिन्न अदालतों में अंतिम निर्णय के लिए लंबित हैं। अनुसूचित जाति के लोगों के खिलाफ हुए अपराधिक मामलों की बात की जाए तो 2024 में पुलिस द्वारा ऐसे 48 मामले दर्ज हुए। इनमें केवल पांच मामलों में चार्जशीट दाखिल की गई। बाकी मामले पुलिस की जांच के स्तर पर लंबित हैं। कांग्रेस अध्यक्ष खरगे द्वारा इस्तेमाल मंच के शुद्धीकरण का मामला उत्तराखंड में इन दिनों सुर्खियां बना हुआ है। इस राज्य में कोई केस दर्ज नहीं है।


    केस दर्ज करने में महाराष्ट्र दूसरे और गुजरात तीसरे नंबर पर

    दोषियों को सजा दिलाने के लिए विशेष न्यायालय मौजूद : अस्पृश्यता से उत्पन्न किसी भी प्रकार की अक्षमता के शिकार व्यक्तियों को कानूनी सहायता दिलाने, अभियोजन शुरू करने अथवा अभियोजन की निगरानी करने के लिए अधिकारियों की नियुक्ति करना जैसे उपाय शामिल हैं। दोषियों को सजा दिलाने के लिए विशेष न्यायालयों की स्थापना भी की गई है। कई राज्य सरकारों ने समितियों का गठन किया है।


    शुद्धीकरण मामले में उत्तराखंड भाजपा अध्यक्ष समेत कई नेताओं पर केस दर्ज

    कर्नाटक में बंगलूरू के विधान सौध पुलिस थाने में उत्तराखंड भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट समेत कई नेताओं के खिलाफ जीरो एफआईआर दर्ज की गई। यह मामला कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की 8 अगस्त को हल्द्वानी में हुई रैली स्थल के शुद्धीकरण से जुड़ा हुआ है। कांग्रेस के एसटी विभाग के पूर्व उपाध्यक्ष टीआर रामप्पा ने 31 अगस्त को दी गई शिकायत में कहा कि खरगे की रैली के बाद भाजपा के कुछ सदस्यों और पदाधिकारियों ने 10 अगस्त को जनसभा स्थल का शुद्धीकरण किया। इसका मकसद आपत्तिजनक, अपमानजनक और जातिवादी सोच दिखाना था कि अनुसूचित जाति के मल्लिकार्जुन खरगे की मौजूदगी ने जगह को अपवित्र कर दिया। इसलिए इस जगह को रस्म के जरिये शुद्ध करने की जरूरत थी। शिकायत में कहा है कि यह न केवल आपत्तिजनक है, बल्कि खरगे की गरिमा के खिलाफ है। 

  • मेडल की जंग से पहले कंटेनर में रात गुजार रहे एथलीट, जानिए जापान के लिए SAI की ये अनोखी तैयारी क्यों है खास

    मेडल की जंग से पहले कंटेनर में रात गुजार रहे एथलीट, जानिए जापान के लिए SAI की ये अनोखी तैयारी क्यों है खास


    नई दिल्ली । जापान में होने वाले एशियन गेम्स 2026 में भारतीय एथलीट सिर्फ मैदान पर मेडल जीतने की तैयारी नहीं कर रहे हैं बल्कि उन्हें प्रतियोगिता स्थल पर मिलने वाली रहने की अलग व्यवस्था के लिए भी पहले से तैयार किया जा रहा है। इस बार आइची-नागोया में होने वाले एशियन गेम्स की सबसे बड़ी खासियतों में से एक यह है कि खिलाड़ियों के लिए पारंपरिक एथलीट्स विलेज नहीं बनाया गया है। खिलाड़ियों को कंटेनर क्रूज और दूसरी जगहों पर ठहराने की व्यवस्था की गई है। ऐसी स्थिति में भारतीय खिलाड़ियों को अचानक नए और सीमित माहौल का सामना न करना पड़े इसके लिए Sports Authority of India यानी SAI ने देश में ही एक अनोखी तैयारी शुरू कर दी है।

    पटियाला और बेंगलुरु में कंटेनर आधारित कमरे तैयार किए गए हैं जहां भारतीय एथलीट बारी बारी से रात गुजार रहे हैं। पहली नजर में यह व्यवस्था थोड़ी हैरान करने वाली लग सकती है क्योंकि कंटेनर में जगह सीमित होती है और खिलाड़ी आमतौर पर ट्रेनिंग के साथ आराम और रिकवरी के लिए पर्याप्त जगह के आदी होते हैं। लेकिन इस पहल का मकसद खिलाड़ियों को किसी असुविधा में डालना नहीं बल्कि उन्हें उस माहौल से पहले ही परिचित कराना है जिसका सामना उन्हें जापान पहुंचने के बाद करना पड़ सकता है।

    SAI अधिकारियों के मुताबिक करीब दो साल पहले ही यह स्पष्ट हो गया था कि एशियन गेम्स के दौरान खिलाड़ियों के लिए पारंपरिक एथलीट्स विलेज की व्यवस्था नहीं होगी। इसके बाद योजना बनाई गई कि भारतीय खिलाड़ियों को भारत में ही वैसा माहौल देकर मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार किया जाए। कोशिश यह है कि जापान पहुंचने पर कम जगह या अलग तरह की रहने की व्यवस्था खिलाड़ियों के प्रदर्शन और एकाग्रता पर असर न डाले।

    पटियाला में तैयार किया गया कंटेनर करीब 13 मीटर लंबा और लगभग तीन मीटर चौड़ा है। सीमित जगह का अधिकतम इस्तेमाल करते हुए इसमें खिलाड़ियों की जरूरत के मुताबिक कई सुविधाएं जोड़ी गई हैं। इसके दोनों सिरों पर ट्विन शेयरिंग बेडरूम बनाए गए हैं जबकि बीच में एक संकरी गैलरी है। कंटेनर में एयर कंडीशनिंग के साथ छोटी लॉन्ड्री एरिया वॉशिंग मशीन फ्रिज और सिंक वाली कॉम्पैक्ट किचन जैसी सुविधाएं भी हैं। बाथरूम में वॉश बेसिन टॉयलेट और शॉवर के लिए अलग हिस्से बनाए गए हैं। खिलाड़ियों का सामान रखने के लिए कैबिनेट और भारी किट बैग के लिए बेड के नीचे जगह भी बनाई गई है।

    दो बार के एशियन गेम्स चैंपियन शॉटपुटर तजिंदरपाल सिंह तूर ने भी इस अनुभव को उपयोगी बताया। करीब 6 फीट 4 इंच लंबे तजिंदर के लिए सीमित जगह में रहना सामान्य अनुभव से अलग था लेकिन उन्होंने माना कि अंदर जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हैं। उनका मानना है कि अगर खिलाड़ी पहली बार जापान पहुंचकर ऐसी जगह देखते तो शुरुआती समय उस माहौल को समझने और उसके साथ तालमेल बैठाने में निकल सकता था। भारत में पहले से अनुभव मिलने से यह परेशानी काफी कम हो सकती है।

    डिस्कस थ्रोअर सीमा कालीरामणा ने भी कंटेनर में दो रातें बिताईं। थ्रो इवेंट के खिलाड़ियों के लिए जगह की जरूरत कुछ ज्यादा होती है इसलिए शुरुआत में उन्हें भी थोड़ी परेशानी महसूस हुई। हालांकि दूसरे दिन तक उन्होंने इस वातावरण के साथ तालमेल बैठा लिया। यही इस पूरी पहल का उद्देश्य भी है कि खिलाड़ी छोटी से छोटी असुविधा के साथ जल्दी से जल्दी एडजस्ट करना सीखें।

    दिलचस्प बात यह है कि इन कंटेनरों को विशेष रूप से खरीदकर तैयार नहीं किया गया है। कोविड महामारी के दौरान NSNIS पटियाला में इनका इस्तेमाल वेटलिफ्टिंग और एथलेटिक्स के उपकरण रखने के लिए किया जाता था। अब इन्हीं पुराने कंटेनरों को एशियन गेम्स की तैयारी के लिए आवासीय सिमुलेटर में बदल दिया गया है। प्रतियोगिता के बाद भी इनका इस्तेमाल जारी रहेगा और इन्हें गेस्ट हाउस में तब्दील करने की योजना है।

    28 अगस्त से शुरू हुई इस कवायद में अब तक करीब आठ खिलाड़ी कंटेनर में रात गुजार चुके हैं और आगे भी तय कार्यक्रम के अनुसार अन्य एथलीट यहां रुकेंगे। असल में यह तैयारी सिर्फ रहने की जगह को लेकर नहीं बल्कि खिलाड़ियों की मानसिक मजबूती से जुड़ी है। भारतीय एथलीट जब जापान में मैदान पर उतरें तो उनके सामने कमरे की जगह उसकी सीमाएं या सुविधाएं नहीं बल्कि सिर्फ मेडल का लक्ष्य होना चाहिए। इसी सोच के साथ SAI ने पटियाला में एक छोटा सा जापान पहले ही तैयार कर दिया है।

  • 11 सितंबर के बाद मुंबई में फिर जुटेगा मराठा समाज, मनोज जरांगे ने सरकार को दी आर-पार की चेतावनी

    11 सितंबर के बाद मुंबई में फिर जुटेगा मराठा समाज, मनोज जरांगे ने सरकार को दी आर-पार की चेतावनी


    नई दिल्ली । महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर तेजी से गरमा गया है। जालना के अंतरवाली सराटी गांव में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख नेता मनोज जरांगे ने सरकार को अब साफ तौर पर अल्टीमेटम दे दिया है। जरांगे ने कहा है कि सरकार के पास 11 सितंबर तक का समय है। अगर इस अवधि में उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं लिया गया तो 12 सितंबर को आंदोलन मुंबई की ओर कूच करेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि मांगें पूरी होने तक उनका अनशन खत्म नहीं होगा।

    मनोज जरांगे पिछले कई दिनों से मराठा समुदाय को आरक्षण देने और पात्र मराठों को कुनबी जाति प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर हैं। लगातार अनशन के कारण उनकी तबीयत को लेकर भी चिंता बढ़ी है। प्रदर्शन स्थल पर मौजूद डॉक्टरों ने उन्हें ड्रिप यानी आईवी फ्लूइड लेने की सलाह दी लेकिन जरांगे ने इसे लेने से इनकार कर दिया। इसके बावजूद उन्होंने आंदोलन जारी रखने का फैसला किया है और सरकार पर मांगों को जल्द पूरा करने का दबाव बनाया है।
    मनोज जरांगे पिछले कई दिनों से मराठा समुदाय को आरक्षण देने और पात्र मराठों को कुनबी जाति प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर हैं। लगातार अनशन के कारण उनकी तबीयत को लेकर भी चिंता बढ़ी है। प्रदर्शन स्थल पर मौजूद डॉक्टरों ने उन्हें ड्रिप यानी आईवी फ्लूइड लेने की सलाह दी लेकिन जरांगे ने इसे लेने से इनकार कर दिया। इसके बावजूद उन्होंने आंदोलन जारी रखने का फैसला किया है और सरकार पर मांगों को जल्द पूरा करने का दबाव बनाया है।

    गुरुवार को महाराष्ट्र सरकार की ओर से मंत्रियों और विधायकों का एक प्रतिनिधिमंडल भी जरांगे से मिलने पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल में मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल और उदय सामंत के साथ एमएलसी प्रसाद लाड और विधायक मकरंद पाटिल शामिल थे। सरकार की ओर से जरांगे की बिगड़ती सेहत का हवाला देते हुए उनसे अनशन खत्म करने या कुछ समय के लिए स्थगित करने की अपील की गई। सरकार ने यह भी बताया कि करीब 58 लाख कुनबी रिकॉर्ड अब तक खोजे जा चुके हैं और कुनबी प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी। हालांकि इन आश्वासनों के बावजूद जरांगे अपने आंदोलन को खत्म करने के लिए तैयार नहीं हुए।

    जरांगे ने मराठा समुदाय के लोगों से 4 सितंबर से कुनबी प्रमाणपत्र के लिए आवेदन करने की अपील भी की है। उनका कहना है कि पुराने पारिवारिक रिकॉर्ड खून के रिश्तों और वंशावली से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर पात्र लोग प्रमाणपत्र के लिए आवेदन कर सकते हैं। कुनबी समुदाय अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी के अंतर्गत आता है। जरांगे की प्रमुख मांग है कि पात्र मराठों को कुनबी के रूप में मान्यता दी जाए ताकि उन्हें ओबीसी आरक्षण का लाभ मिल सके।

    इसके अलावा जरांगे की मांगों में सतारा गजट के आधार पर आरक्षण लागू करना आंदोलन के दौरान दर्ज पुलिस मामलों को वापस लेना और आंदोलन में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को सरकारी नौकरी तथा आर्थिक सहायता देना भी शामिल है। इन मांगों को लेकर सरकार और जरांगे के बीच बातचीत जारी है लेकिन फिलहाल किसी अंतिम समाधान तक बात नहीं पहुंची है।

    मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि सरकार संविधान और कानून के दायरे में आने वाली मांगों पर बातचीत के लिए तैयार है। वहीं उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी कहा है कि सरकार मराठा समुदाय को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है लेकिन किसी दूसरे वर्ग के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। ऐसे में सरकार के सामने मराठा आरक्षण की मांग को लेकर संतुलन बनाने की बड़ी चुनौती है।

    अब सबकी नजर 11 सितंबर पर टिकी है। जरांगे इसे अपना आखिरी भूख हड़ताल बता चुके हैं। उनका साफ कहना है कि अगर तय समय तक मांगों पर अमल नहीं हुआ तो 12 सितंबर को मुंबई में आंदोलन किया जाएगा। इस ऐलान के बाद महाराष्ट्र की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ गई है। आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत किस दिशा में जाती है और क्या 11 सितंबर से पहले कोई समाधान निकलता है इस पर पूरे महाराष्ट्र की नजर रहेगी।

  • मिर्जापुर द मूवी में रवि किशन का दिखा दबदबा, बब्बन बबुआ बनकर गुड्डू-मुन्ना पर भारी पड़े अभिनेता

    मिर्जापुर द मूवी में रवि किशन का दिखा दबदबा, बब्बन बबुआ बनकर गुड्डू-मुन्ना पर भारी पड़े अभिनेता


    नई दिल्ली । मिर्जापुर की गद्दी की लड़ाई एक बार फिर बड़े पर्दे पर पहुंच चुकी है और इस बार इस जंग में रवि किशन ने ऐसी एंट्री मारी है जिसने पूरी कहानी का रंग ही बदल दिया है। 4 सितंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई मिर्जापुर द मूवी में रवि किशन बब्बन बबुआ के किरदार में नजर आ रहे हैं। फिल्म में उनका अंदाज इतना दमदार है कि कई मौकों पर गुड्डू पंडित और मुन्ना भैया जैसे पुराने और चर्चित किरदार भी उनके सामने कमजोर पड़ते दिखाई देते हैं। फिल्म की शुरुआती प्रतिक्रियाओं में भी रवि किशन के अभिनय को खास तौर पर सराहा जा रहा है।

    मिर्जापुर की दुनिया में अब तक कालीन भैया गुड्डू पंडित और मुन्ना भैया के बीच सत्ता और वर्चस्व की लड़ाई देखने को मिली है लेकिन फिल्म इस कहानी में एक नया खिलाड़ी लेकर आती है। बब्बन बबुआ यानी रवि किशन की नजर मिर्जापुर की गद्दी पर है और वह कालीन भैया को रास्ते से हटाकर खुद इस सत्ता का मालिक बनना चाहता है। उसका किरदार शुरुआत से ही आक्रामक तेवर और दबदबे के साथ सामने आता है। कहानी में वह एक कारोबारी डील के बहाने कालीन भैया के करीब पहुंचता है लेकिन उसके इरादे कुछ और ही होते हैं।

    रवि किशन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि उन्होंने बब्बन बबुआ को सिर्फ एक आम विलेन की तरह पेश नहीं किया है। उनके हावभाव संवाद बोलने का अंदाज और पर्दे पर मौजूदगी किरदार को अलग पहचान देते हैं। एक्शन दृश्यों में उनका बाहुबल नजर आता है तो भावनात्मक दृश्यों में भी उन्होंने अपनी पकड़ बनाए रखी है। यही वजह है कि फिल्म में उन्हें अच्छा खासा स्क्रीन टाइम मिला है और कई दर्शकों के लिए वह फिल्म का सबसे बड़ा सरप्राइज पैकेज बनकर उभरे हैं।

    फिल्म के क्लाइमैक्स में रवि किशन का किरदार और भी ज्यादा प्रभावशाली नजर आता है। बब्बन बबुआ जिस अंदाज में गुड्डू पंडित और मुन्ना भैया से भिड़ता है वह दृश्य फिल्म के चर्चित हिस्सों में शामिल हो गया है। पर्दे पर उनका रौब और आक्रामकता देखकर दर्शकों के बीच सीटी और तालियों का माहौल बनने की बात सामने आई है। इस तरह रवि किशन ने एक बार फिर साबित किया है कि मजबूत स्क्रीन प्रेजेंस वाला अभिनेता छोटे या बड़े किसी भी किरदार को यादगार बना सकता है।

    हालांकि फिल्म में सिर्फ रवि किशन ही आकर्षण का केंद्र नहीं हैं। पंकज त्रिपाठी एक बार फिर कालीन भैया के रूप में अपने पुराने दबदबे के साथ लौटे हैं। अली फजल गुड्डू पंडित और दिव्येंदु शर्मा मुन्ना भैया के चर्चित किरदारों में फिर दिखाई दे रहे हैं। फिल्म की कहानी में पुराने चेहरों के साथ नए किरदारों का मेल देखने को मिलता है जिससे मिर्जापुर की दुनिया और ज्यादा विस्तृत होती नजर आती है।

    फिल्म का निर्देशन गुरमीत सिंह ने किया है और कहानी व लेखन की जिम्मेदारी पुनीत कृष्णा ने संभाली है। फिल्म की कहानी मिर्जापुर सीरीज की टाइमलाइन से जुड़ी है और इसी वजह से दर्शकों को कई ऐसे किरदार फिर पर्दे पर नजर आते हैं जिन्हें आगे की कहानी में अलग परिस्थितियों में देखा गया था। मिर्जापुर द मूवी में रवि किशन की बब्बन बबुआ के रूप में एंट्री ने सत्ता की इस पुरानी लड़ाई में एक नया कोण जोड़ दिया है।

    कुल मिलाकर मिर्जापुर द मूवी में रवि किशन ने बब्बन बबुआ के किरदार के जरिए अपना अलग भौकाल खड़ा किया है। फिल्म में जहां पुराने किरदारों की वापसी दर्शकों को रोमांचित करती है वहीं रवि किशन की दमदार मौजूदगी कहानी में नया तनाव और उत्साह पैदा करती है। बब्बन बबुआ का किरदार कितना ताकतवर है यह फिल्म देखने के बाद साफ महसूस होता है लेकिन इतना जरूर है कि इस बार मिर्जापुर की गद्दी की लड़ाई में रवि किशन ने अपनी जबरदस्त मौजूदगी दर्ज करा दी है।

  • शनिवार की पूजा से पहले जरूर जान लें ये नियम, इन गलतियों के कारण शनि देव की कृपा और पूजा का पूर्ण फल मिलना हो सकता है मुश्किल

    शनिवार की पूजा से पहले जरूर जान लें ये नियम, इन गलतियों के कारण शनि देव की कृपा और पूजा का पूर्ण फल मिलना हो सकता है मुश्किल


    नई दिल्ली । शनिवार का दिन न्याय के देवता और कर्मफलदाता शनि देव को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनि देव व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। इसलिए शनिवार के दिन उनकी पूजा करते समय श्रद्धा के साथ नियमों का पालन करना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। कई लोग शनि देव की कृपा पाने और जीवन में आने वाली परेशानियों को दूर करने की कामना से शनिवार को व्रत रखते हैं पूजा करते हैं दान करते हैं और मंदिर जाकर शनि देव के दर्शन करते हैं। हालांकि पूजा में की गई कुछ छोटी गलतियां धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूजा के पूर्ण फल से वंचित कर सकती हैं। ऐसे में शनिवार की पूजा करते समय विशेष सावधानी बरतना जरूरी है।

    शनिवार के दिन सबसे पहले मन और व्यवहार की शुद्धता पर ध्यान देना चाहिए। केवल पूजा पाठ और धार्मिक कर्मकांड करना ही पर्याप्त नहीं माना जाता बल्कि अपने कर्मों को भी सही रखना जरूरी होता है। शनि देव को न्याय का देवता कहा जाता है इसलिए किसी कमजोर व्यक्ति को परेशान करना किसी का अपमान करना झूठ बोलना या किसी के साथ अन्याय करना उचित नहीं माना जाता। धार्मिक मान्यता है कि शनिवार के दिन विशेष रूप से गरीब जरूरतमंद और असहाय लोगों के प्रति संवेदनशील रहना चाहिए। किसी जरूरतमंद की सहायता करना और सामर्थ्य के अनुसार दान करना शुभ माना जाता है।

    शनिवार की पूजा में साफ सफाई और पवित्रता का भी विशेष महत्व है। पूजा करने से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए और पूजा स्थल को साफ रखना चाहिए। पूजा को जल्दबाजी में पूरा करने के बजाय शांत मन और पूरी श्रद्धा के साथ शनि देव का स्मरण करना बेहतर माना जाता है। कई लोग केवल अपनी परेशानियां दूर करने की इच्छा से पूजा करते हैं लेकिन धार्मिक दृष्टि से सच्ची श्रद्धा और अच्छे कर्मों के साथ की गई आराधना को अधिक महत्वपूर्ण माना गया है।

    शनिवार के दिन दान पुण्य का भी विशेष महत्व बताया गया है। जरूरतमंद लोगों को भोजन कराना वस्त्र दान करना या अपनी क्षमता के अनुसार किसी की सहायता करना शुभ माना जाता है। हालांकि दान करते समय दिखावा और अहंकार से बचना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार दान का उद्देश्य केवल प्रसिद्धि पाना नहीं बल्कि निस्वार्थ भाव से किसी जरूरतमंद की सहायता करना होना चाहिए। यही भावना पूजा और धार्मिक कर्मों को अधिक सार्थक बनाती है।

    शनिवार को पीपल के वृक्ष की पूजा और दीपदान की परंपरा भी कई स्थानों पर प्रचलित है। लेकिन पूजा करते समय स्थानीय परंपराओं और धार्मिक नियमों का ध्यान रखना चाहिए। किसी भी धार्मिक कार्य को केवल अंधविश्वास के आधार पर करने के बजाय श्रद्धा और सही जानकारी के साथ करना उचित माना जाता है। शनि देव की पूजा में सबसे महत्वपूर्ण बात यह मानी जाती है कि व्यक्ति अपने जीवन में संयम ईमानदारी और न्याय का मार्ग अपनाए।

    इसलिए शनिवार की पूजा करते समय केवल विधि विधान पर ध्यान देने के बजाय अपने व्यवहार और कर्मों पर भी नजर डालनी चाहिए। जरूरतमंद की मदद करना बड़ों का सम्मान करना किसी के साथ अन्याय न करना और सच्चाई के मार्ग पर चलना शनि देव की आराधना का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। श्रद्धा के साथ पूजा और अच्छे कर्मों का मेल ही जीवन में सकारात्मकता लाने का माध्यम बन सकता है। शनिवार के दिन इन बातों का ध्यान रखकर की गई पूजा धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिक फलदायी और सार्थक मानी जाती है।

  • तलाक के बाद भी एक्स वाइव्स के करीब हैं आमिर खान, दोस्त बोला- वह खुद कहते हैं मैं अच्छा पति नहीं, बेहतर एक्स हसबैंड हूं

    तलाक के बाद भी एक्स वाइव्स के करीब हैं आमिर खान, दोस्त बोला- वह खुद कहते हैं मैं अच्छा पति नहीं, बेहतर एक्स हसबैंड हूं


    नई दिल्ली । बॉलीवुड के मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान अपनी फिल्मों के साथ साथ अपनी निजी जिंदगी को लेकर भी अक्सर चर्चा में रहते हैं। आमिर की जिंदगी में रिश्तों ने कई उतार चढ़ाव देखे हैं और उनकी दो शादियां टूट चुकी हैं लेकिन खास बात यह है कि इन रिश्तों के खत्म होने के बाद भी उनके बीच कड़वाहट ने जगह नहीं बनाई। आमिर खान के करीबी दोस्त और फिल्म लगान में बाघा का किरदार निभाने वाले अभिनेता अमीन हाजी ने उनकी निजी जिंदगी से जुड़े कई दिलचस्प पहलुओं का खुलासा किया है। अमीन के मुताबिक आमिर खान खुद मजाक में कहते हैं कि वह पति से ज्यादा अच्छे एक्स हसबैंड हैं।

    अमीन हाजी ने एक बातचीत के दौरान बताया कि आमिर खान ने तलाक के बाद भी अपनी दोनों एक्स वाइव्स रीना दत्ता और किरण राव के साथ रिश्ते खराब नहीं होने दिए। उनके अनुसार आमिर और उनकी पूर्व पत्नियों के बीच आज भी सच्चा प्यार सम्मान और एक दूसरे की भावनाओं की कद्र मौजूद है। यही वजह है कि अलग होने के बाद भी वे कई मौकों पर परिवार के रूप में साथ नजर आते रहे हैं। अमीन और उनकी पत्नी शार्लेट ने आमिर की पर्सनल लाइफ पर बात करते हुए कहा कि रिश्ते खत्म होने के बाद भी उनमें सम्मान बनाए रखना हर किसी के लिए आसान नहीं होता लेकिन आमिर ने इसे बेहद सहज तरीके से संभाला है।

    अमीन हाजी ने बताया कि आमिर खान अपनी एक्स वाइव्स की निजी पसंद और उनकी अलग पहचान का भी पूरा सम्मान करते हैं। रीना दत्ता आज भी अपनी पहचान के साथ जीती हैं और आमिर ने हमेशा उनके फैसलों की इज्जत की है। दोस्त के मुताबिक आमिर मानते हैं कि शादी खत्म होने का मतलब यह नहीं है कि दो लोगों के बीच सम्मान और अपनापन भी खत्म हो जाए। शायद यही सोच उनके रिश्तों को बाकी सेलिब्रिटी तलाक से अलग बनाती है।

    आमिर खान की पहली शादी रीना दत्ता के साथ साल 1986 में हुई थी। फिल्मों में बड़ी पहचान बनाने से पहले ही दोनों ने प्रेम विवाह किया था। इस रिश्ते से उनके दो बच्चे जुनैद खान और आयरा खान हैं। हालांकि करीब 16 साल बाद साल 2002 में दोनों अलग हो गए लेकिन बच्चों और परिवार के लिए दोनों के बीच रिश्ता हमेशा सहज बना रहा। इसके बाद आमिर खान ने फिल्ममेकर किरण राव से साल 2005 में शादी की। दोनों का एक बेटा आजाद है। साल 2021 में आमिर और किरण ने अलग होने का फैसला किया लेकिन तलाक के बाद भी दोनों की दोस्ती और पारिवारिक बॉन्डिंग चर्चा में रही।

    आमिर खान की जिंदगी में रिश्तों का एक नया अध्याय भी जुड़ चुका है। इसी साल जुलाई में उन्होंने गौरी स्प्रैट के साथ रजिस्टर्ड मैरिज की थी। इस शादी में उनके करीबी दोस्त और फिल्म जगत से जुड़े कुछ खास लोग शामिल हुए थे जिनमें अमीन हाजी भी मौजूद थे। आमिर की पर्सनल लाइफ को करीब से जानने वाले लोगों का मानना है कि वह रिश्तों को खत्म करने के बजाय उन्हें नई समझ और सम्मान के साथ आगे बढ़ाने में विश्वास रखते हैं।

    दो शादियों के टूटने के बावजूद रीना दत्ता और किरण राव के साथ आमिर खान का मजबूत रिश्ता यह दिखाता है कि अलगाव के बाद भी रिश्तों में सम्मान और अपनापन बरकरार रखा जा सकता है। शायद इसी वजह से अमीन हाजी की यह बात सबसे ज्यादा चर्चा में है कि आमिर खुद को पति से ज्यादा अच्छा एक्स हसबैंड मानते हैं। आमिर की जिंदगी की यही सोच अब उनके फैंस के बीच भी खूब सुर्खियां बटोर रही है।