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  • इलाहाबाद हाईकोर्ट के प्रतिनिधि संबंधी आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर टली सुनवाई, शीर्ष अदालत ने कहा- बातचीत चल रही है तो दे रहे हैं समय

    इलाहाबाद हाईकोर्ट के प्रतिनिधि संबंधी आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर टली सुनवाई, शीर्ष अदालत ने कहा- बातचीत चल रही है तो दे रहे हैं समय

    नई दिल्ली । देश की सर्वोच्च अदालत ने मथुरा स्थित ऐतिहासिक श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद विवाद से जुड़ी एक महत्वपूर्ण याचिका पर होने वाली सुनवाई को आगामी 12 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दिया है। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की कार्यवाही जैसे ही शुरू हुई, पीठ को यह अवगत कराया गया कि इस विवाद से जुड़े विभिन्न हिंदू पक्षों के बीच आपस में कुछ अनौपचारिक बातचीत का दौर चल रहा है। यह आंतरिक विचार-विमर्श इस मुख्य बिंदु पर केंद्रित है कि अदालत के समक्ष चल रहे विभिन्न मुकदमों में से किसे मुख्य मुकदमा माना जाए और किसका दावा प्राथमिक होगा। जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की खंडपीठ ने वादियों के बीच चल रही इसी ऑफ-द-रिकॉर्ड चर्चा को ध्यान में रखते हुए मामले को आगे बढ़ाने का निर्देश जारी किया।

    अदालत की कार्यवाही की शुरुआत में ही पीठ ने विभिन्न हिंदू पक्षों का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ताओं से उनके बीच चल रही इस आंतरिक बातचीत की प्रगति के संबंध में सीधे सवाल पूछे। न्यायाधीशों ने स्पष्ट किया कि यदि वादियों के बीच मामले को सुलझाने अथवा मुकदमों के एकीकरण को लेकर कोई गंभीर विमर्श चल रहा है, तो अदालत उन्हें उचित समय देने के लिए तैयार है। इस दौरान एक हिंदू पक्ष के वकील ने पीठ से यह भी आग्रह किया कि इस आंतरिक बातचीत को पूरी तरह अनौपचारिक रखा जाए और न्यायालय अपने लिखित आदेश में इस चर्चा का उल्लेख दर्ज न करे। हालांकि, पीठ ने तार्किक रुख अपनाते हुए कहा कि यदि पक्षकारों के बीच कोई सकारात्मक विमर्श चल रहा है, तो उसे आदेश में दर्ज करने में कोई विधिक बाधा नहीं होनी चाहिए।

    सर्वोच्च न्यायालय की खंडपीठ ने मामले को बार-बार स्थगित किए जाने की प्रवृत्ति पर भी ध्यान दिलाया। पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस संवेदनशील मामले को पूर्व में भी कई बार टाला जा चुका है, इसलिए इस बार स्थगन का आदेश केवल इसी ठोस आधार पर दिया जा रहा है कि पक्षकार आपसी सहमति और मुकदमों के स्वरूप को लेकर किसी निर्णय पर पहुंच सकें। अदालत ने वकीलों को आश्वस्त किया कि वे किसी भी पक्ष को बातचीत के लिए विवश नहीं कर रहे हैं, बल्कि वादियों के बीच के समन्वय को देखते हुए ही प्रक्रिया को समय दे रहे हैं।

    यह पूरा विधिक विवाद दरअसल इलाहाबाद हाईकोर्ट के वर्ष 2025 के एक आदेश के खिलाफ दायर याचिका से जुड़ा हुआ है। हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में एक विशिष्ट मुकदमे से जुड़े हिंदू पक्ष को भगवान श्रीकृष्ण के सभी भक्तों का आधिकारिक प्रतिनिधि स्वीकार कर लिया था, जिसे दूसरे हिंदू पक्ष ने चुनौती दी है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि इस प्रकार का एकपक्षीय प्रतिनिधित्व अन्य वादियों के दावों को प्रभावित कर सकता है। अब सभी पक्षों की नजरें 12 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह स्पष्ट होगा कि हिंदू पक्षों की आपसी बातचीत से मुकदमों की रूपरेखा में क्या बदलाव आता है।

  • शहीद दिवस रैली से ठीक पहले कामरहाटी के कद्दावर विधायक ने छोड़ी पार्टी, भ्रष्टाचार के संगीन आरोप लगा कर दी खुली चुनौती

    शहीद दिवस रैली से ठीक पहले कामरहाटी के कद्दावर विधायक ने छोड़ी पार्टी, भ्रष्टाचार के संगीन आरोप लगा कर दी खुली चुनौती

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस में आगामी 21 जुलाई की शहीद दिवस रैली से ठीक पहले एक बहुत बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। प्रवर्तन निदेशालय द्वारा सपरिवार समन जारी किए जाने के बाद कामरहाटी विधानसभा क्षेत्र के वरिष्ठ और कद्दावर विधायक मदन मित्रा ने मंगलवार रात को ही पार्टी के आधिकारिक नेतृत्व से दूरी बना ली और सुबह होते ही ममता बनर्जी के आधिकारिक कालीघाट गुट को औपचारिक रूप से अलविदा कह दिया। तृणमूल कांग्रेस से इस्तीफा देने के तुरंत बाद मदन मित्रा ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व, विशेष रूप से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के खिलाफ बेहद आक्रामक रुख अख्तियार करते हुए कई सनसनीखेज और गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे राज्य का सियासी पारा पूरी तरह से गरमा गया है।

    एक प्रमुख बांग्ला समाचार चैनल को दिए गए अपने विस्तृत साक्षात्कार में पूर्व तृणमूल नेता ने पार्टी के भीतर व्याप्त सांगठनिक ढांचे और नेतृत्व की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने बेहद आक्रामक लहजे में खुले मंच से यह दावा किया कि वह इस तथ्य को पूरी तरह साबित कर सकते हैं कि वर्तमान सत्ता पक्ष की टीम में शामिल प्रत्येक दस में से आठ लोग भ्रष्टाचार में डूबे हुए हैं। उन्होंने स्वयं को पूरी तरह से पाक-साफ बताते हुए नेतृत्व को खुली चुनौती दी कि यदि कोई भी व्यक्ति उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों को प्रमाणित कर देता है, तो वह राजनीति छोड़ने के साथ-साथ अत्यंत कठोर कदम उठाने से भी पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने विपक्ष के खेमे में जाने और वहां मौजूद अन्य नेताओं के संदर्भ में पूछे गए सवालों पर स्पष्ट किया कि परिस्थितिजन्य राजनीति के तहत बड़े सांगठनिक बदलाव अब अवश्यंभावी हो चुके हैं।

    अभिषेक बनर्जी के पार्टी में तेजी से बढ़ते प्रभाव और उनके काम करने के तौर-तरीकों को मुख्य निशाना बनाते हुए मदन मित्रा ने भूतकाल की राजनीतिक घटनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब अभिषेक बनर्जी ने सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया था, तब उनके सामने संगठन में पार्थ चटर्जी, मुकुल रॉय और सुब्रत बख्शी जैसे अत्यंत अनुभवी और वरिष्ठ चेहरे मौजूद थे। आरोप के अनुसार, इन वरिष्ठ चेहरों को आगे रखकर पृष्ठभूमि से पूरी तरह से समानांतर सत्ता चलाने का प्रयास किया गया। मित्रा ने वर्तमान सांगठनिक गतिविधियों को बेहद नकारात्मक बताते हुए आरोप लगाया कि समकालीन राजनीति में इतनी जटिल और रणनीतिक प्रवृत्तियां किसी अन्य नेता में नहीं हैं और उनके सामने विरोधी राजनीतिक दल जैसे माकपा और भाजपा के नेता भी काफी पीछे नजर आते हैं।

    राजनीतिक हलकों में इस प्रकार के तीखे बयानों के बाद संभावित सुरक्षा खतरों और पार्टी की ओर से होने वाली किसी भी जवाबी कार्रवाई के डर के संबंध में पूछे गए प्रश्नों का मदन मित्रा ने बेहद बेबाकी से जवाब दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब उनके मन से किसी भी प्रकार का राजनीतिक या प्रशासनिक भय पूरी तरह समाप्त हो चुका है और वह मानसिक रूप से पूरी तरह शांत हैं। उन्होंने आगे पलटवार करते हुए कहा कि उनके ऊपर किसी भी प्रकार का दबाव बनाने या संगठनात्मक हमला करने का साहस विरोधियों में नहीं है। अभिषेक बनर्जी के क्षेत्रीय जनाधार पर गंभीर सवालिया निशान लगाते हुए उन्होंने दावा किया कि उनके स्थानीय क्षेत्र के नागरिक भी उनके साथ खड़े नहीं हैं, जिसके संबंध में विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक आंकड़ों का हवाला दिया गया है, जिसका आज तक संगठन की ओर से कोई आधिकारिक खंडन जारी नहीं किया जा सका है।

  • मंदिर समिति के अध्यक्ष के पूर्व निजी सहायक प्रमोद नौटियाल पर कसा शिकंजा, चोरी की रकम की बरामदगी के लिए रिमांड की तैयारी में जुटी पुलिस

    मंदिर समिति के अध्यक्ष के पूर्व निजी सहायक प्रमोद नौटियाल पर कसा शिकंजा, चोरी की रकम की बरामदगी के लिए रिमांड की तैयारी में जुटी पुलिस

    नई दिल्ली । उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध और पवित्र बद्रीनाथ धाम में चढ़ावे की राशि की चोरी के मामले में चमोली पुलिस की विशेष जांच टीम ने एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा किया है। पुलिस की ओर से आधिकारिक तौर पर दावा किया गया है कि गिरफ्तार किया गया मुख्य आरोपी प्रमोद नौटियाल मंदिर परिसर में दान की गई धनराशि की गिनती के दौरान एक या दो बार नहीं, बल्कि कम से कम चार अलग-अलग अवसरों पर नकदी की हेराफेरी करते हुए सीसीटीवी कैमरों में कैद हुआ है। इस हाई-प्रोफाइल मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस की विंग लगातार तकनीकी साक्ष्यों को जुटाने में लगी हुई है। पुलिस अब अदालत के माध्यम से आरोपी की हिरासत प्राप्त करने की कानूनी प्रक्रिया में जुट गई है ताकि चोरी की गई वास्तविक धनराशि और अन्य कीमती सामान को बरामद किया जा सके।

    चमोली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, जांच दल ने अब तक मंदिर परिसर में हुई दान की गिनती से संबंधित कई महत्वपूर्ण तिथियों की सीसीटीवी फुटेज का बारीकी से विश्लेषण किया है। इनमें मुख्य रूप से जून और जुलाई महीने के शुरुआती हफ्तों की रिकॉर्डिंग शामिल हैं, जहां आरोपी प्रमोद नौटियाल कथित तौर पर बड़ी ही चालाकी से नकदी को छिपाकर अपने पास रखते हुए दिखाई दे रहा है। हालांकि, तकनीकी सीमाओं के कारण जांच टीम के सामने एक बड़ी चुनौती भी खड़ी हो गई है। वर्तमान यात्रा सीजन के दौरान अब तक दर्जनों बार दान की गिनती की जा चुकी है, परंतु सीसीटीवी कैमरों का डिजिटल स्टोरेज फुल हो जाने की वजह से पुरानी फुटेज स्वतः ही डिलीट हो चुकी हैं। ऐसी स्थिति में पुलिस को अंदेशा है कि आरोपी पूर्व में भी इस तरह की वारदातों को अंजाम देता आ रहा होगा, जिसके साक्ष्य मिट चुके हैं।

    गौरतलब है कि इस पूरे मामले का मुख्य आरोपी प्रमोद नौटियाल श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के शीर्ष नेतृत्व का बेहद करीबी और पूर्व निजी सहायक रह चुका है। वह लंबे समय से इस प्रतिष्ठित धार्मिक संस्थान से जुड़ा हुआ था और उसके पास वीआईपी प्रोटोकॉल के साथ-साथ मंदिर में आने वाले चढ़ावे की गिनती की प्रत्यक्ष निगरानी करने की अत्यंत महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी थी। इस ऊंचे और जिम्मेदार पद पर रहने के कारण ही उसे नकदी की गिनती वाले संवेदनशील क्षेत्र में निर्बाध प्रवेश की अनुमति मिली हुई थी, जिसका उसने कथित तौर पर दुरुपयोग किया। आरोपी को पुलिस ने उसके देहरादून स्थित आवास से गिरफ्तार किया था, जिसके बाद अदालत ने उसे चौदह दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।

    पुलिस और विशेष जांच दल की अब तक की पूछताछ में आरोपी ने अपने ऊपर लगे आरोपों को स्वीकार नहीं किया है और वह लगातार जांच अधिकारियों को गुमराह करने का प्रयास कर रहा है। वर्तमान में पुलिस के हाथ केवल एक शालिग्राम शिला लगी है, जबकि चोरी की गई नकद राशि अथवा सोने-चांदी के सिक्कों की बरामदगी अभी भी शेष है। इसी वजह से पुलिस अब उच्च न्यायालय अथवा सत्र अदालत के समक्ष दोबारा रिमांड का आवेदन प्रस्तुत करने की रणनीति बना रही है। इस प्रशासनिक विफलता और सुरक्षा में चूक के बाद मंदिर समिति ने भी कड़ा रुख अख्तियार करते हुए आंतरिक व्यवस्था में बड़े बदलाव किए हैं, जिसके तहत दान प्रबंधन से जुड़े कुछ अन्य अधिकारियों को भी उनके पदों से हटा दिया गया है। वर्तमान में इस पूरे प्रकरण की समानांतर जांच पुलिस की एसआईटी, मंदिर समिति की आंतरिक जांच कमेटी और राज्य सरकार द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति द्वारा अत्यंत गंभीरता से की जा रही है।

  • छत्रपति शिवाजी महाराज के ऐतिहासिक स्थल पर सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास, वन विभाग ने त्वरित कार्रवाई कर हटाया बोर्ड

    छत्रपति शिवाजी महाराज के ऐतिहासिक स्थल पर सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास, वन विभाग ने त्वरित कार्रवाई कर हटाया बोर्ड

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र के पुणे में स्थित ऐतिहासिक और प्रमुख पर्यटन स्थल सिंहगढ़ किले में सांप्रदायिक सौहार्द को प्रभावित करने की एक गंभीर कोशिश का मामला सामने आया है। कुछ अज्ञात शरारती तत्वों द्वारा किले के मुख्य प्रवेश मार्ग के समीप एक बेहद संवेदनशील और विवादित पोस्टर लगा दिया गया, जिसमें एक विशेष समुदाय के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की बात कही गई थी। जैसे ही यह मामला स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा बलों के संज्ञान में आया, तुरंत त्वरित कार्रवाई की गई। राज्य के वन विभाग ने मुस्तैदी दिखाते हुए उस विवादित पोस्टर को तत्काल प्रभाव से वहां से हटा दिया। हालांकि इस घटना के संबंध में पुलिस को अभी तक कोई औपचारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई है, लेकिन मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने स्वतः ही इस पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी है।

    वन विभाग के प्रशासनिक अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, यह घटना मंगलवार सुबह की है जब पार्किंग क्षेत्र के बिल्कुल समीप किले के प्रवेश द्वार पर लगे एक पुराने लोहे के बोर्ड पर यह छपा हुआ पोस्टर चिपका हुआ देखा गया। विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सुबह के समय गश्त के दौरान जैसे ही यह आपत्तिजनक पोस्टर दिखाई दिया, उसे तुरंत हटाकर जब्त कर लिया गया। शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, किसी अज्ञात असामाजिक तत्व ने तड़के अंधेरे का फायदा उठाकर इस कृत्य को अंजाम दिया और प्रिंटेड पोस्टर को वहां चिपकाकर मौके से फरार हो गया। मराठी भाषा में लिखे गए इस पोस्टर की तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी तेजी से प्रसारित हो गईं, जिससे क्षेत्र में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई थी।

    इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चिंताजनक बात यह रही कि पोस्टर के निचले हिस्से में आधिकारिक भाषा का प्रयोग करते हुए आदेशानुसार शब्द लिखा गया था। वन विभाग के अधिकारियों ने अंदेशा व्यक्त किया है कि शरारती तत्वों ने जानबूझकर इस शब्द का इस्तेमाल किया ताकि आम जनता और वहां आने वाले पर्यटकों के बीच यह गलत संदेश और भ्रम फैलाया जा सके कि यह प्रतिबंध सरकार या किसी अधिकृत सरकारी विभाग द्वारा लागू किया गया है। वर्तमान में सिंहगढ़ किला और उसके आसपास का पूरा विस्तृत वन क्षेत्र राज्य के वन विभाग के प्रशासनिक और कानूनी अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आता है और यहां किसी भी प्रकार का प्रतिबंध पूरी तरह से गैर-कानूनी है।

    ऐतिहासिक दृष्टिकोण से सिंहगढ़ का किला मध्यकालीन भारत का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और गौरवशाली पहाड़ी किला माना जाता है। यह स्थल छत्रपति शिवाजी महाराज के समृद्ध इतिहास और प्रसिद्ध सिंहगढ़ की ऐतिहासिक लड़ाई का गवाह रहा है, जिसके कारण महाराष्ट्र के सबसे प्रमुख और लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में इसकी गिनती होती है। पुणे ग्रामीण पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि भले ही किसी संगठन ने इस मामले में शिकायत दर्ज नहीं कराई है, लेकिन सामाजिक शांति और कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाली इस हरकत को बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है। किले की तरफ जाने वाले सभी पहाड़ी रास्तों, चेकपोस्ट और मुख्य प्रवेश मार्गों पर स्थापित सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की गहनता से जांच की जा रही है ताकि संदिग्धों को चिन्हित कर उनके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जा सके।

  • 17 जुलाई को विभिन्न ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर रिलीज होने जा रही हैं आठ नई फिल्में और वेब सीरीज

    17 जुलाई को विभिन्न ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर रिलीज होने जा रही हैं आठ नई फिल्में और वेब सीरीज


    नई दिल्ली ।
    भारतीय दर्शकों के लिए डिजिटल मनोरंजन की दुनिया में इस सप्ताहांत एक बड़ा बदलाव देखने को मिलने वाला है, जहां प्रमुख ओटीटी प्लेटफॉर्म्स एक साथ कई बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट्स को दर्शकों के सामने पेश करने के लिए तैयार हैं। आगामी 17 जुलाई को नेटफ्लिक्स, जियोहॉटस्टार और जी5 जैसे बड़े स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर आठ नई फिल्में और वेब सीरीज दस्तक देने जा रही हैं। सप्ताहांत के अवकाश को देखते हुए तैयार की गई इस सूची में हर आयु वर्ग और रुचि के दर्शकों की पसंद का विशेष ध्यान रखा गया है। युवाओं की पसंदीदा कॉलेज लाइफ की रोमांटिक कहानियों से लेकर दक्षिण भारतीय सिनेमा की धांसू एक्शन से भरपूर फिल्मों और रोंगटे खड़े कर देने वाले सस्पेंस थ्रिलर तक, इस बार डिजिटल जगत में मनोरंजन का एक बेहद व्यापक कैनवास तैयार किया गया है।

    युवा दर्शकों के बीच लंबे समय से बेहद लोकप्रिय रही एक चर्चित रोमांटिक वेब सीरीज का बहुप्रतीक्षित आखिरी पार्ट इस शुक्रवार को नेटफ्लिक्स पर प्रसारित होने जा रहा है। हार्टस्टॉपर फॉरएवर नाम की इस सीरीज में कॉलेज जाने की दहलीज पर खड़े दो मुख्य किरदारों, निक और चार्ली की आगे की जिंदगी के संघर्ष को खूबसूरती से बुना गया है। यह कहानी दिखाती है कि कैसे ये दोनों किरदार दूर रहकर भी अपने भावनात्मक रिश्ते को निभाते हैं और जीवन के नए बदलावों को स्वीकार करते हैं। इसके समानांतर, वास्तविक और मार्मिक घटनाओं में रुचि रखने वाले वैश्विक सिनेमा के प्रेमियों के लिए एक बेहद गंभीर जर्मन फिल्म 23,000 लाइव्स भी इसी प्लेटफॉर्म पर आ रही है। यह फिल्म पूरी तरह से एक सच्ची घटना पर आधारित है, जो समुद्र के बीचों-बीच डूबते हुए हजारों बेसहारा शरणार्थियों की जान बचाने वाले जांबाज लोगों की मानवीय गाथा को बयां करती है।

    एक्शन और रहस्यमयी कहानियों के शौकीन दर्शकों के लिए जियोहॉटस्टार इस हफ्ते एक बहुत बड़ी क्षेत्रीय फिल्म का हिंदी प्रारूप लेकर आ रहा है। मां इंति बंगाराम नाम की इस एक्शन थ्रिलर फिल्म में दक्षिण भारतीय सिनेमा की शीर्ष अभिनेत्री सामंथा ने एक ऐसी खतरनाक पूर्व शूटर का मुख्य किरदार निभाया है, जो अपना पुराना पेशा छोड़ चुकी है, लेकिन अपने परिवार पर आए अचानक संकट के बाद उसे दोबारा बंदूक उठाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। दुनिया भर के सिनेमाघरों में सौ करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार कर सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित करने वाली यह फिल्म अब घरेलू दर्शकों के लिए मोबाइल और टीवी स्क्रीन पर उपलब्ध होगी। इसी क्रम में, जी5 प्लेटफॉर्म पर भी क्षेत्रीय सिनेमा की एक और बड़ी तेलुगू फिल्म ट्रांसफर त्रिमुर्तुलु रिलीज होने जा रही है। यह फिल्म एक ऐसे कर्तव्यनिष्ठ पुलिस कॉन्स्टेबल के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक मामले की तफ्तीश करते हुए अनजाने में राज्य के एक बहुत बड़े राजनीतिक घोटाले और साजिश का शिकार बन जाता है, जिसमें भरपूर कानूनी और अदालती ड्रामा शामिल है।

    नेटफ्लिक्स पर भावनात्मक कहानियों और उपन्यासों पर आधारित सिनेमा पसंद करने वाले दर्शकों के लिए द मैप ऑफ लॉन्गिंग नामक एक नई वेब सीरीज भी पेश की जा रही है। एक बेहद लोकप्रिय किताब पर आधारित यह कहानी ग्रेटा नाम की एक ऐसी युवती के मानसिक द्वंद्व को दिखाती है, जो अपनी बहन की असमय मृत्यु के बाद पूरी तरह से अवसाद में चली जाती है और फिर किस तरह वह इस गहरे व्यक्तिगत दुख से बाहर निकलकर अपनी जिंदगी को एक नई दिशा देती है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय शोज़ और विशेष रूप से कोरियन ड्रामा के प्रेमियों के लिए भी इस वीकेंड एक विशेष फैंटेसी सीरीज द ईस्ट पैलेस नेटफ्लिक्स पर आ रही है। यह अलौकिक शक्तियों और भूत-प्रेत की पृष्ठभूमि पर बनी एक राजा की कहानी है, जिसके पूरे शाही घराने पर एक प्राचीन श्राप का साया है, जिसे दूर करने के लिए वह एक रहस्यमयी शिकारी और मृत आत्माओं से बात करने वाली लड़की की सहायता लेता है।

    राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर आधारित थ्रिलर फिल्मों के शौकीनों के लिए जी5 पर दक्षिण भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता दर्शन थूगुदीपा की मुख्य भूमिका वाली फिल्म द डेविल रिलीज होने के लिए तैयार है। यह एक सीधे-साधे और आम नागरिक कृष्णा की कहानी है, जिसे एक ताकतवर राजनेता के गायब हुए बेटे की जगह झूठा वारिस बनकर रहने का सौदा किया जाता है, जिसके बाद वह सत्ता के गलियारों में होने वाले गंदे और जानलेवा खेल में पूरी तरह फंस जाता है। इसके अतिरिक्त, सस्पेंस और व्यक्तिगत रिश्तों में धोखे की थीम पर आधारित एक मैक्सिकन थ्रिलर फिल्म डिजायर भी इसी दिन नेटफ्लिक्स पर उपलब्ध कराई जा रही है। यह कहानी लुसेरो नाम की एक बेहद सफल और नामचीन महिला वकील की है, जिसकी व्यवस्थित जिंदगी एक गुप्त प्रेम प्रसंग के कारण पूरी तरह से तबाह हो जाती है। गलत फैसलों और विश्वासघात के ताने-बाने से बुनी गई यह थ्रिलर फिल्म सप्ताहांत पर दर्शकों को अंत तक बांधे रखने का वादा करती है।

  • भारतीय सिनेमा के इतिहास में चेतन आनंद का अनूठा प्रयोग: कान्स फिल्म फेस्टिवल से लेकर काव्यात्मक संवादों तक दर्ज की अमिट छाप

    भारतीय सिनेमा के इतिहास में चेतन आनंद का अनूठा प्रयोग: कान्स फिल्म फेस्टिवल से लेकर काव्यात्मक संवादों तक दर्ज की अमिट छाप

    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा के इतिहास में प्रयोगधर्मिता और रचनात्मकता के कई दौर आए हैं, लेकिन सत्तर के दशक में किया गया एक अनोखा प्रयोग आज भी फिल्म समीक्षकों और दर्शकों के बीच कौतूहल का विषय बना हुआ है। उस दौर में जब बॉलीवुड के निर्देशक पारंपरिक ढर्रे से अलग हटकर कुछ नया करने का प्रयास कर रहे थे, तब एक ऐसी फिल्म का निर्माण हुआ जिसके सभी संवाद पूरी तरह से काव्यात्मक थे। आज के दौर में जहां दर्शक यथार्थवादी और प्रामाणिक सिनेमा की मांग करते हैं, वहीं वर्ष 1970 में रिलीज हुई इस फिल्म में किरदारों का आपस में केवल शायरी और कविता के माध्यम से बात करना उस समय एक बड़ा जोखिम माना जा रहा था। इसके बावजूद, इस अनूठे प्रयोग ने न केवल बॉक्स ऑफिस पर सफलता के झंडे गाड़े, बल्कि एक ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया जिसे आज तक कोई दूसरा फिल्मकार दोहरा नहीं सका है।

    इस ऐतिहासिक और अनूठी फिल्म के निर्माण के पीछे भारतीय सिनेमा के दिग्गज निर्देशक चेतन आनंद का विजन था। चेतन आनंद को अक्सर लोग केवल प्रसिद्ध अभिनेता देव आनंद के भाई के रूप में याद करते हैं, जबकि हकीकत यह है कि वह स्वयं वैश्विक स्तर पर देश का नाम रोशन करने वाले एक महान फिल्मकार थे। उनकी निर्देशकीय क्षमता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि महान फिल्म निर्देशक सत्यजीत रे भी उन्हें अपनी प्रेरणा मानते थे। चेतन आनंद ने वर्ष 1946 में अपनी फिल्म नीचा नगर के जरिए अंतरराष्ट्रीय मंच पर वह ऐतिहासिक सफलता हासिल की थी, जिसे आज तक कोई दूसरी हिंदी फिल्म हासिल नहीं कर सकी है। उनकी इस कलात्मक प्रस्तुति को प्रतिष्ठित कान्स फिल्म फेस्टिवल में सर्वोच्च सम्मान यानी ग्रैंड प्राइज से नवाजा गया था, जिसने वैश्विक स्तर पर भारतीय सिनेमा की पहचान बनाई थी।

    कान्स फिल्म फेस्टिवल में मिली इस अभूतपूर्व कामयाबी के बाद सत्यजीत रे ने स्वयं चेतन आनंद को पत्र लिखकर यह स्वीकार किया था कि इस वैश्विक सम्मान ने ही उन्हें फिल्म निर्माण के क्षेत्र में उतरने का हौसला दिया था। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमाने के बाद चेतन आनंद ने सिनेमाई दुनिया में एक और नया मील का पत्थर स्थापित करने का संकल्प लिया। उन्होंने एक ऐसी प्रेम कहानी पर फिल्म बनाने का निर्णय लिया, जिसका पूरा स्क्रीनप्ले और हर एक संवाद साधारण बोलचाल के बजाय कविता की शक्ल में हो। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए उन्होंने फिल्म उद्योग के सबसे दिग्गज और गंभीर अभिनेताओं को अनुबंधित किया, जिनमें राज कुमार, पृथ्वीराज कपूर और प्राण जैसे दिग्गज नाम शामिल थे। इन दिग्गज कलाकारों के अभिनय और काव्यात्मक संवादों के अनूठे संगम ने पर्दे पर एक जादुई माहौल तैयार कर दिया था।

    चेतन आनंद अपनी फिल्मों में वास्तविकता और दृश्यों की प्रामाणिकता को लेकर बेहद गंभीर रहते थे। इस फिल्म के एक खास दृश्य के लिए उन्हें सरसों के खेतों की प्राकृतिक लाइटिंग और पीले रंग के बैकग्राउंड की आवश्यकता थी। इसके लिए उन्होंने स्थानीय किसानों को अतिरिक्त धन राशि देकर समय से पहले सरसों की फसल उगाने का आग्रह किया था, ताकि फिल्म की शूटिंग के दौरान प्राकृतिक दृश्य बिल्कुल सटीक मिल सकें। मूल रूप से यह फिल्म लगभग तीन घंटे से अधिक लंबी तैयार हुई थी, लेकिन संपादन की मेज पर इसे दर्शकों के अनुकूल चुस्त रखते हुए दो घंटे बीस मिनट का किया गया। जब यह फिल्म हीर रांझा के नाम से सिनेमाघरों में रिलीज हुई, तो इसके अनोखे प्रारूप को देखकर शुरुआत में लोग चौंक गए, लेकिन देखते ही देखते इसने कमाई के सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए और आज भी यह भारतीय सिनेमा की सबसे प्रतिष्ठित और लीक से हटकर बनी फिल्मों में शीर्ष पर गिनी जाती है।

  • ईरान का पलटवार…बहरीन में अमेरिकी मिलेट्री बेस पर अब तक का सबसे बड़ा हमला

    ईरान का पलटवार…बहरीन में अमेरिकी मिलेट्री बेस पर अब तक का सबसे बड़ा हमला


    वाशिंगटन।
    अमेरिका (America) द्वारा बुधवार को किए गए बैक-टू-बैक दो बड़े हवाई हमलों (Major Air Strikes) के जवाब में ईरान (Iran) ने अब तक का सबसे बड़ा पलटवार किया है. तेहरान ने दावा किया है कि गुरुवार को ईरान (Iran) ने बहरीन (Bahrain) में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों (US military bases) पर अब तक का सबसे बड़ा और भीषण हमला बोल दिया है, जिसने पूरे मध्य-पूर्व को दहला दिया है।

    ईरानी सैन्य कमांडरों और आधिकारिक मीडिया ‘प्रेस टीवी’ के जरिए जो बयान सामने आए हैं, वे साफ संकेत दे रहे हैं कि यह जंग अब किसी भी हद तक जा सकती है. ईरान के सबसे शक्तिशाली सैन्य संगठन ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल मोहेबी ने अमेरिका को खुली चेतावनी देते हुए कहा है।

    IRGC ने कहा, “दुश्मन (अमेरिका) यह समझने की भूल कतई न करे कि वह इस संघर्ष को अपनी मर्जी से खींच सकता है और इसे एक ‘वॉर ऑफ एट्रिशन’ (थका देने वाले लंबे युद्ध) में बदल सकता है. ईरान के मौजूदा सैन्य ऑपरेशन पूरी तरह से खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी आक्रामक सैन्य बुनियादी ढांचे और ठिकानों को नेस्तनाबूद करने पर केंद्रित हैं. यह काम पूरा होते ही हमारा अगला विनाशकारी चरण शुरू होगा।

    होर्मुज जलसंधि पर ईरान की ‘तालाबंदी’, रखीं कड़ी शर्तें
    दूसरी ओर, ईरान की थल सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल अकरमी निया ने वैश्विक व्यापार के सबसे महत्वपूर्ण मार्ग ‘होर्मुज’ को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है. उन्होंने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका ईरान की तीन प्रमुख शर्तों को नहीं मानता, तब तक यह अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पूरी तरह बंद रहेगा। इन शर्तों के तहत होर्मुज को दोबारा खोलने के लिए अमेरिका को ईरान के साथ हुए समझौते (MoU) की शर्तों का पालन करना होगा, शत्रुतापूर्ण गतिविधियां बंद करनी होंगी और ईरानी कानूनों को लागू करना होगा।

    MoU का पालन और शत्रुता का अंत
    ईरान का कहना है कि अमेरिका को दोनों देशों के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) के नियमों का पालन करना होगा, अपनी शत्रुतापूर्ण कार्रवाई रोकनी होगी और ईरानी कानूनों को लागू करना होगा. इन शर्तों के बिना जलमार्ग से किसी भी जहाज को गुजरने नहीं दिया जाएगा. बहरीन में हुए इस बड़े हमले और ईरान की इस सख्त घेराबंदी के बाद अमेरिका और उसके सहयोगी देशों में हड़कंप मच गया है, और वैश्विक तेल बाजार पूरी तरह क्रैश होने की कगार पर पहुंच गया है।

  • MP: भोपाल में पुलिस की निगरानी में खड़ी स्कूटी लेकर भागा युवक…. चोर को खुद चाबी देने के आरोप

    MP: भोपाल में पुलिस की निगरानी में खड़ी स्कूटी लेकर भागा युवक…. चोर को खुद चाबी देने के आरोप


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की राजधानी भोपाल (Bhopal) में वाहन चेकिंग (Vehicle Checking) के दौरान पुलिस (Police) की कथित लापरवाही का मामला सामने आया है. आरोप है कि चेकिंग के दौरान पुलिस की निगरानी में खड़ी एक स्कूटी (Scooty) को एक अज्ञात युवक लेकर फरार हो गया. शिकायतकर्ता का दावा है कि स्कूटी की चाबी पुलिस के पास थी और कथित तौर पर एक पुलिसकर्मी ने वही चाबी अज्ञात युवक को सौंप दी. इस पूरे घटनाक्रम के सामने आने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं. पीड़ित ने मामले की शिकायत भोपाल पुलिस कमिश्नर से करते हुए निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है।

    जानकारी के अनुसार, घटना 13 जुलाई की रात करीब 8 बजे भोपाल के सेंट्रल लाइब्रेरी चौराहे पर हुई. शिकायतकर्ता नदीम आलम का आरोप है कि वाहन चेकिंग के दौरान ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने उनकी सुजुकी बर्गमैन स्कूटी को रोक लिया था. उनका कहना है कि जांच के दौरान पुलिसकर्मियों ने स्कूटी की चाबी अपने पास रख ली थी और वाहन वहीं खड़ा था. शिकायतकर्ता का आरोप है कि कुछ देर बाद वहां मौजूद एक पुलिसकर्मी ने कथित तौर पर वही चाबी एक अज्ञात युवक को दे दी।


    चेकिंग के दौरान रोकी गई थी स्कूटी

    आरोप है कि युवक ने बिना किसी रोक-टोक के स्कूटी स्टार्ट की और मौके से फरार हो गया. नदीम आलम के मुताबिक, जब उन्होंने पुलिसकर्मियों से अपनी स्कूटी वापस मांगी, तब उन्हें पता चला कि वाहन वहां से गायब हो चुका है. उन्होंने मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों से जानकारी लेने की कोशिश की, लेकिन उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।

    पीड़ित का कहना है कि यदि स्कूटी की चाबी पुलिस के कब्जे में थी, तो वाहन किसी दूसरे व्यक्ति के हाथ कैसे लग गया और वह वहां से कैसे निकल गया. घटना के बाद नदीम आलम ने पूरे मामले की शिकायत भोपाल पुलिस कमिश्नर से की है. उन्होंने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और उनकी स्कूटी जल्द से जल्द बरामद की जाए।

    शिकायत के बाद पुलिस महकमे में मचा हड़कंप
    शिकायतकर्ता का दावा है कि सेंट्रल लाइब्रेरी चौराहे पर लगे सीसीटीवी कैमरों में पूरी घटना रिकॉर्ड हुई है. उनका कहना है कि यदि सीसीटीवी फुटेज की जांच की जाए तो पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आ सकती है. इस मामले के सामने आने के बाद वाहन चेकिंग के दौरान पुलिस की जिम्मेदारी और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं. यदि शिकायतकर्ता के आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह ड्यूटी के दौरान गंभीर लापरवाही का मामला माना जा सकता है. फिलहाल इस मामले में पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. अब जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोप कितने सही हैं और घटना के लिए कौन जिम्मेदार है।

  • इजरायल को फंडिंग करने पर अमेरिका में बवाल… सांसदों ने की कटौती की मांग

    इजरायल को फंडिंग करने पर अमेरिका में बवाल… सांसदों ने की कटौती की मांग


    वाशिंगटन।
    इजरायल (Israel) की मदद करना अमेरिकी सरकार (American Government) को भारी पड़ता दिख रहा है. इस मुद्दे को लेकर अमेरिका (America) की राजनीति में हंगामा शुरू हो गया है. हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (House of Representatives) के आधे से ज्यादा डेमोक्रेटिक सांसदों (Democratic lawmakers) ने इजरायल को दी जाने वाली 3.3 अरब डॉलर की सहायता राशि में कटौती करने के पक्ष में मतदान किया है।

    बुधवार को सदन में इस संशोधन प्रस्ताव पर मतदान हुआ. प्रस्ताव के पक्ष में 104 और विरोध में 314 वोट पड़े. हालांकि, ये राष्ट्रीय सुरक्षा खर्च विधेयक में इस संशोधन को जोड़ने के लिए काफी नहीं था। इस मतदान से ये साफ हो गया है कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Prime Minister Benjamin Netanyahu) की युद्ध रणनीति को लेकर अमेरिकी संसद और डेमोक्रेटिक पार्टी में गहरी दरार है।


    चुनाव से ठीक पहले पार्टी में मतभेद

    ये मतदान अमेरिक में होने वाले मिड-टर्म चुनावों से ठीक पहले हुआ है, जो ये तय करेंगे कि अमेरिकी कांग्रेस पर किसका कंट्रोल होगा. इस वोटिंग में डेमोक्रेटिक पार्टी के नेतृत्व के बीच भी मतभेद खुलकर सामने आए. 100 से ज्यादा डेमोक्रेट्स ने विदेशी सैन्य सहायता राशि को पूरी तरह खत्म करने वाले इस संशोधन के पक्ष में वोट दिया, जबकि लगभग इतने ही डेमोक्रेट्स ने इसके खिलाफ मतदान किया।

    वहीं, जबकि रिपब्लिकन सांसदों ने इजरायल को दी जाने वाली सहायता को बनाए रखने के पक्ष में वोट डाला. सदन में डेमोक्रेटिक नेता हकीम जेफ्रीस ने इस प्रस्ताव का विरोध किया. हालांकि, उन्होंने अपने सहयोगियों को लिखे पत्र में इस बात पर जोर दिया कि इजरायल और फिलिस्तीनी लोगों की भलाई के लिए मिडिल-ईस्ट में अमेरिकी नीति को बदलना होगा। जेफ्रीस ने कहा कि नेतन्याहू सरकार के रवैये में जरूरी बदलाव लाने के लिए और भी सही तरीके मौजूद हैं।


    पार्टी में बढ़ता आंतरिक दबाव

    इजरायल को लेकर बढ़ती विरोध डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती है. पार्टी को अपने ही भीतर लेफ्ट विंग के बढ़ते दबाव का सामना करना पड़ रहा है. हालांकि, रिपब्लिकन पार्टी इस फूट का फायदा उठाकर डेमोक्रेट्स को ‘कट्टर वामपंथी’ साबित करने की कोशिश कर रही है।

    इस बीच, डेमोक्रेटिक व्हिप और मैसाचुसेट्स की प्रतिनिधि कैथरीन क्लार्क ने फंड रोकने का समर्थन किया. एक हालिया AP-NORC पोल के मुताबिक, लगभग एक-तिहाई अमेरिकी एडल्ट- जिनमें करीब आधे डेमोक्रेट शामिल हैं, उनका मानना है कि इजरायल ने गाजा में फिलिस्तीनियों के खिलाफ नरसंहार किया है. हालांकि, इजरायल और अमेरिकी सरकार इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते रहे हैं।

  • ब्रिटेन द्वारा IRGC को 'सुरक्षा के लिए खतरा' बताने पर भड़का ईरान, राजदूत को किया तलब

    ब्रिटेन द्वारा IRGC को 'सुरक्षा के लिए खतरा' बताने पर भड़का ईरान, राजदूत को किया तलब


    लंदन।
    ईरान-अमेरिका (Iran-America) के बीच जंग नए मोड़ पर पहुंच चुकी है. दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. इस बीच, ईरान (Iran) ने तेहरान में ब्रिटेन (Britain) के राजदूत को तलब किया. यह कदम लंदन द्वारा यूके के ‘काउंटरिंग स्टेट थ्रेट्स एक्ट’ (‘Countering State Threats Act’) के तहत इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (Islamic Revolutionary Guard Corps- IRGC) को नामित करने के बाद उठाया गया. एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी विदेश मंत्रालय ने चेतावनी दी कि इस कदम का जवाब दिया जाएगा।

    यह घटनाक्रम ब्रिटेन द्वारा लंदन में ईरान के चार्ज डी’अफेयर्स अली नसीमफार को तलब किए जाने के एक दिन बाद हुआ. ब्रिटेन सरकार का आरोप था कि हाल के महीनों में पूरे यूरोप में हमले करने के लिए प्रॉक्सी समूहों को निर्देशित करने में ईरान की भूमिका रही है।

    बता दें, ब्रिटेन ने सोमवार को IRGC और उससे जुड़े एक समूह को सुरक्षा के लिए खतरा घोषित किया. यह कदम उन नए अधिकारों के तहत उठाया गया जिनका मकसद विदेशी देशों को निगरानी और तोड़फोड़ जैसी गतिविधियों के लिए प्रॉक्सी का इस्तेमाल करने से रोकना है।


    होर्मुज को लेकर बढ़ी चिंताएं

    ईरान-अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर चिंताएं फिर बढ़ गई हैं. रॉयटर्स के मुताबिक, समुद्री सुरक्षा और शिपिंग इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों ने बताया कि जहाजों पर ईरानी हमलों के सिलसिले के बाद सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं, जिसके चलते शिपिंग कंपनियां स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने के लिए अमेरिकी सेना की निगरानी वाली योजना का इस्तेमाल करने से बच रही हैं।

    28 फरवरी को ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से ईरानी सेना ने इस इलाके में माइंस बिछा दी हैं, जिससे जहाजों को ईरान या ओमान के तट के करीब बने दो वैकल्पिक रास्तों में से किसी एक का इस्तेमाल करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।