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  • रूस का यूक्रेन पर बड़ा हमला…. राजधानी कीव पर दांगी बैलिस्टिक मिसाइलें

    रूस का यूक्रेन पर बड़ा हमला…. राजधानी कीव पर दांगी बैलिस्टिक मिसाइलें


    कीव।
    रूस (Russia) ने गुरुवार तड़के एक बार फिर यूक्रेन (Ukraine) की राजधानी कीव (Kyiv) को निशाना बनाते हुए बैलिस्टिक मिसाइलों (Ballistic Missiles) से बड़ा हमला किया. यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक, हमले के दौरान कई धमाकों की आवाजें सुनी गईं, जबकि एयर डिफेंस सिस्टम (Air Defense System) लगातार मिसाइलों को रोकने में जुटे रहे. यूक्रेनी वायुसेना ने चेतावनी दी है कि राजधानी पर और मिसाइल हमले हो सकते हैं, इसलिए लोगों से सुरक्षित बंकरों में रहने की अपील की गई है।

    कीव के मेयर विताली क्लिट्स्को ने बताया कि शहर के पश्चिमी बाहरी इलाके में एक गोदाम मिसाइल हमले की चपेट में आ गया. वहीं, इंटरसेप्ट की गई मिसाइलों का मलबा ड्नीप्रो नदी के पूर्वी किनारे स्थित इलाके में गिरा. शुरुआती जानकारी के मुताबिक, कम से कम आठ बैलिस्टिक मिसाइलें कीव की ओर दागी गई थीं।

    यूक्रेन की वायुसेना ने टेलीग्राम पर जारी संदेश में कहा कि बैलिस्टिक मिसाइलों के अलावा रूस ने शाहेद ड्रोन भी कई शहरों की ओर भेजे हैं. उत्तर-पूर्वी शहर खारकीव में भी ड्रोन हमलों के बाद कई विस्फोटों की खबरें सामने आई हैं. इसके अलावा विनित्सिया समेत कई अन्य क्षेत्रों में भी एयर रेड अलर्ट जारी किया गया.


    यूक्रेन के रक्षा मंत्री को पद से हटाने के बाद हमला

    यह हमला ऐसे समय हुआ है जब यूक्रेन में रक्षा मंत्री मायखाइलो फेदोरोव को पद से हटाए जाने को लेकर राजनीतिक हलचल बनी हुई है. उनके हटने के कुछ ही समय बाद रूस ने राजधानी पर नया हमला कर दिया।


    यूक्रेन पर रूस लगातार कर रहा घातक हमले

    जुलाई में रूस की तरफ से कीव पर यह सातवां बड़ा हमला बताया जा रहा है. इससे पहले 14 जुलाई की रात रूस ने मिसाइलों और ड्रोन के जरिए बड़े पैमाने पर हमला किया था, जिसमें कम से कम सात लोगों की मौत हुई थी और 78 लोग घायल हुए थे. उस हमले में राजधानी के 16 स्थानों को नुकसान पहुंचा था, जिनमें एक स्कूल और एक नागरिक औद्योगिक प्रतिष्ठान भी शामिल था।

    इससे पहले 2 जुलाई को हुए हमले में 30 से अधिक लोगों की मौत और 100 से ज्यादा लोग घायल हुए थे. वहीं, 6 जुलाई के हमले में कम से कम 26 लोगों की जान गई थी. लगातार हो रहे इन हमलों ने कीव में आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

  • केन्द्र सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर विन्डफॉल टैक्स घटाया…. डीजल और ATF पर बढ़ाया

    केन्द्र सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर विन्डफॉल टैक्स घटाया…. डीजल और ATF पर बढ़ाया


    नई दिल्ली।
    मोदी सरकार (Modi Government) ने बुधवार को डीजल (Diesel) और विमान में इस्तेमाल होने वाले ईंधन (Aviation fuel) ATF के निर्यात पर लगने वाले विन्डफॉल टैक्स (Windfall tax) को बढ़ा दिया है, जबकि पेट्रोल के निर्यात पर यह टैक्स घटा दिया। यह फैसला 16 जुलाई यानी आज से लागू हो गया है। यह हर 15 दिन पर होने वाली समीक्षा का हिस्सा है।

    वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, पेट्रोल पर विन्डफॉल टैक्स घटाकर 2.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। यह पहले 4 रुपये था। वहीं, डीजल पर यह शुल्क 8.5 रुपये से बढ़ाकर 15.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। जबकि, विन्डफॉल टैक्स एटीएफ पर 7.5 रुपये से बढ़ाकर 14.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। बता दें इससे आम जनता पर कोई असर नहीं पड़ेगा।


    क्यों किया टैक्स में बदलाव

    यह टैक्स में बदलाव ऐसे समय आया है, जब वैश्विक तेल बाजार काफी अस्थिर है। बुधवार को ब्रेंट क्रूड तेल की कीमत करीब 2% बढ़कर 84.73 डॉलर प्रति बैरल के एक महीने के हाई पर पहुंच गई। इसकी वजह थी कि अमेरिका ने ईरान पर अपनी नौसैनिक नाकाबंदी फिर से लागू कर दी, जिससे होर्मुज स्ट्रेट से तेल सप्लाई पर खतरा पैदा हो गया। इस रास्ते दुनिया की करीब 20% तेल सप्लाई होती थी।

    इसके अलावा, नए भू-राजनीतिक तनाव और तेल टैंकरों पर हमलों ने भी कीमतों को सहारा दिया, हालांकि महंगाई की चिंताओं और वैश्विक मांग में सुस्ती ने बढ़त को सीमित रखा। रूस के कम निर्यात जैसी सप्लाई की दिक्कतों से डीजल की रिफाइनिंग मार्जिन बढ़ा है, जिससे ऑयल मार्केट पर दबाव बना हुआ है।


    थोक खरीद पर रोक और बाद में राहत

    केंद्र सरकार ने 11 जून को औद्योगिक, कमर्शियल और संस्थागत उपभोक्ताओं को खुदरा ईंधन पंपों से पेट्रोल-डीजल खरीदने से रोक दिया था और उन्हें थोक सप्लाई चैनलों से खरीदारी करने का निर्देश दिया था। यह अस्थायी आदेश ईंधन की उचित उपलब्धता सुनिश्चित करने, जमाखोरी और अवैध हेर-फेर रोकने तथा आम उपभोक्ताओं के लिए निर्बाध सप्लाई बनाए रखने के लिए जारी किया गया था।

    सरकार ने कहा था कि ग्लोबल सप्लाई चेन और शिपिंग पर भू-राजनीतिक स्थिति का बुरा असर पड़ रहा है, जिससे आपूर्ति असंतुलन का खतरा बढ़ गया है। दरअसल, थोक खरीदारों और खुदरा दरों के बीच बड़े अंतर के कारण बड़े उपभोक्ता अपनी खरीदारी नियमित थोक चैनलों से हटाकर खुदरा पंपों पर कर रहे थे, जिससे खुदरा बिक्री असामान्य रूप से बढ़ गई थी। उस समय दिल्ली में रिटेल डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर था, जबकि थोक खरीदारों को 134.50 रुपये प्रति लीटर चुकाना पड़ रहा था।

    यह अंतर इसलिए पैदा हुआ, क्योंकि सरकारी तेल कंपनियों ने पश्चिम एशिया संघर्ष की वजह से आम उपभोक्ताओं को ईंधन की महंगाई से बचाने के लिए रिटले रेट को नियंत्रित रखा। जबकि, थोक खरीदार बाजार-आधारित दरों का भुगतान करते रहे। इस आदेश के तहत, खुदरा पंपों से डीजल बिक्री केवल वाहन ईंधन टैंक या पीईएसओ अप्रूब्ड कंटेनरों तक सीमित कर दी गई।

    वहीं डीजल पर 200 लीटर की खरीद सीमा तय कर दी गई। यह प्रतिबंध 90 दिनों तक प्रभावी रह सकता था और नए आदेश से बढ़ाया भी जा सकता था। उल्लंघन पर आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत सजा का प्रावधान था। बाद में, 29 जून को ये पाबंदियां हटा ली गईं और 1 जुलाई से वापस सामान्य व्यवस्था लागू हो गई।

  • PAK की अर्थव्यवस्था पर बड़ा संकट .. बलूचिस्तान ने किया आजादी का ऐलान, संसाधनों की आपूर्ति भी रोकी

    PAK की अर्थव्यवस्था पर बड़ा संकट .. बलूचिस्तान ने किया आजादी का ऐलान, संसाधनों की आपूर्ति भी रोकी


    इस्लामाबाद।
    बलूचिस्तान (Balochistan) की प्राकृतिक गैस, कोयला, खनिज और रेयर अर्थ पर निर्भर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था (Pakistan Economy) इस वक्त अस्तित्व के संकट से जूझ रही है। जिस इलाके को पाकिस्तान लंबे समय से अपना आर्थिक इंजन मानता रहा, उसी बलूचिस्तान ने अब न सिर्फ आजादी का ऐलान (Declaration of Independence) कर दिया है, बल्कि अपनी संसाधनों की आपूर्ति भी पूरी तरह रोक दी है। दरअसल, बलूचिस्तान प्रांत में मंगलवार को स्वतंत्रता की घोषणा के साथ ही पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन कट गई है। क्षेत्र में लगे पूर्ण शटडाउन और ट्रांसपोर्ट ब्लॉकेड ने पंजाब की औद्योगिक इकाइयों को घुटनों पर ला दिया है। अगर यही हालात रहे तो संभव है कि पाकिस्तान कटोरा लेकर घूमने के लायक भी नहीं बचेगा।

    पंजाब के प्रमुख बिजनेस लीडर्स ने चेतावनी दी है कि अगर यह संकट लंबा खिंचा तो इसका असर किसी सक्रिय युद्ध से भी कहीं ज्यादा विनाशकारी साबित हो सकता है। पंजाब चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री और अन्य प्रमुख बिजनेस संगठनों के प्रतिनिधियों ने लाहौर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। इसमें उन्होंने बलूचिस्तान पर निर्भरता को लेकर गंभीर चिंता जताई। बिजनेस लीडर्स के अनुसार, पाकिस्तान की अधिकांश भारी उद्योगों की ऊर्जा आपूर्ति, कच्चा माल और खनिज बलूचिस्तान के रास्ते ही आते हैं। शटडाउन के कारण यह पूरी सप्लाई चेन थम गई है।


    LNG और कोयला आपूर्ति पूरी तरह बंद

    प्रेस कॉन्फ्रेंस में उद्योगपतियों ने विस्तार से बताया कि लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) और कोयला मुख्य रूप से बलूचिस्तान के बंदरगाहों और खदानों से पंजाब भेजा जाता है। अब दोनों क्षेत्रों के बीच सभी तरह के एक्सपोर्ट और ट्रांसपोर्ट रुक गए हैं। एक प्रमुख इंडस्ट्री लीडर ने कहा कि हमारी फैक्टरियां अब ईंधन के बिना चल नहीं सकतीं। कई प्लांट्स पहले ही बंद हो चुके हैं या उत्पादन आधा कर दिया गया है। अगर यह स्थिति 10-15 दिन और चली तो पूरे पंजाब में बड़े पैमाने पर छंटनी शुरू हो जाएगी। उन्होंने शहबाज शरीफ सरकार को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि लंबे समय तक रुकावट बनी रही तो न सिर्फ औद्योगिक उत्पादन ठप होगा, बल्कि बेरोजगारी बढ़ने से सामाजिक अस्थिरता भी पैदा हो सकती है।


    खनिज और कच्चे माल की कमी

    बिजनेस प्रतिनिधियों ने बताया कि डुकी, चागई और अन्य खनिज क्षेत्रों से कोयला, क्रोमाइट, कॉपर और अन्य जरूरी इंडस्ट्रियल इनपुट्स की आपूर्ति रोक दी गई है। ट्रांसपोटर्स हड़ताल पर हैं क्योंकि राज्य उच्च मार्गों पर उनकी सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं दी जा रही। नतीजतन, फैक्टरियों तक कच्चा माल नहीं पहुंच पा रहा। टेक्सटाइल, सीमेंट, फर्टिलाइजर, स्टील और पावर सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया गया कि कई यूनिट्स में उत्पादन 40-60 प्रतिशत तक कम हो गया है।


    बलूचिस्तान पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की रीढ़

    बलूच नेता मीर यार बलूच द्वारा शेयर किए गए वीडियो और उनके बयानों में कहा गया है कि बलूचिस्तान सोना, प्राकृतिक गैस, तांबा, क्रोमाइट और रेयर अर्थ का विशाल भंडार है। अगर बलूचिस्तान इन संसाधनों पर अपना पूर्ण नियंत्रण वापस ले लेता है तो पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को भारी झटका लगेगा। मीर यार बलूच ने कहा कि हम जिसे ‘रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान’ कह रहे हैं, वहां स्थिति धीरे-धीरे बलूच मुक्ति सेनाओं के नियंत्रण में आ रही है। हम अपने प्राकृतिक संसाधनों का फायदा अपने लोगों को देना चाहते हैं, न कि पाकिस्तान की केंद्रीय सरकार को।

    दूसरी ओर एक आर्थिक विशेषज्ञ ने कहा कि बलूचिस्तान पाकिस्तान की जीडीपी में सीधे-सीधे योगदान नहीं देता दिखता, लेकिन उसकी सप्लाई चेन पूरे देश की रीढ़ है। इन संसाधनों के बिना पाकिस्तानी सरकार दिवालिया होकर टूट जाएगी। यही कारण है कि पंजाब के बिजनेसमैनों ने सरकार से तुरंत बातचीत शुरू करने और बलूचिस्तान में शांति बहाल करने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि यह अब सिर्फ सुरक्षा मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था का संकट बन चुका है।

  • IDBI Bank को 53,000 करोड़ में खरीदेगी कनाडा के उद्योगपति प्रेम वत्स की कंपनी

    IDBI Bank को 53,000 करोड़ में खरीदेगी कनाडा के उद्योगपति प्रेम वत्स की कंपनी


    नई दिल्ली।
    आईडीबीआई बैंक (IDBI Bank) को बेचने की सरकार की वर्षों पुरानी जद्दोजहद अपने मुकाम पर पहुंचती दिख रही है। वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) में मंगलवार को हुई उच्च स्तरीय बैठकों के बाद सरकार और कनाडा के उद्योगपति प्रेम वत्स (Canadian Industrialist Prem Watsa) की कंपनी फेयरफैक्स होल्डिंग्स (Fairfax Holdings) के बीच इस बहुप्रतीक्षित सौदे पर सहमति बन गई है। इसके तहत, कंपनी 53,000 करोड़ रुपये में बैंक में बहुलांश हिस्सा खरीदेगी। यह सौदा न सिर्फ विनिवेश के मोर्चे पर सरकार की मदद करेगा, बल्कि भारतीय बैंकिंग के इतिहास में एक नया अध्याय भी लिखेगा।

    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) की अगुवाई वाले मंत्रियों के अधिकार प्राप्त समूह को इस संशोधित बोली से अवगत करा दिया गया है। जल्द ही इस संबंध में औपचारिक अधिसूचना और अभिरुचि पत्र जारी किया जाएगा, जिसके बाद शेयर-परचेज एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर होंगे। चूंकि, फेयरफैक्स एक प्रवर्तक के रूप में हिस्सेदारी ले रही है, इसलिए कंपनी को आम शेयरधारकों के लिए एक ओपन ऑफर भी लाना होगा।

    नई कीमत पर, सरकार बैंक में अपनी 45.48 फीसदी में से 30.48 फीसदी हिस्सेदारी बेचकर करीब 26,620 करोड़ रुपये जुटा सकती है। इसके अलावा, बैंक में 50 फीसदी से थोड़ी कम हिस्सेदारी रखने वाला भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) भी अपना 30.24 फीसदी हिस्सा बेचने की योजना बना रहा है।


    टूटेगा पिछला रिकॉर्ड

    भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा विदेशी निवेश साल 2025 में देखा गया था, जब एमिरेट्स एनबीडी ने 2.75 अरब डॉलर में आरबीएल बैंक की 60 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी थी। आईडीबीआई बैंक का यह सौदा उस रिकॉर्ड को लगभग दोगुना कर देगा।

    फेयरफैक्स के लिए आगे कुछ बैंकिंग नियमों का पालन करना होगा। फेयरफैक्स की भारतीय इकाई के पास पहले से ही सीएसबी बैंक में 40 फीसदी हिस्सेदारी है। बैंकिंग नियमों के मुताबिक, प्रवर्तक को सीएसबी और आईडीबीआई बैंक का आपस में विलय करना होगा, जिसके लिए भारतीय रिजर्व बैंक कुछ अतिरिक्त समय दे सकता है। इसके अलावा, इस सौदे को अंतिम रूप देने से पहले आरबीआई की फिट एंड प्रॉपर जांच और भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग की मंजूरी भी जरूरी होगी।


    बजटीय लक्ष्य को मिलेगी रफ्तार

    सरकार ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 में परिसंपत्ति मुद्रीकरण के जरिये 80,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है। इसमें से अब तक वह सिर्फ 20,272 करोड़ रुपये ही जुटा सकी है। आईडीबीआई बैंक से मिलने वाले 26,620 करोड़ रुपये के बाद सरकार इस लक्ष्य के बेहद करीब पहुंच जाएगी। इसके बाद सरकार कोल इंडिया और एलआईसी जैसी कंपनियों में भी अपनी कुछ हिस्सेदारी बेच सकती है।


    ये होगी सबसे लंबी विनिवेश प्रक्रिया

    आईडीबीआई बैंक की निजीकरण प्रक्रिया भारतीय बैंकिंग इतिहास के सबसे लंबे समय तक खिंचने वाले विनिवेश मामलों में एक है। इसकी शुरुआत 21 जनवरी, 2019 में हुई थी।

  • कोटा की 5 महिलाओं ने की किडनी ट्रांसप्लांट की मांग… राष्ट्रपति से मांगी इच्छामृत्यु की अनुमति

    कोटा की 5 महिलाओं ने की किडनी ट्रांसप्लांट की मांग… राष्ट्रपति से मांगी इच्छामृत्यु की अनुमति


    कोटा।
    राजस्थान (Rajasthan) के कोटा में बच्चे के जन्म के बाद किडनी फेलियर (Kidney failure) से जूझ रही पांच महिलाओं ने डायलिसिस करवाने से इनकार कर दिया है। ये महिलाएं किडनी ट्रांसप्लांट (Kidney transplant) की मांग कर रही हैं। उनके परिवारों ने अब राष्ट्रपति को पत्र लिखकर कहा है कि अगर सरकार उनके सही इलाज का इंतजाम नहीं कर सकती तो इच्छामृत्यु की अनुमति दी जाए। इन महिलाओं ने जिला अधिकारियों को किडनी ट्रांसप्लांट के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था।


    70 से ज्यादा दिनों से अस्पताल में हैं

    उधर, न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल (एनएमसीएच) के अधिकारियों का कहना है कि उनका इलाज चल रहा है और सभी मरीजों की हालत स्थिर है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, धन्नी सुमन, रागिनी मीणा, सुशीला महावर, पिंकी एयरवाल और आरती चौबदार नाम की महिलाओं की सेहत मई की शुरुआत में बच्चे के जन्म के बाद बिगड़ने के बाद से अब तक 32 बार डायलिसिस हो चुका है। वे 70 से ज्यादा दिनों से अस्पताल में हैं। इसके अलावा, कोटा के एनएमसीएच और जेके लोन हॉस्पिटल में सी-सेक्शन सर्जरी के बाद हुई दिक्कतों की वजह से पांच और महिलाओं की मौत हो गई थी।


    डायलिसिस शब्द से ही डरने लगी हैं

    मई के पहले हफ्ते से भर्ती सुमन के पति मोहन लाल ने बताया कि उनकी पत्नी अब डायलिसिस शब्द से ही डरने लगी हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया के एक घंटे के अंदर ही उसे उल्टी होने लगती है। वह बुरी तरह कांपने लगती हैं और बुखार आ जाता है। वहीं, रागिनी ने कहा कि डायलिसिस की प्रक्रिया बहुत दर्दनाक होती है। लंबे समय तक इलाज के बावजूद उनकी सेहत में कोई सुधार नहीं हुआ है।

    पिंकी और आरती डायलिसिस से इनकार करते हुए अस्पताल से बाहर चली गईं। उन्होंने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया। रागिनी के पति लोकेश मीना ने दावा किया कि वार्ड स्टाफ उन पर रोजाना डिस्चार्ज लेने का दबाव डाल रहा है।


    राष्ट्रपति को चिट्ठी

    बुधवार को इन पांचों महिलाओं के परिवारों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर या तो किडनी ट्रांसप्लांट या फिर मौत की मांग की। अपने पत्र में उन्होंने कहा कि अगर किडनी ट्रांसप्लांट नहीं हो पाता है तो उन्हें इच्छामृत्यु (यूथेनेशिया) की इजाजत दी जाए। यह कदम महिलाओं द्वारा जिला अधिकारियों को किडनी ट्रांसप्लांट पक्का करने के लिए दिए गए 48 घंटे के अल्टीमेटम के खत्म होने के बाद उठाया गया।


    चलती-फिरती लाशों की तरह जी रहीं

    मोहन लाल ने कहा था कि हम उन्हें इस तरह तड़पते हुए और नहीं देख सकते। अगर हमें 48 घंटे के अंदर किडनी ट्रांसप्लांट का लिखित आश्वासन नहीं मिला तो हम उन्हें डायलिसिस के लिए लाना बंद कर देंगे और उन्हें मरने देंगे। वे तो चलती-फिरती लाशों की तरह जी रही हैं।


    डायलिसिस से मना करना जानलेवा हो सकता है

    एनएमसीएच के प्रिंसिपल डॉ. नीलेश जैन ने बताया कि सभी पांच महिलाओं का इलाज चल रहा है और उनकी हालत स्थिर है। उन्होंने कहा कि उन्हें 20 दिन पहले ही डिस्चार्ज करने की मंजूरी मिल गई थी और वे डायलिसिस सेशन के लिए अस्पताल आ सकती हैं। उन्होंने चेताया कि डायलिसिस से इनकार करना जानलेवा हो सकता है।


    प्रशासन को समस्या बताना चाहिए

    उन्होंने बताया कि ऐसे मरीजों के लिए डॉक्टर पहले तीन महीने तक इलाज के जरिए किडनी की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने की कोशिश करते हैं। उसके बाद ही कोई स्पेशलिस्ट तय करता है कि ट्रांसप्लांट की जरूरत है या नहीं। अस्पताल प्रशासन पर लगे आरोपों को खारिज करते हुए प्रिंसिपल जैन ने कहा कि मरीजों को अपनी समस्याओं के बारे में प्रशासन को बताना चाहिए ताकि उनका समाधान निकाला जा सके।

  • भारत के पड़ोसी देश में माता-पिता की इजाजत के बगैर बच्चे नहीं चला पाएंगे सोशल मीडिया, प्रस्ताव पेश

    भारत के पड़ोसी देश में माता-पिता की इजाजत के बगैर बच्चे नहीं चला पाएंगे सोशल मीडिया, प्रस्ताव पेश


    नई दिल्ली। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर एक बड़ा प्रस्ताव पेश किया गया है। इसमें मांग की गई है कि 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को माता-पिता या कानूनी संरक्षक की अनुमति के बिना सोशल मीडिया अकाउंट बनाने और चलाने की इजाजत नहीं दी जाए।

    सत्तारूढ़ गठबंधन की सहयोगी इस्तेहकाम-ए-पाकिस्तान पार्टी (IPP) की विधायक सारा अहमद ने मंगलवार को पंजाब विधानसभा में यह प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने साइबर उत्पीड़न, ऑनलाइन यौन शोषण और बच्चों में बढ़ती डिजिटल निर्भरता को देखते हुए सोशल मीडिया इस्तेमाल को नियंत्रित करने की मांग उठाई।

    बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए कानून बनाने की मांग
    सारा अहमद पंजाब बाल संरक्षण ब्यूरो की अध्यक्ष भी हैं। उनके द्वारा पेश किया गया यह प्रस्ताव पाकिस्तान की किसी प्रांतीय या संघीय विधायिका में अपनी तरह का पहला प्रस्ताव बताया जा रहा है।

    प्रस्ताव में संघीय सरकार से बच्चों की सोशल मीडिया तक पहुंच को नियंत्रित करने और ऑनलाइन सुरक्षा को मजबूत करने के लिए व्यापक कानून बनाने की सिफारिश की गई है।

    प्रस्ताव में कहा गया है कि बच्चों के शारीरिक, मानसिक, मनोवैज्ञानिक और नैतिक विकास की सुरक्षा करना राज्य की संवैधानिक और नैतिक जिम्मेदारी है। सोशल मीडिया के अनियंत्रित इस्तेमाल से बच्चे साइबर बुलिंग, ऑनलाइन शोषण, अनुचित सामग्री, मानसिक तनाव और डिजिटल लत जैसी समस्याओं का सामना कर सकते हैं।

    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऐज वेरिफिकेशन की मांग
    प्रस्ताव में पाकिस्तान दूरसंचार प्राधिकरण (PTA) से देश में संचालित सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रभावी उम्र सत्यापन प्रणाली (Age Verification System) लागू करने की मांग भी की गई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए प्रस्तावित नियमों का सही तरीके से पालन हो सके।

    दुनिया के कई देश भी बना रहे हैं सख्त नियम
    यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब दुनिया के कई देश बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर नए नियमों पर विचार कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक ऑनलाइन गतिविधियों, मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं, साइबर उत्पीड़न और हानिकारक कंटेंट के संपर्क के बीच संबंधों को देखते हुए सरकारें नियमन बढ़ा रही हैं।

    कई देशों में लागू हो चुके हैं आयु आधारित नियम
    ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय संघ के कई सदस्य देशों समेत दुनिया के कई देशों ने बच्चों की सोशल मीडिया पहुंच को सीमित करने के लिए आयु आधारित प्रतिबंध लागू किए हैं। वहीं कुछ देश अधिक सख्त आयु सत्यापन व्यवस्था और ऑनलाइन बाल सुरक्षा कानूनों पर काम कर रहे हैं।

  • तेलंगाना में बेटियों की घट रही संख्या, 1000 बेटों पर सिर्फ 787 बेटियां, 14 जिलों में हालात गंभीर

    तेलंगाना में बेटियों की घट रही संख्या, 1000 बेटों पर सिर्फ 787 बेटियां, 14 जिलों में हालात गंभीर


    नई दिल्ली। तेलंगाना में जन्म के समय लिंगानुपात को लेकर चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। राज्य में बेटियों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। साल 2024 के सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (CRS) के आंकड़ों के अनुसार, तेलंगाना के 33 जिलों में से 14 जिलों में प्रति 1,000 लड़कों पर लड़कियों की संख्या 900 से भी नीचे पहुंच गई है।

    इन आंकड़ों में सबसे खराब स्थिति नलगोंडा जिले की सामने आई है, जहां साल 2024 में प्रति 1,000 लड़कों पर सिर्फ 787 लड़कियों का जन्म दर्ज किया गया। यह तेलंगाना में सबसे कम और देश के चिंताजनक आंकड़ों में शामिल है।

    नलगोंडा में लंबे समय से बनी हुई है समस्या
    नलगोंडा जिले में जन्म के समय लिंगानुपात की स्थिति लंबे समय से चिंता का विषय रही है। कई प्रयासों के बावजूद यहां बेटियों की संख्या में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया है। नए आंकड़ों ने एक बार फिर प्रशासन और सामाजिक संगठनों की चिंता बढ़ा दी है।

    कामारेड्डी ने पेश की सकारात्मक मिसाल
    जहां एक ओर कई जिलों में बेटियों की संख्या कम हो रही है, वहीं कामारेड्डी जिला उम्मीद की किरण बनकर सामने आया है। यह तेलंगाना का एकमात्र जिला है जहां लड़कियों का जन्म लड़कों से अधिक दर्ज किया गया।

    कामारेड्डी में प्रति 1,000 लड़कों पर 1,060 लड़कियों का जन्म हुआ। इसके बाद मुलुगु (991) और सिद्दीपेट (951) जिलों का स्थान रहा। इन दोनों जिलों ने राज्य के औसत 910 से बेहतर प्रदर्शन किया है।

    कई अन्य जिलों में भी स्थिति चिंताजनक
    नलगोंडा के अलावा कई अन्य जिलों में भी जन्म के समय लिंगानुपात काफी कम दर्ज किया गया है।

    महबूबाबाद: 805 लड़कियां प्रति 1,000 लड़के
    नागरकुरनूल: 842
    वनपर्थी: 848

    इसके अलावा वारंगल, रंगारेड्डी और खम्मम जैसे बड़े जिलों में भी लड़कियों की संख्या लड़कों की तुलना में कम दर्ज की गई है।

    साल 2024 में तेलंगाना में कुल 7.7 लाख बच्चों का जन्म दर्ज हुआ। देरी से होने वाले पंजीकरण की संख्या कम होने के कारण इन आंकड़ों को काफी सटीक माना जा रहा है।

    पुराने मामलों ने फिर बढ़ाई चिंता
    नलगोंडा के ताजा आंकड़ों ने साल 2017 की घटनाओं की याद भी ताजा कर दी है। उस समय लड़कियों की सुरक्षा के लिए गठित ‘रक्षिता’ कमेटी ने जिले में कन्या भ्रूण हत्या और शिशु हत्या के 14 मामले सामने लाए थे।

    जांच में सामने आया था कि कुछ मामलों में बेटियों के जन्म को छिपाया गया और उनके शवों को गुपचुप तरीके से ठिकाने लगाया गया। साल 2011 की जनगणना में भी कम उम्र के बच्चों में लड़कियों की घटती संख्या के संकेत मिले थे।

    बेटियों की संख्या घटने की वजह क्या है?
    विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे सामाजिक सोच और परंपरागत मान्यताएं बड़ी वजह हैं। कई ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी बेटे को परिवार का वंश आगे बढ़ाने वाला और बुढ़ापे का सहारा माना जाता है।

    वहीं दहेज जैसी सामाजिक कुरीतियों के कारण कुछ लोग बेटियों को आर्थिक बोझ के रूप में देखते हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि कम लिंगानुपात वाले जिलों में सरकार को निगरानी बढ़ाने की जरूरत है।

    विशेषज्ञों ने अल्ट्रासाउंड केंद्रों की नियमित जांच और पीसीपीएनडीटी (PCPNDT) कानून को सख्ती से लागू करने की मांग की है, ताकि भ्रूण लिंग जांच और कन्या भ्रूण हत्या जैसी गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके।

  • NEET-UG पेपर लीक केस में CBI का बड़ा खुलासा: NTA के पेपर-सेटर पर सवाल, आरोपी के फोन में मिले 111 मैचिंग प्रश्न

    NEET-UG पेपर लीक केस में CBI का बड़ा खुलासा: NTA के पेपर-सेटर पर सवाल, आरोपी के फोन में मिले 111 मैचिंग प्रश्न


    नई दिल्ली। NEET-UG पेपर लीक मामले की जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बड़ा खुलासा किया है। जांच एजेंसी ने विशेष अदालत को बताया कि पेपर लीक के तार कथित तौर पर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के उस पैनल तक पहुंच रहे हैं, जो परीक्षा के प्रश्न तैयार करता है।

    CBI के अनुसार, लातूर के एक कोचिंग सेंटर संचालक शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर ने NTA के पेपर-सेटर पैनल में शामिल पी वी कुलकर्णी से केमिस्ट्री के प्रश्न हासिल करने के लिए 5 लाख रुपये दिए थे। इस खुलासे के बाद परीक्षा की निष्पक्षता को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं।

    आरोपी के मोबाइल से मिले 36 फोटो, 111 सवाल परीक्षा से मैच
    CBI ने आरोपी मोटेगांवकर की जमानत याचिका का विरोध करते हुए अदालत में डिजिटल सबूत पेश किए। जांच के दौरान जब्त किए गए मोबाइल फोन की जांच में गैलरी से केमिस्ट्री के हाथ से लिखे हुए प्रश्नों की 36 तस्वीरें मिलीं।

    इन तस्वीरों में कुल 132 सवाल लिखे हुए थे। CBI ने जब इन प्रश्नों का मिलान NTA के मास्टर क्वेश्चन बैंक से किया तो इनमें से 111 सवाल NEET-UG परीक्षा के प्रश्नपत्र से हूबहू मैच पाए गए। जांच एजेंसी के मुताबिक, मोबाइल फोन के मेटाडेटा विश्लेषण से पता चला कि ये तस्वीरें 3 मई को आयोजित परीक्षा से करीब 10 दिन पहले खींची गई थीं। CBI का कहना है कि ये हस्तलिखित नोट्स कथित तौर पर मोटेगांवकर की लिखावट में हैं।

    5 लाख रुपये की डील और रकम बरामद
    CBI ने अदालत को बताया कि कथित पेपर लीक की कड़ी मोटेगांवकर के बेटे के जरिए जुड़ी, जो आरोपी पेपर-सेटर पी वी कुलकर्णी की केमिस्ट्री ट्यूटोरियल क्लास में पढ़ता था। जांच के अनुसार, इसी दौरान गोपनीय प्रश्न उपलब्ध कराए गए।

    जांच एजेंसी ने बताया कि प्रश्न हासिल करने के लिए हुई 5 लाख रुपये की डील की रकम एक अन्य आरोपी मनोज भगवानराव शिरुरे की निशानदेही पर बरामद कर ली गई है। इस मामले में अब तक 13 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और सभी आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।

    विवाद के बाद रद्द हुई थी परीक्षा
    NEET-UG पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी के आरोपों के बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए थे। इसके बाद NTA ने 12 मई को 3 मई को आयोजित NEET-UG परीक्षा को रद्द कर दिया था। बाद में मेडिकल अभ्यर्थियों के लिए 21 जून को दोबारा परीक्षा (Re-exam) आयोजित की गई थी। CBI की जांच में सामने आए इन नए तथ्यों के बाद परीक्षा प्रक्रिया की सुरक्षा व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका को लेकर बहस तेज हो गई है।

  • महाराष्ट्र: उल्हास नदी पर बन रहे बुलेट ट्रेन पुल के बहने की खबर वायरल, NHSRCL ने बताया क्या है सच्‍चाई

    महाराष्ट्र: उल्हास नदी पर बन रहे बुलेट ट्रेन पुल के बहने की खबर वायरल, NHSRCL ने बताया क्या है सच्‍चाई


    मुंबई। महाराष्ट्र के ठाणे जिले में भारी बारिश के बाद सोशल मीडिया पर वायरल हुई उस खबर का नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने खंडन किया है, जिसमें दावा किया गया था कि मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत उल्हास नदी पर बन रहा पुल बह गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि कोई भी स्थायी पुल क्षतिग्रस्त या बहा नहीं है।

    NHSRCL ने बुधवार को जारी बयान में बताया कि भारी बारिश और उल्हास नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी के कारण केवल निर्माण कार्य के लिए बनाया गया अस्थायी एक्सेस मार्ग प्रभावित हुआ है। यह मार्ग मजदूरों, मशीनरी और निर्माण सामग्री के आवागमन के लिए तैयार किया गया था और इसका मुख्य पुल की संरचना से कोई संबंध नहीं था।

    निर्माण कार्य पर नहीं पड़ा कोई असर
    अधिकारियों के अनुसार, इस घटना का पुल के डिजाइन, सुरक्षा या निर्माण कार्य पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। परियोजना का निर्माण कार्य तय योजना के अनुसार जारी है और सभी गतिविधियां सामान्य रूप से संचालित हो रही हैं।

    भारी बारिश के बाद फैली थी भ्रम की स्थिति
    हाल ही में ठाणे जिले में हुई तेज बारिश के कारण उल्हास नदी उफान पर आ गई थी, जिससे आसपास के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई। इसी दौरान कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया गया कि निर्माणाधीन पुल बह गया है। हालांकि, NHSRCL ने स्पष्ट किया कि प्रभावित हिस्सा केवल अस्थायी निर्माण मार्ग था, स्थायी पुल नहीं।

    1.08 लाख करोड़ रुपये की है परियोजना
    मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर की कुल लंबाई 508 किलोमीटर है और इसे करीब 1.08 लाख करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से विकसित किया जा रहा है।

    NHSRCL ने लोगों से अपील की है कि परियोजना से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए केवल आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करें और सोशल मीडिया पर प्रसारित भ्रामक या अपुष्ट खबरों से बचें। निगम के अनुसार, ठाणे सहित सभी निर्माण स्थलों पर परियोजना का कार्य पारदर्शिता के साथ लगातार जारी है।

  • कर्क संक्रांति आज: सूर्य का कर्क राशि में प्रवेश, उत्तरायण समाप्त, इन 4 राशियों को होगा लाभ

    कर्क संक्रांति आज: सूर्य का कर्क राशि में प्रवेश, उत्तरायण समाप्त, इन 4 राशियों को होगा लाभ


    नई दिल्ली। आज कर्क संक्रांति के अवसर पर सूर्य देव मिथुन राशि से निकलकर चंद्रमा की राशि कर्क में प्रवेश कर रहे हैं। ज्योतिष और हिंदू पंचांग के अनुसार सूर्य के इस राशि परिवर्तन को कर्क संक्रांति कहा जाता है, जिसका विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है।

    कर्क संक्रांति के साथ ही सूर्य का उत्तरायण काल समाप्त हो गया है और अब सूर्य दक्षिणायन हो गए हैं। आगामी छह माह तक सूर्य दक्षिणायन रहेंगे। शास्त्रों में इस अवधि को देवताओं की रात्रि कहा गया है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार सूर्य के कर्क राशि में प्रवेश से कुछ राशियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन और शुभ फल मिलने की संभावना है।

    इन राशियों को मिलेगा विशेष लाभ

    मेष राशि (Aries)
    कर्क संक्रांति मेष राशि के जातकों के लिए शुभ संकेत लेकर आई है। आत्मविश्वास और साहस में वृद्धि होगी। कार्यस्थल पर आपके काम की सराहना होगी और वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलेगा। नौकरी की तलाश कर रहे लोगों और कारोबार बढ़ाने की योजना बना रहे लोगों के लिए समय अनुकूल रहेगा। आर्थिक स्थिति भी पहले से बेहतर हो सकती है।

    कन्या राशि (Virgo)
    कन्या राशि वालों के लिए सूर्य का यह गोचर आर्थिक दृष्टि से लाभकारी माना जा रहा है। धन प्राप्ति के नए अवसर मिल सकते हैं और लंबे समय से अटका हुआ पैसा वापस मिलने के योग बन रहे हैं। सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी तथा परिवार में सुखद वातावरण रहेगा। किसी पुराने मित्र या रिश्तेदार से मुलाकात भी लाभदायक साबित हो सकती है।

    तुला राशि (Libra)
    तुला राशि के नौकरीपेशा लोगों को पदोन्नति या नई जिम्मेदारी मिलने की संभावना है। लंबे समय से अटके सरकारी कार्य पूरे हो सकते हैं। व्यापारियों को नई डील से अच्छा लाभ मिलने के संकेत हैं। पिता का सहयोग और मार्गदर्शन महत्वपूर्ण निर्णयों में मददगार रहेगा।

    मीन राशि (Pisces)
    मीन राशि के जातकों के लिए यह समय सुख और समृद्धि लेकर आ सकता है। संपत्ति या वाहन खरीदने की योजना साकार हो सकती है। परिवार में शांति और सौहार्द बना रहेगा तथा मानसिक तनाव में कमी आएगी। विद्यार्थियों को भी शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना है।

    कर्क संक्रांति पर करें ये तीन शुभ कार्य

    तिल और गंगाजल से स्नान करें
    यदि पवित्र नदी में स्नान संभव न हो तो घर पर स्नान के पानी में गंगाजल और काले तिल मिलाकर स्नान करें। इसे शुभ माना गया है।

    सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करें
    स्नान के बाद तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन, अक्षत और लाल पुष्प डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें तथा ‘ॐ सूर्याय नमः’ मंत्र का जाप करें।

    अन्न, वस्त्र और उपयोगी वस्तुओं का दान करें
    दक्षिणायन की शुरुआत में दान का विशेष महत्व माना गया है। इस दिन जरूरतमंद लोगों या ब्राह्मणों को अन्न, विशेष रूप से सत्तू, वस्त्र, छाता अथवा मौसमी फलों का दान करना शुभ माना जाता है।