Blog

  • मुनाफावसूली के बाद भी सोने में तेजी के संकेत, एक्सपर्ट बोले- इस रेंज में खरीदारी का मौका न गंवाएं

    मुनाफावसूली के बाद भी सोने में तेजी के संकेत, एक्सपर्ट बोले- इस रेंज में खरीदारी का मौका न गंवाएं


    नई दिल्ली । सोने की चमक फिलहाल फीकी पड़ने के संकेत नहीं दे रही है। पिछले चार वर्षों में जिस रफ्तार से सोने की कीमतों ने ऊंचाई हासिल की है उसने निवेशकों और खरीदारों दोनों को हैरान कर दिया है। सितंबर 2022 में करीब 50 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास रहने वाला 24 कैरेट सोना अब सितंबर 2026 में करीब 1.55 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया है। यानी चार साल में सोने ने करीब 210 फीसदी का जबरदस्त रिटर्न दिया है। हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजार में मुनाफावसूली जरूर देखने को मिली है लेकिन बाजार विशेषज्ञ इसे तेजी के दौर का अंत नहीं बल्कि लंबे बुल रन के बीच सामान्य करेक्शन मान रहे हैं।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 29 जनवरी को 5608 डॉलर प्रति औंस के ऐतिहासिक स्तर तक पहुंच गया था। इसके बाद कीमतों में करीब 20 फीसदी की गिरावट आई और फिलहाल सोना लगभग 4500 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है। हालांकि बाजार जानकारों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 4400 डॉलर प्रति औंस का महत्वपूर्ण स्तर बना रहता है तब तक सोने की तेजी को मजबूत समर्थन मिलता रहेगा। घरेलू बाजार में भी करीब 1.49 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार अगर वैश्विक बाजार में बड़ी गिरावट नहीं आती है तो दीपावली तक सोने का भाव 1.60 लाख से 1.62 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है।

    सोने की तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों की लगातार बढ़ती खरीदारी है। वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच कई देश अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं। इसे डी डॉलराइजेशन की रणनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है। कई देशों को अब यह चिंता है कि विदेशी मुद्रा या दूसरे देशों के वित्तीय साधनों पर पूरी तरह निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है जबकि अपने पास रखा सोना अधिक सुरक्षित संपत्ति माना जाता है। यही वजह है कि चीन जैसे देश लगातार अपने स्वर्ण भंडार में इजाफा कर रहे हैं और अन्य केंद्रीय बैंक भी बड़ी मात्रा में खरीदारी कर रहे हैं।

    सोने की मजबूती की दूसरी बड़ी वजह इसकी मौद्रिक परिसंपत्ति के रूप में बढ़ती अहमियत है। पहले सोने को मुख्य रूप से महंगाई और आर्थिक संकट से बचाव के साधन के तौर पर देखा जाता था लेकिन अब वैश्विक स्तर पर इसे करेंसी के अवमूल्यन और वित्तीय जोखिमों के खिलाफ मजबूत सुरक्षा कवच माना जा रहा है। बदलती वैश्विक परिस्थितियों में निवेशकों और देशों दोनों के लिए सोना भरोसेमंद संपत्ति बनकर उभरा है।

    इसके अलावा भारत और चीन जैसे बड़े बाजारों में त्योहारों और शादी के सीजन के दौरान बढ़ने वाली भौतिक मांग भी कीमतों को मजबूत आधार दे रही है। आपूर्ति की सीमित स्थिति और संस्थागत खरीदारी के कारण सोने पर दबाव कम दिखाई दे रहा है। हालांकि कीमतों में बीच बीच में गिरावट संभव है लेकिन लंबी अवधि का रुझान अभी भी मजबूत माना जा रहा है।

    खरीदारी को लेकर विशेषज्ञों की सलाह है कि शादी या अन्य जरूरी जरूरतों के लिए सोना खरीदने वालों को बहुत बड़ी गिरावट का इंतजार नहीं करना चाहिए। यदि कीमत 1.45 लाख से 1.52 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के दायरे में नीचे आती है तो चरणबद्ध तरीके से खरीदारी की जा सकती है। एक साथ पूरी रकम लगाने के बजाय जरूरत और बजट के हिसाब से 40 से 50 फीसदी खरीदारी पहले की जा सकती है। हालांकि निवेशकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि सोने की कीमतें वैश्विक बाजार और रुपये की चाल से प्रभावित होती हैं इसलिए तेजी की उम्मीद के बावजूद निवेश से पहले अपनी वित्तीय जरूरत और जोखिम क्षमता का आकलन जरूर करना चाहिए।

  • संघर्ष से सुपरस्टार तक पंकज त्रिपाठी की कहानी: काम मांगने के लिए कहते थे ईश्वर ने भेजा है, निभाया लड़की का किरदार

    संघर्ष से सुपरस्टार तक पंकज त्रिपाठी की कहानी: काम मांगने के लिए कहते थे ईश्वर ने भेजा है, निभाया लड़की का किरदार


    नई दिल्ली । पंकज त्रिपाठी आज हिंदी सिनेमा के उन चुनिंदा अभिनेताओं में शामिल हैं जिनका नाम सुनते ही दर्शकों को एक बेहतरीन अभिनय की उम्मीद होने लगती है। फिल्मों से लेकर वेब सीरीज तक अपने सहज और दमदार अभिनय से अलग पहचान बनाने वाले पंकज त्रिपाठी ने सफलता के इस मुकाम तक पहुंचने के लिए लंबा और मुश्किल सफर तय किया है। आज उनके 50वें जन्मदिन पर उनकी जिंदगी की कहानी एक बार फिर यह साबित करती है कि अगर मेहनत और धैर्य का साथ न छोड़ा जाए तो संघर्षों की सबसे कठिन राह भी सफलता तक पहुंचा सकती है।

    5 सितंबर 1976 को जन्मे पंकज त्रिपाठी का बचपन गांव के माहौल में बीता। उनके पिता किसान होने के साथ पुजारी भी थे और बचपन में पंकज पढ़ाई के अलावा पिता के साथ खेतों में हाथ भी बंटाते थे। हालांकि उनके मन में शुरू से ही अभिनय के प्रति गहरी रुचि थी। गांव में त्योहारों के दौरान होने वाले स्थानीय नाटकों में उन्हें अभिनय करने का मौका मिलता था। उस दौर में वह कई बार लड़की का किरदार भी निभाते थे। शायद तब किसी ने नहीं सोचा होगा कि गांव के मंच पर अभिनय करने वाला यह बच्चा एक दिन हिंदी सिनेमा का इतना बड़ा और भरोसेमंद नाम बन जाएगा।

    हाई स्कूल तक गांव में पढ़ाई करने के बाद पंकज त्रिपाठी पटना पहुंचे। वहां उन्होंने होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई की लेकिन अभिनय का सपना लगातार उनके भीतर जिंदा रहा। कई वर्षों तक पटना में रहने के बाद उन्होंने दिल्ली का रुख किया और नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में दाखिला लिया। साल 2004 में पढ़ाई पूरी करने के बाद उनका सफर मुंबई पहुंचा जहां सपनों की दुनिया में कदम रखना आसान था लेकिन अपनी पहचान बनाना बेहद मुश्किल।

    पंकज त्रिपाठी ने अपने करियर की शुरुआत छोटे किरदारों से की। कन्नड़ फिल्म चिगुरिदा कनासु में छोटा रोल करने के बाद वह मुंबई पहुंचे लेकिन सालों तक उन्हें लगातार संघर्ष करना पड़ा। उन्होंने खुद बताया था कि 2004 से 2010 के बीच काम तो मिला लेकिन आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं हो सकी। वह काम की तलाश में मुंबई की सड़कों और प्रोडक्शन ऑफिसों के चक्कर लगाते थे और अभिनय का एक मौका पाने के लिए लगातार कोशिश करते रहे।

    उनके काम मांगने का तरीका भी बेहद अलग था। जब ऑफिस के बाहर गार्ड पूछता कि उन्हें किसने बुलाया है तो वह कहते थे कि ईश्वर जी ने भेजा है। अंदर जाकर कास्टिंग से जुड़े लोग भी यही सवाल करते तो पंकज फिर वही जवाब देते और ऊपर की ओर इशारा कर देते। उनकी यह बात कई लोगों को हंसाती थी तो कुछ लोग नाराज भी हो जाते थे लेकिन पंकज का विश्वास और कोशिश कभी नहीं रुकी।

    इस संघर्ष के दौर में उनकी पत्नी मृदुला ने उनका सबसे मजबूत सहारा बनकर साथ दिया। वह स्कूल में पढ़ाती थीं और परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों को संभालती थीं। पंकज त्रिपाठी कई बार स्वीकार कर चुके हैं कि पत्नी का साथ नहीं मिलता तो शायद उनका सफर इतना आसान नहीं होता। उन्होंने अपने कठिन दिनों को केवल संघर्ष नहीं बल्कि खुद को कला के लिए तैयार करने का समय बताया।

    साल 2004 में फिल्म रन में काम करने के बाद भी उन्हें तुरंत पहचान नहीं मिली। कई वर्षों तक वह छोटे किरदारों में नजर आए और गैंगस्टर तथा विलेन जैसे रोल करते रहे। बंटी और बबली, अपहरण, ओमकारा, शौर्य, रावण, आक्रोश, चिल्लर पार्टी और अग्निपथ जैसी फिल्मों में छोटे किरदारों के जरिए उन्होंने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।

    फिर साल 2012 में गैंग्स ऑफ वासेपुर ने उनकी जिंदगी और करियर की दिशा बदल दी। इसके बाद पंकज त्रिपाठी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। बरेली की बर्फी, फुकरे रिटर्न्स, न्यूटन और कई अन्य फिल्मों के साथ वेब सीरीज की दुनिया में भी उन्होंने अपनी जबरदस्त पहचान बनाई। आज उनकी कहानी सिर्फ एक अभिनेता की सफलता नहीं बल्कि हर उस इंसान के लिए प्रेरणा है जो मुश्किल हालात में भी अपने सपनों को जिंदा रखता है।

  • शनिवार व्रत की संपूर्ण विधि: सुबह से शाम तक करें ये खास काम शनिदेव की कृपा पाने के लिए भूलकर भी न करें ये गलतियां

    शनिवार व्रत की संपूर्ण विधि: सुबह से शाम तक करें ये खास काम शनिदेव की कृपा पाने के लिए भूलकर भी न करें ये गलतियां


    नई दिल्ली । शनिवार का दिन भगवान शनिदेव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनिदेव कर्मों के आधार पर फल देने वाले देवता हैं और उनकी कृपा से जीवन में आने वाली कई परेशानियों से राहत मिलने की मान्यता है। शनिवार को श्रद्धा और नियम के साथ व्रत रखने से मन को शांति मिलती है और व्यक्ति अपने कर्मों के प्रति अधिक सजग होता है। शनिवार व्रत को लेकर मान्यता है कि इसे पूरी श्रद्धा के साथ करने से शनिदेव प्रसन्न हो सकते हैं और जीवन में सकारात्मक बदलाव का मार्ग खुल सकता है।

    शनिवार व्रत रखने वाले व्यक्ति को सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद साफ कपड़े पहनकर पूजा स्थल की सफाई करें और भगवान शनिदेव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। पूजा के दौरान शनिदेव की प्रतिमा या तस्वीर के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाने की परंपरा है। दीपक में काले तिल डालना भी शुभ माना जाता है। इसके बाद शनिदेव को काले तिल काली उड़द और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की जा सकती है। श्रद्धालु शनिदेव के मंत्रों का जाप करते हुए उनकी आराधना कर सकते हैं।

    शनिवार के दिन शनि मंदिर जाकर पूजा करना भी विशेष फलदायी माना जाता है। मंदिर में सरसों का तेल अर्पित करने की परंपरा है। इसके साथ ही काले तिल और काली उड़द का दान किया जा सकता है। धार्मिक मान्यताओं में जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराना और सामर्थ्य के अनुसार वस्त्र या अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करना भी पुण्यकारी माना गया है। शनिवार के दिन सेवा और दान का विशेष महत्व बताया जाता है।

    व्रत रखने वाले व्यक्ति को दिनभर सात्विक भोजन करना चाहिए। अपनी परंपरा और स्वास्थ्य के अनुसार फलाहार किया जा सकता है। भोजन में अनावश्यक तामसिक चीजों से बचना बेहतर माना जाता है। पूजा पाठ के साथ व्यक्ति को अपने व्यवहार और कर्मों पर भी ध्यान देना चाहिए क्योंकि शनिदेव को न्याय और कर्म का देवता माना जाता है। किसी गरीब या जरूरतमंद व्यक्ति का अपमान करने से बचना चाहिए और अपनी क्षमता के अनुसार उसकी सहायता करनी चाहिए।

    शनिवार के दिन हनुमान जी की पूजा करना भी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि हनुमान जी की भक्ति से शनिदेव से जुड़े भय और परेशानियों से राहत मिल सकती है। इसलिए शनिदेव की पूजा के साथ हनुमान चालीसा का पाठ भी किया जा सकता है। शाम के समय शनिदेव के नाम से दीपक जलाकर प्रार्थना करने की परंपरा भी है।

    हालांकि व्रत और पूजा की विधि अलग अलग परंपराओं में कुछ भिन्न हो सकती है। इसलिए अपनी पारिवारिक परंपरा और धार्मिक मान्यता के अनुसार पूजा करना उचित है। व्रत के दौरान केवल बाहरी नियमों का पालन ही नहीं बल्कि मन में अच्छे विचार रखना और ईमानदारी से अपने कर्म करना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। श्रद्धा के साथ किया गया शनिवार व्रत व्यक्ति को आत्मअनुशासन और सकारात्मक सोच की ओर प्रेरित कर सकता है।

  • बिग बॉस 20 में सलमान का मेगा धमाका, 20 सुपरहिट गानों पर दिखाएंगे खास डांस मूव्स, जानिए प्रीमियर में क्या होगा खास

    बिग बॉस 20 में सलमान का मेगा धमाका, 20 सुपरहिट गानों पर दिखाएंगे खास डांस मूव्स, जानिए प्रीमियर में क्या होगा खास


    नई दिल्ली । टेलीविजन के सबसे चर्चित और विवादित रियलिटी शो बिग बॉस का नया सीजन शुरू होने से पहले ही दर्शकों के बीच जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। बिग बॉस 20 का ग्रैंड प्रीमियर 6 सितंबर को होने जा रहा है और इस बार शो की शुरुआत बेहद खास अंदाज में करने की तैयारी है। शो के होस्ट सलमान खान अपने फैंस के लिए एक शानदार परफॉर्मेंस लेकर मंच पर उतरेंगे जिसमें उनके फिल्मी करियर के कई यादगार पलों की झलक देखने को मिल सकती है। खबरों के मुताबिक सलमान खान अपने 20 आइकॉनिक गानों पर 20 यादगार डांस मूव्स करते नजर आएंगे जिससे प्रीमियर की शाम और भी रंगीन और धमाकेदार बनने वाली है।

    सलमान खान लंबे समय से बिग बॉस की पहचान का अहम हिस्सा रहे हैं और उनकी एंट्री से लेकर वीकेंड के एपिसोड तक दर्शकों में अलग ही उत्सुकता रहती है। अब बिग बॉस 20 के ग्रैंड प्रीमियर में उनका यह खास डांस परफॉर्मेंस फैंस के लिए किसी बड़े सरप्राइज से कम नहीं होगा। सलमान के पुराने और सुपरहिट गानों के साथ उनके मशहूर डांस स्टेप्स को एक ही मंच पर देखने का मौका दर्शकों को मिलने वाला है। माना जा रहा है कि यह प्रस्तुति सलमान के लंबे फिल्मी सफर और उनके फैंस के बीच बने मजबूत जुड़ाव की भी खास झलक पेश करेगी।

    बिग बॉस के हर नए सीजन के साथ सबसे बड़ा सवाल कंटेस्टेंट्स को लेकर रहता है और इस बार भी कई चर्चित नामों की एंट्री की अटकलें तेज हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार कुशल तंवर उर्फ गुल्लू खुशी दुबे रैपर शेंटी शर्मा ईशा रिखी आम्रपाली दुबे कनिका मान सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर आरिश्फा खान मैरी कॉम अमन गांधी काजी तौकीर गीता बसरा और शोविक चक्रवर्ती जैसे नाम चर्चा में हैं। हालांकि शो में कौन कौन शामिल होगा इसकी पूरी तस्वीर ग्रैंड प्रीमियर के दौरान ही साफ होगी।

    नए सीजन को लेकर दर्शकों की उम्मीदें भी काफी बढ़ गई हैं क्योंकि बिग बॉस सिर्फ कंटेस्टेंट्स की एंट्री तक सीमित नहीं रहता बल्कि यहां दोस्ती दुश्मनी टास्क बहस और कई चौंकाने वाले ट्विस्ट पूरे सीजन को चर्चा में बनाए रखते हैं। ऐसे में बिग बॉस 20 में भी दर्शकों को नए चेहरों के साथ अलग रणनीतियां और कई दिलचस्प मुकाबले देखने को मिल सकते हैं।

    इस बार ग्रैंड प्रीमियर में सलमान खान की खास परफॉर्मेंस को लेकर फैंस पहले से ही उत्साहित हैं। 20 आइकॉनिक गानों और 20 यादगार डांस मूव्स का यह कॉन्सेप्ट प्रीमियर को और भव्य बनाने वाला है। सलमान के हिट गानों के साथ मंच पर होने वाला यह खास सेलिब्रेशन दर्शकों को उनके पुराने फिल्मी अंदाज की याद भी दिला सकता है।

    बिग बॉस 20 का ग्रैंड प्रीमियर 6 सितंबर को रात 9 बजे जियो हॉटस्टार पर देखा जा सकेगा जबकि इसका टेलीविजन प्रसारण रात 10 बजकर 30 मिनट पर कलर्स चैनल पर होगा। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि सलमान खान अपने खास डांस परफॉर्मेंस के अलावा दर्शकों के लिए और कौन से सरप्राइज लेकर आते हैं और कौन से नए चेहरे बिग बॉस के घर में कदम रखते हैं। इतना तय है कि सलमान के धमाकेदार अंदाज के साथ बिग बॉस 20 की शुरुआत इस बार दर्शकों के लिए मनोरंजन का बड़ा पैकेज बनने वाली है।

  • मलेरिया कब बन सकता है जानलेवा? बुखार से लेकर बेहोशी तक इन संकेतों को पहचानें, डॉक्टर ने बताई जरूरी सावधानियां

    मलेरिया कब बन सकता है जानलेवा? बुखार से लेकर बेहोशी तक इन संकेतों को पहचानें, डॉक्टर ने बताई जरूरी सावधानियां


    नई दिल्ली । मानसून के मौसम में मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ जाता है और इनमें मलेरिया एक ऐसी बीमारी है जिसे नजरअंदाज करना कई बार गंभीर पड़ सकता है। तेज बुखार ठंड लगना कंपकंपी सिरदर्द और कमजोरी जैसे लक्षण अक्सर सामान्य वायरल संक्रमण जैसे लगते हैं लेकिन यही संकेत मलेरिया की शुरुआत भी हो सकते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बुखार के साथ ठंड और कंपकंपी महसूस हो रही है तो इसे हल्के में लेने के बजाय डॉक्टर की सलाह लेकर समय पर जांच करानी चाहिए।

    मलेरिया संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलने वाला परजीवी संक्रमण है। इसकी शुरुआत कई बार सामान्य बुखार की तरह होती है जिसके कारण लोग इसे वायरल फीवर समझकर घर पर ही इलाज शुरू कर देते हैं। डॉक्टरों के अनुसार तेज बुखार के साथ सिरदर्द ठंड लगना कंपकंपी कमजोरी मतली या उल्टी जैसे लक्षण दिखाई दें तो सतर्क हो जाना चाहिए। केवल लक्षणों के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि व्यक्ति को मलेरिया है या नहीं इसलिए समय पर जांच कराना सबसे जरूरी कदम माना जाता है।

    विशेषज्ञों की सलाह है कि मलेरिया का संदेह होने पर खुद से एंटी मलेरियल दवा शुरू नहीं करनी चाहिए। बिना जांच और डॉक्टर की सलाह के दवा लेने से सही बीमारी की पहचान में देरी हो सकती है और स्वास्थ्य संबंधी दूसरी समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं। डॉक्टर जांच के परिणाम और मरीज की स्थिति के आधार पर बीमारी का प्रकार तथा सही इलाज तय करते हैं। समय रहते मलेरिया की पहचान हो जाए और उचित उपचार शुरू कर दिया जाए तो गंभीर जटिलताओं के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

    इलाज शुरू होने के बाद भी मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है। कई बार दवा लेने के बाद बुखार या कमजोरी कम होने लगती है और मरीज खुद को ठीक मानकर दवा बीच में ही बंद कर देते हैं। ऐसा करना खतरनाक हो सकता है। डॉक्टर की सलाह के बिना दवा की मात्रा कम या ज्यादा करना और इलाज की अवधि बदलना भी उचित नहीं है। मलेरिया का उपचार मरीज की स्थिति और संक्रमण के प्रकार के अनुसार तय किया जाता है इसलिए पूरी दवा और डॉक्टर की सलाह का पालन करना जरूरी है।

    कुछ लक्षण ऐसे हैं जिन्हें मलेरिया की गंभीर स्थिति का संकेत माना जा सकता है। अत्यधिक कमजोरी बार बार उल्टी होना सांस लेने में परेशानी पेशाब की मात्रा बहुत कम हो जाना असामान्य रक्तस्राव चेतना या व्यवहार में बदलाव भ्रम बेहोशी और दौरे पड़ना जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत अस्पताल जाना चाहिए। गंभीर मामलों में शरीर के कई अंगों पर असर पड़ सकता है इसलिए ऐसे संकेतों को बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

    छोटे बच्चों विशेषकर पांच साल से कम उम्र के बच्चों और गर्भवती महिलाओं में मलेरिया को लेकर अधिक सतर्क रहने की जरूरत होती है। कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों में भी संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है। इसलिए बुखार लंबे समय तक बना रहे या अचानक हालत बिगड़ने लगे तो घरेलू उपचार पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से संपर्क करना बेहतर है।

    मलेरिया से बचाव के लिए मच्छरों से सुरक्षा भी बेहद जरूरी है। घर और आसपास पानी जमा न होने दें मच्छरदानी का इस्तेमाल करें और खासकर शाम तथा रात के समय मच्छरों के काटने से बचाव करें। याद रखें तेज बुखार और कंपकंपी को सामान्य समझकर टालना सही नहीं है। समय पर जांच सही इलाज और गंभीर लक्षणों पर तुरंत अस्पताल पहुंचना ही मलेरिया से होने वाले बड़े खतरे को कम करने का सबसे सुरक्षित तरीका है

  • गुरु के सम्मान में समर्पित है 5 सितंबर, शिक्षक दिवस पर जानिए इस दिन की पूरी कहानी और डॉ. राधाकृष्णन का योगदान

    गुरु के सम्मान में समर्पित है 5 सितंबर, शिक्षक दिवस पर जानिए इस दिन की पूरी कहानी और डॉ. राधाकृष्णन का योगदान


    नई दिल्ली । भारत में हर साल 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। यह दिन देश के उन शिक्षकों को सम्मान देने के लिए समर्पित है जो विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान ही नहीं देते बल्कि उन्हें जीवन में सही दिशा दिखाने और बेहतर इंसान बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिक्षक दिवस का यह अवसर गुरु और शिष्य के बीच के उस रिश्ते को याद करने का दिन है जिसकी नींव ज्ञान संस्कार अनुशासन और मार्गदर्शन पर टिकी होती है। स्कूलों कॉलेजों और शिक्षण संस्थानों में इस दिन विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं और विद्यार्थी अपने शिक्षकों के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त करते हैं।

    भारत में 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाने के पीछे देश के महान शिक्षाविद दार्शनिक और पूर्व राष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन का महत्वपूर्ण योगदान है। उनका जन्म 5 सितंबर 1888 को हुआ था। वे शिक्षा और दर्शन के क्षेत्र में अपने उल्लेखनीय योगदान के लिए पूरे देश में सम्मानित रहे। जब वे भारत के राष्ट्रपति बने तो उनके कुछ विद्यार्थियों और प्रशंसकों ने उनका जन्मदिन मनाने की इच्छा जताई। इस पर उन्होंने अपने जन्मदिन को अलग तरीके से मनाने की बात कहते हुए इसे शिक्षकों के सम्मान के दिन के रूप में मनाने का सुझाव दिया। इसके बाद 5 सितंबर को भारत में शिक्षक दिवस के रूप में मनाने की परंपरा शुरू हुई।

    शिक्षक दिवस केवल एक उत्सव नहीं बल्कि शिक्षा के महत्व को समझने का अवसर भी है। किसी भी समाज के निर्माण में शिक्षक की भूमिका बेहद अहम होती है क्योंकि शिक्षक ही नई पीढ़ी को ज्ञान के साथ सोचने समझने और सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने में मदद करते हैं। विद्यार्थी के जीवन में माता पिता के बाद शिक्षक का स्थान सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। एक अच्छा शिक्षक अपने विद्यार्थियों की प्रतिभा को पहचानकर उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है और असफलता के समय उनका हौसला भी बढ़ाता है।

    इस दिन विद्यार्थी अपने शिक्षकों के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करते हैं। कई स्कूलों में सांस्कृतिक कार्यक्रम भाषण प्रतियोगिता और विशेष प्रस्तुतियां आयोजित की जाती हैं। विद्यार्थी अपने शिक्षकों को शुभकामनाएं देते हैं और कई जगह उन्हें उपहार देकर सम्मानित भी किया जाता है। कुछ शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थी एक दिन के लिए शिक्षक की भूमिका निभाते हैं और कक्षाओं का संचालन करते हैं। इससे उन्हें शिक्षक की जिम्मेदारियों और चुनौतियों को करीब से समझने का अवसर मिलता है।

    आज के बदलते दौर में शिक्षक की भूमिका भी लगातार बदल रही है। तकनीक और डिजिटल माध्यमों ने शिक्षा के तरीकों को काफी बदल दिया है लेकिन शिक्षक का महत्व आज भी कम नहीं हुआ है। इंटरनेट से जानकारी आसानी से मिल सकती है लेकिन उस जानकारी को सही तरीके से समझना उसका उपयोग करना और सही दिशा में आगे बढ़ना शिक्षक के मार्गदर्शन से ही बेहतर तरीके से संभव होता है।

    शिक्षक दिवस इसलिए भी खास है क्योंकि यह विद्यार्थियों को अपने शिक्षकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर देता है। जीवन में सफलता हासिल करने वाले कई लोग अपनी उपलब्धियों का श्रेय अपने शिक्षकों को देते हैं। वास्तव में शिक्षक वह व्यक्ति होता है जो विद्यार्थी के भीतर छिपी संभावनाओं को पहचानकर उसे उड़ान भरने का आत्मविश्वास देता है। 5 सितंबर का दिन इसी सम्मान और कृतज्ञता की भावना को मजबूत करता है और हमें याद दिलाता है कि एक अच्छे शिक्षक का प्रभाव विद्यार्थी की पूरी जिंदगी पर दिखाई दे सकता है।

  • बंगाल में धीरेंद्र शास्त्री का बड़ा बयान, बोले- ‘ये अकबर का नहीं, रघुवर का है देश’; धर्मांतरण पर भी दिया बयान

    बंगाल में धीरेंद्र शास्त्री का बड़ा बयान, बोले- ‘ये अकबर का नहीं, रघुवर का है देश’; धर्मांतरण पर भी दिया बयान


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में कथा के लिए पहुंचे बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री ने धर्मांतरण और घर वापसी के मुद्दे पर बड़ा बयान दिया। हावड़ा में आयोजित कथा के दौरान उन्होंने कहा, “यह देश अकबर का नहीं, रघुवर यानी भगवान राम का है।” उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में अब तक जिन लोगों का धर्मांतरण हुआ है, उनकी जल्द ही घर वापसी कराई जाएगी।

    धीरेंद्र शास्त्री ने अपने संबोधन में उन लोगों पर भी निशाना साधा, जो उनके बंगाल आने का विरोध कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कुछ लोग कह रहे थे कि बाबा को बंगाल में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा, लेकिन अब वे बंगाल आ चुके हैं। मंच से सीएम शुभेंदु की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि जनता को उनके विचारों, संस्कृति और हिंदुत्व की बातों पर भरोसा है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में कोलकाता का पत्ता-पत्ता ‘जय श्री राम’ के नारों से गूंजेगा।

    ‘बाबर वाले नहीं, रघुवर वाले बैठे हैं’

    सीमा के रास्ते देश में आने वाले लोगों को लेकर भी शास्त्री ने सख्त तेवर दिखाए। उन्होंने कहा कि सीमा के सहारे भारत में घुसने वाले ‘देशद्रोही’ यह बात कान खोलकर सुन लें कि अब यहां बाबर वाले नहीं, रघुवर वाले बैठे हैं। उन्होंने कहा, “छेड़ोगे तो छोड़ा नहीं जाएगा।”

    हालांकि, इसी दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई मुसलमानों या ईसाइयों से नहीं है। उन्होंने कहा कि विरोध उन लोगों से है जो भारत का खाते हैं और पाकिस्तान का गाते हैं। अपनी बात समझाने के लिए उन्होंने फिल्म ‘अमर अकबर एंथनी’ का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि फिल्म में तीनों के पूजा-पद्धति के रास्ते अलग नजर आते हैं, लेकिन अंत में सबका बाप कन्हैया लाल ही निकलता है। इसी उदाहरण के जरिए उन्होंने बंगाल के लोगों से मिलजुलकर रहने की अपील की और कहा, “कायदे में रहेंगे तो फायदे में रहेंगे।”

    बॉर्डर इलाकों में कथा करने की इच्छा

    धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि अभी हावड़ा में कथा हुई है, लेकिन आगे वह पश्चिम बंगाल के उन इलाकों में भी कथा करना चाहते हैं, जो सीमा से सटे हुए हैं। उनका दावा है कि इन क्षेत्रों में धर्मांतरण अधिक हुआ है। उन्होंने राम और मां काली से जुड़ी घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे इलाकों तक सनातन की आवाज पहुंचनी चाहिए।

    उन्होंने कहा कि केवल सरकार बदलने से किसी प्रदेश का पूरी तरह कायाकल्प नहीं हो सकता, बल्कि इसके लिए लोगों के भीतर भी बदलाव जरूरी है। उन्होंने ‘मन परिवर्तन’ पर जोर देते हुए कहा कि जब सनातनी एकजुट होंगे और हर व्यक्ति के मन में राम का भाव जागेगा, तभी बंगाल में वास्तविक रामराज्य की नींव मजबूत होगी।

    ‘दिक्कत है तो बांग्लादेश चले जाएं’

    अपने संबोधन में पड़ोसी देश बांग्लादेश का जिक्र करते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि जिन्हें भारत में रहने में परेशानी महसूस होती है, वे वहां जा सकते हैं। भाषण के अंत में उन्होंने अपनी राजनीतिक स्थिति भी स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि उनका किसी राजनीतिक दल से संबंध नहीं है और न ही वे किसी विशेष राजनीतिक चेहरे के समर्थक हैं। उनका कहना था कि वे पहले भी सनातन के थे, आज भी सनातन के हैं और आगे भी सनातन के ही रहेंगे।

  • बेंगलुरु में कर्ज वसूली की क्रूरता, महिला को चाकू से हमला कर अगवा किया, बंधक बनाकर प्रताड़ित करने का आरोप

    बेंगलुरु में कर्ज वसूली की क्रूरता, महिला को चाकू से हमला कर अगवा किया, बंधक बनाकर प्रताड़ित करने का आरोप


    नई दिल्ली । बेंगलुरु में कर्ज की वसूली को लेकर सामने आया एक मामला बेहद गंभीर और चौंकाने वाला है। आरोप है कि लोन की रकम और ब्याज नहीं चुका पाने पर एक महिला को अगवा कर बंधक बनाया गया और उसके साथ मारपीट की गई। पीड़िता के अनुसार आरोपियों ने उसे निर्वस्त्र कर उसका वीडियो बनाया और पैसे नहीं देने पर वीडियो वायरल करने की धमकी दी। पुलिस ने महिला को बरामद करने के बाद इस मामले में दो महिलाओं समेत तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर आगे की जांच की जा रही है।

    पुलिस के मुताबिक महिला ने करीब दो साल पहले आरोपी रेशमा बानू से एक लाख रुपए उधार लिए थे। इसके बाद उसने रेशमा के माध्यम से नाजत नाम की आरोपी से 50 हजार रुपए और लिए थे। इस तरह महिला पर कुल डेढ़ लाख रुपए का कर्ज था। बताया गया कि आर्थिक परेशानी के कारण महिला पिछले छह महीने से ब्याज और करीब दो महीने से किस्त की रकम नहीं चुका पा रही थी। इसके बाद कर्ज को लेकर उस पर दबाव बढ़ता गया।

    कथित तौर पर लगातार बढ़ते दबाव से परेशान महिला ने रेशमा का मोबाइल नंबर ब्लॉक कर दिया और अपनी मां के घर जाकर रहने लगी। लेकिन आरोप है कि इसके बाद भी कर्ज देने वालों ने उसका पीछा नहीं छोड़ा। पुलिस के अनुसार नाजत ने महिला को काम दिलाने का बहाना बनाकर अपने घर बुलाया। जब महिला वहां पहुंची तो रेशमा बानू और उसका पति सुहैल भी वहां मौजूद थे। आरोप है कि इसके बाद तीनों ने महिला के साथ मारपीट शुरू कर दी और कर्ज की रकम चुकाने के लिए उस पर दबाव बनाया।

    मामला यहीं नहीं रुका। महिला का आरोप है कि उसके साथ हिंसा की गई और चाकू से हमला करने के बाद उसे जबरन एक ऑटो रिक्शा में बैठाकर वहां से ले जाया गया। आरोपियों ने उसे कुंबलगोडु के पास स्थित एक मकान में पहुंचाया जहां कथित तौर पर उसे बंधक बनाकर रखा गया। पीड़िता के आरोप के अनुसार वहां उसके साथ दोबारा मारपीट की गई और उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।

    सबसे गंभीर आरोप यह है कि महिला को निर्वस्त्र कर उसका वीडियो बनाया गया। पीड़िता का कहना है कि आरोपियों ने इस वीडियो को वायरल करने की धमकी देते हुए उससे कर्ज और ब्याज की रकम चुकाने का दबाव बनाया। इस घटना ने निजी तौर पर कर्ज देने और वसूली के नाम पर अपनाए जाने वाले कथित आपराधिक तरीकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    पूरा मामला उस समय सामने आया जब महिला के अचानक लापता होने पर उसकी मां ने चंद्रालेआउट पुलिस स्टेशन पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने महिला की तलाश शुरू की और उसे बरामद कर लिया। इसके बाद पीड़िता के बयान और शुरुआती जांच के आधार पर पुलिस ने आरोपी रेशमा बानू, नाजत और सुहैल को गिरफ्तार कर लिया।

    पुलिस अब पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि महिला को कितने समय तक बंधक बनाकर रखा गया और कथित तौर पर बनाए गए वीडियो से जुड़े डिजिटल साक्ष्य क्या हैं। पुलिस कर्ज की मूल रकम और ब्याज को लेकर हुए विवाद की भी जांच कर रही है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और जांच के आगे बढ़ने के साथ मामले में अन्य तथ्य सामने आने की संभावना है।

  • 36 हजार फीट पर विमान और पायलट पर नशे का आरोप, AAIB रिपोर्ट के बाद एअर इंडिया ने PIC को किया बर्खास्त

    36 हजार फीट पर विमान और पायलट पर नशे का आरोप, AAIB रिपोर्ट के बाद एअर इंडिया ने PIC को किया बर्खास्त


    नई दिल्ली । एअर इंडिया ने फुकेत से दिल्ली आने वाली फ्लाइट AI2379 के पायलट इन कमांड के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उसे नौकरी से निकाल दिया है। यह कार्रवाई उस समय की गई जब जांच में पायलट का साइकोएक्टिव पदार्थ यानी मानसिक या शारीरिक क्षमता को प्रभावित करने वाले नशीले पदार्थ का टेस्ट पॉजिटिव पाया गया। एअरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो यानी AAIB की रिपोर्ट के बाद सामने आए इस मामले को एअरलाइन ने बेहद गंभीरता से लिया और अपनी जीरो टॉलरेंस नीति के तहत पायलट की सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी। कंपनी ने साफ कहा है कि यात्रियों और क्रू मेंबर की सुरक्षा उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है और उड़ान संचालन से जुड़े नियमों के उल्लंघन को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    मामला 4 अगस्त 2026 को फुकेत से दिल्ली आ रही एअर इंडिया की फ्लाइट AI2379 से जुड़ा है। विमान उस समय करीब 36 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ान भर रहा था जब उड़ान के दौरान गंभीर तकनीकी और परिचालन संबंधी स्थिति पैदा हुई। रिपोर्ट के अनुसार विमान के तीनों हाइड्रॉलिक सिस्टम में खराबी आने के बाद ऑटोपायलट बंद हो गया और विमान में स्टॉल की चेतावनी शुरू हो गई। इसके बाद कुछ ही सेकंड के भीतर विमान करीब 300 फीट नीचे आ गया। यह स्थिति यात्रियों और क्रू के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती थी हालांकि बाद में विमान को सुरक्षित रूप से दिल्ली पहुंचा लिया गया।

    इस घटना में टर्बुलेंस और अचानक हुए झटकों के कारण 20 यात्रियों और चार क्रू मेंबर के घायल होने की जानकारी सामने आई थी। घटना के बाद मामले की जांच शुरू की गई और दोनों पायलटों के नशीले या साइकोएक्टिव पदार्थों से जुड़े टेस्ट कराए गए। जांच में को पायलट की रिपोर्ट निगेटिव आई लेकिन पायलट इन कमांड का टेस्ट पॉजिटिव पाया गया। इसी खुलासे के बाद मामले ने गंभीर रूप ले लिया और अब एअर इंडिया ने संबंधित पायलट के खिलाफ सबसे कड़ी कार्रवाई करते हुए उसकी नौकरी समाप्त कर दी है।

    एअर इंडिया के अनुसार विमान उड़ाने वाले पायलट की फिटनेस और मानसिक तथा शारीरिक स्थिति सीधे तौर पर यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ी होती है। ऐसे में किसी पायलट का साइकोएक्टिव पदार्थ के टेस्ट में पॉजिटिव पाया जाना बेहद गंभीर मामला है। एअरलाइन ने कहा कि सुरक्षा और फिटनेस के नियमों का पालन सभी कर्मचारियों के लिए अनिवार्य है और किसी भी स्तर पर लापरवाही या नियमों का उल्लंघन स्वीकार नहीं किया जाएगा।

    AAIB की रिपोर्ट के बाद एअर इंडिया ने अपने स्तर पर मामले की समीक्षा की और इसके बाद पायलट को तत्काल प्रभाव से हटाने का फैसला लिया। कंपनी ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा से जुड़े मामलों में पद या जिम्मेदारी के आधार पर किसी को रियायत नहीं दी जाएगी। एअरलाइन की ओर से अपनाई गई जीरो टॉलरेंस नीति के तहत यह संदेश भी दिया गया है कि यात्रियों की सुरक्षा से किसी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता।

    अब इस मामले ने विमानन क्षेत्र में पायलटों की मेडिकल फिटनेस और उड़ान से पहले तथा बाद की जांच व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच एजेंसियों और एअरलाइन की आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी कि इस घटना से जुड़े अन्य तकनीकी और परिचालन पहलुओं में क्या निष्कर्ष सामने आते हैं। फिलहाल एअर इंडिया ने साफ कर दिया है कि सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी और किसी भी कर्मचारी के लिए नियमों से ऊपर होने की कोई गुंजाइश नहीं है।

  • आज बदलेगी 4 राशियों की किस्मत! नवपंचम राजयोग से मिलेगा धन लाभ, प्रमोशन और सफलता का जबरदस्त योग

    आज बदलेगी 4 राशियों की किस्मत! नवपंचम राजयोग से मिलेगा धन लाभ, प्रमोशन और सफलता का जबरदस्त योग


    नई दिल्ली । वैदिक ज्योतिष में ग्रहों की बदलती चाल और उनके विशेष संयोगों को जीवन में होने वाले बदलावों से जोड़कर देखा जाता है। आज यानी 5 सितंबर को ग्रहों की स्थिति के बीच एक विशेष नवपंचम राजयोग बनने जा रहा है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यह शुभ योग सुबह 10 बजे बनेगा और इसका निर्माण शुक्र तथा चंद्रमा के प्रभाव से हो रहा है। इस ग्रह संयोग को सुख समृद्धि कला और मानसिक शांति से जोड़कर देखा जाता है। माना जा रहा है कि इस विशेष योग का प्रभाव सभी राशियों पर अलग अलग रूप में पड़ सकता है लेकिन चार राशियों के लिए यह समय विशेष रूप से शुभ संकेत लेकर आ सकता है। इन राशियों में मेष मिथुन सिंह और तुला शामिल हैं।

    मेष राशि के जातकों के लिए शुक्र और चंद्रमा के प्रभाव से बना नवपंचम योग लाभकारी माना जा रहा है। कार्यक्षेत्र में स्थिति मजबूत हो सकती है और सहकर्मियों के साथ वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलने की संभावना जताई गई है। लंबे समय से अटके हुए प्रोजेक्ट्स में गति आ सकती है। व्यापार से जुड़े लोगों के लिए भी कोई बड़ी डील या लाभ का अवसर मिल सकता है। आर्थिक मोर्चे पर राहत मिलने और आय के नए स्रोत बनने की संभावना बताई जा रही है। पारिवारिक जीवन में भी खुशियों का माहौल रह सकता है और जीवनसाथी के साथ संबंधों में मधुरता बढ़ सकती है।
    मिथुन राशि के जातकों के लिए यह समय सुख सुविधाओं में वृद्धि के संकेत लेकर आ सकता है। समाज में मान सम्मान और प्रभाव बढ़ने की संभावना जताई गई है। लोग आपके विचारों और कार्यशैली की सराहना कर सकते हैं। यदि आप किसी नए काम की शुरुआत करने की योजना बना रहे हैं तो ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यह समय अनुकूल माना जा रहा है। मित्रों और प्रियजनों का साथ मिलने से मानसिक प्रसन्नता भी बनी रह सकती है।

    सिंह राशि के लोगों के लिए नवपंचम राजयोग आत्मविश्वास में बढ़ोतरी और करियर में प्रगति के अवसर लेकर आ सकता है। नौकरीपेशा लोगों को पदोन्नति या मनचाही जगह स्थानांतरण की खुशखबरी मिलने की संभावना बताई जा रही है। कार्यक्षेत्र में अधिकारियों का सहयोग भी मिल सकता है। आर्थिक मामलों में अप्रत्याशित सफलता के योग माने जा रहे हैं। निवेश से अच्छा लाभ मिलने और पुराने कर्जों से राहत मिलने की संभावना भी जताई गई है।

    वहीं तुला राशि के स्वामी शुक्र ग्रह हैं इसलिए इस राशि के जातकों के लिए यह नवपंचम योग विशेष रूप से लाभकारी माना जा रहा है। भौतिक सुख सुविधाओं में वृद्धि हो सकती है और जीवन स्तर में सुधार के संकेत मिल सकते हैं। विद्यार्थियों के साथ साथ मीडिया कला और ग्लैमर के क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए भी यह समय सफलता के अवसर लेकर आ सकता है। लंबे समय से अटके काम पूरे होने की संभावना जताई जा रही है।

    कुल मिलाकर शुक्र और चंद्रमा के प्रभाव से बन रहा यह नवपंचम राजयोग मेष मिथुन सिंह और तुला राशि के जातकों के लिए ज्योतिषीय दृष्टि से खास माना जा रहा है। करियर व्यापार आर्थिक स्थिति मान सम्मान और व्यक्तिगत जीवन में सकारात्मक बदलाव के संकेत बताए जा रहे हैं। हालांकि ज्योतिषीय भविष्यवाणियों को सामान्य मान्यताओं के रूप में देखा जाता है और किसी व्यक्ति के जीवन पर ग्रहों का प्रभाव उसकी व्यक्तिगत जन्मकुंडली और अन्य परिस्थितियों के अनुसार अलग हो सकता है।