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  • अमेरिका में भारतीय मूल के नेता को सम्मान, सीनेट में सुनील पुरी को याद किया गया

    अमेरिका में भारतीय मूल के नेता को सम्मान, सीनेट में सुनील पुरी को याद किया गया


    नई दिल्ली अमेरिका की सीनेट में भारतीय मूल के अमेरिकी उद्योगपति और राष्ट्रपति सुनील पुरी को श्रद्धांजलि दी गई। इस दौरान अमेरिकी सीनेटर डिक डर्बिन ने उनके जीवन और समाज के लिए दिए गए योगदान को याद किया।

    सीनेटर डर्बिन ने बताया कि किस तरह भारत से बहुत कम पैसे लेकर अमेरिका आए एक युवा ने मेहनत और लगन के दम पर न सिर्फ अपनी पहचान बनाई, बल्कि रॉकफोर्ड, इलिनोइस के विकास में भी अहम भूमिका निभाई।

    मुंबई से अमेरिका तक का प्रेरणादायक सफर
    डर्बिन ने अपनी किताब में कहा कि सुनील पुरी अमेरिका में मुंबई से बेहतर शिक्षा का सपना देखते थे। वह रॉकफोर्ड यूनिवर्सिटी (पूर्व में रॉकफोर्ड कॉलेज) की पढ़ाई करने आये थे। कॉलेज के दिनों में आर्थिक स्थिति आसान नहीं थी। पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए उन्हें कई छोटी-मोटी सब्जियां उगानी पड़ती हैं।

    सीनेटर डर्बिन ने बताया कि कड़ी मेहनत और लगन के साथ उन्होंने हर तरह का काम किया, जिसमें अस्पताल में बेडपैन साफ ​​करना और भर्ती जैसे कठिन काम भी शामिल थे। इसी संघर्ष के दम पर उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की और आगे बढ़ने का रास्ता निकाला।

    रियल एस्टेट में बनी बड़ी पहचान
    एक रियल एस्टेट कंपनी की स्थापना के बाद सुनील पुरी ने ‘फर्स्ट रॉकफोर्ड ग्रुप’ का नाम रखा, जिसके बाद उन्हें ‘फर्स्ट मिडवेस्ट ग्रुप’ का नाम दिया गया।

    इस कंपनी ने रॉकफोर्ड सिटी में कई पुनर्विकास कंपनियों को आगे बढ़ाया। डर्बिन ने बताया कि कंपनी ने कई वीरान और उपेक्षित इमारतों को फिर से विकसित कर उन्हें उपयोगी स्थानों पर रेस्तरां, कार्यालय और गोदामों में बदल दिया।

    उनके अनुसार इन कोलिक ने शहर में नई ऊर्जा भर दी और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के साथ-साथ हजारों लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा किए।

    समाजसेवा में भी दिया बड़ा योगदान
    व्यवसाय के साथ-साथ सुनील पुरी समाजसेवा के कार्य में भी सक्रिय रहे। डर्बिन ने बताया कि अपने माता-पिता से मिली सीख से प्रेरणा लेकर वह हमेशा समाज को कुछ वापस करने की बात करते थे।

    उन्होंने कई कोचिंग संस्थानों के लिए लाखों डॉलर का दान और अपना समय भी समर्पित किया। उनके योगदान में कई महत्वपूर्ण स्मारक हो सकते हैं, जिनमें ‘कीलिंग-पुरी पीस प्लाजा’, दक्षिण-पूर्व रॉकफोर्ड की वाईएमसीए शाखा और ‘साल्वेशन आर्मी पुरी फैमिली डिजास्टर सर्विसेज सेंटर’ शामिल हैं।

    भारत-अफ्रीका को मजबूत बनाने में भूमिका
    सीनेटर डर्बिन ने यह भी निर्देश दिया कि सुनील पुरी भारत और अमेरिका के सशक्तिकरण को हमेशा के लिए मजबूत करने के लिए सक्रिय रहें।

    उन्होंने दोनों देशों के बीच सहयोग और साझेदारी को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम किया। इसी मित्र में उन्होंने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपतियों बिल क्लिंटन और बराक ओबामा के साथ भारत की यात्रा भी की थी।

    सुनील पुरी का जीवन संघर्ष, परिश्रम और समाजसेवा का उदाहरण है। एक साधारण प्रवासी से लेकर सफल उद्योगपति और पदवी तक की यात्रा पर निकले उनके कई लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। अमेरिकी सीनेट द्वारा दी गई श्रद्धांजलि इस बात का प्रमाण है कि उन्होंने अमेरिका और भारत दोनों के समाज में गहरी छाप छोड़ी है।

  • एमपी के सबसे अमीर IAS अफसर का खुलासा: 19.5 करोड़ संपत्ति के साथ मनु श्रीवास्तव टॉप पर, 100 अफसरों के पास न मकान न प्लॉट

    एमपी के सबसे अमीर IAS अफसर का खुलासा: 19.5 करोड़ संपत्ति के साथ मनु श्रीवास्तव टॉप पर, 100 अफसरों के पास न मकान न प्लॉट

    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारियों की संपत्ति से जुड़ा एक दिलचस्प आंकड़ा सामने आया है, जिसमें कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। केंद्र सरकार को दी गई जानकारी के अनुसार राज्य के कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के पास करोड़ों की संपत्ति है, जबकि करीब 100 अधिकारी ऐसे भी हैं जिनके पास न खुद का मकान है और न ही कोई प्लॉट। इस सूची में सबसे ज्यादा संपत्ति रखने वाले अधिकारी के रूप में मनु श्रीवास्तव का नाम सामने आया है।

    केंद्रीय कार्मिक और प्रशिक्षण मंत्रालय को दी गई संपत्ति की जानकारी के अनुसार अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव के पास करीब 19.5 करोड़ रुपये की संपत्ति दर्ज है, जो मध्यप्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारियों में सबसे अधिक है। वहीं कलेक्टर स्तर के अधिकारियों में विवेक श्रोत्रिय सबसे आगे हैं। उनकी घोषित संपत्ति करीब 6.2 करोड़ रुपये बताई गई है।

    दरअसल केंद्र सरकार के निर्देश पर सभी आईएएस अधिकारियों को हर वर्ष अपनी चल और अचल संपत्तियों का विवरण देना होता है। इसी क्रम में मध्यप्रदेश कैडर के अधिकारियों ने 31 दिसंबर 2024 तक की स्थिति में अपनी संपत्ति का विवरण केंद्र को सौंपा है। इस सूची में कुल 388 आईएएस अधिकारियों ने अपनी प्रॉपर्टी की जानकारी दी है, जिनमें से चार अधिकारी अब रिटायर हो चुके हैं।

    रिपोर्ट के अनुसार राज्य के 231 आईएएस अधिकारियों के पास खेती की जमीन भी है। हालांकि इस सूची का एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि करीब 100 अधिकारी ऐसे हैं जिनके पास न खुद का मकान है और न ही कोई प्लॉट दर्ज है। यह आंकड़ा इसलिए भी ध्यान खींचता है क्योंकि आमतौर पर यह माना जाता है कि वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के पास पर्याप्त संपत्ति होती है।

    संपत्ति के मामले में दूसरे स्थान पर टी प्रतीक राव का नाम सामने आया है, जिनके पास घोषित संपत्ति करीब 10.5 करोड़ रुपये बताई गई है। वहीं प्रताप नारायण यादव लगभग 10.2 करोड़ रुपये की संपत्ति के साथ सूची में तीसरे स्थान पर हैं।इसके अलावा अनिरुद्ध मुखर्जी के पास करीब 8.71 करोड़ रुपये की संपत्ति दर्ज है। वहीं अंजलि रमेश के पास लगभग 7.35 करोड़ रुपये और ज्ञानेश्वर पाटिल के पास करीब 7.10 करोड़ रुपये की संपत्ति बताई गई है।

    इसके अलावा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों में अनुराग जैन की घोषित संपत्ति लगभग 4.14 करोड़ रुपये है, जबकि नीरज मंडलोई के पास करीब 4.97 करोड़ रुपये की संपत्ति दर्ज की गई है। वहीं राजेश राजोरा की संपत्ति करीब 1.73 करोड़ रुपये बताई गई है। सरकारी नियमों के तहत आईएएस अधिकारियों को अपनी संपत्ति का विवरण पारदर्शिता बनाए रखने के लिए हर साल देना अनिवार्य होता है। यह प्रक्रिया प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की जाती है।

    मध्यप्रदेश के आईएएस अधिकारियों की संपत्ति से जुड़ा यह डाटा सामने आने के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। यह आंकड़े एक ओर जहां अधिकारियों की आर्थिक स्थिति की झलक देते हैं, वहीं यह भी बताते हैं कि कई अधिकारी अभी भी व्यक्तिगत संपत्ति के मामले में अपेक्षाकृत सीमित संसाधनों के साथ सेवा दे रहे हैं।

  • भारतीय कुश्ती के महान शिक्षक: गुरु हनुमान की विरासत आज भी कायम

    भारतीय कुश्ती के महान शिक्षक: गुरु हनुमान की विरासत आज भी कायम


    नई दिल्ली भारत में कुश्ती सिर्फ एक खेल नहीं बल्कि परंपरा और संस्कृति का हिस्सा है। समय-समय पर कई महान पहलवानों और कोचों ने इस खेल को नई ऊंचाई तक पहुंचाया। उन्नीस महान व्यक्तित्वों में एक नाम है गुरु हनुमान का, असली नाम विजय पाल यादव था।

    गुरु हनुमान को भारतीय कुश्ती का आधुनिक रूप देने का श्रेय दिया जाता है। उन्होंने पारंपरिक भारतीय पहलवानों को अंतर्राष्ट्रीय फ्रीस्टाइल कुश्ती के मानकों के अनुरूप ढालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके सुझाव में कई पहलवानों ने देश का नाम विश्व स्तर पर रोशन किया।

    राजस्थान से दिल्ली तक का सफर
    विजय पाल यादव का जन्म 15 मार्च 1901 को चिड़ावा, राजस्थान में हुआ था। दिलचस्प बात यह है कि वह कभी स्कूल नहीं गईं, लेकिन बचपन से ही उनके मन में कुश्ती के लिए गहरी पैठ थी।

    कम उम्र में ही उन्होंने छात्रों में प्रैक्टिस शुरू कर दी और नौकरी में अपना करियर बनाने का सपना देखा। साल 1919 में उन्होंने काम की तलाश में दिल्ली आकर सब्जी मंडी इलाके में एक छोटी सी दुकान शुरू की। हालाँकि उनका मन व्यापार में नहीं लगा और उन्होंने अपना पूरा ध्यान कुश्ती पर लगा दिया। धीरे-धीरे वह इलाके में एक बेहतरीन रेसलर के रूप में पहचाने जाने लगे।

    बिड़ला मिल्स व्यायामशाला से गुरु हनुमान एरिना तक
    भारतीय उद्योगपति के.के. बिड़ला ने उन्हें कुश्ती के प्रशिक्षण के लिए जमीन उपलब्ध कराई। इसके बाद 1925 के आसपास पुरानी दिल्ली के मलकागंज इलाके में बिड़ला मिल्स व्यायामशाला की शुरुआत हुई।

    यह क्षेत्र बाद में गुरु हनुमान् क्षेत्र के नाम से प्रसिद्ध हुआ। रोशनआरा बाग और शक्ति नगर के पास स्थित यह अखाड़ा आज भी भारत का सबसे पुराना और प्रसिद्ध कुश्ती प्रशिक्षण प्रशिक्षण में से एक माना जाता है।

    कई दिग्गज रेसलरों को प्रशिक्षण दिया गया
    गुरु हनुमान के मार्गदर्शन में कई पहलवानों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया। उनके शिष्य सुदेश कुमार और प्रेम नाथ ने 1958 के राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीता था।

    इसके अलावा सतपाल सिंह और करतार सिंह ने क्रमशः 1982 और 1986 के एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता। गुरु हनुमान के आठ शिष्यों को भारत के प्रतिष्ठित अर्जुन गुरु भी मिल गए हैं। उनके इंजीनियरों में दारा सिंह, हंस राम, सुभाष वर्मा, वीरेंद्र सिंह और सुशील कुमार जैसे दिग्गज शामिल हैं।

    सुशील कुमार और रवि दहिया जैसे स्टैंडर्स से लेकर ट्रेडिशनल गुरु परंपरा तक
    गुरु हनुमान के शिष्य सतपाल सिंह आज भी भारत के बड़े कुश्ती कोचों में गिने जाते हैं। उनके प्रशिक्षण में सुशील कुमार और रवि दहिया जैसे पहलवानों ने ओलंपिक में भारत के लिए पदक नामांकन इतिहास हासिल किया।

    ऐसे ही गुरु हनुमान की कोचिंग परंपरा आज भी भारतीय कुश्ती को नई पीढ़ी तक पहुंचा रही है।

    पुरस्कार और सम्मान
    भारतीय कुश्ती में उनके अमूल्य योगदान को देखते हुए उन्हें कई बड़े सम्मान मिले। उन्हें 1983 में पद्म श्री और 1987 में प्रतिष्ठित द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 9 अगस्त 2003 को मदन लाल खुराना ने नई दिल्ली के कल्याण विहार स्पोर्ट्स स्टेडियम में हनुमान जी की प्रतिमा का अनावरण भी किया था।

    विभिन्न दुर्घटनाओं में हुई मौतें
    24 मई 1999 को हरिद्वार के पास एक कार दुर्घटना में गुरु हनुमान का निधन हो गया। हालाँकि उनकी विरासत आज भी भारतीय कुश्ती में जीवित है और उनके क्षेत्रीय देश के पहलवानों के लिए प्रेरणा का केंद्र बनी हुई है।

    गुरु हनुमान सिर्फ एक कोच नहीं बल्कि भारतीय कुश्ती के महान मार्गदर्शक थे। उन्होंने औद्योगिक स्टॉक एक्सचेंजों को आधुनिक अंतरराष्ट्रीय स्तर तक मान्यता दी और ऐसी पीढ़ी तैयार की, जिसने देश का नाम विश्व मंच पर रोशन किया। उनकी बनाई परंपरा आज भी भारतीय कुश्ती की ताकतें बनी हुई है।

  • इरफान पठान का बयान: CSK में युवा खिलाड़ियों को मौका, फिर भी धोनी की अहमियत बरकरार

    इरफान पठान का बयान: CSK में युवा खिलाड़ियों को मौका, फिर भी धोनी की अहमियत बरकरार


    नई दिल्ली भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व ऑलराउंडर इरफान पठान का कहना है कि चेन्नई सुपर किंग्स में अब युवा खिलाड़ियों के लिए खुद को साबित करने का सही समय आ गया है। हालांकि टीम में युवा खिलाड़ियों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन एमएस धोनी की भूमिका अभी भी बहुत महत्वपूर्ण बनी हुई है।

    इजरायल पठान ने बातचीत करते हुए कहा कि धोनी मैदान पर और मैदान के बाहर दोनों जगह टीम के लिए योगदान देने को तैयार नजर आते हैं। उनके अनुसार ड्रेसिंग रूम में धोनी की पहचान अगली पीढ़ी के खिलाड़ियों और नेताओं को दिशा देने में अहम भूमिका निभाएगी।

    आईपीएल में फिर दिख धोनी का जलवा
    इरफान पठान ने कहा कि जैसे ही आईपीएल शुरू होगा, क्रिकेट फैंस को एक बार फिर एमएस धोनी मैदान पर नजर आएंगे। उन्होंने कहा कि धोनी इस सीजन के लिए पूरी तरह तैयार और फिट दिख रहे हैं।

    पठान के अनुसार, धोनी ने सालों तक टीम की जिम्मेदारी संभाली है, लेकिन अब समय आ गया है कि युवा खिलाड़ियों को भी आगे आने का मौका दिया जाए। उन्होंने कहा कि आयुष म्हात्रे, डेवल्ड ब्रेविस, शिवम दुबे और रुतुराज गायकवाड़ जैसे खिलाड़ियों को टीम की कमान संभालनी चाहिए।

    युवा खिलाड़ियों से बड़ी उम्मीदें
    इरफान पठान का मानना ​​है कि सीएसके की मौजूदा टीम पेपर पर काफी रोमांचक नजर आती है। उन्होंने कहा कि इस युवा टीम में जिम्मेदारी लेने की क्षमता और निडरता साफ दिखाई देती है। उनके हिसाब से आयुष म्हात्रे, डेवल्ड ब्रेविस, शिवम दुबे और कप्तान रुतुराज गायकवाड़ जैसे खिलाड़ी आने वाले समय में टीम को नई दिशा दे सकते हैं।

    अनुभवी टीम से युवा टीम की ओर बदलाव
    एक समय था जब चेन्नई सुपर किंग्स को अनुभवी और अनुभवी खिलाड़ियों की टीम माना जाता था। लेकिन पिछले कुछ समय से टीम की रणनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है।

    नीलामी में भी टीम ने युवाओं पर भरोसा दिखाया है। आयुष म्हात्रे, डेवल्ड ब्रेविस और सरफराज खान जैसे युवा खिलाड़ियों को टीम में शामिल करना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। वहीं संजू सैमसन के आने से टीम की मजबूती भी काफी मजबूत हुई है।

    धोनी को शानदार विदाई देने की कोशिश
    संभावना तय जा रही है कि यह सीजन एमएस धोनी का चेन्नई सुपर किंग्स के लिए आखिरी आईपीएल हो सकता है। ऐसे में कप्तान रुतुराज गायकवाड़ और अन्य युवा खिलाड़ियों के पास धोनी के साथ खेलते हुए उनसे सीखने का बड़ा मौका होगा।

    पुणे है कि चेन्नई सुपर किंग्स आईपीएल इतिहास की सबसे सफल टीमों में से एक है। टीम ने धोनी की कप्तानी में पांच बार खिताब जीता है और इस मामले में मुंबई इंडियंस के बराबर है, जिसने रोहित शर्मा की कप्तानी में पांच ट्रॉफी जीती हैं।

    सीएसके ने आखिरी बार 2023 में आईपीएल का खिताब जीता था। अब टीम की कोशिश इस सीजन में एक बार फिर ट्रॉफी अपने दिग्गज कप्तान धोनी को शानदार विदाई देने की होगी।

    इरफान पठान के अनुसार चेन्नई सुपर किंग्स अब युवा खिलाड़ियों के दम पर आगे बढ़ने की तैयारी कर रही है, लेकिन एमएस धोनी का अनुभव और मार्गदर्शन टीम के लिए अब भी सबसे बड़ी ताकत बना हुआ है। आने वाला आईपीएल सीजन यह तय करेगा कि युवा जोश और अनुभवी नेतृत्व का यह मेल टीम को कितनी सफलता दिला पाता है।

  • इंदौर की सनातन प्रीमियर लीग में पहुंचे BCCI उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला, बोले गांव के बच्चों से ही निकलेगा भारत का भविष्य

    इंदौर की सनातन प्रीमियर लीग में पहुंचे BCCI उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला, बोले गांव के बच्चों से ही निकलेगा भारत का भविष्य


    इंदौर । मध्य प्रदेश के इंदौर में आयोजित सनातन प्रीमियर लीग इन दिनों खेल और सियासी हलकों में चर्चा का केंद्र बनी हुई है। इस लीग में शामिल होने पहुंचे राजीव शुक्ला ने मंच से इस आयोजन की खुलकर सराहना की और कहा कि जो भी क्रिकेट को बढ़ावा देता है वह देश के भविष्य को मजबूत करने का काम करता है। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजनों से गांव और छोटे कस्बों के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आगे आने का अवसर मिलता है।

    कार्यक्रम के दौरान राजीव शुक्ला ने कहा कि सनातन प्रीमियर लीग की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें गांवों के बच्चे बड़ी संख्या में हिस्सा ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को सही मंच और अवसर मिलते हैं तो वही खिलाड़ी आगे चलकर राज्य टीम रणजी ट्रॉफी और राष्ट्रीय टीम तक पहुंच सकते हैं। उनके मुताबिक क्रिकेट का असली टैलेंट अक्सर बड़े शहरों के बाहर छोटे कस्बों और गांवों में छिपा होता है जिसे पहचानने और आगे बढ़ाने के लिए इस तरह की लीग बेहद जरूरी हैं।

    राजीव शुक्ला ने कहा कि देश में क्रिकेट को और मजबूत बनाने के लिए जमीनी स्तर पर खेल गतिविधियों को बढ़ाना बेहद जरूरी है। यदि गांव गांव में खेल प्रतियोगिताएं और लीग आयोजित होंगी तो युवाओं को बेहतर अवसर मिलेंगे और देश को नए खिलाड़ी मिलेंगे। उन्होंने कहा कि आज के समय में कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी ऐसे हैं जो संसाधनों की कमी के कारण आगे नहीं बढ़ पाते लेकिन स्थानीय स्तर की लीग उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच देती हैं।

    इस मौके पर उन्होंने आयोजनकर्ता संत देवकीनंदन ठाकुर की भी सराहना की और कहा कि उनके प्रयास से युवाओं को खेल से जुड़ने का बड़ा अवसर मिल रहा है। उन्होंने कहा कि यह बेहद गर्व की बात है कि साधु संत भी अब युवाओं को खेल और सकारात्मक गतिविधियों की ओर प्रेरित कर रहे हैं। उनके मुताबिक जब संत समाज युवाओं को खेल के लिए प्रेरित करता है तो इसका सीधा असर समाज पर पड़ता है और युवा गलत रास्तों से दूर रहते हैं।

    राजीव शुक्ला ने अपने संबोधन में कहा कि सनातन कोई विवाद का विषय नहीं बल्कि एक परंपरा और विचारधारा है। उन्होंने कहा कि यदि सनातन के नाम पर युवा खेल रहे हैं आगे बढ़ रहे हैं और नशे जैसी बुराइयों से दूर रह रहे हैं तो यह समाज के लिए बेहद अच्छी बात है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से युवाओं में अनुशासन टीमवर्क और सकारात्मक सोच विकसित होती है।

    उन्होंने यह भी कहा कि देश में क्रिकेट की लोकप्रियता बहुत अधिक है और यदि इसे गांव गांव तक ले जाया जाए तो भारत को भविष्य में और भी बेहतरीन खिलाड़ी मिल सकते हैं। उनके अनुसार भारत की कई बड़ी क्रिकेट प्रतिभाएं छोटे शहरों और कस्बों से ही निकलकर सामने आई हैं।

    इंदौर में आयोजित सनातन प्रीमियर लीग को लेकर स्थानीय स्तर पर भी उत्साह देखा जा रहा है। बड़ी संख्या में दर्शक मैच देखने के लिए पहुंच रहे हैं और युवा खिलाड़ी इस मंच को अपने करियर के लिए एक बड़े अवसर के रूप में देख रहे हैं।

  • तवानगर जंगल में लुटेरों का एक घंटे का आतंक: आदिवासी दंपति और ग्रामीण से छीने मोबाइल व नकदी, पुलिस ने 6 घंटे में पकड़ा

    तवानगर जंगल में लुटेरों का एक घंटे का आतंक: आदिवासी दंपति और ग्रामीण से छीने मोबाइल व नकदी, पुलिस ने 6 घंटे में पकड़ा


    नर्मदापुरमर। नर्मदापुरम के तवानगर के जंगल में शुक्रवार शाम घोघरी और बटकुई के पास तीन लुटेरों ने एक घंटे में दो अलग-अलग लूट की घटनाओं को अंजाम देकर क्षेत्र में दहशत फैला दी। आदिवासी दंपति और एक अन्य ग्रामीण से कुल 6 हजार रुपए और दो मोबाइल छीने गए।

    जानकारी के अनुसार, फरियादी साहब लाल भूसारे अपनी पत्नी फूलवती के साथ बाइक से घर लौट रहे थे। घोघरी के छिपीखापा रोड पर जंगल में तीन बदमाशों ने उन्हें रोक लिया और उनका मोबाइल व नगदी छीनकर भाग गए। कुछ देर बाद शाम 7 बजे, रामेश्वर निवासी घोघरी को भी रोककर उसके पास से 500 रुपए और मोबाइल छीना गया।

    जैसे ही घटना की सूचना ग्रामीणों और तवानगर थाने तक पहुंची, थाना प्रभारी संजय पांडे और उनकी टीम ने इलाके में घेराबंदी कर आरोपियों की तलाश शुरू की। तत्परता और ग्रामीणों की मदद से पुलिस ने 6 घंटे के भीतर संदिग्ध दो युवकों को पकड़ लिया, जिनसे पूछताछ जारी है।

    एसपी सांई कृष्णा थोटा ने बताया कि दोनों लूट की वारदात तवानगर थाना क्षेत्र में हुई है और जल्द ही मामले का पूर्ण खुलासा किया जाएगा।

    ग्रामीणों ने पुलिस की त्वरित कार्रवाई की सराहना की और बताया कि जंगल में सुरक्षा के इंतजामों को और कड़ा करने की आवश्यकता है।

  • हरभजन सिंह का बयान: हार्दिक के लिए रोहित की सलाह से बदल सकती है मुंबई की किस्मत

    हरभजन सिंह का बयान: हार्दिक के लिए रोहित की सलाह से बदल सकती है मुंबई की किस्मत


    नई दिल्ली। हरभजन सिंह का मानना ​​है कि मुंबई इंडियंस को आईपीएल 2026 में रोहित शर्मा का बेहतर इस्तेमाल करना चाहिए। उनके अनुसार रोहित को सिर्फ बल्लेबाजी के लिए इम्पैक्ट प्लेयर के रूप में नहीं बल्कि पूरे मैच के दौरान मैदान पर रखना टीम के लिए ज्यादा फायदेमंद होगा।

    हरभजन सिंह ने जियोहॉटस्टार पर बातचीत के दौरान कहा कि रोहित शर्मा जैसे अनुभवी खिलाड़ी की मौजूदगी मैदान पर टीम के लिए बेहद अहम होती है। खासकर जब मैच कठिन स्थिति में हो और कप्तान को रणनीतिक फैसले लेने हों, तब रोहित जैसे अनुभवी खिलाड़ी का साथ बहुत काम आता है।

    उन्होंने कहा, “रोहित शर्मा को 12वें खिलाड़ी के तौर पर इस्तेमाल किया गया है जो सिर्फ बल्लेबाजी करता है, लेकिन मुझे लगता है कि जिस तरह के नेतृत्वकर्ता वह रहे हैं, उन्हें मैदान पर होना चाहिए। मुश्किल मैचों में, जब आपको कुछ खास फैसले लेने होते हैं, तब वह कप्तान के लिए बहुत मददगार हो सकते हैं।”

    हार्दिक पांड्या को मिल सकता है अनुभव का फायदा
    हरभजन सिंह का मानना है कि Hardik Pandya के लिए भी रोहित शर्मा की मौजूदगी मैदान पर काफी फायदेमंद साबित हो सकती है। रोहित लंबे समय तक मुंबई इंडियंस के कप्तान रहे हैं और उनकी रणनीतिक समझ काफी मजबूत है।

    ऐसे में जब मैच के दौरान मुश्किल फैसले लेने हों या रणनीति बदलने की जरूरत पड़े, तब रोहित शर्मा का अनुभव टीम और कप्तान दोनों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    आकाश चोपड़ा ने भी किया समर्थन
    पूर्व भारतीय सलामी बल्लेबाज Aakash Chopra ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय रखते हुए कहा कि रोहित शर्मा को पूरा मैच खेलना चाहिए। उन्होंने कहा कि रोहित इस समय फिट हैं और अच्छी फॉर्म में भी नजर आ रहे हैं, इसलिए टीम को इसका फायदा उठाना चाहिए।

    आकाश चोपड़ा के अनुसार ओपनिंग बल्लेबाज के लिए मैच से पहले मैदान पर रहना और खेल की परिस्थितियों को समझना बेहद जरूरी होता है। अगर कोई ओपनर लंबे समय तक डगआउट में बैठा रहे और फिर सीधे बल्लेबाजी करने आए, तो यह उसके लिए स्वाभाविक स्थिति नहीं होती।

    उन्होंने कहा, “अगर आप फिट हैं, तो आपको पूरा मैच खेलना चाहिए। खासकर जब आप दूसरी पारी में बल्लेबाजी कर रहे हों तो आपको इम्पैक्ट प्लेयर के रूप में नहीं आना चाहिए। एक ओपनर को डगआउट से 20 ओवर देखने की आदत नहीं होती।”

    पिछले दो सीजन में इम्पैक्ट प्लेयर की भूमिका
    दरअसल पिछले दो आईपीएल सीजन में Rohit Sharma को कई मुकाबलों में इम्पैक्ट प्लेयर के तौर पर इस्तेमाल किया गया था। वह ज्यादातर समय डगआउट में बैठे रहते थे और सिर्फ बल्लेबाजी के लिए मैदान पर आते थे। उस समय इसकी मुख्य वजह उनकी फिटनेस बताई जा रही थी। हालांकि पिछले 6 से 8 महीनों में रोहित शर्मा ने अपनी फिटनेस पर काफी मेहनत की है और अब वह टीम के सबसे फिट खिलाड़ियों में गिने जा रहे हैं।

    मुंबई इंडियंस के लिए बड़ा फैसला
    गौरतलब है कि Rohit Sharma की कप्तानी में Mumbai Indians ने पांच बार आईपीएल का खिताब जीता है। उनकी कप्तानी में टीम ने कई यादगार सफलताएं हासिल की थीं। हालांकि 2024 सीजन में टीम मैनेजमेंट ने बड़ा फैसला लेते हुए रोहित शर्मा की जगह Hardik Pandya को कप्तान नियुक्त कर दिया था। इसके बाद से टीम की रणनीति में कई बदलाव देखने को मिले हैं।

    अब आईपीएल 2026 की शुरुआत के बाद ही यह साफ होगा कि मुंबई इंडियंस रोहित शर्मा को पूरे मैच के लिए मैदान पर उतारती है या फिर उन्हें पहले की तरह इम्पैक्ट प्लेयर के तौर पर ही इस्तेमाल किया जाता है।

    हरभजन सिंह और आकाश चोपड़ा जैसे क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि रोहित शर्मा का अनुभव और नेतृत्व क्षमता मुंबई इंडियंस के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में अगर उन्हें पूरे मैच के दौरान मैदान पर रखा जाए तो यह टीम और कप्तान हार्दिक पांड्या दोनों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।

  • जबलपुर में बड़ी कार्रवाई: काम में लापरवाही पर 26 थाना प्रभारियों को निंदा की सजा, एसपी ने दर्ज कराया सर्विस रिकॉर्ड में दंड

    जबलपुर में बड़ी कार्रवाई: काम में लापरवाही पर 26 थाना प्रभारियों को निंदा की सजा, एसपी ने दर्ज कराया सर्विस रिकॉर्ड में दंड


    जबलपुर । मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले से पुलिस विभाग में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की खबर सामने आई है। यहां पुलिस अधीक्षक ने काम में लापरवाही बरतने वाले 26 थाना प्रभारियों टीआई के खिलाफ एक साथ सख्त कदम उठाते हुए उन्हें निंदा की सजा सुनाई है। इस कार्रवाई में शहर और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के थाना प्रभारी शामिल हैं। एक साथ इतनी बड़ी संख्या में टीआई पर की गई कार्रवाई से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है और इसे अनुशासनात्मक सख्ती के तौर पर देखा जा रहा है।

    जानकारी के मुताबिक पुलिस अधीक्षक ने जिले में कानून व्यवस्था की समीक्षा के दौरान पाया कि कई थाना क्षेत्रों में पिछले साल की तुलना में इस वर्ष प्रतिबंधात्मक कार्रवाइयों में कमी आई है। विशेष रूप से अपराध रोकथाम के लिए की जाने वाली कार्रवाई जैसे शांति भंग की आशंका पर गिरफ्तारी बाउंड ओवर की कार्रवाई और अन्य एहतियाती कदम अपेक्षाकृत कम किए गए। इसे पुलिस अधीक्षक ने गंभीर लापरवाही मानते हुए संबंधित थाना प्रभारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का निर्णय लिया।

    इसी के तहत 26 थाना प्रभारियों को निंदा की सजा दी गई है। यह सजा भले ही सेवा नियमों के अनुसार लघु दंड की श्रेणी में आती है लेकिन इसका प्रभाव अधिकारी के पूरे करियर पर पड़ सकता है। सरकारी सेवा में निंदा का अर्थ है कि कर्मचारी के खिलाफ औपचारिक रूप से लिखित चेतावनी जारी की जाती है और इसे उसके सर्विस रिकॉर्ड में दर्ज किया जाता है। यह प्रविष्टि भविष्य में पदोन्नति और अन्य प्रशासनिक निर्णयों के दौरान महत्वपूर्ण मानी जाती है।

    पुलिस विभाग के जानकारों के अनुसार निंदा की कार्रवाई भले ही निलंबन या वेतन कटौती जैसी कठोर सजा नहीं होती लेकिन यह अधिकारी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है। कई मामलों में इस तरह की प्रविष्टि होने से पदोन्नति की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और अधिकारी को आगे की सेवा में सावधानी बरतने की चेतावनी के रूप में भी देखा जाता है।

    बताया जा रहा है कि पुलिस अधीक्षक ने यह कदम इसलिए उठाया ताकि थाना स्तर पर कानून व्यवस्था को लेकर गंभीरता बनी रहे और अधिकारी अपराध नियंत्रण के लिए आवश्यक कार्रवाई समय पर करें। वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि प्रतिबंधात्मक कार्रवाई अपराध रोकने का एक अहम माध्यम होती है और इसमें कमी आने से कानून व्यवस्था पर असर पड़ सकता है।

    इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में चर्चा का माहौल है। कई थाना प्रभारियों को उम्मीद नहीं थी कि समीक्षा के बाद इतनी बड़ी संख्या में एक साथ कार्रवाई होगी। हालांकि विभागीय सूत्रों का कहना है कि यह कदम अधिकारियों को उनकी जिम्मेदारी का अहसास कराने और पुलिसिंग को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

    पुलिस अधीक्षक की इस कार्रवाई को विभाग में अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। इससे स्पष्ट संकेत दिया गया है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने और अपराध रोकने के मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

  • सोनम वांगचुक पर NSA हटाया गया, 170 दिन बाद जोधपुर जेल से रिहाई; लेह हिंसा के बाद हुई थी गिरफ्तारी

    सोनम वांगचुक पर NSA हटाया गया, 170 दिन बाद जोधपुर जेल से रिहाई; लेह हिंसा के बाद हुई थी गिरफ्तारी



    नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने शनिवार को लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता और इंजीनियर सोनम वांगचुक पर लगी नेशनल सिक्युरिटी एक्ट (NSA) को तुरंत प्रभाव से हटा दिया। गृह मंत्रालय के अनुसार, वांगचुक ने हिरासत की अवधि का लगभग आधा हिस्सा पूरा किया है। अब वे जोधपुर जेल से रिहा होंगे।

    लद्दाख प्रशासन ने 24 सितंबर 2025 को हुए लेह हिंसा के बाद वांगचुक को 26 सितंबर को NSA के तहत हिरासत में लिया था। हिंसा में चार लोगों की मौत हुई और 150 से अधिक घायल हुए थे। सरकार का आरोप था कि वांगचुक ने इन प्रदर्शनों को भड़काया। NSA के तहत ऐसे व्यक्तियों को हिरासत में रखा जा सकता है, जो देश की सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा माने जाएँ। अधिकतम हिरासत अवधि 12 महीने तक होती है।

    सोनम वांगचुक उस समय लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग कर रहे थे और इस मुद्दे पर आंदोलन कर रहे थे। उनके नेतृत्व में हुए प्रदर्शनों के दो दिन बाद ही उन्हें हिरासत में लिया गया था।

    जोधपुर जेल में 170 दिन तक बंद रहने के बाद अब वांगचुक की रिहाई से उनके समर्थकों में राहत का माहौल है। अधिकारियों ने बताया कि रिहाई के बाद उनके लद्दाख लौटने और क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर निगरानी रखी जाएगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि NSA हटाए जाने से वांगचुक के राजनीतिक और सामाजिक कार्यों पर कानूनी प्रतिबंध कम होंगे, और यह लद्दाख में केंद्र और स्थानीय प्रशासन के बीच संतुलन बनाए रखने का भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। 

  • उज्जैन में निगम कर्मचारियों पर हंगामा, तलवार और लाठी लेकर किया हमला; महिला हिरासत में

    उज्जैन में निगम कर्मचारियों पर हंगामा, तलवार और लाठी लेकर किया हमला; महिला हिरासत में


    उज्जैन। नगरकोट मोहल्ले में शनिवार सुबह नगर निगम कर्मचारियों से विवाद इतना बढ़ गया कि एक व्यक्ति ने तलवार और लाठी निकालकर हमला कर दिया। मारपीट के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया, जबकि पुलिस ने आरोपी के घर से एक महिला को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।

    सूत्रों के अनुसार, नगर निगम की कचरा संग्रहण गाड़ी रोज की तरह सुबह करीब 7:30 बजे मोहल्ले में पहुंची। गाड़ी के ड्राइवर का नाम कलीम और कचरा कर्मचारी का नाम जावेद बताया गया है। इस दौरान गीला और सूखा कचरा अलग न करने को लेकर विवाद शुरू हुआ। कर्मचारी ने समझाया, लेकिन आरोपी की बहस जल्द हिंसक रूप ले गई।

    मौके पर मौजूद दरोगा ने समझाइश देने की कोशिश की, लेकिन आरोपी ने हंगामा और धमकी बढ़ा दी। नगर निगम के कर्मचारी, अधिकारी और पुलिस तत्काल मौके पर पहुंचे, लेकिन आरोपी पहले ही फरार हो चुका था।

    पुलिस ने आरोपी के घर से एक महिला को हिरासत में लिया और उसे 112 की गाड़ी से चिमनगंज थाना ले जाया गया। महिला से पूछताछ जारी है। नगर निगम के नोडल अधिकारी ताराचंद मालवीय ने कहा कि कर्मचारियों ने सख्त कार्रवाई की मांग की है और मामले की जांच की जा रही है।

    यह घटना उज्जैन में सार्वजनिक सुरक्षा और निगम कर्मचारियों की सुरक्षा के सवाल खड़े करती है। अधिकारी चेतावनी दे रहे हैं कि निगम कार्यकर्ताओं के साथ इस तरह की हरकत बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जिम्मेदारों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी।

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