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  • आज बदलेगी 4 राशियों की किस्मत! नवपंचम राजयोग से मिलेगा धन लाभ, प्रमोशन और सफलता का जबरदस्त योग

    आज बदलेगी 4 राशियों की किस्मत! नवपंचम राजयोग से मिलेगा धन लाभ, प्रमोशन और सफलता का जबरदस्त योग


    नई दिल्ली । वैदिक ज्योतिष में ग्रहों की बदलती चाल और उनके विशेष संयोगों को जीवन में होने वाले बदलावों से जोड़कर देखा जाता है। आज यानी 5 सितंबर को ग्रहों की स्थिति के बीच एक विशेष नवपंचम राजयोग बनने जा रहा है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यह शुभ योग सुबह 10 बजे बनेगा और इसका निर्माण शुक्र तथा चंद्रमा के प्रभाव से हो रहा है। इस ग्रह संयोग को सुख समृद्धि कला और मानसिक शांति से जोड़कर देखा जाता है। माना जा रहा है कि इस विशेष योग का प्रभाव सभी राशियों पर अलग अलग रूप में पड़ सकता है लेकिन चार राशियों के लिए यह समय विशेष रूप से शुभ संकेत लेकर आ सकता है। इन राशियों में मेष मिथुन सिंह और तुला शामिल हैं।

    मेष राशि के जातकों के लिए शुक्र और चंद्रमा के प्रभाव से बना नवपंचम योग लाभकारी माना जा रहा है। कार्यक्षेत्र में स्थिति मजबूत हो सकती है और सहकर्मियों के साथ वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलने की संभावना जताई गई है। लंबे समय से अटके हुए प्रोजेक्ट्स में गति आ सकती है। व्यापार से जुड़े लोगों के लिए भी कोई बड़ी डील या लाभ का अवसर मिल सकता है। आर्थिक मोर्चे पर राहत मिलने और आय के नए स्रोत बनने की संभावना बताई जा रही है। पारिवारिक जीवन में भी खुशियों का माहौल रह सकता है और जीवनसाथी के साथ संबंधों में मधुरता बढ़ सकती है।
    मिथुन राशि के जातकों के लिए यह समय सुख सुविधाओं में वृद्धि के संकेत लेकर आ सकता है। समाज में मान सम्मान और प्रभाव बढ़ने की संभावना जताई गई है। लोग आपके विचारों और कार्यशैली की सराहना कर सकते हैं। यदि आप किसी नए काम की शुरुआत करने की योजना बना रहे हैं तो ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यह समय अनुकूल माना जा रहा है। मित्रों और प्रियजनों का साथ मिलने से मानसिक प्रसन्नता भी बनी रह सकती है।

    सिंह राशि के लोगों के लिए नवपंचम राजयोग आत्मविश्वास में बढ़ोतरी और करियर में प्रगति के अवसर लेकर आ सकता है। नौकरीपेशा लोगों को पदोन्नति या मनचाही जगह स्थानांतरण की खुशखबरी मिलने की संभावना बताई जा रही है। कार्यक्षेत्र में अधिकारियों का सहयोग भी मिल सकता है। आर्थिक मामलों में अप्रत्याशित सफलता के योग माने जा रहे हैं। निवेश से अच्छा लाभ मिलने और पुराने कर्जों से राहत मिलने की संभावना भी जताई गई है।

    वहीं तुला राशि के स्वामी शुक्र ग्रह हैं इसलिए इस राशि के जातकों के लिए यह नवपंचम योग विशेष रूप से लाभकारी माना जा रहा है। भौतिक सुख सुविधाओं में वृद्धि हो सकती है और जीवन स्तर में सुधार के संकेत मिल सकते हैं। विद्यार्थियों के साथ साथ मीडिया कला और ग्लैमर के क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए भी यह समय सफलता के अवसर लेकर आ सकता है। लंबे समय से अटके काम पूरे होने की संभावना जताई जा रही है।

    कुल मिलाकर शुक्र और चंद्रमा के प्रभाव से बन रहा यह नवपंचम राजयोग मेष मिथुन सिंह और तुला राशि के जातकों के लिए ज्योतिषीय दृष्टि से खास माना जा रहा है। करियर व्यापार आर्थिक स्थिति मान सम्मान और व्यक्तिगत जीवन में सकारात्मक बदलाव के संकेत बताए जा रहे हैं। हालांकि ज्योतिषीय भविष्यवाणियों को सामान्य मान्यताओं के रूप में देखा जाता है और किसी व्यक्ति के जीवन पर ग्रहों का प्रभाव उसकी व्यक्तिगत जन्मकुंडली और अन्य परिस्थितियों के अनुसार अलग हो सकता है।

  • फर्जी IAS तृप्ति का AI वाला ठगी नेटवर्क बेनकाब, भाई संग नौकरी दिलाने का झांसा, लैपटॉप से खुल सकते हैं कई और राज

    फर्जी IAS तृप्ति का AI वाला ठगी नेटवर्क बेनकाब, भाई संग नौकरी दिलाने का झांसा, लैपटॉप से खुल सकते हैं कई और राज


    भोपाल । भोपाल में फर्जी IAS अधिकारी बनकर लोगों को ठगने वाली तृप्ति सिंह के मामले में पुलिस जांच के दौरान एक के बाद एक चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। जांच में पता चला है कि तृप्ति और उसका भाई सुधांशु नौकरी लगवाने के नाम पर लोगों को अपने जाल में फंसाते थे और ठगी को असली दिखाने के लिए AI की मदद से फर्जी जॉइनिंग लेटर और अन्य दस्तावेज तैयार कराए जाते थे। इस पूरे मामले में उनके साथी प्रखर की भूमिका भी सामने आई है जो कथित तौर पर डिजिटल टूल और AI की मदद से ऐसे दस्तावेज तैयार करता था। पुलिस को उम्मीद है कि जब्त किए गए लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की फोरेंसिक जांच से इस ठगी नेटवर्क के कई और राज सामने आ सकते हैं।

    चंदेरी पुलिस ने प्रखर को लखनऊ से गिरफ्तार कर उसका लैपटॉप जब्त किया था। पूछताछ के बाद उसे जेल भेज दिया गया लेकिन अब उसके डिजिटल डिवाइस की जांच पर पुलिस की खास नजर है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कितने फर्जी जॉइनिंग लेटर तैयार किए गए और इन दस्तावेजों का इस्तेमाल किन लोगों को भरोसे में लेने के लिए किया गया। पुलिस यह भी खंगाल रही है कि दस्तावेज तैयार करने से लेकर उन्हें पीड़ितों तक पहुंचाने तक पूरे नेटवर्क की कार्यप्रणाली क्या थी।

    इधर आरोपी तृप्ति और उसके भाई सुधांशु को भोपाल की बाग सेवनिया पुलिस प्रोडक्शन वारंट पर लेकर आई है और दोनों से लगातार पूछताछ की जा रही है। पुलिस के अनुसार शुरुआती पूछताछ में दोनों ने ठगी की कम से कम दो घटनाओं से जुड़े तथ्य स्वीकार किए हैं। तृप्ति ने बताया कि शुरुआत में उसने खुद को IAS अधिकारी बताकर लोगों और सरकारी अधिकारियों के बीच प्रभाव बनाने का काम केवल मजे के लिए शुरू किया था। लेकिन जब इस फर्जी पहचान के दम पर उसे सरकारी रेस्ट हाउस और पर्यटन स्थलों तक पहुंच मिलने लगी तो उसका आत्मविश्वास बढ़ता गया। धीरे धीरे यही शौक लोगों को ठगने के एक सुनियोजित तरीके में बदल गया।

    पुलिस के मुताबिक तृप्ति और सुधांशु ऐसे लोगों की तलाश करते थे जिन्हें सरकारी नौकरी की जरूरत होती थी। उन्हें सरकारी विभागों में नौकरी लगवाने का भरोसा देकर रकम मांगी जाती थी और भरोसा मजबूत करने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया जाता था। जांच में यह भी सामने आया है कि सुधांशु रसूखदार लोगों से संपर्क बनाने और बड़े कारोबारियों को प्रभावित करने का काम करता था। कुछ लोगों को होटल और रिजॉर्ट के ठेके दिलाने का झांसा देकर भी अपने जाल में फंसाने की कोशिश की जाती थी।

    इस मामले में चंदेरी के एक टूरिस्ट गाइड से बेटी की नौकरी लगवाने के नाम पर तीन लाख रुपए लेने का मामला भी सामने आया है। पुलिस के अनुसार तृप्ति की मुलाकात गाइड से किला कोठी में हुई थी जहां उसने खुद को IAS अधिकारी बताते हुए उसकी बेटी की MP Tourism में नौकरी लगवाने का भरोसा दिया। इसके बाद गाइड के मोबाइल पर जॉइनिंग लेटर भेजा गया। जांच में सामने आया कि यह दस्तावेज भेजने के करीब 37 मिनट बाद डिलीट कर दिया गया था। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि यह फर्जी लेटर किस डिवाइस पर तैयार किया गया और उसे भेजने के बाद हटाने का फैसला किसने लिया।

    चंदेरी SDOP महेश शर्मा के अनुसार अब तक की पूछताछ में AI की मदद से फर्जी दस्तावेज तैयार किए जाने की पुष्टि हुई है। प्रखर के लैपटॉप समेत अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त किए गए हैं और उनकी जांच के बाद फर्जी दस्तावेजों की वास्तविक संख्या सामने आ सकती है। दूसरी ओर भोपाल की बाग सेवनिया पुलिस ठगी की रकम का पूरा ट्रेल खंगाल रही है। बैंक ट्रांजेक्शन मोबाइल चैट और डिजिटल डिवाइस की जांच के जरिए यह पता लगाया जा रहा है कि पैसा किस माध्यम से लिया गया और आखिरकार किन खातों तक पहुंचा। पुलिस को आशंका है कि सामने आए मामलों के अलावा भी कई लोग इस फर्जी IAS और AI आधारित दस्तावेजों वाले ठगी नेटवर्क का शिकार हुए हो सकते हैं।

  • चेहरे की डलनेस और टैनिंग से परेशान हैं तो आजमाएं पपीता: जानें त्वचा को ग्लो देने का आसान और असरदार तरीका

    चेहरे की डलनेस और टैनिंग से परेशान हैं तो आजमाएं पपीता: जानें त्वचा को ग्लो देने का आसान और असरदार तरीका


    नई दिल्ली । चेहरे की खूबसूरती और त्वचा की चमक बनाए रखने के लिए लोग अक्सर महंगे स्किन केयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं लेकिन कई बार घर में मौजूद सामान्य चीजें भी त्वचा की देखभाल में मददगार साबित हो सकती हैं। पपीता इन्हीं चीजों में शामिल है। यह स्वादिष्ट फल सेहत के साथ त्वचा के लिए भी उपयोगी माना जाता है। इसमें पपेन नामक एंजाइम और कई पोषक तत्व पाए जाते हैं जो त्वचा की मृत कोशिकाओं को हटाने में मदद कर सकते हैं। यही वजह है कि पपीते का इस्तेमाल कई घरेलू स्किन केयर रूटीन में किया जाता है।

    अगर त्वचा बेजान नजर आती है या चेहरे पर जमा डेड स्किन के कारण प्राकृतिक चमक कम हो गई है तो पके हुए पपीते का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए पपीते को अच्छी तरह मैश करके चेहरे पर हल्की परत के रूप में लगाया जा सकता है। इसे आंखों और होंठों के आसपास लगाने से बचना चाहिए। कुछ मिनट बाद चेहरे को सामान्य पानी से साफ किया जा सकता है। इसके बाद त्वचा पर हल्का मॉइस्चराइजर लगाना बेहतर रहता है। पपीते में मौजूद एंजाइम त्वचा की ऊपरी परत पर मौजूद मृत कोशिकाओं को हटाने में मदद कर सकते हैं जिससे चेहरा साफ और मुलायम महसूस हो सकता है।

    पपीते को शहद या दही जैसी चीजों के साथ मिलाकर फेस पैक के रूप में इस्तेमाल करने का चलन भी है। शहद त्वचा को मॉइस्चराइज करने में मदद कर सकता है जबकि दही में मौजूद लैक्टिक एसिड त्वचा को एक्सफोलिएट करने में सहायक हो सकता है। हालांकि हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है इसलिए किसी भी घरेलू नुस्खे को पूरे चेहरे पर लगाने से पहले पैच टेस्ट करना जरूरी है। खासतौर पर संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए।

    पपीते का इस्तेमाल करते समय यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि इसे बहुत ज्यादा देर तक चेहरे पर लगाकर न रखें। बार बार या जरूरत से ज्यादा एक्सफोलिएशन करने से त्वचा में जलन और रूखापन बढ़ सकता है। अगर चेहरे पर पहले से कट लगा हो या त्वचा पर जलन हो रही हो तो ऐसे समय में पपीते का प्रयोग करने से बचना चाहिए। किसी नए स्किन केयर उपाय को अपनाते समय त्वचा की प्रतिक्रिया पर नजर रखना सबसे जरूरी है।

    अगर चेहरे की देखभाल के साथ पपीते को डाइट में भी शामिल किया जाए तो यह संतुलित खानपान का हिस्सा बन सकता है। इसमें विटामिन ए और विटामिन सी जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं जो शरीर के लिए महत्वपूर्ण हैं। हालांकि केवल पपीता खाने या चेहरे पर लगाने से त्वचा की सभी समस्याएं खत्म होने की गारंटी नहीं है। लगातार मुंहासे दाग धब्बे खुजली या गंभीर त्वचा समस्या होने पर विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर होता है। सही स्किन केयर रूटीन संतुलित खानपान पर्याप्त पानी और धूप से बचाव के साथ त्वचा को लंबे समय तक स्वस्थ रखने में मदद कर सकता है।

  • शनिवार का राशिफल 5 सितंबर: कुछ राशियों की चमकेगी किस्मत तो कुछ को रहना होगा सावधान, जानें मेष से मीन तक भविष्यफल

    शनिवार का राशिफल 5 सितंबर: कुछ राशियों की चमकेगी किस्मत तो कुछ को रहना होगा सावधान, जानें मेष से मीन तक भविष्यफल


    नई दिल्ली । 5 सितंबर का दिन कई राशियों के लिए नई उम्मीद और सकारात्मक बदलाव लेकर आ सकता है। ग्रहों की स्थिति के प्रभाव से कुछ लोगों के रुके हुए काम पूरे होने के संकेत मिल रहे हैं तो वहीं कुछ राशियों को अपने फैसलों में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होगी। आज का दिन नौकरी पेशा लोगों के लिए महत्वपूर्ण रह सकता है। कार्यक्षेत्र में जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं लेकिन मेहनत का उचित परिणाम मिलने की संभावना भी बनी रहेगी। कारोबार से जुड़े लोगों को नए अवसर मिल सकते हैं। किसी पुराने संपर्क के जरिए लाभ का रास्ता खुल सकता है। धन के मामले में दिन सामान्य से बेहतर रहने की उम्मीद है लेकिन अनावश्यक खर्च से बचना जरूरी होगा।

    मेष राशि वालों के लिए आज का दिन आत्मविश्वास बढ़ाने वाला रहेगा। कामकाज में आपकी सक्रियता वरिष्ठ अधिकारियों को प्रभावित कर सकती है। किसी महत्वपूर्ण काम में सफलता मिलने से मन प्रसन्न रहेगा। वृषभ राशि के जातकों को आर्थिक मामलों में लाभ मिल सकता है। परिवार से जुड़ी कोई अच्छी खबर भी मिल सकती है। मिथुन राशि वालों के लिए आज बातचीत के जरिए बिगड़े काम बनाने का अवसर रहेगा। नौकरी में बदलाव का विचार कर रहे लोगों को नई जानकारी मिल सकती है।

    कर्क राशि के जातकों को आज अपने काम पर पूरा ध्यान देने की जरूरत होगी। भावनाओं में आकर कोई बड़ा निर्णय लेने से बचें। सिंह राशि वालों के लिए दिन उत्साह से भरा रह सकता है। कार्यक्षेत्र में आपकी पहचान मजबूत होगी और किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति से मुलाकात भविष्य में फायदा दे सकती है। कन्या राशि के लोगों को मेहनत का परिणाम मिलने के संकेत हैं। रुका हुआ पैसा वापस मिलने की संभावना बन सकती है।

    तुला राशि वालों के लिए आज का दिन रिश्तों के लिहाज से अच्छा रहेगा। परिवार के साथ समय बिताने का अवसर मिलेगा। कारोबार में साझेदारी से जुड़े मामलों में सोच समझकर आगे बढ़ें। वृश्चिक राशि के जातकों को आज किसी पुराने विवाद से राहत मिल सकती है। काम में नई जिम्मेदारी मिल सकती है जो भविष्य में तरक्की का आधार बनेगी।

    धनु राशि वालों के लिए यात्रा या काम से जुड़ी कोई महत्वपूर्ण योजना बन सकती है। आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए किए गए प्रयास सफल हो सकते हैं। मकर राशि के लोगों को करियर में आगे बढ़ने का मौका मिल सकता है। किसी अनुभवी व्यक्ति की सलाह आपके लिए उपयोगी साबित होगी। कुंभ राशि वालों को आज जल्दबाजी में निवेश करने से बचना चाहिए। हालांकि कार्यक्षेत्र में अच्छे अवसर मिल सकते हैं। मीन राशि के लिए दिन सकारात्मक रहेगा। मन की कोई इच्छा पूरी होने से खुशी मिल सकती है और परिवार में भी माहौल अच्छा रहेगा।

    कुल मिलाकर 5 सितंबर का दिन कई राशियों के लिए नए अवसर लेकर आ सकता है। सफलता पाने के लिए मेहनत के साथ सही समय पर सही फैसला लेना जरूरी होगा। आज सितारे आपका साथ दें तो भी अपनी योजनाओं को मजबूत बनाए रखना और जल्दबाजी से बचना ही बेहतर रहेगा। यह राशिफल सामान्य ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है और व्यक्तिगत कुंडली के अनुसार परिणाम अलग हो सकते हैं।

  • विजय को PM कैंडिडेट बनाने की मांग से कांग्रेस नाराज, अब TVK की सहयोगी दलों की बुलाई गई है बैठक

    विजय को PM कैंडिडेट बनाने की मांग से कांग्रेस नाराज, अब TVK की सहयोगी दलों की बुलाई गई है बैठक


    चेन्नई। तमिलनाडु में सत्ता के गठबंधन के बीच अब राष्ट्रीय राजनीति को लेकर खींचतान शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को 2029 के लोकसभा चुनाव में विपक्ष का प्रधानमंत्री पद का चेहरा बनाने की मांग TVK के भीतर तेज हो रही है। पार्टी नेताओं के इन बयानों से उसकी प्रमुख सहयोगी कांग्रेस असहज है। इसी बीच TVK ने 9 सितंबर को सहयोगी दलों की बैठक बुलाई है, जिसे मौजूदा राजनीतिक तनाव के बीच काफी अहम माना जा रहा है।

    TVK सरकार में मंत्री आधव अर्जुन, राज मोहन और आर. निर्मल कुमार ने CPI(M), CPI और MDMK को बैठक में शामिल होने का न्योता दिया है। हालांकि गठबंधन की सबसे बड़ी सहयोगी कांग्रेस को बैठक में बुलाया गया है या नहीं, इसकी अभी पुष्टि नहीं हुई है। बैठक का एजेंडा भी आधिकारिक तौर पर स्पष्ट नहीं किया गया है।

    PM पद को लेकर क्यों गरमाया मामला?
    बैठक ऐसे समय हो रही है जब TVK के कुछ विधायक खुले तौर पर विजय को 2029 के लिए प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने की मांग कर रहे हैं। विधायक कनिमोझी ने दावा किया कि 2029 में विजय TVK की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे। उन्होंने यहां तक कहा कि देश का अगला प्रधानमंत्री कौन होगा, इसका फैसला दिल्ली नहीं बल्कि तमिलनाडु करेगा।

    कनिमोझी ने विजय को राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा बदलाव लाने वाला नेता बताते हुए एक और बड़ा दावा किया। उनके मुताबिक राहुल गांधी अंततः विजय की उम्मीदवारी का समर्थन करेंगे। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के समर्थन से ही विजय मुख्यमंत्री बने हैं और आगे राहुल ही उनका हाथ पकड़कर उन्हें प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचाएंगे।

    रानीपेट की विधायक आई. ताहिरा, ऊर्जा संसाधन एवं कानून मंत्री आर. निर्मल कुमार समेत TVK के कई अन्य नेताओं ने भी विजय की राष्ट्रीय भूमिका की पैरवी की है।

    कांग्रेस ने साफ किया- राहुल गांधी ही पसंद
    TVK नेताओं के बयानों पर कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि 2029 के प्रधानमंत्री पद को लेकर उसकी पसंद राहुल गांधी हैं। कांग्रेस विधायक दल की नेता थरहाई कथबर्ट ने विजय को PM उम्मीदवार बनाने के अभियान को TVK के कुछ पहली बार चुने गए विधायकों का ‘फैन माइंडसेट’ करार दिया।

    कांग्रेस का कहना है कि विजय पहले ही राहुल गांधी को गठबंधन का उम्मीदवार स्वीकार कर चुके हैं। ऐसे में कुछ विधायकों के व्यक्तिगत बयान पार्टी की तय रणनीति नहीं माने जा सकते।

    तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मणिकम टैगोर ने भी विजय की PM दावेदारी से जुड़े बयानों को मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का चुनाव आखिरकार देश के मतदाता ही करेंगे।

    कांग्रेस का साथ जरूरी, अपने दम पर बहुमत नहीं
    विजय की सरकार की मजबूरी यह है कि TVK के पास अकेले बहुमत नहीं है। सरकार कांग्रेस, वामपंथी दलों, VCK और IUML के समर्थन पर टिकी है। TVK की सबसे बड़ी सहयोगी कांग्रेस के राज्य सरकार में पांच विधायक और दो मंत्री हैं।

    ऐसे में राष्ट्रीय स्तर पर विजय और राहुल गांधी को लेकर टकराव लंबा खिंचता है तो इसका असर राज्य सरकार की स्थिरता पर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि 9 सितंबर की बैठक को गठबंधन के भीतर पैदा हुई तल्खी कम करने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है।

    INDIA ब्लॉक में नहीं, फिर भी कांग्रेस सरकार में
    TVK अभी औपचारिक रूप से INDIA ब्लॉक का हिस्सा नहीं बनी है। इसके बावजूद तमिलनाडु में कांग्रेस उसकी सरकार का हिस्सा है। इससे दोनों दलों को राज्य में साथ काम करते हुए राष्ट्रीय राजनीति में अलग-अलग रुख अपनाने की गुंजाइश मिलती है।

    हालांकि विजय को PM बनाने की मांग और कांग्रेस की राहुल गांधी को लेकर स्पष्ट पसंद ने गठबंधन के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। अब बड़ा सवाल यही है कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले क्या राज्य में विजय-कांग्रेस की साझेदारी राष्ट्रीय नेतृत्व की महत्वाकांक्षाओं के टकराव के बावजूद कायम रह पाएगी?

  • 450 साल पुराने नक्शे को बदलने की तैयारी, नए मैप में अफ्रीका दिखेगा बड़ा, यूरोप-अमेरिका होंगे छोटे

    450 साल पुराने नक्शे को बदलने की तैयारी, नए मैप में अफ्रीका दिखेगा बड़ा, यूरोप-अमेरिका होंगे छोटे


    नई दिल्ली। स्कूलों में पढ़ाया जाने वाला दुनिया का पारंपरिक नक्शा अब बदल सकता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने ऐसा विश्व मानचित्र अपनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है, जो महाद्वीपों का आकार उनके वास्तविक क्षेत्रफल के ज्यादा करीब दिखाता है। नए ‘इक्वल अर्थ’ (Equal Earth) प्रोजेक्शन में अफ्रीका पहले की तुलना में काफी बड़ा दिखाई देगा, जबकि यूरोप और उत्तरी अमेरिका का आकार छोटा नजर आएगा। प्रस्ताव के समर्थन में 164 देशों ने वोट किया, छह देश मतदान से दूर रहे और अमेरिका ने अकेले इसके खिलाफ मतदान किया।

    इस बदलाव की जड़ करीब 450 साल पुराने मर्केटर प्रोजेक्शन में है। 1569 में कार्टोग्राफर गेरार्डस मर्केटर ने ऐसा नक्शा तैयार किया था, जिसका सबसे बड़ा फायदा समुद्र में यात्रा करने वाले नाविकों को मिला। लेकिन दिशा और रास्तों को सीधी रेखाओं में दिखाने की इस तकनीक ने धरती के अलग-अलग हिस्सों के वास्तविक आकार में बड़ा अंतर पैदा कर दिया।

    धरती गोल, कागज सपाट… यहीं से शुरू हुई दिक्कत

    पृथ्वी गोल है, जबकि नक्शा सपाट कागज पर बनाया जाता है। इसे समझने के लिए संतरे का उदाहरण लिया जा सकता है। संतरे के छिलके को निकालकर पूरी तरह सपाट फैलाने की कोशिश करेंगे तो वह कहीं न कहीं खिंचेगा, फटेगा या उसका आकार बिगड़ेगा। पृथ्वी के साथ भी नक्शा बनाते समय यही समस्या आती है।

    मर्केटर ने उस समय इस समस्या का ऐसा समाधान निकाला, जिससे समुद्र में दिशा तय करना आसान हो गया। उस दौर में जहाज महीनों समुद्र में चलते थे। नक्शे पर सीधी रेखाओं में रास्ते और दिशाएं मिलने से नाविकों को अपना मार्ग तय करने में मदद मिलती थी।

    लेकिन इसका दूसरा असर यह हुआ कि जैसे-जैसे नक्शे पर भूमध्य रेखा से दूर जाते हैं, जमीन का आकार जरूरत से ज्यादा बड़ा दिखाई देने लगता है।

    ग्रीनलैंड और अफ्रीका का उदाहरण समझिए

    मर्केटर प्रोजेक्शन में यूरोप, उत्तरी अमेरिका और ग्रीनलैंड अपने वास्तविक आकार से काफी बड़े दिखाई देते हैं। दूसरी ओर भूमध्य रेखा के आसपास मौजूद अफ्रीका और भारत जैसे बड़े भूभाग अपेक्षाकृत छोटे नजर आते हैं।

    सबसे बड़ा अंतर अफ्रीका और ग्रीनलैंड को देखकर समझ आता है। वास्तविकता में अफ्रीका का क्षेत्रफल ग्रीनलैंड से करीब 14 गुना ज्यादा है, लेकिन पारंपरिक मर्केटर नक्शे में दोनों लगभग समान आकार के नजर आते हैं।

    यानी यह नक्शा समुद्री नेविगेशन के लिहाज से उपयोगी था, लेकिन दुनिया के अलग-अलग भूभागों के वास्तविक आकार की तस्वीर सही नहीं देता था।

    ‘इक्वल अर्थ’ में क्या अलग होगा?

    ‘इक्वल अर्थ’ प्रोजेक्शन 2018 में कार्टोग्राफरों ने तैयार किया था। इसका उद्देश्य महाद्वीपों को उनके वास्तविक क्षेत्रफल के ज्यादा करीब दिखाना है। इसमें अफ्रीका, लैटिन अमेरिका, दक्षिण एशिया और ओशिनिया पहले के मुकाबले बड़े दिखाई देंगे। इसके उलट यूरोप और उत्तरी अमेरिका का आकार छोटा नजर आएगा।

    इसका मकसद केवल नक्शे की शक्ल बदलना नहीं है। इसके जरिए लोगों, खासकर बच्चों को दुनिया के भूगोल और देशों के वास्तविक आकार की ज्यादा सटीक तस्वीर दिखाने की कोशिश की जा रही है।

    164 देशों का समर्थन, अमेरिका अकेला विरोध में

    संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रस्ताव को 164 देशों का समर्थन मिला। छह देशों ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया, जबकि अमेरिका ने इसके खिलाफ मतदान किया। प्रस्ताव को टोगो के विदेश मंत्री रॉबर्ट डुसी ने आगे बढ़ाया था।

    डुसी का कहना था कि नक्शे केवल भौगोलिक जानकारी देने का माध्यम नहीं होते। उनका असर बच्चों की शिक्षा, लोगों की कल्पना और दुनिया को देखने के नजरिए पर भी पड़ता है। उनके मुताबिक किसी क्षेत्र को वास्तविक आकार से अलग दिखाने वाली तस्वीर लंबे समय तक लोगों की धारणा को प्रभावित कर सकती है।

    अमेरिका ने कहा- UN असली मुद्दों से भटक रहा

    अमेरिका ने प्रस्ताव पर नाराजगी जताई। अमेरिकी प्रतिनिधि यारिना फेरेंसविच ने कहा कि ऐसे कदमों की वजह से ही संयुक्त राष्ट्र अपनी साख खो रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब दुनिया कई गंभीर समस्याओं का सामना कर रही है, तब संगठन 16वीं सदी के नक्शों पर चर्चा करने में समय क्यों लगा रहा है।

    हालांकि, संयुक्त राष्ट्र महासभा ने प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अब सदस्य देशों से पारंपरिक मर्केटर प्रोजेक्शन के बजाय ‘इक्वल अर्थ’ को अपनाने की अपील की गई है। इसका उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों को दुनिया का भूगोल उसके वास्तविक क्षेत्रफल के ज्यादा करीब दिखाना है।

  • नेपाल के फ्लैश फ्लड पर मुआवजे की मांग, भारत बोला- जलवायु संकट साझा चुनौती, विकसित देश करें मदद

    नेपाल के फ्लैश फ्लड पर मुआवजे की मांग, भारत बोला- जलवायु संकट साझा चुनौती, विकसित देश करें मदद


    नई दिल्ली। नेपाल में फ्लैश फ्लड से हुई भारी तबाही के बाद जलवायु संकट के लिए भारत, चीन और अमेरिका से मुआवजा देने की मांग को लेकर उठे विवाद पर भारत ने अपना रुख साफ किया है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि जलवायु परिवर्तन पूरी दुनिया के सामने साझा चुनौती है और इससे निपटने की जिम्मेदारी भी इसी आधार पर तय होनी चाहिए।

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत का हमेशा से मानना रहा है कि जलवायु परिवर्तन से जुड़े कदम ‘साझा लेकिन अलग-अलग जिम्मेदारियों और संबंधित क्षमताओं’ के सिद्धांत पर आधारित होने चाहिए।

    नेपाल ने उठाया था ऐतिहासिक जिम्मेदारी का मुद्दा

    नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने फ्लैश फ्लड के बाद कहा था कि उनके देश का ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन लगभग शून्य है, इसके बावजूद नेपाल को जलवायु संकट की भारी कीमत चुकानी पड़ रही है।

    उन्होंने दुनिया के तीन प्रमुख ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जक देशों—चीन, अमेरिका और भारत—से ऐतिहासिक जिम्मेदारी स्वीकार करने की अपील की थी। उनका कहना था कि इन देशों को नेपाल जैसे जलवायु संकट से प्रभावित और कमजोर देशों को मुआवजा देना चाहिए।

    नेपाल के विदेश मंत्री ने इसे किसी तरह की ‘दान’ की मांग नहीं, बल्कि इन देशों का कानूनी और नैतिक दायित्व बताया था।

    भारत बोला- विकसित देशों को आगे आना चाहिए

    भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि ऐतिहासिक रूप से उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार विकसित देशों को जलवायु संकट से प्रभावित विकासशील देशों की मदद में आगे आना चाहिए।

    रणधीर जायसवाल ने कहा कि जिन विकसित देशों का ऐतिहासिक उत्सर्जन सबसे ज्यादा रहा है और जिन्होंने जलवायु संकट को बढ़ाने में बड़ा योगदान दिया है, उन्हें उत्सर्जन कम करने के साथ-साथ विकासशील देशों को वित्तीय सहायता और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के जरिए मदद करनी चाहिए।

    नेपाल ने बाद में दी थी सफाई

    विवाद बढ़ने के बाद नेपाल के विदेश मंत्री ने अपने बयान पर स्पष्टीकरण भी दिया था। उन्होंने कहा था कि न तो उन्होंने और न ही नेपाल सरकार ने भारत, चीन या अमेरिका से विशेष रूप से मुआवजा मांगा है। उनकी अपील पूरी वैश्विक बिरादरी से थी कि जलवायु परिवर्तन के असर को गंभीरता से समझा जाए और प्रभावित देशों को लंबे समय तक सहयोग दिया जाए।

    त्रासदी में 1200 से ज्यादा मौतें

    नेपाल में आई इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 1200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। आपदा के बाद नेपाल में राहत और बचाव कार्य जारी हैं।

    भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि संकट की इस घड़ी में भारत नेपाल की सरकार और वहां के लोगों के साथ मजबूती से खड़ा है। मंत्रालय के मुताबिक, करीबी दोस्त और साझेदार होने के नाते भारत ने तत्काल प्रतिक्रिया दी और नेपाल में राहत, रिकवरी तथा पुनर्निर्माण के प्रयासों में सहयोग जारी रखेगा।

  • MP में बारिश का दौर जारी, आज 19 जिलों में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी

    MP में बारिश का दौर जारी, आज 19 जिलों में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी


    भोपाल। मध्यप्रदेश में बारिश का दौर एक बार फिर उत्तर की ओर बढ़ गया है। पूर्वी हिस्से में लंबे समय तक सक्रिय रहे मानसूनी सिस्टम का असर अब ग्वालियर-चंबल के साथ सागर और उज्जैन संभाग में ज्यादा दिखाई देगा। मौसम विभाग ने शनिवार को 19 जिलों में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। श्योपुर और शिवपुरी के लिए ऑरेंज अलर्ट है। लगातार बारिश और कई इलाकों में बने बाढ़ जैसे हालात को देखते हुए 7 जिलों में स्कूल बंद रखने का निर्णय लिया गया है।

    शनिवार को ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, सागर, गुना, अशोकनगर, विदिशा, राजगढ़, शाजापुर, आगर-मालवा और मंदसौर में भी भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा प्रदेश के कई अन्य हिस्सों में गरज-चमक के साथ हल्की से तेज बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है।

    7 जिलों में बच्चों की छुट्टी

    बारिश और जलभराव की स्थिति को देखते हुए 5 सितंबर को श्योपुर, शिवपुरी, गुना, मुरैना, भिंड, ग्वालियर और रायसेन में स्कूल बंद रखने के आदेश दिए गए हैं। मुरैना में स्कूलों के साथ आंगनवाड़ी केंद्र भी बंद रहेंगे। श्योपुर और गुना में नर्सरी से 12वीं तक के विद्यार्थियों का अवकाश रहेगा, जबकि भिंड और ग्वालियर में नर्सरी से 8वीं तक की कक्षाएं नहीं लगेंगी। शिवपुरी में सभी शैक्षणिक संस्थान और आंगनवाड़ी केंद्र बंद रहेंगे। रायसेन में सरकारी और निजी दोनों स्कूलों के लिए छुट्टी घोषित की गई है।

    6 सितंबर तक सिस्टम का असर

    मौसम विशेषज्ञों के अनुसार बारिश कराने वाला सिस्टम 6 सितंबर को भी सक्रिय रहेगा। इसके बाद 7 और 8 सितंबर को भी कुछ इलाकों में तेज बारिश की संभावना है। हालांकि, इंदौर में इस दौरान तेज बारिश की संभावना कम है।

    MP में 762.7 मिमी पानी बरसा

    मौसम केंद्र के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में अब तक 762.7 मिमी यानी करीब 30 इंच बारिश हो चुकी है। सामान्य तौर पर इस अवधि तक 816 मिमी यानी 32.1 इंच बारिश होनी चाहिए थी। इस लिहाज से प्रदेश में कुल बारिश अभी भी सामान्य से 7% कम है।

    बारिश के आंकड़ों में क्षेत्रीय अंतर भी साफ नजर आ रहा है। पूर्वी मध्यप्रदेश में अब सामान्य से 3% ज्यादा पानी गिर चुका है, जबकि पश्चिमी हिस्से में बारिश का आंकड़ा औसत से 15% कम है।

    बाढ़ से सुधरे पूर्वी हिस्से के आंकड़े

    पूर्वी मध्यप्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में आंकड़ा करीब 1% तक कम है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 4% से 23% तक कम बारिश दर्ज हुई है।

    हालांकि पिछले एक सप्ताह की लगातार बारिश ने इस अंतर को काफी कम किया है। पूर्वी हिस्से के कई जिलों में इसी दौरान बाढ़ जैसे हालात बने हैं। इसका असर बारिश के आंकड़ों पर भी पड़ा और सीजन में पहली बार यह क्षेत्र सामान्य बारिश से आगे निकल गया।

    पश्चिमी MP के 22 जिलों में बारिश की कमी

    पश्चिमी हिस्से में स्थिति इसके उलट है। आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, खंडवा, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 5% से 54% तक कम बारिश हुई है।

    इन 24 जिलों में सामान्य से ज्यादा पानी

    प्रदेश के 24 जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से ऊपर पहुंच चुका है। इनमें अनूपपुर, छतरपुर, डिंडौरी, मैहर, मंडला, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी शामिल हैं।

  • ग्वालियर में 120 करोड़ के रत्नजड़ित गहनों से सजे राधा-कृष्ण, साल में एक बार दिखता है ये राजसी रूप

    ग्वालियर में 120 करोड़ के रत्नजड़ित गहनों से सजे राधा-कृष्ण, साल में एक बार दिखता है ये राजसी रूप

    ग्वालियर। जन्माष्टमी के मौके पर मध्य प्रदेश के ग्वालियर का ऐतिहासिक गोपाल मंदिर एक बार फिर आस्था और राजसी वैभव का केंद्र बन गया। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर राधा-कृष्ण का करीब 120 करोड़ रुपये के बेशकीमती रत्नजड़ित आभूषणों से विशेष शृंगार किया गया। इस दुर्लभ स्वरूप के दर्शन के लिए मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है।

    गोपाल मंदिर में होने वाला यह विशेष शृंगार साल में केवल एक बार किया जाता है। यही वजह है कि भक्त पूरे साल जन्माष्टमी का इंतजार करते हैं। इस दौरान मंदिर में सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम किए जाते हैं।

    बैंक लॉकर से निकाले गए ऐतिहासिक गहने

    राधा-कृष्ण के राजसी शृंगार के लिए इन ऐतिहासिक आभूषणों को बैंक लॉकर से निकाला गया। कड़ी सुरक्षा के बीच इन्हें गोपाल मंदिर पहुंचाया गया, जहां विशेष सफाई के बाद भगवान के विग्रहों को इन आभूषणों से सजाया गया।

    बेशकीमती गहनों की सुरक्षा के लिए मंदिर परिसर और आसपास बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए। सादे कपड़ों में भी जवानों को निगरानी के लिए लगाया गया, जबकि वरिष्ठ अधिकारी सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की लगातार निगरानी करते रहे।

    हीरा, पन्ना, माणिक से लेकर मोती तक जड़े हैं

    गोपाल मंदिर के इन आभूषणों को रियासतकालीन विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। इनमें हीरा, पन्ना, माणिक, पुखराज, नीलम और मोती जैसे बेशकीमती रत्न जड़े हुए हैं।

    राधारानी के शृंगार में पुखराज, माणिक और पन्ना जड़ित करीब तीन किलो वजनी मुकुट प्रमुख आकर्षण है। भगवान श्रीकृष्ण को भी विशेष राजसी मुकुट पहनाया जाता है। इसके अलावा सफेद मोतियों से बना पंचमढ़ी हार और सात लड़ी का विशेष हार भी शृंगार का हिस्सा है। बताया जाता है कि सात लड़ी वाले हार में 62 असली मोती और 55 पन्ने जड़े हैं। इसके साथ सोने के झुमके, नथ, कंठी, चूड़ियां, कड़े और अन्य बहुमूल्य आभूषण भी भगवान के शृंगार में शामिल किए जाते हैं।

    1921 में हुआ था गोपाल मंदिर का निर्माण

    ग्वालियर के गोपाल मंदिर की स्थापना 1921 में तत्कालीन ग्वालियर रियासत के शासक माधवराव सिंधिया प्रथम ने कराई थी। रियासतकाल में भगवान की पूजा और शृंगार के लिए सोने-चांदी के बर्तन तथा कई बहुमूल्य आभूषण तैयार करवाए गए थे।

    भगवान की पूजा में इस्तेमाल होने वाली रियासतकालीन सामग्री में इत्रदान, पिचकारी, चलनी, धूपदान, छत्र और निरंजनी समेत कई विशेष वस्तुएं शामिल हैं। ये सामान आज भी ग्वालियर की ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत की पहचान बने हुए हैं।


    आजादी के बाद बैंक लॉकर में रखे गए गहने

    आजादी से पहले इन आभूषणों का नियमित रूप से इस्तेमाल भगवान के शृंगार में किया जाता था। लेकिन आजादी के बाद सुरक्षा कारणों से इन्हें बैंक लॉकर में सुरक्षित रखा जाने लगा।

    2007 से इन आभूषणों की देखरेख नगर निगम के पास है। इसके बाद से हर वर्ष जन्माष्टमी पर विशेष सुरक्षा के बीच गहनों को लॉकर से निकालकर गोपाल मंदिर लाया जाता है और भगवान राधा-कृष्ण का राजसी शृंगार किया जाता है।


    हजारों श्रद्धालुओं को रहता है पूरे साल इंतजार

    गोपाल मंदिर में जन्माष्टमी की रात राधा-कृष्ण का यह अलौकिक स्वरूप देखने के लिए श्रद्धालुओं में खास उत्साह रहता है। सुबह से ही मंदिर के बाहर भक्तों की लंबी कतारें लग जाती हैं।

    आस्था, इतिहास और राजसी वैभव का यह संगम गोपाल मंदिर को खास बनाता है। करीब 120 करोड़ रुपये मूल्य के बताए जाने वाले रत्नजड़ित आभूषणों से सजे राधा-कृष्ण के दर्शन भक्तों के लिए धार्मिक आस्था के साथ-साथ ग्वालियर की समृद्ध रियासतकालीन विरासत को देखने का भी दुर्लभ अवसर होते हैं।

  • रामदेवरा में भादवा मेले के दौरान पार्किंग शुल्क को लेकर श्रद्धालुओं ने जबरन वसूली और दोहरी रकम लेने के आरोप लगाए

    रामदेवरा में भादवा मेले के दौरान पार्किंग शुल्क को लेकर श्रद्धालुओं ने जबरन वसूली और दोहरी रकम लेने के आरोप लगाए


    नई दिल्ली ।राजस्थान के जैसलमेर जिले स्थित रामदेवरा में बाबा रामदेव के दर्शन के लिए पहुंच रहे श्रद्धालुओं को भादवा मेले के दौरान पार्किंग व्यवस्था को लेकर परेशानी का सामना करने के आरोप सामने आए हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिर क्षेत्र के आसपास वाहनों के प्रवेश और पार्किंग के नाम पर निर्धारित शुल्क से अधिक वसूली की जा रही है और कई स्थानों पर रास्ते रोककर पैसे लिए जा रहे हैं।

    रामदेवरा में बाबा रामदेव का वार्षिक भादवा मेला शुरू हो चुका है। इस दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। ऐसे में वाहनों की आवाजाही और पार्किंग की व्यवस्था प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण रहती है। इस बार पार्किंग शुल्क को लेकर सामने आई शिकायतों ने व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।

    श्रद्धालुओं के अनुसार, मेले के दौरान मुख्य रास्तों पर बैरिकेडिंग की गई है और वाहनों को रोककर करीब 100 रुपये का पार्किंग शुल्क लिया जा रहा है। उनका आरोप है कि कई मामलों में वाहन को पार्किंग स्थल में खड़ा नहीं करने के बावजूद शुल्क लिया जाता है। कुछ श्रद्धालुओं का कहना है कि उन्होंने आगे होटल या अन्य स्थान पर वाहन खड़ा करने की व्यवस्था कर रखी थी, फिर भी उन्हें रास्ते से आगे बढ़ने के लिए शुल्क देना पड़ा।

    श्रद्धालुओं ने यह भी आरोप लगाया कि एक बार पार्किंग शुल्क जमा करने के बाद यदि वाहन किसी काम से बाहर निकलकर दोबारा लौटता है तो फिर से भुगतान करने के लिए कहा जाता है। कुछ लोगों के मुताबिक पुरानी रसीद दिखाने के बावजूद दोबारा शुल्क मांगा गया। इसके अलावा मुख्य प्रवेश मार्ग पर भुगतान करने के बाद अंदर अलग पार्किंग के नाम पर दोबारा रकम मांगने की शिकायत भी सामने आई है।

    इस व्यवस्था को लेकर श्रद्धालुओं में नाराजगी है। उनका कहना है कि वे बाबा रामदेव के दर्शन और धार्मिक आयोजन में शामिल होने के लिए दूर-दूर से आते हैं। ऐसे में यदि पार्किंग की आवश्यकता नहीं होने के बावजूद शुल्क लिया जाता है या एक ही वाहन से अलग-अलग जगहों पर भुगतान कराया जाता है तो इससे उन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानी होती है।

    मामले में पार्किंग ठेके से जुड़े कर्मचारियों का अलग पक्ष है। उनका कहना है कि ग्राम पंचायत स्तर पर 72 लाख रुपये से अधिक की बोली के बाद नियमानुसार पार्किंग का ठेका लिया गया है। कर्मचारियों के मुताबिक भादवा मेले के दौरान हर वर्ष पार्किंग व्यवस्था के लिए ठेका दिया जाता है और शुल्क उसी प्रक्रिया के तहत लिया जा रहा है।

    दूसरी ओर श्रद्धालुओं का कहना है कि शुल्क वसूलने और वाहनों को रोकने की प्रक्रिया स्पष्ट होनी चाहिए। उनका आरोप है कि पार्किंग व्यवस्था के नाम पर रास्ता रोकना उचित नहीं है और जिन लोगों को वाहन पार्क नहीं करना है, उनसे भी शुल्क लेना सवाल खड़ा करता है।

    श्रद्धालु दिनेश सारस्वत ने भी व्यवस्था पर आपत्ति जताते हुए कहा कि रास्ते रोककर बिना रसीद शुल्क दिए लोगों को आगे नहीं जाने देना उचित नहीं है। उन्होंने इसे कुछ वर्षों से शुरू हुई व्यवस्था बताते हुए इसे बंद कराने और श्रद्धालुओं के साथ कथित गलत व्यवहार पर कार्रवाई की मांग की। उन्होंने स्थानीय विधायक से भी मामले में हस्तक्षेप की अपेक्षा जताई।

    भादवा मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी को देखते हुए पार्किंग व्यवस्था, शुल्क वसूली और यातायात प्रबंधन को लेकर पारदर्शिता महत्वपूर्ण है। श्रद्धालुओं की शिकायतों के बीच अब यह सवाल उठ रहा है कि निर्धारित शुल्क की वसूली किस तरह हो रही है और क्या पार्किंग नहीं करने वाले वाहनों से भी रकम लेना नियमों के अनुरूप है। इन आरोपों पर प्रशासन की स्पष्ट कार्रवाई और स्थिति की जांच से ही वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।