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  • इंडिया-इंग्लैंड मैच के दौरान एजबेस्टन स्टेडियम में साथ दिखे कृति सेनन और कबीर बहिया,

    इंडिया-इंग्लैंड मैच के दौरान एजबेस्टन स्टेडियम में साथ दिखे कृति सेनन और कबीर बहिया,

    नई दिल्ली । भारत और इंग्लैंड के बीच खेले गए एकदिवसीय मुकाबले के दौरान एजबेस्टन स्टेडियम में बॉलीवुड अभिनेत्री कृति सेनन की मौजूदगी ने क्रिकेट के साथ-साथ मनोरंजन जगत में भी चर्चा का विषय बना दिया। मैच देखने पहुंचीं कृति सेनन को ब्रिटेन के कारोबारी कबीर बहिया के साथ स्टैंड्स में देखा गया, जिसके बाद दोनों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगीं। इन तस्वीरों ने एक बार फिर दोनों के रिश्ते को लेकर चल रही चर्चाओं को हवा दे दी है।

    मैच के दौरान कृति सेनन दर्शक दीर्घा में कबीर बहिया और अपने कुछ अन्य परिचितों के साथ नजर आईं। दोनों आरामदायक अंदाज में मैच का आनंद लेते दिखाई दिए। स्टेडियम से साझा की गई तस्वीरों में उनकी सहज मौजूदगी ने प्रशंसकों का ध्यान आकर्षित किया। इसके बाद सोशल मीडिया पर दोनों की तस्वीरें तेजी से साझा की जाने लगीं और उनके निजी रिश्ते को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जाने लगीं।

    कबीर बहिया ने भी इस क्रिकेट मुकाबले से जुड़ी कुछ तस्वीरें अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा कीं, जिनमें कृति सेनन भी दिखाई दीं। वहीं कृति ने भी अपने सोशल मीडिया पर मैच के दौरान की कुछ झलकियां साझा कीं। हालांकि दोनों ने किसी भी पोस्ट में अपने रिश्ते को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की। ऐसे में यह चर्चा केवल सार्वजनिक रूप से साथ दिखाई देने और सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों तक ही सीमित है।

    कृति सेनन और कबीर बहिया के रिश्ते को लेकर चर्चाएं पिछले काफी समय से चल रही हैं। दोनों कई अवसरों पर एक साथ दिखाई दे चुके हैं, जिससे डेटिंग की अटकलें समय-समय पर सामने आती रही हैं। अभिनेत्री के जन्मदिन समारोह और पारिवारिक आयोजनों में कबीर बहिया की मौजूदगी के बाद भी इस तरह की चर्चाओं को बल मिला था। हालांकि अब तक दोनों में से किसी ने भी अपने रिश्ते की आधिकारिक पुष्टि या खंडन नहीं किया है।

    कबीर बहिया का नाम ब्रिटेन के कारोबारी जगत से जुड़ा बताया जाता है। वह एक व्यवसायिक परिवार से संबंध रखते हैं और विमानन तथा पर्यटन क्षेत्र से जुड़े कारोबार में सक्रिय हैं। इसी वजह से उनका नाम पिछले कुछ समय से मनोरंजन जगत की खबरों में भी लगातार चर्चा में बना हुआ है। कृति सेनन के साथ उनकी सार्वजनिक मौजूदगी के कारण सोशल मीडिया पर उनकी लोकप्रियता भी बढ़ी है।

    दूसरी ओर कृति सेनन अपने फिल्मी करियर में लगातार सक्रिय हैं। हाल ही में वह अपनी नई फिल्म के जरिए दर्शकों के बीच नजर आईं और आगामी परियोजनाओं को लेकर भी चर्चा में बनी हुई हैं। अभिनय के साथ-साथ उनकी निजी जिंदगी भी अक्सर सुर्खियों का हिस्सा बन जाती है। हालांकि अभिनेत्री निजी मामलों पर सार्वजनिक रूप से कम ही प्रतिक्रिया देती हैं।

    फिलहाल एजबेस्टन स्टेडियम से सामने आई तस्वीरों ने प्रशंसकों के बीच उत्सुकता जरूर बढ़ा दी है, लेकिन दोनों के रिश्ते को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं और अटकलों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की जा सकती। जब तक संबंधित पक्ष स्वयं कोई जानकारी साझा नहीं करते, तब तक इन खबरों को केवल चर्चाओं और कयासों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

  • आमिर खान की तीसरी शादी पर धार्मिक विवाद गहराया, गैर-मुस्लिम जीवनसाथी से विवाह को लेकर शाही चीफ मुफ्ती की आपत्ति

    आमिर खान की तीसरी शादी पर धार्मिक विवाद गहराया, गैर-मुस्लिम जीवनसाथी से विवाह को लेकर शाही चीफ मुफ्ती की आपत्ति

    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान अपनी तीसरी शादी के बाद एक नए विवाद के केंद्र में आ गए हैं। गैर-मुस्लिम गौरी स्प्रैट से उनके विवाह को लेकर मुस्लिम पर्सनल दारुल इफ्ता के शाही चीफ मुफ्ती मौलाना इब्राहिम हुसैन ने सार्वजनिक रूप से आपत्ति जताई है। उन्होंने इस्लामी शरीयत की अपनी व्याख्या के आधार पर कहा है कि किसी मुस्लिम पुरुष का गैर-मुस्लिम महिला से विवाह करना तब तक स्वीकार्य नहीं माना जाता, जब तक संबंधित महिला इस्लाम धर्म स्वीकार न कर ले। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया और सार्वजनिक विमर्श में इस विषय पर चर्चा तेज हो गई है।

    मौलाना इब्राहिम हुसैन का कहना है कि इस्लामी धार्मिक नियमों के अनुसार मुस्लिम पुरुष के लिए गैर-मुस्लिम महिला से विवाह करना उचित नहीं है। सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो में उन्होंने इसे शरीयत के विरुद्ध बताते हुए कहा कि ऐसा विवाह धार्मिक दृष्टि से मान्य नहीं माना जाता। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग ऐसे विवाह करते हैं, उन्हें अपने धार्मिक कर्तव्यों और मान्यताओं के प्रति उत्तरदायी होना चाहिए। उनके बयान को कई माध्यमों में फतवा जारी किए जाने के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

    मौलाना ने अपने वक्तव्य में केवल अंतरधार्मिक विवाह ही नहीं, बल्कि बार-बार विवाह और तलाक के मुद्दे पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति वैवाहिक जिम्मेदारियों का निर्वहन सही तरीके से नहीं कर सकता, तो उसे बार-बार विवाह करने से बचना चाहिए। हालांकि उन्होंने अपने बयान में सीधे तौर पर आमिर खान का नाम नहीं लिया, लेकिन हाल ही में एक फिल्म अभिनेता द्वारा गैर-मुस्लिम महिला से तीसरी शादी किए जाने का उल्लेख किया, जिसे आमिर खान से जोड़कर देखा जा रहा है।

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच आमिर खान या उनकी टीम की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है। इसलिए इस विवाद पर अभिनेता का पक्ष सामने आना बाकी है। वहीं सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता और कानूनी अधिकार का विषय बता रहे हैं, जबकि कुछ धार्मिक दृष्टिकोण से इस पर अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं।

    जानकारी के अनुसार आमिर खान ने 5 जुलाई 2026 को गौरी स्प्रैट से स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत निजी समारोह में रजिस्टर्ड विवाह किया था। गौरी स्प्रैट बेंगलुरु की रहने वाली हैं और ब्यूटी एवं वेलनेस क्षेत्र से जुड़ा व्यवसाय संचालित करती हैं। उनकी पिछली शादी से एक पुत्र भी है। स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत भारत में अलग-अलग धर्मों के वयस्क नागरिक कानूनी रूप से विवाह कर सकते हैं।

    आमिर खान के निजी जीवन की बात करें तो यह उनका तीसरा विवाह है। उन्होंने पहला विवाह वर्ष 1986 में रीना दत्ता से किया था, जिनसे उनके दो बच्चे हैं। दोनों का वर्ष 2002 में तलाक हो गया। इसके बाद उन्होंने वर्ष 2005 में फिल्म निर्माता किरण राव से विवाह किया। दोनों का एक पुत्र है और वर्ष 2021 में उन्होंने आपसी सहमति से अलग होने का निर्णय लिया था। अब गौरी स्प्रैट के साथ उनका नया वैवाहिक जीवन चर्चा का विषय बना हुआ है। फिलहाल धार्मिक टिप्पणी और सार्वजनिक बहस के बीच सभी की नजर आमिर खान की संभावित प्रतिक्रिया और आगे के घटनाक्रम पर बनी हुई है।

  • जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल को मिला बॉलीवुड का समर्थन, स्वरा भास्कर पहुंचीं धरना स्थल, आंदोलन में जताई एकजुटता

    जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल को मिला बॉलीवुड का समर्थन, स्वरा भास्कर पहुंचीं धरना स्थल, आंदोलन में जताई एकजुटता


    नई दिल्ली ।
    नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है। आंदोलन के 18वें दिन बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर प्रदर्शन स्थल पहुंचीं और सोनम वांगचुक से मुलाकात कर उनके आंदोलन के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया। इस दौरान उन्होंने आंदोलन से जुड़े लोगों से भी बातचीत की और प्रदर्शन में शामिल होकर अपनी एकजुटता दिखाई। वांगचुक की गिरती सेहत के बीच इस मुलाकात को आंदोलन के लिए महत्वपूर्ण समर्थन के रूप में देखा जा रहा है।

    जंतर-मंतर पर चल रहा यह आंदोलन राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित कर रहा है। सोनम वांगचुक पिछले 18 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। वह कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आंदोलन में शामिल होकर परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर अपनी आवाज उठा रहे हैं। आंदोलन से जुड़े लोग शिक्षा व्यवस्था में सुधार और संबंधित मांगों पर सरकार से कार्रवाई की अपेक्षा कर रहे हैं। लंबे समय से जारी इस अनशन के कारण वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर भी लगातार चिंता व्यक्त की जा रही है।

    प्रदर्शन स्थल पर पहुंचीं स्वरा भास्कर ने आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों से मुलाकात की और अपने समर्थन का संदेश साझा किया। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से भी आंदोलन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई। स्वरा ने आंदोलन से जुड़े लोगों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह भविष्य की पीढ़ियों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को सामने लाने का प्रयास है। उन्होंने सोनम वांगचुक के लंबे संघर्ष की प्रशंसा करते हुए उनके प्रति सम्मान और समर्थन व्यक्त किया।

    आंदोलन से जुड़े लोगों के अनुसार सोनम वांगचुक 28 जून से भूख हड़ताल पर हैं। लगातार अनशन के कारण उनकी शारीरिक स्थिति प्रभावित हो रही है। संगठन के संस्थापक अभिजीत दिपके ने भी उनकी सेहत को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि लंबे समय से भोजन नहीं लेने के कारण उनके शरीर पर इसका असर दिखाई देने लगा है। उन्होंने कहा कि आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से जारी है और संगठन अपनी मांगों पर सकारात्मक पहल की उम्मीद कर रहा है।

    सोनम वांगचुक के समर्थन में केवल स्वरा भास्कर ही नहीं बल्कि फिल्म और साहित्य जगत की कई अन्य हस्तियां भी सामने आई हैं। लेखिका अरुंधति रॉय, अभिनेता नसीरुद्दीन शाह, रत्ना पाठक शाह, फिल्मकार संजय काक सहित कई लोगों ने वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर चिंता व्यक्त की है। इन हस्तियों ने आंदोलन से जुड़े पक्षों से संवाद के माध्यम से समाधान निकालने और वांगचुक की भूख हड़ताल समाप्त कराने की अपील भी की है। इसके अलावा अभिनेता ओमी वैद्य ने भी वीडियो संदेश जारी कर लोगों से इस मुद्दे पर जागरूक होने और अपनी आवाज उठाने का आग्रह किया है।

    आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए कॉकरोच जनता पार्टी ने 20 जुलाई को संसद मार्च निकालने की घोषणा की है। संगठन का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर उचित निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। दूसरी ओर, सोनम वांगचुक की लगातार बिगड़ती सेहत को देखते हुए आंदोलन से जुड़े लोग और समर्थक उनकी चिकित्सकीय निगरानी तथा जल्द समाधान की उम्मीद जता रहे हैं। यह आंदोलन अब सामाजिक, शैक्षणिक और सार्वजनिक विमर्श का महत्वपूर्ण विषय बन चुका है।

  • कार के अंदर तक कैमरा पहुंचने पर नाराज हुईं मौनी रॉय, पैपराजी से बोलीं- 'कितनी बार कहूं, बंद करो'

    कार के अंदर तक कैमरा पहुंचने पर नाराज हुईं मौनी रॉय, पैपराजी से बोलीं- 'कितनी बार कहूं, बंद करो'


    नई दिल्ली ।
    अभिनेत्री मौनी रॉय का एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसमें वह पैपराजी की लगातार रिकॉर्डिंग से असहज नजर आ रही हैं। मुंबई में दोस्तों के साथ डिनर के बाद जब वह अपनी कार में बैठीं तो फोटोग्राफर्स लगातार कार की खिड़की से उनकी तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड करते रहे। इस दौरान मौनी ने कई बार कैमरा बंद करने का इशारा करते हुए रिकॉर्डिंग रोकने की अपील की। उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और निजी जीवन की गोपनीयता को लेकर एक नई बहस भी छेड़ रहा है।

    घटना मंगलवार रात की बताई जा रही है, जब मौनी रॉय अपने दोस्तों के साथ डिनर के लिए एक रेस्टोरेंट पहुंची थीं। बाहर निकलने के बाद उन्होंने सामान्य तरीके से पैपराजी के लिए तस्वीरें खिंचवाईं। इसके बाद जैसे ही वह अपनी कार में बैठीं, कुछ फोटोग्राफर्स कार के शीशे से लगातार वीडियो रिकॉर्ड करने लगे। इस दौरान मौनी ने हाथ और उंगली के इशारे से कई बार ‘बंद करो’ कहते हुए रिकॉर्डिंग रोकने का अनुरोध किया। उनके चेहरे पर नाराजगी और असहजता साफ दिखाई दे रही थी।

    वीडियो में मौनी ब्लैक स्लीवलेस आउटफिट में नजर आ रही हैं। वह शांत रहने की कोशिश करती दिखीं, लेकिन लगातार कैमरा उनकी ओर किए जाने के कारण उन्होंने स्पष्ट रूप से अपनी नाराजगी जाहिर की। कुछ ही देर बाद उनकी कार वहां से रवाना हो गई। सोशल मीडिया पर यह वीडियो सामने आने के बाद लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कई लोगों ने निजी जीवन और व्यक्तिगत सीमा का सम्मान किए जाने की बात कही, जबकि कुछ ने इसे सेलिब्रिटी और पैपराजी के बीच सामान्य स्थिति बताया।

    उस शाम मौनी रॉय अपनी करीबी दोस्त अनुषा दांडेकर और अभिनेता अर्जुन बिजलानी के साथ डिनर पर गई थीं। रेस्टोरेंट के बाहर तीनों ने एक-दूसरे से मुलाकात की और कुछ समय साथ बिताया। डिनर के बाद बाहर निकलते समय भी फोटोग्राफर्स ने उनकी तस्वीरें लीं, लेकिन कार में बैठने के बाद भी रिकॉर्डिंग जारी रहने से अभिनेत्री असहज महसूस करती दिखाई दीं।

    हाल के दिनों में मौनी रॉय अपनी निजी जिंदगी को लेकर भी चर्चा में रही हैं। उनके व्यक्तिगत जीवन से जुड़ी खबरों ने भी सोशल मीडिया पर काफी ध्यान आकर्षित किया था। ऐसे में सार्वजनिक स्थानों पर उनकी हर गतिविधि पर पैपराजी और सोशल मीडिया की नजर बनी रहती है। हालांकि, इस ताजा घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि सार्वजनिक हस्तियों की निजी सीमाओं का सम्मान किस हद तक किया जाना चाहिए।

    मौनी रॉय ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत टेलीविजन से की थी और कई लोकप्रिय धारावाहिकों के जरिए उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। बाद में उन्होंने फिल्मों का रुख किया और कई चर्चित परियोजनाओं में अभिनय किया। आज वह टेलीविजन और फिल्म दोनों माध्यमों की प्रमुख अभिनेत्रियों में गिनी जाती हैं। उनका यह वायरल वीडियो फिलहाल सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है और पैपराजी संस्कृति तथा निजता के अधिकार को लेकर लोगों के बीच विभिन्न तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

  • भारत-यूके सीईटीए लागू होने के साथ आर्थिक रिश्तों को नई मजबूती, पीएम मोदी बोले- किसानों, एमएसएमई और पेशेवरों के लिए खुलेंगे व्यापक अवसर

    भारत-यूके सीईटीए लागू होने के साथ आर्थिक रिश्तों को नई मजबूती, पीएम मोदी बोले- किसानों, एमएसएमई और पेशेवरों के लिए खुलेंगे व्यापक अवसर

    नई दिल्ली । भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) के लागू होने के साथ दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते को भारत-यूके साझेदारी का महत्वपूर्ण और भविष्य उन्मुख कदम बताते हुए कहा कि इससे दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, तकनीकी सहयोग और नवाचार को नई गति मिलेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि यह समझौता केवल आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दोनों देशों के नागरिकों, उद्योगों और पेशेवरों के लिए भी दीर्घकालिक अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेगा।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि सीईटीए और सोशल सिक्योरिटी एग्रीमेंट मिलकर भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच भरोसे पर आधारित संबंधों को और मजबूत बनाएंगे। उनके अनुसार इन समझौतों का उद्देश्य साझा विकास की सोच को वास्तविक परिणामों में बदलना है। इससे व्यापारिक सहयोग के साथ-साथ निवेश, अनुसंधान, तकनीक और नवाचार जैसे क्षेत्रों में भी व्यापक विस्तार देखने को मिलेगा। उन्होंने कहा कि दोनों लोकतांत्रिक देशों की यह साझेदारी भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है और इससे आर्थिक सहयोग का दायरा लगातार बढ़ेगा।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विशेष रूप से किसानों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों, स्टार्टअप और उद्यमियों के लिए इस समझौते को लाभकारी बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय उत्पादों को यूनाइटेड किंगडम के बाजार में बेहतर पहुंच मिलने से निर्यात में वृद्धि होगी और घरेलू उद्योगों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती मिलेगी। इससे देश के विभिन्न क्षेत्रों में उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, नए निवेश आकर्षित होंगे और रोजगार के अवसरों का विस्तार होगा। उनका मानना है कि यह समझौता भारत के निर्यात आधारित विकास मॉडल को भी नई दिशा देगा।

    प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि तकनीकी सहयोग और पेशेवर सेवाओं के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच साझेदारी पहले की तुलना में अधिक मजबूत होगी। भारतीय आईटी, इंजीनियरिंग, वित्तीय सेवाओं और अन्य पेशेवर क्षेत्रों से जुड़े विशेषज्ञों के लिए नए अवसर उपलब्ध होंगे। सोशल सिक्योरिटी एग्रीमेंट के लागू होने से सीमित अवधि के लिए यूनाइटेड किंगडम में कार्यरत भारतीय पेशेवरों को विशेष लाभ मिलेगा। इससे भारतीय कंपनियों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी मजबूत होगी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी भागीदारी बढ़ेगी।

    केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी इस समझौते को भारत-यूके संबंधों का मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि सीईटीए के तहत भारत के लगभग 99 प्रतिशत निर्यात को यूनाइटेड किंगडम में जीरो-ड्यूटी एक्सेस मिलेगा, जिससे भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति और मजबूत होगी। उनके अनुसार कपड़ा, चमड़ा, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग उत्पाद, समुद्री उत्पाद, रसायन, प्रोसेस्ड फूड सहित अनेक क्षेत्रों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। इसके साथ ही एमएसएमई, किसानों और विनिर्माण क्षेत्र से जुड़े उद्यमों के लिए भी नए निर्यात अवसर तैयार होंगे।

    सरकार का मानना है कि यह समझौता केवल व्यापारिक आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग को नई दिशा देगा। निवेश, तकनीकी आदान-प्रदान, नवाचार, कौशल विकास और पेशेवर सेवाओं में बढ़ता सहयोग दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएगा। आने वाले वर्षों में यह साझेदारी साझा समृद्धि, सतत विकास और वैश्विक आर्थिक सहयोग के नए मानक स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

  • जून में ऑटो सेक्टर ने पकड़ी तेज रफ्तार, यात्री वाहनों की थोक बिक्री 24.1 प्रतिशत उछली; दोपहिया, तिपहिया और निर्यात में भी दर्ज हुई मजबूत बढ़त

    जून में ऑटो सेक्टर ने पकड़ी तेज रफ्तार, यात्री वाहनों की थोक बिक्री 24.1 प्रतिशत उछली; दोपहिया, तिपहिया और निर्यात में भी दर्ज हुई मजबूत बढ़त

    नई दिल्ली । जून महीने में भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग ने मजबूत वृद्धि दर्ज करते हुए घरेलू बाजार में मांग के लगातार बढ़ने के संकेत दिए हैं। यात्री वाहनों की थोक बिक्री में उल्लेखनीय बढ़ोतरी के साथ दोपहिया, तिपहिया और वाहन निर्यात के आंकड़ों में भी प्रभावशाली सुधार देखने को मिला है। उद्योग के ताजा आंकड़े बताते हैं कि वाहन निर्माताओं द्वारा डीलरों को भेजे जाने वाले वाहनों की संख्या पिछले वर्ष की तुलना में काफी अधिक रही, जिससे बाजार में उपभोक्ता मांग और उत्पादन गतिविधियों में तेजी का संकेत मिलता है।

    जून के दौरान यात्री वाहनों की थोक बिक्री 24.1 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि के साथ 3,88,144 यूनिट्स तक पहुंच गई। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 3,12,851 यूनिट्स था। यह बढ़ोतरी दर्शाती है कि देश में निजी वाहनों की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है। बेहतर आर्थिक गतिविधियों, उपभोक्ताओं के बढ़ते विश्वास और नए मॉडलों की उपलब्धता ने इस प्रदर्शन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    यात्री वाहन श्रेणी में सबसे बड़ा योगदान यूटिलिटी व्हीकल सेगमेंट का रहा। इस वर्ग की बिक्री में 19.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और कुल 2,17,228 यूनिट्स डीलरों तक भेजी गईं। वहीं, यात्री कारों की बिक्री भी 15.7 प्रतिशत बढ़कर 98,610 यूनिट्स पर पहुंच गई। वैन श्रेणी ने भी सकारात्मक प्रदर्शन करते हुए 9.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की और इसकी बिक्री 10,230 यूनिट्स रही। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि विभिन्न श्रेणियों में उपभोक्ताओं की मांग संतुलित रूप से बढ़ रही है।

    दोपहिया वाहन बाजार ने भी जून में शानदार प्रदर्शन किया। इस श्रेणी में कुल 18,51,400 यूनिट्स की थोक बिक्री दर्ज की गई, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 18.6 प्रतिशत अधिक है। विशेष रूप से स्कूटर सेगमेंट सबसे तेजी से बढ़ने वाला वर्ग रहा, जहां बिक्री में 39.1 प्रतिशत का उछाल दर्ज हुआ और कुल 7,44,823 यूनिट्स डीलरों तक पहुंचीं। दूसरी ओर मोटरसाइकिलों की बिक्री 6.4 प्रतिशत बढ़कर 10,56,422 यूनिट्स रही, जबकि मोपेड श्रेणी में कम आधार के कारण 50.4 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई और बिक्री 50,155 यूनिट्स तक पहुंच गई।

    तिपहिया वाहनों की बिक्री में भी मजबूत विस्तार देखने को मिला। जून के दौरान इस श्रेणी की थोक बिक्री 26.1 प्रतिशत बढ़कर 77,951 यूनिट्स रही। पैसेंजर कैरियर वाहनों की बिक्री में 25 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि गुड्स कैरियर वाहनों की बिक्री 29.4 प्रतिशत बढ़ी। इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों की मांग भी लगातार मजबूत बनी रही और ई-रिक्शा की बिक्री में 52.4 प्रतिशत की उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो स्वच्छ और किफायती परिवहन विकल्पों की बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाती है।

    घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी भारतीय वाहन उद्योग का प्रदर्शन उत्साहजनक रहा। जून के दौरान कुल वाहन निर्यात 34 प्रतिशत बढ़कर 6,73,105 यूनिट्स पर पहुंच गया। इसमें दोपहिया वाहनों का निर्यात सबसे अधिक रहा, जिसमें 40.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करते हुए 5,43,684 यूनिट्स विदेश भेजी गईं। तिपहिया वाहनों का निर्यात भी 39.7 प्रतिशत बढ़कर 51,950 यूनिट्स तक पहुंच गया, जबकि यात्री वाहनों का निर्यात लगभग स्थिर रहते हुए 76,601 यूनिट्स दर्ज किया गया। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू मांग में मजबूती, निर्यात बाजारों में बेहतर अवसर और विभिन्न वाहन श्रेणियों में लगातार बढ़ती बिक्री आने वाले महीनों में भी भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग की विकास गति को मजबूत बनाए रख सकती है।

  • भारत के बाद अब नेपाल भी इथेनॉल मिश्रित ईंधन की राह पर, E10 पेट्रोल लागू करने की तैयारी तेज, उत्पादन से लेकर गुणवत्ता और कीमत तक बने सख्त नियम

    भारत के बाद अब नेपाल भी इथेनॉल मिश्रित ईंधन की राह पर, E10 पेट्रोल लागू करने की तैयारी तेज, उत्पादन से लेकर गुणवत्ता और कीमत तक बने सख्त नियम

    नई दिल्ली । भारत में इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को बढ़ावा दिए जाने के बाद अब पड़ोसी देश नेपाल भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ा रहा है। नेपाल सरकार ने पेट्रोल में 10 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण यानी E10 पेट्रोल लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए संबंधित मानकों का विस्तृत मसौदा जारी किया गया है, जिसमें इथेनॉल के उत्पादन, गुणवत्ता, भंडारण, परिवहन, लेबलिंग और मूल्य निर्धारण तक के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए गए हैं। सरकार का उद्देश्य वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने के साथ-साथ आयातित पेट्रोल पर निर्भरता कम करना और घरेलू संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है।

    प्रस्तावित मानकों के अनुसार नेपाल ऑयल कॉर्पोरेशन को पेट्रोल में अधिकतम 10 प्रतिशत तक इथेनॉल मिलाने की व्यवस्था करनी होगी। हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि भविष्य में आवश्यकता और परिस्थितियों के अनुसार कैबिनेट के निर्णय से इथेनॉल मिश्रण का अनुपात बदला जा सकेगा। इससे ऊर्जा नीति को समय-समय पर बदलती जरूरतों के अनुरूप लचीला बनाए रखने की कोशिश की गई है।

    मसौदे में इथेनॉल उत्पादन के स्रोतों और तकनीकों को अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया गया है। साथ ही इसके सुरक्षित भंडारण और गुणवत्ता नियंत्रण पर विशेष जोर दिया गया है। चूंकि इथेनॉल अत्यधिक ज्वलनशील होता है, इसलिए इसे केवल सुरक्षित, सूखे और पूरी तरह लीक-प्रूफ टैंक या ड्रम में रखने का प्रावधान किया गया है। परिवहन और भंडारण के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य होगा ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना या पर्यावरणीय जोखिम से बचा जा सके।

    सरकार ने उत्पाद की पारदर्शिता और ट्रेसबिलिटी सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक कंटेनर पर विस्तृत जानकारी देना भी अनिवार्य किया है। इसमें निर्माता का नाम, बैच नंबर, उत्पादन की मात्रा और उत्पादन तकनीक का उल्लेख करना होगा। इसके अलावा इथेनॉल पूरी तरह स्वच्छ और पारदर्शी होना चाहिए तथा उसमें किसी प्रकार के ठोस कण नहीं होने चाहिए। मसौदे में यह भी स्पष्ट किया गया है कि पेट्रोल में मिलाए जाने वाले इथेनॉल की शुद्धता कम से कम 99.5 प्रतिशत होनी आवश्यक होगी।

    प्रस्तावित नियमों में वाहन सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी गई है। इसी कारण मेथनॉल, तारपीन, कीटोन और टार जैसे ऐसे पदार्थों के उपयोग पर रोक लगाने का प्रस्ताव रखा गया है, जो इंजन, रबर पाइप और ईंधन प्रणाली को नुकसान पहुंचा सकते हैं। सरकार का मानना है कि उच्च गुणवत्ता वाले इथेनॉल के उपयोग से वाहनों की कार्यक्षमता बेहतर बनी रहेगी और ईंधन प्रणाली पर नकारात्मक प्रभाव कम होगा।

    नेपाल सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य घरेलू स्तर पर इथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देना, नए रोजगार के अवसर सृजित करना और पेट्रोल आयात पर निर्भरता को धीरे-धीरे कम करना है। साथ ही सरकार इस बात को लेकर भी सतर्क है कि इथेनॉल उत्पादन के कारण खाद्यान्न की उपलब्धता प्रभावित न हो। इसी वजह से खाद्य उपयोग वाले अनाज को कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल करने पर रोक लगाने का प्रस्ताव किया गया है।

    इसके स्थान पर चीनी उद्योग से निकलने वाले शीरे, नेपियर घास, कृषि एवं वन अपशिष्ट, धान के पुआल, मक्के के डंठल, गेहूं की भूसी, खराब एवं अनुपयोगी अनाज, कसावा तथा अन्य जैविक स्रोतों का उपयोग करने पर जोर दिया गया है। सरकार ने पर्यावरण अनुकूल उत्पादन प्रक्रिया अपनाने की भी शर्त रखी है। तैयार इथेनॉल केवल नेपाल ऑयल कॉर्पोरेशन को बेचा जा सकेगा, जबकि इसकी कीमत हर वित्तीय वर्ष की शुरुआत से पहले सरकार की सिफारिश समिति तय करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह नीति प्रभावी ढंग से लागू होती है तो नेपाल की ऊर्जा सुरक्षा, जैव ईंधन उत्पादन और हरित अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक मजबूती मिल सकती है।

  • रोमिंग डेटा से अमेरिकी ठिकानों तक पहुंचने का दावा, ईरान की कथित साइबर रणनीति ने बढ़ाई वैश्विक सुरक्षा एजेंसियों की चिंता

    रोमिंग डेटा से अमेरिकी ठिकानों तक पहुंचने का दावा, ईरान की कथित साइबर रणनीति ने बढ़ाई वैश्विक सुरक्षा एजेंसियों की चिंता

    नई दिल्ली । मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच मोबाइल नेटवर्क सुरक्षा को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। हालिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ईरान या उससे जुड़े तत्वों ने क्षेत्र के पुराने दूरसंचार नेटवर्क की तकनीकी कमजोरियों का उपयोग कर अमेरिकी सैनिकों, सरकारी कर्मचारियों और रक्षा ठेकेदारों के मोबाइल फोन की लोकेशन का पता लगाने की कोशिश की। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और अमेरिकी अधिकारियों ने यह स्पष्ट किया है कि हमलों में लोकेशन डेटा की निर्णायक भूमिका साबित नहीं हुई है। इसके बावजूद इस घटनाक्रम ने वैश्विक स्तर पर साइबर सुरक्षा और मोबाइल संचार की विश्वसनीयता पर नई चर्चा शुरू कर दी है।

    बताया जा रहा है कि मोबाइल सर्विलांस पर काम करने वाले एक स्वतंत्र शोध समूह ने मध्य पूर्व के कई दूरसंचार नेटवर्क पर असामान्य गतिविधियां दर्ज कीं। शोधकर्ताओं के अनुसार बड़ी संख्या में ऐसी तकनीकी रिक्वेस्ट भेजी गईं जिनका उद्देश्य रोमिंग पर मौजूद विशेष मोबाइल फोनों की स्थिति और नेटवर्क की जानकारी प्राप्त करना था। विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की गतिविधियां सामान्य उपभोक्ता सेवाओं से अलग होती हैं और किसी विशेष लक्ष्य की पहचान करने के उद्देश्य से इस्तेमाल की जा सकती हैं।

    साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार इस पूरे मामले में सबसे अधिक चर्चा एसएस7 प्रोटोकॉल को लेकर हो रही है। यह दूरसंचार नेटवर्क का एक पुराना सिग्नलिंग सिस्टम है, जिसका उपयोग विभिन्न देशों के मोबाइल नेटवर्क के बीच कॉल, संदेश और रोमिंग सेवाओं के समन्वय के लिए किया जाता है। वर्षों से सुरक्षा विशेषज्ञ इस प्रणाली की कमजोरियों की ओर ध्यान दिलाते रहे हैं। यदि किसी नेटवर्क तक अनुचित पहुंच मिल जाए तो कुछ परिस्थितियों में इसका दुरुपयोग कर किसी मोबाइल डिवाइस की स्थिति संबंधी सीमित जानकारी जुटाने की कोशिश की जा सकती है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि किसी व्यक्ति की लगातार और सटीक वास्तविक समय की निगरानी केवल इसी तकनीक के आधार पर हमेशा संभव नहीं होती।

    रिपोर्टों के अनुसार बहरीन सहित खाड़ी क्षेत्र के कुछ दूरसंचार नेटवर्क पर ऐसे एसएस7 अनुरोधों में अचानक वृद्धि देखी गई। इसी आधार पर कुछ विश्लेषकों ने आशंका जताई कि अमेरिकी सैन्य कर्मियों या ठेकेदारों से जुड़े मोबाइल नंबरों की पहचान करने का प्रयास किया गया हो सकता है। हालांकि इस संबंध में किसी सरकारी एजेंसी ने सार्वजनिक रूप से ठोस तकनीकी प्रमाण जारी नहीं किए हैं।

    दूसरी ओर अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने स्वीकार किया है कि युद्ध क्षेत्रों में वाणिज्यिक लोकेशन डेटा और डिजिटल ट्रैकिंग से जुड़े संभावित खतरों को गंभीरता से लिया जा रहा है। सेना का कहना है कि कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त एहतियाती उपाय लागू किए गए हैं, लेकिन सुरक्षा कारणों से उनकी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती। वहीं अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी कहा है कि हालिया हमलों में लोकेशन डेटा की अहम भूमिका होने के दावों का समर्थन उपलब्ध तथ्यों से नहीं होता।

    साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला आधुनिक युद्ध में डिजिटल तकनीकों की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। आज मोबाइल फोन केवल संचार का साधन नहीं रह गए हैं, बल्कि वे संवेदनशील सूचनाओं का स्रोत भी बन सकते हैं। इसलिए सैन्य, सरकारी और रणनीतिक संस्थानों के साथ-साथ आम उपयोगकर्ताओं के लिए भी सुरक्षित नेटवर्क, अद्यतन सुरक्षा उपाय और डिजिटल सतर्कता पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। यही कारण है कि दूरसंचार नेटवर्क की सुरक्षा और पुराने प्रोटोकॉल के आधुनिकीकरण पर अब वैश्विक स्तर पर तेजी से ध्यान दिया जा रहा है।

  • 'सेल बोस्टन 2026' में भारत की दमदार मौजूदगी, आईएनएस सुदर्शिनी ने समुद्री विरासत और सांस्कृतिक पहचान का किया भव्य प्रदर्शन

    'सेल बोस्टन 2026' में भारत की दमदार मौजूदगी, आईएनएस सुदर्शिनी ने समुद्री विरासत और सांस्कृतिक पहचान का किया भव्य प्रदर्शन

    नई दिल्ली । अमेरिका के ऐतिहासिक शहर बोस्टन में आयोजित प्रतिष्ठित ‘सेल बोस्टन 2026’ समारोह के दौरान भारतीय नौसेना ने अपनी समुद्री परंपरा, अनुशासन और सांस्कृतिक विरासत का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। भारतीय नौसेना के पाल पोत आईएनएस सुदर्शिनी के चालक दल और प्रशिक्षुओं ने शहर की प्रमुख सड़कों पर आयोजित क्रू एवं कैडेट सिटी परेड में हिस्सा लिया। उनकी अनुशासित कदमताल और तिरंगे के साथ प्रस्तुत मार्च ने स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ विभिन्न देशों से आए प्रतिभागियों का भी ध्यान आकर्षित किया।

    ‘सेल बोस्टन 2026’ दुनिया के प्रमुख समुद्री आयोजनों में से एक माना जाता है, जिसमें 20 से अधिक देशों के 60 से ज्यादा पारंपरिक और विशाल नौकायन पोत भाग ले रहे हैं। इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहा आईएनएस सुदर्शिनी अपनी विशिष्ट पहचान और ऐतिहासिक महत्व के कारण विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। परेड के दौरान भारतीय दल ने अनुशासन, पेशेवर दक्षता और सांस्कृतिक विविधता का ऐसा परिचय दिया, जिसकी व्यापक सराहना की गई।

    भारतीय नौसेना के इस अभियान का उद्देश्य केवल समुद्री उपस्थिति दर्ज कराना नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध नौवहन परंपराओं, समुद्री इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करना भी है। आईएनएस सुदर्शिनी के माध्यम से भारत दुनिया को यह संदेश दे रहा है कि उसकी समुद्री परंपरा हजारों वर्षों पुरानी होने के साथ आज भी उतनी ही प्रासंगिक और जीवंत है। परेड में भारतीय तिरंगे की मौजूदगी और नौसैनिकों का आत्मविश्वासपूर्ण प्रदर्शन भारत की वैश्विक पहचान को और मजबूत करता नजर आया।

    रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय समुद्री आयोजनों में भागीदारी से भारत और अमेरिका के बीच समुद्री सहयोग को नई मजबूती मिलती है। साथ ही यह भी संदेश जाता है कि समुद्र केवल व्यापार, परिवहन और सुरक्षा का माध्यम नहीं, बल्कि विभिन्न देशों के बीच सांस्कृतिक संवाद और मित्रता का भी महत्वपूर्ण सेतु है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से नौसेनाओं के बीच सहयोग, अनुभवों का आदान-प्रदान और पारस्परिक विश्वास भी बढ़ता है।

    बोस्टन पहुंचने से पहले आईएनएस सुदर्शिनी ने न्यूयॉर्क में आयोजित ‘सेल फोर्थ 250’ समारोह में भी भाग लिया था, जहां भारतीय दल ने अपनी प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई थी। इसके बाद पोत बोस्टन पहुंचा और यहां भी भारत की समुद्री परंपरा तथा सांस्कृतिक पहचान का सफलतापूर्वक प्रतिनिधित्व किया। विभिन्न देशों के पारंपरिक नौकायन पोतों के बीच भारतीय पोत की मौजूदगी ने वैश्विक मंच पर भारत की ऐतिहासिक समुद्री विरासत को नई पहचान दिलाई।

    आईएनएस सुदर्शिनी वर्तमान में ‘लोकायन 2026’ वैश्विक समुद्री अभियान के तहत विभिन्न देशों के बंदरगाहों का दौरा कर रहा है। इस अभियान का उद्देश्य भारत की समुद्री विरासत, नौवहन परंपराओं और ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ के संदेश को विश्व समुदाय तक पहुंचाना है। भारतीय नौसेना का यह ऐतिहासिक पाल पोत प्रशिक्षण, समुद्री जागरूकता और अंतरराष्ट्रीय सद्भावना को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। बोस्टन में इसकी भागीदारी ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि भारत अपनी समृद्ध समुद्री विरासत, सांस्कृतिक मूल्यों और वैश्विक साझेदारी की भावना के साथ अंतरराष्ट्रीय मंच पर लगातार मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है।

  • भारत-यूके एफटीए लागू होते ही खुलेंगे व्यापार और निवेश के नए द्वार, शून्य शुल्क के साथ भारतीय निर्यात को मिलेगा बड़ा वैश्विक बाजार, 'विकसित भारत' अभियान को मिलेगी नई रफ्तार

    भारत-यूके एफटीए लागू होते ही खुलेंगे व्यापार और निवेश के नए द्वार, शून्य शुल्क के साथ भारतीय निर्यात को मिलेगा बड़ा वैश्विक बाजार, 'विकसित भारत' अभियान को मिलेगी नई रफ्तार

    नई दिल्ली । भारत और ब्रिटेन के बीच लागू हुआ व्यापक आर्थिक एवं मुक्त व्यापार समझौता देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। उद्योग जगत का मानना है कि यह समझौता भारत के निर्यात, निवेश, प्रौद्योगिकी सहयोग और वैश्विक व्यापारिक संबंधों को नई दिशा देगा। इसके साथ ही ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में भी यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। समझौते के प्रभाव से भारतीय उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अधिक प्रतिस्पर्धी बनने का अवसर मिलेगा, जबकि दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग का दायरा भी पहले की तुलना में अधिक व्यापक होगा।

    भारत की सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग से जुड़े संगठनों ने इस समझौते का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे डिजिटल व्यापार, नवाचार, अनुसंधान और तकनीकी सहयोग के नए रास्ते खुलेंगे। विशेष रूप से आईटी और डिजिटल सेवाओं से जुड़े क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच साझेदारी मजबूत होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा, क्लाउड सेवाओं और डिजिटल समाधान जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने से भारतीय कंपनियों को वैश्विक स्तर पर अपनी मौजूदगी मजबूत करने का अवसर मिलेगा।

    इस समझौते का एक महत्वपूर्ण पक्ष सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा है। नई व्यवस्था के तहत ब्रिटेन में सीमित अवधि के लिए कार्य करने वाले भारतीय पेशेवरों को वहां सामाजिक सुरक्षा अंशदान जमा नहीं करना होगा। वे निर्धारित अवधि तक भारत में ही अपना योगदान जारी रख सकेंगे। इससे भारतीय कंपनियों और उनके कर्मचारियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ कम होगा तथा अंतरराष्ट्रीय नियुक्तियों को अधिक सरल और व्यावहारिक बनाया जा सकेगा। उद्योग जगत का मानना है कि यह व्यवस्था भारतीय प्रतिभाओं की वैश्विक भागीदारी को बढ़ावा देगी।

    दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग को मजबूत बनाने के उद्देश्य से स्थापित संस्थागत मंच भी आने वाले समय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इन मंचों के माध्यम से सरकार, उद्योग और नवाचार से जुड़े संगठनों के बीच समन्वय बढ़ेगा। साथ ही डिजिटल व्यापार, प्रौद्योगिकी सुरक्षा, अनुसंधान और दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग को गति मिलेगी। इससे नई तकनीकों के विकास और उनके व्यावसायिक उपयोग के लिए बेहतर वातावरण तैयार होने की संभावना है।

    उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि भारतीय प्रौद्योगिकी कंपनियां पहले से ही ब्रिटेन में बड़े स्तर पर निवेश कर रही हैं और हजारों लोगों को रोजगार उपलब्ध करा रही हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे कर्मचारियों की है जो राजधानी से बाहर विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत हैं। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था, कौशल विकास और नई तकनीकों के विस्तार को भी प्रोत्साहन मिला है। आने वाले वर्षों में यह सहयोग और अधिक व्यापक होने की संभावना जताई जा रही है।

    सरकार का कहना है कि इस समझौते के लागू होने के बाद भारत के अधिकांश निर्यात को ब्रिटेन के बाजार में शून्य शुल्क के साथ प्रवेश मिलेगा। इससे वस्तुओं और सेवाओं की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी तथा निर्यातकों को नए अवसर प्राप्त होंगे। उद्योग संगठनों का मानना है कि यह समझौता विनिर्माण, सेवाओं, कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, टेक्नोलॉजी और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देगा। साथ ही भारत की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भूमिका और मजबूत होगी।

    आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौता केवल व्यापार बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी को भी नई मजबूती प्रदान करेगा। बेहतर बाजार पहुंच, निवेश में वृद्धि, तकनीकी सहयोग, प्रतिभा के आदान-प्रदान और उद्योगों के विस्तार से भारत की आर्थिक विकास यात्रा को नई गति मिलने की उम्मीद है। यही कारण है कि उद्योग जगत इस समझौते को भारत की वैश्विक आर्थिक महत्वाकांक्षाओं और विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मान रहा है।