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  • रामदेवरा में भादवा मेले के दौरान पार्किंग शुल्क को लेकर श्रद्धालुओं ने जबरन वसूली और दोहरी रकम लेने के आरोप लगाए

    रामदेवरा में भादवा मेले के दौरान पार्किंग शुल्क को लेकर श्रद्धालुओं ने जबरन वसूली और दोहरी रकम लेने के आरोप लगाए


    नई दिल्ली ।राजस्थान के जैसलमेर जिले स्थित रामदेवरा में बाबा रामदेव के दर्शन के लिए पहुंच रहे श्रद्धालुओं को भादवा मेले के दौरान पार्किंग व्यवस्था को लेकर परेशानी का सामना करने के आरोप सामने आए हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिर क्षेत्र के आसपास वाहनों के प्रवेश और पार्किंग के नाम पर निर्धारित शुल्क से अधिक वसूली की जा रही है और कई स्थानों पर रास्ते रोककर पैसे लिए जा रहे हैं।

    रामदेवरा में बाबा रामदेव का वार्षिक भादवा मेला शुरू हो चुका है। इस दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। ऐसे में वाहनों की आवाजाही और पार्किंग की व्यवस्था प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण रहती है। इस बार पार्किंग शुल्क को लेकर सामने आई शिकायतों ने व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।

    श्रद्धालुओं के अनुसार, मेले के दौरान मुख्य रास्तों पर बैरिकेडिंग की गई है और वाहनों को रोककर करीब 100 रुपये का पार्किंग शुल्क लिया जा रहा है। उनका आरोप है कि कई मामलों में वाहन को पार्किंग स्थल में खड़ा नहीं करने के बावजूद शुल्क लिया जाता है। कुछ श्रद्धालुओं का कहना है कि उन्होंने आगे होटल या अन्य स्थान पर वाहन खड़ा करने की व्यवस्था कर रखी थी, फिर भी उन्हें रास्ते से आगे बढ़ने के लिए शुल्क देना पड़ा।

    श्रद्धालुओं ने यह भी आरोप लगाया कि एक बार पार्किंग शुल्क जमा करने के बाद यदि वाहन किसी काम से बाहर निकलकर दोबारा लौटता है तो फिर से भुगतान करने के लिए कहा जाता है। कुछ लोगों के मुताबिक पुरानी रसीद दिखाने के बावजूद दोबारा शुल्क मांगा गया। इसके अलावा मुख्य प्रवेश मार्ग पर भुगतान करने के बाद अंदर अलग पार्किंग के नाम पर दोबारा रकम मांगने की शिकायत भी सामने आई है।

    इस व्यवस्था को लेकर श्रद्धालुओं में नाराजगी है। उनका कहना है कि वे बाबा रामदेव के दर्शन और धार्मिक आयोजन में शामिल होने के लिए दूर-दूर से आते हैं। ऐसे में यदि पार्किंग की आवश्यकता नहीं होने के बावजूद शुल्क लिया जाता है या एक ही वाहन से अलग-अलग जगहों पर भुगतान कराया जाता है तो इससे उन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानी होती है।

    मामले में पार्किंग ठेके से जुड़े कर्मचारियों का अलग पक्ष है। उनका कहना है कि ग्राम पंचायत स्तर पर 72 लाख रुपये से अधिक की बोली के बाद नियमानुसार पार्किंग का ठेका लिया गया है। कर्मचारियों के मुताबिक भादवा मेले के दौरान हर वर्ष पार्किंग व्यवस्था के लिए ठेका दिया जाता है और शुल्क उसी प्रक्रिया के तहत लिया जा रहा है।

    दूसरी ओर श्रद्धालुओं का कहना है कि शुल्क वसूलने और वाहनों को रोकने की प्रक्रिया स्पष्ट होनी चाहिए। उनका आरोप है कि पार्किंग व्यवस्था के नाम पर रास्ता रोकना उचित नहीं है और जिन लोगों को वाहन पार्क नहीं करना है, उनसे भी शुल्क लेना सवाल खड़ा करता है।

    श्रद्धालु दिनेश सारस्वत ने भी व्यवस्था पर आपत्ति जताते हुए कहा कि रास्ते रोककर बिना रसीद शुल्क दिए लोगों को आगे नहीं जाने देना उचित नहीं है। उन्होंने इसे कुछ वर्षों से शुरू हुई व्यवस्था बताते हुए इसे बंद कराने और श्रद्धालुओं के साथ कथित गलत व्यवहार पर कार्रवाई की मांग की। उन्होंने स्थानीय विधायक से भी मामले में हस्तक्षेप की अपेक्षा जताई।

    भादवा मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी को देखते हुए पार्किंग व्यवस्था, शुल्क वसूली और यातायात प्रबंधन को लेकर पारदर्शिता महत्वपूर्ण है। श्रद्धालुओं की शिकायतों के बीच अब यह सवाल उठ रहा है कि निर्धारित शुल्क की वसूली किस तरह हो रही है और क्या पार्किंग नहीं करने वाले वाहनों से भी रकम लेना नियमों के अनुरूप है। इन आरोपों पर प्रशासन की स्पष्ट कार्रवाई और स्थिति की जांच से ही वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।

  • अदाणी पोर्ट्स मुंद्रा में शुरू करेगी समर्पित खाली कंटेनर यार्ड, लॉजिस्टिक्स क्षमता और आपूर्ति श्रृंखला दक्षता बढ़ाने पर जोर

    अदाणी पोर्ट्स मुंद्रा में शुरू करेगी समर्पित खाली कंटेनर यार्ड, लॉजिस्टिक्स क्षमता और आपूर्ति श्रृंखला दक्षता बढ़ाने पर जोर

    नई दिल्ली । अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड ने मुंद्रा में समर्पित एम्प्टी कंटेनर यार्ड यानी खाली कंटेनर यार्ड शुरू करने की घोषणा की है। इस सुविधा के साथ एकीकृत वेयरहाउसिंग व्यवस्था भी विकसित की जाएगी। कंपनी का उद्देश्य कंटेनर प्रबंधन की क्षमता बढ़ाने के साथ आयात और निर्यात से जुड़ी लॉजिस्टिक्स प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाना है।

    प्रस्तावित यार्ड में खाली कंटेनरों के पूरे जीवनचक्र से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इनमें कंटेनरों का भंडारण, रखरखाव, निरीक्षण और निर्यातकों तथा कंटेनर फ्रेट स्टेशनों तक उनकी आवाजाही शामिल होगी। कंपनी के अनुसार, एक ही व्यवस्था के तहत इन सेवाओं के उपलब्ध होने से कंटेनरों के संचालन में बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकेगा।

    यह पहल कंपनी की एंबिशन 2031 रणनीति का हिस्सा है। इसके तहत अदाणी पोर्ट्स अपने कंटेनर संचालन और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क का विस्तार करने की दिशा में काम कर रही है। कंपनी अगले पांच वर्षों में अपने नेटवर्क में 60 लाख टीईयू से अधिक अतिरिक्त कंटेनर हैंडलिंग क्षमता जोड़ने की योजना पर आगे बढ़ रही है। इसमें मुंद्रा पोर्ट की भूमिका महत्वपूर्ण रहने वाली है।

    कंपनी के पूर्णकालिक निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अश्विनी गुप्ता के अनुसार, मुंद्रा में स्थापित किया जा रहा समर्पित एम्प्टी कंटेनर यार्ड कंटेनर इकोसिस्टम की दक्षता बढ़ाने में मदद करेगा। इसके संचालन में कंपनी के साथ साझेदार, कंटेनर फ्रेट स्टेशन और शिपिंग लाइनें भी भूमिका निभा सकती हैं।

    इस सुविधा से कंटेनरों के टर्नअराउंड टाइम को कम करने और उनकी अनावश्यक आवाजाही घटाने का लक्ष्य है। इसके अलावा, कंटेनरों के बेहतर प्रबंधन से लॉजिस्टिक्स लागत को अनुकूलित करने में मदद मिलने की उम्मीद है। कंपनी का मानना है कि ऐसी सुविधाएं व्यापार से जुड़े बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

    मुंद्रा पोर्ट पहले से ही देश के कंटेनर कारोबार में प्रमुख स्थान रखता है। वित्त वर्ष 2025-26 तक भारत के कंटेनर बाजार में अदाणी पोर्ट्स की हिस्सेदारी 45.5 प्रतिशत बताई गई है। अकेले मुंद्रा पोर्ट देश के करीब 35 प्रतिशत कंटेनर व्यापार को संभालता है। इस वजह से इसे भारत का सबसे बड़ा कंटेनर हैंडलिंग बंदरगाह माना जाता है।

    कंपनी के मुताबिक, मुंद्रा में हर साल लगभग 16 लाख टीईयू खाली कंटेनरों का प्रबंधन किया जाता है। इस बड़े परिचालन आधार को देखते हुए समर्पित यार्ड की स्थापना से खाली कंटेनरों के भंडारण और आवाजाही के प्रबंधन को अधिक सुव्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है।

    अदाणी पोर्ट्स ने कहा कि यह पहल प्रौद्योगिकी आधारित और अधिक कुशल लॉजिस्टिक्स व्यवस्था विकसित करने की सरकारी दिशा के अनुरूप है। कंपनी इसे ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को मजबूत करने और व्यापारिक गतिविधियों के लिए बुनियादी ढांचा बेहतर बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण मान रही है।

    वर्तमान में एपीएसईजेड 16 रणनीतिक रूप से स्थित बंदरगाहों और टर्मिनलों का संचालन करता है। कंपनी के पास 136 जहाजों का विविध समुद्री बेड़ा और एकीकृत लॉजिस्टिक्स क्षमता है। इसकी कार्गो हैंडलिंग क्षमता 653 मिलियन टन प्रतिवर्ष है और भारत के कुल बंदरगाह कार्गो वॉल्यूम में इसकी हिस्सेदारी करीब 27 प्रतिशत है। कंपनी ने वर्ष 2030 तक एक अरब टन थ्रूपुट हासिल करने का लक्ष्य रखा है।

  • एयर इंडिया फुकेत-दिल्ली उड़ान में पायलट का ड्रग टेस्ट नॉन-नेगेटिव, एएआईबी ने ऊंचाई घटने की घटना को बताया गंभीर चिंता

    एयर इंडिया फुकेत-दिल्ली उड़ान में पायलट का ड्रग टेस्ट नॉन-नेगेटिव, एएआईबी ने ऊंचाई घटने की घटना को बताया गंभीर चिंता

    नई दिल्ली । एयर इंडिया की फुकेत से दिल्ली आ रही उड़ान से जुड़ी एक घटना की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सामने आई है। विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो ने अपनी रिपोर्ट में पायलट-इन-कमांड के साइकोएक्टिव या नशीले पदार्थों की जांच में नॉन-नेगेटिव परिणाम आने और उड़ान के दौरान विमान की ऊंचाई कम होने को गंभीर चिंता का विषय बताया है। जांच एजेंसी ने इस मामले में नागर विमानन महानिदेशालय से प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करने की मांग की है।

    रिपोर्ट के अनुसार, घटना के बाद दिल्ली पहुंचने पर विमान के दोनों क्रू सदस्यों की मेडिकल स्क्रीनिंग की गई थी। दोनों के ब्रेथलाइजर टेस्ट के परिणाम संतोषजनक पाए गए। हालांकि, साइकोएक्टिव या नशीले पदार्थों की पहचान के लिए किए गए परीक्षण में पायलट-इन-कमांड का शुरुआती सैंपल नॉन-नेगेटिव मिला, जबकि को-पायलट का परिणाम नेगेटिव रहा।

    इसके बाद पुष्टि के लिए दोनों फ्लाइट क्रू सदस्यों के रक्त नमूने पैथोलॉजिकल लैब भेजे गए। जांच रिपोर्ट में बताया गया कि पायलट-इन-कमांड का कन्फर्मेशन टेस्ट भी नॉन-नेगेटिव आया, जबकि को-पायलट के दोनों परीक्षणों में परिणाम नेगेटिव रहे। एएआईबी ने इस तथ्य को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में विशेष रूप से दर्ज किया है।

    जांच एजेंसी ने कहा है कि मामले के तकनीकी और अन्य पहलुओं की विस्तृत जांच अभी जारी है। इसी वजह से रिपोर्ट में सामने आए शुरुआती तथ्यों को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना गया है। एएआईबी ने डीजीसीए से मामले में आवश्यक प्राथमिक कार्रवाई करने को कहा है।

    एयर इंडिया ने भी घटना की जांच में सहयोग करने की बात कही है। एयरलाइन ने कहा कि सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और सुरक्षा, फिटनेस अथवा नियमों के अनुपालन में किसी भी तरह की चूक को स्वीकार नहीं किया जाएगा। एयर इंडिया ने घटना के बाद अपने सभी पायलटों की स्वैच्छिक जांच शुरू करने की जानकारी भी दी है।

    रिपोर्ट के मुताबिक फुकेत में उड़ान से पहले विमान की जांच की गई थी। इस निरीक्षण के दौरान कोई नई तकनीकी गड़बड़ी सामने नहीं आई थी। विमान में केवल एक ऐसा आइटम दर्ज था, जिसे पहले से ही मिनिमम इक्विपमेंट लिस्ट के तहत नोट किया गया था। उड़ान दल ने विमान के चारों ओर किए गए वॉक-अराउंड निरीक्षण के दौरान भी किसी अतिरिक्त खराबी की सूचना नहीं दी।

    यह उड़ान एआई-2379 के रूप में संचालित हो रही एयरबस ए320 थी। 4 अगस्त को ओडिशा के ऊपर लगभग 36,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ान के दौरान विमान के तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम काम करना बंद कर गए। इसके बाद विमान की ऊंचाई में उल्लेखनीय बदलाव दर्ज किया गया।

    रिपोर्ट के अनुसार विमान ने शुरुआत में 372 फीट की अतिरिक्त ऊंचाई हासिल की, लेकिन इसके बाद अपनी निर्धारित ऊंचाई से 292 फीट नीचे चला गया। इस घटना के दौरान विमान में कुल 145 लोग मौजूद थे। इनमें 137 यात्री, छह केबिन क्रू सदस्य और दो पायलट शामिल थे।

    घटना के बाद कम से कम 20 यात्रियों और चार क्रू सदस्यों के घायल होने की जानकारी रिपोर्ट में दी गई है। विमान को मुख्य रूप से ओवरहेड स्टोरेज डिब्बों और सीलिंग पैनलों के हिस्से में नुकसान पहुंचा। एएआईबी की विस्तृत जांच में अब तकनीकी खराबी, संचालन संबंधी परिस्थितियों और क्रू से जुड़े पहलुओं की आगे जांच की जा रही है।

  • बैंकिंग क्षेत्र में नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए अवसर, वेल्थ एग्जीक्यूटिव और क्रेडिट एनालिस्ट पदों पर नियुक्तियां

    बैंकिंग क्षेत्र में नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए अवसर, वेल्थ एग्जीक्यूटिव और क्रेडिट एनालिस्ट पदों पर नियुक्तियां

    नई दिल्ली । बैंकिंग क्षेत्र में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बैंक ऑफ बड़ौदा ने बड़ी भर्ती प्रक्रिया शुरू की है। बैंक ने विभिन्न विभागों में कुल 1100 पदों पर नियमित आधार पर योग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति के लिए रिक्तियां जारी की हैं। इन पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 4 सितंबर 2026 से शुरू हो चुकी है और उम्मीदवार 24 सितंबर 2026 तक आवेदन कर सकते हैं।

    जारी रिक्तियों में सबसे अधिक पद वेल्थ एग्जीक्यूटिव के हैं। वेल्थ मैनेजमेंट सर्विसेज के तहत जूनियर मैनेजमेंट ग्रेड स्केल-I में वेल्थ एग्जीक्यूटिव के 1000 पदों पर भर्ती की जाएगी। इसके अलावा कॉर्पोरेट और इंस्टीट्यूशनल क्रेडिट विभाग में मिडिल मैनेजमेंट ग्रेड स्केल-II के क्रेडिट एनालिस्ट के 100 पद निर्धारित किए गए हैं।

    इन पदों के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को निर्धारित शैक्षणिक योग्यता और अनुभव की शर्तें पूरी करनी होंगी। वेल्थ एग्जीक्यूटिव पद के लिए किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से किसी भी विषय में स्नातक होना जरूरी है। इसके साथ भारतीय बीमा संस्थान से आईसी-38 प्रमाणपत्र या निर्धारित समकक्ष योग्यता भी आवश्यक है।

    क्रेडिट एनालिस्ट पद के लिए उम्मीदवार के पास किसी मान्यता प्राप्त संस्थान या विश्वविद्यालय से किसी भी विषय में स्नातक की डिग्री के साथ चार्टर्ड अकाउंटेंट की योग्यता होना जरूरी है। दोनों पदों के लिए उम्मीदवारों से संबंधित क्षेत्र में निर्धारित कार्य अनुभव भी मांगा गया है। पद के अनुसार न्यूनतम एक से दो वर्ष का अनुभव आवश्यक है।

    आयु सीमा की बात करें तो आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की न्यूनतम आयु पद के अनुसार 21 से 22 वर्ष और अधिकतम आयु 32 से 33 वर्ष निर्धारित है। आयु की गणना 1 सितंबर 2026 के आधार पर की जाएगी। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को अधिकतम आयु सीमा में नियमानुसार छूट का लाभ मिलेगा।

    चयन प्रक्रिया कई चरणों में पूरी की जाएगी। उम्मीदवारों के आवेदन की प्रारंभिक जांच के बाद ऑनलाइन टेस्ट आयोजित किया जा सकता है। इसके बाद साइकोमेट्रिक टेस्ट, ग्रुप डिस्कशन और या इंटरव्यू जैसे चरणों से उम्मीदवारों का मूल्यांकन किया जाएगा। चयन प्रक्रिया में दस्तावेज सत्यापन समेत अन्य निर्धारित चरण भी शामिल रहेंगे।

    चयनित उम्मीदवारों को पद के अनुसार निर्धारित वेतनमान दिया जाएगा। वेल्थ एग्जीक्यूटिव पद के लिए वेतनमान 48,480 रुपये से 85,920 रुपये के बीच है, जबकि क्रेडिट एनालिस्ट पद के लिए 64,820 रुपये से 93,960 रुपये के बीच वेतनमान निर्धारित किया गया है। इसके अतिरिक्त पात्र कर्मचारियों को नियमों के अनुसार विभिन्न लाभ और भत्ते भी मिलेंगे।

    आवेदन के दौरान उम्मीदवारों को अपनी श्रेणी के अनुसार निर्धारित शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से करना होगा। सामान्य, ईडब्ल्यूएस और ओबीसी वर्ग के उम्मीदवारों के लिए आवेदन शुल्क 750 रुपये रखा गया है। वहीं एससी, एसटी, पीडब्ल्यूबीडी, ईएसएम और महिला उम्मीदवारों के लिए शुल्क 175 रुपये निर्धारित किया गया है।

    इच्छुक उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे आवेदन की अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना पात्रता, आयु सीमा, अनुभव, दस्तावेज और अन्य शर्तों की जांच कर आवेदन प्रक्रिया पूरी करें। आवेदन में किसी तरह की त्रुटि से बचने के लिए जमा करने से पहले सभी जानकारियों और दस्तावेजों को ध्यानपूर्वक जांचना जरूरी होगा।

  • निर्मला सीतारमण ने न्यूयॉर्क में वैश्विक कंपनियों के सीईओ से मुलाकात कर भारत में निवेश बढ़ाने का आह्वान किया

    निर्मला सीतारमण ने न्यूयॉर्क में वैश्विक कंपनियों के सीईओ से मुलाकात कर भारत में निवेश बढ़ाने का आह्वान किया

    नई दिल्ली ।वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने न्यूयॉर्क में वैश्विक कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ कई दौर की बैठकें कीं। इन बातचीत में उन्होंने भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, मजबूत डिजिटल आधारभूत ढांचे और वित्तीय क्षेत्र में मौजूद निवेश अवसरों को रेखांकित करते हुए विदेशी कंपनियों को भारत में निवेश के लिए आमंत्रित किया।

    टिलमैन होल्डिंग्स के चेयरमैन और मुख्य कार्यकारी अधिकारी संजीव आहूजा के साथ हुई बैठक में डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर पर विशेष चर्चा हुई। वित्त मंत्री ने कहा कि हालिया बजट घोषणाओं सहित सरकार की नीतिगत दिशा डिजिटल क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर रही है।

    उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग, डिजिटल सेवाओं और एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में तेजी से बढ़ती गतिविधियों का उल्लेख किया। इन क्षेत्रों के विस्तार के साथ भारत में डेटा सेंटर, हाई कैपेसिटी नेटवर्क और विश्वसनीय बिजली आपूर्ति से जुड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर की मांग भी बढ़ रही है।

    सीतारमण ने कहा कि इस बदलते डिजिटल परिदृश्य में टिलमैन होल्डिंग्स जैसी कंपनियों के लिए भारत में इन्फ्रास्ट्रक्चर के अगले चरण के विकास में भागीदारी के महत्वपूर्ण अवसर मौजूद हैं। सरकार की कोशिश ऐसे निवेशों के लिए नीतिगत और कारोबारी वातावरण को लगातार बेहतर बनाने की है।

    मार्श री के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डीन क्लिसुरा और कंपनी की रणनीति एवं कॉरपोरेट डेवलपमेंट प्रमुख देवांशु ध्यानी के साथ बैठक में भी भारत की आर्थिक और कारोबारी क्षमता पर चर्चा हुई। वित्त मंत्री ने कहा कि भारत वैश्विक प्रोफेशनल सर्विसेज और रिस्क मैनेजमेंट कंपनियों को बड़ा घरेलू बाजार, कुशल प्रतिभा और तेजी से विकसित हो रहा इन्फ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराता है।

    उन्होंने भारत की डिजिटल क्षमताओं और कारोबारी सुधारों की दिशा का भी उल्लेख किया। मार्श री की टीम ने भारत में सुधारों के लिए सरकार के प्रयासों की सराहना की और देश में अपनी मौजूदगी को और मजबूत करने तथा कारोबार का विस्तार करने की योजना बताई।

    मार्श री ने भारत को समान अवसर वाला बाजार बताते हुए नियामकीय व्यवस्था को भी सकारात्मक बताया। कंपनी ने गिफ्ट सिटी पर अपना ध्यान बढ़ाने की जानकारी दी और वहां विकसित हो रहे वित्तीय इकोसिस्टम के साथ उत्पादों तथा सेवाओं के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी भागीदारी बढ़ाने की बात कही।

    वित्त मंत्री ने बीएनवाई मेलन के ग्रुप मुख्य परिचालन अधिकारी एलेजांद्रो पेरेज के साथ भी बातचीत की। इस बैठक में भारत की मजबूत विकास यात्रा और वैश्विक वित्तीय संस्थानों के लिए देश में निवेश बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श हुआ।

    पेरेज ने भारत के प्रति बीएनवाई मेलन की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि कंपनी की वैश्विक गतिविधियों और विकास रणनीति में भारत एक महत्वपूर्ण बाजार के रूप में उभर रहा है। उन्होंने आईआईटी सहित प्रमुख भारतीय संस्थानों के साथ कंपनी की साझेदारी का भी उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य उच्च गुणवत्ता वाली प्रतिभाओं को विकसित करना है।

    बीएनवाई मेलन के भारत संचालन की बदलती भूमिका पर भी चर्चा हुई। भारत अब केवल डिलीवरी सेंटर के रूप में नहीं, बल्कि इनोवेशन, टेक्नोलॉजी और एआई जैसी उन्नत क्षमताओं के लिए रणनीतिक वैश्विक केंद्र के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है।

    बैठकों में डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स और गिफ्ट सिटी आईएफएससी से जुड़े अवसरों पर भी चर्चा हुई। वित्त मंत्री ने बीएनवाई मेलन की टीम को गिफ्ट सिटी आईएफएससी का दौरा करने और वहां उपलब्ध विभिन्न वित्तीय उत्पादों तथा सेवाओं से जुड़े अवसरों का आकलन करने के लिए आमंत्रित किया।

  • चार सत्रों की गिरावट के बाद शेयर बाजार में लौटी तेजी, सेंसेक्स 362 अंक चढ़कर 76,500 के पार बंद

    चार सत्रों की गिरावट के बाद शेयर बाजार में लौटी तेजी, सेंसेक्स 362 अंक चढ़कर 76,500 के पार बंद

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार ने लगातार चार कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद शुक्रवार को राहत की सांस ली और बढ़त के साथ कारोबार समाप्त किया। घरेलू बाजार में मेटल और कमोडिटी शेयरों में खरीदारी का असर प्रमुख सूचकांकों पर दिखाई दिया। हालांकि ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली और मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण बाजार की तेजी सीमित रही।

    कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 362.57 अंक यानी 0.48 प्रतिशत की मजबूती के साथ 76,515.43 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 24.25 अंक यानी 0.10 प्रतिशत की बढ़त दर्ज करते हुए 23,897.70 पर पहुंच गया। लगातार गिरावट के बाद प्रमुख सूचकांकों में आई यह तेजी निवेशकों के लिए कुछ राहत लेकर आई।

    शुक्रवार के कारोबार में मेटल और कमोडिटी क्षेत्र बाजार की तेजी के प्रमुख आधार रहे। निफ्टी मेटल इंडेक्स में 1.07 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई और यह दिन के प्रमुख प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रों में रहा। निफ्टी कमोडिटीज में भी 0.55 प्रतिशत की मजबूती देखने को मिली।

    इसके अलावा निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में 0.49 प्रतिशत और निफ्टी इंडिया डिफेंस में 0.39 प्रतिशत की बढ़त रही। निफ्टी मीडिया 0.30 प्रतिशत, निफ्टी प्राइवेट बैंक 0.28 प्रतिशत और निफ्टी ऑयल एंड गैस 0.21 प्रतिशत मजबूत होकर बंद हुए। निफ्टी पीएसई में भी मामूली 0.04 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।

    दूसरी ओर कई प्रमुख सेक्टरों में दबाव बना रहा। निफ्टी रियल्टी में 0.90 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि निफ्टी हेल्थकेयर 0.87 प्रतिशत और निफ्टी फार्मा 0.68 प्रतिशत कमजोर रहे। निफ्टी आईटी में 0.47 प्रतिशत, निफ्टी ऑटो में 0.45 प्रतिशत और निफ्टी पीएसयू बैंक में 0.44 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स भी 0.43 प्रतिशत नीचे रहा।

    व्यापक बाजार में कारोबार मिश्रित रहा। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 156.15 अंक यानी 0.25 प्रतिशत की गिरावट के साथ 63,079.05 पर बंद हुआ। इसके विपरीत निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 44.70 अंक यानी 0.22 प्रतिशत की बढ़त के साथ 20,095.45 पर पहुंच गया। इससे संकेत मिला कि छोटे शेयरों में चुनिंदा खरीदारी बनी रही, जबकि मिडकैप शेयरों में दबाव देखने को मिला।

    बाजार के जानकारों के मुताबिक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की आशंका कम होने से भारतीय बाजार को समर्थन मिला। ब्याज दरों के रुख को लेकर बदलती उम्मीदों का असर वैश्विक बाजारों और निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता पर भी पड़ रहा है।

    हालांकि बाजार में तेजी पूरी तरह मजबूत नहीं रही। ऊंचे स्तरों पर निवेशकों की मुनाफावसूली ने बढ़त को सीमित किया। इसके साथ ही मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव भी निवेशकों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। ऐसे माहौल में विदेशी बाजारों के संकेतों और वैश्विक आर्थिक आंकड़ों पर घरेलू निवेशकों की नजर बनी हुई है।

    अमेरिका से आने वाले रोजगार संबंधी आंकड़े भी बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। इसके बाद अगले सप्ताह जारी होने वाले अमेरिकी खुदरा महंगाई के आंकड़ों पर निवेशकों की विशेष नजर रहेगी। महंगाई के आंकड़े अमेरिकी केंद्रीय बैंक की आगामी ब्याज दर नीति को लेकर बाजार की उम्मीदों को प्रभावित कर सकते हैं।

    जानकारों का मानना है कि अगस्त में कोर महंगाई में मामूली नरमी की उम्मीद फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में आगे बढ़ोतरी की संभावना को कमजोर कर सकती है। इससे अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में स्थिरता आने और वैश्विक शेयर बाजारों पर दबाव कम होने की संभावना बन सकती है। ऐसे में आने वाले कारोबारी सत्रों में वैश्विक आर्थिक आंकड़ों और भू-राजनीतिक घटनाक्रम के साथ घरेलू निवेश धारणा बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।

  • 4 सितंबर को मनाई जाएगी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के संयोग से बढ़ा पर्व का महत्व

    4 सितंबर को मनाई जाएगी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के संयोग से बढ़ा पर्व का महत्व

    नई दिल्ली ।श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व इस वर्ष 4 सितंबर को मनाया जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 4 सितंबर को रात 2 बजकर 25 मिनट से शुरू हुई और 5 सितंबर की रात 12 बजकर 13 मिनट तक रहेगी। धार्मिक परंपरा में जन्माष्टमी की तारीख निर्धारित करते समय केवल अष्टमी तिथि ही नहीं, बल्कि मध्यरात्रि और रोहिणी नक्षत्र की स्थिति को भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

    इन्हीं पंचांग गणनाओं के आधार पर शुक्रवार को जन्माष्टमी का मुख्य उत्सव मनाया जाएगा। रात में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव और विशेष पूजा की जाएगी। इस बार पर्व को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है, क्योंकि ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार कई शुभ संयोग एक साथ बन रहे हैं।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मध्यरात्रि में रोहिणी नक्षत्र और वृष राशि के संयोग में हुआ था। वर्ष 2026 में जन्माष्टमी पर भी अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का विशेष मेल बताया जा रहा है। इसी कारण इस संयोग को जयंती योग के रूप में विशेष महत्व दिया जा रहा है।

    इस वर्ष जन्माष्टमी पर जयंती योग के अलावा सर्वार्थ सिद्धि योग, हर्षण योग, हंस योग, मालव्य योग, बुधादित्य राजयोग और नवपंचम राजयोग बनने की बात कही गई है। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं में शुभ योगों को पूजा, व्रत, भक्ति और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अनुकूल माना जाता है।

    जन्माष्टमी की सबसे महत्वपूर्ण पूजा मध्यरात्रि के निशीथ काल में की जाती है। इस वर्ष निशीथ काल रात 11 बजकर 58 मिनट से 12 बजकर 44 मिनट तक रहेगा। यानी भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की मुख्य पूजा के लिए श्रद्धालुओं को लगभग 46 मिनट का समय मिलेगा।

    अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के संयोग को देखते हुए इस अवधि में श्रीकृष्ण की पूजा को विशेष महत्व दिया जा रहा है। श्रद्धालु इस दौरान भगवान का अभिषेक, पूजन, आरती और जन्मोत्सव से जुड़े धार्मिक अनुष्ठान कर सकते हैं। कई भक्त जन्माष्टमी पर व्रत रखते हैं और मध्यरात्रि में पूजा के बाद व्रत का पारण करते हैं।

    4 सितंबर के दिन की शुरुआत हर्षण योग से होगी, जो दोपहर 3 बजकर 44 मिनट तक रहने की जानकारी दी गई है। इसके बाद अन्य ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार दिन और रात में अलग-अलग योगों की स्थिति रहेगी। इन योगों को लेकर धार्मिक मान्यताएं अलग-अलग हैं और श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना करते हैं।

    छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर समेत कई शहरों में जन्माष्टमी को लेकर मंदिरों में विशेष तैयारियां की गई हैं। राजधानी के इस्कॉन मंदिर, खाटू श्याम मंदिर और राधा-कृष्ण मंदिरों में शुक्रवार सुबह से ही धार्मिक कार्यक्रम, भजन और अन्य आयोजन शुरू होने की तैयारी है। मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण के श्रृंगार, झांकी और जन्मोत्सव के लिए व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं।

    जन्माष्टमी केवल धार्मिक अनुष्ठान का पर्व नहीं है, बल्कि श्रीकृष्ण के जीवन, उनके उपदेशों और धर्म तथा कर्म की अवधारणा को स्मरण करने का अवसर भी माना जाता है। इस दिन देशभर में श्रद्धालु भगवान कृष्ण की बाल रूप में पूजा करते हैं और मध्यरात्रि में उनके जन्म का उत्सव मनाते हैं। इस बार बनने वाले विशेष ज्योतिषीय संयोगों के कारण पर्व का धार्मिक महत्व और अधिक चर्चा में है।

  • जॉर्जिया मेलोनी ने बनाया इटली में नया रिकॉर्ड, पीएम मोदी ने सबसे लंबे कार्यकाल पर मित्रता और रणनीतिक साझेदारी को सराहा

    जॉर्जिया मेलोनी ने बनाया इटली में नया रिकॉर्ड, पीएम मोदी ने सबसे लंबे कार्यकाल पर मित्रता और रणनीतिक साझेदारी को सराहा

    नई दिल्ली । इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने देश के राजनीतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। मेलोनी शुक्रवार को लगातार 1413 दिन तक सरकार का नेतृत्व करने के साथ इटली गणराज्य बनने के बाद सबसे लंबे समय तक लगातार सत्ता में रहने वाली प्रधानमंत्री बन गई हैं। उनकी इस उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई दी है और भारत तथा इटली के बीच संबंधों को मजबूत करने में उनकी भूमिका की सराहना की है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में जॉर्जिया मेलोनी को अपनी मित्र बताते हुए कहा कि यह उपलब्धि इटली के लोगों के उनके नेतृत्व में भरोसे और विश्वास को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि मेलोनी की मित्रता भारत और इटली के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने में महत्वपूर्ण रही है।

    मोदी ने भारत और इटली के लोगों के बेहतर भविष्य के लिए दोनों देशों के साथ मिलकर आगे भी काम करने की उम्मीद जताई। उन्होंने मेलोनी को आने वाले वर्षों के लिए सफलता की शुभकामनाएं भी दीं। प्रधानमंत्री के संदेश में दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग और व्यक्तिगत स्तर पर नेताओं के संबंधों को भी प्रमुखता मिली।

    मेलोनी सरकार ने शुक्रवार को लगातार सत्ता में रहने के 1413 दिन पूरे किए। इसके साथ ही उनकी सरकार ने इटली के पूर्व प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। बर्लुस्कोनी की सरकार वर्ष 2001 से 2005 के बीच लगातार 1412 दिन तक सत्ता में रही थी। मेलोनी की सरकार ने एक दिन अधिक लगातार सत्ता में रहकर नया रिकॉर्ड कायम किया है।

    यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इटली का राजनीतिक इतिहास लंबे समय तक सरकारों की अस्थिरता से जुड़ा रहा है। देश में गठबंधन सरकारों के टूटने और राजनीतिक बदलाव के कारण सरकारों का औसत कार्यकाल करीब 13 महीने बताया जाता है। ऐसे राजनीतिक माहौल में मेलोनी की सरकार का लगातार इतने लंबे समय तक सत्ता में बने रहना उनके लिए बड़ी राजनीतिक उपलब्धि है।

    जॉर्जिया मेलोनी इटली की पहली महिला प्रधानमंत्री भी हैं। उन्होंने तीन दक्षिणपंथी और कंजरवेटिव पार्टियों वाले गठबंधन के नेतृत्व में सरकार बनाई थी। गठबंधन की सरकार के सामने अलग-अलग राजनीतिक विचारों और प्राथमिकताओं के बीच तालमेल बनाए रखने की चुनौती रही है। इसके बावजूद सरकार का लगातार बने रहना मेलोनी के नेतृत्व की स्थिरता के रूप में देखा जा रहा है।

    मेलोनी खुद भी इस उपलब्धि को अपनी सरकार की महत्वपूर्ण सफलता के तौर पर पेश कर रही हैं। इसी सिलसिले में उनकी पार्टी की ओर से शुक्रवार शाम बारी शहर में एक बड़ी रैली आयोजित की जानी है। मेलोनी इस कार्यक्रम में शामिल होकर भाषण भी देंगी। माना जा रहा है कि रैली के दौरान वह सरकार के कार्यकाल और अब तक की उपलब्धियों को लेकर अपना पक्ष सामने रखेंगी।

    भारत और इटली के बीच संबंधों के लिहाज से भी मेलोनी का कार्यकाल महत्वपूर्ण रहा है। प्रधानमंत्री मोदी और मेलोनी के बीच कई मौकों पर द्विपक्षीय सहयोग तथा रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने को लेकर बातचीत हुई है। मोदी के ताजा संदेश से संकेत मिलता है कि भारत दोनों देशों के बीच सहयोग को भविष्य में भी मजबूत बनाए रखने को महत्व देता है। मेलोनी की रिकॉर्ड उपलब्धि के बीच भारत की ओर से दी गई यह बधाई दोनों देशों के राजनीतिक संबंधों में निरंतरता का संदेश देती है।

  • गरीब हितग्राहियों के राशन में हेराफेरी पर प्रशासन सख्त, जांच में सामने आई अनियमितता के बाद सात विक्रेताओं पर होगी कार्रवाई

    गरीब हितग्राहियों के राशन में हेराफेरी पर प्रशासन सख्त, जांच में सामने आई अनियमितता के बाद सात विक्रेताओं पर होगी कार्रवाई

    मध्य प्रदेश: के टीकमगढ़ जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत गरीब हितग्राहियों को दिए जाने वाले राशन में कथित गड़बड़ी का बड़ा मामला सामने आया है। जिला प्रशासन की जांच में सात शासकीय उचित मूल्य दुकानों पर खाद्यान्न के रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक के बीच गंभीर अंतर पाया गया है। जांच के आधार पर संबंधित दुकान विक्रेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं।

    मामला जिले की छिपरी, बिजरावन, बजीतपुर, बड़ागांव, सुरजपुर, भेलसी और अजनौर स्थित शासकीय उचित मूल्य दुकानों से जुड़ा है। इन दुकानों को लेकर जिला प्रशासन को शिकायतें मिली थीं। शिकायतों में गरीब हितग्राहियों के लिए आवंटित गेहूं के वितरण में गड़बड़ी और खाद्यान्न की हेराफेरी किए जाने के आरोप लगाए गए थे।

    शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर विवेक श्रोतिय के निर्देश पर संबंधित राशन दुकानों की जांच कराई गई। जांच के दौरान दुकानों के दस्तावेजों, खाद्यान्न वितरण से जुड़े रिकॉर्ड और उपलब्ध वास्तविक स्टॉक का परीक्षण किया गया। इस प्रक्रिया में सरकारी रिकॉर्ड और मौके पर मौजूद खाद्यान्न की मात्रा में बड़ा अंतर सामने आया।

    जांच रिपोर्ट के अनुसार, सातों दुकानों से जुड़े मामले में करीब 62 लाख 78 हजार रुपये मूल्य के खाद्यान्न के गबन की बात सामने आई है। इसमें गरीब हितग्राहियों के लिए आवंटित गेहूं, चावल और नमक शामिल हैं। आरोप है कि इन खाद्य सामग्री के वितरण में अनियमितता बरती गई और निर्धारित व्यवस्था के अनुरूप हितग्राहियों तक राशन नहीं पहुंचाया गया।

    सरकारी राशन व्यवस्था का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को निर्धारित मात्रा में खाद्यान्न उपलब्ध कराना है। ऐसे में राशन के रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में अंतर पाए जाने के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है। जांच में सामने आई अनियमितताओं को आधार बनाकर संबंधित दुकान संचालकों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

    प्रशासन ने जांच रिपोर्ट के आधार पर सात राशन दुकान विक्रेताओं के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। इस कार्रवाई के बाद संबंधित विक्रेताओं की भूमिका की जांच पुलिस स्तर पर भी की जाएगी। मामले में आगे की कार्रवाई जांच और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर होगी।

    जिला प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को गंभीरता से लिया जाएगा। गरीब हितग्राहियों के लिए निर्धारित राशन में अनियमितता पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि पात्र परिवारों के हक का खाद्यान्न किसी भी स्तर पर प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा।

    इस कार्रवाई से राशन दुकानों के संचालन और खाद्यान्न वितरण की व्यवस्था पर निगरानी बढ़ाए जाने के संकेत भी मिले हैं। सात दुकानों में सामने आई कथित अनियमितताओं के बाद संबंधित रिकॉर्ड और स्टॉक की जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब एफआईआर की प्रक्रिया के साथ मामले में आगे की जांच और कानूनी कार्रवाई पर नजर रहेगी।

  • राजवाड़ा स्थित अनोखे मंदिर में मां यशोदा की गोद में विराजते हैं बाल कृष्ण, देश विदेश से आती हैं श्रद्धालु महिलाएं

    राजवाड़ा स्थित अनोखे मंदिर में मां यशोदा की गोद में विराजते हैं बाल कृष्ण, देश विदेश से आती हैं श्रद्धालु महिलाएं

    मध्यप्रदेश: के इंदौर शहर में राजवाड़ा क्षेत्र की गलियों के बीच स्थित करीब 230 साल पुराना मां यशोदा मंदिर अपनी अनोखी धार्मिक परंपरा के लिए विशेष पहचान रखता है। जन्माष्टमी के अवसर पर यहां मां यशोदा की गोद भराई की रस्म निभाई जाती है। मान्यता है कि इस परंपरा में शामिल होकर महिलाएं संतान प्राप्ति की मनोकामना करती हैं।

    मंदिर की सबसे खास बात यहां स्थापित मां यशोदा की प्रतिमा है, जिनकी गोद में बाल स्वरूप में भगवान श्रीकृष्ण विराजमान हैं। इसी स्वरूप के कारण यह मंदिर श्रद्धालुओं के बीच अलग धार्मिक महत्व रखता है। मंदिर में मां और बेटे के पवित्र संबंध को केंद्र में रखते हुए पूजा और धार्मिक परंपराएं निभाई जाती हैं।

    जन्माष्टमी के दिन मंदिर में संतान की इच्छा रखने वाली महिलाओं की विशेष उपस्थिति रहती है। महिलाएं मां यशोदा की गोद भराई की रस्म करती हैं और भगवान श्रीकृष्ण से अपनी मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करती हैं। इस दौरान पूजा सामग्री के साथ पारंपरिक तरीके से गोद भराई की रस्म पूरी की जाती है।

    मंदिर से जुड़ी मान्यता के कारण जन्माष्टमी पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इनमें इंदौर और मध्यप्रदेश के अलग अलग हिस्सों से आने वाली महिलाओं के साथ देश के दूसरे राज्यों से आने वाले श्रद्धालु भी शामिल होते हैं। मंदिर की यह परंपरा अब देश के बाहर रहने वाले श्रद्धालुओं के बीच भी आस्था का विषय बनी हुई है।

    कई महिलाएं संतान प्राप्ति की इच्छा लेकर मंदिर पहुंचती हैं, जबकि कुछ श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी होने के बाद दोबारा मां यशोदा और बाल कृष्ण के दर्शन करने आती हैं। श्रद्धालुओं के लिए गोद भराई की रस्म धार्मिक विश्वास और पारिवारिक सुख की कामना से जुड़ा अवसर होती है।

    मंदिर के पुजारियों के अनुसार मां यशोदा के मंदिर में जन्माष्टमी के दौरान गोद भराई की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। इसी मान्यता के चलते हर वर्ष इस अवसर पर मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है। महिलाएं मां यशोदा की पूजा कर अपनी इच्छाओं और परिवार से जुड़ी प्रार्थनाएं रखती हैं।

    मंदिर का धार्मिक महत्व केवल संतान प्राप्ति की मान्यता तक सीमित नहीं है। मां यशोदा की गोद में बाल कृष्ण की प्रतिमा भक्तों को भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप और यशोदा के वात्सल्य की याद दिलाती है। यही कारण है कि जन्माष्टमी के अवसर पर यहां पूजा का माहौल विशेष रूप से भावनात्मक और श्रद्धापूर्ण दिखाई देता है।

    राजवाड़ा क्षेत्र में स्थित यह पुराना मंदिर इंदौर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़ा हुआ है। लंबे समय से चली आ रही परंपराओं ने इसे स्थानीय आस्था के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित किया है। जन्माष्टमी पर यहां होने वाली गोद भराई की रस्म इसकी विशिष्ट पहचान मानी जाती है।

    देश के अलग अलग हिस्सों और विदेशों से आने वाली महिलाओं के लिए यह धार्मिक यात्रा अपनी संतान की कामना और आस्था से जुड़ा अनुभव होती है। मंदिर में पहुंचकर वे मां यशोदा और बाल कृष्ण के सामने प्रार्थना करती हैं तथा परिवार में खुशियों की कामना करती हैं।

    करीब 230 वर्ष पुराने इस मंदिर में जन्माष्टमी के अवसर पर दिखाई देने वाली श्रद्धा इंदौर की धार्मिक परंपराओं की विविधता को भी सामने लाती है। मां यशोदा की गोद में विराजमान बाल कृष्ण का स्वरूप और गोद भराई की परंपरा इस मंदिर को शहर के अन्य धार्मिक स्थलों से अलग पहचान देती है।