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  • टीकमगढ़ में किसान की रहस्यमयी मौत, 11 लाख के लेनदेन पर उठे सवाल

    टीकमगढ़ में किसान की रहस्यमयी मौत, 11 लाख के लेनदेन पर उठे सवाल


    मध्य प्रदेश ।  टीकमगढ़ जिले के देहात थाना क्षेत्र स्थित बड़ागांव खुर्द गांव में सोमवार सुबह एक किसान की संदिग्ध मौत से सनसनी फैल गई। 55 वर्षीय मोहन यादव का शव उनके घर में मृत अवस्था में मिलने के बाद गांव में हड़कंप मच गया। मामले को लेकर परिजनों ने हत्या की आशंका जताई है और गांव के ही तीन लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

    मृतक के बड़े भाई रामेश्वर यादव का आरोप है कि गांव के राम चरण नपित, हर चरण नपित और राजकुमार नपित ने मोहन यादव की हत्या की है। परिजनों के अनुसार, मोहन यादव ने करीब 10 साल पहले रामचरण और हरचरण को लगभग 11 लाख रुपए उधार दिए थे, जो अब तक वापस नहीं किए गए थे।

    बताया जा रहा है कि चार दिन पहले मोहन यादव पैसे वापस मांगने आरोपियों के घर गए थे, जहां दोनों पक्षों के बीच विवाद भी हुआ था। इसके बाद परिवार में तनाव की स्थिति बनी हुई थी।

    परिजनों का दावा है कि घटनास्थल से राम चरण उर्फ कल्लू की तौलिया बरामद हुई है, जिसे वे इस मामले का महत्वपूर्ण सबूत मान रहे हैं। इसी आधार पर परिवार ने हत्या की आशंका और मजबूत होने की बात कही है।

    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा गया, जहां मेडिकल जांच के बाद रिपोर्ट तैयार की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी।

    परिजनों ने बताया कि पुलिस ने एक आरोपी को हिरासत में लिया है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है। गांव में घटना के बाद तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है और लोग मामले को लेकर चर्चा कर रहे हैं।

    फिलहाल पुलिस इस मौत को संदिग्ध मानते हुए जांच में जुटी हुई है। जांच पूरी होने और मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा।

  • पद्म पुरस्कार 2026 में कला, सिनेमा और संस्कृति जगत के दिग्गजों को मिलेगा सर्वोच्च सम्मान

    पद्म पुरस्कार 2026 में कला, सिनेमा और संस्कृति जगत के दिग्गजों को मिलेगा सर्वोच्च सम्मान


    नई दिल्ली।
    देश के सबसे प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों में शामिल पद्म पुरस्कार समारोह आज राजधानी में पूरे गरिमामय वातावरण के बीच आयोजित होने जा रहा है। यह आयोजन केवल पुरस्कार वितरण का कार्यक्रम नहीं बल्कि उन महान हस्तियों के योगदान को सम्मान देने का अवसर भी माना जाता है, जिन्होंने अपने कार्यों से देश और समाज को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हर वर्ष की तरह इस बार भी विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले व्यक्तित्वों को सम्मानित किया जाएगा, जिनके कार्यों ने समाज पर गहरी और सकारात्मक छाप छोड़ी है।

    राष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाला यह विशेष समारोह देश के सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व का एक अहम हिस्सा माना जाता है। इस अवसर पर कला, साहित्य, संगीत, सिनेमा, खेल, समाज सेवा और अन्य क्षेत्रों से जुड़ी कई प्रतिष्ठित हस्तियों को सम्मानित किया जाएगा। समारोह को लेकर पूरे देश में उत्साह का माहौल है क्योंकि यह मंच उन लोगों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान देता है जिन्होंने वर्षों की मेहनत और समर्पण से अपनी अलग पहचान बनाई है।

    इस वर्ष पुरस्कारों की सूची में कई ऐसे नाम शामिल हैं, जिन्होंने लंबे समय तक अपने क्षेत्र में असाधारण योगदान दिया है। खासतौर पर मनोरंजन और कला जगत से जुड़े कई दिग्गजों के नामों ने लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। कुछ महान हस्तियों को मरणोपरांत सम्मान दिए जाने की घोषणा ने इस समारोह को और भावुक बना दिया है। यह सम्मान केवल पुरस्कार नहीं बल्कि उनके जीवनभर के योगदान और विरासत को याद करने का एक माध्यम भी माना जा रहा है।

    देश के फिल्म और संगीत जगत से जुड़े कई लोकप्रिय चेहरों को भी इस बार सम्मान सूची में स्थान मिला है। दशकों तक लोगों के दिलों पर राज करने वाले कलाकारों से लेकर अपनी कला के माध्यम से नई पीढ़ी को प्रेरित करने वाले व्यक्तित्वों तक, इस बार कई बड़े नाम सम्मान प्राप्त करने जा रहे हैं। इन हस्तियों ने अपनी प्रतिभा और मेहनत के बल पर देश को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने में भी अहम भूमिका निभाई है।

    पद्म पुरस्कारों को भारत के सबसे बड़े नागरिक सम्मानों में गिना जाता है और यह सम्मान उन व्यक्तियों को प्रदान किया जाता है जिन्होंने अपने क्षेत्र में विशेष उपलब्धियां हासिल की हों। इस सम्मान का उद्देश्य केवल उपलब्धियों का जश्न मनाना नहीं बल्कि समाज में प्रेरणा और उत्कृष्टता की भावना को बढ़ावा देना भी है। यही कारण है कि हर वर्ष देशभर के लोग इस समारोह का बेसब्री से इंतजार करते हैं।

    आज होने वाला यह आयोजन केवल पुरस्कार वितरण तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि यह देश की उन प्रेरणादायक कहानियों का उत्सव भी बनेगा, जिन्होंने मेहनत, संघर्ष और समर्पण से नई ऊंचाइयों को छुआ है। सम्मानित होने वाली हस्तियां आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेंगी और उनके कार्य समाज को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे।

  • टीकमगढ़ में दर्दनाक हादसा: मेमू ट्रेन से गिरकर स्वास्थ्य कर्मचारी की मौत

    टीकमगढ़ में दर्दनाक हादसा: मेमू ट्रेन से गिरकर स्वास्थ्य कर्मचारी की मौत


    मध्य प्रदेश । टीकमगढ़ जिले के मवई रेलवे स्टेशन पर सोमवार को एक दर्दनाक रेल हादसे में स्वास्थ्य कर्मचारी की मौत हो गई। मृतक की पहचान छतरपुर निवासी सुरेंद्र अहिरवार के रूप में हुई है, जो आयुष अस्पताल में कार्यरत थे और प्रतिदिन मेमू ट्रेन से ड्यूटी पर आते-जाते थे।

    जानकारी के अनुसार, सोमवार को भी सुरेंद्र अपनी नियमित यात्रा के तहत मेमू ट्रेन से मवई स्टेशन पहुंचे थे। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि जैसे ही ट्रेन स्टेशन पर रुकी और वह उतरने लगे, अचानक उनका पैर फिसल गया। संतुलन बिगड़ने से वह ट्रेन के नीचे आ गए और गंभीर रूप से घायल हो गए।

    घटना के बाद स्टेशन पर अफरा-तफरी मच गई। मौके पर मौजूद यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों ने तुरंत उन्हें ट्रेन के नीचे से बाहर निकाला और गंभीर हालत में टीकमगढ़ जिला चिकित्सालय पहुंचाया। हालांकि डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।

    सुरेंद्र अहिरवार के निधन की खबर मिलते ही अस्पताल स्टाफ और उनके परिचितों में शोक की लहर दौड़ गई। बताया जा रहा है कि वह अपने मिलनसार स्वभाव और कार्यकुशलता के कारण साथियों के बीच काफी लोकप्रिय थे।

    घटना की सूचना मिलने पर पुलिस भी अस्पताल पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। परिजनों को सूचित कर दिया गया है। उनके पहुंचने के बाद पंचनामा और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

    इस हादसे ने एक बार फिर रेलवे स्टेशनों पर सुरक्षा और सावधानी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने यात्रियों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त इंतजाम किए जाने की मांग उठाई है।

  • दलाई लामा के अगले अवतार पर फिर गरमाई राजनीति, चीन ने भारत को दी चेतावनी; उत्तराधिकारी को लेकर बढ़ा तनाव

    दलाई लामा के अगले अवतार पर फिर गरमाई राजनीति, चीन ने भारत को दी चेतावनी; उत्तराधिकारी को लेकर बढ़ा तनाव



    नई दिल्ली। तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा के अगले अवतार को लेकर चीन और भारत के बीच कूटनीतिक तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। चीन ने साफ कहा है कि दलाई लामा के पुनर्जन्म का मुद्दा उसका “आंतरिक मामला” है और इसमें किसी बाहरी दखल की अनुमति नहीं दी जाएगी।

    भारत स्थित चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर कहा कि तथाकथित “सेंट्रल तिब्बती एडमिनिस्ट्रेशन” को किसी भी संप्रभु देश की मान्यता नहीं है और उसे पुनर्जन्म प्रक्रिया पर दावा करने का अधिकार नहीं है। चीन ने साथ ही भारत से उम्मीद जताई कि वह तिब्बत की स्वतंत्रता से जुड़ी गतिविधियों को मंच नहीं देगा।

    दरअसल, यह विवाद तब और गहरा गया जब दलाई लामा ने हाल में कहा कि उनके पुनर्जन्म को पहचानने का “एकमात्र अधिकार” गादेन फोद्रांग ट्रस्ट के पास होगा और किसी अन्य संस्था या सरकार को इसमें हस्तक्षेप का अधिकार नहीं है।

    चीन ने इस बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा कि दलाई लामा के किसी भी पुनर्जन्म को बीजिंग की मंजूरी जरूरी होगी। चीन लंबे समय से यह दावा करता रहा है कि तिब्बती बौद्ध परंपरा में पुनर्जन्म की प्रक्रिया चीनी कानूनों और ऐतिहासिक ‘गोल्डन अर्न’ प्रणाली के तहत होनी चाहिए।

    विशेषज्ञों का मानना है कि चीन को सबसे बड़ा डर इस बात का है कि अगला दलाई लामा चीन से बाहर, खासकर भारत में चुना जा सकता है। वर्तमान में तिब्बती निर्वासित सरकार भारत के धर्मशाला में संचालित होती है और दलाई लामा भी लंबे समय से भारत में रह रहे हैं।

    माना जा रहा है कि अगर अगला दलाई लामा भारत या किसी स्वतंत्र देश में चुना जाता है, तो इससे तिब्बत मुद्दे पर चीन की स्थिति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कमजोर पड़ सकती है। यही वजह है कि बीजिंग इस पूरे मामले को लेकर बेहद संवेदनशील नजर आ रहा है।

    वहीं भारत की ओर से आधिकारिक तौर पर ‘वन चाइना’ नीति का सम्मान किया जाता है, लेकिन कई भारतीय नेताओं ने कहा है कि दलाई लामा के उत्तराधिकारी का फैसला तिब्बती परंपरा और उनके अनुयायियों के अनुसार होना चाहिए।

    फिलहाल दलाई लामा के अगले अवतार को लेकर धार्मिक परंपरा, भू-राजनीति और भारत-चीन रिश्तों के बीच नई खींचतान साफ दिखाई दे रही है।

  • जब पहाड़ों के लोगों ने खुद संभाली जिम्मेदारी, तब फूलों की घाटी ने बर्बादी से खूबसूरती तक का सफर तय किया

    जब पहाड़ों के लोगों ने खुद संभाली जिम्मेदारी, तब फूलों की घाटी ने बर्बादी से खूबसूरती तक का सफर तय किया

    नई दिल्ली । उत्तराखंड अपनी प्राकृतिक सुंदरता, ऊंचे पहाड़ों और मनमोहक घाटियों के लिए पूरी दुनिया में पहचान रखता है, लेकिन इसी खूबसूरत राज्य की एक प्रसिद्ध घाटी कभी पर्यावरणीय संकट के ऐसे दौर से गुजर रही थी, जहां उसकी पहचान और अस्तित्व दोनों खतरे में पड़ने लगे थे। दुनिया भर में अपनी खूबसूरती के लिए मशहूर फूलों की घाटी एक समय भारी मात्रा में प्लास्टिक और गैर-बायोडिग्रेडेबल कचरे के बोझ तले दब चुकी थी। लगातार बढ़ते पर्यटन और श्रद्धालुओं की आवाजाही के कारण यहां हालात इतने गंभीर हो गए थे कि घाटी का संवेदनशील पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित होने लगा था। हालांकि इसके बाद जो हुआ उसने केवल उत्तराखंड ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के सामने एक नई मिसाल पेश कर दी।

    कई वर्षों तक इस क्षेत्र में आने वाले लोगों की संख्या बढ़ती रही, लेकिन कचरे के प्रबंधन की कोई प्रभावी व्यवस्था विकसित नहीं हो सकी। नतीजा यह हुआ कि वर्षों तक प्लास्टिक और अन्य हानिकारक कचरा घाटी में जमा होता गया। धीरे-धीरे यह स्थिति एक बड़े पर्यावरणीय संकट में बदलने लगी। प्राकृतिक रूप से बेहद संवेदनशील इस हिमालयी क्षेत्र पर बढ़ते दबाव ने चिंता बढ़ा दी थी और लगने लगा था कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो इसकी खूबसूरती हमेशा के लिए प्रभावित हो सकती है।

    इसके बाद स्थानीय लोगों ने बदलाव की जिम्मेदारी खुद अपने हाथों में लेने का फैसला किया। गांवों के लोगों, सामाजिक समूहों और स्थानीय संस्थाओं ने मिलकर एक बड़े सफाई अभियान की शुरुआत की। यह केवल सरकारी प्रयास नहीं था बल्कि इसमें आम नागरिकों की भागीदारी सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आई। लोगों ने घर-घर जाकर जागरूकता फैलाई और घाटी को दोबारा स्वच्छ बनाने का संकल्प लिया। कुछ ही वर्षों में वर्षों से जमा भारी मात्रा में प्लास्टिक और गैर-बायोडिग्रेडेबल कचरा हटाया गया।

    सबसे खास और प्रेरणादायक पहलू यह रहा कि लोगों ने केवल सफाई तक खुद को सीमित नहीं रखा। स्थानीय समुदाय ने अवैध अतिक्रमणों के खिलाफ भी पहल की और बड़ी संख्या में अस्थायी ढांचों और दुकानों को हटाने का फैसला लिया। यह काम आसान नहीं था क्योंकि इसमें आर्थिक और सामाजिक चुनौतियां भी जुड़ी हुई थीं, लेकिन पर्यावरण को प्राथमिकता देते हुए लोगों ने कठिन फैसले लिए और घाटी को दोबारा संतुलित करने की दिशा में काम किया।

    सफाई अभियान के दौरान कचरे को घाटी से बाहर निकालना भी बड़ी चुनौती था। कठिन पहाड़ी रास्तों के बीच लोगों ने निरंतर मेहनत की और कचरे को नीचे तक पहुंचाने के लिए पारंपरिक संसाधनों का इस्तेमाल किया। इस सामूहिक प्रयास ने यह साबित कर दिया कि सीमित संसाधनों के बावजूद अगर समाज ठान ले तो असंभव दिखने वाले काम भी संभव हो सकते हैं।

    आज जब दुनिया के कई पर्यटन स्थल प्लास्टिक प्रदूषण और पर्यावरणीय संकट से जूझ रहे हैं, तब उत्तराखंड की यह कहानी एक मजबूत संदेश देती है। यह सिर्फ एक घाटी की सफाई की कहानी नहीं बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी, पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी की ऐसी मिसाल है जिसने दुनिया को यह दिखाया कि बदलाव केवल नीतियों से नहीं बल्कि लोगों की इच्छा शक्ति से भी आता है।

  • बैठक में गैरहाजिरी पर नोटिस, डॉक्टर ने लगाया मानसिक प्रताड़ना का आरोप

    बैठक में गैरहाजिरी पर नोटिस, डॉक्टर ने लगाया मानसिक प्रताड़ना का आरोप


    मध्य प्रदेश । दतिया के जिला स्वास्थ्य विभाग में एक कारण बताओ नोटिस ने नया प्रशासनिक विवाद खड़ा कर दिया है। एनक्वास (NQAS) बैठक में अनुपस्थित रहने पर सीएमएचओ डॉ. बीके वर्मा द्वारा जारी नोटिस के जवाब में डॉ. एसएस बाथम ने गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे मामले को मानसिक प्रताड़ना और व्यक्तिगत द्वेष से प्रेरित बताया है।

    जानकारी के अनुसार, सीएमएचओ कार्यालय की ओर से 18 तारीख को आयोजित बैठक में अनुपस्थित रहने पर डॉ. बाथम को नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया था। इसके जवाब में डॉ. बाथम ने कई सवाल उठाते हुए पूछा कि उन्हें बैठक की सूचना कब और किस माध्यम से दी गई थी।

    डॉ. बाथम ने अपने जवाब में कहा कि यदि बैठक के संबंध में कोई आदेश जारी किया गया था, तो उसकी प्रति नोटिस के साथ संलग्न की जानी चाहिए थी। उन्होंने आरोप लगाया कि जानबूझकर उनकी छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है और उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।

    अपने पत्र में डॉ. बाथम ने यह भी लिखा कि वे कई बार कार्यालय संबंधी समस्याओं और स्टाफ की उपलब्धता पर चर्चा करने सीएमएचओ कार्यालय पहुंचे, लेकिन हर बार उन्हें यह कहकर लौटा दिया गया कि “साहब मीटिंग में हैं।” उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ऐसी कौन सी लगातार चलने वाली बैठकें थीं, जिनके कारण उनसे चर्चा तक नहीं हो सकी।

    डॉक्टर ने आरोप लगाया कि पूर्व में भी उनके खिलाफ अनर्गल पत्राचार कर छवि धूमिल करने का प्रयास किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में कुछ पत्र सोशल मीडिया ग्रुपों में साझा किए गए, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश हुई।

    डॉ. बाथम ने अपने जवाब में सीएमएचओ पर लंबे समय से व्यक्तिगत द्वेष रखने और पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर कार्रवाई करने का आरोप लगाया है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि इस प्रकार का द्वेषपूर्ण पत्राचार जारी रहा, तो वे इसे मानसिक प्रताड़ना मानते हुए वैधानिक कार्रवाई करेंगे।

    मामले को गंभीर बनाते हुए डॉ. बाथम ने अपने जवाब की प्रतिलिपि राज्य मानवाधिकार आयोग, कलेक्टर और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को भी भेजी है। वहीं दोनों अधिकारियों के बीच हुआ यह पत्राचार अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

  • लाहौर में हिंदू-सिख नामों की वापसी पर सियासत गर्म, नजम सेठी बोले-पश्चिमी देशों में छवि चमकाने का खेल

    लाहौर में हिंदू-सिख नामों की वापसी पर सियासत गर्म, नजम सेठी बोले-पश्चिमी देशों में छवि चमकाने का खेल




    नई दिल्ली। पाकिस्तान के लाहौर में विभाजन से पहले के हिंदू, सिख और जैन समुदायों से जुड़े पुराने इलाकों और सड़कों के नाम बहाल करने की तैयारी ने नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। पंजाब सरकार की इस योजना को लेकर पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार नजम सेठी ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि इसके पीछे पाक सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की रणनीति काम कर रही है।

    दरअसल, पंजाब सरकार ने लाहौर और आसपास के कई ऐतिहासिक इलाकों के पुराने नाम दोबारा लागू करने की योजना को मंजूरी दी है। यह फैसला मुख्यमंत्री मरियम नवाज की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया और इसे नवाज शरीफ के नेतृत्व वाले ‘लाहौर हेरिटेज एरियाज़ रिवाइवल प्रोजेक्ट’ के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है।

    इस योजना के तहत इस्लामपुरा का नाम फिर से ‘कृष्ण नगर’, सुन्नत नगर का ‘संत नगर’, मुस्तफाबाद का ‘धर्मपुरा’ और बाबरी मस्जिद चौक का नाम ‘जैन मंदिर रोड’ किए जाने जैसे प्रस्ताव शामिल हैं। इसके अलावा भी कई ऐतिहासिक नामों की समीक्षा की जा रही है।

    इसी मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए पत्रकार नजम सेठी ने कहा कि पाकिस्तान में लंबे समय से इस्लामीकरण की राजनीति होती रही है और विभाजन के बाद हिंदू व अन्य गैर-मुस्लिम पहचान वाले नामों को व्यवस्थित तरीके से बदला गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि अब अचानक पुराने नामों की वापसी के पीछे जनरल असीम मुनीर की पश्चिमी देशों में उदारवादी छवि पेश करने की कोशिश हो सकती है।

    सेठी ने यहां तक कहा कि सेना प्रमुख की मंजूरी के बिना इतना बड़ा फैसला संभव नहीं था। हालांकि पाकिस्तान सरकार की ओर से इसे केवल सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक पहचान को बचाने की पहल बताया जा रहा है।फिलहाल इस फैसले ने पाकिस्तान में इतिहास, राजनीति और पहचान की बहस को फिर से तेज कर दिया है।

  • Q4 में कंपनियों ने दिखाई कमाई की ताकत, किसी का मुनाफा 63% उछला तो कहीं आय और ऑपरेटिंग प्रदर्शन ने चौंकाया निवेशकों को

    Q4 में कंपनियों ने दिखाई कमाई की ताकत, किसी का मुनाफा 63% उछला तो कहीं आय और ऑपरेटिंग प्रदर्शन ने चौंकाया निवेशकों को

    नई दिल्ली। मार्च तिमाही के कारोबारी नतीजों ने कई कंपनियों के प्रदर्शन को लेकर बाजार में नई चर्चा छेड़ दी है। रियल एस्टेट, आईटी और वित्तीय सेवा क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों ने मजबूत आंकड़ों के जरिए यह संकेत दिया है कि कारोबारी गतिविधियों में तेजी बरकरार है। बेहतर कमाई, बढ़ते मुनाफे और ऑपरेशनल क्षमता में सुधार ने निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। खासकर कुछ कंपनियों के नतीजों ने बाजार को सकारात्मक संकेत दिए हैं।

    रियल एस्टेट सेक्टर की कंपनी Shriram Properties ने मार्च तिमाही में उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए अपने मुनाफे में जोरदार उछाल दर्ज किया। कंपनी का शुद्ध लाभ पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 63 प्रतिशत से अधिक बढ़ा। साथ ही कंपनी की कुल आय में भी मजबूत बढ़त देखने को मिली। कंपनी की परिचालन आय और मार्जिन में सुधार यह दर्शाता है कि प्रोजेक्ट डिलीवरी और आवासीय मांग ने कारोबारी रफ्तार को मजबूती दी है। बेहतर बिक्री और ग्राहक मांग ने कंपनी के प्रदर्शन में अहम भूमिका निभाई।

    वहीं आईटी समाधान क्षेत्र से जुड़ी Saksoft Limited ने भी स्थिर और संतुलित वृद्धि दिखाई है। कंपनी ने अपने मुनाफे और आय दोनों में बढ़त दर्ज की है। इसके साथ ही ऑपरेटिंग प्रदर्शन में सुधार और मार्जिन में मजबूती यह संकेत देती है कि डिजिटल सेवाओं और तकनीकी समाधान की मांग लगातार बढ़ रही है। कंपनी की परिचालन दक्षता में सुधार भी उसके प्रदर्शन को मजबूती देने वाला कारक माना जा रहा है।

    वित्तीय सेवा क्षेत्र की प्रमुख कंपनी Sundaram Finance Limited ने भी मार्च तिमाही में स्थिर प्रदर्शन किया। हालांकि कंपनी के शुद्ध लाभ में सीमित बढ़त देखने को मिली, लेकिन ब्याज से होने वाली आय में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई। बढ़ते ऋण पोर्टफोलियो और वित्तीय गतिविधियों में सुधार ने कंपनी की कमाई को सहारा दिया है। इससे कंपनी की कारोबारी स्थिति पहले की तुलना में अधिक मजबूत दिखाई दे रही है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि तिमाही नतीजों में दिखाई दे रही यह मजबूती निवेशकों के भरोसे को बढ़ाने का काम कर सकती है। अलग-अलग क्षेत्रों की कंपनियों द्वारा दर्ज की गई ग्रोथ यह संकेत देती है कि आर्थिक गतिविधियां धीरे-धीरे गति पकड़ रही हैं। आने वाले समय में निवेशकों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि यह प्रदर्शन अगले कुछ तिमाहियों में किस स्तर तक बरकरार रहता है।

  • पतारा जंगल में छापा: जुए के दतिया के पतारा जंगल में जुए के फड़ पर पुलिस का छापा: 8 गिरफ्तार, 6 फरार, 2.85 लाख नकद बरामदड़ से लाखों की नकदी और गाड़ियां जब्त

    पतारा जंगल में छापा: जुए के दतिया के पतारा जंगल में जुए के फड़ पर पुलिस का छापा: 8 गिरफ्तार, 6 फरार, 2.85 लाख नकद बरामदड़ से लाखों की नकदी और गाड़ियां जब्त


    मध्य प्रदेश । दतिया जिले में अवैध गतिविधियों के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत सिविल लाइन थाना पुलिस ने रविवार रात बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। जिला अस्पताल के पीछे स्थित पतारा के जंगल में लंबे समय से चल रहे जुए के फड़ पर पुलिस ने अचानक दबिश दी और 8 जुआरियों को गिरफ्तार कर लिया।

    पुलिस के अनुसार, मुखबिर से मिली सटीक सूचना के आधार पर टीआई वैभव गुप्ता के नेतृत्व में टीम ने इलाके की घेराबंदी की। जैसे ही पुलिस मौके पर पहुंची, जुआरियों में भगदड़ मच गई, लेकिन पुलिस ने तेजी दिखाते हुए 8 लोगों को पकड़ लिया, जबकि 6 आरोपी अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए।

    कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मौके से करीब 2 लाख 85 हजार रुपए नकद, एक स्विफ्ट कार, एक बाइक और एक सोने की चेन सहित जुए से जुड़ा अन्य सामान भी जब्त किया है। बरामदगी के बाद इलाके में हड़कंप मच गया।

    पुलिस जांच में सामने आया है कि जुआरी इस सुनसान जंगल क्षेत्र का इस्तेमाल इसलिए कर रहे थे ताकि देर रात तक बिना किसी रोक-टोक के अवैध गतिविधियां चलती रहें और किसी को इसकी जानकारी न हो सके।

    गिरफ्तार आरोपियों में नीरज कुशवाह (सीतापुर), ब्रजमोहन कुशवाह (कमथरा), दिनेश अहिरवार (सिद्धार्थ कॉलोनी), नरेश कुशवाह (ठंडी सड़क), राजेंद्र गोस्वामी (उनाव रोड), प्रवेंद्र जाटव (डबरा), जीतेन्द्र कुशवाह और श्रीराम कुशवाह (कुरथरा) शामिल हैं।

    वहीं फरार आरोपियों में आनंद कुशवाह, विपिन यादव, राजेश उर्फ कल्लू कमरिया, दीपक कमरिया, रामलाल कुशवाह और बचन यादव के नाम सामने आए हैं। पुलिस उनकी तलाश में लगातार दबिश दे रही है।

    पुलिस का कहना है कि यह पता लगाया जा रहा है कि इस जुए के फड़ का मुख्य संचालक कौन था और यह गतिविधि कितने समय से चल रही थी। मामले में जुआ एक्ट के तहत आगे की कार्रवाई की जा रही है।

  • दतिया में रेलवे मार्ग बंद होने पर बवाल, 1000 लोगों के सामने संकट

    दतिया में रेलवे मार्ग बंद होने पर बवाल, 1000 लोगों के सामने संकट


    मध्य प्रदेश । दतिया रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर-1 के पास स्थित रामनगर डेरा, पीताम्बरा कॉलोनी, विला कॉलोनी और मिश्रा कॉलोनी के रहवासियों ने सोमवार सुबह कलेक्ट्रेट पहुंचकर विरोध दर्ज कराया। लोगों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए रेलवे प्रशासन द्वारा पुराने आवागमन मार्ग को बंद किए जाने की कार्रवाई पर आपत्ति जताई।

    रहवासियों का आरोप है कि रेलवे विभाग उस रास्ते को बंद करने की तैयारी कर रहा है, जिसका उपयोग वर्षों से स्थानीय लोग आवागमन के लिए करते आ रहे हैं। उनका कहना है कि इस मार्ग के बंद होने से करीब एक हजार से अधिक लोगों के सामने गंभीर आवागमन संकट खड़ा हो जाएगा।

    लोगों ने बताया कि यह मार्ग आजादी से पहले से उपयोग में है और पुराने रेलवे स्टेशन के टिकट घर के पास से रामनगर डेरा और बाजनी क्षेत्र की ओर जाने के लिए बनाया गया था। यह भूमि खसरा क्रमांक 613/701 में मध्यप्रदेश शासन के नाम दर्ज है, और लंबे समय से लोग इसी रास्ते का उपयोग कर रहे हैं।

    रहवासियों ने यह भी बताया कि नए रेलवे स्टेशन के निर्माण के दौरान पुराने रास्ते के स्थान पर एक वैकल्पिक मार्ग बनाया गया था, जिससे वर्तमान में कॉलोनियों और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की आवाजाही हो रही है। लेकिन अब उसी वैकल्पिक मार्ग को भी बंद करने की तैयारी की जा रही है, जिससे स्थिति और गंभीर हो सकती है।

    स्थानीय लोगों का आरोप है कि मौके पर गिट्टी, रेत और ईंट जैसे निर्माण सामग्री एकत्र की जा रही है, जिससे संकेत मिलता है कि रास्ता बंद करने का काम जल्द शुरू हो सकता है।

    प्रभावित कॉलोनियों में बड़ी संख्या में शासकीय कर्मचारी, व्यापारी और किसान परिवार रहते हैं। वहीं स्कूल जाने वाले बच्चों और ग्रामीणों की दैनिक आवाजाही भी इसी मार्ग पर निर्भर है। लोगों का कहना है कि प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत बनी सड़क भी इसी रास्ते से जुड़ी हुई है, ऐसे में रास्ता बंद होने पर पूरी कनेक्टिविटी प्रभावित हो जाएगी।

    रहवासियों ने कलेक्टर से मांग की है कि रेलवे द्वारा किए जा रहे किसी भी निर्माण कार्य को तत्काल रोका जाए और आमजन के लिए यह मार्ग सुरक्षित रखा जाए। ज्ञापन सौंपते समय बड़ी संख्या में कॉलोनीवासी और ग्रामीण मौजूद रहे।