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  • मां लक्ष्मी को प्रसन्न करना है तो शुक्रवार को रखें इन बातों का ध्यान छोटी सी गलती भी पड़ सकती है भारी

    मां लक्ष्मी को प्रसन्न करना है तो शुक्रवार को रखें इन बातों का ध्यान छोटी सी गलती भी पड़ सकती है भारी


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में शुक्रवार का दिन मां लक्ष्मी को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन माता लक्ष्मी की पूजा करने से घर में सुख समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है। कई लोग शुक्रवार के दिन व्रत रखते हैं और विधि विधान से मां लक्ष्मी का पूजन करते हैं। मान्यता है कि इस दिन पूजा पाठ के साथ कुछ विशेष नियमों का ध्यान रखना भी जरूरी होता है। ऐसा माना जाता है कि स्वच्छता और सकारात्मक वातावरण मां लक्ष्मी को प्रिय होता है इसलिए शुक्रवार के दिन घर को साफ सुथरा रखना शुभ माना जाता है।

    शुक्रवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद घर की साफ सफाई करनी चाहिए। खासतौर पर पूजा स्थल और मुख्य द्वार के आसपास गंदगी नहीं रहने देनी चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां लक्ष्मी का संबंध स्वच्छता और समृद्धि से माना जाता है इसलिए घर में बिखरा हुआ सामान और अनावश्यक गंदगी रखने से बचने की सलाह दी जाती है। पूजा के स्थान पर दीपक जलाकर मां लक्ष्मी का ध्यान करना और अपनी सामर्थ्य के अनुसार फल फूल तथा मिठाई का भोग लगाना शुभ माना जाता है।

    शुक्रवार के दिन किसी के साथ विवाद करने या कठोर शब्द बोलने से बचना चाहिए। परिवार के सदस्यों के साथ प्रेम और सम्मान से व्यवहार करना बेहतर माना जाता है। जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करना और अपनी क्षमता के अनुसार दान करना भी शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दान और सेवा की भावना व्यक्ति के जीवन में सकारात्मकता लाने में सहायक हो सकती है।

    इस दिन घर में नकारात्मक वातावरण बनाने वाली गतिविधियों से बचने की सलाह दी जाती है। अनावश्यक क्रोध करना किसी का अपमान करना या बिना वजह किसी से झगड़ा करना उचित नहीं माना जाता। इसी तरह घर की महिलाओं और बुजुर्गों का सम्मान करना भी महत्वपूर्ण माना गया है। मान्यता है कि जहां परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम और सम्मान का वातावरण रहता है वहां सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।

    शुक्रवार को खानपान को लेकर भी कई परिवारों में विशेष परंपराएं होती हैं। व्रत रखने वाले लोग अपनी आस्था और पारिवारिक परंपरा के अनुसार फलाहार करते हैं। कुछ लोग इस दिन सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। अगर कोई व्यक्ति व्रत रख रहा है तो उसे अपनी शारीरिक क्षमता का ध्यान रखना चाहिए। स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर लंबे समय तक भूखे रहने के बजाय विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुक्रवार के दिन किसी भी तरह के नशे और तामसिक गतिविधियों से दूर रहना शुभ माना जाता है। साथ ही पूजा के दौरान मन को शांत रखते हुए माता लक्ष्मी का स्मरण करना चाहिए। घर में दीपक जलाने और पूजा के बाद आरती करने की परंपरा भी कई परिवारों में निभाई जाती है।

    कुल मिलाकर शुक्रवार के नियम केवल पूजा पाठ तक सीमित नहीं हैं बल्कि स्वच्छता संयम अच्छे व्यवहार और जरूरतमंदों की सहायता से भी जुड़े हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अगर शुक्रवार के दिन श्रद्धा के साथ मां लक्ष्मी की पूजा की जाए और अच्छे आचरण को अपनाया जाए तो जीवन में सकारात्मकता और सुख शांति बनी रह सकती है। इन नियमों को आस्था और पारिवारिक परंपरा के अनुसार अपनाया जा सकता है।

  • शहडोल सरकारी स्कूल में बारिश के बीच बच्चों से छज्जे की सफाई, वायरल वीडियो के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

    शहडोल सरकारी स्कूल में बारिश के बीच बच्चों से छज्जे की सफाई, वायरल वीडियो के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

    मध्य प्रदेश: के शहडोल जिले में सरकारी प्राथमिक विद्यालय से सामने आए एक वीडियो ने बच्चों की सुरक्षा और स्कूलों में जिम्मेदारी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गोरतरा ग्राम पंचायत स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय में बारिश के दौरान बच्चों से स्कूल की छत और छज्जे की सफाई कराए जाने का मामला सामने आया है। वायरल वीडियो में कुछ बच्चे ऊंचाई वाले हिस्से पर चढ़कर सफाई करते दिखाई दे रहे हैं।

    बताया जा रहा है कि स्कूल की छत की दीवार और छज्जे पर गंदगी जमा होने के बाद उसे साफ करने की जरूरत महसूस हुई थी। इसी दौरान बच्चों से सफाई का काम कराया गया। वीडियो में बच्चे ऊंचाई पर मौजूद दिखाई देते हैं, जिससे उनके फिसलने या नीचे गिरने का खतरा बना हुआ था। खास तौर पर बारिश के दौरान छत और छज्जे की सतह पर फिसलन बढ़ जाने से जोखिम और अधिक गंभीर हो जाता है।

    स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की उम्र को देखते हुए इस तरह का कार्य कराना सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है। जिस समय विद्यार्थियों को पढ़ाई और शैक्षणिक गतिविधियों में शामिल होना चाहिए, उस समय उनसे ऊंचाई पर चढ़कर सफाई कराने की घटना सामने आई है। यदि सफाई आवश्यक थी तो इसे सुरक्षित तरीके से कराया जा सकता था, ताकि विद्यार्थियों को किसी संभावित दुर्घटना का सामना न करना पड़े।

    मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि बच्चों को छत और छज्जे जैसे जोखिम वाले स्थान पर जाने की अनुमति किस स्तर पर दी गई। स्कूल परिसर में विद्यार्थियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी शिक्षकों और संबंधित प्रशासनिक व्यवस्था की होती है। ऐसे में यह भी सवाल उठ रहा है कि घटना के समय बच्चों की निगरानी और सुरक्षा के लिए क्या व्यवस्था मौजूद थी।

    शहडोल जिले में बारिश के कारण पहले से ही कई स्थानों पर जनजीवन प्रभावित बताया जा रहा है। ऐसे मौसम में स्कूल भवनों की सुरक्षा और विद्यार्थियों की आवाजाही को लेकर अतिरिक्त सावधानी की जरूरत होती है। बारिश के बीच ऊंचाई पर सफाई का काम बच्चों से कराया जाना इसी वजह से और अधिक चिंता का विषय बन गया है।

    वीडियो सामने आने के बाद अभिभावकों के बीच भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है। स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को किसी भी ऐसे काम में शामिल नहीं किया जाना चाहिए, जिसमें उनकी शारीरिक सुरक्षा प्रभावित होने की आशंका हो। खासकर छत, छज्जे या ऊंचाई वाले स्थानों पर काम करते समय प्रशिक्षित और जिम्मेदार व्यक्ति की मौजूदगी जरूरी मानी जाती है।

    घटना के बाद यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि सरकारी स्कूलों में सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं की निगरानी किस तरह की जा रही है। स्कूल भवन की नियमित सफाई और रखरखाव की जिम्मेदारी तय व्यवस्था के तहत पूरी की जानी चाहिए, लेकिन इसके लिए विद्यार्थियों को जोखिम में डालना उचित नहीं माना जा सकता।

    फिलहाल वायरल वीडियो के आधार पर सामने आई इस घटना ने स्कूल प्रबंधन और संबंधित शिक्षा व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। पूरे मामले में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि बच्चों से सफाई का काम क्यों कराया गया, उन्हें ऊंचाई पर जाने की अनुमति किसने दी और बारिश के दौरान उनकी सुरक्षा के लिए क्या सावधानियां बरती गई थीं। मामले की वास्तविक स्थिति और जिम्मेदारी तय होने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

  • अमेरिकी सैन्यकर्मियों की मौत पर बदला ट्रंप प्रशासन का बयान, हॉवर्ड लुटनिक ने स्वीकार की अपनी बड़ी गलती

    अमेरिकी सैन्यकर्मियों की मौत पर बदला ट्रंप प्रशासन का बयान, हॉवर्ड लुटनिक ने स्वीकार की अपनी बड़ी गलती

    नई दिल्ली ।ईरान में जारी अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बीच अमेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ मंत्री के बयान में बदलाव ने सैनिकों की मौत के आंकड़ों को लेकर चर्चा तेज कर दी है। अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक ने पहले ईरान अभियान के दौरान किसी अमेरिकी सैन्यकर्मी की मौत नहीं होने की बात कही थी, लेकिन बाद में उन्होंने अपने बयान को गलत बताते हुए 18 अमेरिकी सैन्यकर्मियों की मौत की पुष्टि की।

    लुटनिक ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए मृत सैनिकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सैन्यकर्मियों के बलिदान को लेकर गलत जानकारी देना गंभीर चूक थी और इसके लिए वह माफी मांगते हैं। उनका यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है जब ईरान में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के दौरान मारे गए और घायल हुए सैनिकों की संख्या को लेकर प्रशासन से लगातार सवाल किए जा रहे हैं।

    लुटनिक के अनुसार, यह गलती उस समय हुई जब वह एक कार्यक्रम में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और तकनीकी विषयों पर बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान उनसे ईरान में अमेरिकी सैन्य अभियान से जुड़े सवाल पूछे गए। जवाब देते समय उन्होंने गलत जानकारी दे दी और कहा कि किसी अमेरिकी सैन्यकर्मी की जान नहीं गई है।

    उन्होंने बाद में स्पष्ट किया कि उस वक्त उनके दिमाग में वेनेजुएला में हुए एक अलग सैन्य अभियान की जानकारी थी। इसी वजह से उन्होंने ईरान से संबंधित सवाल का गलत उत्तर दे दिया। लुटनिक ने कहा कि उनका बयान तथ्यात्मक रूप से गलत था और वह इसकी जिम्मेदारी लेते हैं।

    अमेरिकी मंत्री ने अपने स्पष्टीकरण में सैनिकों और उनके परिवारों के प्रति सम्मान भी व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि देश की सेवा करने वाले अमेरिकी पुरुषों और महिलाओं के बलिदान को हमेशा याद रखा जाना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से उन परिवारों के प्रति दुख जताया जिन्होंने ईरान में सैन्य कार्रवाई के दौरान अपने प्रियजनों को खोया है।

    यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य तनाव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। अमेरिकी अभियान से जुड़े नुकसान और सैन्यकर्मियों की स्थिति पर स्पष्ट जानकारी को लेकर प्रशासन के बयानों पर नजर रखी जा रही है। ऐसे में एक वरिष्ठ मंत्री के बयान में बदलाव ने सरकारी सूचना तंत्र की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े किए हैं।

    लुटनिक की सार्वजनिक माफी को प्रशासन की ओर से गलत सूचना को स्पष्ट करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने अपने पहले बयान को सही ठहराने के बजाय सीधे तौर पर गलती स्वीकार की और मृत सैनिकों की संख्या के संबंध में संशोधित जानकारी सामने रखी।

    ईरान अभियान में अमेरिकी सैन्यकर्मियों की मौत का मुद्दा अब केवल सैन्य कार्रवाई से जुड़ा विषय नहीं रह गया है, बल्कि अमेरिकी प्रशासन की जवाबदेही और आधिकारिक सूचनाओं की सटीकता से भी जुड़ गया है। 18 सैनिकों की मौत की बात स्वीकार किए जाने के बाद आगे की कार्रवाई और नुकसान से संबंधित आधिकारिक जानकारी पर भी विशेष ध्यान रहेगा।

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच लुटनिक ने अमेरिकी सेना में सेवा देने वाले लोगों के योगदान और बलिदान को याद करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा के लिए काम करने वाले सैन्यकर्मियों के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उनके बयान में हुई गलती के बाद दी गई माफी से प्रशासन की ओर से स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है।

  • आरजी कर केस में पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ ने सीबीआई जांच पर उठाए सवाल, डॉक्टरों की गिरफ्तारी को लेकर भी बोलीं

    आरजी कर केस में पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ ने सीबीआई जांच पर उठाए सवाल, डॉक्टरों की गिरफ्तारी को लेकर भी बोलीं


    नई दिल्ली ।
    कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में महिला डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले में पीड़िता की मां और बीजेपी विधायक रत्ना देबनाथ ने जांच की प्रगति पर असंतोष जताया है। उन्होंने कहा कि बेटी की मौत के बाद परिवार को न्याय की उम्मीद थी, लेकिन अब भी उन्हें लगता है कि न्याय दिलाने की प्रक्रिया पर्याप्त गति से आगे नहीं बढ़ रही है।

    बैरकपुर में बुधवार को आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान रत्ना देबनाथ ने कहा कि वह मूल रूप से राजनीति में आने की इच्छुक नहीं थीं। उनका परिवार सामान्य जीवन जी रहा था और उनके पति का कारोबार था। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी ने भी उन्हें राजनीति में आने से दूर रहने की सलाह दी थी।

    रत्ना देबनाथ के अनुसार, बेटी की दर्दनाक मौत के बाद परिस्थितियां पूरी तरह बदल गईं। उस समय परिवार को यह भरोसा दिलाया गया था कि सरकार बदलने के बाद राज्य में हालात बेहतर होंगे और मामले में न्याय की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार बदल गई है तो क्या वास्तव में जमीन पर स्थिति में भी बदलाव आया है।

    बीजेपी विधायक ने सीबीआई की जांच को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि वह जांच की वर्तमान प्रगति से संतुष्ट नहीं हैं। अदालत की ओर से मामले में नई विशेष जांच टीम गठित किए जाने के बाद भी उन्होंने जांच की दिशा और गति को लेकर सवाल उठाए।

    उन्होंने मामले में डॉक्टरों की भूमिका से जुड़े मुद्दे पर भी सवाल खड़ा किया। रत्ना देबनाथ के मुताबिक, उन्हें बताया गया कि आरोपी डॉक्टर हैं और उन्हें इस तरह गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि अदालत में इस तरह की बात सामने आई थी कि डॉक्टरों को सीधे गिरफ्तार नहीं किया जा सकता।

    इस पर रत्ना देबनाथ ने सवाल किया कि यदि कोई डॉक्टर अपराध में शामिल है और उनकी बेटी की हत्या से उसका संबंध सामने आता है तो केवल डॉक्टर होने के आधार पर कार्रवाई क्यों नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी भी डॉक्टर थी और परिवार के लिए यह समझना कठिन है कि किसी पेशे से जुड़े व्यक्ति पर अपराध का आरोप होने के बावजूद कानूनी प्रक्रिया में अलग मानक क्यों अपनाया जाए।

    रत्ना देबनाथ ने यह भी कहा कि उनका परिवार शुरुआत में राजनीति में शामिल नहीं होना चाहता था। उनकी प्राथमिकता अपनी बेटी के लिए न्याय हासिल करना थी। उन्होंने बताया कि उन्हें राज्य की शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी चिंताएं बताई गई थीं और इन्हीं परिस्थितियों के बीच वह सार्वजनिक जीवन में आईं।

    आरजी कर मामला अगस्त 2024 में सामने आया था, जब अस्पताल के सेमिनार हॉल में एक महिला डॉक्टर का शव मिला था। घटना के बाद पूरे देश में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे और अस्पतालों में चिकित्सकों की सुरक्षा तथा महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठे थे।

    मामले की जांच को लेकर लंबे समय से विभिन्न स्तरों पर कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई चलती रही है। अब पीड़िता की मां के ताजा बयान ने जांच की गति और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर बहस फिर तेज कर दी है। रत्ना देबनाथ ने स्पष्ट किया कि सरकार बदलने के बावजूद उनके परिवार की न्याय की प्रतीक्षा समाप्त नहीं हुई है। उनके बयान से यह भी सामने आया कि परिवार अब भी मामले में व्यापक और प्रभावी कानूनी कार्रवाई की उम्मीद कर रहा है।

  • रेवंत रेड्डी ने ओवैसी बंधुओं की देशभक्ति पर उठे सवाल खारिज किए, बोले मोदी और शाह से कम नहीं देशभक्ति

    रेवंत रेड्डी ने ओवैसी बंधुओं की देशभक्ति पर उठे सवाल खारिज किए, बोले मोदी और शाह से कम नहीं देशभक्ति

    नई दिल्ली ।तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और उनके भाई अकबरुद्दीन ओवैसी की देशभक्ति को लेकर खुलकर उनका बचाव किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दोनों नेताओं की देशभक्ति पर सवाल नहीं उठाया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देशभक्ति और देश की रक्षा के मामले में असदुद्दीन ओवैसी और अकबरुद्दीन ओवैसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से कम नहीं हैं।

    रेवंत रेड्डी ने यह बयान हैदराबाद में चंचलगुडा-संतोषनगर चार लेन वाले नवनिर्मित स्टील फ्लाईओवर के उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ लोगों ने ओवैसी भाइयों को देश के खिलाफ बताया है, लेकिन वह इस धारणा को स्वीकार नहीं करते। उनके मुताबिक राजनीतिक विचारों में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन इससे किसी व्यक्ति की देशभक्ति पर सवाल खड़ा नहीं किया जाना चाहिए।

    मुख्यमंत्री ने असदुद्दीन ओवैसी की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वह भारतीय सैनिकों के समर्थन में आयोजित रैली में कांग्रेस नेताओं के साथ शामिल हुए थे। उन्होंने अभियान में शामिल सैनिकों की सलामती के लिए प्रार्थना भी की थी। रेवंत रेड्डी ने इसी आधार पर कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर ओवैसी भाइयों की प्रतिबद्धता को लेकर किसी को उंगली नहीं उठानी चाहिए।

    रेवंत रेड्डी ने कहा कि राजनीतिक टिप्पणियां अलग-अलग हो सकती हैं और विभिन्न दलों के नेताओं के अपने राजनीतिक विचार हो सकते हैं। हालांकि, जब बात देशभक्ति और देश की रक्षा की आती है तो ओवैसी भाइयों की निष्ठा पर सवाल उठाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा के मामले में दोनों पीछे हटने वाले नहीं हैं।

    इस दौरान AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी तेलंगाना की राजनीति को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि उन्हें यह कहने में कोई हिचकिचाहट नहीं है कि उनकी पार्टी का समर्थन किसी राजनीतिक दल को नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को है। ओवैसी के इस बयान के बाद दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

    रेवंत रेड्डी और ओवैसी के बीच राजनीतिक संबंधों को लेकर तेलंगाना में पहले भी चर्चा होती रही है। AIMIM का प्रभाव मुख्य रूप से हैदराबाद और आसपास के क्षेत्रों में माना जाता है, जबकि कांग्रेस राज्य में सत्तारूढ़ दल है। ऐसे में मुख्यमंत्री का सार्वजनिक मंच से ओवैसी बंधुओं की देशभक्ति का बचाव करना राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से असदुद्दीन ओवैसी की देशभक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह से कम देशभक्त नहीं हैं। उन्होंने अपने बयान में अकबरुद्दीन ओवैसी को भी शामिल करते हुए दोनों भाइयों की देश के प्रति प्रतिबद्धता पर भरोसा जताया।

    रेवंत रेड्डी के बयान ने तेलंगाना की राजनीति में एक नई चर्चा को जन्म दिया है। उनके बयान का मुख्य संदेश यही रहा कि राजनीतिक मतभेदों को देशभक्ति के आकलन का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने ओवैसी भाइयों के सार्वजनिक आचरण और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सैनिकों के समर्थन में उनकी भागीदारी का उल्लेख करते हुए अपनी बात रखी।

  • श्रीनगर एयरपोर्ट पर IndiGo विमान VDGS पोल से टकराया, ब्रेक सिस्टम खराबी के दावे के बीच जांच में जुटे अधिकारी

    श्रीनगर एयरपोर्ट पर IndiGo विमान VDGS पोल से टकराया, ब्रेक सिस्टम खराबी के दावे के बीच जांच में जुटे अधिकारी


    नई दिल्ली । 
    श्रीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर शुक्रवार सुबह IndiGo की एक फ्लाइट पार्किंग के दौरान विजुअल डॉकिंग गाइडेंस सिस्टम के पोल से टकरा गई। शुरुआती जानकारी के अनुसार विमान को पार्क करते समय ब्रेक सिस्टम में खराबी सामने आई, जिसके बाद विमान का अगला हिस्सा पोल के संपर्क में आ गया। हादसे में विमान के नोज सेक्शन को नुकसान पहुंचा है।

    घटना के समय विमान में मौजूद सभी यात्री और क्रू सदस्य सुरक्षित रहे। किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। विमान के रुकने के बाद यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को मैनुअल एयरक्राफ्ट सीढ़ियों की मदद से सुरक्षित बाहर निकाला गया।

    यह विमान IndiGo की फ्लाइट संख्या 6E 225 थी, जिसने सुबह नवी मुंबई से उड़ान भरी थी। विमान शुक्रवार सुबह करीब नौ बजे श्रीनगर एयरपोर्ट पहुंचा। लैंडिंग के बाद विमान को बे नंबर छह पर पार्क किया जा रहा था। इसी दौरान यह घटना हुई।

    उपलब्ध जानकारी के मुताबिक विमान का पंजीकरण नंबर VT-NOG है। पार्किंग की प्रक्रिया के दौरान विमान VDGS यानी विजुअल डॉकिंग गाइडेंस सिस्टम के पोल से टकराया। टक्कर के कारण विमान के अगले हिस्से को नुकसान हुआ। हालांकि नुकसान के बावजूद यात्रियों को सुरक्षित तरीके से विमान से बाहर निकाल लिया गया।

    एयरलाइन की ओर से घटना को पार्किंग के दौरान हुई मामूली घटना बताया गया है। हालांकि शुरुआती तौर पर ब्रेक सिस्टम में खराबी की बात सामने आई है, लेकिन हादसे की पूरी वजह अभी स्पष्ट नहीं है। विमान के पोल से संपर्क में आने की परिस्थितियों और तकनीकी कारणों की जांच निर्धारित प्रक्रिया के तहत की जाएगी।

    हवाई अड्डे पर विमान की सुरक्षित पार्किंग के लिए विजुअल डॉकिंग गाइडेंस सिस्टम महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह व्यवस्था पायलट को विमान को निर्धारित पार्किंग स्थान तक सही तरीके से पहुंचाने में सहायता करती है। इस घटना में इसी प्रणाली के पोल से विमान का संपर्क हुआ, जिससे उसके अगले हिस्से को नुकसान पहुंचा।

    घटना के बाद एयरपोर्ट पर यात्रियों की सुरक्षा को लेकर तत्काल स्थिति का आकलन किया गया। अधिकारियों के शुरुआती बयान के अनुसार विमान में सवार सभी लोग सुरक्षित हैं। एयरपोर्ट के सामान्य संचालन पर भी घटना का कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है।

    श्रीनगर एयरपोर्ट के निदेशक जावेद अंजुम ने बताया कि हवाई अड्डे का संचालन सामान्य रूप से जारी है। विमानों की आवाजाही निर्धारित व्यवस्था के अनुसार चल रही है और यात्रियों तथा अन्य संबंधित लोगों के लिए सुरक्षित संचालन सुनिश्चित किया जा रहा है।

    घटना की सही वजह सामने आने के लिए तकनीकी और परिचालन पहलुओं की जांच महत्वपूर्ण होगी। इसमें विमान के ब्रेक सिस्टम की स्थिति, पार्किंग के दौरान हुई गतिविधियां और VDGS पोल से विमान के संपर्क की परिस्थितियों का आकलन किया जा सकता है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि टक्कर के पीछे वास्तविक तकनीकी या अन्य कारण क्या था।

    फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि घटना में किसी यात्री या क्रू सदस्य को चोट नहीं आई। विमान के अगले हिस्से को हुए नुकसान का आकलन संबंधित तकनीकी प्रक्रिया के तहत किया जाएगा। इसके बाद विमान की आगे की परिचालन स्थिति के बारे में फैसला लिया जाएगा।

    इस घटना ने विमान की पार्किंग प्रक्रिया और तकनीकी प्रणालियों की भूमिका को लेकर ध्यान आकर्षित किया है। हालांकि अभी किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। जांच पूरी होने के बाद ही ब्रेक सिस्टम में खराबी और पोल से हुई टक्कर के बीच वास्तविक संबंध स्पष्ट हो सकेगा।

  • राशन वितरण में गड़बड़ी पड़ी भारी: बड़ोखरा में सेल्समैन का मकान ध्वस्त, जिले में 6 राशन विक्रेताओं पर कानूनी कार्रवाई

    राशन वितरण में गड़बड़ी पड़ी भारी: बड़ोखरा में सेल्समैन का मकान ध्वस्त, जिले में 6 राशन विक्रेताओं पर कानूनी कार्रवाई


    शिवपुरी। शिवपुरी जिले में राशन वितरण में गड़बड़ी के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। बदरवास क्षेत्र के बड़ोखरा गांव में ग्रामीणों की शिकायत के बाद हुई जांच में लापरवाही और अनियमितता सामने आने पर प्रशासन ने कार्रवाई की। कलेक्टर अर्पित वर्मा के निर्देश के बाद टीम ने सेल्समैन के खिलाफ कदम उठाते हुए सरकारी जमीन पर बने अवैध मकान को जेसीबी की मदद से ढहा दिया। इसके साथ ही जिले में राशन वितरण से जुड़े मामलों में छह विक्रेताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करते हुए उन्हें जेल भेजने की प्रक्रिया की गई है।

    मामला बड़ोखरा गांव की उचित मूल्य दुकान से जुड़ा है। कलेक्टर अर्पित वर्मा ने अचानक दुकान का निरीक्षण किया था। इस दौरान ग्रामीणों ने सेल्समैन योगेश जाट पर राशन वितरण में मनमानी करने का आरोप लगाया। ग्रामीणों का कहना था कि उन्होंने राशन लेने के लिए फिंगरप्रिंट भी लगाए थे लेकिन इसके बावजूद उन्हें करीब तीन महीने से खाद्यान्न नहीं मिल रहा था। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने अपनी मौजूदगी में पात्र हितग्राहियों को राशन का वितरण कराया और सेल्समैन के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए।

    प्रशासन के निर्देश के बाद भी सेल्समैन लगातार दुकान से गायब रहा। इसके बाद गुरुवार को तहसीलदार सचिन भार्गव के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम उसके गांव सेमरी पहुंची। यहां जांच के दौरान सरकारी जमीन पर एक मकान बना मिला। प्रशासन ने निर्माण को अवैध मानते हुए कार्रवाई की और जेसीबी से मकान को ढहा दिया। इस कार्रवाई के बाद राशन वितरण व्यवस्था में गड़बड़ी करने वालों के बीच हड़कंप की स्थिति बन गई।

    प्रशासन ने केवल एक मामले तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी है। जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में राशन दुकानों की जांच के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। कोलारस क्षेत्र की बामोरखुर्द और श्रीपुरा राशन दुकानों में पीओएस मशीन के रिकॉर्ड में खाद्यान्न दर्ज था लेकिन मौके पर राशन उपलब्ध नहीं मिला। इस मामले में विक्रेता माधौ सिंह यादव और धनपाल सिंह के खिलाफ कार्रवाई की गई और उन्हें जेल भेजा गया।

    इसी तरह रन्नौद तहसील की अकोदा राशन दुकान में भी वितरण व्यवस्था में गड़बड़ी सामने आने के बाद विक्रेता गोलू लोधी पर कार्रवाई की गई। पिछोर क्षेत्र में भी निवोदा के पुष्पेंद्र सिनावलकलां के भगवानलाल और बघावारा के सतेंद्र के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई। इन मामलों में भी आरोपित विक्रेताओं को जेल भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई।

    कलेक्टर ने अधिकारियों को जिले की सभी उचित मूल्य दुकानों का मौके पर जाकर निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि पीओएस मशीन में दर्ज खाद्यान्न और वास्तव में हितग्राहियों को वितरित किए गए राशन में किसी तरह का अंतर नहीं होना चाहिए। पात्र लोगों को समय पर उनका राशन मिले और वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे इस पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने साफ संकेत दिया है कि राशन वितरण में अनियमितता मिलने पर जांच के बाद जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • आरबीआई के कदमों से भारत का भुगतान संतुलन मजबूत, वित्त वर्ष 2027 में 75 अरब डॉलर तक अधिशेष का अनुमान

    आरबीआई के कदमों से भारत का भुगतान संतुलन मजबूत, वित्त वर्ष 2027 में 75 अरब डॉलर तक अधिशेष का अनुमान

    नई दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने और घरेलू मुद्रा पर दबाव कम करने के लिए उठाए गए कदमों का असर भारत की बाहरी आर्थिक स्थिति पर दिखाई दे सकता है। एक रिपोर्ट के अनुमान के मुताबिक वित्त वर्ष 2026-27 में देश का भुगतान संतुलन यानी बैलेंस ऑफ पेमेंट 65 से 75 अरब डॉलर के अधिशेष में रह सकता है।

    रिपोर्ट के अनुसार सेवा निर्यात और विदेशों से आने वाली रेमिटेंस में मजबूती भारत के चालू खाते को सहारा देगी। इसके चलते वित्त वर्ष 2027 में चालू खाता घाटा सकल घरेलू उत्पाद के करीब 1 से 1.25 प्रतिशत के दायरे में रहने का अनुमान है। इससे बाहरी क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

    विदेशी मुद्रा को देश में आकर्षित करने के लिए आरबीआई ने कई योजनाएं शुरू की हैं। इन उपायों के तहत कुल 136.4 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा प्रवाह आने का अनुमान है। इस बढ़े हुए प्रवाह ने देश के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने के साथ रुपये के अवमूल्यन पर दबाव कम करने में भी मदद की है।

    भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों की बढ़ोतरी महत्वपूर्ण रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में 47.9 अरब डॉलर की वृद्धि हुई और देश का कुल विदेशी मुद्रा भंडार 729.3 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया।

    आरबीआई की ओर से जून में शुरू की गई विदेशी मुद्रा आकर्षित करने वाली योजनाओं में एफसीएनआर यानी विदेशी मुद्रा अनिवासी बैंक जमा की अहम भूमिका रही। इन जमा के जरिए करीब 127.2 अरब डॉलर जुटाए गए, जो कुल विदेशी मुद्रा प्रवाह का 90 प्रतिशत से अधिक है।

    इसके अलावा विदेशी मुद्रा में विदेशी कर्ज यानी ओएफसीबी के माध्यम से करीब 5.3 अरब डॉलर और बाह्य वाणिज्यिक उधारी यानी ईसीबी के जरिए 3.9 अरब डॉलर जुटाए गए। इस तरह विदेशी मुद्रा जुटाने के अलग-अलग माध्यमों ने देश की बाहरी वित्तीय स्थिति को मजबूत करने में योगदान दिया।

    एफसीएनआर जमा को आकर्षक बनाने के लिए कई बैंकों ने तीन से पांच वर्ष की अवधि वाली जमा पर ब्याज दरों में भी बढ़ोतरी की। इन दरों को करीब 2 से 4 प्रतिशत के स्तर से बढ़ाकर 6 से 7 प्रतिशत तक किया गया। इससे एनआरआई के लिए भारत में विदेशी मुद्रा जमा रखने की आकर्षकता बढ़ी और बैंकों को अतिरिक्त विदेशी मुद्रा जुटाने में मदद मिली।

    आरबीआई ने बाजार में अतिरिक्त तरलता को नियंत्रित करने के लिए भी कदम उठाए हैं। इसके तहत 6 अगस्त से 2 सितंबर के बीच कुल 53.5 लाख करोड़ रुपये की वीआरआरआर यानी वैरिएबल रेट रिवर्स रेपो नीलामियों की घोषणा की गई। इसका उद्देश्य बैंकिंग प्रणाली में मौजूद अतिरिक्त नकदी का प्रबंधन करना है।

    इन उपायों की पृष्ठभूमि में बाहरी क्षेत्र पर बढ़े दबाव को भी देखा जा सकता है। मध्य पूर्व में संघर्ष और उससे जुड़े घटनाक्रम के कारण तेल की कीमतों में बढ़ोतरी तथा विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की निकासी ने भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने चुनौतियां बढ़ाई थीं। महंगे तेल से आयात बिल बढ़ने और डॉलर की मांग बढ़ने के कारण रुपये पर दबाव बना था।

    हालांकि रिपोर्ट का आकलन है कि मजबूत सेवा निर्यात, रेमिटेंस और विदेशी मुद्रा प्रवाह ने भारत को इन बाहरी झटकों से निपटने के लिए पहले की तुलना में बेहतर स्थिति में पहुंचाया है। रिपोर्ट के मुताबिक मध्य पूर्व की स्थिति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, लेकिन विदेशी मुद्रा भंडार और बाहरी वित्तीय स्थिति में सुधार से भारतीय अर्थव्यवस्था की लचीलापन क्षमता मजबूत हुई है।

  • शिवपुरी में मानसून फिर मेहरबान दोपहर से रुक-रुककर बारिश जारी औसत बारिश का आंकड़ा पहुंचा इतने करीब

    शिवपुरी में मानसून फिर मेहरबान दोपहर से रुक-रुककर बारिश जारी औसत बारिश का आंकड़ा पहुंचा इतने करीब


    शिवपुरी । शिवपुरी में शुक्रवार को एक बार फिर मौसम ने करवट ली और दोपहर बाद बारिश का दौर शुरू हो गया। आसमान में बादल छाने के बाद दोपहर से रुक-रुककर बारिश होती रही। देर शाम तक कई इलाकों में बूंदाबांदी और बारिश का सिलसिला जारी रहा। लगातार बदलते मौसम के बीच शहरवासियों को उमस और गर्मी से राहत मिली। शिवपुरी में फिलहाल मानसून सक्रिय बना हुआ है और मौसम विभाग के पूर्वानुमान में भी आने वाले दिनों में बारिश की संभावना बनी हुई है।

    बारिश शुरू होने के साथ ही शहर का मौसम सुहाना हो गया। दोपहर में अचानक बादल घिरने के बाद बारिश हुई और इसके बाद कुछ समय के अंतराल पर फिर पानी बरसता रहा। बारिश की वजह से सड़कों पर भी नमी बढ़ गई और मौसम में ठंडक महसूस की गई। शिवपुरी में शुक्रवार को तापमान भी अपेक्षाकृत कम रहा। मौसम संबंधी ताजा जानकारी के मुताबिक दिन का अधिकतम तापमान करीब 26 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया गया जबकि न्यूनतम तापमान 24 डिग्री के करीब रहने का अनुमान है।

    इस बारिश को सितंबर में सक्रिय हुए मानसूनी सिस्टम से जोड़कर देखा जा रहा है। मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में इस समय बारिश का दौर बना हुआ है। मौसम विभाग से जुड़े पूर्वानुमानों के अनुसार 4 और 5 सितंबर को प्रदेश के पश्चिमी हिस्सों में बारिश का असर बढ़ सकता है। भोपाल उज्जैन नर्मदापुरम और ग्वालियर चंबल समेत कई संभागों में तेज बारिश की संभावना जताई गई है।

    शिवपुरी में इस सीजन अब तक औसत बारिश का आंकड़ा भी लगातार बढ़ा है। उपलब्ध स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार जिले में जून से अब तक 600 मिलीमीटर से ज्यादा औसत वर्षा दर्ज की जा चुकी है। एक स्थानीय अपडेट में यह आंकड़ा 606.52 मिलीमीटर बताया गया है। वहीं बाद के अपडेट में कुल वर्षा 626.90 मिलीमीटर तक पहुंचने का उल्लेख है। इससे साफ है कि सितंबर की बारिश ने जिले के कुल वर्षा आंकड़े में भी इजाफा किया है।

    बारिश के बीच किसानों की नजर भी मौसम पर बनी हुई है। ग्रामीण इलाकों में लगातार हो रही बारिश खेती के लिए अहम मानी जा रही है हालांकि ज्यादा बारिश होने पर खेतों में जलभराव और फसलों को नुकसान का खतरा भी बढ़ सकता है। शहर में भी निचले इलाकों और खराब जल निकासी वाले रास्तों पर बारिश का पानी जमा होने की स्थिति बन सकती है।

    फिलहाल शिवपुरी में बारिश का दौर पूरी तरह थमता नजर नहीं आ रहा है। मौसम विभाग के अनुसार शनिवार को भी बारिश की संभावना है जबकि रविवार को भी शिवपुरी में बारिश का पूर्वानुमान है। ऐसे में अगले दो दिनों तक जिले में बादल और बारिश का असर बना रह सकता है।

  • नेपाल में फिर बाढ़ का खतरा बढ़ा, त्रिशूली परियोजना के लापता कर्मियों की तलाश में भारतीय और नेपाली दल जुटे

    नेपाल में फिर बाढ़ का खतरा बढ़ा, त्रिशूली परियोजना के लापता कर्मियों की तलाश में भारतीय और नेपाली दल जुटे

    नई दिल्ली ।नेपाल में आई भीषण बाढ़ और अचानक आई जल आपदा के बाद हालात अब भी बेहद चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान जारी है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार गुरुवार तक मृतकों की संख्या बढ़कर 1252 हो गई और करीब 5083 लोगों के लापता होने का अनुमान है। शव नहीं मिलने या पहचान नहीं होने के कारण कई परिवार प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार भी कर रहे हैं।

    त्रिशूली पावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले कई कर्मचारी भी बाढ़ के बाद से लापता बताए जा रहे हैं। इसी बीच परियोजना में काम करने वाले एक कर्मचारी ने आरोप लगाया कि बाढ़ आने से पहले चीन की कंपनी के एक सुपरवाइजर ने 265 कर्मचारियों को सुरंग के भीतर छोड़ दिया और खुद बाहर निकल गया।

    कर्मी के अनुसार सुरंग के अंदर मौजूद मजदूरों ने एक तेज आवाज सुनी थी। इसके बाद उन्होंने अपने सुपरवाइजर से सुरंग से बाहर निकलने की अनुमति मांगी थी। इस घटना से परियोजना में काम कर रहे लोगों की सुरक्षा और आपदा के समय प्रबंधन की तैयारियों को लेकर सवाल उठे हैं।

    लापता लोगों की तलाश में भारत भी नेपाल की मदद कर रहा है। भारतीय सुरंग बचाव दल नेपाली सेना के साथ मिलकर चिलिमे पावर हाउस में बचाव अभियान चला रहा है। भारतीय दूत ने स्याब्रूबेसी स्थित भारतीय टनल बचाव दल के आधार शिविर का दौरा किया और अभियान की प्रगति की जानकारी ली।

    बचाव दलों ने विशेष उपकरणों की मदद से सुरंग के भीतर करीब 100 मीटर तक का निरीक्षण किया है। अब सुरंग के और अंदर जाने के लिए भारी उपकरण लाने की तैयारी की जा रही है। कठिन परिस्थितियों के बावजूद भारतीय और नेपाली दल बचाव कार्य जारी रखे हुए हैं।

    इस बीच नेपाल के उत्तरी हिस्सों में एक बार फिर बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। भोटेकोशी नदी के ऊपरी इलाकों में लगातार बारिश होने के कारण जलस्तर बढ़ने की आशंका जताई गई है। इसका असर भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों के अलावा रसुवा और नुवाकोट जिलों से होकर बहने वाली छोटी नदियों और जलधाराओं पर भी पड़ सकता है।

    नेपाल में हालिया तबाही के बाद हिमनदों की स्थिति को लेकर भी चिंता बढ़ी है। तिब्बती पठार के ग्लेशियरों में बदलाव और उनके अस्थिर होने की आशंका को भविष्य में अचानक बाढ़ के संभावित कारणों से जोड़ा जा रहा है। पिछले कुछ दशकों में इस क्षेत्र के ग्लेशियरों में उल्लेखनीय कमी आने की बात भी सामने आई है।

    26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के आसपास चट्टानों के खिसकने या हिमस्खलन के कारण अचानक बाढ़ आई थी। इससे उत्तरी और मध्य नेपाल के कई कस्बों और गांवों में भारी नुकसान हुआ। मौजूदा परिस्थितियों में लगातार बारिश और बढ़ते जलस्तर ने प्रशासन की चिंता फिर बढ़ा दी है।

    राहत सामग्री के वितरण को व्यवस्थित करने के लिए नेपाल सरकार ने सिंगल विंडो व्यवस्था लागू की है। इसके तहत निजी संस्थाओं और सामाजिक संगठनों को नेपाल में राहत सामग्री सीधे भेजने या ले जाने से पहले अनुमति लेना जरूरी होगा। सीमा पर राहत सामग्री के लिए निर्धारित कस्टम प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही उसे आगे ले जाने की अनुमति दी जाएगी।

    बाढ़ के बाद जारी बचाव अभियान में भारत की सहायता से सुरंगों में फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। वहीं नेपाल में दोबारा बढ़ते जलस्तर और संभावित आपदा को देखते हुए स्थानीय प्रशासन तथा बचाव एजेंसियां सतर्क हैं। लगातार निगरानी, समय पर चेतावनी और प्रभावित क्षेत्रों तक राहत पहुंचाना फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता बनी हुई है।