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  • रूसी तेल खरीद पर जयशंकर का स्पष्ट रुख, बोले युद्ध ऊर्जा कारोबार से नहीं बल्कि संवाद और कूटनीति से खत्म होगा

    रूसी तेल खरीद पर जयशंकर का स्पष्ट रुख, बोले युद्ध ऊर्जा कारोबार से नहीं बल्कि संवाद और कूटनीति से खत्म होगा

    नई दिल्ली ।विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रूस से तेल खरीद के मुद्दे पर भारत का रुख एक बार फिर स्पष्ट करते हुए कहा है कि यूक्रेन युद्ध का समाधान किसी देश के तेल खरीदने या नहीं खरीदने से नहीं निकलेगा। उन्होंने कहा कि करीब पांचवें वर्ष में पहुंच चुका यह संघर्ष संवाद, कूटनीति और गंभीर बातचीत के जरिए ही समाप्त हो सकता है।

    कीव में गुरुवार को जयशंकर ने कहा कि भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा एक महत्वपूर्ण विषय है। करीब 1.4 अरब आबादी वाले देश के लिए पर्याप्त और सस्ती ऊर्जा उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन का अपना दृष्टिकोण है और भारत उसका सम्मान करता है, लेकिन युद्ध खत्म करने का रास्ता केवल तेल खरीदने या रोकने से नहीं निकल सकता।

    अमेरिका की ओर से रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर संभावित प्रतिबंध या अतिरिक्त शुल्क लगाए जाने के सवाल पर भी विदेश मंत्री ने भारत की स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि संघर्ष को समाप्त करने के लिए उन उपायों पर ध्यान देना जरूरी है, जो सीधे शांति और बातचीत की दिशा में आगे बढ़ते हों।

    जयशंकर ने कहा कि रूस से तेल, खनिज, धातु, एल्यूमिना या उर्वरक खरीदना अथवा नहीं खरीदना युद्ध का समाधान नहीं है। उनके मुताबिक वास्तविक समाधान बातचीत के जरिए ही संभव है और भारत दोनों पक्षों के बीच संवाद को प्रोत्साहित करने की अपनी नीति पर कायम है।

    रूस और यूक्रेन के बीच 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद से भारत की रूसी तेल खरीद को लेकर अमेरिका और यूरोपीय देशों की ओर से सवाल उठाए जाते रहे हैं। भारत ने लगातार कहा है कि उसकी प्राथमिकता अपने नागरिकों के लिए ऊर्जा की उपलब्धता और उचित कीमत सुनिश्चित करना है। वैश्विक ऊर्जा बाजार में बदलाव के बीच रूसी तेल भारत के लिए एक व्यावहारिक ऊर्जा विकल्प भी बना है।

    जयशंकर इन दिनों तीन दिवसीय यूक्रेन और पोलैंड यात्रा पर हैं। कीव में उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की और विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा से मुलाकात की। यात्रा का उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करना है।

    उन्होंने भारत की उस नीति को भी दोहराया कि यह युद्ध का युग नहीं है और किसी संघर्ष का स्थायी समाधान युद्ध के मैदान में नहीं खोजा जा सकता। भारत दोनों पक्षों के साथ संपर्क बनाए हुए है। जयशंकर ने हाल में मॉस्को में हुई उच्चस्तरीय बातचीत के बाद अब कीव में भी सीधे संवाद किया है।

    विदेश मंत्री ने हाल में कीव पर हुए हमले का उल्लेख करते हुए वहां हुई भारतीय नागरिक की मौत पर भी शोक जताया। उन्होंने कहा कि संघर्ष में जान गंवाने वाले सभी लोगों के परिवारों के प्रति भारत की संवेदनाएं हैं। इस घटना ने यूक्रेन में मौजूद भारतीय नागरिकों और वहां काम करने वाले लोगों की सुरक्षा के मुद्दे को भी महत्वपूर्ण बना दिया है।

    जयशंकर ने यूक्रेनी विदेश मंत्री के साथ बातचीत में काला सागर में वाणिज्यिक जहाजों पर हो रहे हमलों और भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि भारतीय नाविक विभिन्न देशों के जहाजों पर काम करते हैं और ऐसे हमलों से उनकी सुरक्षा प्रभावित होती है।

    भारत ने काला सागर में नागरिक और व्यावसायिक जहाजों पर किसी भी पक्ष की ओर से किए जाने वाले हमलों को अस्वीकार्य बताया है। समुद्री मार्ग बाधित होने से ईंधन, उर्वरक और खाद्य सामग्री की आपूर्ति पर भी असर पड़ सकता है। भारत का जोर इसलिए युद्धविराम, संवाद और कूटनीतिक समाधान के साथ नागरिकों तथा वैश्विक व्यापार मार्गों की सुरक्षा पर भी बना हुआ है।

  • Jio IPO कब आएगा? अक्टूबर के अंत या नवंबर में 37,800 करोड़ रुपये के इश्यू की तैयारी, बन सकता है सबसे बड़ा आईपीओ

    Jio IPO कब आएगा? अक्टूबर के अंत या नवंबर में 37,800 करोड़ रुपये के इश्यू की तैयारी, बन सकता है सबसे बड़ा आईपीओ

    नई दिल्ली ।रिलायंस इंडस्ट्रीज के टेलीकॉम और डिजिटल कारोबार से जुड़ी कंपनी Jio Platforms के प्रस्तावित आईपीओ को लेकर निवेशकों की नजर अब इसकी संभावित लॉन्च तारीख पर है। कंपनी करीब 4 अरब डॉलर यानी लगभग 37,800 करोड़ रुपये का सार्वजनिक निर्गम ला सकती है। यदि यह इश्यू तय योजना के मुताबिक बाजार में आता है, तो यह भारतीय शेयर बाजार का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ बन सकता है।

    कंपनी के आईपीओ के अक्टूबर के अंत या नवंबर की शुरुआत में आने की संभावना जताई जा रही है। संभावित समय को लेकर नवरात्रि और दिवाली के आसपास का दौर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नवरात्रि 11 से 20 अक्टूबर तक है, जबकि दिवाली 8 नवंबर को मनाई जाएगी। हालांकि अंतिम तारीख की औपचारिक घोषणा अभी बाकी है।

    कंपनी की ओर से आईपीओ की तारीख तय होने के बाद निवेशकों तक पहुंच बनाने के लिए रोड शो और प्रचार अभियान शुरू किए जाने की योजना है। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार विदेशों में करीब तीन सप्ताह और भारत में लगभग दो सप्ताह तक रोड शो आयोजित किए जा सकते हैं। तारीख जल्दी तय होने पर विदेश और घरेलू निवेशकों के साथ बातचीत का अभियान भी जल्द शुरू हो सकता है।

    Jio Platforms ने आईपीओ की दिशा में महत्वपूर्ण नियामकीय प्रक्रिया पूरी कर ली है। कंपनी ने जून में ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस यानी DRHP दाखिल किया था। इसके बाद 28 अगस्त को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी सेबी से आईपीओ को मंजूरी मिल गई। इससे कंपनी के लिए सार्वजनिक निर्गम की राह आगे बढ़ी है।

    प्रस्तावित आईपीओ का आकार करीब 37,800 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। यह रकम जुटने पर Jio का इश्यू अब तक के सबसे बड़े आईपीओ का रिकॉर्ड अपने नाम कर सकता है। फिलहाल पूरा हो चुका सबसे बड़ा आईपीओ हुंडई मोटर इंडिया का करीब 27,000 करोड़ रुपये का है। वहीं राष्ट्रीय शेयर बाजार यानी NSE का लगभग 31,000 करोड़ रुपये का आईपीओ अभी बाजार में आना बाकी है।

    Jio Platforms के प्रस्तावित इश्यू में करीब 27 करोड़ नए शेयर जारी किए जाएंगे। यह कंपनी की कुल हिस्सेदारी का लगभग 2.9 प्रतिशत हिस्सा होगा। खास बात यह है कि इस आईपीओ में मौजूदा शेयरधारकों की ओर से Offer for Sale यानी OFS के जरिए शेयर बेचने का प्रस्ताव नहीं है।

    यह रिलायंस समूह से करीब दो दशक बाद आने वाला बड़ा आईपीओ भी होगा। इससे पहले 2006 में रिलायंस पेट्रोलियम का आईपीओ आया था। ऐसे में Jio का सार्वजनिक निर्गम समूह और भारतीय पूंजी बाजार दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    आईपीओ से जुटाई जाने वाली रकम का बड़ा हिस्सा कर्ज चुकाने में इस्तेमाल किया जाएगा। प्रस्तावित योजना के अनुसार करीब 27,500 करोड़ रुपये Jio की ऑपरेटिंग कंपनी रिलायंस जियो इन्फोकॉम यानी RJIL के कर्ज को समय से पहले चुकाने के लिए लगाए जा सकते हैं। शेष राशि का इस्तेमाल कंपनी की अन्य जरूरतों के लिए किया जाएगा।

    Jio Platforms अपनी सहायक कंपनी RJIL को जरूरत के अनुसार शेयर, प्रेफरेंस शेयर, डिबेंचर या कर्ज के माध्यम से भी वित्तीय सहायता उपलब्ध करा सकती है। इससे आईपीओ से मिलने वाली पूंजी का उपयोग समूह के टेलीकॉम कारोबार की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने में भी किया जा सकता है।

    Jio Platforms में कई बड़े वैश्विक निवेशकों की हिस्सेदारी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्रमुख निवेशकों के पास कंपनी की करीब 30.9 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इनमें मेटा से जुड़ी जाधू होल्डिंग्स की लगभग 9.98 प्रतिशत और गूगल इंटरनेशनल की करीब 7.73 प्रतिशत हिस्सेदारी शामिल है।

    इसके अलावा सऊदी अरब का पब्लिक इन्वेस्टमेंट फंड, सिल्वर लेक, विस्टा इक्विटी, जनरल अटलांटिक, केकेआर और अबू धाबी की निवेश एजेंसी ADIA भी Jio Platforms में निवेश कर चुके हैं। प्रस्तावित आईपीओ के आकार और वैश्विक निवेशकों की मौजूदगी के कारण बाजार में इसकी लॉन्चिंग को लेकर खास दिलचस्पी बनी हुई है।

  • यूनिसेफ की रिपोर्ट में खुलासा, एक साल में करीब दो करोड़ बच्चों ने ऑनलाइन यौन शोषण का सामना किया

    यूनिसेफ की रिपोर्ट में खुलासा, एक साल में करीब दो करोड़ बच्चों ने ऑनलाइन यौन शोषण का सामना किया

    नई दिल्ली ।इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल के बीच बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता सामने आई है। संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार बीते एक साल में दुनियाभर के करीब दो करोड़ बच्चों को ऑनलाइन यौन शोषण या उससे जुड़े अनुचित व्यवहार का सामना करना पड़ा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वास्तविक आंकड़ा इससे कहीं अधिक हो सकता है।

    यह रिपोर्ट 21 देशों में इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले करीब 21 हजार बच्चों से जुटाए गए सर्वे पर आधारित है। इसके लिए 2020 से 2025 के बीच जानकारी एकत्र की गई। अध्ययन में ब्राजील और पाकिस्तान समेत कई देश शामिल रहे। केन्या और सर्बिया भी सर्वे का हिस्सा थे, जबकि भारत को इस अध्ययन में शामिल नहीं किया गया।

    रिपोर्ट के मुताबिक 12 से 17 वर्ष की उम्र के करीब 1.5 करोड़ बच्चे अनचाहे और आपत्तिजनक यौन कंटेंट के संपर्क में आए। वहीं लगभग 90 लाख बच्चों ने ऐसी यौन प्रकृति की बातचीत या संपर्क के लिए दबाव का सामना करने की जानकारी दी।

    डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होने वाले गलत व्यवहार में सोशल मीडिया की भूमिका प्रमुख रही। रिपोर्ट में सामने आया कि दर्ज किए गए ऐसे व्यवहारों में लगभग 60 प्रतिशत मामले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हुए। इनमें फेसबुक, व्हाट्सऐप, इंस्टाग्राम और स्नैपचैट जैसे प्लेटफॉर्म शामिल रहे।

    ऑनलाइन गेमिंग भी बच्चों के लिए जोखिम का एक क्षेत्र सामने आया। रिपोर्ट के अनुसार करीब 14 प्रतिशत गलत व्यवहार के मामले ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े थे। इससे संकेत मिलता है कि बच्चों की डिजिटल सुरक्षा के लिए केवल सोशल मीडिया पर निगरानी पर्याप्त नहीं है, बल्कि अलग-अलग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर सुरक्षा उपायों की जरूरत है।

    रिपोर्ट में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। बच्चों के ऑनलाइन यौन उत्पीड़न से जुड़े आधे से अधिक मामलों में कथित रूप से ऐसा व्यक्ति शामिल था, जिसे बच्चा पहले से जानता था। इनमें दोस्त, रिश्तेदार या पार्टनर जैसे लोग शामिल थे। यानी बच्चों के लिए ऑनलाइन खतरा हमेशा किसी अनजान व्यक्ति से ही नहीं आता।

    अध्ययन के अनुसार करीब 38 प्रतिशत बच्चों ने बताया कि वे पहली बार ऑनलाइन इस तरह की यौन गतिविधि या उत्पीड़न के शिकार हुए। अफ्रीका, एशिया, लैटिन अमेरिका और पूर्वी यूरोप के सर्वेक्षण वाले देशों में 12 से 17 वर्ष की उम्र के पांच में से एक से अधिक बच्चों ने ऑनलाइन यौन शोषण के कम से कम एक रूप का अनुभव बताया।

    रिपोर्ट में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई से जुड़े खतरे को लेकर भी चिंता जताई गई है। नौ देशों से जुटाए गए आंकड़ों में अनुमानित 11 लाख बच्चों ने बताया कि उनकी एआई से तैयार की गई आपत्तिजनक तस्वीरें या वीडियो बनाए गए थे। ऐसे अनुभवों से बच्चों में चिंता और मानसिक दबाव का स्तर भी बढ़ा हुआ पाया गया।

    डिजिटल प्लेटफॉर्म संचालित करने वाली कंपनियों की ओर से सुरक्षा उपायों में सुधार किए जाने की बात कही गई है। किशोरों के अकाउंट को अधिक निजी बनाने और वयस्कों के लिए किशोरों को संदेश भेजने की क्षमता सीमित करने जैसे कदम उठाए गए हैं। हालांकि बच्चों के ऑनलाइन शोषण के सामने आए आंकड़े लगातार सतर्कता की जरूरत बताते हैं।

    बच्चों को डिजिटल खतरों की जानकारी देने के साथ अभिभावकों और स्कूलों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। बच्चों को अनचाहे संपर्क, आपत्तिजनक सामग्री और दबाव वाली बातचीत की पहचान करने के बारे में जागरूक करना जरूरी है। किसी संदिग्ध स्थिति में भरोसेमंद व्यक्ति से मदद लेने की जानकारी भी उन्हें दी जानी चाहिए।

    रिपोर्ट से यह स्पष्ट होता है कि इंटरनेट पर बच्चों की सुरक्षा एक व्यापक चुनौती बन चुकी है। सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेमिंग और एआई आधारित सामग्री के बढ़ते इस्तेमाल के बीच तकनीकी सुरक्षा, जागरूकता और प्रभावी निगरानी को साथ लेकर चलना जरूरी है।

  • नेपाल बाढ़ के बाद हिमालयी राज्यों में ग्लेशियल झीलों और हिमस्खलन के खतरे पर केंद्र सरकार ने तैयारियां तेज कीं

    नेपाल बाढ़ के बाद हिमालयी राज्यों में ग्लेशियल झीलों और हिमस्खलन के खतरे पर केंद्र सरकार ने तैयारियां तेज कीं

    नई दिल्ली ।नेपाल में पिछले सप्ताह आई भयावह बाढ़ के बाद भारत सरकार ने हिमालयी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में संभावित प्राकृतिक आपदाओं को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। ग्लेशियल झीलों के फटने से आने वाली बाढ़ और हिमस्खलन के खतरे को देखते हुए केंद्र ने बचाव और तैयारी की मौजूदा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की है।

    गुरुवार को केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक हुई। इसमें हिमालयी क्षेत्रों में मौजूद संवेदनशील स्थानों की पहचान, निगरानी व्यवस्था और किसी संभावित आपदा से पहले चेतावनी जारी करने के उपायों पर चर्चा की गई।

    बैठक में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिवों तथा संबंधित राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इसके अलावा केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों और वैज्ञानिक संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी तैयारियों की जानकारी साझा की।

    ग्लेशियल झीलों की लगातार निगरानी को बैठक में प्रमुख प्राथमिकता के तौर पर रखा गया। अधिकारियों से संवेदनशील ग्लेशियल झीलों और बर्फ से ढके क्षेत्रों पर लगातार नजर रखने को कहा गया, ताकि वहां होने वाले बदलावों का समय रहते पता लगाया जा सके।

    हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियल झीलों के फटने से अचानक बड़ी मात्रा में पानी नीचे की ओर आने का खतरा रहता है। ऐसे में प्रभावित होने वाले संभावित क्षेत्रों और पानी के प्रवाह के रास्तों की पहले से पहचान करना आपदा प्रबंधन की तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया।

    बैठक में अत्यधिक जोखिम वाले स्थानों को चिह्नित करने और संभावित जलप्रवाह मार्गों का निर्धारण करने पर भी जोर दिया गया। इसका उद्देश्य खतरे की स्थिति में संबंधित प्रशासन को समय रहते सूचना देना और प्रभावित आबादी को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की कार्रवाई शुरू करना है।

    केंद्रीय गृह सचिव ने जोखिम बढ़ने की स्थिति में संवेदनशील ग्लेशियल झीलों और हिमस्खलन संभावित क्षेत्रों की सक्रिय निगरानी को जरूरी बताया। समय पर चेतावनी मिलने से प्रशासन को राहत और बचाव के लिए आवश्यक संसाधन जुटाने तथा निकासी की प्रक्रिया शुरू करने का अवसर मिल सकता है।

    बैठक में राज्यों ने अपने-अपने क्षेत्रों में आपदा से निपटने की तैयारियों और रणनीतियों की जानकारी दी। इसके बाद राज्य एजेंसियों, जिला प्रशासन तथा वैज्ञानिक और तकनीकी संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि संभावित ग्लेशियल झील विस्फोट या हिमस्खलन जैसी घटनाओं से निपटने की तैयारी केवल आपदा आने के बाद राहत और बचाव तक सीमित नहीं होनी चाहिए। जोखिम की पहले पहचान, निवारक कदम और स्थानीय समुदायों की तैयारी को भी योजना का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।

    राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को अपनी आपदा प्रबंधन तैयारियों की नियमित समीक्षा करने की सलाह दी गई। साथ ही प्रारंभिक चेतावनी और निकासी व्यवस्था में मौजूद कमियों को पहचानकर उनमें समय रहते सुधार करने को कहा गया।

    इस पूरी कवायद का उद्देश्य हिमालयी क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं के संभावित प्रभाव को कम करना और प्रशासन की प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करना है। खास तौर पर संवेदनशील इलाकों में निगरानी, चेतावनी और स्थानीय स्तर पर समन्वित कार्रवाई को मजबूत करने पर ध्यान दिया जा रहा है।

  • शर्मिला टैगोर की टिप्पणी पर मुकेश खन्ना की प्रतिक्रिया, वंदे मातरम को लेकर धार्मिक स्वीकार्यता के तर्क पर जताई असहमति

    शर्मिला टैगोर की टिप्पणी पर मुकेश खन्ना की प्रतिक्रिया, वंदे मातरम को लेकर धार्मिक स्वीकार्यता के तर्क पर जताई असहमति

    नई दिल्ली ।वंदे मातरम को लेकर जारी बहस के बीच अभिनेता मुकेश खन्ना ने अभिनेत्री शर्मिला टैगोर के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कई सवाल उठाए हैं। खन्ना ने कहा कि दूसरे धर्मों से जुड़ी चिंताओं के आधार पर वंदे मातरम को देखने का नजरिया प्रभावित नहीं होना चाहिए। उन्होंने इस मुद्दे को धर्म, आस्था और राष्ट्र सम्मान से जोड़ते हुए अपनी स्पष्ट राय रखी।

    शर्मिला टैगोर ने वंदे मातरम को लेकर अपनी बात रखते हुए कहा था कि कुछ अन्य धर्मों के लोगों के लिए इसके धार्मिक संदर्भों को स्वीकार करना कठिन हो सकता है। इसी टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए मुकेश खन्ना ने कहा कि वह उनकी व्यक्तिगत समझ या दृष्टिकोण हो सकता है, लेकिन उन्हें यह समझ नहीं आता कि दूसरे धर्मों की चिंताओं को इस गीत के संदर्भ में प्रमुखता क्यों दी जानी चाहिए।

    खन्ना ने शर्मिला टैगोर की पारिवारिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि का भी उल्लेख किया। उन्होंने उनके पटौदी परिवार में विवाह और इस्लामी पहचान से जुड़े संदर्भों को सामने रखते हुए सवाल किया कि लंबे समय तक भारतीय और बंगाली सांस्कृतिक परिवेश में रहने के बाद अब वंदे मातरम को लेकर दूसरे धर्मों की स्वीकार्यता का मुद्दा क्यों उठाया जा रहा है।

    उन्होंने शर्मिला टैगोर के बंगाली परिवेश का भी जिक्र किया। खन्ना के अनुसार वह बंगाल में पली-बढ़ी हैं, जहां धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का सार्वजनिक जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है। उन्होंने उनके बंगाली सिनेमा से जुड़े करियर का उल्लेख करते हुए पूछा कि वंदे मातरम के संदर्भ में धार्मिक स्वीकार्यता को लेकर यह चिंता अब क्यों सामने आ रही है।

    मुकेश खन्ना ने अपनी धार्मिक समझ बताते हुए कहा कि हिंदू परंपरा में ईश्वर को निराकार माना जाता है और अलग-अलग देवी-देवताओं के माध्यम से उसी परम सत्ता की आराधना की जाती है। उन्होंने हनुमान, शिव, राम और कृष्ण जैसे आराध्य रूपों का उदाहरण देते हुए अपनी बात रखी।

    उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोगों की धार्मिक मान्यता उन्हें केवल अपने ईश्वर के सामने झुकने की अनुमति देती है। खन्ना ने इस दृष्टिकोण को वंदे मातरम को लेकर उठने वाली आपत्तियों से जोड़कर अपनी असहमति जाहिर की।

    हालांकि, मुकेश खन्ना ने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति को शारीरिक रूप से सिर झुकाने या किसी विशेष तरीके से सम्मान व्यक्त करने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार भारत माता के सामने सिर झुकाना उनकी अपनी आस्था और राष्ट्र के प्रति सम्मान का तरीका है, लेकिन किसी दूसरे व्यक्ति पर ऐसा करने के लिए दबाव नहीं होना चाहिए।

    खन्ना ने वंदे मातरम के गायन को लेकर भी सवाल उठाया। उनका कहना था कि किसी व्यक्ति का इसे नहीं गाना अलग बात है, लेकिन पूरे गीत के गायन पर ही आपत्ति जताना उनकी समझ से बाहर है। उन्होंने इस बहस को राजनीतिक दृष्टिकोण से भी जोड़ते हुए शर्मिला टैगोर की मंशा पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि कुछ लोग मुस्लिम समुदाय के समर्थन को ध्यान में रखकर अपनी स्थिति रखते हैं।

    वंदे मातरम भारत के स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रीय चेतना से लंबे समय से जुड़ा रहा है। इसी कारण इसके धार्मिक और सांस्कृतिक संदर्भों को लेकर समय-समय पर बहस होती रही है। मुकेश खन्ना की टिप्पणी ने इस पुराने मुद्दे को एक बार फिर मनोरंजन जगत के चर्चित चेहरों के बीच सार्वजनिक बहस का विषय बना दिया है।

  • ऋषि कपूर जयंती: बॉबी से अग्निपथ तक उनके ये यादगार किरदार आज भी दर्शकों के बीच खास पहचान रखते हैं

    ऋषि कपूर जयंती: बॉबी से अग्निपथ तक उनके ये यादगार किरदार आज भी दर्शकों के बीच खास पहचान रखते हैं

    नई दिल्ली ।हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता ऋषि कपूर की जयंती पर उनके शानदार फिल्मी सफर और यादगार किरदार एक बार फिर चर्चा में हैं। 4 सितंबर 1952 को मुंबई के चेंबूर में जन्मे ऋषि कपूर ने बेहद कम उम्र में कैमरे का सामना किया था। 1970 में आई फिल्म मेरा नाम जोकर में उन्होंने अपने पिता राज कपूर के बचपन की भूमिका निभाई थी।

    बतौर मुख्य अभिनेता ऋषि कपूर ने 1973 में फिल्म बॉबी से शुरुआत की। इस फिल्म में उन्होंने राजनाथ का किरदार निभाया था और डिंपल कपाड़िया उनके साथ मुख्य भूमिका में थीं। फिल्म की सफलता ने ऋषि कपूर को युवा दर्शकों के बीच लोकप्रिय बना दिया। उनकी मासूम प्रेमी वाली छवि लंबे समय तक हिंदी सिनेमा में उनकी पहचान बनी रही।

    इसके बाद 1976 में आई लैला मजनू में उन्होंने मजनू की भूमिका निभाकर रोमांटिक अभिनय का एक और प्रभावशाली उदाहरण पेश किया। प्रेम और विरह से जुड़े इस किरदार में उनकी भावनात्मक प्रस्तुति दर्शकों को पसंद आई और उनके करियर को मजबूती मिली।

    1977 की अमर अकबर एंथनी में ऋषि कपूर ने अकबर इलाहाबादी का किरदार निभाया। अमिताभ बच्चन और विनोद खन्ना के साथ वाली इस फिल्म में उनका अंदाज अलग था। नीतू सिंह के साथ उनकी जोड़ी को भी दर्शकों ने खूब पसंद किया।

    1982 में आई प्रेम रोग ऋषि कपूर के करियर की महत्वपूर्ण फिल्मों में शामिल रही। फिल्म में उन्होंने देवधर की भूमिका निभाई। सामाजिक विषय से जुड़ी इस कहानी में उनके अभिनय ने यह दिखाया कि वह केवल रोमांटिक भूमिकाओं तक सीमित अभिनेता नहीं थे।

    समय के साथ ऋषि कपूर ने अपनी छवि बदलने की कोशिश की। 2009 की लव आज कल में उन्होंने वीर सिंह का किरदार निभाया। फिल्म में उनका सरदार वाला रूप और उम्रदराज प्रेम कहानी का हिस्सा दर्शकों के सामने उनके अभिनय का अलग पक्ष लेकर आया।

    2012 की अग्निपथ में ऋषि कपूर ने राउफ लाला का नकारात्मक किरदार निभाया। यह उनके करियर के सबसे चर्चित बदलावों में से एक था। पर्दे पर पहली बार खलनायक की भूमिका में उनका अंदाज काफी प्रभावशाली रहा और उन्होंने साबित किया कि उम्र के साथ अभिनेता अपनी स्क्रीन पहचान को पूरी तरह बदल सकता है।

    2013 में डी-डे में उन्होंने इकबाल नामक माफिया डॉन का किरदार निभाया। इस भूमिका में उनका गंभीर और कठोर रूप देखने को मिला। इसके बाद 2016 की कपूर एंड संस में उन्होंने 90 वर्षीय दादा अमरजीत की भूमिका निभाई और अपने मेकअप तथा अभिनय से दर्शकों को प्रभावित किया।

    2018 में 102 नॉट आउट में उन्होंने 75 वर्षीय बेटे बाबूलाल की भूमिका निभाई, जबकि अमिताभ बच्चन उनके 102 वर्षीय पिता बने। इसी वर्ष मुल्क में मुराद अली मोहम्मद के रूप में ऋषि कपूर ने एक संवेदनशील और गंभीर किरदार निभाया।

    ऋषि कपूर का निधन 30 अप्रैल 2020 को हुआ, लेकिन उनके अभिनय की विविधता आज भी उन्हें हिंदी सिनेमा के यादगार कलाकारों में बनाए हुए है। उनकी जयंती पर उनके किरदार यह याद दिलाते हैं कि उन्होंने अपने करियर में लगातार अलग-अलग भूमिकाओं को अपनाकर अभिनय की व्यापक क्षमता दिखाई।

  • आज का राशिफल: 4 सितंबर को चमकेगा इन राशियों का भाग्य, करियर और रिश्तों में आएंगे बड़े बदलाव

    आज का राशिफल: 4 सितंबर को चमकेगा इन राशियों का भाग्य, करियर और रिश्तों में आएंगे बड़े बदलाव


    नई दिल्ली। आज 4 सितंबर का दिन ग्रह नक्षत्रों की चाल के अनुसार सभी 12 राशियों के जीवन में अलग अलग प्रभाव लेकर आया है। किसी राशि के लिए यह दिन नई सफलता और आर्थिक लाभ के अवसर ला सकता है तो कुछ लोगों को अपने फैसलों में धैर्य और सावधानी रखने की जरूरत होगी। कार्यक्षेत्र कारोबार परिवार और स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में आज का दिन कई महत्वपूर्ण संकेत दे रहा है।

    मेष राशि के जातकों के लिए आज का दिन उत्साह और आत्मविश्वास से भरा रह सकता है। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत का असर दिखाई देगा और किसी महत्वपूर्ण काम में सफलता मिल सकती है। कारोबार से जुड़े लोगों को नए अवसर मिल सकते हैं। परिवार के सदस्यों का सहयोग मनोबल बढ़ाएगा लेकिन जल्दबाजी में कोई बड़ा फैसला लेने से बचना बेहतर रहेगा।

    वृषभ राशि वालों को आज आर्थिक मामलों में समझदारी से कदम बढ़ाने की जरूरत होगी। धन लाभ के योग बन सकते हैं लेकिन अनावश्यक खर्च बढ़ने की संभावना भी रहेगी। नौकरी करने वाले लोगों को जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। परिवार में किसी विषय पर चर्चा हो सकती है इसलिए अपनी बात शांतिपूर्वक रखने का प्रयास करें।

    मिथुन राशि के लिए आज का दिन नई योजनाओं पर काम शुरू करने के लिए अच्छा साबित हो सकता है। आपकी बातचीत और समझदारी से कई रुके हुए काम आगे बढ़ सकते हैं। सामाजिक क्षेत्र में सम्मान बढ़ने की संभावना है। प्रेम संबंधों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही न करें।

    कर्क राशि के जातकों को आज भावनाओं में बहकर कोई निर्णय लेने से बचना चाहिए। कार्यक्षेत्र में धैर्य रखने से परिस्थितियां आपके पक्ष में आ सकती हैं। परिवार के किसी सदस्य से महत्वपूर्ण सहयोग मिल सकता है। आर्थिक मामलों में संतुलन बनाए रखना जरूरी होगा। शाम के समय मन को शांति देने वाला कोई काम कर सकते हैं।

    सिंह राशि वालों के लिए आज का दिन प्रगति के संकेत लेकर आया है। करियर में नई जिम्मेदारी या अवसर मिल सकता है। व्यापार में लाभ की संभावना रहेगी। आपकी नेतृत्व क्षमता लोगों को प्रभावित कर सकती है। हालांकि किसी करीबी के साथ बातचीत में अहंकार को बीच में न आने दें।

    कन्या राशि के जातकों को आज अपने काम पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होगी। मेहनत के अच्छे परिणाम मिल सकते हैं और अधूरे कार्य पूरे होने की संभावना है। धन से जुड़े मामलों में सुधार देखने को मिल सकता है। परिवार में सुखद वातावरण रहेगा। स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए खानपान पर ध्यान दें।

    तुला राशि वालों के लिए आज का दिन रिश्तों और साझेदारी के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है। किसी पुराने विवाद का समाधान निकल सकता है। नौकरी और कारोबार में सहयोगियों का साथ मिलेगा। आर्थिक स्थिति सामान्य से बेहतर रह सकती है। जीवनसाथी के साथ समय बिताने का अवसर मिल सकता है।

    वृश्चिक राशि के जातकों को आज गुप्त शत्रुओं और अनावश्यक विवादों से सावधान रहने की जरूरत है। कामकाज में सफलता पाने के लिए मेहनत अधिक करनी पड़ सकती है। धन के मामले में सोच समझकर निवेश करें। परिवार का सहयोग मिलने से मानसिक तनाव कम हो सकता है।

    धनु राशि के लिए आज का दिन नई उम्मीदें लेकर आ सकता है। शिक्षा प्रतियोगिता और करियर से जुड़े मामलों में सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना है। यात्रा के योग बन सकते हैं। दोस्तों और परिवार के साथ अच्छा समय बीतेगा। किसी नए व्यक्ति से मुलाकात भविष्य में लाभदायक साबित हो सकती है।

    मकर राशि वालों को आज घरेलू और पेशेवर जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाना होगा। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत की सराहना हो सकती है। संपत्ति या वाहन से जुड़े मामलों में सकारात्मक खबर मिल सकती है। परिवार में सुख शांति बनाए रखने के लिए धैर्य से काम लें।

    कुंभ राशि के जातकों के लिए आज का दिन संपर्क और संवाद के माध्यम से सफलता दिला सकता है। नई जानकारी और नए अवसर मिल सकते हैं। भाई बहनों का सहयोग प्राप्त होगा। कारोबार में विस्तार की योजना बन सकती है। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा लेकिन अत्यधिक काम से थकान हो सकती है।

    मीन राशि वालों के लिए आज का दिन आर्थिक मामलों में अच्छा रह सकता है। धन लाभ के नए अवसर मिल सकते हैं। परिवार में खुशियों का माहौल रहेगा और किसी शुभ समाचार की संभावना बन सकती है। करियर में आगे बढ़ने के लिए किए गए प्रयास सफल हो सकते हैं। हालांकि भावनाओं के आधार पर खर्च करने से बचें।

    कुल मिलाकर 4 सितंबर का दिन मेहनत धैर्य और समझदारी के साथ आगे बढ़ने का संदेश दे रहा है। कुछ राशियों के लिए करियर और धन लाभ के नए रास्ते खुल सकते हैं जबकि अन्य राशियों को अपने फैसलों में संयम बनाए रखना होगा। सकारात्मक सोच और सही प्रयास से दिन को बेहतर बनाया जा सकता है।

  • पश्चिम एशिया तनाव के बीच जेडी वेंस ने ईरान की तुलना में चीन को बताया अधिक जिम्मेदार देश, दबाव बढ़ाने के संकेत

    पश्चिम एशिया तनाव के बीच जेडी वेंस ने ईरान की तुलना में चीन को बताया अधिक जिम्मेदार देश, दबाव बढ़ाने के संकेत

    नई दिल्ली ।पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान को लेकर अमेरिकी रणनीति और चीन की संभावित भूमिका पर महत्वपूर्ण बयान दिया है। वेंस ने ईरान की तुलना में चीन को अधिक जिम्मेदार देश बताते हुए कहा कि बीजिंग ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने के अमेरिकी प्रयास में सहयोग के लिए तैयार है।

    अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट शुरू किया है। इस अभियान का उद्देश्य ईरान की आर्थिक गतिविधियों और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों पर दबाव बढ़ाना बताया जा रहा है। ऐसे में चीन का सहयोग अमेरिकी रणनीति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि चीन ईरान के साथ महत्वपूर्ण आर्थिक संबंध रखने वाले देशों में शामिल है।

    वेंस ने कहा कि चीन सरकार इस मामले में सहयोग करने के लिए तैयार है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अमेरिका और चीन के बीच कई नीतिगत मतभेद मौजूद हैं। इसके बावजूद उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच संबंधों को सकारात्मक बताया।

    ईरान और चीन की तुलना करते हुए वेंस ने कहा कि चीन अंतरराष्ट्रीय विवादों में अपनी बात मनवाने के लिए वाणिज्यिक जहाजों पर उसी तरह गोलीबारी करने वाला देश नहीं है, जैसा अमेरिका ईरान के मामले में आरोप लगा रहा है। उनका बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में समुद्री मार्गों और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी हुई है।

    वेंस के अनुसार तुर्किये, अजरबैजान, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कतर और अन्य खाड़ी देश भी अलग-अलग स्तर पर अमेरिका की मदद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ देश सार्वजनिक रूप से अपनी स्थिति जाहिर नहीं करना चाहते, लेकिन निजी तौर पर वे वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों को लेकर ईरान पर दबाव बनाने के पक्ष में हैं।

    अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने ईरान के खिलाफ आगे की रणनीति को लेकर भी स्पष्ट संकेत दिए। उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन के पास आर्थिक, सैन्य, राजनयिक और गुप्त उपायों सहित कई विकल्प मौजूद हैं। हालांकि उन्होंने इन विकल्पों की विस्तृत जानकारी देने से इनकार किया।

    वेंस ने कहा कि अमेरिकी प्रशासन अपनी योजनाओं को सार्वजनिक नहीं करेगा, क्योंकि ऐसा करने से राष्ट्रपति ट्रंप की निर्णय लेने की क्षमता सीमित हो सकती है। उनका कहना था कि राष्ट्रपति को परिस्थितियों के अनुसार फैसला लेने के लिए रणनीतिक गोपनीयता बनाए रखना जरूरी है।

    वेंस ने हालिया अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का बचाव करते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति का भी उल्लेख किया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान वहां वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाने वाली गतिविधियां बंद नहीं करता है तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है।

    होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के प्रमुख ऊर्जा परिवहन मार्गों में शामिल है। यहां किसी भी लंबे समय तक व्यवधान से कच्चे तेल और अन्य ऊर्जा उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका रहती है। इसका असर एशिया और यूरोप सहित उन अर्थव्यवस्थाओं पर भी पड़ सकता है जो पश्चिम एशिया से ऊर्जा आयात करती हैं।

    अमेरिका की ओर से चीन के सहयोग का दावा इस पूरे घटनाक्रम में विशेष महत्व रखता है। वाशिंगटन और बीजिंग के बीच व्यापार और रणनीतिक मुद्दों पर मतभेद रहे हैं, लेकिन ईरान के खिलाफ दबाव अभियान में संभावित सहयोग पश्चिम एशिया की बदलती कूटनीतिक परिस्थितियों को दर्शाता है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि चीन वास्तव में अमेरिकी आर्थिक दबाव अभियान में किस स्तर तक सहयोग करता है और ईरान की प्रतिक्रिया क्या रहती है।

  • अरहान खान की पहली फिल्म की स्क्रिप्ट अंतिम चरण में, अनिरुद्ध अय्यर के निर्देशन में एक्शन हीरो के रूप में दिखेंगे

    अरहान खान की पहली फिल्म की स्क्रिप्ट अंतिम चरण में, अनिरुद्ध अय्यर के निर्देशन में एक्शन हीरो के रूप में दिखेंगे

    नई दिल्ली ।अरबाज खान और मलाइका अरोड़ा के बेटे अरहान खान जल्द ही बॉलीवुड में बतौर अभिनेता अपनी नई पारी शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं। लंबे समय से उनके फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखने को लेकर चर्चा होती रही है, लेकिन अब उनके संभावित डेब्यू प्रोजेक्ट को लेकर अहम जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि अरहान को एक बड़ी एक्शन फिल्म के जरिए बतौर हीरो लॉन्च किया जाएगा।

    अरहान खान को इससे पहले परिवार और दोस्तों के साथ कई सार्वजनिक कार्यक्रमों में देखा गया है। हालांकि, अभिनय के क्षेत्र में उनकी औपचारिक शुरुआत अब तक नहीं हुई थी। नई जानकारी के अनुसार उनकी पहली फिल्म एक्शन आधारित होगी और इसमें वह मुख्य भूमिका निभाते नजर आ सकते हैं। फिल्म के निर्देशन की जिम्मेदारी अनिरुद्ध अय्यर के पास बताई जा रही है।

    अनिरुद्ध अय्यर इससे पहले एक्शन शैली की फिल्म का निर्देशन कर चुके हैं। अरहान की डेब्यू फिल्म की कहानी और पटकथा फिलहाल अंतिम चरण में होने की जानकारी है। ऐसे में फिल्म से जुड़े अन्य कलाकारों, शूटिंग शेड्यूल और रिलीज डेट को लेकर आधिकारिक स्तर पर विस्तृत जानकारी सामने आना अभी बाकी है।

    अरहान के फिल्मी करियर को लेकर उनके पिता अरबाज खान भी पहले अपनी बात रख चुके हैं। अरबाज का कहना रहा है कि अरहान के लिए उनके पास फिल्म की स्क्रिप्ट आ सकती है, लेकिन वह यह भी मानते हैं कि देश में कई फिल्म निर्माता नए चेहरों और प्रतिभाओं की तलाश कर रहे हैं। उन्होंने संकेत दिया था कि अगर किसी अन्य फिल्म निर्माता के पास अरहान के लिए उपयुक्त प्रस्ताव आता है तो वह उस पर भी विचार कर सकते हैं।

    अरबाज ने यह भी स्पष्ट किया था कि अगर उनके पास अरहान के लिए कोई उपयुक्त प्रोजेक्ट आता है तो वह उसे जरूर प्रस्तावित करेंगे, लेकिन अंतिम फैसला अरहान को खुद लेने देंगे। इससे यह संकेत मिलता है कि उनके करियर को लेकर परिवार की ओर से अवसर उपलब्ध कराने के साथ उनकी अपनी पसंद को भी महत्व दिया जाएगा।

    अभिनय में कदम रखने से पहले अरहान डिजिटल माध्यम पर भी अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर चुके हैं। उन्होंने अपने दोस्तों देव और आरुष के साथ पॉडकास्ट शुरू किया था, जिसका नाम दम बिरयानी रखा गया। इस पॉडकास्ट में परिवार से जुड़े लोगों की मौजूदगी भी देखने को मिली थी। इसके जरिए अरहान को कैमरे के सामने बातचीत और प्रस्तुति का अनुभव मिला।

    अरहान का फिल्मी बैकग्राउंड भी उनके डेब्यू को चर्चा में बनाए हुए है। उनके पिता अरबाज खान अभिनेता होने के साथ निर्माता और निर्देशक के रूप में भी काम कर चुके हैं। उन्होंने 1996 में फिल्म दरार से अभिनय की शुरुआत की थी और कई फिल्मों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। इसके अलावा उन्होंने दबंग 2 का निर्देशन भी किया था।

    वहीं मलाइका अरोड़ा मनोरंजन जगत में अभिनेत्री, मॉडल और डांसर के रूप में लंबे समय से सक्रिय हैं। उनके कई लोकप्रिय डांस नंबर दर्शकों के बीच खास पहचान बना चुके हैं। ऐसे में अरहान के बॉलीवुड डेब्यू को लेकर दर्शकों की दिलचस्पी स्वाभाविक रूप से बढ़ी हुई है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि उनकी पहली फिल्म की आधिकारिक घोषणा कब होती है और एक्शन भूमिका में उनका प्रदर्शन कैसा रहता है।

  • Bigg Boss 20 के घर से उठा पर्दा! जंगल थीम और मिस्ट्री रूम ने बढ़ाया रोमांच, हर कोने में छिपा है बड़ा ट्विस्ट

    Bigg Boss 20 के घर से उठा पर्दा! जंगल थीम और मिस्ट्री रूम ने बढ़ाया रोमांच, हर कोने में छिपा है बड़ा ट्विस्ट


    नई दिल्ली । Bigg Boss 20 के ग्रैंड प्रीमियर का काउंटडाउन शुरू हो चुका है और शो शुरू होने से पहले ही इसके आलीशान घर की झलक ने फैंस की एक्साइटमेंट बढ़ा दी है। इस बार बिग बॉस हाउस को बेहद खास अंदाज में तैयार किया गया है। घर का डिजाइन जंगल थीम पर आधारित है और इसमें नेचर के साथ रहस्य और ड्रामा का जबरदस्त कॉम्बिनेशन देखने को मिल रहा है। घर की तस्वीरों से साफ है कि इस सीजन में कंटेस्टेंट्स को सिर्फ टास्क और आपसी टकराव ही नहीं बल्कि एक बेहद अलग माहौल का भी सामना करना होगा।

    इस बार बिग बॉस के घर को डिजाइनर वर्षा जैन ने तैयार किया है। यानी पिछले कुछ सीजन में नजर आए डिजाइन से अलग इस बार घर को पूरी तरह नए कॉन्सेप्ट में पेश किया गया है। घर के अंदर दाखिल होते ही कई ऐसी चीजें नजर आती हैं जो इसकी थीम को खास बनाती हैं। एंट्री गेट पर लगा बड़ा और ड्रामेटिक स्टैच्यू पूरे घर का सबसे आकर्षक हिस्सा दिखाई देता है।

    घर का गार्डन एरिया भी काफी दिलचस्प है। इसे जंगल जैसी फील देने की कोशिश की गई है। पेड़ों और नेचर से जुड़े डिजाइन के बीच एक विशाल सांप का स्ट्रक्चर भी बनाया गया है। बिग बॉस में अक्सर कंटेस्टेंट्स के लिए आस्तीन का सांप जैसे मुहावरों का इस्तेमाल सुनने को मिलता है और इस बार मेकर्स ने इसी थीम को घर के डिजाइन में भी शामिल कर दिया है। इसके अलावा गार्डन में शार्क स्टाइल का पूल एरिया बनाया गया है जो घर के पूरे लुक को और ज्यादा ड्रामेटिक बनाता है।

    लिविंग रूम को भी बेहद अलग अंदाज दिया गया है। इसका शेप ऑक्टोपस जैसा है और दीवारों पर बिग बॉस की मिस्ट्री और सस्पेंस से जुड़े डिजाइन देखने को मिलते हैं। कहीं उल्लू नजर आता है तो कहीं बंदर जैसे एलिमेंट्स घर को जंगल थीम से जोड़ते हैं। दीवारों की रंगीन और कोजी डिजाइन घर को एक साथ रहस्यमयी और लग्जूरियस लुक देती है।

    बिग बॉस के घर में सबसे ज्यादा चर्चा मिस्ट्री रूम्स को लेकर होती है और इस बार भी मेकर्स ने सस्पेंस बरकरार रखा है। रूम नंबर 2 को लेकर खास रहस्य बनाया गया है। वहीं रूम नंबर 20 को भी मिस्ट्री रूम बताया जा रहा है। इसका खुलासा ग्रैंड प्रीमियर के दौरान किया जाएगा। ऐसे में सलमान खान के जरिए इन कमरों से जुड़े राज सामने आने का इंतजार फैंस को रहेगा।

    बेडरूम का इंटीरियर भी पिछली बार से काफी अलग नजर आ रहा है। घर को ज्यादा स्पेसियस बनाया गया है ताकि कंटेस्टेंट्स को पर्याप्त जगह मिल सके। वहीं वॉशरूम एरिया में बातचीत और गॉसिप के लिए बड़ा काउच लगाया गया है। बिग बॉस के पिछले सीजनों में ऐसे छोटे कोने अक्सर बड़े विवादों की वजह बनते रहे हैं।

    घर का किचन भी अपने आप में खास है। इसे इस बार BB Food Truck नाम दिया गया है। बिग बॉस के घर में किचन हमेशा से राजनीति और रणनीति का बड़ा केंद्र रहा है। ऐसे में इस नए डिजाइन के बीच यहां होने वाली बातचीत और खींचतान भी शो का अहम हिस्सा बन सकती है।

    सबसे खास बात यह है कि पूरे घर में 100 से ज्यादा कैमरे लगाए गए हैं। यानी कंटेस्टेंट्स की गतिविधियों पर लगातार नजर रहेगी। घर का लगभग हर कोना कैमरों की निगरानी में होगा। कुल मिलाकर Bigg Boss 20 का घर सिर्फ रहने की जगह नहीं बल्कि शो के ड्रामा और सस्पेंस का एक अहम किरदार नजर आने वाला है।