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  • ब्रह्मांड के सबसे बड़े रहस्य से उठा पर्दा! डार्क मैटर से जुड़े कण का मिला चौंकाने वाला संकेत

    ब्रह्मांड के सबसे बड़े रहस्य से उठा पर्दा! डार्क मैटर से जुड़े कण का मिला चौंकाने वाला संकेत


    नई दिल्ली । ब्रह्मांड के सबसे बड़े रहस्यों में शामिल डार्क मैटर को लेकर वैज्ञानिकों को एक बेहद अहम संकेत मिला है। जिस पदार्थ को वैज्ञानिक दशकों से खोजने की कोशिश कर रहे हैं उसे आज तक सीधे तौर पर देखा या पकड़ा नहीं जा सका है। अब अमेरिका की जमीन से करीब एक मील नीचे मौजूद एक अत्याधुनिक प्रयोगशाला में लगे डिटेक्टर ने एक ऐसी रहस्यमयी घटना दर्ज की है जिसने वैज्ञानिकों की उम्मीद बढ़ा दी है। हालांकि अभी इसे डार्क मैटर की पक्की खोज कहना जल्दबाजी होगी।

    यह संकेत LZ डिटेक्टर से मिला है। इस प्रयोग से जुड़े करीब 250 वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने लगभग दो वर्षों तक इसके आंकड़ों का अध्ययन किया है। टीम में छह देशों के 39 संस्थानों से जुड़े विशेषज्ञ शामिल हैं। जांच के दौरान वैज्ञानिकों को एक ऐसा कण मिला जो एक परमाणु से टकराता हुआ दिखाई दिया। वैज्ञानिकों को आशंका है कि यह WIMP यानी Weakly Interacting Massive Particle हो सकता है। WIMP को लंबे समय से डार्क मैटर के संभावित कणों में से एक माना जाता है।

    इस खोज की खास बात यह है कि LZ डिटेक्टर बेहद संवेदनशील है और बहुत छोटे कणों के बीच होने वाली हल्की सी प्रतिक्रिया को भी पकड़ने की कोशिश करता है। इसे अमेरिका के साउथ डकोटा में सैनफोर्ड अंडरग्राउंड रिसर्च फैसिलिटी में जमीन के करीब एक मील नीचे स्थापित किया गया है। इतनी गहराई में प्रयोग करने का मकसद ऊपर से आने वाले दूसरे कणों और विकिरण के प्रभाव को कम करना है ताकि बेहद कमजोर संकेतों को भी पहचाना जा सके।

    आसान भाषा में समझें तो वैज्ञानिक ऐसे संकेत की तलाश कर रहे हैं जो यह बता सके कि डार्क मैटर का कोई कण सामान्य पदार्थ के परमाणु से टकराया है। इस बार मिले संकेत ने इसी संभावना को जन्म दिया है। लेकिन वैज्ञानिक अभी बेहद सावधानी से आगे बढ़ रहे हैं क्योंकि केवल एक घटना के आधार पर डार्क मैटर की मौजूदगी साबित नहीं की जा सकती।

    इस संकेत को 2.6 सिग्मा का स्तर मिला है। वैज्ञानिक प्रयोगों में सिग्मा का इस्तेमाल यह समझने के लिए किया जाता है कि किसी नतीजे के संयोग से सामने आने की कितनी संभावना है। बड़ी वैज्ञानिक खोज के लिए आम तौर पर 5 सिग्मा का स्तर जरूरी माना जाता है। इसका मतलब साफ है कि अभी इस संकेत को निर्णायक सबूत नहीं माना जा सकता।

    ब्राउन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रिक गैटस्कैल ने भी स्पष्ट किया है कि वैज्ञानिकों की टीम डार्क मैटर खोज लेने का दावा नहीं कर रही है। टीम ने जरूर कुछ असामान्य और दिलचस्प देखा है लेकिन इसके पीछे की असली वजह समझने के लिए और जांच की आवश्यकता है। वैज्ञानिकों ने यह भी पता लगाने की कोशिश की है कि कहीं यह घटना किसी दूसरे कारण से तो नहीं हुई।

    डार्क मैटर आखिर इतना महत्वपूर्ण क्यों है। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह ऐसा पदार्थ है जिसे हम सीधे देख नहीं सकते क्योंकि यह प्रकाश को सामान्य पदार्थ की तरह उत्सर्जित या परावर्तित नहीं करता। फिर भी इसके अस्तित्व के संकेत ब्रह्मांड में मौजूद गुरुत्वाकर्षण प्रभावों से मिलते हैं। माना जाता है कि ब्रह्मांड के कुल पदार्थ का करीब 85 फीसदी हिस्सा डार्क मैटर हो सकता है।

    अब वैज्ञानिक LZ डिटेक्टर से मिलने वाले आगे के आंकड़ों पर नजर रखेंगे। यदि भविष्य में इसी तरह के कई संकेत मिलते हैं और वैज्ञानिक प्रमाण 5 सिग्मा के स्तर तक पहुंचते हैं तो डार्क मैटर की खोज का दावा काफी मजबूत हो सकता है। फिलहाल वैज्ञानिकों के हाथ डार्क मैटर नहीं बल्कि उसका एक बेहद दिलचस्प संभावित सुराग लगा है। आने वाले प्रयोग यह तय करेंगे कि यह वास्तव में डार्क मैटर का संकेत था या किसी दूसरे कण से जुड़ी दुर्लभ घटना।

  • रात में अचानक पैर पकड़ लेता है दर्द तो न करें नजरअंदाज, इन पोषक तत्वों की कमी हो सकती है वजह

    रात में अचानक पैर पकड़ लेता है दर्द तो न करें नजरअंदाज, इन पोषक तत्वों की कमी हो सकती है वजह


    नई दिल्ली। पैरों में दर्द होना आम समस्या है लेकिन अगर बिना किसी चोट या ज्यादा मेहनत के अचानक पैर में दर्द ऐंठन या खिंचाव होने लगे तो इसे सिर्फ सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कई बार शरीर में जरूरी विटामिन और मिनरल्स की कमी का असर मांसपेशियों और नसों पर पड़ सकता है। खासतौर पर बार बार होने वाली ऐंठन या दर्द शरीर में पोषण से जुड़ी किसी कमी की ओर इशारा कर सकता है। हालांकि पैर में दर्द के कई दूसरे कारण भी हो सकते हैं इसलिए लगातार परेशानी रहने पर डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

    विटामिन डी शरीर में हड्डियों के साथ मांसपेशियों और नसों के सामान्य कामकाज के लिए भी जरूरी माना जाता है। इसकी कमी होने पर शरीर में कमजोरी और दर्द जैसी शिकायत हो सकती है। कुछ लोगों में पैरों के अलावा कमर और पीठ में भी दर्द महसूस हो सकता है। शरीर को विटामिन डी का एक प्रमुख स्रोत सूर्य की रोशनी है। इसके अलावा डाइट और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट के जरिए इसकी कमी को दूर किया जा सकता है। बिना जांच के खुद से हाई डोज सप्लीमेंट लेना उचित नहीं है।

    कैल्शियम को आमतौर पर हड्डियों की मजबूती से जोड़कर देखा जाता है लेकिन इसका संबंध मांसपेशियों के सामान्य संकुचन और तंत्रिका तंत्र के कामकाज से भी है। शरीर में कैल्शियम का स्तर कम होने पर कुछ लोगों को मांसपेशियों में खिंचाव ऐंठन या असहजता महसूस हो सकती है। डाइट में दूध दही पनीर तिल और कैल्शियम से भरपूर अन्य खाद्य पदार्थ शामिल किए जा सकते हैं। अगर किसी व्यक्ति में लगातार कमी बनी हुई है तो डॉक्टर उचित जांच के बाद इसकी वजह और उपचार तय कर सकते हैं।

    विटामिन बी12 की कमी भी नसों से जुड़ी परेशानियों का कारण बन सकती है। इसकी कमी होने पर हाथ पैर में झनझनाहट सुन्नपन कमजोरी या असामान्य संवेदनाएं महसूस हो सकती हैं। कुछ लोगों को पैरों में खिंचाव या दर्द की शिकायत भी हो सकती है। खासकर लंबे समय से बनी रहने वाली ऐसी समस्या को नजरअंदाज करने के बजाय इसकी सही वजह पता करना जरूरी है। विटामिन बी12 मुख्य रूप से दूध अंडे मांस और मछली जैसे खाद्य पदार्थों में पाया जाता है। शाकाहारी लोगों में इसके स्रोत सीमित होने के कारण डॉक्टर की सलाह से इसकी जांच और जरूरत के अनुसार सप्लीमेंट की सलाह दी जा सकती है।

    पैरों में अचानक ऐंठन और दर्द का कारण सिर्फ विटामिन या मिनरल्स की कमी ही नहीं होता। शरीर में पानी की कमी लंबे समय तक एक ही स्थिति में रहना अधिक शारीरिक गतिविधि मांसपेशियों पर दबाव या कुछ दवाओं के प्रभाव से भी ऐसी परेशानी हो सकती है। इसलिए केवल लक्षण देखकर किसी एक पोषक तत्व की कमी मान लेना सही नहीं है।

    शरीर को जरूरी पोषक तत्व देने के लिए संतुलित आहार लेना सबसे महत्वपूर्ण है। खाने में हरी सब्जियां मौसमी फल दूध दही अंडे दालें सूखे मेवे और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल करें। पर्याप्त पानी पीना और नियमित हल्की एक्सरसाइज भी शरीर को सक्रिय रखने में मदद कर सकती है। अगर पैर का दर्द बार बार हो रहा है रात में लगातार ऐंठन होती है पैर में सुन्नपन या कमजोरी रहती है या दर्द काफी ज्यादा है तो डॉक्टर से संपर्क करना बेहतर होगा। जरूरत पड़ने पर जांच के जरिए विटामिन और मिनरल्स के स्तर के साथ समस्या की दूसरी संभावित वजहों का भी पता लगाया जा सकता है।

  • 2007 की हिट ‘हे बेबी’ लौट रही है पर्दे पर! अक्षय कुमार की फिल्म के सीक्वल पर आया बड़ा अपडेट

    2007 की हिट ‘हे बेबी’ लौट रही है पर्दे पर! अक्षय कुमार की फिल्म के सीक्वल पर आया बड़ा अपडेट


    नई दिल्ली । अक्षय कुमार के फैंस के लिए बॉलीवुड से बड़ी खुशखबरी सामने आई है। साल 2007 में रिलीज हुई सुपरहिट कॉमेडी फिल्म हे बेबी का सीक्वल अब बनना तय हो गया है। करीब दो दशक बाद फिल्म के दूसरे पार्ट को लेकर आधिकारिक तौर पर बड़ा अपडेट सामने आया है। इस खबर की पुष्टि खुद फिल्म प्रोड्यूसर साजिद नाडियाडवाला ने की है। सीक्वल की खबर सामने आते ही अक्षय कुमार और फिल्म के पुराने फैंस के बीच उत्साह बढ़ गया है।

    दरअसल 3 सितंबर को साजिद नाडियाडवाला ने न्यू साउथ वेल्स के प्रीमियर क्रिस मिन्स का मुंबई स्थित अपने ऑफिस में स्वागत किया। इस मुलाकात की तस्वीरें उन्होंने सोशल मीडिया पर शेयर कीं। इसी दौरान उन्होंने बताया कि ऑस्ट्रेलिया में तीन फिल्मों की शूटिंग को लेकर डील साइन की गई है। खास बात यह है कि इन तीन फिल्मों में हे बेबी का सीक्वल भी शामिल है। हे बेबी का पहला पार्ट भी ऑस्ट्रेलिया में शूट किया गया था।

    हे बेबी साल 2007 में रिलीज हुई थी और इसमें अक्षय कुमार के साथ फरदीन खान और रितेश देशमुख मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे। फिल्म का निर्देशन साजिद खान ने किया था। कहानी तीन ऐसे कुंवारे दोस्तों के इर्द गिर्द घूमती है जिनकी जिंदगी उस वक्त पूरी तरह बदल जाती है जब उनके घर के दरवाजे पर एक छोटी बच्ची पहुंच जाती है। बाद में पता चलता है कि उन तीनों में से एक उस बच्ची का पिता है।

    शुरुआत में तीनों दोस्त बच्ची की जिम्मेदारी लेने से बचते हैं लेकिन धीरे धीरे उस मासूम बच्ची के साथ उनका रिश्ता गहरा होता जाता है। कॉमेडी के साथ इमोशनल कहानी ने दर्शकों का दिल जीत लिया था। फिल्म में विद्या बालन फीमेल लीड रोल में थीं जबकि शाहरुख खान ने कैमियो किया था।

    अब हे बेबी 2 की घोषणा ने सबसे बड़ा सवाल इसकी स्टारकास्ट को लेकर खड़ा कर दिया है। फैंस चाहते हैं कि सीक्वल में पुरानी कास्ट को ही वापस लाया जाए। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने अक्षय कुमार रितेश देशमुख और फरदीन खान को दोबारा एक साथ देखने की इच्छा जताई है। वहीं कुछ फैंस अक्षय कुमार और साजिद खान की जोड़ी की वापसी को लेकर भी उत्साहित हैं।

    पहली फिल्म के बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन की बात करें तो इसे समीक्षकों से मिली जुली प्रतिक्रिया मिली थी लेकिन दर्शकों के बीच फिल्म सफल रही थी। बॉक्स ऑफिस इंडिया के मुताबिक फिल्म का बजट करीब 36 करोड़ रुपये था जबकि भारत में फिल्म ने लगभग 65.94 करोड़ रुपये का ग्रॉस कलेक्शन किया था।

    फिलहाल हे बेबी 2 की कहानी कलाकारों और रिलीज डेट को लेकर ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है। लेकिन करीब 19 साल बाद इस कॉमेडी फ्रेंचाइजी की वापसी निश्चित रूप से अक्षय कुमार के फैंस के लिए किसी बड़े सरप्राइज से कम नहीं है।

  • राधा-कृष्ण की कहानी पर करण जौहर का बड़ा दांव! सचिन रवि संभालेंगे निर्देशन और लेखन की कमान

    राधा-कृष्ण की कहानी पर करण जौहर का बड़ा दांव! सचिन रवि संभालेंगे निर्देशन और लेखन की कमान


    नई दिल्ली । करण जौहर अब अपनी फिल्मों के रोमांस और फैमिली ड्रामा से आगे बढ़कर एक ऐसी कहानी बड़े पर्दे पर लाने की तैयारी में हैं जिसमें प्रेम के साथ भक्ति और भावनाओं का गहरा मेल देखने को मिलेगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक करण जौहर का प्रोडक्शन हाउस धर्मा प्रोडक्शन्स राधा और कृष्ण की प्रेम कहानी पर फिल्म बनाने की तैयारी कर रहा है। इस प्रोजेक्ट का संभावित नाम फिलहाल राधा कृष्ण बताया जा रहा है और फिल्म के विकास का काम काफी आगे बढ़ चुका है।

    इस फिल्म की सबसे खास बात इसके विषय के साथ साथ इसका निर्देशन भी हो सकता है। रिपोर्ट के अनुसार फिल्ममेकर सचिन रवि को इस बड़े प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वह फिल्म की कहानी लिखने के साथ इसका निर्देशन भी कर सकते हैं। हालांकि अभी फिल्म की स्टारकास्ट को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि करण जौहर राधा और कृष्ण की भूमिकाओं के लिए किन कलाकारों को चुनते हैं।

    करण जौहर लंबे समय से भारतीय संस्कृति और प्रेम की इस चर्चित कहानी को बड़े पर्दे पर लाने की इच्छा रखते थे। बताया जा रहा है कि उन्हें अब ऐसी कहानी मिली है जो इस विषय की भावनात्मक गहराई और पौराणिक महत्व के साथ न्याय कर सकती है। यही वजह है कि धर्मा प्रोडक्शन्स इस फिल्म को सामान्य रोमांटिक फिल्म के बजाय बड़े स्तर पर बनाने की तैयारी कर रहा है।

    फिल्म में राधा और कृष्ण के प्रेम को कहानी का मुख्य केंद्र रखा जा सकता है। इसके साथ ही कृष्ण के जन्म से लेकर कंस के वध तक की महत्वपूर्ण घटनाओं को भी कहानी का हिस्सा बनाए जाने की चर्चा है। ऐसे में फिल्म में रोमांस के अलावा इमोशन ड्रामा संघर्ष और ट्रेजेडी का भी मजबूत मेल देखने को मिल सकता है। अगर यह प्रोजेक्ट अपनी योजना के मुताबिक बनता है तो दर्शकों को पौराणिक कथा का एक भव्य सिनेमाई रूप देखने को मिल सकता है।

    सचिन रवि की बात करें तो वह कन्नड़ सिनेमा में अपने अलग अंदाज के लिए पहचाने जाते हैं। साल 2019 में रिलीज हुई फैंटेसी एडवेंचर कॉमेडी फिल्म अवने श्रीमननारायण के निर्देशन के लिए उन्हें खास पहचान मिली। निर्देशन से पहले सचिन रवि बतौर एडिटर भी काम कर चुके हैं। किरिक पार्टी उलिदावरु कंदन्थे और सिंपल अगि ओंध लव स्टोरी जैसी फिल्मों की एडिटिंग से भी उनका नाम जुड़ा रहा है।

    फिलहाल धर्मा प्रोडक्शन्स की तरफ से राधा कृष्ण फिल्म को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। इसलिए स्टारकास्ट रिलीज डेट और शूटिंग से जुड़ी जानकारी का इंतजार करना होगा। अगर करण जौहर इस प्रोजेक्ट को बड़े स्तर पर पर्दे पर उतारते हैं तो यह धर्मा प्रोडक्शन्स की अब तक की फिल्मों से काफी अलग और महत्वाकांक्षी कोशिश साबित हो सकती है।

  • फरहान-जोया की परवरिश पर जावेद अख्तर का बड़ा खुलासा! बोले बच्चों को किसी धर्म से नहीं जोड़ा

    फरहान-जोया की परवरिश पर जावेद अख्तर का बड़ा खुलासा! बोले बच्चों को किसी धर्म से नहीं जोड़ा


    नई दिल्ली । मशहूर लेखक और गीतकार जावेद अख्तर अपनी बेबाक राय और स्पष्ट विचारों के लिए जाने जाते हैं। धर्म को लेकर भी वह कई बार खुलकर अपनी बात रख चुके हैं। अब उन्होंने अपने बच्चों फरहान अख्तर और जोया अख्तर की परवरिश से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा साझा किया है। जावेद अख्तर ने बताया कि उन्होंने बचपन से ही अपने दोनों बच्चों को किसी धार्मिक पहचान से नहीं जोड़ा। उनके मुताबिक बच्चों को यह तय करने की आजादी दी गई कि बड़े होने पर वे धर्म और आस्था को किस तरह देखते हैं।

    जावेद अख्तर ने एक बातचीत में बताया कि यह किस्सा उस समय का है जब फरहान अख्तर करीब 7 या 8 साल के थे। एक दिन वह स्कूल से घर लौटे और अपने पिता से एक ऐसा सवाल पूछ बैठे जिसने जावेद को भी सोचने पर मजबूर कर दिया। फरहान ने उनसे पूछा कि क्या हम मुस्लिम हैं। यह सवाल इसलिए भी स्वाभाविक था क्योंकि बच्चे अपने आसपास के लोगों और समाज से धर्म और समुदाय को लेकर बातें सुनते हुए बड़े होते हैं। लेकिन जावेद ने बेटे को किसी धार्मिक पहचान में बांधने के बजाय उसे एक अलग नजरिया समझाया।

    जावेद अख्तर के मुताबिक उन्होंने फरहान से कहा कि इंसान जिस शहर या समुदाय में पैदा होता है उससे उसकी असली पहचान तय नहीं होती। कोई व्यक्ति मुंबई पुणे आगरा अहमदाबाद लंदन या न्यूयॉर्क में पैदा हो सकता है लेकिन जन्म की जगह उसके व्यक्तित्व की सबसे महत्वपूर्ण पहचान नहीं हो सकती। उनके लिए सबसे अहम बात यह है कि इंसान बड़ा होकर कैसा व्यक्ति बनता है और उसके व्यवहार में किस तरह की इंसानियत दिखाई देती है।

    जावेद ने बताया कि फरहान और जोया को उन्होंने किसी धर्म से जोड़कर नहीं पाला। उनके दोनों बच्चे बड़े होते हुए खुद धर्म और समाज के बारे में समझने लगे लेकिन माता पिता की तरफ से उन पर किसी खास धार्मिक पहचान को अपनाने का दबाव नहीं था। जावेद के अनुसार उनके बच्चे किसी धार्मिक पहचान के बजाय अपनी सोच और अपने फैसलों के साथ बड़े हुए।

    फरहान और जोया जावेद अख्तर और उनकी पहली पत्नी हनी ईरानी के बच्चे हैं। बाद में जावेद ने अभिनेत्री शबाना आजमी से शादी की। फरहान और जोया दोनों ने मनोरंजन जगत में अपनी अलग पहचान बनाई है। फरहान अभिनेता निर्देशक निर्माता और लेखक के तौर पर सफल रहे हैं जबकि जोया अख्तर ने निर्देशन और लेखन के क्षेत्र में अपनी खास जगह बनाई है।

    जावेद अख्तर अपने बच्चों की उपलब्धियों पर गर्व करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि फरहान और जोया ने अपनी सफलता के लिए किसी तरह का समझौता नहीं किया। उनके मुताबिक दोनों ने नाम शोहरत और पैसा हासिल करने के लिए ऐसा काम नहीं किया जिससे उनकी गरिमा प्रभावित हो। उन्होंने अपने दम पर अपनी पहचान बनाई और अपने करियर में लगातार आगे बढ़े।

    जावेद अख्तर का यह किस्सा सिर्फ फरहान के बचपन से जुड़ी एक याद नहीं बल्कि बच्चों की परवरिश को लेकर उनकी सोच को भी सामने रखता है। उन्होंने धार्मिक पहचान को बच्चों पर थोपने के बजाय उन्हें खुद सवाल पूछने समझने और अपनी सोच विकसित करने की आजादी दी। फरहान का बचपन में पूछा गया छोटा सा सवाल और पिता का जवाब आज भी जावेद अख्तर की विचारधारा की एक खास झलक देता है।

  • टीम इंडिया के खराब प्रदर्शन पर BCCI का मंथन! कप्तान और कोच पहुंचे बैठक में लेकिन चीफ सेलेक्टर अगरकर नहीं आए

    टीम इंडिया के खराब प्रदर्शन पर BCCI का मंथन! कप्तान और कोच पहुंचे बैठक में लेकिन चीफ सेलेक्टर अगरकर नहीं आए


    नई दिल्ली । टीम इंडिया के हालिया विदेशी दौरों पर खराब प्रदर्शन के बाद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने बड़ी रिव्यू मीटिंग की लेकिन इस अहम बैठक से चीफ सेलेक्टर अजीत अगरकर की गैरमौजूदगी ने कई सवाल खड़े कर दिए। मुंबई स्थित BCCI मुख्यालय में हुई इस बैठक में टीम इंडिया के आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे की समीक्षा की गई। भारतीय टीम को दोनों विदेशी दौरों पर लिमिटेड ओवर्स क्रिकेट में उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिली जिसके बाद बोर्ड ने प्रदर्शन से लेकर खिलाड़ियों की फिटनेस और लगातार सामने आ रही चोटों तक कई अहम मुद्दों पर चर्चा की।

    बैठक में सबसे ज्यादा चर्चा अजीत अगरकर के शामिल नहीं होने को लेकर रही। अगरकर का मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट सितंबर के अंत में समाप्त होने वाला है और ऐसे में यह माना जा रहा था कि बोर्ड की इस बैठक में उनके भविष्य और कॉन्ट्रैक्ट एक्सटेंशन को लेकर भी कोई बड़ा फैसला हो सकता है। हालांकि BCCI सचिव देवजीत सैकिया ने साफ कर दिया कि इस रिव्यू मीटिंग में अगरकर के कॉन्ट्रैक्ट को आगे बढ़ाने को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई।

    सैकिया ने चीफ सेलेक्टर की गैरमौजूदगी की वजह भी बताई। उनके मुताबिक बैठक काफी कम समय के नोटिस पर बुलाई गई थी और उस समय अजीत अगरकर मुंबई से बाहर थे। बताया गया कि वह ऐसी जगह मौजूद थे जहां से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भी बैठक में शामिल होना संभव नहीं हो सका। अगरकर की अनुपस्थिति इसलिए भी सुर्खियों में रही क्योंकि टीम के खराब प्रदर्शन की समीक्षा करने वाली बैठक में चयन समिति के प्रमुख का मौजूद न होना क्रिकेट जगत में चर्चा का विषय बन गया।

    दरअसल भारतीय टीम के लिए हाल के दोनों विदेशी दौरे निराशाजनक रहे। भारत ने आयरलैंड के खिलाफ दो मैचों की T20I सीरीज खेली जिसमें टीम को 0-2 से हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद इंग्लैंड दौरे पर भी टीम का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। पांच मैचों की T20I सीरीज में भारत को 1-4 से हार मिली जबकि तीन मैचों की ODI सीरीज में भी टीम को 1-2 से शिकस्त झेलनी पड़ी। लगातार विदेशी दौरों पर सीमित ओवरों के क्रिकेट में खराब नतीजों के बाद BCCI ने टीम के प्रदर्शन का गहराई से विश्लेषण करने का फैसला किया।

    मुंबई में हुई इस अहम बैठक में भारतीय क्रिकेट के कई बड़े नाम मौजूद रहे। टेस्ट और ODI कप्तान शुभमन गिल T20I कप्तान श्रेयस अय्यर हेड कोच गौतम गंभीर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के क्रिकेट डायरेक्टर वीवीएस लक्ष्मण और BCCI के कई अधिकारी बैठक में शामिल हुए। बैठक के दौरान सिर्फ टीम के प्रदर्शन पर ही नहीं बल्कि खिलाड़ियों की फिटनेस और लगातार हो रही चोटों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। आने वाले मुकाबलों को देखते हुए टीम मैनेजमेंट के सामने खिलाड़ियों को फिट रखने और बेहतर संयोजन तैयार करने की चुनौती भी अहम मानी जा रही है।

    अजीत अगरकर के कार्यकाल पर नजर डालें तो उनके नेतृत्व वाली चयन समिति के दौर में भारतीय टीम ने कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। भारत ने 2023 ODI वर्ल्ड कप का फाइनल खेला और इसके बाद 2024 तथा 2026 में लगातार दो T20 वर्ल्ड कप जीतने में सफलता हासिल की। हालांकि इसी दौर में भारतीय क्रिकेट में कई बड़े बदलाव भी देखने को मिले और विराट कोहली तथा रोहित शर्मा ने टेस्ट और T20I क्रिकेट से संन्यास लिया जबकि दिग्गज ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया।

    अब सबकी नजर सितंबर के अंत पर टिकी है जब अजीत अगरकर का मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट समाप्त होगा। फिलहाल BCCI ने उनके एक्सटेंशन को लेकर किसी चर्चा से इनकार किया है लेकिन आने वाले दिनों में चयन समिति और भारतीय टीम के भविष्य को लेकर बोर्ड का फैसला क्रिकेट जगत के लिए बेहद अहम साबित हो सकता है।

  • सलमान के बिग बॉस में होगी सितारों की एंट्री! एक्स वाइफ खोलेंगी राज तो ग्लैमरस हसीनाएं बढ़ाएंगी शो का पारा

    सलमान के बिग बॉस में होगी सितारों की एंट्री! एक्स वाइफ खोलेंगी राज तो ग्लैमरस हसीनाएं बढ़ाएंगी शो का पारा


    नई दिल्ली । बिग बॉस के फैंस का इंतजार अब खत्म होने वाला है क्योंकि देश का चर्चित रियलिटी शो बिग बॉस 20 जल्द ही दर्शकों के बीच दस्तक देने जा रहा है। 6 सितंबर से शुरू होने वाले इस नए सीजन को लेकर उत्साह लगातार बढ़ता जा रहा है। हमेशा की तरह इस बार भी सलमान खान शो की कमान संभालते नजर आएंगे और नए सीजन में ग्लैमर विवाद दोस्ती दुश्मनी और कई बड़े खुलासों का जबरदस्त तड़का देखने को मिल सकता है। मेकर्स इस बार तथास्तु-टू थीम के साथ दर्शकों के सामने आने की तैयारी में हैं और प्रोमो के जरिए पहले ही संकेत दे चुके हैं कि सीजन 20 में ट्विस्ट और टर्न्स की कोई कमी नहीं होगी।

    शो के प्रीमियर से पहले कई नाम सामने आ चुके हैं जिनमें कुछ चेहरों को कन्फर्म बताया जा रहा है जबकि कई सितारों के नाम चर्चा में बने हुए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार टीवी एक्ट्रेस माही विज सोशल मीडिया स्टार गुल्लू उर्फ कुशाल तंवर अर्शिफा खान कनिका मान पंजाबी एक्ट्रेस ईशा रिखी और सिंगर काजी तौकीर बिग बॉस 20 का हिस्सा बन सकते हैं। वहीं रिया अहीर और लव गिल की एंट्री पर जनता का फैसला अहम भूमिका निभा सकता है।

    माही विज की एंट्री को लेकर भी काफी चर्चा है क्योंकि वह लंबे समय से टीवी इंडस्ट्री का जाना माना चेहरा रही हैं। उनकी निजी जिंदगी भी सुर्खियों में रही है और अब फैंस यह देखने के लिए उत्साहित हैं कि वह बिग बॉस के घर में अपनी पर्सनैलिटी और गेम प्लान से कितना असर छोड़ पाती हैं। दूसरी ओर काजी तौकीर की एंट्री दर्शकों के लिए नॉस्टैल्जिया का बड़ा डोज हो सकती है। फेम गुरुकुल जीतने के बाद उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई थी और करीब दो दशक बाद किसी बड़े रियलिटी शो में उनकी वापसी दर्शकों का ध्यान खींच सकती है।

    सबसे ज्यादा दिलचस्प चर्चा ईशा रिखी को लेकर है जिनका नाम रैपर बादशाह के साथ जुड़ने के बाद लगातार सुर्खियों में रहा है। दोनों के रिश्ते और अलगाव को लेकर कई तरह की बातें सामने आती रही हैं। ऐसे में अगर ईशा बिग बॉस के घर में पहुंचती हैं तो दर्शकों को उनकी निजी जिंदगी से जुड़े कुछ अनसुने राज सुनने को मिल सकते हैं। वहीं कनिका मान अपने ग्लैमरस अंदाज और दमदार स्क्रीन प्रेजेंस के साथ शो में मनोरंजन का तड़का लगाने के लिए तैयार नजर आ सकती हैं।

    सोशल मीडिया पर मजबूत पकड़ रखने वाली अर्शिफा खान भी इस सीजन का बड़ा नाम मानी जा रही हैं। बचपन से अभिनय की दुनिया में सक्रिय अर्शिफा की जबरदस्त फैन फॉलोइंग है और उनका डिजिटल प्रभाव बिग बॉस के घर में उनके लिए मजबूत साबित हो सकता है। वहीं गुल्लू उर्फ कुशाल तंवर को रियलिटी शोज का अनुभव है और उनकी एंट्री घर के माहौल को और ज्यादा प्रतिस्पर्धी बना सकती है।

    इन नामों के अलावा आमिर खान के भाई फैसल खान शो में शामिल हो सकते हैं। रिया चक्रवर्ती के भाई शोविक चक्रवर्ती बॉक्सर मैरी कॉम मौनी रॉय करण वाही नीति टेलर आम्रपाली दुबे गीता बसरा और पंचायत फेम आसिफ खान समेत कई सितारों के नाम भी चर्चा में हैं। हालांकि इन नामों पर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। अब देखना दिलचस्प होगा कि बिग बॉस 20 के घर में कौन एंट्री करता है और कौन अपने गेम रिश्तों तथा बेबाक खुलासों से दर्शकों का दिल जीतते हुए शो का सबसे बड़ा खिलाड़ी बनता है।

  • टीम इंडिया का व्यस्त शेड्यूल: 4 महीनों में 29 मैचों की चुनौती, चार देशों से होगी जोरदार टक्कर

    टीम इंडिया का व्यस्त शेड्यूल: 4 महीनों में 29 मैचों की चुनौती, चार देशों से होगी जोरदार टक्कर


    नई दिल्ली । साल 2026 के करीब आठ महीने बीत चुके हैं लेकिन टीम इंडिया के लिए क्रिकेट का रोमांच अभी खत्म नहीं हुआ है। सितंबर से दिसंबर तक भारतीय क्रिकेट टीम बेहद व्यस्त रहने वाली है और इन चार महीनों के दौरान उसे कई बड़े और महत्वपूर्ण इंटरनेशनल मुकाबले खेलने हैं। टीम इंडिया अफगानिस्तान वेस्टइंडीज न्यूजीलैंड और श्रीलंका के खिलाफ अलग-अलग फॉर्मेट में कुल 29 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलेगी। इसके अलावा भारतीय टीम एशियन गेम्स में भी हिस्सा लेगी जिससे साल के आखिरी महीनों में खिलाड़ियों के सामने लगातार क्रिकेट का चुनौतीपूर्ण शेड्यूल रहेगा।

    सितंबर में टीम इंडिया की शुरुआत अफगानिस्तान के खिलाफ तीन टी20 इंटरनेशनल मैचों से होगी। पहला मुकाबला 13 सितंबर को नई दिल्ली में खेला जाएगा जबकि दूसरा मैच 15 सितंबर और तीसरा मुकाबला 17 सितंबर को नई दिल्ली में ही होगा। इसके बाद भारतीय टीम वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे और टी20 सीरीज में उतरेगी। दोनों टीमों के बीच तीन वनडे मुकाबले खेले जाएंगे जिनकी शुरुआत 27 सितंबर से होगी। यह सीरीज 3 अक्टूबर तक चलेगी।

    वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे सीरीज के बाद टीम इंडिया पांच मैचों की टी20 सीरीज खेलेगी। यह मुकाबले 6 अक्टूबर से 17 अक्टूबर तक लखनऊ रांची इंदौर हैदराबाद और बेंगलुरु में खेले जाएंगे। इस सीरीज के बाद भारतीय टीम सीधे न्यूजीलैंड दौरे के लिए रवाना होगी जहां उसे अक्टूबर और नवंबर में लंबा और बेहद चुनौतीपूर्ण दौरा करना है।

    न्यूजीलैंड में टीम इंडिया पहले पांच टी20 मुकाबले खेलेगी। इसके बाद दोनों टीमों के बीच पांच मैचों की वनडे सीरीज होगी। दौरे का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा दो टेस्ट मैचों की सीरीज होगी जो भारत के वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप अभियान के लिए भी अहम मानी जा रही है। न्यूजीलैंड दौरे पर टीम इंडिया कुल 12 इंटरनेशनल मैच खेलेगी और इस दौरान उसे विदेशी परिस्थितियों में अपनी ताकत साबित करनी होगी।

    साल के आखिरी महीने दिसंबर में भारतीय टीम अपने घर में श्रीलंका का सामना करेगी। दोनों देशों के बीच तीन वनडे और तीन टी20 इंटरनेशनल मुकाबले खेले जाएंगे। वनडे सीरीज की शुरुआत 13 दिसंबर से दिल्ली में होगी जबकि इसके बाद बेंगलुरु और अहमदाबाद में मुकाबले खेले जाएंगे। टी20 सीरीज 22 दिसंबर से शुरू होगी और राजकोट कटक तथा पुणे में मैच आयोजित किए जाएंगे।

    अगर पूरे शेड्यूल पर नजर डालें तो टीम इंडिया को अफगानिस्तान के खिलाफ 3 टी20 वेस्टइंडीज के खिलाफ 3 वनडे और 5 टी20 न्यूजीलैंड के खिलाफ 5 टी20 5 वनडे और 2 टेस्ट जबकि श्रीलंका के खिलाफ 3 वनडे और 3 टी20 मुकाबले खेलने हैं। इस तरह चार महीनों में कुल 29 इंटरनेशनल मैच टीम इंडिया के इंतजार में हैं। एशियन गेम्स के मुकाबलों को इसमें शामिल नहीं किया गया है और उनके जुड़ने से मैचों की संख्या और बढ़ सकती है। ऐसे में साल 2026 के आखिरी चार महीने भारतीय क्रिकेट टीम और क्रिकेट प्रशंसकों दोनों के लिए बेहद रोमांचक और व्यस्त रहने वाले हैं।

  • टाटा केमिकल्स को केन्या से झटका! राष्ट्रपति रुटो ने कहा- सामान समेटकर निकल जाएं

    टाटा केमिकल्स को केन्या से झटका! राष्ट्रपति रुटो ने कहा- सामान समेटकर निकल जाएं


    नैरोबी।
    टाटा समूह की कंपनी टाटा केमिकल्स मगाडी को केन्या में बड़ा झटका लगा है। राष्ट्रपति विलियम रुटो ने कंपनी पर लेक मगाडी क्षेत्र में एक सदी से ज्यादा समय तक कारोबार करने के बावजूद पर्याप्त निवेश नहीं करने का आरोप लगाया है। रुटो ने कहा कि उन्होंने कंपनी से अपना सामान समेटकर देश से जाने के लिए कहा है।

    यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब केन्या सरकार ने 28 जुलाई को टाटा केमिकल्स मगाडी के खनन संचालन को कथित तौर पर खनन कानूनों का पालन नहीं करने के आरोप में निलंबित कर दिया था। सरकार अब इस क्षेत्र में नए निवेशकों को लाने और स्थानीय स्तर पर खनिजों का प्रसंस्करण बढ़ाने की योजना बना रही है।

    राष्ट्रपति रुटो ने क्या कहा?

    काजियाडो काउंटी में एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति रुटो ने टाटा केमिकल्स मगाडी के खिलाफ नाराजगी जाहिर की। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी लेक मगाडी में 100 साल से अधिक समय से काम कर रही है, लेकिन क्षेत्र के विकास के लिए अपेक्षित निवेश नहीं किया गया।

    रुटो ने स्वाहिली में कहा कि टाटा केमिकल्स मगाडी के पास 100 साल का कॉन्ट्रैक्ट था, लेकिन कंपनी ने कुछ नहीं किया। उन्होंने दावा किया कि कुछ दिन पहले ही उन्होंने कंपनी से अपना सामान समेटकर चले जाने को कहा था।

    सरकार ने नए निवेशकों की पहचान की

    केन्याई राष्ट्रपति के मुताबिक, सरकार ने टाटा केमिकल्स के संचालन की जगह काम संभालने के लिए नए निवेशकों की पहचान कर ली है। उनका कहना है कि केन्या को अपने प्राकृतिक और खनिज संसाधनों से वर्तमान की तुलना में कहीं अधिक आर्थिक लाभ मिलना चाहिए।

    सरकार की योजना इस क्षेत्र में दो नई कंपनियां लाने की है। इसके जरिए निवेश बढ़ाने, स्थानीय स्तर पर खनिजों के प्रसंस्करण को प्रोत्साहित करने और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर जोर दिया जाएगा।

    लेक मगाडी में क्या करती है टाटा की कंपनी?

    टाटा केमिकल्स मगाडी टाटा समूह का हिस्सा है और केन्या की राजधानी नैरोबी से करीब 120 किलोमीटर यानी 75 मील दक्षिण-पश्चिम में स्थित लेक मगाडी में कारोबार करती है।

    कंपनी यहां हर साल 3.5 लाख टन से अधिक सोडा ऐश का उत्पादन करती है। इस उत्पाद को भारत के अलावा दक्षिण-पूर्व एशिया, मध्य पूर्व और अफ्रीका के दूसरे हिस्सों में निर्यात किया जाता है।

    28 जुलाई को क्यों निलंबित हुआ था संचालन?

    राष्ट्रपति का यह बयान 28 जुलाई को कंपनी के खनन संचालन के निलंबन के बाद आया है। केन्या सरकार ने आरोप लगाया था कि कंपनी ने देश के खनन कानूनों का पालन नहीं किया है।

    उस समय खनन मामलों के कैबिनेट सचिव हसन जोहो ने कहा था कि कंपनी का कामकाज तब तक निलंबित रहेगा, जब तक वह अपनी कानूनी जिम्मेदारियां पूरी नहीं कर लेती।

    टाटा केमिकल्स का क्या कहना है?

    कंपनी ने पिछले महीने अपने बचाव में कहा था कि उसने केन्याई अधिकारियों की ओर से मांगे गए सभी जरूरी दस्तावेज जमा कर दिए हैं और वह लागू नियमों का पालन कर रही है।

    टाटा केमिकल्स ने यह भी कहा था कि संचालन पर रोक का असर करीब 500 कर्मचारियों के अलावा ठेकेदारों, सप्लायर्स और आसपास रहने वाले समुदायों पर भी पड़ रहा है।

    1911 में शुरू हुआ था टाटा का रिश्ता

    लेक मगाडी के साथ टाटा समूह का संबंध करीब 115 साल पुराना है। कंपनी का इतिहास यहां 1911 से शुरू होता है। इसके बाद 1928 में केन्या सरकार के साथ एक बड़ा खनन लीज समझौता किया गया था।

    बाद में टाटा केमिकल्स ने 2005 में ब्रिटेन के ब्रूनर मोंड ग्रुप का अधिग्रहण किया और लेक मगाडी से जुड़े इस कारोबार की जिम्मेदारी अपने हाथ में ले ली।

    अब केन्या सरकार के रुख और नए निवेशकों को लाने की योजना से इस लंबे कारोबारी रिश्ते का भविष्य सवालों के घेरे में है। दूसरी ओर, टाटा केमिकल्स का कहना है कि उसने अधिकारियों की मांग के मुताबिक दस्तावेज उपलब्ध कराए हैं और नियमों का पालन किया है।

  • जयशंकर की जेलेंस्की से मुलाकात के बीच कीव पर रूसी ड्रोन हमला

    जयशंकर की जेलेंस्की से मुलाकात के बीच कीव पर रूसी ड्रोन हमला

    कीव। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने दावा किया है कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर जब कीव में उनसे मुलाकात कर रहे थे, उसी दौरान रूस ने यूक्रेन पर ड्रोन हमला किया। जेलेंस्की के मुताबिक, रूस की ओर से जेट इंजन वाले ‘शाहेद’ ड्रोन लॉन्च किए गए थे। यूक्रेन पहले भी इन ड्रोन के विकास में ईरान की मदद का आरोप लगाता रहा है।

    जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेनी लड़ाकू विमानों ने ज्यादातर ड्रोन को हवा में ही मार गिराया, जिसके चलते जयशंकर के नेतृत्व वाला भारतीय प्रतिनिधिमंडल सुरक्षित रहा।

    युद्ध खत्म करने के रास्तों पर हुई चर्चा

    विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को यूक्रेन की राजधानी कीव में राष्ट्रपति जेलेंस्की से मुलाकात की। बातचीत में रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के संभावित रास्तों के साथ-साथ भारत और यूक्रेन के द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई।

    जयशंकर ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए बताया कि उन्होंने जेलेंस्की को यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा के साथ हुई बातचीत की जानकारी दी। दोनों पक्षों के बीच चर्चा का प्रमुख मुद्दा युद्ध का समाधान तलाशना रहा।

    इसी मुलाकात के दौरान कीव में रूसी ड्रोन हमले की खबर सामने आई।

    जेलेंस्की ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल का किया जिक्र

    जेलेंस्की ने अपने बयान में खास तौर पर जयशंकर के प्रतिनिधिमंडल की सुरक्षा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यूक्रेनी लड़ाकू विमानों ने ज्यादातर ड्रोन को नष्ट कर दिया और इसी कारण भारतीय प्रतिनिधिमंडल सुरक्षित रहा।

    यूक्रेनी राष्ट्रपति के मुताबिक, जिस समय जयशंकर उनके साथ कीव में मौजूद थे, उसी वक्त रूस ने एक बार फिर जेट इंजन वाले शाहेद ड्रोन लॉन्च किए। यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि जयशंकर ऐसे समय यूक्रेन पहुंचे थे जब राजधानी में रूसी हवाई हमलों का खतरा बना हुआ था।

    जेलेंस्की ने दुनिया से मांगा स्पष्ट रुख

    जेलेंस्की ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और दुनिया की प्रमुख शक्तियों से रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर स्पष्ट रुख अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि युद्ध को समाप्त करने की जरूरत है और शांति ऐसी होनी चाहिए जो भरोसेमंद और लंबे समय तक टिकाऊ रहे।

    उन्होंने भारत के रुख का भी उल्लेख करते हुए कहा कि यूक्रेन युद्ध समाप्त करने की भारत की प्रतिबद्धता की सराहना करता है।

    बंदरगाहों और खाद्य आपूर्ति को लेकर रूस पर आरोप

    यूक्रेनी राष्ट्रपति ने रूस पर यूक्रेन के बंदरगाहों, खाद्य गलियारे और आपूर्ति व्यवस्था को बाधित करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने खास तौर पर ब्लैक सी में नागरिक जहाजों की सुरक्षा को महत्वपूर्ण बताया।

    जेलेंस्की का तर्क है कि समुद्री मार्गों में किसी भी तरह की रुकावट का असर केवल यूक्रेन तक सीमित नहीं रहेगा। इससे उन क्षेत्रों में भी खाद्य आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जो इन समुद्री रास्तों पर निर्भर हैं।

    जयशंकर की कीव यात्रा के दौरान हुई यह मुलाकात और उसी समय सामने आया ड्रोन हमला रूस-यूक्रेन युद्ध की मौजूदा स्थिति की गंभीरता को भी रेखांकित करता है।