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  • स्मृति मंधाना ने रचा इतिहास…. सर्वाधिक रन बनाने वाली नंबर-1 महिला क्रिकेटर बनी, मिताली को छोड़ा पीछा

    स्मृति मंधाना ने रचा इतिहास…. सर्वाधिक रन बनाने वाली नंबर-1 महिला क्रिकेटर बनी, मिताली को छोड़ा पीछा


    दुबई।
    भारतीय महिला क्रिकेट (Indian Women’s Cricket) की स्टार बल्लेबाज स्मृति मंधाना (Smriti Mandhana) ने एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली है। मंधाना महिला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट (Women’s International Cricket) में सर्वाधिक रन बनाने वाली बल्लेबाज बन गई हैं। उन्होंने इस मामले में भारत की पूर्व कप्तान मिताली राज (Mithali Raj) को पीछे छोड़ दिया है। भारत ने महिला एशिया कप में मंधाना की शतक की बदौलत हॉन्गकॉन्ग के खिलाफ 20 ओवर में पांच विकेट पर 193 रन बनाए।


    मंधाना का शतक

    मंधाना ने टी20 अंतरराष्ट्रीय करियर का 36वां अर्धशतक लगाया। उन्होंने छक्का मारकर अर्धशतक पूरा किया था। हालांकि, इसके लिए उन्होंने 40 गेंदें लीं थीं। हालांकि, इसके बाद मंधाना ने सीधे चौथी गीयर में बल्लेबाजी की। उन्होंने अगले 50 रन के लिए केवल 17 गेंदें लीं। मंधाना ने 57 गेंद में टी20 अंतरराष्ट्रीय करियर का दूसरा शतक लगाया। स्मृति मंधाना ने 64 गेंद में 14 चौके और सात छक्के की मदद से 124 रन की पारी खेली। वह रन आउट हुईं।


    महान मिताली राज का कौन सा रिकॉर्ड टूटा?

    मंधाना के नाम अब महिला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 10,880 रन हो गए हैं। इसके साथ ही उन्होंने मिताली राज के 10,868 रनों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। मिताली लंबे समय तक इस सूची में शीर्ष पर थीं और भारतीय महिला क्रिकेट की सबसे सफल बल्लेबाजों में शामिल रही हैं। मिताली के बाद इस लिस्ट में सूजी बेट्स, शार्लोट एडवर्ड्स और स्टेफनी टेलर जैसी दिग्गज बल्लेबाज हैं।

    मिताली राज के संन्यास के बाद अब मंधाना भारतीय महिला क्रिकेट की बल्लेबाजी की सबसे बड़ी स्टार के रूप में लगातार नए मुकाम हासिल कर रही हैं। स्मृति मंधाना ने सिर्फ मिताली का रिकॉर्ड नहीं तोड़ा, बल्कि महिला क्रिकेट में भारतीय बल्लेबाजी के एक नए युग की शुरुआत का संकेत भी दिया है।


    भारत के लिए टी20 में शतक का कौन सा रिकॉर्ड?

    भारत की महिला टीम की ओर से टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अब तक तीन शतक दर्ज किए गए हैं। स्मृति मंधाना ने इस सूची में दो बार अपना नाम दर्ज कराया है। उन्होंने 2025 में इंग्लैंड के खिलाफ ट्रेंट ब्रिज में 112 रन की शानदार पारी खेली थी। हालांकि, मंधाना की 124 रन की पारी भारतीय महिला खिलाड़ी की ओर से टी20 अंतरराष्ट्रीय का सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर है। वहीं हरमनप्रीत कौर ने 2018 टी20 विश्व कप में न्यूजीलैंड के खिलाफ 103 रन की पारी खेलकर यह उपलब्धि हासिल की थी।


    मंधाना का शतक के मामले में कौन सा रिकॉर्ड?

    स्मृति मंधाना ने महिला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा शतक लगाने के मामले में भी नया रिकॉर्ड बना लिया है। उनके नाम अब 18 अंतरराष्ट्रीय शतक हो गए हैं। वह इस सूची में ऑस्ट्रेलिया की मेग लैनिंग और दक्षिण अफ्रीका की लॉरा वोल्वार्ड्ट से आगे निकल गई हैं। ऑस्ट्रेलिया की पूर्व कप्तान मेग लैनिंग और दक्षिण अफ्रीका की स्टार बल्लेबाज एल वोल्वार्ड्ट 17-17 शतकों के साथ संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर हैं। वेस्टइंडीज की हेली मैथ्यूज 15 शतकों के साथ चौथे और न्यूजीलैंड की सूजी बेट्स तथा इंग्लैंड की टैमी ब्यूमोंट 14-14 शतकों के साथ संयुक्त रूप से पांचवें स्थान पर हैं।


    महिला T20I में भारत के लिए सबसे ज्यादा छक्के

    स्मृति मंधाना ने हॉन्गकॉन्ग के खिलाफ दुबई में खेली अपनी शानदार पारी के दौरान सात छक्के लगाए। इसके साथ ही उन्होंने भारत की महिला टीम के लिए टी20 अंतरराष्ट्रीय में सर्वाधिक छक्के लगाने का रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया। मंधाना के नाम अब इस फॉर्मेट में 95 छक्के हैं, जबकि हरमनप्रीत कौर ने 89 छक्के लगाए हैं।


    महिला टी20 एशिया कप का कौन सा रिकॉर्ड टूटा?

    स्मृति मंधाना ने महिला टी20 एशिया कप के इतिहास में सबसे बड़ी व्यक्तिगत पारी का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। उन्होंने 2026 में दुबई में हांगकांग के खिलाफ नाबाद 120 रन बनाए, जो इस टूर्नामेंट में अब तक का सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर है। उन्होंने श्रीलंका की चमारी अटापट्टू का 2024 में मलयेशिया के खिलाफ बनाया गया नाबाद 119 रन का रिकॉर्ड पीछे छोड़ा।


    महिला टी20 एशिया कप में सबसे बड़े टीम स्कोर

    महिला टी20 एशिया कप में सबसे बड़े टीम स्कोर के मामले में भारत का दबदबा नजर आता है। भारत ने 2024 में दांबुला में यूएई के खिलाफ 201/5 रन बनाकर टूर्नामेंट का सर्वोच्च स्कोर खड़ा किया था। वहीं 2026 में दुबई में हॉन्गकॉन्ग के खिलाफ भारत ने 193/5 रन बनाए, जो इस सूची में दूसरे स्थान पर है।

  • देशभर में आज श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की धूम…. जानिए क्या है पूजा का शुभ मुहूर्त

    देशभर में आज श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की धूम…. जानिए क्या है पूजा का शुभ मुहूर्त


    नई दिल्ली।
    आज देशभर में जन्माष्टमी (Krishna Janmashtami 2026) का महापर्व मनाया जा रहा है। जन्माष्टमी को कृष्णाष्टमी, गोकुलाष्टमी, कृष्ण जयंती, श्रीकृष्ण जयंती, यदुकुलाष्टमी और अष्टमी रोहिणी के नामों से भी जाना जाता है. हर साल यह पर्व भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है. यह पर्व भगवान विष्णु (Lord Vishnu) के आठवें अवतार श्री कृष्ण के जन्मोत्सव (Krishna Janmashtami 2026) के रूप में मनाया जाता है. द्रिक पंचांग के अनुसार, यह भगवान कृष्ण का 5253वां जन्मोत्सव है।

    जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल की उपासना की जाती है. भक्त इस दिन व्रत रखते हैं और विधि-विधान से भगवान का श्रृंगार करते हैं. लड्डू गोपाल को पंचामृत से स्नान कराया जाता है, सुंदर वस्त्र और आभूषण पहनाए जाते हैं और उन्हें पालने में बैठाकर झुलाया जाता है. तो आइए जानते हैं कि कृष्ण जन्माष्टमी पर आज रात लड्डू गोपाल के पूजन का क्या मुहूर्त (Muhurat) रहेगा।


    कृष्ण जन्माष्टमी 2026 शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat)

    भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की तिथि 4 सितंबर यानी आज अर्धरात्रि में 2 बजकर 25 मिनट पर शुरू हो चुकी है, जो कि 5 सितंबर की रात 12 बजकर 13 मिनट पर समाप्त होगी. आज श्रीकृष्ण की पूजा का मुहूर्त रात 11 बजकर 57 मिनट से लेकर 12 बजकर 42 मिनट तक रहेगा, जिसके लिए कुल 45 मिनट मिलेंगे. इसी अवधि में लड्डू गोपाल का जन्म होगा और जन्मोत्सव मनाया जाएगा.

    भगवान कृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में हुआ था और इसलिए, कृष्ण जन्माष्टमी हमेशा रोहिणी नक्षत्र में ही मनाई जाती है. रोहिणी नक्षत्र अर्धरात्रि में 12 बजकर 29 मिनट पर लग चुका है और इसका समापन आज रात 11 बजकर 4 मिनट पर होगा.


    कृष्ण जन्माष्टमी की पूजन सामग्री (Janmashtami Puja Samagri)

    जन्माष्टमी के दिन श्री कृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर लड्डू गोपाल के पूजन और भव्य श्रृंगार के लिए मुख्य रूप से बाल गोपाल की मूर्ति, झूला, नए वस्त्र, मुकुट, बांसुरी, मोरपंख, चंदन, रोली, अक्षत, दीपक, धूप, कपूर और ताजे फूलों की आवश्यकता होती है. इसके साथ ही भगवान के अभिषेक के लिए पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल) और उनके प्रिय भोग के रूप में माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी, ऋतुफल, मिठाई तथा पान-सुपारी तैयार की जाती है, जिसमें तुलसी दल मिलाना अत्यंत अनिवार्य माना गया है।


    कृष्ण जन्माष्टमी पर ऐसे करें श्रीकृष्ण की पूजा

    कृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर भगवान श्री कृष्ण के बाल रूप ‘लड्डू गोपाल’ की पूजा के लिए सबसे पहले सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूरे दिन सात्विक रहते हुए व्रत का संकल्प लें. पूजन स्थल एवं मंदिर को अच्छे से साफ कर सजाएं और बाल गोपाल के लिए एक सुंदर झूला तैयार करें. मुख्य पूजा मध्यरात्रि 12 बजे की जाती है, जब भगवान का जन्म हुआ था; इस समय लड्डू गोपाल को पहले गंगाजल और फिर पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल) से स्नान कराकर नए वस्त्र, मुकुट, बांसुरी, मोरपंख और चंदन से उनका दिव्य श्रृंगार करें।

    इसके बाद उन्हें झूले में विराजमान कराकर प्रेमपूर्वक झूला झुलाएं और उनके अत्यंत प्रिय माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी, पंचामृत एवं फलों का भोग लगाएं, जिसमें तुलसी दल मिलाना अनिवार्य माना गया है. अंत में धूप-दीप जलाकर श्रद्धापूर्वक आरती करें, अनजाने में हुई भूल-चूक के लिए क्षमा प्रार्थना करें और सभी में प्रसाद बांटकर अपना व्रत खोलें।


    इन दिव्य मंत्रों का करें जाप (Sri Krishna Mantra)

    – कृं कृष्णाय नमः
    – ऊं देविकानन्दनाय विधमहे वासुदेवाय धीमहि तन्नो कृष्ण:प्रचोदयात
    – ओम क्लीम कृष्णाय नमः
    – गोकुल नाथाय नमः
    – ऊं नमो भगवते श्रीगोविन्दाय नम:

    कृष्ण जन्माष्टमी उपाय (Krishna Janmashtami Upay)

    1. जन्माष्टमी की रात 12 बजे लड्डू गोपाल के जन्मोत्सव के बाद केसर मिश्रित दूध से उनका अभिषेक करें. धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली का वास होता है.

    2. जन्माष्टमी की रात भगवान श्रीकृष्ण को पान का पत्ता अर्पित करना भी शुभ माना जाता है. मान्यता है कि अगले दिन उस पत्ते पर रोली से श्री यंत्र बनाकर उसे तिजोरी या धन रखने के स्थान पर रखने से आर्थिक परेशानियों से राहत मिल सकती है।

  • भारत की डिफेंस कंपनी से 768 करोड़ की डील में चूक, गई एस्टोनिया के रक्षा मंत्री की कुर्सी

    भारत की डिफेंस कंपनी से 768 करोड़ की डील में चूक, गई एस्टोनिया के रक्षा मंत्री की कुर्सी


    नई दिल्ली। यूक्रेन के लिए गोला-बारूद खरीदने की 70 मिलियन यूरो यानी करीब ₹768.50 करोड़ से अधिक की डिफेंस डील विवादों में घिर गई है। इस मामले की राजनीतिक जिम्मेदारी लेते हुए एस्टोनिया के रक्षा मंत्री हन्नो पेवकुर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। पेवकुर 2022 से रक्षा मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

    विवाद उस समय सामने आया, जब डील में भारत के स्वामित्व वाली एक ऐसी कंपनी को शामिल किया गया, जिसका इससे पहले आर्टिलरी शेल्स बेचने का कोई रिकॉर्ड नहीं था। पेवकुर ने बुधवार को इस्तीफे की घोषणा करते हुए कहा कि वह इस डिफेंस डील की जिम्मेदारी ले रहे हैं।

    इटली की कंपनी से हुआ था करार
    मामला 2024 में हुए उस समझौते से जुड़ा है, जिसे एस्टोनिया के सेंटर फॉर डिफेंस इनवेस्टमेंट्स ने इटली में रजिस्टर्ड Datasel SRL नाम की कंपनी के साथ किया था। इसी साल Datasel को भारत की Neco Defence Munitions ने खरीद लिया था।

    इस डील का उद्देश्य यूक्रेन के लिए तोपखाने के गोले उपलब्ध कराना था। एस्टोनिया यूक्रेन का मजबूत समर्थक रहा है और उस समय यूक्रेनी सेना को गोला-बारूद की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा था।

    एस्टोनिया ने इस खरीद के लिए यूरोपीय संघ की European Peace Facility से मिलने वाली राशि का इस्तेमाल किया। डील के तहत कंपनी को बड़ी रकम एडवांस में भी दी गई थी।

    डिलीवरी में होती रही देरी, क्वालिटी पर भी सवाल
    करार के बाद उम्मीद थी कि कुछ ही महीनों में गोला-बारूद यूक्रेन पहुंच जाएगा। हालांकि, उत्पादन से जुड़ी कथित समस्याओं के चलते डिलीवरी लगातार टलती रही। आखिरकार 2025 में जब गोला-बारूद की आपूर्ति हुई तो उसकी गुणवत्ता को लेकर भी सवाल खड़े हो गए।

    एस्टोनिया के सेंटर फॉर डिफेंस इनवेस्टमेंट्स के डायरेक्टर ने भी माना कि यह सौदा नहीं किया जाना चाहिए था। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, “अगर मैं एक घर बनाना शुरू करूं और ऐसी कंपनी को काम पर रखूं, जिसने पहले कभी घर नहीं बनाया हो, तो यह संदेह होना स्वाभाविक है कि वह घर पूरा नहीं कर पाएगी।”

    रक्षा मंत्री बोले- हर डील की निगरानी संभव नहीं
    हालांकि, हन्नो पेवकुर ने रक्षा मंत्रालय के भीतर जिम्मेदारियों के बंटवारे का बचाव किया। उनका कहना था कि रक्षा मंत्री व्यक्तिगत रूप से हर डिफेंस डील की निगरानी नहीं करता।

    एस्टोनिया के प्रधानमंत्री Kristen Michal ने भी कहा कि उन्हें इस मामले में पेवकुर की कोई व्यक्तिगत गलती नजर नहीं आती। इसके बावजूद राजनीतिक जिम्मेदारी तय किए जाने की स्थिति में रक्षा मंत्री ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

    इस्तीफे के बाद पेवकुर ने कहा कि उन्होंने यह कदम इस विश्वास के साथ उठाया है कि एस्टोनिया ने अपनी राष्ट्रीय रक्षा को मजबूत करने के लिए सही फैसले लिए हैं।

  • 5 माह भी नहीं चली कॉकरोच जनता पार्टी….. मई में बनी और सितंबर में टूट गई, दीपके पर गंभीर आरोप

    5 माह भी नहीं चली कॉकरोच जनता पार्टी….. मई में बनी और सितंबर में टूट गई, दीपके पर गंभीर आरोप

    नई दिल्ली। राजनीति के दलदल से दूर रहने की बात करने वाले अभिजीत दीपके (Abhijeet Deepke) अब उसमें फंसते हुए नजर आ रहे हैं। अभिजीत दीपके (Abhijeet Deepke) की कॉकरोच जनता पार्टी (Cockroach Janata Party) में बगावत हो गई है। कॉकरोच पार्टी के एक सदस्य ने ना सिर्फ दीपके का साथ छोड़ा है, बल्कि एक नई पार्टी बनाने का भी ऐलान कर दिया है। यही नहीं इस नेता ने अभिजीत दीपके और उनके साथियों पर कई बड़े आरोप भी लगाए हैं।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक पेपर लीक आंदोलन से जुड़े रहे कॉकरोच पार्टी के सदस्य मनीष ब्रह्मभट्ट ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर खुद को CJP से अलग कर लिया। साथ ही उन्होंने एक अलग गुट, ‘कॉकरोच जनता पार्टी-डेमोक्रेटिक’ (CJP-D) बनाने का ऐलान कर दिया है। ब्रह्मभट्ट ने पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि आंदोलन की सफलता के बाद जमीनी कार्यकर्ताओं और छात्रों का सौदा कर दिया गया और संगठन अब ‘टीम केजरीवाल’ में बदल गया है।


    मनीष ब्रह्मभट्ट क्या-क्या बोल गए?

    मनीष ब्रह्मभट्ट ने आरोप लगाया कि आंदोलन के सफल होने के बाद जो 12 सदस्यीय राष्ट्रीय टीम बनाई गई, उसके लिए किसी भी जमीनी कार्यकर्ता, छात्र या सोशल मीडिया वॉलंटियर से सलाह नहीं ली गई। ब्रह्मभट्ट ने कहा, “आंदोलन देश का था, लेकिन सफलता मिलते ही इसे बेच दिया गया। नई टीम के 8 सदस्य आम आदमी पार्टी से जुड़े हैं। यह पूरी टीम अरविंद केजरीवाल के राजनीतिक हितों को ध्यान में रखकर बनाई गई है।”

    उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन में शिवसेना, सपा, राजद, बीजेपी, कांग्रेस और एनसीपी से जुड़े युवाओं ने भी हिस्सा लिया था, लेकिन नई टीम में किसी को जगह नहीं मिली। साथ ही महिला, सिख और मुस्लिम चेहरों को भी दरकिनार कर दिया गया। ब्रह्मभट्ट ने कहा कि जिस आंदोलन की नींव पेपर लीक के खिलाफ पड़ी थी, उसी आंदोलन के नेतृत्व ने अब मेरिट को किनारे कर दिया है।


    ‘CJP-D में सबको मिलेगी जगह’

    इस दौरान मनीष ब्रह्मभट्ट ने कहा है कि CJP-D को एक सच्चा लोकतांत्रिक और राष्ट्रव्यापी संगठन बनाया जाएगा। इसके तहत हर राज्य के स्थानीय आंदोलनकारियों और वॉलंटियर्स में से 5-5 प्रतिनिधियों को चुना जाएगा, ताकि हर जगह की आवाज को बराबर जगह मिल सके।


    क्या कह रहे हैं अभिजीत दीपके?

    दूसरी तरफ केजरीवाल से सांठ-गांठ जैसे आरोपों को अभिजीत दीपके ने सिरे से खारिज किया है। एक बयान में उन्होंने कहा है कि उनकी पार्टी सिर्फ छात्रों की A टीम है और किसी भी अन्य किसी भी CJP का कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा, “महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री कहते हैं कि हम कांग्रेस की ‘B’ टीम हैं, कुछ लोग हमें आम आदमी पार्टी की ‘B’ टीम बताते हैं। मुझे लगता है कि इन नेताओं को एक साथ बैठकर तय कर लेना चाहिए। हमारी तरफ से बात साफ है। हम सिर्फ और सिर्फ छात्रों की ‘A’ टीम हैं।”


    दीपके ने बनाई थी कॉकरोच पार्टी

    इससे पहले देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत के एक बयान के विरोध में महाराष्ट्र के अभिजीत दीपके ने कॉकरोच जनता पार्टी की मुहिम शुरू की थी। देखते ही देखते इस ऑनलाइन मुहिम से लाखों लोग जुड़ गए। इसके बाद पार्टी ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन की अगुवाई की थी। आंदोलन की सफलता के बाद पार्टी चर्चा में है।

  • Janmashtami 2026: MP के इंदौर जिले का अनोखा मंदिर…. जहां विराजमान हैं मूछों वाले कृष्ण

    Janmashtami 2026: MP के इंदौर जिले का अनोखा मंदिर…. जहां विराजमान हैं मूछों वाले कृष्ण


    इंदौर।
    देशभर में आज भगवान श्रीकृष्ण (Lord Shri Krishna) के जन्मोत्सव (Janmashtami 2026) की धूम मची हुई है. सभी मंदिरों में विशेष साज-सज्जा की गई है और कान्हा के जन्म की तैयारियां चल रही हैं. लेकिन आज हम आपको मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के इंदौर जिले (Indore district) के एक ऐसे अनोखे कृष्ण मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसके बारे में जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे। आइए जानते हैं इस मंदिर की खासियत….

    इंदौर जिले के सबसे आखिरी गांव गिरोता में भगवान श्रीकृष्ण का एक ऐसा मंदिर है, जहां कान्हा अपने सामान्य स्वरूप से बिल्कुल अलग मूंछों वाले कृष्ण के रूप में विराजमान हैं. ये मूंछें आन-बान-शान का प्रतीक मानी जाती हैं. मूंछें आत्मसम्मान और मर्यादा का भी प्रतीक मानी जाती हैं. इसी रूप में यहां भगवान श्रीकृष्ण विराजमान हैं. इतना ही नहीं, इस मंदिर को लेकर कई ऐसी मान्यताएं और कथाएं प्रचलित हैं, जो इसे बेहद खास बनाती हैं।


    अनोखी प्रतिमा विराजमान

    गांव के मुख्य चौराहे पर स्थित इस मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण की अनोखी प्रतिमा विराजमान है. भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा में मूंछें हैं. यही वजह है कि यहां कान्हा को ‘मूंछों वाले कृष्ण’ के नाम से जाना जाता है. गांव के मुख्य चौराहे पर स्थित होने के कारण इस मंदिर को ‘चौराहे वाले बा के मंदिर’ के रूप में भी श्रद्धा के साथ पूजा जाता है।


    मंदिर से जुड़ी मान्यताएं

    इस मंदिर से जुड़ी कई मान्यताएं और कथाएं भी हैं. इसको लेकर स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों पहले गांव में ज्यादातर घर लकड़ी के बने हुआ करते थे. इसी दौरान एक बार गांव में अचानक भीषण आग लग गई. आग की लपटों ने मंदिर के आसपास बने कई घरों को अपनी चपेट में ले लिया, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि मंदिर भी लकड़ी का होने के बावजूद आग से सुरक्षित रहा. बताया जाता है कि जब पुजारी ने आग की लपटों को बढ़ते देखा तो भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा को वहां से हटाने का प्रयास किया, लेकिन प्रतिमा अपने स्थान से नहीं हिली. इसके बाद लोगों की आस्था इस मंदिर के प्रति और भी मजबूत हो गई।


    मंदिर की बनावट अलग

    इस मंदिर की बनावट भी इसे दूसरे मंदिरों से अलग दिखती है. मंदिर एक तरह से द्वार के आकार में बना हुआ है. यही वजह है कि गांव के लोग मंदिर के नीचे से होकर गुजरते हैं. स्थानीय मान्यता है कि मंदिर के नीचे से होकर गुजरने से भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद मिलता है और श्रद्धालुओं के मनोरथ एवं कार्य सिद्ध होते हैं।


    जन्माष्टमी पर आयोजन

    मंदिर के पुजारी का कहना है कि वैसे तो मंदिर में प्रतिदिन पूजा-पाठ और भजन-कीर्तन का दौर चलता रहता है, लेकिन श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और एकादशी के मौके पर यहां विशेष आयोजन किए जाते हैं. जन्माष्टमी पर मंदिर को विशेष रूप से सजाया जाता है. बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन के लिए पहुंचते हैं और रात तक भजन-कीर्तन का दौर चलता है।


    बारिश से जुड़ी मान्यता

    इस मंदिर से जुड़ी एक और बेहद खास मान्यता है. बताया जाता है कि जब आसपास के इलाकों में बारिश नहीं होती और लोग परेशान हो जाते हैं, तब मंदिर में विशेष रूप से डोल सजाया जाता है. श्रद्धालु इस डोल के आसपास कुछ दिनों तक फेरे लगाते हैं और ‘हरे राम, हरे कृष्ण’ का संकीर्तन करते हैं. स्थानीय लोगों की मान्यता है कि इस धार्मिक अनुष्ठान के बाद क्षेत्र में अच्छी बारिश होती है।

  • चंडीगढ़-मोहाली सीमा पर बड़े किसान आंदोलन की तैयारी… महिलाएं भी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ हो रही शामिल

    चंडीगढ़-मोहाली सीमा पर बड़े किसान आंदोलन की तैयारी… महिलाएं भी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ हो रही शामिल


    चंडीगढ़।
    संयुक्त किसान मोर्चा (Samyukt Kisan Morcha) का चंडीगढ़-मोहाली सीमा (Chandigarh-Mohali border) पर सात दिवसीय पक्का मोर्चा (Solid Front) जारी है। बृहस्पतिवार को प्रदेश के विभिन्न गांवों से किसान और महिलाएं ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ मोर्चा स्थल पर पहुंचीं। उन्होंने पानी संकट, कृषि मांगों, गन्ना मूल्य और लैंड पूलिंग नीति को लेकर सरकारों पर हमला बोला।

    मोर्चे में पंजाबी गायक भी समर्थन देने आए। बृहस्पतिवार को किसानों ने बैठक कर मोर्चे को आगे बढ़ाने की रणनीति तय की और नारेबाजी भी की। मोर्चे की अध्यक्षता कर रहे मनजीत सिंह धनेर (Manjit Singh Dhaner) और बलबीर सिंह राजेवाल (Balbir Singh Rajewal) ने पंजाब में गहराते जल संकट को गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि भूजल और नदियों के प्रदूषण से खेती, पशुधन व आम लोगों का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। किसान नेता हरिंदर सिंह लख्खोवाल ने कहा, यदि सरकारें बातचीत के लिए आगे नहीं बढ़ीं, तो किसान देशभर में आंदोलन करेंगे।


    राजेवाल कहेंगे एक साल यहीं रुको तो डेरा डाल देंगे

    रात के करीब तीन बज रहे हैं। हल्की बारिश के बाद मोहाली-चंडीगढ़ सीमा पर ठंडी हवा चल रही है। सड़क किनारे कतार में खड़ी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में अधिकांश किसान नींद ले रहे हैं जबकि कुछ जागकर साथियों और सामान की पहरेदारी कर रहे हैं। कहीं धीमी आवाज में आगे की रणनीति पर चर्चा चल रही है तो कुछ लोग सुबह शुरू होने वाले लंगर की तैयारी में जुटे हैं। पक्के मोर्चे के बीच आधी रात के बाद का यह दृश्य बता रहा है कि किसान केवल सात दिन के प्रदर्शन के लिए नहीं, जरूरत पड़ी तो लंबी लड़ाई के लिए भी तैयारी करके आए हैं।

    माछीवाड़ा से आए किसान हरवंत सिंह ने कहा कि हम राजेवाल की सुनेंगे। वह कहेंगे कि सात सितंबर को वापस घर चलो तो चले जाएंगे। अगर कहेंगे कि छह महीने या एक साल यहीं रुकना है तो हम यहीं डेरा डाल देंगे। हरवंत सिंह जथेदार राजा बलवीर सिंह के नेतृत्व में 32 ट्रॉलियों के साथ मोर्चे में पहुंचे हैं। उनका कहना है कि जब तक किसान नेतृत्व वापस जाने का फैसला नहीं करता, वे धरनास्थल से नहीं हटेंगे।

    एक सितंबर से शुरू हुए मोर्चे में पंजाब के अलग-अलग हिस्सों से किसानों के पहुंचने का सिलसिला लगातार बढ़ रहा है। पहले दिन करीब एक हजार ट्रैक्टर-ट्रॉलियां पहुंचने का दावा किया गया था। दूसरे दिन यह संख्या बढ़कर तीन हजार से अधिक होने की बात किसान संगठनों ने कही। आंदोलन में करीब 32 किसान जत्थेबंदियां शामिल हैं।


    आगामी रणनीति व मांगें

    किसान नेताओं ने शुक्रवार को मोर्चे की अहम बैठक बुलाई है जिसमें अगले संघर्ष का एलान किया जाएगा। उन्होंने पंजाब सरकार से विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की। किसानों ने पानी के पुराने समझौते और लैंड पूलिंग नीति रद्द करने की भी मांग की है। बासमती, मूंग, मक्का, आलू, मटर और गोभी जैसी फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की गारंटी देने की भी मांग की गई है।

  • घर की इन जगहों पर गलती पड़ सकती है भारी वास्तु दोष के संकेत पहचानें और बिना तोड़फोड़ अपनाएं ये आसान उपाय

    घर की इन जगहों पर गलती पड़ सकती है भारी वास्तु दोष के संकेत पहचानें और बिना तोड़फोड़ अपनाएं ये आसान उपाय


    नई दिल्ली। वास्तु शास्त्र में घर की दिशा और वहां रखी वस्तुओं की स्थिति को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक और वास्तु संबंधी मान्यताओं के अनुसार घर में मौजूद ऊर्जा का प्रभाव वहां रहने वाले लोगों के जीवन पर पड़ सकता है। यही वजह है कि घर बनाते समय या सामान व्यवस्थित करते समय दिशाओं का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। अगर घर में लगातार तनाव का माहौल बना रहता है या काम बनते बनते रुक जाते हैं तो कुछ लोग इसे वास्तु दोष से जोड़कर देखते हैं। हालांकि इन परिस्थितियों के पीछे कई व्यावहारिक कारण भी हो सकते हैं।

    वास्तु के अनुसार घर का मुख्य द्वार सबसे महत्वपूर्ण स्थानों में से एक माना जाता है। इसे हमेशा साफ और व्यवस्थित रखने की सलाह दी जाती है। दरवाजे के आसपास गंदगी या अनावश्यक सामान रखने से बचना चाहिए। मान्यता है कि साफ मुख्य द्वार घर में सकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश का मार्ग बनाता है। इसी तरह घर के पूजा स्थल को भी साफ रखना और वहां अनावश्यक सामान जमा नहीं होने देना चाहिए।

    घर की रसोई को लेकर भी वास्तु में कई नियम बताए गए हैं। मान्यता के अनुसार अग्नि तत्व से जुड़े होने के कारण रसोई की दिशा और वहां रखे सामान का विशेष महत्व होता है। गैस चूल्हे और पानी से जुड़े स्थानों को उचित तरीके से व्यवस्थित रखने की सलाह दी जाती है। रसोई में गंदे बर्तन लंबे समय तक पड़े रहने से भी बचना चाहिए।

    वास्तु मान्यताओं में सोने की दिशा को भी महत्वपूर्ण बताया गया है। सामान्य तौर पर दक्षिण दिशा की ओर सिर करके सोने को बेहतर माना जाता है। वहीं सोने के कमरे में बहुत ज्यादा अव्यवस्था रखने से बचने की सलाह दी जाती है। बिस्तर के आसपास अनावश्यक सामान और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की अधिकता कम रखना अच्छा माना जाता है।

    घर में टूटी हुई वस्तुओं को लंबे समय तक संभालकर रखने की आदत से भी बचना चाहिए। टूटे शीशे खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान या बेकार पड़ी वस्तुओं को घर में जमा करने के बजाय उन्हें हटाना बेहतर होता है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार ऐसी वस्तुएं नकारात्मकता का वातावरण बना सकती हैं। व्यावहारिक तौर पर भी घर में अनावश्यक सामान कम होने से साफ सफाई और व्यवस्था बनाए रखना आसान होता है।

    घर के उत्तर पूर्व हिस्से को वास्तु में विशेष महत्व दिया जाता है। इस स्थान को साफ और खुला रखने की सलाह दी जाती है। भारी सामान रखने के बजाय यहां पर्याप्त रोशनी और स्वच्छता बनाए रखना बेहतर माना जाता है। घर में प्राकृतिक रोशनी और हवा का पर्याप्त प्रवेश भी स्वस्थ और आरामदायक वातावरण के लिए उपयोगी होता है।

    अगर किसी घर में वास्तु दोष को लेकर चिंता है तो बिना विशेषज्ञ सलाह के बड़े निर्माण कार्य या तोड़फोड़ करने की जरूरत नहीं है। सबसे पहले घर की साफ सफाई और व्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए। पर्याप्त रोशनी और हवा का प्रबंध करना चाहिए और खराब सामान को हटाना चाहिए। जरूरत महसूस होने पर किसी योग्य वास्तु विशेषज्ञ से घर की स्थिति के अनुसार सलाह ली जा सकती है।

    कुल मिलाकर वास्तु शास्त्र से जुड़े उपाय आस्था और पारंपरिक मान्यताओं का विषय हैं। इन्हें अपनाते समय व्यावहारिक जरूरतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। घर को साफ व्यवस्थित और हवादार रखना अपने आप में बेहतर रहने का वातावरण तैयार करता है। सकारात्मक सोच अच्छे व्यवहार और परिवार के सदस्यों के बीच आपसी सम्मान के साथ इन उपायों को अपनाया जाए तो घर का माहौल अधिक सुखद बनाया जा सकता है।

  • शुक्रवार व्रत में भूलकर भी न करें ये गलतियां सुबह से पूजा तक जानें पूरी विधि और जरूरी नियम

    शुक्रवार व्रत में भूलकर भी न करें ये गलतियां सुबह से पूजा तक जानें पूरी विधि और जरूरी नियम


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में शुक्रवार का दिन मां लक्ष्मी को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुक्रवार के दिन विधि विधान से मां लक्ष्मी की पूजा करने और व्रत रखने से घर में सुख समृद्धि और शांति बनी रहती है। आर्थिक परेशानियों से मुक्ति और परिवार की खुशहाली की कामना से भी कई लोग शुक्रवार का व्रत रखते हैं। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियम के साथ माता लक्ष्मी का पूजन करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।

    शुक्रवार व्रत की शुरुआत सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के साथ की जाती है। इसके बाद साफ कपड़े पहनकर घर के पूजा स्थान की सफाई करनी चाहिए। पूजा स्थल पर मां लक्ष्मी की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें। इसके बाद माता के सामने दीपक जलाकर व्रत का संकल्प लिया जाता है। पूजा के दौरान माता लक्ष्मी को लाल या गुलाबी रंग के फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके साथ ही अक्षत और रोली अर्पित करके माता का ध्यान करना चाहिए।

    मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए पूजा में सफेद मिठाई फल और खीर जैसी चीजों का भोग लगाया जा सकता है। कई जगहों पर शुक्रवार के दिन माता को कमल का फूल अर्पित करने की परंपरा भी है। पूजा के दौरान लक्ष्मी माता के मंत्रों का जाप करना और लक्ष्मी चालीसा या लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करना शुभ माना जाता है। इसके बाद माता की आरती करनी चाहिए और परिवार की सुख शांति तथा आर्थिक समृद्धि के लिए प्रार्थना करनी चाहिए।

    व्रत रखने वाले व्यक्ति को पूरे दिन सात्विक भोजन करने की परंपरा का पालन करना चाहिए। अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार फलाहार किया जा सकता है। कुछ लोग शुक्रवार को निर्जला व्रत रखते हैं जबकि कुछ लोग फल और दूध का सेवन करके व्रत पूरा करते हैं। व्रत की विधि परिवार की परंपरा और अपनी आस्था के अनुसार रखी जा सकती है। शाम के समय दोबारा मां लक्ष्मी की पूजा करके आरती करने के बाद व्रत का पारण किया जाता है।

    शुक्रवार के व्रत में साफ सफाई का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां लक्ष्मी को स्वच्छता प्रिय है इसलिए पूजा स्थल और घर को साफ रखना चाहिए। किसी का अपमान करने या क्रोध करने से बचना चाहिए और जरूरतमंद व्यक्ति की मदद करना शुभ माना जाता है। सामर्थ्य के अनुसार गरीब या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कपड़े या अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान भी किया जा सकता है।

    हालांकि व्रत के दौरान केवल धार्मिक नियमों का पालन ही पर्याप्त नहीं माना जाता बल्कि मन में श्रद्धा और सकारात्मक भावना रखना भी महत्वपूर्ण है। व्रत को केवल आर्थिक लाभ पाने का साधन मानने के बजाय आत्मसंयम और भक्ति के रूप में करना बेहतर माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धा से की गई पूजा व्यक्ति के जीवन में सकारात्मकता और मानसिक शांति ला सकती है।

    इस तरह शुक्रवार का व्रत सरल तरीके से रखा जा सकता है। सुबह स्नान और संकल्प से लेकर मां लक्ष्मी की पूजा भोग मंत्र जाप और आरती तक सभी कार्य श्रद्धा के साथ करने चाहिए। अगर किसी व्यक्ति को स्वास्थ्य संबंधी समस्या है तो लंबे समय तक भूखे रहने के बजाय अपनी स्थिति के अनुसार व्रत रखना चाहिए। धार्मिक परंपराओं में भी श्रद्धा के साथ विवेक और संयम को महत्वपूर्ण माना गया है।

  • 4 सितंबर को भोपाल में जमकर बरसेंगे बादल IMD ने जारी किया भारी बारिश का अलर्ट दिनभर छाए रहेंगे बादल

    4 सितंबर को भोपाल में जमकर बरसेंगे बादल IMD ने जारी किया भारी बारिश का अलर्ट दिनभर छाए रहेंगे बादल


    भोपाल। भोपाल में 4 सितंबर को मौसम एक बार फिर करवट लेने वाला है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक राजधानी में शुक्रवार को आमतौर पर बादल छाए रहने और भारी बारिश होने की संभावना है। भोपाल एयरपोर्ट के लिए जारी शहर के पूर्वानुमान में 4 सितंबर को न्यूनतम तापमान करीब 23 डिग्री और अधिकतम तापमान करीब 24 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान जताया गया है। इसके साथ ही भारी बारिश की चेतावनी भी दर्ज की गई है।

    मानसून की सक्रियता के बीच भोपाल और आसपास के इलाकों में मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है। कभी तेज बारिश तो कभी बादलों के बीच हल्की बौछारों का दौर देखने को मिल रहा है। अब 4 सितंबर को बारिश की गतिविधि बढ़ने की संभावना है। ऐसे में सुबह से ही आसमान में बादल छाए रह सकते हैं और दिन के दौरान कई हिस्सों में तेज बारिश देखने को मिल सकती है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान में भारी बारिश के साथ स्थानीय स्तर पर गरज चमक की स्थिति बनने की संभावना से भी इनकार नहीं किया गया है।

    बारिश का असर शहर की सड़कों और निचले इलाकों में भी दिखाई दे सकता है। तेज बारिश होने की स्थिति में कुछ स्थानों पर पानी जमा होने से यातायात प्रभावित हो सकता है। सड़कों पर फिसलन बढ़ने के कारण दोपहिया वाहन चालकों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होगी। बारिश के दौरान खुले स्थानों पर रहने वाले लोगों को भी मौसम के अचानक बदलने पर सुरक्षित स्थान का रुख करना चाहिए।

    मध्य प्रदेश में इस समय मानसूनी गतिविधियां सक्रिय बनी हुई हैं। हालिया मौसम रिपोर्टों में प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने और अगले दिनों में पश्चिमी मध्य प्रदेश में बारिश की गतिविधि बढ़ने की संभावना जताई गई थी। भोपाल भी इस मौसम प्रणाली के प्रभाव वाले इलाकों में शामिल है।

    4 सितंबर के बाद भी भोपाल में मौसम पूरी तरह साफ होने के संकेत नहीं हैं। शहर के लिए उपलब्ध IMD पूर्वानुमान में 5 सितंबर को भी बारिश या गरज चमक की संभावना बताई गई है। इसके बाद 6 और 7 सितंबर को भी बादल और बारिश की गतिविधि बने रहने का अनुमान है। यानी राजधानी में मानसून की सक्रियता आने वाले दिनों में भी दिखाई दे सकती है।

    मौसम विभाग के पूर्वानुमान को देखते हुए लोगों को बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने और जरूरी होने पर ही सावधानी के साथ घर से निकलने की सलाह दी जा सकती है। वाहन चालकों को पानी भरी सड़कों पर धीमी गति से वाहन चलाना चाहिए और बिजली चमकने के दौरान खुले मैदान या पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचना चाहिए। किसानों और ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को भी स्थानीय मौसम अपडेट पर नजर बनाए रखनी चाहिए।

    कुल मिलाकर 4 सितंबर को भोपाल में बारिश का दिन रहने के आसार हैं। बादलों की मौजूदगी के साथ भारी बारिश मौसम को सुहाना जरूर बनाएगी लेकिन कई इलाकों में जलभराव और यातायात जैसी परेशानियां भी सामने आ सकती हैं। ऐसे में राजधानी के लोगों के लिए मौसम विभाग के ताजा अपडेट पर नजर रखना और बारिश के दौरान सावधानी बरतना सबसे जरूरी होगा।

  • वृंदावन जाने से पहले कर लें पूरी तैयारी मंदिर में क्या ले जाएं और बंदरों से कैसे बचें जानें जरूरी Travel Tips

    वृंदावन जाने से पहले कर लें पूरी तैयारी मंदिर में क्या ले जाएं और बंदरों से कैसे बचें जानें जरूरी Travel Tips


    उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में स्थित वृंदावन भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहां बांके बिहारी मंदिर इस्कॉन मंदिर प्रेम मंदिर निधिवन और रंगनाथ मंदिर जैसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थल हैं। खासतौर पर जन्माष्टमी और होली जैसे बड़े त्योहारों के दौरान यहां देश के अलग अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। अगर आप भी वृंदावन जाने की तैयारी कर रहे हैं तो यात्रा शुरू करने से पहले कुछ जरूरी बातों की जानकारी रखना बेहद फायदेमंद रहेगा।

    वृंदावन घूमने के लिए मौसम का ध्यान रखना भी जरूरी है। अक्टूबर से मार्च के बीच मौसम अपेक्षाकृत सुहावना रहता है और इस दौरान घूमना आसान हो सकता है। वहीं जन्माष्टमी और होली जैसे अवसरों पर धार्मिक उत्साह अपने चरम पर होता है लेकिन भारी भीड़ के कारण यात्रा चुनौतीपूर्ण भी हो सकती है। ऐसे समय में होटल परिवहन और मंदिर दर्शन की योजना पहले से बनाना बेहतर रहता है।

    यात्रा पर निकलते समय अपने साथ जरूरत से ज्यादा सामान ले जाने से बचें। हल्का बैग रखें जिसमें पानी की बोतल मोबाइल चार्जर जरूरी दवाइयां पहचान पत्र और कुछ नकद पैसे जैसी आवश्यक चीजें हों। भारी सामान के साथ मंदिरों और भीड़भाड़ वाली गलियों में घूमना मुश्किल हो सकता है।

    वृंदावन के मंदिरों में स्थानीय धार्मिक परंपराओं और व्यवस्थाओं का सम्मान करना जरूरी है। अलग अलग मंदिरों के अपने नियम हो सकते हैं। कुछ स्थानों पर मोबाइल फोन कैमरा या बैग ले जाने पर पाबंदी हो सकती है। इसलिए जिस मंदिर में दर्शन के लिए जा रहे हैं वहां के मौजूदा नियमों की जानकारी पहले ले लेना बेहतर होगा।

    अगर पहली बार वृंदावन जा रहे हैं तो प्रमुख धार्मिक स्थलों की सूची पहले से बना लें। बांके बिहारी मंदिर के अलावा इस्कॉन मंदिर प्रेम मंदिर निधिवन और रंगनाथ मंदिर जैसे स्थानों को अपनी यात्रा योजना में शामिल किया जा सकता है। भीड़ वाले दिनों में सभी जगहों पर जाना आसान नहीं होता इसलिए प्राथमिकता के हिसाब से प्लान बनाना ज्यादा बेहतर रहेगा।

    लंबी यात्रा और भीड़भाड़ के बीच स्वास्थ्य का भी ध्यान रखें। सिरदर्द पेट की परेशानी या दूसरी सामान्य दिक्कतों के लिए डॉक्टर द्वारा बताई गई जरूरी दवाइयां साथ रखना उपयोगी हो सकता है। बुजुर्गों बच्चों और ज्यादा देर तक चलने में परेशानी वाले लोगों के लिए पर्याप्त आराम की व्यवस्था करना भी जरूरी है।

    वृंदावन में बंदरों की मौजूदगी भी यात्रियों के लिए चुनौती बन सकती है। बंदर अक्सर खाने पीने की चीजों या हाथ में मौजूद सामान की तरफ आकर्षित हो सकते हैं। इसलिए उनके सामने खाना न दिखाएं और मोबाइल चश्मा पर्स या दूसरी जरूरी वस्तुएं संभालकर रखें। बंदरों के बहुत करीब जाने या उन्हें छेड़ने से भी बचना चाहिए।

    भीड़भाड़ वाले धार्मिक आयोजनों के दौरान अपने सामान और साथ आए लोगों पर नजर बनाए रखें। बच्चों को अकेला न छोड़ें और किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन या पुलिस की मदद लें। मंदिर परिसर में धक्का मुक्की से बचते हुए कतार और सुरक्षा व्यवस्था का पालन करें।

    वृंदावन की यात्रा सिर्फ दर्शन तक सीमित नहीं होती बल्कि यहां की गलियों और धार्मिक माहौल का अनुभव भी लोगों को आकर्षित करता है। हालांकि त्योहारों के दौरान भीड़ और यातायात व्यवस्था को देखते हुए धैर्य रखना जरूरी है। समय का अतिरिक्त मार्जिन रखें और प्रशासन की ओर से जारी ट्रैफिक डायवर्जन या यात्रा संबंधी ताजा निर्देशों का पालन करें। थोड़ी सी तैयारी और सावधानी के साथ वृंदावन की धार्मिक यात्रा को सुरक्षित और यादगार बनाया जा सकता है।