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  • अमेरिका-ईरान तनाव फिर चरम पर IRGC के ठिकानों पर हमला ट्रंप बोले- पलटवार की भारी कीमत चुकानी होगी

    अमेरिका-ईरान तनाव फिर चरम पर IRGC के ठिकानों पर हमला ट्रंप बोले- पलटवार की भारी कीमत चुकानी होगी


    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बेहद गंभीर दौर में पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC के ठिकानों को निशाना बनाकर सैन्य कार्रवाई की है। हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने साफ संकेत दिया है कि अगर ईरान ने अमेरिकी हमले का जवाब देने की कोशिश की तो वाशिंगटन की ओर से पहले से कहीं ज्यादा जोरदार कार्रवाई की जा सकती है।

    अमेरिकी सेंट्रल कमांड की ओर से बताया गया कि स्थानीय समय के अनुसार दोपहर करीब 12 बजे अमेरिकी बलों ने ईरान में IRGC से जुड़े ठिकानों पर हमले शुरू किए। अमेरिकी पक्ष के मुताबिक यह कार्रवाई होर्मुज स्ट्रेट में वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैनिकों के खिलाफ IRGC की ओर से किए गए कथित हमलों के प्रयासों के बाद की गई है।

    यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव पहले से बढ़ा हुआ है। सोमवार रात दोनों पक्षों के बीच हमलों का आदान प्रदान भी हुआ था। बताया जा रहा है कि एक महीने से अधिक समय के बाद दोनों देशों के बीच फिर से इस तरह की सीधी सैन्य कार्रवाई हुई है। नए हमले ने क्षेत्र में बड़े संघर्ष की आशंका को और बढ़ा दिया है।

    राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए भी अमेरिकी कार्रवाई की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट के आसपास मौजूद ईरानी ठिकानों को निशाना बना रहा है। ट्रंप ने इस कार्रवाई को बड़ा और शक्तिशाली बताया। उनके मुताबिक ईरान की ओर से होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री माइन बिछाने की कथित कोशिश और जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर आठ मिसाइल दागे जाने के बाद यह कदम उठाया गया।

    दूसरी तरफ ईरान ने भी अमेरिकी हमले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। IRGC के प्रवक्ता सरदार मोहेबी ने कहा कि अमेरिका को ईरान पर किए गए ताजा हमले पर पछताना पड़ेगा और उसे कठोर जवाब का सामना करना होगा। ईरानी सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ और खातम अल-अनबिया मुख्यालय की ओर से भी अमेरिकी कार्रवाई की निंदा की गई है।

    ईरानी पक्ष ने कहा है कि अमेरिकी सेना की ओर से की जा रही कार्रवाई का जवाब दिया जाएगा। ईरानी बयान में अमेरिका को क्षेत्र में अपनी सैन्य गतिविधियां बढ़ाने के खिलाफ चेतावनी दी गई है। इससे दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव बढ़ने की आशंका बनी हुई है।

    इस बीच अमेरिका ने अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भी कदम उठाया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी नागरिकों के लिए सुरक्षा अलर्ट जारी किया है। लोगों को ज्यादा सतर्क रहने और संभावित उड़ान रद्द होने तथा हवाई क्षेत्र बंद होने जैसी परिस्थितियों के लिए तैयार रहने को कहा गया है। यात्रा में बाधा आने की आशंका के बीच क्षेत्र में रह रहे अमेरिकी नागरिकों को स्थानीय परिस्थितियों पर नजर रखने की सलाह दी गई है।

    अमेरिकी हमले और ईरान की जवाबी धमकी के बाद अब दुनिया की नजर इस बात पर है कि दोनों देशों के बीच तनाव आगे किस दिशा में जाता है। होर्मुज स्ट्रेट की रणनीतिक अहमियत को देखते हुए किसी भी नए सैन्य टकराव का असर पूरे मध्य पूर्व के साथ अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।

  • वाइब्रेंट गुजरात 2027 के लिए CM पटेल का बड़ा प्लान दिग्गज कंपनियों को गुजरात में निवेश का दिया न्योता

    वाइब्रेंट गुजरात 2027 के लिए CM पटेल का बड़ा प्लान दिग्गज कंपनियों को गुजरात में निवेश का दिया न्योता


    नई दिल्ली। वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट 2027 की तैयारियों के तहत मुंबई में आयोजित रोड शो के दौरान गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने देश के कई दिग्गज उद्योगपतियों से मुलाकात की। इन बैठकों में गुजरात में नए निवेश की संभावनाओं से लेकर मौजूदा परियोजनाओं के विस्तार तक कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने उद्योग जगत को गुजरात में निवेश के लिए उपलब्ध सुविधाओं और संभावनाओं से अवगत कराया।

    मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा से मुलाकात की। बैठक में गुजरात में महिंद्रा ग्रुप की मौजूदगी को और मजबूत करने पर चर्चा हुई। खास तौर पर इलेक्ट्रिक व्हीकल इकोसिस्टम और भविष्य की मोबिलिटी से जुड़े समाधानों में निवेश की संभावनाओं पर बातचीत हुई। इसके साथ ही गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी यानी गिफ्ट सिटी में महिंद्रा ग्रुप की मौजूदगी बढ़ाने के विकल्पों पर भी विचार किया गया।

    सीएम पटेल ने बताया कि गुजरात का मजबूत पोर्ट नेटवर्क बेहतर लॉजिस्टिक्स सुविधाएं विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश के अनुकूल औद्योगिक नीतियां राज्य को नई पीढ़ी के मैन्युफैक्चरिंग और वित्तीय सेवाओं के लिए बेहतर जगह बनाती हैं। बैठक में इन्हीं सुविधाओं के आधार पर गुजरात में कारोबार के विस्तार की संभावनाओं पर विचार किया गया।

    इसके बाद मुख्यमंत्री ने एएम/एनएस इंडिया के सीईओ अमित हरलालका से मुलाकात की। इस दौरान कंपनी की गुजरात में बड़ी स्टील परियोजना को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा हुई। मुख्यमंत्री के अनुसार कंपनी ने गुजरात में दुनिया के सबसे बड़े स्टील मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स में से एक विकसित करने का विजन साझा किया है। इसकी कुल उत्पादन क्षमता 25 मिलियन टन बताई गई है।

    बैठक में 80 हजार करोड़ रुपए के बड़े कैपिटल इन्वेस्टमेंट से जुड़ी प्रगति की भी समीक्षा की गई। इसके अलावा हजीरा में रिन्यूएबल एनर्जी और बैटरी स्टोरेज सिस्टम के लिए करीब 10 हजार करोड़ रुपए के अतिरिक्त निवेश की प्रतिबद्धता पर भी चर्चा हुई। इससे गुजरात के औद्योगिक और ऊर्जा क्षेत्र में निवेश को नई गति मिलने की उम्मीद है।

    मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने हिंडाल्को इंडस्ट्रीज के एमडी सतीश पाई से भी मुलाकात की। बैठक में गुजरात के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में कंपनी की मौजूदगी को और मजबूत करने के मुद्दे पर बातचीत हुई। इसमें कॉपर रीसाइक्लिंग ई-वेस्ट मैनेजमेंट और सर्कुलर इकॉनमी से जुड़ी योजनाओं पर विशेष जोर रहा।

    बैठक के दौरान दिसंबर में शुरू होने वाले कॉपर रीसाइक्लिंग प्लांट के उद्घाटन की तैयारियों पर भी चर्चा हुई। साथ ही गुजरात को कॉपर उद्योग के लिए प्रमुख वैश्विक केंद्र के तौर पर विकसित करने के लिए नए निवेश अवसरों और टिकाऊ औद्योगिक प्रक्रियाओं पर विचार किया गया।

    वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट 2027 से पहले मुंबई रोड शो में हुई ये बैठकें गुजरात के निवेश आकर्षित करने के प्रयासों को दिखाती हैं। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी स्टील रिन्यूएबल एनर्जी बैटरी स्टोरेज कॉपर रीसाइक्लिंग और सर्कुलर इकॉनमी जैसे क्षेत्रों पर बढ़ता फोकस राज्य की औद्योगिक रणनीति में नए सेक्टरों की अहमियत को भी दर्शाता है।

  • भारत-बेल्जियम की दोस्ती को मिली नई धार मोदी बोले- बदलती दुनिया में दोनों देश स्वाभाविक साझेदार

    भारत-बेल्जियम की दोस्ती को मिली नई धार मोदी बोले- बदलती दुनिया में दोनों देश स्वाभाविक साझेदार


    नई दिल्ली। नई दिल्ली में भारत और बेल्जियम के बीच रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में अहम बातचीत हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता की और दोनों देशों के बीच सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों पर चर्चा की। इसके बाद दोनों नेताओं ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में द्विपक्षीय संबंधों को लेकर अपनी बात रखी। इस दौरान पीएम मोदी ने भारत और बेल्जियम के रिश्तों को इतिहास से जुड़ा हुआ बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच साझा स्मृतियां और लोकतांत्रिक मूल्यों की समानता इस साझेदारी को खास बनाती है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और बेल्जियम के संबंधों की जड़ें इतिहास में काफी गहरी हैं। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान बेल्जियम में हजारों भारतीय सैनिकों के साहस और बलिदान को उन्होंने दोनों देशों की साझा स्मृति का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि आज लोकतांत्रिक मूल्य बाजार आधारित अर्थव्यवस्था और लोगों के बीच मजबूत संपर्क भारत और बेल्जियम को स्वाभाविक साझेदार बनाते हैं।

    पीएम मोदी ने बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर की पहली भारत यात्रा का स्वागत करते हुए उनके भारत से पुराने संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि डी वेवर लंबे समय तक एंटवर्प के मेयर रहे हैं और इस दौरान उन्होंने वहां रहने वाले बड़े भारतीय समुदाय के साथ ही भारत और बेल्जियम के बीच हीरा कारोबार को भी समर्थन दिया।

    प्रधानमंत्री मोदी ने करीब एक दशक पहले अपनी बेल्जियम यात्रा को याद करते हुए कहा कि पिछले वर्षों में दोनों देशों की साझेदारी का दायरा तेजी से बढ़ा है। अब यह सहयोग पारंपरिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं है बल्कि रक्षा और स्वच्छ ऊर्जा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में भी दोनों देश साथ काम कर रहे हैं। उन्होंने जोरावर टैंक जैसे आधुनिक रक्षा उपकरणों पर सहयोग का जिक्र किया। इसके साथ ही आंध्र प्रदेश के काकीनाडा में दुनिया के बड़े ग्रीन अमोनिया प्रोजेक्ट्स में से एक विकसित किए जाने की बात भी कही।

    बदलते वैश्विक हालात का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया इस समय बड़े उथल पुथल के दौर से गुजर रही है। कई क्षेत्रों में संघर्ष की स्थिति बनी हुई है और खाद्य ईंधन तथा सप्लाई चेन समेत कई क्षेत्रों में अनिश्चितता का असर दिखाई दे रहा है। ऐसे चुनौतीपूर्ण माहौल के बीच भारत की अर्थव्यवस्था अपनी गति बनाए हुए है। उन्होंने पिछले क्वार्टर में 7.8 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की विकास यात्रा दुनिया के लिए विश्वास और नए अवसरों का आधार बन रही है।

    भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापारिक सहयोग को लेकर भी प्रधानमंत्री ने महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने इस वर्ष की शुरुआत में हुए भारत-यूरोपीय संघ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का जिक्र करते हुए इसे दोनों पक्षों के लिए नई संभावनाओं का रास्ता बताया। पीएम मोदी के मुताबिक आर्थिक प्रगति और इस समझौते ने भारत और यूरोप के आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए नए अवसर पैदा किए हैं। भारत और बेल्जियम के बीच हुई बातचीत में रक्षा खाद्य क्षेत्र क्लीन एनर्जी और अन्य क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने से जुड़े समझौतों और एमओयू का भी आदान प्रदान हुआ।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में भारत और बेल्जियम की साझेदारी आने वाले समय में और व्यापक हो सकती है। दोनों देशों के बीच बढ़ता आर्थिक सहयोग रणनीतिक साझेदारी और लोगों के बीच संपर्क इस रिश्ते को नई मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

  • गणेश उत्सव से पहले उज्जैन में अनोखी पहल स्कूलों में बच्चों को सिखा रहे मिट्टी के गणेश बनाना

    गणेश उत्सव से पहले उज्जैन में अनोखी पहल स्कूलों में बच्चों को सिखा रहे मिट्टी के गणेश बनाना


    उज्जैन । गणेश चतुर्थी से पहले उज्जैन में पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक खास पहल शुरू की गई है। शहर के स्कूलों में बच्चों को मिट्टी से गणेश प्रतिमा बनाने की ट्रेनिंग दी जा रही है। इसका उद्देश्य बच्चों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने के साथ गणेश उत्सव में मिट्टी की प्रतिमाओं को बढ़ावा देना है। इसी अभियान के तहत गुरुवार को ढांचा भवन स्थित मॉडल स्कूल में गणेश प्रतिमा निर्माण कार्यशाला आयोजित की गई जिसमें बड़ी संख्या में छात्र छात्राओं ने हिस्सा लिया।

    कार्यशाला में बच्चों ने अपने हाथों से मिट्टी की गणेश प्रतिमाएं तैयार कीं। इस दौरान उज्जैन के विधायक अनिल जैन कालूखेड़ा और एसपी प्रदीप शर्मा भी बच्चों के साथ प्रतिमा बनाने में शामिल हुए। जनप्रतिनिधि और पुलिस अधिकारी को बच्चों के साथ बैठकर मिट्टी से गणेश प्रतिमा बनाते देख विद्यार्थियों में खास उत्साह नजर आया। बच्चों ने पूरी रुचि के साथ प्रतिमा निर्माण की बारीकियां सीखीं और आकर्षक गणेश प्रतिमाएं तैयार कीं।

    इस अभियान का आयोजन लोकमान्य तिलक गणेशोत्सव महाआयोजन समिति की ओर से किया जा रहा है। समिति पिछले 12 वर्षों से पर्यावरण संरक्षण और शास्त्रोक्त पूजन परंपरा को बढ़ावा देने के लिए अलग अलग गतिविधियां संचालित कर रही है। समिति के सहसंयोजक जगदीश पांचाल ने बताया कि समिति संयोजक विधायक अनिल जैन कालूखेड़ा के मार्गदर्शन में स्कूलों और सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से बच्चों और आम लोगों को मिट्टी के गणेश बनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

    विधायक अनिल जैन कालूखेड़ा ने कहा कि मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमा पर्यावरण और जल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। गणेश उत्सव के दौरान प्रतिमा विसर्जन के बाद मिट्टी पानी में आसानी से घुल जाती है। इससे जलस्रोतों में प्रदूषण का खतरा कम करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने बच्चों से भी पर्यावरण हितैषी तरीके से त्योहार मनाने की अपील की।

    एसपी प्रदीप शर्मा ने भी अभियान की सराहना की। उन्होंने कहा कि जब बच्चे खुद अपने हाथों से गणेश प्रतिमा तैयार करेंगे तो उनमें प्रकृति और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना भी मजबूत होगी। कार्यशाला के बाद बच्चे इन्हीं प्रतिमाओं का पूजन करेंगे और विसर्जन के समय भी पर्यावरण संरक्षण का संदेश लोगों तक पहुंचेगा।

    इससे पहले बुधवार को इंदिरा नगर स्थित नूतन कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में भी प्रतिमा निर्माण कार्यशाला का शुभारंभ किया गया था। अभियान को आगे शहर के अन्य स्कूलों तक ले जाने की तैयारी है। आयोजकों का कहना है कि बच्चों को शुरुआत से ही पर्यावरण के अनुकूल परंपराओं से जोड़ना जरूरी है ताकि आने वाले समय में त्योहारों के साथ प्रकृति की सुरक्षा का संदेश भी मजबूत हो सके।

  • वाटरफॉल में इंसानियत शर्मसार चोरी के शक में दो बच्चों को पीटा कपड़े उतरवाकर बनाया वीडियो

    वाटरफॉल में इंसानियत शर्मसार चोरी के शक में दो बच्चों को पीटा कपड़े उतरवाकर बनाया वीडियो

    जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर में बगदरी फॉल पर दो नाबालिग बच्चों के साथ कथित तौर पर अमानवीय व्यवहार का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। करीब 12 साल के दोनों बच्चे बुधवार को पाटन से वाटरफॉल घूमने पहुंचे थे। इसी दौरान तेंदूखेड़ा से बाइक पर आए कुछ युवकों ने बच्चों पर चोरी करने का आरोप लगा दिया। इसके बाद युवकों ने दोनों बच्चों के साथ मारपीट शुरू कर दी। बच्चे लगातार खुद को निर्दोष बताते रहे और युवकों से उन्हें छोड़ने की गुहार लगाते रहे लेकिन आरोप है कि इसके बावजूद उनके साथ मारपीट जारी रही।

    बताया जा रहा है कि युवक वाटरफॉल के पास अपने कपड़े और सामान रखकर नहाने गए थे। इसी दौरान वहां मौजूद दोनों बच्चों पर कपड़ों से रुपए निकालने का आरोप लगाया गया। युवकों ने बच्चों से पूछताछ के नाम पर उनके साथ मारपीट की। बच्चे बार बार कहते रहे कि उन्होंने कोई चोरी नहीं की है और अपने पिता को फोन लगाने की बात भी कहते रहे। इसके बावजूद युवकों ने उनकी बात नहीं मानी।

    मामला यहीं नहीं रुका। आरोप है कि दोनों बच्चों के कपड़े उतरवा दिए गए और उन्हें निर्वस्त्र कर घुमाया गया। इसी दौरान एक युवक मोबाइल से पूरी घटना का वीडियो बनाता रहा। वीडियो में बच्चे चोरी से इनकार करते हुए दिखाई दे रहे हैं। वे लगातार युवकों से छोड़ने की अपील करते रहे। इस दौरान बच्चों के साथ मौजूद लोगों के सामने भी कथित तौर पर अभद्र और अमानवीय व्यवहार किया गया।

    बच्चों के मुताबिक उनके पास मोबाइल फोन भी था जिसे युवकों ने छीन लिया। आरोप है कि उनसे रुपए भी लिए गए और शराब के लिए पैसे मांगने की बात कही गई। घटना के बाद बनाया गया वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस तक मामला पहुंचा और अधिकारियों ने घटना को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी।

    एएसपी सूर्यकांत शर्मा के मुताबिक सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के जरिए पुलिस को घटना की जानकारी मिली है। वीडियो में दो नाबालिग बच्चों के साथ मारपीट और उन्हें निर्वस्त्र किए जाने की बात सामने आई है। मामले की जांच पाटन थाना प्रभारी को सौंपी गई है। पुलिस वीडियो के आधार पर घटना में शामिल युवकों की पहचान करने में जुटी है।

    इस घटना ने बच्चों की सुरक्षा और पर्यटन स्थलों पर निगरानी को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। किसी बच्चे पर चोरी का संदेह होने की स्थिति में कानून हाथ में लेने के बजाय पुलिस को सूचना देना जरूरी है। बच्चों के साथ मारपीट करना और कथित तौर पर उन्हें निर्वस्त्र कर वीडियो बनाकर प्रसारित करना गंभीर मामला है। पुलिस अब वायरल वीडियो और उपलब्ध जानकारी के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।

  • जर्जर मकान की छत ने उजाड़ दिया परिवार 2 साल के बेटे और मां की मौत पिता समेत दो बेटियां अस्पताल में भर्ती

    जर्जर मकान की छत ने उजाड़ दिया परिवार 2 साल के बेटे और मां की मौत पिता समेत दो बेटियां अस्पताल में भर्ती


    ग्वालियर । ग्वालियर के डबरा में बुधवार रात बारिश के बीच एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। जंगीपुरा इलाके में एक जर्जर दो मंजिला कच्चे मकान की छत अचानक भरभराकर नीचे गिर गई। उस समय परिवार के पांच सदस्य घर के अंदर मौजूद थे और सो रहे थे। छत का मलबा सीधे उनके ऊपर जा गिरा जिससे सभी लोग उसमें दब गए। हादसे की तेज आवाज सुनकर आसपास रहने वाले लोग मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी। स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से मलबा हटाकर सभी को बाहर निकाला गया।
    हादसे के बाद घायलों को तत्काल डबरा सिविल अस्पताल ले जाया गया। रास्ते में दो साल के आदित्य रजक उर्फ गुन्नू ने दम तोड़ दिया। उसकी मां सीमा को भी गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। वहीं परिवार के मुखिया जागेंद्र रजक उम्र 38 वर्ष और उनकी बेटियां वैशाली उम्र 5 वर्ष तथा रागनी उम्र 8 वर्ष गंभीर रूप से घायल हैं। प्राथमिक उपचार के बाद तीनों को बेहतर इलाज के लिए ग्वालियर रेफर किया गया है।

    हादसे की सूचना मिलते ही परिवार के रिश्तेदार और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग अस्पताल पहुंच गए। इसी दौरान परिजनों और पड़ोसियों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल परिसर में हंगामा किया। पड़ोसी वीरू रजक का दावा है कि जब सीमा को अस्पताल लाया गया था तब उनकी सांसें चल रही थीं। परिजनों का कहना है कि यदि समय पर बेहतर उपचार मिलता तो शायद सीमा की जान बचाई जा सकती थी। हालांकि इलाज में लापरवाही के आरोपों की आधिकारिक जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

    अस्पताल में हंगामे की जानकारी मिलने पर प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। एसडीएम नवकिरण कौर एसडीओपी सौरभ कुमार और तहसीलदार नवीन भारद्वाज ने अस्पताल पहुंचकर परिवार से मुलाकात की। अधिकारियों ने परिजनों को मामले की जांच कराने और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई का भरोसा दिलाया। साथ ही परिवार को नियमानुसार आर्थिक सहायता दिलाने की बात भी कही गई।

    बताया जा रहा है कि रजक परिवार करीब 15 साल से इसी मकान में किराए पर रह रहा था। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी। जागेंद्र ग्वालियर की एक जूता फैक्ट्री में काम करते थे और रोजाना ट्रेन से आना जाना करते थे। उनकी पत्नी सीमा घरों में झाड़ू पोंछा लगाने का काम करती थीं। लंबे समय से जर्जर हालत में रह रहे मकान की छत आखिरकार बारिश के दौरान परिवार पर ही कहर बनकर टूट पड़ी।

    इस हादसे में परिवार की दो बेटियां नैंसी और गौरी सुरक्षित बच गईं। हादसे के समय दोनों अपने चाचा राघवेंद्र रजक के घर पर थीं। अगर वे भी उसी मकान में मौजूद होतीं तो हादसे का असर और भयावह हो सकता था।

    बारिश के मौसम में जर्जर मकानों को लेकर लगातार खतरा बना रहता है। डबरा की यह घटना एक बार फिर ऐसे मकानों की सुरक्षा जांच और कमजोर परिवारों की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करती है। अब प्रशासनिक जांच के साथ अस्पताल में लगाए गए आरोपों की जांच का इंतजार है। वहीं परिवार के लिए यह हादसा ऐसा दुख छोड़ गया है जिसकी भरपाई शायद कभी नहीं हो सकेगी।

  • 120 करोड़ के बेशकीमती गहनों से होगा राधा-कृष्ण का श्रृंगार लॉकर से निकलेंगे अनमोल मोती पन्ने और हीरे

    120 करोड़ के बेशकीमती गहनों से होगा राधा-कृष्ण का श्रृंगार लॉकर से निकलेंगे अनमोल मोती पन्ने और हीरे


    ग्वालियर । ग्वालियर के ऐतिहासिक गोपाल मंदिर में इस बार जन्माष्टमी का उत्सव बेहद खास होने जा रहा है। 4 सितंबर को भगवान राधा-कृष्ण का राजसी श्रृंगार बेशकीमती सोने चांदी हीरे मोती और पन्नों से जड़े आभूषणों से किया जाएगा। इन आभूषणों की कुल कीमत 120 करोड़ रुपए से अधिक बताई जा रही है। साल में चुनिंदा विशेष अवसरों पर ही बैंक लॉकर से बाहर निकाले जाने वाले इन गहनों के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। इस बार करीब डेढ़ लाख श्रद्धालुओं के आने का अनुमान लगाया जा रहा है।

    जन्माष्टमी के दिन सुबह करीब 10 बजे आभूषणों को सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के लॉकर से निकालने की प्रक्रिया शुरू होगी। इसके लिए नगर निगम आयुक्त की ओर से गठित विशेष समिति बैंक पहुंचेगी। सुरक्षा व्यवस्था के बीच आभूषणों को मंदिर तक लाया जाएगा। मंदिर पहुंचने के बाद सभी गहनों की सफाई की जाएगी और इसके बाद इन्हें भगवान राधा-कृष्ण के श्रृंगार में शामिल किया जाएगा।

    गोपाल मंदिर में रखे इन आभूषणों की खासियत सिर्फ उनकी कीमत नहीं बल्कि उनका ऐतिहासिक और कलात्मक महत्व भी है। भगवान श्रीकृष्ण के श्रृंगार में सोने का मुकुट शामिल किया जाता है जिसमें पुखराज माणिक और पन्ने जैसे कीमती रत्न जड़े हैं। वहीं राधारानी का करीब तीन तोला वजन का रत्नजड़ित मुकुट भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण रहता है।

    इन आभूषणों में सबसे ज्यादा चर्चा सात लड़ियों वाले उस हार की होती है जिसमें 62 असली मोती और 55 पन्ने जड़े हुए हैं। इस हार की कीमत करीब 35 करोड़ रुपए आंकी गई है। इसके अलावा रत्नजड़ित मुकुट की कीमत करीब 25 करोड़ रुपए बताई जाती है। भगवान के श्रृंगार में शामिल सोने के मुकुट की कीमत भी करीब 1.25 करोड़ रुपए बताई गई है। अलग अलग आभूषणों में जड़े कीमती रत्न इस पूरे श्रृंगार को और भव्य बना देते हैं।

    जन्माष्टमी के मौके पर मंदिर की सजावट भी खास अंदाज में की जाएगी। गोपाल मंदिर परिसर को आकर्षक रोशनी से सजाने के साथ फूल बंगला और रंगोली तैयार की जाएगी। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए परिसर में एलईडी स्क्रीन भी लगाई जाएंगी। इन स्क्रीन के जरिए भगवान के दर्शन का लाइव प्रसारण किया जाएगा ताकि भीड़ के कारण सभी श्रद्धालुओं को गर्भगृह तक पहुंचने में परेशानी न हो।

    श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के भी व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं। मंदिर में पुलिसकर्मियों की तैनाती रहेगी और सीसीटीवी कैमरों से पूरे परिसर पर नजर रखी जाएगी। श्रद्धालुओं के आने और जाने के लिए अलग अलग व्यवस्था रखने की तैयारी है ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके और दर्शन व्यवस्था सुचारु बनी रहे।

    गोपाल मंदिर का इतिहास भी बेहद खास है। इस मंदिर का निर्माण सिंधिया राजवंश की महारानी बैजाबाई ने वर्ष 1843 में कराया था। सफेद संगमरमर से बने इस मंदिर की वास्तुकला में मराठा शैली के साथ यूरोपीय प्रभाव भी नजर आता है। मंदिर के गर्भगृह में चांदी से मढ़े दरवाजे इसकी भव्यता को और बढ़ाते हैं।

    जन्माष्टमी पर जब इन दुर्लभ आभूषणों से राधा-कृष्ण का श्रृंगार होगा तो गोपाल मंदिर में राजसी परंपरा और धार्मिक आस्था का अनोखा संगम देखने को मिलेगा। यही वजह है कि इस विशेष दर्शन को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह है।

  • NHAI सड़क की खुलेगी पोल! हाईकोर्ट के निर्देश पर JCB से लिए गए सैंपलों की होगी जांच

    NHAI सड़क की खुलेगी पोल! हाईकोर्ट के निर्देश पर JCB से लिए गए सैंपलों की होगी जांच


    ग्वालियर । ग्वालियर में लगातार खराब हो रही सड़कों को लेकर उठ रहे सवाल अब नेशनल हाईवे तक पहुंच गए हैं। शहर में एक साल के भीतर 12 से ज्यादा सड़कें धंसने और कई मार्गों की निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठने के बाद हाईकोर्ट के निर्देश पर गठित विशेष जांच टीम ने आगरा मुंबई हाईवे के एक हिस्से की गहन जांच शुरू की। गुरुवार को टीम की मौजूदगी में मेहरा टोल प्लाजा और सिकरौदा चौराहे के बीच सड़क को जेसीबी की मदद से खुदवाया गया। सड़क की ऊपरी सतह हटाने के बाद अलग अलग परतों से डामर गिट्टी और बेस मटेरियल के नमूने लिए गए हैं।

    इन नमूनों को अब प्रयोगशाला में परीक्षण के लिए भेजा जाएगा। जांच में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि सड़क निर्माण में निर्धारित मानकों के मुताबिक सामग्री का इस्तेमाल हुआ था या नहीं। इसके साथ ही डामर की मात्रा गिट्टी की गुणवत्ता सड़क की अलग अलग परतों की मजबूती और कॉम्पैक्शन जैसे तकनीकी पहलुओं की भी जांच की जाएगी। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि सड़क निर्माण में कहीं गुणवत्ता से समझौता तो नहीं किया गया।

    हाईकोर्ट के निर्देश पर नेशनल हाईवे की सड़क को मौके पर खुदवाकर उसकी वास्तविक स्थिति जांचने की यह कार्रवाई इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि इससे सरकारी दस्तावेजों में दर्ज तकनीकी जानकारी का जमीन पर हुए निर्माण से मिलान किया जा सकेगा। जांच टीम की निगरानी में सड़क की परतें हटाई गईं और जरूरी स्थानों से सैंपल लिए गए। इससे केवल कागजी रिकॉर्ड के आधार पर गुणवत्ता का आकलन करने के बजाय वास्तविक निर्माण की स्थिति सामने आने की उम्मीद है।

    मामला शहर की खराब सड़कों को लेकर दायर जनहित याचिका से जुड़ा है। वरिष्ठ अधिवक्ता अवधेश सिंह तोमर ने सड़कों के बार बार धंसने गड्ढों और निर्माण गुणवत्ता को लेकर याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने विभागीय रिपोर्टों पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय स्वतंत्र जांच कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद वकीलों और तकनीकी विशेषज्ञों को शामिल करते हुए चार सदस्यीय विशेष टीम बनाई गई।

    यह टीम इससे पहले ग्वालियर की कई प्रमुख सड़कों का निरीक्षण कर चुकी है। विक्की फैक्ट्री से झांसी रोड चेतकपुरी से सिंधिया महल गेट और चेतकपुरी से एजी ऑफिस पुल मार्ग समेत कई हिस्सों में सड़क की स्थिति डामर की मोटाई और क्षति का परीक्षण किया गया। 19 अगस्त को गुढ़ी गुढ़ा का नाका और बेटी बचाओ चौराहे के आसपास से भी कोर सैंपल लिए गए थे।

    जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सैंपलिंग की लोकेशन पहले से सार्वजनिक नहीं की जा रही है। सड़क का चयन सैंपल लेने से कुछ समय पहले किया जाता है ताकि संबंधित निर्माण एजेंसी को पहले से तैयारी करने का अवसर न मिले। टीम इससे पहले लेजर कैमरों और आधुनिक उपकरणों की मदद से सड़कों की हाईटेक स्कैनिंग भी कर चुकी है। इससे सड़क की सतह समतलीकरण और डामर की स्थिति का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया गया।

    अब नेशनल हाईवे से लिए गए सैंपलों की जांच पीडब्ल्यूडी की केंद्रीय परीक्षण प्रयोगशाला ग्वालियर में की जाएगी। रिपोर्ट सामने आने के बाद हाईकोर्ट के समक्ष तथ्य रखे जाएंगे। इसके बाद सड़क निर्माण की गुणवत्ता और यदि कोई तकनीकी अनियमितता सामने आती है तो उसकी जिम्मेदारी को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

  • PNB करेंसी चेस्ट में नकली नोट: CCTV में हाउस कीपर गड्डी से नोट निकालता दिखा, डेढ़ साल से यहीं था तैनात

    PNB करेंसी चेस्ट में नकली नोट: CCTV में हाउस कीपर गड्डी से नोट निकालता दिखा, डेढ़ साल से यहीं था तैनात


    सहारनपुर। पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की घंटाघर स्थित करेंसी चेस्ट में मिले नकली नोटों की रकम बढ़कर 17 करोड़ 29 लाख रुपए हो गई है। मामले में पार्ट टाइम हाउस कीपर विशाल पर भी पुलिस की जांच का शिकंजा कस गया है। उसके परिजनों का दावा है कि मंगलवार देर रात पुलिस उसे पूछताछ के लिए अपने साथ ले गई। हालांकि, पुलिस ने उसकी हिरासत की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

    जांच के दौरान बालेली गांव निवासी विशाल की एक CCTV फुटेज सामने आई है, जिसमें वह करेंसी की गड्डी से नोट निकालता हुआ दिखाई दे रहा है। विशाल करीब चार साल से पीएनबी में सफाई कर्मचारी के तौर पर काम कर रहा था और पिछले डेढ़ साल से करेंसी चेस्ट में पार्ट टाइम हाउस कीपर के रूप में तैनात था।

    दो FIR में दर्ज हुआ मामला
    करेंसी चेस्ट में हुई गड़बड़ी को लेकर सदर थाने में दो अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज कराई गई हैं। एक FIR में नकली नोट मिलने का मामला है, जबकि दूसरी में 4.30 लाख रुपए गायब होने की जानकारी दी गई है।

    विशाल के पिता बीरम सिंह के मुताबिक, मंगलवार देर रात पुलिस टीम उनके घर पहुंची और विशाल को पूछताछ के लिए अपने साथ ले गई। उन्होंने बताया कि परिवार की ओर से बार-बार पूछने के बावजूद पुलिस टीम ने ज्यादा जानकारी नहीं दी।

    परिवार के कई सदस्य बैंकिंग क्षेत्र में
    बीरम सिंह ने बताया कि उनका परिवार खेती-बाड़ी करता है। उनका बड़ा बेटा और बहू पीएनबी की सहारनपुर शाखा में तैनात हैं। उनसे छोटा बेटा ग्रामीण बैंक में काम करता है, जबकि एक अन्य बेटा निजी नौकरी करता है। विशाल परिवार का सबसे छोटा बेटा है।

    परिजनों के अनुसार, विशाल करीब चार साल से पीएनबी में सफाई कर्मचारी के पद पर काम कर रहा था। करीब डेढ़ साल पहले उसकी तैनाती करेंसी चेस्ट में की गई थी।

    29 लाख के नकली नोट और मिले
    पीएनबी की करेंसी चेस्ट में नकली नोट मिलने का आंकड़ा बुधवार को करीब 29 लाख रुपए और बढ़ गया। इससे नकली नोटों की कुल रकम अब 17 करोड़ 29 लाख रुपए तक पहुंच गई है।

    शुरुआत में करेंसी चेस्ट से 7 करोड़ 40 लाख रुपए के नोट नकली पाए गए थे। इसके बाद यह आंकड़ा बढ़कर 17 करोड़ रुपए हुआ और अब करीब 29 लाख रुपए के नकली नोट और मिलने के बाद कुल रकम 17.29 करोड़ रुपए हो गई है।

    मामले की जांच के लिए बुधवार को लखनऊ से आरबीआई के कई अधिकारी और पांच सदस्यीय फॉरेंसिक टीम भी सहारनपुर पहुंची। टीम करीब 11 बजे सोफिया मार्केट स्थित करेंसी चेस्ट शाखा पहुंची और अन्य जांच टीमों के साथ मिलकर देर शाम तक नोटों की गिनती और जांच करती रही।

    एसपी सिटी व्योम बिंदल ने बताया कि बैंक की ओर से मिली जानकारी के अनुसार नकली नोटों की कुल संख्या 17 करोड़ 29 लाख रुपए तक पहुंच गई है। मामले की गहन जांच की जा रही है और फरार आरोपियों के घर भी खंगाले गए हैं।

    आरबीआई, पीएनबी, SIT और फॉरेंसिक टीम जांच में जुटी
    करेंसी चेस्ट में नकली नोट मिलने के बाद जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है। आरबीआई, पीएनबी, एसआईटी और फॉरेंसिक टीम अपने-अपने स्तर पर मामले की जांच कर रही हैं। जिन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई थी, उनके स्थान पर नया स्टाफ भी तैनात किया गया है।

    पार्ट टाइम हाउस कीपर विशाल से पूछताछ किए जाने की बात सामने आ रही है, हालांकि पुलिस की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। वहीं, मामले की जांच के लिए बृहस्पतिवार को एनआईए की टीम के भी पहुंचने की संभावना जताई गई है।

    मेरठ के पीएनबी हेड ऑफिस में भी जांच
    सहारनपुर करेंसी चेस्ट में मिले नकली नोटों की जांच का दायरा मेरठ तक पहुंच गया है। बुधवार को मेरठ बाईपास स्थित वेदव्यासपुरी के पीएनबी हेड ऑफिस का मुख्य द्वार बंद कर शाम तक जांच की गई। पीएनबी के जीएम अजय कुमार टिबरेवाल के पीए सचिन बिश्नोई ने कहा कि मामले से जुड़ी सभी जानकारी सहारनपुर से ही दी जा सकती है।

    स्ट्रांग रूम में प्रवेश की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में
    फॉरेंसिक टीम करेंसी चेस्ट में मौजूद फिंगरप्रिंट, CCTV फुटेज और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है। जांच इस बिंदु पर भी केंद्रित है कि इतनी बड़ी मात्रा में नकली नोट स्ट्रांग रूम तक कैसे पहुंचे।

    बताया गया है कि करेंसी चेस्ट के स्ट्रांग रूम में प्रवेश के लिए कई औपचारिकताएं पूरी करनी होती हैं। प्रवेश से पहले फिंगरप्रिंट स्कैन किया जाता है और सत्यापन के बाद ही आगे की प्रक्रिया होती है। स्ट्रांग रूम की दो चाबियां अलग-अलग लोगों के पास रहती हैं और उसे खोलने के लिए दोनों चाबियों का इस्तेमाल जरूरी होता है।

    दोनों चाबियां लगाए जाने और दोनों संबंधित व्यक्तियों के फिंगरप्रिंट स्कैन होने के बाद ही स्ट्रांग रूम में प्रवेश संभव होता है। फॉरेंसिक टीम यह पता लगाने में जुटी है कि नकली नोट रखने के लिए इस पूरी सुरक्षा व्यवस्था में किसी तरह की छेड़छाड़ तो नहीं की गई।

    इसके अलावा नकली नोटों में इस्तेमाल कागज, स्याही और प्रिंटर की भी जांच की जा रही है। जांच की जिम्मेदारी पीएनबी हेड ऑफिस और आरबीआई की टीम ने संभाली हुई है।

    नोडल अधिकारी की शिकायत पर दर्ज हुई थीं FIR
    करेंसी चेस्ट में 17 करोड़ रुपए के जाली नोट मिलने के मामले में नोडल अधिकारी अरुण कुमार चौबे की ओर से सदर थाने में दो अलग-अलग मामलों में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।

    इन मामलों में वरिष्ठ प्रबंधक मंडल कार्यालय रवि कुमार कांसे, करेंसी चेस्ट प्रबंधक शर्मा, करेंसी चेस्ट खरा बाजार जगाधरी के प्रबंधक अमित कुमार और पार्ट टाइम हाउस कीपर विशाल को आरोपी बनाया गया है।

  • एंटीबायोटिक बेअसर तो जान पर भारी संक्रमण! 1.59 लाख मरीजों पर ICMR की रिसर्च में सामने आया गंभीर खतरा

    एंटीबायोटिक बेअसर तो जान पर भारी संक्रमण! 1.59 लाख मरीजों पर ICMR की रिसर्च में सामने आया गंभीर खतरा


    नई दिल्ली। एंटीबायोटिक दवाएं गंभीर बैक्टीरियल इंफेक्शन के इलाज में बेहद अहम मानी जाती हैं लेकिन जब बैक्टीरिया इन दवाओं के खिलाफ प्रतिरोधी हो जाते हैं तो इलाज की चुनौती काफी बढ़ जाती है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च यानी ICMR से जुड़े शोधकर्ताओं की बड़ी स्टडी में सामने आया है कि कार्बापेनेम एंटीबायोटिक्स के खिलाफ रेजिस्टेंस रखने वाले ग्राम नेगेटिव बैक्टीरिया से संक्रमित मरीजों में मौत का खतरा अधिक हो सकता है। ऐसे संक्रमण न केवल मरीज की हालत को गंभीर बना सकते हैं बल्कि इलाज की अवधि और दवाओं पर होने वाले खर्च को भी बढ़ा सकते हैं।

    ग्राम नेगेटिव बैक्टीरिया शरीर के अलग अलग हिस्सों में संक्रमण फैला सकते हैं। इनमें ई कोलाई क्लेबसिएला न्यूमोनिया एसिनेटोबैक्टर बाउमानी और स्यूडोमोनास एरुजिनोसा जैसे बैक्टीरिया शामिल हैं। ये फेफड़ों पेशाब की नली घाव और खून में संक्रमण का कारण बन सकते हैं। गंभीर संक्रमण के मामलों में कार्बापेनेम जैसी शक्तिशाली एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है लेकिन जब बैक्टीरिया इन दवाओं के खिलाफ भी रेजिस्टेंट हो जाते हैं तो डॉक्टरों के पास प्रभावी उपचार के विकल्प सीमित हो सकते हैं।

    शोधकर्ताओं ने अप्रैल 2022 से अप्रैल 2025 के बीच देश के 20 बड़े अस्पतालों में भर्ती 1 लाख 59 हजार 336 मरीजों के आंकड़ों का अध्ययन किया। इनमें 26 हजार 213 मरीजों में ग्राम नेगेटिव बैक्टीरिया से संक्रमण की पुष्टि हुई। इनमें 16 हजार 25 मरीज यानी करीब 61.1 प्रतिशत ऐसे थे जिनमें संक्रमण कार्बापेनेम एंटीबायोटिक्स के खिलाफ रेजिस्टेंट पाया गया। इस अंतर ने एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस को लेकर गंभीर चिंता सामने रखी है।

    स्टडी के आंकड़ों में मौत का अंतर भी स्पष्ट नजर आया। ई कोलाई से संक्रमित मरीजों में कार्बापेनेम रेजिस्टेंट संक्रमण की स्थिति में मृत्यु दर 24.4 प्रतिशत रही जबकि दवा के प्रति संवेदनशील संक्रमण में यह 17.3 प्रतिशत थी। क्लेबसिएला न्यूमोनिया के मामले में मृत्यु दर क्रमशः 31.2 और 23.5 प्रतिशत रही। एसिनेटोबैक्टर बाउमानी में यह आंकड़ा 37.9 और 32.8 प्रतिशत जबकि स्यूडोमोनास एरुजिनोसा में 28.9 और 20.2 प्रतिशत रहा।

    खतरा तब और बढ़ जाता है जब संक्रमण खून तक पहुंच जाता है। ऐसे मामलों में रेजिस्टेंट बैक्टीरिया से संक्रमित मरीजों में मृत्यु दर कई मामलों में काफी अधिक देखी गई। शोध के मुताबिक इन चारों बैक्टीरिया से होने वाले रक्त संक्रमणों में 85 प्रतिशत से ज्यादा मामले अस्पताल से जुड़े संक्रमण थे। इससे अस्पतालों में साफ सफाई संक्रमण नियंत्रण और मेडिकल उपकरणों के सुरक्षित इस्तेमाल की अहमियत सामने आती है।

    एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का असर मरीज की जेब पर भी पड़ सकता है। रिसर्च में रेजिस्टेंट संक्रमण के इलाज में एंटीबायोटिक दवाओं का खर्च सामान्य संक्रमण की तुलना में लगभग 1.1 से 2 गुना तक ज्यादा पाया गया। हालांकि इसमें अस्पताल में भर्ती रहने कमरे जांच और अन्य चिकित्सा सेवाओं का खर्च शामिल नहीं था इसलिए वास्तविक आर्थिक बोझ इससे अधिक हो सकता है।

    विशेषज्ञों के लिए यह रिसर्च इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस केवल इलाज की समस्या नहीं बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। बिना जरूरत एंटीबायोटिक लेना दवाओं का गलत इस्तेमाल और संक्रमण नियंत्रण में लापरवाही बैक्टीरिया में प्रतिरोध बढ़ाने में भूमिका निभा सकती है। ऐसे में डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक लेने से बचना सही जांच के बाद उचित दवा का इस्तेमाल करना और अस्पतालों में संक्रमण रोकने के उपायों को मजबूत करना बेहद जरूरी है।