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  • वृंदावन जाने से पहले कर लें पूरी तैयारी मंदिर में क्या ले जाएं और बंदरों से कैसे बचें जानें जरूरी Travel Tips

    वृंदावन जाने से पहले कर लें पूरी तैयारी मंदिर में क्या ले जाएं और बंदरों से कैसे बचें जानें जरूरी Travel Tips


    उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में स्थित वृंदावन भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहां बांके बिहारी मंदिर इस्कॉन मंदिर प्रेम मंदिर निधिवन और रंगनाथ मंदिर जैसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थल हैं। खासतौर पर जन्माष्टमी और होली जैसे बड़े त्योहारों के दौरान यहां देश के अलग अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। अगर आप भी वृंदावन जाने की तैयारी कर रहे हैं तो यात्रा शुरू करने से पहले कुछ जरूरी बातों की जानकारी रखना बेहद फायदेमंद रहेगा।

    वृंदावन घूमने के लिए मौसम का ध्यान रखना भी जरूरी है। अक्टूबर से मार्च के बीच मौसम अपेक्षाकृत सुहावना रहता है और इस दौरान घूमना आसान हो सकता है। वहीं जन्माष्टमी और होली जैसे अवसरों पर धार्मिक उत्साह अपने चरम पर होता है लेकिन भारी भीड़ के कारण यात्रा चुनौतीपूर्ण भी हो सकती है। ऐसे समय में होटल परिवहन और मंदिर दर्शन की योजना पहले से बनाना बेहतर रहता है।

    यात्रा पर निकलते समय अपने साथ जरूरत से ज्यादा सामान ले जाने से बचें। हल्का बैग रखें जिसमें पानी की बोतल मोबाइल चार्जर जरूरी दवाइयां पहचान पत्र और कुछ नकद पैसे जैसी आवश्यक चीजें हों। भारी सामान के साथ मंदिरों और भीड़भाड़ वाली गलियों में घूमना मुश्किल हो सकता है।

    वृंदावन के मंदिरों में स्थानीय धार्मिक परंपराओं और व्यवस्थाओं का सम्मान करना जरूरी है। अलग अलग मंदिरों के अपने नियम हो सकते हैं। कुछ स्थानों पर मोबाइल फोन कैमरा या बैग ले जाने पर पाबंदी हो सकती है। इसलिए जिस मंदिर में दर्शन के लिए जा रहे हैं वहां के मौजूदा नियमों की जानकारी पहले ले लेना बेहतर होगा।

    अगर पहली बार वृंदावन जा रहे हैं तो प्रमुख धार्मिक स्थलों की सूची पहले से बना लें। बांके बिहारी मंदिर के अलावा इस्कॉन मंदिर प्रेम मंदिर निधिवन और रंगनाथ मंदिर जैसे स्थानों को अपनी यात्रा योजना में शामिल किया जा सकता है। भीड़ वाले दिनों में सभी जगहों पर जाना आसान नहीं होता इसलिए प्राथमिकता के हिसाब से प्लान बनाना ज्यादा बेहतर रहेगा।

    लंबी यात्रा और भीड़भाड़ के बीच स्वास्थ्य का भी ध्यान रखें। सिरदर्द पेट की परेशानी या दूसरी सामान्य दिक्कतों के लिए डॉक्टर द्वारा बताई गई जरूरी दवाइयां साथ रखना उपयोगी हो सकता है। बुजुर्गों बच्चों और ज्यादा देर तक चलने में परेशानी वाले लोगों के लिए पर्याप्त आराम की व्यवस्था करना भी जरूरी है।

    वृंदावन में बंदरों की मौजूदगी भी यात्रियों के लिए चुनौती बन सकती है। बंदर अक्सर खाने पीने की चीजों या हाथ में मौजूद सामान की तरफ आकर्षित हो सकते हैं। इसलिए उनके सामने खाना न दिखाएं और मोबाइल चश्मा पर्स या दूसरी जरूरी वस्तुएं संभालकर रखें। बंदरों के बहुत करीब जाने या उन्हें छेड़ने से भी बचना चाहिए।

    भीड़भाड़ वाले धार्मिक आयोजनों के दौरान अपने सामान और साथ आए लोगों पर नजर बनाए रखें। बच्चों को अकेला न छोड़ें और किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन या पुलिस की मदद लें। मंदिर परिसर में धक्का मुक्की से बचते हुए कतार और सुरक्षा व्यवस्था का पालन करें।

    वृंदावन की यात्रा सिर्फ दर्शन तक सीमित नहीं होती बल्कि यहां की गलियों और धार्मिक माहौल का अनुभव भी लोगों को आकर्षित करता है। हालांकि त्योहारों के दौरान भीड़ और यातायात व्यवस्था को देखते हुए धैर्य रखना जरूरी है। समय का अतिरिक्त मार्जिन रखें और प्रशासन की ओर से जारी ट्रैफिक डायवर्जन या यात्रा संबंधी ताजा निर्देशों का पालन करें। थोड़ी सी तैयारी और सावधानी के साथ वृंदावन की धार्मिक यात्रा को सुरक्षित और यादगार बनाया जा सकता है।

  • शेयर बाजार में संभलकर कदम रखें निवेशक! 4 सितंबर को इन फैक्टर्स से बदल सकती है Nifty-Sensex की चाल

    शेयर बाजार में संभलकर कदम रखें निवेशक! 4 सितंबर को इन फैक्टर्स से बदल सकती है Nifty-Sensex की चाल


    नई दिल्ली। शुक्रवार 4 सितंबर को भारतीय शेयर बाजार में कारोबार के दौरान उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है। बीते कुछ कारोबारी सत्रों में बाजार पर वैश्विक अनिश्चितता का दबाव रहा है और निवेशकों की नजर अब घरेलू संकेतों के साथ साथ अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर भी बनी हुई है। 3 सितंबर को बाजार में शुरुआती बढ़त के बाद बिकवाली लौट आई और सेंसेक्स करीब 417 अंक गिरकर बंद हुआ जबकि निफ्टी 23900 के स्तर से नीचे चला गया। इससे संकेत मिल रहा है कि बाजार में फिलहाल तेजी को लेकर पूरी तरह भरोसा नहीं बन पाया है।

    4 सितंबर के कारोबार में सबसे अहम भूमिका कच्चे तेल की कीमतों की रह सकती है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण तेल की कीमतों में तेजी आई है जिससे महंगाई और ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ी है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए महंगा कच्चा तेल रुपये और कंपनियों की लागत पर दबाव डाल सकता है। ऐसे में अगर शुक्रवार को तेल की कीमतों में दोबारा तेज उछाल आता है तो इसका असर बाजार की धारणा पर दिखाई दे सकता है।

    दूसरी ओर ग्लोबल बाजार से कुछ सकारात्मक संकेत भी मिल रहे हैं। अमेरिकी और एशियाई बाजारों में हालिया कारोबार के दौरान मजबूती देखने को मिली है और गुरुवार को भारतीय बाजार में बैंकिंग शेयरों में खरीदारी ने भी बाजार को सहारा दिया था। विदेशी मुद्रा प्रवाह से भारतीय बैंकों की तरलता स्थिति को भी समर्थन मिला है। ऐसे संकेत बाजार में गिरावट को सीमित करने में मदद कर सकते हैं।

    निवेशकों की नजर अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े आंकड़ों और फेडरल रिजर्व के संकेतों पर भी रहेगी। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के कारण दुनिया भर के शेयर बाजारों में सतर्कता बढ़ी है। यदि अमेरिका से आने वाले आर्थिक आंकड़े ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख की संभावना बढ़ाते हैं तो इसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ सकता है। दूसरी तरफ कमजोर आर्थिक आंकड़े दरों में नरमी की उम्मीद को बढ़ा सकते हैं जिससे उभरते बाजारों को कुछ राहत मिल सकती है।

    घरेलू स्तर पर बैंकिंग और वित्तीय कंपनियों के शेयर बाजार को दिशा देने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। हाल के कारोबार में बैंकिंग शेयरों में खरीदारी देखने को मिली है। इसके अलावा मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है। हालांकि बाजार में उतार चढ़ाव को देखते हुए किसी एक सेक्टर या शेयर में जल्दबाजी से दांव लगाने के बजाय कंपनी के फंडामेंटल और बाजार की मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखना जरूरी होगा।

    कुल मिलाकर 4 सितंबर का कारोबार बेहद अहम रह सकता है। बाजार में तेजी की कोशिश दिखाई दे सकती है लेकिन महंगा कच्चा तेल वैश्विक तनाव अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां सेंसेक्स और निफ्टी पर दबाव डाल सकती हैं। ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए सतर्क रणनीति अपनाना बेहतर रहेगा। बाजार की दिशा को लेकर किसी निश्चित तेजी या गिरावट का अनुमान लगाने के बजाय सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तरों के साथ वैश्विक संकेतों पर नजर रखना जरूरी होगा। यह खबर निवेश सलाह नहीं है और निवेश का फैसला अपनी रिसर्च तथा विशेषज्ञ की सलाह के आधार पर ही लेना चाहिए।

  • बारिश में बढ़ जाता है स्किन इंफेक्शन का खतरा, नमी और पसीने से बचने के लिए अपनाएं ये उपाय

    बारिश में बढ़ जाता है स्किन इंफेक्शन का खतरा, नमी और पसीने से बचने के लिए अपनाएं ये उपाय


    नई दिल्ली। बारिश का मौसम गर्मी से राहत जरूर देता है लेकिन इस दौरान त्वचा को अतिरिक्त देखभाल की जरूरत पड़ती है। वातावरण में नमी बढ़ने के कारण पसीना ज्यादा आता है और त्वचा लंबे समय तक नम बनी रह सकती है। ऐसी स्थिति में बैक्टीरिया और फंगस के बढ़ने का खतरा भी बढ़ जाता है। यही वजह है कि मानसून के दौरान कई लोगों को दाद खाज खुजली लाल चकत्ते जलन और त्वचा पर छोटे छोटे दाने जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अगर समय रहते त्वचा की सफाई और देखभाल पर ध्यान दिया जाए तो इन समस्याओं को काफी हद तक दूर रखा जा सकता है।

    मानसून में सबसे जरूरी है कि शरीर को साफ और सूखा रखा जाए। बारिश में भीगने के बाद गीले कपड़ों में ज्यादा देर तक रहने से त्वचा पर नमी बनी रहती है और फंगल इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए बारिश में भीगने के बाद जल्द से जल्द कपड़े बदलने चाहिए। खासतौर पर अंडरआर्म्स जांघों के बीच पैर की उंगलियों के बीच और शरीर की उन जगहों को अच्छी तरह सुखाना चाहिए जहां पसीना ज्यादा आता है। गीले मोजे और जूते भी लंबे समय तक पहनने से बचना चाहिए।

    त्वचा की सफाई के लिए बहुत ज्यादा तेज साबुन या ऐसे उत्पादों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए जो त्वचा को अत्यधिक रूखा बना दें। अपनी त्वचा के प्रकार के अनुसार हल्के क्लीनजर का इस्तेमाल किया जा सकता है। चेहरा धोने के बाद उसे साफ तौलिए से धीरे से सुखाना जरूरी है। तौलिए को नियमित रूप से धोकर अच्छी तरह सुखाएं और कोशिश करें कि अपना तौलिया किसी दूसरे व्यक्ति के साथ साझा न करें।

    मानसून में त्वचा को मॉइस्चराइज करना भी जरूरी है। कई लोग सोचते हैं कि नमी वाले मौसम में मॉइस्चराइजर की जरूरत नहीं होती लेकिन ऐसा नहीं है। त्वचा की जरूरत के अनुसार हल्का और नॉन कॉमेडोजेनिक मॉइस्चराइजर इस्तेमाल किया जा सकता है। बाहर निकलते समय मौसम बादलों वाला हो तब भी सनस्क्रीन लगाना उपयोगी रहता है क्योंकि सूर्य की पराबैंगनी किरणों का असर बादलों के बीच से भी हो सकता है।

    अगर त्वचा पर लगातार खुजली होने लगे गोल आकार के लाल चकत्ते दिखाई दें त्वचा पर जलन बढ़ती जाए या समस्या बार बार वापस आए तो इसे सामान्य खुजली समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बिना चिकित्सकीय सलाह के किसी भी तेज दवा या स्टेरॉयड वाली क्रीम का इस्तेमाल करना नुकसानदायक हो सकता है। गलत क्रीम से त्वचा की समस्या दबने के बजाय और जटिल हो सकती है।

    इसके अलावा मानसून में बहुत ज्यादा तंग कपड़े पहनने से भी बचना चाहिए। सूती और आरामदायक कपड़े त्वचा को हवा मिलने में मदद करते हैं। रोजाना पर्याप्त पानी पीना संतुलित आहार लेना और शरीर की स्वच्छता बनाए रखना भी त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद करता है। थोड़ी सी सावधानी और नियमित देखभाल से बारिश के मौसम में त्वचा को संक्रमण और दूसरी परेशानियों से बचाया जा सकता है।

  • जन्माष्टमी व्रत में न करें ये गलतियां, पहली बार व्रत रखने वाले जरूर जानें खानपान के नियम

    जन्माष्टमी व्रत में न करें ये गलतियां, पहली बार व्रत रखने वाले जरूर जानें खानपान के नियम


    नई दिल्ली। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का पर्व जन्माष्टमी इस साल 4 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल की पूजा करते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत रखते हैं। जन्माष्टमी का व्रत पहली बार रखने वालों के मन में अक्सर यह सवाल रहता है कि व्रत के दौरान क्या खाया जा सकता है और किन चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत में सात्विक और फलाहारी भोजन को प्राथमिकता दी जाती है।

    अगर आप फलाहार वाला व्रत रख रहे हैं तो पूरे दिन भूखे रहने की जरूरत नहीं होती। अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार फल दूध और सूखे मेवों का सेवन किया जा सकता है। केला सेब अनार नाशपाती और दूसरे मौसमी फल व्रत के दौरान लिए जा सकते हैं। इसके अलावा बादाम काजू किशमिश और मखाने भी अच्छे फलाहारी विकल्प माने जाते हैं। दूध दही और लस्सी का सेवन भी किया जा सकता है।

    जन्माष्टमी के व्रत में कुट्टू और सिंघाड़े के आटे का इस्तेमाल भी किया जाता है। इससे पूरी हलवा या दूसरी फलाहारी चीजें बनाई जा सकती हैं। सामक के चावल और इसकी खीर भी व्रत के दौरान खाई जाती है। भोजन में नमक का इस्तेमाल करना हो तो सामान्य नमक की जगह सेंधा नमक का प्रयोग किया जाता है। हालांकि व्रत के नियम अलग-अलग परंपराओं और परिवारों में कुछ हद तक अलग हो सकते हैं।

    वहीं कुछ ऐसी चीजें भी हैं जिनसे जन्माष्टमी व्रत के दौरान दूरी बनाने की सलाह दी जाती है। सामान्य तौर पर दाल चावल गेहूं बेसन और सूजी जैसे अनाज या उनसे बनी चीजें व्रत के फलाहार में शामिल नहीं की जाती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्याज और लहसुन जैसी तामसिक मानी जाने वाली चीजों से भी परहेज किया जाता है। इसके साथ ही बहुत ज्यादा तला भुना और मसालेदार भोजन करने से बचना बेहतर माना जाता है।

    व्रत के दौरान बाजार में मिलने वाले पैक्ड और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों से भी सावधानी बरतनी चाहिए। फलाहारी बताकर बेचे जाने वाले हर पैक्ड उत्पाद में व्रत के अनुकूल सामग्री हो यह जरूरी नहीं है। इसलिए घर पर तैयार किया गया हल्का और सात्विक भोजन अधिक सुरक्षित विकल्प माना जाता है।

    जन्माष्टमी की रात भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय विशेष पूजा की जाती है। पंचांग के अनुसार इस वर्ष 4 सितंबर की रात 11 बजकर 57 मिनट से 12 बजकर 43 मिनट तक पूजा का शुभ समय बताया गया है। इसी दौरान लड्डू गोपाल का अभिषेक श्रृंगार और पूजा की जाती है। पूजा के बाद कई गृहस्थ श्रद्धालु चरणामृत माखन मिश्री और धनिया की पंजीरी जैसे प्रसाद ग्रहण करके व्रत खोलते हैं। वहीं वैष्णव परंपरा का पालन करने वाले श्रद्धालु अष्टमी तिथि समाप्त होने के बाद अगले दिन सुबह व्रत पारण करते हैं। ऐसे में व्रत रखने से पहले अपनी परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार पारण का समय जरूर देख लेना चाहिए।

  • Krishna Janmashtami 2026: कब होगा लड्डू गोपाल का जन्मोत्सव? जानें अष्टमी तिथि महानिशीथ काल और पूजा का सही समय

    Krishna Janmashtami 2026: कब होगा लड्डू गोपाल का जन्मोत्सव? जानें अष्टमी तिथि महानिशीथ काल और पूजा का सही समय


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव बेहद खास माना जाता है। हर साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है। इस दिन देशभर में भक्त व्रत रखते हैं और रात के समय भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल की विशेष पूजा करते हैं। इस बार जन्माष्टमी की तारीख को लेकर लोगों के बीच भ्रम बना हुआ है लेकिन पंचांग गणना के अनुसार कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व आज 4 सितंबर 2026 शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस दिन मंदिरों और घरों में कान्हा के जन्मोत्सव की भव्य तैयारियां की जाएंगी।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म आधी रात के समय हुआ था। इसलिए जन्माष्टमी की पूजा में मध्यरात्रि के समय का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन भक्त सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लेते हैं और पूरे दिन भगवान कृष्ण का स्मरण करते हैं। घरों में लड्डू गोपाल के लिए पालना सजाया जाता है। उन्हें नए वस्त्र पहनाए जाते हैं और फूलों से श्रृंगार किया जाता है। मंदिरों में भी जन्माष्टमी के लिए विशेष सजावट की जाती है।

    पंचांग के अनुसार इस वर्ष कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 4 सितंबर की रात 2 बजकर 25 मिनट से शुरू होगी और 5 सितंबर की रात 12 बजकर 13 मिनट तक रहेगी। उदयातिथि और जन्मोत्सव की परंपरा को ध्यान में रखते हुए 4 सितंबर को ही जन्माष्टमी का व्रत रखा जाएगा। इसी वजह से 3 सितंबर या 5 सितंबर को लेकर जो भ्रम है उसे दूर किया जा सकता है।

    जन्माष्टमी के दिन पूजा के लिए कई शुभ समय बताए गए हैं। सुबह 5 बजकर 46 मिनट से 10 बजकर 26 मिनट तक पूजा का समय रहेगा। इसके बाद दोपहर 12 बजकर 5 मिनट से 1 बजकर 33 मिनट तक भी पूजा की जा सकती है। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 36 मिनट से दोपहर 12 बजकर 24 मिनट तक बताया गया है। शाम के समय 4 बजकर 41 मिनट से 6 बजकर 14 मिनट तक और रात में 9 बजकर 7 मिनट से 10 बजकर 33 मिनट तक पूजा का समय रहेगा। इसके अलावा रात 12 बजकर 5 मिनट से सुबह 4 बजकर 19 मिनट तक भी पूजा के लिए समय बताया गया है।

    जन्माष्टमी की सबसे खास पूजा महानिशीथ काल में मानी जाती है। इस साल महानिशीथ काल रात 11 बजकर 57 मिनट से 12 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। इसी दौरान भक्त श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मनाएंगे। लड्डू गोपाल का पंचामृत और गंगाजल से अभिषेक करने के बाद उन्हें नए वस्त्र पहनाए जाएंगे। मुकुट मोरपंख आभूषण और फूलों की माला से उनका श्रृंगार किया जाएगा। इसके बाद भगवान को पालने में विराजमान कर झूला झुलाया जाएगा और माखन मिश्री पंजीरी सहित सात्विक भोग अर्पित किया जाएगा।

    इस साल जन्माष्टमी पर रोहिणी नक्षत्र का संयोग भी बताया गया है। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार श्रीकृष्ण का रोहिणी नक्षत्र से विशेष संबंध माना जाता है। पंचांग के अनुसार रोहिणी नक्षत्र 4 सितंबर की रात 12 बजकर 29 मिनट से शुरू होकर रात 11 बजकर 4 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा हर्षण योग बुधादित्य योग हंस योग और मालव्य योग जैसे शुभ योग बनने की बात भी कही गई है।

    जन्माष्टमी का व्रत रखने वाले भक्त अगले दिन यानी 5 सितंबर को पारण करेंगे। धर्मशास्त्रीय परंपरा के अनुसार सूर्योदय के बाद सुबह 6 बजे के पश्चात पारण किया जा सकता है। हालांकि अलग अलग क्षेत्रों में पंचांग और स्थानीय परंपरा के अनुसार इसमें थोड़ा अंतर हो सकता है। इसलिए व्रत रखने वाले लोगों को अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार पारण का समय देखना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जन्माष्टमी पर श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करने से सुख शांति और समृद्धि की कामना की जाती है।

  • गेटवे ऑफ इंडिया के पास समंदर में फेरी का इंजन हुआ खराब, दूसरी नाव से किया सभी यात्रियों का सुरक्षित रेस्क्यू

    गेटवे ऑफ इंडिया के पास समंदर में फेरी का इंजन हुआ खराब, दूसरी नाव से किया सभी यात्रियों का सुरक्षित रेस्क्यू


    मुंबई। महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में गुरुवार रात गेटवे ऑफ इंडिया के पास समुद्र में एक फेरी का इंजन अचानक खराब हो गया। बीच समुद्र में फेरी के रुकने से उसमें सवार यात्रियों में अफरातफरी मच गई। पुलिस और स्थानीय नाव संचालक की मदद पहुंचने तक यात्रियों की सांसें अटकी रहीं।

    हालांकि, राहत की बात रही कि स्थानीय पुलिस और एक अन्य लोकल बोट ऑपरेटर ने फेरी में सवार 34 यात्रियों और चार चालक दल के सदस्यों समेत सभी 38 लोगों को सुरक्षित बचा लिया। पुलिस अधिकारी के मुताबिक, घटना गुरुवार रात करीब 8:30 बजे की है।

    लौटते वक्त बीच समुद्र में बंद हुआ इंजन
    ‘अनवारी’ नाम की यह फेरी यात्रियों को करीब आधे घंटे की समुद्री सैर कराती है। गेटवे ऑफ इंडिया लौटते समय समुद्र तट से करीब 1.5 नॉटिकल मील दूर अचानक उसका इंजन खराब हो गया। उस समय फेरी पर 34 यात्री और चालक दल के चार सदस्य मौजूद थे।

    फेरी के खराब होने की सूचना पुलिस कंट्रोल रूम को मिली। इसके बाद कांस्टेबल अभिजीत शिंदे और अन्य पुलिसकर्मियों ने आसपास मौजूद नावों की जानकारी जुटानी शुरू की।

    पास में मौजूद थी दूसरी नाव
    पुलिस को पता चला कि समुद्री सैर कराने वाली एक अन्य नाव ‘आजाद हिंद’ खराब फेरी के पास ही मौजूद है। पुलिस अधिकारियों ने नाव के मालिक जुनैद मुल्ला से संपर्क कर तत्काल मदद मांगी।

    इसके बाद ‘आजाद हिंद’ मौके पर पहुंची और खराब पड़ी ‘अनवारी’ को खींचकर सुरक्षित गेटवे ऑफ इंडिया की जेट्टी नंबर 2 तक ले आई। करीब रात 9:30 बजे फेरी को जेट्टी तक पहुंचाया गया। सभी 34 यात्रियों और चालक दल के चारों सदस्यों को बिना किसी चोट के सुरक्षित तट पर उतार लिया गया। इसके बाद यात्रियों ने राहत की सांस ली।

  • होर्मुज की जंग में अब दक्षिण कोरिया की एंट्री, सैन्य संसाधन तैनात करने की तैयारी

    होर्मुज की जंग में अब दक्षिण कोरिया की एंट्री, सैन्य संसाधन तैनात करने की तैयारी


    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का सीधा असर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होने वाली वैश्विक तेल आपूर्ति पर पड़ रहा है। हालिया हमलों के बाद तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। वहीं, अमेरिका और ईरान के बीच पर्दे के पीछे चल रही बातचीत भी अब पटरी से उतरती नजर आ रही है। इस बीच दक्षिण कोरिया होर्मुज को लेकर बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है।

    दक्षिण कोरिया होर्मुज में ‘फ्रीडम ऑफ नेविगेशन’ यानी जहाजों की आवाजाही की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने में सहयोग के लिए सैन्य संसाधन तैनात करने पर विचार कर रहा है। दक्षिण कोरियाई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन संसाधनों को इस साल के अंत से पहले भेजने का लक्ष्य रखा गया है। रिपोर्ट्स में सरकारी और सैन्य सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी गई है।

    संसद से मंजूरी लेने की तैयारी
    दक्षिण कोरिया के कई मीडिया संस्थानों के अनुसार, सरकार सैन्य संसाधनों की संभावित तैनाती के लिए संसद की मंजूरी लेने की प्रक्रिया तैयार कर रही है। कैबिनेट की समीक्षा के बाद इसी महीने संसद में सहमति प्रस्ताव पेश करने की योजना है।

    सरकार के सामने कई विकल्प हैं। इनमें समुद्री गश्ती विमान भेजना, जहाजों को लॉजिस्टिक सपोर्ट उपलब्ध कराना और समुद्री बारूदी सुरंगों का पता लगाने तथा उन्हें हटाने वाली यूनिट तैनात करना शामिल है। इसके अलावा सियोल अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस समेत कई देशों के साथ अपने संभावित योगदान के आकार और स्वरूप को लेकर भी बातचीत कर रहा है।

    राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा- अभी फैसला नहीं
    दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति कार्यालय ब्लू हाउस ने कहा है कि सियोल होर्मुज में जहाजों की आवाजाही की स्वतंत्रता में योगदान देने के व्यावहारिक तरीकों पर चर्चा कर रहा है। हालांकि, कार्यालय ने उन मीडिया रिपोर्ट्स को तथ्यों से अलग बताया है, जिनमें दावा किया गया था कि सरकार ने सैन्य तैनाती का अंतिम फैसला ले लिया है।

    ट्रंप के बयान के बाद बदले समीकरण
    दक्षिण कोरिया का यह कदम अमेरिका के साथ उसके संबंधों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अगस्त में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा था कि उन्होंने अमेरिका-दक्षिण कोरिया के संयुक्त सैन्य अभ्यासों को कुछ हद तक इसलिए कम किया, क्योंकि दक्षिण कोरिया ने ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिका की मदद करने से इनकार कर दिया था।

    अब होर्मुज में संभावित सैन्य योगदान को अमेरिका के साथ रिश्तों में आई तल्खी कम करने की दिशा में उठाए जा रहे कदम के तौर पर देखा जा रहा है।

  • MP में आज 28 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, अगले दो दिन रहेगा सिस्टम का ज्‍यादा असर

    MP में आज 28 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, अगले दो दिन रहेगा सिस्टम का ज्‍यादा असर


    भोपाल। मध्य प्रदेश में बारिश का दौर लगातार जारी है। मंदाकिनी नदी खतरे के निशान के ऊपर बह रही है, जबकि नर्मदा भी उफान पर है। छतरपुर, सतना, मंडला और मैहर समेत कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। छतरपुर के कुटनी और जबलपुर के बरगी बांध से पानी छोड़ा जा रहा है। राजधानी भोपाल में भी गुरुवार-शुक्रवार की दरमियानी रात बारिश हुई।

    मौसम विभाग ने प्रदेश में अगले 48 घंटे के दौरान भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। प्रदेश में अब तक 741.2 मिमी यानी 29.2 इंच बारिश हो चुकी है, जो सीजन के कोटे की करीब 78% है।

    पूर्वी हिस्से में तेज बारिश, अगले दो दिन सिस्टम का असर
    गुरुवार को ट्रफ और स्पष्ट निम्न दबाव का क्षेत्र सक्रिय रहा। इसके प्रभाव से प्रदेश के पूर्वी हिस्से में कई स्थानों पर तेज बारिश हुई। मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक अगले दो दिनों तक भोपाल, उज्जैन, सागर, नर्मदापुरम, ग्वालियर और चंबल संभाग में भारी से अति भारी बारिश हो सकती है। मौसम सिस्टम का असर 4 और 5 सितंबर को ज्यादा रहने का अनुमान है। इसके बाद 6 और 7 सितंबर को भी ग्वालियर-चंबल संभाग में तेज बारिश हो सकती है।

    इन जिलों में ऑरेंज अलर्ट
    मौसम विभाग ने शिवपुरी, गुना, राजगढ़, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, सागर, दमोह और नर्मदापुरम में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। वहीं भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर, श्योपुर, भिंड, दतिया, पन्ना, सतना, रीवा, अशोकनगर, विदिशा, रायसेन, छिंदवाड़ा, बैतूल, सीहोर, शाजापुर, देवास, आगर-मालवा और मंदसौर में भारी बारिश की चेतावनी है।

    इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, नीमच, रतलाम, हरदा, मुरैना, जबलपुर, कटनी, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश होने का अनुमान है।

    चित्रकूट में मंदाकिनी खतरे के निशान के ऊपर
    गुरुवार को चित्रकूट में मंदाकिनी का जलस्तर 138.52 मीटर तक पहुंच गया और यह खतरे के निशान के करीब रहा। SDERF ने करीब 100 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। छतरपुर में बारिश और बाढ़ के खतरे को देखते हुए सभी स्कूलों में छुट्टी कर दी गई। लवकुशनगर की गुढ़ाकला ग्राम पंचायत में मूसलाधार बारिश के दौरान एक कच्चा मकान ढह गया।

    मैहर में पुल डूबे, मंडला में नर्मदा उफान पर
    मैहर में पुलों के ऊपर से पानी बहने के कारण मुकुंदपुर रोड बंद रहा। मंडला में नर्मदा का जलस्तर 436.1 मीटर पहुंच गया। जबलपुर में बरगी बांध का जलभराव 93.33% होने के बाद पांच गेट करीब एक मीटर तक खोले गए हैं। इससे नर्मदा के घाटों पर जलस्तर करीब 4 फीट तक बढ़ने की संभावना जताई गई है।

    सीजन में अब तक 29.2 इंच बारिश
    मध्य प्रदेश में इस मानसून सीजन में अब तक 741.2 मिमी यानी 29.2 इंच बारिश दर्ज की गई है। सामान्य तौर पर इस अवधि में 31.8 इंच यानी 808.2 मिमी बारिश होनी चाहिए थी। इस लिहाज से प्रदेश में अब तक 2.6 इंच कम और ओवरऑल 8% कम बारिश हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से करीब 1% कम, जबकि पश्चिमी हिस्से में औसत से 17% कम बारिश दर्ज की गई है।

    34 जिलों में 1% से 23% तक कम बारिश
    पूर्वी हिस्से के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में इस सीजन में अब तक करीब 1% तक कम बारिश हुई है। बालाघाट, डिंडौरी, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, रीवा, सागर, सिवनी और टीकमगढ़ समेत कई जिलों में सामान्य से 1% से 23% तक कम बारिश दर्ज की गई है।

    हालांकि पिछले एक सप्ताह से पूर्वी हिस्से के कई जिलों में लगातार बारिश के कारण बाढ़ के हालात बने हुए हैं। इसके चलते सीजन में पहली बार आंकड़ों के लिहाज से पूर्वी हिस्सा बेहतर स्थिति में आया है।

    पश्चिमी हिस्से के आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, दतिया, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, खंडवा, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 6% से 54% तक कम बारिश हुई है।

    21 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश
    मौसम विभाग के मुताबिक अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मंडला, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, उमरिया, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़ और शिवपुरी में औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

  • Janmashtami Wishes 2026: राधे-कृष्ण के प्रेम से सजे ये संदेश भेजकर अपनों को दें जन्माष्टमी की बधाई

    Janmashtami Wishes 2026: राधे-कृष्ण के प्रेम से सजे ये संदेश भेजकर अपनों को दें जन्माष्टमी की बधाई


    नई दिल्ली। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व देशभर में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन मंदिरों में विशेष सजावट की जाती है और भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप का श्रृंगार कर आधी रात को जन्मोत्सव मनाया जाता है। भक्त दिनभर व्रत रखते हैं और रात में कान्हा के जन्म के बाद पूजा अर्चना कर उन्हें भोग अर्पित करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को हुआ था। उन्हें भगवान विष्णु का आठवां अवतार माना जाता है।

    श्रीकृष्ण का जीवन प्रेम भक्ति कर्म और धर्म का संदेश देता है। बचपन में उनकी नटखट लीलाएं भक्तों को आनंदित करती हैं तो वहीं महाभारत में दिया गया गीता का ज्ञान जीवन में सही कर्म और कर्तव्य का मार्ग दिखाता है। यही वजह है कि जन्माष्टमी का पर्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रहता बल्कि लोगों के बीच प्रेम और खुशियां बांटने का अवसर भी बन जाता है।

    अगर आप भी इस जन्माष्टमी पर अपने प्रियजनों को खास अंदाज में शुभकामनाएं देना चाहते हैं तो इन संदेशों को WhatsApp Facebook या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भेज सकते हैं।

    1.
    कान्हा की बंसी से जीवन में मधुरता छाए
    राधे कृष्ण की कृपा से हर सपना मुस्काए
    आपके घर सुख शांति और समृद्धि आए
    श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं।

    2.
    नटखट नंदलाल आपके सारे दुख हर लें
    अपने आशीर्वाद से जीवन को खुशियों से भर दें
    हर दिन नई उम्मीद और नई खुशी लेकर आए
    आपको और आपके परिवार को जन्माष्टमी की शुभकामनाएं।

    3.
    राधा के प्रेम और कृष्ण की मुस्कान
    आपके जीवन को बना दें खुशियों का जहान
    कान्हा की कृपा हमेशा आपके साथ रहे
    जन्माष्टमी का यह पर्व मंगलमय रहे।

    4.
    मुरलीधर की मधुर धुन जीवन में रंग भर दे
    गोविंद की कृपा हर परेशानी को दूर कर दे
    घर आंगन में सुख और प्रेम बना रहे
    श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की ढेरों शुभकामनाएं।

    5.
    नंद के घर फिर से खुशियों की बहार आए
    यशोदा के लल्ला का आशीर्वाद आपके घर आए
    जीवन से हर चिंता और परेशानी दूर हो
    जन्माष्टमी का त्योहार आपके लिए शुभ हो।

    6.
    जिसके सिर पर मोर मुकुट और हाथों में बांसुरी है
    जिसकी मुस्कान में दुनिया की सारी खुशी है
    वही कान्हा आपके जीवन में प्रेम और सुख बरसाएं
    जन्माष्टमी की बहुत बहुत बधाई।

    7.
    कृष्ण नाम की गूंज से मन को सुकून मिले
    कान्हा की भक्ति से जीवन को नई दिशा मिले
    हर कदम पर उनका आशीर्वाद बना रहे
    आपको जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं।

    8.
    माखन मिश्री जैसी मीठी हो आपकी हर खुशी
    कान्हा की कृपा से पूरी हो दिल की हर आरजू
    राधे कृष्ण का प्रेम हमेशा आपके साथ रहे
    जन्माष्टमी का पर्व आपके लिए शुभ और मंगलमय रहे।

    9.
    कान्हा की बंसी बजती रहे
    आपके आंगन में खुशियां सजती रहें
    जीवन में प्रेम और शांति बनी रहे
    श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं।

    10.
    नटखट कान्हा आपके जीवन में खुशियां लाएं
    हर मुश्किल को आसान बनाएं
    सुख समृद्धि और शांति से भर जाए आपका संसार
    आपको और आपके परिवार को जन्माष्टमी की हार्दिक बधाई।

  • शिवपुरी में हादसे से मचा हड़कंप बाइक सवार पिता-पुत्र को कार ने कुचला नाबालिग के वाहन चलाने का दावा

    शिवपुरी में हादसे से मचा हड़कंप बाइक सवार पिता-पुत्र को कार ने कुचला नाबालिग के वाहन चलाने का दावा


    शिवपुरी । शिवपुरी में गुरुवार को तेज रफ्तार कार की टक्कर से बाइक सवार पिता-पुत्र गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा विष्णु मंदिर के पास पुलिया पर हुआ जहां नीलगर चौराहे की तरफ से आ रही कार ने बाइक को साइड से टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बाइक सवार दोनों सड़क पर गिर गए और उन्हें गंभीर चोटें आईं। हादसे के बाद दोनों को इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज पहुंचाया गया जहां प्राथमिक उपचार के बाद पिता की हालत गंभीर होने पर उन्हें ग्वालियर रेफर कर दिया गया।

    हादसे में घायल धर्मेंद्र रजक उम्र 38 वर्ष ने बताया कि वह इंद्रा कॉलोनी में रहते हैं और अपनी बाइक से न्यू ब्लॉक स्थित दुकान की ओर जा रहे थे। उनके पिता भजनलाल रजक बाइक की पिछली सीट पर बैठे थे। दोनों सामान्य तरीके से अपने गंतव्य की ओर जा रहे थे। इसी दौरान विष्णु मंदिर के पास पुलिया पर सामने से आ रही कार ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी।

    धर्मेंद्र के मुताबिक कार तेज रफ्तार में थी और चालक ने वाहन को लापरवाही से चलाते हुए बाइक को टक्कर मारी। दुर्घटना में धर्मेंद्र के बाएं पैर में गंभीर चोट लगी और काफी खून बहने लगा। वहीं उनके पिता भजनलाल के पसली के अलावा दोनों पैरों और कंधे में भी गंभीर चोटें आई हैं। हादसे के बाद मौके पर अफरा तफरी का माहौल बन गया और आसपास मौजूद लोगों की मदद से घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की गई।

    धर्मेंद्र ने हादसे की जानकारी अपने बड़े भाई परमानंद रजक को दी। इसके बाद दोनों घायलों को शिवपुरी मेडिकल कॉलेज ले जाया गया। यहां डॉक्टरों ने दोनों का उपचार शुरू किया। धर्मेंद्र के पैर में गंभीर चोट होने के कारण प्लास्टर चढ़ाया गया जबकि उनके पिता की हालत अधिक गंभीर बताई गई। प्राथमिक उपचार के बाद भजनलाल को बेहतर इलाज के लिए ग्वालियर रेफर कर दिया गया।

    घायल धर्मेंद्र ने पुलिस को दिए बयान में एक अहम आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि जिस समय कार ने उनकी बाइक को टक्कर मारी उस वक्त कार एक नाबालिग लड़की चला रही थी। हालांकि पुलिस ने अभी इस आरोप की पुष्टि नहीं की है। पुलिस ने कार नंबर MP 33 C 9001 और अज्ञात चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और पूरे मामले की जांच की जा रही है।

    पुलिस अब दुर्घटना की परिस्थितियों के साथ कार कौन चला रहा था और हादसे के समय वाहन की रफ्तार कितनी थी जैसे बिंदुओं की जांच करेगी। साथ ही घायल पिता-पुत्र के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। हादसे के कारण बाइक सवार परिवार में चिंता का माहौल है और घायल पिता को ग्वालियर रेफर किए जाने के बाद परिजन उनके इलाज को लेकर परेशान हैं।