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  • भोजशाला विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की अहम पहल, मध्य प्रदेश सरकार को अंतरिम व्यवस्था बनाने का निर्देश, सभी पक्षों के अधिकारों के संतुलन पर जोर

    भोजशाला विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की अहम पहल, मध्य प्रदेश सरकार को अंतरिम व्यवस्था बनाने का निर्देश, सभी पक्षों के अधिकारों के संतुलन पर जोर

    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला परिसर से जुड़े लंबे समय से चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण अंतरिम निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने राज्य सरकार से ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा है, जिससे अंतिम निर्णय आने तक किसी भी पक्ष को असुविधा न हो और धार्मिक गतिविधियां शांतिपूर्ण ढंग से संचालित हो सकें। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था केवल अंतरिम प्रकृति की होगी और इससे किसी भी पक्ष के कानूनी अधिकारों या दावों पर कोई अंतिम प्रभाव नहीं पड़ेगा।

    सुनवाई के दौरान सर्वोच्च अदालत ने कहा कि संवेदनशील मामलों में शांति, सामाजिक सौहार्द और कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। इसी उद्देश्य से राज्य सरकार को निर्देश दिया गया कि वह ऐसी व्यावहारिक व्यवस्था तैयार करे, जिससे सभी संबंधित पक्षों की आवश्यकताओं का संतुलित समाधान हो सके। अदालत ने यह भी कहा कि अंतरिम व्यवस्था को अंतिम निर्णय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

    भोजशाला परिसर को लेकर लंबे समय से दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे हैं। एक पक्ष इसे मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर मानता है, जबकि दूसरा पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद के रूप में मान्यता देने की मांग करता है। इसी विवाद से संबंधित विभिन्न याचिकाओं पर न्यायिक प्रक्रिया जारी है और मामला अभी अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा में है।

    सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष की ओर से यह दलील दी गई कि पूर्व की व्यवस्था में बदलाव के कारण धार्मिक गतिविधियों पर प्रभाव पड़ा है। वहीं दूसरे पक्ष ने अपने ऐतिहासिक और धार्मिक दावों को दोहराते हुए संबंधित दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर अपना पक्ष अदालत के समक्ष रखा। दोनों पक्षों ने विस्तृत कानूनी तर्क प्रस्तुत किए, जिन पर अदालत ने गंभीरता से विचार किया।

    कार्यवाही के दौरान सर्वोच्च अदालत ने सभी पक्षों के वरिष्ठ अधिवक्ताओं को भी संयम बरतने की सलाह दी। अदालत ने कहा कि यह अत्यंत संवेदनशील विषय है और बहस के दौरान प्रयुक्त भाषा तथा शब्दों का चयन अत्यधिक सावधानी के साथ किया जाना चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की अनावश्यक विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो।

    अदालत ने संकेत दिया कि इस मामले की अंतिम सुनवाई विस्तृत रूप से की जाएगी। इसके लिए दोनों पक्षों के वरिष्ठ अधिवक्ताओं की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए उपयुक्त तिथि निर्धारित की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर पूरे दिन सुनवाई कर सभी पक्षों के तर्कों और उपलब्ध साक्ष्यों पर विस्तार से विचार किया जाएगा।

    इस बीच मध्य प्रदेश सरकार पर अंतरिम व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने की जिम्मेदारी रहेगी। अदालत का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अंतिम न्यायिक निर्णय आने तक परिसर में शांति, कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द बना रहे तथा किसी भी समुदाय के अधिकारों पर अनावश्यक प्रभाव न पड़े।

    भोजशाला विवाद देश के प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक मामलों में शामिल रहा है। सर्वोच्च अदालत के ताजा निर्देशों के बाद अब सभी की निगाहें राज्य सरकार द्वारा बनाई जाने वाली अंतरिम व्यवस्था और आगामी विस्तृत सुनवाई पर टिकी हैं। अंतिम फैसला आने तक न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार सभी पक्षों के दावों और अधिकारों पर विधिक परीक्षण जारी रहेगा।

  • बायोकॉन में ₹3,481 करोड़ की ब्लॉक डील से शेयरों में जबरदस्त उछाल, 18 महीने की सबसे बड़ी तेजी के बाद निवेशकों की नजर आगे की चाल पर

    बायोकॉन में ₹3,481 करोड़ की ब्लॉक डील से शेयरों में जबरदस्त उछाल, 18 महीने की सबसे बड़ी तेजी के बाद निवेशकों की नजर आगे की चाल पर

    नई दिल्ली । फार्मा क्षेत्र की प्रमुख कंपनी बायोकॉन के शेयरों में मंगलवार को बाजार खुलते ही तेज खरीदारी देखने को मिली, जिससे कंपनी का शेयर एक समय सात प्रतिशत से अधिक की बढ़त के साथ 18 महीनों के सबसे बड़े एकदिवसीय उछाल की ओर बढ़ गया। बाजार में आई इस तेजी की सबसे बड़ी वजह कंपनी में बड़े पैमाने पर हुई ब्लॉक डील और प्रमुख निवेशक मायलन द्वारा अपनी पूरी हिस्सेदारी बेचने की तैयारी रही। इस घटनाक्रम के बाद निवेशकों के बीच कंपनी को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है और बाजार की नजर अब आगे होने वाले बदलावों पर टिक गई है।

    बाजार में आई तेजी के पीछे सबसे अहम कारण मायलन की ओर से बायोकॉन में मौजूद अपनी 5.64 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की योजना मानी जा रही है। इस हिस्सेदारी का अनुमानित मूल्य करीब 3,481 करोड़ रुपये बताया जा रहा है। जैसे ही इस बड़े सौदे की जानकारी बाजार तक पहुंची, निवेशकों की सक्रियता बढ़ गई और शेयर में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार के दौरान शेयर ने मजबूत बढ़त दर्ज करते हुए कई महीनों का उच्च स्तर छू लिया।

    कारोबारी सत्र की शुरुआत में लगभग नौ करोड़ शेयरों का बड़ा ब्लॉक डील बाजार में दर्ज किया गया। पहले चरण में करीब 4.4 करोड़ और दूसरे चरण में लगभग 4.6 करोड़ शेयरों की खरीद-बिक्री हुई। दोनों सौदों को मिलाकर यह संख्या लगभग उतनी ही रही, जितनी हिस्सेदारी मायलन के पास थी। हालांकि शुरुआती कारोबार के दौरान इन शेयरों के खरीदार और विक्रेता की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई, लेकिन बाजार विशेषज्ञों ने इसे बड़े संस्थागत निवेशकों की भागीदारी वाला महत्वपूर्ण लेनदेन माना।

    उपलब्ध शेयरहोल्डिंग आंकड़ों के अनुसार कंपनी में प्रमोटर किरण मजूमदार-शॉ की हिस्सेदारी लगभग 30 प्रतिशत है, जबकि ग्लेंटेक इंटरनेशनल के पास करीब 15 प्रतिशत हिस्सेदारी मौजूद है। इसके अलावा कई घरेलू म्यूचुअल फंड और बीमा कंपनियां भी कंपनी में महत्वपूर्ण निवेश बनाए हुए हैं। बड़ी संख्या में खुदरा निवेशकों की भागीदारी भी कंपनी में बनी हुई है, जिससे यह शेयर लंबे समय से निवेशकों के बीच लोकप्रिय माना जाता है।

    हाल के महीनों में बायोकॉन के शेयर ने लगातार सकारात्मक प्रदर्शन किया है। पिछले एक सप्ताह में इसमें उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की गई, जबकि एक महीने के दौरान भी शेयर मजबूत स्थिति में बना रहा। वर्ष 2026 की शुरुआत से अब तक निवेशकों को दोहरे अंक का रिटर्न मिल चुका है। वहीं लंबी अवधि के निवेशकों के लिए भी कंपनी ने पिछले तीन वर्षों में बेहतर लाभ दिया है, जिससे इस शेयर पर भरोसा बना हुआ है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि किसी बड़े निवेशक के बाहर निकलने का अर्थ हमेशा कंपनी के मूलभूत कारोबार में कमजोरी नहीं होता। कई बार वैश्विक कंपनियां अपनी निवेश रणनीति में बदलाव के तहत हिस्सेदारी बेचती हैं। ऐसे में बाजार की वास्तविक प्रतिक्रिया इस बात पर निर्भर करती है कि इन शेयरों को कौन से नए निवेशक खरीदते हैं और कंपनी की भविष्य की कारोबारी रणनीति कैसी रहती है।

    बायोकॉन से जुड़े इस बड़े घटनाक्रम ने फिलहाल बाजार का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। आने वाले दिनों में निवेशकों की निगाह कंपनी के शेयरहोल्डिंग पैटर्न, संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों और कारोबारी प्रदर्शन पर बनी रहेगी। यदि कंपनी अपने परिचालन और वित्तीय प्रदर्शन को मजबूत बनाए रखती है, तो शेयर की आगे की दिशा पर भी इसका सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है।

  • एस. जयशंकर ने रखा भारत का वैश्विक विजन; बोले- संघर्ष और अस्थिरता के दौर में संयुक्त राष्ट्र को निभानी होगी निर्णायक भूमिका

    एस. जयशंकर ने रखा भारत का वैश्विक विजन; बोले- संघर्ष और अस्थिरता के दौर में संयुक्त राष्ट्र को निभानी होगी निर्णायक भूमिका

    नई दिल्ली । भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की 2028-29 की गैर-स्थायी सदस्यता के लिए अपना औपचारिक अभियान शुरू करते हुए वैश्विक मंच पर अपनी प्राथमिकताओं और दृष्टिकोण को स्पष्ट किया है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अभियान की शुरुआत के दौरान कहा कि वर्तमान समय में दुनिया अभूतपूर्व संघर्ष, हिंसा और अस्थिरता के दौर से गुजर रही है। ऐसे माहौल में संयुक्त राष्ट्र और विशेष रूप से सुरक्षा परिषद की जिम्मेदारी पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि वैश्विक शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए संयुक्त राष्ट्र को अधिक प्रभावी, प्रतिनिधित्वपूर्ण और भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप कार्य करना होगा।

    डॉ. जयशंकर ने कहा कि भारत का उद्देश्य केवल सुरक्षा परिषद की सदस्यता हासिल करना नहीं, बल्कि वैश्विक शासन व्यवस्था को अधिक समावेशी और व्यावहारिक बनाने में सक्रिय योगदान देना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत ऐसी विश्व व्यवस्था का समर्थन करता है जहां सभी देशों की आवाज को समान महत्व मिले और विकासशील देशों, विशेषकर ग्लोबल साउथ, को निर्णय प्रक्रिया में उचित प्रतिनिधित्व प्राप्त हो। उनके अनुसार बदलती वैश्विक परिस्थितियों में बहुपक्षीय संस्थाओं को भी समय के अनुरूप स्वयं को ढालना आवश्यक है।

    विदेश मंत्री ने बताया कि भारत का पूरा अभियान एसएचएएनटीआई दृष्टिकोण पर आधारित होगा, जिसका उद्देश्य विश्वास, पारदर्शिता, अंतरराष्ट्रीय मानकों और सहयोग के माध्यम से समग्र प्रगति सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि भारत विभिन्न देशों के बीच संवाद, सहयोग और आपसी विश्वास को बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास करेगा ताकि अंतरराष्ट्रीय विवादों का समाधान शांतिपूर्ण तरीकों से संभव हो सके। उनका मानना है कि स्थायी शांति केवल बातचीत और सहयोग से ही सुनिश्चित की जा सकती है।

    उन्होंने संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों को और अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उनके अनुसार भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए पीसकीपिंग मिशनों को आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रशिक्षण और स्पष्ट रणनीति से लैस करना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत महिला, शांति और सुरक्षा एजेंडा को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा तथा शांति अभियानों में महिला शांति सैनिकों की भूमिका को और मजबूत करने का समर्थन करेगा।

    नई और उभरती तकनीकों का उल्लेख करते हुए डॉ. जयशंकर ने कहा कि भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता के मानव-केंद्रित और जिम्मेदार उपयोग का समर्थक है। उन्होंने कहा कि एआई का उपयोग समावेशी विकास, सार्वजनिक हित और सुरक्षा के लिए किया जाना चाहिए। साथ ही इसके दुरुपयोग को रोकने और अंतरराष्ट्रीय शांति व सुरक्षा पर संभावित खतरों से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग की आवश्यकता भी उन्होंने रेखांकित की।

    समुद्री सुरक्षा को भारत की महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में शामिल बताते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि नियम-आधारित और स्वतंत्र समुद्री व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक है। उन्होंने सुरक्षित समुद्री व्यापार, समुद्री डकैती पर नियंत्रण, नाविकों की सुरक्षा तथा मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों को निरंतर समर्थन देने की भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही उन्होंने आतंकवाद के वित्तपोषण पर प्रभावी रोक लगाने और आतंकी संगठनों के खिलाफ पारदर्शी एवं साक्ष्य-आधारित वैश्विक प्रतिबंध प्रणाली की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

    अपने संबोधन के अंत में डॉ. जयशंकर ने कहा कि आज की चुनौतियों का समाधान तभी संभव है जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण, उत्तरदायी और परिणामोन्मुख बने। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत का अभियान वैश्विक शासन व्यवस्था को अधिक समावेशी, संतुलित और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगा तथा विश्व समुदाय के सामने मौजूद नई चुनौतियों से सामूहिक रूप से निपटने का मार्ग प्रशस्त करेगा।

  • 10 महीनों में 50 लाख यूजर्स का आंकड़ा पार, 'अदाणी वन' ऐप ने एयरपोर्ट लॉयल्टी प्रोग्राम में बनाई मजबूत पहचान, यात्रियों के लिए जल्द आएंगी नई प्रीमियम सुविधाएं

    10 महीनों में 50 लाख यूजर्स का आंकड़ा पार, 'अदाणी वन' ऐप ने एयरपोर्ट लॉयल्टी प्रोग्राम में बनाई मजबूत पहचान, यात्रियों के लिए जल्द आएंगी नई प्रीमियम सुविधाएं

    नई दिल्ली । देश में तेजी से बढ़ते डिजिटल एयरपोर्ट इकोसिस्टम के बीच अदाणी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड के कंज्यूमर ऐप ‘अदाणी वन’ ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। कंपनी के एयरपोर्ट लॉयल्टी प्रोग्राम ‘अदाणी रिवार्ड्स’ ने लॉन्च होने के महज 10 महीनों के भीतर 50 लाख सदस्यों का आंकड़ा पार कर लिया है। यह उपलब्धि इस बात का संकेत मानी जा रही है कि यात्रियों के बीच डिजिटल सेवाओं और रिवार्ड आधारित सुविधाओं की स्वीकार्यता लगातार बढ़ रही है। कंपनी का मानना है कि यह बढ़ती भागीदारी यात्रियों को अधिक सुविधाजनक, तेज और लाभकारी एयरपोर्ट अनुभव उपलब्ध कराने की दिशा में सकारात्मक संकेत देती है।

    ‘अदाणी रिवार्ड्स’ देश के सात राज्यों में स्थित अदाणी एयरपोर्ट्स द्वारा संचालित सभी आठ एयरपोर्ट पर उपलब्ध है। इस कार्यक्रम के तहत यात्री ‘अदाणी वन’ ऐप के माध्यम से एयरपोर्ट परिसर में खरीदारी, खानपान और अन्य सेवाओं का उपयोग करते समय रिवार्ड पॉइंट अर्जित कर सकते हैं। बाद में इन पॉइंट्स का उपयोग विभिन्न सुविधाओं और विशेष लाभों के लिए किया जा सकता है। इससे यात्रियों को अपनी नियमित यात्रा के दौरान अतिरिक्त लाभ प्राप्त करने का अवसर मिलता है।

    कंपनी के अनुसार, डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से यात्रियों को एकीकृत सेवाएं उपलब्ध कराने का प्रयास लगातार किया जा रहा है। ऐप के जरिए टिकट, एयरपोर्ट सेवाएं और रिवार्ड सिस्टम को एक ही मंच पर उपलब्ध कराने से उपयोगकर्ताओं का अनुभव अधिक सरल और सुविधाजनक बना है। यही वजह है कि कम समय में बड़ी संख्या में लोगों ने इस प्लेटफॉर्म को अपनाया है और लॉयल्टी प्रोग्राम से जुड़ना पसंद किया है।

    कंपनी ने यह भी जानकारी दी है कि वर्ष के अंत तक टियर-बेस्ड मेंबरशिप मॉडल शुरू करने की योजना बनाई गई है। इस नई व्यवस्था के तहत नियमित और अधिक यात्रा करने वाले यात्रियों को अतिरिक्त लाभ, विशेष सुविधाएं और उनकी जरूरतों के अनुरूप व्यक्तिगत सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे यात्रियों की भागीदारी बढ़ाने के साथ-साथ एयरपोर्ट अनुभव को और बेहतर बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

    कंपनी के प्रतिनिधियों का कहना है कि 50 लाख सदस्यों का आंकड़ा पार करना ‘अदाणी रिवार्ड्स’ के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। आने वाले समय में नए फीचर्स, बेहतर ऑफर्स और अतिरिक्त सुविधाएं जोड़ी जाएंगी ताकि अधिक से अधिक यात्री इस प्लेटफॉर्म से जुड़ सकें। कंपनी का उद्देश्य अपने सभी एयरपोर्ट पर यात्रियों को एक समान और आधुनिक डिजिटल अनुभव प्रदान करना है।

    यात्रियों के लिए इस प्रोग्राम से जुड़ना भी काफी आसान बनाया गया है। एयरपोर्ट पर खरीदारी या अन्य सेवाओं का उपयोग करते समय केवल मोबाइल नंबर के माध्यम से तुरंत सदस्यता ली जा सकती है। इसके बाद अर्जित रिवार्ड पॉइंट्स का उपयोग मुफ्त खानपान, प्रीमियम एयरपोर्ट सेवाओं और अन्य विशेष सुविधाओं के लिए किया जा सकता है। इससे यात्रियों को नियमित यात्रा के दौरान अतिरिक्त मूल्य प्राप्त होता है।

    कंपनी ने यह भी बताया कि दिवाली, विंटरफेस्ट और समर कार्निवल जैसे विशेष अभियान उपयोगकर्ताओं की भागीदारी बढ़ाने में प्रभावी साबित हुए हैं। इन अभियानों के दौरान विशेष ऑफर्स और चुनिंदा अनुभव उपलब्ध कराए गए, जिससे ऐप के उपयोग में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। वर्तमान में कंपनी मुंबई, अहमदाबाद, लखनऊ, जयपुर, मंगलुरु, गुवाहाटी, तिरुवनंतपुरम और नवी मुंबई सहित आठ एयरपोर्ट का संचालन कर रही है। आने वाले महीनों में लॉयल्टी प्रोग्राम का और विस्तार कर यात्रियों को अधिक डिजिटल सुविधाएं और बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने की योजना पर काम किया जा रहा है।

  • अदाणी इलेक्ट्रिसिटी ने घटाया एटीएंडसी लॉस, हजारों छापों से करोड़ों की चोरी का हुआ खुलासा

    अदाणी इलेक्ट्रिसिटी ने घटाया एटीएंडसी लॉस, हजारों छापों से करोड़ों की चोरी का हुआ खुलासा


    नई दिल्ली ।
    बिजली चोरी के खिलाफ लगातार चलाए गए सघन अभियान का असर अब बिजली वितरण व्यवस्था के प्रदर्शन में भी दिखाई देने लगा है। अदाणी इलेक्ट्रिसिटी ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान अपने एग्रीगेट टेक्निकल एंड कमर्शियल (एटीएंडसी) लॉस को घटाकर 4.46 प्रतिशत तक पहुंचाने का दावा किया है। कंपनी के अनुसार यह पिछले वित्त वर्ष की तुलना में बेहतर प्रदर्शन है और इससे वितरण प्रणाली की दक्षता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

    कंपनी का कहना है कि एटीएंडसी लॉस में आई कमी का सीधा लाभ उन उपभोक्ताओं को मिलेगा जो नियमित रूप से बिजली बिल का भुगतान करते हैं। बिजली चोरी कम होने से वितरण कंपनियों पर वित्तीय दबाव घटता है, जिससे नेटवर्क को बेहतर बनाने और उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण सेवा उपलब्ध कराने में मदद मिलती है। साथ ही बिजली आपूर्ति व्यवस्था भी अधिक स्थिर और विश्वसनीय बनती है।

    बिजली चोरी पर अंकुश लगाने के लिए पूरे वर्ष बड़े स्तर पर विशेष अभियान चलाया गया। इस दौरान हजारों स्थानों पर छापेमारी की गई और चोरी के मामलों में सैकड़ों प्राथमिकी दर्ज कराई गईं। अभियान के दौरान सुबह, देर शाम और अवकाश के दिनों में भी विशेष कार्रवाई की गई, ताकि चोरी के ऐसे मामलों को रोका जा सके जो सामान्य निरीक्षण के दौरान सामने नहीं आ पाते।

    जांच के दौरान बड़ी मात्रा में अवैध बिजली खपत का पता चला। इसके साथ ही बिजली चोरी में इस्तेमाल किए जा रहे भारी मात्रा में अवैध तार और अन्य उपकरण भी जब्त किए गए। कंपनी का कहना है कि इस कार्रवाई से करोड़ों रुपये मूल्य की अवैध बिजली खपत का खुलासा हुआ, जिससे वितरण व्यवस्था को होने वाले आर्थिक नुकसान को कम करने में मदद मिली।

    अभियान के दौरान औद्योगिक गतिविधियों से जुड़े कुछ बड़े मामलों का भी पता चला, जहां कथित रूप से सीधे बिजली आपूर्ति का उपयोग कर अवैध तरीके से बिजली का इस्तेमाल किया जा रहा था। ऐसे मामलों में संबंधित स्थानों पर कार्रवाई करते हुए अवैध कनेक्शन हटाए गए और कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई। कंपनी का कहना है कि इस प्रकार की कार्रवाई भविष्य में बिजली चोरी पर प्रभावी रोक लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि बिजली चोरी केवल आर्थिक नुकसान का विषय नहीं है, बल्कि इससे पूरे वितरण नेटवर्क पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। अधिक भार के कारण ट्रांसफॉर्मर, केबल और अन्य उपकरणों के खराब होने की संभावना बढ़ जाती है। विशेष रूप से अधिक मांग वाले घनी आबादी वाले क्षेत्रों में इसका असर बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता और रखरखाव लागत दोनों पर पड़ता है।

    बिजली अधिनियम के प्रावधानों के तहत बिजली चोरी को गंभीर अपराध माना गया है। दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ जुर्माना, कारावास अथवा दोनों प्रकार की कार्रवाई का प्रावधान है। इसी कारण कंपनी स्थानीय प्रशासन और पुलिस के सहयोग से नियमित संयुक्त अभियान चलाकर ऐसे मामलों में कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है।

    कंपनी का मानना है कि बिजली चोरी पर प्रभावी नियंत्रण से न केवल वितरण प्रणाली अधिक मजबूत होगी, बल्कि उपभोक्ताओं को प्रतिस्पर्धी दरों पर बेहतर सेवा उपलब्ध कराने में भी सहायता मिलेगी। आने वाले समय में भी विशेष निगरानी अभियान जारी रखने की योजना है, ताकि एटीएंडसी लॉस को और कम किया जा सके तथा बिजली वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और सक्षम बनाया जा सके।

  • फर्जी पहचान, शादी और करोड़ों के सपनों का जाल! खुद को IAS बताने वाली महिला पर ठगी और हत्या के प्रयास का मामला दर्ज

    फर्जी पहचान, शादी और करोड़ों के सपनों का जाल! खुद को IAS बताने वाली महिला पर ठगी और हत्या के प्रयास का मामला दर्ज

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के बरेली जिले से कथित फर्जी पहचान के जरिए शादी करने का एक मामला सामने आया है। आरोप है कि एक महिला ने स्वयं को भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी बताकर युवक से विवाह किया। बाद में जब उसके दावों की सत्यता पर सवाल उठे तो पति ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने महिला को गिरफ्तार कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस के अनुसार, युवक और महिला की पहचान सोशल मीडिया के माध्यम से हुई थी। बातचीत के दौरान महिला ने स्वयं को IAS अधिकारी बताया और दावा किया कि एक न्यायिक मामले के कारण उसकी नियुक्ति लंबित है। युवक का आरोप है कि महिला और उसके परिजनों ने भी इसी बात की पुष्टि करते हुए भरोसा दिलाया कि मामला समाप्त होते ही वह प्रशासनिक सेवा में कार्यभार संभाल लेगी। इन दावों पर विश्वास करने के बाद दोनों ने विवाह कर लिया।

    शिकायत में कहा गया है कि विवाह के शुरुआती दिनों के बाद महिला का व्यवहार बदलने लगा। पति का आरोप है कि उसने परिवार के बहुमूल्य आभूषण और अन्य कीमती सामान अपने कब्जे में ले लिया। आरोप यह भी है कि बाद में परिवार पर बड़ी धनराशि की मांग का दबाव बनाया गया और आर्थिक लाभ के लिए जमीन बेचने का सुझाव दिया गया। जब परिवार ने इसका विरोध किया तो कथित रूप से झूठे मुकदमों में फंसाने और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई।

    पति ने अपनी शिकायत में यह भी आरोप लगाया है कि एक रात महिला ने कथित रूप से उसका गला दबाकर हत्या करने का प्रयास किया। उसने तत्काल पुलिस सहायता ली, जिसके बाद स्थानीय स्तर पर मामले को सुलझाने का प्रयास भी किया गया। हालांकि विवाद समाप्त नहीं हुआ और बाद में पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई।

    मामले में दर्ज प्राथमिकी में महिला के साथ उसके पिता, भाई और एक अन्य रिश्तेदार को भी नामजद किया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि सभी ने मिलकर महिला की पहचान और नौकरी को लेकर गलत जानकारी देकर विवाह कराया। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि क्या इस तरह की शिकायतें पहले भी सामने आई थीं और क्या अन्य लोगों के साथ भी इसी प्रकार की घटनाएं हुई हैं।

    पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच और दर्ज मुकदमे के आधार पर महिला को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले से जुड़े दस्तावेज, डिजिटल साक्ष्य और अन्य प्रमाण जुटाए जा रहे हैं। साथ ही नामजद अन्य व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    यह मामला एक बार फिर ऑनलाइन पहचान और वैवाहिक संबंधों में तथ्यों के सत्यापन की आवश्यकता को रेखांकित करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया के माध्यम से बनने वाले संबंधों में व्यक्तिगत और पेशेवर दावों की पुष्टि करना आवश्यक है, ताकि भविष्य में इस प्रकार के विवादों और धोखाधड़ी की संभावनाओं को कम किया जा सके। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और पुलिस सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है।

  • पाकिस्तानी दर्शकों पर चढ़ा भारतीय फिल्मों का सुरूर, नेटफ्लिक्स पर हफ्तों से टॉप ट्रेंड में बनी हुई हैं ये 6 बेहतरीन मूवीज

    पाकिस्तानी दर्शकों पर चढ़ा भारतीय फिल्मों का सुरूर, नेटफ्लिक्स पर हफ्तों से टॉप ट्रेंड में बनी हुई हैं ये 6 बेहतरीन मूवीज


    नई दिल्ली ।
    पड़ोसी देश पाकिस्तान में भारतीय फिल्मों और डिजिटल कंटेंट के प्रति दीवानगी लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है। सांस्कृतिक और भौगोलिक सीमाओं को दरकिनार करते हुए, पाकिस्तानी दर्शक इस समय ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर भारतीय सिनेमा को बेहद चाव से देख रहे हैं। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, नेटफ्लिक्स पाकिस्तान की टॉप 10 सूची में छह भारतीय फिल्मों ने अपनी मजबूत पकड़ बना रखी है। इनमें से कुछ फिल्में तो ऐसी हैं जो पिछले कई हफ्तों से लगातार ट्रेंडिंग चार्ट में शीर्ष पर बनी हुई हैं, जिससे साफ पता चलता है कि दोनों देशों के बीच कला और मनोरंजन के स्तर पर जुड़ाव कितना गहरा है।

    इस सूची में जो फिल्म सबसे ज्यादा ध्यान आकर्षित कर रही है, वह है अभिनेता रणवीर सिंह की ब्लॉकबस्टर फिल्म का अनकट वर्जन ‘धुरंधर: रॉ और अनदेखा’। यह फिल्म अपनी रिलीज के समय से ही काफी विवादों में घिरी रही थी, लेकिन इसके बावजूद पिछले आठ हफ्तों से यह पाकिस्तान में नेटफ्लिक्स की टॉप 10 सूची में नौवें स्थान पर बनी हुई है। सेंसर बोर्ड की कैंची के बिना, पूरी तरह से अनसेंसर्ड और अनकट फॉर्मेट में रिलीज की गई इस थ्रिलर फिल्म को देखने के लिए दर्शकों में भारी उत्सुकता देखी जा रही है और विवादों के बाद भी इसका ट्रेंड में बने रहना बेहद चौंकाने वाला है।

    ट्रेंडिंग चार्ट में दूसरे नंबर पर दक्षिण भारतीय सिनेमा के दिग्गज कलाकार अर्जुन सरजा की फिल्म ‘ब्लास्ट’ का कब्जा है। सुभाष के राज के निर्देशन में बनी यह फिल्म थियेटरों में अपनी सफलता का परचम लहराने के बाद अब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी कमाल कर रही है। फिल्म में प्रीति मुखुंधन और अभिरामी जैसे कलाकारों ने मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं और इसे पाकिस्तानी दर्शकों का भरपूर प्यार मिल रहा है। इसके ठीक बाद तीसरे स्थान पर बॉलीवुड के खिलाड़ी अक्षय कुमार और वामिका गब्बी की हॉरर-कॉमेडी फिल्म ‘भूत बंगला’ काबिज है। निर्देशक प्रियदर्शन की इस फिल्म को दर्शकों द्वारा खूब सराहा जा रहा है।

    पारिवारिक मनोरंजन की श्रेणी में कॉमेडी-ड्रामा फिल्म ‘दादी की शादी’ इस सूची में चौथे स्थान पर ट्रेंड कर रही है। इस फिल्म में कपिल शर्मा, नीतू कपूर और सादिया खातीब जैसे कलाकारों की जुगलबंदी लोगों को खूब हंसा रही है। वहीं, अभिनेता रितेश देशमुख की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित फिल्म ‘राजा शिवाजी’ छठे नंबर पर अपनी जगह बनाने में कामयाब रही है। इस फिल्म की खास बात इसमें सलमान खान का कैमियो रोल और संजय दत्त, विद्या बालन तथा अभिषेक बच्चन जैसे बड़े सितारों की मौजूदगी है, जिसने दर्शकों को अपनी ओर खींचा है।

    इस सूची को पूरा करती है सुरेश त्रिवेनी के निर्देशन में बनी ब्लैक कॉमेडी थ्रिलर फिल्म ‘मां बहन’, जो आठवें स्थान पर काबिज है। माधुरी दीक्षित, तृप्ति डीमरी और रवि किशन जैसे बेहतरीन कलाकारों से सजी इस फिल्म को इसके अनोखे विषय और सस्पेंस के कारण काफी पसंद किया जा रहा है। कुल मिलाकर, नेटफ्लिक्स का यह मौजूदा ट्रेंड यह साबित करता है कि कहानी कहने का बेहतरीन अंदाज और दमदार अभिनय हर तरह की सीमाओं को पार कर दर्शकों के दिलों में अपनी जगह बना ही लेता है।

  • राम मंदिर में चढ़ावे पर मचे विवाद के बीच बड़ा कदम: सुरक्षा और रसीद का सबूत मांगने वाले दानदाताओं का समर्पण लौटाने की तैयारी में ट्रस्ट

    राम मंदिर में चढ़ावे पर मचे विवाद के बीच बड़ा कदम: सुरक्षा और रसीद का सबूत मांगने वाले दानदाताओं का समर्पण लौटाने की तैयारी में ट्रस्ट

    नई दिल्ली । राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किए गए चढ़ावे की सुरक्षा और उसकी रसीदों को लेकर उपजे विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने एक बेहद कड़ा और अप्रत्याशित कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। मंदिर प्रबंधन उन सभी दानदाताओं का समर्पण और भेंट की गई बहुमूल्य वस्तुएं वापस लौटाने की योजना पर विचार कर रहा है, जिन्होंने हाल के दिनों में चढ़ावे की सुरक्षा पर सार्वजनिक रूप से सवाल खड़े किए थे और मीडिया के समक्ष गंभीर आरोप लगाए थे। हालांकि ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि इस अति-संवेदनशील विषय पर अभी कोई अंतिम और औपचारिक निर्णय नहीं लिया गया है, लेकिन इस पर आंतरिक रूप से गंभीर विमर्श का दौर जारी है।

    इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में श्रद्धालुओं द्वारा लगाए गए वे आरोप हैं जिनमें कहा गया था कि उनके द्वारा समर्पित की गई बहुमूल्य सामग्रियों की न तो उचित रसीद प्रदान की गई और न ही उन्हें मंदिर परिसर में उचित स्थान पर प्रदर्शित या सुरक्षित रखा गया। इन दावों के सामने आने के बाद ट्रस्ट की ओर से यह तर्क दिया जा रहा है कि मंदिर के गर्भगृह में स्थान अत्यंत सीमित और निश्चित है, जिसके कारण हर श्रद्धालु की भेंट को वहां स्थायी रूप से सजाकर रखना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। मंदिर प्रशासन के अनुसार, केवल समय-समय पर आवश्यक और उपयोगी वस्तुओं को ही पूजा-अर्चना के विधान में शामिल किया जाता है और उसके बाद उन्हें पुनः सुरक्षित तिजोरियों में रखवा दिया जाता है।

    इसके साथ ही धातु के रूप में मिलने वाले दान और उसकी रसीद की प्रक्रिया को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की गई है। ट्रस्ट का मानना है कि श्रद्धालुओं द्वारा सौंपी जाने वाली मूल्यवान धातुओं की शुद्धता का वैज्ञानिक परीक्षण किए बिना तत्काल रसीद जारी करना संभव नहीं है। शुद्धता की जांच होने के बाद ही धातु का वास्तविक मूल्य और मात्रा निर्धारित होती है, जिसके आधार पर रसीद में उल्लेख किया जाता है। दानदाताओं द्वारा दी जाने वाली वस्तुओं को धातु के मूल रूप में ही रिकॉर्ड में दर्ज किया जाता है, इसलिए तत्क्षण रसीद की मांग करना तार्किक रूप से सही नहीं है।

    उल्लेखनीय है कि देश के विभिन्न हिस्सों से आए कई प्रतिष्ठित दानदाताओं ने अपना बहुमूल्य चढ़ावा गायब होने या उसका उचित हिसाब न मिलने की शिकायतें की थीं। इन सामग्रियों में पूर्व गृह सचिव एस लक्ष्मीनारायण द्वारा भेंट की गई स्वर्ण मंडित श्रीरामचरितमानस, सिंधी समाज की ओर से दी गई दो सौ किलोग्राम चांदी की ईंटें, सराफा व्यवसायियों द्वारा समर्पित लगभग साठ किलोग्राम चांदी, चांदी की बनी कागभुसंडि आकृति, अत्यंत कीमती हार और चांदी की चरण पादुकाएं शामिल थीं। इस विवाद पर विराम लगाने के उद्देश्य से मंदिर न्यास ने छह जुलाई को बकायदा साक्ष्यों के साथ पूरे चढ़ावे का हिसाब सार्वजनिक रूप से पेश किया था, जिसमें कई मूल्यवान वस्तुओं को प्रत्यक्ष रूप से प्रदर्शित किया गया था और चांदी को पिघलाकर सुरक्षित रखने के प्रमाण भी मीडिया के सामने रखे गए थे।

    इस पूरे प्रकरण ने अब कानूनी रूप भी अख्तियार कर लिया है और राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े विवाद तथा वित्तीय प्रबंधन को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत में तीन अलग-अलग याचिकाएं दायर की जा चुकी हैं। पहली याचिका में चढ़ावा चोरी के आरोपों की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो से जांच कराने के साथ-साथ मंदिर ट्रस्ट के समस्त वित्तीय लेन-देन का भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक से ऑडिट कराने की मांग की गई है। दूसरी याचिका में विभिन्न जांच एजेंसियों के विशेषज्ञों को मिलाकर एक संयुक्त विशेष जांच दल के गठन की गुहार लगाई गई है ताकि न्यास के प्रशासनिक कामकाज में सामने आ रही कथित वित्तीय अनियमिताओं की तह तक जाया जा सके।

    तीसरी याचिका के माध्यम से पूरे ट्रस्ट के वित्तीय संचालन का एक व्यापक फोरेंसिक ऑडिट कराने की मांग उठाई गई है। इस याचिका में केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और मंदिर ट्रस्ट को एक ऐसी मजबूत विनियामक और निगरानी व्यवस्था विकसित करने का निर्देश देने की मांग की गई है जो भविष्य में इस तरह के विवादों को रोक सके। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि देश और दुनिया के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और उनके द्वारा दिए जाने वाले दान की शुचिता को बनाए रखने के लिए एक अत्यंत पारदर्शी ऑडिट सिस्टम का होना अनिवार्य है, ताकि मंदिर प्रशासन की जवाबदेही हर स्तर पर सुनिश्चित की जा सके।

  • एमबाप्पे बनाम यामल की टक्कर विश्व कप सेमीफाइनल में फ्रांस और स्पेन के बीच होगा हाई वोल्टेज मुकाबला

    एमबाप्पे बनाम यामल की टक्कर विश्व कप सेमीफाइनल में फ्रांस और स्पेन के बीच होगा हाई वोल्टेज मुकाबला


    नई दिल्ली । फीफा विश्व कप 2026 अब अपने सबसे रोमांचक दौर में पहुंच चुका है। टूर्नामेंट का पहला सेमीफाइनल मुकाबला मौजूदा यूरोपीय चैंपियन स्पेन और दो बार की विश्व विजेता फ्रांस के बीच खेला जाएगा। टेक्सास के डलास स्टेडियम में होने वाले इस हाई वोल्टेज मुकाबले में दोनों टीमें फाइनल का टिकट हासिल करने के इरादे से मैदान में उतरेंगी। दुनिया भर के फुटबॉल प्रशंसकों की निगाहें इस मुकाबले पर टिकी हैं क्योंकि दोनों टीमों के पास विश्व स्तरीय खिलाड़ी और शानदार फॉर्म मौजूद है।

    फ्रांस लगातार तीसरी बार फीफा विश्व कप के फाइनल में पहुंचने से सिर्फ एक कदम दूर है। कोच डिडियर डेसचैम्प्स की टीम ने पूरे टूर्नामेंट में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। ग्रुप चरण में सेनेगल इराक और नॉर्वे को हराकर फ्रांस ने शानदार शुरुआत की। इसके बाद नॉकआउट चरण में स्वीडन पैराग्वे और मोरक्को जैसी मजबूत टीमों को मात देकर सेमीफाइनल में जगह बनाई। टीम के कप्तान किलियन एमबाप्पे के अलावा ओस्मान डेम्बेले माइकल ओलिस और मार्कस थुरम जैसे खिलाड़ी फ्रांस के आक्रमण को बेहद मजबूत बनाते हैं।

    दूसरी ओर स्पेन ने भी शानदार वापसी करते हुए सेमीफाइनल तक का सफर तय किया है। ग्रुप चरण के पहले मुकाबले में काबो वर्डे के खिलाफ गोलरहित ड्रॉ के बाद टीम ने सऊदी अरब और उरुग्वे को हराकर शीर्ष स्थान हासिल किया। इसके बाद स्पेन ने ऑस्ट्रिया पुर्तगाल और बेल्जियम जैसी मजबूत टीमों को हराकर अंतिम चार में जगह बनाई। युवा स्टार लैमिन यामल पेड्री फैबियन रुइज निको विलियम्स और मिकेल मेरिनो ने टीम की सफलता में अहम भूमिका निभाई है।

    अगर दोनों टीमों के आपसी रिकॉर्ड की बात करें तो अब तक फ्रांस और स्पेन के बीच कुल 38 मुकाबले खेले गए हैं। इनमें स्पेन ने 18 मैच जीते हैं जबकि फ्रांस को 13 मुकाबलों में जीत मिली है। सात मुकाबले ड्रॉ रहे हैं। आंकड़ों के लिहाज से स्पेन का पलड़ा थोड़ा भारी जरूर नजर आता है लेकिन विश्व कप जैसे बड़े मंच पर दोनों टीमें बराबरी की चुनौती पेश करती हैं।

    यह मुकाबला भारतीय समयानुसार बुधवार देर रात 12 बजकर 30 मिनट पर शुरू होगा। भारत में फुटबॉल प्रशंसक इस मैच की लाइव स्ट्रीमिंग जी5 पर देख सकेंगे। वहीं इसका सीधा प्रसारण यूनाइट8 स्पोर्ट्स 1 यूनाइट8 स्पोर्ट्स 1 एचडी यूनाइट8 स्पोर्ट्स 2 और यूनाइट8 स्पोर्ट्स 2 एचडी चैनलों पर किया जाएगा।

    फुटबॉल प्रेमियों के लिए यह मुकाबला किसी फाइनल से कम नहीं माना जा रहा है। एक तरफ किलियन एमबाप्पे की रफ्तार और अनुभव होगा तो दूसरी ओर लैमिन यामल और स्पेन की युवा ब्रिगेड अपनी आक्रामक शैली से चुनौती पेश करेगी। ऐसे में डलास का यह सेमीफाइनल रोमांच चरम पर पहुंचाने वाला मुकाबला साबित हो सकता है और जीतने वाली टीम विश्व कप ट्रॉफी से सिर्फ एक कदम दूर रह जाएगी।

  • पेपर लीक और बेरोजगारी के खिलाफ कांग्रेस की 200 किलोमीटर साइक्लोथॉन जीतू पटवारी का बीजेपी पर बड़ा हमला

    पेपर लीक और बेरोजगारी के खिलाफ कांग्रेस की 200 किलोमीटर साइक्लोथॉन जीतू पटवारी का बीजेपी पर बड़ा हमला


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में परीक्षा प्रणाली में कथित गड़बड़ियों पेपर लीक और बढ़ती बेरोजगारी के मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने सोमवार से इंदौर से भोपाल तक 200 किलोमीटर लंबी साइक्लोथॉन यात्रा शुरू कर दी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व में निकाली जा रही यह यात्रा राहुल गांधी के छात्रों की गूंज अभियान का हिस्सा बताई जा रही है। दो दिन तक चलने वाली इस यात्रा में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता छात्र और युवा शामिल हो रहे हैं। रास्ते में देवास सीहोर और भोपाल सहित कई जिलों से भी सैकड़ों लोग इस अभियान से जुड़ेंगे।

    यात्रा के दौरान देवास पहुंचे जीतू पटवारी ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि प्रदेश और देश में सामने आए हर पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर हर पेपर लीक मामले के पीछे भाजपा से जुड़े माफिया का नाम ही क्यों सामने आता है। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की भी मांग की।

    पटवारी ने कहा कि कांग्रेस छात्रों और युवाओं की आवाज को बुलंद करने के लिए सड़क पर उतरी है। उनके अनुसार राहुल गांधी लगातार देश के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था को बचाने का मुद्दा उठा रहे हैं और यह यात्रा उसी अभियान को आगे बढ़ाने का प्रयास है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं के भविष्य से जुड़े गंभीर मुद्दों पर संवेदनशील नहीं है।

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने राज्य सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि यह मगरमच्छ की मोटी चमड़ी वाली सरकार है जिस पर जनता की समस्याओं का शायद कोई असर नहीं पड़ता। हालांकि उन्होंने विश्वास जताया कि इस यात्रा का प्रभाव आम जनता पर जरूर पड़ेगा और आने वाले समय में जनता बदलाव का फैसला करेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस छात्रों और बेरोजगार युवाओं के अधिकारों की लड़ाई लगातार लड़ती रहेगी।

    यात्रा के दौरान कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं का विभिन्न स्थानों पर स्वागत किया गया। जगह जगह स्वागत पंडाल लगाए गए और साइकिल यात्रा में स्थानीय लोगों ने भी भागीदारी निभाई। पूर्व कृषि मंत्री और विधायक सचिन यादव ने भी यात्रा में हिस्सा लिया और करीब 36 किलोमीटर साइकिल चलाकर देवास पहुंचे। उन्होंने भी परीक्षा गड़बड़ियों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि केंद्रीय शिक्षा मंत्री में नैतिकता है तो उन्हें तत्काल इस्तीफा देना चाहिए।

    इस बीच इंदौर में यात्रा के दौरान गांधी प्रतिमा के सामने कचरा फैलने का मामला भी सामने आया। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद नगर निगम ने मौके पर पहुंचकर जांच की और एनएसयूआई के प्रदेश प्रभारी रवि दांगी के नाम दो हजार रुपये का स्पॉट फाइन लगाया। भाजपा ने इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस की आलोचना की जबकि कांग्रेस ने यात्रा को छात्रों और युवाओं की आवाज से जोड़ते हुए इसे जनआंदोलन का स्वरूप देने की बात कही।

    कांग्रेस की यह साइक्लोथॉन अब भोपाल की ओर बढ़ रही है जहां यात्रा के समापन पर छात्रों बेरोजगारी और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता को लेकर सरकार के खिलाफ बड़ा संदेश देने की तैयारी की जा रही है।