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  • एंटीबायोटिक बेअसर तो जान पर भारी संक्रमण! 1.59 लाख मरीजों पर ICMR की रिसर्च में सामने आया गंभीर खतरा

    एंटीबायोटिक बेअसर तो जान पर भारी संक्रमण! 1.59 लाख मरीजों पर ICMR की रिसर्च में सामने आया गंभीर खतरा


    नई दिल्ली। एंटीबायोटिक दवाएं गंभीर बैक्टीरियल इंफेक्शन के इलाज में बेहद अहम मानी जाती हैं लेकिन जब बैक्टीरिया इन दवाओं के खिलाफ प्रतिरोधी हो जाते हैं तो इलाज की चुनौती काफी बढ़ जाती है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च यानी ICMR से जुड़े शोधकर्ताओं की बड़ी स्टडी में सामने आया है कि कार्बापेनेम एंटीबायोटिक्स के खिलाफ रेजिस्टेंस रखने वाले ग्राम नेगेटिव बैक्टीरिया से संक्रमित मरीजों में मौत का खतरा अधिक हो सकता है। ऐसे संक्रमण न केवल मरीज की हालत को गंभीर बना सकते हैं बल्कि इलाज की अवधि और दवाओं पर होने वाले खर्च को भी बढ़ा सकते हैं।

    ग्राम नेगेटिव बैक्टीरिया शरीर के अलग अलग हिस्सों में संक्रमण फैला सकते हैं। इनमें ई कोलाई क्लेबसिएला न्यूमोनिया एसिनेटोबैक्टर बाउमानी और स्यूडोमोनास एरुजिनोसा जैसे बैक्टीरिया शामिल हैं। ये फेफड़ों पेशाब की नली घाव और खून में संक्रमण का कारण बन सकते हैं। गंभीर संक्रमण के मामलों में कार्बापेनेम जैसी शक्तिशाली एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है लेकिन जब बैक्टीरिया इन दवाओं के खिलाफ भी रेजिस्टेंट हो जाते हैं तो डॉक्टरों के पास प्रभावी उपचार के विकल्प सीमित हो सकते हैं।

    शोधकर्ताओं ने अप्रैल 2022 से अप्रैल 2025 के बीच देश के 20 बड़े अस्पतालों में भर्ती 1 लाख 59 हजार 336 मरीजों के आंकड़ों का अध्ययन किया। इनमें 26 हजार 213 मरीजों में ग्राम नेगेटिव बैक्टीरिया से संक्रमण की पुष्टि हुई। इनमें 16 हजार 25 मरीज यानी करीब 61.1 प्रतिशत ऐसे थे जिनमें संक्रमण कार्बापेनेम एंटीबायोटिक्स के खिलाफ रेजिस्टेंट पाया गया। इस अंतर ने एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस को लेकर गंभीर चिंता सामने रखी है।

    स्टडी के आंकड़ों में मौत का अंतर भी स्पष्ट नजर आया। ई कोलाई से संक्रमित मरीजों में कार्बापेनेम रेजिस्टेंट संक्रमण की स्थिति में मृत्यु दर 24.4 प्रतिशत रही जबकि दवा के प्रति संवेदनशील संक्रमण में यह 17.3 प्रतिशत थी। क्लेबसिएला न्यूमोनिया के मामले में मृत्यु दर क्रमशः 31.2 और 23.5 प्रतिशत रही। एसिनेटोबैक्टर बाउमानी में यह आंकड़ा 37.9 और 32.8 प्रतिशत जबकि स्यूडोमोनास एरुजिनोसा में 28.9 और 20.2 प्रतिशत रहा।

    खतरा तब और बढ़ जाता है जब संक्रमण खून तक पहुंच जाता है। ऐसे मामलों में रेजिस्टेंट बैक्टीरिया से संक्रमित मरीजों में मृत्यु दर कई मामलों में काफी अधिक देखी गई। शोध के मुताबिक इन चारों बैक्टीरिया से होने वाले रक्त संक्रमणों में 85 प्रतिशत से ज्यादा मामले अस्पताल से जुड़े संक्रमण थे। इससे अस्पतालों में साफ सफाई संक्रमण नियंत्रण और मेडिकल उपकरणों के सुरक्षित इस्तेमाल की अहमियत सामने आती है।

    एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का असर मरीज की जेब पर भी पड़ सकता है। रिसर्च में रेजिस्टेंट संक्रमण के इलाज में एंटीबायोटिक दवाओं का खर्च सामान्य संक्रमण की तुलना में लगभग 1.1 से 2 गुना तक ज्यादा पाया गया। हालांकि इसमें अस्पताल में भर्ती रहने कमरे जांच और अन्य चिकित्सा सेवाओं का खर्च शामिल नहीं था इसलिए वास्तविक आर्थिक बोझ इससे अधिक हो सकता है।

    विशेषज्ञों के लिए यह रिसर्च इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस केवल इलाज की समस्या नहीं बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। बिना जरूरत एंटीबायोटिक लेना दवाओं का गलत इस्तेमाल और संक्रमण नियंत्रण में लापरवाही बैक्टीरिया में प्रतिरोध बढ़ाने में भूमिका निभा सकती है। ऐसे में डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक लेने से बचना सही जांच के बाद उचित दवा का इस्तेमाल करना और अस्पतालों में संक्रमण रोकने के उपायों को मजबूत करना बेहद जरूरी है।

  • देश में तेजी से हो रहा धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन का विकास : मोहन यादव

    देश में तेजी से हो रहा धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन का विकास : मोहन यादव

    भोपाल । मध्‍य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में मप्र के उज्जैन और गुजरात की द्वारिका नगरी सहित देशभर में लगातार धार्मिक पर्यटन आध्यात्मिक पर्यटन का विकास हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हमारी सरकार भारतीय संस्कृति के गौरवशाली अतीत को पुन: स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध होकर कार्य कर रही है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरुवार को सपत्नीक गुजरात की देवभूमि द्वारका के पावन द्वारकाधीश मंदिर पहुंचकर सपत्नीक भगवान श्री द्वारकाधीश के अलौकिक रूप का दर्शन एवं विधि-विधान से पूजन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भगवान श्री द्वारकाधीश के दर्शन-पूजन के बाद मंदिर परिसर के बाहर स्थानीय मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा की। उन्‍होंने भगवान द्वारकाधीश से सभी प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि एवं कल्याण की कामना की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को मनाई जाने वाली जन्माष्टमी से पहले देश-प्रदेशवासियों को भगवान श्रीकृष्ण के जन्म पर्व की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं भी दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के साथ उनकी धर्मपत्नी सीमा यादव एवं अन्य परिजनों सहित सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय के डॉ. इलैया राजा टी. भी उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन में श्री महाकाल लोक के निर्माण के बाद श्रद्धालुओं की संख्या 20 गुना बढ़ गई है। वर्तमान में लगभग 10 करोड़ से अधिक तीर्थ यात्री उज्जैन आ रहे हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी के कर कमलों से उज्जैन में बाबा महाकाल लोक के लोकार्पण के बाद बनारस में भी काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरीडोर का निर्माण हुआ, जिससे बाबा विश्वनाथ की नगरी में धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाइयां मिली हैं।

    जन्माष्टमी से पहले भगवान श्री द्वारकाधीश के दर्शन का मिला सौभाग्य
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि द्वारकाधीश मंदिर आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित सनातन संस्कृति के चार धामों में से एक प्रमुख तीर्थ है। जन्माष्टमी से ठीक पहले भगवान श्री द्वारकाधीश के भव्य दर्शन का अवसर मिलना हम सभी के लिए सौभाग्य की बात है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कुछ समय पहले ही वे सोमनाथ धाम गये थे। इसके बाद आज द्वारका के प्रसिद्ध श्री द्वारकाधीश मंदिर में विधिवत् दर्शन-पूजन-अर्चन कर यहां की सभी व्यवस्थाओं का जायजा लिया है। हम भी अपने देवस्थानों में बेहतर से बेहतर प्रबंधन की सभी व्यवस्थाएं कर रहे हैं।

    म.प्र. में श्रद्धालुओं के लिए विकसित की जा रहीं सुगम व्यवस्थाएं
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया प्रतिनिधियों से कहा कि मध्यप्रदेश सरकार लगातार धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन के विस्तार के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रही है। प्रदेश के सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों एवं देवस्थानों पर सहज एवं सुगम आवागमन, श्रद्धालुओं के ठहरने, उनकी सुरक्षा और पर्यटकों की वृद्धि को देखते हुए वहां सभी जरूरी अधोसंरचनाओं का तेजी से विकास किया जा रहा है।

  • मायावती ने आकाश आनंद से छीनी राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी, बताया राजनीतिक रूप से अपरिपक्व

    मायावती ने आकाश आनंद से छीनी राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी, बताया राजनीतिक रूप से अपरिपक्व

    लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी की बड़ी जिम्मेदारियों से दूर रखने का फैसला किया है। मायावती ने कहा कि आकाश आनंद को अभी राजनीतिक रूप से और परिपक्व होने की जरूरत है। इसी के साथ आकाश आनंद से राष्ट्रीय संयोजक का पद भी हटा दिया गया है। उन्होंने अपने एक्स प्रोफाइल में भी बदलाव करते हुए ‘राष्ट्रीय संयोजक’ की जगह खुद को बसपा कार्यकर्ता बताया है। इस फैसले से आकाश के समर्थकों में निराशा है।

    कांशीराम के सिद्धांतों का दिया हवाला
    मायावती ने मान्यवर कांशीराम के सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने अपने परिवार को पार्टी के काम में सहयोग करने की अनुमति दी थी, लेकिन परिवार के सदस्यों को चुनाव लड़ाने या पार्टी में महत्वपूर्ण पद देने के पक्ष में नहीं थे।

    मायावती ने कहा कि वह भी इसी संकल्प पर आगे बढ़ रही हैं। आकाश आनंद को पार्टी में काम करने की अनुमति रहेगी, लेकिन फिलहाल उन्हें कोई बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी।

    ‘अभी और परिपक्वता की जरूरत’
    मायावती के मुताबिक आकाश आनंद को राजनीतिक तौर पर अभी और परिपक्व होने की जरूरत है। उनका मानना है कि विरोधी दल चुनाव के दौरान साम, दाम, दंड और भेद जैसे हथकंडों का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसे में राजनीतिक अनुभव और परिपक्वता की कमी के कारण पार्टी को संभावित चुनावी नुकसान से बचाना जरूरी है।

    आकाश आनंद के एक्स प्रोफाइल में बदलाव भी इसी फैसले के बाद सामने आया है। अब उनकी पहचान राष्ट्रीय संयोजक के बजाय बसपा कार्यकर्ता के रूप में दिखाई जा रही है।

    लखनऊ में हुई बसपा की अहम बैठक
    मायावती ने लखनऊ में पार्टी की ऑल इंडिया स्तर की महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में संगठन को मजबूत करने और विभिन्न ज्वलंत मुद्दों पर पार्टी का रुख स्पष्ट करने को लेकर निर्देश दिए गए। इस दौरान पिछले कार्यों की समीक्षा भी की गई।

    मायावती ने पार्टी के छोटे-बड़े सभी पदाधिकारियों को संगठन की कमियों को दूर करने और पूरी ईमानदारी व निष्ठा के साथ पार्टी के दिशा-निर्देशों का पालन करने की सख्त हिदायत दी।

    कांशीराम के संघर्षों का किया जिक्र
    मायावती ने कांशीराम के संघर्षों को याद करते हुए कहा कि शोषित वर्ग को शासक वर्ग बनाना ही बहुजन आंदोलन का मुख्य उद्देश्य है। इसके लिए सत्ता हासिल करना जरूरी है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से संगठन को मजबूत करने और इस लक्ष्य की दिशा में लगातार काम करने का आह्वान किया।

    RSS और मोहन भागवत के बयानों पर भी निशाना
    बैठक में मायावती ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका दौरे के दौरान दिए गए बयानों का भी संज्ञान लिया। उन्होंने संघ की कथनी और करनी में भारी अंतर होने का आरोप लगाया।

    मायावती ने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने समानता के लिए जीवनभर संघर्ष किया। वहीं आरक्षण, मुस्लिम और अन्य अल्पसंख्यक वर्गों की सुरक्षा तथा महिला अधिकारों जैसे मुद्दों पर आरएसएस के दावों में उन्हें सच्चाई की कमी नजर आती है। उन्होंने आरएसएस को सलाह दी कि वह बाबा साहेब के मानवतावादी और समतामूलक संविधान का ईमानदारी से पालन करे और अपने लोगों से भी उसका पालन करवाए।

  • अयोध्या: राम मंदिर ट्रस्ट के नए पदाधिकारियों की हुई पहली बैठक, जानिए क्‍या बोले सीईओ जितेंद्र मिश्रा ?

    अयोध्या: राम मंदिर ट्रस्ट के नए पदाधिकारियों की हुई पहली बैठक, जानिए क्‍या बोले सीईओ जितेंद्र मिश्रा ?

    अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में नई जिम्मेदारियां तय होने के बाद गुरुवार को नवनियुक्त पदाधिकारियों की पहली बैठक हुई। रामघाट स्थित कार्यशाला के श्रीराम जन्मभूमि क्षेत्र कार्यालय में हुई इस बैठक में ट्रस्ट की नई प्रशासनिक व्यवस्था और कामकाज को लेकर चर्चा की गई।

    बैठक के बाद बाहर आए नवनियुक्त सीईओ और पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा ने कहा कि आज सभी ने एक-दूसरे से परिचय किया और कई मुद्दों पर चर्चा हुई। आगे भी कई बैठकें होंगी, ताकि वे यहां की पूरी कार्यप्रणाली को समझ सकें। इसके बाद वे अपना कार्यभार ग्रहण करेंगे। जितेंद्र मिश्रा ने कहा, “मैं बहुत सौभाग्यशाली हूं कि मुझे प्रभु श्रीराम और रामभक्तों की सेवा करने का अवसर मिला है।”

    बैठक में ये पदाधिकारी रहे मौजूद
    बैठक में नवनियुक्त सीईओ जितेंद्र मिश्रा के अलावा ट्रस्ट के महासचिव गोविंद देवगिरी, कोषाध्यक्ष महेश भागचंद, ट्रस्टी मदन मोहन पांडे सहित अकाउंटिंग व्यवस्था से जुड़े अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।

    नई जिम्मेदारियां तय होने के बाद हुई यह पहली बैठक इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इसमें ट्रस्ट के कामकाज और वित्तीय व्यवस्था को लेकर आगे की कार्ययोजना पर चर्चा की गई। सभी पदाधिकारियों के एक-दूसरे से परिचय के बाद लेखा-जोखा, अकाउंटिंग सिस्टम और ट्रस्ट के प्रशासनिक कामकाज से जुड़े विषयों की जानकारी भी साझा की गई।

    कार्यभार संभालने से पहले व्यवस्था समझेंगे सीईओ
    नवनियुक्त सीईओ जितेंद्र मिश्रा के पदभार ग्रहण करने से पहले हुई इस बैठक को ट्रस्ट की नई प्रशासनिक व्यवस्था की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे आगे होने वाली बैठकों के जरिए ट्रस्ट और मंदिर से जुड़े कामकाज को विस्तार से समझेंगे, इसके बाद औपचारिक रूप से जिम्मेदारी संभालेंगे।

    माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में मंदिर और ट्रस्ट से जुड़े प्रशासनिक कार्यों, लेखा-जोखा और वित्तीय व्यवस्था को लेकर नई कार्ययोजना का खाका इन्हीं बैठकों के जरिए तैयार किया जाएगा।

  • बरगी बांध 93% भरा, 5 गेट एक मीटर तक खोले गए, नर्मदा का जलस्तर बढ़ने के आसार

    बरगी बांध 93% भरा, 5 गेट एक मीटर तक खोले गए, नर्मदा का जलस्तर बढ़ने के आसार

    जबलपुर। मंडला, डिंडौरी और अमरकंटक क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश का असर बरगी बांध के जलस्तर पर दिखाई दे रहा है। जबलपुर जिले में औसत से कम बारिश के बावजूद बांध में पानी की आवक लगातार बनी हुई है। बुधवार को बरगी बांध का जलस्तर 421.85 मीटर और जलभराव 93.33 प्रतिशत पहुंच गया। पानी की लगातार आवक को देखते हुए गुरुवार सुबह 11 बजे बांध के पांच गेट करीब एक-एक मीटर तक खोले गए। इनसे करीब 760 क्यूमेक पानी छोड़ा जा रहा है।

    गेट खोले जाने से पहले बरगी बांध प्रबंधन और जिला प्रशासन ने नर्मदा नदी के घाटों और आसपास के निचले इलाकों में अलर्ट जारी किया है। प्रबंधन के मुताबिक पानी छोड़े जाने के बाद नर्मदा के घाटों पर जलस्तर करीब 3 से 4 फीट तक बढ़ सकता है। लोगों से नदी और घाटों के आसपास सावधानी बरतने की अपील की गई है।

    बांध में 707 क्यूमेक पानी की आवक
    बरगी बांध प्रबंधन के अनुसार 2 सितंबर की सुबह 8 बजे बांध में 707 क्यूमेक पानी की आवक दर्ज की गई थी। बारिश, मौसम के पूर्वानुमान और आगामी दिनों में संभावित जल आवक को देखते हुए पांच जलद्वार करीब एक मीटर तक खोले गए हैं। फिलहाल बांध से करीब 760 क्यूमेक पानी की निकासी की जा रही है।

    आवक के हिसाब से बदलेगी पानी छोड़ने की मात्रा
    प्रबंधन का कहना है कि बांध में वास्तविक जल आवक और जलस्तर की स्थिति के आधार पर पानी की निकासी की मात्रा में बदलाव किया जा सकता है। लगातार पानी की आवक बनी रहने पर आने वाले दिनों में गेटों से छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा बढ़ाई या घटाई जा सकती है।

    प्रशासन और बांध प्रबंधन ने नर्मदा के घाटों तथा निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। विशेष रूप से नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए लोगों से घाटों के आसपास जाने से बचने की अपील की गई है।

  • पोस्टमार्टम हाउस भी चोरों से नहीं बचा: शिवपुरी में कंप्रेसर और कॉपर केबल चोरी, पुलिस से शिकायत

    पोस्टमार्टम हाउस भी चोरों से नहीं बचा: शिवपुरी में कंप्रेसर और कॉपर केबल चोरी, पुलिस से शिकायत


    शिवपुरी ।
    शिवपुरी जिला अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस में चोरी की एक गंभीर घटना सामने आई है। अज्ञात चोरों ने उस जगह को निशाना बनाया जहां शवों को सुरक्षित रखने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। चोर दो शव रखने वाले फ्रीजरों से कंप्रेसर, कॉपर पाइप और कॉपर केबल निकालकर ले गए। इसके साथ ही स्टेबलाइजर से जुड़ा सामान भी चोरी होने की जानकारी सामने है। घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन में हड़कंप मच गया और पोस्टमार्टम हाउस की महत्वपूर्ण व्यवस्था प्रभावित होने से चिंता बढ़ गई है।

    अस्पताल प्रबंधन के अनुसार पोस्टमार्टम हाउस में रखे दोनों फ्रीजरों को चोरों ने निशाना बनाया। फ्रीजरों में लगे कंप्रेसर और कॉपर से जुड़े जरूरी उपकरण गायब मिले। चोरी की वजह से शवों को सुरक्षित रखने के लिए इस्तेमाल होने वाली फ्रीजर व्यवस्था प्रभावित हुई है। जब इस घटना की जानकारी अस्पताल के अधिकारियों तक पहुंची तो मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच शुरू कराई गई।

    पोस्टमार्टम हाउस में मौजूद नोडल अधिकारी और को नोडल अधिकारी ने चोरी की घटना की जानकारी अस्पताल प्रबंधन को दी। इसके बाद मामले की सूचना पुलिस तक पहुंचाई गई। सिविल सर्जन एवं मुख्य अस्पताल अधीक्षक डॉ. रामप्रताप सिंह चौहान ने सिटी कोतवाली पुलिस को पत्र लिखकर अज्ञात चोरों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। अस्पताल प्रबंधन ने चोरी हुए सामान और फ्रीजरों को हुए नुकसान की जानकारी भी पुलिस को उपलब्ध कराई है।

    मामले में फरियादी आयुष खरे के आवेदन और अस्पताल प्रबंधन की शिकायत के आधार पर सिटी कोतवाली पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 305 ए के तहत मामला दर्ज कर लिया है। आयुष खरे पोस्टमार्टम हाउस के पास शिवपुरी के रहने वाले बताए गए हैं। पुलिस अब चोरी की पूरी घटना की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि चोर पोस्टमार्टम हाउस तक कैसे पहुंचे और उन्होंने कब इस वारदात को अंजाम दिया।

    पुलिस के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती आरोपियों की पहचान करना है। इसके लिए पोस्टमार्टम हाउस और जिला अस्पताल परिसर के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच की जा सकती है। साथ ही चोरी हुए कॉपर पाइप, कॉपर केबल और अन्य सामान की बरामदगी के लिए भी प्रयास किए जाएंगे। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि चोरी की घटना में एक व्यक्ति शामिल था या फिर किसी गिरोह ने मिलकर इस वारदात को अंजाम दिया।

    पोस्टमार्टम हाउस जैसी संवेदनशील जगह पर चोरी की घटना ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। शवों को सुरक्षित रखने वाले फ्रीजरों से जरूरी उपकरण चोरी होने के कारण अस्पताल की व्यवस्था प्रभावित हुई है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और जल्द ही आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • NH-46 पर एक रात में 7 गौवंश की मौत तेज रफ्तार ट्रकों ने 9 को कुचला

    NH-46 पर एक रात में 7 गौवंश की मौत तेज रफ्तार ट्रकों ने 9 को कुचला


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले के बदरवास थाना क्षेत्र से होकर गुजरने वाला NH-46 बुधवार रात गौवंश के लिए बेहद दर्दनाक साबित हुआ। हाईवे पर अलग-अलग स्थानों पर हुए दो सड़क हादसों में तेज रफ्तार ट्रकों की चपेट में आने से कुल 9 गौवंश हादसे का शिकार हो गए। इनमें से 7 गौवंश की मौके पर ही मौत हो गई जबकि दो घायल बताए जा रहे हैं। लगातार हुए इन हादसों के बाद इलाके में गौवंश की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

    पहला हादसा सुमेला बायपास के ओवरब्रिज पर हुआ। बताया जा रहा है कि यहां सड़क किनारे चार गौवंश मौजूद थे। इसी दौरान शिवपुरी से गुना की ओर जा रहे एक तेज रफ्तार ट्रक ने उन्हें टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि तीन गौवंश ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। एक गौवंश गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे के बाद हाईवे पर कुछ समय के लिए अफरा तफरी का माहौल बन गया।

    घटना की जानकारी मिलते ही सनातनी गो सेवा समिति की टीम मौके पर पहुंची। टीम के सदस्यों ने घायल गौवंश को संभाला और उसका उपचार कराया। साथ ही सड़क पर पड़े मृत गौवंश को हटाकर सुरक्षित स्थान पर किया गया ताकि हाईवे पर आने जाने वाले दूसरे वाहनों के लिए खतरा न बना रहे।

    इसी रात दूसरा हादसा ईश्वरी ओवरब्रिज पर हुआ। यहां गुना से शिवपुरी की ओर जा रहे एक ट्रक ने सड़क पर मौजूद पांच गौवंश को अपनी चपेट में ले लिया। इस दुर्घटना में चार गौवंश की मौके पर ही मौत हो गई जबकि एक घायल हो गया। एक ही रात में कुछ ही दूरी के अंतर पर हुए दोनों हादसों ने हाईवे पर गौवंश की मौजूदगी और उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    ईश्वरी ओवरब्रिज पर हादसे की सूचना मिलने के बाद भी सनातनी गो सेवा समिति की टीम घटनास्थल पर पहुंची। टीम ने घायल गौवंश को इलाज उपलब्ध कराया और मृत गौवंश को सड़क से हटाकर किनारे किया। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं के बीच सबसे बड़ी चिंता यह है कि हाईवे पर आवारा या खुले में घूमने वाले गौवंश रात के समय तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आ जाते हैं।

    NH-46 जैसे व्यस्त हाईवे पर वाहनों की रफ्तार काफी अधिक रहती है। ऐसे में सड़क पर अचानक गौवंश आ जाने से चालक के लिए वाहन नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है। इससे न केवल गौवंश की जान को खतरा रहता है बल्कि वाहन सवार लोगों के लिए भी गंभीर दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।

    बुधवार रात हुए दोनों हादसों में कुल 9 गौवंश की चपेट में आने की जानकारी सामने आई है। इनमें 7 की मौत हो चुकी है जबकि दो घायल हैं। घटना के बाद गो सेवा समिति की सक्रियता से घायल पशुओं को समय पर उपचार मिल सका। हालांकि एक ही रात में सात गौवंश की मौत ने हाईवे पर पशुओं की सुरक्षा के इंतजामों और तेज रफ्तार वाहनों की निगरानी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे हादसों को रोकने के लिए हाईवे के संवेदनशील हिस्सों पर विशेष निगरानी और पशुओं को सड़क से दूर रखने के इंतजाम जरूरी माने जा रहे हैं।

  • मच्छर को कैसे पता चलता है किस इंसान को काटना है IIT कानपुर की रिसर्च से खुलेगा राज

    मच्छर को कैसे पता चलता है किस इंसान को काटना है IIT कानपुर की रिसर्च से खुलेगा राज


    नई दिल्ली। बारिश और उमस के मौसम में मच्छरों की परेशानी बढ़ जाती है। अक्सर आपने भी महसूस किया होगा कि एक ही कमरे में कई लोग बैठे हों तो मच्छर किसी एक व्यक्ति के आसपास ज्यादा मंडराते हैं जबकि दूसरे व्यक्ति को लगभग छोड़ देते हैं। आखिर मच्छर किस आधार पर अपना शिकार चुनता है। क्या वह इंसानों के बीच अंतर कर सकता है। क्या शरीर की गंध उसे किसी खास व्यक्ति की तरफ खींचती है। इन सवालों का जवाब तलाशने के लिए IIT कानपुर के वैज्ञानिक मच्छर के दिमाग और उसकी गंध पहचानने की क्षमता का अध्ययन कर रहे हैं।

    यह रिसर्च IIT कानपुर के मेहता फैमिली सेंटर फॉर इंजीनियरिंग इन मेडिसिन में प्रोफेसर नितिन गुप्ता की लैब में की जा रही है। वैज्ञानिक यह समझना चाहते हैं कि मच्छर इंसान के शरीर से निकलने वाली गंध को किस तरह पहचानता है। इसके बाद उस गंध से जुड़ी जानकारी उसके दिमाग तक कैसे पहुंचती है और मच्छर इसी सूचना के आधार पर किसी व्यक्ति की ओर जाने का फैसला कैसे करता है। इस अध्ययन का उद्देश्य मच्छर के व्यवहार के पीछे काम करने वाली पूरी जैविक प्रक्रिया को समझना है।

    रिसर्च में खास तौर पर Aedes aegypti मच्छर पर ध्यान दिया जा रहा है। यह मच्छर डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों को फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वैज्ञानिक यह पता लगाना चाहते हैं कि कुछ लोग मच्छरों को ज्यादा आकर्षित क्यों करते हैं जबकि कुछ लोगों की ओर उनका आकर्षण अपेक्षाकृत कम होता है। इसके पीछे इंसान के शरीर से निकलने वाले अलग अलग रासायनिक संकेतों की भूमिका हो सकती है।

    इंसान के शरीर की गंध केवल पसीने से नहीं बनती। त्वचा पर रहने वाले सूक्ष्म जीव भी अलग अलग रसायन पैदा करते हैं और शरीर की कुल गंध को प्रभावित करते हैं। हर व्यक्ति की शरीर की गंध एक जैसी नहीं होती। यही अंतर मच्छरों के व्यवहार को प्रभावित कर सकता है। वैज्ञानिक अब यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि कौन सी गंध मच्छर को इंसान की तरफ आकर्षित करती है और कौन से संकेत उसे किसी व्यक्ति से दूर कर सकते हैं।

    मच्छर के शरीर पर मौजूद विशेष सेंसर आसपास के रासायनिक संकेतों को पहचानते हैं। इन संकेतों की जानकारी उसके दिमाग तक पहुंचती है जहां गंध से जुड़ी सूचनाओं को प्रोसेस किया जाता है। वैज्ञानिक इसी कनेक्शन का अध्ययन कर रहे हैं। आसान भाषा में समझें तो शोधकर्ता यह जानना चाहते हैं कि मच्छर क्या सूंघता है। उसका दिमाग उस गंध को कैसे समझता है और इसके बाद वह किस दिशा में उड़ने या इंसान के पास जाने का फैसला करता है।

    इस रिसर्च में CRISPR Cas9 जैसी जेनेटिक तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। इसकी मदद से मच्छर के कुछ खास जीन में बदलाव करके वैज्ञानिक यह देख सकते हैं कि उनका असर गंध पहचानने और मच्छर के व्यवहार पर किस तरह पड़ता है। इससे मच्छर की उस जैविक व्यवस्था को समझने में मदद मिल सकती है जिसके जरिए वह इंसान को खोजता है।

    अध्ययन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मादा मच्छर के खून पीने के बाद होने वाले व्यवहारिक बदलाव को समझना भी है। मादा मच्छर को अंडे विकसित करने के लिए खून की जरूरत होती है। खून पीने के बाद उसकी प्राथमिकता बदल जाती है। इसके बाद वह इंसान की तलाश करने के बजाय अंडे देने के लिए उपयुक्त जगह खोजने पर अधिक ध्यान देती है। वैज्ञानिक यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि इस बदलाव के दौरान मच्छर के दिमाग में क्या परिवर्तन होता है।

    इस रिसर्च का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि मच्छरों से फैलने वाली बीमारियां बड़ी स्वास्थ्य चुनौती हैं। अगर वैज्ञानिक यह समझने में सफल होते हैं कि मच्छर इंसान तक पहुंचने के लिए किन गंधों और संकेतों का इस्तेमाल करता है तो भविष्य में ऐसे तरीके विकसित किए जा सकते हैं जो इन संकेतों को बदल दें या मच्छर की पहचान प्रक्रिया को बाधित करें। इससे केवल मच्छर को मारने या भगाने के बजाय उसकी इंसान तक पहुंचने की प्रक्रिया को ही निशाना बनाया जा सकेगा।

    IIT कानपुर की यह रिसर्च अभी मच्छर की गंध पहचानने की क्षमता और उसके दिमाग में होने वाली गतिविधियों को समझने पर केंद्रित है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इस अध्ययन से मच्छर के व्यवहार की बेहतर समझ विकसित होगी और भविष्य में डेंगू चिकनगुनिया जैसी बीमारियों को नियंत्रित करने के लिए नए वैज्ञानिक उपाय खोजने में मदद मिल सकती है।

  • दाद को हर खुजली समझना पड़ सकता है भारी मानसून में ऐसे रखें त्वचा का ख्याल

    दाद को हर खुजली समझना पड़ सकता है भारी मानसून में ऐसे रखें त्वचा का ख्याल


    नई दिल्ली। बारिश का मौसम गर्मी से राहत जरूर देता है लेकिन इस दौरान त्वचा से जुड़ी कई परेशानियां भी बढ़ने लगती हैं। वातावरण में ज्यादा नमी और उमस के कारण पसीना जल्दी नहीं सूखता और त्वचा लंबे समय तक गीली बनी रह सकती है। यही वजह है कि मानसून में दाद फंगल इंफेक्शन और खुजली जैसी समस्याएं ज्यादा परेशान कर सकती हैं। खास बात यह है कि आम बोलचाल में दाद खाज और खुजली को अक्सर एक ही समस्या मान लिया जाता है जबकि इन तीनों शब्दों का मतलब और कारण हमेशा एक जैसा नहीं होता।

    दाद को आमतौर पर फंगल इंफेक्शन या रिंगवर्म के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसमें त्वचा पर गोल या चकत्ते जैसे निशान दिखाई दे सकते हैं। इन चकत्तों के किनारे लाल या थोड़े उभरे हुए हो सकते हैं और वहां काफी खुजली भी हो सकती है। दाद शरीर के अलग-अलग हिस्सों में हो सकता है और संक्रमित व्यक्ति के संपर्क या उसके व्यक्तिगत सामान के इस्तेमाल से फैलने का खतरा भी रहता है। इसलिए ऐसे लक्षण दिखाई देने पर इसे सामान्य खुजली समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

    वहीं खाज शब्द का इस्तेमाल अलग-अलग जगहों पर अलग अर्थ में किया जाता है। आम बोलचाल में इसका इस्तेमाल खुजली या खुजली वाली त्वचा की समस्या के लिए किया जाता है। केवल खाज होने की बात से यह तय नहीं किया जा सकता कि समस्या फंगल इंफेक्शन की ही है। इसके पीछे एलर्जी त्वचा में जलन फंगल संक्रमण या दूसरी वजहें भी हो सकती हैं। इसलिए सही कारण जानने के लिए लक्षणों पर ध्यान देना जरूरी है।

    खुजली खुद कोई बीमारी नहीं बल्कि एक लक्षण है। त्वचा में खुजली कई कारणों से हो सकती है। एलर्जी ड्राई स्किन पसीना फंगल इंफेक्शन कीड़े के काटने या त्वचा से जुड़ी दूसरी समस्याएं इसके पीछे हो सकती हैं। इसलिए हर तरह की खुजली को दाद मान लेना सही नहीं है। अगर खुजली के साथ गोल चकत्ते बन रहे हैं या निशान धीरे-धीरे फैल रहे हैं तो फंगल संक्रमण की संभावना हो सकती है और ऐसे में डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर रहता है।

    मानसून में फंगल इंफेक्शन का खतरा इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि गर्म और नम वातावरण फंगस के लिए अनुकूल माना जाता है। शरीर के ऐसे हिस्सों में समस्या ज्यादा हो सकती है जहां त्वचा आपस में रगड़ खाती है या जहां नमी लंबे समय तक बनी रहती है। बगल कमर जांघों के बीच और पैरों की उंगलियों के बीच का हिस्सा इसका उदाहरण है। गीले कपड़े मोजे और जूते लंबे समय तक पहने रहने से भी त्वचा पर नमी बनी रहती है।

    बारिश में भीगने के बाद सबसे जरूरी है कि गीले कपड़े जल्द से जल्द बदलें। शरीर को अच्छी तरह सुखाएं और उन हिस्सों पर विशेष ध्यान दें जहां नमी आसानी से जमा होती है। रोज साफ और सूखे मोजे पहनें और गीले जूतों को लंबे समय तक पहनने से बचें। बहुत ज्यादा टाइट कपड़े पहनने से भी बचना चाहिए क्योंकि इससे पसीना और नमी त्वचा के संपर्क में ज्यादा समय तक रह सकती है।

    व्यक्तिगत साफ-सफाई के साथ संक्रमण फैलने से रोकना भी जरूरी है। किसी दूसरे व्यक्ति का तौलिया कपड़े मोजे या निजी सामान इस्तेमाल करने से बचें। अगर त्वचा पर बने गोल चकत्ते लगातार बढ़ रहे हैं खुजली बहुत ज्यादा है या समस्या बार-बार लौट रही है तो त्वचा रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना समझदारी है।

    खास तौर पर बिना डॉक्टर की सलाह के ऐसी क्रीम लगाने से बचना चाहिए जिसमें स्टेरॉयड शामिल हो। गलत तरीके से इस्तेमाल करने पर ऐसी क्रीम फंगल इंफेक्शन के लक्षणों को बदल सकती है और समस्या को और जटिल बना सकती है। सही समय पर सही कारण की पहचान और उचित उपचार ही त्वचा की समस्या को बढ़ने से रोकने का बेहतर तरीका है। मानसून में त्वचा को सूखा साफ और सुरक्षित रखना दाद फंगल इंफेक्शन और कई तरह की खुजली से बचाव में मदद कर सकता है।

  • जम्मू-कश्मीर में धमकियों पर फारूक का बड़ा बयान बोले राज्य का दर्जा रोकने की साजिश

    जम्मू-कश्मीर में धमकियों पर फारूक का बड़ा बयान बोले राज्य का दर्जा रोकने की साजिश


    नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी पंडितों को कथित तौर पर मिल रही धमकियों को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने इन धमकियों को लेकर उपराज्यपाल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि घाटी में कश्मीरी पंडितों को डराने का काम कराया जा रहा है ताकि जम्मू-कश्मीर को दोबारा राज्य का दर्जा देने की प्रक्रिया को टाला जा सके। उनके इस बयान के बाद भाजपा और कश्मीरी पंडित समुदाय की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है।

    अनंतनाग में पत्रकारों से बातचीत के दौरान फारूक अब्दुल्ला ने कश्मीरी पंडितों को मिल रही धमकियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि घाटी में अब कश्मीरी पंडितों की संख्या बेहद कम है। उन्होंने तर्क दिया कि जम्मू-कश्मीर में कई बड़े प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी हिंदू समुदाय से हैं। ऐसे में अगर हिंदुओं को निशाना बनाकर धमकियां दी जा रही हैं तो इन वरिष्ठ अधिकारियों को इस तरह की धमकियां क्यों नहीं मिल रही हैं। इसी सवाल के आधार पर उन्होंने मौजूदा प्रशासन की भूमिका पर संदेह जताया।

    फारूक अब्दुल्ला ने आरोप लगाया कि इन धमकियों के पीछे उपराज्यपाल प्रशासन का हाथ हो सकता है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी उपराज्यपाल प्रशासन के पास है इसलिए उसे यह बताना चाहिए कि धमकियां कहां से आ रही हैं और इनके पीछे कौन लोग हैं। हालांकि इन आरोपों के समर्थन में उन्होंने कोई सार्वजनिक सबूत पेश नहीं किया। उनका बयान फिलहाल राजनीतिक आरोप के तौर पर सामने आया है।

    फारूक अब्दुल्ला ने इस पूरे विवाद को जम्मू-कश्मीर के राज्य के दर्जे से भी जोड़ दिया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से राज्य का दर्जा बहाल करने को लेकर पहले जो आश्वासन दिए गए थे उन्हें पूरा नहीं किया गया है। उनके मुताबिक पहले परिसीमन होगा फिर विधानसभा चुनाव होंगे और उसके बाद राज्य का दर्जा बहाल करने की बात कही गई थी। लेकिन उनका आरोप है कि इस दिशा में अपेक्षित कदम नहीं उठाए गए।

    उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ हुई मुलाकात का भी जिक्र किया। फारूक के मुताबिक उनके सांसदों को भरोसा दिया गया था कि राज्य के दर्जे से जुड़ा फैसला जल्द लिया जाएगा। उन्होंने सवाल उठाया कि उस आश्वासन के बाद काफी समय बीत चुका है लेकिन अब तक स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं हुई है। इसी मुद्दे को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस की ओर से केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

    फारूक अब्दुल्ला ने अनुच्छेद 370 और 35ए के मुद्दे पर भी अपने राजनीतिक विरोधियों को निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों ने पहले भाजपा के साथ मिलकर इन प्रावधानों को हटाने में मदद की थी वही अब राज्य के दर्जे और अनुच्छेद 370 की बहाली की बात कर रहे हैं। उन्होंने इसे जनता को भ्रमित करने की कोशिश बताया।

    वहीं भाजपा ने फारूक अब्दुल्ला के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। पार्टी प्रवक्ता अंकुर शर्मा ने उनके बयान को चौंकाने वाला बताते हुए आरोप लगाया कि वह कश्मीरी पंडितों के नरसंहार और उनके दर्द को नकारने की कोशिश कर रहे हैं। भाजपा का कहना है कि कश्मीरी पंडितों से जुड़े मुद्दे को राजनीतिक साजिश के रूप में पेश करने के बजाय उनकी सुरक्षा और सम्मान पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

    इस पूरे घटनाक्रम ने जम्मू-कश्मीर में एक बार फिर कश्मीरी पंडितों की सुरक्षा और राज्य के दर्जे के सवाल को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। एक ओर फारूक अब्दुल्ला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं तो दूसरी ओर भाजपा उनके बयान को कश्मीरी पंडित समुदाय के प्रति असंवेदनशील बता रही है। अब इस विवाद में प्रशासन की ओर से आने वाली प्रतिक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हैं।