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  • नौतपा की शुरुआत के साथ MP में भीषण गर्मी का दौर जारी, 44 जिलों में आज हीटवेव और 5 में रेड अलर्ट

    नौतपा की शुरुआत के साथ MP में भीषण गर्मी का दौर जारी, 44 जिलों में आज हीटवेव और 5 में रेड अलर्ट

    भोपाल। मध्य प्रदेश में नौतपा की शुरुआत 25 मई से हो गई है और यह 2 जून तक प्रभावी रहेगा। मौसम विभाग के अनुसार, 25 से 28 मई तक प्रदेशभर में भीषण गर्मी और हीटवेव का असर बना रहेगा। नौतपा के शुरुआती चार दिन लोगों को तेज लू और झुलसाने वाली गर्मी का सामना करना पड़ेगा। सोमवार को प्रदेश के 44 जिलों में हीटवेव की चेतावनी जारी की गई है। इनमें निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना और सतना में तीव्र लू को लेकर रेड अलर्ट घोषित किया गया है।

    मौसम विभाग का कहना है कि नौतपा की शुरुआत के साथ भोपाल, ग्वालियर और उज्जैन सहित कई शहरों में तापमान 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है।

    नौतपा शुरू होने से पहले ही प्रदेश में गर्मी ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। रविवार को खजुराहो और नौगांव सबसे गर्म शहर रहे, जहां अधिकतम तापमान 45.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा दतिया में तापमान 45 डिग्री तक पहुंचा, जबकि टीकमगढ़ और शाजापुर में 44 डिग्री दर्ज किया गया। दमोह, सागर और सतना में 44.2 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा। वहीं गुना, मुरैना, राजगढ़ और श्योपुर में भी पारा 44 डिग्री तक पहुंच गया।

    प्रदेश के बड़े शहरों की बात करें तो ग्वालियर सबसे गर्म रहा, जहां तापमान 44.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। भोपाल में 42.7 डिग्री, जबलपुर में 43.3 डिग्री, उज्जैन में 41.5 डिग्री और इंदौर में 40.9 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया।

    मौसम विभाग ने निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना और सतना में रेड अलर्ट जारी किया है। वहीं भिंड, दतिया, आगर-मालवा, राजगढ़, सागर, नरसिंहपुर, दमोह, जबलपुर, मंडला, बालाघाट, कटनी, उमरिया, शहडोल, मैहर, रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली सहित 18 जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

    इसके अलावा भोपाल, ग्वालियर, उज्जैन, रायसेन, विदिशा, शिवपुरी, मुरैना समेत 21 जिलों में येलो अलर्ट घोषित किया गया है। वहीं इंदौर, देवास, हरदा, बैतूल, छिंदवाड़ा, धार और झाबुआ सहित 11 जिलों में तेज गर्मी का असर बना रहेगा।

    मौसम विभाग के मुताबिक, 31 मई तक प्रदेश में गर्मी अपने चरम पर रह सकती है। अगले चार दिनों तक पूरे प्रदेश में भीषण गर्मी और लू का दौर जारी रहने की संभावना जताई गई है, जिससे लोगों को फिलहाल राहत मिलने के आसार नहीं हैं।

  • TMC में बढ़ी अंदरूनी नाराजगी, सांसद काकोली घोष ने जिलाध्यक्ष पद छोड़ा, उठाए सवाल

    TMC में बढ़ी अंदरूनी नाराजगी, सांसद काकोली घोष ने जिलाध्यक्ष पद छोड़ा, उठाए सवाल

    कोलकाता। पश्चिम बंगाल की सियासत में तृणमूल कांग्रेस के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। पार्टी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने बारासात जिला अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने का ऐलान किया है। उन्होंने चुनावी हार की जिम्मेदारी लेते हुए संगठन की कार्यप्रणाली और चुनावी रणनीति पर सवाल उठाए हैं।

    काकोली घोष दस्तीदार ने चुनाव के दौरान IPAC की भूमिका को लेकर भी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि चुनावी प्रक्रिया के समय IPAC टीम की ओर से अनावश्यक दबाव बनाया गया, जिससे पार्टी के कामकाज पर असर पड़ा।

    उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान जिस तरह दबाव बनाने की कोशिश की गई, वह सही तरीका नहीं था। दस्तीदार ने कहा कि उनके क्षेत्र की सभी सीटों पर पार्टी को हार मिली है, इसलिए वह नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ रही हैं। उनके इस बयान के बाद TMC के भीतर नई राजनीतिक बहस शुरू हो गई है।

    अपने इस्तीफे में उन्होंने कहा कि बारासात जिले में पार्टी के खराब प्रदर्शन की पूरी जिम्मेदारी वह स्वीकार करती हैं। उन्होंने माना कि हाल के दिनों में भ्रष्टाचार और अपराध से जुड़ी घटनाओं ने जनता के बीच पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाया है।

    सांसद ने यह भी कहा कि लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखने के लिए पार्टी को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और ईमानदार बनने की जरूरत है। उन्होंने पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी से अपील की कि संगठन को मजबूत करने के लिए पुराने और अनुभवी नेताओं को साथ लेकर आगे बढ़ना चाहिए।

    दस्तीदार ने परोक्ष रूप से नई एजेंसियों और खास तौर पर IPAC की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि उन्हें इस तरह की रणनीतिक एजेंसियों की भूमिका पर पूरा भरोसा नहीं है।

    यह इस्तीफा ऐसे समय आया है जब पश्चिम बंगाल में चुनावी नतीजों के बाद तृणमूल कांग्रेस को कई राजनीतिक झटकों का सामना करना पड़ रहा है। कई सीटों पर हार के बाद पार्टी की रणनीति और नेतृत्व को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। वहीं पार्टी नेतृत्व लगातार चुनावी अनियमितताओं और EVM गड़बड़ी जैसे मुद्दे उठा रहा है।

    राजनीतिक जानकार काकोली घोष दस्तीदार के इस्तीफे को सिर्फ संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि TMC के भीतर बढ़ती नाराजगी और असंतोष के संकेत के तौर पर देख रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मामला राज्य की राजनीति में और हलचल बढ़ा सकता है।

  • पर्सनल लोन एक नज़र में: तुरंत पैसे पाने का आसान तरीका, लेकिन समझदारी जरूरी

    पर्सनल लोन एक नज़र में: तुरंत पैसे पाने का आसान तरीका, लेकिन समझदारी जरूरी


    नई दिल्ली । आज के समय में पर्सनल लोन लोगों की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने का एक आसान और तेजी से उपलब्ध होने वाला विकल्प बन चुका है। चाहे मेडिकल इमरजेंसी हो, शादी का खर्च, ट्रैवल प्लान या किसी अन्य व्यक्तिगत आवश्यकता—पर्सनल लोन बिना किसी गारंटी के बैंक और वित्तीय संस्थानों द्वारा दिया जाता है।

    पर्सनल लोन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें किसी भी प्रकार की सिक्योरिटी या संपत्ति गिरवी रखने की जरूरत नहीं होती। यह पूरी तरह आपकी आय, क्रेडिट स्कोर और रीपेमेंट क्षमता पर आधारित होता है। आवेदन प्रक्रिया भी काफी सरल होती है और कई बार कुछ ही घंटों में लोन अप्रूव हो जाता है।

    योग्यता यानी एलिजिबिलिटी की बात करें तो इसके लिए आवेदक का वेतनभोगी या स्व-नियोजित होना जरूरी है। आमतौर पर 21 से 60 वर्ष की आयु सीमा में आने वाले व्यक्ति इस लोन के लिए पात्र होते हैं। साथ ही अच्छा क्रेडिट स्कोर (आमतौर पर 700 या उससे अधिक) होने पर लोन मिलने की संभावना बढ़ जाती है। बैंक आपकी मासिक आय और नौकरी की स्थिरता को भी ध्यान में रखते हैं।

    ब्याज दर (Interest Rate) की बात करें तो यह अलग-अलग बैंकों और NBFCs में भिन्न हो सकती है। आमतौर पर पर्सनल लोन पर ब्याज दर 10% से लेकर 24% सालाना तक हो सकती है। यह दर आपके क्रेडिट स्कोर, आय और बैंक पॉलिसी पर निर्भर करती है। बेहतर क्रेडिट स्कोर होने पर आपको कम ब्याज दर पर लोन मिल सकता है।

    पर्सनल लोन की एक खासियत यह भी है कि इसकी रीपेमेंट अवधि 1 साल से लेकर 5-7 साल तक हो सकती है, जिससे ईएमआई को अपने बजट के अनुसार मैनेज करना आसान हो जाता है।

    हालांकि, विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि पर्सनल लोन केवल जरूरी परिस्थितियों में ही लिया जाए, क्योंकि इसकी ब्याज दर अन्य लोन की तुलना में थोड़ी अधिक होती है। समय पर ईएमआई न चुकाने पर क्रेडिट स्कोर पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है।

    कुल मिलाकर पर्सनल लोन एक उपयोगी वित्तीय साधन है, जो सही योजना और समझदारी के साथ लिया जाए तो आर्थिक जरूरतों को आसानी से पूरा कर सकता है।

  • TTH प्रोपेगेंडा केस में बड़ा खुलासा, PAK गैंगस्टर शहजाद भट्टी और ISI नेटवर्क की भूमिका आई सामने

    TTH प्रोपेगेंडा केस में बड़ा खुलासा, PAK गैंगस्टर शहजाद भट्टी और ISI नेटवर्क की भूमिका आई सामने

    नई दिल्ली। तहरीके तालिबान हिंदुस्तान (TTH) नामक संगठन से जुड़े प्रोपेगेंडा मामले में जांच एजेंसियों ने बड़ा खुलासा किया है। दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल की जांच में सामने आया है कि इस पूरे नेटवर्क के पीछे पाकिस्तानी गैंगस्टर से आतंकी बने शहजाद भट्टी का नाम जुड़ा हुआ है। जांच एजेंसियों के अनुसार शहजाद भट्टी पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और अपने सहयोगियों आबिद जट्ट और अजमल गुज्जर के साथ मिलकर इस संगठन का प्रोपेगेंडा फैलाने में सक्रिय भूमिका निभा रहा था।

    कुछ दिन पहले दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने दिल्ली से सोहेल नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में खुलासा हुआ कि उसे शहजाद भट्टी की ओर से दिल्ली और फरीदाबाद में TTH नाम की ग्राफिटी बनाने का टास्क दिया गया था। निर्देश के तहत उसे दीवारों और सार्वजनिक स्थानों पर TTH लिखने और उसके नीचे छोटा “S” जोड़ने को कहा गया था, ताकि इसे शहजाद भट्टी से जोड़कर देखा जा सके।

    पुलिस के मुताबिक सोहेल का आपराधिक रिकॉर्ड भी रहा है और उसे इस काम के बदले पैसे दिए गए थे। मामले की आगे जांच जारी है। जांच एजेंसियों ने यह भी दावा किया है कि शहजाद भट्टी और उसके सहयोगियों पर पुलिसकर्मियों की टारगेट किलिंग की साजिश रचने के आरोप भी सामने आए हैं। इसी सिलसिले में हाल ही में दिल्ली पुलिस ने तीन युवकों को गिरफ्तार किया था, जो कथित तौर पर इस नेटवर्क से जुड़े हुए थे।

    दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने बाद में सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। एजेंसियों का कहना है कि इस पूरे मामले से संकेत मिलता है कि TTH नाम के प्रोपेगेंडा नेटवर्क के पीछे संगठित अंतरराष्ट्रीय साजिश हो सकती है। फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोग कौन हैं और भारत में इसके जरिए किस तरह से दुष्प्रचार और आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देने की कोशिश की जा रही थी।

  • ज्वालामुखी की दहशत भी बेअसर: 2000 साल पुराना बाली का पुरा बेसाकिह मंदिर आज भी खड़ा है रहस्यमयी मजबूती के साथ

    ज्वालामुखी की दहशत भी बेअसर: 2000 साल पुराना बाली का पुरा बेसाकिह मंदिर आज भी खड़ा है रहस्यमयी मजबूती के साथ



    नई दिल्ली(New Delhi)।
    इंडोनेशिया के बाली द्वीप में स्थित पुरा बेसाकिह मंदिर को वहां का सबसे बड़ा और सबसे पवित्र हिंदू मंदिर माना जाता है। इसे ‘मदर टेंपल’ यानी मातृ मंदिर भी कहा जाता है। करीब 2000 साल पुराने इस मंदिर को बाली की संस्कृति, आस्था और इतिहास का प्रतीक माना जाता है।

    पर्वतों और बादलों के बीच स्थित यह मंदिर अपनी भव्यता और आध्यात्मिक वातावरण के कारण हर साल हजारों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करता है। यहां सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि दर्जनों छोटे-बड़े मंदिरों का विशाल परिसर मौजूद है।

    ज्वालामुखी के बीच भी सुरक्षित रहने का रहस्य
    यह मंदिर सक्रिय ज्वालामुखी माउंट अगुंग की तलहटी में स्थित है, जो कई बार विस्फोट कर चुका है। इसके बावजूद मंदिर को बड़े नुकसान से बचा रहना स्थानीय लोगों के लिए आज भी रहस्य और आस्था का विषय है।

    सबसे बड़ा उदाहरण 1963 के ज्वालामुखी विस्फोट का है, जब लावा मंदिर के बेहद करीब तक पहुंच गया था, लेकिन मुख्य मंदिर सुरक्षित बच गया। इसी कारण स्थानीय लोग इसे देवताओं की कृपा और चमत्कार मानते हैं।

    वास्तुकला और धार्मिक महत्व
    पुरा बेसाकिह की वास्तुकला बेहद आकर्षक है, जिसमें ऊंची सीढ़ियां, पत्थरों के विशाल द्वार और पारंपरिक बाली शैली की संरचनाएं देखने को मिलती हैं। यहां समय-समय पर धार्मिक अनुष्ठान और बड़े उत्सव आयोजित होते हैं, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं।मंत्रों की गूंज और धार्मिक वातावरण इस स्थान को और भी आध्यात्मिक बना देता है।

    पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र
    आज यह मंदिर सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि बाली की पहचान और प्रमुख पर्यटन केंद्र भी बन चुका है। यहां आने वाले पर्यटक प्रकृति, संस्कृति और आध्यात्मिकता का अनोखा संगम महसूस करते हैं।स्थानीय मान्यता के अनुसार, सच्चे मन से यहां आने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं, यही कारण है कि सदियों बाद भी इस मंदिर की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है।

  • अमेरिकी का दावा, "ईरान के शीर्ष नेता मोजतबा खामेनेई ‘सीक्रेट लोकेशन’ पर छिपे, इसलिए समझौते में हो रही देरी"

    अमेरिकी का दावा, "ईरान के शीर्ष नेता मोजतबा खामेनेई ‘सीक्रेट लोकेशन’ पर छिपे, इसलिए समझौते में हो रही देरी"


    नई दिल्‍ली । अमेरिकी खुफिया अधिकारियों ने ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई को लेकर चौंकाने वाली जानकारी दी है. अधिकारियों का कहना है कि वह (मोजतबा खामेनेई) को ईरानी बलों ने खुफिया जगह पर छिपाया हुआ है, जहां उनका बाहरी दुनिया से संपर्क पूरी तरह कट गया है और इसी कारण अमेरिकी प्रशासन के साथ संभावित समझौते की बातचीत में देरी हो रही है.

    मामले की जानकारी रखने वाले अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, अमेरिकी खुफिया जानकारी से पता चलता है कि ईरान के सर्वोच्च नेता प्रभावी रूप से एक अज्ञात स्थान पर छिपे हुए हैं, जहां से बाहरी दुनिया का संपर्क बहुत कम है और उनसे केवल संदेशवाहकों (मैसेंजर) के एक जटिल जाल के जरिए ही संपर्क किया जा सकता है.

    ‘बातचीत में कठिनाई’
    ट्रंप प्रशासन के साथ काम करने के लिए अधिकृत ईरानी अधिकारियों को अपनी ही सरकारी व्यवस्था के अंदर संवाद करने में कठिनाई हो रही है और यही एक मुख्य कारण है कि ईरान के साथ संभावित समझौते और पिछले समझौतों का विवरण सामने आने में देरी हो रही है.

    अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई तक केवल संदेशवाहकों (मैसेंजर) के एक भूलभुलैया वाले नेटवर्क के जरिए ही पहुंचा जा सकता है. जब भी अमेरिका किसी समझौते के प्रस्ताव का विवरण भेजता है तो सर्वोच्च नेता तक सीधे पहुंच न होने के कारण अंतिम प्रतिक्रिया मिलने में बहुत लंबा वक्त लग जाता है. वो केवल व्यापक तौर पर अपने अधीनस्थों को निर्देश भेज पा रहे हैं.

    ‘बंकरों में बंद हैं ईरानी नेता’
    खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक, युद्ध के दौरान अमेरिकी और इजरायली सुरक्षा तंत्र ने ईरानी सरकार के अंदर से जानकारी जुटाकर उनके कई वरिष्ठ नेताओं को खत्म कर दिया है. इस डर से अधिकांश ईरानी नेता हफ्तों तक बेहद मजबूत बंकरों के अंदर बंद रहते हैं. वो बहुत जरूरी होने पर ही आपस में बात करते हैं.

    ‘जल्द हो सकता है समझौता’
    व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने इस खुफिया जानकारी और ईरान से बातचीत के तरीकों पर टिप्पणी करने से साफ इनकार कर दिया. हालांकि, एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने बताया कि सर्वोच्च नेता ने वर्तमान मसौदा समझौते की रूपरेखा पर अपनी सहमति दे दी है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर उम्मीद जताई है कि अगले कुछ दिनों में अंतिम फैसला सामने आ जाएगा.

    आपको बता दें कि ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई जो ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत अमेरिकी और इजरायली हमलों में घायल हो गए थे. अपने पिता अयातुल्ला अली खामेनेई (जिन्होंने 1989 से 28 फरवरी तक ईरान पर शासन किया था) की हत्या करने वाले हमलों के समान हमलों से बचने के लिए कड़े कदम उठा रहे हैं. युद्ध शुरू होने से पहले से ही मोजतबा खामेनेई को आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक रूप से देखा या सुना नहीं गया है. अमेरिका का दावा है कि मोजतबा हमले में बुरी तरह घायल हो गए हैं.

  • तपती धूप में भी फिटनेस बरकरार: जानें हेल्दी रहने के आसान टिप्स

    तपती धूप में भी फिटनेस बरकरार: जानें हेल्दी रहने के आसान टिप्स


    नई दिल्ली । देशभर में गर्मी ने अपने तीखे तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। तेज धूप, गर्म हवाएं और बढ़ता तापमान लोगों की सेहत पर असर डाल रहा है। ऐसे मौसम में खुद को स्वस्थ और फिट बनाए रखना बेहद जरूरी हो जाता है। थोड़ी सी सावधानी और सही दिनचर्या अपनाकर आप इस भीषण गर्मी में भी पूरी तरह से एनर्जेटिक रह सकते हैं।

    सबसे जरूरी बात है शरीर में पानी की कमी न होने देना। अक्सर लोग तब तक पानी नहीं पीते जब तक उन्हें प्यास महसूस न हो, लेकिन यह आदत डिहाइड्रेशन का कारण बन सकती है। गर्मी के मौसम में भरपूर पानी पीना चाहिए और साथ ही नारियल पानी, नींबू पानी, छाछ और घरेलू इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक्स का सेवन करना चाहिए। इससे शरीर का तापमान संतुलित रहता है और लू लगने का खतरा कम होता है।

    गर्मी में बाहर का तला-भुना और भारी भोजन से बचना चाहिए। इसके बजाय हल्का, ताजा और सुपाच्य भोजन लेना अधिक लाभकारी होता है। मसालेदार खाना शरीर में गर्मी बढ़ा सकता है, जिससे कमजोरी और थकान महसूस हो सकती है। सॉफ्ट ड्रिंक्स और अत्यधिक चाय-कॉफी का सेवन भी सीमित करना चाहिए क्योंकि ये शरीर में पानी की कमी बढ़ा सकते हैं।

    दिन के सबसे गर्म समय यानी दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच घर से बाहर निकलने से बचना चाहिए। यदि बाहर जाना जरूरी हो, तो सिर को ढककर निकलें और पानी की बोतल साथ रखें। हल्के, ढीले और सूती कपड़े पहनना गर्मी से बचाव में मदद करता है।

    सेहत विशेषज्ञों के अनुसार गर्मी में हल्का व्यायाम, योग और प्राणायाम सबसे अच्छा विकल्प है। सुबह या शाम के समय वॉक करने से शरीर सक्रिय रहता है और ऊर्जा बनी रहती है। बहुत ज्यादा भारी एक्सरसाइज करने से बचना चाहिए।

    गर्मी के मौसम में साफ-सफाई का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है क्योंकि इस समय संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। ताजा और स्वच्छ भोजन का सेवन करें और बासी खाने से बचें। बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें क्योंकि वे जल्दी प्रभावित हो सकते हैं।

    यदि किसी को चक्कर, सिरदर्द या अत्यधिक कमजोरी महसूस हो तो तुरंत आराम करें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से संपर्क करें। सही सावधानी और संतुलित जीवनशैली अपनाकर गर्मी के मौसम में भी स्वस्थ और ऊर्जावान रहा जा सकता है।

  • जलसा के बाहर हंगामा: अमिताभ बच्चन के दीदार के इंतजार में फैन बेहोश, ‘दर्शन’ कल्चर पर भड़के लोग

    जलसा के बाहर हंगामा: अमिताभ बच्चन के दीदार के इंतजार में फैन बेहोश, ‘दर्शन’ कल्चर पर भड़के लोग




    नई दिल्ली(New Delhi)। बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन के जुहू स्थित बंगले जलसा के बाहर रविवार को एक बड़ा हादसा होते-होते बच गया। भीषण गर्मी में अमिताभ बच्चन की एक झलक पाने के लिए घंटों इंतजार कर रहा एक फैन अचानक बेहोश हो गया। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत उसकी मदद की और पानी डालकर उसे होश में लाया।

    जानकारी के मुताबिक, हर रविवार की तरह इस बार भी बड़ी संख्या में फैंस अमिताभ बच्चन के वीकली अपीयरेंस का इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान एक अधेड़ उम्र का फैन गर्मी और भीड़ के बीच अचानक गिर पड़ा, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। हालांकि समय रहते उसे राहत मिल गई और कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ।

    इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद लोगों में नाराजगी भी देखने को मिल रही है। इंस्टाग्राम पर पोस्ट किए गए वीडियो के कमेंट सेक्शन में कई यूजर्स ने इस तरह की भीड़ और “दर्शन संस्कृति” पर सवाल उठाए हैं। कुछ लोगों ने लिखा कि “ये कोई भगवान नहीं हैं”, तो कुछ ने भीड़ को गैरजरूरी बताया।

    वहीं दूसरी ओर कई यूजर्स ने फैन के प्रति सहानुभूति जताते हुए कहा कि भीषण गर्मी में इस तरह घंटों इंतजार करना खतरनाक हो सकता है और ऐसी भीड़ पर नियंत्रण जरूरी है।

    बताया जा रहा है कि अमिताभ बच्चन हर रविवार अपने फैंस से जलसा के बाहर मिलते हैं और उनके साथ तस्वीरें भी साझा करते हैं। हाल ही में उन्होंने अपने ब्लॉग में फैंस के प्रति आभार जताते हुए उनके साथ अच्छे व्यवहार की बात भी कही थी।

    इस घटना के बाद एक बार फिर फैंस की सुरक्षा और इस तरह के सार्वजनिक जमावड़े को लेकर बहस तेज हो गई है।

  • अमेरिका-ईरान वार्ता फिर अटकी, फ्रीज फंड और यूरेनियम शर्तों पर गतिरोध गहराया

    अमेरिका-ईरान वार्ता फिर अटकी, फ्रीज फंड और यूरेनियम शर्तों पर गतिरोध गहराया

    नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच संभावित समझौते को लेकर चल रही बातचीत एक बार फिर रुकती हुई नजर आ रही है। ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विदेशी बैंकों में जमा ईरान के फ्रीज फंड को जारी करने के मुद्दे पर दोनों देशों के बीच गंभीर मतभेद सामने आए हैं, जिससे प्रस्तावित समझौते पर अनिश्चितता बढ़ गई है।

    रिपोर्ट में कहा गया है कि तेहरान ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक अमेरिका शुरुआती चरण में ही कुछ ब्लॉक की गई संपत्तियों को रिलीज करने पर सहमत नहीं होता, तब तक किसी अंतिम समझौते की संभावना कम है। ईरान का आरोप है कि बातचीत के दौरान अमेरिकी रुख कई बार बदलता रहा है और पहले बनी सहमतियों के बावजूद अहम शर्तों पर अड़चनें पैदा हुई हैं।

    जानकारी के अनुसार, ईरान ने अपनी स्थिति उन देशों तक भी पहुंचाई है जो बैकचैनल कूटनीति में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। तेहरान का कहना है कि वह केवल मौखिक आश्वासनों पर भरोसा नहीं कर सकता और उसे समझौते के तहत ठोस गारंटी चाहिए, खासकर फ्रीज किए गए धन की तत्काल रिहाई के रूप में।

    दूसरी ओर, अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच अब तक कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है और कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर मतभेद बरकरार हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हालांकि दावा किया कि कुछ प्रमुख बिंदुओं पर सहमति बनी है, लेकिन बाद में यह भी कहा कि बातचीत अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है और अंतिम निर्णय अभी बाकी है।

    प्रस्तावित समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और ईरान के उच्च संवर्धित यूरेनियम भंडार को नियंत्रित करने जैसे प्रावधान शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि, यूरेनियम निपटान की प्रक्रिया और भविष्य में परमाणु गतिविधियों पर प्रतिबंध की अवधि को लेकर अभी भी सहमति नहीं बन सकी है। अगर यह वार्ता विफल होती है, तो इसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिरता पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

  • बॉलीवुड का ऐतिहासिक डुएट: किशोर कुमार बनाम मोहम्मद रफी की जादुई जुगलबंदी

    बॉलीवुड का ऐतिहासिक डुएट: किशोर कुमार बनाम मोहम्मद रफी की जादुई जुगलबंदी


    नई दिल्ली । बॉलीवुड के सुनहरे दौर में जब मोहम्मद रफी और किशोर कुमार जैसे दिग्गज गायक एक साथ किसी गाने में अपनी आवाज देते थे, तो वह सिर्फ एक गीत नहीं बल्कि इतिहास बन जाता था। ऐसा ही एक यादगार किस्सा फिल्म दोस्ताना (1980) से जुड़ा है, जिसमें अमिताभ बच्चन और शत्रुघ्न सिन्हा मुख्य भूमिकाओं में थे।

    इस फिल्म के मशहूर डुएट गीत “सलामत रहे दोस्ताना हमारा” की रिकॉर्डिंग के दौरान स्टूडियो में एक दिलचस्प माहौल देखने को मिला। बताया जाता है कि मोहम्मद रफी समय पर स्टूडियो पहुंच गए थे और उन्होंने गाने की रिहर्सल भी पूरी तैयारी के साथ की थी। उनकी क्लासिकल और मधुर आवाज ने वहां मौजूद सभी लोगों को प्रभावित कर दिया था।

    लेकिन जब किशोर कुमार स्टूडियो पहुंचे तो उन्होंने माहौल को गंभीर बनाने के बजाय हल्का-फुल्का कर दिया। वे रफी साहब के साथ मजाक-मस्ती करने लगे, जिससे कई लोगों को लगा कि वह गाने को लेकर गंभीर नहीं हैं। उस समय कई लोगों को लगा कि रफी साहब अपनी परफॉर्मेंस से बाजी मार लेंगे।

    हालांकि, जैसे ही रिकॉर्डिंग शुरू हुई, पूरा माहौल बदल गया। पहले मोहम्मद रफी ने अपने हिस्से को बेहद खूबसूरती और गहराई के साथ गाया। लेकिन जब किशोर कुमार की बारी आई, तो उनकी आवाज ने स्टूडियो में मौजूद हर शख्स को हैरान कर दिया। उनकी गायकी में जो ऊर्जा, भाव और सहजता थी, उसने गाने को एक अलग ही ऊंचाई पर पहुंचा दिया।

    संगीतकार पंडित रोनू मजुमदार के अनुसार, उस दिन दोनों ही दिग्गजों ने शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन किशोर कुमार की आवाज में एक अलग तरह का जादू था, जिसने माहौल को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी परफॉर्मेंस को कई लोग उस दौर की सबसे यादगार रिकॉर्डिंग्स में से एक मानते हैं।

    फिल्म दोस्ताना के अन्य गीत भी सुपरहिट साबित हुए और फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया। लेकिन यह डुएट गाना आज भी इसलिए याद किया जाता है क्योंकि इसमें दो महान गायकों की अद्भुत टक्कर और संगीत की असली ताकत देखने को मिली।