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  • क्राइम और सस्पेंस का तगड़ा डोज प्राइम वीडियो की ये 5 सीरीज कर देंगी आपका वीकेंड सेट

    क्राइम और सस्पेंस का तगड़ा डोज प्राइम वीडियो की ये 5 सीरीज कर देंगी आपका वीकेंड सेट


    नई दिल्ली। ओटीटी पर क्राइम और सस्पेंस से भरपूर कहानियों का अपना अलग ही क्रेज है। खासकर जब कहानी में रहस्य के साथ मजबूत किरदार और लगातार बढ़ता रोमांच हो तो दर्शक एक एपिसोड देखने के बाद अगले एपिसोड पर पहुंचने से खुद को रोक नहीं पाते। अमेजन प्राइम वीडियो पर भी क्राइम जॉनर की कई ऐसी हिंदी सीरीज मौजूद हैं जिन्हें दर्शकों के बीच काफी पसंद किया गया है। अगर आपको मिर्जापुर जैसी दमदार क्राइम कहानी पसंद आती है तो इन पांच सीरीज को अपनी वॉचलिस्ट में शामिल कर सकते हैं।

    दहाड़ इस लिस्ट में सबसे पहले आती है। सोनाक्षी सिन्हा गुलशन देवैया और विजय वर्मा जैसे कलाकारों से सजी यह सीरीज एक बेहद गंभीर क्राइम केस के इर्द गिर्द घूमती है। कहानी में एक ऐसे सीरियल किलर की तलाश दिखाई जाती है जो महिलाओं को अपना निशाना बनाता है। कई महिलाओं की लाशें सार्वजनिक शौचालयों से मिलने के बाद पुलिस के सामने एक बेहद पेचीदा मामला खड़ा हो जाता है। जैसे जैसे जांच आगे बढ़ती है कहानी का रहस्य और गहरा होता जाता है। सीरीज की IMDb रेटिंग 7.6 बताई गई है।

    इसके बाद नाम आता है तांडव का। यह एक पॉलिटिकल क्राइम ड्रामा है जिसमें सत्ता की चाह और अपराध का खतरनाक खेल देखने को मिलता है। सैफ अली खान डिंपल कपाड़िया जीशान अय्यूब और सुनील ग्रोवर जैसे कलाकार इसमें अहम भूमिकाओं में हैं। कहानी सत्ता के गलियारों में चलने वाली साजिशों और एक ऐसे राज के इर्द गिर्द आगे बढ़ती है जिसे छिपाना किरदारों के लिए मुश्किल होता जाता है। इस सीरीज की IMDb रेटिंग 4.8 है।

    अगर गंभीर क्राइम कहानी के साथ दमदार जांच और रहस्य पसंद है तो पाताल लोक भी शानदार विकल्प है। सीरीज में पुलिस जांच के जरिए समाज के अलग अलग तबकों और अपराध की जटिल दुनिया को दिखाया गया है। जयदीप अहलावत इश्वाक सिंह और अभिषेक बनर्जी जैसे कलाकारों ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। इसके अब तक दो सीजन आ चुके हैं और इसकी IMDb रेटिंग 8.2 बताई गई है।

    क्राइम के साथ स्पाई और एक्शन का मजा लेना चाहते हैं तो द फैमिली मैन को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। मनोज बाजपेयी और शारिब हाशमी स्टारर यह सीरीज एक ऐसे व्यक्ति की कहानी दिखाती है जो एक तरफ देश की सुरक्षा से जुड़े खतरनाक मिशनों को संभालता है और दूसरी तरफ अपनी पारिवारिक जिंदगी को संतुलित करने की कोशिश करता है। सीरीज के अब तक तीन सीजन आ चुके हैं और इसकी IMDb रेटिंग 8.6 बताई गई है।

    इस लिस्ट की पांचवीं सीरीज डांसिंग ऑन द ग्रेव है। यह फिक्शन क्राइम ड्रामा से अलग एक डॉक्यू सीरीज है जो एक चर्चित हत्याकांड की पड़ताल करती है। चार एपिसोड की यह सीरीज शकीरा खलीली हत्याकांड पर आधारित है। इसमें मामले से जुड़े घटनाक्रम और हत्या के पीछे छिपे रहस्य को सामने लाने की कोशिश की गई है। साल 2023 में रिलीज हुई इस सीरीज की IMDb रेटिंग 7 बताई गई है।

    अगर आपको क्राइम मिस्ट्री सस्पेंस पॉलिटिकल ड्रामा और स्पाई थ्रिलर पसंद हैं तो प्राइम वीडियो की ये पांच सीरीज आपकी वॉचलिस्ट में जगह बना सकती हैं। खासकर दहाड़ पाताल लोक और द फैमिली मैन जैसी सीरीज अपनी कहानी और किरदारों की वजह से लंबे समय तक याद रह सकती हैं।

  • खाना पूरी तरह ठंडा होने का इंतजार न करें 2 घंटे वाला ये नियम जरूर जानें

    खाना पूरी तरह ठंडा होने का इंतजार न करें 2 घंटे वाला ये नियम जरूर जानें


    नई दिल्ली। घर में खाना बच जाना आम बात है। कई बार रात के खाने का कुछ हिस्सा सुबह के लिए रख दिया जाता है। ऐसे में ज्यादातर लोग बचे हुए भोजन को ढककर किचन में रख देते हैं और अगले दिन गर्म करके खाने की सोचते हैं। कुछ लोगों को लगता है कि खाना अगर ढका हुआ है तो वह पूरी रात सुरक्षित रहेगा। लेकिन खाद्य सुरक्षा के लिहाज से ऐसा करना हमेशा सही नहीं माना जाता। खासकर पका हुआ खाना कमरे के तापमान पर लंबे समय तक रहने पर खराब हो सकता है और इसे खाने से स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो सकती है।

    खाद्य सुरक्षा से जुड़े सामान्य नियम के मुताबिक जल्दी खराब होने वाले भोजन को कमरे के तापमान पर दो घंटे से ज्यादा नहीं छोड़ना चाहिए। अगर वातावरण का तापमान 32 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा है तो यह समय और कम होकर करीब एक घंटे का रह जाता है। इसलिए गर्म मौसम में रात का खाना सुबह तक बाहर छोड़ना विशेष रूप से जोखिम भरा हो सकता है।

    इसका मुख्य कारण बैक्टीरिया की तेजी से बढ़ने की क्षमता है। करीब 4 डिग्री सेल्सियस से 60 डिग्री सेल्सियस के बीच का तापमान बैक्टीरिया के विकास के लिए अनुकूल माना जाता है। इस तापमान सीमा को अक्सर डेंजर जोन कहा जाता है। पका हुआ भोजन इस दायरे में जितनी देर रहता है उसमें हानिकारक सूक्ष्मजीवों के बढ़ने की संभावना उतनी ही बढ़ सकती है। मांस चिकन अंडे डेयरी उत्पाद और अन्य जल्दी खराब होने वाले खाद्य पदार्थों के मामले में खास सावधानी बरतना जरूरी है।

    यहां एक और आम गलती सामने आती है। कई लोग गर्म खाना फ्रिज में रखने से बचते हैं और उसे पूरी तरह ठंडा होने तक किचन में ही छोड़ देते हैं। लेकिन खाना ठंडा करने के लिए घंटों इंतजार करना भी सुरक्षित तरीका नहीं है। खासकर जब खाना बड़ी मात्रा में किसी गहरे बर्तन में रखा हो तो उसका अंदरूनी हिस्सा लंबे समय तक गर्म रह सकता है और बैक्टीरिया के लिए अनुकूल वातावरण बन सकता है।

    अगर खाना ज्यादा मात्रा में बचा है तो उसे छोटे और उथले बर्तनों में बांटना बेहतर तरीका हो सकता है। इससे भोजन जल्दी ठंडा होता है और उसे समय पर फ्रिज में रखा जा सकता है। भोजन को सुरक्षित रखने में समय के साथ तापमान का भी महत्वपूर्ण योगदान होता है। इसलिए सिर्फ यह देखना पर्याप्त नहीं है कि खाना देखने या सूंघने में ठीक लग रहा है।

    गर्मियों में विशेष सावधानी जरूरी है क्योंकि अधिक तापमान में भोजन जल्दी खराब हो सकता है। अगर कमरे का तापमान 32 डिग्री सेल्सियस से ऊपर है तो जल्दी खराब होने वाले भोजन को एक घंटे से ज्यादा बाहर रखना उचित नहीं माना जाता। ऐसे में रात का बचा खाना अगर लंबे समय तक बाहर पड़ा रहा है तो उसे अगले दिन खाने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए।

    इसलिए घर में भोजन बचने पर सबसे जरूरी बात है कि उसे समय रहते सुरक्षित तापमान पर रखा जाए। खाने को लंबे समय तक बाहर छोड़ने के बजाय उचित तरीके से ठंडा करके फ्रिज में रखना बेहतर है। खासकर गर्म मौसम में दो घंटे वाला नियम याद रखना भोजन को सुरक्षित रखने की दिशा में एक आसान और जरूरी आदत हो सकती है।

  • पुजारी से अलग अफसर संभालते हैं प्रशासन जानिए बड़े मंदिरों में कैसे चलता है CEO सिस्टम

    पुजारी से अलग अफसर संभालते हैं प्रशासन जानिए बड़े मंदिरों में कैसे चलता है CEO सिस्टम


    नई दिल्ली। अयोध्या के राम मंदिर में मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO की नियुक्ति के बाद मंदिर प्रशासन की व्यवस्था एक बार फिर चर्चा में आ गई है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की अहम बैठक में रिटायर्ड एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्र को ट्रस्ट का पहला CEO नियुक्त करने को मंजूरी दी गई है। इसके साथ ही राम मंदिर उन प्रमुख धार्मिक संस्थानों की श्रेणी में शामिल हो गया है जहां धार्मिक गतिविधियों के साथ प्रशासनिक जिम्मेदारियों को अलग स्तर पर संभालने की व्यवस्था है।

    देश के कई बड़े और प्रसिद्ध मंदिरों में पहले से ही इसी तरह का प्रशासनिक ढांचा मौजूद है। कहीं एग्जीक्यूटिव ऑफिसर तो कहीं चीफ एडमिनिस्ट्रेटर जैसे पदों पर अधिकारी रोजमर्रा के कामकाज की जिम्मेदारी संभालते हैं। इसका उद्देश्य बड़े स्तर पर आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाओं से लेकर वित्तीय व्यवस्था सुरक्षा स्वच्छता और मंदिर की संपत्तियों के प्रबंधन तक सभी कामों को व्यवस्थित तरीके से संचालित करना होता है।

    आंध्र प्रदेश का तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम इस व्यवस्था का बड़ा उदाहरण है। यहां मुख्य प्रशासनिक अधिकारी को CEO के बजाय एग्जीक्यूटिव ऑफिसर कहा जाता है। यही अधिकारी मंदिर प्रशासन के रोजमर्रा के संचालन की जिम्मेदारी संभालता है। उसके साथ ज्वाइंट एग्जीक्यूटिव ऑफिसर वित्त और लेखा से जुड़े अधिकारी मुख्य अभियंता तथा सुरक्षा से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी काम करते हैं। इस पूरी व्यवस्था में बोर्ड नीतिगत फैसलों से जुड़ी भूमिका निभाता है जबकि अधिकारी उन फैसलों को जमीन पर लागू कराने का काम करते हैं।

    उत्तराखंड के बदरीनाथ और केदारनाथ धाम के प्रशासन में भी CEO की अहम भूमिका है। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अंतर्गत दोनों प्रमुख धामों की व्यवस्थाएं संचालित होती हैं। समिति में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष जैसे पदों के साथ CEO का प्रशासनिक ढांचा भी मौजूद है। CEO के अधीन अलग-अलग अधिकारी मंदिर व्यवस्था से जुड़े कार्यों को देखते हैं। यहां भी धार्मिक परंपराओं और प्रशासनिक कामकाज के बीच जिम्मेदारियों का स्पष्ट विभाजन देखने को मिलता है।

    ओडिशा के पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर में पद का नाम CEO नहीं बल्कि चीफ एडमिनिस्ट्रेटर है। यह अधिकारी मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था में केंद्रीय भूमिका निभाता है। उसके जिम्मे मंदिर की संपत्ति श्रद्धालुओं की सुविधाएं साफ-सफाई अनुशासन सुरक्षा और धन तथा आभूषणों की सुरक्षित देखरेख जैसे महत्वपूर्ण काम होते हैं। कानून के तहत चीफ एडमिनिस्ट्रेटर मंदिर प्रबंध समिति के सचिव और मुख्य कार्यकारी अधिकारी की भूमिका भी निभाता है।

    जम्मू स्थित माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड में भी CEO का पद मौजूद है। यहां बोर्ड नीतिगत स्तर पर फैसले करता है जबकि CEO और उनकी टीम श्रद्धालुओं की सुविधाओं यात्रा व्यवस्था सुरक्षा और रोजमर्रा के प्रशासन को संचालित करती है।

    दरअसल बड़े मंदिरों में CEO जैसी व्यवस्था का मकसद धार्मिक परंपराओं को बदलना नहीं बल्कि विशाल स्तर पर होने वाले प्रशासनिक काम को पेशेवर तरीके से चलाना है। लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही दान और चढ़ावे का प्रबंधन सुरक्षा साफ-सफाई तकनीकी व्यवस्था और मंदिर की संपत्तियों की देखरेख जैसे कामों के लिए एक मजबूत प्रशासनिक ढांचा जरूरी होता है। अयोध्या के राम मंदिर में CEO की नियुक्ति के बाद अब इस व्यवस्था को लेकर देशभर में चर्चा तेज हो गई है।

  • 60 घंटे पाकिस्तान की कैद में रहे अभिनंदन का नया सफर IAF के बाद प्राइवेट एयरलाइंस से जुड़े

    60 घंटे पाकिस्तान की कैद में रहे अभिनंदन का नया सफर IAF के बाद प्राइवेट एयरलाइंस से जुड़े


    नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना के जांबाज अधिकारी ग्रुप कैप्टन अभिनंदन वर्धमान से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। 2019 में पाकिस्तान के F-16 लड़ाकू विमान को मार गिराने के बाद देशभर में चर्चा में आए अभिनंदन ने कथित तौर पर भारतीय वायुसेना की सेवा से विदाई ले ली है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अब वह निजी विमानन कंपनी Fly91 के साथ जुड़ गए हैं। हालांकि इस बदलाव को लेकर भारतीय वायुसेना या अभिनंदन वर्धमान की तरफ से आधिकारिक तौर पर कोई घोषणा नहीं की गई है।

    हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने बताया है कि अभिनंदन ने 31 मार्च को भारतीय वायुसेना से विदाई ली थी। इसके बाद उन्होंने निजी एयरलाइंस Fly91 के साथ काम शुरू किया है। एयरलाइन की ओर से भी अभिनंदन की नियुक्ति या उनकी भूमिका को लेकर कोई विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। कंपनी ने कर्मचारियों से जुड़ी व्यक्तिगत जानकारी को निजी मामला बताया है।

    गोवा स्थित Fly91 ने मार्च 2024 में अपना परिचालन शुरू किया था। कंपनी क्षेत्रीय हवाई संपर्क पर ध्यान देती है और उसके बेड़े में ATR 72-600 विमान शामिल हैं। फिलहाल कंपनी के परिचालन केंद्र गोवा और हैदराबाद में हैं। अभिनंदन जैसे अनुभवी लड़ाकू पायलट का निजी विमानन क्षेत्र में जाना उनके करियर का एक नया अध्याय माना जा रहा है।

    अभिनंदन वर्धमान का नाम देश को 2019 में हुए भारत और पाकिस्तान के बीच हवाई टकराव के दौरान खास तौर पर याद है। पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के प्रशिक्षण ठिकाने को निशाना बनाकर एयरस्ट्राइक की थी। इसके अगले दिन भारत और पाकिस्तान के लड़ाकू विमानों के बीच हवाई मुठभेड़ हुई थी।

    उस समय विंग कमांडर रहे अभिनंदन वर्धमान ने MiG-21 Bison से पाकिस्तान के F-16 विमान को निशाना बनाया था। हालांकि इसी कार्रवाई के दौरान उनका विमान भी दुश्मन के निशाने पर आ गया और वह पाकिस्तान की सीमा में जा गिरे। इसके बाद पाकिस्तानी सेना ने उन्हें हिरासत में ले लिया था। करीब 60 घंटे बाद उन्हें भारत को सौंप दिया गया था। उनकी वापसी के बाद देशभर में उनके साहस और जज्बे की चर्चा हुई थी।

    अभिनंदन को उनकी बहादुरी के लिए वर्ष 2021 में वीर चक्र से सम्मानित किया गया था। वीर चक्र युद्धकाल में दिया जाने वाला भारत का तीसरा सर्वोच्च वीरता पुरस्कार है। सम्मान के दौरान हवाई मुठभेड़ में उनके असाधारण साहस और कर्तव्य के प्रति समर्पण को विशेष रूप से रेखांकित किया गया था।

    अब वायुसेना की वर्दी छोड़कर निजी विमानन क्षेत्र में कदम रखने की खबर ने एक बार फिर अभिनंदन को चर्चा में ला दिया है। हालांकि उनकी नई भूमिका को लेकर आधिकारिक जानकारी का इंतजार है। यदि रिपोर्ट्स की पुष्टि होती है तो यह भारतीय वायुसेना के एक चर्चित फाइटर पायलट के सैन्य सेवा से नागरिक विमानन क्षेत्र की ओर बढ़ने का अहम बदलाव होगा।

  • लाल साड़ी और वो खौफनाक चीख आज भी नहीं भूल पाए दर्शक ऐसे बना था लज्जा शंकर पांडे का आइकॉनिक सीन

    लाल साड़ी और वो खौफनाक चीख आज भी नहीं भूल पाए दर्शक ऐसे बना था लज्जा शंकर पांडे का आइकॉनिक सीन


    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा में कुछ किरदार ऐसे होते हैं जो फिल्म खत्म होने के बाद भी दर्शकों के जेहन से नहीं निकलते। साल 1999 में रिलीज हुई फिल्म संघर्ष का लज्जा शंकर पांडे भी ऐसा ही किरदार था। आशुतोष राणा ने इस भूमिका में ऐसा खौफ पैदा किया था कि उस दौर में सिनेमाघरों में बैठे दर्शक तक उनकी आवाज और हावभाव देखकर सहम जाते थे। आज फिल्म को रिलीज हुए कई साल बीत चुके हैं लेकिन लज्जा शंकर पांडे का नाम आते ही लोगों के सामने वही डरावना चेहरा और जीभ हिलाकर निकाली गई उनकी खौफनाक चीख याद आ जाती है।

    इस किरदार की सबसे खास बात यह थी कि इसे डरावना बनाने के लिए किसी बड़े स्पेशल इफेक्ट या आधुनिक तकनीक का सहारा नहीं लिया गया था। आशुतोष राणा ने अपने अभिनय और आवाज के दम पर ऐसा माहौल तैयार किया जो आज भी याद किया जाता है। खास बात यह है कि जिस सीन को देखकर दर्शकों की चीख निकल जाती थी उसके लिए खुद आशुतोष राणा ने कोई रिहर्सल नहीं की थी।

    फिल्म की कहानी महेश भट्ट ने लिखी थी और तनुजा चंद्रा ने इसका निर्देशन किया था। कहानी एक ऐसे खतरनाक तांत्रिक की थी जो अमर होने की सनक में बच्चों की बलि देता है। ऐसे किरदार के लिए सिर्फ संवाद बोलना काफी नहीं था। उसे पर्दे पर असामान्य और भयावह दिखाना जरूरी था। महेश भट्ट चाहते थे कि लज्जा शंकर पांडे की कोई ऐसी पहचान हो जिसे दर्शक लंबे समय तक भूल न पाएं।

    यहीं से आशुतोष राणा की कल्पना ने इस किरदार को एक अलग पहचान दी। उन्होंने सोचा कि लज्जा शंकर आम इंसानों की तरह प्रतिक्रिया देने वाला व्यक्ति नहीं होना चाहिए। उसकी हर हरकत उसके भीतर की विकृत मानसिकता को दिखाए। इसी सोच के साथ उन्होंने जीभ हिलाते हुए एक अजीब और डरावनी चीख निकालने का अंदाज तैयार किया।

    इस आवाज के पीछे उनके बचपन की यादों का भी बड़ा योगदान था। मध्य प्रदेश के गाडरवारा में बीता उनका बचपन उन्हें गांव की लोक परंपराओं और अनुष्ठानों के करीब लेकर गया था। उन्होंने वहां तांत्रिक और भगतों को अलग तरह की आवाजें निकालते हुए देखा था। रामलीला में रावण का किरदार निभाने का अनुभव और बाद में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से मिली अभिनय की ट्रेनिंग ने भी उनके भीतर के कलाकार को मजबूत किया। इन्हीं अनुभवों को उन्होंने लज्जा शंकर पांडे की मानसिकता के साथ जोड़ दिया।

    जब इस सीन की शूटिंग का समय आया तो आशुतोष राणा ने अपने इस प्रयोग को सीधे कैमरे के सामने करने का फैसला किया। कैमरा शुरू हुआ और उन्होंने अचानक जीभ हिलाते हुए वह खौफनाक चीख निकाल दी। सेट पर मौजूद लोगों के लिए यह पूरी तरह अप्रत्याशित था। कुछ पल के लिए वहां ऐसा सन्नाटा छा गया जैसे हर कोई उस आवाज के असर में आ गया हो। कट होने के बाद भी टीम को कुछ क्षण समझ नहीं आया कि प्रतिक्रिया कैसे दी जाए। फिर सेट पर तालियों की गूंज सुनाई दी।

    लज्जा शंकर पांडे के किरदार की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है। उस समय आशुतोष राणा को खबर मिली थी कि यह भूमिका किसी बड़े स्टार को दी जा सकती है। वह दूसरी फिल्म की शूटिंग के लिए हैदराबाद में थे। खबर मिलते ही वह मुंबई पहुंचे और महेश भट्ट से मुलाकात की। बाद में उन्हें पता चला कि यह जानकारी गलत थी। महेश भट्ट ने साफ कर दिया कि लज्जा शंकर पांडे का किरदार आशुतोष राणा को ध्यान में रखकर ही लिखा गया था।

    फिल्म रिलीज के समय भले ही बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक बड़ी सफलता हासिल नहीं कर पाई लेकिन समय के साथ संघर्ष को एक अलग पहचान मिली। टेलीविजन और बाद में डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए नई पीढ़ी ने भी फिल्म को देखा। आज लज्जा शंकर पांडे हिंदी सिनेमा के यादगार खलनायकों में गिना जाता है। आशुतोष राणा ने यह साबित कर दिया कि डर पैदा करने के लिए हमेशा तकनीक की जरूरत नहीं होती। कई बार एक कलाकार की आंखें उसकी आवाज और उसकी कल्पना ही दर्शकों की रीढ़ में सिहरन पैदा करने के लिए काफी होती है।

  • जन्माष्टमी पर बन रहा दुर्लभ त्रिग्रही योग इन 4 राशियों को मिलेगा धन और तरक्की का लाभ

    जन्माष्टमी पर बन रहा दुर्लभ त्रिग्रही योग इन 4 राशियों को मिलेगा धन और तरक्की का लाभ


    नई दिल्ली। कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व इस बार 4 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को लेकर देशभर में तैयारियां चल रही हैं। धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण इस पर्व का महत्व इस बार और भी बढ़ गया है क्योंकि इसी दौरान ग्रहों की एक विशेष स्थिति बनने जा रही है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जन्माष्टमी के दिन सूर्य देव गुरु बृहस्पति और चंद्रमा की एक साथ युति से त्रिग्रही योग का निर्माण होगा। सूर्य को आत्मविश्वास और सफलता का कारक माना जाता है जबकि गुरु ज्ञान धन और समृद्धि से जुड़े माने जाते हैं। वहीं चंद्रमा मन भावनाओं और मानसिक शांति का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में इन तीन ग्रहों का एक साथ आना कई राशियों के लिए शुभ संकेत माना जा रहा है।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस त्रिग्रही योग का सबसे ज्यादा लाभ चार राशियों को मिल सकता है। इन राशि के जातकों के लिए जन्माष्टमी के आसपास का समय करियर आर्थिक स्थिति और पारिवारिक जीवन के लिहाज से बेहतर साबित हो सकता है।

    वृषभ राशि

    वृषभ राशि के जातकों के लिए यह ग्रह संयोग आर्थिक रूप से राहत देने वाला हो सकता है। लंबे समय से अटका हुआ पैसा वापस मिलने के योग बन सकते हैं। आमदनी बढ़ाने के नए रास्ते सामने आ सकते हैं। नौकरी करने वाले लोगों को वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिल सकता है और उनके काम की सराहना होने की संभावना है। कारोबार से जुड़े लोगों के लिए भी समय अनुकूल रह सकता है। नया काम शुरू करने की योजना बना रहे लोगों को आगे बढ़ने का अवसर मिल सकता है।

    कर्क राशि

    कर्क राशि के स्वामी चंद्रमा हैं इसलिए जन्माष्टमी पर बनने वाला यह संयोग इस राशि के लिए विशेष महत्व रख सकता है। जातकों के आत्मविश्वास में वृद्धि हो सकती है। समाज और परिवार में मान सम्मान बढ़ने के संकेत हैं। लंबे समय से चल रहा मानसिक तनाव कम हो सकता है। घर में धार्मिक या मांगलिक आयोजन होने की संभावना बन सकती है। पारिवारिक माहौल में सकारात्मकता बढ़ेगी और अपनों के साथ संबंध मजबूत हो सकते हैं।

    सिंह राशि

    सिंह राशि के स्वामी सूर्य देव हैं। ऐसे में सूर्य का गुरु और चंद्रमा के साथ मिलना इस राशि के जातकों के लिए लाभकारी माना जा रहा है। कार्यक्षेत्र में नेतृत्व क्षमता सामने आएगी और अधिकारियों की नजर में आपकी स्थिति मजबूत हो सकती है। नौकरी में पदोन्नति या जिम्मेदारी बढ़ने के योग बन सकते हैं। कारोबार करने वाले लोगों को किसी बड़े सौदे से फायदा मिल सकता है। आर्थिक मामलों में भी स्थिति बेहतर होने की उम्मीद है। निवेश से जुड़े फैसलों में लाभ मिल सकता है हालांकि किसी भी बड़े निवेश से पहले उचित सलाह लेना जरूरी रहेगा।

    धनु राशि

    धनु राशि के स्वामी देवगुरु बृहस्पति हैं। इसलिए त्रिग्रही योग में गुरु की मौजूदगी इस राशि के जातकों के लिए भाग्य को मजबूत करने वाली मानी जा रही है। विद्यार्थियों के लिए समय अच्छा रह सकता है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले लोगों को मेहनत का बेहतर परिणाम मिल सकता है। शिक्षा और करियर से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों में सफलता मिलने की संभावना है। भूमि भवन या वाहन खरीदने की इच्छा पूरी हो सकती है। कानूनी मामलों में भी राहत मिलने के संकेत हैं।

    जन्माष्टमी के इस शुभ अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा के साथ कुछ सरल उपाय भी किए जा सकते हैं। मान्यता है कि रात के समय बाल गोपाल को माखन मिश्री और तुलसी दल अर्पित करना शुभ होता है। इसके साथ ही ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का 108 बार जाप किया जा सकता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इससे भगवान श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त होती है और घर में सुख शांति तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

  • पंत के साथ पार्टी में नजर आए माही हुक्के का जिक्र आते ही वायरल हुआ VIDEO पुराने किस्से भी चर्चा में

    पंत के साथ पार्टी में नजर आए माही हुक्के का जिक्र आते ही वायरल हुआ VIDEO पुराने किस्से भी चर्चा में


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट के पूर्व कप्तान एमएस धोनी एक बार फिर सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। इस बार वजह क्रिकेट का मैदान नहीं बल्कि एक वायरल VIDEO है जिसमें धोनी भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत के साथ पार्टी करते नजर आ रहे हैं। दोनों खिलाड़ियों की मौजूदगी वाली यह क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर की जा रही है। VIDEO में पंत कुछ दोस्तों के साथ आराम करते दिखाई देते हैं जबकि धोनी पीछे की तरफ नजर आते हैं। इसी दौरान कथित तौर पर धोनी की आवाज सुनाई देती है जिसमें वह जरा हुक्का पीके आता हूं कहते नजर आते हैं। इसके बाद से हुक्के को लेकर सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई है।

    वायरल VIDEO में ऋषभ पंत एक सोफे पर कुछ लोगों के साथ बैठे दिखाई दे रहे हैं। आसपास का माहौल किसी होटल या निजी गेट टुगेदर जैसा नजर आता है। टेबल पर कुछ पेय पदार्थ भी दिखाई दे रहे हैं। इसी दौरान एमएस धोनी एक तस्वीर खिंचवाने के बाद वापस आते हैं और पंत के पास पहुंचते दिखाई देते हैं। दोनों के बीच दोस्ताना अंदाज भी नजर आता है। हालांकि इस VIDEO की प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। इसके अलावा यह भी साफ नहीं है कि VIDEO कब और किस जगह रिकॉर्ड किया गया था।

    धोनी के कथित हुक्का वाले बयान ने इसलिए भी लोगों का ध्यान खींचा क्योंकि पूर्व क्रिकेटरों के पुराने बयानों में भी धोनी के हुक्का या शीशा इस्तेमाल करने का जिक्र सामने आ चुका है। ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान जॉर्ज बेली पहले धोनी के कमरे के माहौल को लेकर दिलचस्प बातें बता चुके हैं। उनके मुताबिक धोनी कभी कभी शीशा या हुक्का इस्तेमाल करते थे और उनके कमरे में खिलाड़ियों के आने जाने का सिलसिला लगा रहता था। युवा खिलाड़ी भी उनके कमरे में बैठकर समय बिताते और बातचीत करते थे।

    चेन्नई सुपर किंग्स के पूर्व खिलाड़ी माइकल हसी भी धोनी के होटल रूम को लेकर ऐसी ही बातें बता चुके हैं। उनके अनुसार धोनी का कमरा कई बार खिलाड़ियों के लिए अनौपचारिक मिलन स्थल जैसा बन जाता था। खिलाड़ी वहां बैठते थे बातचीत करते थे और टीम से जुड़े मामलों के अलावा निजी बातें भी साझा करते थे। यही पुराने किस्से अब वायरल VIDEO सामने आने के बाद एक बार फिर सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गए हैं।

    ऋषभ पंत और एमएस धोनी की दोस्ती भी क्रिकेट प्रशंसकों के लिए खास रही है। पंत के शुरुआती दौर से ही धोनी को उनके लिए एक मार्गदर्शक के तौर पर देखा जाता रहा है। दोनों विकेटकीपर बल्लेबाजों के बीच मैदान के बाहर भी अच्छी बॉन्डिंग दिखाई देती रही है। हाल के दिनों में भी दोनों को रांची में साथ समय बिताते देखा गया था। पंत वहां ट्रेनिंग कर रहे थे और धोनी के साथ उनकी मुलाकात की तस्वीरें और वीडियो भी चर्चा में रहे थे।

    जहां एक तरफ धोनी और पंत का पार्टी VIDEO सुर्खियां बटोर रहा है वहीं ऋषभ पंत हाल में मैदान पर भी शानदार प्रदर्शन के कारण चर्चा में रहे हैं। श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में पंत ने तीन पारियों में 168 रन बनाए थे। उनका औसत 56 रहा और उन्होंने दो अर्धशतक लगाए। गॉल टेस्ट की दूसरी पारी में पंत ने 66 रन की अहम पारी खेली थी।

    इसी सीरीज के दौरान पंत ने टेस्ट क्रिकेट में एक बड़ी उपलब्धि भी हासिल की। वह टेस्ट क्रिकेट में 100 छक्के लगाने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज बने। टेस्ट क्रिकेट में उनके नाम अब 3725 रन हैं। उन्होंने 90 पारियों में आठ शतक और 21 अर्धशतक लगाए हैं।

    फिलहाल सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा चर्चा धोनी के कथित जरा हुक्का पीके आता हूं वाले बयान की हो रही है। VIDEO को लेकर फैंस अलग अलग राय दे रहे हैं। हालांकि जब तक VIDEO की जगह समय और प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं होती तब तक इससे जुड़े दावों को लेकर सावधानी बरतना जरूरी है। VIDEO वायरल होने के बावजूद इस मामले पर धोनी या पंत की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

  • पश्चिम के संपन्न देशों में भविष्य को लेकर पहले से ज्यादा डरे हुए हैं लोग, जानें इसकी वजह….

    पश्चिम के संपन्न देशों में भविष्य को लेकर पहले से ज्यादा डरे हुए हैं लोग, जानें इसकी वजह….


    लंदन/न्यूयॉर्क।
    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artifical Intelligence) से नौकरियों पर खतरा, जलवायु परिवर्तन, युद्ध की आहट और गहराता आर्थिक ध्रुवीकरण (Economic polarization)…। पश्चिमी दुनिया (Western world- अमेरिका और यूरोप) के संपन्न देशों में हर हफ्ते सामने आने वाले ओपिनियन पोल्स एक ही बात दोहरा रहे हैं, लोग भविष्य को लेकर पहले कभी इतने ज्यादा आशंकित और डरे हुए नहीं थे।

    2026 में सामने आए एक सर्वे में 5 में से 2 अमेरिकी नागरिकों (40%) ने आशंका जताई कि 2276 में अपनी स्थापना के 500 साल पूरे होने तक अमेरिका शायद एक देश के तौर पर बचेगा ही नहीं। अधिकांश लोगों का मानना है कि 2050 तक उनका देश कमजोर, आर्थिक रूप से पिछड़ा और राजनीतिक तौर पर और बंटा हुआ होगा। ब्रिटेन और फ्रांस जैसे अमीर देश संकटग्रस्त मुल्कों के साथ कतार में खड़े हैं। लेकिन इसके उलट, 55 देशों में किए गए यूनिसेफ और ग्लोबल सर्वे के आंकड़े बिल्कुल विपरीत तस्वीर पेश करते हैं।

    इंडोनेशिया, कीनिया, सऊदी अरब और कोलंबिया जैसे मध्यम आय वाले देशों के नागरिक अपने कल को लेकर पश्चिमी रईसों के मुकाबले कई गुना ज्यादा आशावादी हैं। साइंस जर्नल ‘नेचर’ में प्रकाशित शोध के अनुसार, भविष्य को लेकर उम्मीद इस बात पर निर्भर नहीं करती कि आज आपके पास कितनी दौलत हैं, बल्कि यह इस बात पर टिकी है कि आप किस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।


    उम्र का 55वां साल : जहां से शुरू होता है निराशावाद का चक्र

    55 साल की उम्र पार करते ही निराशावादी सोच रखने वाले लोग बहुसंख्यक हो जाते हैं।
    पश्चिमी देशों की बूढ़ी आबादी : ब्रिटेन (31%), अमेरिका (30%), फ्रांस (34%) और जर्मनी (38%) में 55 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की आबादी सबसे ज्यादा है। यही वजह है कि ये देश सबसे ज्यादा निराशावादी हैं। बुल्गारिया, बोस्निया, ऑस्ट्रिया और बेल्जियम दुनिया के सबसे कम उम्मीद वाले देशों में शीर्ष पर हैं।

    युवा देशों में भारी उत्साह : इसके विपरीत, युवा आबादी वाले देशों में भविष्य को लेकर जबर्दस्त सकारात्मकता है। कीनिया (सिर्फ 7.5% आबादी 55+), सीरिया (11%), सऊदी अरब (13%) और दक्षिण अफ्रीका (12%) दुनिया के सबसे ज्यादा आशावादी देशों में शामिल हैं।


    लोकतांत्रिक देशों में निराशावाद ज्यादा क्यों?

    हैरानी की बात यह है कि नागरिक अधिकारों, अभिव्यक्ति की आजादी और अवसरों की समानता के बावजूद लोकतांत्रिक देशों में अधिनायकवादी देशों की तुलना में भविष्य को लेकर निराशा ज्यादा दर्ज की जाती है। इसकी तीन मुख्य वजहें हैं:

    चुनावी वादों का भारी दबाव : लोकतंत्र में नेता हर चुनाव में जिंदगी बेहतर बनाने के बड़े-बड़े वादे करते हैं। जब वास्तविक जीवन में वे वादे पूरे नहीं होते, तो नागरिकों में गहरा असंतोष पैदा होता है।

    स्वतंत्र मीडिया का फोकस : स्वतंत्र प्रेस लगातार व्यवस्था की खामियों, घोटालों और समस्याओं को उजागर करती है, जिससे जनता के बीच लगातार नकारात्मकता का माहौल बना रहता है।

    कम संपन्न में आगे बढ़ने की संभावनाएं ज्यादा : आप जितने कम संपन्न होते हैं, आपके ऊपर उठने की उम्मीद उतनी ही ज्यादा होती हैं। आशावाद इस बात से तय नहीं होता कि आज आपके पास क्या है, बल्कि इससे तय होता है कि आप भविष्य में किस दिशा की ओर बढ़ रहे हैं। लोग अपने निजी जीवन को लेकर आमतौर पर आश्वस्त रहते हैं, लेकिन पूरे देश या समाज के भविष्य को लेकर भारी चिंता जताते हैं।

  • मोदी-पेजेशकियन की मुलाकात पर अमेरिका बोला-भारत-ईरान के बीच कोई व्यापार समझौता नहीं….

    मोदी-पेजेशकियन की मुलाकात पर अमेरिका बोला-भारत-ईरान के बीच कोई व्यापार समझौता नहीं….


    वॉशिंगटन
    । अमेरिका (America) के विदेश मंत्री मार्को रूबियो (Foreign Minister Marco Rubio) ने बुधवार को कहा कि उन्हें नहीं लगता कि भारत और ईरान (India and Iran) के बीच किसी व्यापार समझौते (Trade Agreement) को लेकर बातचीत हो रही है। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देश ईरान की सरकार से बातचीत करते हैं। रूबियो ने यह टिप्पणी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन (Iranian President Masoud Pezeshkian) के बीच बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन से इतर हुई मुलाकात को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में की। यह सवाल फॉक्स न्यूज रेडियो के ‘द ब्रायन किल्मीड शो’ में उनसे पूछा गया था।

    कार्यक्रम के दौरान प्रस्तोता ब्रायन किल्मीड ने कहा कि पीएम मोदी और पेजेशकियन की मुलाकात में ऐसा लगा कि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते की तैयारी हो रही है। इसके जवाब में रूबियो ने कहा, ”खैर, मुझे नहीं लगता कि भारत और ईरान के बीच कोई व्यापार समझौता है। जाहिर तौर पर, सभी देश अपनी-अपनी विदेश नीति तय करते हैं और दुनिया के कई देश ईरान की सरकार से बातचीत करते हैं।”


    ईरान की मदद करने वाले देशों पर अमेरिका क्या करेगा कार्रवाई?

    अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा, ”मेरा मतलब है कि हम भी ईरान की सरकार के कुछ लोगों के साथ मिले हैं। कुछ चर्चाओं के संदर्भ में हमारी उनसे बातचीत और संपर्क हुआ है।” रूबियो ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी देश को ईरान को अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने में मदद नहीं करनी चाहिए।

    उन्होंने कहा, ”किसी भी देश को ऐसे तंत्र बनाने में उनकी मदद नहीं करनी चाहिए, जिनके जरिए वे राजस्व जुटा सकें और फिर उसका इस्तेमाल आतंकवाद को बढ़ावा देने के साथ परमाणु हथियार बनाने की कोशिश में कर सकें। और अगर देश ऐसा करने का फैसला करते हैं, तो हमें उन पर भी प्रतिबंध लगाना पड़ेगा।”


    पीएम मोदी से पेजेशकियन ने क्यों की मुलाकात?

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 अगस्त को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन से इतर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ बैठक की थी। ईरान की अर्द्ध सरकारी एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने आपसी रिश्तों की मौजूदा स्थिति का जायजा लिया और दोनों देशों के लिए अहम क्षेत्रों में ईरान और भारत के बीच आपसी सहयोग को मजबूत करने की जरूरत पर बल दिया गया।

    पश्चिम एशिया संकट के बीच दोनों शीर्ष नेताओं में संवाद कायम रहा है। जून में, पीएम मोदी और पेजेशकियन के बीच फोन पर बातचीत हुई थी, जिसमें ईरानी राष्ट्रपति ने भारतीय पीएम को पश्चिम एशिया में हो रही घटनाओं और आगे की राह के बारे में जानकारी दी थी। बातचीत के दौरान, पीएम मोदी ने संघर्ष खत्म करने के लिए बनी सहमति का स्वागत किया था और स्थायी शांति और स्थिरता के लिए लगातार कोशिशों की जरूरत को दोहराया।

  • नेपाल के बाढ़ पीड़ितों के लिए आगे आए सोनू सूद बोले अगर अभी मदद नहीं करेंगे तो कब करेंगे कंपनियों से भी की बड़ी अपील

    नेपाल के बाढ़ पीड़ितों के लिए आगे आए सोनू सूद बोले अगर अभी मदद नहीं करेंगे तो कब करेंगे कंपनियों से भी की बड़ी अपील


    नई दिल्ली। नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने बड़ी तबाही मचाई है और इस मुश्किल समय में बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद एक बार फिर जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए आगे आए हैं। सोनू सूद अपनी चैरिटी फाउंडेशन की टीम के साथ नेपाल पहुंचे हैं। उनके साथ बड़ी मात्रा में राहत सामग्री भी पहुंची है। इसमें कंबल और खाने पीने का सामान शामिल है। अभिनेता का कहना है कि सिर्फ तत्काल राहत पहुंचाना ही काफी नहीं है बल्कि आने वाले महीनों तक प्रभावित परिवारों की मदद जारी रखने की जरूरत है ताकि वे दोबारा अपनी सामान्य जिंदगी की ओर लौट सकें।

    नेपाल पहुंचने के बाद सोनू सूद ने राहत अभियान को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि उनकी टीम बाढ़ प्रभावित इलाकों में जाकर लोगों से मुलाकात कर रही है और उनकी जरूरतों को समझने की कोशिश कर रही है। कई परिवार ऐसे हैं जिन्होंने इस आपदा में अपना जरूरी सामान और रोजमर्रा की सुविधाएं खो दी हैं। ऐसे लोगों तक जरूरी सामग्री पहुंचाना इस समय सबसे बड़ी प्राथमिकता है। सोनू ने कहा कि उनकी टीम कंबल और भोजन जैसी जरूरी चीजें लेकर पहुंची है और आगे भी आवश्यकता के अनुसार सामान उपलब्ध कराया जाएगा।

    अभिनेता ने यह भी बताया कि राहत सामग्री लेकर नेपाल पहुंचना आसान नहीं है। इसके लिए काफी कागजी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। हालांकि इन मुश्किलों के बावजूद उनकी टीम लगातार काम कर रही है। सोनू का कहना है कि प्रभावित लोगों की जिंदगी को दोबारा पटरी पर लाने में समय लगेगा। इसलिए राहत अभियान को कुछ दिनों तक सीमित रखने के बजाय लंबे समय तक जारी रखने की जरूरत है।

    सोनू सूद ने इस दौरान भारत सरकार की ओर से नेपाल को दी जा रही सहायता की भी सराहना की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों की तारीफ करते हुए कहा कि भारत सरकार ने संकट की इस घड़ी में नेपाल के लिए अच्छा काम किया है। उनके मुताबिक नेपाल को दी जा रही मदद के लिए प्रधानमंत्री की भूमिका महत्वपूर्ण है और यह सहायता आगे भी जारी रहनी चाहिए। सोनू ने कहा कि जब वह प्रभावित परिवारों से सीधे मिलते हैं तो उन्हें महसूस होता है कि समस्या कुछ हफ्तों या कुछ महीनों में खत्म होने वाली नहीं है।

    सोनू सूद ने लोगों से भी अपनी क्षमता के अनुसार मदद करने की अपील की। उन्होंने कहा कि मुश्किल समय में जरूरतमंदों के साथ खड़ा होना हर व्यक्ति का फर्ज है। अभिनेता खुद प्रभावित लोगों से बातचीत कर यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि उन्हें किन चीजों की सबसे ज्यादा जरूरत है ताकि उसी हिसाब से आगे राहत सामग्री पहुंचाई जा सके।

    उन्होंने बड़ी कंपनियों से भी नेपाल के राहत अभियान में शामिल होने की अपील की। सोनू का कहना है कि कंपनियों को अपने CSR प्रयासों के जरिए प्रभावित इलाकों तक पहुंचना चाहिए। उनका मानना है कि सरकार और सामाजिक संस्थाओं के साथ कॉरपोरेट जगत भी आगे आए तो राहत और पुनर्वास का काम तेजी से किया जा सकता है।

    नेपाल में हुई इस आपदा के बाद बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है। कई लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं और प्रभावित इलाकों में सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। ऐसे समय में सोनू सूद का राहत अभियान जरूरतमंद परिवारों के लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आया है। अभिनेता इससे पहले भी आपदा और संकट के समय लोगों की मदद के लिए आगे आते रहे हैं। इस बार भी उनका फोकस सिर्फ राहत सामग्री बांटने पर नहीं बल्कि प्रभावित परिवारों को लंबे समय तक संभालने पर है।