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  • ट्विशा शर्मा मौत केस में आज बड़ा दिन भोपाल कोर्ट में सुनवाई दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पेश कर सकती है सीबीआई

    ट्विशा शर्मा मौत केस में आज बड़ा दिन भोपाल कोर्ट में सुनवाई दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पेश कर सकती है सीबीआई


    भोपाल । भोपाल की मॉडल और एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत से जुड़े बहुचर्चित मामले में मंगलवार को जिला अदालत में अहम सुनवाई होने जा रही है। इस सुनवाई पर जांच एजेंसियों के साथ साथ दोनों पक्षों की भी नजरें टिकी हुई हैं क्योंकि माना जा रहा है कि केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई इस दौरान दिल्ली एम्स की दूसरी पोस्टमॉर्टम की अंतिम फॉरेंसिक रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश कर सकती है। वहीं मामले के दोनों आरोपी रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे अधिवक्ता समर्थ सिंह की न्यायिक हिरासत से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेशी कराई जा सकती है।

    ट्विशा शर्मा की 12 मई 2026 की रात भोपाल के कटारा हिल्स स्थित ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। घटना के बाद ससुराल पक्ष ने इसे आत्महत्या बताया जबकि मायके पक्ष ने हत्या का आरोप लगाया। मामले ने तूल पकड़ने के बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जांच की निगरानी करते हुए दिल्ली एम्स से दोबारा पोस्टमॉर्टम कराने के निर्देश दिए थे।

    हाईकोर्ट के आदेश के बाद 25 मई 2026 को सीबीआई ने इस मामले की जांच अपने हाथ में ली। इसके बाद एजेंसी लगातार वैज्ञानिक साक्ष्यों डिजिटल रिकॉर्ड घटनास्थल की जांच और फॉरेंसिक विश्लेषण के आधार पर मामले की पड़ताल कर रही है। जांच के दौरान सीबीआई ने घटनास्थल का सीन रिक्रिएशन भी कराया और कई तकनीकी साक्ष्य एकत्र किए।

    सूत्रों के अनुसार दिल्ली एम्स के पांच सदस्यीय मेडिकल बोर्ड ने 10 जुलाई को अपनी 11 पृष्ठों की अंतिम फॉरेंसिक रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में सीबीआई को सौंप दी थी। रिपोर्ट की एक प्रति मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भी भेजी गई है। हालांकि रिपोर्ट की आधिकारिक सामग्री सार्वजनिक नहीं की गई है लेकिन बताया जा रहा है कि जांच में कथित तौर पर फांसी में इस्तेमाल हुई जिम बेल्ट पर मिले स्किन टिश्यू और ट्विशा की गर्दन पर मिले लिगेचर मार्क के बीच वैज्ञानिक समानता का उल्लेख किया गया है। इन दावों की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल अदालत में रिपोर्ट पेश होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

    आज की सुनवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि सीबीआई के पास जांच पूरी कर चालान पेश करने की वैधानिक समय सीमा तेजी से पूरी होने की ओर है। कानून के अनुसार एजेंसी को निर्धारित अवधि के भीतर आरोप पत्र दाखिल करना होगा। यदि तय समय में चालान पेश नहीं किया जाता है तो आरोपी पक्ष को डिफॉल्ट जमानत का दावा करने का कानूनी अधिकार मिल सकता है।

    ऐसे में अदालत की आज की कार्यवाही इस हाई प्रोफाइल मामले की दिशा तय करने में अहम साबित हो सकती है। यदि सीबीआई फॉरेंसिक रिपोर्ट के साथ चालान भी पेश करती है तो जांच अगले चरण में पहुंच जाएगी और मामले की सुनवाई तेजी से आगे बढ़ सकती है। पूरे प्रदेश की नजर अब अदालत की कार्यवाही और सीबीआई की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

  • छह साल बाद भी नहीं भरे दिल्ली दंगों के जख्म: नाले को देखकर आज भी कांप उठती है रूह, आईबी अधिकारी अंकित शर्मा के भाई ने की सभी दोषियों के लिए फांसी की मांग

    छह साल बाद भी नहीं भरे दिल्ली दंगों के जख्म: नाले को देखकर आज भी कांप उठती है रूह, आईबी अधिकारी अंकित शर्मा के भाई ने की सभी दोषियों के लिए फांसी की मांग

    नई दिल्ली । वर्ष 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़के भीषण सांप्रदायिक दंगों के दौरान देश को झकझोर देने वाले इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में अदालत ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। विशेष अदालत के न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने इस नृशंस हत्याकांड में आम आदमी पार्टी के पूर्व स्थानीय पार्षद ताहिर हुसैन सहित पांच आरोपियों को दोषी करार दिया है। अदालत द्वारा दोषी ठहराए गए अन्य अपराधियों में हसीन उर्फ मुल्लाजी, नजीम, कासिम और समीर खान शामिल हैं। इस न्यायिक फैसले से पीड़ित परिवार को एक कानूनी राहत तो जरूर मिली है, लेकिन उनके जीवन में आया खालीपन और अपनों को खोने का गहरा दर्द आज छह साल बाद भी उतना ही ताजा और तकलीफदेह बना हुआ है।

    न्यायालय के इस बड़े फैसले के बाद अंकित शर्मा के परिवार की वह खौफनाक यादें एक बार फिर जीवंत हो गई हैं, जिन्होंने उनके हंसते-खेलते परिवार को पूरी तरह उजाड़ दिया था। सुरक्षा कारणों और उस डरावने घटनाक्रम के मानसिक आघात के चलते पीड़ित परिवार उत्तर-पूर्वी दिल्ली के खजूरी खास स्थित अपने पैतृक मकान को हमेशा के लिए छोड़कर जा चुका है और तब से एक किराए के मकान में रहने को विवश है। अंकित शर्मा के बड़े भाई अंकुर शर्मा ने एक साक्षात्कार में अपने दिल का गुबार निकालते हुए न्याय व्यवस्था से मांग की है कि उनके भाई की हत्या करने वाले सभी दोषियों को कानूनन फांसी की सजा मिलनी चाहिए ताकि पीड़ित आत्मा को सच्ची शांति मिल सके।

    घटनाक्रम के अनुसार, 25 फरवरी 2020 को आईबी अधिकारी अंकित शर्मा घर का कुछ जरूरी सामान लेने के लिए बाहर निकले थे, जिसके बाद वह अचानक लापता हो गए। जांच एजेंसियों और पुलिस के मुताबिक, उग्र दंगाइयों की एक हिंसक भीड़ ने अंकित को अगवा कर लिया था और बेहद क्रूरतापूर्वक उन पर धारदार हथियारों से हमला किया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ था कि देश की सुरक्षा एजेंसी में कार्यरत इस युवा अधिकारी को अपराधियों ने 52 बार चाकू से गोदा था। इस वीभत्स वारदात को अंजाम देने के बाद हत्यारों ने साक्ष्य छिपाने के उद्देश्य से उनके खून से लथपथ शव को पास के ही एक गंदे नाले में फेंक दिया था, जिसे अगली सुबह पुलिस ने बरामद किया था।

    अंकित शर्मा के परिजनों ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अंकित को केवल उनकी धार्मिक पहचान यानी हिंदू होने के कारण सोची-समझी साजिश के तहत निशाना बनाया गया था। उनके भाई अंकुर ने बताया कि अंकित एक बेहद मिलनसार और धर्मनिरपेक्ष सोच वाले व्यक्ति थे, जिनके मित्रों में हिंदू और मुसलमान दोनों ही समुदायों के लोग शामिल थे। दुःख की बात यह रही कि जब दंगाइयों की भीड़ ने उन पर हमला किया, तो उनके कुछ स्थानीय मुस्लिम दोस्तों ने भी अंकित को बचाने के बजाय कातिलों का साथ दिया। इस खौफनाक मंजर की यादें परिवार को इस कदर प्रताड़ित करती हैं कि आज भी दंगों के क्षेत्र या उस नाले के पास से गुजरते समय उनका दिल भारी हो जाता है।

    इस भयावह त्रासदी का अंकित शर्मा के माता-पिता के स्वास्थ्य पर अत्यंत प्रतिकूल और गंभीर प्रभाव पड़ा है। जवान बेटे की इस तरह हुई असमय और क्रूर मौत के सदमे के कारण उनके माता-पिता गंभीर रूप से उच्च रक्तचाप (हाई बीपी) और मानसिक तनाव का शिकार हो चुके हैं। अदालती कार्यवाही या दंगों से जुड़ी किसी भी चर्चा मात्र से ही उनका पूरा परिवार भारी अवसाद और तनाव की स्थिति में आ जाता है। पीड़ित परिवार का स्पष्ट रूप से मानना है कि उनके साथ पूर्ण और वास्तविक न्याय तभी होगा जब देश के लिए बलिदान देने वाले उनके बेटे के हत्यारों को कानून के तहत अधिकतम और कठोरतम संभव दंड दिया जाएगा।

  • सरकारी वकील उज्ज्वल निकम ने बयां किया आर्म्स एक्ट की सजा के वक्त का पूरा कोर्ट रूम ड्रामा

    सरकारी वकील उज्ज्वल निकम ने बयां किया आर्म्स एक्ट की सजा के वक्त का पूरा कोर्ट रूम ड्रामा

    नई दिल्ली । वर्ष 1993 के मुंबई सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले ने देश के साथ-साथ पूरे फिल्म जगत को हिलाकर रख दिया था। इस ऐतिहासिक मुकदमे में सबसे चर्चित चेहरा रहे बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त की सजा और उनके अदालती संघर्ष की कहानियां आज भी लोगों के जेहन में ताजा हैं। हाल ही में इस संवेदनशील मामले के विशेष सरकारी अभियोजक रहे वरिष्ठ वकील उज्ज्वल निकम ने एक साक्षात्कार में उस वक्त के अदालती माहौल और फैसले के दिन संजय दत्त की मानसिक स्थिति को लेकर बेहद चौंकाने वाले और अनसुने खुलासे किए हैं। निकम ने बताया कि फैसला सुनाए जाने के वक्त अभिनेता किस कदर डरे हुए थे और सजा का ऐलान होते ही अदालत कक्ष के भीतर वह पूरी तरह टूट गए थे।

    मुंबई की विशेष टाडा अदालत में चल रहे इस लंबे मुकदमे के दौरान पूरे देश की निगाहें संजय दत्त पर टिकी हुई थीं। उज्ज्वल निकम के अनुसार, फैसला आने वाले दिन अदालत कक्ष के भीतर भारी तनाव और सन्नाटा पसरा हुआ था। संजय दत्त को उस समय सबसे बड़ा डर इस बात का था कि क्या उन पर देशद्रोह या आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने का ठप्पा लगेगा। जब अदालत ने उन्हें टाडा यानी आतंकवादी और विघटनकारी गतिविधियां अधिनियम के तहत लगे गंभीर आरोपों से बरी कर दिया, तो उनके चेहरे पर कुछ पल के लिए राहत जरूर दिखी थी। लेकिन इसके तुरंत बाद जब गैर-कानूनी हथियार रखने के आरोप में आर्म्स एक्ट के तहत उन्हें दोषी ठहराया गया, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।

    उज्ज्वल निकम ने बताया कि टाडा के आरोपों से मुक्ति मिलने के बाद संजय दत्त को लगा था कि शायद वे पूरी तरह बच जाएंगे या उन्हें प्रोबेशन का लाभ मिल जाएगा। लेकिन कानून अपनी राह पर चल रहा था। जैसे ही न्यायाधीश ने आर्म्स एक्ट के तहत सजा की अवधि का ऐलान करना शुरू किया, संजय दत्त के शरीर में कंपन होने लगा। निकम ने उस दृश्य को याद करते हुए साझा किया कि अभिनेता के हाथ-पैर कांप रहे थे और वह अदालत में खड़े होने की स्थिति में भी नहीं दिख रहे थे। उनकी आंखें आंसुओं से भर गईं और वह पूरी तरह लाचार नजर आने लगे थे। एक ऐसा अभिनेता जिसे स्क्रीन पर हमेशा कड़े और मजबूत किरदारों में देखा गया था, वह कानून के सामने पूरी तरह बेबस खड़ा था।

    अभियोजन पक्ष के रूप में उज्ज्वल निकम ने संजय दत्त के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत कड़ी सजा की वकालत की थी क्योंकि देश की सुरक्षा के दृष्टिकोण से प्रतिबंधित हथियार रखना एक अक्षम्य अपराध था। निकम ने खुलासा किया कि सजा के बाद संजय दत्त ने उनकी तरफ देखा था और उनकी आंखों में अपने भविष्य को लेकर एक गहरा डर और असमंजस साफ दिखाई दे रहा था। इस ऐतिहासिक मामले में संजय दत्त को पांच साल के कारावास की सजा सुनाई गई थी, जिसके बाद उन्हें यरवदा जेल भेजा गया। उज्ज्वल निकम का यह संस्मरण न केवल एक वीआईपी आरोपी की न्यायिक प्रक्रिया के दौरान की मनोवैज्ञानिक स्थिति को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि कानून की नजर में कोई भी व्यक्ति अपने प्रभाव या शोहरत के बल पर बच नहीं सकता।

  • सावन 2026 में इन चार पवित्र पौधों की पूजा से प्रसन्न होंगे भोलेनाथ दूर होंगी जीवन की बाधाएं

    सावन 2026 में इन चार पवित्र पौधों की पूजा से प्रसन्न होंगे भोलेनाथ दूर होंगी जीवन की बाधाएं


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में सावन माह को भगवान शिव की भक्ति और आराधना के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस पूरे महीने में भक्त भोलेनाथ की पूजा अर्चना जलाभिषेक व्रत और विभिन्न धार्मिक उपायों के माध्यम से उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि सावन में की गई सच्ची श्रद्धा से पूजा भगवान शिव को शीघ्र प्रसन्न करती है और भक्तों के जीवन में चल रही अनेक परेशानियों का अंत होता है। इसी क्रम में कुछ विशेष पौधों की पूजा का भी उल्लेख मिलता है जिन्हें शिव प्रिय माना गया है।

    मान्यता है कि सावन में इन पौधों की पूजा करने से घर में सुख शांति समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। साथ ही जीवन में आ रही बाधाएं धीरे धीरे दूर होने लगती हैं। आइए जानते हैं वे चार पवित्र पौधे कौन से हैं जिनकी पूजा सावन में विशेष फलदायी मानी जाती है।

    बेलपत्र का पौधा

    बेलपत्र भगवान शिव को सबसे प्रिय अर्पणों में से एक माना जाता है। सावन माह में शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने के साथ यदि बेलपत्र के पौधे की भी पूजा की जाए तो इसे अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार बेलपत्र में ब्रह्मा विष्णु और महेश तीनों देवताओं का प्रतीकात्मक वास माना गया है। इसकी पूजा करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में आध्यात्मिक वातावरण मजबूत होता है।

    शमी का पौधा

    शमी का पौधा भी सावन में विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि इसकी पूजा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और घर का वास्तु दोष कम होता है। कई लोग इसे घर के मुख्य द्वार की बाईं ओर लगाने की सलाह देते हैं। धार्मिक विश्वास के अनुसार शमी की पूजा से शनि से जुड़े कष्टों में भी राहत मिल सकती है और परिवार पर शिव कृपा बनी रहती है।

    आक यानी मदार का पौधा

    आक या मदार का पौधा भगवान शिव से विशेष रूप से जुड़ा माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में कहा गया है कि इस पौधे में शिव तत्व का वास होता है। सावन में इसकी पूजा करने से घर में सुख समृद्धि और शांति बनी रहती है। विशेष रूप से यदि यह पौधा घर के पूर्व या उत्तर दिशा में लगा हो तो उसकी पूजा को अधिक शुभ माना जाता है।

    तुलसी का पौधा

    तुलसी को हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और पूजनीय पौधा माना गया है। यह देवी लक्ष्मी का प्रतीक मानी जाती है। सावन में तुलसी की पूजा करने से घर में धन सुख और समृद्धि का आगमन होता है। धार्मिक विश्वास है कि जहां तुलसी का वास होता है वहां सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और परिवार में शांति का वातावरण बना रहता है।

    सावन में पौधों की पूजा का महत्व

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन में इन पौधों की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। साथ ही घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और जीवन में आ रही बाधाएं कम होने लगती हैं। हालांकि यह सभी बातें धार्मिक विश्वासों पर आधारित हैं और इन्हें आस्था के रूप में ही ग्रहण किया जाना चाहिए।

  • विवादों और सदमे के बीच थमीं रॉब डीपरिंक की सांसें: यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद फीफा कप से बाहर हुए रेफरी की मौत से खेल जगत स्तब्ध

    विवादों और सदमे के बीच थमीं रॉब डीपरिंक की सांसें: यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद फीफा कप से बाहर हुए रेफरी की मौत से खेल जगत स्तब्ध

    नई दिल्ली । फुटबॉल जगत अभी दक्षिण अफ्रीका के युवा मिडफील्डर जेडन एडम्स के आकस्मिक निधन के गहरे सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि फीफा विश्व कप 2026 के बीच एक और दुखद खबर ने खेल प्रेमियों को झकझोर कर रख दिया है। विश्व कप के लिए वीडियो असिस्टेंट रेफरी की सूची से बाहर किए गए नीदरलैंड के विख्यात फुटबॉल रेफरी रॉब डीपरिंक का 38 वर्ष की आयु में असामयिक निधन हो गया है। डच रेफरी के इस तरह अचानक दुनिया से चले जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल समुदाय में शोक की लहर दौड़ गई है, हालांकि उनकी मृत्यु के वास्तविक कारणों का खुलासा अभी तक नहीं किया गया है।

    दिवंगत रेफरी रॉब डीपरिंक का करियर शानदार रहा था और वह वर्ष 2017 से नीदरलैंड की शीर्ष घरेलू फुटबॉल लीग ‘एरेडिविजी’ में रेफरी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। हाल ही में संपन्न हुए यूरो कप 2024 में भी उन्होंने वीएआर अधिकारी के तौर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनकी प्रतिभा को देखते हुए ही फीफा ने उन्हें 2026 के महाकुंभ के लिए वीएआर अधिकारियों की मुख्य सूची में शामिल किया था। लेकिन टूर्नामेंट के आगाज से करीब एक महीने पहले लंदन की मेट्रोपॉलिटन पुलिस द्वारा एक नाबालिग के यौन उत्पीड़न के संगीन मामले में की गई उनकी गिरफ्तारी के बाद परिस्थितियां पूरी तरह बदल गईं।

    इस गंभीर आपराधिक मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए फीफा और डच फुटबॉल एसोसिएशन ने कड़ा रुख अपनाया और डीपरिंक को विश्व कप की रेफरी टीम से तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर दिया था। हालांकि, बाद में स्थानीय पुलिस और जांच एजेंसियों को उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिले, जिसके चलते इस कानूनी मामले को आधिकारिक तौर पर बंद कर दिया गया था। मामले के बंद होने के बाद डीपरिंक ने अपनी बेगुनाही साबित होने पर राहत की सांस ली थी, लेकिन विश्व कप जैसे प्रतिष्ठित मंच से बाहर किए जाने के फैसले से वह मानसिक रूप से काफी निराश और तनाव में चल रहे थे।

    नीदरलैंड फुटबॉल संघ ने इस दुखद घटनाक्रम पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए एक आधिकारिक शोक संदेश जारी किया है। संघ ने अपने बयान में कहा कि रॉब डीपरिंक के असामयिक निधन की खबर से पूरा खेल जगत स्तब्ध है और देश ने न केवल एक अत्यंत सम्मानित खेल अधिकारी खोया है, बल्कि एक बेहद सहृदय और समर्पित साथी को भी गंवा दिया है। विश्व फुटबॉल की सर्वोच्च शासी निकाय फीफा ने भी डच फुटबॉल संघ और दिवंगत रेफरी के पीड़ित परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं प्रकट की हैं। खेल इतिहास में इस विश्व कप को खिलाड़ियों और अधिकारियों की अप्रत्याशित क्षति के लिए हमेशा याद रखा जाएगा।

  • विराट कोहली की वापसी से बढ़ी ताकत, लेकिन कुलदीप यादव और वॉशिंगटन सुंदर के बीच फंसा प्लेइंग-11 का पेच

    विराट कोहली की वापसी से बढ़ी ताकत, लेकिन कुलदीप यादव और वॉशिंगटन सुंदर के बीच फंसा प्लेइंग-11 का पेच

    नई दिल्ली । टी20 श्रृंखला में 0-4 की एकतरफा और निराशाजनक हार का सामना करने के बाद, भारतीय क्रिकेट टीम अब एक नई शुरुआत के इरादे से मैदान पर उतरने के लिए तैयार है। इंग्लैंड के खिलाफ तीन मैचों की एकदिवसीय श्रृंखला का पहला मुकाबला बर्मिंघम के प्रतिष्ठित एजबेस्टन मैदान पर खेला जाना है। इस मुकाबले में भारतीय टीम प्रबंधन का मुख्य उद्देश्य न केवल एक शानदार जीत दर्ज करना होगा, बल्कि खेल के इस प्रारूप में अपनी बादशाहत को पुनः साबित करना भी होगा। मुख्य कोच गौतम गंभीर और कप्तान शुभमन गिल के लिए यह मुकाबला रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे टी20 श्रृंखला की गलतियों को दोहराने से बचना चाहेंगे।

    इस श्रृंखला के लिए भारतीय टीम में कई सीनियर खिलाड़ियों की वापसी हुई है, जिससे टीम का संतुलन काफी मजबूत नजर आ रहा है। रोहित शर्मा और पूर्व कप्तान विराट कोहली जैसे अनुभवी दिग्गजों की मौजूदगी से बल्लेबाजी क्रम को अत्यधिक स्थिरता मिलेगी। सलामी जोड़ी के रूप में रोहित शर्मा और कप्तान शुभमन गिल पारी की शुरुआत करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। वहीं, पिछले कुछ समय से मध्यक्रम में विकल्प के तौर पर देखे जा रहे यशस्वी जायसवाल इस श्रृंखला का हिस्सा नहीं हैं, जिसके चलते विराट कोहली का अपने पसंदीदा नंबर-3 स्थान पर खेलना पूरी तरह तय माना जा रहा है। कोहली की वापसी के कारण ईशान किशन को इस मैच में अंतिम एकादश से बाहर बैठना पड़ सकता है।

    भारतीय टीम का मध्यक्रम इस प्रारूप में काफी अनुभवी और विश्वसनीय दिखाई दे रहा है। नंबर-4 पर श्रेयस अय्यर और नंबर-5 पर विकेटकीपर बल्लेबाज केएल राहुल की जगह लगभग पक्की मानी जा रही है। हालांकि, मुख्य कोच गौतम गंभीर के रणनीतिक दृष्टिकोण को देखते हुए केएल राहुल के बल्लेबाजी क्रम में परिस्थितियों के अनुसार लचीलापन देखा जा सकता है। बाएं हाथ के हरफनमौला खिलाड़ी अक्षर पटेल को टीम में एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा जा रहा है, जिन्हें बल्लेबाजी में गहराई प्रदान करने के लिए नंबर-5 या नंबर-6 पर प्रमोट किया जा सकता है। उनकी मौजूदगी से दाएं हाथ के बल्लेबाजों की अधिकता वाले मध्यक्रम को एक अच्छा संतुलन मिलेगा।

    तेज गेंदबाजी विभाग की बात करें तो अनुभवी तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह की लंबे समय बाद एकदिवसीय टीम में वापसी हो रही है। वह वर्ष 2023 के एकदिवसीय विश्व कप फाइनल के बाद पहली बार इस प्रारूप में देश का प्रतिनिधित्व करेंगे। बुमराह के साथ तेज गेंदबाजी आक्रमण की जिम्मेदारी अर्शदीप सिंह और प्रसिद्ध कृष्णा के कंधों पर होगी। इंग्लैंड की सीम और स्विंग के अनुकूल परिस्थितियों में यह तिकड़ी भारतीय टीम के लिए सबसे बड़ा हथियार साबित हो सकती है। हार्दिक पंड्या और नीतीश कुमार रेड्डी की चोट के कारण अनुपलब्धता ने टीम प्रबंधन के लिए ऑलराउंडर के विकल्प को थोड़ा सीमित कर दिया है, जिसके कारण शिवम दुबे को अंतिम एकादश में शामिल किया जाना तय माना जा रहा है।

    टीम प्रबंधन के सामने सबसे बड़ी दुविधा स्पिन विभाग के चयन को लेकर खड़ी हो गई है। कलाई के स्पिनर कुलदीप यादव मध्य ओवरों में विकेट निकालने की अपनी बेजोड़ क्षमता के लिए जाने जाते हैं, लेकिन उनकी कमजोर बल्लेबाजी टीम की निचली क्रम की गहराई को प्रभावित करती है। यदि भारत कुलदीप और शिवम दुबे दोनों को खिलाता है, तो टीम की बल्लेबाजी केवल नंबर-7 तक ही सीमित रह जाएगी। ऐसे में दूसरे विकल्प के रूप में वॉशिंगटन सुंदर का नाम सामने आ रहा है, जो आक्रामक ऑफ-स्पिन गेंदबाजी के साथ-साथ निचले क्रम में बल्लेबाजी को मजबूती प्रदान कर सकते हैं। कोच गौतम गंभीर के पिछले निर्णयों को देखते हुए ऐसा प्रतीत होता है कि वह बल्लेबाजी की गहराई को प्राथमिकता दे सकते हैं, जिससे सुंदर का पलड़ा थोड़ा भारी नजर आता है।

  • दीपिका और होने वाले दूसरे बच्चे के लिए काम से लेंगे ब्रेक रणवीर सिंह ने चुना परिवार पहले फिर प्रलय की शूटिंग

    दीपिका और होने वाले दूसरे बच्चे के लिए काम से लेंगे ब्रेक रणवीर सिंह ने चुना परिवार पहले फिर प्रलय की शूटिंग


    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह इन दिनों अपने करियर और निजी जिंदगी दोनों के बेहद खास दौर से गुजर रहे हैं। एक ओर उनकी फिल्मों को शानदार सफलता मिल रही है तो दूसरी ओर वह अपने परिवार के साथ नए सदस्य के स्वागत की तैयारियों में भी जुटे हैं। इसी बीच रणवीर सिंह को लेकर बड़ी खबर सामने आई है कि वह अपनी आगामी बिग बजट फिल्म प्रलय की शूटिंग के बीच पैटरनिटी लीव लेने वाले हैं ताकि पत्नी दीपिका पादुकोण और अपने परिवार के साथ इस खास समय को पूरी तरह जी सकें।

    रिपोर्ट्स के अनुसार रणवीर सिंह अगस्त 2026 से फिल्म प्रलय की शूटिंग शुरू करेंगे। फिल्म का शुरुआती शेड्यूल करीब दो महीने तक चलेगा। इसके बाद दीपिका पादुकोण की दूसरी डिलीवरी का समय करीब आने पर रणवीर अपने सभी पेशेवर कामों से कुछ समय के लिए दूरी बना लेंगे। बताया जा रहा है कि वह दिवाली के आसपास पैटरनिटी लीव पर जाएंगे और इस दौरान पत्नी दीपिका बेटी दुआ तथा परिवार के नए सदस्य के साथ पूरा समय बिताएंगे। फिल्म की बाकी शूटिंग उनकी वापसी के बाद वर्ष 2027 में फिर शुरू होगी।

    रणवीर सिंह हमेशा से अपने परिवार को प्राथमिकता देने के लिए जाने जाते हैं। बेटी दुआ के जन्म के बाद भी उन्होंने निजी जीवन को भरपूर समय दिया था। अब दूसरी बार पिता बनने की खुशी के बीच उन्होंने एक बार फिर परिवार को सबसे ऊपर रखने का फैसला किया है। उनके इस निर्णय की सोशल मीडिया पर भी काफी सराहना हो रही है जहां प्रशंसक इसे एक जिम्मेदार पिता की मिसाल बता रहे हैं।

    दूसरी ओर फिल्म प्रलय भी रणवीर सिंह के करियर की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में गिनी जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक करीब 300 करोड़ रुपये के भारी भरकम बजट में तैयार हो रही यह फिल्म अत्याधुनिक विजुअल इफेक्ट्स से लैस होगी। फिल्म की कहानी एक डिस्टोपियन जॉम्बी थ्रिलर पर आधारित बताई जा रही है जिसमें बड़े स्तर पर वीएफएक्स का इस्तेमाल किया जाएगा। इसकी शूटिंग भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों में की जाएगी जिससे यह अंतरराष्ट्रीय स्तर की भव्य फिल्म बनने की ओर बढ़ रही है।

    रणवीर सिंह के लिए पिछले कुछ वर्ष बेहद सफल रहे हैं। उनकी फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया है और उन्हें लगातार बड़े प्रोजेक्ट्स मिल रहे हैं। ऐसे समय में भी उन्होंने अपने परिवार के लिए काम से ब्रेक लेने का फैसला कर यह संदेश दिया है कि निजी जीवन और परिवार की खुशियां भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं जितनी पेशेवर सफलता।

    उधर दीपिका पादुकोण भी इन दिनों अपने दूसरे बच्चे के स्वागत की तैयारियों में व्यस्त हैं। अभिनेत्री फिलहाल फिल्मों से ब्रेक लेकर परिवार के साथ समय बिता रही हैं और बेटी दुआ की देखभाल पर पूरा ध्यान दे रही हैं। माना जा रहा है कि अक्टूबर या नवंबर 2026 में उनके घर नए मेहमान की किलकारी गूंज सकती है।

    ऐसे में आने वाले महीनों में रणवीर सिंह एक तरफ अपनी मेगा बजट फिल्म प्रलय को लेकर चर्चा में रहेंगे तो दूसरी ओर दूसरी बार पिता बनने की खुशी भी उनके जीवन का सबसे खास पल बनने वाली है।

  • पुलिस अधिकारियों को मिला बड़ा तोहफा मध्य प्रदेश में 301 निरीक्षकों का डीएसपी पद पर हुआ प्रमोशन

    पुलिस अधिकारियों को मिला बड़ा तोहफा मध्य प्रदेश में 301 निरीक्षकों का डीएसपी पद पर हुआ प्रमोशन


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश सरकार ने पुलिस विभाग में लंबे समय से पदोन्नति का इंतजार कर रहे अधिकारियों को बड़ी सौगात देते हुए बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। गृह विभाग ने राज्य पुलिस सेवा में कार्यरत 301 निरीक्षकों को पदोन्नत कर उप पुलिस अधीक्षक यानी डीएसपी के पद पर नियुक्त करने के आदेश जारी कर दिए हैं। 13 जुलाई 2026 को जारी इस आदेश के बाद पुलिस महकमे में खुशी का माहौल है और इसे विभाग के सबसे बड़े प्रमोशन आदेशों में से एक माना जा रहा है।

    गृह विभाग की ओर से मंत्रालय वल्लभ भवन भोपाल से जारी आदेश के अनुसार चयनित निरीक्षकों को छठे वेतनमान के ग्रेड पे 5400 से सातवें वेतनमान के लेवल 12 के अंतर्गत उप पुलिस अधीक्षक के पद पर पदोन्नत किया गया है। सरकार के इस फैसले से उन अधिकारियों को राहत मिली है जो कई वर्षों से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे थे। विभागीय वरिष्ठता और निर्धारित प्रक्रिया के तहत तैयार की गई सूची के आधार पर यह पदोन्नति दी गई है।

    पुलिस विभाग में निरीक्षक से उप पुलिस अधीक्षक बनना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जाता है। डीएसपी के रूप में अधिकारियों की जिम्मेदारियां पहले की तुलना में काफी बढ़ जाती हैं। कानून व्यवस्था बनाए रखने से लेकर अपराध नियंत्रण विशेष अभियानों की निगरानी और प्रशासनिक कार्यों का नेतृत्व करने जैसी अहम जिम्मेदारियां अब इन अधिकारियों के कंधों पर होंगी। इससे पुलिस प्रशासन की कार्यक्षमता और नेतृत्व क्षमता को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    सरकार के इस फैसले का असर केवल अधिकारियों के पदनाम तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि इसका सीधा लाभ पुलिस व्यवस्था को भी मिलेगा। बड़ी संख्या में नए डीएसपी मिलने से विभिन्न जिलों और इकाइयों में लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरने में मदद मिलेगी। इससे पुलिसिंग की गुणवत्ता बेहतर होने के साथ प्रशासनिक कार्यों में भी तेजी आने की संभावना है।

    पदोन्नति पाने वाले अधिकारियों के लिए यह फैसला उनके लंबे अनुभव और सेवा का सम्मान माना जा रहा है। वर्षों तक थाना स्तर पर कानून व्यवस्था संभालने वाले इन अधिकारियों को अब उच्च प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाने का अवसर मिलेगा। इससे विभाग के भीतर कार्य करने वाले अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों का मनोबल भी बढ़ेगा तथा उन्हें अपने करियर में आगे बढ़ने की नई प्रेरणा मिलेगी।

    मध्य प्रदेश सरकार लगातार प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए विभिन्न विभागों में पदोन्नति और नियुक्ति संबंधी फैसले ले रही है। हाल के महीनों में कई विभागों में अधिकारियों और कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ दिया गया है। पुलिस विभाग में 301 निरीक्षकों को एक साथ डीएसपी बनाना भी इसी दिशा में उठाया गया बड़ा कदम माना जा रहा है।

    अब पदोन्नति के बाद इन अधिकारियों की नई पदस्थापना की प्रक्रिया भी जल्द पूरी होने की संभावना है। नई जिम्मेदारियां संभालने के बाद उनसे बेहतर नेतृत्व प्रभावी कानून व्यवस्था और अपराध नियंत्रण में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने की उम्मीद की जा रही है। सरकार का मानना है कि अनुभवी अधिकारियों को नेतृत्व की भूमिका देने से राज्य की पुलिस व्यवस्था और अधिक सशक्त तथा प्रभावी बनेगी।

  • जेठालाल कहीं नहीं जा रहे तारक मेहता के मेकर्स ने अफवाहों पर लगाया विराम दिलीप जोशी रहेंगे शो का हिस्सा

    जेठालाल कहीं नहीं जा रहे तारक मेहता के मेकर्स ने अफवाहों पर लगाया विराम दिलीप जोशी रहेंगे शो का हिस्सा


    नई दिल्ली । फिल्मों की शूटिंग के दौरान कलाकारों की सुरक्षा के लिए बॉडीगार्ड रखना आम बात है लेकिन हॉलीवुड की एक चर्चित फिल्म के सेट पर ऐसा भी दौर आया जब एक अभिनेता की सुरक्षा नहीं बल्कि उससे बाकी कलाकारों और पूरी यूनिट को बचाने के लिए बॉडीगार्ड तैनात करने पड़े। यह दिलचस्प और हैरान करने वाला किस्सा साल 1987 में रिलीज हुई सुपरहिट साइंस फिक्शन एक्शन फिल्म प्रिडेटर की शूटिंग से जुड़ा है।

    इस फिल्म में हॉलीवुड स्टार अर्नोल्ड श्वार्ज़नेगर मुख्य भूमिका में थे। फिल्म की शूटिंग मैक्सिको के दूरदराज जंगलों में बेहद कठिन परिस्थितियों में की जा रही थी। भीषण गर्मी उमस और चुनौतीपूर्ण लोकेशन के बीच कलाकारों और तकनीकी टीम के लिए काम करना आसान नहीं था। लंबे समय तक कठिन माहौल में शूटिंग होने से पूरी यूनिट मानसिक और शारीरिक दबाव से गुजर रही थी।

    इसी दौरान फिल्म में बिली का किरदार निभाने वाले अभिनेता सॉनी लैंडहम का व्यवहार लगातार बदलने लगा। बताया जाता है कि वह सेट पर असहज महसूस करने लगे थे। फिल्म में कई लंबे और मजबूत कदकाठी वाले कलाकार मौजूद थे और इसी वजह से सॉनी लैंडहम खुद को असुरक्षित और हीन भावना से घिरा हुआ महसूस करने लगे। धीरे धीरे इसका असर उनके व्यवहार पर भी दिखाई देने लगा।

    रिपोर्टों के अनुसार सॉनी लैंडहम कई बार शूटिंग के दौरान सहयोग नहीं करते थे और गुस्से में साथी कलाकारों व क्रू के सदस्यों के साथ आक्रामक रवैया अपनाने लगते थे। स्थिति तब और गंभीर हो जाती थी जब वह जरूरत से ज्यादा शराब पी लेते थे। उनके गुस्से और अनियंत्रित व्यवहार से पूरी यूनिट में तनाव का माहौल बनने लगा था।

    हालात इतने बिगड़ गए कि फिल्म के निर्माताओं और प्रोडक्शन टीम को सुरक्षा के लिहाज से बड़ा फैसला लेना पड़ा। उन्होंने सॉनी लैंडहम के साथ हर समय एक विशेष बॉडीगार्ड तैनात कर दिया। यह बॉडीगार्ड उनकी सुरक्षा के लिए नहीं बल्कि इस बात का ध्यान रखने के लिए रखा गया था कि यदि अभिनेता का व्यवहार बेकाबू हो जाए तो वह तुरंत स्थिति संभाल सके और बाकी कलाकारों व क्रू को सुरक्षित रखे।

    बताया जाता है कि मेकर्स ने इसके लिए करीब 6 फुट 8 इंच लंबे और बेहद मजबूत व्यक्ति को चुना था। उसका काम चौबीसों घंटे सॉनी लैंडहम के साथ रहना और किसी भी अप्रिय स्थिति में हस्तक्षेप करना था। यह फैसला इसलिए लिया गया ताकि फिल्म की शूटिंग बिना किसी बड़े विवाद या हादसे के पूरी की जा सके।

    हालांकि तमाम मुश्किलों के बावजूद प्रिडेटर सफलतापूर्वक पूरी हुई और रिलीज के बाद जबरदस्त हिट साबित हुई। अर्नोल्ड श्वार्ज़नेगर की यह फिल्म आज भी हॉलीवुड की सबसे प्रतिष्ठित एक्शन फिल्मों में गिनी जाती है। दूसरी ओर सॉनी लैंडहम का यह किस्सा फिल्म इंडस्ट्री के उन दुर्लभ घटनाक्रमों में शामिल हो गया जिसमें किसी अभिनेता की वजह से पूरी यूनिट की सुरक्षा के लिए अलग से बॉडीगार्ड नियुक्त करने पड़े।

  • फिल्म के हीरो नहीं बने सबसे बड़ी चुनौती इस अभिनेता की हरकतों से परेशान होकर मेकर्स ने उठाया बड़ा कदम

    फिल्म के हीरो नहीं बने सबसे बड़ी चुनौती इस अभिनेता की हरकतों से परेशान होकर मेकर्स ने उठाया बड़ा कदम


    नई दिल्ली । फिल्मों की शूटिंग के दौरान कलाकारों की सुरक्षा के लिए बॉडीगार्ड रखना आम बात है लेकिन हॉलीवुड की एक चर्चित फिल्म के सेट पर ऐसा भी दौर आया जब एक अभिनेता की सुरक्षा नहीं बल्कि उससे बाकी कलाकारों और पूरी यूनिट को बचाने के लिए बॉडीगार्ड तैनात करने पड़े। यह दिलचस्प और हैरान करने वाला किस्सा साल 1987 में रिलीज हुई सुपरहिट साइंस फिक्शन एक्शन फिल्म प्रिडेटर की शूटिंग से जुड़ा है।

    इस फिल्म में हॉलीवुड स्टार अर्नोल्ड श्वार्ज़नेगर मुख्य भूमिका में थे। फिल्म की शूटिंग मैक्सिको के दूरदराज जंगलों में बेहद कठिन परिस्थितियों में की जा रही थी। भीषण गर्मी उमस और चुनौतीपूर्ण लोकेशन के बीच कलाकारों और तकनीकी टीम के लिए काम करना आसान नहीं था। लंबे समय तक कठिन माहौल में शूटिंग होने से पूरी यूनिट मानसिक और शारीरिक दबाव से गुजर रही थी।

    इसी दौरान फिल्म में बिली का किरदार निभाने वाले अभिनेता सॉनी लैंडहम का व्यवहार लगातार बदलने लगा। बताया जाता है कि वह सेट पर असहज महसूस करने लगे थे। फिल्म में कई लंबे और मजबूत कदकाठी वाले कलाकार मौजूद थे और इसी वजह से सॉनी लैंडहम खुद को असुरक्षित और हीन भावना से घिरा हुआ महसूस करने लगे। धीरे धीरे इसका असर उनके व्यवहार पर भी दिखाई देने लगा।

    रिपोर्टों के अनुसार सॉनी लैंडहम कई बार शूटिंग के दौरान सहयोग नहीं करते थे और गुस्से में साथी कलाकारों व क्रू के सदस्यों के साथ आक्रामक रवैया अपनाने लगते थे। स्थिति तब और गंभीर हो जाती थी जब वह जरूरत से ज्यादा शराब पी लेते थे। उनके गुस्से और अनियंत्रित व्यवहार से पूरी यूनिट में तनाव का माहौल बनने लगा था।

    हालात इतने बिगड़ गए कि फिल्म के निर्माताओं और प्रोडक्शन टीम को सुरक्षा के लिहाज से बड़ा फैसला लेना पड़ा। उन्होंने सॉनी लैंडहम के साथ हर समय एक विशेष बॉडीगार्ड तैनात कर दिया। यह बॉडीगार्ड उनकी सुरक्षा के लिए नहीं बल्कि इस बात का ध्यान रखने के लिए रखा गया था कि यदि अभिनेता का व्यवहार बेकाबू हो जाए तो वह तुरंत स्थिति संभाल सके और बाकी कलाकारों व क्रू को सुरक्षित रखे।

    बताया जाता है कि मेकर्स ने इसके लिए करीब 6 फुट 8 इंच लंबे और बेहद मजबूत व्यक्ति को चुना था। उसका काम चौबीसों घंटे सॉनी लैंडहम के साथ रहना और किसी भी अप्रिय स्थिति में हस्तक्षेप करना था। यह फैसला इसलिए लिया गया ताकि फिल्म की शूटिंग बिना किसी बड़े विवाद या हादसे के पूरी की जा सके।

    हालांकि तमाम मुश्किलों के बावजूद प्रिडेटर सफलतापूर्वक पूरी हुई और रिलीज के बाद जबरदस्त हिट साबित हुई। अर्नोल्ड श्वार्ज़नेगर की यह फिल्म आज भी हॉलीवुड की सबसे प्रतिष्ठित एक्शन फिल्मों में गिनी जाती है। दूसरी ओर सॉनी लैंडहम का यह किस्सा फिल्म इंडस्ट्री के उन दुर्लभ घटनाक्रमों में शामिल हो गया जिसमें किसी अभिनेता की वजह से पूरी यूनिट की सुरक्षा के लिए अलग से बॉडीगार्ड नियुक्त करने पड़े।