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  • नेपाल के बाढ़ पीड़ितों के लिए आगे आए सोनू सूद बोले अगर अभी मदद नहीं करेंगे तो कब करेंगे कंपनियों से भी की बड़ी अपील

    नेपाल के बाढ़ पीड़ितों के लिए आगे आए सोनू सूद बोले अगर अभी मदद नहीं करेंगे तो कब करेंगे कंपनियों से भी की बड़ी अपील


    नई दिल्ली। नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने बड़ी तबाही मचाई है और इस मुश्किल समय में बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद एक बार फिर जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए आगे आए हैं। सोनू सूद अपनी चैरिटी फाउंडेशन की टीम के साथ नेपाल पहुंचे हैं। उनके साथ बड़ी मात्रा में राहत सामग्री भी पहुंची है। इसमें कंबल और खाने पीने का सामान शामिल है। अभिनेता का कहना है कि सिर्फ तत्काल राहत पहुंचाना ही काफी नहीं है बल्कि आने वाले महीनों तक प्रभावित परिवारों की मदद जारी रखने की जरूरत है ताकि वे दोबारा अपनी सामान्य जिंदगी की ओर लौट सकें।

    नेपाल पहुंचने के बाद सोनू सूद ने राहत अभियान को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि उनकी टीम बाढ़ प्रभावित इलाकों में जाकर लोगों से मुलाकात कर रही है और उनकी जरूरतों को समझने की कोशिश कर रही है। कई परिवार ऐसे हैं जिन्होंने इस आपदा में अपना जरूरी सामान और रोजमर्रा की सुविधाएं खो दी हैं। ऐसे लोगों तक जरूरी सामग्री पहुंचाना इस समय सबसे बड़ी प्राथमिकता है। सोनू ने कहा कि उनकी टीम कंबल और भोजन जैसी जरूरी चीजें लेकर पहुंची है और आगे भी आवश्यकता के अनुसार सामान उपलब्ध कराया जाएगा।

    अभिनेता ने यह भी बताया कि राहत सामग्री लेकर नेपाल पहुंचना आसान नहीं है। इसके लिए काफी कागजी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। हालांकि इन मुश्किलों के बावजूद उनकी टीम लगातार काम कर रही है। सोनू का कहना है कि प्रभावित लोगों की जिंदगी को दोबारा पटरी पर लाने में समय लगेगा। इसलिए राहत अभियान को कुछ दिनों तक सीमित रखने के बजाय लंबे समय तक जारी रखने की जरूरत है।

    सोनू सूद ने इस दौरान भारत सरकार की ओर से नेपाल को दी जा रही सहायता की भी सराहना की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों की तारीफ करते हुए कहा कि भारत सरकार ने संकट की इस घड़ी में नेपाल के लिए अच्छा काम किया है। उनके मुताबिक नेपाल को दी जा रही मदद के लिए प्रधानमंत्री की भूमिका महत्वपूर्ण है और यह सहायता आगे भी जारी रहनी चाहिए। सोनू ने कहा कि जब वह प्रभावित परिवारों से सीधे मिलते हैं तो उन्हें महसूस होता है कि समस्या कुछ हफ्तों या कुछ महीनों में खत्म होने वाली नहीं है।

    सोनू सूद ने लोगों से भी अपनी क्षमता के अनुसार मदद करने की अपील की। उन्होंने कहा कि मुश्किल समय में जरूरतमंदों के साथ खड़ा होना हर व्यक्ति का फर्ज है। अभिनेता खुद प्रभावित लोगों से बातचीत कर यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि उन्हें किन चीजों की सबसे ज्यादा जरूरत है ताकि उसी हिसाब से आगे राहत सामग्री पहुंचाई जा सके।

    उन्होंने बड़ी कंपनियों से भी नेपाल के राहत अभियान में शामिल होने की अपील की। सोनू का कहना है कि कंपनियों को अपने CSR प्रयासों के जरिए प्रभावित इलाकों तक पहुंचना चाहिए। उनका मानना है कि सरकार और सामाजिक संस्थाओं के साथ कॉरपोरेट जगत भी आगे आए तो राहत और पुनर्वास का काम तेजी से किया जा सकता है।

    नेपाल में हुई इस आपदा के बाद बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है। कई लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं और प्रभावित इलाकों में सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। ऐसे समय में सोनू सूद का राहत अभियान जरूरतमंद परिवारों के लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आया है। अभिनेता इससे पहले भी आपदा और संकट के समय लोगों की मदद के लिए आगे आते रहे हैं। इस बार भी उनका फोकस सिर्फ राहत सामग्री बांटने पर नहीं बल्कि प्रभावित परिवारों को लंबे समय तक संभालने पर है।

  • गत वर्ष सरकारी दफ्तरों में भ्रष्टाचार की 70 हजार शिकायतें… बैंक-रेलवे सबसे आगे: CVC

    गत वर्ष सरकारी दफ्तरों में भ्रष्टाचार की 70 हजार शिकायतें… बैंक-रेलवे सबसे आगे: CVC


    नई दिल्ली।
    केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) (Central Vigilance Commission – CVC) की वार्षिक रिपोर्ट 2025 (Report 2025) के अनुसार, पिछले साल सरकारी विभागों के खिलाफ कुल 70,584 भ्रष्टाचार की शिकायतें मिलीं। शिकायतों के मामले में बैंक और रेलवे (Banks and Railways) शीर्ष पर रहे। मुख्य सतर्कता अधिकारियों (सीवीओ) ने इनमें से 64,905 शिकायतों का निपटारा 31 दिसंबर 2025 तक कर दिया था।

    रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के अंत तक 5,679 शिकायतें प्रक्रिया में थीं। इनमें से 2,002 मामले तीन महीने से अधिक समय से लंबित थे। नियमों के तहत, सीवीओ को तीन महीने के अंदर जांच पूरी करनी होती है। आयोग इनकी त्वरित निपटारे के लिए नियमित समीक्षा करता है। सर्वाधिक 9,933 शिकायतें बैंकों से मिलीं, जिनमें 9,520 निस्तारित कर दी गईं। वहीं रेलवे से जुड़ी 9,381 शिकायतें दर्ज हुईं, 8,754 को निस्तारित किया गया है।

    आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय की 6,531 शिकायतें हैं। स्थानीय निकाय (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की सरकार यानी जीएनसीटीडी को छोड़कर) में 4,834 शिकायतें दर्ज की गई हैं। इसमें दिल्ली जल बोर्ड, एमसीडी, एनडीएमसी और डीएसआईआईडीसी शामिल हैं।

    इन विभागों में शिकायतें
    मानव संसाधन विकास में 2,030, श्रम मंत्रालय में 1,894 बीमा कंपनियां की 1,536 दूरसंचार की 1,469, रक्षा मंत्रालय में 1,410, उपभोक्ता मामले में 1,123, इस्पात मंत्रालय में 1,023 और डाक विभाग में 1,003 शिकायतें दर्ज की गईं हैं।

  • देश के कई हिस्सों में भारी बारिश से जनजीवन बेहाल…. अगले 4 दिन तक इन राज्यों में अलर्ट

    देश के कई हिस्सों में भारी बारिश से जनजीवन बेहाल…. अगले 4 दिन तक इन राज्यों में अलर्ट


    नई दिल्ली।
    मध्य भारत (Central India) के ऊपर बने निम्न दबाव के क्षेत्र और उत्तर भारत (North India) में पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के सक्रिय होने से पहाड़ से लेकर मैदान तक मूसलाधार बारिश (Torrential rain) का दौर शुरू हो गया है। नदियों में उफान से ज्यादातर इलाके बाढ़ की चपेट में हैं, भूस्खलन (Landslide) होने से 200 से अधिक सड़कें बंद हैं और कई इलाकों से संपर्क कट गया है। मौसम विभाग ने अगले चार दिनों तक भारी बारिश की संभावना जताई है और 12 से अधिक राज्यों के लिए अलर्ट जारी किया है।

    उत्तराखंड में भारी बारिश के चलते आदि कैलाश और चीन सीमा को जोड़ने वाली तवाघाट-गुंजी सड़क दो दिन से बंद है इससे व्यास घाटी का संपर्क कटा है। दारमा और चौदास घाटी को जोड़ने वाली धारचूला-तवाघाट बॉर्डर रोड पर भी आठ घंटे यातायात ठप रहा। राज्य में भूस्खलन के चलते 150 से ज्यादा सड़कों पर यातायात बाधित रहा, जिसके चलते लोगों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। बुधवार को मूसलाधार बारिश से चार धाम यात्रा मार्ग पर भी दिन भर यातायात बाधित होता रहा। कई लिंक मार्गों के बंद होने से कई गांवों अलग-थलग पड़ गए हैं।


    अनंतनाग : गाड़ी पर गिरा पत्थर, एक पर्यटक की मौत

    जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में भारी बारिश से सहार खड्ड में बाढ़ आ गई और आसपास के दर्जनों गांवों का जिला मुख्यालय से सीधा संपर्क कट गया। कठुआ में 101.8 मिमी बारिश दर्ज की गई। अनंतनाग जिले में पहाड़ी से गिरे पत्थर की चपेट में एक इनोवा गाड़ी के आने से ओडिशा के एक पर्यटक की मौत हो गई।


    हरियाणा में भारी बारिश

    पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से हरियाणा के अंबाला, रोहतक, फरीदाबाद, पलवल, कुरुक्षेत्र, कैथल व जींद के कुछ एरिया में बारिश हुई। वहीं, यमुनानगर में हथिनीकुंड बैराज के पास लापता हुए नाहन की पैराट्रूप यूनिट के दो कमांडो में से एक कमांडों का शव देर शाम बरामद कर लिया है। दूसरे का अभी तक सुराग नहीं लगा। सर्च टीम दो हेलिकॉप्टरों की मदद से लगातार तलाश में जुटी है। 


    बिहार में नदियां उफनाई

    बिहार और नेपाल में लगातार हो रही तेज बारिश के कारण राज्य की प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। प्रशासन ने पूरे राज्य में अलर्ट जारी किया है। रोहतास जिले के इंद्रपुरी में सोन बैराज के सभी 69 फाटक खोल दिए गए हैं, जिससे भारी मात्रा में पानी छोड़ा जा रहा है।

  • कोरोना के बाद इबोला ले रहा महामारी का रूप…. कांगो में 3 हजार से ज्यादा लोगों की मौत

    कोरोना के बाद इबोला ले रहा महामारी का रूप…. कांगो में 3 हजार से ज्यादा लोगों की मौत


    ब्राजाविले।
    अफ्रीका महाद्वीप (Africa Continent) के कुछ देशों में दावा किया जा रहा है कि कोरोना (Corona) के बाद इबोला महामारी (Ebola Epidemic) का रुप अख्तियार करके लोगों को असमय काल के गाल में खींच रही है. कुछ घंटे पहले जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, खासकर डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (Democratic Republic of Congo) में इबोला के प्रकोप से मरने वालों की संख्या 3,000 से ज्यादा हो गई है. हजारों मौतों के बाद डब्ल्यूएचओ से लेकर कई देशों की सरकारें तक स्तब्ध हैं. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, कांगो में मृतकों का आंकड़ा बढ़कर 3,007 पहुंच चुका है, जबकि इबोला से संक्रमित मरीजों की तादाद अब 6,186 है।

    रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इस साल देश की अब तक की सबसे भयानक महामारी उत्तर-पूर्व में तेजी से फैलती जा रही है. इसने लाखों लोगों को अपनी चपेट में लिया है. इस बीमारी से मरने वालों का आंकड़ा लोगों को डरा रहा है।


    शहर दर शहर इबोला का ‘कहर’

    गुरुवार के बुलेटिन में पीड़ितों और मृतकों का आंकड़ा और बढ़ सकता है. आपको बताते चलें कि इस बीमारी के फैलने की आधिकारिक घोषणा 15 मई को इतुरी प्रांत में हुई थी, हालांकि कुछ स्वास्थ्य अधिकारियों और विशेषज्ञों का कहना है कि इसका प्रकोप शायद जनवरी, 2026 में ही शुरू हो गया था.

    कांगो के अधिकारियों, विश्व स्वास्थ्य संगठन और सहायता समूहों की इसे रोकने की कोशिशों के बावजूद, यह बीमारी छह प्रांतों में फैल चुकी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लचर निगरानी सिस्टम, असुरक्षा और समुदायों के आपसी विरोध के कारण मरीजों की जल्दी पहचान करने और उनके इलाज की कोशिशों में रुकावट आई है।

    विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि लगभग 60% मौतें अस्पतालों के बाहर होती हैं, जिससे मरीजों की मौत होने से पहले इबोला पीड़ित मामलों का पता लगाने में आने वाली चुनौतियों का पता चलता है. साल 2026 में इबोला का प्रकोप, 2018-2020 की महामारी को पीछे छोड़ते हुए कांगो के इतिहास का सबसे बड़ा और सबसे घातक रूप लेता जा रहा है. कांगो के लोगों का मानना है कि इस बार इबोला का प्रकोप साल 2014-2016 में पश्चिम अफ्रीका में फैले प्रकोप से घातक हो सकता है. एक दशक पहले गिनी, लाइबेरिया और सिएरा लियोन में 28,600 से ज्यादा लोग इबोला से संक्रमित हुए थे तब 11,000 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी।


    कब-कब दहशत में आई दुनिया?

    WHO और देश की सरकारें किसी बीमारी को महामारी घोषित करती हैं. बीती कुछ सदियों की बड़ी महामारियों की बात करें तो अमेरिका सरकार की नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के मुताबिक कोविड नाम की महामारी से पहले 1918-1919 की इन्फ्लुएंजा महामारी को मानव इतिहास की सबसे घातक बीमारी और महामारी माना गया था।

    108 साल पहले इन्फ्लुएंजा वायरस ने एक ही समय में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में दिखा और उसने अप्रत्याशित रूप से लोगों की जान ली थी. उस समय 5 से 10 करोड़ लोगों की मौत हुई थी. उस महामारी में बीमारी के लक्षण और उसके फैलने का तरीका भी कई मायनों में अप्रत्याशित था. इसी तरह 1957-58 का एशियाई फ्लू, 1968-69 का हांगकांग फ्लू और 2009-10 में स्वाइन फ्लू नाम की बीमारी ने दुनिया को डराया था।

    कोरोनावायरस महामारी के कारण दुनिया भर में आधिकारिक तौर पर 71 लाख लोगों की मौत की पुष्टि हुई थी. WHO और अन्य स्वतंत्र डेटा एजेंसियों के मुताबिक महामारी के दौरान हुई अप्रत्यक्ष या अतिरिक्त मौतों को भी शामिल करें तो असल आंकड़ा 1.8 करोड़ से 3 करोड़ के बीच होने का अनुमान है। सालों पहले न तो मेडिकल साइंस आज की जैसी समृद्ध थी और न ही जीवन रक्षक दवाएं और मेडिकल उपकरण थे, तब इतनी मौतें होना समझ में आता है, लेकिन आज इतनी दवाओं और टीके होने के बावजूद तमाम वायरस से लोगों का डरना समझ से परे है।

  • सरकार की सख्ती के बाद नरम पड़े शक्कर के थोक भाव….फिर भी फुटकर रेट नहीं हुए कम

    सरकार की सख्ती के बाद नरम पड़े शक्कर के थोक भाव….फिर भी फुटकर रेट नहीं हुए कम


    नई दिल्ली।
    चीनी (Sugar) के थोक भाव (Wholesale Prices) सरकार की सख्ती के बाद काफी नरम हुए, लेकिन रिटेल प्राइस (Retail Prices) में अभी बहुत अधिक नरमी देखने को नही मिल रही है। दिल्ली से गुवाहाटी तक जहां मंडी में चीनी सस्ती हुई है, वहीं खुदरा बाजार (Retail Market) में पिछले दो दिन से भाव स्थिर हैं। चीनीमंडी के मुताबिक मुंबई में 22 अगस्त को 1 क्विंटल चीनी का भाव 6750 रुपये था और अब ये 5200 रुपये पर आ गए हैं। दिल्ली में ऑल टाइम हाई (All-time High) 6600 से 2 सितंबर को चीनी के दाम 5700 रुपये क्विंटल ही रह गए।

    इसी तरह कानपुर में थोक चीनी के लेटेस्ट भाव 5650 रुपये, रायपुर, रांची और कोलकाता में 5400 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गया है। गुवाहटी में 5450 रुपये है तो हैदराबाद में 5300 और चेन्नई में 5900 रुपये क्विंटल। इन रेट्स में जीएसटी जुड़ा हुआ है।


    रिटेल प्राइस में बदलाव नहीं

    दो सितंबर को मुंबई, गुवाहटी में चीनी का रिटेल भाव 62 रुपये प्रति किलो था। रांची, दिल्ली, कानुपर, रायपुर, मुंबई, कोलकाता और हैदराबाद में 1 किलो चीनी का भाव 61 रुपये पर टिका था। जबकि, चेन्नई में यह 63 रुपये किलो थी। इन शहरों में एक सितंबर को भी खुदरा बाजार में चीनी के रेट यही थे।


    कितनी सस्ती हो चुकी है चीनी

    सरकार की सख्ती और उपायों के चलते दिल्ली में 12 दिन में चीनी 7 रुपये सस्ती हुई है। कानपुर में चीन के भाव इस अवधि में 9 रुपये, रायपुर में 8 रुपये, मुंबई में 6 रुपये गिरे हैं। रांची में चीनी 70 रुपये से 61 रुपये पर आ गई है। गुवाहटी में 71 से 62 और कोलकाता में 70 से 61 रुपये पर आ गई है चीनी। हैदराबाद और चेन्नई में भी चीनी 22 अगस्त को 70 रुपये पर पहुंच गई थी।


    सरकार ने क्या-क्या उठाए हैं कदम

    कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने बड़े उपभोक्ताओं और डीलरों के लिए स्टॉक रखने की सीमा तय की। सरकार ने चीनी की जमाखोरी और स्टॉक छिपाने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी तेज कर दी है।

    सरकार ने 21 अगस्त को 10 लाख मीट्रिक टन चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति दी थी। निर्यातक देशों से करीब 70-80 हजार टन चीनी वाली 3-4 खेपें पहले ही रवाना हो चुकी हैं। इसके अलावा भारतीय बंदरगाहों पर ही करीब 3-4 लाख टन चीनी रिफाइन होकर बाजार के लिए उपलब्ध होने की उम्मीद है।

    खासकर त्योहारी सीजन को देखते हुए सरकार की कोशिश बाजार में पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रण में रखने की है। अगर ये सभी कदम उम्मीद के मुताबिक काम करते हैं, तो आने वाले हफ्तों में चीनी के भाव में और नरमी देखने को मिल सकती है।

  • दुनिया में बढ़ी भारत की साख…. 35 साल बाद जापान ने रेटिंग को एक पायदान बढ़ाकर A किया

    दुनिया में बढ़ी भारत की साख…. 35 साल बाद जापान ने रेटिंग को एक पायदान बढ़ाकर A किया


    नई दिल्ली।
    जापान (Japan) की साख निर्धारण एजेंसी जेसीआर (Credit rating agency JCR) ने बुधवार को स्थिर परिदृश्य के साथ भारत (India) की रेटिंग एक पायदान बढ़ाकर ‘ए-’ कर दी। एजेंसी ने रेटिंग बढ़ाने के पीछे भारत की ‘मजबूत’ आर्थिक वृद्धि (‘Robust’ Economic Growth) और वित्तीय स्थिति में सुधार को प्रमुख कारण बताया।

    जेसीआर ने कहा कि 140 करोड़ से अधिक की आबादी और मौजूदा मूल्य पर 3.9 लाख करोड़ डॉलर की जीडीपी वाली भारतीय अर्थव्यवस्था के चालू वित्त वर्ष में छह प्रतिशत से अधिक की उच्च वृद्धि दर बनाए रखने की उम्मीद है। निजी खपत और निवेश के मजबूत समर्थन से भारतीय अर्थव्यवस्था हाल के वर्षों में ऊंची वृद्धि दर बनाए हुए है।

    15वें वित्त आयोग के चेयरमैन एनके सिंह ने कहा 35 से ज्यादा वर्षों बाद भारत को फिर ‘ए’ रेटिंग मिली है। यह भारत की तेज आर्थिक वृद्धि, संरचनात्मक सुधारों और केंद्र-राज्य साझेदारी की मजबूती की मान्यता है। इससे पहले भारत को ‘ए’ श्रेणी की रेटिंग मूडीज ने 1988 में ए2 दी थी। हालांकि, 1990-91 के भुगतान संतुलन संकट के दौरान यह रेटिंग चली गई थी।


    क्या मिलेगा फायदा

    आम आदमी को सीधे नहीं, बल्कि धीरे-धीरे अर्थव्यवस्था के जरिए फायदा मिल सकता है। बेहतर रेटिंग से कंपनियों के लिए विदेशों से कर्ज सस्ता होगा। इससे भविष्य में होम लोन, कार लोन और कारोबार के कर्ज की ब्याज दरों पर सकारात्मक असर पड़ने की संभावना है। विदेशी निवेश भी आकर्षित होगा। इससे कारखाने, नए कारोबार बढ़ने पर रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।


    बेल्जियम से बढ़ेगा व्यापार

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को भारत की यात्रा पर आए बेल्जियम के प्रधानमंत्री बर्ट दे वेवर के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इस दौरान व्यापार और निवेश बढ़ाने पर विशेष जोर रहेगा। ऊर्जा, रक्षा, जलवायु परिवर्तन, प्रौद्योगिकी आदि के क्षेत्रों में भी कई समझौते की उम्मीद है। यूरोपीय संघ के देश के रूप में बेल्जियम भारत में निवेश और व्यापार के लिए महत्वपूर्ण है।

    बेल्जियम के प्रधानमंत्री की भारत यात्रा दो दशक के अंतराल के बाद हो रही है। इससे दोनों देशों के बीच संबंधों के एक नए युग की शुरूआत होने की उम्मीद है। बेल्जियम उन यूरोपीय देशों में शामिल है, जिसने भारत के आजाद होने के तुरंत बाद राजनयिक संबंध स्थापित किए थे। प्रधानमंत्री मोदी ने 2016 में बेल्जियम की यात्रा की थी।

    बेल्जियम के प्रधानमंत्री के साथ वहां के रक्षा और विदेश व्यापार मंत्री भी भारत आए हैं। संभावना है कि रक्षा उद्योगों के बीच सह उत्पादन को लेकर कुछ समझौते हो सकते हैं। वहीं, बीते वर्ष विभिन्न क्षेत्रों में 40 से अधिक समझौते हुए थे।


    18 अरब डॉलर का व्यापार

    भारत और बेल्जियम के बीच मौजूदा व्यापार 13 अरब डॉलर सालाना है। हाल में यूरोपीय संघ के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौते के बाद इसमें बढ़ोतरी की उम्मीद है। इतना ही नहीं भारत में विदेशी निवेश का भी बेल्जियम एक महत्वपूर्ण स्रोत है। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार 2000-2025 के दौरान बेल्जियम से 4.2 अरब डॉलर का निवेश भारत में आया। अब इसमें बढ़ोतरी की संभावना है।

  • सेब की तुलना सेब से करना नहीं जानते और देश की जनता को कर रहे गुमराह : पीयूष गोयल

    सेब की तुलना सेब से करना नहीं जानते और देश की जनता को कर रहे गुमराह : पीयूष गोयल


    नई दिल्ली।
    केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) ने बुधवार को 7.8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि (7.8 Percent GDP Growth) पर टिप्पणी को लेकर विपक्षी दलों और पूर्व वित्त सचिव सुभाष गर्ग (Subhash Garg) की तीखी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि आलोचक ‘सेब की तुलना सेब से करना’ भी नहीं जानते और देश की जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं।

    गौरतलब है कि संशोधित जीडीपी श्रृंखला के तहत, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में देश की आर्थिक वृद्धि दर वास्तविक आधार पर 7.8 प्रतिशत रही। गोयल ने कहा कि वैश्विक स्तर पर जारी उथल-पुथल के बीच भारत ‘रेगिस्तान में नखलिस्तान’ की तरह है और देश दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज गति से बढ़ता रहा है।

    क्या बोले गोयल?
    पीयूष गोयल ने कहा, “नकारात्मक बातें करने वाले लोग कुछ भी कहें, लेकिन 7.8 प्रतिशत की वृद्धि वास्तविकता है। जब मैं टेलीविजन पर कुछ विपक्षी नेताओं को देखता हूं,… किसी पूर्व वित्त सचिव या पूर्व रिजर्व बैंक गवर्नर को भी शामिल कर लें, जो दोनों ही उचित कारणों से भारत या सरकार में अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके।” गोयल ने कहा, वे सेब की तुलना सेब से करना भी नहीं जानते। वे पुरानी श्रृंखला की वृद्धि दर की तुलना नई श्रृंखला से करके भारत की जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि नई श्रृंखला में आधार वर्ष ही बदल गया है।

    उन्होंने आगे कहा कि आलोचक वृद्धि के आंकड़ों में कमियां निकालने की कोशिश कर रहे हैं और सवाल उठा रहे हैं कि ठीक है, 7.8 प्रतिशत की वृद्धि है, लेकिन रोजगार कहां हैं? हालांकि उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि कपड़ा क्षेत्र में श्रमिकों की मांग मजबूत है। उन्होंने तिरुपुर के उद्योग से अधिक श्रमिकों की मांग का उल्लेख करते हुए कहा, “तिरुपुर में एक लाख लोग भेज दीजिए, हम उन्हें काम देंगे।”


    जानिए कुछ अहम सवालों के जवाब-

    – सरकार ने जीडीपी आंकड़े का बचाव क्यों किया?
    2.6% वृद्धि का दावा पुरानी और नई जीडीपी श्रृंखला के आंकड़ों को मिलाकर किया गया है, जो सही तुलना नहीं है।

    – पुरानी-नई श्रृंखला में क्या अंतर?
    पुरानी जीडीपी श्रृंखला में 2011-12 को आधार वर्ष बनाया गया था, जबकि फरवरी 2026 से नई श्रृंखला में 2022-23 को आधार वर्ष बनाया गया है।

    – पिछले साल की जीडीपी का आंकड़ा क्यों बदला गया?
    सरकार के अनुसार आंकड़ों में बदलाव सामान्य संशोधन प्रक्रिया का हिस्सा है। नई आधार श्रृंखला, बेहतर आंकड़ा स्रोत, नई आईआईपी और पीपीआई श्रृंखला और अतिरिक्त जानकारी मिलने के बाद आंकड़ों को संशोधित किया गया।

    – फिर 7.8 प्रतिशत वास्तविक वृद्धि कैसे निकली?
    आर्थिक वृद्धि की तुलना स्थिर कीमतों पर की जाती है। इससे कीमतों में बदलाव का असर हट जाता है और वास्तविक उत्पादन वृद्धि का पता चलता है। अप्रैल-जून तिमाही में इस्पात, सीमेंट और वाहनों समेत कई क्षेत्रों के उत्पादन में मजबूत वृद्धि हुई।

    – विनिर्माण क्षेत्र में नकारात्मक डिफ्लेटर क्यों आया?
    विनिर्माण क्षेत्र का वास्तविक जीवीए 9.2% बढ़ा, जबकि मौजूदा कीमतों पर वृद्धि 7.7% रही। डबल-डिफ्लेशन पद्धति में उत्पादन और कच्चे माल की कीमतों को अलग-अलग समायोजित किया जाता है। कच्चे माल की कीमतें ज्यादा तेजी से बढ़ती हैं तो नकारात्मक डिफ्लेटर आ सकता है।

    – जीडीपी डिफ्लेटर और महंगाई दर अलग क्यों है?
    जीडीपी डिफ्लेटर वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में बदलाव को दर्शाता है। खुदरा महंगाई घरेलू खपत की वस्तुओं और सेवाओं के एक निर्धारित समूह को मापता है, जबकि थोक महंगाई मुख्य रूप से वस्तुओं की थोक कीमतों पर आधारित है।


    सरकार ने 2.6 प्रतिशत वृद्धि के दावे को नकारा

    सरकार ने आर्थिक वृद्धि दर 2.6 प्रतिशत रहने के दावे को खारिज करते हुए कहा कि वृद्धि दर का आंकड़ा अर्थव्यवस्था के ठोस उत्पादन आंकड़ों पर आधारित है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के सचिव सौरभ गर्ग ने यह स्पष्टीकरण पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग की टिप्पणी के बाद दिया है। पूर्व वित्त सचिव का दावा है कि अगर पिछले साल की जून तिमाही की जीडीपी को करीब 86 लाख करोड़ रुपये से घटाकर 80 लाख करोड़ रुपये नहीं किया जाता तो वृद्धि करीब 2.6 प्रतिशत ही रहती।


    नई श्रृंखला ज्यादा मजबूत और विश्वसनीय

    15वें वित्त आयोग के चेयरमैन एन. के. सिंह ने इस मुद्दे पर कहा कि नई जीडीपी श्रृंखला ज्यादा विश्वसनीय है। यह वैश्विक मानकों के अनुरूप है और इसमें उत्पादक मूल्य सूचकांक की नई श्रृंखला का इस्तेमाल किया गया है। जीडीपी अनुमान तैयार करने में 300 से अधिक अलग-अलग मूल्य डिफ्लेटर का इस्तेमाल किया जाता है। अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों और उत्पादों की कीमतों में बदलाव को ज्यादा बारीकी से शामिल किया जा सकता है और सटीकता बढ़ती है।

  • भोपाल वालों के लिए मौसम का बड़ा अपडेट! 3 सितंबर को मध्यम बारिश के साथ गरज चमक के आसार

    भोपाल वालों के लिए मौसम का बड़ा अपडेट! 3 सितंबर को मध्यम बारिश के साथ गरज चमक के आसार


    भोपाल । भोपाल में सितंबर की शुरुआत के साथ मौसम का मिजाज लगातार बदला हुआ नजर आ रहा है। बारिश और बादलों का दौर शहर में अभी पूरी तरह थमता दिखाई नहीं दे रहा है। मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक 3 सितंबर को राजधानी भोपाल में आसमान सामान्य तौर पर बादलों से घिरा रहेगा और मध्यम बारिश होने की संभावना है। दिन का अधिकतम तापमान करीब 27 डिग्री सेल्सियस जबकि न्यूनतम तापमान करीब 23 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। ऐसे में शहरवासियों को गर्मी से राहत मिलने के साथ दिनभर मौसम ठंडा और नम बना रह सकता है।

    मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 3 सितंबर को भोपाल में बारिश के साथ गरज चमक भी देखने को मिल सकती है। इसका असर शहर के अलग अलग इलाकों में अलग तरीके से दिखाई दे सकता है। कहीं हल्की बारिश हो सकती है तो कुछ स्थानों पर मध्यम बारिश के दौर देखने को मिल सकते हैं। सुबह से ही आसमान में बादल छाए रहने की संभावना है और दिन बढ़ने के साथ बारिश की गतिविधियां तेज हो सकती हैं। ऐसे में खुले आसमान के नीचे काम करने वाले लोगों और दोपहिया वाहन चालकों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होगी।

    3 सितंबर को तापमान में भी बहुत ज्यादा बढ़ोतरी की संभावना नहीं है। न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने से सुबह और रात के समय मौसम अपेक्षाकृत ठंडा महसूस हो सकता है। वहीं अधिकतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने से दोपहर में भी तेज गर्मी का असर कम रहने की उम्मीद है। लगातार बादल और बारिश के कारण वातावरण में नमी बनी रह सकती है जिससे उमस का अनुभव कुछ समय के लिए बढ़ सकता है।

    बारिश के दौरान शहर की सड़कों पर जलभराव की स्थिति भी कुछ इलाकों में परेशानी बढ़ा सकती है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत होगी। बारिश के समय विजिबिलिटी कम होने के कारण वाहन चालकों को गति नियंत्रित रखने और सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दी जाती है। बिजली चमकने के दौरान खुले मैदान या पेड़ के नीचे खड़े होने से भी बचना चाहिए।

    मौसम का यह बदलाव शहर के लिए कई मायनों में राहत देने वाला भी है। बारिश से तापमान नियंत्रित रहने के साथ वातावरण में गर्मी का असर कम हो सकता है। हालांकि लगातार बारिश के कारण कुछ स्थानों पर सड़क यातायात प्रभावित होने और जलभराव जैसी स्थानीय समस्याएं सामने आ सकती हैं। मौसम विभाग के अनुसार 4 सितंबर को भी भोपाल में बादल और मध्यम बारिश की संभावना बनी हुई है। इसके बाद मौसम में कुछ बदलाव देखने को मिल सकता है।

    कुल मिलाकर 3 सितंबर को भोपाल में मौसम बारिश वाला रहने के आसार हैं। आसमान में बादल छाए रहेंगे और मध्यम बारिश के साथ गरज चमक देखने को मिल सकती है। तापमान सामान्य से नीचे रहने के कारण राजधानी में मौसम अपेक्षाकृत ठंडा बना रह सकता है। ऐसे में बाहर निकलने वाले लोग छाता या रेनकोट साथ रखें और मौसम की ताजा जानकारी पर नजर बनाए रखें।

  • करीना कपूर की वजह से अमिताभ बच्चन के रिश्तेदार बने सैफ अली खान, KBC में बिग बी के सवाल पर कन्फ्यूज हुए एक्टर

    करीना कपूर की वजह से अमिताभ बच्चन के रिश्तेदार बने सैफ अली खान, KBC में बिग बी के सवाल पर कन्फ्यूज हुए एक्टर


    नई दिल्ली। अमिताभ बच्चन इन दिनों कौन बनेगा करोड़पति के नए सीजन को लेकर चर्चा में हैं। शो में हर बार की तरह इस बार भी मनोरंजन के साथ सितारों की निजी जिंदगी से जुड़े दिलचस्प किस्से सामने आ रहे हैं। इसी कड़ी में शो के एक प्रोमो ने दर्शकों का ध्यान खींचा है जिसमें अक्षय कुमार और सैफ अली खान हॉटसीट पर बैठे नजर आ रहे हैं। दोनों अपनी आने वाली फिल्म हैवान के प्रमोशन के लिए शो में पहुंचे थे। बातचीत के दौरान अमिताभ बच्चन ने सैफ के साथ अपने रिश्ते का ऐसा कनेक्शन बताया जिसे सुनकर खुद सैफ भी हैरान रह गए।

    दरअसल अमिताभ बच्चन ने बातचीत के बीच सैफ से कहा कि बहुत कम लोग उनके और सैफ के रिश्ते के बारे में जानते हैं। यह सुनते ही सैफ ने हैरानी से पूछा कि कौन मैं। इसके बाद बिग बी ने कपूर परिवार के जरिए इस रिश्ते की पूरी कड़ी समझाई। अमिताभ ने बताया कि राज कपूर की बेटी रीतू नंदा के बेटे निखिल नंदा हैं। निखिल नंदा ने अमिताभ बच्चन की बेटी श्वेता बच्चन से शादी की है। इस तरह बच्चन और कपूर परिवार के बीच पहले से ही पारिवारिक रिश्ता जुड़ा हुआ है।

    यहीं से सैफ अली खान का कनेक्शन भी सामने आता है। राज कपूर करीना कपूर के दादा थे और निखिल नंदा तथा करीना कपूर आपस में कजिन भाई बहन हैं। सैफ अली खान ने करीना कपूर से शादी की है। ऐसे में करीना के जरिए सैफ का रिश्ता बच्चन परिवार से भी जुड़ जाता है। अमिताभ बच्चन ने इसी पारिवारिक कनेक्शन को मजाकिया अंदाज में सैफ के सामने रखा।

    इसके बाद बिग बी ने सैफ से पूछा कि आखिर उनका और सैफ का क्या रिश्ता हुआ और करीना उन्हें क्या कहेंगी। अचानक सामने आए इस सवाल ने सैफ को थोड़ा उलझा दिया। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि अच्छा हुआ यह सवाल KBC का हिस्सा नहीं था। सैफ का जवाब सुनकर अमिताभ बच्चन और अक्षय कुमार अपनी हंसी नहीं रोक पाए। अक्षय ने भी मस्ती करते हुए सैफ को छेड़ा।

    अमिताभ बच्चन और सैफ अली खान की ऑनस्क्रीन जोड़ी भी दर्शकों के लिए नई नहीं है। दोनों कलाकार इससे पहले एकलव्य द रॉयल गार्ड और आरक्षण जैसी फिल्मों में साथ काम कर चुके हैं। दोनों की फिल्मों में अलग अलग तरह की भूमिकाएं देखने को मिली हैं और उनकी स्क्रीन प्रेजेंस को भी पसंद किया गया है।

    वहीं सैफ अली खान और अक्षय कुमार अब लंबे समय बाद फिल्म हैवान में एक साथ नजर आने वाले हैं। फिल्म का निर्देशन प्रियदर्शन कर रहे हैं। इसमें सैफ एक दृष्टिबाधित व्यक्ति की भूमिका में दिखाई देंगे जबकि अक्षय कुमार नकारात्मक किरदार में नजर आएंगे। दोनों की पुरानी दोस्ती और साथ काम करने का इतिहास इस फिल्म को लेकर उत्सुकता बढ़ा रहा है। हैवान 11 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है।

    इस तरह KBC का यह प्रोमो सिर्फ फिल्म प्रमोशन तक सीमित नहीं रहा बल्कि अमिताभ और सैफ के परिवारों के बीच जुड़े रिश्ते की दिलचस्प कड़ी भी सामने ले आया। सबसे खास बात यह रही कि जिस रिश्ते को जानकर दर्शक हैरान हुए उसी कनेक्शन को लेकर सैफ खुद भी कुछ पल के लिए कन्फ्यूज नजर आए।

  • शर्मिला टैगोर को एक्शन-कट बोलना कुणाल खेमू का सपना था, बोले- लेजेंड को डायरेक्ट कर गर्व महसूस हुआ

    शर्मिला टैगोर को एक्शन-कट बोलना कुणाल खेमू का सपना था, बोले- लेजेंड को डायरेक्ट कर गर्व महसूस हुआ


    नई दिल्ली। कुणाल खेमू इन दिनों अपनी आने वाली फिल्म वाइब को लेकर चर्चा में हैं। फिल्म का ट्रेलर रिलीज होने के बाद इसकी कहानी और स्टारकास्ट को लेकर दर्शकों की दिलचस्पी बढ़ गई है। इस फिल्म की खास बात यह भी है कि कुणाल खेमू ने इसमें अभिनय करने के साथ निर्देशन और लेखन की जिम्मेदारी भी संभाली है। फिल्म में प्रीति जिंटा स्पर्श श्रीवास्तव वंशिका धीर दिनेश लाल यादव और दिग्गज अभिनेत्री शर्मिला टैगोर अहम भूमिकाओं में नजर आएंगी। शर्मिला टैगोर का इस फिल्म से जुड़ना कुणाल के लिए इसलिए भी खास है क्योंकि वह उनकी सास हैं।

    फिल्म में शर्मिला टैगोर को कास्ट करने के अनुभव को याद करते हुए कुणाल ने बताया कि उनके लिए यह फैसला आसान नहीं था। कुणाल के मुताबिक शर्मिला जी के साथ फिल्म को लेकर बातचीत कुछ ऐसी थी जैसे अंधेरे में तीर चलाना। उन्होंने शर्मिला से फिल्म का सिनोप्सिस मांगे जाने पर उन्हें पूरी कहानी के बारे में बताया। इसके बाद शर्मिला टैगोर ने फिल्म के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। कुणाल के लिए यह पल बेहद खास था क्योंकि वह लंबे समय से किसी दिग्गज कलाकार को बतौर निर्देशक एक्शन और कट बोलने का सपना देख रहे थे।

    कुणाल ने बताया कि शर्मिला टैगोर को डायरेक्ट करना उनके लिए एक ऐसा चेकबॉक्स था जिसे वह काफी समय से पूरा करना चाहते थे। उनके मुताबिक वह इस बात को लेकर बेहद खुश और गर्व महसूस करते हैं कि उन्हें शर्मिला जैसी दिग्गज अभिनेत्री को निर्देशक के तौर पर निर्देशित करने का मौका मिला। उनके लिए यह अनुभव सिर्फ काम का हिस्सा नहीं बल्कि निजी और पेशेवर दोनों स्तरों पर बेहद यादगार रहा।

    वहीं फिल्म की ट्रेलर लॉन्चिंग के दौरान प्रीति जिंटा ने भी कुणाल खेमू से अपनी नाराजगी जाहिर की। प्रीति ने मजाकिया अंदाज में कहा कि फिल्म में उन्हें ज्यादा फनी सीन नहीं दिए गए जबकि शूटिंग के दौरान वह कॉमेडी से भरपूर अनुभव की उम्मीद कर रही थीं। उन्होंने बताया कि फिल्म की शूटिंग आसान नहीं थी और कलाकारों ने कई बार दिन में 16 से 18 घंटे तक काम किया।

    इस दौरान कुणाल की पत्नी और अभिनेत्री सोहा अली खान भी मौजूद थीं। उन्होंने कुणाल के मजाकिया अंदाज की तारीफ करते हुए कहा कि शादी हो या फ्यूनरल कुणाल लोगों को हंसा ही देते हैं। सोहा के मुताबिक दोनों परिवारों में कुणाल सबसे ज्यादा फनी हैं।

    कुणाल खेमू के निर्देशन करियर की बात करें तो उन्होंने साल 2024 में मडगांव एक्सप्रेस के साथ बतौर निर्देशक शुरुआत की थी। प्रतीक गांधी अविनाश तिवारी और दिव्येंदु स्टारर इस फिल्म को दर्शकों और क्रिटिक्स से अच्छी प्रतिक्रिया मिली थी। इसके बाद अब कुणाल वाइब के जरिए निर्देशन में एक और कदम आगे बढ़ा रहे हैं।

    वाइब में कुणाल के साथ काम करने वाली स्टारकास्ट भी काफी दिलचस्प है। फिल्म में शर्मिला टैगोर जैसी दिग्गज अभिनेत्री के साथ प्रीति जिंटा भी नजर आएंगी। फिल्म 18 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। वहीं कुणाल बतौर अभिनेता गोलमाल 5 में भी नजर आएंगे जिसमें अजय देवगन अक्षय कुमार अरशद वारसी तुषार कपूर और शरमन जोशी जैसे कलाकार शामिल हैं।