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  • आईपीएल में खत्म हुआ एक स्वर्णिम अध्याय 18 साल बाद चेन्नई सुपर किंग्स से अलग हुए स्टीफन फ्लेमिंग

    आईपीएल में खत्म हुआ एक स्वर्णिम अध्याय 18 साल बाद चेन्नई सुपर किंग्स से अलग हुए स्टीफन फ्लेमिंग


    नई दिल्ली । इंडियन प्रीमियर लीग के इतिहास का एक बेहद सफल और यादगार अध्याय अब समाप्त हो गया है। पांच बार की चैंपियन चेन्नई सुपर किंग्स और उसके लंबे समय तक हेड कोच रहे स्टीफन फ्लेमिंग ने 18 वर्षों की ऐतिहासिक साझेदारी को आपसी सहमति से समाप्त करने का फैसला लिया है। इस घोषणा के साथ ही आईपीएल के सबसे लंबे और सबसे सफल कोचिंग कार्यकालों में से एक का अंत हो गया। फ्रेंचाइजी ने आधिकारिक रूप से इसकी जानकारी देते हुए फ्लेमिंग के योगदान को हमेशा याद रखने की बात कही।

    स्टीफन फ्लेमिंग का चेन्नई सुपर किंग्स से रिश्ता आईपीएल के पहले सीजन वर्ष 2008 में शुरू हुआ था। उस समय वह खिलाड़ी के रूप में टीम से जुड़े थे। अगले ही वर्ष उन्होंने हेड कोच की जिम्मेदारी संभाली और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। लगभग दो दशक तक उन्होंने टीम को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया और चेन्नई सुपर किंग्स को आईपीएल की सबसे सफल और सबसे सम्मानित फ्रेंचाइजियों में शामिल कर दिया।

    फ्लेमिंग के नेतृत्व में चेन्नई सुपर किंग्स ने पांच बार आईपीएल ट्रॉफी अपने नाम की। इसके अलावा टीम ने दो बार चैंपियंस लीग टी20 का खिताब भी जीता। उनकी कोचिंग में सीएसके ने रिकॉर्ड 12 बार प्लेऑफ में जगह बनाई और 10 बार फाइनल तक का सफर तय किया। यह निरंतर सफलता उनकी रणनीति मजबूत नेतृत्व और खिलाड़ियों से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कराने की क्षमता का सबसे बड़ा प्रमाण मानी जाती है।

    चेन्नई सुपर किंग्स की मालकिन रूपा गुरुनाथ ने फ्लेमिंग की विदाई पर कहा कि उन्होंने केवल टीम को जीत दिलाने का काम नहीं किया बल्कि फ्रेंचाइजी की पहचान और संस्कृति को भी मजबूत बनाया। उन्होंने कहा कि फ्लेमिंग ने लगभग दो दशकों तक समर्पण जुनून और नेतृत्व के साथ टीम को नई दिशा दी। मैदान पर उनका सफर भले ही समाप्त हो रहा हो लेकिन वह हमेशा सुपर किंग्स परिवार और उसकी विरासत का अभिन्न हिस्सा बने रहेंगे।

    फ्रेंचाइजी के मैनेजिंग डायरेक्टर काशी विश्वनाथन ने भी फ्लेमिंग के योगदान को ऐतिहासिक बताया। उनके अनुसार फ्लेमिंग ने केवल टीम की रणनीति नहीं बनाई बल्कि ऐसा माहौल तैयार किया जिसमें अनुशासन निरंतरता विनम्रता और टीम भावना सबसे बड़ी पहचान बन गई। खिलाड़ियों को समझने और हर खिलाड़ी की क्षमता को निखारने की उनकी कला ने चेन्नई सुपर किंग्स को लगातार सफल बनाया। उनका प्रभाव केवल मैदान तक सीमित नहीं रहा बल्कि टीम की कार्यसंस्कृति का स्थायी हिस्सा बन गया।

    विदाई के अवसर पर स्टीफन फ्लेमिंग भी भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि खेल की दुनिया में 18 वर्ष बहुत लंबा समय होता है और वह केवल आभार की भावना के साथ इस जिम्मेदारी से विदा ले रहे हैं। उनके अनुसार चेन्नई सुपर किंग्स के साथ बिताया गया समय उनके पूरे कोचिंग करियर का सबसे यादगार अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि इस दौरान टीम ने शानदार जीत हासिल की कठिन दौर का सामना किया और ऐसी अनगिनत यादें बनाई जो जीवनभर उनके साथ रहेंगी।

    फ्लेमिंग ने यह भी कहा कि चेन्नई सुपर किंग्स हमेशा उनके दिल के बेहद करीब रहेगी और भले ही अब वह टीम के हेड कोच नहीं होंगे लेकिन भविष्य में भी टीम की सफलता के लिए हमेशा शुभकामनाएं देते रहेंगे। उन्होंने फ्रेंचाइजी प्रबंधन खिलाड़ियों सहयोगी स्टाफ और करोड़ों प्रशंसकों का धन्यवाद करते हुए कहा कि इस सफर ने उन्हें एक बेहतर कोच और बेहतर इंसान बनाया।

    स्टीफन फ्लेमिंग और चेन्नई सुपर किंग्स की यह साझेदारी आईपीएल इतिहास में हमेशा एक आदर्श उदाहरण के रूप में याद की जाएगी। लगातार सफलता स्थिर नेतृत्व और मजबूत टीम संस्कृति की जो मिसाल इस जोड़ी ने पेश की है वह आने वाले वर्षों तक फ्रेंचाइजी क्रिकेट के लिए प्रेरणा बनी रहेगी। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि चेन्नई सुपर किंग्स फ्लेमिंग के बाद टीम की कमान किसे सौंपती है और नया दौर किस दिशा में आगे बढ़ता है।

  • फीफा वर्ल्ड कप 2026 में फ्रांस सबसे मजबूत दावेदार ओलिवर कान बोले संतुलित टीम ही बनाएगी चैंपियन

    फीफा वर्ल्ड कप 2026 में फ्रांस सबसे मजबूत दावेदार ओलिवर कान बोले संतुलित टीम ही बनाएगी चैंपियन


    नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप 2026 अपने निर्णायक दौर में पहुंच चुका है और सेमीफाइनल मुकाबलों से पहले फुटबॉल जगत की निगाहें चारों दावेदार टीमों पर टिकी हुई हैं। इसी बीच जर्मनी के महान गोलकीपर ओलिवर कान ने टूर्नामेंट को लेकर बड़ी भविष्यवाणी करते हुए फ्रांस को विश्व चैंपियन बनने का सबसे प्रबल दावेदार बताया है। कान का मानना है कि फ्रांस के पास संतुलित टीम गहराई से भरा स्क्वॉड और हर परिस्थिति में मुकाबला जीतने की क्षमता है जो उसे बाकी टीमों से थोड़ा आगे खड़ा करती है।

    फ्रांस का मुकाबला 15 जुलाई को डलास स्टेडियम में स्पेन से होने वाले पहले सेमीफाइनल में होगा। यह मुकाबला टूर्नामेंट के सबसे बड़े और रोमांचक मुकाबलों में गिना जा रहा है। विश्व कप के नॉकआउट चरण में दोनों टीमें दूसरी बार आमने सामने होंगी। इससे पहले वर्ष 2006 के राउंड ऑफ 16 में फ्रांस ने स्पेन को 3 1 से हराकर बाहर का रास्ता दिखाया था। अब एक बार फिर दोनों यूरोपीय दिग्गज विश्व कप के फाइनल का टिकट हासिल करने के लिए आमने सामने होंगे।

    ओलिवर कान ने कहा कि यदि अब तक के प्रदर्शन के आधार पर किसी एक टीम को चुनना हो तो उनकी पहली पसंद फ्रांस होगी। उनके अनुसार फ्रांस की सबसे बड़ी ताकत उसका संतुलन है। टीम के पास मजबूत डिफेंस रचनात्मक मिडफील्ड और तेज आक्रमण करने वाले खिलाड़ी मौजूद हैं। इसके साथ ही बेंच स्ट्रेंथ भी बेहद मजबूत है जिससे किसी भी समय मैच का रुख बदला जा सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि सेमीफाइनल में पहुंची चारों टीमें खिताब जीतने की पूरी क्षमता रखती हैं और उनके बीच बहुत कम अंतर है।

    कान के अनुसार स्पेन और फ्रांस के बीच होने वाला मुकाबला रणनीति और धैर्य की सबसे बड़ी परीक्षा होगा। स्पेन अपनी तेज पासिंग और गेंद पर नियंत्रण रखने वाली शैली के लिए जाना जाता है जबकि फ्रांस की सबसे बड़ी ताकत उसका तेज पलटवार है। ऐसे में जो टीम मिडफील्ड पर नियंत्रण बनाए रखेगी और विपक्षी टीम की रणनीति को सफल नहीं होने देगी वही फाइनल का टिकट हासिल कर सकती है।

    उन्होंने कहा कि स्पेन के लिए फ्रांस की मजबूत रक्षापंक्ति को तोड़ना आसान नहीं होगा। स्पेन को लगातार धैर्य के साथ आक्रमण करना होगा तेज पासिंग करनी होगी और मैदान के अहम हिस्सों में अतिरिक्त खिलाड़ियों की मौजूदगी बनाए रखनी होगी। साथ ही उसे अपने डिफेंस को भी मजबूत रखना होगा क्योंकि फ्रांस दुनिया की सबसे खतरनाक काउंटर अटैक करने वाली टीमों में शामिल है और छोटी सी गलती भी मैच का परिणाम बदल सकती है।

    कान ने यह भी कहा कि बड़े मुकाबलों का फैसला अक्सर छोटे छोटे पलों से होता है। केवल लगातार दबाव बनाना ही काफी नहीं होता बल्कि सही समय पर समझदारी से प्रेसिंग करना और मिडफील्ड में नियंत्रण बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण होता है। जो टीम विपक्षी को खुलकर खेलने का मौका नहीं देगी उसके जीतने की संभावना अधिक होगी।

    अपने लंबे गोलकीपिंग अनुभव को साझा करते हुए ओलिवर कान ने आधुनिक फुटबॉल में गोलकीपर की बदलती भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज का गोलकीपर केवल गोल बचाने वाला खिलाड़ी नहीं रह गया है बल्कि वह टीम के आक्रमण की शुरुआत करने वाला पहला खिलाड़ी और अंतिम रक्षक दोनों की भूमिका निभाता है। गोलकीपर का एक सही फैसला मैच जितवा सकता है जबकि एक छोटी सी गलती पूरी टीम की मेहनत पर पानी फेर सकती है।

    उन्होंने कहा कि विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में वही टीमें सफल होती हैं जो दबाव के बीच भी शांत रहती हैं अपने गेम प्लान पर कायम रहती हैं और भावनाओं के बजाय सही समय पर सही फैसले लेती हैं। यही विशेषताएं फ्रांस की टीम में साफ दिखाई देती हैं और यही वजह है कि वह इस बार विश्व कप ट्रॉफी जीतने की सबसे मजबूत दावेदार नजर आती है।

  • मध्य पूर्व संकट से सहमा भारतीय शेयर बाजार सेंसेक्स 77000 के नीचे फिसला निवेशकों की बढ़ी चिंता

    मध्य पूर्व संकट से सहमा भारतीय शेयर बाजार सेंसेक्स 77000 के नीचे फिसला निवेशकों की बढ़ी चिंता


    नई दिल्ली । मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल का असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। कारोबारी सप्ताह की शुरुआत भारी बिकवाली के साथ हुई और निवेशकों में सतर्कता का माहौल नजर आया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 649 अंकों की गिरावट के साथ 76920 के स्तर पर पहुंच गया जबकि निफ्टी 184 अंक टूटकर 24022 पर कारोबार करता दिखाई दिया। वैश्विक घटनाक्रमों से बढ़ी अनिश्चितता और ऊर्जा कीमतों में तेजी ने बाजार की धारणा को कमजोर कर दिया।

    सुबह के कारोबार में केवल बड़ी कंपनियों के शेयर ही नहीं बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर भी दबाव देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स करीब 280 अंक टूट गया जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स भी गिरावट के साथ कारोबार करता रहा। इससे साफ संकेत मिला कि निवेशक जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाते हुए सुरक्षित विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं।

    सेक्टोरल इंडेक्स पर नजर डालें तो सबसे अधिक दबाव मेटल फाइनेंशियल सर्विसेज और कंजम्प्शन शेयरों पर रहा। इसके अलावा ऑटो प्राइवेट बैंक पीएसयू बैंक कमोडिटी इन्फ्रास्ट्रक्चर ऑयल एंड गैस एफएमसीजी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे लगभग सभी प्रमुख सेक्टर लाल निशान में कारोबार करते रहे। केवल आईटी और फार्मा सेक्टर ने मजबूती दिखाई और सीमित बढ़त के साथ कारोबार किया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितता के दौर में आईटी और दवा कंपनियों को अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेश माना जाता है इसलिए इन शेयरों में खरीदारी देखने को मिली।

    सेंसेक्स की प्रमुख कंपनियों में टाटा स्टील इंडिगो मारुति सुजुकी एशियन पेंट्स बजाज फिनसर्व बजाज फाइनेंस एचडीएफसी बैंक एलएंडटी अल्ट्राटेक सीमेंट बीईएल टाइटन महिंद्रा एंड महिंद्रा भारती एयरटेल एसबीआई सन फार्मा आईसीआईसीआई बैंक इन्फोसिस और आईटीसी जैसे शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। वहीं टीसीएस एचसीएल टेक पावर ग्रिड और एनटीपीसी के शेयर सीमित बढ़त के साथ कारोबार करते दिखाई दिए।

    भारतीय बाजार पर दबाव की सबसे बड़ी वजह मध्य पूर्व में बढ़ता सैन्य तनाव माना जा रहा है। अमेरिका द्वारा कमर्शियल जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में ईरान पर की गई नई सैन्य कार्रवाई के बाद हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं। इसके जवाब में ईरान ने कुवैत बहरीन और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है। इस घटनाक्रम ने वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है और इसका सीधा असर दुनिया भर के शेयर बाजारों पर दिखाई दे रहा है।

    एशियाई बाजारों में भी कमजोरी का माहौल रहा। टोक्यो शंघाई हांगकांग बैंकॉक और सोल के प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए जबकि जकार्ता का बाजार हल्की बढ़त बनाए रखने में सफल रहा। दूसरी ओर शुक्रवार को अमेरिकी शेयर बाजार मजबूती के साथ बंद हुए थे लेकिन ताजा घटनाओं के बाद वैश्विक बाजारों का रुख बदल गया।

    मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने के साथ कच्चे तेल की कीमतों में भी तेज उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड चार प्रतिशत से अधिक बढ़कर लगभग 79 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड करीब 74 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है इसलिए तेल की कीमतों में तेजी का असर महंगाई आयात बिल और कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है। यही वजह है कि निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर मध्य पूर्व के घटनाक्रम कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक बाजारों के रुख पर बनी रहेगी। यदि तनाव और बढ़ता है तो बाजार में उतार चढ़ाव जारी रह सकता है जबकि हालात सामान्य होने पर निवेशकों का भरोसा दोबारा लौटने की संभावना भी बनी रहेगी।

  • भारत और यूरोप के बीच मजबूत होगी रणनीतिक साझेदारी पीयूष गोयल का तीन देशों का दौरा आज से शुरू

    भारत और यूरोप के बीच मजबूत होगी रणनीतिक साझेदारी पीयूष गोयल का तीन देशों का दौरा आज से शुरू


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश। भारत और यूरोपीय देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो गई है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल सोमवार से स्पेन बेल्जियम और फिनलैंड के पांच दिवसीय आधिकारिक दौरे पर रवाना हो रहे हैं। 13 से 17 जुलाई तक चलने वाले इस दौरे के दौरान वे उच्चस्तरीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे और व्यापार निवेश तकनीक नवाचार तथा स्वच्छ ऊर्जा जैसे अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण बैठकों में हिस्सा लेंगे। इस यात्रा को भारत और यूरोपीय संघ के बीच तेजी से मजबूत होते संबंधों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार इस दौरे का मुख्य उद्देश्य यूरोप के साथ भारत की आर्थिक भागीदारी को और मजबूत बनाना है। यात्रा के दौरान एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग क्लीन एनर्जी डिजिटल टेक्नोलॉजी नवाचार रत्न एवं आभूषण उद्योग और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर रहेगा। इसके साथ ही दोनों पक्ष निवेश के नए अवसरों और दीर्घकालिक व्यापारिक साझेदारी पर भी चर्चा करेंगे।

    सरकार का मानना है कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित व्यापक व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने में यह दौरा महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। भारत की कोशिश एक ऐसे संतुलित और पारस्परिक लाभ वाले समझौते की है जो मजबूत आपूर्ति श्रृंखला टिकाऊ विकास और नियम आधारित वैश्विक व्यापार व्यवस्था को बढ़ावा दे सके। यही वजह है कि इस दौरे को केवल राजनयिक यात्रा नहीं बल्कि आर्थिक सहयोग के नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।

    स्पेन दौरे के दौरान पीयूष गोयल वहां के शीर्ष राजनीतिक और आर्थिक नेतृत्व से मुलाकात करेंगे। वे स्पेन के पहले उपराष्ट्रपति और अर्थव्यवस्था व्यापार एवं उद्योग मंत्री कार्लोस कुएर्पो कैबालेरो उद्योग एवं पर्यटन मंत्री जोर्डी हेरेउ बोहेर तथा विदेश मामलों और यूरोपीय संघ सहयोग मंत्री जोस मैनुअल अल्बारेस बुएनो के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इसके अलावा भारत स्पेन बिजनेस राउंडटेबल की अध्यक्षता करते हुए वे स्पेन की प्रमुख कंपनियों और उद्योग संगठनों के साथ निवेश और कारोबारी साझेदारी की संभावनाओं पर चर्चा करेंगे। इस दौरान भारत में निवेश के अवसरों को भी प्रमुखता से प्रस्तुत किया जाएगा।

    बेल्जियम में केंद्रीय मंत्री एंटवर्प बंदरगाह और विश्व प्रसिद्ध एंटवर्प वर्ल्ड डायमंड सेंटर का दौरा करेंगे। यहां वे कई प्रमुख वैश्विक कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। इसके अलावा ब्रसेल्स में आयोजित तीसरी भारत यूरोपीय संघ व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद की मंत्री स्तरीय बैठक की सह अध्यक्षता भी करेंगे। यह परिषद भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार भरोसेमंद तकनीक और आर्थिक सुरक्षा जैसे विषयों पर सहयोग का सबसे महत्वपूर्ण संस्थागत मंच माना जाता है।

    फिनलैंड में पीयूष गोयल वहां के आर्थिक मामलों के मंत्री डॉ सकारी पुइस्टो के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। साथ ही भारत फिनलैंड बिजनेस राउंडटेबल में भाग लेकर फिनिश कंपनियों को भारत में निवेश और साझेदारी के नए अवसरों से अवगत कराएंगे। विशेष रूप से डिजिटल तकनीक हरित ऊर्जा और नवाचार आधारित उद्योगों में सहयोग बढ़ाने पर जोर रहेगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बदलाव तेजी से हो रहे हैं और दुनिया विश्वसनीय व्यापारिक साझेदारों की तलाश में है। भारत तेजी से विनिर्माण नवाचार और तकनीकी विकास का बड़ा केंद्र बनकर उभर रहा है। ऐसे में यूरोपीय देशों के साथ मजबूत आर्थिक संबंध न केवल निवेश बढ़ाएंगे बल्कि रोजगार सृजन तकनीकी सहयोग और निर्यात को भी नई गति देंगे। उम्मीद की जा रही है कि इस दौरे के परिणाम आने वाले समय में भारत और यूरोप के बीच आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण साबित होंगे।

  • स्मार्टफोन खरीदने की सोच बदल रही एआई फीचर्स बने सबसे बड़ा फैसला 68 फीसदी उपभोक्ता दे रहे प्राथमिकता

    स्मार्टफोन खरीदने की सोच बदल रही एआई फीचर्स बने सबसे बड़ा फैसला 68 फीसदी उपभोक्ता दे रहे प्राथमिकता


    नई दिल्ली । मध्य पूर्व में एक बार फिर बढ़ते भू राजनीतिक तनाव के बीच भारत के लिए राहत की खबर यह है कि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के मामले में पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत स्थिति में खड़ा है। ईरान और अमेरिका के बीच फिर से बढ़े सैन्य तनाव तथा होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की घोषणा के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ गई है लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने समय रहते आवश्यक तैयारियां कर ली हैं। इसी कारण संभावित आपूर्ति संकट का असर फिलहाल सीमित रहने की उम्मीद है।

    हाल के घटनाक्रम में अमेरिका की ओर से सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान ने 11 जुलाई को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट को फिर से बंद करने का ऐलान किया। इसके बाद इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई। यह समुद्री रास्ता दुनिया के बड़े हिस्से में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति का प्रमुख माध्यम है इसलिए इसके प्रभावित होने का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर तुरंत दिखाई देने लगा।

    ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो सितंबर और अक्टूबर के दौरान कच्चे तेल की आपूर्ति लागत बढ़ सकती है। हालांकि भारत ने पहले से ही अगस्त तक के लिए कच्चे तेल और एलपीजी के आयात की व्यवस्था सुरक्षित कर ली है। यही वजह है कि निकट भविष्य में देश के भीतर ईंधन की उपलब्धता को लेकर किसी बड़े संकट की आशंका नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार प्राकृतिक गैस के क्षेत्र में कुछ चुनौतियां जरूर सामने आ सकती हैं लेकिन उन्हें भी प्रभावी तरीके से संभाला जा सकता है।

    मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है। ब्रेंट क्रूड करीब पांच प्रतिशत की बढ़त के साथ 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड भी लगभग पांच प्रतिशत बढ़कर 75 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि तनाव और बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमतें 80 से 85 डॉलर प्रति बैरल के बीच पहुंच सकती हैं।

    हालांकि इस बार वैश्विक बाजार में एक महत्वपूर्ण अंतर यह है कि गैर ओपेक देशों ने अपना उत्पादन पहले ही बढ़ा दिया है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति का दबाव कुछ हद तक कम हुआ है और संभावित कमी की भरपाई करने की क्षमता भी बनी हुई है। यही कारण है कि कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका के बावजूद वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर स्थिति पहले जैसी गंभीर नहीं मानी जा रही।

    भारत सरकार भी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर लगातार सतर्क बनी हुई है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि देश के पास लगभग 60 दिनों के लिए कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है जबकि एलपीजी का करीब 45 दिनों का स्टॉक सुरक्षित रखा गया है। इसके अलावा वैकल्पिक आयात स्रोतों और रणनीतिक भंडारण की व्यवस्था भी लगातार मजबूत की जा रही है ताकि किसी भी आपात स्थिति में आम लोगों और उद्योगों पर असर कम से कम पड़े।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में ऊर्जा आयात के स्रोतों में विविधता लाने रणनीतिक भंडारण क्षमता बढ़ाने और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर जो काम किया है उसका फायदा अब दिखाई दे रहा है। यदि मध्य पूर्व में तनाव लंबा भी खिंचता है तो भारत के पास स्थिति से निपटने के लिए पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत तैयारी मौजूद है। यही कारण है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद देश की ऊर्जा सुरक्षा फिलहाल सुरक्षित मानी जा रही है।

  • ईरान अमेरिका तनाव के बीच भारत तैयार कच्चे तेल एलपीजी और गैस का पर्याप्त भंडार संकट से देगा सुरक्षा

    ईरान अमेरिका तनाव के बीच भारत तैयार कच्चे तेल एलपीजी और गैस का पर्याप्त भंडार संकट से देगा सुरक्षा


    नई दिल्ली । मध्य पूर्व में एक बार फिर बढ़ते भू राजनीतिक तनाव के बीच भारत के लिए राहत की खबर यह है कि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के मामले में पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत स्थिति में खड़ा है। ईरान और अमेरिका के बीच फिर से बढ़े सैन्य तनाव तथा होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की घोषणा के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ गई है लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने समय रहते आवश्यक तैयारियां कर ली हैं। इसी कारण संभावित आपूर्ति संकट का असर फिलहाल सीमित रहने की उम्मीद है।

    हाल के घटनाक्रम में अमेरिका की ओर से सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान ने 11 जुलाई को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट को फिर से बंद करने का ऐलान किया। इसके बाद इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई। यह समुद्री रास्ता दुनिया के बड़े हिस्से में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति का प्रमुख माध्यम है इसलिए इसके प्रभावित होने का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर तुरंत दिखाई देने लगा।

    ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो सितंबर और अक्टूबर के दौरान कच्चे तेल की आपूर्ति लागत बढ़ सकती है। हालांकि भारत ने पहले से ही अगस्त तक के लिए कच्चे तेल और एलपीजी के आयात की व्यवस्था सुरक्षित कर ली है। यही वजह है कि निकट भविष्य में देश के भीतर ईंधन की उपलब्धता को लेकर किसी बड़े संकट की आशंका नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार प्राकृतिक गैस के क्षेत्र में कुछ चुनौतियां जरूर सामने आ सकती हैं लेकिन उन्हें भी प्रभावी तरीके से संभाला जा सकता है।

    मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है। ब्रेंट क्रूड करीब पांच प्रतिशत की बढ़त के साथ 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड भी लगभग पांच प्रतिशत बढ़कर 75 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि तनाव और बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमतें 80 से 85 डॉलर प्रति बैरल के बीच पहुंच सकती हैं।

    हालांकि इस बार वैश्विक बाजार में एक महत्वपूर्ण अंतर यह है कि गैर ओपेक देशों ने अपना उत्पादन पहले ही बढ़ा दिया है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति का दबाव कुछ हद तक कम हुआ है और संभावित कमी की भरपाई करने की क्षमता भी बनी हुई है। यही कारण है कि कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका के बावजूद वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर स्थिति पहले जैसी गंभीर नहीं मानी जा रही।

    भारत सरकार भी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर लगातार सतर्क बनी हुई है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि देश के पास लगभग 60 दिनों के लिए कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है जबकि एलपीजी का करीब 45 दिनों का स्टॉक सुरक्षित रखा गया है। इसके अलावा वैकल्पिक आयात स्रोतों और रणनीतिक भंडारण की व्यवस्था भी लगातार मजबूत की जा रही है ताकि किसी भी आपात स्थिति में आम लोगों और उद्योगों पर असर कम से कम पड़े।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में ऊर्जा आयात के स्रोतों में विविधता लाने रणनीतिक भंडारण क्षमता बढ़ाने और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर जो काम किया है उसका फायदा अब दिखाई दे रहा है। यदि मध्य पूर्व में तनाव लंबा भी खिंचता है तो भारत के पास स्थिति से निपटने के लिए पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत तैयारी मौजूद है। यही कारण है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद देश की ऊर्जा सुरक्षा फिलहाल सुरक्षित मानी जा रही है।

  • रियल एस्टेट सेक्टर पर निवेशकों का भरोसा मजबूत, 33 फीसदी बढ़ा प्राइवेट इक्विटी निवेश, विदेशी पूंजी ने बढ़ाई रफ्तार

    रियल एस्टेट सेक्टर पर निवेशकों का भरोसा मजबूत, 33 फीसदी बढ़ा प्राइवेट इक्विटी निवेश, विदेशी पूंजी ने बढ़ाई रफ्तार


    नई दिल्ली । भारतीय रियल एस्टेट बाजार लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है और वर्ष 2026 की पहली छमाही ने इस क्षेत्र के लिए बेहद उत्साहजनक तस्वीर पेश की है। जनवरी से जून के बीच देश के रियल एस्टेट सेक्टर में 3.2 अरब डॉलर का निजी इक्विटी निवेश दर्ज किया गया है जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 33 प्रतिशत अधिक है। यह बढ़ोतरी इस बात का स्पष्ट संकेत है कि घरेलू और विदेशी दोनों निवेशकों का भरोसा भारतीय रियल एस्टेट बाजार पर लगातार मजबूत हो रहा है और आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में निवेश की संभावनाएं और अधिक बढ़ सकती हैं।

    ग्लोबल रियल एस्टेट कंसल्टिंग फर्म सैविल्स इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार केवल दूसरी तिमाही यानी अप्रैल से जून के दौरान ही करीब 2 अरब डॉलर का निवेश हुआ। यह पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 25 प्रतिशत अधिक है। रिपोर्ट बताती है कि निवेशकों की प्राथमिकताएं अब तेजी से बदल रही हैं और पारंपरिक ऑफिस परिसंपत्तियों के साथ-साथ डेटा सेंटर जैसे आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी उनका भरोसा लगातार बढ़ रहा है।

    दूसरी तिमाही के दौरान कुल निवेश में डेटा सेंटर का हिस्सा सबसे अधिक 38 प्रतिशत रहा। इसके बाद ऑफिस सेक्टर ने 30 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ दूसरा स्थान हासिल किया जबकि रेजिडेंशियल सेक्टर 16 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ तीसरे स्थान पर रहा। हालांकि यदि पूरे जनवरी से जून की अवधि की बात करें तो ऑफिस सेक्टर अब भी सबसे आगे बना हुआ है और कुल निजी इक्विटी निवेश में इसकी हिस्सेदारी 34 प्रतिशत रही। इससे साफ है कि कॉरपोरेट गतिविधियों के विस्तार और आधुनिक कार्यस्थलों की बढ़ती मांग के कारण ऑफिस स्पेस निवेशकों की पहली पसंद बना हुआ है।

    रिपोर्ट के मुताबिक निवेश केवल पारंपरिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहा बल्कि हॉस्पिटैलिटी हेल्थकेयर और स्टूडेंट हाउसिंग या को लिविंग जैसे वैकल्पिक रियल एस्टेट सेगमेंट में भी पूंजी का प्रवाह बढ़ा है। हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में 8 प्रतिशत और स्टूडेंट हाउसिंग तथा को लिविंग में 3 प्रतिशत निवेश दर्ज किया गया। इससे यह संकेत मिलता है कि निवेशक अब तेजी से उभरते नए क्षेत्रों में भी अवसर तलाश रहे हैं।

    निवेश के स्रोतों पर नजर डालें तो इस अवधि में कुल निजी इक्विटी निवेश का 51 प्रतिशत हिस्सा घरेलू निवेशकों से आया जबकि 49 प्रतिशत निवेश विदेशी निवेशकों ने किया। घरेलू निवेश का बड़ा हिस्सा ऑफिस सेक्टर में लगाया गया और इसका लगभग 68 प्रतिशत निवेश देश के प्रमुख टियर वन शहरों में केंद्रित रहा। दूसरी ओर विदेशी निवेशकों की पूंजी का 69 प्रतिशत हिस्सा अमेरिका और कनाडा से आया जिसने मुख्य रूप से डेटा सेंटर और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को प्राथमिकता दी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था मजबूत शहरीकरण बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और स्थिर आर्थिक माहौल निवेशकों को आकर्षित कर रहे हैं। डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों में बढ़ता निवेश इस बात का संकेत है कि डिजिटल सेवाओं और क्लाउड टेक्नोलॉजी की मांग भविष्य में और तेजी से बढ़ने वाली है।

    सैविल्स इंडिया के कैपिटल मार्केट सर्विसेज के मैनेजिंग डायरेक्टर सुमीत भाटिया का कहना है कि पहली छमाही के निवेश आंकड़े भारतीय रियल एस्टेट बाजार में निवेशकों के मजबूत विश्वास को दर्शाते हैं। उनका मानना है कि हॉस्पिटैलिटी हेल्थकेयर स्टूडेंट हाउसिंग और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों में लगातार बढ़ता निवेश यह साबित करता है कि निवेशक अब भारत की डिजिटल और वैकल्पिक रियल एस्टेट ग्रोथ स्टोरी पर लंबी अवधि का दांव लगा रहे हैं। कंपनी को उम्मीद है कि आने वाली तिमाहियों में भी निवेश का यह सकारात्मक रुझान जारी रहेगा और भारतीय रियल एस्टेट बाजार वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना रहेगा।

  • सेबी का बड़ा एक्शन कर्मचारियों पर सख्त हुई आचार संहिता शेयर बाजार में निवेश से लेकर नई नौकरी तक हर कदम पर रहेगी नजर

    सेबी का बड़ा एक्शन कर्मचारियों पर सख्त हुई आचार संहिता शेयर बाजार में निवेश से लेकर नई नौकरी तक हर कदम पर रहेगी नजर


    नई दिल्ली ।  भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड यानी सेबी ने अपने कर्मचारियों के लिए सेवा नियमों में व्यापक बदलाव करते हुए आचार संहिता को पहले से अधिक सख्त बना दिया है। नए संशोधित नियमों का उद्देश्य हितों के टकराव की संभावना को कम करना पारदर्शिता को बढ़ावा देना और बाजार नियामक संस्था की निष्पक्षता को और मजबूत बनाना है। सेबी द्वारा अधिसूचित कर्मचारी सेवा संशोधन विनियम 2026 के तहत कर्मचारियों के निवेश खुलासे नौकरी बदलने और उपहार स्वीकार करने से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रावधान लागू किए गए हैं।

    नए नियमों के अनुसार अब कर्मचारियों के साथ उनके परिवार और आश्रितों की परिभाषा का भी विस्तार किया गया है। इसमें गोद लिए गए बच्चे सौतेले बच्चे और ऐसे लोग भी शामिल होंगे जो किसी कर्मचारी पर आर्थिक रूप से निर्भर हैं। इससे अब निवेश और सेवा संबंधी नियमों का दायरा पहले की तुलना में कहीं अधिक व्यापक हो जाएगा और किसी भी प्रकार के हितों के टकराव की संभावना पर अधिक प्रभावी निगरानी रखी जा सकेगी।

    सेबी ने कर्मचारियों के निवेश नियमों में सबसे बड़ा बदलाव किया है। अब कर्मचारी और उनके परिवार के सदस्य नौकरी के दौरान शेयर इक्विटी में परिवर्तनीय प्रतिभूतियों और डेरिवेटिव उत्पादों में नया निवेश नहीं कर सकेंगे। हालांकि म्यूचुअल फंड रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट यानी रीट्स और अन्य विनियमित सामूहिक निवेश योजनाओं में निवेश की अनुमति पहले की तरह जारी रहेगी। इसके साथ ही ऐसे निवेश उत्पादों में निवेश की अधिकतम सीमा भी तय कर दी गई है जो किसी कर्मचारी के कुल निवेश पोर्टफोलियो के 25 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती।

    कुछ विशेष परिस्थितियों में कर्मचारियों को छूट भी दी गई है। इनमें जीवनसाथी को मिलने वाले एम्प्लॉई स्टॉक ऑप्शन और विवेकाधीन पोर्टफोलियो प्रबंधन सेवाओं के माध्यम से किए गए निवेश शामिल हैं। सेबी का मानना है कि इन प्रावधानों से कर्मचारियों की निष्पक्षता बनी रहेगी और बाजार से जुड़े संवेदनशील निर्णयों पर किसी प्रकार का निजी प्रभाव नहीं पड़ेगा।

    संशोधित नियमों के तहत यदि कोई कर्मचारी इस्तीफा देता है या सेवानिवृत्त होता है तो उस पर दो वर्ष का कूलिंग ऑफ पीरियड लागू रहेगा। इस अवधि के दौरान वह किसी भी व्यक्ति कंपनी या संस्था की ओर से सेबी के समक्ष किसी मामले में पैरवी नहीं कर सकेगा। यह प्रतिबंध जांच सुनवाई सेटलमेंट और विभिन्न मंजूरियों से जुड़े मामलों पर भी लागू रहेगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सेवा के दौरान प्राप्त गोपनीय जानकारी का निजी लाभ के लिए उपयोग न किया जा सके।

    नौकरी बदलने से जुड़े नियमों को भी अधिक पारदर्शी बनाया गया है। यदि कोई कर्मचारी किसी अन्य संस्था या कंपनी में नौकरी के लिए बातचीत शुरू करता है तो उसे एक महीने के भीतर इसकी जानकारी सेबी को देना अनिवार्य होगा। इससे संभावित हितों के टकराव की समय रहते पहचान की जा सकेगी और आवश्यक कदम उठाए जा सकेंगे।

    सेबी ने उपहार स्वीकार करने के नियमों में भी संशोधन किया है। अब कर्मचारियों को 50 हजार रुपए तक के उपहार की रिपोर्ट करने की आवश्यकता नहीं होगी जबकि पहले यह सीमा 10 हजार रुपए थी। साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि सामाजिक और पारंपरिक अवसरों पर मिलने वाले कौन से उपहार नियमों के अनुरूप स्वीकार किए जा सकते हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सेबी के ये नए नियम नियामकीय संस्थाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इससे न केवल कर्मचारियों के आचरण पर बेहतर निगरानी रखी जा सकेगी बल्कि निवेशकों का भरोसा भी और मजबूत होगा। बदलते वित्तीय माहौल में यह पहल भारतीय पूंजी बाजार की विश्वसनीयता को नई मजबूती देने वाली मानी जा रही है।

  • विदेशी निवेशकों की वापसी से भारतीय शेयर बाजार को नई रफ्तार, जून 2027 तक निफ्टी 26,500 पहुंचने की उम्मीद

    विदेशी निवेशकों की वापसी से भारतीय शेयर बाजार को नई रफ्तार, जून 2027 तक निफ्टी 26,500 पहुंचने की उम्मीद


    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार को लेकर वैश्विक निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स ने उत्साहजनक अनुमान जारी किया है। संस्थान का मानना है कि भारत में विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली का दौर अब लगभग समाप्त हो चुका है और आने वाले महीनों में विदेशी पूंजी का प्रवाह फिर से तेज हो सकता है। मजबूत घरेलू मांग, स्थिर आर्थिक आधार और निवेशकों की बदलती रणनीति के चलते भारतीय इक्विटी बाजार में तेजी की संभावना जताई गई है।

    गोल्डमैन सैक्स के एशिया मैक्रो रिसर्च के सह-प्रमुख और एशिया-पैसिफिक इक्विटी रणनीतिकार टिमोथी मो, अमोरिता गोयल और सुनील कौल द्वारा जारी इंडिया स्ट्रैटेजी नोट के अनुसार जून 2027 तक निफ्टी 26,500 अंक के स्तर तक पहुंच सकता है। यह मौजूदा स्तर से करीब 10 प्रतिशत की संभावित बढ़त दर्शाता है।

    रिपोर्ट में कहा गया है कि मई 2026 की तुलना में अब बाजार को लेकर दृष्टिकोण पूरी तरह बदल चुका है। उस समय उत्तर एशियाई बाजारों की तुलना में भारतीय बाजार कम आकर्षक माना जा रहा था और विदेशी निवेशकों की जल्द वापसी की उम्मीद भी नहीं थी। हालांकि अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं।

    विश्लेषकों के मुताबिक वर्ष 2026 की पहली छमाही में वैश्विक निवेशकों ने भारत को फंडिंग मार्केट की तरह इस्तेमाल किया। इस दौरान महज साढ़े तीन महीनों में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 30 अरब डॉलर से अधिक की बिकवाली की। लेकिन जून के दूसरे पखवाड़े से तस्वीर बदलने लगी और विदेशी निवेशक फिर से शुद्ध खरीदार बन गए। इस दौरान उन्होंने करीब दो अरब डॉलर का निवेश किया।

    गोल्डमैन सैक्स का मानना है कि वैश्विक फंडों की भारतीय बाजार में हिस्सेदारी अभी भी सामान्य स्तर से कम है। ऐसे में उनके पास दोबारा निवेश बढ़ाने की पर्याप्त गुंजाइश मौजूद है। हालांकि कंपनियों की आय में संशोधन और अन्य वैश्विक बाजारों की तुलना में मूल्यांकन निवेशकों के लिए चुनौती बने रह सकते हैं, लेकिन घरेलू अर्थव्यवस्था में सुधार और मांग में मजबूती बाजार की धारणा को सकारात्मक बनाए रखेगी।

    एनएसडीएल के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2026-27 में अब तक विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 1.28 लाख करोड़ रुपए की शुद्ध निकासी की है। जून महीने में एफआईआई ने 49,340 करोड़ रुपए की बिकवाली की थी, जबकि जुलाई में अब तक 15,157 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश दर्ज किया गया है। इससे संकेत मिलता है कि विदेशी निवेशकों का भरोसा धीरे-धीरे भारतीय बाजार की ओर लौट रहा है।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि घरेलू आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी रहती हैं और वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं तो आने वाले समय में भारतीय शेयर बाजार नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ सकता है। ऐसे में निवेशकों की नजर अब विदेशी निवेश के रुझान और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी।

  • पत्नी दो महीने से मायके में थी, मानसिक तनाव में युवक ने दी जान; आखिरी कॉल से खुली घटना की परत

    पत्नी दो महीने से मायके में थी, मानसिक तनाव में युवक ने दी जान; आखिरी कॉल से खुली घटना की परत


    मध्य प्रदेश। इंदौर के बाणगंगा थाना क्षेत्र में रविवार को एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। 39 वर्षीय युवक ने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। आत्महत्या से पहले उसने अपने एक दोस्त को फोन कर कहा कि परिवार से कह देना कि अब मैं नहीं रहा। इसके कुछ ही देर बाद उसने यह कदम उठा लिया। सूचना मिलने पर परिजन मौके पर पहुंचे और उसे अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

    पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान साईं सुमन नगर निवासी विशाल चौहान के रूप में हुई है। वह एक निजी कंपनी में कार्यरत था। रविवार को अवकाश होने के कारण वह घर पर ही मौजूद था। घटना के समय परिवार के अन्य सदस्य घर से बाहर थे।

    मृतक के चचेरे भाई अनिल ने बताया कि उन्हें विशाल के दोस्त का फोन आया था, लेकिन बाइक चलाने के कारण वह कॉल नहीं उठा सके। कुछ देर बाद जब उन्होंने वापस फोन किया तो दोस्त ने बताया कि विशाल ने आखिरी बार फोन कर कहा था कि वह अब इस दुनिया में नहीं रहेगा और परिवार को इसकी जानकारी दे देना। यह सुनते ही अनिल ने विशाल के भाई से संपर्क किया, लेकिन वह भी घर पर मौजूद नहीं था। बाद में मां को सूचना दी गई। जब परिवार के लोग घर पहुंचे तो विशाल कमरे में फंदे से लटका मिला।

    परिजन उसे तुरंत पास के निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजकर जांच शुरू कर दी है।

    परिजनों के मुताबिक विशाल अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ अलग रहता था। उसकी पत्नी पिछले करीब दो महीने से एरोड्रम क्षेत्र स्थित अपने मायके में रह रही थी। परिवार का कहना है कि पत्नी के वापस नहीं आने से वह मानसिक तनाव में था। हालांकि, पुलिस को मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है, इसलिए आत्महत्या के वास्तविक कारणों की जांच की जा रही है।

    पुलिस का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। परिजनों और परिचितों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    यदि आप या आपका कोई परिचित मानसिक तनाव या आत्महत्या जैसे विचारों से जूझ रहा है, तो किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात करें या तुरंत स्थानीय मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ अथवा हेल्पलाइन से संपर्क करें। समय पर मदद मिलना बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है।