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  • ईशा देओल ने चुना मस्ती भरा अंदाज, मालामाल वीकली 2 में दिखेगा कॉमेडी का नया रंग

    ईशा देओल ने चुना मस्ती भरा अंदाज, मालामाल वीकली 2 में दिखेगा कॉमेडी का नया रंग


    नई दिल्ली। ईशा देओल एक बार फिर दर्शकों को हंसाने और मनोरंजन करने के लिए तैयार हैं। अभिनेत्री जल्द ही मालामाल वीकली 2 में नजर आने वाली हैं। यह फिल्म पूरी तरह कॉमेडी और मस्ती से भरपूर बताई जा रही है। ईशा देओल के लिए यह प्रोजेक्ट इसलिए भी खास है क्योंकि कॉमेडी ऐसा जॉनर है जिसे वह पहले भी पसंद करती रही हैं और अब लंबे समय बाद इसी अंदाज में वापसी करने को लेकर उत्साहित हैं। अभिनेत्री का कहना है कि हाल ही में उन्होंने अलग तरह की फिल्मों पर काम किया है और उसके बाद उन्हें कुछ हल्का फुल्का और मजेदार करने की इच्छा थी।

    ईशा देओल ने फिल्म को लेकर अपनी खुशी जाहिर करते हुए बताया कि उन्हें इस समय बिल्कुल ऐसी ही फिल्म की जरूरत थी। अभिनेत्री के मुताबिक वह लगातार अलग तरह के किरदारों और विषयों पर काम कर रही थीं। उन्होंने हॉरर कॉमेडी फिल्म घूंघट और तेलुगु फिल्म SYG पर काम पूरा किया है। इन दोनों प्रोजेक्ट्स के बाद उनका मन एक ऐसी फिल्म करने का था जिसमें खूब मस्ती हो और दर्शकों को हंसने का मौका मिले। इसी दौरान मालामाल वीकली 2 उनके पास आई और उन्हें लगा कि यह प्रोजेक्ट उनके लिए बिल्कुल सही है।

    कॉमेडी के साथ ईशा देओल का पुराना रिश्ता रहा है। वह नो एंट्री शादी नंबर 1 और वन टू थ्री जैसी फिल्मों में अपने अभिनय से दर्शकों को मनोरंजन कर चुकी हैं। इन फिल्मों के अनुभव के बाद भी अभिनेत्री का मानना है कि कॉमेडी एक ऐसा स्पेस है जिसमें वह हमेशा सहज महसूस करती हैं। यही वजह है कि मालामाल वीकली 2 की स्क्रिप्ट ने उन्हें सबसे ज्यादा आकर्षित किया। ईशा के मुताबिक फिल्म की कहानी काफी मजेदार है और उन्हें उम्मीद है कि दर्शकों को भी यह खूब पसंद आएगी।

    मालामाल वीकली 2 को लेकर सामने आ रही जानकारी के अनुसार फिल्म में कई चर्चित कलाकारों की मौजूदगी देखने को मिल सकती है। फिल्म की संभावित कास्ट में रितेश देशमुख परेश रावल राजपाल यादव एल्विश यादव रवीना टंडन परिणीति चोपड़ा शिल्पा शिरोडकर और फरदीन खान जैसे नाम शामिल बताए जा रहे हैं। ऐसे में फिल्म में कॉमेडी के साथ कलाकारों की बड़ी टोली दर्शकों के लिए मनोरंजन का एक खास पैकेज पेश कर सकती है।

    फिल्म के निर्देशन की जिम्मेदारी अमित जोशी संभाल रहे हैं। अमित जोशी इससे पहले तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया जैसी फिल्म से जुड़े रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक मालामाल वीकली 2 की शूटिंग नवंबर से शुरू हो सकती है। फिल्म की कहानी और स्टारकास्ट को लेकर दर्शकों में अभी से उत्सुकता देखने को मिल रही है।

    ईशा देओल की इस वापसी को उनके करियर के एक अलग रंग के तौर पर भी देखा जा रहा है। गंभीर और अलग तरह के प्रोजेक्ट्स के बाद अभिनेत्री का कॉमेडी की ओर लौटना उनके प्रशंसकों के लिए खास हो सकता है। अब देखना होगा कि मालामाल वीकली 2 में ईशा देओल का यह नया अंदाज दर्शकों को कितना पसंद आता है और फिल्म पर्दे पर कितनी हंसी और मस्ती बिखेर पाती है।

  • समुद्र का बढ़ता जलस्तर बना खतरा, मुंबई-कोलकाता में लाखों लोगों के घर डूबने का संकट

    समुद्र का बढ़ता जलस्तर बना खतरा, मुंबई-कोलकाता में लाखों लोगों के घर डूबने का संकट


    संयुक्त राष्ट्र।
    समुद्र के बढ़ते जलस्तर का खतरा अब भविष्य की आशंका भर नहीं रह गया है। संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि भारत के मुंबई और कोलकाता जैसे तटीय शहरों में लाखों लोगों के सामने विस्थापन का तत्काल खतरा पैदा हो गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, समुद्र का जलस्तर बढ़ने और जमीन के स्थायी रूप से पानी में डूबने के कारण बड़ी आबादी को आने वाले समय में अपने घर गंवाने पड़ सकते हैं।

    संयुक्त राष्ट्र महासचिव की रिपोर्ट ‘समुद्र के जलस्तर में वृद्धि से जुड़ी चुनौतियां तथा उनसे निपटने के तरीके और उपाय’ में कहा गया है कि समुद्र का बढ़ता जलस्तर अब दूर का या भविष्य का खतरा नहीं है। यह प्रक्रिया पहले से जारी है और दर्ज इतिहास में किसी भी दौर की तुलना में तेज गति से हो रही है।

    सिर्फ तटीय इलाकों का नहीं, पूरे शहरों का संकट

    रिपोर्ट के मुताबिक, समुद्र के जलस्तर में बढ़ोतरी का असर पहले से ही शहरी बुनियादी ढांचे पर दिखाई देने लगा है। जल आपूर्ति व्यवस्था, परिवहन नेटवर्क, ऊर्जा ग्रिड, इमारतों और भूजल संसाधनों को नुकसान पहुंच रहा है।

    इसका असर सिर्फ संपत्ति तक सीमित नहीं है। संयुक्त राष्ट्र ने चेताया है कि समुद्र का बढ़ता स्तर मानवाधिकारों के प्रभावी इस्तेमाल, दीर्घकालिक विकास और वित्तीय स्थिरता के लिए भी गंभीर चुनौती बन रहा है।

    मुंबई-कोलकाता समेत इन शहरों पर ज्यादा असर

    संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में जोखिम का स्वरूप अलग-अलग क्षेत्रों में अलग बताया गया है। अमेरिका के मियामी और न्यूयॉर्क तथा चीन के ग्वांगझू जैसे उच्च आय वाले शहरों में सबसे बड़ा खतरा तटीय बुनियादी ढांचे और संपत्तियों को होने वाले भारी वित्तीय नुकसान का है।

    अनुमान के मुताबिक इन शहरों में करीब 2,000 अरब से 3,500 अरब अमेरिकी डॉलर की संपत्ति जोखिम में है।

    इसके उलट दक्षिण एशिया के निचले डेल्टा क्षेत्रों और मुंबई, कोलकाता तथा ढाका जैसे शहरों में सबसे बड़ा खतरा लोगों के विस्थापन का है। रिपोर्ट के अनुसार यहां 1.4 करोड़ से अधिक लोगों के घरों के स्थायी रूप से पानी में डूबने का तत्काल खतरा है।

    सिर्फ पैसों में नहीं मापा जा सकता नुकसान

    रिपोर्ट ने इस बात पर जोर दिया है कि तटीय क्षेत्रों के जोखिम का आकलन केवल आर्थिक नुकसान के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। इसमें मानवीय जिंदगी, विस्थापन और सामाजिक प्रभाव को भी वित्तीय जोखिमों के बराबर महत्व देने की जरूरत है।

    संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, समुद्र का बढ़ता जलस्तर तटीय समुदायों की कमजोरियों को और बढ़ा रहा है। इसलिए जोखिम का आकलन करने के मौजूदा तरीकों को ज्यादा व्यापक बनाने की जरूरत है।

    स्वास्थ्य पर भी पड़ेगा गंभीर असर

    समुद्र के बढ़ते जलस्तर का असर जनस्वास्थ्य पर भी पड़ने की आशंका है। तटीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़े बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंच सकता है। इसके अलावा जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ने, स्वच्छता व्यवस्था बाधित होने, चोट और मौत के जोखिम में वृद्धि की आशंका जताई गई है।

    रिपोर्ट में मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव को भी रेखांकित किया गया है। लगातार बाढ़, घर और आजीविका खोने का डर तथा संभावित विस्थापन लोगों में मानसिक तनाव बढ़ा सकता है।

    समुद्र का बढ़ता स्तर और जमीन का धंसना, दोहरी मार

    संयुक्त राष्ट्र ने यह भी चेताया है कि समुद्र के जलस्तर में बढ़ोतरी और जमीन के धंसने का संयुक्त प्रभाव तटीय बाढ़ के खतरे को और गंभीर बना रहा है।

    इससे तटीय पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचने के साथ-साथ जान-माल, आजीविका और महत्वपूर्ण जलीय पारिस्थितिकी तंत्र से मिलने वाली सेवाओं एवं आवासों का नुकसान बढ़ सकता है।

    रिपोर्ट का संदेश स्पष्ट है कि समुद्र का बढ़ता जलस्तर अब आने वाले दशकों की समस्या नहीं, बल्कि वर्तमान समय में सामने आ रही ऐसी चुनौती है, जिसके सामाजिक, आर्थिक और मानवीय प्रभावों से निपटने के लिए तत्काल तैयारी जरूरी है।

  • विंध्य में बाढ़ से बिगड़े हालात, कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर; सतना-रीवा में स्कूल बंद

    विंध्य में बाढ़ से बिगड़े हालात, कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर; सतना-रीवा में स्कूल बंद


    रीवा।
    मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से में सक्रिय मानसूनी सिस्टम के चलते लगातार हो रही बारिश ने विंध्य क्षेत्र में हालात बिगाड़ दिए हैं। रीवा, सतना, मैहर, मऊगंज, सिंगरौली और शहडोल संभाग के कई इलाकों में भारी बारिश के कारण बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। कई नदियों का जलस्तर खतरे के निशान के ऊपर पहुंच गया है, जिससे निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की परेशानी बढ़ गई है।

    सबसे ज्यादा असर सतना और चित्रकूट में दिखाई दे रहा है। चित्रकूट में मंदाकिनी नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। रामघाट इलाके में करीब 400 दुकानें और 20 से 25 होटल पानी की चपेट में आ गए हैं। वहीं, रीवा जिले में बिहार और टमस नदियों के बढ़े जलस्तर के साथ तराई क्षेत्र में बेलन नदी भी उफान पर है।

    बांधों के गेट खुलने से बढ़ा पानी का बहाव

    लगातार बारिश के बीच बांधों से छोड़े जा रहे पानी ने भी स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। बाणसागर बांध के आठ गेट खोले जाने के बाद सोन नदी के बहाव में तेजी आई है। इससे नदी के आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।

    बेलन नदी पर बने बांध के गेट भी खोल दिए गए हैं। इसके अलावा टमस नदी पर स्थित बकिया बैराज डैम के गेट खोले जाने से तराई क्षेत्र के गांवों में पानी का दबाव बढ़ गया है। लगातार बारिश और बांधों से छोड़े जा रहे पानी के कारण कई निचले इलाकों में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति बनी हुई है।

    चित्रकूट में रामघाट की दुकानें और होटल डूबे

    चित्रकूट में लगातार बारिश के कारण मंदाकिनी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। रामघाट क्षेत्र में पानी भरने से करीब 400 दुकानें और 20 से 25 होटल प्रभावित हुए हैं।

    जलस्तर बढ़ने के कारण नदी किनारे रहने वाले लोगों और कारोबारियों के सामने भी परेशानी खड़ी हो गई है। प्रशासन की ओर से लोगों को नदी और जलभराव वाले इलाकों से दूर रहने की सलाह दी जा रही है।

    सतना, रीवा और मैहर में स्कूल-कॉलेज बंद

    लगातार बारिश और बिगड़ते हालात को देखते हुए सतना, रीवा और मैहर जिलों में स्कूल, कॉलेज और आंगनवाड़ियों को 2 और 3 सितंबर को बंद रखने का फैसला लिया गया है। अगले दो दिनों में भी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना को देखते हुए प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है।

    अगले दो दिन भारी बारिश का अलर्ट

    मौसम विभाग के मुताबिक मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से में सक्रिय मानसूनी सिस्टम का प्रभाव अभी बना हुआ है। इसके चलते रीवा सहित पूरे विंध्य और आसपास के क्षेत्रों में अगले दो दिनों तक भारी बारिश होने की चेतावनी जारी की गई है।

    छतरपुर, सतना, रीवा, मैहर, मऊगंज और सिंगरौली में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में सिस्टम का प्रभाव ज्यादा रहने के कारण सतना, रीवा और शहडोल संभाग के जिलों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।

    निचले इलाकों में बढ़ सकता है खतरा

    मौसम विभाग के अलर्ट के बीच लगातार बारिश होने पर नदियों और नालों का जलस्तर और बढ़ सकता है। इससे निचले इलाकों में जलभराव की समस्या गंभीर होने की आशंका है। चित्रकूट में मंदाकिनी का बढ़ा जलस्तर पहले ही हालात को चुनौतीपूर्ण बना चुका है।

    अगले 24 से 48 घंटे विंध्य और मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से के लिए अहम माने जा रहे हैं। यदि बारिश का जोर बरकरार रहता है तो बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। प्रशासन ने लोगों से नदी किनारे और जलभराव वाले क्षेत्रों में जाने से बचने की अपील की है।

  • ट्रेलर में क्यों नहीं दिखे सनी देओल? रामायण पार्ट 1 के अंत में मिलेगा बड़ा जवाब

    ट्रेलर में क्यों नहीं दिखे सनी देओल? रामायण पार्ट 1 के अंत में मिलेगा बड़ा जवाब


    नई दिल्ली। रणबीर कपूर और साई पल्लवी स्टारर फिल्म रामायण इन दिनों दर्शकों के बीच जबरदस्त चर्चा का विषय बनी हुई है। नितेश तिवारी के निर्देशन में तैयार हो रही इस फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम की भूमिका में नजर आएंगे जबकि साई पल्लवी माता सीता का किरदार निभा रही हैं। वहीं साउथ के सुपरस्टार यश फिल्म में रावण की भूमिका निभाते दिखाई देंगे। फिल्म को लेकर लगातार सामने आ रहे अपडेट के बीच अब इसके पहले पार्ट के क्लाइमैक्स से जुड़ी एक बड़ी जानकारी सामने आई है जो दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ा सकती है।

    फिल्म का ट्रेलर सामने आने के बाद से ही एक सवाल लगातार चर्चा में है कि आखिर सनी देओल कहां हैं। फिल्म में सनी देओल के हनुमान का किरदार निभाने की जानकारी पहले से सामने आ चुकी है लेकिन ट्रेलर में उनकी कोई स्पष्ट झलक देखने को नहीं मिली। इसी वजह से फैंस के बीच यह सवाल उठ रहा था कि मेकर्स ने हनुमान के किरदार को ट्रेलर से क्यों दूर रखा है। अब सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक इसका जवाब फिल्म के क्लाइमैक्स में मिल सकता है।

    रिपोर्ट में दावा किया गया है कि रामायण पार्ट 1 का अंत भगवान हनुमान की झलक के साथ किया जा सकता है। यानी जिस किरदार को लेकर दर्शकों में सबसे ज्यादा उत्सुकता है उसकी पहली बड़ी झलक फिल्म खत्म होने के ठीक पहले दिखाई जा सकती है। यह सीन इतना महत्वपूर्ण हो सकता है कि मेकर्स इसे फिल्म का आखिरी सीन रखने के अलावा मिड क्रेडिट या पोस्ट क्रेडिट सीन के रूप में भी पेश कर सकते हैं।

    अगर ऐसा होता है तो सिनेमाघरों में दर्शकों के लिए यह बड़ा सरप्राइज साबित हो सकता है। फिल्म की कहानी के अगले हिस्से को लेकर भी उत्सुकता बढ़ाने के लिए यह तरीका अपनाया जा सकता है। खासतौर पर सनी देओल की लोकप्रियता और हनुमान के किरदार से जुड़ी भावनात्मक अपील को देखते हुए क्लाइमैक्स में उनकी झलक दर्शकों के बीच जबरदस्त उत्साह पैदा कर सकती है।

    रामायण को दो भागों में रिलीज करने की योजना है। पहला भाग इस साल दिवाली के मौके पर दुनियाभर के सिनेमाघरों में लाने की तैयारी है जबकि दूसरे भाग को अगले साल रिलीज किया जाना है। ऐसे में पहले पार्ट के अंत में हनुमान की एंट्री कहानी को अगले भाग से जोड़ने के लिए अहम कड़ी बन सकती है।

    फिल्म में रणबीर कपूर और साई पल्लवी के साथ यश और सनी देओल जैसे बड़े सितारों की मौजूदगी ने पहले ही इसके प्रति दर्शकों की उम्मीदें काफी बढ़ा दी हैं। अब अगर क्लाइमैक्स में सनी देओल के हनुमान का परिचय कराया जाता है तो यह फिल्म के सबसे चर्चित पलों में से एक बन सकता है। हालांकि क्लाइमैक्स में हनुमान की झलक को लेकर सामने आई जानकारी फिलहाल रिपोर्ट्स पर आधारित है और आधिकारिक तौर पर मेकर्स की ओर से इसकी पुष्टि नहीं हुई है।

  • स्किन केयर रूटीन में शामिल करें एवोकाडो, पोषण और नमी से त्वचा को बना सकता है ज्यादा सॉफ्ट और हेल्दी

    स्किन केयर रूटीन में शामिल करें एवोकाडो, पोषण और नमी से त्वचा को बना सकता है ज्यादा सॉफ्ट और हेल्दी


    नई दिल्ली । त्वचा की देखभाल के लिए लोग बाजार में मिलने वाले महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं लेकिन कई प्राकृतिक चीजें भी स्किन केयर रूटीन में उपयोगी साबित हो सकती हैं। इन्हीं में से एक है एवोकाडो जो अपने पोषक तत्वों और हेल्दी फैट्स के कारण काफी लोकप्रिय है। एवोकाडो को खाने के साथ साथ त्वचा की देखभाल में भी शामिल किया जा सकता है। इसमें मौजूद पोषक तत्व त्वचा को नमी देने और उसे मुलायम बनाए रखने में सहायक हो सकते हैं। खासतौर पर जिन लोगों की त्वचा रूखी रहती है उनके लिए एवोकाडो आधारित घरेलू स्किन केयर उपाय उपयोगी हो सकते हैं। हालांकि हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है इसलिए किसी भी चीज को चेहरे पर लगाने से पहले सावधानी रखना जरूरी है।

    एवोकाडो में प्राकृतिक रूप से हेल्दी फैट्स पाए जाते हैं जो त्वचा की नमी बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। रूखी और बेजान त्वचा में नमी की कमी होने पर चेहरा खिंचा हुआ और थका हुआ दिखाई देने लगता है। ऐसे में एवोकाडो का गूदा त्वचा को मॉइस्चराइज करने वाले घरेलू उपाय के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। पके हुए एवोकाडो को अच्छी तरह मैश करके चेहरे पर हल्के हाथों से लगाया जा सकता है और कुछ समय बाद साफ पानी से धोया जा सकता है। यह त्वचा को मुलायम महसूस कराने में मदद कर सकता है।

    त्वचा की देखभाल के लिए एवोकाडो का इस्तेमाल अन्य प्राकृतिक चीजों के साथ भी किया जाता है। उदाहरण के लिए इसे थोड़ी मात्रा में शहद के साथ मिलाकर फेस पैक के रूप में लगाया जा सकता है। शहद त्वचा को नमी देने वाले गुणों के लिए जाना जाता है और एवोकाडो के साथ इसका संयोजन रूखी त्वचा के लिए उपयोगी महसूस हो सकता है। इस तरह के घरेलू फेस पैक को चेहरे पर बहुत अधिक देर तक रखने की जरूरत नहीं होती। लगाने से पहले त्वचा को साफ कर लेना चाहिए और बाद में चेहरे को सामान्य पानी से धोना बेहतर रहता है।

    अगर त्वचा बहुत ज्यादा रूखी दिखाई देती है तो एवोकाडो को दही जैसे हल्के प्राकृतिक पदार्थों के साथ मिलाकर भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे त्वचा को ताजगी और नमी का एहसास मिल सकता है। हालांकि संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को किसी भी नए मिश्रण का उपयोग करने से पहले पैच टेस्ट जरूर करना चाहिए। चेहरे पर सीधे कोई भी घरेलू नुस्खा लगाने से पहले हाथ के छोटे हिस्से पर जांच करना एक सुरक्षित तरीका हो सकता है। जलन खुजली लालिमा या किसी भी तरह की परेशानी महसूस होने पर उसका इस्तेमाल तुरंत बंद कर देना चाहिए।

    एवोकाडो का लाभ केवल बाहर से लगाने तक सीमित नहीं है। संतुलित आहार में पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करना भी त्वचा के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण होता है। पर्याप्त पानी पीना संतुलित भोजन करना अच्छी नींद लेना और नियमित रूप से त्वचा की सफाई करना हेल्दी स्किन के लिए जरूरी आदतें हैं। केवल एक घरेलू चीज से त्वचा की हर समस्या खत्म होने की उम्मीद करना सही नहीं है लेकिन सही जीवनशैली के साथ प्राकृतिक चीजों का संतुलित उपयोग स्किन केयर रूटीन को बेहतर बना सकता है।

    एवोकाडो को स्किन केयर का हिस्सा बनाते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि प्राकृतिक होने का मतलब यह नहीं है कि हर चीज हर व्यक्ति की त्वचा के लिए पूरी तरह उपयुक्त होगी। अगर लंबे समय से मुंहासे एलर्जी खुजली या अन्य त्वचा संबंधी समस्या बनी हुई है तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर होता है। सही देखभाल और संतुलित दिनचर्या के साथ एवोकाडो को अपने ब्यूटी रूटीन में शामिल कर त्वचा को प्राकृतिक पोषण और नमी देने की कोशिश की जा सकती है।

  • सुबह शहद-नींबू पानी पीना है वेट लॉस का फॉर्मूला? जानिए क्या कहता है विज्ञान

    सुबह शहद-नींबू पानी पीना है वेट लॉस का फॉर्मूला? जानिए क्या कहता है विज्ञान


    नई दिल्ली। आज के समय में बढ़ता वजन और पेट की चर्बी लोगों के लिए बड़ी चिंता बन चुके हैं। वजन कम करने के लिए लोग डाइट से लेकर एक्सरसाइज तक कई तरीके अपनाते हैं। इसी बीच सुबह खाली पेट गुनगुने पानी में नींबू और शहद मिलाकर पीने का चलन भी काफी बढ़ गया है। इसे अक्सर फैट बर्निंग या डिटॉक्स ड्रिंक के तौर पर प्रचारित किया जाता है। दावा किया जाता है कि रोजाना इसका सेवन करने से शरीर में जमा अतिरिक्त चर्बी तेजी से कम होती है और मेटाबॉलिज्म भी बेहतर होता है। लेकिन सवाल यह है कि क्या वाकई यह पेय अकेले वजन कम कर सकता है?

    विशेषज्ञों के मुताबिक नींबू और शहद दोनों में कुछ पोषक और जैविक गुण जरूर पाए जाते हैं लेकिन इनके मिश्रण को सीधे तौर पर शरीर की चर्बी पिघलाने वाली ड्रिंक मानना सही नहीं है। अब तक ऐसा मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है जो यह साबित करे कि नींबू और शहद का पानी शरीर में जमा फैट को सीधे बर्न करता है। वजन घटाने की प्रक्रिया कई चीजों पर निर्भर करती है और इसमें पूरे दिन के खान-पान के साथ शारीरिक गतिविधि और जीवनशैली की अहम भूमिका होती है।

    नींबू पानी का एक फायदा यह जरूर हो सकता है कि इसमें कैलोरी बहुत कम होती है। अगर कोई व्यक्ति मीठे पेय या ज्यादा कैलोरी वाले ड्रिंक की जगह सादा नींबू पानी पीता है तो उसकी कुल कैलोरी खपत कम हो सकती है। पर्याप्त पानी पीना भी शरीर के सामान्य कामकाज के लिए जरूरी है। पानी पीने से शरीर हाइड्रेट रहता है और कुछ लोगों को भोजन से पहले पानी लेने पर पेट भरा हुआ महसूस हो सकता है। इससे जरूरत से ज्यादा खाने से बचने में मदद मिल सकती है।

    हालांकि वजन घटाने के नाम पर नींबू पानी में अधिक मात्रा में शहद मिलाना उल्टा असर डाल सकता है। शहद प्राकृतिक जरूर है लेकिन इसमें कैलोरी और शुगर मौजूद होती है। इसलिए अगर कोई व्यक्ति रोजाना अपने पेय में ज्यादा शहद डालता है तो उसकी कुल कैलोरी खपत बढ़ सकती है। ऐसे में वेट लॉस की कोशिश प्रभावित हो सकती है। अगर किसी को नींबू पानी पसंद है तो इसे बिना शहद या बहुत कम मात्रा में शहद के साथ लिया जा सकता है।

    वास्तविक वेट लॉस के लिए किसी एक ड्रिंक पर निर्भर रहने के बजाय पूरे दिन की डाइट पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है। भोजन में पोषक तत्वों का संतुलन बनाए रखना और जरूरत के अनुसार कैलोरी लेना महत्वपूर्ण है। इसके साथ नियमित वॉकिंग रनिंग योग या अन्य शारीरिक गतिविधियां भी वजन नियंत्रित करने में मदद करती हैं। पर्याप्त नींद और तनाव को नियंत्रित रखना भी स्वस्थ वजन बनाए रखने की प्रक्रिया का हिस्सा है।

    इसलिए शहद-नींबू पानी को चमत्कारी फैट बर्निंग ड्रिंक मानने के बजाय इसे एक कम कैलोरी वाले पेय के रूप में देखना बेहतर है। सिर्फ इसे पीने से पेट की चर्बी तेजी से कम होने की उम्मीद करना सही नहीं होगा। वजन घटाने का टिकाऊ तरीका संतुलित भोजन नियमित गतिविधि पर्याप्त पानी अच्छी नींद और लंबे समय तक स्वस्थ आदतों को अपनाना है।

  • युवाओं में अचानक मौत की वजह क्या? 25 अस्पतालों की स्टडी में सामने आए ये बड़े जोखिम

    युवाओं में अचानक मौत की वजह क्या? 25 अस्पतालों की स्टडी में सामने आए ये बड़े जोखिम


    नई दिल्ली। जिम में कसरत करते हुए या डांस के दौरान अचानक किसी युवा की मौत की खबर अक्सर लोगों को हैरान कर देती है. देखने में पूरी तरह फिट नजर आने वाले व्यक्ति के साथ आखिर ऐसा कैसे हो सकता है. भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद यानी आईसीएमआर के एक अध्ययन ने इस सवाल से जुड़े कई अहम संकेत दिए हैं. शोधकर्ताओं के मुताबिक कम उम्र में दिल का दौरा और रक्त के थक्के बनने के पीछे कई जोखिम कारक जिम्मेदार हो सकते हैं. इनमें पहले रक्त का थक्का बनना परिवार में ऐसी समस्या का इतिहास दूसरी बीमारियां और धूम्रपान जैसे कारण प्रमुख हैं.

    यह अध्ययन आईसीएमआर के राष्ट्रीय महामारी विज्ञान संस्थान के शोधकर्ताओं ने देश के 25 बड़े अस्पतालों में किया. शोध में 18 से 45 वर्ष की उम्र के 767 मरीजों को शामिल किया गया. खास बात यह रही कि अध्ययन में ऐसे मरीजों को देखा गया जिन्हें समय पर इलाज मिलने के बाद बचा लिया गया था. इसका उद्देश्य यह समझना था कि अपेक्षाकृत कम उम्र में दिल का दौरा पड़ने या शरीर में रक्त के थक्के बनने के पीछे कौन से कारक भूमिका निभा सकते हैं.

    अध्ययन में सामने आया कि जिन लोगों को पहले भी रक्त का थक्का बनने की समस्या हो चुकी थी उनमें दिल का दौरा पड़ने का जोखिम बहुत अधिक पाया गया. ऐसे लोगों में यह खतरा करीब 60 गुना तक ज्यादा देखा गया. वहीं जिन मरीजों को पहले से कोई दूसरी बीमारी थी उनमें दिल के दौरे का जोखिम 4.6 गुना अधिक पाया गया.

    धूम्रपान करने वालों के लिए भी अध्ययन में गंभीर चेतावनी सामने आई. ऐसे लोगों में दिल के दौरे का खतरा 3.5 गुना अधिक पाया गया. इसके अलावा जिन लोगों के परिवार में पहले किसी सदस्य को रक्त का थक्का बनने की समस्या रही थी उनमें भी दिल के दौरे का जोखिम सामान्य लोगों की तुलना में करीब 3.3 गुना ज्यादा पाया गया.

    शोध में कोविड से जुड़ी जानकारी भी सामने आई. जिन लोगों को कोविड संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था उनमें रक्त का थक्का बनने की समस्या देखी गई. हालांकि अध्ययन के मुताबिक कोविड वैक्सीन से लोगों को इस तरह का नुकसान होने का प्रमाण नहीं मिला.

    अध्ययन में शामिल 767 मरीजों में 432 यानी करीब 56.3 प्रतिशत लोगों को दिल का दौरा पड़ा था. वहीं 198 यानी करीब 25.8 प्रतिशत मरीजों में दिमाग की नस में रक्त का प्रवाह रुकने से जुड़ी समस्या सामने आई. दोनों तरह के मामलों को मिलाकर यह संख्या अध्ययन में शामिल मरीजों का बड़ा हिस्सा थी.

    उम्र के लिहाज से भी अध्ययन महत्वपूर्ण है. कुल मरीजों में 614 यानी करीब 80.1 प्रतिशत की उम्र 31 से 45 वर्ष के बीच थी. इसका मतलब यह है कि ऐसे जोखिम केवल बहुत अधिक उम्र के लोगों तक सीमित नहीं हैं. युवाओं में भी यदि पहले से कोई जोखिम मौजूद है तो उसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है.

    विशेषज्ञों के मुताबिक इसका मतलब यह नहीं है कि जिम जाना या डांस करना अपने आप में खतरनाक है. नियमित शारीरिक गतिविधि सामान्य तौर पर स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होती है. लेकिन जिन लोगों में पहले से हृदय संबंधी जोखिम या रक्त के थक्के से जुड़ी समस्या का इतिहास है उन्हें अपनी क्षमता के अनुसार व्यायाम करना चाहिए और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए.

    इस अध्ययन से एक अहम संदेश यह मिलता है कि अचानक होने वाली घटनाओं के पीछे कई बार पहले से मौजूद जोखिम छिपे हो सकते हैं. इसलिए शरीर के संकेतों को नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते जांच और चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है. खासकर धूम्रपान करने वालों और परिवार में ऐसी बीमारी का इतिहास रखने वाले लोगों को अपनी सेहत को लेकर ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.

  • बड़े स्टार नहीं बड़ा बजट नहीं फिर भी बॉक्स ऑफिस पर छाई हनुमान अंश, 26वें दिन 50 करोड़ पार

    बड़े स्टार नहीं बड़ा बजट नहीं फिर भी बॉक्स ऑफिस पर छाई हनुमान अंश, 26वें दिन 50 करोड़ पार


    नई दिल्ली। बॉक्स ऑफिस पर इस समय फिल्म हनुमान अंश की सफलता ने सभी को हैरान कर दिया है. अगस्त में रिलीज हुई इस फिल्म ने शुरुआत में बेहद धीमी रफ्तार पकड़ी लेकिन बाद में इसकी कमाई ने ऐसी रफ्तार पकड़ी कि बड़े बजट की फिल्मों को भी पीछे छोड़ दिया. करीब 2 करोड़ रुपये की लागत में तैयार हुई हनुमान अंश ने 26 दिनों में 50 करोड़ रुपये से ज्यादा का नेट कलेक्शन कर लिया है. कम बजट और बिना बड़े सितारों वाली इस फिल्म की कमाई को इंडस्ट्री में एक बड़ी मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है.

    हनुमान अंश 7 अगस्त को देशभर में 355 स्क्रीन्स पर रिलीज हुई थी. रिलीज के पहले दिन फिल्म ने केवल 10 लाख रुपये की कमाई की थी. शुरुआती आंकड़ों को देखकर ऐसा नहीं लग रहा था कि फिल्म आगे चलकर इतना बड़ा कारोबार कर पाएगी. पहले 15 दिनों तक भी फिल्म की रफ्तार काफी सुस्त रही. कई दिनों में इसकी कमाई महज कुछ लाख रुपये तक सीमित रही.

    इसके बाद फिल्म की कहानी पूरी तरह बदल गई. तीसरे शनिवार को हनुमान अंश की कमाई में बड़ा उछाल देखने को मिला और फिल्म ने करीब 85 लाख रुपये जुटाए. अगले दिन रविवार को इसकी कमाई सीधे 2.20 करोड़ रुपये तक पहुंच गई. शुरुआती दो हफ्तों में जहां फिल्म करीब 40 लाख रुपये ही कमा पाई थी वहीं तीसरे हफ्ते में इसने लगभग 10 करोड़ रुपये का कारोबार कर लिया. इसके साथ ही फिल्म की कुल कमाई करीब 10.40 करोड़ रुपये तक पहुंच गई.

    फिल्म की असली रफ्तार तीसरे हफ्ते के बाद देखने को मिली. उस समय सिनेमाघरों में कई दूसरी बड़ी फिल्में भी मौजूद थीं और उन्हें ज्यादा स्क्रीन मिली हुई थीं. इसके बावजूद हनुमान अंश ने दर्शकों के बीच अपनी पकड़ मजबूत कर ली. 21वें दिन के बाद फिल्म की कमाई में लगातार तेजी देखने को मिली.

    चौथे हफ्ते में फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर ऐसा प्रदर्शन किया जिसकी शायद किसी ने उम्मीद नहीं की थी. कई दिनों में फिल्म ने 6 से 7 करोड़ रुपये तक की कमाई की. चौथे रविवार को तो फिल्म ने करीब 12 करोड़ रुपये का शानदार कलेक्शन किया. अकेले चौथे हफ्ते में हनुमान अंश ने लगभग 43.23 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन कर लिया.

    26वें दिन फिल्म ने 50 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया. इसके बाद चौथे मंगलवार को भी फिल्म ने करीब 8 करोड़ रुपये की कमाई की और इसकी कुल नेट कमाई 53.63 करोड़ रुपये तक पहुंच गई. महज 2 करोड़ रुपये के बजट से बनी इस फिल्म का यह कारोबार करीब 25 गुना से ज्यादा बैठता है.

    हनुमान अंश की सफलता इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि फिल्म को शुरुआत में दर्शकों का बहुत बड़ा समर्थन नहीं मिला था. लेकिन धीरे धीरे माउथ पब्लिसिटी ने माहौल बदल दिया. फिल्म की कहानी और विषय ने दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचना शुरू किया और कम स्क्रीन के बावजूद इसकी कमाई बढ़ती चली गई.

    फिल्म की यह सफलता बताती है कि बॉक्स ऑफिस पर सिर्फ बड़ा बजट या बड़े सितारे ही सफलता की गारंटी नहीं होते. मजबूत कहानी और दर्शकों से जुड़ाव भी किसी फिल्म को लंबी रेस का खिलाड़ी बना सकता है. अगर हनुमान अंश की रफ्तार आने वाले दिनों में भी बनी रहती है तो इसके 100 करोड़ रुपये के आंकड़े की ओर बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है.

  • क्रिटिकल मिनरल्स पर मिलकर काम करेंगे भारत-अमेरिका, जी20 बैठक में हुई बड़ी डील

    क्रिटिकल मिनरल्स पर मिलकर काम करेंगे भारत-अमेरिका, जी20 बैठक में हुई बड़ी डील


    एशविले।
    भारत और अमेरिका (India and America) ने अपने लंबे समय से चले आ रहे आर्थिक संबंधों के तहत महत्वपूर्ण खनिजों पर सहयोग को और गहरा करने पर सहमति जताई है। यह सहमति वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) और अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट (US Treasury Secretary Scott Bessent) के बीच हुई बातचीत के बाद बनी है।

    दोनों नेताओं की मुलाकात सोमवार को नॉर्थ कैरोलिना (North Carolina) के एशविले में जी20 वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की बैठक (G 20 Meeting) के दौरान हुई। इस बैठक में महत्वपूर्ण खनिजों और सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला को भारत-अमेरिका आर्थिक संवाद के केंद्र में रखा गया। दोनों पक्षों ने दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंधों को स्वीकार किया और कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए प्रतिबद्धता जताई।

    केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण ने अमेरिकी वित्त मंत्री बेसेंट को इस साल के अंत में नई दिल्ली आने का न्योता दिया, ताकि भारत-अमेरिका आर्थिक और वित्तीय साझेदारी बैठक हो सके। इस प्रस्तावित दौरे से दोनों सरकारों को आर्थिक और वित्तीय सहयोग की समीक्षा करने और उन क्षेत्रों की पहचान करने का एक और मौका मिलेगा, जिनमें साझेदारी का विस्तार किया जा सकता है।

    भारत के वित्त मंत्रालय के अनुसार, बेसेंट ने जी7 प्लस ढांचे में भारत की भूमिका की सराहना की। उन्होंने महत्वपूर्ण खनिजों पर जी7 के नेतृत्व वाले संवादों में भारत की भागीदारी का भी स्वागत किया।


    महत्वपूर्ण खनिजों पर दोनों देश क्यों साथ आए?

    मंत्रालय ने बताया कि ये चर्चाएं आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करने और शोध व तकनीक साझा करने के उद्देश्य से की जा रही हैं। महत्वपूर्ण खनिज प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक और रणनीतिक चर्चाओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए हैं। एशविले में हुई बैठक ने भारत और अमेरिका को इस मुद्दे को अपनी व्यापक वित्तीय और आर्थिक साझेदारी से जोड़ने का अवसर दिया।

    सीतारमण-बेसेंट की बैठक ने इस बात को भी रेखांकित किया कि दोनों सरकारें आर्थिक मामलों पर नियमित उच्च-स्तरीय संपर्क बनाए रखने को कितना महत्व देती हैं। उनकी यह चर्चा ऐसे समय में हुई जब वित्त मंत्री और केंद्रीय बैंक गवर्नर वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और विकास व वित्तीय सहयोग को मजबूत करने के तरीकों पर विचार करने के लिए एशविले में जुटे थे।


    भारत के लिए यह सहयोग क्यों अहम है?

    भारत के लिए महत्वपूर्ण खनिज संवादों में भागीदारी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के साथ मिलकर आपूर्ति-श्रृंखला सुरक्षा, शोध और तकनीक पर काम करने का एक अवसर प्रदान करती है। अमेरिका के लिए, भारत की भागीदारी इन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण संसाधनों से जुड़े प्रयासों में एक बड़ी अर्थव्यवस्था और एक महत्वपूर्ण उभरते बाजार को जोड़ती है।

    वित्त मंत्री बेसेंट को दिया गया न्योता इस बात का भी संकेत है कि आर्थिक और वित्तीय साझेदारी नई दिल्ली और वाशिंगटन के बीच जुड़ाव का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनी रहेगी। यह व्यवस्था दोनों देशों को मंत्रिस्तरीय स्तर पर व्यापक आर्थिक और वित्तीय मुद्दों पर चर्चा करने की अनुमति देती है।


    नई दिल्ली में बैठक कब होगी?

    इस साल के अंत में नई दिल्ली में प्रस्तावित बैठक एशविले वार्ता के बाद इन परामर्शों को जारी रखेगी। वित्त मंत्रालय ने नई दिल्ली बैठक की कोई तारीख नहीं बताई। उसने यह भी खुलासा नहीं किया कि दोनों देश महत्वपूर्ण खनिजों को लेकर किन विशिष्ट पहलों को आगे बढ़ा सकते हैं।


    महत्वपूर्ण खनिज आखिर क्यों जरूरी हैं?

    महत्वपूर्ण खनिजों का उपयोग कई उद्योगों में होता है, जिनमें स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स, दूरसंचार, रक्षा विनिर्माण और उन्नत तकनीक शामिल हैं। सरकारें अब अपने स्रोतों में विविधता लाने और केंद्रित आपूर्ति श्रृंखला के कारण होने वाले व्यवधानों के जोखिम को कम करने पर तेजी से ध्यान दे रही हैं।

  • देश में फिर सक्रिय हुआ मानसून…. 19 राज्यों में एक सप्ताह भारी बारिश के आसार… अलर्ट जारी

    देश में फिर सक्रिय हुआ मानसून…. 19 राज्यों में एक सप्ताह भारी बारिश के आसार… अलर्ट जारी


    नई दिल्ली।
    दक्षिण-पश्चिम मानसून (South-West Monsoon) एक बार फिर देश के अधिकांश हिस्सों में सक्रिया हुआ है। इसके प्रभाव से उत्तराखंड से लेकर ओडिशा, छत्तीसगढ़ और पूर्वोत्तर के राज्यों में भारी बारिश हुई है। उत्तराखंड में अलग-अलग घटनाओं में 3 बच्चों समेत 11 लोगों की मौत हो गई है, जबकि असम के गुवाहाटी में भूस्खलन में एक ही परिवार के तीन सदस्य समेत चार जिंदा दफन हो गए। मौसम विभाग ने सक्रिय मानसून के चलते 7 सितंबर तक हिमाचल प्रदेश और हरियाणा समेत कम से कम 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश में भारी बारिश की चेतावनी (Heavy rain warning) दी है। छत्तीसगढ़, ओडिशा, बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में तेज बारिश होने की संभावना है।


    भूस्खलन के कारण जनहानि

    हल्द्वानी से मिली जानकारी के मुताबिक, अल्मोड़ा जिले के हवालबाग ब्लॉक के वडयूड़ा गांव में सोमवार रात भूस्खलन की चपेट में आए घर में सो रही एक महिला और उसके दो बच्चों की दबने से मौत हो गई। जिले के धार की तूनी क्षेत्र में देर रात पहाड़ी से आए मलबे की चपेट में आने से दो लोगों की जान चली गई, जबकि भीमताल बाईपास पर नाले में बहने से चार साल की बच्ची की जान चली गई।


    नदी के उफान में बह गईं मां-बेटी

    देहरादून के प्रेमनगर क्षेत्र में मंगलवार तड़के बरसाती रपटे में आए तेज बहाव से दो गाड़ियां बह गई। इसमें तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि दो लोगों को बचा लिया गया। कोटद्वार में कोल्हू नदी के उफान में महिला और उसकी एक साल की बेटी बह गई।


    उत्तराखंड में नदियां उफनाई, रास्ते बंद

    उत्तराखंड में कई नदियां उफान पर हैं। ऊधमसिंह नगर जिले में बारिश से सभी नदियों का जल स्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है। नानकसागर बांध से 4000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। शारदा नदी का जलस्तर मंगलवार को एक लाख क्यूसेक से अधिक होने के कारण बैराज पर चार पहिया वाहनों का संचालन रोक दिया गया। दोपहर दो बजे नदी का जलस्तर 1,48,813 क्यूसेक दर्ज किया गया।


    जम्मू-कश्मीर में बारिश से कई रास्ते बाधित

    जम्मू-कश्मीर के कई जिलों में मंगलवार को भारी बारिश हुई। पुंछ जिले में कई नाले उफान पर आ गए। पुंछ-मेंढर मार्ग पर गांव मंगनाड़ में मंगनाड़ नाले के उफान पर आने से मार्ग करीब दो घंटे बाधित रहा। इससे वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। कठुआ जिले के बिलावर और रामकोट क्षेत्रों में भी बारिश हुई। पिछले 24 घंटे में कठुआ में 73 मिलीमीटर, कटड़ा में 62, पुंछ में 38.5 मिमी बारिश हुई।


    नदी का जलस्तर बढ़ा, 6 बच्चों समेत 10 फंसे

    जम्मू-कश्मीर के ही राजोरी जिले में मंगलवार को हुई भारी बारिश के बीच विभिन्न इलाकों में नदी-नालों का जलस्तर अचानक बढ़ गया। इसी दौरान बढून क्षेत्र में जमौला नदी में जलस्तर बढ़ने से 6 बच्चों समेत 10 लोग नदी के बीच फंस गए। सूचना मिलते ही पुलिस और एसडीआरएफ की टीमों ने तत्काल संयुक्त बचाव अभियान चलाकर सभी 10 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। जमौला नदी में पानी बढ़ने से कुछ लोग अचानक उसमें फंस गए थे। पुलिस जवानों और एसडीआरएफ टीम ने तुरंत पहुंचकर राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। संयुक्त टीम ने सावधानीपूर्वक कार्रवाई करते हुए नदी में फंसे 10 लोगों, जिनमें 6 बच्चे भी शामिल थे, को सुरक्षित बाहर निकाला।


    कालका-शिमला ट्रैक 13 तक बंद

    हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश के कारण कालका-शिमला रेलवे ट्रैक पर ब्रिज नंबर 57 के पास मिट्टी बहने से नैरो गेज ट्रेनों का संचालन बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने इस ट्रैक पर चलने वाली सभी ट्रेनों को 13 सितंबर तक रद्द कर दिया है। क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत और ट्रैक को सुरक्षित बनाने का काम युद्धस्तर पर चल रहा है।