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  • मेडल से भरी झोली फिर भी नौकरी नहीं, थ्रोबॉल चैंपियन अमरदीप की कहानी ने CM सोरेन का खींचा ध्यान

    मेडल से भरी झोली फिर भी नौकरी नहीं, थ्रोबॉल चैंपियन अमरदीप की कहानी ने CM सोरेन का खींचा ध्यान


    नई दिल्ली। झारखंड के 29 वर्षीय थ्रोबॉल खिलाड़ी अमरदीप कुमार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन करते हुए चार गोल्ड मेडल अपने नाम किए हैं लेकिन इन उपलब्धियों के बावजूद उनकी जिंदगी आज भी संघर्षों से गुजर रही है। सरकारी नौकरी और प्रोत्साहन राशि नहीं मिलने के कारण अमरदीप को परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए रांची के अरगोड़ा चौक पर सब्जी बेचनी पड़ रही है। इसके अलावा वह कैब भी चलाते हैं। खिलाड़ी की स्थिति सामने आने के बाद अब झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मामले का संज्ञान लिया है और खेल विभाग को इस पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

    अमरदीप ने कम उम्र से ही थ्रोबॉल को अपना करियर बनाया। कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया और लगातार शानदार प्रदर्शन किया। वर्ष 2015 में मलेशिया में आयोजित एशियन जूनियर थ्रोबॉल चैंपियनशिप में उन्होंने अपना पहला अंतरराष्ट्रीय गोल्ड मेडल जीता। इसके बाद वर्ष 2017 में काठमांडू में हुई इंडो नेपाल थ्रोबॉल चैंपियनशिप में भी वह स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम का हिस्सा रहे। वर्ष 2019 में बेंगलुरु में आयोजित साउथ एशियन थ्रोबॉल चैंपियनशिप में भी उन्होंने गोल्ड अपने नाम किया। वर्ष 2026 में रांची में आयोजित प्रतियोगिता में एक बार फिर अमरदीप ने स्वर्ण पदक हासिल किया। इस तरह उनके खाते में देश के लिए चार अंतरराष्ट्रीय गोल्ड मेडल हैं।

    इतनी बड़ी खेल उपलब्धियों के बावजूद अमरदीप को सरकारी नौकरी नहीं मिल सकी। उनका कहना है कि वह वर्ष 2016 से प्रोत्साहन राशि के लिए सरकारी स्तर पर प्रयास कर रहे हैं। वहीं वर्ष 2020 से नौकरी के लिए कोशिश शुरू की थी लेकिन इसी दौरान कोरोना महामारी के कारण प्रक्रिया प्रभावित हुई। वर्ष 2022 के बाद उन्होंने फिर लगातार प्रयास किए लेकिन अब तक उन्हें सफलता नहीं मिली। उनका दावा है कि नौकरी और कैश अवॉर्ड से जुड़े उनके आवेदन अभी भी लंबित हैं।

    अमरदीप का कहना है कि उन्होंने अपनी समस्या सरकार के सामने रखने में कोई कसर नहीं छोड़ी। वह राज्य के पूर्व खेल मंत्री हफीजुल हसन से भी मुलाकात कर चुके हैं। उनका कहना है कि उनके कई साथी खिलाड़ी दूसरे राज्यों से हैं और वहां उन्हें सरकारी नौकरी सहित कई सुविधाएं मिली हैं। इसके मुकाबले झारखंड में उन्हें अब तक अपने आवेदन पर राहत का इंतजार है।

    परिवार की आर्थिक स्थिति भी अमरदीप के संघर्ष को और मुश्किल बना देती है। उनके पिता सब्जी बेचकर परिवार का खर्च चलाते हैं और अमरदीप भी उनके काम में हाथ बंटाते हैं। उनकी मां गृहिणी हैं और वह करीब 35 किलो सब्जी सिर पर रखकर घर-घर बेचती हैं। बड़े भाई फास्ट फूड का स्टॉल चलाकर परिवार की आमदनी में सहयोग करते हैं। अमरदीप खुद भी जरूरत पड़ने पर कैब चलाते हैं। कई बार रात में कैब चलाने के बाद सुबह अभ्यास के लिए पहुंचना उनके लिए चुनौती बन जाता है।

    अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के लिए भी अमरदीप को आर्थिक परेशानियों से जूझना पड़ा। मलेशिया जाने के दौरान उन्हें करीब 65 हजार रुपये का कर्ज लेना पड़ा था। झारखंड थ्रोबॉल एसोसिएशन ने भी उनके खर्च में मदद की और करीब आधी राशि का भार उठाया। इसके बावजूद आर्थिक कठिनाइयों के बीच अमरदीप ने खेल से नाता नहीं तोड़ा है।

    अब उनकी कहानी सामने आने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने खेल विभाग को मामले को देखने और जरूरी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद खेल मंत्री सुदिव्य सोनू ने भी कहा कि सरकार मौजूदा खेल नीति के आधार पर अमरदीप को नौकरी देने की संभावनाएं तलाश रही है। साथ ही रोजगार के दूसरे विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है।

    अमरदीप का संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है। वह अक्टूबर 2026 के आखिर में श्रीलंका में होने वाली प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करने की तैयारी कर रहे हैं। एक ओर देश के लिए पदक जीतने का जुनून कायम है तो दूसरी ओर परिवार चलाने की जिम्मेदारी भी उनके कंधों पर है। अमरदीप की कहानी उन खिलाड़ियों की चुनौती को सामने लाती है जो अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश के लिए पदक तो जीतते हैं लेकिन अपने भविष्य की सुरक्षा के लिए उन्हें आज भी संघर्ष करना पड़ता है।

  • नेपाल त्रासदी: मलबे से अब भी निकल रहे शव, अब तक 1093 लोगों की मौत, 4 हजार से ज्यादा लापता

    नेपाल त्रासदी: मलबे से अब भी निकल रहे शव, अब तक 1093 लोगों की मौत, 4 हजार से ज्यादा लापता


    काठमांडू।
    नेपाल (Nepal) में आई भीषण बाढ़ (Severe floods) और भूस्खलन (Landslides) ने भारी तबाही मचाई है. हादसे के आठवें दिन भी राहत और बचाव का काम जारी है. मलबे के बीच से अब भी लोगों को बाहर निकाला जा रहा है. नेपाल पुलिस के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, मंगलवार रात 8 बजे तक इस आपदा में 1093 लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं, चार हजार से ज्यादा लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।

    दरअसल, यह हादसा 26 अगस्त को उत्तरी नेपाल में हुआ था. तेज बारिश के बाद कई इलाकों में अचानक बाढ़ आ गई. इसके साथ ही बड़े पैमाने पर भूस्खलन हुआ. देखते ही देखते पानी और मलबे ने गांवों और कस्बों को अपनी चपेट में ले लिया. कई जगहों पर घर, सड़कें और दूसरी इमारतें मलबे में दब गईं।


    तीन महीने के लिए घोषित किया गया आपदा क्षेत्र

    नेपाल सरकार ने प्रभावित इलाके को कम से कम तीन महीने के लिए आपदा संकट क्षेत्र घोषित किया है. सरकार का कहना है कि इससे राहत और बचाव के लिए जरूरी संसाधन तेजी से पहुंचाए जा सकेंगे. साथ ही राहत टीमों की तैनाती भी बेहतर तरीके से की जा सकेगी।

    सरकार अब बचाव के साथ राहत और पुनर्वास पर भी जोर दे रही है. प्रभावित इलाकों में बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी और बचाव दल लगाए गए हैं. टीमें लगातार मलबे में लोगों की तलाश कर रही हैं. लापता लोगों के परिवार अभी भी अपनों के लौटने का इंतजार कर रहे हैं।


    हेलीकॉप्टर से दिखी तबाही की तस्वीर

    चीन मीडिया ग्रुप (CMG) के एक रिपोर्टर ने सोमवार को हेलीकॉप्टर से प्रभावित इलाके का जायजा लिया. यह इलाका चीन-नेपाल सीमा पर स्थित ग्यिरोंग-रसुवा सीमा चौकी के नेपाली हिस्से में है. आसमान से ली गई तस्वीरों में तबाही का बड़ा मंजर दिखाई दिया।

    इस रिपोर्ट के मुताबिक, सीमा चौकी के पास नेपाल की तरफ कई गांव और छोटे कस्बे पूरी तरह तबाह हो गए हैं. कई गाड़ियां और इमारतें गहरे मलबे में दब गई हैं. जहां कभी लोगों की आवाजाही रहती थी, वहां अब चारों तरफ मिट्टी और मलबा नजर आ रहा है. कीचड़ से क्षेत्र में दलदल जैसे हालात बन गए हैं.

    तबाही से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में स्याब्रुबेंसी भी शामिल है. यह शहर सीमा चौकी से सीधी दूरी में 10 किलोमीटर से भी कम दूर है. आपदा से पहले यहां काफी चहल-पहल रहती थी. लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं।

    हेलीकॉप्टर से इलाके का जायजा लेने वाले रिपोर्टर का कहना है कि शहर में आम लोगों की मौजूदगी बेहद कम दिखाई दी. वहां सिर्फ राहत और बचाव दल के सदस्य नजर आए. ये टीमें मलबे में जिंदगी की तलाश कर रही हैं।

    आठ दिन बीतने के बाद भी बचाव अभियान थमा नहीं है. मलबे के नीचे दबे लोगों की तलाश लगातार जारी है. हर गुजरते दिन के साथ चुनौती बढ़ रही है. इसके बावजूद रेस्क्यू टीम का सर्च ऑपरेशन जारी है. चार हजार से ज्यादा लोगों के लापता होने से उनके परिवारों की चिंता बढ़ी हुई है।


    नेपाल बाढ़ में लापता पांच लोगों के शव भारत में मिले

    नेपाल में आई अचानक बाढ़ में बहकर लापता हुए पांच नेपाली नागरिकों के शव उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में गंडक नदी से बरामद हुए. मंगलवार को सभी शवों को सोनौली बॉर्डर पर नेपाल पुलिस को सौंप दिया गया. मृतकों में दो महिलाएं और तीन पुरुष शामिल हैं. ये शव कुशीनगर के बरवा पट्टी और खड्डा इलाके से मिले थे. शवों को शाम करीब 4 बजे सोनौली लाया गया. इसके बाद नेपाल के बेलहिया थाने के प्रभारी सब-इंस्पेक्टर हरिराम डांगी को सौंप दिया गया।

    अधिकारियों के मुताबिक, शवों को नेपाल के बुटवल ले जाया गया है. वहां नेपाल पुलिस मृतकों की पहचान करेगी. इसके बाद शवों को उनके परिवारों को सौंपा जाएगा. नेपाल में लगातार हो रही बारिश और अचानक आई बाढ़ के कारण कई लोग बह गए हैं. सीमा से लगे भारतीय इलाकों में भी इसका असर देखने को मिल रहा है।

    नेपाल और उत्तर प्रदेश में लगातार बारिश के कारण महाराजगंज में कई नदियों का जलस्तर बढ़ गया है. वाल्मीकिनगर के गंडक बैराज से 1,50,200 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है. महाराजगंज में पिछले 24 घंटे में 33.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है. जिले में अब तक कुल 655.5 मिलीमीटर बारिश हो चुकी है।

    मंगलवार दोपहर 2 बजे गंडक नदी का अपस्ट्रीम जलस्तर 355.30 फीट और डाउनस्ट्रीम जलस्तर 352.60 फीट दर्ज किया गया. रोहिन नदी अभी खतरे के निशान से नीचे बह रही है. हालांकि महाव नाला खतरे के निशान से ऊपर है. इसका जलस्तर नौ फीट पहुंच गया है. खतरे का निशान पांच फीट है. राप्ती, चंदन और प्यास नदियों का जलस्तर भी बढ़ रहा है. हालांकि ये नदियां अभी खतरे के निशान से नीचे हैं।

    अपर जिलाधिकारी प्रशांत कुमार ने बताया कि प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर रख रहा है. एसडीएम, तहसील अधिकारियों, सिंचाई विभाग और बाढ़ नियंत्रण अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं. निचले और संवेदनशील इलाकों में राहत और बचाव की तैयारी पूरी रखने को कहा गया है.महाराजगंज और नेपाल से लगे इलाकों में सभी तटबंध फिलहाल सुरक्षित हैं।

  • संन्यास के बाद फ्रेंचाइजी क्रिकेट में धमाकेदार वापसी बेन स्टोक्स बने BBL के सबसे महंगे खिलाड़ी

    संन्यास के बाद फ्रेंचाइजी क्रिकेट में धमाकेदार वापसी बेन स्टोक्स बने BBL के सबसे महंगे खिलाड़ी


    नई दिल्ली। इंग्लैंड के पूर्व कप्तान और स्टार ऑलराउंडर बेन स्टोक्स ने फ्रेंचाइजी क्रिकेट में वापसी करते हुए बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। स्टोक्स आगामी बिग बैश लीग यानी BBL के 2026-27 सीजन में एडिलेड स्ट्राइकर्स की ओर से खेलते नजर आएंगे। खास बात यह है कि उन्हें साइन करने के साथ ही स्टोक्स BBL इतिहास के सबसे महंगे खिलाड़ी बन गए हैं। उनकी डील ने विदेशी खिलाड़ियों की कीमत को लेकर लीग में नया बेंचमार्क तैयार कर दिया है। स्टोक्स पूरे सीजन के लिए टीम के साथ उपलब्ध रहेंगे और स्ट्राइकर्स को उनसे बल्ले और गेंद दोनों से मैच जिताने वाले प्रदर्शन की उम्मीद होगी।

    स्टोक्स का BBL से रिश्ता नया नहीं है। वह इससे पहले 2014-15 सीजन में मेलबर्न रेनेगेड्स के लिए खेल चुके हैं। उस दौरान उन्होंने चार मुकाबलों में हिस्सा लिया था। इसके बाद लंबे समय तक वह इस लीग से दूर रहे। अब करीब 12 साल बाद उनकी BBL में वापसी होने जा रही है। कई फ्रेंचाइजियां उन्हें अपनी टीम में शामिल करना चाहती थीं लेकिन अंत में एडिलेड स्ट्राइकर्स ने बाजी मार ली। टीम ने उनके साथ एक साल का करार किया है।

    BBL में हाल ही में कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम में बदलाव किया गया है। लीग ने डायरेक्ट साइनिंग मॉडल को फिर से लागू किया है जिसके तहत फ्रेंचाइजियों को खिलाड़ियों को सीधे साइन करने और उनके लिए अधिक राशि खर्च करने की स्वतंत्रता मिलती है। इस नए सिस्टम के तहत स्टोक्स पूरे सीजन के लिए साइन किए जाने वाले पहले विदेशी खिलाड़ी बने हैं। रिपोर्ट के अनुसार उनकी डील करीब 3.5 करोड़ रुपये यानी लगभग 3 लाख 60 हजार अमेरिकी डॉलर की है। यह रकम पिछले प्लैटिनम स्तर के करीब 2.84 करोड़ रुपये के शीर्ष बैंड से भी अधिक है।

    एडिलेड स्ट्राइकर्स के कोच और पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान टिम पेन ने स्टोक्स को क्रिकेट इतिहास के महान ऑलराउंडरों में शामिल बताया है। उनका मानना है कि स्टोक्स बड़े मुकाबलों में दबाव झेलने और मैच का रुख बदलने की क्षमता रखते हैं। स्टोक्स ने भी ऑस्ट्रेलिया में खेलने को लेकर उत्साह जताया है और कहा है कि वह एडिलेड स्ट्राइकर्स के साथ जुड़ने के मौके को गंवाना नहीं चाहते थे। उनका पहला मुकाबला 16 दिसंबर को सिडनी थंडर के खिलाफ कैनबरा में होगा जबकि 23 दिसंबर को वह एडिलेड ओवल में अपनी नई टीम के घरेलू मैदान पर पहली बार उतरेंगे।

    स्टोक्स के लिए यह वापसी इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने जून 2026 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया था। इसके बाद अब उनका फोकस फ्रेंचाइजी क्रिकेट पर बढ़ता दिखाई दे रहा है। लंबे समय से उन्होंने नियमित T20 क्रिकेट भी नहीं खेला है। आखिरी बार वह 2024 में द हंड्रेड में T20 क्रिकेट खेलते नजर आए थे जहां उन्हें हैमस्ट्रिंग चोट का सामना करना पड़ा था।

    IPL में भी स्टोक्स की मांग काफी ज्यादा रही है। वह तीन अलग-अलग टीमों का हिस्सा रह चुके हैं। 2017 में राइजिंग पुणे सुपरजायंट ने उन्हें 14.5 करोड़ रुपये में खरीदा था और वह उस समय IPL इतिहास के सबसे महंगे विदेशी खिलाड़ी बने थे। इसके बाद 2023 में चेन्नई सुपर किंग्स ने उन्हें 16.25 करोड़ रुपये में अपने साथ जोड़ा। हालांकि चोट के कारण वह उस सीजन केवल दो मैच खेल सके। स्टोक्स के दोनों T20 शतक भी IPL में ही आए हैं।

    ऑस्ट्रेलिया में स्टोक्स की सबसे यादगार T20 पारियों में से एक 2022 T20 वर्ल्ड कप फाइनल की रही जब उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ नाबाद 52 रन बनाकर इंग्लैंड को चैंपियन बनाया था। अब BBL में उनकी वापसी पर सभी की नजरें होंगी। एडिलेड स्ट्राइकर्स को उम्मीद होगी कि स्टोक्स की पूरे सीजन उपलब्धता टीम को खिताब की मजबूत दावेदार बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।

  • अमेरिका में निचले सदन में दिसंबर तक फंडिंग वाला बिल पारित…. शटडाउन का संकट टला?

    अमेरिका में निचले सदन में दिसंबर तक फंडिंग वाला बिल पारित…. शटडाउन का संकट टला?


    वाशिंगटन।
    अमेरिकी संसद (American Parliament) के निचले सदन प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स-House of Representatives) ने मंगलवार को एक अस्थायी विधेयक (Provisional Bill) पारित किया। इसका मकसद संघीय सरकार के कामकाज के लिए दिसंबर की शुरुआत तक धन उपलब्ध कराना है। यह कदम इसलिए उठाया गया है, ताकि सांसदों के दोबारा चुनाव के लिए प्रचार के दौरान सरकार का कामकाज बंद (शटडाउन-Shutdown) न हो।

    सांसदों के लिए सितंबर के आखिर में खत्म हो रहे वित्त वर्ष से पहले यह कदम उठाना जरूरी था। ऐसा नहीं करने पर सरकारी कामकाज के लिए पैसा खत्म हो सकता था। सांसद नहीं चाहते थे कि चुनाव प्रचार के दौरान सरकार के कामकाज को लेकर कोई संकट खड़ा हो। पिछले साल भी सरकार के कामकाज के लंबे समय तक बंद रहने से बड़ा संकट पैदा हुआ था।

    प्रतिनिधि सभा ने 370-48 वोट से विधेयक (Short-Term Funding Bill) पारित किया। सीनेट इसे पहले ही भारी बहुमत से मंजूर कर चुका है। अब यह विधेयक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास जाएगा। उनकी मंजूरी के बाद यह कानून बन जाएगा।

    प्रतिनिधि सभा की विनियोग समिति के अध्यक्ष सांसद टॉम कोल ने कहा कि इससे देश और लोगों को यह भरोसा मिलेगा कि सरकार का कामकाज चलता रहेगा। उन्होंने कहा कि इससे यह भी तय रहेगा कि सेना के जवानों को उनका वेतन मिलता रहेगा।


    पिछले साल कितने लंबे शटडाउन हुए थे?

    पिछली शरद ऋतु में रिकॉर्ड 43 दिनों तक सरकारी कामकाज बंद रहा था। दोनों पार्टियों में उस टैक्स क्रेडिट को जारी रखने को लेकर सहमति नहीं बनी थी, जिसकी समय सीमा खत्म हो रही थी। यह टैक्स क्रेडिट अफोर्डेबल केयर एक्ट के तहत मिलने वाली स्वास्थ्य बीमा योजनाओं की लागत कम करता है।

    इसके बाद गृह सुरक्षा विभाग का कामकाज भी बंद हुआ था। यह शटडाउन 76 दिनों तक चला। बाद में सांसदों ने विभाग के बड़े हिस्से के लिए फंडिंग पर सहमति बना ली। हालांकि, आव्रजन कानून लागू करने से जुड़े कामों के लिए फंडिंग नहीं दी गई।


    सांसद इस बार क्या चाहते थे?

    सांसद नहीं चाहते थे कि चुनाव से पहले फिर ऐसी स्थिति बने। उन्होंने हाल के गतिरोध के लिए एक-दूसरे की पार्टी को जिम्मेदार ठहराया। प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष माइक जॉनसन ने वोटिंग से पहले पत्रकारों से कहा कि वे एक और डेमोक्रेटिक शटडाउन के खतरे से बचेंगे।

    वोटिंग के बाद जॉनसन ने कहा कि प्रतिनिधि सभा ने अपना काम कर दिया। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को शक था कि रिपब्लिकन बहुमत अपने अंदर के मतभेदों को दूर कर पाएगा या नहीं। इसके बावजूद समर्थन जुटाया गया। उन्होंने कहा कि वे जिम्मेदारी से काम कर रहे हैं और काम पूरा कर रहे हैं।


    डेमोक्रेट्स ने विधेयक का समर्थन क्यों किया?

    प्रतिनिधि सभा की विनियोग समिति में डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रमुख सांसद रोजा डेलॉरो ने मंगलवार सुबह बंद कमरे में हुई बैठक में अपने साथी डेमोक्रेट सांसदों से बिल के पक्ष में वोट करने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह विधेयक उस प्रस्ताव से काफी बेहतर है, जिसे इस साल की गर्मियों की शुरुआत में प्रतिनिधि सभा ने लगभग पार्टी लाइन के आधार पर पारित किया था।

    उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि विधेयक गृह सुरक्षा विभाग को बॉर्डर पेट्रोल के लिए पैसा ट्रांसफर करने से रोकता है। यह उस प्रस्तावित नियम को भी टालता है, जिसके तहत ट्रंप प्रशासन में राजनीतिक नियुक्ति पाने वाले अधिकारियों को उन संघीय अनुदानों को रोकने की ज्यादा ताकत मिल जाती, जिन्हें वे राष्ट्रपति के एजेंडे के मुताबिक नहीं मानते।

    ये बदलाव सीनेट ने अपने विधेयक के संस्करण को मंजूरी देते समय किए थे। डेमोक्रेट्स को चिंता है कि प्रशासन अनुदानों से जुड़े इस प्रस्तावित नियम का इस्तेमाल डेमोक्रेटिक पार्टी के नेतृत्व वाले राज्यों से पैसा दूर करने के लिए कर सकता है। डेलॉरो ने नियम को टालने को एक अहम पहला कदम बताया। हालांकि, उन्होंने कहा कि इस नीति को लागू होने से रोकने के लिए अभी और काम करना होगा।

    डेलॉरो ने कहा कि किसी समुदाय को आपदा राहत मिलेगी या नहीं, यह इस बात पर निर्भर नहीं होना चाहिए कि उसने पिछले चुनाव में किसे वोट दिया था।


    विधेयक में कितने समय की फंडिंग है?

    यह अस्थायी विधेयक संघीय एजेंसियों को आम तौर पर मौजूदा स्तर पर 11 दिसंबर तक फंडिंग देगा। इससे सांसदों को पूरे साल के लिए फंडिंग वाले विधेयक पर सहमति बनाने के लिए और समय मिलेगा। हालांकि, इस पर दोनों पक्षों के बीच सहमति बनना आसान नहीं होगा

    रिपब्लिकन सैन्य खर्च के लिए सैकड़ों अरब डॉलर की अतिरिक्त फंडिंग चाहते हैं। इसके साथ ही वे रक्षा से जुड़े नहीं ज्यादातर कार्यक्रमों के खर्च में कटौती करना चाहते हैं। डेमोक्रेट्स का कहना है कि वे इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं कर सकते। उनका जोर ऐसी द्विदलीय व्यवस्था पर है, जिसमें घरेलू कार्यक्रमों को भी रक्षा कार्यक्रमों के बराबर महत्व और फंडिंग मिले।

  • PM मोदी के जन्मदिन के बहाने देश को मथने की तैयारी… BJP शुरू करेगी जनसंपर्क अभियान

    PM मोदी के जन्मदिन के बहाने देश को मथने की तैयारी… BJP शुरू करेगी जनसंपर्क अभियान


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के जन्मदिन के बहाने भाजपा (BJP) ने जनसंपर्क यात्राओं और एक महीने के सेवा संकल्प अभियान (Service Pledge Campaign) के तहत पूरे देश को मथने, कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरने और लोगों से सीधा संवाद करने की व्यापक तैयारी की है।

    योजना के तहत पीएम की जन्मभूमि वडनगर और कर्मभूमि वाराणसी से अलग-अलग यात्रा निकालने की है। इन यात्राओं से जुड़ी टीमें देश के अलग-अलग हिस्सों में बतौर लोकसेवक मोदी की उपलब्धियों की जानकारी देगी। इन यात्राओं से अछूते हिस्से में सेवा संकल्प अभियान के तहत रैलियां, रक्तदान, स्वास्थ्य जांच शिविर के जरिये लोगों से संपर्क साधा जाएगा। सेवा संकल्प अभियान का तानाबाना सोमवार देर रात तक पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन, गृह मंत्री अमित शाह, महासचिव स्मृति ईरानी, विनोद तावड़े समेत कई वरिष्ठ नेताओं की बैठक में बुना गया।


    ये है यात्रा का खाका

    17 सितंबर से वडनगर और वाराणसी से शुरू हो रही यात्रा देश के विभिन्न हिस्से से गुजरते हुए 17 अक्तूबर को क्रमश: वाराणसी और वडनगर पहुंचेगी। दोनों यात्रा प्रतिदिन सौ किमी के सफर के साथ अलग-अलग तीन-तीन हजार किमी क्षेत्र को कवर करेगी। प्रतिदिन कम से कम चार कार्यक्रम करेगी।

  • ईरान-अमेरिका जंग में तेजी के बीच कच्चे तेल के दामों में भारी इजाफा

    ईरान-अमेरिका जंग में तेजी के बीच कच्चे तेल के दामों में भारी इजाफा


    तेहरान।
    पेट्रोल-डीजल (Petrol and Diesel) के सस्ता होने की उम्मीद कर रहे लोगों के लिए बुरी खबर है। ईरान और अमेरिका में जंग (Iran -America War) तेज हो गई है। मिसाइलों की बारिश ने क्रूड की कीमतों (Crude oil Prices) में आग लगा दी है। अब इंटरनेशन बेंचमार्क (International benchmark) ब्रेंट क्रूड तेजी से 100 डॉलर प्रति बैरल की ओर भाग रहा है। ऐसे में दुनिया भर में एक बार फिर ऊर्जा संकट के और बढ़ने के खतरे बढ़ गए हैं।

    बुधवार सुबह कारोबार शुरू होते ही कच्चे तेल की कीमतों में करीब 1.5% से अधिक की बढ़ोतरी हुई। यह उछाल मंगलवार के तेज उछाल के बाद आया है, जब दोनों तरह के तेल 4 डॉलर से ज्यादा महंगे हो गए थे। ब्लूमबर्ग के अनुसार वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड का दाम सुबह 7 बजे के 1.61 डॉलर प्रति बैरल चढ़कर 91.83 डॉलर पर कारोबार कर रहा था और अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 1.91 डॉलर प्रति बैरल चढ़कर 96.56 डॉलर पर था।


    अमेरिका-ईरान के बीच रातभर मिसाइलों की बारिश

    अमेरिका ने ईरान के ठिकानों पर हवाई हमले किए, जिसके जवाब में ईरान ने पलटवार किया। दोनों देशों के बीच हफ्तों में यह सबसे गंभीर झड़प है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, ये हमले ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की उन हालिया हरकतों के जवाब में किए गए, जिसमें उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट में व्यापारिक जहाजों और अमेरिकी सैनिकों पर हमले की कोशिश की थी।


    होर्मुज पर संकट गहरा

    ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने चेतावनी दी है कि अमेरिकी हमलों से होर्मुज के रास्ते और भी ज्यादा बंद हो जाएंगे। गौरतलब है कि इसी रास्ते से दुनिया की कुल पांचवीं तेल खपत गुजरती थी, लेकिन अब ईरान ने इसे व्यावसायिक जहाजों के लिए प्रभावी रूप से बंद कर दिया है।


    ईरान की जवाबी कार्रवाई और नए हमले

    IRGC ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं और दावा किया कि बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिक मारे गए। ईरानी मीडिया के मुताबिक, बहरीन में अमेरिकी बेस पर बड़े पैमाने पर ड्रोन हमला किया गया। जॉर्डन की सेना ने 13 में से 10 मिसाइलें हवा में ही नष्ट कर दीं। अमेरिकी अधिकारियों ने अभी तक किसी भी नुकसान की पुष्टि नहीं की है। कुवैत ने भी दुश्मन ड्रोन गतिविधि के खिलाफ अपनी सेना तैनात कर दी है।


    टैंकरों पर हमले

    पिछले सप्ताहांत (जुलाई के बाद पहली बार) झड़पें तेज हुईं। सोमवार को होर्मुज से निकलते दो टैंकरों पर भी हमले हुए, जिससे तेल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है और कारोबारी वैकल्पिक रास्ते तलाशने पर मजबूर हैं।

  • MP सरकार को बड़ा झटका…. दिल्ली HC ने दिया वकील को 78 लाख का भुगतान करने का आदेश

    MP सरकार को बड़ा झटका…. दिल्ली HC ने दिया वकील को 78 लाख का भुगतान करने का आदेश


    नई दिल्ली।
    दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने मध्य प्रदेश सरकार (Madhya Pradesh Government) को आदेश दिया कि वह वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप जॉर्ज चौधरी (Anoop George Chaudhari) को एक मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में पेश होने के बदले 78 लाख 65 हजार रुपए और उस पर 9% सालाना की दर से ब्याज का भुगतान भी करे। उच्च न्यायालय ने राज्य के इस दावे को खारिज कर दिया कि वरिष्ठ अधिवक्ता असल में सिर्फ दो बार पेश हुए थे।

    जस्टिस सचिन दत्ता की पीठ ने इंदौर डेवलपमेंट अथॉरिटी बनाम मनोहरलाल व अन्य (2020) मामले में उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ के आदेश का हवाला दिया और वरिष्ठ अधिवक्ता की मौजूदगी को नोट किया। पीठ ने कहा कि कार्यवाही के रिकॉर्ड में दिख रही पेशी को देखने से पता चलता है कि याचिकाकर्ता मध्य प्रदेश सरकार की तरफ से पेश हुए थे। ऐसे में ना ही इसमें कोई शक रह जाता है और इस रिकॉर्ड के महत्व को कम करके भी नहीं आंका जा सकता।

    अदालत ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय में पेशी दर्ज करना कोई अनौपचारिक या सामान्य काम नहीं है। उच्चतम न्यायालय नियम, 2013 के आदेश IV नियम 1(बी) के तहत किसी पार्टी के ‘एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड’ के अलावा कोई अन्य वकील किसी मामले में अदालत के सामने पेश नहीं हो सकता, बहस नहीं कर सकता। अदालत को संबोधित नहीं कर सकता, जब तक कि उसे ‘एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड’ ने निर्देश न दिया हो या अदालत ने अनुमति न दी हो।

    पीठ ने कहा कि एक वरिष्ठ अधिवक्ता उच्चतम न्यायालय में किसी पक्षकार पर अपनी पेशी थोप नहीं सकता। उसकी पेशी केवल उस पार्टी के ‘एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड’ के माध्यम से और उनके निर्देशों पर ही दर्ज की जा सकती है। पीठ ने पाया कि याचिकाकर्ता की पेशी राज्य के स्थाई वकील व राज्य के ‘एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड’ के साथ चौदह तारीखों पर दर्ज की गई, इसलिए यह निष्कर्ष निकला कि ऐसी हर तारीख पर उनकी पेशी राज्य के ही अधिकृत प्रतिनिधियों द्वारा कराई गई।

  • पाकिस्तान की हार से लेकर अबॉर्शन तक इमाद वसीम पर सानिया के गंभीर आरोप बोलीं उस वक्त मैं पूरी तरह बेबस थी

    पाकिस्तान की हार से लेकर अबॉर्शन तक इमाद वसीम पर सानिया के गंभीर आरोप बोलीं उस वक्त मैं पूरी तरह बेबस थी


    नई दिल्ली। पाकिस्तान क्रिकेट टीम के पूर्व ऑलराउंडर इमाद वसीम एक बार फिर अपने क्रिकेट करियर की वजह से नहीं बल्कि निजी जिंदगी को लेकर सुर्खियों में हैं। उनकी पूर्व पत्नी सानिया अशफाक ने एक पॉडकास्ट में इमाद और उनके परिवार को लेकर कई गंभीर दावे किए हैं। सानिया ने आरोप लगाया कि साल 2023 में उनकी इच्छा के खिलाफ उनका अबॉर्शन करवाया गया था। उन्होंने दावा किया कि इस पूरे मामले में इमाद और उनके परिवार का दबाव था। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और सामने उपलब्ध जानकारी मुख्य रूप से सानिया के बयान पर आधारित है।

    सानिया ने पॉडकास्ट में अपनी तीसरी प्रेग्नेंसी का जिक्र करते हुए कहा कि जब उन्होंने इमाद को इस बारे में बताया था तो वह शुरुआत में काफी खुश हुए थे। इसके बाद इमाद ने अपनी मां को फोन किया और सानिया के मुताबिक बातचीत के दौरान उन्हें इस प्रेग्नेंसी को खत्म करने के लिए कहा गया। सानिया ने दावा किया कि उन्हें बेहद गंभीर धमकी भी दी गई थी और इस वजह से वह खुद को पूरी तरह असहाय महसूस कर रही थीं।

    सानिया का कहना है कि उस समय उनके बच्चे भी उनके साथ थे और हालात उनके लिए बेहद मुश्किल थे। उन्होंने दावा किया कि उन्हें एक इंजेक्शन दिए जाने की बात कही गई थी जिससे वह शांत रहेंगी लेकिन जब उन्हें होश आया तो अबॉर्शन हो चुका था। सानिया ने इस दौरान यह भी आशंका जताई कि उन्हें पूरी सच्चाई नहीं बताई गई थी। उनके मुताबिक वह उस परिस्थिति में कुछ समझ पाने या अपनी बात मजबूती से रखने की स्थिति में नहीं थीं।

    इस पूरे मामले के साथ सानिया ने 2024 टी20 वर्ल्ड कप में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए मुकाबले का भी जिक्र किया। उस मैच में पाकिस्तान को भारत के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। सानिया के मुताबिक मैच खत्म होने के बाद जब इमाद होटल पहुंचे तो वह काफी गुस्से में थे। सानिया का दावा है कि इमाद ने उनसे कहा कि पाकिस्तान उनकी वजह से मैच हार गया। इसके जवाब में सानिया ने कथित तौर पर कहा कि शायद यह उस बच्चे के मामले में अल्लाह की सजा है।

    सानिया के ये दावे सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी चर्चा तेज हो गई है। इमाद वसीम और सानिया अशफाक का रिश्ता पहले भी कई बार सुर्खियों में रहा है। दोनों के रिश्ते में लंबे समय से तनाव की खबरें सामने आती रही हैं और बाद में दोनों अलग हो गए। अब सानिया के ताजा बयान ने उनके रिश्ते से जुड़े पुराने विवादों को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।

    क्रिकेट की बात करें तो इमाद वसीम पाकिस्तान के प्रमुख ऑलराउंडरों में रहे हैं। उन्होंने पाकिस्तान के लिए 55 वनडे मुकाबले खेले जिसमें 986 रन बनाने के साथ 44 विकेट हासिल किए। टी20 इंटरनेशनल में उन्होंने 75 मैचों में 554 रन बनाए और 73 विकेट अपने नाम किए। गेंद और बल्ले दोनों से योगदान देने वाले इमाद का अंतरराष्ट्रीय करियर पाकिस्तान क्रिकेट में काफी अहम रहा है।

    फिलहाल सानिया के आरोपों को लेकर इमाद वसीम की ओर से कोई विस्तृत जवाब सामने नहीं आया है। ऐसे में इस पूरे विवाद में दोनों पक्षों का पक्ष सामने आना बाकी है। सानिया के बयान ने हालांकि इमाद की निजी जिंदगी को लेकर एक नया विवाद जरूर खड़ा कर दिया है।

  • बिहार निवेश के मामले में आज भी पिछड़ा राज्य… निवेशकों को आकर्षित करने में सबसे पीछे

    बिहार निवेश के मामले में आज भी पिछड़ा राज्य… निवेशकों को आकर्षित करने में सबसे पीछे


    पटना।
    बिहार (Bihar) आज भी निवेश (Investment) आकर्षित करने की कसौटी पर सबसे पिछड़ा राज्य है। आधारभूत संरचना, संसाधनों की उपलब्धता, कारोबारी माहौल और जमीन आवंटन की जटिलता के मोर्चे पर राज्य आज भी पिछड़ा है। नीति आयोग (NITI Aayog) की हालिया रैकिंग रिपोर्ट (Ranking Report) में बिहार देश के बड़े 17 राज्यों में सबसे नीचे 17वें स्थान पर और 36 राज्यों में 26वें स्थान पर है। नीति आयोग द्वारा जुलाई 2026 में जारी निवेश अनुकूल सूचकांक में बिहार को देश के तीसरे श्रेणी के राज्यों में शामिल किया गया है।

    रिपोर्ट में राज्य को सौ अंकों में कुल 41.2 अंक ही प्राप्त हुए हैं। नीति आयोग की रिपोर्ट में मानकों के अनुरूप राज्यों को चार श्रेणियों में बांटा गया है। तीसरी श्रेणी (40 से 45 अंक) में बिहार के साथ झारखंड, पंजाब, पश्चिम बंगाल, जम्मू-कश्मीर, मेघालय, नागालैंड और पुदुचेरी शामिल हैं। वहीं, उच्च प्रदर्शन (50 से अधिक अंक) वाले पांच राज्यों में गोवा, गुजरात, महाराष्ट्र, ओडिशा और तामिलनाडु शामिल हैं।


    प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में निचले पायदान पर

    निवेश अनुकूल सूचकांक में बताया गया है कि बिहार में वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) सिर्फ 0.16 मिलियन डॉलर रहा जबकि इसी वित्तीय वर्ष में महाराष्ट्र में 15,116 मिलियन डॉलर, दिल्ली में 6523.43 मिलियन डॉलर और कर्नाटक में 6571 मिलियन डॉलर रहा। कुल एफडीआई का 85 प्रतिशत हिस्सा महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, दिल्ली, तामिलनाडु को मिल जाता है। इसी तरह पेटेंट के मामले में भी बिहार फिसड्डी रहा। रिपोर्ट के अनुसार बिहार से वित्तीय वर्ष 2023 में कंपनियों द्वारा कुल दाखिल पेटेंट का 0.48 प्रतिशत ही दाखिल हो सका।

    जबकि देश के बड़े राज्यों का औसत पेटेंट दाखिल करने की दर 3.6 प्रतिशत रही। रिपोर्ट में राज्य में समर्पित(डेडिकेटेड) औद्योगिक पार्क, औद्योगिक आधारभूत संरचना के अलावा निवेश आकर्षित करने के लिए संरक्षा और सुरक्षा की दिशा में काम करने की सलाह दी गई है। आधारभूत संरचना, कारोबारी माहौल, संसाधन, सरकारी नीतियां, विनियामक सुगमता, वित्तीय सेहत, संस्थागत वातावरण (इंस्टीटयूशनल इन्वायरमेंट) और पर्यावरणीय लचीलापन की बात भी कही गई।


    दूरगामी रणनीति अपनानाी होगी

    अर्थशास्त्री और नालंदा विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर सुधांशु कुमार के अनुसार निवेश अनुकूल सूचकांक में बिहार की खराब स्थिति चिंता का विषय है। बड़े राज्यों में सबसे नीचे बिहार की स्थिति राज्य की गहरी संरचनात्मक कमजोरियों को उजागर करती है जो पहले भी कई अध्ययनों में सामने आती रही हैं। नवाचार और एमएसएमई आधार दोनों ही पिछड़े हैं, जबकि सुरक्षा, भूमि आवंटन और रोजगार की कमी निवेशकों को रोकती है। रिपोर्ट के अनुसार प्रति व्यक्ति जीएसडीपी बड़े राज्यों के औसत से 72 फीसदी कम है। निर्णायक दृष्टि और समयबद्ध दूरगामी रणनीति अपनाकर बिहार निम्न विकास के जाल से बाहर निकल सकता है और एक सशक्त आर्थिक भविष्य की ओर बढ़ सकता है।


    क्या है निवेश अनुकूल सूचकांक

    निवेश अनुकूल सूचकांक के तहत देश के विभिन्न राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में निवेशक और व्यवसाय के लिए कितना अनुकूल माहौल है। इसका मूल्यांकन किया गया है। नीति आयोग ने देश में पहली बार राज्यों की निवेश तैयारियों का मूल्यांकन कर रिपोर्ट और रैंकिंग जुलाई 2026 में जारी की है। अर्थशास्त्रियों के अनुसार देश में मजबूत निवेश पारिस्थितिकी तंत्र(इकोसिस्टम) विकसित कर देश को 2047 तक विकसित देश बनाने के उद्देश्य से इस सूचकांक को जारी किया गया है। इसमें देश के सभी 28 राज्य और 8 केंद्र शासित प्रदेश को विभिन्न श्रेणियों के तहत शामिल किया गया है।


    कमियां गिनाईं, सुझाव दिये

    1. बिहार में भूमि आवंटन प्रक्रिया जटिल और उलझाऊ है
    2. रोजगार के अवसर सीमित हैं।
    3. राज्य के द्वितीय और तृतीय श्रेणी वाले शहरों में वायु संपर्कता कम है
    4. बिजली की निर्बाध उपलब्धता के लिए अभी और काम करने की जरूरत है
    5. निवेश आकर्षित करने के लिए संरक्षा और सुरक्षा पर फोकस करने की जरुरत

  • कैसे प्रसन्न होंगे विघ्नहर्ता गणेश? जानें पूजा का सही तरीका, प्रिय भोग और जीवन बदलने वाले सरल उपाय

    कैसे प्रसन्न होंगे विघ्नहर्ता गणेश? जानें पूजा का सही तरीका, प्रिय भोग और जीवन बदलने वाले सरल उपाय


    नई दिल्ली । सनातन धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता माना गया है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले गणपति की पूजा करने की परंपरा है। मान्यता है कि जहां भगवान गणेश की कृपा होती है वहां जीवन की बड़ी से बड़ी बाधाएं भी दूर होने लगती हैं। बुद्धि विवेक ज्ञान सुख समृद्धि और सफलता के दाता माने जाने वाले गणेश जी को प्रसन्न करने के लिए केवल बड़े अनुष्ठान ही नहीं बल्कि सच्ची श्रद्धा और सरल उपाय भी काफी माने जाते हैं। नियमित रूप से भगवान गणेश की पूजा करने से मन को शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

    गणेश जी को प्रसन्न करने के लिए सबसे पहले सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होना चाहिए। इसके बाद साफ वस्त्र पहनकर पूजा स्थल की सफाई करें और भगवान गणेश की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाएं। पूजा के दौरान मन को शांत रखें और पूरी श्रद्धा के साथ गणपति का ध्यान करें। मान्यता है कि भगवान गणेश को स्वच्छता और पवित्रता अत्यंत प्रिय है इसलिए पूजा स्थान को साफ और व्यवस्थित रखना चाहिए।

    भगवान गणेश को दूर्वा विशेष रूप से प्रिय मानी जाती है। पूजा के दौरान गणपति को दूर्वा अर्पित करना शुभ माना जाता है। दूर्वा चढ़ाते समय भगवान गणेश का स्मरण करने से जीवन की बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना की जाती है। इसके साथ ही लाल या पीले फूल भी अर्पित किए जा सकते हैं। गणेश जी को मोदक और लड्डू का भोग लगाना भी अत्यंत शुभ माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणपति को मिठास प्रिय है इसलिए गुड़ और मोदक का भोग भी उनकी कृपा पाने का सरल उपाय माना जाता है।

    गणेश जी की पूजा में मंत्र जाप का भी विशेष महत्व है। ॐ गं गणपतये नमः मंत्र का नियमित जाप करने से मन की एकाग्रता बढ़ती है और नकारात्मक विचारों से दूरी बनाने में मदद मिलती है। बुधवार का दिन भगवान गणेश को समर्पित माना जाता है इसलिए इस दिन विशेष पूजा और व्रत करना भी शुभ फलदायी माना जाता है। श्रद्धालु बुधवार को गणपति मंदिर जाकर दर्शन कर सकते हैं और जरूरतमंद लोगों को भोजन या अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान भी कर सकते हैं।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश को केवल पूजा और भोग से ही नहीं बल्कि अच्छे कर्मों से भी प्रसन्न किया जा सकता है। किसी का अपमान न करना बुजुर्गों का सम्मान करना जरूरतमंदों की सहायता करना और अपने व्यवहार में विनम्रता रखना गणपति की कृपा पाने का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। जीवन में सफलता के लिए मेहनत और ईमानदारी के साथ आगे बढ़ना भी भगवान गणेश की आराधना का ही एक रूप माना जाता है।

    यदि किसी व्यक्ति के जीवन में लगातार रुकावटें आ रही हों या कोई महत्वपूर्ण कार्य बार-बार बाधित हो रहा हो तो भगवान गणेश का स्मरण कर उस कार्य की शुरुआत करना शुभ माना जाता है। घर से निकलने से पहले गणपति का ध्यान करना और सकारात्मक सोच के साथ काम करना आत्मविश्वास बढ़ा सकता है। बुधवार के दिन गणेश जी को मोदक या लड्डू का भोग लगाकर परिवार में प्रसाद बांटना भी शुभ माना जाता है।

    भगवान गणेश को प्रसन्न करने का सबसे बड़ा उपाय सच्ची श्रद्धा और शुद्ध मन है। पूजा में दिखावे की बजाय भक्ति और विश्वास को महत्व देना चाहिए। जब व्यक्ति अपने जीवन में अच्छे विचार अच्छे कर्म और सकारात्मक व्यवहार को अपनाता है तब उसका मन भी मजबूत होता है। विघ्नहर्ता गणपति की आराधना हमें यही संदेश देती है कि हर कठिनाई का सामना धैर्य बुद्धि और विश्वास के साथ किया जाए। सच्चे मन से गणेश जी का स्मरण करने वाला व्यक्ति जीवन की चुनौतियों से लड़ने की शक्ति और आगे बढ़ने का आत्मविश्वास प्राप्त कर सकता है।