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  • झारखंडः गुमला में पंचायत ने बच्ची से दुष्कर्म का मामला दबाकर आरोपी से वसूला जुर्माना और कर ली शराब-मटन की पार्टी

    झारखंडः गुमला में पंचायत ने बच्ची से दुष्कर्म का मामला दबाकर आरोपी से वसूला जुर्माना और कर ली शराब-मटन की पार्टी


    नई दिल्ली । झारखंड के गुमला जिले से इंसानियत को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है। जिले के घाघरा थाना क्षेत्र स्थित पलमा गांव में तीन साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म की शर्मनाक घटना के बाद गांव की पंचायत ने मामले को रफा-दफा करने के लिए आरोपी से तत्काल 20 हजार का जुर्माना वसूला और इससे शराब एवं मटन पार्टी की।

    इसकी जानकारी मिलने पर पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दुष्कर्म के आरोपी को गिरफ्तार किया। अब गैरकानूनी पंचायत बुलाने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की तैयारी चल रही है। घटना बीते शनिवार, 11 जुलाई 2026 की है, जब पलमा गांव के ही रहने वाले दरिंदे सुनील लोहरा ने तीन वर्षीय मासूम बच्ची को अपनी हवस का शिकार बनाया और उसके साथ बर्बरता की।

    जब इस घटना की जानकारी गांव के कुछ रसूखदारों को लगी, तो उन्होंने पुलिस को सूचना देने या पीड़ित परिवार को कानूनी न्याय दिलाने के बजाय, रविवार को गांव में ही एक गुपचुप पंचायत बुला ली। इस पंचायत का मुख्य उद्देश्य पीड़ित को न्याय दिलाना नहीं, बल्कि पूरे मामले को रफा-दफा करना था। पंचायत में बैठे दबंगों ने अमानवीयता की सारी हदें पार करते हुए मासूम के जख्मों की कीमत लगा दी और आरोपी सुनील लोहरा पर एक लाख रुपये का आर्थिक जुर्माना ठोकने का फरमान सुना दिया।

    दबंगों ने आरोपी से मौके पर ही 20 हजार रुपये नकद वसूल लिए और शेष 80 हजार रुपये की भारी-भरकम राशि एक सप्ताह के भीतर हर हाल में चुकाने की सख्त मोहलत दे दी। लेकिन, संवेदनहीनता का सबसे वीभत्स रूप इसके बाद देखने को मिला। पीड़ित परिवार और तड़पती हुई मासूम बच्ची के चीख-पुकार को पूरी तरह दरकिनार कर, पंचायत के इन कथित पंचों ने आरोपी से मौके पर वसूले गए उसी 20 हजार रुपये से गांव में ही मटन और शराब का बंदोबस्त किया।

    इसके बाद दुष्कर्म के पैसों से इन रसूखदारों ने जमकर जश्न मनाया और मटन-शराब की पार्टी की। इस बीच, गांव के ही एक सजग नागरिक ने हिम्मत दिखाई और गुप्त रूप से घाघरा थाना पुलिस को पूरे घटनाक्रम की सटीक सूचना दे दी। पुलिस प्रशासन तुरंत हरकत में आया और आनन-फानन में घाघरा थाना पुलिस की एक विशेष टीम ने पलमा गांव में भारी दबिश देकर छापेमारी की। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी सुनील लोहरा को उसके ठिकाने से धर दबोचा और उसे सलाखों के पीछे भेज दिया।

    आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट और दुष्कर्म की अत्यंत गंभीर व गैर-जमानती धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस पीड़ित परिवार पर केस दबाने का दबाव बनाने, साक्ष्यों को नष्ट करने और जघन्य सामाजिक अपराध को छुपाने का षड्यंत्र रचने के आरोप में पंचायत के आयोजकों, उसमें शामिल दबंगों और शराब पार्टी करने वालों की पहचान में जुटी है।

  • सरकारी नौकरी का बड़ा अवसर परमाणु ऊर्जा परियोजना में 255 टेक्नीशियन पदों पर भर्ती आवेदन 15 जुलाई से

    सरकारी नौकरी का बड़ा अवसर परमाणु ऊर्जा परियोजना में 255 टेक्नीशियन पदों पर भर्ती आवेदन 15 जुलाई से


    नई दिल्ली । सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक शानदार अवसर सामने आया है। न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट ने स्टाइपेंडरी ट्रेनी और टेक्नीशियन के कुल 255 पदों पर भर्ती के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। यह भर्ती तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले स्थित देश के सबसे बड़े परमाणु ऊर्जा केंद्र के लिए की जाएगी। इच्छुक और पात्र उम्मीदवार 15 जुलाई से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवेदन प्रक्रिया 4 अगस्त की शाम चार बजे तक जारी रहेगी।

    भर्ती के तहत विभिन्न आरक्षित और अनारक्षित वर्गों के लिए अलग अलग पद निर्धारित किए गए हैं। कुल 255 रिक्तियों में अनुसूचित जाति के लिए 54 पद अनुसूचित जनजाति के लिए 19 पद अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 77 पद आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 20 पद तथा सामान्य वर्ग के लिए 85 पद शामिल हैं। इसके अलावा दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए भी 11 पद आरक्षित रखे गए हैं जिससे अधिक से अधिक योग्य उम्मीदवारों को अवसर मिल सके।

    ऑनलाइन आवेदन केवल एनपीसीआईएल की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे। उम्मीदवारों को निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना पंजीकरण और आवेदन प्रक्रिया पूरी करनी होगी। अंतिम तिथि के बाद किसी भी प्रकार का आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा इसलिए अभ्यर्थियों को समय रहते आवेदन करने की सलाह दी गई है।

    शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो प्लांट ऑपरेटर पद के लिए अभ्यर्थी के पास विज्ञान संकाय से बारहवीं पास होना जरूरी है। फिजिक्स केमिस्ट्री और गणित विषयों के साथ कम से कम 50 प्रतिशत अंक होना अनिवार्य है। वहीं इलेक्ट्रॉनिक्स मैकेनिक इंस्ट्रूमेंट मैकेनिक इलेक्ट्रीशियन फिटर टर्नर मशीनिस्ट और वेल्डर जैसे ट्रेड के लिए उम्मीदवार के पास दसवीं में विज्ञान और गणित में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक तथा संबंधित ट्रेड में दो वर्षीय आईटीआई प्रमाणपत्र होना चाहिए। जिन ट्रेड में आईटीआई की अवधि दो वर्ष से कम है वहां एक वर्ष का संबंधित कार्य अनुभव भी आवश्यक होगा। सभी उम्मीदवारों के लिए दसवीं स्तर तक अंग्रेजी विषय पढ़ा होना भी अनिवार्य रखा गया है।

    आयु सीमा के अनुसार आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की न्यूनतम उम्र 18 वर्ष और अधिकतम उम्र 24 वर्ष निर्धारित की गई है। आरक्षित वर्गों के अभ्यर्थियों को केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट प्रदान की जाएगी।

    चयनित उम्मीदवारों को दो वर्ष के प्रशिक्षण कार्यक्रम से गुजरना होगा। प्रशिक्षण के पहले वर्ष में प्रति माह 20 हजार रुपये और दूसरे वर्ष में 22 हजार रुपये का स्टाइपेंड दिया जाएगा। इसके अलावा एक बार तीन हजार रुपये का बुक अलाउंस भी मिलेगा। प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा होने के बाद अभ्यर्थियों को टेक्नीशियन बी के पद पर नियुक्त किया जाएगा। इस पद पर सातवें वेतन आयोग के अनुसार लेवल तीन में 21 हजार 700 रुपये का मूल वेतन मिलेगा। इसके साथ महंगाई भत्ता और अन्य सरकारी भत्तों का लाभ भी दिया जाएगा।

    एनपीसीआईएल की यह भर्ती तकनीकी क्षेत्र में करियर बनाने वाले युवाओं के लिए बेहतरीन अवसर मानी जा रही है। आकर्षक वेतन प्रशिक्षण के दौरान आर्थिक सहायता और भविष्य में स्थायी सरकारी नौकरी की संभावना इस भर्ती को और अधिक महत्वपूर्ण बनाती है। इच्छुक उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि आवेदन करने से पहले आधिकारिक अधिसूचना को ध्यानपूर्वक पढ़ लें और सभी आवश्यक दस्तावेज पहले से तैयार रखें ताकि आवेदन प्रक्रिया में किसी प्रकार की परेशानी न हो।

  • स्वास्थ्य सेवाओं में बदल रहा भारत का भविष्य राजनाथ बोले इलाज के साथ रोकथाम और रिसर्च पर भी बराबर जोर

    स्वास्थ्य सेवाओं में बदल रहा भारत का भविष्य राजनाथ बोले इलाज के साथ रोकथाम और रिसर्च पर भी बराबर जोर


    नई दिल्ली । भारत का स्वास्थ्य क्षेत्र तेजी से बदलाव के दौर से गुजर रहा है और अब सरकार का फोकस केवल बीमारियों के इलाज तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि उनकी रोकथाम पर भी समान रूप से दिया जा रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में कहा कि बीते वर्षों में देश की स्वास्थ्य व्यवस्था अधिक आत्मनिर्भर सुलभ किफायती आधुनिक और जनकेंद्रित बनी है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा शिक्षा अनुसंधान और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार में अभूतपूर्व प्रगति हुई है जिससे देश वैश्विक स्वास्थ्य क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है।

    राजनाथ सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में स्वास्थ्य सेवाओं में व्यापक बदलाव देखने को मिला है। वर्ष 2017 से पहले राज्य में केवल 17 मेडिकल कॉलेज थे जबकि अब उनकी संख्या बढ़कर 81 हो चुकी है। इसके अलावा प्रदेश में दो एम्स भी संचालित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश अब हर जिले में मेडिकल कॉलेज की परिकल्पना से भी आगे निकल चुका है और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में नए मानक स्थापित कर रहा है।

    उन्होंने कहा कि बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए पर्याप्त संख्या में डॉक्टरों और विशेषज्ञों की उपलब्धता बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य से सरकार ने मेडिकल शिक्षा का बड़े पैमाने पर विस्तार किया है। आज भारत जीन चिकित्सा परमाणु चिकित्सा और अन्य आधुनिक तकनीकों के जरिए स्वास्थ्य संबंधी वैश्विक चुनौतियों का स्वदेशी समाधान तैयार कर रहा है। उन्होंने बताया कि कैंसर के इलाज में उपयोगी सीएआर टी सेल थेरेपी का दुनिया का सबसे सस्ता संस्करण भारत ने विकसित किया है जिससे यह उपचार अब आम लोगों की पहुंच में भी आ रहा है।

    रक्षा मंत्री ने चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हीमोफीलिया के इलाज के लिए स्वदेशी जीन थेरेपी का सफल परीक्षण किया जा चुका है। पुणे के वैज्ञानिकों ने स्तन कैंसर के उपचार के लिए आधुनिक नैनो दवा विकसित की है। उन्होंने यह भी बताया कि तीन दशक बाद देश में पेनिसिलिन जी का उत्पादन दोबारा शुरू हुआ है। उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना के माध्यम से चिकित्सा उपकरणों के स्वदेशी निर्माण को भी नई गति मिली है। इसी वर्ष भारत ने निमोनिया के इलाज में उपयोगी पहली स्वदेशी मैक्रोलाइड एंटीबायोटिक नैफिथ्रोमाइसिन भी विकसित की है।

    राजनाथ सिंह ने कहा कि वर्ष 2023 में भारत ने पहली स्वदेशी एमआरआई मशीन विकसित कर स्वास्थ्य क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की। उन्होंने बताया कि देशभर में 19 हजार से अधिक जन औषधि केंद्रों के माध्यम से लोगों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाइयां उपलब्ध कराई जा रही हैं जबकि आयुष्मान भारत योजना के जरिए करोड़ों लोगों को मुफ्त इलाज का लाभ मिल रहा है। पिछले बारह वर्षों में स्वास्थ्य क्षेत्र में हुए बदलावों ने आम नागरिकों तक बेहतर चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त किया है।

    रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल इलाज उपलब्ध कराना नहीं बल्कि ऐसी स्वास्थ्य व्यवस्था तैयार करना है जो हर नागरिक के लिए सुलभ किफायती और गुणवत्तापूर्ण हो। उन्होंने अंगदान को मानवता की सबसे बड़ी सेवा बताते हुए कहा कि डॉक्टरों की जिम्मेदारी केवल इलाज तक सीमित नहीं है बल्कि समाज में जागरूकता फैलाने की भी है ताकि अंगदान को लेकर फैली भ्रांतियां दूर हो सकें।

    उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता जीन संपादन कृत्रिम जीव विज्ञान और सटीक चिकित्सा जैसी नई तकनीकें स्वास्थ्य क्षेत्र का भविष्य तय कर रही हैं। ऐसे में डॉक्टरों को लगातार नई तकनीकों और शोध से खुद को अपडेट रखना होगा। उन्होंने नवस्नातक चिकित्सकों से आह्वान किया कि वे केवल डिग्री हासिल करने तक सीमित न रहें बल्कि सेवा समर्पण और संवेदनशीलता के साथ समाज के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।

  • अमरनाथ यात्रियों से भरे काफिले में बड़ा हादसा जम्मू श्रीनगर हाईवे पर चार वाहन भिड़े 18 श्रद्धालु घायल

    अमरनाथ यात्रियों से भरे काफिले में बड़ा हादसा जम्मू श्रीनगर हाईवे पर चार वाहन भिड़े 18 श्रद्धालु घायल

    नई दिल्ली । अमरनाथ यात्रा के दौरान सोमवार को जम्मू श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर बड़ा सड़क हादसा हो गया। रामबन जिले के चंदरकोट क्षेत्र में यात्रा काफिले के साथ चल रहे चार वाहन आपस में टकरा गए जिससे अफरा तफरी मच गई। हादसे में 18 अमरनाथ श्रद्धालु घायल हो गए। राहत की बात यह रही कि सभी को मामूली चोटें आई हैं और उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। पुलिस और प्रशासन की टीम ने मौके पर पहुंचकर तुरंत राहत एवं बचाव अभियान चलाया और सभी घायलों को रामबन जिला अस्पताल पहुंचाया।

    जानकारी के अनुसार हादसा चंदरकोट स्थित लंगर स्थल के पास उस समय हुआ जब पहलगाम की ओर जा रहे अमरनाथ यात्रा काफिले में शामिल वाहन एक दूसरे से टकरा गए। सबसे पहले जम्मू कश्मीर सड़क परिवहन निगम की एक बस आगे चल रही दूसरी एसआरटीसी बस से जा भिड़ी। टक्कर इतनी तेज थी कि दूसरी बस आगे चल रही कार से टकरा गई और कार ने सामने मौजूद एक निजी बस को जोरदार टक्कर मार दी। देखते ही देखते चारों वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गए और यात्रियों में चीख पुकार मच गई।

    हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंच गईं। घायलों को तत्काल एंबुलेंस के जरिए जिला अस्पताल रामबन ले जाया गया जहां उनका उपचार शुरू किया गया। अधिकारियों ने बताया कि किसी भी यात्री की हालत गंभीर नहीं है और सभी खतरे से बाहर हैं।

    अब तक दस घायलों की पहचान हो चुकी है। इनमें उत्तर प्रदेश के कानपुर निवासी हर्ष राजपूत विशाल गुप्ता और पंकज सुवनकर शामिल हैं। महाराष्ट्र के यवतमाल निवासी सुहास जीवन मोवाडे भी हादसे में घायल हुए हैं। राजस्थान के श्रीगंगानगर निवासी भारत भूषण और विनोद कुमार को भी चोटें आई हैं। इसके अलावा राजस्थान के बीकानेर की किरण पंजाब की सीमा रानी राजस्थान के पवन कुमार और गंगा सिन्हा भी घायलों में शामिल हैं। शेष आठ यात्रियों की पहचान की प्रक्रिया जारी है।

    दुर्घटना के कारण जम्मू श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित रहा। पुलिस ने क्षतिग्रस्त वाहनों को सड़क से हटाकर मार्ग को दोबारा सुचारु कराया। हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है और यह पता लगाया जा रहा है कि दुर्घटना चालक की लापरवाही से हुई या किसी तकनीकी खराबी की वजह से।

    गौरतलब है कि इस वर्ष श्री अमरनाथ यात्रा तीन जुलाई से शुरू हुई है और यह 28 अगस्त तक चलेगी। यात्रा के दौरान देशभर से लाखों श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए जम्मू कश्मीर पहुंच रहे हैं। अब तक दो लाख पैंतालीस हजार से अधिक श्रद्धालु पवित्र गुफा में दर्शन कर चुके हैं। प्रशासन की ओर से सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए गए हैं लेकिन इस हादसे ने यात्रा मार्ग पर सुरक्षित संचालन की चुनौती को एक बार फिर सामने ला दिया है।

  • भारतीय महिला टीम की जीत लगभग तय लॉर्ड्स टेस्ट में इंग्लैंड पर शिकंजा सिर्फ चार विकेट की दरकार

    भारतीय महिला टीम की जीत लगभग तय लॉर्ड्स टेस्ट में इंग्लैंड पर शिकंजा सिर्फ चार विकेट की दरकार


    नई दिल्ली । भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर खेले जा रहे टेस्ट मैच में शानदार प्रदर्शन करते हुए जीत की मजबूत नींव रख दी है। बल्लेबाजों के दमदार प्रदर्शन के बाद भारतीय गेंदबाजों ने भी शानदार खेल दिखाया और इंग्लैंड को बैकफुट पर धकेल दिया। तीसरे दिन का खेल समाप्त होने तक मेजबान टीम छह विकेट खोकर केवल 130 रन ही बना सकी है। अब इंग्लैंड को जीत के लिए अभी भी 327 रन चाहिए जबकि उसके सिर्फ चार विकेट शेष हैं। ऐसे में भारतीय टीम ऐतिहासिक जीत से महज चार विकेट दूर खड़ी है।

    मैच की शुरुआत भारत के लिए आसान नहीं रही थी। टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम ने शुरुआती 37 रन तक दो विकेट गंवा दिए थे। इसके बाद स्मृति मंधाना ने शानदार जिम्मेदारी निभाते हुए जेमिमा रोड्रिगेज और कप्तान हरमनप्रीत कौर के साथ महत्वपूर्ण साझेदारियां कीं। मंधाना ने आकर्षक बल्लेबाजी करते हुए 83 रन बनाए जबकि हरमनप्रीत कौर ने 58 और दीप्ति शर्मा ने 57 रन का अहम योगदान दिया। इन पारियों की बदौलत भारत पहली पारी में 285 रन तक पहुंचने में सफल रहा।

    इंग्लैंड की पहली पारी भारतीय गेंदबाजों के सामने ज्यादा देर टिक नहीं सकी। शुरुआती झटकों के बाद कप्तान नैट साइवर ब्रंट और एमी जोन्स ने कुछ संघर्ष जरूर किया लेकिन भारतीय गेंदबाजों ने लगातार दबाव बनाए रखा। युवा तेज गेंदबाज क्रांति गौड़ ने शानदार गेंदबाजी करते हुए पांच विकेट अपने नाम किए और इंग्लैंड की पूरी टीम केवल 170 रन पर सिमट गई। भारत को पहली पारी के आधार पर 115 रन की महत्वपूर्ण बढ़त हासिल हुई जिसने मैच की दिशा बदल दी।

    दूसरी पारी में भारतीय बल्लेबाजों ने इंग्लैंड को वापसी का कोई मौका नहीं दिया। स्मृति मंधाना ने एक बार फिर शानदार बल्लेबाजी करते हुए 70 रन बनाए जबकि शेफाली वर्मा के साथ पहले विकेट के लिए 88 रन की मजबूत साझेदारी की। इसके बाद यास्तिका भाटिया ने करियर की सबसे यादगार पारी खेलते हुए 113 रन बनाए और लॉर्ड्स के मैदान पर टेस्ट शतक लगाने वाली पहली महिला क्रिकेटर बन गईं। ऋचा घोष ने भी तेज अंदाज में नाबाद 50 रन बनाकर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। भारत ने सात विकेट पर 341 रन बनाकर पारी घोषित की और इंग्लैंड के सामने जीत के लिए 457 रन का मुश्किल लक्ष्य रखा।

    इतने बड़े लक्ष्य का पीछा करने उतरी इंग्लैंड की शुरुआत बेहद खराब रही। भारतीय गेंदबाजों ने शुरुआत से ही सटीक लाइन और लेंथ के साथ दबाव बनाया। इंग्लैंड ने केवल दो रन के स्कोर पर पहला विकेट गंवा दिया और देखते ही देखते 59 रन तक पांच बल्लेबाज पवेलियन लौट चुके थे। हालांकि मैडी विलियर्स और एमी जोन्स ने कुछ देर संघर्ष किया लेकिन भारतीय गेंदबाजों ने मैच पर अपनी पकड़ बनाए रखी। तीसरे दिन के अंत तक सायली सातघारे क्रांति गौड़ और स्नेह राणा ने दो दो विकेट लेकर इंग्लैंड की उम्मीदों को लगभग खत्म कर दिया।

    यह मुकाबला इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि लॉर्ड्स के प्रतिष्ठित मैदान पर पहली बार महिला टेस्ट मैच खेला जा रहा है। भारतीय टीम अब इस ऐतिहासिक अवसर को यादगार जीत में बदलने से सिर्फ चार विकेट दूर है। यदि चौथे दिन भारतीय गेंदबाज अपनी लय बरकरार रखते हैं तो टीम इंडिया लॉर्ड्स में सुनहरे इतिहास का नया अध्याय लिख देगी।

  • "आओ, अब घर लौट चलें": गुजरात में 25 लोगों ने की शारदापीठ शंकराचार्य की प्रेरणा से घर वापिसी

    "आओ, अब घर लौट चलें": गुजरात में 25 लोगों ने की शारदापीठ शंकराचार्य की प्रेरणा से घर वापिसी


    गुजरात । गुजरात के आदिवासी बहुल छोटा उदेपुर जिले में धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन ‘स्वधर्मानयन’ अभियान को एक नई ऊर्जा मिली है। द्वारका शारदापीठ द्वारा संचालित श्री आनंद वर्धन आश्रम के उद्घाटन अवसर पर 25 आदिवासी एवं वनवासी भाई-बहनों ने जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानन्द सरस्वती के सान्निध्य में गंगाजल ग्रहण कर भगवान श्रीराम का मंत्र लिया और स्वेच्छा से सनातन हिंदू धर्म अपनाने का संकल्प व्यक्त किया। शारदापीठ की ओर से बताया गया कि हमारे लिए यह धार्मिक अनुष्ठान अपनी सांस्कृतिक जड़ों से पुनः जुड़ने का अभियान है।

    उल्‍लेखनीय है कि 11 जुलाई 2026 को गुजरात के छोटा उदेपुर जिले के ग्राम वासणा (कोषिन्द्रा) में द्वारका शारदापीठ द्वारा संचालित श्री आनंद वर्धन आश्रम का उद्घाटन द्वारकाशारदापीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानन्द सरस्वती महाराज के करकमलों से संपन्न हुआ। आदिवासी एवं वनवासी समाज के बीच स्थापित यह आश्रम धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ सामाजिक एवं सांस्कृतिक जागरण का भी केंद्र बनेगा।


    शारदापीठ का कहना है कि इस आश्रम के माध्यम से क्षेत्र के लोगों तक सनातन धर्म की शिक्षाएं, भारतीय संस्कृति, वैदिक परंपराएं तथा नैतिक जीवन मूल्यों को व्यवस्थित रूप से पहुंचाया जाएगा। इसके साथ ही स्थानीय समाज में संस्कार, शिक्षा, सेवा और सामाजिक समरसता से जुड़े कार्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे। आश्रम के उद्घाटन समारोह का सबसे महत्वपूर्ण क्षण वह रहा, जब 25 आदिवासी एवं वनवासी भाई-बहनों ने सार्वजनिक रूप से गंगाजल ग्रहण किया तथा शंकराचार्य स्वामी सदानन्द सरस्वती से भगवान श्रीराम का मंत्र ग्रहण कर सनातन हिंदू धर्म अपनाने का संकल्प लिया।

    इस अवसर पर उन्होंने यह घोषणा भी की कि वे अपने जीवन में सनातन धर्म की परंपराओं का पालन करेंगे तथा अपनी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध रहेंगे। आयोजन से जुड़े लोगों के अनुसार यह पूरी प्रक्रिया स्वेच्छा से संपन्न हुई और इसमें शामिल सभी लोगों ने स्वयं अपनी इच्छा से यह निर्णय लिया।


    ‘स्वधर्मानयन’ को स्थायी आधार देगा नया आश्रम

    अपने उद्बोधन में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानन्द सरस्वती महाराज ने कहा कि वे पिछले कई वर्षों से गुजरात के जनजाति एवं वनवासी क्षेत्रों में ‘स्वधर्मानयन यात्रा’ के माध्यम से लगातार जनजागरण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वासणा ग्राम में आनंद वर्धन आश्रम की स्थापना इस अभियान को नई दिशा और स्थायी आधार प्रदान करेगी।

    उन्होंने कहा कि अब यह आश्रम धार्मिक अनुष्ठानों के अतिरिक्‍त गांव-गांव तक पहुंचने वाले जागरण अभियान का केंद्र बनेगा। उन्होंने कहा कि भविष्य में वे अधिक व्यापक स्तर पर ग्रामीण क्षेत्रों का भ्रमण करेंगे और लोगों को अपनी सांस्कृतिक एवं धार्मिक परंपराओं के महत्व से परिचित कराएंगे।


    शंकराचार्य सदानन्द सरस्वती महाराज ने कहा, “किसी भी समाज की पहचान उसकी संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों से होती है। यदि समाज अपनी जड़ों से कट जाता है तो उसकी सांस्कृतिक पहचान भी धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगती है, इसलिए अपनी परंपराओं का संरक्षण और उनका पालन प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है।”

    गांव-गांव तक पहुंच रहा है ‘स्वधर्मानयन’ का संदेश

    द्वारका शारदापीठ के अनुसार ‘स्वधर्मानयन’ अभियान का उद्देश्य किसी प्रकार भी प्रकार के विवाद में न पड़ते हुए उन लोगों को उनकी सांस्कृतिक एवं धार्मिक विरासत से पुनः जोड़ना है, जोकि विभिन्न कारणों से अपनी मूल परंपराओं से दूर हो गए हैं। इसी उद्देश्य से पिछले कई वर्षों से गुजरात के आदिवासी अंचलों में नियमित रूप से ग्राम सभाएं, धार्मिक प्रवचन, सत्संग, संस्कार शिविर, यज्ञ तथा जनजागरण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को भारतीय संस्कृति, वैदिक परंपरा, परिवार व्यवस्था, सामाजिक समरसता और सनातन जीवन पद्धति के विषय में जानकारी दी जाती है।


    शारदापीठ का मानना है कि समाज में स्थायी परिवर्तन लाने के लिए धार्मिक अनुष्ठानों के साथ आवश्‍यक यह भी है कि निरंतर संवाद, शिक्षा और सेवा कार्यों को भी माध्यम बनाया जाए। इसी कारण “स्वधर्मानयन अभियान” को सेवा, संस्कार और सांस्कृतिक जागरण के साथ जोड़ा गया है।

    पहले भी अनेक स्थानों पर हुए हैं घर वापसी के कार्यक्रम

    द्वारका शारदापीठ और उसके शंकराचार्यों द्वारा घर वापसी अथवा ‘स्वधर्मानयन’ का अभियान पिछले कई वर्षों से निरंतर चलाया जा रहा है। विशेष रूप से गुजरात, झारखण्‍ड, छत्‍तीसगढ़, मध्‍यप्रदेश समेत कई राज्‍यों के आदिवासी और वनवासी क्षेत्रों में समय-समय पर ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं, जिनमें अनेक परिवारों ने स्वेच्छा से पुनः सनातन परंपरा अपनाने की घोषणा की।

    यहां गुजरात के संदर्भ में ज्ञात हो कि शारदापीठ से जुड़े संतों ने वर्षों से दक्षिण गुजरात, छोटा उदेपुर, पंचमहल, दाहोद तथा अन्य आदिवासी क्षेत्रों में व्यापक संपर्क अभियान चलाया है। इन अभियानों के दौरान गांव-गांव जाकर धार्मिक सभाएं आयोजित की गईं, लोगों से संवाद स्थापित किया गया तथा भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा के विषय में जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया गया।


    इसके अतिरिक्त धार्मिक संस्कार शिविरों, रामकथा, गीता प्रवचन, गौ-सेवा, शिक्षा सहायता, चिकित्सा शिविर और सामाजिक सेवा गतिविधियों के माध्यम से भी स्थानीय समाज के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखा गया। शारदापीठ का दावा है कि इन प्रयासों के परिणामस्वरूप अनेक परिवार अपनी पारंपरिक धार्मिक पहचान के साथ पुनः जुड़े हैं।

    नवस्थापित आनंद वर्धन आश्रम में भी भविष्य में संस्कृत शिक्षा, धार्मिक अध्ययन, बच्चों के संस्कार वर्ग, महिलाओं के सशक्तिकरण कार्यक्रम, योग, आध्यात्मिक प्रशिक्षण तथा सामाजिक सेवा गतिविधियों के संचालन की योजना बताई गई है। आश्रम के माध्यम से स्थानीय युवाओं को भारतीय संस्कृति और राष्ट्र निर्माण से जुड़े विषयों पर भी प्रेरित किया जाएगा।

    शंकराचार्य का आह्वान- ‘अपने धर्म और संस्कृति को जानिए’

    अपने संबोधन में शंकराचार्य स्वामी सदानन्द सरस्वती ने कहा, “समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपने धर्म, संस्कृति और इतिहास का ज्ञान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि नई पीढ़ी अपनी जड़ों को समझेगी, तभी वह अपनी सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रख सकेगी।”

    उन्होंने कहा है- “आने वाले समय में स्वधर्मानयन यात्रा को और अधिक व्यापक बनाया जाएगा। इसके अंतर्गत गुजरात के दूरस्थ आदिवासी और वनवासी क्षेत्रों में लगातार प्रवास, धार्मिक संवाद और जनजागरण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। आनंद वर्धन आश्रम इस पूरे अभियान का प्रमुख केंद्र बनेगा और यहां से सेवा, संस्कार तथा सांस्कृतिक जागरण की गतिविधियों को नई गति मिलेगी।”

    उन्होंने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य लोगों के भीतर अपनी परंपराओं के प्रति आत्मविश्वास जगाना, सामाजिक एकता को मजबूत करना तथा भारतीय संस्कृति के शाश्वत मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाना है। इसी संकल्प के साथ शारदापीठ आने वाले वर्षों में अपने स्वधर्मानयन अभियान को और व्यापक स्वरूप देने की तैयारी कर रहा है।

  • वनडे में इंग्लैंड पर भारत का दबदबा फिर दोहराने की तैयारी हेड टू हेड रिकॉर्ड दे रहे जीत का भरोसा

    वनडे में इंग्लैंड पर भारत का दबदबा फिर दोहराने की तैयारी हेड टू हेड रिकॉर्ड दे रहे जीत का भरोसा


    नई दिल्ली । भारत और इंग्लैंड के बीच तीन मैचों की बहुप्रतीक्षित वनडे सीरीज का आगाज 14 जुलाई से होने जा रहा है। पहला मुकाबला बर्मिंघम के ऐतिहासिक एजबेस्टन क्रिकेट स्टेडियम में खेला जाएगा जहां भारतीय टीम टी20 सीरीज में मिली निराशाजनक हार का हिसाब बराबर करने के इरादे से मैदान पर उतरेगी। हालांकि हालिया टी20 प्रदर्शन भारत के पक्ष में नहीं रहा लेकिन वनडे क्रिकेट का इतिहास टीम इंडिया के आत्मविश्वास को मजबूत करता है। दोनों टीमों के बीच अब तक खेले गए मुकाबलों के आंकड़े साफ बताते हैं कि इस प्रारूप में भारत का पलड़ा इंग्लैंड पर भारी रहा है।

    भारत और इंग्लैंड के बीच अब तक 110 वनडे मुकाबले खेले जा चुके हैं। इनमें से 61 मैच भारत ने अपने नाम किए हैं जबकि इंग्लैंड केवल 44 मुकाबलों में जीत दर्ज कर सका है। दो मैच टाई रहे और तीन मुकाबलों का कोई परिणाम नहीं निकल सका। यह रिकॉर्ड दिखाता है कि वनडे क्रिकेट में टीम इंडिया ने लगातार इंग्लैंड पर अपना दबदबा बनाए रखा है और यही इतिहास एक बार फिर भारतीय खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाएगा।

    हालांकि इंग्लैंड की धरती पर भारत का रिकॉर्ड अपेक्षाकृत संतुलित रहा है। इंग्लैंड में दोनों टीमों के बीच खेले गए 44 वनडे मुकाबलों में भारत ने 18 मैच जीते हैं जबकि इंग्लैंड ने 23 मुकाबलों में बाजी मारी है। एक मैच टाई रहा और दो मुकाबले बेनतीजा रहे। घरेलू परिस्थितियों का फायदा इंग्लैंड को जरूर मिलता रहा है लेकिन मौजूदा भारतीय टीम के पास अनुभव और संतुलन दोनों मौजूद हैं।

    टी20 सीरीज में भारतीय बल्लेबाजी उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकी थी। शीर्ष क्रम से लेकर मध्यक्रम तक कोई भी बल्लेबाज लगातार प्रभाव नहीं छोड़ पाया। ऐसे में वनडे सीरीज में सभी की नजर रोहित शर्मा और विराट कोहली की वापसी पर होगी। इन दोनों दिग्गजों की मौजूदगी से भारतीय बल्लेबाजी को मजबूती मिलेगी और टीम का अनुभव भी बढ़ेगा। कप्तान शुभमन गिल पर एक बार फिर पारी की मजबूत शुरुआत कराने की जिम्मेदारी होगी जबकि मध्यक्रम में श्रेयस अय्यर केएल राहुल ईशान किशन और अक्षर पटेल अहम भूमिका निभाएंगे।

    ऑलराउंडर विभाग में वॉशिंगटन सुंदर अक्षर पटेल और नीतीश कुमार रेड्डी टीम को संतुलन देंगे। तीनों खिलाड़ी बल्ले और गेंद दोनों से मैच का रुख बदलने की क्षमता रखते हैं। दूसरी ओर गेंदबाजी की अगुवाई तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह करेंगे जिनका अनुभव और सटीक लाइन लेंथ इंग्लैंड के बल्लेबाजों के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकती है। उनके साथ प्रसिद्ध कृष्णा अर्शदीप सिंह प्रिंस यादव और गुरनूर बरार तेज आक्रमण को मजबूती देंगे। चोट के कारण हर्षित इस सीरीज का हिस्सा नहीं हैं।

    स्पिन विभाग में कुलदीप यादव भारतीय टीम के सबसे बड़े हथियार होंगे। उनकी विविधता इंग्लैंड के बल्लेबाजों को परेशान कर सकती है। रवि बिश्नोई को भी टीम में जगह मिली है जबकि चोट के चलते वरुण चक्रवर्ती इस सीरीज में नहीं खेल पाएंगे।

    टी20 की निराशा को पीछे छोड़कर टीम इंडिया अब वनडे में नई शुरुआत करना चाहेगी। शानदार हेड टू हेड रिकॉर्ड मजबूत बल्लेबाजी और अनुभवी गेंदबाजी आक्रमण के दम पर भारतीय टीम के पास इंग्लैंड को उसी की धरती पर हराकर सीरीज जीतने का सुनहरा मौका होगा।

  • इंग्लैंड के खिलाफ विराट के बल्ले से बन सकते हैं इतिहास के नए रिकॉर्ड 15 हजार वनडे रन से सिर्फ 203 रन दूर

    इंग्लैंड के खिलाफ विराट के बल्ले से बन सकते हैं इतिहास के नए रिकॉर्ड 15 हजार वनडे रन से सिर्फ 203 रन दूर


    नई दिल्ली ।  भारत और इंग्लैंड के बीच मंगलवार से शुरू होने वाली तीन मैचों की वनडे सीरीज क्रिकेट प्रेमियों के लिए बेहद खास होने जा रही है। इस सीरीज के साथ टीम इंडिया के स्टार बल्लेबाज विराट कोहली करीब छह महीने बाद एक बार फिर नीली जर्सी में मैदान पर उतरेंगे। उनकी वापसी सिर्फ भारतीय बल्लेबाजी को मजबूती देने तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि इस सीरीज में उनके बल्ले से कई ऐतिहासिक रिकॉर्ड भी टूट सकते हैं। क्रिकेट जगत की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या विराट इंग्लैंड के खिलाफ अपने शानदार रिकॉर्ड को बरकरार रखते हुए इतिहास के नए अध्याय लिख पाएंगे।

    विराट कोहली अब तक भारत के लिए 311 वनडे मुकाबले खेल चुके हैं। इस दौरान उन्होंने 299 पारियों में 58.71 की शानदार औसत से 14797 रन बनाए हैं। अब वह वनडे क्रिकेट में 15000 रन पूरे करने से केवल 203 रन दूर हैं। यदि वह इंग्लैंड के खिलाफ तीन मैचों की इस सीरीज में यह आंकड़ा हासिल कर लेते हैं तो वनडे क्रिकेट में 15000 रन बनाने वाले दुनिया के सिर्फ दूसरे बल्लेबाज बन जाएंगे। इस सूची में फिलहाल केवल महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर का नाम शामिल है।

    इस उपलब्धि से भी बड़ी बात यह है कि विराट के पास सबसे तेज 15000 वनडे रन पूरे करने का विश्व रिकॉर्ड अपने नाम करने का सुनहरा मौका है। सचिन तेंदुलकर ने इस मुकाम तक पहुंचने के लिए 359 पारियां खेली थीं जबकि विराट फिलहाल केवल 299 पारियां खेल चुके हैं। यदि वह इस सीरीज में 203 रन बना लेते हैं तो वह सचिन का रिकॉर्ड तोड़ते हुए सबसे कम पारियों में 15000 रन बनाने वाले बल्लेबाज बन जाएंगे। यह उपलब्धि उनके शानदार करियर में एक और ऐतिहासिक अध्याय जोड़ देगी।

    वनडे क्रिकेट में विराट का रिकॉर्ड पहले से ही बेहद शानदार रहा है। उन्होंने अब तक 54 शतक और 77 अर्धशतक लगाए हैं तथा दुनिया के सबसे सफल एकदिवसीय बल्लेबाजों में गिने जाते हैं। रन बनाने की निरंतरता और बड़े मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन उनकी सबसे बड़ी पहचान रही है।

    इंग्लैंड के खिलाफ भी विराट का प्रदर्शन हमेशा प्रभावशाली रहा है। उन्होंने इंग्लैंड के विरुद्ध 38 वनडे पारियों में लगभग 41 की औसत से 1397 रन बनाए हैं। इस दौरान उनके बल्ले से तीन शतक और 10 अर्धशतक निकले हैं। खास बात यह है कि इंग्लैंड की सरजमीं पर भी उनका रिकॉर्ड बेहद दमदार रहा है। वहां उन्होंने 33 पारियों में 51.88 की औसत से 1349 रन बनाए हैं जिनमें एक शतक और 12 अर्धशतक शामिल हैं। यह आंकड़े बताते हैं कि इंग्लिश परिस्थितियां विराट के खेल के अनुकूल रही हैं और उन्होंने वहां हमेशा जिम्मेदारी के साथ बल्लेबाजी की है।

    भारतीय टीम भी चाहेगी कि विराट अपनी वापसी को यादगार बनाएं और बल्लेबाजी क्रम की अगुवाई करते हुए टीम को सीरीज में मजबूत शुरुआत दिलाएं। युवा खिलाड़ियों से सजी टीम के लिए विराट का अनुभव और बड़े मैचों का दबाव झेलने की क्षमता बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

    भारत और इंग्लैंड के बीच पहला वनडे 14 जुलाई को खेला जाएगा जबकि दूसरा मुकाबला 16 जुलाई और तीसरा एवं अंतिम वनडे 19 जुलाई को होगा। इन तीन मुकाबलों में सिर्फ सीरीज की जीत ही दांव पर नहीं होगी बल्कि करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों की नजर विराट कोहली के बल्ले से बनने वाले उन रिकॉर्ड्स पर भी रहेगी जो उन्हें वनडे क्रिकेट के इतिहास में एक नई ऊंचाई पर पहुंचा सकते हैं।

  • सेमीफाइनल से पहले जो कोल की भविष्यवाणी इंग्लैंड रोकेगा मेसी का जादू और बनाएगा फाइनल का रास्ता

    सेमीफाइनल से पहले जो कोल की भविष्यवाणी इंग्लैंड रोकेगा मेसी का जादू और बनाएगा फाइनल का रास्ता


    नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप 2026 के सेमीफाइनल मुकाबले से पहले इंग्लैंड और अर्जेंटीना के बीच होने वाली टक्कर को लेकर उत्साह चरम पर है। इसी बीच इंग्लैंड के पूर्व स्टार फुटबॉलर जो कोल ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि इंग्लैंड की टीम अर्जेंटीना के कप्तान और दुनिया के महानतम खिलाड़ियों में शामिल लियोनेल मेसी को रोकने में सफल रहेगी। अटलांटा स्टेडियम में होने वाले इस हाईवोल्टेज मुकाबले से पहले उनके बयान ने फुटबॉल जगत में नई बहस छेड़ दी है।

    करीब 21 साल बाद इंग्लैंड और अर्जेंटीना की टीमें फिर विश्व कप के मंच पर आमने सामने होंगी। दोनों देशों के बीच फुटबॉल प्रतिद्वंद्विता दशकों पुरानी है और हर मुकाबला इतिहास और भावनाओं से जुड़ा रहा है। विश्व कप में अब तक दोनों टीमें पांच बार भिड़ चुकी हैं। 1962 1966 1986 1998 और 2002 के मुकाबले फुटबॉल इतिहास के सबसे चर्चित मैचों में गिने जाते हैं। पिछली बार जापान में खेले गए विश्व कप में इंग्लैंड ने डेविड बेकहम की पेनल्टी की बदौलत अर्जेंटीना को हराकर यादगार जीत दर्ज की थी।

    इस बार भी मुकाबला बेहद रोमांचक माना जा रहा है क्योंकि अर्जेंटीना मौजूदा विश्व चैंपियन है। टीम ने 2022 में कतर में विश्व कप जीतकर 36 साल बाद खिताब अपने नाम किया था और अब लगातार दूसरी बार चैंपियन बनने की दौड़ में है। दूसरी ओर इंग्लैंड भी शानदार लय में नजर आ रहा है और लंबे इंतजार के बाद विश्व कप जीतने का सपना पूरा करना चाहता है।

    जो कोल ने एक फुटबॉल पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान कहा कि इंग्लैंड की सबसे बड़ी चुनौती लियोनेल मेसी होंगे लेकिन उन्हें पूरा भरोसा है कि टीम उनके प्रभाव को सीमित करने में सफल रहेगी। उनके अनुसार इंग्लैंड के खिलाड़ी दबाव वाले मुकाबलों में खेलने के आदी हैं और टीम की मजबूत आक्रामक रणनीति अर्जेंटीना के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मेसी को रोकना जरूरी होगा और इंग्लैंड यह काम कर दिखाएगा।

    अर्जेंटीना ने इस विश्व कप में अब तक शानदार प्रदर्शन किया है लेकिन उसे हर चरण में कड़ी चुनौती भी मिली है। क्वार्टर फाइनल में स्विट्जरलैंड के खिलाफ मुकाबला निर्धारित समय तक बराबरी पर रहा जिसके बाद अतिरिक्त समय में जूलियन अल्वारेज और लौटारो मार्टिनेज के गोलों ने टीम को जीत दिलाई। इससे पहले राउंड ऑफ 16 में मिस्र के खिलाफ अर्जेंटीना ने दो गोल से पिछड़ने के बावजूद आखिरी मिनटों में शानदार वापसी करते हुए मुकाबला अपने नाम किया था। वहीं पहली बार विश्व कप खेल रही केप वर्डे ने भी अर्जेंटीना को अतिरिक्त समय तक संघर्ष करने पर मजबूर कर दिया था।

    हालांकि इन कठिन मुकाबलों के बावजूद अर्जेंटीना ने अब तक अपने सभी मैच जीते हैं और फ्रांस के साथ टूर्नामेंट की अपराजित टीम बनी हुई है। दूसरी ओर इंग्लैंड भी मजबूत संतुलित टीम के रूप में सामने आया है और उसके खिलाड़ी बड़े मुकाबलों में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए जाने जाते हैं।

    अब पूरी दुनिया की नजर इस सेमीफाइनल पर टिकी है जहां एक ओर मेसी अपने करियर में एक और विश्व कप खिताब की ओर कदम बढ़ाना चाहेंगे तो दूसरी ओर इंग्लैंड उन्हें रोककर फाइनल का टिकट हासिल करने की कोशिश करेगा। फुटबॉल प्रेमियों को उम्मीद है कि यह मुकाबला विश्व कप इतिहास के सबसे यादगार सेमीफाइनल में शामिल हो सकता है।

  • एक साल की चोट से वापसी और लॉर्ड्स में ऐतिहासिक शतक यास्तिका बोलीं यह मेरे जीवन का सबसे गर्व भरा पल

    एक साल की चोट से वापसी और लॉर्ड्स में ऐतिहासिक शतक यास्तिका बोलीं यह मेरे जीवन का सबसे गर्व भरा पल


    नई दिल्ली । भारतीय महिला क्रिकेट टीम की विकेटकीपर बल्लेबाज यास्तिका भाटिया ने लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर ऐसा का रनामा कर दिखाया जिसे भारतीय क्रिकेट लंबे समय तक याद रखेगा। इंग्लैंड के खिलाफ खेले जा रहे एकमात्र महिला टेस्ट मैच में यास्तिका ने शानदार 113 रन की पारी खेलते हुए न केवल भारत को मजबूत स्थिति में पहुंचाया बल्कि लॉर्ड्स के प्रतिष्ठित ऑनर्स बोर्ड पर अपना नाम दर्ज कराने वाली पहली महिला क्रिकेटर भी बन गईं। यह उपलब्धि इसलिए भी खास रही क्योंकि वह करीब एक साल तक चोट के कारण क्रिकेट से दूर रहने के बाद मैदान पर लौटी थीं।

    यास्तिका की यह पारी केवल एक शतक नहीं बल्कि संघर्ष धैर्य और आत्मविश्वास की मिसाल बनकर सामने आई। लंबे समय तक चोट से जूझने के कारण उन्हें कई बड़े टूर्नामेंट से बाहर रहना पड़ा था। घरेलू वनडे विश्व कप और महिला प्रीमियर लीग जैसे महत्वपूर्ण प्रतियोगिताओं में हिस्सा नहीं ले पाने का दर्द उनके लिए बेहद कठिन था। उन्होंने स्वीकार किया कि उस दौर में कई बार उन्हें लगा कि इतनी बड़ी उपलब्धि शायद अब कभी हासिल नहीं हो पाएगी।

    उन्होंने बताया कि चोट के दौरान पुनर्वास का समय मानसिक और शारीरिक दोनों ही रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण था। लेकिन परिवार टीम प्रबंधन और सहयोगी खिलाड़ियों ने लगातार उनका हौसला बढ़ाया। यही भरोसा उन्हें दोबारा मैदान तक लेकर आया। उन्होंने कहा कि यदि छह महीने पहले कोई उनसे कहता कि उनका नाम लॉर्ड्स के ऑनर्स बोर्ड पर दर्ज होगा तो शायद वह खुद भी इस बात पर विश्वास नहीं करतीं। आज यह सपना सच होने जैसा महसूस हो रहा है।

    यास्तिका ने अपनी ऐतिहासिक पारी के बाद भावुक होते हुए कहा कि यह केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने बताया कि शतक पूरा होने के बाद उन्होंने जश्न मनाने की अलग योजना बनाई थी लेकिन उस पल भावनाएं इतनी प्रबल थीं कि उन्होंने सिर्फ भारतीय तिरंगे को चूमकर अपनी खुशी जाहिर की। उनके लिए यह सबसे बड़ा सम्मान था कि वह भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए इतिहास का हिस्सा बनीं।

    उन्होंने कहा कि जब उन्होंने हेलमेट उतारा तो उनकी आंखों के सामने पिछले एक साल का पूरा संघर्ष घूम गया। परिवार की यादें कठिन दौर की चुनौतियां और मैदान पर वापसी की मेहनत सब कुछ एक साथ याद आने लगा। वह पल इतना भावुक था कि खुद को संभालना भी मुश्किल हो गया। उनके अनुसार यह उनके क्रिकेट जीवन का सबसे खास क्षण है।

    यास्तिका ने स्पष्ट किया कि उनका सपना केवल इस शतक तक सीमित नहीं है। वह भारत के लिए और भी बड़ी उपलब्धियां हासिल करना चाहती हैं। उनका लक्ष्य टीम को विश्व कप जिताना है और देश के लिए लगातार यादगार प्रदर्शन करना है। उन्होंने कहा कि भारतीय जर्सी पहनकर खेलने से बड़ा सम्मान कोई नहीं हो सकता और वह आने वाले वर्षों में टीम की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाना चाहती हैं।

    भारतीय महिला क्रिकेट के लिए भी यह उपलब्धि बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। लॉर्ड्स जैसे ऐतिहासिक मैदान पर टेस्ट शतक लगाकर यास्तिका ने न केवल नया इतिहास रचा बल्कि आने वाली पीढ़ी की महिला क्रिकेटरों के लिए भी नई प्रेरणा तैयार की है। कठिन परिस्थितियों से निकलकर शीर्ष स्तर पर सफलता हासिल करने की उनकी कहानी यह साबित करती है कि मेहनत धैर्य और विश्वास के दम पर हर सपना पूरा किया जा सकता है।