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  • UP के 3.5 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों को बड़ी सौगात, सैलरी में 7 हजार रुपए तक बढ़ोतरी, बीमा कवर भी

    UP के 3.5 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों को बड़ी सौगात, सैलरी में 7 हजार रुपए तक बढ़ोतरी, बीमा कवर भी

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने प्रदेश के करीब साढ़े तीन लाख आउटसोर्स कर्मचारियों को बड़ी सौगात दी है। सरकार ने उनकी सैलरी में 7 हजार रुपए तक की बढ़ोतरी की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (यूपीकोस) की वेबसाइट और लोगो लॉन्च किया। इस दौरान आउटसोर्स कर्मचारियों को चेक भी वितरित किए गए। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक भी मौजूद रहे।

    सरकार के मुताबिक, आउटसोर्स कर्मचारियों को 50 लाख रुपए तक का बीमा कवर दिया जाएगा। इसके अलावा आकस्मिक दवा के लिए 5 लाख रुपए और एयर एंबुलेंस के लिए 10 लाख रुपए तक की सहायता का प्रावधान किया गया है।

    एक ही पोर्टल पर होगा सभी आउटसोर्स कर्मचारियों का रिकॉर्ड
    यूपीकोस के माध्यम से प्रदेश के अलग-अलग सरकारी विभागों में काम कर रहे आउटसोर्स कर्मचारियों का एकीकृत डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। अभी कर्मचारियों से संबंधित जानकारी अलग-अलग विभागों और आउटसोर्स एजेंसियों के स्तर पर रखी जाती है। नई व्यवस्था में इन सभी रिकॉर्ड को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा। इससे कर्मचारियों से जुड़ी जानकारी एक ही जगह उपलब्ध हो सकेगी।

    भर्ती से लेकर भुगतान तक की जानकारी पोर्टल पर दर्ज होगी
    यूपीकोस के पोर्टल पर कर्मचारी की भर्ती, तैनाती, उपस्थिति और भुगतान से संबंधित जानकारी दर्ज की जाएगी। इससे यह पता लगाना आसान होगा कि किस विभाग में कितने आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत हैं और उन्हें कितना भुगतान किया जा रहा है। कर्मचारियों की सेवा से संबंधित रिकॉर्ड भी डिजिटल रूप में उपलब्ध रहेगा। जरूरत पड़ने पर किसी कर्मचारी की तैनाती, भुगतान या सेवा रिकॉर्ड की जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म से देखी जा सकेगी।

    एजेंसियों की प्रक्रिया पर भी होगी निगरानी
    नई व्यवस्था लागू होने के बाद आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती, तैनाती और भुगतान की प्रक्रिया पर निगरानी आसान होने की उम्मीद है। अलग-अलग एजेंसियों के माध्यम से होने वाली प्रक्रिया में रिकॉर्ड और भुगतान से जुड़ी गड़बड़ियों की गुंजाइश कम करने में भी मदद मिलेगी। प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में बड़ी संख्या में कर्मचारी आउटसोर्स के माध्यम से काम कर रहे हैं। नई व्यवस्था का सीधा असर इन कर्मचारियों की भर्ती, सेवा शर्तों और भुगतान व्यवस्था से जुड़े प्रबंधन पर पड़ेगा।

  • बुलंदशहर के शिकारपुर विधायक अनिल शर्मा का निधन, दिल्ली के अस्पताल में ली अंतिम सांस

    बुलंदशहर के शिकारपुर विधायक अनिल शर्मा का निधन, दिल्ली के अस्पताल में ली अंतिम सांस

    बुलंदशहर। शिकारपुर विधानसभा सीट से भाजपा विधायक और पूर्व राज्यमंत्री अनिल शर्मा का बुधवार को दिल्ली के एक अस्पताल में निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे और कैंसर का इलाज करा रहे थे। उनके निधन की खबर से बुलंदशहर जिले और शिकारपुर क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। अनिल शर्मा योगी सरकार में वन राज्य मंत्री भी रह चुके थे। इलाज के दौरान दिल्ली के अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली।

    कम उम्र में निर्विरोध ग्राम प्रधान चुने गए थे
    अनिल शर्मा बुलंदशहर के शिकारपुर विधानसभा क्षेत्र के सुरजावली गांव के रहने वाले थे। उन्होंने कम उम्र में ही राजनीति में कदम रखा और ग्राम सुरजावली के निर्विरोध प्रधान चुने गए थे। इसके बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में आगे बढ़ते हुए विधानसभा चुनाव लड़ा।

    2002 में पहली बार बने विधायक
    अनिल शर्मा ने वर्ष 2002 में खुर्जा विधानसभा सीट से बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के टिकट पर पहली बार विधानसभा चुनाव जीता। इसके बाद 2007 में भी उन्होंने खुर्जा सीट से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और लगातार दूसरी बार विधायक बने। वर्ष 2012 में उन्होंने शिकारपुर विधानसभा सीट से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया।

    2017 में भाजपा के टिकट पर जीते, योगी सरकार में बने मंत्री
    भाजपा में शामिल होने के बाद अनिल शर्मा ने वर्ष 2017 में शिकारपुर विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। इसके बाद उन्हें प्रदेश की योगी सरकार में वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री की जिम्मेदारी दी गई। वर्ष 2022 में भी उन्होंने भाजपा के टिकट पर शिकारपुर सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इस तरह वह शिकारपुर से भाजपा विधायक के तौर पर अपना कार्यकाल पूरा कर रहे थे। अनिल शर्मा के निधन से भाजपा कार्यकर्ताओं, समर्थकों और क्षेत्र के लोगों में शोक की लहर है।

  • अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक, 3 नए सदस्य बनाए गए, CEO के नाम पर मंथन जारी

    अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक, 3 नए सदस्य बनाए गए, CEO के नाम पर मंथन जारी

    अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अहम बैठक अयोध्या की मणिरामदास छावनी में चल रही है। बैठक में ट्रस्ट के लिए तीन नए सदस्यों की घोषणा की गई है। इनमें अयोध्या के मदन मोहन पांडेय, दिल्ली के महेश भागचंदका और अयोध्या की निर्मला यादव शामिल हैं। बैठक में अंतरिम महासचिव डॉ. कृष्ण मोहन, कोषाध्यक्ष गोविंद देवगिरि, ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास, शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती सहित अन्य ट्रस्टी मौजूद हैं।

    राम मंदिर के पहले CEO के नाम पर अंतिम मंथन
    बैठक का सबसे अहम एजेंडा राम मंदिर के पहले मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) की नियुक्ति है। CEO के चयन के लिए गठित तीन सदस्यीय सर्च कमेटी अपनी रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंप चुकी है। बताया जा रहा है कि कमेटी ने तीन नामों का पैनल ट्रस्ट के सामने रखा है। अब ट्रस्ट इन नामों पर चर्चा कर अंतिम नाम तय कर सकता है। बैठक के दूसरे चरण में ट्रस्ट से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर भी विचार-विमर्श होगा।

    पूर्व IPS राजेश पांडेय की दावेदारी सबसे मजबूत बताई जा रही
    CEO पद की चर्चा में पूर्व IPS अधिकारी राजेश पांडेय का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। उनकी दावेदारी की खास वजह सिर्फ पुलिस और प्रशासनिक अनुभव नहीं है। वह लखनऊ के अलीगंज स्थित ऐतिहासिक हनुमान मंदिर ट्रस्ट के सचिव भी हैं। इस वजह से उन्हें मंदिर प्रशासन और धार्मिक संस्थान के प्रबंधन का प्रत्यक्ष अनुभव भी हासिल है। राम मंदिर CEO के लिए यह अनुभव उनकी प्रोफाइल को अलग महत्व देता है।

    CEO के सामने होंगी कई बड़ी जिम्मेदारियां
    राम मंदिर CEO की भूमिका केवल प्रशासनिक कामकाज तक सीमित नहीं होगी। अयोध्या में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या के बीच सुरक्षा व्यवस्था, विभिन्न सरकारी एजेंसियों के साथ समन्वय, VIP और आम श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्थाएं तथा मंदिर से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट्स का प्रबंधन जैसी जिम्मेदारियां भी CEO के सामने रहेंगी।

    इसी वजह से सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था की जटिलताओं का अनुभव रखने वाले राजेश पांडेय की दावेदारी को खास माना जा रहा है। हालांकि अंतिम फैसला ट्रस्ट को ही करना है।

    बैठक में ये प्रमुख ट्रस्टी और आमंत्रित सदस्य मौजूद
    1. महंत नृत्य गोपाल दास
    2. कमलनयन दास
    3. स्वामी गोविंद देव गिरी
    4. डॉ. कृष्ण मोहन
    5. दिनेंद्र दास जी महाराज
    6. दिनेश चंद्र जी
    7. बजरंग बांगड़ा
    8. जगदीश आफले
    9. राज गोपाल मिनियार
    10. समीर पांडा

    ट्रस्ट डीड और नियमावली में संशोधन पर भी चर्चा
    CEO की नियुक्ति के अलावा ट्रस्ट की डीड और न्यास नियमावली में संशोधन सहित कई अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी बैठक में चर्चा होने की संभावना है। बैठक दोपहर 3 बजे ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास की अध्यक्षता में होनी है। अधिकांश ट्रस्टी अयोध्या पहुंच चुके हैं, जबकि कुछ सदस्य ऑनलाइन माध्यम से बैठक में शामिल होंगे।

    बैठक से पहले ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि और अंतरिम महासचिव डॉ. कृष्ण मोहन ने रामलला के दरबार में पहुंचकर दर्शन-पूजन किया। दोनों ने मंदिर की मौजूदा व्यवस्थाओं का जायजा लेने के बाद बैठक की तैयारियों में हिस्सा लिया।

    चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्र की वापसी पर भी नजर
    बैठक में ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और पूर्व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र को लेकर भी निर्णय अहम माना जा रहा है। चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद दोनों ने अपने पदों से इस्तीफा दिया था। हालांकि पिछले कुछ समय में दोनों की सामाजिक गतिविधियां बढ़ी हैं।

    ऐसे में ट्रस्ट में उनकी संभावित वापसी को लेकर अटकलें भी तेज हैं। सूत्रों के मुताबिक, जांच की मौजूदा स्थिति में चंपत राय को लेकर राहत की बात सामने आने के बाद उनके दोबारा ट्रस्ट से जुड़ने की संभावना पर चर्चा हो सकती है। डॉ. अनिल मिश्र को लेकर ट्रस्ट क्या फैसला करता है, इस पर भी नजर रहेगी। अंतिम तस्वीर बैठक के बाद ही साफ होगी।

    संघ और VHP पदाधिकारियों के अयोध्या पहुंचने से बढ़ी हलचल
    बैठक से पहले संघ और विश्व हिंदू परिषद के कई वरिष्ठ पदाधिकारियों के भी अयोध्या पहुंचने की सूचना है। VHP महामंत्री बजरंग लाल बांगड़ा, संरक्षक दिनेश चंद्र और संघ के क्षेत्र प्रचारक अनिल सिंह के अयोध्या पहुंचने की जानकारी है। संघ और VHP पदाधिकारियों ने ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि से मुलाकात भी की। बंद कमरे में हुई इस बैठक के बाद ट्रस्ट की अहम बैठक को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं।

  • AI की बढ़ती ताकत से डेटा सेंटर सेक्टर में बड़ा धमाका, 2029 तक भारत में 110 अरब डॉलर के निवेश का अनुमान

    AI की बढ़ती ताकत से डेटा सेंटर सेक्टर में बड़ा धमाका, 2029 तक भारत में 110 अरब डॉलर के निवेश का अनुमान


    नई दिल्ली। भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड टेक्नोलॉजी की तेजी से बढ़ती मांग अब डेटा सेंटर उद्योग को एक नई ऊंचाई पर ले जाने की तैयारी कर रही है। देश की डेटा सेंटर क्षमता जून 2026 में करीब 1.6 गीगावाट है और इसके 2029 तक बढ़कर 6 गीगावाट पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है। इस विशाल विस्तार के लिए करीब 110 अरब डॉलर की पूंजी की जरूरत होगी। रिपोर्ट के मुताबिक भारत में एआई वर्कलोड और हाइपरस्केल क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती तैनाती डेटा सेंटर सेक्टर के इस तेज विस्तार की सबसे बड़ी वजह बनने जा रही है।

    रिपोर्ट में बताया गया है कि 2026 की पहली छमाही में देश के डेटा सेंटर बाजार में 101 मेगावाट की मांग दर्ज की गई। यह आंकड़ा पिछले तीन वर्षों की पहली छमाही के औसत की तुलना में 20 प्रतिशत से अधिक है। इससे साफ है कि डिजिटल सेवाओं और एआई आधारित तकनीकों के बढ़ते इस्तेमाल के साथ कंपनियों को बड़े स्तर पर डेटा स्टोरेज और प्रोसेसिंग क्षमता की जरूरत पड़ रही है। इसी दौरान डेटा सेंटर की आपूर्ति में भी तेजी देखी गई और करीब 85 मेगावाट नई क्षमता जोड़ी गई।

    नई क्षमता का बड़ा हिस्सा मुंबई और चेन्नई जैसे प्रमुख बाजारों में केंद्रित रहा। हालांकि पहले से बुक की जा चुकी क्षमता को तेजी से उपलब्ध कराए जाने के कारण बाजार में खाली डेटा सेंटर क्षमता घटकर रिकॉर्ड निचले स्तर 2.8 प्रतिशत पर पहुंच गई। इतनी कम रिक्त क्षमता इस बात का संकेत है कि डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग तेजी से बढ़ रही है और कंपनियां भविष्य की जरूरतों को देखते हुए पहले से ही बड़ी क्षमता सुरक्षित करने में जुटी हुई हैं।

    वैश्विक हाइपरस्केलर कंपनियां भी भारत के डेटा सेंटर बाजार की तस्वीर बदल रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार ये कंपनियां नई क्षमता का करीब 30 प्रतिशत हिस्सा अपनी सेल्फ बिल्ड सुविधाओं के माध्यम से विकसित करने की तैयारी कर रही हैं। अनुमान है कि केवल हाइपरस्केल सेल्फ बिल्ड परियोजनाओं से ही 2029 तक करीब 1.4 गीगावाट क्षमता उपलब्ध हो सकती है। इससे भारत के तकनीकी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को और अधिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    बड़े निवेश के कारण हैदराबाद और विशाखापत्तनम जैसे शहर तेजी से गीगावाट स्तर के डेटा सेंटर हब के रूप में उभर सकते हैं। वहीं मुंबई और चेन्नई जैसे पहले से स्थापित बाजार भी अपनी क्षमता का तेजी से विस्तार कर रहे हैं। आने वाले वर्षों में देश के कई शहर वैश्विक क्लाउड और एआई सेवाओं के महत्वपूर्ण केंद्र बन सकते हैं।

    डेटा सेंटर उद्योग को सरकारी नीतियों से भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। हालिया केंद्रीय बजट में विदेशी क्लाउड सेवा प्रदाताओं के लिए 20 साल की टैक्स हॉलिडे की घोषणा की गई है जिसे 31 मार्च 2047 तक बढ़ाया गया है। इस नीति से 50 अरब डॉलर से अधिक की विदेशी निवेश प्रतिबद्धताएं सामने आने की बात कही गई है। इससे भारत को वैश्विक एआई और क्लाउड सेवाओं के एक बड़े केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद मिल सकती है।

    रिपोर्ट के अनुसार 2029 तक डेटा सेंटर विस्तार के लिए रियल एस्टेट निर्माण पर करीब 4 अरब डॉलर मैकेनिकल इलेक्ट्रिकल और प्लंबिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर 18 अरब डॉलर तथा सर्वर और रैक जैसे आईटी उपकरणों पर करीब 88 अरब डॉलर खर्च होने का अनुमान है। भविष्य में बिजली की जरूरतों को पूरा करने के लिए छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर भी एक अहम विकल्प बन सकते हैं। 2033 तक इन तकनीकों के विकसित होने से बड़े डेटा सेंटर परिसरों को ऑफ ग्रिड बिजली उपलब्ध कराने की संभावनाएं पैदा हो सकती हैं। कुल मिलाकर एआई की बढ़ती ताकत और डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ भारत का डेटा सेंटर सेक्टर आने वाले वर्षों में तकनीकी विकास और बड़े निवेश का नया केंद्र बनने की ओर बढ़ रहा है।

  • जुबीन गर्ग मौत केस में नई कड़ी: घटना वाली यॉट के चश्मदीद सदस्य की कोर्ट में पेशी, बयान से जांच को मिल सकती है दिशा

    जुबीन गर्ग मौत केस में नई कड़ी: घटना वाली यॉट के चश्मदीद सदस्य की कोर्ट में पेशी, बयान से जांच को मिल सकती है दिशा


    नई दिल्ली। जुबीन गर्ग की मौत के मामले में अब एक अहम मोड़ सामने आया है। सितंबर 2025 में सिंगापुर में जिस यॉट पर मशहूर सिंगर और म्यूजिशियन जुुबीन गर्ग मौजूद थे और जहां से जुड़ी परिस्थितियों के बाद उनकी मौत हुई थी उस यॉट पर मौजूद रहे एक महत्वपूर्ण गवाह ने अब कोर्ट में अपना बयान दर्ज कराया है। सिंगापुर में असम एसोसिएशन से जुड़े परीक्षित शर्मा बुधवार को गुवाहाटी की स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट में पेश हुए। उनकी गवाही को इस मामले की सुनवाई में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वह उन लोगों में शामिल थे जो घटना के समय उसी यॉट पर मौजूद थे।

    52 वर्षीय जुबीन गर्ग की 19 सितंबर 2025 को सिंगापुर में मौत हो गई थी। वह नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल के चौथे आयोजन में हिस्सा लेने के लिए सिंगापुर पहुंचे थे। इसी दौरान वह लाजरस आइलैंड के पास एक यॉट पर गए थे। जानकारी के मुताबिक जुबीन गर्ग समुद्र में तैरने के लिए यॉट से नीचे उतरे थे लेकिन इसके बाद उनकी डूबने से मौत हो गई। इस घटना की खबर सामने आने के बाद असम समेत देशभर में उनके प्रशंसकों के बीच गहरा दुख देखने को मिला था। मौत की परिस्थितियों को लेकर सवाल भी उठे जिसके बाद मामले की गहन जांच शुरू की गई।

    जुबीन गर्ग की मौत को लेकर असम में कई जगह विरोध प्रदर्शन हुए और पुलिस में बड़ी संख्या में शिकायतें दर्ज कराई गईं। इसके बाद असम पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने मामले की विस्तृत जांच शुरू की। राज्य में दर्ज 60 से अधिक एफआईआर को बाद में एक साथ जोड़कर सीआईडी को सौंप दिया गया ताकि पूरे मामले की एकीकृत तरीके से जांच की जा सके।

    जांच के बाद एसआईटी ने दिसंबर 2025 में कोर्ट के सामने चार्जशीट पेश की। इस मामले में कुल सात लोगों को आरोपी बनाया गया है। इनमें नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल के आयोजक श्यामकानु महंत जुबीन गर्ग के मैनेजर सिद्धार्थ शर्मा उनके बैंड से जुड़े शेखर ज्योति गोस्वामी और सिंगर अमृतप्रभा महंत शामिल हैं जिन पर हत्या सहित गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इसके अलावा जुबीन गर्ग के कजिन संदीपन गर्ग तथा उनके निजी सुरक्षा कर्मी नंदेश्वर बोरा और प्रबीन बैश्य को भी आरोपी बनाया गया है। हालांकि इन सभी आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत को करना है और मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है।

    मामले की सुनवाई तेजी से पूरी करने के उद्देश्य से गुवाहाटी हाईकोर्ट ने मार्च 2026 में एक विशेष फास्ट ट्रैक सेशन कोर्ट का गठन किया था। इसके बाद मई में सभी सात आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए गए और मुकदमे की प्रक्रिया आगे बढ़ी। गवाहों के बयान दर्ज करने का सिलसिला 8 जून से शुरू हुआ था। 14 अगस्त तक अभियोजन पक्ष सूचीबद्ध 394 गवाहों में से 94 के बयान दर्ज करा चुका था। अब सिंगापुर से जुड़े गवाहों की गवाही को भी जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    इसी क्रम में परीक्षित शर्मा का कोर्ट पहुंचना मामले की एक नई और अहम कड़ी माना जा रहा है। क्योंकि वह उस यॉट पर मौजूद थे जहां जुबीन गर्ग अपने अंतिम समय में मौजूद थे। ऐसे में उनके बयान से घटना के दौरान मौजूद परिस्थितियों और वहां के घटनाक्रम को समझने में मदद मिल सकती है।

    उधर सिंगापुर की कोरोनर कोर्ट इस साल मार्च में जुबीन गर्ग की मौत को डूबने से हुई मौत बता चुकी है। वहां की जांच में किसी साजिश या बाहरी हस्तक्षेप के ठोस सबूत नहीं मिले थे और फाउल प्ले की संभावना को खारिज कर दिया गया था। हालांकि भारत में चल रही न्यायिक प्रक्रिया उन आरोपों और परिस्थितियों की जांच से जुड़ी है जो जुबीन गर्ग की मौत के बाद सामने आई थीं। सुप्रीम कोर्ट भी मामले की सुनवाई को जल्द पूरा करने पर जोर दे चुका है। ऐसे में यॉट पर मौजूद रहे अहम गवाह परीक्षित शर्मा की गवाही को अब इस बहुचर्चित मामले की आगे की सुनवाई में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • मेडिकल ऑफिसर से MTS तक भर्ती: PGIMER ने जारी किया नोटिफिकेशन 19 अक्टूबर तक करें आवेदन

    मेडिकल ऑफिसर से MTS तक भर्ती: PGIMER ने जारी किया नोटिफिकेशन 19 अक्टूबर तक करें आवेदन


    नई दिल्ली। चंडीगढ़ स्थित पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च यानी PGIMER ने नौकरी की तलाश कर रहे उम्मीदवारों के लिए भर्ती का शानदार मौका दिया है। संस्थान ने विभिन्न पदों पर सीधी भर्ती के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी कर कुल 60 रिक्तियां घोषित की हैं। इनमें PGIMER चंडीगढ़ में ग्रुप C के 57 पद शामिल हैं जबकि पंजाब के संगरूर स्थित PGI सैटेलाइट सेंटर में ग्रुप A B और C के 3 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। इन पदों के लिए आवेदन प्रक्रिया 3 सितंबर 2026 से शुरू होगी और उम्मीदवार 19 अक्टूबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।

    PGIMER चंडीगढ़ में जिन 57 पदों पर भर्ती होगी उनमें लाइब्रेरी अटेंडेंट ग्रेड I का एक पद एनिमल अटेंडेंट का एक पद नाई का एक पद और मल्टी टास्किंग स्टाफ सफाई ग्रेड III के 54 पद शामिल हैं। वहीं PGI सैटेलाइट सेंटर संगरूर के लिए मेडिकल ऑफिसर ग्रुप A का एक पद कंप्यूटर प्रोग्रामर ग्रुप B का एक पद और फार्मासिस्ट ग्रेड II ग्रुप C का एक पद निर्धारित किया गया है।

    मेडिकल ऑफिसर के पद के लिए उम्मीदवार के पास मान्य मेडिकल क्वालिफिकेशन होना जरूरी है। इसके साथ ही संबंधित स्टेट मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन और परिवार नियोजन तथा शैक्षिक तरीकों से जुड़ी विशेष ट्रेनिंग की आवश्यकता होगी। संबंधित स्पेशलिटी में पोस्टग्रेजुएट डिग्री या डिप्लोमा रखने वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाएगी।

    कंप्यूटर प्रोग्रामर पद के लिए गणित सांख्यिकी ऑपरेशन रिसर्च फिजिक्स इंजीनियरिंग या कंप्यूटर साइंस से जुड़ी निर्धारित शैक्षणिक योग्यता मांगी गई है। इसके अलावा कंप्यूटर प्रोग्रामिंग या इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर के संचालन से संबंधित अनुभव भी आवश्यक होगा। फार्मासिस्ट ग्रेड II के लिए मैट्रिक या समकक्ष योग्यता के साथ फार्मेसी में डिप्लोमा और फार्मेसी एक्ट 1948 के तहत रजिस्ट्रेशन जरूरी है।

    लाइब्रेरी अटेंडेंट के लिए साइंस विषय के साथ मैट्रिक लाइब्रेरी साइंस में डिप्लोमा और संबंधित अनुभव मांगा गया है। एनिमल अटेंडेंट के लिए मैट्रिक या समकक्ष योग्यता के साथ हिंदी अंग्रेजी या पंजाबी जैसी किसी भाषा में पढ़ने और लिखने की क्षमता जरूरी होगी। नाई के पद के लिए मैट्रिक पास होने के साथ कम से कम दो साल का अनुभव चाहिए। वहीं MTS पद के लिए मैट्रिक या समकक्ष योग्यता और सफाई संबंधी कार्यों की जानकारी आवश्यक है।

    आयु सीमा की बात करें तो उम्मीदवार की न्यूनतम उम्र 18 वर्ष होनी चाहिए। अधिकतम आयु पद के अनुसार 30 से 35 वर्ष तक निर्धारित की गई है। आयु की गणना आवेदन की अंतिम तारीख के आधार पर की जाएगी। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट मिलेगी।

    चयन प्रक्रिया में आवेदन की स्क्रीनिंग के बाद कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट यानी CBT स्किल टेस्ट इंटरव्यू और दस्तावेज सत्यापन जैसे चरण शामिल हो सकते हैं। चयनित उम्मीदवारों को पद के अनुसार 18000 रुपये से लेकर 177500 रुपये प्रतिमाह तक वेतन दिया जाएगा। इसके अलावा नियमानुसार अन्य भत्ते और सुविधाएं भी मिलेंगी।

    आवेदन शुल्क सामान्य OBC और EWS वर्ग के उम्मीदवारों के लिए 1500 रुपये निर्धारित किया गया है जबकि SC और ST उम्मीदवारों को 800 रुपये शुल्क देना होगा। बेंचमार्क दिव्यांगता वाले उम्मीदवारों को रजिस्ट्रेशन फीस में छूट दी गई है। इच्छुक उम्मीदवार 3 सितंबर से PGIMER की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तारीख 19 अक्टूबर 2026 है इसलिए उम्मीदवारों को सलाह है कि अंतिम समय का इंतजार करने के बजाय समय रहते आवेदन कर दें।

  • माइक न मिलने पर जनपद अध्यक्ष का छलका दर्द, सिंधिया के कार्यक्रम में सियासी तकरार ने पकड़ा जोर

    माइक न मिलने पर जनपद अध्यक्ष का छलका दर्द, सिंधिया के कार्यक्रम में सियासी तकरार ने पकड़ा जोर


    शिवपुरी । शिवपुरी के बदरवास में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के कार्यक्रम के दौरान माइक को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। सोमवार शाम बिजरौनी बायपास और दौलतपुर से खाइखेड़ा मार्ग निर्माण के भूमि पूजन कार्यक्रम में बदरवास जनपद अध्यक्ष मीरा बाई परिहार को मंच से बोलने का अवसर नहीं मिला। कार्यक्रम के बाद जनपद अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि वह अपनी बात रखने वाली थीं लेकिन उनका माइक हटा दिया गया। इसके बाद स्थानीय राजनीति में इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

    कार्यक्रम के दौरान जनपद अध्यक्ष मीरा बाई परिहार केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के सामने क्षेत्र से जुड़ी अपनी बात रखना चाहती थीं। उनका कहना है कि उन्होंने कोलारस विधायक महेंद्र यादव से भी उन्हें बोलने का अवसर देने की बात कही थी। जनपद अध्यक्ष के मुताबिक विधायक ने उन्हें अपनी बात वहीं से कहने के लिए कहा था लेकिन वह माइक के जरिए मंच से अपनी बात रखना चाहती थीं। उनका आरोप है कि उन्हें ऐसा करने का मौका नहीं दिया गया।

    कार्यक्रम समाप्त होने के बाद मीरा बाई परिहार ने विधायक महेंद्र यादव पर नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले करीब एक साल से जनपद क्षेत्र के विकास कार्यों में अड़चनें आ रही हैं। जनपद अध्यक्ष ने दावा किया कि विकास कार्यों से जुड़े मामलों को लेकर वह चार बार दिल्ली तक जा चुकी हैं लेकिन अब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है।

    मीरा बाई ने कहा कि जनपद अध्यक्ष के तौर पर जनता के लिए विकास कार्य कराना उनकी जिम्मेदारी है। लेकिन यदि विकास कार्यों के लिए जरूरी प्रक्रिया और फंड से जुड़े काम ही आगे नहीं बढ़ेंगे तो सरपंचों की मांगों को पूरा करना मुश्किल होगा। उन्होंने अधिकारियों और बिचौलियों पर भी काम में बाधा डालने के आरोप लगाए। उनका कहना है कि कई मामलों में ऑनलाइन एंट्री तक नहीं होने दी जा रही है। उन्होंने मीडिया के माध्यम से विकास फंड जल्द जारी करने की मांग की और संकेत दिया कि सुनवाई नहीं होने पर वह इस मुद्दे को बड़े स्तर पर उठा सकती हैं।

    वहीं कोलारस विधायक महेंद्र यादव ने पूरे मामले पर अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि मीरा बाई परिहार ने उनसे केंद्रीय मंत्री से कुछ कहने की इच्छा जताई थी। विधायक के मुताबिक उन्होंने जनपद अध्यक्ष से अपनी बात कागज पर लिखकर देने के लिए कहा था ताकि उनकी बात केंद्रीय मंत्री तक स्पष्ट रूप से पहुंचाई जा सके।

    विधायक ने कहा कि यदि जनपद अध्यक्ष ने माइक के जरिए केंद्रीय मंत्री और जनता के सामने अपनी बात रखने की इच्छा जताई होती तो उन्हें बोलने का अवसर जरूर दिया जाता। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री कोलारस रेलवे स्टेशन पर उज्जैनी एक्सप्रेस के नियमित ठहराव को हरी झंडी दिखाने वाले थे। इसी कारण मंच से बोलने का समय सीमित था और मंडल अध्यक्ष विधायक तथा सांसद को ही वक्तव्य का अवसर दिया गया।

    महेंद्र यादव ने मीरा बाई परिहार को पार्टी की वरिष्ठ नेता बताते हुए कहा कि केंद्रीय मंत्री अभी शिवपुरी में ही हैं और जनपद अध्यक्ष उनसे मुलाकात कर अपनी बात सीधे रख सकती हैं। विधायक ने यह भी कहा कि वह स्वयं मीरा बाई से इस मामले में चर्चा करेंगे।

    इस कार्यक्रम में क्षेत्र को रेल सुविधा की सौगात भी मिली। ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रयासों से कोलारस रेलवे स्टेशन पर उज्जैनी एक्सप्रेस के नियमित ठहराव को मंजूरी मिली है। इसके अलावा अशोकनगर रेलवे स्टेशन पर सोगरिया दानापुर एक्सप्रेस के ठहराव को भी स्वीकृति दी गई है। विकास कार्यों और रेल सुविधाओं के बीच मंच पर बोलने को लेकर उठा यह विवाद अब स्थानीय सियासत में चर्चा का विषय बन गया है।

  • माधव टाइगर रिजर्व मार्ग पर मचा हड़कंप बाइक सवार ने समझा टाइगर वन विभाग बोला पगमार्क बाघ के नहीं

    माधव टाइगर रिजर्व मार्ग पर मचा हड़कंप बाइक सवार ने समझा टाइगर वन विभाग बोला पगमार्क बाघ के नहीं


    नई दिल्ली। शिवपुरी के माधव टाइगर रिजर्व क्षेत्र से गुजरने वाले नरवर सतनवाड़ा मार्ग पर मंगलवार रात एक जंगली जानवर को देखकर बाइक सवार घबरा गया और सड़क पर गिरकर घायल हो गया। घटना टपकेश्वर मंदिर और एरावन गांव के बीच रात करीब आठ बजे हुई। बाइक सवार का कहना है कि अचानक सड़क पर टाइगर जैसा जानवर दिखाई देने से वह घबरा गया और बाइक का संतुलन बिगड़ गया। हादसे के बाद राहगीरों ने घायल युवक को इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज पहुंचाया।

    घायल बाइक सवार की पहचान नरवर तहसील के चकरमपुर गांव निवासी विकास कुशवाहा के रूप में हुई है। बताया गया कि विकास नरवर से मणिखेड़ा डैम की ओर जा रहे थे। इसी दौरान रास्ते में उन्हें सड़क पर एक जंगली जानवर दिखाई दिया। अंधेरा होने के कारण उन्होंने उसे टाइगर समझ लिया। जानवर को देखकर अचानक घबराने के चलते बाइक अनियंत्रित हो गई और वह सड़क पर गिर पड़े। हादसे में उन्हें चोट आई जिसके बाद आसपास से गुजर रहे लोगों ने मदद की और अस्पताल पहुंचाया।

    घटना की जानकारी मिलने के बाद वन विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची। भाजपा नेता बशर अली ने सतनवाड़ा रेंज के रेंजर माधव सिंह सिकरवार को मामले की सूचना दी थी। इसके बाद वन विभाग की टीम ने घटनास्थल और आसपास के इलाके का निरीक्षण किया। टीम ने यह पता लगाने की कोशिश की कि आखिर बाइक सवार के सामने कौन सा जंगली जानवर आया था। इसके लिए मौके पर मिले पगमार्क की भी जांच की गई।

    वन विभाग की जांच में सामने आया कि घटनास्थल पर पगमार्क जरूर मिले हैं लेकिन वे टाइगर के नहीं हैं। रेंजर माधव सिंह सिकरवार के मुताबिक मौके पर मिले निशान बाघ के पगमार्क नहीं हैं। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि कोई दूसरा जंगली जानवर सड़क पार कर रहा था। उसी को देखकर बाइक सवार घबरा गया होगा। माधव टाइगर रिजर्व की टीम ने भी फिलहाल इस स्थान पर टाइगर की मौजूदगी की पुष्टि नहीं की है। वन विभाग की टीम आगे भी इलाके का निरीक्षण करेगी।

    हालांकि इस पूरे इलाके में जंगली जानवरों की आवाजाही को लेकर लोगों की चिंता बनी हुई है। वन विभाग के अनुसार नरवर सतनवाड़ा मार्ग के आसपास तेंदुए की आवाजाही रहती है। कई बार राहगीरों को सड़क के आसपास तेंदुआ दिखाई देने की जानकारी भी सामने आती रही है। हालांकि अब तक तेंदुए द्वारा किसी राहगीर पर हमला किए जाने की सूचना नहीं मिली है। ऐसे में यह संभावना भी जताई जा रही है कि बाइक सवार के सामने तेंदुआ या कोई अन्य जंगली जानवर आया हो।

    माधव टाइगर रिजर्व से जुड़े इस इलाके में पहले भी वन्यजीवों की मौजूदगी को लेकर चिंता सामने आती रही है। सिंध नदी किनारे 25 अप्रैल को 50 वर्षीय सरवन आदिवासी का शव टुकड़ों में मिलने के बाद इलाके में दहशत बढ़ गई थी। उस समय मादा टाइगर MT-6 की लोकेशन भी आसपास मिली थी और उसकी कॉलर आईडी सक्रिय पाई गई थी। एरावन गांव माधव टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में स्थित है। ऐसे में रात के समय इस मार्ग से गुजरने वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।

  • OTT लवर्स के लिए खुशखबरी, सितंबर में ZEE5 पर लगेगा फिल्मों-सीरीज का तड़का

    OTT लवर्स के लिए खुशखबरी, सितंबर में ZEE5 पर लगेगा फिल्मों-सीरीज का तड़का


    नई दिल्ली। सितंबर का महीना OTT दर्शकों के लिए काफी खास रहने वाला है। ZEE5 ने इस महीने स्ट्रीम होने वाली फिल्मों और वेब सीरीज की अपनी लिस्ट जारी कर दी है। इस लिस्ट में अलग अलग भाषाओं की फिल्मों और सीरीज के साथ रिएलिटी शोज और बच्चों के लिए खास कंटेंट भी शामिल है। यानी दर्शकों को एक ही प्लेटफॉर्म पर क्राइम थ्रिलर से लेकर कॉमेडी ड्रामा और रोमांटिक फिल्म तक देखने का मौका मिलेगा।

    इस महीने ZEE5 पर सबसे ज्यादा चर्चा तिग्मांशु धूलिया के निर्देशन में बनी फिल्म घमासान को लेकर है। यह हाई वोल्टेज क्राइम थ्रिलर है जिसमें अरशद वारसी प्रतीक गांधी राजपाल यादव और इशिता दत्ता जैसे कलाकार नजर आएंगे। फिल्म 11 सितंबर को स्ट्रीम होगी। इसकी कहानी और कलाकारों की मौजूदगी इसे सितंबर की प्रमुख रिलीज में शामिल करती है।

    इसके अलावा बकैती नाम की कॉमेडी ड्रामा सीरीज भी दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए तैयार है। इस सीरीज का निर्देशन अमित गुप्ता ने किया है। इसमें राजेश तैलंग शीबा चड्ढा तान्या शर्मा और आदित्य शुक्ला जैसे कलाकार नजर आएंगे। हल्के फुल्के मनोरंजन के साथ कॉमेडी पसंद करने वाले दर्शकों के लिए यह सीरीज खास विकल्प बन सकती है।

    रिएलिटी शो पसंद करने वालों के लिए भी ZEE5 ने तैयारी की है। लीगेसी नाम का देसी हिप हॉप रिएलिटी और टैलेंट शो इस महीने दर्शकों के बीच आएगा। इसे रफ्तार और कृष्णा होस्ट और जज करते नजर आएंगे। म्यूजिक और हिप हॉप पसंद करने वाले दर्शकों के लिए यह शो आकर्षण का केंद्र हो सकता है।

    तमिल कंटेंट की बात करें तो नयंतारा और कविन राज की फिल्म हाय भी ZEE5 पर दस्तक देगी। यह एक रोमांटिक फिल्म है जिसमें के भाग्यराज और प्रभु भी अहम भूमिकाओं में हैं। इसके साथ सट्टमम नीधियुम का दूसरा पार्ट भी दर्शकों को देखने मिलेगा। यह कोर्टरूम ड्रामा सीरीज है जिसका निर्देशन बालाजी सेलवराज ने किया है।

    तेलुगु दर्शकों के लिए वीरभद्राणी रहस्यम का दूसरा पार्ट आएगा। वहीं पंचनामा नाम की क्राइम इन्वेस्टिगेशन थ्रिलर सीरीज भी 11 सितंबर को स्ट्रीम होगी। कन्नड़ कंटेंट में कॉर्पोरेट लव स्टोरी और हल्ली पावर जैसे शो शामिल हैं। कॉर्पोरेट लव स्टोरी में कॉर्पोरेट दुनिया के बीच पनपती प्रेम कहानी दिखाई जाएगी जबकि हल्ली पावर ग्रामीण कर्नाटक की संस्कृति पर आधारित रिएलिटी शो है।

    मलयालम कंटेंट की बात करें तो बांद्रा भी दर्शकों के लिए उपलब्ध होगी। दिलीप और तमन्ना भाटिया स्टारर यह फिल्म 90 के दशक के मुंबई अंडरवर्ल्ड और बॉलीवुड की दुनिया के इर्द गिर्द घूमती है। इसके अलावा केरल अंडरग्राउंड नाम का मलयालम रैप और हिप हॉप रिएलिटी शो भी दर्शकों को देखने मिलेगा।

    मराठी सिनेमा पसंद करने वालों के लिए अडकित्ता को शामिल किया गया है। वहीं बच्चों के मनोरंजन के लिए बंदबुध बुड़बक 2 और स्मार्ट किड्ज जैसी सीरीज भी आने वाली हैं। ऐसे में सितंबर में ZEE5 की लाइनअप काफी विविध नजर आ रही है और अलग अलग उम्र तथा पसंद के दर्शकों के लिए मनोरंजन के कई विकल्प मौजूद रहेंगे।

  • ईशा देओल ने चुना मस्ती भरा अंदाज, मालामाल वीकली 2 में दिखेगा कॉमेडी का नया रंग

    ईशा देओल ने चुना मस्ती भरा अंदाज, मालामाल वीकली 2 में दिखेगा कॉमेडी का नया रंग


    नई दिल्ली। ईशा देओल एक बार फिर दर्शकों को हंसाने और मनोरंजन करने के लिए तैयार हैं। अभिनेत्री जल्द ही मालामाल वीकली 2 में नजर आने वाली हैं। यह फिल्म पूरी तरह कॉमेडी और मस्ती से भरपूर बताई जा रही है। ईशा देओल के लिए यह प्रोजेक्ट इसलिए भी खास है क्योंकि कॉमेडी ऐसा जॉनर है जिसे वह पहले भी पसंद करती रही हैं और अब लंबे समय बाद इसी अंदाज में वापसी करने को लेकर उत्साहित हैं। अभिनेत्री का कहना है कि हाल ही में उन्होंने अलग तरह की फिल्मों पर काम किया है और उसके बाद उन्हें कुछ हल्का फुल्का और मजेदार करने की इच्छा थी।

    ईशा देओल ने फिल्म को लेकर अपनी खुशी जाहिर करते हुए बताया कि उन्हें इस समय बिल्कुल ऐसी ही फिल्म की जरूरत थी। अभिनेत्री के मुताबिक वह लगातार अलग तरह के किरदारों और विषयों पर काम कर रही थीं। उन्होंने हॉरर कॉमेडी फिल्म घूंघट और तेलुगु फिल्म SYG पर काम पूरा किया है। इन दोनों प्रोजेक्ट्स के बाद उनका मन एक ऐसी फिल्म करने का था जिसमें खूब मस्ती हो और दर्शकों को हंसने का मौका मिले। इसी दौरान मालामाल वीकली 2 उनके पास आई और उन्हें लगा कि यह प्रोजेक्ट उनके लिए बिल्कुल सही है।

    कॉमेडी के साथ ईशा देओल का पुराना रिश्ता रहा है। वह नो एंट्री शादी नंबर 1 और वन टू थ्री जैसी फिल्मों में अपने अभिनय से दर्शकों को मनोरंजन कर चुकी हैं। इन फिल्मों के अनुभव के बाद भी अभिनेत्री का मानना है कि कॉमेडी एक ऐसा स्पेस है जिसमें वह हमेशा सहज महसूस करती हैं। यही वजह है कि मालामाल वीकली 2 की स्क्रिप्ट ने उन्हें सबसे ज्यादा आकर्षित किया। ईशा के मुताबिक फिल्म की कहानी काफी मजेदार है और उन्हें उम्मीद है कि दर्शकों को भी यह खूब पसंद आएगी।

    मालामाल वीकली 2 को लेकर सामने आ रही जानकारी के अनुसार फिल्म में कई चर्चित कलाकारों की मौजूदगी देखने को मिल सकती है। फिल्म की संभावित कास्ट में रितेश देशमुख परेश रावल राजपाल यादव एल्विश यादव रवीना टंडन परिणीति चोपड़ा शिल्पा शिरोडकर और फरदीन खान जैसे नाम शामिल बताए जा रहे हैं। ऐसे में फिल्म में कॉमेडी के साथ कलाकारों की बड़ी टोली दर्शकों के लिए मनोरंजन का एक खास पैकेज पेश कर सकती है।

    फिल्म के निर्देशन की जिम्मेदारी अमित जोशी संभाल रहे हैं। अमित जोशी इससे पहले तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया जैसी फिल्म से जुड़े रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक मालामाल वीकली 2 की शूटिंग नवंबर से शुरू हो सकती है। फिल्म की कहानी और स्टारकास्ट को लेकर दर्शकों में अभी से उत्सुकता देखने को मिल रही है।

    ईशा देओल की इस वापसी को उनके करियर के एक अलग रंग के तौर पर भी देखा जा रहा है। गंभीर और अलग तरह के प्रोजेक्ट्स के बाद अभिनेत्री का कॉमेडी की ओर लौटना उनके प्रशंसकों के लिए खास हो सकता है। अब देखना होगा कि मालामाल वीकली 2 में ईशा देओल का यह नया अंदाज दर्शकों को कितना पसंद आता है और फिल्म पर्दे पर कितनी हंसी और मस्ती बिखेर पाती है।