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  • कार्यवाहक प्रमोशन पर चला सरकार का बड़ा फैसला हजारों पुलिसकर्मियों की बढ़ी मुश्किलें मूल पद पर लौटाने की तैयारी शुरू

    कार्यवाहक प्रमोशन पर चला सरकार का बड़ा फैसला हजारों पुलिसकर्मियों की बढ़ी मुश्किलें मूल पद पर लौटाने की तैयारी शुरू


    मध्य प्रदेश मध्य प्रदेश पुलिस विभाग में नए पदोन्नति नियम लागू होने के बाद बड़ा प्रशासनिक बदलाव देखने को मिल सकता है। पिछले कई वर्षों से कार्यवाहक पदोन्नति के आधार पर उच्च पदों पर जिम्मेदारी संभाल रहे करीब पंद्रह हजार पुलिस अधिकारी और कर्मचारियों पर अब मूल पद पर लौटने का खतरा मंडरा रहा है। सरकार द्वारा मध्य प्रदेश पदोन्नति नियम दो हजार पच्चीस लागू किए जाने के बाद पुलिस मुख्यालय ने नियमित विभागीय पदोन्नति समिति की प्रक्रिया तेज कर दी है। इसके साथ ही कार्यवाहक पदोन्नति के सभी मामलों की चरणबद्ध समीक्षा शुरू कर दी गई है जिससे पूरे विभाग में चिंता और असमंजस का माहौल बन गया है।

    दरअसल वर्ष दो हजार सोलह के बाद लंबे समय तक नियमित पदोन्नतियां नहीं हो सकीं। विभाग में रिक्त पदों और प्रशासनिक जरूरतों को देखते हुए वर्ष दो हजार इक्कीस से बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी और कर्मचारियों को कार्यवाहक पदोन्नति देकर उच्च पदों की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। अब नए नियम लागू होने के बाद इन सभी मामलों का दोबारा परीक्षण किया जा रहा है ताकि नियमित पदोन्नति केवल पात्र और योग्य कर्मचारियों को ही मिल सके।

    इस प्रक्रिया की पहली बड़ी कार्रवाई पांढुर्णा जिले में देखने को मिली है जहां कार्यवाहक प्रधान आरक्षक के रूप में काम कर रहे बत्तीस पुलिसकर्मियों से प्रभार वापस लेकर उन्हें फिर से आरक्षक पद पर पदस्थ कर दिया गया। पुलिस अधीक्षक द्वारा जारी आदेश के बाद सभी कर्मचारियों ने अपने मूल पद पर कार्यभार संभाल लिया। विभाग का कहना है कि यह कार्रवाई नए पदोन्नति नियमों और पुलिस मुख्यालय के निर्देशों के अनुरूप की गई है।

    सूत्रों के अनुसार नियमित विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक से पहले प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी के पिछले पांच वर्षों के सेवा रिकॉर्ड की गहन जांच की जा रही है। इसमें वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन अनुशासनात्मक कार्रवाई निलंबन विभागीय दंड और न्यायालयों में लंबित मामलों का भी मूल्यांकन किया जा रहा है। जिन कर्मचारियों का रिकॉर्ड निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं होगा उन्हें नियमित पदोन्नति नहीं मिलेगी और उनका कार्यवाहक प्रभार भी समाप्त कर दिया जाएगा।

    पुलिस मुख्यालय के प्रारंभिक आकलन के अनुसार फिलहाल करीब एक हजार अधिकारी और कर्मचारी ऐसे हैं जिन पर इस प्रक्रिया का सीधा प्रभाव पड़ सकता है। आने वाले कुछ दिनों में प्रदेश के अन्य जिलों में भी इसी तरह की कार्रवाई शुरू होने की संभावना है। विभागीय अधिकारियों का अनुमान है कि आगे चलकर प्रभावित होने वालों की संख्या पंद्रह हजार तक पहुंच सकती है।

    वर्षों से उच्च पदों पर कार्य कर रहे कई पुलिसकर्मियों का मानना है कि यदि उन्हें फिर से मूल पद पर भेजा गया तो इससे उनका मनोबल प्रभावित होगा और कार्यक्षमता पर भी असर पड़ सकता है। दूसरी ओर विभाग का कहना है कि नई व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी और नियम आधारित होगी ताकि योग्य कर्मचारियों को ही स्थायी पदोन्नति का लाभ मिल सके।

    बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव द्वारा सभी विभागों से पदोन्नति प्रक्रिया की जानकारी मांगे जाने के बाद पुलिस विभाग सहित कई विभागों में लंबित पदोन्नति मामलों पर तेजी से काम शुरू हुआ है। ऐसे में आने वाले दिनों में पुलिस महकमे में बड़े स्तर पर प्रशासनिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

  • दिल्ली से भोपाल आ रही शताब्दी में एक्सपायरी ब्रेड परोसी गई छोटे बच्चों समेत दर्जनों यात्रियों को फूड पॉयजनिंग का डर शिकायत के बाद जांच शुरू

    दिल्ली से भोपाल आ रही शताब्दी में एक्सपायरी ब्रेड परोसी गई छोटे बच्चों समेत दर्जनों यात्रियों को फूड पॉयजनिंग का डर शिकायत के बाद जांच शुरू


    नई दिल्ली। दिल्ली से भोपाल आ रही नई दिल्ली रानी कमलापति शताब्दी एक्सप्रेस में शनिवार सुबह यात्रियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी बड़ी लापरवाही सामने आई। ट्रेन में नाश्ते के दौरान यात्रियों को ऐसी ब्रेड परोसी गई जिसकी उपयोग अवधि एक दिन पहले ही समाप्त हो चुकी थी। घटना का पता चलते ही पूरे कोच में हड़कंप मच गया और यात्रियों ने रेलवे की खानपान व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

    जानकारी के अनुसार ट्रेन के सी फोर कोच में यात्रा कर रहे करीब चौहत्तर यात्रियों को नाश्ते के साथ ब्रेड दी गई थी। इनमें छोटे बच्चे भी शामिल थे। अधिकांश यात्रियों ने बिना पैकेट देखे ब्रेड खा ली। बाद में एक यात्री की नजर ब्रेड के पैकेट पर लिखी उपयोग अवधि पर पड़ी तो पता चला कि उसकी अंतिम तिथि दस जुलाई थी जबकि इसे ग्यारह जुलाई को यात्रियों को परोसा गया। इसके बाद यात्रियों में फूड पॉयजनिंग की आशंका को लेकर चिंता बढ़ गई।

    यात्रियों का कहना है कि यह मामला केवल एक कोच तक सीमित नहीं था। ट्रेन के अन्य हिस्सों में रखे गए कैटरिंग पैकेटों में भी उसी तारीख वाली ब्रेड मौजूद थी। इससे आशंका जताई जा रही है कि कई अन्य कोचों में भी यात्रियों को एक्सपायरी खाद्य सामग्री परोसी गई होगी। इस घटना ने रेलवे की कैटरिंग व्यवस्था की निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।

    दिल्ली से भोपाल यात्रा कर रहे एक यात्री ने बताया कि नाश्ता करने के बाद जब एक्सपायरी डेट का पता चला तो सभी यात्री हैरान रह गए। उन्होंने तुरंत रेल मदद ऐप के जरिए शिकायत दर्ज कराई ताकि मामले की तत्काल जांच हो सके। कई अन्य यात्रियों ने भी ऑनलाइन उपभोक्ता आयोग के पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

    यात्रियों का कहना है कि यदि इस तरह की लापरवाही एक प्रीमियम ट्रेन में हो सकती है तो अन्य ट्रेनों की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। उनका मानना है कि यात्रियों की जान से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता और रेलवे को खाद्य सामग्री की गुणवत्ता जांच के लिए और अधिक सख्त व्यवस्था लागू करनी चाहिए।

    मामले में आईआरसीटीसी के क्षेत्रीय अधिकारी ने कहा कि संबंधित ट्रेन का संचालन नॉर्दर्न रेलवे के अधीन है और भोजन भी वहीं से लोड किया जाता है। हालांकि उन्होंने स्थानीय स्तर पर जांच या कार्रवाई को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी। इसके बाद यात्रियों में नाराजगी और बढ़ गई क्योंकि वे जिम्मेदारी तय कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

    गौरतलब है कि इससे एक दिन पहले भी इसी शताब्दी एक्सप्रेस के भोजन की गुणवत्ता और मात्रा को लेकर शिकायत सामने आई थी। एक यात्री ने सोशल मीडिया पर रेल मंत्री और आईआरसीटीसी को टैग करते हुए भोजन की गुणवत्ता पर सवाल उठाए थे। लगातार दो दिनों में सामने आई इन घटनाओं ने रेलवे की खानपान व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यात्रियों को उम्मीद है कि जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी और भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा देखने को नहीं मिलेगी।

  • मध्य प्रदेश की राजनीति में बड़ा उलटफेर नरोत्तम को झटका शिवराज की कसम टूटी और अफसरों का हुआ शुगर टेस्ट

    मध्य प्रदेश की राजनीति में बड़ा उलटफेर नरोत्तम को झटका शिवराज की कसम टूटी और अफसरों का हुआ शुगर टेस्ट


    मध्य प्रदेशमध्य प्रदेश की राजनीति इन दिनों लगातार ऐसे घटनाक्रमों की गवाह बन रही है जिन्होंने सियासी गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। सबसे बड़ी चर्चा दतिया विधानसभा उपचुनाव को लेकर रही जहां पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को टिकट मिलने की पूरी उम्मीद थी लेकिन पार्टी ने अंतिम समय में आशुतोष तिवारी पर भरोसा जताकर सभी को चौंका दिया। लंबे समय से चुनावी तैयारियों में जुटे नरोत्तम मिश्रा लगातार क्षेत्र में सक्रिय थे और जनता के बीच पहुंचकर समर्थन जुटा रहे थे। टिकट की घोषणा के बाद उनके समर्थकों में मायूसी साफ दिखाई दी और राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।

    भारतीय जनता पार्टी के फैसले ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि संगठन में अंतिम निर्णय नेतृत्व का होता है और आखिरी समय तक किसी भी नाम पर मुहर लगना तय नहीं माना जा सकता। यही कारण है कि दतिया का चुनाव अब नए समीकरणों के साथ आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है।

    राजनीतिक हलकों में दूसरी बड़ी चर्चा कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए राकेश यादव को लेकर रही। दिलचस्प बात यह रही कि एक दिन पहले तक जिन राकेश यादव को मंत्री कैलाश विजयवर्गीय पहचानने से इनकार कर रहे थे अगले ही दिन वही भाजपा में शामिल हुए और उन्हें प्रदेश प्रवक्ता की जिम्मेदारी भी सौंप दी गई। इस घटनाक्रम ने सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक मंचों तक नई बहस छेड़ दी और विपक्ष को भी भाजपा पर तंज कसने का मौका मिल गया।

    उधर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी एक बार फिर चर्चा में रहे। गंजबासौदा दौरे के दौरान समर्थकों ने उनका फूल मालाओं से भव्य स्वागत किया। खास बात यह रही कि शिवराज पहले कई बार सार्वजनिक मंचों से नेताओं के अत्यधिक स्वागत और मालाओं से परहेज की अपील कर चुके हैं। ऐसे में उनका मालाओं से लदा हुआ वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक चर्चाओं का दौर तेज हो गया। हालांकि समर्थकों का कहना है कि यह जनता का स्नेह है जिसे ठुकराना संभव नहीं होता।

    प्रशासनिक स्तर पर रीवा संभाग के कमिश्नर शीलेंद्र सिंह की पहल भी सुर्खियों में रही। समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने देखा कि कई अधिकारी और कर्मचारी बार बार बाहर जा रहे हैं। पूछताछ में स्वास्थ्य संबंधी जानकारी मिलने के बाद उन्होंने मौके पर ही मेडिकल टीम बुलाकर सभी की शुगर जांच कराई। जांच में कई कर्मचारियों का शुगर स्तर सामान्य से अधिक मिला। इस पहल को स्वास्थ्य जागरूकता और नियमित जांच अभियान से जोड़कर देखा जा रहा है।

    इधर राजधानी भोपाल के मंत्रालय का पांचवें फ्लोर का एक कमरा भी चर्चाओं में बना हुआ है। बताया जा रहा है कि पिछले ढाई वर्षों में वहां बैठने वाले कई अधिकारियों का लगातार तबादला हो चुका है। इसी वजह से अब यह कमरा लंबे समय से खाली पड़ा है। कुछ लोग इसे महज संयोग मान रहे हैं जबकि कुछ इसे वास्तु से जोड़कर चर्चा कर रहे हैं। हालांकि प्रशासनिक स्तर पर इस तरह की बातों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है लेकिन सियासी और प्रशासनिक गलियारों में यह विषय लोगों की दिलचस्पी का केंद्र बना हुआ है।

  • नोरंजन जगत का काला सच: 'समझौते' से इनकार पर संदीपा विर्क को फिल्म से निकाला, आधी रात को कमरे में घुसा था डायरेक्टर

    नोरंजन जगत का काला सच: 'समझौते' से इनकार पर संदीपा विर्क को फिल्म से निकाला, आधी रात को कमरे में घुसा था डायरेक्टर

    नई दिल्ली । मनोरंजन जगत की चकाचौंध के पीछे छिपा एक बेहद कड़वा और स्याह सच एक बार फिर सामने आया है। मशहूर अभिनेत्री और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर संदीपा विर्क ने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में फिल्म उद्योग के भीतर व्याप्त कास्टिंग काउच और यौन उत्पीड़न की गंभीर समस्याओं पर खुलकर बात की है। अभिनेत्री ने अपने करियर के दौरान झेले गए अपमानजनक अनुभवों का खुलासा करते हुए बताया कि किस तरह काम के बदले उनसे अनुचित मांगें की गईं और इनकार करने पर उन्हें फिल्मों से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।

    संदीपा विर्क पिछले कुछ समय से एक कथित वित्तीय विवाद के चलते कानूनी मुश्किलों का सामना कर रही थीं। छह करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उन्हें देश की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली तिहाड़ जेल में साढ़े चार महीने का समय बिताना पड़ा था। वर्तमान में अदालत से जमानत मिलने के बाद वे सलाखों से बाहर हैं। जेल से रिहा होने के बाद ‘द शेरोज टीवी’ (TheSheroesTV) पॉडकास्ट के साथ विशेष बातचीत में अभिनेत्री का दर्द छलक पड़ा, जहां उन्होंने जेल के भीतर कटे अपने भयावह दिनों और फिल्म उद्योग की विसंगतियों को बेबाकी से उजागर किया।

    जेल के दिनों को याद करते हुए संदीपा ने भावुक होकर बताया कि तिहाड़ जेल के भीतर गुजारा गया हर एक दिन और हर एक सेकंड उनके लिए अत्यधिक मानसिक और शारीरिक स्ट्रगल से भरा था। उन्होंने कहा कि वहां की परिस्थितियां इतनी कठिन थीं कि वे हर दिन ईश्वर से केवल मौत की दुआ मांगती थीं। हालांकि, अब वह समय बीत चुका है, लेकिन उस दौर ने उनकी मानसिक स्थिति पर गहरा असर डाला है। जेल की इन यादों के अलावा उन्होंने अपने फिल्मी करियर के दौरान झेले गए शोषण पर भी विस्तार से बात की।

    फिल्म इंडस्ट्री में काम के बदले होने वाले शारीरिक और मानसिक शोषण यानी कास्टिंग काउच पर बात करते हुए संदीपा ने कहा कि इस उद्योग में सीधा अपराध या जबरदस्ती भले ही न दिखती हो, लेकिन परोक्ष रूप से दबाव बनाने की प्रथा बेहद आम है। उनके अनुसार, अलग-अलग फिल्म उद्योगों में अभिनेत्रियों को अप्रोच करने और उनसे अनुचित मांगें रखने का तरीका अलग होता है। जहां बॉलीवुड में ‘डिनर’ या ‘कॉफी’ के बहाने अनौपचारिक तौर पर बात शुरू की जाती है, जो देखने में सामान्य लगती है, वहीं क्षेत्रीय सिनेमा में यह दबाव अधिक सीधा और आक्रामक होता है।

    अपने साथ घटी एक अत्यंत विचलित करने वाली घटना का जिक्र करते हुए अभिनेत्री ने बताया कि एक पंजाबी फिल्म की सात दिनों की शूटिंग पूरी होने के बाद, फिल्म के निर्देशक आधी रात को जबरन उनके होटल के कमरे के भीतर दाखिल हो गए। निर्देशक ने उनके सामने सीधे तौर पर शारीरिक समझौता (कॉम्प्रोमाइज) करने की शर्त रख दी और कहा कि वे आगे की शूटिंग तभी करेंगे जब संदीपा उनकी मांग मान लेंगी। जब संदीपा ने पूरी दृढ़ता के साथ इस अनैतिक मांग को ठुकरा दिया, तो उन्हें तुरंत उस फिल्म से निष्कासित कर दिया गया।

    इस घटना के बाद भी संदीपा की मुश्किलें कम नहीं हुईं। उन्होंने बताया कि एक अन्य पंजाबी फिल्म की शूटिंग के दौरान फिल्म के मुख्य अभिनेता (हीरो) ने उनके साथ बेहद अभद्र व्यवहार किया। उस अभिनेता की यह अनुचित मांग थी कि संदीपा होटल में उसके बगल वाले कमरे में ही ठहरें, अन्यथा वह शूटिंग शुरू नहीं करेगा। इन लगातार हो रहे खराब अनुभवों और गरिमा से समझौता न करने की अपनी जिद के कारण संदीपा ने दोनों ही फिल्में बीच में ही छोड़ दी थीं।

    अपने इस पूरे अनुभव को साझा करते हुए संदीपा विर्क ने यह भी स्पष्ट किया कि इस तरह की विसंगतियां केवल फिल्म उद्योग तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि लगभग हर कार्यक्षेत्र और प्रोफेशन में महिलाओं को इस तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कास्टिंग काउच एक कड़वी हकीकत है, लेकिन अंततः यह हर महिला का अपना व्यक्तिगत फैसला होता है कि वह इसके आगे झुकती है या नहीं। उन्होंने इस व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाते हुए कहा कि योग्यता और काम को ही प्राथमिकता दी जानी चाहिए, न कि काम के बदले किसी से अनुचित मांगें की जानी चाहिए।

  • शेयर बाजार आउटलुक 11 जुलाई जानिए किन फैक्टर्स से तय होगी अगले सप्ताह बाजार की दिशा

    शेयर बाजार आउटलुक 11 जुलाई जानिए किन फैक्टर्स से तय होगी अगले सप्ताह बाजार की दिशा


    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में कारोबार नहीं होगा क्योंकि बीएसई और एनएसई दोनों एक्सचेंज साप्ताहिक अवकाश के चलते बंद रहेंगे। हालांकि निवेशकों के लिए यह दिन अगले सप्ताह की रणनीति तैयार करने का अच्छा अवसर हो सकता है। बाजार भले ही बंद रहे लेकिन वैश्विक बाजारों की गतिविधियां कच्चे तेल की कीमतें डॉलर इंडेक्स विदेशी निवेशकों की खरीद बिक्री और कंपनियों के तिमाही नतीजे आने वाले कारोबारी सत्र की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

    बीते कुछ कारोबारी सत्रों में भारतीय बाजार में उतार चढ़ाव देखने को मिला है। एक ओर घरेलू अर्थव्यवस्था के मजबूत संकेत निवेशकों का भरोसा बढ़ा रहे हैं तो दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम बाजार की चाल पर असर डाल रहे हैं। ऐसे में अगले सप्ताह निवेशकों की नजर सबसे पहले वैश्विक बाजारों से मिलने वाले संकेतों पर रहेगी। यदि अमेरिका और एशियाई बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते हैं तो भारतीय बाजार में भी अच्छी शुरुआत देखने को मिल सकती है।

    आईटी बैंकिंग ऑटो और एफएमसीजी सेक्टर के शेयरों पर विशेष नजर बनी रहेगी। इन सेक्टरों की कई बड़ी कंपनियां तिमाही नतीजे जारी करने वाली हैं। यदि कंपनियों के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहते हैं तो संबंधित शेयरों में खरीदारी बढ़ सकती है। वहीं कमजोर नतीजों की स्थिति में मुनाफावसूली भी देखने को मिल सकती है।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों और घरेलू संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगी। यदि विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है तो बाजार को मजबूती मिल सकती है। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में तेजी या गिरावट का असर भी भारतीय बाजार पर देखने को मिलेगा क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर काफी निर्भर है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को जल्दबाजी में बड़े निवेश से बचना चाहिए और केवल मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों पर ही ध्यान देना चाहिए। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए बाजार में आने वाली गिरावट अच्छे शेयरों में निवेश का अवसर बन सकती है। वहीं छोटे निवेशकों को किसी भी अफवाह के आधार पर निवेश करने से बचना चाहिए और अपने पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखनी चाहिए।

    अगले कारोबारी सप्ताह में वैश्विक आर्थिक आंकड़े केंद्रीय बैंकों से जुड़े संकेत और कॉरपोरेट नतीजे बाजार की दिशा तय करेंगे। ऐसे में निवेशकों को धैर्य के साथ बाजार पर नजर रखने और सोच समझकर निवेश का फैसला लेने की सलाह दी जा रही है। सही रणनीति और मजबूत कंपनियों का चयन लंबे समय में बेहतर रिटर्न दिलाने में मददगार साबित हो सकता है।

  • टी20 की निराशा मिटाने मैदान में उतरेंगे रोहित और विराट वनडे सीरीज में इंग्लैंड को कड़ी चुनौती देने को तैयार भारत

    टी20 की निराशा मिटाने मैदान में उतरेंगे रोहित और विराट वनडे सीरीज में इंग्लैंड को कड़ी चुनौती देने को तैयार भारत


    नई दिल्ली। इंग्लैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में मिली हार ने भारतीय क्रिकेट प्रेमियों को जरूर निराश किया है लेकिन अब उम्मीदों का नया अध्याय वनडे सीरीज के साथ शुरू होने जा रहा है। तीन मैचों की इस अहम सीरीज में टीम इंडिया अपने सबसे अनुभवी खिलाड़ियों रोहित शर्मा और विराट कोहली के साथ मैदान में उतरेगी। दोनों दिग्गजों की वापसी ने भारतीय टीम के हौसले को नई ऊर्जा दी है और फैंस को भरोसा है कि भारत इस बार दमदार पलटवार करेगा।

    हाल के दिनों में भारतीय टीम का टी20 प्रदर्शन उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा। आयरलैंड के खिलाफ सीरीज गंवाने के बाद इंग्लैंड ने भी भारतीय टीम को लगातार मुकाबलों में मात देकर सीरीज अपने नाम कर ली। युवा खिलाड़ियों से सजी टीम दबाव के क्षणों में प्रभाव छोड़ने में सफल नहीं रही। ऐसे में अब वनडे प्रारूप में अनुभवी खिलाड़ियों की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है।

    रोहित शर्मा और विराट कोहली अब केवल वनडे क्रिकेट में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। दोनों खिलाड़ियों ने टी20 अंतरराष्ट्रीय और टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले लिया है लेकिन सीमित ओवरों के इस प्रारूप में उनका अनुभव और निरंतरता आज भी भारतीय टीम की सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है। इंग्लैंड जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में इन दोनों बल्लेबाजों का अनुभव टीम के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।

    रोहित शर्मा से उम्मीद होगी कि वह शुरुआत से ही आक्रामक बल्लेबाजी कर टीम को मजबूत आधार दें। वनडे क्रिकेट में तीन दोहरे शतक लगाने वाले रोहित किसी भी गेंदबाजी आक्रमण को ध्वस्त करने की क्षमता रखते हैं। दूसरी ओर विराट कोहली कठिन परिस्थितियों में पारी संभालने और लक्ष्य का पीछा करने की अपनी शानदार क्षमता के लिए दुनिया भर में पहचाने जाते हैं। उनका अनुभव युवा बल्लेबाजों के लिए भी प्रेरणा बनेगा।

    भारतीय टीम को एक और बड़ी मजबूती जसप्रीत बुमराह की वापसी से मिली है। तेज गेंदबाजी आक्रमण में उनकी मौजूदगी विरोधी बल्लेबाजों के लिए बड़ी चुनौती होगी। कप्तान शुभमन गिल उपकप्तान श्रेयस अय्यर और विकेटकीपर बल्लेबाज केएल राहुल पर भी बड़ी जिम्मेदारी रहेगी कि वे बल्ले से महत्वपूर्ण योगदान दें और टीम को संतुलित प्रदर्शन दिलाएं।

    भारत के लिए यह वनडे सीरीज सिर्फ एक ट्रॉफी जीतने का मौका नहीं बल्कि आत्मविश्वास और लय हासिल करने की भी परीक्षा है। लगातार मिली हार के बाद टीम प्रबंधन और चयनकर्ताओं की नजर भी इस सीरीज पर रहेगी। यदि अनुभवी और युवा खिलाड़ियों का संतुलन सही बैठा तो भारत एक बार फिर जीत की राह पर लौट सकता है।

    भारत और इंग्लैंड के बीच पहला वनडे 14 जुलाई को बर्मिंघम में खेला जाएगा। दूसरा मुकाबला 16 जुलाई को कार्डिफ में जबकि तीसरा और अंतिम मैच 19 जुलाई को ऐतिहासिक लॉर्ड्स मैदान पर होगा। क्रिकेट प्रेमियों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या रोहित शर्मा और विराट कोहली अपनी शानदार बल्लेबाजी से टीम इंडिया को जीत दिलाकर टी20 की निराशा भुला पाएंगे।

  • जहां इंसानी अदालतें हार मान जाती हैं वहां न्याय करती हैं मां कोटगाड़ी देवी मन्नत पूरी होने पर चढ़ता है लोहे का हथौड़ा

    जहां इंसानी अदालतें हार मान जाती हैं वहां न्याय करती हैं मां कोटगाड़ी देवी मन्नत पूरी होने पर चढ़ता है लोहे का हथौड़ा


    नई दिल्ली। देवभूमि उत्तराखंड अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ साथ अद्भुत धार्मिक आस्था और चमत्कारी मंदिरों के लिए भी पूरे देश में प्रसिद्ध है। इन्हीं पवित्र स्थलों में कुमाऊं क्षेत्र का मां कोटगाड़ी देवी मंदिर एक ऐसा अनोखा धाम है जहां भक्त फूल माला या नारियल नहीं बल्कि लोहे का हथौड़ा चढ़ाते हैं। यह परंपरा वर्षों पुरानी है और आज भी हजारों श्रद्धालु पूरी श्रद्धा के साथ इसका पालन करते हैं।

    स्थानीय लोगों की मान्यता है कि मां कोटगाड़ी देवी का यह दरबार न्याय का अंतिम स्थान है। जब किसी व्यक्ति को अदालत पुलिस या समाज से न्याय नहीं मिलता तब वह पूरी आस्था के साथ माता के दरबार में अपनी फरियाद लेकर पहुंचता है। श्रद्धालु अपनी समस्या को लिखकर माता के चरणों में अर्पित करते हैं और विश्वास रखते हैं कि मां स्वयं उनके साथ हुए अन्याय का समाधान करती हैं।

    इस मंदिर की सबसे अनोखी परंपरा लोहे का हथौड़ा चढ़ाने की है। माना जाता है कि हथौड़ा न्याय शक्ति और कठोर निर्णय का प्रतीक है। जिस प्रकार अदालत में न्याय का प्रतीक हथौड़ा माना जाता है उसी तरह यहां भक्त न्याय मिलने के बाद माता का आभार व्यक्त करने के लिए लोहे का हथौड़ा अर्पित करते हैं। कई श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार तांबे का त्रिशूल या पीतल की घंटी भी भेंट करते हैं। मंदिर परिसर में लगे हजारों हथौड़े इस अनूठी परंपरा और भक्तों की अटूट आस्था की गवाही देते हैं।

    ग्रामीणों का विश्वास है कि मां कोटगाड़ी देवी के दरबार में झूठ और छल की कोई जगह नहीं है। यदि कोई व्यक्ति झूठी शपथ लेकर किसी निर्दोष को फंसाने का प्रयास करता है तो उसे अपने कर्मों का दंड अवश्य मिलता है। यही कारण है कि इस क्षेत्र में लोग माता के दरबार में असत्य बोलने से भी डरते हैं और न्याय के प्रति गहरी आस्था रखते हैं।

    हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु देश के अलग अलग हिस्सों से यहां पहुंचते हैं। कोई पारिवारिक विवाद लेकर आता है तो कोई जमीन के मामले में न्याय की उम्मीद करता है। कई लोग वर्षों बाद अपनी मनोकामना पूरी होने पर फिर मंदिर पहुंचकर माता के चरणों में हथौड़ा अर्पित करते हैं और धन्यवाद देते हैं। यही विश्वास इस मंदिर को देश के सबसे अनोखे धार्मिक स्थलों में शामिल करता है।

    चारों ओर फैले शांत पहाड़ और आध्यात्मिक वातावरण इस मंदिर की दिव्यता को और भी विशेष बना देते हैं। यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु केवल दर्शन ही नहीं करते बल्कि मानसिक शांति और आत्मविश्वास का भी अनुभव करते हैं। मां कोटगाड़ी देवी का यह पवित्र धाम आज भी आस्था न्याय और विश्वास का अद्भुत संगम बना हुआ है। यदि कभी उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र की यात्रा करें तो इस अनोखे मंदिर के दर्शन अवश्य करें जहां लोगों का विश्वास है कि सच्ची श्रद्धा और निष्कलंक मन से की गई प्रार्थना कभी व्यर्थ नहीं जाती।

  • चेक बाउंस मामले में अभिनेता राजपाल यादव को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ा झटका, तीन महीने की जेल की सजा बरकरार

    चेक बाउंस मामले में अभिनेता राजपाल यादव को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ा झटका, तीन महीने की जेल की सजा बरकरार

    नई दिल्ली । बॉलीवुड के प्रसिद्ध हास्य अभिनेता राजपाल यादव एक बार फिर गंभीर कानूनी संकट में घिर गए हैं। दिल्ली हाई कोर्ट ने सालों पुराने एक चेक बाउंस और ऋण भुगतान से जुड़े आपराधिक मामले में अभिनेता की तीन महीने की जेल की सजा को बरकरार रखने का फैसला सुनाया है। अदालत के इस कड़े रुख के बाद अभिनेता को एक बार फिर जेल की हवा खानी पड़ेगी। इस अदालती फैसले के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर राजपाल यादव का एक नया पोस्ट भी सामने आया है, जो इंटरनेट पर तेजी से चर्चा का विषय बन गया है।

    न्यायालय का यह आदेश शुक्रवार को आया, जिसमें दिल्ली हाई कोर्ट ने राजपाल यादव के पिछले आचरण और वित्तीय प्रतिबद्धताओं को पूरा न करने के रवैये को ‘संदिग्ध’ करार दिया। इस मामले में न केवल अभिनेता बल्कि उनकी पत्नी राधा यादव को भी अदालत ने दोषी पाया है। अदालत ने राधा यादव को निर्देश दिया है कि वह शिकायतकर्ता कंपनी को मुआवजे के रूप में 5,51,380 रुपये की राशि का अविलंब भुगतान सुनिश्चित करें।

    यह पूरा विवाद साल 2010 से जुड़ा हुआ है, जब राजपाल यादव ने अपने निजी प्रोडक्शन बैनर तले ‘अता पता लापता’ नामक एक फिल्म का निर्माण और निर्देशन किया था। इस महत्वाकांक्षी सिनेमाई परियोजना को पूरा करने के लिए अभिनेता ने दिल्ली की एक वित्तीय कंपनी ‘एम/एस मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड’ से 5 करोड़ रुपये का मोटा कर्ज लिया था। हालांकि, बॉक्स ऑफिस पर यह फिल्म बुरी तरह असफल साबित हुई, जिसके कारण राजपाल यादव लिया गया कर्ज चुकाने में असमर्थ रहे। समय के साथ इस मूल रकम पर ब्याज बढ़ता गया और यह देनदारी लगभग 9 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।

    ऋण की अदायगी न होने और अभिनेता द्वारा दिए गए चेक के बैंक में बाउंस हो जाने के बाद वित्तीय कंपनी ने अदालत का रुख किया था। इस कानूनी लड़ाई के दौरान राजपाल यादव को पहले भी जेल जाना पड़ा था। इसी साल फरवरी 2026 में भी वह जेल की सजा काट रहे थे, जिसके बाद उन्हें कुछ समय के लिए जमानत पर रिहा किया गया था। तब फिल्म जगत के कई सितारों और सहयोगियों ने राजपाल यादव के समर्थन में आकर उनकी आर्थिक रूप से मदद भी की थी, लेकिन इसके बावजूद वह अपना पूरा कर्ज चुकता करने में विफल रहे, जिसके परिणामस्वरूप अब उन्हें दोबारा तीन महीने जेल में बिताने होंगे।

    दिलचस्प बात यह है कि जेल की सजा बहाल होने के इस बड़े घटनाक्रम के बीच राजपाल यादव के आधिकारिक इंस्टाग्राम हैंडल से एक नया व्यावसायिक विज्ञापन वीडियो पोस्ट किया गया है। इस मसाले के विज्ञापन में वह अभिनेता अक्षय कुमार के साथ अपने चिर-परिचित मजाकिया अंदाज में अभिनय करते नजर आ रहे हैं। इस पोस्ट के कैप्शन में अभिनेता ने लिखा कि खाना सिर्फ खाना नहीं होता, बल्कि महफिल में रंग जमाना भी होता है।

    अदालती फैसले और इस नए वीडियो के एक साथ सामने आने के बाद प्रशंसकों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं की ओर से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। जहां कई प्रशंसक उनके अभिनय और अक्षय कुमार के साथ उनकी पुरानी ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री की सराहना कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में लोग उनके चेक बाउंस मामले और जेल की सजा पर अपनी चिंताएं जाहिर कर रहे हैं। कई शुभचिंतकों ने अभिनेता को इस कठिन कानूनी समय में मजबूत रहने की सलाह दी है। फिलहाल, उच्च न्यायालय के आदेश के बाद अभिनेता को आत्मसमर्पण कर अपनी तय सजा काटनी होगी।

  • सुपरहिट डेब्यू के बाद भी क्यों पीछे रह गए जावेद जाफरी अभिनेता ने बताया करियर में क्या बनी सबसे बड़ी रुकावट

    सुपरहिट डेब्यू के बाद भी क्यों पीछे रह गए जावेद जाफरी अभिनेता ने बताया करियर में क्या बनी सबसे बड़ी रुकावट


    नई दिल्ली। बॉलीवुड के बेहतरीन अभिनेता डांसर और कॉमेडियन जावेद जाफरी ने अपने लंबे फिल्मी सफर को लेकर खुलकर बात की है। उन्होंने स्वीकार किया कि प्रतिभा और मेहनत होने के बावजूद वह कभी बॉलीवुड के ए लिस्ट सितारों में अपनी जगह नहीं बना सके। जावेद का मानना है कि फिल्म इंडस्ट्री में केवल अभिनय ही सफलता की गारंटी नहीं होता बल्कि मजबूत पीआर सही नेटवर्क और लगातार मिलने वाली बड़ी सफलताएं भी कलाकार की पहचान तय करती हैं।

    एक बातचीत के दौरान जावेद जाफरी ने कहा कि किसी भी कलाकार का करियर इस बात पर निर्भर करता है कि उसे किस तरह पेश किया जाता है। उनके अनुसार इंडस्ट्री का अपना एक तंत्र होता है जहां पीआर और ग्रुप का हिस्सा होना कई बार आगे बढ़ने में मदद करता है। अगर किसी कलाकार के बारे में लगातार सकारात्मक माहौल बनाया जाए तो उसके लिए नए अवसर बढ़ जाते हैं जबकि नकारात्मक छवि करियर की रफ्तार धीमी कर सकती है।

    जावेद ने स्वीकार किया कि वह इस व्यवस्था का हिस्सा कभी नहीं बन पाए। उन्होंने कहा कि उन्होंने न तो किसी ग्रुप का सहारा लिया और न ही अपने लिए अलग से प्रचार अभियान चलाया। यही वजह रही कि उन्हें वैसी पहचान और मौके नहीं मिले जिनके वह हकदार थे। उनके मुताबिक इंडस्ट्री में सफलता मिलने के बाद ही लोगों का नजरिया तेजी से बदलता है और फिर वही कलाकार सबकी पहली पसंद बन जाता है।

    अपने तर्क को समझाने के लिए जावेद ने सलमान खान का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि सलमान की शुरुआती फिल्म को वह सफलता नहीं मिली जिसकी उम्मीद थी और उस समय उनके बारे में ज्यादा सकारात्मक बातें नहीं हुईं। लेकिन जब एक बड़ी हिट फिल्म आई तो पूरा माहौल बदल गया और वही सलमान इंडस्ट्री के सबसे बड़े सितारों में शामिल हो गए। जावेद का कहना है कि कलाकार वही रहता है लेकिन एक बड़ी सफलता उसकी पूरी छवि बदल देती है।

    जावेद ने अपनी पहली फिल्म मेरी जंग का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इस फिल्म में उन्हें खलनायक के रूप में पेश किया गया था। फिल्म सफल रही लेकिन दर्शकों और फिल्म निर्माताओं ने उन्हें उसी छवि में देखना शुरू कर दिया। उनके अनुसार अगर उस समय किसी निर्देशक ने उन्हें हल्की फुल्की मनोरंजक या संगीत प्रधान फिल्म में मौका दिया होता तो उनकी छवि बदल सकती थी और करियर नई दिशा पकड़ सकता था।

    उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने कभी खुद को अलग तरह के किरदारों के लिए आगे बढ़कर पेश नहीं किया। हालांकि उन्हें इस बात का कोई पछतावा नहीं है। उनका मानना है कि हर कलाकार का सफर अलग होता है और उन्होंने अपने हिस्से के काम को पूरी ईमानदारी से निभाया है। अभिनय डांस कॉमेडी और वॉयस ओवर जैसे कई क्षेत्रों में उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है जिसे दर्शकों का भरपूर प्यार मिला।

    वर्क फ्रंट की बात करें तो जावेद जाफरी इन दिनों फिल्म धमाल 4 को लेकर चर्चा में हैं। कॉमेडी से भरपूर इस फिल्म में उनके साथ अजय देवगन रितेश देशमुख अरशद वारसी समेत कई लोकप्रिय कलाकार नजर आ रहे हैं। दर्शकों को उम्मीद है कि एक बार फिर जावेद अपनी शानदार कॉमिक टाइमिंग से सभी का मनोरंजन करेंगे।

  • शुद्ध पेट्रोल से सस्ता क्यों नहीं है E20 ईंधन? केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय ने भ्रांतियों को दूर कर तार्किक और आर्थिक कारणों से उठाया पर्दा

    शुद्ध पेट्रोल से सस्ता क्यों नहीं है E20 ईंधन? केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय ने भ्रांतियों को दूर कर तार्किक और आर्थिक कारणों से उठाया पर्दा

    नई दिल्ली । देश के ईंधन बाजार में इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) की अनिवार्य उपलब्धता और इससे जुड़े उपभोक्ताओं के विभिन्न सवालों पर केंद्र सरकार ने अपनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने आम जनता और वाहन मालिकों के बीच व्याप्त चिंताओं तथा भ्रामक सूचनाओं का खंडन करते हुए तथ्यों पर आधारित विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया है। सरकार ने तार्किक, आर्थिक और परिचालन संबंधी कारणों का हवाला देते हुए बताया है कि क्यों पेट्रोल पंपों पर उपभोक्ताओं को E10 या शुद्ध पेट्रोल चुनने का अलग से विकल्प नहीं दिया जा सकता है।

    मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, देश भर के फ्यूल स्टेशनों पर पेट्रोल के कई अलग-अलग ग्रेड्स को एक साथ बनाए रखना तार्किक और परिचालन के दृष्टिकोण से एक बेहद जटिल और बड़ी चुनौती होगी। भारत का E20 ईंधन की ओर बढ़ना कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं है, बल्कि यह वाहन निर्माताओं, ऑटोमोबाइल क्षेत्र की विभिन्न परीक्षण एजेंसियों और तेल विपणन कंपनियों के साथ लंबे समय तक किए गए व्यापक विचार-विमर्श का परिणाम है। इस सुनियोजित रणनीति के तहत ही बुनियादी ढांचे को अपग्रेड किया गया है।

    सरकार ने उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें यह कहा जा रहा था कि भारत ने इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को लागू करने में जल्दबाजी दिखाई है। मंत्रालय ने याद दिलाया कि देश में इथेनॉल मिश्रण की शुरुआत वर्ष 2001 में ही हो चुकी थी और यह कार्यक्रम पिछले दो दशकों से निरंतर विकास के दौर से गुजर रहा है। ब्राजील और अमेरिका जैसे वैश्विक उदाहरणों का अध्ययन करने के बाद ही भारतीय उद्योगों को इस परिवर्तन के हर चरण में शामिल किया गया। ऐसे में इतनी बड़ी क्षमता के निर्माण के बाद दोबारा E10 पर वापस लौटने से भारी-भरकम औद्योगिक निवेश को नुकसान पहुंचेगा।

    उपभोक्ताओं के मन में यह सवाल भी प्रमुखता से उठ रहा था कि जब E20 में बीस फीसदी इथेनॉल मिलाया जाता है, तो यह शुद्ध पेट्रोल की तुलना में सस्ता क्यों नहीं बिक रहा है। इसके आर्थिक पहलू को स्पष्ट करते हुए मंत्रालय ने बताया कि सरकार किसानों को उचित मुआवजा देने के लिए लाभकारी कीमतों पर इथेनॉल की खरीद करती है। मौजूदा अंतरराष्ट्रीय बाजार परिदृश्य में जब कच्चा तेल लगभग 70 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है, तब E20 का उत्पादन शुद्ध पेट्रोल से अधिक महंगा पड़ता है। यदि कच्चे तेल की वैश्विक कीमतें 120 से 130 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचती हैं, तब इथेनॉल का मिश्रण आर्थिक रूप से अधिक सस्ता साबित होता है।

    मंत्रालय ने साफ किया कि इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम का प्राथमिक उद्देश्य किसी विशेष दिन ईंधन की कीमतों को कम करना नहीं है, बल्कि भारत की विदेशी तेल आयात पर निर्भरता को कम करना और देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाना है। सरकार के आंकड़ों के अनुसार, इस दूरदर्शी नीति के चलते अब तक देश की 1.97 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हो चुकी है। इसके अलावा, पर्यावरण के मोर्चे पर 952 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी दर्ज की गई है, जबकि देश के किसानों के बैंक खातों में 1.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे स्थानांतरित की गई है।

    पुराने वाहनों के इंजनों पर E20 पेट्रोल के पड़ने वाले प्रभाव को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही भ्रामक सूचनाओं पर भी सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। मंत्रालय ने उपभोक्ताओं को आश्वस्त करते हुए कहा है कि भारत की इथेनॉल आपूर्ति श्रृंखला देश की सबसे कड़ाई से विनियमित और वैज्ञानिक रूप से परीक्षित ईंधन प्रणालियों में से एक है। वाहनों को नुकसान पहुंचने के दावे किसी भी वैज्ञानिक कसौटी पर खरे नहीं उतरते हैं, इसलिए नागरिकों को बिना किसी प्रामाणिक आधार के फैलाए जा रहे अनावश्यक भय और अफवाहों से गुमराह नहीं होना चाहिए। E20 ईंधन न केवल स्वच्छ है बल्कि यह इंजन के दहन को बेहतर कर कार्बन फुटप्रिंट को 40 प्रतिशत तक कम करता है।