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  • प्राचीन ठंडक रहस्य: गर्मियों में शरीर को ठंडक देने के 5 देसी तरीके…

    प्राचीन ठंडक रहस्य: गर्मियों में शरीर को ठंडक देने के 5 देसी तरीके…

    नई दिल्ली:  गर्मियों का मौसम आते ही शरीर को ठंडा रखना हर किसी के लिए चुनौती बन जाता है। शहरों में लोग अक्सर फ्रिज का ठंडा पानी, कोल्ड ड्रिंक और एयर कंडीशनर का सहारा लेते हैं। ये तुरंत राहत तो देते हैं और गर्मी में थोड़ी राहत महसूस कराते हैं, लेकिन लंबे समय में स्वास्थ्य पर इसका नकारात्मक असर भी पड़ सकता है। अगर हम गांवों की जीवनशैली देखें तो पता चलता है कि वहां लोग सदियों से प्राकृतिक और देसी तरीकों से गर्मी से राहत पाते आए हैं। इन तरीकों में न तो बिजली की जरूरत होती है और न ही महंगे उपकरण। फिर भी ये शरीर को अंदर से ठंडा रखने में बेहद असरदार हैं।

    हमारे पारंपरिक खान-पान और घरेलू नुस्खों में कई चीजें शामिल हैं जो शरीर का तापमान संतुलित रखने में मदद करती हैं। यही कारण है कि गांवों में लोग तेज गर्मी के बावजूद ज्यादा हेल्दी और एनर्जेटिक रहते हैं। आइए जानते हैं पांच ऐसी देसी चीजों के बारे में जो गर्मियों में शरीर को ठंडा रखने के लिए आज भी अपनाई जाती हैं।


    1. मटके का पानी

    गांवों में ज्यादातर घरों में मिट्टी के मटके में पानी रखा जाता है। मटके का पानी फ्रिज के पानी जितना ठंडा नहीं होता लेकिन धीरे-धीरे शरीर को ठंडक पहुंचाता है। मिट्टी के बर्तन में छोटे-छोटे छिद्र पानी को धीरे-धीरे ठंडा करते हैं। यह पानी प्राकृतिक रूप से ठंडा रहता है और पाचन के लिए भी लाभकारी होता है।

    2. सत्तू का शरबत

    भुने हुए चने से बनने वाला सत्तू का शरबत बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड में गर्मियों में बहुत लोकप्रिय है। इसे देसी एनर्जी ड्रिंक भी कहा जाता है। यह शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है, लंबे समय तक पेट भरा रखता है और लू से बचाव में मदद करता है।

    3. बेल का शरबत

    बेल का फल गर्मियों में बहुत फायदेमंद माना जाता है। इसका शरबत शरीर को अंदर से ठंडा करता है और पाचन में सुधार लाता है। आयुर्वेद में भी इसे गर्मी से राहत और पाचन के लिए उपयोगी बताया गया है।

    4. छाछ (मट्ठा)

    दही से बनी छाछ गर्मियों में शरीर को हल्का और ठंडा रखने में मदद करती है। इसमें मौजूद प्रोबायोटिक तत्व पाचन को मजबूत बनाते हैं और शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करते हैं। छाछ पीने से गर्मी में हल्का महसूस होता है और ऊर्जा बनी रहती है।

    5. खस का शरबत

    खस की जड़ से तैयार शरबत भी गर्मियों में ठंडक देने के लिए काफी प्रभावी है। खस की तासीर ठंडी मानी जाती है और यह शरीर को ठंडक देने के साथ गर्मी से होने वाली थकान को भी कम करता है। इसका सेवन शरीर को तरोताजा महसूस कराता है और लंबे समय तक ठंडक बनाए रखता है।

    आज के समय में लोग गर्मी से बचने के लिए फ्रिज के ठंडे पानी और कोल्ड ड्रिंक्स पर निर्भर हो जाते हैं। लेकिन हमारे पारंपरिक देसी तरीके आज भी उतने ही असरदार हैं जितने पहले थे और शरीर को अंदर से ठंडा बनाए रखने में मदद करते हैं। गर्मी में स्वास्थ्य और ऊर्जा बनाए रखने के लिए इन प्राकृतिक उपायों को अपनाना सबसे सुरक्षित और प्रभावी तरीका है।
  • RBI ने जारी किया ‘कस्टमर लायबिलिटी फ्रेमवर्क’, डिजिटल भुगतान सुरक्षित बनाने बड़ा कदम

    नई दिल्ली में डिजिटल बैंकिंग और ऑनलाइन भुगतान के बढ़ते इस्तेमाल के बीच ग्राहकों को सुरक्षा देने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक नया ड्राफ्ट फ्रेमवर्क पेश किया है। इस प्रस्तावित नियम के तहत यदि किसी ग्राहक के साथ डिजिटल ट्रांजैक्शन के दौरान धोखाधड़ी होती है और वह इसे समय पर बैंक या संबंधित संस्था को सूचित करता है, तो उसे अधिकतम 25,000 रुपये तक मुआवजा मिल सकता है।

    आरबीआई ने इसे कस्टमर लायबिलिटी इन डिजिटल ट्रांजैक्शंस नाम से जारी किया है। इसका मुख्य उद्देश्य डिजिटल भुगतान में होने वाली धोखाधड़ी से ग्राहकों की सुरक्षा बढ़ाना और शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया को तेज करना है। केंद्रीय बैंक ने इस मसौदे पर आम जनता, बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों से 6 अप्रैल 2026 तक सुझाव मांगे हैं।

    ड्राफ्ट के अनुसार यदि किसी ग्राहक के साथ 50,000 रुपये तक का डिजिटल फ्रॉड होता है और वह तुरंत इसकी सूचना देता है, तो उसे नुकसान की राशि का 85 प्रतिशत या अधिकतम 25,000 रुपये (जो भी कम हो) वापस मिल सकता है। उदाहरण के तौर पर 10,000 रुपये के फ्रॉड पर लगभग 8,500 रुपये और 40,000 रुपये के फ्रॉड पर अधिकतम सीमा के कारण 25,000 रुपये वापस मिलेंगे।

    आरबीआई का मानना है कि इस व्यवस्था से ग्राहकों का भरोसा डिजिटल भुगतान प्रणाली पर बढ़ेगा। ड्राफ्ट का प्रस्ताव है कि मुआवजा व्यवस्था लागू होने के एक वर्ष तक प्रभावी रहे और इसके बाद अनुभव और प्रतिक्रिया के आधार पर समीक्षा की जाए।

    केंद्रीय बैंक ने यह भी स्पष्ट किया कि मौजूदा नियम 2017 में जारी किए गए थे। तब से डिजिटल बैंकिंग, मोबाइल पेमेंट और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के तरीके काफी बदल चुके हैं। साथ ही साइबर अपराध और इलेक्ट्रॉनिक फ्रॉड के नए प्रकार तेजी से बढ़े हैं। पुराने नियमों को अपडेट करने की जरूरत इसलिए महसूस की गई।

    ड्राफ्ट फ्रेमवर्क का एक अहम उद्देश्य यह भी है कि शिकायतों के निपटारे में लगने वाले समय को कम किया जाए। कई मामलों में ग्राहकों को धोखाधड़ी के बाद अपनी राशि वापस पाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। नए नियम लागू होने के बाद बैंकों और वित्तीय संस्थानों की जवाबदेही बढ़ेगी और शिकायत निपटान तेजी से होगा।

    आरबीआई ने मसौदा अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक किया है। बैंक, एनबीएफसी और आम नागरिक ईमेल के माध्यम से सुझाव भेज सकते हैं। सुझावों की समीक्षा के बाद अंतिम नियम जारी किए जाएंगे। यह कदम देश के डिजिटल भुगतान तंत्र को और अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • दही: ब्लड प्रेशर कम करने और इम्यूनिटी बढ़ाने वाला सुपरफूड, जानें 12 हेल्थ बेनिफिट्स और सावधानियां

    दही: ब्लड प्रेशर कम करने और इम्यूनिटी बढ़ाने वाला सुपरफूड, जानें 12 हेल्थ बेनिफिट्स और सावधानियां


    नई दिल्ली । दही सेहत का खजाना है। इसमें प्रोटीन गुड फैट शुगर और प्रोबायोटिक्स की भरपूर मात्रा होती है जो न सिर्फ स्वादिष्ट है बल्कि गट हेल्थ इम्यूनिटी और मेटाबॉलिज्म को भी रीसेट करता है। इतना ही नहीं यह ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में भी मददगार है। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित स्टडी बताती है कि नियमित दही खाने से हाई ब्लड प्रेशर का रिस्क 16–20% तक कम हो सकता है। हफ्ते में पांच या उससे अधिक बार संतुलित डाइट के साथ दही खाने से ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है।

    डॉ. संचयन रॉय सीनियर कंसल्टेंट इंटरनल मेडिसिन अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल दिल्ली के अनुसार दही में मौजूद जिंक सेलेनियम और विटामिन D संक्रमण पैदा करने वाले वायरस और बैक्टीरिया के खिलाफ सुरक्षा कवच का काम करते हैं। इससे इम्यूनिटी मजबूत होती है और शरीर में इंफ्लेमेशन कम होता है। नियमित सेवन से सर्दी-जुकाम से लेकर गंभीर बीमारियों का रिस्क घटता है।

    हार्ट हेल्थ के लिए भी दही बेहद फायदेमंद है। इसमें पोटेशियम और मैग्नीशियम मौजूद हैं जो शरीर से एक्स्ट्रा सोडियम को बाहर निकालकर ब्लड प्रेशर को संतुलित रखते हैं। प्रोबायोटिक्स बैड कोलेस्ट्रॉल LDLको कम करने और इंफ्लेमेशन घटाने में मदद करते हैं। इन गुणों के कारण दही हार्ट डिजीज का रिस्क कम कर सकता है।

    ब्लड प्रेशर कंट्रोल में दही कैसे मदद करता है? इसमें मौजूद बायोएक्टिव पेप्टाइड्स ब्लड प्रेशर बढ़ाने वाले एंजाइम्स की एक्टिविटी को कम करते हैं और ब्लड वेसल्स को रिलैक्स करते हैं। इससे ब्लड फ्लो बेहतर होता है और दबाव संतुलित रहता है। विशेष रूप से मिड एज महिलाओं और अधिक BMI वाले लोगों के लिए दही ज्यादा फायदेमंद साबित होता है।

    दही के नियमित सेवन से पाचन तंत्र भी मजबूत होता है। प्रोबायोटिक्स गट माइक्रोबायोम का संतुलन बनाए रखते हैं बैड बैक्टीरिया को बढ़ने से रोकते हैं और IBS कब्ज या ब्लोटिंग जैसी समस्याओं में राहत देते हैं। स्वस्थ गट माइक्रोबायोम मूड और ब्रेन फंक्शनिंग को भी प्रभावित करता है।

    दही खाने का सही समय दोपहर का माना जाता है क्योंकि इस समय पाचन क्षमता सबसे मजबूत होती है। खाली पेट दही खाने से पेट में एसिड बढ़ सकता है इसलिए इसे हमेशा मेन कोर्स के साथ साइड डिश के रूप में लें। मीठा या फ्लेवर्ड दही एक्स्ट्रा शुगर और प्रिजर्वेटिव्स के कारण नुकसानदेह हो सकता है।

    साथ ही दही स्किन और बालों के लिए भी लाभकारी है। इसमें मौजूद लैक्टिक एसिड और प्रोटीन स्किन की रंगत सुधारते हैं मॉइश्चर बनाए रखते हैं और बालों की जड़ें मजबूत करते हैं।हालांकि कुछ लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए। आर्थराइटिस अस्थमा किडनी डिजीज लैक्टोज इनटॉलेरेंस या गंभीर एसिडिटी वाले लोगों को दही सेवन डॉक्टर की सलाह पर ही करना चाहिए।

    दही खाने से ब्लड प्रेशर कम होता है इम्यूनिटी मजबूत होती है और यह शरीर को कई तरह की लाइफस्टाइल डिजीज से बचाने में मदद करता है। इसे अपनी डाइट में शामिल करना एक छोटी लेकिन असरदार हेल्थ हैबिट है।

  • सुबह खाली पेट पानी पीना: सेहत के लिए ‘साइलेंट हीलर’, जानें 11 फायदे और सही तरीका

    सुबह खाली पेट पानी पीना: सेहत के लिए ‘साइलेंट हीलर’, जानें 11 फायदे और सही तरीका


    नई दिल्ली । हम अक्सर सुनते हैं कि सुबह खाली पेट पानी पीना सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है। हेल्थ एक्सपर्ट इसे साइलेंट हीलर कहते हैं क्योंकि यह छोटी लेकिन असरदार आदत हमारे शरीर को रीस्टार्ट का संदेश देती है। इंग्लैंड की लॉफबोरो यूनिवर्सिटी की स्टडी बताती है कि सुबह उठने के 30 मिनट के अंदर आधा लीटर पानी पीने से ब्रेन की फंक्शनिंग में सुधार आता है।

    डॉ. रोहित शर्मा कंसल्टेंट इंटरनल मेडिसिन अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल जयपुर बताते हैं कि सोते समय शरीर रिकवरी और रिपेयर मोड में चला जाता है। मेटाबॉलिज्म और ऑर्गन्स स्लो हो जाते हैं। ऐसे में सुबह पानी पीना शरीर को धीरे धीरे इस मोड से बाहर निकालता है। मूड संतुलित रहता है फोकस और याददाश्त बढ़ती है और सोचने समझने की क्षमता बेहतर होती है।

    डाइजेशन पर इसका असर भी महत्वपूर्ण है। खाली पेट पानी पेट में पहुंचकर पाचन तंत्र को सक्रिय करता है पेट और आंतों की मांसपेशियां मूवमेंट शुरू करती हैं। गैस्ट्रिक जूस और एंजाइम्स रिलीज होने से खाना पचाने की क्षमता बढ़ती है। कब्ज एसिडिटी और ब्लोटिंग जैसी समस्याएं कम होती हैं।

    सुबह पानी पीने से कई लाइफस्टाइल डिजीज का जोखिम घट सकता है। हाइड्रेटेड रहने से मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है और टॉक्सिन्स जमा नहीं होते। किडनी स्टोन यूरिन इन्फेक्शन हाई ब्लड प्रेशर और कब्ज जैसी बीमारियों के खतरे कम होते हैं।

    वजन कम करने में भी यह मददगार है। पानी मेटाबॉलिज्म को 20–30% तक एक्टिव करता है और कैलोरी बर्न में सहायक होता है। पेट थोड़ा भरा महसूस होने से नाश्ते में ओवरईटिंग कम होती है। हालांकि सिर्फ पानी पीने से वजन कम नहीं होता इसे हेल्दी लाइफस्टाइल के साथ अपनाना जरूरी है।

    मानसिक स्वास्थ्य पर भी इसका असर दिखता है। डिहाइड्रेशन से थकान चिड़चिड़ापन और फोकस की कमी हो सकती है। सुबह पानी पीने से ब्रेन को पर्याप्त ऑक्सीजन और ब्लड सप्लाई मिलती है जिससे स्ट्रेस हॉर्मोन बैलेंस होते हैं और दिन की शुरुआत क्लियर और शांत होती है।

    एनर्जी लेवल और मूड पर भी सकारात्मक असर पड़ता है। रात भर डिहाइड्रेटेड रहने से शरीर सुस्त रहता है। पानी पीते ही सेल्स सक्रिय हो जाती हैं थकान कम होती है और सिर भारी लगने की समस्या घटती है। यही कारण है कि हेल्थ एक्सपर्ट चाय कॉफी से पहले पानी पीने की सलाह देते हैं।

    डॉ. शर्मा के मुताबिक गुनगुना या नॉर्मल टेम्परेचर का पानी सुबह के लिए सबसे सही है। ठंडा पानी डाइजेशन धीमा कर सकता है। आमतौर पर 1–2 गिलास 250–500 ml पानी पर्याप्त होता है लेकिन मौसम और हेल्थ कंडीशन के हिसाब से मात्रा बदल सकती है।

    कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं। किडनी या हार्ट की समस्या लो ब्लड प्रेशर गंभीर गैस्ट्रिक इश्यू वाले लोग थोड़ी सतर्कता बरतें। सुबह खाली पेट पानी पीना एक छोटी लेकिन असरदार आदत है जो डाइजेशन मेटाबॉलिज्म मेंटल हेल्थ और ओवरऑल वेलबीइंग को बेहतर बनाती है।

  • US-Iran युद्ध की आग में सेंसेक्स और निफ्टी लुढ़के, शेयर बाजार में हाहाकार

    US-Iran युद्ध की आग में सेंसेक्स और निफ्टी लुढ़के, शेयर बाजार में हाहाकार


    नई दिल्‍ली । भारतीय शेयर बाजार पर सोमवार को अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते संघर्ष का असर देखने को मिला। सेंसेक्स 2,366 अंक टूटकर 76,552 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 717 अंकों की गिरावट के साथ 23,732 पर आ गया। सभी प्रमुख स्टॉक्स लाल निशान में रहे। इंडिगो 7% से अधिक लुढ़ककर शीर्ष नुकसान में रहा। इसके अलावा टाटा स्टील 5.59%, मारुति 5.40% और इटरनल 5.19% टूटकर बंद हुए।

    शुरुआती कारोबार में भारी गिरावट

    सुबह के कारोबार में भी बाजार में दबाव साफ दिखा। बीएसई सेंसेक्स 1,862 अंक की गिरावट के साथ 77,056 पर खुला, जबकि निफ्टी 582 अंक नीचे 23,868 पर आया। NSE पर केवल 249 शेयर ही हरे निशान में थे, जबकि 403 स्टॉक्स 52 हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंच गए। निफ्टी फ्यूचर्स पिछले बंद भाव से करीब 722 अंकों की गिरावट के साथ 23,824 के आसपास ट्रेड कर रहे थे।

    विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी-ईरान संघर्ष और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण घरेलू बाजार में भारी बिकवाली हुई। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के साथ तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई हैं, जिससे वैश्विक निवेशक भी सतर्क हो गए।

    एशियाई और अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाहाकार

    सोमवार को एशियाई बाजारों में भी भारी दबाव देखा गया। जापान का निक्की 225 सूचकांक 6.22% गिरकर 53,000 के स्तर से नीचे चला गया, जबकि टॉपिक्स 5.27% टूट गया। दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स पिछले सप्ताह 11% गिरने के बाद सोमवार को 8% से अधिक लुढ़का, जिसमें सैमसंग और SK हाइनिक्स जैसी कंपनियां सबसे अधिक प्रभावित रहीं। गिरावट के चलते सर्किट ब्रेकर चालू किए गए और ट्रेडिंग 20 मिनट के लिए रोक दी गई। हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स भी तेज गिरावट के साथ खुला। वॉल स्ट्रीट में भी दबाव रहा। डॉउ जोन्स फ्यूचर्स में 950 अंक तक की गिरावट आई, एसएंडपी 500 फ्यूचर्स 100 अंक से अधिक लुढ़के और नैस्डैक फ्यूचर्स में 400 अंकों की गिरावट दर्ज हुई।

    कच्चे तेल की कीमतों में रिकॉर्ड उछाल

    अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच हुर्मुज जलडमरूमध्य पर खतरे और खाड़ी के तेल उत्पादकों द्वारा उत्पादन में कटौती के कारण कच्चे तेल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गईं। ब्रेंट क्रूड ऑयल 18.03% बढ़कर 109.40 डॉलर प्रति बैरल हो गई, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड फ्यूचर्स 20.23% उछलकर 109.29 डॉलर पर पहुंच गए। यह दोनों स्तर रूस के 2022 में यूक्रेन पर हमले के शुरुआती महीनों के बाद नहीं देखे गए थे। कतर के ऊर्जा मंत्री ने चेतावनी दी कि अगर युद्ध के कारण खाड़ी देशों का उत्पादन बाधित हुआ, तो कच्चे तेल की कीमत $150 तक पहुंच सकती है।

  • खरमास 2026: 15 मार्च से मांगलिक कार्यों पर विराम, अप्रैल-मई में विवाह के शुभ मुहूर्त

    खरमास 2026: 15 मार्च से मांगलिक कार्यों पर विराम, अप्रैल-मई में विवाह के शुभ मुहूर्त


    नई दिल्ली । सनातन धर्म में ग्रहों की चाल और शुभ मुहूर्त का अत्यंत महत्व माना जाता है। ज्योतिषाचार्य पंडित गिरिधर गोपाल चौबे के अनुसार जब सूर्य देव बृहस्पति गुरु की राशि मीन में प्रवेश करते हैं तब खरमास का आरंभ होता है। साल 2026 में यह गोचर 14 मार्च की मध्य रात्रि को तड़के 3:07 बजे होगा और 15 मार्च से मीन संक्रांति के साथ ही खरमास शुरू हो जाएगा।

    खरमास की अवधि में विवाह गृह प्रवेश मुंडन और नए व्यापार जैसी मांगलिक गतिविधियों पर रोक रहती है। पंडित चौबे बताते हैं कि इस समय पूजा पाठ दान और तप अत्यंत शुभ और फलदायी माने जाते हैं। सूर्य जब गुरु की राशियों धनु या मीन में होते हैं तो उनका तेज और प्रभाव विवाह जैसे भौतिक सुखों वाले कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता।

    विवाह के लिए शुक्र और गुरु ग्रह का उदय और शुभ स्थिति जरूरी है। गुरु को कन्या की कुंडली में पति का कारक और शुक्र को वर की कुंडली में पत्नी और दाम्पत्य सुख का प्रतीक माना जाता है। यदि ये ग्रह अस्त हों तो विवाह संपन्न नहीं किया जाता। इस वर्ष 28 फरवरी को शुक्र के मीन राशि में प्रवेश के बाद स्थिति में सकारात्मक परिवर्तन आया है।

    विवाह के लिए शुभ नक्षत्र जैसे रोहिणी मृगशिरा और रेवती शुभ तिथि और अनुकूल लग्न का संयोग होना आवश्यक है। रविवार सोमवार बुधवार गुरुवार और शुक्रवार को विशेष रूप से विवाह के लिए अनुकूल दिन माने जाते हैं।

    खरमास की समाप्ति 14 अप्रैल 2026 को होगी जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश कर मेष संक्रांति मनाएंगे। इसके तुरंत बाद विवाह जैसे मांगलिक कार्य फिर से शुरू किए जा सकते हैं। मिथिला पंचांग के अनुसार अप्रैल में 17 20 26 और 30 तारीखें और बनारसी पंचांग के अनुसार 15 16 20 21 25–30 अप्रैल की तिथियां विवाह के लिए अति शुभ हैं। मई माह में मिथिला पंचांग के अनुसार 1 6 8 10 और 13 मई और बनारसी पंचांग के अनुसार 1–8 12 और 13 मई को विवाह के विशेष योग बन रहे हैं।

    ग्रीष्मकाल में भी शुभ संयोग मिलते हैं। जून में 19 24–26 28 और 29 जून और जुलाई में 1 2 3 6 9 12 मिथिला पंचांग और 1 2 6–8 11 12 बनारसी पंचांग को विवाह के लिए अनुकूल मुहूर्त हैं। इसके बाद देवशयनी एकादशी के आसपास से पुनः मांगलिक कार्यों पर विराम रहेगा।

    पंडित चौबे कहते हैं कि जातकों को अपनी कुंडली के अनुसार स्थानीय विद्वान से सलाह लेकर ही लग्न तय करना चाहिए ताकि ग्रहों का पूर्ण आशीर्वाद प्राप्त हो। इस प्रकार 15 मार्च से 14 अप्रैल 2026 तक खरमास रहेगा और इसके बाद अप्रैल मई के बीच विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों के लिए कई श्रेष्ठ मुहूर्त उपलब्ध हैं।

  • अमेरिका-ईरान युद्ध का असर, कच्चे तेल की कीमतें $100 पार, पेट्रोल-डीजल महंगे होने की आशंका

    अमेरिका-ईरान युद्ध का असर, कच्चे तेल की कीमतें $100 पार, पेट्रोल-डीजल महंगे होने की आशंका

    नई दिल्ली। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष ने अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में भूचाल ला दिया है। सोमवार को कारोबारी सप्ताह की शुरुआत में ही कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के स्तर को पार कर गईं। इस उछाल ने ग्लोबल इकोनॉमी में चिंता बढ़ा दी है और आने वाले दिनों में आम आदमी की रसोई और ईंधन पर असर होने की संभावना जताई जा रही है।

    एक दिन में 17% की भारी तेजी

    सोमवार को अमेरिकी बेंचमार्क (WTI) क्रूड की कीमत $15.66 की वृद्धि के साथ $106.56 प्रति बैरल पर पहुंच गई। यानी एक ही दिन में लगभग 17.23% का उछाल देखा गया। वहीं, ब्रेंट क्रूड की कीमत $14.23 बढ़कर $106.92 प्रति बैरल हो गई। शुक्रवार तक तेल बाजार $90 के आसपास स्थिर था, लेकिन वीकेंड में बिगड़े हालात ने बाजार का समीकरण बदल दिया।

    10 दिन से जारी है अमेरिका-ईरान संघर्ष

    कच्चे तेल की कीमतों में यह उछाल पिछले 10 दिनों से अमेरिका और ईरान-इजरायल के बीच जारी संघर्ष की वजह से आया है। अमेरिका और इजरायल के हमलों में ईरान के सैन्य और ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिसमें प्रमुख ईंधन डिपो भी शामिल थे। इसके जवाब में ईरान ने भी आक्रामक हमले किए। खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी और इजरायली ठिकानों पर ईरान की कार्रवाई ने सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ा दिया।

    ईरान की चेतावनी

    ईरान के संसदीय अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने चेतावनी दी है कि संघर्ष जारी रहा तो देश के तेल क्षेत्र पर विनाशकारी प्रभाव पड़ सकता है। उनका कहना है कि इस स्थिति में ईरान न तो तेल उत्पादन कर पाएगा और न ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचना संभव होगा। इस बयान से वैश्विक सप्लाई चेन में जोखिम बढ़ गया है।

    कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी की आशंका

    विशेषज्ञों की चिंता स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर है। यह वह संकरा समुद्री मार्ग है जिससे दुनिया के कुल कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ईरान ने फिलहाल इसे बंद नहीं किया है, लेकिन चेतावनी दी है कि संघर्ष बढ़ा तो अमेरिका और इजरायल से जुड़े व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया जा सकता है। यदि मार्ग अवरुद्ध होता है, तो तेल की कीमतों में और उछाल संभव है।

    अमेरिका की प्रतिक्रिया

    अमेरिका ने कहा है कि यह संकट लंबे समय तक नहीं रहेगा। अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट के अनुसार, मौजूदा उछाल केवल मार्केट का डर है और कुछ हफ्तों तक ही बने रहने की संभावना है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने भी कहा कि ईरान के खिलाफ कार्रवाई भविष्य में तेल उद्योग के लिए फायदेमंद होगी।

    ट्रंप का बयान

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि संघर्ष के कारण तेल की कीमतें बढ़ी हैं, लेकिन इसे सुरक्षा की कीमत मानना चाहिए। उनका मानना है कि जैसे ही ईरान का परमाणु खतरा समाप्त होगा, तेल की कीमतें तेजी से नीचे आएंगी। इस उछाल के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की अस्थिरता बनी हुई है, और आने वाले हफ्तों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी असर देखने को मिल सकता है।

  • रोज सुबह पीएं मेथी का पानी: कोलेस्ट्रॉल घटाए, वजन नियंत्रित करे और मेटाबॉलिज्म बढ़ाए

    रोज सुबह पीएं मेथी का पानी: कोलेस्ट्रॉल घटाए, वजन नियंत्रित करे और मेटाबॉलिज्म बढ़ाए


    नई दिल्ली । आयुर्वेद में मेथी को औषधीय गुणों से भरपूर माना गया है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और गलत खान-पान के कारण कोलेस्ट्रॉल की समस्या तेजी से बढ़ रही है। जब खून में कोलेस्ट्रॉल नॉर्मल से ज्यादा हो जाता है तो यह नसों में जमा होकर ब्लॉकेज और दिल पर अतिरिक्त दबाव का कारण बनता है।

    यूपी के अलीगढ़ आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. पीयूष माहेश्वरी के अनुसार मेथी के दानों में फाइबर और स्टेरोइडल सैपोनिन्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। सुबह खाली पेट मेथी का पानी पीने से खून में मौजूद बैड कोलेस्ट्रॉल धीरे-धीरे कम होता है। यह नसों की दीवारों पर जमा फैट को पिघलाकर शरीर से बाहर निकालता है जिससे ब्लड फ्लो बेहतर होता है और दिल पर पड़ने वाला दबाव कम होता है।

    इसका सेवन आसान है। रात को एक गिलास पानी में एक चम्मच मेथी दाना भिगो दें। सुबह दाने चबाकर खाएं और पानी पी लें। इस सरल उपाय से नसों में जमा कोलेस्ट्रॉल कम होने लगता है और दिल की सेहत बेहतर रहती है।

    डॉ. माहेश्वरी बताते हैं कि डायबिटीज के मरीजों के लिए मेथी का पानी वरदान है। इसमें मौजूद घुलनशील फाइबर ब्लड में शुगर के अवशोषण की गति धीमी करता है और इंसुलिन के उत्पादन में मदद करता है। नियमित सेवन से फास्टिंग शुगर लेवल नियंत्रित रहता है और मेटाबॉलिक रेट बढ़ता है।

    पाचन के लिए भी मेथी का पानी लाभकारी है। यह गैस एसिडिटी और कब्ज जैसी समस्याओं में राहत देता है आंतों को साफ़ करता है और शरीर से टॉक्सिन्स निकालता है। मेटाबॉलिज्म को तेज करके यह अतिरिक्त चर्बी को बर्न करने में मदद करता है। पेट लंबे समय तक भरा महसूस होने से ओवरईटिंग और अनावश्यक कैलोरी का सेवन भी कम होता है।

    मेथी की तासीर गर्म होती है जो वात दोष को संतुलित करती है। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो जोड़ों और हड्डियों की सूजन कम करने में मदद करते हैं। आयुर्वेद में इसे हार्ट डायबिटीज पाचन और वजन कंट्रोल के लिए शक्तिशाली औषधि माना गया है।

    रोज सुबह खाली पेट मेथी का पानी पीने से नसों में जमा गंदे कोलेस्ट्रॉल कम होता है ब्लड फ्लो बेहतर होता है मेटाबॉलिज्म बूस्ट होता है वजन नियंत्रित रहता है और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। यह दिल पाचन और संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए एक सरल लेकिन असरदार आयुर्वेदिक उपाय है।

  • टी20 वर्ल्ड कप जीत पर धोनी का खास मैसेज, गौतम गंभीर और टीम इंडिया को दी बधाई, पोस्ट हुई वायरल

    टी20 वर्ल्ड कप जीत पर धोनी का खास मैसेज, गौतम गंभीर और टीम इंडिया को दी बधाई, पोस्ट हुई वायरल


    नई दिल्ली। आईसीसी मेन्स टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत की शानदार जीत के बाद मैदान के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी एक खास पल चर्चा में आ गया। अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में न्यूजीलैंड को 96 रन से हराकर भारत ने तीसरी बार टी20 विश्व कप का खिताब अपने नाम किया। जीत के तुरंत बाद पूर्व कप्तान एमएस धोनी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर टीम को बधाई दी, जो तेजी से वायरल हो गई।

    फाइनल मैच के दौरान धोनी वीवीआईपी बॉक्स में मौजूद थे। उनके साथ भारतीय कप्तान रोहित शर्मा और बीसीसीआई सचिव जय शाह भी नजर आए। मैच खत्म होने के बाद धोनी ने इंस्टाग्राम पर टीम की उपलब्धि की सराहना करते हुए खास तौर पर मुख्य कोच गौतम गंभीर की तारीफ की।

    धोनी का संदेश बना चर्चा का विषय

    धोनी ने अपनी पोस्ट में लिखा, “कोच साहब, आप पर मुस्कान बहुत अच्छी लगती है।” इसके साथ ही उन्होंने टीम के शानदार प्रदर्शन और पिछले कुछ समय में हुए बदलावों की भी सराहना की। उन्होंने लिखा कि अहमदाबाद में इतिहास रचा गया है और यह जीत पूरे देश के लिए गर्व का पल है। धोनी ने टीम, सपोर्ट स्टाफ और दुनियाभर में मौजूद भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों को बधाई देते हुए कहा कि सभी को खेलते देखना बेहद खुशी की बात रही। धोनी का “कोच साहब” वाला संबोधन सीधे गौतम गंभीर के लिए था। गंभीर अपनी सख्त और गंभीर छवि के लिए जाने जाते हैं, इसलिए जीत के बाद उनकी मुस्कान को लेकर धोनी की टिप्पणी सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में रही।



    बुमराह की भी जमकर तारीफ

    धोनी ने अपनी पोस्ट में तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह की भी तारीफ की। उन्होंने मजाकिया अंदाज में लिखा, “बुमराह के बारे में अगर कुछ न लिखूं तो ही बेहतर है… चैंपियन गेंदबाज।” दरअसल फाइनल मुकाबले में बुमराह ने शानदार गेंदबाजी करते हुए 15 रन देकर 4 विकेट लिए और न्यूजीलैंड की बल्लेबाजी को बड़ा झटका दिया।

    भारत ने 96 रन से जीता फाइनल

    फाइनल में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 255 रन का बड़ा स्कोर खड़ा किया। इसके जवाब में 256 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी न्यूजीलैंड की टीम शुरुआत से ही दबाव में रही और 19 ओवर में 159 रन पर सिमट गई। इस तरह भारत ने 96 रन की बड़ी जीत के साथ टी20 वर्ल्ड कप 2026 का खिताब अपने नाम कर लिया।

  • ईरान में मोजतबा खामेनेई बने सुप्रीम लीडर, एक्सपर्ट बोले- अमेरिका से और बढ़ सकता है टकराव

    ईरान में मोजतबा खामेनेई बने सुप्रीम लीडर, एक्सपर्ट बोले- अमेरिका से और बढ़ सकता है टकराव


    नई दिल्ली। ईरान के मौजूदा नेतृत्व ने देश के नए सुप्रीम लीडर के रूप में मोजतबा खामेनेई को नियुक्त कर दिया है। उन्हें अयातुल्ला अली खामेनेई का उत्तराधिकारी बनाया गया है। विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला ईरान के अमेरिका के साथ समझौते की बजाय टकराव की नीति को मजबूत करने का संकेत देता है।

    ईरान में सुप्रीम लीडर देश का सबसे शक्तिशाली पद होता है। विदेश नीति, रक्षा और परमाणु कार्यक्रम जैसे अहम फैसलों पर अंतिम अधिकार उसी के पास होता है। साथ ही वह राष्ट्रपति और संसद के कामकाज को भी दिशा देता है। यानी कई मामलों में सुप्रीम लीडर की ताकत राष्ट्रपति से भी अधिक मानी जाती है।

    ट्रंप के लिए झटका माना जा रहा फैसला

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए भी झटका माना जा सकता है। ट्रंप ने पहले मोजतबा को कमजोर नेता बताते हुए उनकी संभावित नियुक्ति को खारिज किया था और यह भी संकेत दिए थे कि नए सुप्रीम लीडर के चयन में उनकी राय अहम होनी चाहिए।

    गौरतलब है कि युद्ध के शुरुआती दौर में अमेरिका और इजरायल के हमलों के दौरान अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी। इसके बाद मोजतबा को उनका उत्तराधिकारी बनाया गया है। इस कदम को तेहरान में कट्टरपंथी ताकतों के प्रभाव को मजबूत करने वाला माना जा रहा है।

    अमेरिका के लिए ‘बेइज्जती’ जैसा कदम

    मिडिल ईस्ट इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ फेलो एलेक्स वटांका के मुताबिक इतने बड़े सैन्य अभियान के बाद भी अगर 86 वर्षीय नेता की जगह उसके और ज्यादा कट्टरपंथी बेटे को सत्ता मिल जाए तो यह अमेरिका के लिए बड़ी असहज स्थिति है।

    विश्लेषकों का कहना है कि मोजतबा का चयन एक स्पष्ट संदेश देता है कि ईरान फिलहाल समझौते की राह नहीं, बल्कि सख्त रुख और जवाबी कार्रवाई की नीति अपनाने की तैयारी में है।

    रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, मिडिल ईस्ट इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ फेलो पॉल सलेम ने कहा कि मोजतबा के नेतृत्व में ईरान के लिए आने वाले दिन कठिन हो सकते हैं। उनका मानना है कि मोजतबा ऐसे नेता नहीं हैं जो अमेरिका के साथ समझौता करने या अपनी रणनीति बदलने के लिए तैयार हों।

    पिता से भी ज्यादा कट्टर बताए जाते हैं मोजतबा

    पूर्व अमेरिकी राजनयिक और ईरान विशेषज्ञ एलन आयर के मुताबिक मोजतबा खामेनेई को उनके पिता से भी ज्यादा सख्त और कट्टर माना जाता है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) भी उन्हें पसंदीदा उम्मीदवार मानती रही है।

    56 वर्षीय मोजतबा खामेनेई ने शिया इस्लाम की शिक्षा ईरान के कोम स्थित धार्मिक मदरसों में प्राप्त की है। उन्हें ‘हुज्जतुल इस्लाम’ की उपाधि मिली हुई है, जो शिया धर्म में एक महत्वपूर्ण धार्मिक दर्जा माना जाता है।

    अमेरिका ने 2019 में मोजतबा खामेनेई पर प्रतिबंध भी लगाया था। अमेरिकी वित्त मंत्रालय का आरोप था कि किसी आधिकारिक सरकारी पद पर न होने के बावजूद वे अपने पिता के प्रतिनिधि की तरह काम करते हुए सत्ता के फैसलों पर प्रभाव डालते रहे हैं।

    आर्थिक संकट और सख्त नीतियों की चुनौती

    ईरान पहले से ही कमजोर अर्थव्यवस्था, बढ़ती महंगाई, गिरती मुद्रा और बढ़ती गरीबी जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। इसके साथ ही सरकार की कड़ी नीतियों के कारण जनता में असंतोष और विरोध प्रदर्शन भी बढ़े हैं।ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि मोजतबा के सामने देश की आंतरिक चुनौतियों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय दबाव से निपटना भी बड़ी चुनौती होगी। कई विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा हालात में उनके पास सख्त रुख अपनाने के अलावा ज्यादा विकल्प नहीं हैं, चाहे युद्ध समाप्त ही क्यों न हो जाए।