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  • सरदार सरोवर वन टाइम सेटलमेंट बना सियासी मुद्दा क्या मध्य प्रदेश ने घाटे का सौदा किया या बचाए 1268 करोड़

    सरदार सरोवर वन टाइम सेटलमेंट बना सियासी मुद्दा क्या मध्य प्रदेश ने घाटे का सौदा किया या बचाए 1268 करोड़


    मध्य प्रदेश। करीब तीन दशक से लंबित सरदार सरोवर डैम विवाद पर आखिरकार वन टाइम सेटलमेंट हो गया लेकिन इस समझौते ने मध्य प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। जिस राज्य ने अपनी हजारों हेक्टेयर जमीन डूबने और सैकड़ों गांवों के विस्थापन के बदले गुजरात से 7669 करोड़ रुपए का मुआवजा मांगा था उसे अब यह दावा पूरी तरह छोड़ना पड़ा है। इतना ही नहीं राज्य सरकार को गुजरात को 231 करोड़ 80 लाख रुपए का भुगतान भी करना होगा। यही वजह है कि इस समझौते को लेकर सरकार और विपक्ष आमने सामने हैं।

    सरदार सरोवर परियोजना नर्मदा नदी पर गुजरात में बनाई गई थी लेकिन इसके बैकवाटर का सबसे बड़ा असर मध्य प्रदेश पर पड़ा। डैम की ऊंचाई बढ़ने के बाद प्रदेश के 192 गांव और करीब 21 हजार हेक्टेयर भूमि स्थायी रूप से डूब क्षेत्र में आ गई। इसके बाद नए भूमि अधिग्रहण कानून के आधार पर मध्य प्रदेश ने गुजरात से 7669 करोड़ रुपए के मुआवजे की मांग की थी। दूसरी ओर गुजरात पुराने दावों के आधार पर सीमित भुगतान की बात करता रहा और निर्माण लागत में मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी का मुद्दा उठाता रहा। इसी विवाद के कारण मामला वर्षों तक अटका रहा।

    दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की मौजूदगी में चार राज्यों के बीच हुए समझौते में पुरानी फाइल को हमेशा के लिए बंद करने पर सहमति बनी। इसके तहत मध्य प्रदेश ने अपना पूरा मुआवजा दावा वापस ले लिया जबकि गुजरात की ओर से निर्माण लागत में प्रदेश की करीब 1500 करोड़ रुपए की संभावित देनदारी घटाकर केवल 231.80 करोड़ रुपए तय कर दी गई।

    यही फैसला अब राजनीतिक विवाद का कारण बन गया है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार ने प्रदेश के किसानों आदिवासियों और विस्थापित परिवारों के हितों से समझौता किया है। विपक्ष का कहना है कि हजारों करोड़ रुपए के दावे को छोड़ना प्रदेश के अधिकारों का नुकसान है और सरकार को इस पूरे समझौते पर श्वेत पत्र जारी करना चाहिए।

    वहीं मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और सरकार इस समझौते को प्रदेश के हित में लिया गया व्यावहारिक फैसला बता रहे हैं। उनका कहना है कि गुजरात किसी भी स्थिति में 7669 करोड़ रुपए देने को तैयार नहीं था। ऐसे में लंबे कानूनी विवाद को समाप्त करते हुए राज्य ने 1500 करोड़ रुपए की संभावित देनदारी को घटाकर केवल 231.80 करोड़ रुपए में निपटा लिया जिससे सरकारी खजाने पर बड़ा वित्तीय बोझ टल गया।

    सरकार यह भी तर्क दे रही है कि सरदार सरोवर परियोजना से मध्य प्रदेश को दीर्घकालिक लाभ लगातार मिल रहे हैं। परियोजना से बनने वाली जल विद्युत का सबसे बड़ा हिस्सा प्रदेश को मिलता है। साथ ही लाखों हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई और कई बड़े शहरों की पेयजल आपूर्ति भी इसी परियोजना पर निर्भर है। इसलिए सरकार इस समझौते को भविष्य के हितों और व्यावहारिक समाधान के रूप में देख रही है।

    हालांकि सबसे बड़ा सवाल अब उन विस्थापित परिवारों को लेकर है जिनके पुनर्वास और मुआवजे की जिम्मेदारी अब पूरी तरह मध्य प्रदेश सरकार पर आ गई है। चूंकि गुजरात से कोई मुआवजा राशि नहीं मिलेगी इसलिए राज्य सरकार को ही अपने संसाधनों से प्रभावित लोगों के पुनर्वास और भुगतान की व्यवस्था करनी होगी। ऐसे में यह समझौता कानूनी विवाद का अंत जरूर है लेकिन इसके आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव आने वाले समय में भी चर्चा का विषय बने रहेंगे।

  • 40 साल बाद भारतीय प्रधानमंत्री का ऐतिहासिक न्यूजीलैंड दौरा, पीएम मोदी और क्रिस्टोफर लक्सन की मुलाकात से द्विपक्षीय संबंधों को मिली नई रफ्तार

    40 साल बाद भारतीय प्रधानमंत्री का ऐतिहासिक न्यूजीलैंड दौरा, पीएम मोदी और क्रिस्टोफर लक्सन की मुलाकात से द्विपक्षीय संबंधों को मिली नई रफ्तार


    नई दिल्ली ।
    चार दशक से अधिक समय बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की न्यूजीलैंड यात्रा ने दोनों देशों के संबंधों को नई ऊर्जा देने का अवसर प्रदान किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय राजकीय दौरे पर न्यूजीलैंड पहुंचे, जहां उनका प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने गर्मजोशी से स्वागत किया। यह यात्रा केवल औपचारिक कूटनीतिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे भारत और न्यूजीलैंड के बीच राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को नए स्तर पर ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    ऑकलैंड पहुंचने पर दोनों नेताओं की मुलाकात की तस्वीरें और वीडियो व्यापक रूप से चर्चा में रहे। स्वागत के दौरान दोनों नेताओं ने आत्मीयता के साथ एक-दूसरे का अभिवादन किया, जिससे दोनों देशों के मजबूत होते संबंधों का स्पष्ट संदेश भी गया। इस अवसर पर न्यूजीलैंड के शीर्ष नेतृत्व ने भारत के साथ दीर्घकालिक सहयोग को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।

    प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए स्वागत संदेश पर दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने भी भारत और न्यूजीलैंड की मित्रता तथा प्रगति के लिए शुभकामनाएं व्यक्त कीं। राष्ट्रपति के इस संदेश का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी जवाब दिया और कहा कि मित्र देशों की ओर से मिलने वाले ऐसे विचारपूर्ण संदेश हमेशा विशेष महत्व रखते हैं। इस संवाद को क्षेत्रीय सहयोग और आपसी विश्वास का सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

    प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब भारत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपने सहयोगी देशों के साथ संबंधों को लगातार मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रहा है। भारत की एक्ट ईस्ट नीति और समुद्री क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की रणनीति के तहत न्यूजीलैंड का महत्व लगातार बढ़ा है। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, शिक्षा, कृषि, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और रक्षा सहयोग जैसे क्षेत्रों में साझेदारी का दायरा बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा।

    दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को नई गति देने के लिए विभिन्न संभावनाओं पर विचार होने की उम्मीद है। निवेश बढ़ाने, आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने, नवाचार, डिजिटल अर्थव्यवस्था और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा प्रस्तावित है। इसके अलावा क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री सहयोग और मुक्त तथा समावेशी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के साझा दृष्टिकोण पर भी दोनों नेताओं के बीच विस्तृत बातचीत होने की संभावना है।

    प्रधानमंत्री मोदी अपने प्रवास के दौरान न्यूजीलैंड के उद्योग जगत, व्यापारिक समुदाय और खेल क्षेत्र के प्रमुख प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे। साथ ही वहां रहने वाले भारतीय समुदाय को संबोधित कर भारत और प्रवासी भारतीयों के बीच संबंधों को और मजबूत करने का संदेश देंगे। न्यूजीलैंड में भारतीय मूल के लोगों की बढ़ती भागीदारी दोनों देशों के सामाजिक और आर्थिक रिश्तों का महत्वपूर्ण आधार मानी जाती है।

    न्यूजीलैंड प्रधानमंत्री मोदी की तीन देशों की विदेश यात्रा का अंतिम पड़ाव है। इससे पहले वह इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया का दौरा कर चुके हैं। लगातार तीन महत्वपूर्ण देशों की इस यात्रा को भारत की सक्रिय विदेश नीति और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ती भूमिका के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस ऐतिहासिक यात्रा से भारत और न्यूजीलैंड के बीच सहयोग के नए अवसर खुलेंगे तथा दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी आने वाले वर्षों में और अधिक मजबूत होगी।

  • आईएनएस महेंद्रगिरी से बढ़ी भारत की समुद्री ताकत, राजनाथ सिंह बोले- आधुनिक तकनीक और पारंपरिक सैन्य क्षमता का संतुलन ही भविष्य की जीत तय करेगा

    आईएनएस महेंद्रगिरी से बढ़ी भारत की समुद्री ताकत, राजनाथ सिंह बोले- आधुनिक तकनीक और पारंपरिक सैन्य क्षमता का संतुलन ही भविष्य की जीत तय करेगा

    नई दिल्ली । भारतीय नौसेना के युद्धक बेड़े में स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट आईएनएस महेंद्रगिरी के शामिल होने के साथ भारत की समुद्री सुरक्षा क्षमता को एक महत्वपूर्ण मजबूती मिली है। इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत अब केवल समुद्र के माध्यम से अपनी रणनीतिक दिशा तय करने वाला देश नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में समुद्री क्षेत्र की दिशा निर्धारित करने की क्षमता भी विकसित कर रहा है। उन्होंने इसे भारत की बढ़ती सामरिक शक्ति, आत्मनिर्भर रक्षा निर्माण और वैश्विक समुद्री उपस्थिति का महत्वपूर्ण प्रतीक बताया।

    विशाखापट्टनम में आयोजित कमीशनिंग समारोह को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि आईएनएस महेंद्रगिरी एक आधुनिक ब्लू-वाटर स्टील्थ फ्रिगेट है, जो तटीय क्षेत्रों तक सीमित न रहकर गहरे समुद्री क्षेत्रों में लंबे समय तक अभियान संचालित करने में सक्षम है। यह युद्धपोत समुद्री सीमाओं की सुरक्षा, रणनीतिक निगरानी और राष्ट्रीय हितों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना लगातार आधुनिक तकनीक और स्वदेशी रक्षा प्रणालियों के जरिए अपनी परिचालन क्षमता का विस्तार कर रही है।

    आईएनएस महेंद्रगिरी प्रोजेक्ट 17ए के तहत निर्मित छठा और अंतिम स्टील्थ फ्रिगेट है। यह परियोजना भारत के स्वदेशी युद्धपोत निर्माण कार्यक्रम की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल है। युद्धपोत को आधुनिक हथियार प्रणालियों, लंबी दूरी की मिसाइल क्षमता, अत्याधुनिक रडार, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, पनडुब्बी रोधी हथियारों और उन्नत रक्षा उपकरणों से लैस किया गया है। इसके कारण यह समुद्र, आकाश और पानी के भीतर मौजूद संभावित खतरों का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने में सक्षम माना जाता है।

    रक्षा मंत्री ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में युद्ध का स्वरूप लगातार बदल रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ड्रोन और अन्य अत्याधुनिक तकनीकों का महत्व तेजी से बढ़ा है, लेकिन पारंपरिक सैन्य शक्ति की आवश्यकता आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण बनी हुई है। उन्होंने कहा कि भविष्य के संघर्षों में आधुनिक तकनीक निर्णायक भूमिका निभाएगी, लेकिन किसी भी राष्ट्र की वास्तविक ताकत उसके प्रशिक्षित सैनिकों, मजबूत सैन्य ढांचे और विश्वसनीय रक्षा क्षमता से ही तय होगी।

    उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत भविष्य की तकनीकों में निवेश के साथ-साथ अपनी पारंपरिक सैन्य क्षमताओं को भी लगातार मजबूत बना रहा है। उनके अनुसार आधुनिक तकनीक और पारंपरिक सैन्य प्लेटफॉर्म एक-दूसरे के विकल्प नहीं बल्कि पूरक हैं। इतिहास यह प्रमाणित करता है कि जिन देशों ने नई तकनीकों के आकर्षण में अपनी पारंपरिक सैन्य शक्ति की उपेक्षा की, उन्हें गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इसलिए संतुलित रक्षा रणनीति ही राष्ट्रीय सुरक्षा का सबसे प्रभावी आधार बन सकती है।

    रक्षा मंत्री ने हाल के सुरक्षा अभियानों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों ने समय-समय पर यह साबित किया है कि देश की आधुनिक और पारंपरिक दोनों प्रकार की सैन्य क्षमताएं मिलकर प्रभावी परिणाम देने में सक्षम हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारतीय नौसेना आने वाले वर्षों में हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने में और अधिक प्रभावशाली भूमिका निभाएगी। आईएनएस महेंद्रगिरी का नौसेना में शामिल होना आत्मनिर्भर भारत अभियान, स्वदेशी रक्षा उत्पादन और समुद्री रणनीतिक क्षमता को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। भारत लगातार अपने रक्षा ढांचे को आधुनिक बनाते हुए ऐसी सैन्य क्षमताओं का विकास कर रहा है जो राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ वैश्विक समुद्री संतुलन में भी उसकी भूमिका को और अधिक सशक्त बनाएंगी।

  • मध्य प्रदेश के युवाओं का महाकुंभ इंदौर में आज जुटेंगे 5 हजार युवा मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव देंगे विकास का मंत्र

    मध्य प्रदेश के युवाओं का महाकुंभ इंदौर में आज जुटेंगे 5 हजार युवा मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव देंगे विकास का मंत्र


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश के युवाओं की ऊर्जा, नवाचार और नेतृत्व क्षमता को नई दिशा देने के उद्देश्य से 11 जुलाई को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में माय यूथ माय प्राइड कॉन्क्लेव-2026 का आयोजन किया जा रहा है। वन स्टेट वन जनरेशन वन संकल्प थीम पर आधारित इस कॉन्क्लेव में प्रदेश के विभिन्न जिलों से लगभग पांच हजार युवा शामिल होंगे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव विशेष रूप से उपस्थित रहकर युवाओं को संबोधित करेंगे और विकसित, आत्मनिर्भर तथा समृद्ध मध्य प्रदेश के निर्माण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करेंगे।

    सुबह 10 बजे से शुरू होने वाले इस कॉन्क्लेव में युवाओं को प्रदेश के विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने विचार और सुझाव रखने का अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री दोपहर 12 बजे कार्यक्रम में पहुंचकर युवाओं से संवाद करेंगे और उन्हें प्रदेश की विकास यात्रा में सहभागी बनने का संदेश देंगे। आयोजन का उद्देश्य युवाओं को केवल प्रेरित करना नहीं, बल्कि उन्हें विकास के वास्तविक एजेंडा से जोड़ना है।

    कॉन्क्लेव में शिक्षा, कौशल विकास, खेल, स्टार्टअप, एमएसएमई, कृषि, स्वास्थ्य, पर्यावरण, संस्कृति, पर्यटन और जनभागीदारी जैसे प्रमुख क्षेत्रों से जुड़े युवा भाग लेंगे। विभिन्न संवाद सत्रों और कार्यशालाओं के माध्यम से प्रतिभागी अपने क्षेत्रों की चुनौतियों, संभावनाओं और समाधान पर चर्चा करेंगे। इससे युवाओं को नीति निर्माण और विकास योजनाओं में अपनी भूमिका समझने का अवसर मिलेगा।

    कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता पांच समानांतर विषयगत कार्यशालाएं होंगी। इन कार्यशालाओं में युवा समूहों में बैठकर व्यवहारिक और क्रियान्वयन योग्य सुझाव तैयार करेंगे। इन सुझावों को संकलित कर प्रदेश के युवाओं का सामूहिक युवा संकल्प तैयार किया जाएगा, जो मध्य प्रदेश के भविष्य के विकास का विजन प्रस्तुत करेगा। आयोजकों के अनुसार यह संकल्प केवल एक औपचारिक दस्तावेज नहीं होगा, बल्कि युवाओं की आकांक्षाओं और जिम्मेदारियों का साझा घोषणापत्र बनेगा।

    कॉन्क्लेव को युवाओं के लिए आकर्षक और प्रेरक बनाने के लिए कई विशेष गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी। इसमें मोटर साइकिल और साइकिल रैली, प्रेरणादायी उद्बोधन, युवा उपलब्धि सम्मान, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, संवादात्मक सत्र, म्यूजिक स्टेज, इंदौरी फूड स्ट्रीट और सामूहिक युवा संकल्प कार्यक्रम शामिल हैं। इन गतिविधियों का उद्देश्य युवाओं में उत्साह, रचनात्मकता और सहभागिता की भावना को बढ़ाना है।

    कार्यक्रम के अंत में पांच हजार युवा एक साथ विकसित मध्य प्रदेश के निर्माण का संकल्प लेंगे। आयोजकों का मानना है कि यह कॉन्क्लेव प्रदेश के युवाओं को एक साझा मंच प्रदान करेगा जहां वे अपने विचार, ऊर्जा और सपनों को राज्य के विकास से जोड़ सकेंगे। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की उपस्थिति इस आयोजन को और अधिक महत्वपूर्ण बना रही है क्योंकि उनके मार्गदर्शन में युवाओं को प्रदेश की विकास यात्रा में सक्रिय भूमिका निभाने का संदेश मिलेगा।

    इंदौर में आयोजित होने वाला यह कॉन्क्लेव केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश के युवाओं की सामूहिक शक्ति, संकल्प और भविष्य की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण आयोजन माना जा रहा है।

  • ऑनलाइन बुकिंग, बाहरी राज्यों और विदेशी युवतियों का इस्तेमाल, नागपुर में संगठित देह व्यापार गिरोह पर पुलिस का शिकंजा, कई गिरफ्तार

    ऑनलाइन बुकिंग, बाहरी राज्यों और विदेशी युवतियों का इस्तेमाल, नागपुर में संगठित देह व्यापार गिरोह पर पुलिस का शिकंजा, कई गिरफ्तार

    नई दिल्ली ।महाराष्ट्र के नागपुर शहर में पुलिस ने एक संगठित देह व्यापार गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए ऐसे नेटवर्क का खुलासा किया है, जो कथित तौर पर मोबाइल ऐप और ऑनलाइन माध्यमों के जरिए ग्राहकों तक पहुंच बना रहा था। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क में विदेशी नागरिकों के साथ-साथ देश के विभिन्न राज्यों की युवतियों को भी शामिल किया गया था। पुलिस की कार्रवाई के दौरान कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि कई महिलाओं को सुरक्षित निकालकर संरक्षण में लिया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अब पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने और इसके संचालन से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने में जुटी है।

    बताया जा रहा है कि पुलिस को लंबे समय से संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिल रही थी। इसके बाद विशेष निगरानी और गोपनीय सूचना के आधार पर अंबाझरी थाना क्षेत्र में कार्रवाई की गई। जांच के दौरान यह सामने आया कि ग्राहकों से संपर्क और बुकिंग की प्रक्रिया मोबाइल एप्लीकेशन तथा डिजिटल माध्यमों के जरिए संचालित की जा रही थी। कथित तौर पर ग्राहकों को अलग-अलग स्थानों पर भेजने और पूरी व्यवस्था को ऑनलाइन समन्वित किया जाता था, जिससे अवैध गतिविधियों को छिपाने का प्रयास किया जा रहा था।

    प्रारंभिक पूछताछ में यह भी सामने आया कि इस गिरोह में उज़्बेकिस्तान की कुछ महिलाओं के अलावा दिल्ली, पंजाब और अन्य क्षेत्रों से आई युवतियों का भी इस्तेमाल किया जा रहा था। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान कई महिलाओं को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थान पर भेजा है। संबंधित विभागों की मदद से उनकी पहचान, दस्तावेजों और परिस्थितियों की जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं उन्हें किसी प्रकार के दबाव, धोखे या मानव तस्करी के माध्यम से इस नेटवर्क में तो नहीं लाया गया।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इस नेटवर्क का संचालन कितने समय से हो रहा था, इसमें कितने लोग शामिल थे और इसका विस्तार किन-किन शहरों तक फैला हुआ था। डिजिटल उपकरणों, मोबाइल फोन, चैट रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है, जिससे पूरे गिरोह की कार्यप्रणाली और आर्थिक नेटवर्क का पता लगाया जा सके।

    इस मामले ने एक बार फिर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और डिजिटल तकनीक के दुरुपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल जहां सुविधाएं बढ़ाने के लिए किया जा रहा है, वहीं कुछ संगठित गिरोह इसका उपयोग अवैध गतिविधियों को छिपाने और संचालित करने के लिए भी कर रहे हैं। ऐसे मामलों में तकनीकी निगरानी, साइबर विश्लेषण और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता लगातार बढ़ती जा रही है।

    पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच अभी जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे भी कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में अन्य लोगों या किसी बड़े नेटवर्क की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानून के अनुसार सख्त कदम उठाए जाएंगे। अधिकारियों ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि यदि उन्हें इस तरह की किसी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिले तो तुरंत पुलिस को सूचित करें, ताकि मानव तस्करी और संगठित अपराध जैसे मामलों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके।

  • ओडिशा में एटीएम चोरी का हैरान करने वाला तरीका, थार से मशीन उखाड़ ले गए बदमाश, CCTV में कैद हुई पूरी वारदात से पुलिस अलर्ट

    ओडिशा में एटीएम चोरी का हैरान करने वाला तरीका, थार से मशीन उखाड़ ले गए बदमाश, CCTV में कैद हुई पूरी वारदात से पुलिस अलर्ट

    नई दिल्ली । ओडिशा के बालासोर जिले में एटीएम चोरी की एक अनोखी और सुनियोजित वारदात सामने आई है, जिसने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शनिवार तड़के कुछ बदमाश एक काले रंग की महिंद्रा थार में सवार होकर एक एटीएम कियोस्क के बाहर पहुंचे और बेहद कम समय में पूरी मशीन को उखाड़कर अपने साथ ले गए। घटना का तरीका इतना अलग था कि आसपास के लोगों के साथ-साथ पुलिस भी प्रारंभिक जांच में हैरान रह गई।

    बताया जा रहा है कि घटना देर रात करीब दो बजे की है। पांच से अधिक बदमाश पहले एटीएम कियोस्क का दरवाजा तोड़कर अंदर घुसे। इसके बाद उन्होंने मजबूत रस्सी की मदद से पूरी एटीएम मशीन को वाहन से बांध दिया। कुछ ही क्षणों में वाहन की ताकत से मशीन को उसकी जगह से उखाड़ लिया गया और उसे सड़क पर घसीटते हुए वहां से फरार हो गए। पूरी कार्रवाई बेहद तेजी और सुनियोजित तरीके से अंजाम दी गई।

    बदमाश एटीएम मशीन को शहर से दूर एक सुनसान स्थान पर ले गए, जहां मशीन को तोड़कर उसमें रखी नकदी निकाल ली। नकदी लेकर फरार होने से पहले उन्होंने क्षतिग्रस्त एटीएम मशीन को सड़क किनारे छोड़ दिया। बाद में स्थानीय लोगों की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। मशीन की स्थिति देखकर स्पष्ट हुआ कि आरोपियों ने केवल नकदी निकालने के उद्देश्य से पूरी योजना बनाई थी।

    घटना की पूरी वारदात एटीएम कियोस्क में लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हो गई है। फुटेज में कई संदिग्ध दिखाई दे रहे हैं, जो वाहन की मदद से मशीन उखाड़ते और उसे लेकर जाते नजर आते हैं। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज को अपने कब्जे में लेकर आरोपियों की पहचान की प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही आसपास के इलाकों में लगे अन्य कैमरों की रिकॉर्डिंग भी खंगाली जा रही है ताकि बदमाशों के आने और भागने के पूरे रास्ते का पता लगाया जा सके।

    प्रारंभिक जांच में पुलिस को आशंका है कि वारदात को अंजाम देने वाले आरोपी पहले से पूरी तैयारी के साथ पहुंचे थे। उन्होंने एटीएम की लोकेशन, आसपास की गतिविधियों और मौके की परिस्थितियों का पहले से अध्ययन किया होगा। घटना के समय इलाके में लोगों की आवाजाही बेहद कम थी, जिसका फायदा उठाकर बदमाश बिना किसी विरोध के अपनी योजना को सफल बनाने में कामयाब रहे।

    पुलिस ने आसपास के जिलों और पड़ोसी क्षेत्रों में भी अलर्ट जारी किया है। संदिग्ध वाहन और आरोपियों की तलाश के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं। फोरेंसिक विशेषज्ञों की सहायता से घटनास्थल से मिले साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है ताकि अपराधियों तक जल्द पहुंचा जा सके। अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान कर जल्द गिरफ्तारी का प्रयास किया जा रहा है।

    यह घटना एक बार फिर एटीएम सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अकेले और कम निगरानी वाले एटीएम केंद्रों पर अतिरिक्त सुरक्षा उपाय, मजबूत अलार्म सिस्टम और रियल टाइम मॉनिटरिंग जैसी व्यवस्थाओं को और सुदृढ़ करने की आवश्यकता है। फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है और उम्मीद जताई जा रही है कि तकनीकी साक्ष्यों की मदद से इस वारदात में शामिल आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

  • मध्य प्रदेश में मानसून का बदला मिजाज फिलहाल रिमझिम बारिश का दौर अगले हफ्ते कई जिलों में फिर भारी बारिश के आसार

    मध्य प्रदेश में मानसून का बदला मिजाज फिलहाल रिमझिम बारिश का दौर अगले हफ्ते कई जिलों में फिर भारी बारिश के आसार


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बीच अब मौसम कुछ राहत देने वाला है। मौसम विभाग के अनुसार अगले तीन दिनों तक प्रदेश में हल्की से मध्यम बारिश का दौर बना रहेगा और कहीं भी अत्यधिक वर्षा की संभावना नहीं है। हालांकि यह राहत ज्यादा लंबी नहीं होगी क्योंकि अगले सप्ताह एक नया मौसम तंत्र सक्रिय होने के साथ ही कई जिलों में फिर से भारी बारिश का दौर शुरू हो सकता है। ऐसे में लोगों को एक बार फिर सतर्क रहने की जरूरत होगी।

    मौसम विभाग के अनुसार फिलहाल सक्रिय मानसूनी सिस्टम कमजोर पड़ रहा है। इसी वजह से ग्यारह जुलाई से तेरह जुलाई तक अधिकांश जिलों में रुक रुक कर हल्की बारिश होने का अनुमान है। शनिवार को भोपाल इंदौर उज्जैन जबलपुर ग्वालियर सहित प्रदेश के सभी जिलों में गरज चमक के साथ हल्की बारिश हो सकती है। कई स्थानों पर चालीस से पचास किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने की भी संभावना जताई गई है।

    मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक पाकिस्तान के ऊपर पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है जिसका असर अगले सप्ताह मध्य प्रदेश के मौसम पर दिखाई देगा। चौदह जुलाई से कई जिलों में फिर तेज बारिश की संभावना बन रही है। यदि नया सिस्टम पूरी तरह सक्रिय हुआ तो प्रदेश के कई हिस्सों में एक बार फिर भारी वर्षा देखने को मिल सकती है।

    कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल तेज बारिश का रुकना खरीफ फसलों के लिए राहत की खबर है। पिछले कुछ दिनों में कई जिलों में लगातार भारी बारिश के कारण खेतों में पानी भर गया था जिससे फसलों में गलन और नुकसान की आशंका बढ़ने लगी थी। अब हल्की बारिश और मौसम में संतुलन रहने से फसलों को बेहतर बढ़वार मिलने की उम्मीद है।

    बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस बार जून महीने में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई थी लेकिन जुलाई के शुरुआती दिनों ने पूरी तस्वीर बदल दी है। प्रदेश में अब तक लगभग नौ दशमलव पांच इंच बारिश हो चुकी है जो सामान्य से अधिक है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में औसत से काफी ज्यादा बारिश दर्ज की गई है जबकि पूर्वी हिस्से के कुछ जिलों में अब भी सामान्य से कम वर्षा हुई है।

    प्रदेश के लगभग तीस जिलों में सामान्य से अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई है। इनमें भोपाल इंदौर देवास हरदा उज्जैन रतलाम राजगढ़ सीहोर शाजापुर ग्वालियर गुना खंडवा खरगोन और विदिशा जैसे जिले शामिल हैं। वहीं अनूपपुर बालाघाट जबलपुर कटनी रीवा सतना सागर और शहडोल सहित कई जिलों में अभी भी सामान्य से कम वर्षा दर्ज हुई है।

    देवास इस समय प्रदेश का सबसे अधिक बारिश वाला जिला बन गया है जहां अब तक करीब अठारह इंच पानी गिर चुका है। वहीं इंदौर और सीहोर में चौदह इंच से अधिक तथा भोपाल में तेरह इंच से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। दूसरी ओर आलीराजपुर सबसे कम बारिश वाला जिला बना हुआ है जहां अब तक केवल लगभग सवा दो इंच वर्षा हुई है।

    मौसम विभाग का कहना है कि जुलाई का महीना प्रदेश के लिए सबसे महत्वपूर्ण मानसूनी महीना माना जाता है क्योंकि सामान्य तौर पर पूरे सीजन की लगभग चालीस प्रतिशत बारिश इसी महीने होती है। ऐसे में अगले कुछ दिनों का मौसम किसानों और आम लोगों दोनों के लिए बेहद अहम रहने वाला है।

  • हर की पौड़ी की सेवा परंपरा को बड़ा झटका, हजारों भूखों तक भोजन पहुंचाने वाले 'भंडारा किंग बाबा' रमाशंकर गुप्ता का निधन, हरिद्वार ने खोई अपनी अनोखी पहचान

    हर की पौड़ी की सेवा परंपरा को बड़ा झटका, हजारों भूखों तक भोजन पहुंचाने वाले 'भंडारा किंग बाबा' रमाशंकर गुप्ता का निधन, हरिद्वार ने खोई अपनी अनोखी पहचान


    नई दिल्ली ।
    हरिद्वार की हर की पौड़ी क्षेत्र से जुड़ी सेवा और मानवता की एक प्रेरणादायक पहचान अब इतिहास का हिस्सा बन गई है। वर्षों तक श्रद्धालुओं और दानदाताओं को जरूरतमंद लोगों से जोड़ने वाले रमाशंकर गुप्ता, जिन्हें लोग स्नेहपूर्वक ‘भंडारा किंग बाबा’ के नाम से जानते थे, का निधन हो गया। उनके जाने से न केवल हरिद्वार बल्कि उन हजारों लोगों के बीच भी शोक का माहौल है, जिनके लिए वह नियमित रूप से भोजन की व्यवस्था कराने का माध्यम बने थे।

    रमाशंकर गुप्ता मूल रूप से उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के निवासी थे, लेकिन लंबे समय पहले हरिद्वार आकर उन्होंने अपना जीवन सेवा कार्यों को समर्पित कर दिया। हर की पौड़ी के निकट शिवसेतु पर बैठकर वह श्रद्धालुओं से विनम्र आग्रह करते थे कि यदि संभव हो तो भूखे साधुओं, गरीबों और जरूरतमंद लोगों के लिए भंडारे में सहयोग करें। उनका यह प्रयास व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि समाज के वंचित वर्ग तक भोजन पहुंचाने के उद्देश्य से होता था।

    समय के साथ उनकी पहचान एक ऐसे व्यक्ति के रूप में बनी, जिस पर श्रद्धालु पूरी तरह भरोसा करते थे। लोग जानते थे कि उनके माध्यम से दिया गया सहयोग वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचेगा। यही विश्वास उन्हें सामान्य व्यक्ति से अलग बनाता था। हरिद्वार आने वाले अनेक श्रद्धालु विशेष रूप से उन्हें खोजते थे और उनके माध्यम से भोजन वितरण की व्यवस्था कराते थे। उनकी सादगी और पारदर्शिता ने समाज में उनकी अलग छवि स्थापित की।

    रमाशंकर गुप्ता हमेशा इस बात पर जोर देते थे कि भोजन की गुणवत्ता से कभी समझौता नहीं होना चाहिए। उनका मानना था कि जैसा भोजन वह स्वयं ग्रहण करते हैं, वैसा ही भोजन जरूरतमंदों को भी मिलना चाहिए। इसी सोच के साथ वह भोजन तैयार करवाने और उसके वितरण की व्यवस्था में सक्रिय भूमिका निभाते थे। उनका उद्देश्य केवल भोजन कराना नहीं, बल्कि सम्मानपूर्वक सेवा उपलब्ध कराना था।

    उनके निधन के बाद सबसे बड़ा प्रश्न यह भी सामने आया है कि अब उन लोगों की सहायता किस प्रकार होगी, जिनके लिए वह प्रतिदिन भोजन की व्यवस्था सुनिश्चित करते थे। वह दान देने वालों और भोजन पाने वालों के बीच एक मजबूत कड़ी थे। उनकी मौजूदगी ने वर्षों तक सेवा कार्यों को सरल और व्यवस्थित बनाए रखा। अब उनकी अनुपस्थिति में इस व्यवस्था को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी समाज और स्थानीय लोगों के सामने एक महत्वपूर्ण चुनौती के रूप में खड़ी है।

    हरिद्वार जैसे धार्मिक नगरों की पहचान केवल मंदिरों, घाटों और धार्मिक आयोजनों से नहीं बनती, बल्कि ऐसे लोगों से भी बनती है जो निस्वार्थ सेवा को अपना जीवन बना लेते हैं। रमाशंकर गुप्ता ने बिना किसी संस्था, प्रचार या पद के समाज सेवा का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया, जिसने उन्हें लोगों के बीच विशेष सम्मान दिलाया। उनकी पहचान किसी औपचारिक संगठन से नहीं, बल्कि उनके कार्यों और सेवा भाव से बनी।

    आज जब श्रद्धालु हर की पौड़ी की ओर जाएंगे और शिवसेतु से गुजरेंगे, तो वहां उनकी परिचित आवाज सुनाई नहीं देगी। हालांकि उनका जीवन यह संदेश अवश्य छोड़ गया है कि समाज में छोटे-छोटे प्रयास भी हजारों लोगों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। सेवा, विश्वास और मानवता के प्रति उनका समर्पण लंबे समय तक लोगों को प्रेरित करता रहेगा और हरिद्वार की सामाजिक स्मृतियों में उनकी पहचान हमेशा जीवित रहेगी।

  • शंकराचार्य से बढ़ती नजदीकियों के सहारे नया राजनीतिक संदेश, सनातन और समाजवाद को साथ जोड़ने की रणनीति पर आगे बढ़े अखिलेश यादव

    शंकराचार्य से बढ़ती नजदीकियों के सहारे नया राजनीतिक संदेश, सनातन और समाजवाद को साथ जोड़ने की रणनीति पर आगे बढ़े अखिलेश यादव

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश की राजनीति में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले नए राजनीतिक संकेत देखने को मिल रहे हैं। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की हालिया मुलाकात ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा को जन्म दिया है। इस मुलाकात में सनातन, गौरक्षा और राम मंदिर से जुड़े विषयों पर बातचीत हुई, जिसे राजनीतिक विश्लेषक समाजवादी पार्टी की बदलती रणनीति के रूप में देख रहे हैं। हाल के वर्षों में सामाजिक न्याय और पीडीए की राजनीति पर जोर देने वाली पार्टी अब धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर भी अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराने का प्रयास करती दिखाई दे रही है।

    लखनऊ में हुई इस मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें और वीडियो साझा करते हुए सनातन और समाजवाद के बीच समानता का संदेश दिया। मुलाकात के दौरान उन्होंने शंकराचार्य का आशीर्वाद लिया और जमीन पर बैठकर संवाद किया। इस प्रतीकात्मक प्रस्तुति को भी राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी की ओर से इसे सामाजिक समरसता और भारतीय परंपरा के सम्मान का संदेश बताया गया।

    बैठक में राम मंदिर से जुड़े चढ़ावे के कथित अनियमितता के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। अखिलेश यादव ने इस विषय पर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई। उनका कहना था कि धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होना आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि आस्था से जुड़े विषयों को राजनीतिक लाभ या नुकसान के बजाय जनविश्वास के दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।

    स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पिछले कुछ समय से विभिन्न धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर अपनी स्पष्ट राय रखते रहे हैं। गौरक्षा, सनातन परंपरा और अन्य धार्मिक विषयों पर उनकी सक्रियता लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है। हाल के महीनों में उनकी कई सार्वजनिक टिप्पणियों ने प्रदेश की राजनीति में भी प्रभाव डाला है। ऐसे समय में समाजवादी पार्टी नेतृत्व का उनसे लगातार संवाद राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    इससे पहले भी अखिलेश यादव और उनकी पत्नी एवं सांसद डिंपल यादव शंकराचार्य से मुलाकात कर चुके हैं। दोनों पक्षों के बीच गौरक्षा, धार्मिक परंपराओं और सामाजिक मुद्दों पर विचार-विमर्श होता रहा है। इन बैठकों ने यह संकेत दिया है कि समाजवादी पार्टी धार्मिक नेतृत्व के साथ संवाद बनाए रखने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रयास पार्टी की व्यापक सामाजिक पहुंच बढ़ाने की दिशा में भी देखा जा सकता है।

    उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ सभी प्रमुख राजनीतिक दल अपने-अपने जनाधार को मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे में धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक विमर्श एक-दूसरे से जुड़े हुए दिखाई दे रहे हैं। समाजवादी पार्टी जहां सामाजिक न्याय और पिछड़े वर्गों की राजनीति को आगे बढ़ाने की बात करती रही है, वहीं अब सनातन परंपरा से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी सक्रिय भागीदारी दिखा रही है। इससे प्रदेश की चुनावी राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावनाओं पर चर्चा तेज हो गई है।

    हालांकि इस मुलाकात के राजनीतिक प्रभाव का वास्तविक आकलन आगामी चुनावी माहौल और मतदाताओं की प्रतिक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल इतना तय है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में धार्मिक नेतृत्व और राजनीतिक दलों के बीच बढ़ता संवाद चुनावी रणनीतियों का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है, जहां सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दों के साथ राजनीतिक संदेश भी समानांतर रूप से आगे बढ़ रहे हैं।

  • कार्यवाहक प्रमोशन पर चला सरकार का बड़ा फैसला हजारों पुलिसकर्मियों की बढ़ी मुश्किलें मूल पद पर लौटाने की तैयारी शुरू

    कार्यवाहक प्रमोशन पर चला सरकार का बड़ा फैसला हजारों पुलिसकर्मियों की बढ़ी मुश्किलें मूल पद पर लौटाने की तैयारी शुरू


    मध्य प्रदेश मध्य प्रदेश पुलिस विभाग में नए पदोन्नति नियम लागू होने के बाद बड़ा प्रशासनिक बदलाव देखने को मिल सकता है। पिछले कई वर्षों से कार्यवाहक पदोन्नति के आधार पर उच्च पदों पर जिम्मेदारी संभाल रहे करीब पंद्रह हजार पुलिस अधिकारी और कर्मचारियों पर अब मूल पद पर लौटने का खतरा मंडरा रहा है। सरकार द्वारा मध्य प्रदेश पदोन्नति नियम दो हजार पच्चीस लागू किए जाने के बाद पुलिस मुख्यालय ने नियमित विभागीय पदोन्नति समिति की प्रक्रिया तेज कर दी है। इसके साथ ही कार्यवाहक पदोन्नति के सभी मामलों की चरणबद्ध समीक्षा शुरू कर दी गई है जिससे पूरे विभाग में चिंता और असमंजस का माहौल बन गया है।

    दरअसल वर्ष दो हजार सोलह के बाद लंबे समय तक नियमित पदोन्नतियां नहीं हो सकीं। विभाग में रिक्त पदों और प्रशासनिक जरूरतों को देखते हुए वर्ष दो हजार इक्कीस से बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी और कर्मचारियों को कार्यवाहक पदोन्नति देकर उच्च पदों की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। अब नए नियम लागू होने के बाद इन सभी मामलों का दोबारा परीक्षण किया जा रहा है ताकि नियमित पदोन्नति केवल पात्र और योग्य कर्मचारियों को ही मिल सके।

    इस प्रक्रिया की पहली बड़ी कार्रवाई पांढुर्णा जिले में देखने को मिली है जहां कार्यवाहक प्रधान आरक्षक के रूप में काम कर रहे बत्तीस पुलिसकर्मियों से प्रभार वापस लेकर उन्हें फिर से आरक्षक पद पर पदस्थ कर दिया गया। पुलिस अधीक्षक द्वारा जारी आदेश के बाद सभी कर्मचारियों ने अपने मूल पद पर कार्यभार संभाल लिया। विभाग का कहना है कि यह कार्रवाई नए पदोन्नति नियमों और पुलिस मुख्यालय के निर्देशों के अनुरूप की गई है।

    सूत्रों के अनुसार नियमित विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक से पहले प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी के पिछले पांच वर्षों के सेवा रिकॉर्ड की गहन जांच की जा रही है। इसमें वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन अनुशासनात्मक कार्रवाई निलंबन विभागीय दंड और न्यायालयों में लंबित मामलों का भी मूल्यांकन किया जा रहा है। जिन कर्मचारियों का रिकॉर्ड निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं होगा उन्हें नियमित पदोन्नति नहीं मिलेगी और उनका कार्यवाहक प्रभार भी समाप्त कर दिया जाएगा।

    पुलिस मुख्यालय के प्रारंभिक आकलन के अनुसार फिलहाल करीब एक हजार अधिकारी और कर्मचारी ऐसे हैं जिन पर इस प्रक्रिया का सीधा प्रभाव पड़ सकता है। आने वाले कुछ दिनों में प्रदेश के अन्य जिलों में भी इसी तरह की कार्रवाई शुरू होने की संभावना है। विभागीय अधिकारियों का अनुमान है कि आगे चलकर प्रभावित होने वालों की संख्या पंद्रह हजार तक पहुंच सकती है।

    वर्षों से उच्च पदों पर कार्य कर रहे कई पुलिसकर्मियों का मानना है कि यदि उन्हें फिर से मूल पद पर भेजा गया तो इससे उनका मनोबल प्रभावित होगा और कार्यक्षमता पर भी असर पड़ सकता है। दूसरी ओर विभाग का कहना है कि नई व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी और नियम आधारित होगी ताकि योग्य कर्मचारियों को ही स्थायी पदोन्नति का लाभ मिल सके।

    बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव द्वारा सभी विभागों से पदोन्नति प्रक्रिया की जानकारी मांगे जाने के बाद पुलिस विभाग सहित कई विभागों में लंबित पदोन्नति मामलों पर तेजी से काम शुरू हुआ है। ऐसे में आने वाले दिनों में पुलिस महकमे में बड़े स्तर पर प्रशासनिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।