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  • विदिशा सड़क हादसे में मातम, खेत जा रहे किसानों और मजदूरों से भरी ट्रॉली पलटी

    विदिशा सड़क हादसे में मातम, खेत जा रहे किसानों और मजदूरों से भरी ट्रॉली पलटी


    मध्यप्रदेश । विदिशा जिले के कुरवाई थाना क्षेत्र में शुक्रवार सुबह दर्दनाक सड़क हादसे ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। मूंग की फसल काटने जा रहे मजदूरों से भरी एक ट्रैक्टर-ट्रॉली अचानक अनियंत्रित होकर पलट गई। हादसे में एक किसान और एक मजदूर की मौके पर मौत हो गई, जबकि बच्चों सहित 20 अन्य लोग घायल हो गए। दुर्घटना के बाद घटनास्थल पर चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

    यह हादसा सुबह करीब 6 बजे बीना रोड पर लायरा और मलियाखेड़ा गांव के बीच हुआ। बताया जा रहा है कि ट्रैक्टर-ट्रॉली में बड़ी संख्या में मजदूर सवार थे, जो खेतों में मूंग की कटाई करने जा रहे थे। इनमें कई प्रवासी मजदूर भी शामिल थे। मजदूरों के साथ उनके छोटे-छोटे बच्चे भी ट्रॉली में मौजूद थे। अचानक वाहन का संतुलन बिगड़ गया और ट्रॉली सड़क किनारे पलट गई। हादसा इतना भीषण था कि लोग ट्रॉली के नीचे दब गए और कई लोग दूर जाकर गिरे।

    घटना के बाद स्थानीय ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे और घायलों को बाहर निकालने में जुट गए। सूचना मिलते ही कुरवाई थाना प्रभारी आरके मिश्रा पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्य शुरू कराया। पुलिस ने मौके का मुआयना कर जरूरी साक्ष्य जुटाए और ट्रैफिक व्यवस्था संभाली।

    सभी घायलों को तत्काल कुरवाई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने 55 वर्षीय किसान ऋषभ साहू उर्फ ऋषि और 65 वर्षीय मजदूर दरबारी कौल को मृत घोषित कर दिया। दोनों शवों का पंचनामा बनाकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।

    हादसे में घायल 20 वर्षीय दिव्या कोल और 35 वर्षीय रजनी कोल की हालत गंभीर बताई जा रही है। प्राथमिक उपचार के बाद दोनों को जिला चिकित्सालय रेफर किया गया है। वहीं अन्य 18 घायलों का इलाज कुरवाई अस्पताल में जारी है। घायलों में कई मासूम बच्चे भी शामिल हैं, जिनके घायल होने से अस्पताल का माहौल बेहद भावुक हो गया।

    पुलिस प्रशासन अस्पताल और घटनास्थल दोनों जगह लगातार निगरानी बनाए हुए है। प्रारंभिक जांच में ट्रैक्टर-ट्रॉली के अनियंत्रित होकर पलटने की बात सामने आई है। हालांकि वाहन की गति, सड़क की स्थिति और तकनीकी खराबी जैसे पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

    इस हादसे ने एक बार फिर खेतों में काम के लिए असुरक्षित तरीके से मजदूरों को ढोने की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीण इलाकों में मजदूरों और बच्चों को ट्रैक्टर-ट्रॉली में भरकर ले जाना आम बात है, लेकिन यही लापरवाही कई बार जानलेवा साबित हो रही है।

  • गहरे पानी में जाने से हादसा, परिवार के इकलौते बेटे की दर्दनाक मौत

    गहरे पानी में जाने से हादसा, परिवार के इकलौते बेटे की दर्दनाक मौत


    मध्यप्रदेश । विदिशा की बेतवा नदी गुरुवार सुबह एक परिवार की खुशियां अपने साथ बहा ले गई। एसएटीआई कॉलेज में पढ़ाई कर रहे 21 वर्षीय छात्र सहज उर्फ श्रवण तले की नदी में डूबने से मौत हो गई। हादसा उस वक्त हुआ जब वह अपने दो दोस्तों के साथ बेतवा नदी के बड़े घाट पर नहाने गया था। कुछ ही पलों में मौज-मस्ती का माहौल मातम में बदल गया और परिवार का इकलौता बेटा हमेशा के लिए दुनिया छोड़ गया।

    हरदा निवासी सहज तले विदिशा के दुर्गा नगर इलाके में किराए के कमरे में रहकर एसएटीआई कॉलेज में सेकेंड ईयर की पढ़ाई कर रहा था। गुरुवार सुबह करीब 10 बजे वह अपने दो दोस्तों के साथ बेतवा नदी पहुंचा था। बताया गया कि तीनों दोस्त घाट की सीढ़ियों के पास नहा रहे थे। इसी दौरान उन्होंने एक साथ पानी में डुबकी लगाई। दो दोस्त तो सुरक्षित बाहर आ गए, लेकिन सहज गहरे पानी में चला गया और वापस ऊपर नहीं आ सका।

    दोस्तों ने जब सहज को पानी से बाहर नहीं आते देखा तो घबराकर शोर मचाया। घाट पर मौजूद लोगों और गोताखोरों ने तुरंत रेस्क्यू शुरू किया। सूचना मिलते ही होमगार्ड की टीम भी मौके पर पहुंच गई। करीब पांच मिनट तक चले सर्च ऑपरेशन के बाद युवक को पानी से बाहर निकाला गया। उसे तुरंत मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया।

    हादसे की खबर मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। मृतक के मामा विशाल चौधरी ने बताया कि सहज पढ़ाई में बेहद होशियार था और परिवार को उससे बड़ी उम्मीदें थीं। उसके पिता निजी नौकरी करते हैं और सामान्य आर्थिक स्थिति में बेटे को पढ़ा रहे थे। सहज परिवार का इकलौता बेटा था, जबकि उसकी एक बहन है। बेटे की मौत की खबर सुनकर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

    मामा विशाल चौधरी ने लोगों से अपील की है कि नदी, तालाब या अन्य जल स्रोतों में नहाने से पहले उसकी गहराई और सुरक्षा की जानकारी जरूर लें। उन्होंने कहा कि बिना जानकारी और सावधानी के पानी में उतरना जानलेवा साबित हो सकता है।

    वहीं, कोतवाली एएसआई मोहम्मद शाहिद ने बताया कि पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में यह हादसा गहरे पानी में चले जाने की वजह से हुआ माना जा रहा है।

  • मध्यप्रदेश में नकली मेडिकल डिग्री का बड़ा खुलासा, स्वास्थ्य विभाग में मचा हड़कंप

    मध्यप्रदेश में नकली मेडिकल डिग्री का बड़ा खुलासा, स्वास्थ्य विभाग में मचा हड़कंप


    मध्यप्रदेश । सीहोर जिले में स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। पुलिस ने प्रदेशभर में फर्जी मेडिकल डिग्रियां तैयार कर बेचने वाले एक संगठित रैकेट का खुलासा करते हुए इसके मुख्य सरगना हीरा सिंह कौशल को गिरफ्तार किया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी खुद स्वास्थ्य विभाग में सरकारी कर्मचारी है और बिलकिसगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में रेडियोग्राफर के पद पर कार्यरत था। आरोप है कि उसने अपनी सरकारी नौकरी और विभागीय नेटवर्क का फायदा उठाकर कई अयोग्य लोगों को फर्जी डिग्रियों के जरिए डॉक्टर बनवाया और उन्हें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत संचालित संजीवनी क्लीनिकों में नौकरी तक दिला दी।

    पुलिस की शुरुआती जांच और पूछताछ में कई सनसनीखेज खुलासे हुए हैं। जानकारी के मुताबिक, हीरा सिंह लंबे समय से पूरे मध्य प्रदेश में फर्जी मेडिकल डिग्रियों का नेटवर्क चला रहा था। वह मोटी रकम लेकर लोगों को नकली डिग्रियां उपलब्ध कराता था, जिनके आधार पर सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में नियुक्तियां कराई जाती थीं। इस खुलासे के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और नियुक्ति प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

    पूछताछ के दौरान आरोपी ने 12 से अधिक ऐसे लोगों के नाम कबूल किए हैं, जिन्होंने उससे फर्जी डिग्रियां खरीदी थीं और डॉक्टर के रूप में काम कर रहे थे। पुलिस अब इन सभी की तलाश में प्रदेश के अलग-अलग जिलों में लगातार छापेमारी कर रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि इस रैकेट में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और क्या स्थानीय स्तर पर भी बड़े पैमाने पर फर्जी डिग्रियां बांटी गई थीं।

    मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में खलबली मच गई है। बिलकिसगंज CHC के प्रभारी डॉ. नीरज कुमार डागोर ने बताया कि आरोपी हीरा सिंह संस्थान में रेडियोग्राफर के पद पर पदस्थ था और उसने एक तारीख से छुट्टी का आवेदन दिया हुआ था। उन्होंने कहा कि गिरफ्तारी की जानकारी उन्हें मीडिया के माध्यम से मिली है और अभी तक विभाग को इस संबंध में कोई आधिकारिक सूचना प्राप्त नहीं हुई है।

    फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है। संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में इस रैकेट से जुड़े कई और बड़े नाम सामने आ सकते हैं। स्वास्थ्य विभाग की साख पर लगे इस दाग ने प्रदेश में सरकारी नियुक्तियों और मेडिकल प्रमाणपत्रों की सत्यता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

  • स्कूल में रेकी के आरोप में युवक गिरफ्तार, वीआईटी कॉलेज का सुरक्षाकर्मी निकला

    स्कूल में रेकी के आरोप में युवक गिरफ्तार, वीआईटी कॉलेज का सुरक्षाकर्मी निकला


    मध्यप्रदेश । सीहोर जिले के अमलाहा स्थित एक पब्लिक स्कूल में संदिग्ध गतिविधियों का मामला सामने आया है। स्कूल परिसर में बाउंड्री वॉल कूदकर घुसने, घंटों तक घूमने और बाद में गेट का ताला तोड़कर फरार होने के आरोप में पुलिस ने एक युवक को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान भोपाल के रातीबड़ निवासी विकास मारण के रूप में हुई है, जो कोठरी स्थित वीआईटी कॉलेज में सुरक्षाकर्मी के पद पर कार्यरत है। पुलिस ने उसके खिलाफ बीएनएस की धारा 329(4) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    अमलाहा पब्लिक स्कूल के संचालक दीपक जायसवाल ने पुलिस चौकी में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि 18 मई को दिल्ली से लौटने के बाद उन्होंने स्कूल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज चेक की। फुटेज में एक संदिग्ध युवक 16 मई की शाम करीब 6:31 बजे स्कूल की बाउंड्री कूदकर अंदर घुसता दिखाई दिया। आरोपी काफी देर तक स्कूल परिसर में घूमता रहा और बाद में गेट का ताला तोड़कर वहां से स्कूटी लेकर निकल गया।

    जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने उसी दिन सुबह करीब 11 बजे बिना अनुमति स्कूल परिसर में अपनी स्कूटी खड़ी की थी। इसके बाद वह कहीं चला गया था। शाम को जब स्कूल का सुरक्षा गार्ड विनोद वर्मा मुख्य गेट के छोटे फाटक पर ताला लगाकर चाय पीने गया, तब आरोपी ने मौके का फायदा उठाया। गार्ड के लौटने पर फाटक का ताला टूटा मिला और स्कूटी भी गायब थी।

    घटना की जानकारी मिलते ही स्कूल संचालक ने अपने स्तर पर आरोपी की पहचान करने का प्रयास शुरू किया। सीसीटीवी फुटेज और अन्य जानकारी के आधार पर आरोपी की पहचान विकास मारण के रूप में हुई। संचालक ने आरोप लगाया कि आरोपी किसी बड़ी आपराधिक वारदात की नीयत से स्कूल की रेकी करने आया था। उनका कहना है कि जिस तरह आरोपी लंबे समय तक परिसर में घूमता रहा, उससे उसकी गतिविधियां संदिग्ध प्रतीत होती हैं।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए अमलाहा पुलिस चौकी ने तत्काल कार्रवाई की और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अब उससे पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि स्कूल परिसर में घुसने के पीछे उसकी असली मंशा क्या थी और क्या वह किसी अन्य वारदात की योजना बना रहा था।

    पुलिस ने स्कूल में लगे सीसीटीवी फुटेज को अहम साक्ष्य के रूप में जब्त कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है और जरूरत पड़ने पर अन्य धाराएं भी बढ़ाई जा सकती हैं।

  • सीहोर में स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खुली, बीच रास्ते बंद हुई 108 एंबुलेंस

    सीहोर में स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खुली, बीच रास्ते बंद हुई 108 एंबुलेंस


    मध्यप्रदेश । सीहोर जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल तस्वीर सामने आई है, जहां मरीजों की जान बचाने के लिए इस्तेमाल होने वाली 108 आपातकालीन एंबुलेंस खुद लोगों के सहारे चल रही हैं। तकनीकी खराबी और मेंटेनेंस की कमी के चलते ये एंबुलेंस अस्पताल परिसर से लेकर नेशनल हाईवे तक बीच रास्ते बंद हो जा रही हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि कई बार राहगीरों और स्थानीय लोगों को एंबुलेंस में धक्का लगाकर उसे दोबारा चालू करना पड़ रहा है।

    आमतौर पर सड़क पर एंबुलेंस का सायरन सुनते ही लोग तुरंत रास्ता खाली कर देते हैं, क्योंकि उसमें किसी गंभीर मरीज की जिंदगी दांव पर लगी होती है। लेकिन सीहोर में हालात उलट नजर आ रहे हैं। यहां जीवन बचाने वाली एंबुलेंस खुद सड़क पर लाचार खड़ी दिखाई दे रही हैं। वायरल हो रहे वीडियो और तस्वीरों में लोग एंबुलेंस को धक्का लगाते नजर आ रहे हैं, जिसने जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल दी है।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर किसी गंभीर मरीज, गर्भवती महिला या घायल व्यक्ति को अस्पताल ले जाते समय एंबुलेंस बीच रास्ते बंद हो जाए, तो स्थिति कितनी भयावह हो सकती है। समय पर इलाज नहीं मिलने से मरीज की जान तक जा सकती है। लोगों ने सवाल उठाया है कि जब आपातकालीन सेवा देने वाले वाहन ही सुरक्षित और सक्षम नहीं हैं, तो मरीजों की जिंदगी की जिम्मेदारी कौन लेगा।

    इस मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। लोगों का आरोप है कि एंबुलेंस के रखरखाव और मरम्मत के नाम पर हर साल बजट खर्च होता है, फिर भी वाहन जर्जर हालत में क्यों हैं। कई लोगों ने इस पूरे मामले में बजट के दुरुपयोग और लापरवाही की जांच की मांग भी उठाई है।

    हालांकि जिला अस्पताल प्रबंधन ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज नहीं किया, लेकिन दावा किया है कि सभी एंबुलेंस का समय-समय पर मेंटेनेंस कराया जाता है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि तकनीकी खराबियां कभी-कभी अचानक सामने आ जाती हैं, जिन्हें तुरंत ठीक करने का प्रयास किया जाता है।

    इसके बावजूद सड़क पर धक्का खाती एंबुलेंस की तस्वीरें स्वास्थ्य व्यवस्था की सच्चाई बयां कर रही हैं। आम लोगों का कहना है कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ, तो किसी दिन यह लापरवाही बड़ी त्रासदी में बदल सकती है।

  • नाले की सफाई पर विवाद बढ़ा, पार्षद ने प्रशासन को दी सात दिन की मोहलत

    नाले की सफाई पर विवाद बढ़ा, पार्षद ने प्रशासन को दी सात दिन की मोहलत


    मध्यप्रदेश । सीहोर जिले के इछावर नगर में गंदे नाले की समस्या को लेकर लोगों का गुस्सा अब खुलकर सामने आने लगा है। वार्ड क्रमांक 15 के पार्षद जुनैद खान ने नगर परिषद प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए सात दिन के भीतर नाले की सफाई और निर्माण कार्य पूरा करने की चेतावनी दी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि तय समय में कार्रवाई नहीं हुई, तो वार्डवासी नाले की गंदगी निकालकर सीधे नगर परिषद कार्यालय के मुख्य द्वार पर डालेंगे।

    शनिवार को पार्षद जुनैद खान नगर परिषद कार्यालय पहुंचे और मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में उन्होंने नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि नगर के बीचोंबीच गुजरने वाला यह नाला लंबे समय से बदहाल स्थिति में पड़ा हुआ है। पूरे शहर का दूषित पानी और गंदगी इसी नाले में बहती है, लेकिन इसके बावजूद सफाई और निर्माण कार्य को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।

    पार्षद ने आरोप लगाया कि नाले का निर्माण कार्य काफी समय पहले शुरू हुआ था, लेकिन ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही के कारण काम बेहद धीमी गति से चल रहा है। नतीजतन नाला कीचड़, मलबे और सड़ी हुई गंदगी से पूरी तरह भर चुका है। जगह-जगह गंदा पानी जमा होने से हालात और खराब हो गए हैं।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि नाले से उठने वाली तेज दुर्गंध के कारण आसपास रहना मुश्किल हो गया है। दिनभर बदबू फैलने से लोगों को परेशानी हो रही है, वहीं मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ गया है। इससे डेंगू, मलेरिया और अन्य बीमारियों का खतरा भी बढ़ने लगा है। वार्डवासियों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद प्रशासन सिर्फ आश्वासन देता रहा, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

    पार्षद जुनैद खान ने कहा कि नगर परिषद यदि सात दिनों के भीतर सफाई और निर्माण कार्य पूरा नहीं करती, तो जनता के साथ मिलकर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि लोगों की सेहत और सुविधा से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    इस पूरे मामले के बाद नगर परिषद प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। अब देखना होगा कि प्रशासन तय समय में कार्रवाई करता है या फिर वार्डवासियों का विरोध प्रदर्शन शहर में बड़ा मुद्दा बनता है।

  • ड्रग्स बिक्री के शक में स्वास्थ्य विभाग का एक्शन, मेडिकल स्टोर जांच के घेरे में

    ड्रग्स बिक्री के शक में स्वास्थ्य विभाग का एक्शन, मेडिकल स्टोर जांच के घेरे में


    मध्यप्रदेश । सतना जिले के कोटर क्षेत्र के अबेर गांव में नशीली दवाओं की अवैध बिक्री की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। शुक्रवार को ड्रग विभाग, पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम ने क्षेत्र के दो मेडिकल स्टोर्स पर अचानक छापा मारकर जांच की। इस कार्रवाई से इलाके में हड़कंप मच गया। जांच के दौरान गंभीर अनियमितताएं मिलने पर एक मेडिकल स्टोर को तत्काल सील कर दिया गया, जबकि दूसरे स्टोर संचालक को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है।

    संयुक्त कार्रवाई में ड्रग इंस्पेक्टर प्रियंका चौबे, डीएसपी मुख्यालय मनोज दीक्षित और कोटर थाना प्रभारी दिलीप मिश्रा की टीम शामिल रही। अधिकारियों ने अबेर स्थित अनन्या मेडिकल स्टोर और जागृति मेडिकल स्टोर का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान दवाओं के स्टॉक, खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड और लाइसेंस से जुड़े दस्तावेजों की बारीकी से जांच की गई।

    जांच के दौरान अनन्या मेडिकल स्टोर में कई गंभीर खामियां सामने आईं। सबसे बड़ी बात यह रही कि निरीक्षण के समय न तो मेडिकल स्टोर का प्रोपराइटर मौजूद था और न ही लाइसेंसधारी फार्मासिस्ट मौके पर मिला। इसके अलावा दवाओं के रखरखाव और रिकॉर्ड में भी गड़बड़ियां पाई गईं। नियमों के उल्लंघन को गंभीर मानते हुए प्रशासन ने मेडिकल स्टोर को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया। साथ ही संचालक को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।

    वहीं जागृति मेडिकल स्टोर की जांच में भी कई अनियमितताएं सामने आईं। हालांकि यहां स्थिति अपेक्षाकृत कम गंभीर होने के कारण दुकान को सील नहीं किया गया, लेकिन संचालक को नोटिस जारी कर निर्धारित समय में जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

    प्रशासन का कहना है कि क्षेत्र में नशीली दवाओं की अवैध बिक्री को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं। खासकर युवाओं में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति को देखते हुए यह कार्रवाई की गई है। अधिकारियों ने साफ किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले मेडिकल स्टोर्स के खिलाफ आगे भी इसी तरह सख्त अभियान जारी रहेगा।

    पुलिस और ड्रग विभाग अब क्षेत्र के अन्य मेडिकल स्टोर्स की भी निगरानी कर रहे हैं। प्रशासन ने लोगों से भी अपील की है कि यदि कहीं अवैध रूप से नशीली दवाओं की बिक्री हो रही हो तो उसकी जानकारी तुरंत प्रशासन को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।

  • मां को दर्द बताने के बाद युवक ने लगाई फांसी, पुलिस ने आरोपी को दबोचा

    मां को दर्द बताने के बाद युवक ने लगाई फांसी, पुलिस ने आरोपी को दबोचा


    मध्यप्रदेश । सतना जिले के धारकुंडी थाना क्षेत्र में सामने आए आत्महत्या के चर्चित मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपी युवक को गिरफ्तार कर लिया है। प्रतापपुर निवासी 23 वर्षीय नित्यम पांडेय पर आरोप है कि उसने लगातार प्रताड़ित और मानसिक दबाव बनाकर ज्वेलर्स कारोबारी दीपेश सोनी को आत्महत्या के लिए मजबूर किया। करीब दो महीने तक चली पुलिस जांच के बाद आरोपी के खिलाफ बीएनएस की धारा 108 के तहत मामला दर्ज किया गया और कोर्ट में पेश करने के बाद उसे जेल भेज दिया गया।

    घटना 27 मार्च 2026 की है। बैरहना निवासी शकुंतला सोनी ने प्रतापपुर में अपने दूसरे मकान में ज्वेलर्स की दुकान खोल रखी थी। घटना वाले दिन उनका बेटा दीपेश सोनी दुकान संभाल रहा था। बताया गया है कि उसी दौरान गांव का युवक नित्यम पांडेय अपने कुछ साथियों के साथ दुकान के सामने पहुंचा और गाली-गलौज शुरू कर दी। इससे दीपेश काफी परेशान और मानसिक रूप से तनाव में आ गया था।

    घटना से कुछ देर पहले दीपेश ने अपनी मां शकुंतला सोनी को फोन कर पूरी बात बताई थी। उसने कहा था कि नित्यम पांडेय और उसके साथी दुकान के बाहर खड़े होकर अभद्रता कर रहे हैं और लगातार परेशान कर रहे हैं। मां को अपनी परेशानी बताने के बाद दीपेश ने फोन काट दिया। लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि यह बातचीत उसकी आखिरी कॉल साबित होगी।

    फोन कटने के कुछ समय बाद ही दीपेश ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना की जानकारी मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों ने सीधे तौर पर नित्यम पांडेय और उसके साथियों पर दीपेश को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और आत्महत्या के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने शिकायत दर्ज कर जांच शुरू की।

    धारकुंडी थाना पुलिस ने करीब दो महीने तक पूरे मामले की जांच की। इस दौरान परिजनों के बयान, स्थानीय लोगों से पूछताछ और अन्य साक्ष्यों को खंगाला गया। जांच में सामने आया कि आरोपी द्वारा लगातार दबाव और प्रताड़ना दी जा रही थी, जिससे परेशान होकर दीपेश ने आत्मघाती कदम उठाया।

    पुलिस ने पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद आरोपी नित्यम पांडेय को गिरफ्तार कर लिया। उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से कोर्ट ने उसे जेल भेजने के आदेश दिए। पुलिस का कहना है कि मामले में आगे भी जांच जारी है और जरूरत पड़ने पर अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जाएगी।

  • सतना में बड़ा खुलासा: ट्रेजरी और समग्र आईडी लिंक होते ही सामने आया मामला

    सतना में बड़ा खुलासा: ट्रेजरी और समग्र आईडी लिंक होते ही सामने आया मामला


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी लाड़ली बहना योजना में सतना जिले से बड़ा अनियमितता मामला सामने आया है। जिले में 27 ऐसी महिलाओं की पहचान हुई है, जो सरकारी सेवा में होने के बावजूद हर महीने योजना के तहत 1500 रुपए की राशि ले रही थीं। ट्रेजरी सिस्टम में समग्र आईडी लिंक होने के बाद यह फर्जीवाड़ा उजागर हुआ, जिसके बाद प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग में हड़कंप मच गया है। अब इन महिलाओं से शासन द्वारा मिली राशि की रिकवरी की तैयारी शुरू कर दी गई है।

    जानकारी के मुताबिक, चिन्हित 27 महिलाओं में से 16 नगर निगम क्षेत्र की कर्मचारी हैं। ये महिलाएं एक तरफ सरकारी खजाने से वेतन ले रही थीं, वहीं दूसरी ओर लाड़ली बहना योजना का लाभ भी लगातार उठा रही थीं। जांच में सामने आया कि इन कर्मचारियों ने अब तक कुल 5 लाख 5 हजार 450 रुपए योजना के तहत अपने खातों में प्राप्त किए हैं। प्रशासन अब यह पता लगाने में जुटा है कि योजना में आवेदन करते समय गलत जानकारी दी गई थी या बाद में सरकारी सेवा मिलने के बावजूद लाभ लेना जारी रखा गया।

    महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों के अनुसार, योजना की शुरुआत में लाभार्थियों का चयन सेल्फ डिक्लेरेशन यानी स्व-घोषणा के आधार पर किया गया था। उस समय समग्र आईडी और ट्रेजरी रिकॉर्ड आपस में लिंक नहीं थे। लगभग एक साल पहले जब सरकारी कर्मचारियों के वेतन भुगतान के लिए समग्र आईडी को ट्रेजरी से जोड़ा गया, तब यह गड़बड़ी पकड़ में आई। इसके बाद विभाग ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी।

    जिला कार्यक्रम अधिकारी राजीव सिंह ने बताया कि संबंधित निकायों की समितियां जांच कर रही हैं। इसमें यह भी देखा जा रहा है कि कहीं कुछ महिलाएं योजना का लाभ लेने के बाद सरकारी सेवा में तो नहीं आईं। साथ ही, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मामलों की भी अलग से जांच होगी, क्योंकि शासन द्वारा उन्हें कुछ विशेष परिस्थितियों में छूट दी गई है।

    प्रशासन ने संबंधित निकायों से इन महिला कर्मचारियों के आधार कार्ड, समग्र आईडी, बैंक खाते और सेवा संबंधी दस्तावेज मांगे हैं। जांच पूरी होने के बाद अपात्र पाए जाने वालों से पूरी राशि वापस ली जाएगी। इस मामले के सामने आने के बाद योजना की पारदर्शिता और सत्यापन प्रक्रिया पर भी सवाल उठने लगे हैं।

    वर्तमान में सतना जिले में लाड़ली बहना योजना के लगभग 3 लाख 76 हजार हितग्राही हैं। योजना के नियमों के अनुसार, सरकारी नौकरी करने वाली महिलाएं, आयकरदाता परिवार और अधिक आय वर्ग के लोग इस योजना के पात्र नहीं हैं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारी योजना का लाभ ले रहे थे, जिससे प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

  • गोली मारकर हत्या मामले में 3 आरोपी गिरफ्तार, दोस्त के बयान से खुलासा

    गोली मारकर हत्या मामले में 3 आरोपी गिरफ्तार, दोस्त के बयान से खुलासा


    मध्यप्रदेश । सागर शहर के मोतीनगर थाना क्षेत्र में युवक की गोली मारकर हत्या किए जाने के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। विवेकानंद वार्ड के मछरयाई स्थित गौंड बब्बा चबूतरा इलाके में हुई इस सनसनीखेज वारदात ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी थी। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर मामले की परतें खोलने में जुटी हुई है, जबकि अन्य फरार आरोपियों की तलाश जारी है।

    घटना 21 मई की रात करीब 10:30 बजे की बताई जा रही है। पुलिस के मुताबिक पुरानी रंजिश के चलते फरियादी ओम साहू और उसके भाई मयंक साहू का आरोपियों से विवाद हो गया था। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि आरोपियों ने गाली-गलौज शुरू कर दी। इसी दौरान एक आरोपी ने अवैध हथियार निकालकर मयंक साहू पर फायर कर दिया। गोली लगते ही मयंक गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर पड़ा। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

    वारदात के दौरान मयंक को बचाने दौड़े उसके भाई ओम साहू पर भी आरोपियों ने चाकू से हमला कर दिया। इस हमले में ओम गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और हमलावर मौके से फरार हो गए। सूचना मिलते ही मोतीनगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कई टीमें गठित कीं। साइबर सेल और मुखबिर तंत्र की मदद से आरोपियों की लोकेशन ट्रेस की गई। इसके बाद पुलिस ने घेराबंदी कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों में आर्यन आठिया, एक 16 वर्षीय नाबालिग और एक 60 वर्षीय महिला शामिल हैं। पुलिस सभी से पूछताछ कर रही है और फरार अन्य आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दे रही है।

    जांच में यह बात भी सामने आई है कि मृतक मयंक साहू और मुख्य आरोपी यश पहले बेहद करीबी दोस्त थे। दोनों का साथ उठना-बैठना था, लेकिन कुछ साल पहले दोनों के बीच विवाद हो गया था। इसके बाद दोनों के रिश्तों में दुश्मनी बढ़ती चली गई। पुलिस को शक है कि इसी पुरानी रंजिश ने इस खूनी वारदात का रूप लिया।

    प्रत्यक्षदर्शी शिवम तिवारी ने बताया कि घटना के वक्त मयंक और उसके दोस्त घर के बाहर खड़े थे। तभी अचानक यश वहां पहुंचा और जेब से कट्टा निकालकर सीधे मयंक पर फायर कर दिया। गोली लगते ही मयंक जमीन पर गिर पड़ा। शिवम के मुताबिक ओम साहू जब बीच-बचाव करने पहुंचा तो उस पर चाकू से हमला किया गया।

    एडिशनल एसपी लोकेश सिंहा ने बताया कि अब तक इस मामले में छह आरोपियों के नाम सामने आए हैं। पुलिस सभी पहलुओं पर जांच कर रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है और पुलिस लगातार निगरानी बनाए हुए है।