Blog

  • विदेश नीति पर फोकस, इजरायल यात्रा के अनुभव साझा करते हुए पीएम का बड़ा संदेश

    विदेश नीति पर फोकस, इजरायल यात्रा के अनुभव साझा करते हुए पीएम का बड़ा संदेश


    नई दिल्ली। दो दिवसीय इजरायल दौरे से लौटने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि भारत–इजरायल साझेदारी आने वाले समय में और मजबूत होगी। उन्होंने दौरे की झलकियों वाला एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें एयरपोर्ट पर गर्मजोशी से स्वागत, भारतीय समुदाय से मुलाकात, सांस्कृतिक कार्यक्रम और इजरायली संसद में उनके संबोधन के दृश्य शामिल हैं।

    संसद में संबोधन से लेकर सर्वोच्च सम्मान तक
    वीडियो में इजरायली संसद में पीएम के स्वागत, तालियों की गूंज और दोनों देशों के बीच हुए अहम समझौतों के हस्ताक्षर के पल दिखाए गए। प्रधानमंत्री ने लिखा, “इजरायल की खास यात्रा की कुछ खास बातें… अच्छी बातचीत और मजबूत सहयोग। हमारी पार्टनरशिप आगे बढ़ती रहे!”

    रक्षा, तकनीक और व्यापार में नई गति
    दौरे के दौरान रक्षा, सुरक्षा, व्यापार, तकनीक और कृषि जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए इंडि‍या-मिडिल ईस्‍ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (आईएमईसी) और भारत-इजरायल-यूएई-यूएसए (आई2यू2) पहल को आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

    अहम एमओयू: खनिज, समुद्री विरासत और यूपीआई
    खनिज अन्वेषण में उन्नत जियोफिजिकल और एआई तकनीक के उपयोग पर सहयोग के लिए समझौता हुआ। गुजरात के लोथल स्थित नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स के विकास को लेकर भी सहमति बनी, जिससे साझा समुद्री विरासत को बढ़ावा मिलेगा।

    डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में बड़ी पहल के तहत एनपीसीआई इंटरनेशनल और इजरायल की एमएएसएवी के बीच यूपीआई को लागू करने पर समझौता हुआ। इससे दोनों देशों के बीच सीमा-पार रेमिटेंस को आसान बनाने की दिशा में कदम बढ़ेगा।

    कृषि, शिक्षा और वित्तीय सहयोग
    भारत-इजरायल इनोवेशन सेंटर फॉर एग्रीकल्चर की स्थापना के लिए आईसीएआर और एमएएसएचएवी के बीच समझौता हुआ। मत्स्य पालन और जलीय कृषि में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी।

    वित्तीय क्षेत्र में International Financial Services Centres Authority और Israel Securities Authority के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर हुए। इसके अलावा एआई आधारित शिक्षा, वाणिज्यिक मध्यस्थता और विश्वविद्यालयों के बीच शैक्षणिक सहयोग को लेकर भी कई समझौते हुए, जिनमें Nalanda University और Hebrew University of Jerusalem के बीच एमओयू प्रमुख है।

  • दिल्ली शराब नीति केस में बड़ा फैसला, केजरीवाल–सिसोदिया को मिली राहत

    दिल्ली शराब नीति केस में बड़ा फैसला, केजरीवाल–सिसोदिया को मिली राहत

    नई दिल्ली।  दिल्ली की चर्चित आबकारी नीति मामले में शुक्रवार को बड़ा मोड़ आया। अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को सीबीआई केस में राऊज एवेन्यू कोर्ट ने बरी कर दिया। अदालत ने इस मामले में नामजद सभी 23 आरोपियों को भी राहत देते हुए अभियोजन पक्ष की दलीलों को पर्याप्त आधारहीन माना। फैसले के दौरान दोनों नेता अदालत में मौजूद थे, जबकि कुछ अन्य आरोपी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए।

    कोर्ट की कड़ी टिप्पणी: जांच में कमियां
    राऊज एवेन्यू कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सीबीआई की चार्जशीट में गंभीर खामियां हैं और कथित साजिश के समर्थन में ठोस साक्ष्य पेश नहीं किए गए। अदालत ने टिप्पणी की कि अभियोजन पक्ष अनुमान के आधार पर कहानी गढ़ता नजर आया, जो न्यायिक कसौटी पर टिक नहीं सकी।

    जज जीतेंद्र सिंह ने सीबीआई द्वारा कथित कबूलनामे की कॉपी दाखिल न करने पर नाराजगी जताई। साथ ही चार्जशीट में ‘साउथ लॉबी’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर भी आपत्ति दर्ज की। अदालत ने स्पष्ट कहा कि आबकारी नीति के निर्माण में किसी बड़ी आपराधिक साजिश या दुर्भावनापूर्ण इरादे के पर्याप्त प्रमाण नहीं मिले।

    क्या था पूरा मामला?
    यह केस दिल्ली सरकार की 2021-22 की आबकारी नीति से जुड़ा था, जिस पर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप लगे थे। दिल्ली के तत्कालीन मुख्य सचिव की रिपोर्ट के बाद उपराज्यपाल ने सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। इसके बाद Central Bureau of Investigation ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

    26 फरवरी 2023 को मनीष सिसोदिया को गिरफ्तार किया गया था, जबकि 21 मार्च 2024 को प्रवर्तन निदेशालय ने अरविंद केजरीवाल को पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया। बाद में सीबीआई ने भी उन्हें हिरासत में लिया था।

    राजनीतिक असर और आगे की राह
    इस फैसले को आम आदमी पार्टी के लिए बड़ी कानूनी जीत माना जा रहा है। हालांकि यह मामला राजनीतिक बहस का विषय बना रहेगा। अदालत के फैसले के बाद अब निगाहें इस बात पर होंगी कि क्या जांच एजेंसियां ऊपरी अदालत में चुनौती देती हैं या नहीं।

  • पाकिस्तान के हवाई हमलों के जवाब में अफगानिस्तान की जवाबी कार्रवाई, 15 चौकियां कब्जे में लेने का दावा

    पाकिस्तान के हवाई हमलों के जवाब में अफगानिस्तान की जवाबी कार्रवाई, 15 चौकियां कब्जे में लेने का दावा

    नई दिल्ली।  पाकिस्तान द्वारा कथित हवाई हमलों के बाद अफगानिस्तान ने सीमा क्षेत्र में जवाबी कार्रवाई का दावा किया है। इस्लामिक अमीरात ऑफ अफगानिस्तान के उप प्रवक्ता हमदुल्ला फितरत ने बयान जारी कर कहा कि गुरुवार रात शुरू किए गए अभियान में दुश्मन की 15 चौकियों पर कब्जा कर लिया गया है। उनके मुताबिक इस कार्रवाई में कई पाकिस्तानी सैनिक मारे गए, जबकि कुछ को जिंदा पकड़ने का भी दावा किया गया है। हालांकि पाकिस्तान की ओर से इन दावों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    डूरंड लाइन पर ऑपरेशन, रणनीतिक बढ़त का दावा
    अफगान पक्ष का कहना है कि डूरंड लाइन के आसपास तैनात विशेष इकाइयों ने अत्याधुनिक उपकरणों के साथ अभियान चलाया। बयान में कहा गया कि रात के अंधेरे में दुश्मन की गतिविधियों को निशाना बनाया जा रहा है और सीमा पर रणनीतिक बढ़त हासिल की जा रही है। क्षेत्र में हालात बेहद संवेदनशील बताए जा रहे हैं।

    पहले हुए थे हवाई हमले, नागरिक हताहत
    तनाव की पृष्ठभूमि में हालिया हवाई हमलों की घटना है। United Nations Assistance Mission in Afghanistan (यूएनएएमए) ने पुष्टि की थी कि पाकिस्तान के सैन्य हमलों में अफगानिस्तान के नंगरहार और पक्तिका प्रांतों में 13 नागरिकों की मौत हुई। इनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे, जबकि सात अन्य घायल हुए थे। ये हमले 21-22 फरवरी की दरमियानी रात नंगरहार के बेहसूद और खोगियानी जिलों में किए गए बताए गए।

    स्कूल और मस्जिद भी निशाने पर
    स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पक्तिका के बरमल क्षेत्र में एक स्कूल और मस्जिद को निशाना बनाया गया, जबकि ओर्गुन जिले में एक रिहायशी घर पर भी एयर स्ट्राइक की गई। इन घटनाओं के बाद दोनों देशों के बीच पहले से जारी सीमा विवाद और अधिक गहरा गया है।

    आधिकारिक पुष्टि का इंतजार
    अफगानिस्तान के दावों और पाकिस्तान की चुप्पी के बीच स्थिति अस्पष्ट बनी हुई है। स्वतंत्र स्रोतों से 15 चौकियों पर कब्जे की पुष्टि अभी नहीं हो सकी है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि हालात नहीं संभले तो क्षेत्रीय स्थिरता पर गंभीर असर पड़ सकता है।

  • टी20 विश्व कप 2026: आलोचना से आक्रामकता तक, तिलक वर्मा का दमदार जवाब

    टी20 विश्व कप 2026: आलोचना से आक्रामकता तक, तिलक वर्मा का दमदार जवाब

    नई दिल्ली। टी20 विश्व कप 2026 में अपनी धीमी बल्लेबाजी को लेकर आलोचना झेल रहे युवा बल्लेबाज तिलक वर्मा ने जिम्बाब्वे के खिलाफ विस्फोटक पारी खेलकर सभी को करारा जवाब दिया। टीम मैनेजमेंट ने इस मुकाबले में उन्हें तीसरे नंबर की बजाय छठे स्थान पर उतारा और तिलक ने इस भूमिका को पूरी तरह भुनाया।

    16 गेंदों में 44 रन, मैच का रुख बदला
    बाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने महज 16 गेंदों में नाबाद 44 रन ठोक दिए, जिसमें 4 छक्के और 3 चौके शामिल रहे। उनकी इस ताबड़तोड़ पारी ने भारत के स्कोर को 256 रन तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। तेज फिनिशिंग ने न सिर्फ टीम का मनोबल बढ़ाया, बल्कि यह भी दिखा दिया कि तिलक परिस्थिति के मुताबिक खुद को ढालने में माहिर हैं।

    “हर गेंद पर हिट के लिए तैयार”
    मैच के बाद तिलक ने कहा कि जब ओपनर मजबूत शुरुआत देते हैं तो उसका आत्मविश्वास मध्यक्रम तक पहुंचता है। उन्होंने माना कि टीम की रणनीति साफ थी-पावरप्ले में विकेट गिरने के बावजूद आक्रामक रवैया बनाए रखना। उनका कहना था कि विरोधी गेंदबाजों में यह डर बैठाना जरूरी है कि भारतीय बल्लेबाज हर गेंद पर बड़ा शॉट खेलने को तैयार हैं।

    रोल बदला, इरादा नहीं
    तिलक ने अपने बदले बल्लेबाजी क्रम पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि टीम को जहां जरूरत हो, वह वहां खेलने के लिए तैयार हैं। आईपीएल में मुंबई इंडियंस के लिए भी वह इसी तरह की भूमिका निभा चुके हैं और भारतीय टीम में भी अलग-अलग स्थानों पर खेल चुके हैं। उनका मानना है कि विकेट गिरने के तुरंत बाद दबाव तोड़ने के लिए आक्रामक शॉट जरूरी होते हैं।

    250 के पार जाने का लक्ष्य
    तिलक ने साफ किया कि टीम का इरादा सिर्फ बड़ा स्कोर बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि 250 के आंकड़े को लगातार पार करने का है। उन्होंने बताया कि मैच से पहले टीम ने पिछले साल की अपनी टी20 बल्लेबाजी के वीडियो देखे, जिससे आत्मविश्वास बढ़ा। अब यही आक्रामक सोच आगे के मुकाबलों में भी जारी रखने की तैयारी है।

    युवा बल्लेबाज का यह आत्मविश्वास साफ संकेत देता है कि भारतीय टीम सिर्फ जीतने नहीं, बल्कि दबदबा बनाने के इरादे से मैदान में उतर रही है।

  • OTT पर दबकर रह गई सिराई, जय भीम जैसा टॉर्चर और इंसाफ की लड़ाई हिला देगी अंदर तक

    OTT पर दबकर रह गई सिराई, जय भीम जैसा टॉर्चर और इंसाफ की लड़ाई हिला देगी अंदर तक


    नई दिल्ली । ओटीटी की भीड़ में कई बार बेहतरीन फिल्में चुपचाप आकर निकल जाती हैं। साल 2026 में ZEE5 पर रिलीज हुई तमिल फिल्म सिराई भी कुछ ऐसी ही फिल्म है जो बड़े स्टार्स की फिल्मों के शोर में दब गई। कहा जा रहा है कि धुरंधर की चर्चा के बीच इस फिल्म पर कम लोगों की नजर पड़ी लेकिन कंटेंट के मामले में यह किसी से कम नहीं। IMDb पर 8.2 की दमदार रेटिंग के साथ सिराई उन फिल्मों में गिनी जा रही है जो सिस्टम की सच्चाई को बेधड़क सामने रखती हैं।

    फिल्म में लीड रोल निभाया है विक्रम प्रभु ने। उनके साथ कई अनुभवी तमिल कलाकार नजर आते हैं जो कहानी को मजबूत आधार देते हैं। यह फिल्म तमिल में बनी है लेकिन अच्छी बात यह है कि ओटीटी पर यह हिंदी में भी उपलब्ध है इसलिए भाषा दर्शकों के लिए रुकावट नहीं बनती।

    सिराई का अर्थ है जेल या कैद और फिल्म का मूल भी इसी विचार के इर्द-गिर्द घूमता है। कहानी एक ईमानदार पुलिस अधिकारी की है जिसे एक हाई-प्रोफाइल कैदी को एक जेल से दूसरी जेल में ट्रांसफर करने की जिम्मेदारी मिलती है। शुरुआत में यह एक सामान्य ड्यूटी लगती है लेकिन सफर के दौरान उसे पता चलता है कि जिस कैदी को वह ले जा रहा है वह असल में निर्दोष है। उसे कुछ ताकतवर लोगों ने अपने फायदे के लिए फंसाया है।

    यहीं से कहानी में असली संघर्ष शुरू होता है। एक तरफ सिस्टम का दबाव और वर्दी की जिम्मेदारी दूसरी तरफ इंसानियत और अंतरात्मा की आवाज। क्या वह आदेश का पालन करेगा या सच का साथ देगा? फिल्म इसी नैतिक दुविधा को बेहद सधे हुए अंदाज में पेश करती है।

    इस फिल्म की खास बात यह है कि इसमें मसाला एंटरटेनमेंट वाला ओवर-द-टॉप एक्शन नहीं है। यहां सब कुछ रियलिस्टिक है पुलिसिया पूछताछ मानसिक दबाव सत्ता का खेल और कानून की खामियां। यही यथार्थवाद फिल्म को असरदार बनाता है।

    अगर आपको जय भीम और विसरानई जैसी फिल्में पसंद आई थीं तो सिराई भी आपको जरूर प्रभावित करेगी। यह सिर्फ पुलिस और कैदी की कहानी नहीं है बल्कि यह न्याय व्यवस्था की परतें खोलती है और सवाल पूछती है कि सच की कीमत आखिर कितनी भारी होती है।

    विक्रम प्रभु ने अपने किरदार में गजब की गंभीरता दिखाई है। उनके चेहरे के भाव आंखों की बेचैनी और भीतर चल रहे द्वंद्व को उन्होंने बारीकी से निभाया है। फिल्म आपको अंत तक बांधे रखती है और सोचने पर मजबूर करती है। 

  • बजट के बाद वेबिनार में पीएम का विजन: ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ की रफ्तार और तेज करने का आह्वान

    बजट के बाद वेबिनार में पीएम का विजन: ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ की रफ्तार और तेज करने का आह्वान

    नई दिल्ली। केंद्रीय बजट के बाद आयोजित वेबिनार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “विकसित भारत के लिए प्रौद्योगिकी, सुधार और वित्त” विषय पर देश को स्पष्ट संदेश दिया-बजट कोई तात्कालिक लाभ का दस्तावेज नहीं, बल्कि दीर्घकालिक राष्ट्रीय रोडमैप है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधन में उन्होंने कहा कि बजट के बाद वेबिनार की परंपरा अब मजबूत हो चुकी है और इससे योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में गति मिलती है।

    शॉर्ट टर्म नहीं, लॉन्ग टर्म विजन का दस्तावेज
    प्रधानमंत्री ने कहा कि बजट को शेयर बाजार की चाल या आयकर प्रस्तावों के चश्मे से देखना अधूरा आकलन है। असल मायने में बजट इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार, क्रेडिट की सुगमता, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, पारदर्शिता और जीवन को आसान बनाने वाली नीतियों का समग्र खाका होता है। उन्होंने 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को दोहराते हुए कहा कि हर बजट उसी लंबी यात्रा का एक चरण है।

    टेक्नोलॉजी आधारित गवर्नेंस पर जोर
    पीएम ने कहा कि बीते दशक में भारत ने जो लचीलापन दिखाया है, वह सुधारों का परिणाम है। प्रक्रियाओं का सरलीकरण, टेक्नोलॉजी आधारित शासन और संस्थागत मजबूती ने अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी है। उन्होंने एआई, ब्लॉकचेन और डेटा एनालिटिक्स के उपयोग से पारदर्शिता, जवाबदेही और गति बढ़ाने की बात कही। साथ ही शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत कर जमीनी असर सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

    इंफ्रास्ट्रक्चर में रिकॉर्ड निवेश, निजी क्षेत्र को संकेत
    प्रधानमंत्री ने बताया कि 11 वर्ष पहले सार्वजनिक पूंजीगत व्यय लगभग 2 लाख करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। उन्होंने कहा कि यह विशाल निवेश निजी क्षेत्र के लिए स्पष्ट संकेत है कि वह भी नई ऊर्जा के साथ आगे आए। परियोजना स्वीकृति, लागत-लाभ विश्लेषण और लाइफ साइकल कॉस्टिंग को मजबूत कर देरी और अपव्यय रोकने की आवश्यकता बताई।

    बॉन्ड मार्केट और विदेशी निवेश को बढ़ावा
    उन्होंने कहा कि दीर्घकालिक वित्त को मजबूत करने के लिए बॉन्ड बाजार को अधिक सक्रिय और तरल बनाना जरूरी है। बॉन्ड की खरीद-बिक्री प्रक्रिया को सरल किया जा रहा है और निवेशक-अनुकूल ढांचा तैयार किया जा रहा है। वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाकर वित्तीय तंत्र को अधिक पूर्वानुमेय बनाने पर भी बल दिया गया।

    ‘रिफॉर्म पार्टनरशिप चार्टर’ का प्रस्ताव
    प्रधानमंत्री ने सरकार, उद्योग, वित्तीय संस्थानों और अकादमिक जगत के बीच एक स्पष्ट ‘रिफॉर्म पार्टनरशिप चार्टर’ बनाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि नीति की सफलता घोषणाओं से नहीं, बल्कि उत्कृष्ट क्रियान्वयन से तय होती है। अब चर्चा का समय नहीं, बल्कि बजट को जमीन पर तेजी से लागू करने का समय है।

  • जलन, लालच और शक की आग में बुझ गया सितारा: लैला खान हत्याकांड का पूरा सच

    जलन, लालच और शक की आग में बुझ गया सितारा: लैला खान हत्याकांड का पूरा सच


    नई दिल्ली । मायानगरी मुंबई की चकाचौंध के बीच साल 2011 में एक ऐसी घटना घटी, जिसने फिल्म इंडस्ट्री ही नहीं बल्कि पूरे देश को स्तब्ध कर दिया। यह मामला था बॉलीवुड अभिनेत्री लैला खान और उनके परिवार की रहस्यमयी गुमशुदगी का। लैला ने सुपरस्टार राजेश खन्ना के साथ फिल्म वफा में काम किया था और अपनी खूबसूरती व अदाकारी के कारण चर्चा में रहती थीं। लेकिन अचानक उनका और उनके परिवार के पांच अन्य सदस्यों का यूं गायब हो जाना एक बड़े रहस्य में बदल गया।

    मुंबई के एक पॉश इलाके से लैला, उनकी मां सेलिना, तीन भाई बहन और एक चचेरी बहन के लापता होने की खबर ने सनसनी फैला दी। करीब एक साल तक कोई ठोस सुराग नहीं मिला। पुलिस की जांच जारी रही, लेकिन परिवार का कोई अता पता नहीं था। मामला तब और पेचीदा हो गया जब शक की सुई लैला के सौतेले पिता की ओर घूमी।

    पूछताछ के दौरान जो सच सामने आया, उसने सबको झकझोर दिया। सौतेले पिता ने कबूल किया कि उसने ही इगतपुरी नासिक के पास स्थित अपने फार्महाउस पर परिवार के सभी छह सदस्यों की हत्या कर दी और शवों को वहीं दफना दिया। हत्या की वजह थी शक, जलन और संपत्ति को लेकर डर। उसे संदेह था कि लैला की मां का किसी और से संबंध है और वह बच्चों के साथ दुबई बसने की योजना बना रही है। उसे भय था कि परिवार उससे अलग होकर उसे संपत्ति से बेदखल कर देगा।

    बताया गया कि फार्महाउस पर किसी बात को लेकर तीखी बहस हुई। गुस्से में आरोपी ने पहले सेलिना पर हमला किया और फिर एक एक कर सभी को मौत के घाट उतार दिया। अपने अपराध को छिपाने के लिए उसने फार्महाउस के अहाते में गड्ढा खोदकर सभी शवों को दफना दिया और ऊपर से आग लगाकर सबूत मिटाने की कोशिश की। यह वारदात इतनी निर्मम थी कि जिसने भी इसके बारे में सुना, सन्न रह गया।

    मामला वर्षों तक अदालत में चलता रहा। पुलिस ने सबूत जुटाए, गवाह पेश हुए और लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद आखिरकार 2024 में अदालत ने आरोपी सौतेले पिता को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई। करीब 13 साल बाद न्याय मिला, लेकिन तब तक एक उभरती अभिनेत्री और उसका पूरा परिवार इस दुनिया से जा चुका था।

    लैला खान हत्याकांड ने यह साबित कर दिया कि शक और लालच जब रिश्तों पर हावी हो जाते हैं, तो अंजाम बेहद खौफनाक होता है। ग्लैमर की दुनिया की एक चमकती जिंदगी, पारिवारिक साजिश और निर्ममता की भेंट चढ़ गई। यह मामला आज भी याद दिलाता है कि अपराध चाहे जितना छिपाया जाए, सच एक दिन सामने जरूर आता है।

  • केरल अब केरलम: जानिए नाम बदलने पीछे किसका था आइडिया, ये है पूरी कहानी

    केरल अब केरलम: जानिए नाम बदलने पीछे किसका था आइडिया, ये है पूरी कहानी


    नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने हाल ही में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए केरल राज्य का नाम बदलकर आधिकारिक तौर पर केरलम करने की मंजूरी दे दी है। इस फैसले के साथ ही अब सरकारी दस्तावेजों रिपोर्टों और आम बोलचाल में राज्य को उसके पारंपरिक और भाषाई रूप में पहचान मिलेगी।

    नाम बदलने का आइडिया और सूत्रधार
    इस बदलाव के सबसे बड़े सूत्रधार के रूप में पूर्व केंद्रीय मंत्री और केरल भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर का नाम सामने आया है। सूत्रों के अनुसार चंद्रशेखर ने कुछ महीने पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर राज्य का नाम बदलकर केरलम करने का आग्रह किया था। कैबिनेट की हरी झंडी मिलने के बाद उन्होंने न केवल खुद इस नए नाम का इस्तेमाल शुरू कर दिया है बल्कि दूसरों को भी केरल की जगह केरलम कहने के लिए टोकते और सही करते हैं। चंद्रशेखर का तर्क है कि केरलम शब्द राज्य की मलयाली पहचान संस्कृति और इतिहास को अधिक सटीक रूप से दर्शाता है। उनका कहना है कि यह केवल नाम का बदलाव नहीं है बल्कि क्षेत्रीय गौरव को सम्मान देने का प्रयास है।

    रेल मंत्री के कार्यक्रम में केरलम का जश्न

    कैबिनेट के इस फैसले का असर दिल्ली के गलियारों में भी दिखा। गुरुवार को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेलवे सुधारों पर प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की लेकिन वहां का सबका ध्यान केरलम लंच ने खींचा। अधिकारियों और मीडियाकर्मियों के लिए केरलम की पारंपरिक रसोई सजाई गई थी। दोपहर के भोजन में अप्पम इडियप्पम वेजिटेबल स्टू और लाल चावल के साथ केरल शैली का वरथु अर्चा सांभर और रसम परोसा गया। इसके अलावा मेन्यू में थोर्न एरीसेरी पापड़म दही और तीन तरह के अचार भी शामिल थे।

    क्यों बदला गया नाम
    राज्य का नाम बदलने की मांग लंबे समय से लंबित थी। मलयालम भाषा में राज्य को हमेशा से केरलम कहा जाता रहा है जबकि अंग्रेजी और हिंदी में इसे केरल के रूप में जाना जाता था। संविधान की पहली अनुसूची में बदलाव के जरिए अब इसे हर भाषा में केरलम के रूप में स्थापित किया जा रहा है। नाम बदलने की इस प्रक्रिया को सांस्कृतिक पुनरुद्धार के रूप में देखा जा रहा है। राजीव चंद्रशेखर जैसे नेताओं का मानना है कि यह कदम मलयाली गौरव को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान देगा। अब केंद्र की मंजूरी मिलने के बाद आने वाले समय में सभी आधिकारिक संचार और महत्वपूर्ण मील के पत्थरों पर यह बदलाव नजर आएगा।

  • दुश्मन की पनडुब्बियों का शिकारी ‘अंजदीप’ नौसेना में शामिल, बढ़ी समुद्री ताकत

    दुश्मन की पनडुब्बियों का शिकारी ‘अंजदीप’ नौसेना में शामिल, बढ़ी समुद्री ताकत

    नई दिल्ली। भारतीय नौसेना की ताकत में शुक्रवार को बड़ा इजाफा हुआ जब स्वदेशी रूप से निर्मित पनडुब्बी रोधी उथले जल का युद्धपोत ‘अंजदीप’ औपचारिक रूप से बेड़े में शामिल किया गया। चेन्नई के ऐतिहासिक कोरोमंडल तट पर आयोजित समारोह में नौसेना प्रमुख दिनेश के त्रिपाठी ने इसे गौरव का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक पोत का शामिल होना नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की समुद्री शक्ति का प्रतीक है।

    ‘डॉल्फिन हंटर’ की खासियत: पनडुब्बी ढूंढे, पीछा करे और करे निष्क्रिय
    ‘अंजदीप’ को खास तौर पर दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें नाकाम करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसे ‘डॉल्फिन हंटर’ की भूमिका के लिए तैयार किया गया है। इसमें अत्याधुनिक स्वदेशी पनडुब्बी रोधी हथियार और सेंसर पैकेज लगे हैं। पोत में हल माउंटेड सोनार ‘अभय’ भी लगाया गया है, जो समुद्र की गहराइयों में छिपे खतरों को पहचानने में सक्षम है। इसके अलावा यह हल्के टॉरपीडो और पनडुब्बी रोधी रॉकेटों से लैस है।

    77 मीटर लंबा यह युद्धपोत उच्च गति वाली वाटर-जेट प्रोपल्शन प्रणाली से सुसज्जित है, जो इसे 25 समुद्री मील की अधिकतम गति प्रदान करती है। तेज प्रतिक्रिया और तटीय इलाकों में फुर्तीले संचालन के लिए इसे खास तौर पर तैयार किया गया है। पनडुब्बी रोधी भूमिका के अलावा यह तटीय निगरानी, कम तीव्रता वाले समुद्री अभियान तथा खोज एवं बचाव कार्यों में भी सक्षम है।

    2026 तक 15 और पोत, 2035 तक 200+ का लक्ष्य
    नौसेना प्रमुख ने बताया कि वर्ष 2026 तक लगभग 15 और युद्धपोत शामिल किए जाने की योजना है, जो अब तक की सर्वाधिक सम्मिलन दर होगी। वर्ष 2035 तक भारतीय नौसेना को 200 से अधिक पोतों वाली ताकत बनाना लक्ष्य है। वर्तमान में 50 से अधिक पोत भारतीय शिपयार्डों में निर्माणाधीन हैं। 2047 तक पूर्णतः आत्मनिर्भर नौसैनिक शक्ति बनने का विजन रखा गया है।

    ऐतिहासिक विरासत और रणनीतिक संदेश
    ‘अंजदीप’ का नाम उस द्वीप पर रखा गया है जिसने 1961 में गोवा मुक्ति अभियान के दौरान निर्णायक भूमिका निभाई थी। यह अपने पूर्ववर्ती पेट्या श्रेणी के युद्धपोत का उत्तराधिकारी है, जिसने 1972 से 2003 तक राष्ट्र की सेवा की। उल्लेखनीय है कि दिनेश के त्रिपाठी स्वयं 1986-87 में इसी श्रेणी के पोत पर सब-लेफ्टिनेंट के रूप में तैनात रह चुके हैं।

    नौसेना प्रमुख ने हिंद महासागर क्षेत्र के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि प्रतिवर्ष लगभग 1.2 लाख जहाज यहां से गुजरते हैं, जो विश्व के दो-तिहाई तेल परिवहन और आधे कंटेनर यातायात का वहन करते हैं। लाल सागर और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में हालिया तनाव ने समुद्री मार्गों की संवेदनशीलता को उजागर किया है। अक्टूबर 2023 से लाल सागर में भारतीय नौसेना की तैनाती ने करीब 400 व्यापारी जहाजों को सुरक्षित पारगमन सुनिश्चित किया, जिनमें 16.5 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक तेल और अन्य माल शामिल था।

  • ट्रंप ने यूक्रेन और ईरान वार्ता की कमान अपने दामाद और दोस्त के हाथों में सौंपी

    ट्रंप ने यूक्रेन और ईरान वार्ता की कमान अपने दामाद और दोस्त के हाथों में सौंपी


    वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दामाद जेरेड कुश्नर और पुराने मित्र स्टीव विटकॉफ को दुनिया के दो सबसे बड़े संकटों यूक्रेन युद्ध और ईरान के तनाव को संभालने की जिम्मेदारी दी है। गुरुवार को दोनों ने स्विट्जरलैंड के जिनेवा में अलग-अलग बैठकों में इन मुद्दों पर चर्चा की।

    जिनेवा में व्यस्त कूटनीतिक दौरा
    कुश्नर और विटकॉफ ने अपने जिनेवा दौरे की शुरुआत ओमान के राजदूत के आवास से की जहां उन्होंने ईरानी अधिकारियों से मुलाकात की। इसका उद्देश्य तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर एक समझौते पर मुहर लगाना और अमेरिका तथा इजरायल द्वारा संभावित हमलों को रोकना था। इसके कुछ ही घंटों बाद दोनों ने इंटरकॉन्टिनेंटल होटल में यूक्रेनी अधिकारियों से बैठक की। रूसी आक्रमण अब अपने पांचवें वर्ष में है इसलिए यह वार्ता बेहद अहम मानी जा रही थी। इसके बाद फोर सीजन्स होटल में रूस और यूक्रेन के प्रतिनिधियों से अलग-अलग मंजिलों पर मुलाकात की गई। शाम तक दोनों फिर से ओमान के राजदूत के आवास लौटे और गुरुवार देर रात अमेरिका के लिए रवाना हुए।

    गाजा शांति समझौते में भूमिका

    कुश्नर और विटकॉफ की जिम्मेदारी केवल यूरोप या ईरान तक सीमित नहीं है। एक सप्ताह से भी कम समय पहले उन्होंने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की उद्घाटन बैठक में हिस्सा लिया था। यह संस्था गाजा पट्टी में हमास और इजरायल के बीच युद्धविराम सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है।

    ट्रंप की कूटनीतिक रणनीति
    ट्रंप की यह कवायद उनकी कूटनीतिक रणनीति को साफ दर्शाती है। वे अमेरिकी सरकार के पारंपरिक तंत्र पर भरोसा करने की बजाय अपनी सबसे अहम प्राथमिकताओं के लिए भरोसेमंद सहयोगियों दामाद और मित्र पर निर्भर हैं।

    विशेषज्ञों की चिंता और वाइट हाउस का बचाव

    कई विशेषज्ञों ने कहा है कि तीन बड़े और जटिल मुद्दों को केवल दो लोग संभालना चुनौतीपूर्ण है। ‘कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस’ के वरिष्ठ फेलो आरोन डेविड मिलर ने कहा कि हर वार्ता स्वयं में कई जटिल विवरणों का महासागर है। वहीं वाइट हाउस के एक अधिकारी ने इनका बचाव करते हुए कहा कि कुश्नर और विटकॉफ का सफलता का ट्रैक रिकॉर्ड और समय प्रबंधन उन्हें इन जिम्मेदारियों के लिए सक्षम बनाता है। दोनों को नियमित रूप से खुफिया ब्रीफिंग भी दी जाती है।

    व्यावसायिक हितों पर उठ रहे सवाल

    दोनों के बड़े व्यावसायिक हितों के कारण उनकी भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। जेरेड कुश्नर की निवेश फर्म ‘एफिनिटी पार्टनर्स’ अरबों डॉलर का प्रबंधन करती है जिसमें कतर के सॉवरेन वेल्थ फंड का पैसा शामिल है। स्टीव विटकॉफ की क्रिप्टो फर्म ‘वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल’ में हिस्सेदारी है जो अबू धाबी सरकार से जुड़े फंड्स के साथ मध्य पूर्व में सौदे कर रही है। इसके अलावा विटकॉफ और रूस के वार्ताकार किरिल दिमित्रीव ने युद्ध के बाद आर्थिक समझौतों पर चर्चा की। रिपब्लिकन सीनेटर थॉम टिलिस ने कहा कि ये अच्छे व्यापारी हो सकते हैं लेकिन सीनेट की मंजूरी या सरकारी निगरानी के अधीन नहीं हैं।

    यूक्रेन का नजरिया

    यूक्रेन ने कुश्नर और विटकॉफ की भागीदारी का स्वागत किया है। मार्च की शुरुआत में रूसी अधिकारियों के साथ अगली त्रिपक्षीय चर्चा की उम्मीद है जिससे राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की और व्लादिमीर पुतिन की बैठक का रास्ता साफ हो सके। अमेरिका में यूक्रेन की राजदूत ओल्गा स्टेफनिशिना ने कहा कि सीधे राष्ट्रपति ट्रंप से संपर्क होने की वजह से वे दोनों उनके लिए उपयोगी हैं। हालांकि ट्रंप के पहले कार्यकाल में यूक्रेन वार्ता के विशेष दूत रहे कर्ट वोल्कर ने माना कि सीधा संपर्क सकारात्मक है लेकिन कुश्नर और विटकॉफ को इन मुद्दों की पूरी गहन समझ नहीं है।