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  • नीरव मोदी की आखिरी कानूनी उम्मीद भी खत्म, यूरोपीय अदालत से झटका, भारत प्रत्यर्पण का रास्ता लगभग साफ

    नीरव मोदी की आखिरी कानूनी उम्मीद भी खत्म, यूरोपीय अदालत से झटका, भारत प्रत्यर्पण का रास्ता लगभग साफ


    नई दिल्ली।
    पंजाब नेशनल बैंक से जुड़े बहुचर्चित बैंक धोखाधड़ी मामले के मुख्य आरोपी और भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी के भारत प्रत्यर्पण का रास्ता अब लगभग साफ माना जा रहा है। यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स से भी राहत नहीं मिलने के बाद उसके पास उपलब्ध सभी प्रमुख कानूनी विकल्प समाप्त हो चुके हैं। अब मामला मुख्य रूप से ब्रिटेन की प्रशासनिक प्रक्रिया पर निर्भर है, जिसके पूरा होने के बाद उसे भारत लाए जाने की दिशा में अगला कदम उठाया जा सकता है।

    जानकारी के अनुसार नीरव मोदी ने ब्रिटेन की अदालतों से राहत नहीं मिलने के बाद अप्रैल 2026 में यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स का दरवाजा खटखटाया था। उसने अपने प्रत्यर्पण को रोकने की मांग करते हुए याचिका दायर की थी। हालांकि अदालत ने उसे कोई राहत नहीं दी, जिससे उसके प्रत्यर्पण की राह में मौजूद अंतिम कानूनी बाधा भी समाप्त हो गई है। अब ब्रिटेन की संबंधित एजेंसियां प्रत्यर्पण की औपचारिक प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकती हैं।

    इससे पहले ब्रिटेन की हाई कोर्ट ने भी नीरव मोदी की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उसने प्रत्यर्पण आदेश को चुनौती देने की अनुमति मांगी थी। अदालत ने माना था कि भारत की ओर से जेल की सुरक्षा, कैद की परिस्थितियों और कानूनी अधिकारों को लेकर दिए गए आश्वासन पर्याप्त हैं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि इस मामले में ऐसे असाधारण हालात नहीं हैं, जिनके आधार पर प्रत्यर्पण रोका जाए।

    नीरव मोदी ने अपनी याचिकाओं में यह तर्क दिया था कि भारत लौटने पर उसे प्रताड़ना और अनुचित व्यवहार का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि जांच एजेंसियों और भारतीय पक्ष ने इन दावों का विरोध करते हुए अदालत में विस्तृत तथ्य और सुरक्षा संबंधी आश्वासन प्रस्तुत किए। इन्हीं आधारों पर ब्रिटेन की अदालतों ने उसके तर्कों को स्वीकार नहीं किया और प्रत्यर्पण प्रक्रिया को वैध माना।

    यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स में दायर याचिका की सुनवाई गोपनीय रही। अदालत ने प्रक्रिया के दौरान मामले की जानकारी सार्वजनिक नहीं की थी। अब वहां से भी राहत नहीं मिलने के बाद राजनयिक स्तर पर यह माना जा रहा है कि कानूनी दृष्टि से प्रत्यर्पण के खिलाफ कोई बड़ा अवरोध शेष नहीं बचा है। इसके बाद संबंधित प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी होने पर नीरव मोदी को भारत भेजने की प्रक्रिया तेज हो सकती है।

    नीरव मोदी मार्च 2019 से लंदन की वैंड्सवर्थ जेल में बंद है। उसके खिलाफ पंजाब नेशनल बैंक से जुड़े हजारों करोड़ रुपये के कथित बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में जांच चल रही है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो और प्रवर्तन निदेशालय लंबे समय से उसके प्रत्यर्पण की कोशिश कर रहे हैं ताकि भारत में उसके खिलाफ लंबित मामलों की सुनवाई आगे बढ़ाई जा सके।

    ब्रिटेन की अदालतों में नीरव मोदी ने अपने पक्ष में कई कानूनी दलीलें दी थीं। इनमें भारत की जेलों की स्थिति, मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दे और पूर्व के कुछ मामलों का हवाला भी शामिल था। लेकिन अदालत ने प्रत्येक स्तर पर उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद उसके तर्कों को पर्याप्त आधार नहीं माना। अब माना जा रहा है कि यदि प्रशासनिक प्रक्रिया तय समय पर पूरी होती है तो नीरव मोदी का भारत प्रत्यर्पण जल्द संभव हो सकता है, जिससे देश के सबसे चर्चित आर्थिक अपराध मामलों में कानूनी कार्रवाई को नई गति मिल सकती है।

  • आमरस बनाम मैंगो शेक: दोनों में किसमें ज्यादा पोषण, कम कैलोरी और बेहतर फायदे? जानिए पूरी तुलना

    आमरस बनाम मैंगो शेक: दोनों में किसमें ज्यादा पोषण, कम कैलोरी और बेहतर फायदे? जानिए पूरी तुलना

    नई दिल्ली । गर्मियों का मौसम आते ही आम से बने व्यंजनों की मांग तेजी से बढ़ जाती है। इनमें मैंगो शेक और आमरस सबसे अधिक पसंद किए जाने वाले विकल्प हैं। दोनों का स्वाद लाजवाब होता है और दोनों ही पके हुए आम से तैयार किए जाते हैं, लेकिन इन्हें बनाने की विधि, पोषण मूल्य और स्वास्थ्य पर प्रभाव एक-दूसरे से काफी अलग होता है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि दोनों में से कौन-सा विकल्प आपके लिए अधिक फायदेमंद साबित हो सकता है।

    मैंगो शेक एक ठंडा और क्रीमी पेय है, जिसे आम के गूदे में दूध मिलाकर तैयार किया जाता है। कई लोग इसमें स्वाद बढ़ाने के लिए चीनी, ड्राई फ्रूट्स, आइसक्रीम या क्रीम भी मिलाते हैं। इसकी वजह से यह अधिक गाढ़ा, स्वादिष्ट और ऊर्जा से भरपूर बन जाता है। गर्मी के दिनों में यह शरीर को तुरंत ऊर्जा देने वाला पेय माना जाता है और लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराता है।

    दूसरी ओर, आमरस पारंपरिक भारतीय भोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसे केवल पके हुए आम के गूदे को अच्छी तरह मसलकर तैयार किया जाता है। कई जगहों पर इसमें इलायची या केसर जैसी प्राकृतिक खुशबू वाली सामग्री मिलाई जाती है, लेकिन इसका मूल स्वाद आम की प्राकृतिक मिठास पर ही आधारित रहता है। आमरस को अक्सर पूरी या अन्य पारंपरिक व्यंजनों के साथ परोसा जाता है।

    पोषण की दृष्टि से देखें तो दोनों में विटामिन ए, विटामिन सी, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट जैसे कई महत्वपूर्ण पोषक तत्व मौजूद रहते हैं, क्योंकि दोनों का मुख्य आधार आम ही है। हालांकि मैंगो शेक में दूध और अतिरिक्त चीनी मिलाने से इसकी कैलोरी, फैट और शर्करा की मात्रा बढ़ जाती है। यही कारण है कि यह अधिक ऊर्जा प्रदान करता है, लेकिन वजन नियंत्रित रखने वाले लोगों के लिए सीमित मात्रा में ही उपयुक्त माना जाता है।

    वहीं बिना अतिरिक्त चीनी या अन्य सामग्री के तैयार किया गया आमरस अपेक्षाकृत हल्का विकल्प माना जाता है। इसमें प्राकृतिक मिठास बनी रहती है और अतिरिक्त फैट नहीं होता। हालांकि इसमें भी आम के कारण प्राकृतिक शर्करा पर्याप्त मात्रा में होती है, इसलिए इसका सेवन भी संतुलित मात्रा में करना बेहतर रहता है।

    दोनों विकल्पों का उपयोग अलग-अलग जरूरतों के अनुसार किया जा सकता है। यदि किसी को अधिक ऊर्जा और लंबे समय तक पेट भरा रखने वाला पेय चाहिए तो मैंगो शेक बेहतर विकल्प हो सकता है। वहीं यदि कोई व्यक्ति आम के प्राकृतिक स्वाद का आनंद लेना चाहता है और अतिरिक्त फैट से बचना चाहता है तो आमरस अधिक उपयुक्त माना जा सकता है।

    खानपान की परंपरा में भी दोनों की अलग पहचान है। आमरस लंबे समय से पारंपरिक भारतीय भोजन का हिस्सा रहा है, जबकि मैंगो शेक आधुनिक जीवनशैली के साथ घरों, कैफे और रेस्तरां में समान रूप से लोकप्रिय हो चुका है। दोनों का स्वाद और उपयोग अलग-अलग परिस्थितियों में पसंद किया जाता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों ही विकल्प पौष्टिक हो सकते हैं, बशर्ते इनका सेवन संतुलित मात्रा में किया जाए। अतिरिक्त चीनी, क्रीम या आइसक्रीम से बचकर तैयार किए गए मैंगो शेक और बिना अतिरिक्त मिठास वाला आमरस, दोनों ही गर्मियों में स्वाद और पोषण का अच्छा संतुलन प्रदान कर सकते हैं।

  • मुंबई-दक्षिण गुजरात में बारिश बनी रेल संकट की वजह, पश्चिम रेलवे की 40 से अधिक ट्रेनें प्रभावित; हजारों यात्रियों को झेलनी पड़ी परेशानी

    मुंबई-दक्षिण गुजरात में बारिश बनी रेल संकट की वजह, पश्चिम रेलवे की 40 से अधिक ट्रेनें प्रभावित; हजारों यात्रियों को झेलनी पड़ी परेशानी

    नई दिल्ली। मुंबई और दक्षिण गुजरात में मानसून की तेज बारिश ने सोमवार को पश्चिम रेलवे के रेल परिचालन को गंभीर रूप से प्रभावित कर दिया। कई स्थानों पर रेल पटरियों पर जलभराव होने से लंबी दूरी की ट्रेनों की आवाजाही बाधित हो गई। इसके चलते 40 से अधिक ट्रेन सेवाएं प्रभावित हुईं और हजारों यात्रियों को देरी, रद्दीकरण तथा मार्ग परिवर्तन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा। स्थिति को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने राहत एवं सहायता कार्य तेज करते हुए प्रमुख स्टेशनों पर यात्रियों के लिए भोजन, पेयजल और सहायता केंद्रों की व्यवस्था की है।

    सबसे अधिक असर वसई रोड-विरार तथा सफाले-पालघर रेलखंड पर देखने को मिला, जहां भारी जलभराव के कारण ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित हुई। दोपहर तक विरार, वाणगांव, पालघर, दहानू रोड और वलसाड सहित कई स्टेशनों पर लंबी दूरी की अनेक ट्रेनों को रोकना पड़ा। जलभराव के कारण कई रेलगाड़ियों की गति धीमी करनी पड़ी, जबकि कुछ ट्रेनों को सुरक्षा कारणों से निर्धारित मार्ग पर आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी गई।

    रेलवे अधिकारियों के अनुसार, दिनभर में 40 से अधिक ट्रेन सेवाएं किसी न किसी रूप में प्रभावित रहीं। इनमें कई ट्रेनों का समय बदला गया, कुछ को रद्द करना पड़ा और कई रेलगाड़ियों को उनके निर्धारित गंतव्य तक पहुंचने से पहले ही समाप्त कर दिया गया। इससे देश के विभिन्न हिस्सों से आने-जाने वाले यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा।

    महाराष्ट्र के पालघर जिले में स्थिति सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण रही, जहां सुबह कुछ ही घंटों के भीतर अत्यधिक वर्षा दर्ज की गई। लगातार बारिश के कारण रेल पटरियां जलमग्न हो गईं, जिससे परिचालन सामान्य बनाए रखना मुश्किल हो गया। इसके प्रभाव से कई प्रमुख एक्सप्रेस ट्रेनें रास्ते में फंस गईं। वहीं, गुजरात की ओर से आने वाली कुछ ट्रेनों को एहतियातन वापी और सूरत जैसे स्टेशनों पर रोक दिया गया ताकि प्रभावित रेलखंड पर अतिरिक्त दबाव न बढ़े।

    यात्रियों की सुविधा के लिए पश्चिम रेलवे ने राहत व्यवस्था भी शुरू की। विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों के सहयोग से फंसे यात्रियों को भोजन और पेयजल उपलब्ध कराया गया। प्रमुख स्टेशनों पर सहायता केंद्र स्थापित किए गए, जहां यात्रियों को ट्रेन संचालन से जुड़ी जानकारी और आवश्यक सहयोग दिया जा रहा है। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और मौसम की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

    भारी बारिश का असर केवल लंबी दूरी की ट्रेनों तक सीमित नहीं रहा। मुंबई की उपनगरीय लोकल रेल सेवाएं भी प्रभावित हुईं। बोरीवली और चर्चगेट के बीच लोकल ट्रेनें निर्धारित समय से देरी से चलीं, जबकि विरार-दहानू खंड पर परिचालन सबसे अधिक प्रभावित रहा। इससे दैनिक यात्रियों को भी कार्यालय और अन्य गंतव्यों तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

    रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे यात्रा पर निकलने से पहले अपनी ट्रेन की ताजा स्थिति की जानकारी अवश्य प्राप्त करें। अधिकारियों का कहना है कि मौसम की परिस्थितियों के अनुसार परिचालन में आवश्यक बदलाव किए जा रहे हैं और जैसे ही जलभराव की स्थिति सामान्य होगी, ट्रेन सेवाओं को पूरी तरह बहाल करने का प्रयास किया जाएगा। फिलहाल प्रभावित रेलखंडों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और आवश्यक तकनीकी एवं राहत दल मौके पर तैनात हैं।

  • इंडोनेशिया पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी का भव्य राजकीय स्वागत, फाइटर जेट्स ने किया एस्कॉर्ट; राष्ट्रपति प्रबोवो ने एयरपोर्ट पर की अगवानी

    इंडोनेशिया पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी का भव्य राजकीय स्वागत, फाइटर जेट्स ने किया एस्कॉर्ट; राष्ट्रपति प्रबोवो ने एयरपोर्ट पर की अगवानी

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को तीन देशों की अपनी आधिकारिक विदेश यात्रा के पहले चरण में इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता पहुंच गए। इंडोनेशिया पहुंचने पर उनका विशेष राजकीय सम्मान के साथ स्वागत किया गया। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो स्वयं एयरपोर्ट पर मौजूद रहे और उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की अगवानी कर दोनों देशों के बीच मजबूत होते द्विपक्षीय संबंधों का संदेश दिया।

    प्रधानमंत्री के विशेष विमान के इंडोनेशियाई हवाई क्षेत्र में प्रवेश करते ही वहां की वायुसेना के फाइटर जेट्स ने उसे एस्कॉर्ट किया। राजकीय यात्राओं के दौरान दिया जाने वाला यह सम्मान दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास, सामरिक सहयोग और उच्च स्तरीय कूटनीतिक संबंधों का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है। जकार्ता पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री का औपचारिक स्वागत भी निर्धारित राजकीय प्रोटोकॉल के तहत किया गया।

    प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो द्वारा व्यक्तिगत रूप से किए गए स्वागत के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति की उपस्थिति भारत और इंडोनेशिया के बीच गहरी मित्रता तथा परस्पर सम्मान को दर्शाती है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस यात्रा के दौरान होने वाली द्विपक्षीय वार्ताएं दोनों देशों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी को नई ऊर्जा प्रदान करेंगी।

    भारत और इंडोनेशिया ने वर्ष 2018 में अपने संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया था। इसके बाद से रक्षा, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, निवेश, डिजिटल सहयोग, ऊर्जा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान सहित अनेक क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार मजबूत हुआ है। मौजूदा यात्रा के दौरान भी इन विषयों पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है, ताकि दोनों देशों के बीच सहयोग को और व्यापक बनाया जा सके।

    प्रधानमंत्री अपने इंडोनेशिया प्रवास के दौरान वहां रह रहे भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे। भारतीय प्रवासी लंबे समय से दोनों देशों के बीच सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। इस मुलाकात के दौरान समुदाय के साथ संवाद और द्विपक्षीय संबंधों में उनकी भागीदारी पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।

    यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो योग्याकार्ता स्थित ऐतिहासिक प्रम्बानन मंदिर परिसर का भी दौरा करेंगे। यह स्थल भारत और इंडोनेशिया के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है। दोनों नेताओं का यह दौरा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और साझा ऐतिहासिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में भी अहम माना जा रहा है।

    इंडोनेशिया दौरे के बाद प्रधानमंत्री मोदी अपनी विदेश यात्रा के अगले चरण में ऑस्ट्रेलिया और फिर न्यूजीलैंड जाएंगे। इस दौरान वे दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। चर्चाओं का मुख्य फोकस व्यापार, निवेश, रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, तकनीकी साझेदारी और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने पर रहेगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बदलते रणनीतिक परिदृश्य के बीच प्रधानमंत्री मोदी का यह तीन देशों का दौरा भारत की क्षेत्रीय कूटनीति को नई मजबूती देने वाला माना जा रहा है। इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के साथ बढ़ता सहयोग न केवल आर्थिक और सामरिक संबंधों को नई दिशा देगा, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता, समुद्री सुरक्षा और साझा विकास के एजेंडे को भी आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

  • दुनियाभर के पर्यटकों को आकर्षित कर रही हैं पाकिस्तान की ये मनमोहक जगहें, प्रकृति, इतिहास और एडवेंचर का मिलता है अनूठा अनुभव

    दुनियाभर के पर्यटकों को आकर्षित कर रही हैं पाकिस्तान की ये मनमोहक जगहें, प्रकृति, इतिहास और एडवेंचर का मिलता है अनूठा अनुभव

    नई दिल्ली । दक्षिण एशिया का पड़ोसी देश पाकिस्तान अपनी प्राकृतिक विविधता और ऐतिहासिक धरोहरों के कारण पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां ऊंचे बर्फीले पर्वत, हरी-भरी घाटियां, शांत झीलें, विस्तृत समुद्री तट और ऐतिहासिक स्मारक देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। प्रकृति, रोमांच और सांस्कृतिक विरासत का अनूठा संगम इस देश के कई पर्यटन स्थलों को विशेष पहचान दिलाता है।

    उत्तरी पाकिस्तान में स्थित हुंजा घाटी सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में गिनी जाती है। ऊंचे पर्वतों, स्वच्छ वातावरण और हरियाली से घिरी यह घाटी प्राकृतिक सौंदर्य का शानदार उदाहरण मानी जाती है। यहां ट्रैकिंग, राफ्टिंग, कयाकिंग और अन्य साहसिक गतिविधियों का भी आनंद लिया जा सकता है। शांत वातावरण और पर्वतीय दृश्य इसे प्रकृति प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनाते हैं।

    नीलम घाटी भी अपनी मनमोहक प्राकृतिक छटा के लिए प्रसिद्ध है। ऊंची पर्वत श्रृंखलाएं, बहती नदियां, घने जंगल और शांत वातावरण इसे बेहद आकर्षक बनाते हैं। यहां मौजूद ऐतिहासिक स्थल और प्राकृतिक दृश्य पर्यटकों को अलग अनुभव प्रदान करते हैं। यही कारण है कि यह क्षेत्र फोटोग्राफी और प्रकृति प्रेमियों के बीच विशेष रूप से लोकप्रिय माना जाता है।

    समुद्री पर्यटन पसंद करने वालों के लिए चूर्णा आइलैंड प्रमुख आकर्षण है। अरब सागर में स्थित यह द्वीप अपने साफ पानी और समुद्री जीवन के लिए जाना जाता है। यहां स्कूबा डाइविंग, स्नॉर्कलिंग और क्लिफ डाइविंग जैसी रोमांचक गतिविधियां पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। समुद्र के भीतर की रंग-बिरंगी दुनिया देखने के इच्छुक लोगों के लिए यह स्थान विशेष महत्व रखता है।

    सिंध क्षेत्र का गोरख हिल भी पर्यटन मानचित्र पर तेजी से अपनी पहचान बना रहा है। ऊंचाई पर स्थित यह इलाका अपने चट्टानी परिदृश्य, ठंडे मौसम और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है। यहां से दिखाई देने वाले प्राकृतिक दृश्य पर्यटकों को अलग अनुभव प्रदान करते हैं और एडवेंचर पसंद करने वाले यात्रियों के बीच इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है।

    उत्तर पाकिस्तान के शोगरान और सिरी पाये क्षेत्र भी प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध हैं। यहां तक पहुंचने का सफर भी रोमांच से भरपूर माना जाता है। हरे-भरे घास के मैदान, रंग-बिरंगे फूल और बादलों से घिरी पहाड़ियां इस क्षेत्र को बेहद आकर्षक बनाती हैं। गर्मियों के मौसम में बड़ी संख्या में पर्यटक यहां घूमने पहुंचते हैं।

    कराची के समुद्र तट भी देश के प्रमुख पर्यटन आकर्षणों में शामिल हैं। समुद्र किनारे सूर्यास्त का मनमोहक दृश्य, समुद्री हवाएं और मनोरंजक गतिविधियां पर्यटकों को अपनी ओर खींचती हैं। यहां परिवारों और युवा यात्रियों के लिए अवकाश बिताने के कई विकल्प उपलब्ध हैं।

    इसके अलावा खानपुर डैम साहसिक खेलों के लिए प्रसिद्ध है, जहां जेट स्कीइंग, पैराग्लाइडिंग और अन्य एडवेंचर गतिविधियों का आनंद लिया जा सकता है। वहीं हिंगोल नेशनल पार्क अपनी अनूठी भौगोलिक संरचना, वन्यजीवों और प्राकृतिक दृश्यों के कारण प्रकृति प्रेमियों के बीच लोकप्रिय है। ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत में रुचि रखने वाले पर्यटक सुक्कुर जैसे शहरों का भी रुख करते हैं, जहां प्राचीन स्थापत्य और ऐतिहासिक धरोहरें क्षेत्र की समृद्ध विरासत की झलक प्रस्तुत करती हैं।

  • इंडोनेशिया के 1100 साल पुराने प्रम्बानन मंदिर पहुंचेंगे पीएम मोदी, हिंदू विरासत और रणनीतिक साझेदारी को मिलेगा नया आयाम

    इंडोनेशिया के 1100 साल पुराने प्रम्बानन मंदिर पहुंचेंगे पीएम मोदी, हिंदू विरासत और रणनीतिक साझेदारी को मिलेगा नया आयाम

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी तीन देशों की विदेश यात्रा के पहले चरण में इंडोनेशिया पहुंचे हैं। इस दौरे का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव योग्यकर्ता स्थित 9वीं शताब्दी का ऐतिहासिक प्रम्बानन मंदिर माना जा रहा है। यह मंदिर न केवल दक्षिण-पूर्व एशिया की सबसे महत्वपूर्ण हिंदू धरोहरों में शामिल है, बल्कि भारत और इंडोनेशिया के हजारों वर्ष पुराने सांस्कृतिक संबंधों का भी जीवंत प्रतीक है। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक, रणनीतिक और आर्थिक सहयोग को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    प्रम्बानन मंदिर का निर्माण लगभग 850 ईस्वी के आसपास हुआ माना जाता है। यह इंडोनेशिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर परिसर है, जहां भगवान शिव, भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा की भव्य प्रतिमाएं स्थापित हैं। परिसर का सबसे ऊंचा मंदिर भगवान शिव को समर्पित है, जिसकी ऊंचाई लगभग 47 मीटर है। शिव मंदिर के भीतर माता पार्वती, भगवान गणेश और महर्षि अगस्त्य की प्राचीन मूर्तियां भी स्थापित हैं, जो इस परिसर की धार्मिक और ऐतिहासिक महत्ता को और बढ़ाती हैं।

    मंदिर की दीवारों पर रामायण और भागवत पर आधारित विस्तृत शिल्पांकन आज भी आकर्षण का केंद्र हैं। इन कलाकृतियों में भारतीय संस्कृति और पौराणिक परंपराओं की स्पष्ट झलक दिखाई देती है। मंदिर परिसर में नियमित रूप से रामायण बैले का मंचन भी किया जाता है, जो स्थानीय संस्कृति और भारतीय महाकाव्य की गहरी ऐतिहासिक कड़ी को दर्शाता है।

    प्रम्बानन मंदिर को वर्ष 1991 में विश्व धरोहर का दर्जा मिला था। यह स्थल आज भी लाखों पर्यटकों और श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। भारतीय और इंडोनेशियाई विशेषज्ञों के सहयोग से मंदिर परिसर के कुछ पुराने और क्षतिग्रस्त हिस्सों के संरक्षण और जीर्णोद्धार की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान इस सहयोग को आगे बढ़ाने से जुड़े महत्वपूर्ण कदमों की भी घोषणा होने की संभावना है।

    इंडोनेशिया दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाला देश है, लेकिन यहां हिंदू और बौद्ध सभ्यता की विरासत आज भी सुरक्षित है। इस्लाम के आगमन से पहले यहां कई शक्तिशाली हिंदू-बौद्ध राजवंशों का शासन रहा, जिनकी छाप आज भी मंदिरों, स्मारकों और सांस्कृतिक परंपराओं में दिखाई देती है। जावा, बाली, सुमात्रा और अन्य द्वीपों पर स्थित अनेक प्राचीन मंदिर इस ऐतिहासिक विरासत के साक्षी हैं।

    बाली द्वीप आज भी हिंदू संस्कृति का प्रमुख केंद्र माना जाता है, जहां बड़ी संख्या में हिंदू आबादी निवास करती है। वहीं इंडोनेशिया की सांस्कृतिक पहचान में रामायण, महाभारत, भगवान हनुमान और गरुड़ जैसे पात्रों का विशेष स्थान है। इनका प्रभाव स्थानीय कला, नृत्य, साहित्य और सांस्कृतिक आयोजनों में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

    प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा केवल सांस्कृतिक महत्व तक सीमित नहीं है। दोनों देशों के बीच रक्षा, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, निवेश, डिजिटल सहयोग और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी को भी आगे बढ़ाने पर विशेष जोर रहेगा। दोनों देशों के साझा हितों को देखते हुए यह दौरा व्यापक द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ऐतिहासिक विरासत और आधुनिक रणनीतिक सहयोग के इस संतुलन से भारत और इंडोनेशिया के संबंधों को नई गति मिलेगी। प्रम्बानन मंदिर का दौरा इस बात का भी प्रतीक होगा कि सांस्कृतिक जुड़ाव आज भी दोनों देशों की साझेदारी की मजबूत नींव बना हुआ है।

  • 'मुख्यमंत्री का बेटा होने' का टैग तोड़ने में लगे 23 साल, रितेश देशमुख ने साझा किया संघर्ष और सफलता का सफर

    'मुख्यमंत्री का बेटा होने' का टैग तोड़ने में लगे 23 साल, रितेश देशमुख ने साझा किया संघर्ष और सफलता का सफर

    नई दिल्ली । अभिनेता रितेश देशमुख ने अपने फिल्मी करियर के शुरुआती दौर से जुड़ा एक महत्वपूर्ण अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्हें लंबे समय तक इस धारणा का सामना करना पड़ा कि उन्हें फिल्मों में अवसर केवल इसलिए मिलते हैं क्योंकि उनके पिता महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रह चुके थे। उन्होंने कहा कि इस सोच को बदलने और अपनी अलग पहचान बनाने में उन्हें कई वर्षों की लगातार मेहनत करनी पड़ी।

    रियलिटी शो के दौरान एक प्रतियोगी की बात पर प्रतिक्रिया देते हुए रितेश ने बताया कि किसी भी व्यक्ति पर लगने वाला टैग केवल उसके आत्मविश्वास को ही नहीं, बल्कि उसके पेशेवर सफर को भी प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने अभिनय की दुनिया में कदम रखा था, तब अक्सर यह कहा जाता था कि उनकी सफलता का कारण उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि है, न कि उनकी मेहनत या प्रतिभा।

    रितेश ने कहा कि उन्होंने इन धारणाओं का जवाब शब्दों से नहीं, बल्कि अपने काम से दिया। वर्षों तक लगातार अलग-अलग तरह की फिल्मों में अभिनय करने और विविध भूमिकाएं निभाने के बाद लोगों की सोच बदली। उन्होंने बताया कि आज दो दशक से अधिक लंबे करियर और दर्जनों फिल्मों के बाद उन्हें संतोष है कि उन्होंने अपनी मेहनत के दम पर अपनी अलग पहचान स्थापित की है।

    उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी कलाकार के लिए दर्शकों का विश्वास सबसे बड़ी उपलब्धि होता है। शुरुआत में लोगों की राय बदलना आसान नहीं होता, लेकिन लगातार अच्छा प्रदर्शन और ईमानदारी से किया गया काम अंततः अपनी जगह बना ही लेता है। उनका मानना है कि समय और मेहनत ऐसे हर पूर्वाग्रह को समाप्त कर सकते हैं।

    रितेश ने शो के प्रतियोगी को भी यही संदेश दिया कि किसी भी नकारात्मक पहचान या आरोप से घबराने के बजाय धैर्य और निरंतर प्रयास पर भरोसा रखना चाहिए। उनके अनुसार कुछ टैग जल्दी नहीं टूटते, लेकिन यदि व्यक्ति अपने लक्ष्य पर कायम रहे तो एक दिन उसकी मेहनत ही उसकी असली पहचान बन जाती है।

    फिल्मी करियर की बात करें तो रितेश देशमुख ने रोमांटिक, कॉमेडी, ड्रामा और नकारात्मक किरदारों सहित कई अलग-अलग भूमिकाओं में अपनी अभिनय क्षमता का प्रदर्शन किया है। हिंदी सिनेमा के साथ-साथ उन्होंने मराठी फिल्मों में भी उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। अभिनेता के अलावा उन्होंने निर्देशन और निर्माण के क्षेत्र में भी अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई है।

    इन वर्षों में रितेश ने कई लोकप्रिय फिल्मों के माध्यम से दर्शकों का मनोरंजन किया है और अपनी सहज अभिनय शैली के कारण अलग पहचान बनाई है। उनकी हालिया परियोजनाओं को भी दर्शकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उन्होंने अपनी प्रतिभा के बल पर उद्योग में मजबूत स्थान बनाया है।

    रियलिटी शो में साझा किए गए उनके अनुभव को संघर्ष, धैर्य और आत्मविश्वास का उदाहरण माना जा रहा है। रितेश का कहना है कि सफलता का वास्तविक मूल्य तब और बढ़ जाता है, जब वह किसी पूर्वाग्रह या धारणा को पीछे छोड़कर केवल अपनी मेहनत और प्रदर्शन के दम पर हासिल की जाए।

  • राजगढ़ में दर्दनाक हादसा पानी से भरी खदान में समा गया पूरा परिवार भाई बहन और बुआ की मौत से गांव में मातम

    राजगढ़ में दर्दनाक हादसा पानी से भरी खदान में समा गया पूरा परिवार भाई बहन और बुआ की मौत से गांव में मातम


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में सोमवार शाम एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया। ब्यावरा के जगनियापुरा गांव स्थित पानी से भरी क्रेशर खदान में डूबने से एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई। हादसे में पांच वर्षीय मासूम निखरा पारदी उसकी ग्यारह वर्षीय बहन नम्रता पारदी और दोनों को बचाने के लिए पानी में कूदी उनकी पैंतीस वर्षीय बुआ सायराबाई पारदी की जान चली गई। इस घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई और परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है।

    जानकारी के अनुसार सोमवार शाम करीब चार बजे गांव के कुछ बच्चे क्रेशर की खदान के पास खेल रहे थे। खेलते समय उनकी गेंद गहरे पानी से भरी खदान में गिर गई। गेंद निकालने के प्रयास में निखरा और उसकी बहन नम्रता खदान के किनारे पहुंचे लेकिन अचानक उनका संतुलन बिगड़ गया और दोनों गहरे पानी में गिर गए। देखते ही देखते दोनों बच्चे डूबने लगे और मदद के लिए चीखने लगे।

    बच्चों की आवाज सुनते ही उनकी बुआ सायराबाई पारदी दौड़कर मौके पर पहुंचीं। उन्होंने बिना अपनी जान की परवाह किए दोनों बच्चों को बचाने के लिए तुरंत खदान में छलांग लगा दी। बताया जा रहा है कि उन्होंने एक बच्चे को पकड़कर बाहर निकालने की कोशिश भी की लेकिन दूसरे बच्चे को बचाने के प्रयास में उनका संतुलन बिगड़ गया। खदान का पानी काफी गहरा होने के कारण वह भी खुद को संभाल नहीं सकीं और तीनों कुछ ही पलों में पानी में समा गए।

    घटना की जानकारी मिलते ही गांव में अफरा तफरी मच गई। बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे और तत्काल पुलिस तथा प्रशासन को सूचना दी गई। ब्यावरा सिटी थाना पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीम ने ग्रामीणों की मदद से राहत और बचाव अभियान शुरू किया। करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद तीनों को पानी से बाहर निकाला गया और तुरंत सिविल अस्पताल ले जाया गया लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद तीनों को मृत घोषित कर दिया।

    पुलिस ने तीनों शवों का पोस्टमार्टम कराने के बाद उन्हें परिजनों को सौंप दिया है। मामले में मर्ग कायम कर हादसे की जांच शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि दुर्घटना पानी से भरी गहरी खदान के किनारे खेलते समय हुई।

    यह घटना एक बार फिर परित्यक्त और पानी से भरी खदानों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी खदानों के आसपास मजबूत घेराबंदी चेतावनी बोर्ड और निगरानी की व्यवस्था होना बेहद जरूरी है ताकि बच्चे अनजाने में वहां न पहुंच सकें। अभिभावकों को भी बच्चों को खतरनाक और गहरे जलाशयों के पास अकेले खेलने से रोकना चाहिए। थोड़ी सी सावधानी कई अनमोल जिंदगियों को बचा सकती है।

  • सीहोर में भीषण सड़क हादसा बोलेरो और ट्रक की आमने सामने टक्कर में पांच की मौत चार जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे

    सीहोर में भीषण सड़क हादसा बोलेरो और ट्रक की आमने सामने टक्कर में पांच की मौत चार जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में सोमवार दोपहर एक भीषण सड़क हादसे ने पांच परिवारों की खुशियां छीन लीं। आष्टा और शुजालपुर मार्ग पर मेना गोदी गांव के पास तेज रफ्तार ट्रक और बोलेरो की आमने सामने हुई जोरदार टक्कर में पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई जबकि चार अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। दुर्घटना इतनी भयावह थी कि बोलेरो पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और उसमें सवार कई लोग वाहन के अंदर ही फंस गए। हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा तफरी मच गई और आसपास के ग्रामीण तुरंत राहत कार्य में जुट गए।

    जानकारी के अनुसार दुर्घटना सोमवार दोपहर करीब पौने तीन बजे हुई। बोलेरो में कुल नौ लोग सवार थे जो राजगढ़ जिले के कालीपीठ थाना क्षेत्र के भियापुरा गांव से इलाज के लिए आष्टा जा रहे थे। रास्ते में मेना गोदी गांव के पास सामने से आ रहे ट्रक से उनकी जोरदार भिड़ंत हो गई। टक्कर का प्रभाव इतना जबरदस्त था कि बोलेरो के परखच्चे उड़ गए और तीन लोग वाहन से कई फीट दूर जाकर सड़क किनारे गिर पड़े। चालक वाहन में बुरी तरह फंस गया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसे के बाद कई घायल दर्द से तड़पते रहे। स्थानीय लोगों ने बिना समय गंवाए पुलिस को सूचना दी और खुद भी राहत कार्य शुरू कर दिया। ग्रामीणों और पुलिसकर्मियों ने मिलकर क्षतिग्रस्त बोलेरो में फंसे लोगों को बाहर निकाला। कई घायलों के सिर और चेहरे पर गंभीर चोटें थीं जबकि कुछ के हाथ पैर भी टूट गए थे। एंबुलेंस की मदद से सभी घायलों को पहले आष्टा के सिविल अस्पताल पहुंचाया गया जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए सीहोर जिला अस्पताल और फिर भोपाल रेफर किया गया।

    आष्टा पुलिस के अनुसार हादसे के बाद ट्रक चालक वाहन छोड़कर मौके से फरार हो गया। पुलिस उसकी तलाश में जुट गई है और दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में तेज रफ्तार और लापरवाही को हादसे की बड़ी वजह माना जा रहा है हालांकि विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकेगा।

    मृतकों के शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस ने मृतकों और घायलों की पहचान की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अब तक कुछ घायलों की पहचान इंदर सिंह और राजाराम के रूप में हुई है जबकि अन्य की पहचान और परिजनों को सूचना देने का काम जारी है।

    इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यातायात नियमों का पालन सुरक्षित गति से वाहन चलाना और लंबी यात्रा के दौरान पूरी सतर्कता बरतना ऐसे हादसों को काफी हद तक रोक सकता है। प्रशासन ने भी लोगों से सड़क पर सावधानी बरतने और सुरक्षित ड्राइविंग अपनाने की अपील की है ताकि इस तरह की दुखद घटनाओं से बचा जा सके।

  • वैश्विक संकेतों और मजबूत खरीदारी से बाजार में लौटी रफ्तार, सेंसेक्स-निफ्टी मजबूती के साथ बंद, ऑटो और रियल्टी शेयरों ने दिखाई ताकत

    वैश्विक संकेतों और मजबूत खरीदारी से बाजार में लौटी रफ्तार, सेंसेक्स-निफ्टी मजबूती के साथ बंद, ऑटो और रियल्टी शेयरों ने दिखाई ताकत

    नई दिल्ली । सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार ने लगातार चौथे सत्र में मजबूती का सिलसिला कायम रखते हुए बढ़त के साथ कारोबार समाप्त किया। सकारात्मक वैश्विक संकेतों, प्रमुख सेक्टरों में खरीदारी और निवेशकों के बेहतर भरोसे के चलते बाजार में पूरे दिन उत्साह का माहौल बना रहा। कारोबार के अंत में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक मजबूत बढ़त के साथ बंद हुए, जिससे बाजार की सकारात्मक धारणा और मजबूत हुई।

    कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 521.16 अंकों की बढ़त के साथ 78,285.07 अंक पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 159.50 अंक चढ़कर 24,430.35 अंक के स्तर पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार से ही दोनों सूचकांकों में तेजी का रुख दिखाई दिया और दिनभर खरीदारी का दबदबा बना रहा। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 78,398.06 अंक और निफ्टी 24,458.65 अंक के उच्चतम स्तर तक पहुंचने में सफल रहे।

    व्यापक बाजार में भी सकारात्मक रुझान देखने को मिला। मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में भी अच्छी बढ़त दर्ज की गई, जिससे यह संकेत मिला कि केवल बड़ी कंपनियों तक ही नहीं बल्कि मध्यम और छोटी कंपनियों के शेयरों में भी निवेशकों की रुचि बनी रही। बाजार की व्यापक मजबूती को निवेशकों ने सकारात्मक संकेत के रूप में देखा।

    सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो रियल्टी, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, ऑटो तथा ऑयल एंड गैस कंपनियों के शेयरों में सबसे अधिक खरीदारी देखने को मिली। इसके अलावा मेटल, फार्मा, हेल्थकेयर और वित्तीय सेवाओं से जुड़े शेयर भी बढ़त के साथ बंद हुए। हालांकि आईटी, मीडिया और पीएसयू बैंकिंग सेक्टर में कुछ मुनाफावसूली देखने को मिली, जिसके कारण इन क्षेत्रों के सूचकांक दबाव में रहे।

    प्रमुख कंपनियों में एचडीएफसी बैंक, हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, ओएनजीसी, बजाज ऑटो और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। दूसरी ओर कोटक महिंद्रा बैंक, टीसीएस, कोल इंडिया, बजाज फिनसर्व और मैक्स हेल्थकेयर के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। इसके बावजूद बाजार की समग्र दिशा सकारात्मक बनी रही।

    बाजार में आई इस तेजी का सीधा लाभ निवेशकों को भी मिला। कारोबार समाप्त होने तक सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण बढ़कर लगभग 482.33 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। एक ही कारोबारी सत्र में निवेशकों की संपत्ति में करीब दो लाख करोड़ रुपये की वृद्धि दर्ज की गई, जिससे निवेशकों का मनोबल और मजबूत हुआ।

    विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव में नरमी, कच्चे तेल की अपेक्षाकृत स्थिर कीमतें, पहली तिमाही के वित्तीय परिणामों से पहले सकारात्मक माहौल तथा घरेलू स्तर पर मजबूत खरीदारी ने बाजार को मजबूती प्रदान की है। इन कारकों ने निवेशकों के विश्वास को बढ़ाया और बाजार में लगातार चौथे दिन तेजी बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    तकनीकी संकेतक भी फिलहाल बाजार के पक्ष में दिखाई दे रहे हैं। प्रमुख सूचकांक महत्वपूर्ण तकनीकी स्तरों के ऊपर टिके हुए हैं, जिससे निकट अवधि में सकारात्मक रुझान बने रहने की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निफ्टी आने वाले सत्रों में प्रमुख प्रतिरोध स्तरों को पार करने में सफल रहता है तो बाजार में तेजी का अगला चरण देखने को मिल सकता है। वहीं, किसी भी सीमित गिरावट की स्थिति में निचले स्तरों पर खरीदारी का समर्थन मिलने की संभावना बनी हुई है, जिससे बाजार की मजबूती आगे भी बरकरार रह सकती है।