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  • बंगाल की फाल्टा सीट पर सस्पेंस गहरा, टीएमसी उम्मीदवार का अचानक पीछे हटना बना चर्चा का केंद्र

    बंगाल की फाल्टा सीट पर सस्पेंस गहरा, टीएमसी उम्मीदवार का अचानक पीछे हटना बना चर्चा का केंद्र


    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की फाल्टा विधानसभा सीट पर होने वाले पुनर्मतदान से ठीक पहले राजनीतिक घटनाक्रम ने अप्रत्याशित मोड़ ले लिया है, जहां सत्ताधारी दल के उम्मीदवार जहांगीर खान ने अचानक चुनावी मैदान से हटने की घोषणा कर सभी को चौंका दिया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में मतदान से पहले राजनीतिक गतिविधियां अपने चरम पर थीं और सभी दल अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटे हुए थे। जहांगीर खान ने अपने आवास पर आयोजित एक प्रेस वार्ता में यह ऐलान करते हुए कहा कि वे इस चुनावी प्रक्रिया से खुद को अलग कर रहे हैं, जिससे स्थानीय राजनीति में नए सवाल खड़े हो गए हैं। उनका यह निर्णय न केवल उनकी व्यक्तिगत राजनीतिक यात्रा में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है, बल्कि फाल्टा सीट की चुनावी समीकरणों पर भी इसका सीधा असर पड़ने की संभावना है।

    फाल्टा सीट डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है और इसे राजनीतिक रूप से काफी संवेदनशील माना जाता है, जहां हर चुनाव में मुकाबला बेहद रोचक और कड़ा रहता है। हाल ही में हुए मतदान चरण के दौरान कुछ मतदान केंद्रों पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों से जुड़ी अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं, जिसके बाद चुनाव आयोग ने पुनर्मतदान का निर्णय लिया था। अब 21 मई को होने वाले इस दोबारा मतदान से पहले उम्मीदवार का हट जाना राजनीतिक दलों के लिए रणनीतिक चुनौती बन गया है।

    जहांगीर खान ने अपने बयान में क्षेत्र के विकास और शांति को प्राथमिकता देने की बात कही और यह भी संकेत दिया कि वे चाहते हैं कि फाल्टा क्षेत्र में स्थिरता और प्रगति बनी रहे। उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय विकास योजनाओं और विशेष पैकेज जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना अधिक महत्वपूर्ण है। हालांकि उनके इस कदम के पीछे असली कारण को लेकर राजनीतिक गलियारों में अलग-अलग अटकलें लगाई जा रही हैं, और विभिन्न दल इस घटनाक्रम को अपने-अपने नजरिए से देख रहे हैं।

    इस बीच पार्टी की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया में कहा गया है कि उन्हें इस फैसले की जानकारी मिल चुकी है, लेकिन इसके पीछे के कारण स्पष्ट नहीं हैं। यह स्थिति संगठन के भीतर भी एक तरह की अनिश्चितता पैदा कर रही है, क्योंकि चुनाव से ठीक पहले उम्मीदवार का हटना किसी भी दल के लिए रणनीतिक झटका माना जाता है।

    दूसरी ओर, चुनावी प्रचार के दौरान जहांगीर खान का आक्रामक अंदाज भी चर्चा में रहा था, जहां वे अपने भाषणों में लोकप्रिय फिल्मी संवादों का इस्तेमाल कर समर्थकों को आकर्षित करते नजर आए थे। लेकिन अब उनके अचानक पीछे हटने से राजनीतिक माहौल पूरी तरह बदल गया है और विरोधी दल इसे अपने पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

    साथ ही, कानूनी मोर्चे पर भी यह मामला सक्रिय रहा है, जहां उन्होंने गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए अदालत का रुख किया था और अग्रिम जमानत की मांग की थी। इस पूरे घटनाक्रम ने फाल्टा चुनाव को और अधिक जटिल और अनिश्चित बना दिया है, जहां अब सभी की नजरें आगामी मतदान और उसके बाद आने वाले नतीजों पर टिकी हुई हैं, जो 24 मई को घोषित किए जाएंगे।

  • ऑस्ट्रेलिया सीरीज से पहले पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ीं, दो स्टार खिलाड़ी बाहर

    ऑस्ट्रेलिया सीरीज से पहले पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ीं, दो स्टार खिलाड़ी बाहर


    नई दिल्ली । ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ होने वाली तीन मैचों की वनडे सीरीज से पहले पाकिस्तान क्रिकेट टीम को करारा झटका लगा है। टीम के अनुभवी सलामी बल्लेबाज फखर जमान और युवा ओपनर सईम अयूब चोट के कारण इस अहम सीरीज से बाहर हो गए हैं। दोनों खिलाड़ियों के बाहर होने से पाकिस्तान की ओपनिंग जोड़ी पर बड़ा असर पड़ सकता है।

    पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने इस संबंध में आधिकारिक बयान जारी करते हुए बताया कि दोनों खिलाड़ी फिलहाल चोट से उबर रहे हैं और बोर्ड के मेडिकल पैनल की सख्त निगरानी में रिहैबिलिटेशन प्रक्रिया से गुजर रहे हैं। PCB ने स्पष्ट किया कि खिलाड़ियों को अभी पूरी तरह फिट घोषित नहीं किया जा सकता, इसलिए उन्हें ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे सीरीज के लिए चयनित नहीं किया गया है।

    बोर्ड ने अपने बयान में कहा कि दोनों खिलाड़ियों को रिकवरी प्रोग्राम जारी रखने की सलाह दी गई है और उनकी फिटनेस पर लगातार नजर रखी जा रही है। PCB ने यह भी उम्मीद जताई है कि दोनों खिलाड़ी जल्द ही पूरी तरह फिट होकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी करेंगे।

    गौरतलब है कि फखर जमान पाकिस्तान के सबसे अनुभवी बल्लेबाजों में से एक हैं। उन्होंने अब तक 92 वनडे मैचों में 45.42 की शानदार औसत से 3,861 रन बनाए हैं, जिसमें 11 शतक और 19 अर्धशतक शामिल हैं। उनकी गैरमौजूदगी पाकिस्तान के टॉप ऑर्डर को कमजोर कर सकती है।

    वहीं युवा बल्लेबाज सईम अयूब ने भी सीमित मौकों में प्रभावशाली प्रदर्शन किया है। उन्होंने 17 वनडे मैचों में 751 रन बनाए हैं और गेंदबाजी में भी 9 विकेट हासिल किए हैं। उन्हें एक उभरते हुए ऑलराउंडर के रूप में देखा जा रहा था, लेकिन चोट ने उनकी प्रगति पर फिलहाल ब्रेक लगा दिया है।

    30 मई से शुरू होने वाली इस वनडे सीरीज के लिए पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने अभी तक टीम की घोषणा नहीं की है, लेकिन माना जा रहा है कि अब चयनकर्ताओं को ओपनिंग क्रम के लिए नए विकल्प तलाशने होंगे।

    हाल के समय में पाकिस्तान टीम का प्रदर्शन भी लगातार सवालों के घेरे में रहा है। टीम हाल ही में बांग्लादेश दौरे पर दो टेस्ट मैच हार चुकी है, जिससे दबाव और बढ़ गया है। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ यह सीरीज पाकिस्तान के लिए खुद को साबित करने का महत्वपूर्ण मौका माना जा रहा है।

    अब सभी की नजर इस बात पर होगी कि पाकिस्तान टीम इन दो बड़े खिलाड़ियों की गैरमौजूदगी में किस संयोजन के साथ मैदान में उतरती है और क्या वह ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीम के खिलाफ चुनौती पेश कर पाती है या नहीं।

  • रोम में मोदी–मेलोनी की दोस्ती चर्चा में, भारत की ‘मेलोडी टॉफी’ गिफ्ट से मुस्कुराईं इटली PM, वीडियो वायरल

    रोम में मोदी–मेलोनी की दोस्ती चर्चा में, भारत की ‘मेलोडी टॉफी’ गिफ्ट से मुस्कुराईं इटली PM, वीडियो वायरल


    नई दिल्ली । इटली दौरे के दौरान प्रधानमंत्री Narendra Modi और इटली की प्रधानमंत्री Giorgia Meloni की मुलाकात एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में है। रोम में हुई इस मुलाकात के दौरान एक हल्के-फुल्के पल ने सोशल मीडिया पर खास ध्यान खींचा, जब प्रधानमंत्री मोदी ने मेलोनी को भारत की लोकप्रिय ‘मेलोडी’ टॉफी गिफ्ट की।

    यह अनौपचारिक लेकिन भावनात्मक पल दोनों नेताओं के बीच बढ़ती व्यक्तिगत और कूटनीतिक नजदीकी को दर्शाता है। गिफ्ट मिलने के बाद मेलोनी की प्रतिक्रिया को लेकर वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उनकी खुशी और सहजता साफ देखी जा सकती है। इस घटना ने भारत और इटली के संबंधों को एक नए मानवीय और मित्रतापूर्ण रंग में प्रस्तुत किया है।

    रोम में इस मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने डिनर भी किया और बाद में ऐतिहासिक कोलोसियम का दौरा किया। इस दौरान दोनों नेताओं की बातचीत और सहजता ने कूटनीतिक रिश्तों से आगे बढ़कर एक मजबूत व्यक्तिगत तालमेल को भी उजागर किया। यह तस्वीरें और वीडियो दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग की प्रतीक बनकर सामने आए हैं।

    भारत और इटली के बीच हाल के वर्षों में आर्थिक, तकनीकी और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया है। इसी क्रम में दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, उन्नत तकनीक और वैश्विक चुनौतियों पर सहयोग को लेकर व्यापक चर्चा होने की उम्मीद है। यह मुलाकात केवल औपचारिक बातचीत तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसे भविष्य की साझेदारी की दिशा तय करने वाला कदम माना जा रहा है।

    इस दौरान भारत की ओर से वैश्विक कनेक्टिविटी परियोजनाओं, खासकर India–Middle East–Europe Economic Corridor (IMEC) पर भी चर्चा की संभावना जताई गई। यह परियोजना भारत को मध्य पूर्व के रास्ते यूरोप से जोड़ने की एक बड़ी पहल के रूप में देखी जा रही है, जिससे वैश्विक व्यापार नेटवर्क में नई संभावनाएं खुल सकती हैं।

    सोशल मीडिया पर दोनों नेताओं की यह मुलाकात पहले से ही चर्चा में थी, और ‘#Melodi’ जैसे हैशटैग ने इसे और लोकप्रिय बना दिया है। समर्थक इसे भारत–इटली रिश्तों में बढ़ती गर्मजोशी के रूप में देख रहे हैं, जबकि विश्लेषक इसे एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संकेत मानते हैं।

    रोम पहुंचने पर प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत इटली के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा किया गया था, जिसके बाद उनकी मुलाकातें राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री स्तर पर तय हुईं। इस यात्रा का उद्देश्य भारत और इटली के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना, साथ ही वैश्विक मंचों पर सहयोग बढ़ाना बताया जा रहा है।

    कुल मिलाकर, ‘मेलोडी’ टॉफी का यह छोटा-सा गिफ्ट एक बड़े कूटनीतिक संदेश में बदल गया है, जो यह दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय संबंध केवल औपचारिक समझौतों तक सीमित नहीं होते, बल्कि व्यक्तिगत तालमेल भी उनकी दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

  • कानपुर में सनसनी: मां का कटा हाथ लेकर कमिश्नर ऑफिस पहुंचा ITBP जवान, अस्पताल पर लापरवाही का आरोप

    कानपुर में सनसनी: मां का कटा हाथ लेकर कमिश्नर ऑफिस पहुंचा ITBP जवान, अस्पताल पर लापरवाही का आरोप



    कानपुर। कानपुर में एक बेहद संवेदनशील और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां ITBP जवान विकास सिंह अपनी मां का कटा हुआ हाथ लेकर सीधे पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंच गए। यह मामला कथित तौर पर निजी अस्पताल की लापरवाही और पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज न करने से जुड़ा बताया जा रहा है।

    जानकारी के अनुसार, विकास सिंह की मां को 13 मई को सांस लेने में दिक्कत होने पर कानपुर के जीटी रोड स्थित कृष्णा हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि इलाज के दौरान गलत इंजेक्शन लगाए जाने से उनके दाहिने हाथ में गंभीर संक्रमण फैल गया, जिसके बाद हालत लगातार बिगड़ती चली गई।

    परिजनों के मुताबिक, स्थिति बिगड़ने पर महिला को दूसरे अस्पताल पारस हॉस्पिटल रेफर किया गया, जहां डॉक्टरों ने संक्रमण को रोकने के लिए हाथ काटने की सलाह दी। इसके बाद 17 मई को महिला का दाहिना हाथ ऑपरेशन के जरिए काटना पड़ा।

    इसी घटना से आहत ITBP जवान विकास सिंह का आरोप है कि यह स्थिति कथित चिकित्सीय लापरवाही के कारण बनी। उन्होंने यह भी दावा किया कि वह कई बार थाना रेल बाजार में शिकायत लेकर पहुंचे, लेकिन उनकी एफआईआर दर्ज नहीं की गई।

    इसी से नाराज होकर वह कथित सबूत के तौर पर अपनी मां का कटा हुआ हाथ थर्माकोल बॉक्स में रखकर पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंच गए। इस घटना के बाद वहां हड़कंप मच गया और मामला तुरंत उच्च अधिकारियों के संज्ञान में आ गया।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस कमिश्नर ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) को जांच के निर्देश दिए हैं। अब पूरे प्रकरण की जांच के लिए मेडिकल बोर्ड गठित किया जाएगा, जो यह तय करेगा कि इलाज में लापरवाही हुई थी या नहीं।

    जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे अस्पताल और संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल यह मामला स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, मरीज सुरक्षा और पुलिस कार्रवाई की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

  • केमिस्ट एसोसिएशन का बड़ा प्रदर्शन: सरकार से हस्तक्षेप की मांग तेज

    केमिस्ट एसोसिएशन का बड़ा प्रदर्शन: सरकार से हस्तक्षेप की मांग तेज


    मध्य प्रदेश । खंडवा जिले में बुधवार को ऑनलाइन दवा बिक्री और इससे जुड़े नियमों के विरोध में व्यापक असर देखने को मिला, जहां करीब 450 मेडिकल स्टोर एक दिन के लिए बंद रहे। जिलेभर के केमिस्टों ने एकदिवसीय सांकेतिक हड़ताल करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचकर अपना विरोध दर्ज कराया। इस दौरान बड़ी संख्या में केमिस्ट एसोसिएशन के सदस्य मौजूद रहे और उन्होंने डिप्टी कलेक्टर दीक्षा भगोरे को ज्ञापन सौंपा।

    दोपहर के समय आयोजित इस प्रदर्शन में खंडवा केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के साथ मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव एसोसिएशन ने भी समर्थन दिया, जिससे आंदोलन और अधिक व्यापक रूप में दिखाई दिया। केमिस्टों का कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स द्वारा बिना वैध चिकित्सकीय परामर्श और फर्जी या असत्यापित ई-प्रिस्क्रिप्शन के आधार पर दवाओं की बिक्री की जा रही है, जो जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है।

    एसोसिएशन अध्यक्ष गोवर्धन गोलानी ने आरोप लगाया कि इंटरनेट और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से हो रही अवैध दवा बिक्री, फ्री होम डिलीवरी और भारी छूट की नीति छोटे और लाइसेंसधारी केमिस्ट व्यापारियों के अस्तित्व को संकट में डाल रही है। उनका कहना है कि यह स्थिति न केवल बाजार को असंतुलित कर रही है, बल्कि मरीजों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

    केमिस्टों ने अपने ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया कि ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 और 1945 के नियमों में ऑनलाइन दवा बिक्री को लेकर कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है, इसके बावजूद कई ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स कंपनियां लंबे समय से दवाओं का वितरण कर रही हैं। उन्होंने वर्ष 2018 की अधिसूचना GSR 817(E) और कोविड काल में जारी GSR 220(E) का हवाला देते हुए कहा कि इनका गलत उपयोग किया जा रहा है, जिससे अनियंत्रित दवा वितरण को बढ़ावा मिल रहा है।

    केमिस्ट संगठन ने प्रशासन से मांग की है कि बिना सत्यापित ई-प्रिस्क्रिप्शन के दवा वितरण पर तुरंत रोक लगाई जाए और अवैध ऑनलाइन बिक्री पर सख्त कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही GSR 817(E) और GSR 220(E) को वापस लेने तथा ऑनलाइन कंपनियों की प्रीडेटरी प्राइसिंग और अत्यधिक छूट नीति पर भी प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है।

    प्रदर्शन के दौरान केमिस्टों ने यह भी कहा कि कोविड महामारी के दौरान उन्होंने बिना रुके दवा आपूर्ति सुनिश्चित कर स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाए रखा था, लेकिन अब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की अनियंत्रित गतिविधियों के कारण उनका व्यवसाय प्रभावित हो रहा है।

    एसोसिएशन ने सरकार से अपील की है कि वह इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करे और छोटे दवा व्यापारियों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करे, ताकि मरीजों की सुरक्षा और दवा वितरण प्रणाली दोनों संतुलित रह सकें।

  • बहराइच की 23 वर्षीय नैना बनीं प्रेरणा: लंदन में मिला महिला सशक्तिकरण पुरस्कार, किंग चार्ल्स से की मुलाकात

    बहराइच की 23 वर्षीय नैना बनीं प्रेरणा: लंदन में मिला महिला सशक्तिकरण पुरस्कार, किंग चार्ल्स से की मुलाकात




    बहराइच। बहराइच जिले के रिसिया ब्लॉक के पटेल नगर गांव की रहने वाली 23 वर्षीय नैना ने अपनी मेहनत और संघर्ष के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन किया है। उन्हें लंदन के प्रतिष्ठित रॉयल अल्बर्ट हॉल में आयोजित ‘द किंग्स ट्रस्ट सेलिब्रेशन’ कार्यक्रम में अमल क्लूनी महिला सशक्तिकरण पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

    इस सम्मान समारोह के दौरान नैना को ब्रिटेन के राजा किंग चार्ल्स III और क्वीन कैमिला से मिलने का भी अवसर मिला। यह उपलब्धि उनके जीवन की कठिन यात्रा और सामाजिक बदलाव के लिए किए गए कार्यों का परिणाम मानी जा रही है।

    नैना का बचपन संघर्षों से भरा रहा। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्हें अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए खेतों में काम करना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने पढ़ाई जारी रखने का प्रयास किया और गांव के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर अपनी शिक्षा का खर्च निकाला।

    बाद में आगा खान फाउंडेशन और द किंग्स ट्रस्ट इंटरनेशनल की संयुक्त पहल ‘प्रोजेक्ट लहर’ ने उनकी मदद की, जिसके जरिए वे दोबारा स्कूल लौटीं, स्कॉलरशिप हासिल की और अपनी पढ़ाई पूरी की।

    वर्तमान में नैना किशोर लड़कियों के लिए लाइफ स्किल्स कोच के रूप में काम कर रही हैं। वह बाल विवाह के खिलाफ अभियान चलाने के साथ-साथ लड़कियों की शिक्षा और उनके अधिकारों के लिए लगातार जागरूकता फैला रही हैं। उनके प्रयासों से सैकड़ों लड़कियों को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिल रही है।

    पुरस्कार मिलने के बाद नैना ने कहा कि उनके जीवन के संघर्ष ही उनकी सबसे बड़ी ताकत बने। उन्होंने यह सम्मान सभी युवतियों को समर्पित करते हुए कहा कि कभी हार नहीं माननी चाहिए और अपने जीवन की सफलता की कहानी खुद लिखनी चाहिए।

    नैना की यह उपलब्धि न केवल बहराइच बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय बन गई है, जो यह साबित करती है कि कठिन परिस्थितियों में भी मेहनत और लगन से बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है।

  • मौसम विभाग की चेतावनी: 25 मई तक लू का असर, धार में बढ़ी परेशानी

    मौसम विभाग की चेतावनी: 25 मई तक लू का असर, धार में बढ़ी परेशानी


    मध्य प्रदेश । धार शहर और आसपास के क्षेत्रों में इन दिनों भीषण गर्मी ने जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। लगातार बढ़ते तापमान और तपती लू के कारण हालात ऐसे हो गए हैं कि दोपहर के समय घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। पिछले कई दिनों से जिले का अधिकतम तापमान 42 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया जा रहा है, जिससे आम लोगों की दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित हो रही है।

    सुबह के समय भी गर्मी से राहत नहीं मिल रही है, क्योंकि तापमान 27 से 28 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जा रहा है। जैसे-जैसे दिन चढ़ता है, तेज धूप और गर्म हवाएं स्थिति को और गंभीर बना देती हैं। दोपहर के समय बाजार और सड़कें लगभग सुनसान हो जाती हैं, और केवल जरूरी काम होने पर ही लोग घरों से बाहर निकल रहे हैं।

    भीषण गर्मी का सबसे ज्यादा असर स्वास्थ्य पर देखने को मिल रहा है। जिला अस्पताल और निजी अस्पतालों में डिहाइड्रेशन, बुखार, कमजोरी और लू लगने से संबंधित मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। डॉक्टरों के अनुसार यह स्थिति खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों, मजदूरों और खुले में काम करने वाले लोगों के लिए अधिक खतरनाक साबित हो रही है।

    गर्मी और लू के कारण रोजमर्रा की जिंदगी भी प्रभावित हो रही है। मजदूर वर्ग को खुले आसमान के नीचे काम करने में भारी परेशानी हो रही है, वहीं छोटे व्यापारियों और राहगीरों को भी गर्म हवाओं का सामना करना पड़ रहा है। दोपहर के समय बाजारों में सन्नाटा पसरा रहता है और लोग छांव और ठंडी जगहों की तलाश में नजर आते हैं।

    मौसम विभाग ने स्थिति को देखते हुए चेतावनी जारी की है कि आने वाले 25 मई तक जिले में लू का प्रभाव जारी रह सकता है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि तापमान में फिलहाल कोई बड़ी गिरावट के आसार नहीं हैं, बल्कि गर्म हवाओं का असर और बढ़ सकता है।

    प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने भी आम नागरिकों से सतर्क रहने की अपील की है। लोगों को सलाह दी गई है कि वे दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच अनावश्यक रूप से बाहर न निकलें, पर्याप्त मात्रा में पानी और तरल पदार्थों का सेवन करें तथा धूप से बचाव के लिए सिर को ढककर ही बाहर निकलें।

    विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की भीषण गर्मी में सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है, क्योंकि लू का असर अचानक स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। फिलहाल पूरे जिले में गर्मी का यह दौर लोगों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।

  • लखनऊ में मेडिकल स्टोर बंद: ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में व्यापारियों का बड़ा प्रदर्शन

    लखनऊ में मेडिकल स्टोर बंद: ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में व्यापारियों का बड़ा प्रदर्शन



    लखनऊ। लखनऊ में बुधवार को मेडिकल स्टोरों की बंदी से आम लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। शहर के अमीनाबाद, चौक, चारबाग समेत प्रमुख दवा बाजारों में सुबह से ही अधिकांश दुकानें शटर डाउन रहीं। इस बंदी का असर पूरे प्रदेश में देखा गया, जहां अनुमानित रूप से लाखों मेडिकल स्टोर बंद रहे।

    यह बंदी ऑनलाइन दवा बिक्री और ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्म्स के विरोध में की गई है। दवा व्यापारियों का आरोप है कि ऑनलाइन कंपनियां बिना पर्याप्त जांच और फार्मासिस्ट की निगरानी के दवाएं बेच रही हैं, जिससे मरीजों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो रहा है। साथ ही फर्जी प्रिस्क्रिप्शन और भारी डिस्काउंटिंग से पारंपरिक दवा कारोबार पर भी असर पड़ रहा है।

    इस विरोध प्रदर्शन के तहत ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) ने 24 घंटे की देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। इसी के समर्थन में लखनऊ केमिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन समेत विभिन्न संगठनों ने भी बंद को समर्थन दिया।

    व्यापारियों का कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए स्लीपिंग पिल्स, पेन किलर्स और अन्य नियंत्रित दवाओं की आसान उपलब्धता चिंता का विषय है, जिससे युवाओं में दुरुपयोग की आशंका बढ़ रही है। साथ ही अत्यधिक डिस्काउंटिंग को भी नियमों के खिलाफ बताते हुए उन्होंने सप्लाई चेन में गड़बड़ी और नकली दवाओं की संभावना जताई है।

    एसोसिएशन के अध्यक्ष अमित तिवारी ने कहा कि यह केवल व्यापार का मुद्दा नहीं है, बल्कि सीधे तौर पर मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा मामला है। उन्होंने आरोप लगाया कि फर्जी पर्चों के आधार पर दवाएं बेची जा रही हैं, जिससे गलत उपचार और गंभीर दुष्प्रभाव का खतरा बढ़ सकता है।

    हालांकि, संगठनों ने स्पष्ट किया है कि बंद के बावजूद इमरजेंसी और जीवन रक्षक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है, ताकि गंभीर मरीजों को किसी तरह की परेशानी न हो।

    दवा व्यापारियों ने सरकार से मांग की है कि ऑनलाइन दवा बिक्री पर सख्त नियम लागू किए जाएं, फार्मासिस्ट की निगरानी अनिवार्य की जाए और फर्जी प्रिस्क्रिप्शन पर पूरी तरह रोक लगाई जाए। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

  • भोजशाला की अनोखी प्रतिमा: 26 कलाकारों ने 35 दिन में तैयार की थी मां वाग्देवी

    भोजशाला की अनोखी प्रतिमा: 26 कलाकारों ने 35 दिन में तैयार की थी मां वाग्देवी


    मध्य प्रदेश । मध्यप्रदेश के ग्वालियर में एक बेहद ऐतिहासिक और संवेदनशील धार्मिक धरोहर पिछले 15 वर्षों से कड़ी सुरक्षा के बीच संरक्षित रखी हुई है। यह प्रतिमा धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला के गर्भगृह के लिए तैयार की गई मां वाग्देवी (मां सरस्वती) की अष्टधातु मूर्ति है, जिसे वर्ष 2011 में स्थापित किया जाना था, लेकिन उस समय उत्पन्न हुए विवाद और प्रशासनिक परिस्थितियों के चलते इसे ग्वालियर में ही रोक दिया गया था।

    हाल ही में भोजशाला को लेकर अदालत के फैसले के बाद एक बार फिर इस प्रतिमा को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कोर्ट ने भोजशाला परिसर को मंदिर मानते हुए सालभर बिना रोक-टोक पूजा-अर्चना की अनुमति दी है, जिसके बाद इस प्रतिमा के भविष्य को लेकर नए सिरे से उम्मीदें जागी हैं।

    जानकारी के अनुसार, इस दिव्य अष्टधातु प्रतिमा को ग्वालियर के मूर्तिकार प्रभात राय और उनकी टीम ने तैयार किया था। मूर्तिकार के बेटे अनुज राय ने बताया कि वर्ष 2011 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ नेता नवल किशोर जी के आदेश पर यह प्रतिमा तैयार की गई थी। इसे केवल 35 दिनों में 26 कुशल कलाकारों की मेहनत से गढ़ा गया था। प्रतिमा को भोजशाला में स्थापित करने की पूरी तैयारी हो चुकी थी, लेकिन अंतिम समय में विवाद बढ़ने के कारण इसे ग्वालियर में ही रोक दिया गया।

    परिवार के अनुसार, उस समय स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई थी कि कई दिनों तक पुलिस सुरक्षा में प्रतिमा को घर में रखा गया। वर्षों तक बसंत पंचमी जैसे अवसरों पर भी सीमित समय के लिए पुलिस सुरक्षा के बीच ही प्रतिमा को बाहर निकाला जाता था और फिर सुरक्षित रख दिया जाता था।

    मूर्तिकार परिवार आज भी इस प्रतिमा को अपने लिए एक गौरव और ऐतिहासिक धरोहर मानता है। अनुज राय ने भावुक होकर कहा कि यदि भविष्य में यह प्रतिमा स्थापित नहीं भी होती है, तो भी वे इसे गर्व के साथ अपने पास सुरक्षित रखेंगे, क्योंकि यह भारतीय संस्कृति और इतिहास का महत्वपूर्ण प्रतीक है।

    इधर, आरएसएस से जुड़े स्थानीय पदाधिकारियों के अनुसार उस समय प्रतिमा के संरक्षक रहे नवल किशोर अब आध्यात्मिक जीवन अपनाकर मौन धारण कर चुके हैं, जिससे इस प्रतिमा के भविष्य को लेकर कई सवाल अनुत्तरित हैं।

    इस बीच, हिंदू पक्ष से जुड़े संगठन भोज उत्सव समिति ने भी इस मुद्दे को फिर से उठाया है। समिति का कहना है कि लंदन स्थित ब्रिटिश म्यूजियम में रखी मूल मां वाग्देवी प्रतिमा को भारत लाकर भोजशाला में स्थापित करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। संगठन का दावा है कि यह प्रतिमा ऐतिहासिक और धार्मिक दोनों दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

    हालांकि, ग्वालियर में सुरक्षित रखी गई प्रतिमा को भोजशाला में स्थापित करने को लेकर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है और यह विषय फिलहाल विचाराधीन है। संगठन के अनुसार, आगे की सभी प्रक्रियाएं न्यायालय के निर्देशों और कानूनी प्रावधानों के अनुसार ही पूरी की जाएंगी।

    भोजशाला विवाद का यह अध्याय अब एक बार फिर नए मोड़ पर पहुंच गया है, जहां एक ओर न्यायालय के फैसले ने आस्था से जुड़े पक्ष को राहत दी है, वहीं ग्वालियर में सुरक्षित रखी प्रतिमा का भविष्य भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

  • TVK सरकार पर संकट के बादल, CPI-M ने दी समर्थन वापसी की चेतावनी, तमिलनाडु में बढ़ा सियासी टकराव

    TVK सरकार पर संकट के बादल, CPI-M ने दी समर्थन वापसी की चेतावनी, तमिलनाडु में बढ़ा सियासी टकराव


    नई दिल्ली । तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी तनाव देखने को मिल रहा है, जहां मुख्यमंत्री थलपति विजय की पार्टी टीवीके (TVK) के नेतृत्व वाली सरकार पर संकट के बादल गहराते नजर आ रहे हैं। सरकार को बाहर से समर्थन दे रही मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPI-M) ने अब खुलकर चेतावनी दी है कि यदि सत्ता समीकरणों में बदलाव किया गया या AIADMK को सरकार में शामिल किया गया तो समर्थन पर पुनर्विचार किया जा सकता है। इस बयान के बाद राज्य की राजनीतिक परिस्थितियां और अधिक जटिल होती दिखाई दे रही हैं।

    CPI-M के वरिष्ठ नेता ने साफ तौर पर कहा है कि तमिलनाडु की जनता ने इस बार परंपरागत राजनीतिक दलों से हटकर एक नया विकल्प चुना है और टीवीके सरकार का गठन इसी जनादेश का परिणाम है। उनके अनुसार, वामपंथी दलों और अन्य सहयोगी पार्टियों ने केवल इसलिए समर्थन दिया ताकि राज्य में एक वैकल्पिक और अपेक्षाकृत साफ-सुथरी शासन व्यवस्था स्थापित हो सके। ऐसे में यदि सरकार अपने मूल राजनीतिक रुख से हटकर AIADMK के साथ गठजोड़ करती है या उसे सत्ता में हिस्सेदारी देती है, तो यह जनता के भरोसे के साथ समझौता माना जाएगा।

    इस चेतावनी के बाद तमिलनाडु के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। विपक्षी दलों के साथ-साथ सत्ताधारी गठबंधन के भीतर भी असहजता की स्थिति देखी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गठबंधन की स्थिरता कई छोटे दलों के समर्थन पर निर्भर है, ऐसे में किसी भी प्रमुख सहयोगी का असंतोष सरकार के लिए चुनौती खड़ी कर सकता है।

    गौरतलब है कि हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था और राज्य में गठबंधन सरकार का गठन हुआ था। टीवीके ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन करते हुए सबसे अधिक सीटें हासिल की थीं, लेकिन सरकार बनाने के लिए उसे कई छोटे दलों के समर्थन पर निर्भर रहना पड़ा। यही कारण है कि शुरुआत से ही इस गठबंधन में राजनीतिक मतभेद और असहमति की स्थिति बनी हुई है।

    CPI-M का यह ताजा रुख सरकार के लिए एक बड़ा संकेत माना जा रहा है कि आने वाले समय में राजनीतिक संतुलन और सहयोग बनाए रखना आसान नहीं होगा। पार्टी ने यह भी कहा है कि वह सरकार की नीतियों और फैसलों पर नजर बनाए हुए है और जनहित के खिलाफ किसी भी निर्णय पर सख्त रुख अपनाया जाएगा।

    राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि तमिलनाडु की मौजूदा स्थिति बेहद नाजुक है, जहां छोटे दलों का समर्थन सरकार की स्थिरता तय करने में अहम भूमिका निभा रहा है। ऐसे में हर निर्णय और हर राजनीतिक गठजोड़ राज्य की सत्ता समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। फिलहाल सभी की नजर मुख्यमंत्री विजय के अगले कदम पर टिकी हुई है, जो यह तय करेगा कि सरकार आगे स्थिर रहती है या राजनीतिक संकट और गहरा जाता है।