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  • 'भारत टैक्सी' मॉडल पर आएगी सहकारी जीवन बीमा कंपनी, अमित शाह बोले- 30 करोड़ सदस्यों को मिलेगा सशक्त मंच

    'भारत टैक्सी' मॉडल पर आएगी सहकारी जीवन बीमा कंपनी, अमित शाह बोले- 30 करोड़ सदस्यों को मिलेगा सशक्त मंच

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने सहकारिता क्षेत्र को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की घोषणा की है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि देश में जल्द ही एक सहकारी जीवन बीमा कंपनी की स्थापना की जाएगी। यह कंपनी ‘भारत टैक्सी’ मॉडल की तर्ज पर संचालित होगी और इसका उद्देश्य सहकारी संस्थाओं की बीमा क्षेत्र में भागीदारी बढ़ाने के साथ-साथ करोड़ों सदस्यों को व्यापक लाभ उपलब्ध कराना होगा।

    सहकारिता मंत्रालय के पांचवें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि सहकारी जीवन बीमा कंपनी देश के सहकारी आंदोलन को नई मजबूती प्रदान करेगी। उन्होंने बताया कि ‘भारत टैक्सी’ मॉडल को अच्छा प्रतिसाद मिला है और अगले दो वर्षों में इसका विस्तार 500 शहरों तक करने की योजना है। इसी अनुभव के आधार पर अब बीमा क्षेत्र में भी सहकारी व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा।

    उन्होंने कहा कि देश में वर्तमान समय में करीब 8.5 लाख सहकारी संस्थाएं कार्यरत हैं, जिनसे 30 करोड़ से अधिक सदस्य जुड़े हुए हैं। नई सहकारी जीवन बीमा कंपनी इन संस्थाओं को आर्थिक रूप से अधिक सशक्त बनाने और बीमा सेवाओं की पहुंच को व्यापक बनाने में अहम भूमिका निभाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि उर्वरक क्षेत्र की प्रमुख सहकारी संस्था इफको पहले से ही एक जापानी कंपनी के साथ संयुक्त उपक्रम के माध्यम से बीमा कारोबार से जुड़ी हुई है।

    अमित शाह ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में सहकारिता मंत्रालय ने पारदर्शिता, पेशेवर प्रबंधन और तकनीकी सुधारों पर विशेष ध्यान दिया है। मंत्रालय ने देशभर की सहकारी संस्थाओं का व्यापक डेटाबेस तैयार किया है, जिससे भविष्य की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और सहकारी तंत्र के विस्तार में मदद मिलेगी।

    उन्होंने जानकारी दी कि गुजरात के आणंद में त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय की स्थापना की जा रही है। यह संस्थान सहकारी क्षेत्र के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करेगा और क्षमता निर्माण के माध्यम से संस्थाओं की कार्यक्षमता बढ़ाने में योगदान देगा। उनके अनुसार सहकारी क्षेत्र अब केवल डेयरी, चीनी और उर्वरक उद्योग तक सीमित नहीं है, बल्कि अनेक नए क्षेत्रों में भी तेजी से विस्तार कर रहा है।

    कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने विश्वास व्यक्त किया कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में सहकारिता क्षेत्र की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का उद्देश्य राज्यों के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप करना नहीं, बल्कि ऐसी नीतियां तैयार करना है जो पूरे देश में सहकारी संस्थाओं के विकास को गति दें। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में किसी भी राज्य सरकार ने मंत्रालय पर अपने अधिकार क्षेत्र में दखल देने का आरोप नहीं लगाया है।

    समारोह में केंद्रीय मत्स्य, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह ने भी सहकारी क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार की पहलों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि डेयरी क्षेत्र का बड़ा हिस्सा अभी भी असंगठित है और इसे संगठित करने के लिए सहकारी व्यवस्था का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी सहकारिता क्षेत्र में सुधारों को लेकर सरकार के प्रयासों की सराहना की।

    कार्यक्रम में कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया गया। इनमें 75 हजार टन क्षमता वाले 135 गोदामों का हस्तांतरण, 85 गोदामों का उद्घाटन तथा 47 नए अनाज भंडारण गोदामों का वर्चुअल शिलान्यास शामिल रहा। इसके अलावा ‘सहकार वन’ परियोजना का भूमिपूजन तथा उत्तर प्रदेश के बाराबंकी और महाराष्ट्र के जलगांव में भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड की टिश्यू कल्चर सुविधाओं की आधारशिला भी रखी गई।

    इस अवसर पर 50 हजार प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों को ई-पैक्स प्रणाली से जोड़ने की पहल को भी महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया गया। साथ ही भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के बीच बीज प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। कार्यक्रम के अंत में डेयरी सहकारी समितियों के लिए मॉडल उपविधियों तथा सहकारिता मंत्रालय की पांच वर्षों की उपलब्धियों पर आधारित पुस्तक का भी विमोचन किया गया।

  • कर्नाटक में मतदाता सूची पुनरीक्षण पर उठा विवाद, NDA ने चुनाव आयोग से की शिकायत; सत्यापन प्रक्रिया में अनियमितताओं का लगाया आरोप

    कर्नाटक में मतदाता सूची पुनरीक्षण पर उठा विवाद, NDA ने चुनाव आयोग से की शिकायत; सत्यापन प्रक्रिया में अनियमितताओं का लगाया आरोप

    नई दिल्ली । कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता दिखाई दे रहा है। नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) के नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर पुनरीक्षण प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की शिकायत की है। प्रतिनिधिमंडल का आरोप है कि निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा, जिससे मतदाता सूची की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

    शिकायत में कहा गया है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान बूथ स्तर के अधिकारियों को प्रत्येक घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करना चाहिए, लेकिन कई स्थानों पर इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया जा रहा है। आरोप लगाया गया कि घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करने के बजाय सामुदायिक भवनों, अन्य सार्वजनिक स्थानों तथा कुछ निजी परिसरों में लोगों को बुलाकर सामूहिक रूप से फॉर्म भरवाए जा रहे हैं। प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि इससे वास्तविक सत्यापन की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

    NDA नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ क्षेत्रों में लोगों को व्हाट्सएप समूहों और अन्य माध्यमों से विशेष शिविरों में बुलाया गया, जहां एक साथ बड़ी संख्या में आवेदन पत्र भरे गए। उनका दावा है कि इस तरह की प्रक्रिया चुनाव आयोग के निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं है और इससे मतदाता सूची में त्रुटियों या अनियमितताओं की आशंका बढ़ सकती है।

    ज्ञापन में नेताओं ने मांग की है कि अब तक भरे गए सभी गणना प्रपत्रों का दोबारा घर-घर जाकर सत्यापन कराया जाए। साथ ही यदि जांच में किसी अधिकारी या अन्य संबंधित व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि मतदाता सूची लोकतांत्रिक प्रक्रिया की आधारशिला है और इसमें किसी भी प्रकार की त्रुटि या लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।

    प्रतिनिधिमंडल ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि उन्हें राज्य के विभिन्न हिस्सों से ऐसी कई शिकायतें प्राप्त हुई हैं। उनका दावा है कि इन कथित अनियमितताओं से जुड़े कुछ वीडियो और अन्य सामग्री सोशल मीडिया पर भी साझा की गई है। नेताओं ने आग्रह किया कि इन शिकायतों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि मतदाता सूची की विश्वसनीयता बनी रहे।

    शिकायत के दौरान NDA नेताओं ने राज्य सरकार पर भी आरोप लगाए और कहा कि पुनरीक्षण प्रक्रिया में प्रशासनिक तंत्र का दुरुपयोग किया जा रहा है। उनका कहना है कि यदि निर्धारित प्रक्रिया का पूरी तरह पालन नहीं किया गया तो इसका असर चुनावी व्यवस्था की पारदर्शिता पर पड़ सकता है। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।

    मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण चुनावी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, जिसका उद्देश्य पात्र मतदाताओं का सही पंजीकरण सुनिश्चित करना और सूची को अद्यतन रखना होता है। ऐसे में इस प्रक्रिया को लेकर उठे आरोपों ने राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। अब नजर चुनाव आयोग की अगली कार्रवाई पर रहेगी कि शिकायतों की जांच किस प्रकार की जाती है और यदि किसी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है तो उसके समाधान के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

  • चंद्रमा की शुभ-अशुभ स्थिति बदल सकती है जीवन की दिशा, जानें किन योगों से मिलता है सुख और किन दोषों से बढ़ती हैं मुश्किलें

    चंद्रमा की शुभ-अशुभ स्थिति बदल सकती है जीवन की दिशा, जानें किन योगों से मिलता है सुख और किन दोषों से बढ़ती हैं मुश्किलें

    नई दिल्ली । ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन, भावनाओं, माता, मानसिक संतुलन और सुख-समृद्धि का प्रमुख कारक माना गया है। किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में चंद्रमा की स्थिति उसके स्वभाव, निर्णय क्षमता, पारिवारिक संबंधों और मानसिक स्थिति पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालती है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यदि चंद्रमा शुभ और मजबूत स्थिति में हो तो जीवन में स्थिरता, सम्मान और खुशहाली बढ़ती है, जबकि कमजोर या पीड़ित चंद्रमा मानसिक तनाव, अस्थिरता और अनेक चुनौतियों का कारण बन सकता है।

    ज्योतिष के अनुसार वृषभ राशि में चंद्रमा उच्च का तथा कर्क राशि में स्वराशि का माना जाता है। ऐसी स्थिति में व्यक्ति का मन संतुलित रहता है और वह कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखने में सक्षम होता है। मजबूत चंद्रमा रचनात्मक सोच, सकारात्मक दृष्टिकोण और बेहतर निर्णय क्षमता प्रदान करने वाला माना जाता है। ऐसे लोगों को पारिवारिक सुख, सामाजिक सम्मान और आर्थिक उन्नति के अवसर भी अधिक प्राप्त होते हैं।

    मान्यता है कि यदि चंद्रमा पर बृहस्पति, शुक्र या बुध जैसे शुभ ग्रहों का प्रभाव हो तो कई शुभ योगों का निर्माण होता है। ऐसे योग व्यक्ति के व्यक्तित्व को प्रभावशाली बनाते हैं और जीवन में सफलता के अवसर बढ़ाते हैं। मजबूत चंद्रमा वाले लोगों का अपनी माता के साथ संबंध भी सामान्यतः मधुर और सहयोगपूर्ण माना जाता है।

    इसके विपरीत यदि चंद्रमा कमजोर, नीच राशि में स्थित या पाप ग्रहों से प्रभावित हो तो इसका असर व्यक्ति के मानसिक और भावनात्मक जीवन पर पड़ सकता है। वृश्चिक राशि में स्थित चंद्रमा को ज्योतिष में नीच का माना गया है। इसके अलावा राहु, केतु अथवा शनि के प्रभाव से बनने वाले कुछ दोष मानसिक अस्थिरता, चिंता और निर्णय लेने में कठिनाई का कारण माने जाते हैं।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार ऐसे लोगों में अनावश्यक भय, आत्मविश्वास की कमी, अनिद्रा, तनाव और एकाग्रता में कमी जैसी समस्याएं देखने को मिल सकती हैं। कई बार व्यक्ति छोटी-छोटी बातों को लेकर अत्यधिक चिंतित रहता है और भावनात्मक रूप से स्वयं को कमजोर महसूस करता है। हालांकि इन प्रभावों को आध्यात्मिक और धार्मिक उपायों के माध्यम से कम करने की मान्यता भी प्रचलित है।

    चंद्रमा को मजबूत करने के लिए भगवान शिव की नियमित आराधना को विशेष महत्व दिया गया है। शिवलिंग पर जल या दूध अर्पित करना मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। इसके साथ ही माता का सम्मान करना, उनका आशीर्वाद लेना तथा परिवार के प्रति जिम्मेदार व्यवहार रखना भी शुभ फलदायी माना जाता है।

    सोमवार के दिन व्रत रखना, सफेद वस्तुओं जैसे दूध, चावल, चीनी या सफेद वस्त्रों का दान करना भी चंद्र दोष की शांति के लिए उपयोगी माना जाता है। इसके अलावा जल का सम्मान करना और अनावश्यक रूप से पानी की बर्बादी से बचना भी शुभ माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार नियमित सकारात्मक सोच, संयमित जीवनशैली और आध्यात्मिक अभ्यास से भी मानसिक संतुलन मजबूत किया जा सकता है।

    ज्योतिष विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पूरी जन्म कुंडली का समग्र विश्लेषण आवश्यक होता है। केवल चंद्रमा की स्थिति के आधार पर जीवन के सभी परिणाम निर्धारित नहीं किए जा सकते। इसलिए यदि किसी व्यक्ति को अपनी कुंडली में चंद्रमा की स्थिति या उससे जुड़े प्रभावों को लेकर संदेह हो तो अनुभवी ज्योतिष विशेषज्ञ से परामर्श लेकर ही उचित मार्गदर्शन प्राप्त करना बेहतर माना जाता है।

  • देवास में आशा कार्यकर्ताओं का शक्ति प्रदर्शन मांगें पूरी नहीं हुईं तो विधानसभा घेराव की चेतावनी

    देवास में आशा कार्यकर्ताओं का शक्ति प्रदर्शन मांगें पूरी नहीं हुईं तो विधानसभा घेराव की चेतावनी


    देवास। मध्य प्रदेश के देवास जिले में सोमवार को आशा कार्यकर्ताओं और आशा पर्यवेक्षकों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचीं दो हजार से अधिक कार्यकर्ताओं ने रैली निकालकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर धरना दिया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने समय पर वेतन भुगतान, लंबित प्रोत्साहन राशि और एरियर जारी करने की मांग उठाई।

    तेज धूप के बावजूद बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ता कलेक्टर कार्यालय परिसर में डटी रहीं। कई महिलाएं धूप से बचने के लिए छाते लेकर धरने पर बैठीं जबकि कुछ अपने छोटे बच्चों के साथ प्रदर्शन में शामिल हुईं। कार्यकर्ताओं का कहना था कि स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के बावजूद उन्हें समय पर भुगतान और निर्धारित सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।

    प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि कई महीनों तक प्रोत्साहन राशि का भुगतान नहीं किया जाता और भुगतान में मनमानी कटौती भी की जाती है। उनका कहना है कि बकाया राशि का स्पष्ट विवरण भी उपलब्ध नहीं कराया जाता जिससे उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

    आशा कार्यकर्ताओं ने वर्ष 2023 में घोषित एक हजार रुपये की वार्षिक वेतन वृद्धि का एरियर तत्काल जारी करने की मांग भी दोहराई। उनका कहना है कि सरकार द्वारा घोषणा किए जाने के बावजूद अब तक एरियर का भुगतान नहीं हुआ है। साथ ही छह हजार रुपये मासिक प्रोत्साहन राशि में परिवार का भरण पोषण करना बेहद कठिन हो गया है।

    रैली शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए कलेक्टर कार्यालय पहुंची जहां करीब आधे घंटे तक धरना प्रदर्शन चला। इस दौरान भारत माता की जय और हमारा हक हमें दो जैसे नारों से पूरा परिसर गूंज उठा। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के माध्यम से सरकार को अपनी मांगों का ज्ञापन भी सौंपा।

    आशा कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगला चरण विधानसभा घेराव का होगा और तब तक आंदोलन जारी रहेगा जब तक लंबित भुगतान और अन्य मांगों का समाधान नहीं किया जाता।

  • बारिश में घूमने का बना रहे हैं प्लान तो पहुंचिए उदयपुर जानिए 7 दिन की यात्रा और खर्च

    बारिश में घूमने का बना रहे हैं प्लान तो पहुंचिए उदयपुर जानिए 7 दिन की यात्रा और खर्च


    नई दिल्ली । बारिश का मौसम शुरू होते ही राजस्थान का उदयपुर अपनी अलग ही खूबसूरती में नजर आता है। झीलों से घिरा यह ऐतिहासिक शहर मानसून के दौरान हरियाली से ढक जाता है और अरावली की पहाड़ियां बादलों की चादर ओढ़ लेती हैं। पानी से लबालब भरी झीलें और शाही महलों का नजारा इस शहर को देश के सबसे खूबसूरत मानसून पर्यटन स्थलों में शामिल कर देता है। यदि आप एक सप्ताह की यादगार यात्रा की योजना बना रहे हैं तो उदयपुर बेहतरीन विकल्प हो सकता है।

    यात्रा के पहले दिन सिटी पैलेस और लेक पिछोला की सैर करें। शाम को बोट राइड का आनंद लें और झील किनारे स्थानीय भोजन का स्वाद लें।

    दूसरे दिन फतेह सागर झील, सहेलियों की बाड़ी और स्थानीय बाजारों की सैर करें। मानसून के दौरान यहां का वातावरण बेहद सुहावना रहता है।

    तीसरे दिन सज्जनगढ़ पैलेस जाएं जिसे मानसून पैलेस भी कहा जाता है। यहां से पूरे शहर और झीलों का मनोरम दृश्य दिखाई देता है। बारिश के मौसम में यह स्थान फोटोग्राफी के लिए सबसे पसंदीदा माना जाता है।

    चौथे दिन एकलिंगजी मंदिर और नाथद्वारा मंदिर का धार्मिक भ्रमण किया जा सकता है। दोनों स्थल उदयपुर से सड़क मार्ग द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है।

    पांचवें दिन बागोर की हवेली और स्थानीय संग्रहालय देखें। शाम को पारंपरिक राजस्थानी लोकनृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रम यात्रा को और यादगार बना देंगे।

    छठे दिन आसपास की अरावली पहाड़ियों और प्राकृतिक स्थलों की सैर करें। बारिश के मौसम में यहां की हरियाली और शांत वातावरण प्रकृति प्रेमियों को खूब आकर्षित करता है।

    सातवें दिन स्थानीय हस्तशिल्प बाजारों से राजस्थानी कला वस्तुएं कपड़े और स्मृति चिह्न खरीदकर अपनी यात्रा का समापन करें।

    अनुमानित खर्च
    आने जाने का यात्रा खर्च लगभग 4000 से 10000 रुपये (शहर और परिवहन के अनुसार)
    होटल का खर्च प्रति रात लगभग 2000 से 5000 रुपये
    भोजन पर प्रतिदिन लगभग 800 से 1500 रुपये
    स्थानीय घूमने और प्रवेश शुल्क लगभग 3000 से 5000 रुपये
    कुल सात दिन का औसत बजट प्रति व्यक्ति लगभग 25000 से 45000 रुपये हो सकता है।

    मानसून के दौरान यात्रा करते समय छाता या रेनकोट साथ रखें। फिसलन वाले स्थानों पर सावधानी बरतें और मौसम का पूर्वानुमान देखकर ही यात्रा की योजना बनाएं। बारिश के मौसम में उदयपुर की झीलें, महल और हरियाली मिलकर ऐसा अनुभव देती हैं जो लंबे समय तक याद रहता है।

  • मानसून में बढ़ जाता है इन 7 बीमारियों का खतरा जानिए बचाव के आसान और असरदार उपाय

    मानसून में बढ़ जाता है इन 7 बीमारियों का खतरा जानिए बचाव के आसान और असरदार उपाय


    नई दिल्ली । बारिश का मौसम गर्मी से राहत तो देता है लेकिन अपने साथ कई संक्रामक बीमारियों का खतरा भी लेकर आता है। इस दौरान जगह जगह पानी जमा होने से मच्छरों का प्रजनन तेजी से बढ़ता है जबकि दूषित पानी और गंदगी बैक्टीरिया तथा वायरस के फैलाव को बढ़ावा देते हैं। ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही भी स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के दौरान साफ सफाई और खानपान का विशेष ध्यान रखकर कई गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है।

    मानसून में सबसे अधिक फैलने वाली बीमारियों में डेंगू प्रमुख है। यह एडीज मच्छर के काटने से फैलता है। तेज बुखार सिरदर्द आंखों के पीछे दर्द और शरीर तथा जोड़ों में तेज दर्द इसके सामान्य लक्षण हैं। इससे बचने के लिए घर के आसपास पानी जमा न होने दें मच्छरदानी और मच्छर भगाने वाले उत्पादों का उपयोग करें तथा पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें।

    मलेरिया भी बारिश के मौसम में तेजी से फैलता है। संक्रमित मच्छर के काटने से होने वाली इस बीमारी में ठंड लगकर बुखार आना पसीना आना कमजोरी और सिरदर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। शाम के समय मच्छरों से बचाव और साफ वातावरण बनाए रखना बेहद जरूरी है।

    चिकनगुनिया भी मच्छरों के जरिए फैलने वाला संक्रमण है जिसमें तेज बुखार के साथ जोड़ों में असहनीय दर्द हो सकता है। नियमित सफाई और मच्छरों की रोकथाम इसके बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

    बारिश में दूषित भोजन और पानी के कारण टाइफाइड का खतरा भी बढ़ जाता है। लगातार बुखार पेट दर्द कमजोरी और पाचन संबंधी समस्याएं इसके प्रमुख संकेत हैं। हमेशा स्वच्छ पानी पिएं और खुले में मिलने वाले खाद्य पदार्थों से बचें।

    हेपेटाइटिस ए भी गंदे पानी और दूषित भोजन से फैलने वाला संक्रमण है। इसमें आंखों और त्वचा का पीला पड़ना भूख कम लगना थकान और पेट दर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। भोजन और पानी की स्वच्छता इसका सबसे प्रभावी बचाव है।

    गैस्ट्रोएंटेराइटिस यानी पेट का संक्रमण भी मानसून में आम हो जाता है। दूषित भोजन या पानी के कारण दस्त उल्टी पेट दर्द और शरीर में पानी की कमी की समस्या हो सकती है। ताजा और अच्छी तरह पका हुआ भोजन खाना तथा पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ पानी पीना जरूरी है।

    मौसम में अचानक बदलाव के कारण सर्दी जुकाम और फ्लू के मामले भी तेजी से बढ़ते हैं। नाक बहना गले में खराश खांसी और हल्का बुखार इसके सामान्य लक्षण हैं। नियमित हाथ धोना पर्याप्त नींद लेना संतुलित आहार और मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखना संक्रमण से बचने में मदद करता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के दौरान कुछ आसान सावधानियां अपनाकर इन बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। घर और आसपास पानी जमा न होने दें केवल साफ और उबला हुआ पानी पिएं ताजा भोजन करें और बुखार या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई देने पर बिना देरी किए डॉक्टर से सलाह लें। समय पर सतर्कता ही स्वस्थ मानसून की सबसे बड़ी कुंजी है।

  • फिजूलखर्ची छोड़ सेवा का संदेश युवा समाजसेवी ने वृद्धजनों के साथ मनाया जन्मदिन

    फिजूलखर्ची छोड़ सेवा का संदेश युवा समाजसेवी ने वृद्धजनों के साथ मनाया जन्मदिन


    चित्रकूट। आज के दौर में जहां जन्मदिन के मौके पर भव्य पार्टियों और दिखावे का चलन तेजी से बढ़ रहा है वहीं चित्रकूट के युवा समाजसेवी बीपी पटेल ने समाज को प्रेरित करने वाली मिसाल पेश की। उन्होंने अपना जन्मदिन परिवार और दोस्तों के साथ किसी होटल या समारोह स्थल पर मनाने के बजाय गणेश बाग के समीप स्थित विनायकपुर वृद्धाश्रम में बुजुर्गों के बीच मनाया।

    इस अवसर पर बीपी पटेल ने वृद्धाश्रम में रह रहे सभी बुजुर्गों को मिठाई समोसा और फल वितरित किए तथा उनके साथ समय बिताकर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। बुजुर्गों ने भी स्नेहपूर्वक उन्हें और जानकी पटेल को स्वस्थ जीवन तथा दीर्घायु का आशीर्वाद देते हुए उनके इस सामाजिक कार्य की सराहना की।

    समाजसेवी बीपी पटेल ने कहा कि जन्मदिन केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं बल्कि समाज के जरूरतमंद और उपेक्षित लोगों के साथ खुशियां बांटने का भी दिन होना चाहिए। उन्होंने युवाओं से भी अपील की कि वे अपने विशेष अवसरों को सेवा और समाजहित के कार्यों से जोड़ें ताकि ऐसे आयोजन जरूरतमंद लोगों के चेहरे पर मुस्कान ला सकें।

    इस मौके पर सभासद शंकर प्रसाद यादव धर्मेंद्र कुमार ओझा सुरेंद्र यादव हरिशरण जानकी पटेल जगपालक सिंह यादव आशीष श्रीवास्तव एडवोकेट प्रखर सिंह प्रदोष सिंह पटेल वृद्धाश्रम के प्रबंधक कामता प्रसाद समाजसेविका दिव्यांगना मिश्रा अनुराग सिंह पटेल अशोक पटेल और ओंकार सिंह चंदेल सहित अनेक लोग मौजूद रहे।

    जन्मदिन समारोह से पहले बीपी पटेल ने पंपापुर देवांगना हनुमानगढ़ी आश्रम पहुंचकर सिद्ध संत तपशाली प्रेमदास जी महाराज का आशीर्वाद लिया और गुफा में विराजमान हनुमान जी के दर्शन कर अपने सामाजिक जीवन में सेवा और मानवता के मार्ग पर आगे बढ़ने का संकल्प दोहराया।

    बीपी पटेल की यह पहल न केवल बुजुर्गों के प्रति सम्मान का संदेश देती है बल्कि यह भी बताती है कि जीवन के खास अवसरों को समाज सेवा से जोड़कर उन्हें अधिक सार्थक और प्रेरणादायक बनाया जा सकता है।

  • अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट की बड़ी बैठक चढ़ावा चोरी मामले के बाद लिए जा सकते हैं अहम निर्णय

    अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट की बड़ी बैठक चढ़ावा चोरी मामले के बाद लिए जा सकते हैं अहम निर्णय


    उत्तरप्रदेश। अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण सामने आने के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की पहली महत्वपूर्ण बैठक सोमवार को शुरू हो गई। इस बैठक पर देशभर के श्रद्धालुओं और आम लोगों की नजरें टिकी हैं क्योंकि इसमें ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफों सहित कई अहम मुद्दों पर फैसला लिया जाना है।

    बैठक में ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास व्हीलचेयर पर पहुंचकर शामिल हुए। महासचिव चंपत राय भी बैठक में मौजूद रहे जबकि अनिल मिश्रा बैठक शुरू होने तक नहीं पहुंचे। जानकारी के अनुसार ट्रस्ट के कुछ पदेन सदस्य और केंद्र तथा उत्तर प्रदेश सरकार के प्रतिनिधि भी प्रत्यक्ष रूप से बैठक में शामिल नहीं हुए और उनके ऑनलाइन जुड़ने की संभावना जताई गई।

    बताया जा रहा है कि चढ़ावा चोरी की घटना सार्वजनिक होने के बाद चंपत राय और अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा सौंप दिया था। ट्रस्ट की बैठक में इन इस्तीफों को स्वीकार करने या आगे की कार्रवाई को लेकर विचार किया जा रहा है। ट्रस्ट में कुल 14 सदस्य हैं जिनमें चार पदेन सदस्य शामिल हैं। किसी भी प्रस्ताव को पारित करने के लिए दो तिहाई सदस्यों की सहमति आवश्यक होती है जबकि पदेन सदस्यों के मतों की गणना नहीं की जाती।

    बैठक से पहले ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने एक बयान जारी कर कहा कि मंदिर में चढ़ावे की चोरी की घटना से वे बेहद आहत हैं। उन्होंने कहा कि जिसने भी ऐसा महापाप किया है उसे कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि श्रद्धालुओं की आस्था के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जा सकता।

    बैठक के दौरान ट्रस्ट के सदस्यों ने मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम पर भरोसा जताया। उनका कहना था कि इस घटना से देशभर में गलत संदेश गया है और करोड़ों रामभक्तों की भावनाएं आहत हुई हैं। इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई आवश्यक है।

    सूत्रों के अनुसार यदि महासचिव पद पर बदलाव होता है तो विश्व हिंदू परिषद के बजरंग बागड़ा का नाम सामने आ सकता है। वहीं ट्रस्टी पद के लिए नीरज दौनेरिया के नाम पर भी चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि इन संभावित नियुक्तियों पर अंतिम निर्णय ट्रस्ट की बैठक के बाद ही स्पष्ट होगा।

    इस बीच चढ़ावा चोरी मामले की सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ पहले ही खारिज कर चुकी है। अदालत ने कहा कि इसी विषय से संबंधित मामला पहले से सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है। ऐसे में अब सभी की निगाहें ट्रस्ट की बैठक में लिए जाने वाले निर्णय और जांच की अगली दिशा पर टिकी हुई हैं।

  • कानपुर में दर्दनाक हादसा कंटेनर ने ट्रैफिक सिपाहियों को कुचला एक की मौत ड्राइवर भी मरा

    कानपुर में दर्दनाक हादसा कंटेनर ने ट्रैफिक सिपाहियों को कुचला एक की मौत ड्राइवर भी मरा


    उत्तरप्रदेश। कानपुर में सोमवार तड़के बर्रा एलिवेटेड रोड पर एक दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। ड्यूटी पर तैनात दो ट्रैफिक सिपाही जब एक ट्रक को रोककर उसके दस्तावेजों की जांच कर रहे थे, तभी पीछे से तेज रफ्तार में आ रहे एक कंटेनर ने जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि मौके पर अफरा तफरी मच गई और कुछ ही पलों में हालात बेकाबू हो गए।

    जानकारी के अनुसार ट्रैफिक कांस्टेबल जितेंद्र कुमार और राकेश कुमार नौबस्ता चौराहे पर ड्यूटी कर रहे थे। इसी दौरान झारखंड नंबर का एक खाली ट्रक पनकी प्लांट की ओर जा रहा था। शक के आधार पर दोनों सिपाहियों ने ट्रक को रोका और चालक को नीचे उतारकर दस्तावेजों की जांच शुरू की। वे ट्रक के पीछे खड़े होकर पूछताछ कर ही रहे थे कि तभी पीछे से तेज रफ्तार कंटेनर आया और ट्रक को जोरदार टक्कर मार दी।

    हादसे के बाद कंटेनर लगभग 50 मीटर तक वाहन को घसीटता हुआ ले गया। इस दौरान दोनों सिपाही और ट्रक चालक उसकी चपेट में आ गए। हादसे में कांस्टेबल जितेंद्र कुमार की मौके पर ही मौत हो गई जबकि दूसरे सिपाही राकेश कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए जिन्हें कांशीराम अस्पताल में भर्ती कराया गया है। ट्रक चालक रितेश कुमार यादव की भी इस हादसे में मौत हो गई।

    जितेंद्र कुमार 2018 बैच के सिपाही थे और आगरा के रहने वाले थे। उनकी शादी 2020 में हुई थी और उनकी एक ढाई साल की बेटी भी है। इस घटना ने उनके परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। वहीं घायल सिपाही राकेश कुमार का इलाज जारी है और उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है।

    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। हादसे के बाद एलिवेटेड रोड पर करीब दो घंटे तक यातायात बाधित रहा और लंबा जाम लग गया।

    प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हादसा तेज रफ्तार और लापरवाही के कारण हुआ। पुलिस मामले की जांच कर रही है और कंटेनर चालक की पहचान तथा उसकी जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया जारी है।

    यह घटना एक बार फिर सड़क सुरक्षा और भारी वाहनों की रफ्तार पर सवाल खड़े करती है। ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चर्चा शुरू हो गई है।

  • आज दुल्हन बनेंगी अंशुला कपूर, मुंबई में रोहन ठक्कर संग लेंगी सात फेरे, परिवार और करीबी मेहमान होंगे शामिल

    आज दुल्हन बनेंगी अंशुला कपूर, मुंबई में रोहन ठक्कर संग लेंगी सात फेरे, परिवार और करीबी मेहमान होंगे शामिल

    नई दिल्ली। कपूर परिवार में आज जश्न का माहौल है। फिल्म निर्माता बोनी कपूर की बेटी और अभिनेता अर्जुन कपूर की बहन अंशुला कपूर सोमवार को अपने मंगेतर रोहन ठक्कर के साथ विवाह बंधन में बंधने जा रही हैं। दोनों की शादी मुंबई के प्रतिष्ठित ताज लैंड्स एंड होटल में होगी। समारोह को पूरी तरह निजी रखा गया है, जिसमें केवल परिवार के सदस्य, करीबी रिश्तेदार और चुनिंदा मेहमान ही शामिल होंगे। शादी को लेकर कपूर परिवार में पिछले कई दिनों से तैयारियां चल रही थीं।

    जानकारी के अनुसार शादी की सभी रस्में एक ही दिन में पूरी की जाएंगी। विवाह समारोह के बाद मेहमानों के लिए एक विशेष कॉकटेल पार्टी का भी आयोजन किया गया है। दोनों परिवार इस मौके को बेहद सादगी और गरिमापूर्ण तरीके से मनाना चाहते हैं। शादी में आधुनिक भारतीय थीम को ध्यान में रखते हुए मेहमानों के लिए विशेष ड्रेस कोड भी तय किया गया है, जिससे पूरे समारोह में एक जैसी सांस्कृतिक और पारंपरिक झलक दिखाई दे।

    अंशुला कपूर की शादी से पहले हुए प्री-वेडिंग समारोह भी चर्चा में रहे। मेहंदी, चूड़ा और माता की चौकी जैसी पारंपरिक रस्मों की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए, जिन्हें लोगों ने काफी पसंद किया। परिवार के सदस्यों और करीबी दोस्तों ने इन कार्यक्रमों में हिस्सा लेकर शादी की खुशियों को साझा किया। समारोह की सजावट और तैयारियों को भी पारंपरिक और आधुनिक शैली का मिश्रण बताया जा रहा है।

    अंशुला कपूर और रोहन ठक्कर की प्रेम कहानी भी काफी दिलचस्प रही है। दोनों की मुलाकात वर्ष 2022 में एक डेटिंग ऐप के जरिए हुई थी। समय के साथ दोनों की दोस्ती गहरे रिश्ते में बदल गई और पिछले वर्ष जुलाई में न्यूयॉर्क के सेंट्रल पार्क में रोहन ने अंशुला को शादी के लिए प्रपोज किया था। सगाई की तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थीं और प्रशंसकों ने इस जोड़ी को भरपूर शुभकामनाएं दी थीं।

    रोहन ठक्कर पेशे से लेखक हैं और उन्होंने अमेरिका के लॉस एंजिल्स में फिल्म और स्क्रीनराइटिंग की पढ़ाई की है। मनोरंजन जगत से जुड़े होने के बावजूद उन्होंने हमेशा निजी जीवन को सार्वजनिक चर्चा से दूर रखा है। यही वजह है कि दोनों ने अपनी शादी को भी सीमित लोगों की मौजूदगी में आयोजित करने का फैसला किया है।

    शादी में फिल्म जगत के कई जाने-माने चेहरों के शामिल होने की संभावना है। हालांकि समारोह निजी होने के कारण मेहमानों की सूची सार्वजनिक नहीं की गई है। कपूर परिवार की ओर से भी पूरे आयोजन को सादगी और पारिवारिक माहौल में संपन्न कराने पर जोर दिया गया है।

    अंशुला कपूर लंबे समय से सामाजिक कार्यों और मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता से जुड़े अभियानों में सक्रिय रही हैं। वहीं रोहन ठक्कर भी रचनात्मक क्षेत्र में अपनी पहचान बना चुके हैं। ऐसे में दोनों की शादी को कपूर परिवार के लिए एक खास और यादगार अवसर माना जा रहा है। विवाह समारोह के बाद नवविवाहित जोड़े की पहली आधिकारिक तस्वीरों का भी प्रशंसकों को बेसब्री से इंतजार रहेगा।