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  • केमिस्ट एसोसिएशन का बड़ा प्रदर्शन: सरकार से हस्तक्षेप की मांग तेज

    केमिस्ट एसोसिएशन का बड़ा प्रदर्शन: सरकार से हस्तक्षेप की मांग तेज


    मध्य प्रदेश । खंडवा जिले में बुधवार को ऑनलाइन दवा बिक्री और इससे जुड़े नियमों के विरोध में व्यापक असर देखने को मिला, जहां करीब 450 मेडिकल स्टोर एक दिन के लिए बंद रहे। जिलेभर के केमिस्टों ने एकदिवसीय सांकेतिक हड़ताल करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचकर अपना विरोध दर्ज कराया। इस दौरान बड़ी संख्या में केमिस्ट एसोसिएशन के सदस्य मौजूद रहे और उन्होंने डिप्टी कलेक्टर दीक्षा भगोरे को ज्ञापन सौंपा।

    दोपहर के समय आयोजित इस प्रदर्शन में खंडवा केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के साथ मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव एसोसिएशन ने भी समर्थन दिया, जिससे आंदोलन और अधिक व्यापक रूप में दिखाई दिया। केमिस्टों का कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स द्वारा बिना वैध चिकित्सकीय परामर्श और फर्जी या असत्यापित ई-प्रिस्क्रिप्शन के आधार पर दवाओं की बिक्री की जा रही है, जो जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है।

    एसोसिएशन अध्यक्ष गोवर्धन गोलानी ने आरोप लगाया कि इंटरनेट और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से हो रही अवैध दवा बिक्री, फ्री होम डिलीवरी और भारी छूट की नीति छोटे और लाइसेंसधारी केमिस्ट व्यापारियों के अस्तित्व को संकट में डाल रही है। उनका कहना है कि यह स्थिति न केवल बाजार को असंतुलित कर रही है, बल्कि मरीजों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

    केमिस्टों ने अपने ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया कि ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 और 1945 के नियमों में ऑनलाइन दवा बिक्री को लेकर कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है, इसके बावजूद कई ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स कंपनियां लंबे समय से दवाओं का वितरण कर रही हैं। उन्होंने वर्ष 2018 की अधिसूचना GSR 817(E) और कोविड काल में जारी GSR 220(E) का हवाला देते हुए कहा कि इनका गलत उपयोग किया जा रहा है, जिससे अनियंत्रित दवा वितरण को बढ़ावा मिल रहा है।

    केमिस्ट संगठन ने प्रशासन से मांग की है कि बिना सत्यापित ई-प्रिस्क्रिप्शन के दवा वितरण पर तुरंत रोक लगाई जाए और अवैध ऑनलाइन बिक्री पर सख्त कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही GSR 817(E) और GSR 220(E) को वापस लेने तथा ऑनलाइन कंपनियों की प्रीडेटरी प्राइसिंग और अत्यधिक छूट नीति पर भी प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है।

    प्रदर्शन के दौरान केमिस्टों ने यह भी कहा कि कोविड महामारी के दौरान उन्होंने बिना रुके दवा आपूर्ति सुनिश्चित कर स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाए रखा था, लेकिन अब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की अनियंत्रित गतिविधियों के कारण उनका व्यवसाय प्रभावित हो रहा है।

    एसोसिएशन ने सरकार से अपील की है कि वह इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करे और छोटे दवा व्यापारियों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करे, ताकि मरीजों की सुरक्षा और दवा वितरण प्रणाली दोनों संतुलित रह सकें।

  • बहराइच की 23 वर्षीय नैना बनीं प्रेरणा: लंदन में मिला महिला सशक्तिकरण पुरस्कार, किंग चार्ल्स से की मुलाकात

    बहराइच की 23 वर्षीय नैना बनीं प्रेरणा: लंदन में मिला महिला सशक्तिकरण पुरस्कार, किंग चार्ल्स से की मुलाकात




    बहराइच। बहराइच जिले के रिसिया ब्लॉक के पटेल नगर गांव की रहने वाली 23 वर्षीय नैना ने अपनी मेहनत और संघर्ष के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन किया है। उन्हें लंदन के प्रतिष्ठित रॉयल अल्बर्ट हॉल में आयोजित ‘द किंग्स ट्रस्ट सेलिब्रेशन’ कार्यक्रम में अमल क्लूनी महिला सशक्तिकरण पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

    इस सम्मान समारोह के दौरान नैना को ब्रिटेन के राजा किंग चार्ल्स III और क्वीन कैमिला से मिलने का भी अवसर मिला। यह उपलब्धि उनके जीवन की कठिन यात्रा और सामाजिक बदलाव के लिए किए गए कार्यों का परिणाम मानी जा रही है।

    नैना का बचपन संघर्षों से भरा रहा। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्हें अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए खेतों में काम करना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने पढ़ाई जारी रखने का प्रयास किया और गांव के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर अपनी शिक्षा का खर्च निकाला।

    बाद में आगा खान फाउंडेशन और द किंग्स ट्रस्ट इंटरनेशनल की संयुक्त पहल ‘प्रोजेक्ट लहर’ ने उनकी मदद की, जिसके जरिए वे दोबारा स्कूल लौटीं, स्कॉलरशिप हासिल की और अपनी पढ़ाई पूरी की।

    वर्तमान में नैना किशोर लड़कियों के लिए लाइफ स्किल्स कोच के रूप में काम कर रही हैं। वह बाल विवाह के खिलाफ अभियान चलाने के साथ-साथ लड़कियों की शिक्षा और उनके अधिकारों के लिए लगातार जागरूकता फैला रही हैं। उनके प्रयासों से सैकड़ों लड़कियों को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिल रही है।

    पुरस्कार मिलने के बाद नैना ने कहा कि उनके जीवन के संघर्ष ही उनकी सबसे बड़ी ताकत बने। उन्होंने यह सम्मान सभी युवतियों को समर्पित करते हुए कहा कि कभी हार नहीं माननी चाहिए और अपने जीवन की सफलता की कहानी खुद लिखनी चाहिए।

    नैना की यह उपलब्धि न केवल बहराइच बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय बन गई है, जो यह साबित करती है कि कठिन परिस्थितियों में भी मेहनत और लगन से बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है।

  • मौसम विभाग की चेतावनी: 25 मई तक लू का असर, धार में बढ़ी परेशानी

    मौसम विभाग की चेतावनी: 25 मई तक लू का असर, धार में बढ़ी परेशानी


    मध्य प्रदेश । धार शहर और आसपास के क्षेत्रों में इन दिनों भीषण गर्मी ने जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। लगातार बढ़ते तापमान और तपती लू के कारण हालात ऐसे हो गए हैं कि दोपहर के समय घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। पिछले कई दिनों से जिले का अधिकतम तापमान 42 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया जा रहा है, जिससे आम लोगों की दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित हो रही है।

    सुबह के समय भी गर्मी से राहत नहीं मिल रही है, क्योंकि तापमान 27 से 28 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जा रहा है। जैसे-जैसे दिन चढ़ता है, तेज धूप और गर्म हवाएं स्थिति को और गंभीर बना देती हैं। दोपहर के समय बाजार और सड़कें लगभग सुनसान हो जाती हैं, और केवल जरूरी काम होने पर ही लोग घरों से बाहर निकल रहे हैं।

    भीषण गर्मी का सबसे ज्यादा असर स्वास्थ्य पर देखने को मिल रहा है। जिला अस्पताल और निजी अस्पतालों में डिहाइड्रेशन, बुखार, कमजोरी और लू लगने से संबंधित मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। डॉक्टरों के अनुसार यह स्थिति खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों, मजदूरों और खुले में काम करने वाले लोगों के लिए अधिक खतरनाक साबित हो रही है।

    गर्मी और लू के कारण रोजमर्रा की जिंदगी भी प्रभावित हो रही है। मजदूर वर्ग को खुले आसमान के नीचे काम करने में भारी परेशानी हो रही है, वहीं छोटे व्यापारियों और राहगीरों को भी गर्म हवाओं का सामना करना पड़ रहा है। दोपहर के समय बाजारों में सन्नाटा पसरा रहता है और लोग छांव और ठंडी जगहों की तलाश में नजर आते हैं।

    मौसम विभाग ने स्थिति को देखते हुए चेतावनी जारी की है कि आने वाले 25 मई तक जिले में लू का प्रभाव जारी रह सकता है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि तापमान में फिलहाल कोई बड़ी गिरावट के आसार नहीं हैं, बल्कि गर्म हवाओं का असर और बढ़ सकता है।

    प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने भी आम नागरिकों से सतर्क रहने की अपील की है। लोगों को सलाह दी गई है कि वे दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच अनावश्यक रूप से बाहर न निकलें, पर्याप्त मात्रा में पानी और तरल पदार्थों का सेवन करें तथा धूप से बचाव के लिए सिर को ढककर ही बाहर निकलें।

    विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की भीषण गर्मी में सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है, क्योंकि लू का असर अचानक स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। फिलहाल पूरे जिले में गर्मी का यह दौर लोगों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।

  • लखनऊ में मेडिकल स्टोर बंद: ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में व्यापारियों का बड़ा प्रदर्शन

    लखनऊ में मेडिकल स्टोर बंद: ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में व्यापारियों का बड़ा प्रदर्शन



    लखनऊ। लखनऊ में बुधवार को मेडिकल स्टोरों की बंदी से आम लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। शहर के अमीनाबाद, चौक, चारबाग समेत प्रमुख दवा बाजारों में सुबह से ही अधिकांश दुकानें शटर डाउन रहीं। इस बंदी का असर पूरे प्रदेश में देखा गया, जहां अनुमानित रूप से लाखों मेडिकल स्टोर बंद रहे।

    यह बंदी ऑनलाइन दवा बिक्री और ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्म्स के विरोध में की गई है। दवा व्यापारियों का आरोप है कि ऑनलाइन कंपनियां बिना पर्याप्त जांच और फार्मासिस्ट की निगरानी के दवाएं बेच रही हैं, जिससे मरीजों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो रहा है। साथ ही फर्जी प्रिस्क्रिप्शन और भारी डिस्काउंटिंग से पारंपरिक दवा कारोबार पर भी असर पड़ रहा है।

    इस विरोध प्रदर्शन के तहत ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) ने 24 घंटे की देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। इसी के समर्थन में लखनऊ केमिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन समेत विभिन्न संगठनों ने भी बंद को समर्थन दिया।

    व्यापारियों का कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए स्लीपिंग पिल्स, पेन किलर्स और अन्य नियंत्रित दवाओं की आसान उपलब्धता चिंता का विषय है, जिससे युवाओं में दुरुपयोग की आशंका बढ़ रही है। साथ ही अत्यधिक डिस्काउंटिंग को भी नियमों के खिलाफ बताते हुए उन्होंने सप्लाई चेन में गड़बड़ी और नकली दवाओं की संभावना जताई है।

    एसोसिएशन के अध्यक्ष अमित तिवारी ने कहा कि यह केवल व्यापार का मुद्दा नहीं है, बल्कि सीधे तौर पर मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा मामला है। उन्होंने आरोप लगाया कि फर्जी पर्चों के आधार पर दवाएं बेची जा रही हैं, जिससे गलत उपचार और गंभीर दुष्प्रभाव का खतरा बढ़ सकता है।

    हालांकि, संगठनों ने स्पष्ट किया है कि बंद के बावजूद इमरजेंसी और जीवन रक्षक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है, ताकि गंभीर मरीजों को किसी तरह की परेशानी न हो।

    दवा व्यापारियों ने सरकार से मांग की है कि ऑनलाइन दवा बिक्री पर सख्त नियम लागू किए जाएं, फार्मासिस्ट की निगरानी अनिवार्य की जाए और फर्जी प्रिस्क्रिप्शन पर पूरी तरह रोक लगाई जाए। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

  • भोजशाला की अनोखी प्रतिमा: 26 कलाकारों ने 35 दिन में तैयार की थी मां वाग्देवी

    भोजशाला की अनोखी प्रतिमा: 26 कलाकारों ने 35 दिन में तैयार की थी मां वाग्देवी


    मध्य प्रदेश । मध्यप्रदेश के ग्वालियर में एक बेहद ऐतिहासिक और संवेदनशील धार्मिक धरोहर पिछले 15 वर्षों से कड़ी सुरक्षा के बीच संरक्षित रखी हुई है। यह प्रतिमा धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला के गर्भगृह के लिए तैयार की गई मां वाग्देवी (मां सरस्वती) की अष्टधातु मूर्ति है, जिसे वर्ष 2011 में स्थापित किया जाना था, लेकिन उस समय उत्पन्न हुए विवाद और प्रशासनिक परिस्थितियों के चलते इसे ग्वालियर में ही रोक दिया गया था।

    हाल ही में भोजशाला को लेकर अदालत के फैसले के बाद एक बार फिर इस प्रतिमा को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कोर्ट ने भोजशाला परिसर को मंदिर मानते हुए सालभर बिना रोक-टोक पूजा-अर्चना की अनुमति दी है, जिसके बाद इस प्रतिमा के भविष्य को लेकर नए सिरे से उम्मीदें जागी हैं।

    जानकारी के अनुसार, इस दिव्य अष्टधातु प्रतिमा को ग्वालियर के मूर्तिकार प्रभात राय और उनकी टीम ने तैयार किया था। मूर्तिकार के बेटे अनुज राय ने बताया कि वर्ष 2011 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ नेता नवल किशोर जी के आदेश पर यह प्रतिमा तैयार की गई थी। इसे केवल 35 दिनों में 26 कुशल कलाकारों की मेहनत से गढ़ा गया था। प्रतिमा को भोजशाला में स्थापित करने की पूरी तैयारी हो चुकी थी, लेकिन अंतिम समय में विवाद बढ़ने के कारण इसे ग्वालियर में ही रोक दिया गया।

    परिवार के अनुसार, उस समय स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई थी कि कई दिनों तक पुलिस सुरक्षा में प्रतिमा को घर में रखा गया। वर्षों तक बसंत पंचमी जैसे अवसरों पर भी सीमित समय के लिए पुलिस सुरक्षा के बीच ही प्रतिमा को बाहर निकाला जाता था और फिर सुरक्षित रख दिया जाता था।

    मूर्तिकार परिवार आज भी इस प्रतिमा को अपने लिए एक गौरव और ऐतिहासिक धरोहर मानता है। अनुज राय ने भावुक होकर कहा कि यदि भविष्य में यह प्रतिमा स्थापित नहीं भी होती है, तो भी वे इसे गर्व के साथ अपने पास सुरक्षित रखेंगे, क्योंकि यह भारतीय संस्कृति और इतिहास का महत्वपूर्ण प्रतीक है।

    इधर, आरएसएस से जुड़े स्थानीय पदाधिकारियों के अनुसार उस समय प्रतिमा के संरक्षक रहे नवल किशोर अब आध्यात्मिक जीवन अपनाकर मौन धारण कर चुके हैं, जिससे इस प्रतिमा के भविष्य को लेकर कई सवाल अनुत्तरित हैं।

    इस बीच, हिंदू पक्ष से जुड़े संगठन भोज उत्सव समिति ने भी इस मुद्दे को फिर से उठाया है। समिति का कहना है कि लंदन स्थित ब्रिटिश म्यूजियम में रखी मूल मां वाग्देवी प्रतिमा को भारत लाकर भोजशाला में स्थापित करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। संगठन का दावा है कि यह प्रतिमा ऐतिहासिक और धार्मिक दोनों दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

    हालांकि, ग्वालियर में सुरक्षित रखी गई प्रतिमा को भोजशाला में स्थापित करने को लेकर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है और यह विषय फिलहाल विचाराधीन है। संगठन के अनुसार, आगे की सभी प्रक्रियाएं न्यायालय के निर्देशों और कानूनी प्रावधानों के अनुसार ही पूरी की जाएंगी।

    भोजशाला विवाद का यह अध्याय अब एक बार फिर नए मोड़ पर पहुंच गया है, जहां एक ओर न्यायालय के फैसले ने आस्था से जुड़े पक्ष को राहत दी है, वहीं ग्वालियर में सुरक्षित रखी प्रतिमा का भविष्य भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

  • TVK सरकार पर संकट के बादल, CPI-M ने दी समर्थन वापसी की चेतावनी, तमिलनाडु में बढ़ा सियासी टकराव

    TVK सरकार पर संकट के बादल, CPI-M ने दी समर्थन वापसी की चेतावनी, तमिलनाडु में बढ़ा सियासी टकराव


    नई दिल्ली । तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी तनाव देखने को मिल रहा है, जहां मुख्यमंत्री थलपति विजय की पार्टी टीवीके (TVK) के नेतृत्व वाली सरकार पर संकट के बादल गहराते नजर आ रहे हैं। सरकार को बाहर से समर्थन दे रही मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPI-M) ने अब खुलकर चेतावनी दी है कि यदि सत्ता समीकरणों में बदलाव किया गया या AIADMK को सरकार में शामिल किया गया तो समर्थन पर पुनर्विचार किया जा सकता है। इस बयान के बाद राज्य की राजनीतिक परिस्थितियां और अधिक जटिल होती दिखाई दे रही हैं।

    CPI-M के वरिष्ठ नेता ने साफ तौर पर कहा है कि तमिलनाडु की जनता ने इस बार परंपरागत राजनीतिक दलों से हटकर एक नया विकल्प चुना है और टीवीके सरकार का गठन इसी जनादेश का परिणाम है। उनके अनुसार, वामपंथी दलों और अन्य सहयोगी पार्टियों ने केवल इसलिए समर्थन दिया ताकि राज्य में एक वैकल्पिक और अपेक्षाकृत साफ-सुथरी शासन व्यवस्था स्थापित हो सके। ऐसे में यदि सरकार अपने मूल राजनीतिक रुख से हटकर AIADMK के साथ गठजोड़ करती है या उसे सत्ता में हिस्सेदारी देती है, तो यह जनता के भरोसे के साथ समझौता माना जाएगा।

    इस चेतावनी के बाद तमिलनाडु के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। विपक्षी दलों के साथ-साथ सत्ताधारी गठबंधन के भीतर भी असहजता की स्थिति देखी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गठबंधन की स्थिरता कई छोटे दलों के समर्थन पर निर्भर है, ऐसे में किसी भी प्रमुख सहयोगी का असंतोष सरकार के लिए चुनौती खड़ी कर सकता है।

    गौरतलब है कि हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था और राज्य में गठबंधन सरकार का गठन हुआ था। टीवीके ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन करते हुए सबसे अधिक सीटें हासिल की थीं, लेकिन सरकार बनाने के लिए उसे कई छोटे दलों के समर्थन पर निर्भर रहना पड़ा। यही कारण है कि शुरुआत से ही इस गठबंधन में राजनीतिक मतभेद और असहमति की स्थिति बनी हुई है।

    CPI-M का यह ताजा रुख सरकार के लिए एक बड़ा संकेत माना जा रहा है कि आने वाले समय में राजनीतिक संतुलन और सहयोग बनाए रखना आसान नहीं होगा। पार्टी ने यह भी कहा है कि वह सरकार की नीतियों और फैसलों पर नजर बनाए हुए है और जनहित के खिलाफ किसी भी निर्णय पर सख्त रुख अपनाया जाएगा।

    राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि तमिलनाडु की मौजूदा स्थिति बेहद नाजुक है, जहां छोटे दलों का समर्थन सरकार की स्थिरता तय करने में अहम भूमिका निभा रहा है। ऐसे में हर निर्णय और हर राजनीतिक गठजोड़ राज्य की सत्ता समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। फिलहाल सभी की नजर मुख्यमंत्री विजय के अगले कदम पर टिकी हुई है, जो यह तय करेगा कि सरकार आगे स्थिर रहती है या राजनीतिक संकट और गहरा जाता है।

  • बंगाल में आरक्षण नीति पर नया मोड़, ओबीसी कोटा गणित बदला; कई समुदायों की स्थिति में बड़ा बदलाव

    बंगाल में आरक्षण नीति पर नया मोड़, ओबीसी कोटा गणित बदला; कई समुदायों की स्थिति में बड़ा बदलाव

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल में आरक्षण व्यवस्था को लेकर बड़ा प्रशासनिक और नीतिगत बदलाव देखने को मिला है, जहां ओबीसी वर्गीकरण प्रणाली में संशोधन कर पुरानी सूची को फिर से लागू कर दिया गया है। इस फैसले के बाद राज्य की आरक्षण संरचना में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुआ है, जिससे सामाजिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर नई चर्चा शुरू हो गई है। यह कदम अदालत के निर्देशों और मौजूदा नियमों के अनुपालन के संदर्भ में उठाया गया बताया जा रहा है, जिसके तहत पहले लागू संशोधित ओबीसी सूची को रद्द कर दिया गया है।

    इस बदलाव के बाद राज्य में 2010 से पहले की ओबीसी सूची को बहाल किया गया है, जिसमें कई पारंपरिक समुदायों को फिर से शामिल किया गया है। इस सूची के अनुसार अब संबंधित समुदायों को सरकारी नौकरियों और अन्य नियुक्तियों में निर्धारित आरक्षण का लाभ मिलेगा। प्रशासनिक स्तर पर इस निर्णय को व्यवस्था में पारदर्शिता और संतुलन लाने की दिशा में उठाया गया कदम बताया जा रहा है।

    पहले राज्य में ओबीसी आरक्षण को दो श्रेणियों में बांटा गया था, जिसमें एक वर्ग को अधिक पिछड़ा मानते हुए अलग प्रतिशत का लाभ दिया जाता था, जबकि दूसरे वर्ग को अलग कोटा मिलता था। लेकिन अब इस पूरी व्यवस्था को समाप्त कर एकीकृत प्रणाली लागू की गई है, जिससे आरक्षण ढांचे में व्यापक बदलाव देखने को मिल रहा है।

    इस फैसले के बाद बड़ी संख्या में पहले जारी किए गए ओबीसी प्रमाणपत्रों की वैधता पर भी प्रभाव पड़ा है। बताया जा रहा है कि 2010 के बाद जारी कई प्रमाणपत्र अब इस नई व्यवस्था के दायरे में नहीं आते, जिससे प्रभावित लोगों की संख्या लाखों में है। हालांकि पहले से नौकरी प्राप्त कर चुके कर्मचारियों की स्थिति को सुरक्षित रखा गया है और पुराने प्रमाणपत्रों को मान्यता दी गई है।

    नई सूची में कई पारंपरिक सामाजिक समुदायों को शामिल किया गया है, जो लंबे समय से पिछड़ा वर्ग की श्रेणी में आते रहे हैं। इसके साथ ही कुछ अल्पसंख्यक समुदायों को भी पिछड़ा वर्ग में शामिल किया गया है, जिससे आरक्षण ढांचे का सामाजिक संतुलन बदलता हुआ दिखाई दे रहा है।

    इस निर्णय के बाद राज्य में राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। विभिन्न स्तरों पर इसे सामाजिक न्याय और प्रशासनिक सुधार से जोड़कर देखा जा रहा है, जबकि कुछ वर्ग इसे आरक्षण नीति में बड़ा बदलाव मान रहे हैं। आने वाले समय में यह बदलाव राज्य की सामाजिक संरचना और सरकारी नौकरियों की प्रक्रिया पर गहरा प्रभाव डाल सकता है।

  • देवास ब्लास्ट केस में बड़ा खुलासा: मुख्य आरोपी का भाई दिल्ली से गिरफ्तार

    देवास ब्लास्ट केस में बड़ा खुलासा: मुख्य आरोपी का भाई दिल्ली से गिरफ्तार


    मध्य प्रदेश ।  देवास जिले के टोंककला स्थित पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट मामले में जांच एजेंसी SIT ने एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी मुकेश विज के भाई कपिल विज को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया है। इस दर्दनाक हादसे में 6 लोगों की मौत हुई थी, जिसके बाद से जांच एजेंसियां लगातार आरोपियों की तलाश में जुटी हुई थीं। गिरफ्तारी के बाद कपिल विज से पूछताछ जारी है और उससे मामले से जुड़े कई अहम खुलासे होने की उम्मीद जताई जा रही है।

    सूत्रों के अनुसार, SIT पिछले कई दिनों से दिल्ली के विभिन्न ठिकानों पर दबिश दे रही थी। लगातार निगरानी और तकनीकी इनपुट के आधार पर मंगलवार को कपिल विज को गिरफ्तार किया गया। जांच में यह भी सामने आया है कि फैक्ट्री के संचालन में कपिल विज की अहम भूमिका थी और वह पूरे नेटवर्क का हिस्सा था। इसी आधार पर उसे मामले में आरोपी बनाया गया है।

    वहीं, मुख्य आरोपी मुकेश विज फिलहाल फरार बताया जा रहा है और उसके चीन में छिपे होने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि वह पटाखा बनाने वाली मशीनें लेने के लिए चीन गया था। पुलिस और जांच एजेंसियां अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी तलाश में जुट गई हैं।

    गौरतलब है कि यह मामला बेहद गंभीर है, जिसमें फैक्ट्री में हुए विस्फोट के कारण 6 मजदूरों की जान चली गई थी। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया था और प्रशासनिक स्तर पर भी कई सवाल खड़े हुए थे। जांच में यह सामने आया कि फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों की भारी अनदेखी की गई थी और बड़े पैमाने पर विस्फोटक सामग्री अवैध रूप से रखी गई थी।

    एसआईटी की जांच में खुलासा हुआ कि प्रारंभिक जांच के दौरान चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, मुख्य संचालक के रूप में मुकेश विज का नाम सामने आया। अब उसके भाई कपिल विज की गिरफ्तारी के बाद पूरे नेटवर्क की परतें खुलने लगी हैं।

    पुलिस के अनुसार, देवास से भेजी गई विशेष टीम ने दिल्ली में कार्रवाई करते हुए कपिल विज को पकड़ा और अब उसे देवास लाया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में अब कुल छह आरोपियों को नामजद किया जा चुका है और अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

    इस बीच हादसे के बाद प्रशासनिक लापरवाही पर भी गंभीर सवाल उठे हैं। आरोप है कि फैक्ट्री में लाइसेंस से अधिक विस्फोटक सामग्री रखी गई थी और सुरक्षा नियमों का पालन नहीं किया गया था। यहां तक कि बिना पूर्ण निर्माण और सुरक्षा इंतजामों के ही फैक्ट्री में उत्पादन शुरू कर दिया गया था।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए पहले ही कुछ प्रशासनिक अधिकारियों पर कार्रवाई की जा चुकी है, लेकिन कई स्तरों पर जिम्मेदारी तय होना अभी बाकी है। राजनीतिक स्तर पर भी इस हादसे को लेकर बयानबाजी जारी है और सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

    फिलहाल SIT की प्राथमिकता मुख्य आरोपी मुकेश विज को गिरफ्तार करना है, ताकि पूरे रैकेट और फैक्ट्री संचालन के पीछे की असल सच्चाई सामने लाई जा सके। पुलिस का दावा है कि जल्द ही फरार आरोपी को भी पकड़ लिया जाएगा।

  • जटाधारी बाबा महाकाल के भस्म आरती दर्शन: भक्तों ने किए दिव्य दर्शन

    जटाधारी बाबा महाकाल के भस्म आरती दर्शन: भक्तों ने किए दिव्य दर्शन


    मध्य प्रदेश ।  विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन में बुधवार तड़के भव्य और दिव्य भस्म आरती का आयोजन किया गया, जिसमें बाबा महाकाल के गर्भगृह में विशेष धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सबसे पहले वीरभद्र जी को प्रणाम कर स्वस्ति वाचन किया गया और विधिवत आज्ञा लेने के बाद चांदी द्वार खोला गया। इसके बाद गर्भगृह के पट खोलकर बाबा महाकाल के दर्शन का क्रम प्रारंभ हुआ।

    आरती की शुरुआत में पुजारियों द्वारा भगवान महाकाल का श्रृंगार उतारा गया और जलाभिषेक किया गया। इसके बाद पंचामृत से विशेष पूजन किया गया, जिसमें दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और फलों के रस का उपयोग कर भगवान का अभिषेक किया गया। इस दौरान पूरे मंदिर परिसर में मंत्रोच्चार और आरती की गूंज से वातावरण भक्तिमय हो गया।

    पंचामृत पूजन के बाद कर्पूर आरती की गई और इसके पश्चात बाबा महाकाल को भस्म अर्पित कर उनका दिव्य श्रृंगार किया गया। जटाधारी स्वरूप में भगवान महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुंडमाला, रुद्राक्ष की माला तथा सुगंधित पुष्पों की मालाओं से अलंकृत किया गया। इसके साथ ही उन्हें ड्रायफ्रूट, फल और मिठाई का भोग भी अर्पित किया गया।

    भस्म अर्पण की यह विशेष परंपरा महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से निभाई गई, जिसे महाकालेश्वर मंदिर की सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक प्रक्रियाओं में से एक माना जाता है। मान्यता है कि भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल भक्तों को निराकार से साकार स्वरूप में दर्शन देते हैं, जिससे श्रद्धालुओं की आस्था और भी गहरी हो जाती है।

    इस दौरान नंदी हाल में नंदी महाराज का भी विशेष स्नान, ध्यान और पूजन किया गया, जिसके बाद पूरी भस्म आरती की प्रक्रिया पूर्ण हुई। आरती में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

    श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और आस्था के इस अद्भुत दृश्य ने पूरे मंदिर परिसर को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। हर ओर “जय श्री महाकाल” के जयकारों से वातावरण गूंजता रहा और भक्तों ने इस अलौकिक क्षण को अपने जीवन का सौभाग्य माना।

  • इटली दौरे में पीएम मोदी-मेलोनी की दोस्ती चर्चा में: कोलोजियम में सेल्फी, रोम की सड़कों पर साथ सफर

    इटली दौरे में पीएम मोदी-मेलोनी की दोस्ती चर्चा में: कोलोजियम में सेल्फी, रोम की सड़कों पर साथ सफर



    नई दिल्ली। इटली दौरे के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की मुलाकात इस बार खास अंदाज में चर्चा का विषय बन गई। रोम में दोनों नेताओं के बीच न सिर्फ औपचारिक बातचीत हुई, बल्कि उनका दोस्ताना अंदाज भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है।

    पीएम मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को एक खास “मेलोडी” नाम की टॉफी गिफ्ट की, जिसे लेकर मेलोनी ने एक्स पर वीडियो शेयर करते हुए खुशी जताई और कहा कि प्रधानमंत्री मोदी उनके लिए बहुत अच्छी टॉफी लेकर आए हैं, इसके लिए उन्होंने धन्यवाद भी दिया।

    इस मुलाकात के दौरान दोनों नेता रोम की सड़कों पर एक ही कार में साथ नजर आए और करीब 2000 साल पुराने ऐतिहासिक कोलोजियम का दौरा किया। वहां दोनों ने साथ में तस्वीरें भी खिंचवाईं, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गईं।

    इससे पहले दोनों नेताओं ने साथ में डिनर किया और कई अहम वैश्विक मुद्दों पर अनौपचारिक बातचीत भी की। मेलोनी ने मोदी के साथ एक सेल्फी साझा करते हुए लिखा “वेलकम माय फ्रेंड”, जिसने दोनों देशों के बीच मजबूत होते संबंधों को और भी उजागर किया।

    सूत्रों के अनुसार, इस दौरे में भारत और इटली के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, एडवांस टेक्नोलॉजी, रक्षा, ऊर्जा और ग्लोबल सप्लाई चेन जैसे अहम मुद्दों पर बातचीत हुई।

    भारत और इटली के बीच वर्तमान में 14 अरब यूरो से अधिक का व्यापार होता है और दोनों देश मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमोबाइल, फार्मा और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहे हैं। इस दौरे में स्पेशल स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप को और मजबूत करने पर भी विचार किया गया।

    प्रधानमंत्री मोदी ने इटली के उद्योगपतियों और कारोबारी नेताओं से भी मुलाकात की, जिसमें भारत में निवेश और नई औद्योगिक साझेदारी को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई।

    इसके अलावा दोनों नेताओं ने वैश्विक मुद्दों जैसे मिडिल-ईस्ट तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध, इंडो-पैसिफिक सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा पर भी विचार साझा किए।

    गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी इससे पहले भी 2024 में इटली का दौरा कर चुके हैं, जहां उन्होंने जी-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया था। यह यात्रा उनके पांच देशों के दौरे का अंतिम पड़ाव रहा, जिसमें यूएई, नीदरलैंड, स्वीडन और नॉर्वे शामिल रहे।