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  • अग्निपथ योजना में हो सकता है बड़ा बदलाव, अधिक अग्निवीरों को स्थायी सेवा में शामिल करने का प्रस्ताव सरकार के पास पहुंचा

    अग्निपथ योजना में हो सकता है बड़ा बदलाव, अधिक अग्निवीरों को स्थायी सेवा में शामिल करने का प्रस्ताव सरकार के पास पहुंचा

    नई दिल्ली। अग्निपथ योजना के तहत भर्ती हुए लाखों अग्निवीरों के लिए भविष्य में स्थायी सैन्य सेवा के अवसर बढ़ सकते हैं। तीनों सेनाओं की ओर से चार वर्ष का कार्यकाल पूरा करने वाले अधिक अग्निवीरों को नियमित सेवा में शामिल करने का प्रस्ताव सरकार के समक्ष रखा गया है। हालांकि इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक निर्णय नहीं लिया गया है, लेकिन प्रस्ताव पर गंभीर स्तर पर विचार किए जाने की चर्चा है। यदि इसे मंजूरी मिलती है तो अग्निपथ योजना लागू होने के बाद यह सबसे महत्वपूर्ण बदलावों में से एक माना जाएगा।

    मौजूदा व्यवस्था के अनुसार प्रत्येक बैच के अधिकतम 25 प्रतिशत अग्निवीरों को प्रदर्शन, योग्यता और संगठन की आवश्यकता के आधार पर नियमित सेवा में शामिल किया जा सकता है। अब तीनों सेनाओं ने इस सीमा को बढ़ाने का सुझाव दिया है। बताया जा रहा है कि भारतीय नौसेना ने सबसे अधिक संख्या में अग्निवीरों को स्थायी सेवा देने का प्रस्ताव रखा है, जबकि थल सेना और वायुसेना ने भी मौजूदा प्रतिशत बढ़ाने की सिफारिश की है।

    यह प्रस्ताव ऐसे समय सामने आया है जब अग्निपथ योजना के तहत भर्ती पहला बैच अपना चार वर्षीय कार्यकाल पूरा करने की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में बड़ी संख्या में प्रशिक्षित जवानों के भविष्य को लेकर चर्चा तेज हो गई है। सैन्य अधिकारियों का मानना है कि चार वर्षों के दौरान विशेष प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके जवानों को बड़ी संख्या में सेवा से बाहर करना व्यावहारिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

    आधुनिक सैन्य अभियानों में अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों, तकनीकी उपकरणों और विशेष युद्धक क्षमताओं का महत्व लगातार बढ़ा है। ऐसे में प्रशिक्षित और अनुभवी जवानों को अधिक समय तक सेवा में बनाए रखने से सेना की परिचालन क्षमता मजबूत होगी। इसके साथ ही प्रशिक्षण पर होने वाले निवेश का भी बेहतर उपयोग किया जा सकेगा।

    रिपोर्टों के अनुसार सशस्त्र बलों में मानव संसाधन की आवश्यकता भी इस प्रस्ताव के पीछे एक प्रमुख कारण मानी जा रही है। आने वाले वर्षों में भर्ती प्रक्रिया का दायरा बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है ताकि भविष्य की जरूरतों के अनुरूप पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित सैनिक उपलब्ध रह सकें। इससे सेना की दीर्घकालिक क्षमता और संचालन व्यवस्था को मजबूती मिलने की संभावना जताई जा रही है।

    हालांकि इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय अभी बाकी है। बताया जा रहा है कि पहले संबंधित स्तर पर विस्तृत समीक्षा की जाएगी, जिसके बाद ही सरकार अंतिम फैसला ले सकती है। इसलिए फिलहाल स्थायी सेवा में शामिल किए जाने की नई व्यवस्था लागू होने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

    अग्निपथ योजना की शुरुआत वर्ष 2022 में युवाओं को चार वर्ष के लिए सेना, नौसेना और वायुसेना में भर्ती करने के उद्देश्य से की गई थी। इस योजना के तहत चयनित युवाओं को अग्निवीर कहा जाता है। सेवा अवधि पूरी होने के बाद निर्धारित नियमों के अनुसार सीमित संख्या में अभ्यर्थियों को नियमित सेवा का अवसर मिलता है, जबकि अन्य अग्निवीरों को सेवा निधि, कौशल प्रमाणपत्र और विभिन्न रोजगार सहायता सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।

    योजना लागू होने के बाद नौकरी की स्थिरता, पेंशन और चार वर्ष बाद भविष्य की संभावनाओं को लेकर लगातार चर्चा होती रही है। यदि स्थायी सेवा में शामिल किए जाने का प्रतिशत बढ़ाने का प्रस्ताव स्वीकृत होता है तो इससे बड़ी संख्या में अग्निवीरों के लिए सैन्य करियर के अवसर बढ़ सकते हैं। साथ ही योजना को लेकर युवाओं के बीच विश्वास भी और मजबूत होने की संभावना है। फिलहाल सभी की नजरें सरकार के अंतिम निर्णय पर टिकी हुई हैं।

  • ऑस्ट्रेलिया का दबदबा बरकरार, इंग्लैंड को हराकर रिकॉर्ड सातवीं बार बना विमेंस टी20 वर्ल्ड कप चैंपियन

    ऑस्ट्रेलिया का दबदबा बरकरार, इंग्लैंड को हराकर रिकॉर्ड सातवीं बार बना विमेंस टी20 वर्ल्ड कप चैंपियन


    नई दिल्ली । महिला टी20 विश्व कप 2026 के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया ने एक बार फिर अपनी बादशाहत साबित करते हुए इंग्लैंड को 7 विकेट से हराकर रिकॉर्ड सातवीं बार खिताब जीत लिया। लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर खेले गए मुकाबले में बेथ मूनी और फोएबे लिचफील्ड की शानदार बल्लेबाजी ने ऑस्ट्रेलिया को आसान जीत दिला दी। इससे पहले ऑस्ट्रेलिया 2010, 2012, 2014, 2018, 2020 और 2023 में भी विश्व विजेता रह चुका है।

    टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी इंग्लैंड की शुरुआत अच्छी नहीं रही और टीम ने महज 7 रन पर पहला विकेट गंवा दिया। इसके बाद कप्तान नेट साइवर-ब्रंट ने पारी को संभालते हुए संयमित बल्लेबाजी की। उन्होंने फ्रेया कैंप के साथ अहम साझेदारी निभाई और टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया। साइवर-ब्रंट ने 53 गेंदों में 58 रन की नाबाद पारी खेली, जबकि फ्रेया कैंप ने 28 गेंदों पर 44 रन बनाकर इंग्लैंड का स्कोर 20 ओवर में 4 विकेट पर 150 रन तक पहुंचाया। ऑस्ट्रेलिया की ओर से किम गार्थ, लूसी हैमिल्टन, सोफी मोलिनेक्स और एनाबेल सदरलैंड ने एक-एक विकेट लिया।

    151 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी ऑस्ट्रेलिया की शुरुआत भी साधारण रही और जॉर्जिया वोल सिर्फ 9 रन बनाकर पवेलियन लौट गईं। इसके बाद बेथ मूनी और फोएबे लिचफील्ड ने दूसरे विकेट के लिए 100 रन की शानदार साझेदारी कर मैच पूरी तरह ऑस्ट्रेलिया के पक्ष में कर दिया। लिचफील्ड ने 35 गेंदों में 48 रन बनाए, जबकि बेथ मूनी ने 49 गेंदों पर 64 रन की बेहतरीन पारी खेली। एलिस पेरी ने नाबाद 13 रन बनाकर टीम को 17.1 ओवर में जीत की मंजिल तक पहुंचा दिया।

    इंग्लैंड की ओर से शार्लेट डीन, लॉरेन बेल और सोफी एक्लेस्टोन को एक-एक विकेट मिला, लेकिन ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों के सामने उनकी गेंदबाजी बेअसर साबित हुई।

    फाइनल में मैच जिताऊ पारी खेलने वाली बेथ मूनी को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। पूरे टूर्नामेंट में 7 मैचों में 238 रन बनाने और लगातार शानदार प्रदर्शन के दम पर उन्हें प्लेयर ऑफ द सीरीज का पुरस्कार भी मिला।

    खिताबी जीत के बाद मूनी ने कहा कि टीम ने पूरे टूर्नामेंट में आत्मविश्वास और निडर क्रिकेट खेली। उन्होंने कोचिंग स्टाफ, साथी खिलाड़ियों और कप्तान सोफी मोलिनेक्स की जमकर तारीफ करते हुए कहा कि पूरी टीम ने एक-दूसरे का हर परिस्थिति में साथ दिया और इसी एकजुटता का परिणाम विश्व कप ट्रॉफी के रूप में मिला। कप्तान मोलिनेक्स के नेतृत्व की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि उनके शांत स्वभाव और बेहतर फैसलों ने टीम को पूरे अभियान में मजबूती दी।

    इस जीत के साथ ऑस्ट्रेलिया ने महिला टी20 विश्व कप में अपना दबदबा एक बार फिर साबित कर दिया और रिकॉर्ड सातवीं बार विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया।

  • राम जन्मभूमि ट्रस्ट की अहम बैठक आज, चंपत राय के इस्तीफे से लेकर सुरक्षा और प्रशासनिक सुधार तक कई बड़े मुद्दों पर होगी चर्चा

    राम जन्मभूमि ट्रस्ट की अहम बैठक आज, चंपत राय के इस्तीफे से लेकर सुरक्षा और प्रशासनिक सुधार तक कई बड़े मुद्दों पर होगी चर्चा

    नई दिल्ली। अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक सोमवार को आयोजित होने जा रही है। हाल के दिनों में मंदिर के चढ़ावे से जुड़े विवाद और प्रशासनिक मुद्दों के बीच बुलाई गई इस बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है। ट्रस्ट की कार्यप्रणाली, सुरक्षा व्यवस्था और भविष्य की प्रशासनिक योजनाओं को लेकर कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर विचार होने की संभावना है। बैठक को देखते हुए राम जन्मभूमि परिसर और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था पहले से अधिक सख्त कर दी गई है।

    जानकारी के अनुसार बैठक दोपहर बाद आयोजित होगी। सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुए इस बार बैठक का स्थान बदला गया है और इसे राम जन्मभूमि परिसर स्थित गेस्ट हाउस में आयोजित किया जाएगा। बैठक की अध्यक्षता ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास करेंगे। ट्रस्ट के अधिकांश सदस्य प्रत्यक्ष रूप से मौजूद रहेंगे, जबकि कुछ सदस्य ऑनलाइन माध्यम से बैठक में शामिल होंगे।

    बैठक के एजेंडे में कई महत्वपूर्ण विषय शामिल किए गए हैं। इनमें ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफों से जुड़े मामलों पर चर्चा प्रमुख मानी जा रही है। इसके अलावा मंदिर के दानपात्र से कथित चढ़ावे की चोरी के मामले में गठित विशेष जांच दल की प्रारंभिक रिपोर्ट पर भी विचार किया जाएगा। ट्रस्ट इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े निर्णय ले सकता है।

    बैठक में मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के उपायों पर भी चर्चा होगी। हाल के वर्षों में राम मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ी है, जिसके चलते भीड़ प्रबंधन, दर्शन व्यवस्था और सुरक्षा तंत्र को और प्रभावी बनाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। ट्रस्ट भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए नई व्यवस्थाओं और संसाधनों पर भी विचार करेगा।

    इसके अलावा वित्तीय वर्ष 2025-26 के आय-व्यय, लेखा-जोखा और विभिन्न विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा भी बैठक का हिस्सा होगी। ट्रस्ट प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने, वित्तीय प्रबंधन को और मजबूत बनाने तथा मंदिर संचालन से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों को मंजूरी दे सकता है। इन फैसलों का असर आने वाले समय में मंदिर की व्यवस्थाओं और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर दिखाई दे सकता है।

    बैठक के मद्देनजर अयोध्या में सुरक्षा एजेंसियों ने व्यापक इंतजाम किए हैं। राम जन्मभूमि परिसर के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है। सभी प्रवेश मार्गों पर सघन जांच अभियान चलाया जा रहा है, जबकि संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। कई स्थानों पर बैरिकेडिंग कर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाया गया है ताकि बैठक के दौरान किसी भी तरह की अव्यवस्था की संभावना न रहे।

    धार्मिक और प्रशासनिक दृष्टि से इस बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इसमें लिए जाने वाले फैसले ट्रस्ट की कार्यप्रणाली, पारदर्शिता, सुरक्षा व्यवस्था और राम मंदिर के भविष्य के संचालन की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। बैठक समाप्त होने के बाद ट्रस्ट की ओर से लिए गए निर्णयों की आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक किए जाने की संभावना है।

  • विमेंस टी20 वर्ल्ड कप 2026: मूनी के तूफान से ऑस्ट्रेलिया चैंपियन, 'प्लेयर ऑफ द मैच' और 'प्लेयर ऑफ द सीरीज' दोनों अवॉर्ड जीते

    विमेंस टी20 वर्ल्ड कप 2026: मूनी के तूफान से ऑस्ट्रेलिया चैंपियन, 'प्लेयर ऑफ द मैच' और 'प्लेयर ऑफ द सीरीज' दोनों अवॉर्ड जीते


    नई दिल्ली । लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर खेले गए विमेंस टी20 वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया ने एक बार फिर अपनी बादशाहत साबित करते हुए इंग्लैंड को हराकर खिताब अपने नाम कर लिया। इस जीत की सबसे बड़ी नायिका सलामी बल्लेबाज बेथ मूनी रहीं, जिन्होंने शानदार अर्धशतक जड़ते हुए टीम को आसान जीत दिलाई। उनकी शानदार बल्लेबाजी के लिए उन्हें ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ और पूरे टूर्नामेंट में लगातार बेहतरीन प्रदर्शन के लिए ‘प्लेयर ऑफ द सीरीज’ चुना गया।

    इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 4 विकेट के नुकसान पर 150 रन बनाए। जवाब में ऑस्ट्रेलिया ने सिर्फ 17.1 ओवर में लक्ष्य हासिल कर छह विकेट से मुकाबला जीत लिया। ऑस्ट्रेलिया की जीत की नींव बेथ मूनी और फोएबे लिचफील्ड की शानदार साझेदारी ने रखी। दोनों बल्लेबाजों ने दूसरे विकेट के लिए 67 गेंदों में 100 रन जोड़कर मैच पूरी तरह ऑस्ट्रेलिया के पक्ष में कर दिया।

    बेथ मूनी ने 49 गेंदों पर 64 रनों की शानदार पारी खेली, जिसमें 10 चौके शामिल रहे। पूरे टूर्नामेंट में उन्होंने सात मैचों में 238 रन बनाए और 47.60 की औसत से बल्लेबाजी की। बल्लेबाजी के अलावा उन्होंने फील्डिंग में भी पांच कैच लेकर अहम योगदान दिया। वह टूर्नामेंट में दूसरे सबसे ज्यादा रन बनाने वाली बल्लेबाज रहीं।

    खिताबी जीत के बाद मूनी ने कहा कि यह टूर्नामेंट टीम के लिए लंबे समय से सबसे बड़ा लक्ष्य था और इस सफर का अंत विश्व कप जीत के साथ होना बेहद संतोषजनक है। उन्होंने कहा कि पिछले एक साल में टीम में कई बदलाव हुए, लेकिन खिलाड़ियों ने एक-दूसरे का पूरा साथ दिया और आत्मविश्वास के साथ क्रिकेट खेला। उनके मुताबिक टीम ने पूरे अभियान में निडर और सकारात्मक सोच के साथ प्रदर्शन किया।

    मूनी ने टीम के सपोर्ट स्टाफ और कोचिंग ग्रुप की भी जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि लंबे दौरे और खिलाड़ियों की छोटी-मोटी चोटों के बावजूद पूरे स्टाफ ने बेहतरीन काम किया, जिसकी बदौलत फाइनल में ऑस्ट्रेलिया अपनी सर्वश्रेष्ठ टीम के साथ उतर सका।

    ऑस्ट्रेलियाई कप्तान सोफी मोलिनक्स की नेतृत्व क्षमता की सराहना करते हुए मूनी ने कहा कि वह बेहद शांत स्वभाव की कप्तान हैं और दबाव की परिस्थितियों में भी संयम बनाए रखती हैं। उनके नेतृत्व में टीम ने शानदार प्रदर्शन किया और विश्व कप जीतकर उनके नेतृत्व को यादगार सम्मान दिया।

    इस जीत के साथ ऑस्ट्रेलिया ने एक बार फिर महिला टी20 क्रिकेट में अपना दबदबा कायम रखा, जबकि बेथ मूनी ने अपने दमदार प्रदर्शन से साबित कर दिया कि बड़े मुकाबलों में वह टीम की सबसे भरोसेमंद बल्लेबाजों में से एक हैं।

  • राज्यसभा उपचुनाव में दिलचस्प हुआ बंगाल का सियासी गणित, टीएमसी में टूट के बावजूद ममता बनर्जी के समर्थन के बिना मुश्किल में ऋतब्रता गुट

    राज्यसभा उपचुनाव में दिलचस्प हुआ बंगाल का सियासी गणित, टीएमसी में टूट के बावजूद ममता बनर्जी के समर्थन के बिना मुश्किल में ऋतब्रता गुट

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल में राज्यसभा की तीन सीटों पर होने वाले उपचुनाव ने राज्य की राजनीति को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। निर्वाचन कार्यक्रम घोषित होने के साथ ही सभी दलों ने अपनी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। मौजूदा विधानसभा संख्या बल को देखते हुए दो सीटों का परिणाम अपेक्षाकृत स्पष्ट माना जा रहा है, जबकि तीसरी सीट पर राजनीतिक समीकरण और संभावित क्रॉस वोटिंग चुनाव को बेहद रोचक बना सकती है।

    राज्य की 294 सदस्यीय विधानसभा के आधार पर राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए लगभग 74 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होगी। विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी के पास 207 विधायक हैं, जिससे वह दो उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने की स्थिति में दिखाई देती है। हालांकि तीसरी सीट पर जीत के लिए आवश्यक अतिरिक्त समर्थन जुटाना उसके लिए सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है।

    दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस के पास कुल 80 विधायक हैं, लेकिन पार्टी के भीतर सामने आए राजनीतिक मतभेदों ने समीकरण को जटिल बना दिया है। इसके बावजूद माना जा रहा है कि राज्यसभा चुनाव में ममता बनर्जी का प्रभाव अभी भी निर्णायक बना हुआ है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनके समर्थन के बिना अलग गुट के लिए राज्यसभा तक पहुंच बनाना आसान नहीं होगा।

    ऋतब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट की ओर से पर्याप्त विधायकों के समर्थन का दावा किया गया है। यदि इन दावों को सही माना जाए तो भी ममता बनर्जी के साथ मौजूद विधायकों की संख्या ऐसी स्थिति बना सकती है, जिससे अलग गुट के उम्मीदवार की जीत की संभावनाएं प्रभावित हों। यही कारण है कि राज्यसभा चुनाव केवल संख्या का नहीं बल्कि राजनीतिक रणनीति का भी मुकाबला बन गया है।

    राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि क्या भारतीय जनता पार्टी तीसरी सीट के लिए अपने अतिरिक्त मतों का उपयोग किसी अन्य गुट के उम्मीदवार के पक्ष में करेगी। दो उम्मीदवारों की संभावित जीत के बाद भाजपा के पास कुछ मत शेष रह सकते हैं, जिनका इस्तेमाल चुनावी रणनीति के तहत किया जा सकता है। हालांकि इस संबंध में अभी किसी दल की ओर से आधिकारिक संकेत सामने नहीं आए हैं।

    तीसरी सीट का परिणाम संभावित क्रॉस वोटिंग पर भी निर्भर माना जा रहा है। यदि किसी भी दल के विधायक पार्टी लाइन से हटकर मतदान करते हैं तो चुनावी गणित पूरी तरह बदल सकता है। ऐसे में सभी राजनीतिक दल अपने विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश में जुट गए हैं और मतदान तक अंदरूनी गतिविधियां तेज रहने की संभावना है।

    विधानसभा में भाजपा के अलावा तृणमूल कांग्रेस के 80 विधायक हैं। कांग्रेस के पास दो विधायक हैं, जबकि हुमायूं कबीर की पार्टी के भी दो विधायक मौजूद हैं। इसके अतिरिक्त सीपीआई और एआईएसएफ के पास एक-एक विधायक है। इन छोटी राजनीतिक ताकतों की भूमिका भी करीबी मुकाबले की स्थिति में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

    राज्यसभा उपचुनाव केवल रिक्त सीटों को भरने की प्रक्रिया नहीं रह गया है, बल्कि यह पश्चिम बंगाल की बदलती राजनीतिक तस्वीर का भी महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। चुनाव परिणाम यह स्पष्ट करेंगे कि टीएमसी के भीतर उभरे नए समीकरणों का वास्तविक असर कितना है और विपक्ष किस हद तक इस स्थिति का राजनीतिक लाभ उठा पाता है। आगामी मतदान और मतगणना पर पूरे राज्य के साथ राष्ट्रीय राजनीति की भी नजर बनी हुई है।

  • विंबलडन में बड़ा उलटफेर: ओसाका ने नंबर-1 सबालेंका को हराया, पहली बार क्वार्टर फाइनल में पहुंचीं

    विंबलडन में बड़ा उलटफेर: ओसाका ने नंबर-1 सबालेंका को हराया, पहली बार क्वार्टर फाइनल में पहुंचीं


    नई दिल्ली । विंबलडन 2026 में सोमवार को बड़ा उलटफेर देखने को मिला। जापान की स्टार टेनिस खिलाड़ी नाओमी ओसाका ने दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी आर्यना सबालेंका को सीधे सेटों में 6-2, 7-6 (7-2) से हराकर पहली बार विंबलडन के क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली। सेंटर कोर्ट पर खेला गया यह मुकाबला 1 घंटे 28 मिनट तक चला, जिसमें ओसाका ने शुरुआत से अंत तक दमदार प्रदर्शन किया।

    चार बार की ग्रैंड स्लैम चैंपियन ओसाका के लिए यह जीत बेहद खास रही। 2026 में दोनों खिलाड़ियों के बीच हुए तीनों मुकाबलों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। वहीं, 2018 यूएस ओपन के बाद यह पहला अवसर है जब उन्होंने सबालेंका को मात दी है।

    ओसाका ने मैच की शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया और सटीक सर्विस व तेज ग्राउंडस्ट्रोक्स के दम पर पहले सेट को आसानी से 6-2 से अपने नाम कर लिया। दूसरे सेट में सबालेंका ने जोरदार वापसी की और मुकाबले को टाई-ब्रेक तक पहुंचाया, लेकिन निर्णायक क्षणों में ओसाका ने शानदार नियंत्रण बनाए रखते हुए टाई-ब्रेक 7-2 से जीत लिया और मैच अपने नाम कर लिया।

    इस जीत के साथ ओसाका ने पहली बार विंबलडन के अंतिम-8 में प्रवेश किया। इससे पहले वह कभी भी इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट के क्वार्टर फाइनल तक नहीं पहुंच सकी थीं। मां बनने के बाद उनकी यह उपलब्धि शानदार वापसी का बड़ा संकेत मानी जा रही है और अब उन्हें खिताब की प्रमुख दावेदारों में भी गिना जा रहा है।

    दूसरी ओर, सबालेंका का लगातार 14 ग्रैंड स्लैम क्वार्टर फाइनल में पहुंचने का सिलसिला टूट गया। उनका यह रिकॉर्ड 2022 यूएस ओपन से चला आ रहा था। साथ ही, 2020 यूएस ओपन के बाद पहली बार उन्हें किसी ग्रैंड स्लैम मुकाबले में सीधे सेटों में हार का सामना करना पड़ा।

  • जंतर-मंतर आंदोलन के बीच अभिजीत दीपके की छात्रों से अपील, बोले- लंबी लड़ाई के लिए सेहत बचाना जरूरी, अनशन का जिम्मा सोनम वांगचुक संभालें

    जंतर-मंतर आंदोलन के बीच अभिजीत दीपके की छात्रों से अपील, बोले- लंबी लड़ाई के लिए सेहत बचाना जरूरी, अनशन का जिम्मा सोनम वांगचुक संभालें

    नई दिल्ली। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) से जुड़े कथित पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर राजधानी के जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शन के बीच आंदोलन को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। प्रदर्शन में शामिल सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक लगातार नौ दिनों से अनशन पर हैं, जबकि उनके समर्थन में कुछ छात्र भी भूख हड़ताल कर रहे हैं। इसी बीच आंदोलन से जुड़े अभिजीत दीपके ने छात्रों से अनशन समाप्त कर अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की अपील की है।

    अभिजीत दीपके का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में है, जिसमें वह छात्रों और समर्थकों को संबोधित करते हुए कहते हैं कि यह आंदोलन जल्द समाप्त होने वाला नहीं है। ऐसे में सभी लोगों का लंबे समय तक सक्रिय और स्वस्थ रहना आवश्यक है। उनका कहना है कि यदि बड़ी संख्या में छात्र लगातार अनशन करते रहेंगे तो आंदोलन की संगठनात्मक क्षमता प्रभावित हो सकती है।

    दीपके ने अपने संदेश में कहा कि सोनम वांगचुक को लंबे समय तक शांतिपूर्ण आंदोलनों और अनशन का अनुभव है, इसलिए वह इस जिम्मेदारी को बेहतर ढंग से निभा सकते हैं। वहीं छात्रों और अन्य समर्थकों को अपनी ऊर्जा आंदोलन के संचालन, जनसंपर्क और संगठनात्मक गतिविधियों में लगानी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी आंदोलन की सफलता केवल अनशन पर नहीं, बल्कि लगातार सक्रिय जनभागीदारी और समन्वित प्रयासों पर भी निर्भर करती है।

    प्रदर्शन के दौरान सोनम वांगचुक ने भी आंदोलन का समर्थन करने वाले लोगों से संयमित जीवनशैली अपनाने और प्रतीकात्मक रूप से एक दिन का उपवास रखने की अपील की। उनका कहना है कि यदि समर्थक बारी-बारी से एक दिन का उपवास करें तो आंदोलन के प्रति एकजुटता का संदेश भी जाएगा और प्रदर्शन स्थल पर भोजन की व्यवस्था का दबाव भी कम होगा। उन्होंने भोजन में संतुलन और अनुशासन को अच्छे स्वास्थ्य के लिए आवश्यक बताया।

    जानकारी के अनुसार, लंबे समय से जारी अनशन के कारण सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ा है और उनका वजन कम हुआ है। इसके बावजूद उन्होंने आंदोलन जारी रखने का संकल्प दोहराया है। प्रदर्शनकारी शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, परीक्षा प्रणाली में सुधार और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

    जंतर-मंतर पर जारी यह आंदोलन लगातार लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है। प्रदर्शन में शामिल छात्र और सामाजिक कार्यकर्ता शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। वहीं आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधि लगातार यह भी प्रयास कर रहे हैं कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण बना रहे और इसमें शामिल लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

    इसी उद्देश्य से अभिजीत दीपके ने छात्रों से अपील की है कि वे अपनी जान जोखिम में डालने के बजाय आंदोलन को अन्य माध्यमों से मजबूत करें। उनका मानना है कि किसी भी जनआंदोलन की सबसे बड़ी ताकत उसके सक्रिय और स्वस्थ कार्यकर्ता होते हैं। ऐसे में लंबी अवधि के संघर्ष के लिए संयम, संगठन और सतत भागीदारी सबसे अधिक महत्वपूर्ण है।

  • लंदन में PoK को लेकर जोरदार प्रदर्शन, पाकिस्तान हाई कमीशन तक निकाला मार्च; गिरफ्तारियों के विरोध में गूंजे आजादी के नारे

    लंदन में PoK को लेकर जोरदार प्रदर्शन, पाकिस्तान हाई कमीशन तक निकाला मार्च; गिरफ्तारियों के विरोध में गूंजे आजादी के नारे

    नई दिल्ली । पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर से जुड़े मुद्दों की गूंज अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुनाई देने लगी है। लंदन में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर उतरकर पाकिस्तान के खिलाफ विरोध मार्च निकाला और पाकिस्तान हाई कमीशन तक पहुंचकर अपनी मांगों को जोरदार ढंग से उठाया। प्रदर्शन के दौरान पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्र में चल रहे आंदोलन के समर्थन में नारे लगाए गए और हालिया गिरफ्तारियों पर भी कड़ी आपत्ति जताई गई।

    प्रदर्शनकारियों ने पार्लियामेंट स्क्वायर से पाकिस्तान हाई कमीशन तक मार्च किया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने रैली में भाग लेते हुए पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर की मौजूदा स्थिति पर चिंता व्यक्त की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियों पर कार्रवाई और आंदोलन से जुड़े नेताओं की गिरफ्तारी लोकतांत्रिक अधिकारों के विपरीत है।

    विरोध मार्च में शामिल लोगों ने जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के प्रमुख शौकत नवाज मीर और अन्य नेताओं की गिरफ्तारी की निंदा की। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि आंदोलन से जुड़े सभी नेताओं को जल्द रिहा किया जाए और स्थानीय नागरिकों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार दिया जाए। उन्होंने कहा कि आंदोलन को दबाने के प्रयासों से लोगों में असंतोष और बढ़ रहा है।

    आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों ने दावा किया कि पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में लोगों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर लगातार आवाज उठाई जा रही है। उनका कहना है कि क्षेत्र में राजनीतिक और सामाजिक अधिकारों को लेकर व्यापक असंतोष मौजूद है, जिसे अब अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रदर्शन के दौरान भविष्य में आंदोलन को और तेज करने के संकेत भी दिए गए।

    जम्मू-कश्मीर नेशनल इंडिपेंडेंस अलायंस के चेयरमैन महमूद कश्मीरी ने प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कहा कि विभिन्न देशों में रह रहे कश्मीरी समुदाय के लोग भी इस अभियान में अपनी भागीदारी दर्ज करा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य अपने मुद्दों को वैश्विक समुदाय के सामने रखना है और इसे आगे भी जारी रखा जाएगा।

    प्रदर्शन के दौरान कुछ प्रतिभागियों ने नियंत्रण रेखा से जुड़े मुद्दों और क्षेत्र में मानवीय परिस्थितियों पर भी अपनी चिंता व्यक्त की। उनका कहना था कि स्थानीय लोगों की समस्याओं का शांतिपूर्ण और स्थायी समाधान तलाशा जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने क्षेत्र में नागरिक अधिकारों और राजनीतिक स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशों में आयोजित ऐसे प्रदर्शन यह संकेत देते हैं कि पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर से जुड़े मुद्दे अब प्रवासी समुदायों के बीच भी चर्चा का विषय बन रहे हैं। हालांकि इन दावों और आरोपों पर अलग-अलग पक्षों के अपने-अपने दृष्टिकोण हैं। ऐसे में क्षेत्र की स्थिति और उससे जुड़े घटनाक्रम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लगातार नजर बनी हुई है।

  • पैगंबर मोहम्मद पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख स्पष्ट, पहले कानूनी प्रक्रिया अपनाने की दी सलाह

    पैगंबर मोहम्मद पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख स्पष्ट, पहले कानूनी प्रक्रिया अपनाने की दी सलाह


    नई दिल्ली ।
    पैगंबर मोहम्मद पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों से जुड़े मामले में दायर जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी मामले में सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने से पहले कानून के तहत उपलब्ध प्रक्रियाओं का पालन किया जाना आवश्यक है। अदालत ने याचिकाकर्ता को संबंधित प्राधिकरण और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के समक्ष शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी।

    मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से यह दलील दी गई कि कथित टिप्पणियां सामाजिक और सांप्रदायिक सौहार्द को प्रभावित कर सकती हैं। इस आधार पर मामले में शीघ्र सुनवाई की मांग की गई। हालांकि अदालत ने इस अनुरोध को स्वीकार नहीं किया और कहा कि ऐसे मामलों के लिए पहले से निर्धारित कानूनी तंत्र मौजूद है, जिसका उपयोग किया जाना चाहिए।

    सुनवाई के दौरान न्यायालय ने यह जानना चाहा कि क्या मामले में संबंधित एजेंसियों या पुलिस के समक्ष शिकायत दर्ज कराई गई है। अदालत ने कहा कि देश में कानून लागू करने वाली संस्थाएं मौजूद हैं और उन पर विश्वास बनाए रखना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति या संस्था ने कानून का उल्लंघन किया है तो उसके खिलाफ निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

    अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट की भूमिका सीधे हर शिकायत की प्रारंभिक जांच करने की नहीं है। शीर्ष न्यायालय का दायित्व व्यापक संवैधानिक और कानूनी निगरानी सुनिश्चित करना है। यदि प्रत्येक मामला सीधे सर्वोच्च अदालत में लाया जाएगा तो निचली अदालतों और अन्य सक्षम संस्थाओं की भूमिका प्रभावित होगी, जो न्यायिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं माना जा सकता।

    न्यायालय ने कहा कि कानून के तहत उपलब्ध सभी विकल्पों का उपयोग किए जाने के बाद भी यदि संबंधित प्राधिकरण उचित कार्रवाई नहीं करते हैं, तब न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की जा सकती है। अदालत ने संकेत दिया कि न्याय व्यवस्था में विभिन्न स्तरों पर स्थापित संस्थाओं को पहले अपना कार्य करने का अवसर मिलना चाहिए।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी माना कि धार्मिक भावनाओं और सामाजिक सद्भाव से जुड़े मामले संवेदनशील प्रकृति के होते हैं। ऐसे मामलों में सभी पक्षों को जिम्मेदारी और संयम के साथ व्यवहार करना चाहिए। न्यायालय ने कहा कि संवेदनशील विषयों पर अनावश्यक विवाद या सनसनी फैलाने से बचना आवश्यक है, क्योंकि इससे सामाजिक वातावरण प्रभावित हो सकता है।

    अदालत ने दोहराया कि यदि किसी व्यक्ति द्वारा कानून का उल्लंघन किया गया है तो उसके खिलाफ कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही यह भी कहा गया कि शिकायतों के निपटारे के लिए स्थापित संस्थागत व्यवस्था पर भरोसा बनाए रखना लोकतांत्रिक और संवैधानिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    इस घटनाक्रम के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि शीर्ष अदालत ऐसे मामलों में पहले वैधानिक प्रक्रिया अपनाने को प्राथमिकता देती है। न्यायालय का संदेश यह रहा कि कानून के दायरे में उपलब्ध सभी उपायों का उपयोग करने के बाद ही किसी मामले को सर्वोच्च न्यायिक मंच तक ले जाना उचित माना जाएगा।

  • योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला, जलालाबाद का नाम बदलेगा परशुरामपुरी; स्टार्टअप नीति, होमगार्ड स्वास्थ्य योजना समेत 28 प्रस्तावों को मंजूरी

    योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला, जलालाबाद का नाम बदलेगा परशुरामपुरी; स्टार्टअप नीति, होमगार्ड स्वास्थ्य योजना समेत 28 प्रस्तावों को मंजूरी

    लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को हुई उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य सरकार ने विकास, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी। बैठक में कुल 29 प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए, जिनमें से 28 को स्वीकृति मिल गई, जबकि मदरसा शिक्षा से संबंधित एक प्रस्ताव को फिलहाल स्थगित रखा गया। सबसे चर्चित निर्णय शाहजहांपुर जिले के जलालाबाद का नाम बदलकर परशुरामपुरी किए जाने का रहा, जिसे मंत्रिमंडल ने अंतिम मंजूरी प्रदान कर दी।

    सरकार के अनुसार जलालाबाद को भगवान परशुराम की जन्मस्थली के रूप में धार्मिक और ऐतिहासिक मान्यता प्राप्त है। केंद्र सरकार से आवश्यक अनापत्ति मिलने के बाद राज्य मंत्रिमंडल ने नाम परिवर्तन के प्रस्ताव को स्वीकृति दी। सरकार का कहना है कि यह निर्णय स्थानीय ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को अधिक स्पष्ट रूप से स्थापित करने की दिशा में उठाया गया कदम है।

    बैठक में प्रदेश में नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026 और उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन को भी मंजूरी दी गई। नई व्यवस्था के तहत स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए एक हजार करोड़ रुपये का विशेष फंड बनाया जाएगा। इसके अलावा नए उद्यमों को प्रोटोटाइप विकसित करने, शुरुआती पूंजी उपलब्ध कराने तथा इनक्यूबेशन केंद्रों को वार्षिक वित्तीय सहायता देने का प्रावधान किया गया है। सरकार ने समाप्त हो चुकी डेटा सेंटर नीति को भी दोबारा लागू करने का निर्णय लिया है।

    मंत्रिमंडल ने प्रदेश के लगभग 1.60 लाख होमगार्डों और उनके आश्रितों के लिए पांच लाख रुपये तक की कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा को भी मंजूरी दी। इस योजना का उद्देश्य सेवा के दौरान स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों में आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराना है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना को भी स्वीकृति दी गई, जिसके तहत पशुओं के बीमा प्रीमियम का अधिकांश हिस्सा राज्य सरकार वहन करेगी। प्राकृतिक आपदा, बीमारी अथवा दुर्घटना से पशुओं की मृत्यु होने पर पशुपालकों को बीमा का लाभ मिलेगा।

    स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कई प्रस्ताव भी कैबिनेट की मंजूरी प्राप्त करने में सफल रहे। वाराणसी में ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए भूमि उपलब्ध कराई जाएगी, जबकि गोरखपुर और मुरादाबाद में 100-100 बेड वाले ईएसआईसी अस्पताल स्थापित किए जाएंगे। मेडिकल कॉलेज में श्रमिक परिवारों के बच्चों के लिए आधी सीटें आरक्षित रखने का भी निर्णय लिया गया है।

    बैठक में खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों की सीधी भर्ती संबंधी नियमों में संशोधन को भी मंजूरी दी गई। संशोधित व्यवस्था के तहत पात्र खिलाड़ियों को समूह ‘ख’ और ‘ग’ के विभिन्न सरकारी पदों पर सीधे नियुक्ति का अवसर मिलेगा।

    इसके अलावा राज्य सरकार ने तीन निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना, रायबरेली में उद्यान महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र की स्थापना, लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की पेंशन संबंधी संशोधन, गोरखपुर और मुरादाबाद नगर निगम के लिए म्यूनिसिपल बॉन्ड जारी करने सहित कई प्रशासनिक और विकासात्मक प्रस्तावों को भी स्वीकृति प्रदान की। सरकार का कहना है कि इन फैसलों से राज्य में निवेश, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और प्रशासनिक व्यवस्था को नई गति मिलेगी।