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  • फीफा वर्ल्ड कप में सबसे बड़ा उलटफेर, नॉर्वे ने पांच बार की चैंपियन ब्राजील को हराकर रचा इतिहास

    फीफा वर्ल्ड कप में सबसे बड़ा उलटफेर, नॉर्वे ने पांच बार की चैंपियन ब्राजील को हराकर रचा इतिहास


    नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप 2026 के राउंड ऑफ 16 में सबसे बड़ा उलटफेर देखने को मिला, जहां नॉर्वे ने पांच बार की विश्व चैंपियन ब्राजील को 2-1 से हराकर टूर्नामेंट से बाहर कर दिया। न्यू जर्सी में खेले गए इस रोमांचक मुकाबले में एर्लिंग हालैंड ने दो शानदार गोल कर अपनी टीम को पहली बार विश्व कप के क्वार्टर फाइनल में पहुंचा दिया। दूसरी ओर ब्राजील के लिए नेमार का इंजरी टाइम में किया गया गोल केवल हार के अंतर को कम कर सका।

    मुकाबले की शुरुआत दोनों टीमों ने बेहद सतर्क अंदाज में की। पहले हाफ में दोनों पक्षों के डिफेंस ने शानदार प्रदर्शन किया और किसी भी टीम को गोल करने का मौका नहीं दिया। हालांकि ब्राजील ने कई बार नॉर्वे के गोल पर हमला बोला, लेकिन हर बार गोलकीपर ओर्जन नायलैंड मजबूत दीवार बनकर सामने खड़े रहे।

    पहले हाफ के दौरान ब्राजील को वीएआर की मदद से पेनल्टी भी मिली। मैथियस कुन्हा पर हुए फाउल के बाद रेफरी ने पेनल्टी दी, लेकिन ब्रूनो गुइमारेस इस सुनहरे मौके को गोल में नहीं बदल सके। नायलैंड ने शानदार बचाव करते हुए पेनल्टी रोक ली। इसके अलावा उन्होंने गेब्रियल मार्टिनेली, विनीसियस जूनियर और अन्य ब्राजीली खिलाड़ियों के कई खतरनाक प्रयास भी विफल किए।

    दूसरे हाफ में ब्राजील ने आक्रामकता बढ़ाने के लिए बदलाव किए और युवा खिलाड़ी एंड्रिक को मैदान पर उतारा। 52वें मिनट में एंड्रिक के पास गोल करने का शानदार मौका भी आया, लेकिन वह उसे भुना नहीं सके। इसी चूक का फायदा नॉर्वे ने उठाया और धीरे-धीरे मुकाबले पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली।

    79वें मिनट में एर्लिंग हालैंड ने शानदार फिनिश के साथ नॉर्वे को 1-0 की बढ़त दिलाई। ब्राजील अभी इस झटके से उबर भी नहीं पाया था कि 90वें मिनट में हालैंड ने अपना दूसरा गोल दागकर स्कोर 2-0 कर दिया। इस गोल ने ब्राजील की वापसी की उम्मीदों को लगभग खत्म कर दिया।

    इंजरी टाइम में ब्राजील को पेनल्टी मिली, जिस पर अनुभवी स्टार नेमार ने गोल कर स्कोर 2-1 जरूर किया, लेकिन तब तक मुकाबला नॉर्वे की मुट्ठी में जा चुका था। अंतिम सीटी बजते ही नॉर्वे के खिलाड़ियों और प्रशंसकों ने ऐतिहासिक जीत का जश्न मनाया, जबकि ब्राजील के खिलाड़ी मायूस नजर आए।

    इस जीत के साथ नॉर्वे ने अपने फुटबॉल इतिहास में पहली बार फीफा वर्ल्ड कप के क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया है। अब उसका मुकाबला 11 जुलाई को इंग्लैंड और मेक्सिको के बीच होने वाले मैच की विजेता टीम से होगा।

    ब्राजील के लिए यह हार कई सवाल छोड़ गई। टीम ने पूरे मैच में कई बेहतरीन मौके बनाए, लेकिन खराब फिनिशिंग और नॉर्वे के गोलकीपर के शानदार प्रदर्शन ने उसके विश्व कप अभियान का अंत कर दिया। दूसरी ओर एर्लिंग हालैंड ने एक बार फिर साबित किया कि बड़े मुकाबलों में वह अपनी टीम के सबसे बड़े मैच विनर हैं।

  • 11 जुलाई को नौसेना के बेड़े में शामिल होगा ‘महेंद्रगिरि’, स्वदेशी तकनीक से बना अत्याधुनिक युद्धपोत बढ़ाएगा भारत की समुद्री ताकत

    11 जुलाई को नौसेना के बेड़े में शामिल होगा ‘महेंद्रगिरि’, स्वदेशी तकनीक से बना अत्याधुनिक युद्धपोत बढ़ाएगा भारत की समुद्री ताकत

    नई दिल्ली । भारतीय नौसेना जल्द ही अपनी समुद्री शक्ति में एक और आधुनिक युद्धपोत जोड़ने जा रही है। 11 जुलाई को विशाखापत्तनम में आयोजित विशेष समारोह के दौरान स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट ‘महेंद्रगिरि’ को औपचारिक रूप से नौसेना के बेड़े में शामिल किया जाएगा। प्रोजेक्ट-17ए श्रृंखला का यह छठा युद्धपोत देश की रक्षा आत्मनिर्भरता और अत्याधुनिक नौसैनिक तकनीक का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।

    महेंद्रगिरि को भारतीय नौसेना की वर्तमान और भविष्य की समुद्री चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है। इसका डिजाइन भारतीय नौसेना के युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो ने तैयार किया है, जबकि इसका निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड ने किया है। यह पूरी तरह स्वदेशी विशेषज्ञता और रक्षा विनिर्माण क्षमता का परिणाम है, जिससे भारत की तकनीकी दक्षता और मजबूत हुई है।

    यह युद्धपोत स्टील्थ तकनीक से लैस है, जिसके कारण दुश्मन के रडार पर इसकी पहचान सामान्य जहाजों की तुलना में काफी कम होती है। विशेष संरचना और आधुनिक डिजाइन इसे समुद्र में अधिक गोपनीय तरीके से संचालन करने में सक्षम बनाते हैं। युद्ध की स्थिति में यह विशेषता नौसेना को सामरिक बढ़त दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

    महेंद्रगिरि में अत्याधुनिक हथियार और आधुनिक युद्ध प्रणालियां स्थापित की गई हैं। इसमें सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलें, सतह से वायु में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, आधुनिक सेंसर, पनडुब्बी रोधी हथियार और एकीकृत कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम लगाया गया है। यह युद्धपोत एक साथ वायु, समुद्र और पनडुब्बी से आने वाले खतरों का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने में सक्षम है।

    युद्धपोत में आधुनिक कंबाइंड डीजल ऑर गैस प्रणोदन प्रणाली का उपयोग किया गया है। सामान्य समुद्री गश्त के दौरान यह ईंधन की बचत करते हुए लंबी दूरी तक संचालन कर सकता है, जबकि आवश्यकता पड़ने पर गैस टर्बाइन की सहायता से तेज गति भी हासिल कर सकता है। यह क्षमता इसे लंबी अवधि के समुद्री अभियानों और विभिन्न परिचालन परिस्थितियों में प्रभावी बनाती है।

    महेंद्रगिरि की एक और बड़ी विशेषता इसकी उच्च स्वदेशी भागीदारी है। इसके निर्माण में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। देश की अनेक रक्षा कंपनियों के साथ-साथ सैकड़ों सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों ने इसके विभिन्न उपकरण, सेंसर, प्रणालियां और अन्य आवश्यक घटकों के निर्माण में योगदान दिया है। इससे रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को मजबूती मिलने के साथ रोजगार के नए अवसर भी सृजित हुए हैं।

    यह युद्धपोत केवल युद्ध संचालन तक सीमित नहीं रहेगा। मानवीय सहायता एवं आपदा राहत अभियान, खोज एवं बचाव कार्य, समुद्री सुरक्षा गश्त और अंतरराष्ट्रीय सहयोग मिशनों में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। किसी प्राकृतिक आपदा के दौरान राहत पहुंचाने से लेकर हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक उपस्थिति बनाए रखने तक, महेंद्रगिरि कई प्रकार के अभियानों में प्रभावी योगदान देने में सक्षम होगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती सामरिक गतिविधियों और वैश्विक समुद्री व्यापार के महत्व को देखते हुए आधुनिक युद्धपोतों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे समय में महेंद्रगिरि जैसे स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमता, समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक प्रभाव को नई ऊंचाई देंगे। यह युद्धपोत आने वाले वर्षों में भारत की समुद्री शक्ति, आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन और आधुनिक नौसैनिक क्षमता का महत्वपूर्ण प्रतीक बनकर देश की सुरक्षा को और मजबूत करेगा।

  • ब्राजील के वर्ल्ड कप से बाहर होते ही नेमार ने कहा अलविदा, इंटरनेशनल फुटबॉल से संन्यास का किया ऐलान

    ब्राजील के वर्ल्ड कप से बाहर होते ही नेमार ने कहा अलविदा, इंटरनेशनल फुटबॉल से संन्यास का किया ऐलान


    नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप 2026 में ब्राजील का सफर समाप्त होने के साथ ही विश्व फुटबॉल के एक सुनहरे अध्याय का भी अंत हो गया। स्टार फुटबॉलर नेमार जूनियर ने ब्राजील की हार के बाद अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास लेने की घोषणा कर दी। राउंड ऑफ 16 में नॉर्वे के हाथों 2-1 की हार के बाद भावुक नेमार ने कहा कि उन्होंने देश के लिए अपना सब कुछ दिया और अब उनका अंतरराष्ट्रीय सफर समाप्त हो चुका है।

    34 वर्षीय नेमार ने मैच के बाद कहा कि उन्होंने हर संभव प्रयास किया लेकिन टीम को आगे नहीं ले जा सके। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत अमेरिका की धरती से की थी और अब उसी धरती पर अपने सफर का अंत कर रहे हैं। मैदान पर हार के बाद नेमार भावुक दिखाई दिए और साथी खिलाड़ियों के साथ उनकी आंखें भी नम नजर आईं।

    नॉर्वे के खिलाफ मुकाबले में नेमार शुरुआती एकादश का हिस्सा नहीं थे और उन्हें दूसरे हाफ में बतौर सब्स्टीट्यूट मैदान पर उतारा गया। इंजरी टाइम में उन्होंने ब्राजील के लिए एकमात्र गोल दागा जो उनके अंतरराष्ट्रीय करियर का आखिरी गोल भी बन गया। हालांकि उनका यह प्रयास टीम को हार से नहीं बचा सका और ब्राजील टूर्नामेंट से बाहर हो गया।

    नेमार ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में ब्राजील के लिए 130 मुकाबले खेले और रिकॉर्ड 80 गोल किए। इसके अलावा उन्होंने 59 गोल में असिस्ट देकर भी टीम की कई यादगार जीत में अहम भूमिका निभाई। वह ब्राजील के इतिहास में सबसे ज्यादा अंतरराष्ट्रीय गोल करने वाले खिलाड़ी बनकर अपने करियर का समापन कर रहे हैं।

    साल 2010 में ब्राजील के लिए पदार्पण करने वाले नेमार ने एक दशक से अधिक समय तक टीम की अगुआई की। उन्होंने 2012 लंदन ओलंपिक में ब्राजील को रजत पदक दिलाने में अहम योगदान दिया। इसके बाद 2016 रियो ओलंपिक में कप्तान के रूप में टीम को ऐतिहासिक स्वर्ण पदक दिलाकर देश का सपना पूरा किया। वर्ष 2013 में फीफा कन्फेडरेशन कप जीतने में भी उनका प्रदर्शन शानदार रहा।

    हालांकि इस विश्व कप से पहले उनकी फिटनेस को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे। चोटों से जूझने के बावजूद उन्होंने टीम के लिए खेलने का फैसला किया और पूरे टूर्नामेंट में अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश की। विश्व कप के दौरान उनके सोशल मीडिया संकेतों से भी उनके संन्यास की अटकलें लगाई जा रही थीं, जिन पर अब उन्होंने आधिकारिक मुहर लगा दी है।

    ब्राजील के खिलाफ नॉर्वे ने शानदार प्रदर्शन किया। एर्लिंग हालैंड ने दो गोल कर अपनी टीम को क्वार्टर फाइनल में पहुंचाया। ब्राजील ने कई आसान मौके गंवाए, जिसमें एक पेनल्टी भी शामिल रही। आखिरकार नेमार का इंजरी टाइम में आया गोल केवल हार के अंतर को कम कर सका।

    नेमार के संन्यास के साथ ब्राजील फुटबॉल का एक यादगार दौर समाप्त हो गया। अपनी शानदार ड्रिब्लिंग, बेहतरीन गोल और नेतृत्व क्षमता के दम पर उन्होंने दुनिया भर के करोड़ों फुटबॉल प्रेमियों के दिलों में खास जगह बनाई। उनका नाम हमेशा ब्राजील के महानतम खिलाड़ियों में सम्मान के साथ लिया जाएगा।

  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मिले नए थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, सैन्य नेतृत्व और सर्वोच्च कमांडर के बीच हुआ औपचारिक संवाद

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मिले नए थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, सैन्य नेतृत्व और सर्वोच्च कमांडर के बीच हुआ औपचारिक संवाद

    नई दिल्ली । भारतीय थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने सोमवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से राष्ट्रपति भवन में शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान उनकी पत्नी कोमल सेठ भी उनके साथ मौजूद रहीं। थलसेना प्रमुख का पदभार संभालने के बाद राष्ट्रपति के साथ यह उनकी पहली औपचारिक मुलाकात रही, जिसे सैन्य नेतृत्व और देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद के बीच संस्थागत संवाद की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु भारतीय सशस्त्र सेनाओं की सर्वोच्च कमांडर हैं। ऐसे में सेना के नए प्रमुख की यह मुलाकात औपचारिक परंपराओं के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था में शीर्ष नेतृत्व के बीच समन्वय और संवाद का भी महत्वपूर्ण प्रतीक मानी जाती है। समय-समय पर सेना के वरिष्ठ अधिकारी राष्ट्रपति से मुलाकात कर सैन्य परंपराओं और संस्थागत संबंधों को आगे बढ़ाते रहे हैं।

    हाल ही में भारतीय सेना के 31वें थलसेना प्रमुख के रूप में कार्यभार संभालने वाले जनरल धीरज सेठ एक अनुभवी सैन्य अधिकारी हैं। बख्तरबंद कोर से जुड़े रहे जनरल सेठ ने अपने लंबे सैन्य करियर में कई अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं। सेना प्रमुख बनने से पहले वह उप-थलसेना प्रमुख के पद पर कार्यरत थे और विभिन्न महत्वपूर्ण सैन्य नियुक्तियों का अनुभव भी रखते हैं।

    कार्यभार ग्रहण करने के बाद जनरल धीरज सेठ ने भारतीय सेना के आधुनिकीकरण और भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप सैन्य क्षमताओं को मजबूत बनाने को अपनी प्रमुख प्राथमिकता बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि सेना को तकनीक आधारित, अधिक सक्षम और तेजी से बदलते सुरक्षा परिदृश्य के अनुरूप तैयार करना उनकी कार्ययोजना का प्रमुख हिस्सा होगा।

    उनकी रणनीतिक प्राथमिकताओं में आधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सैन्य क्षमताओं का विस्तार, स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा, आत्मनिर्भरता को मजबूत करना तथा तीनों सेनाओं के बीच बेहतर संयुक्त संचालन क्षमता विकसित करना शामिल है। उनका मानना है कि भविष्य के युद्धक्षेत्र में तकनीकी श्रेष्ठता और समन्वित सैन्य संचालन निर्णायक भूमिका निभाएंगे।

    थलसेना प्रमुख बनने के बाद जनरल धीरज सेठ ने अपना दृष्टिकोण भी प्रस्तुत किया है, जिसमें भारतीय सेना को आधुनिक, तकनीक-सक्षम और बहुआयामी सुरक्षा चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार करने पर विशेष बल दिया गया है। उनका मार्गदर्शक मंत्र ‘जय से विजय’ सैन्य क्षमता, नवाचार, आत्मनिर्भरता और संयुक्तता को बढ़ावा देने की सोच को दर्शाता है।

    राष्ट्रपति से मुलाकात से पहले जनरल धीरज सेठ ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से भी शिष्टाचार भेंट की थी। इस दौरान सेना के आधुनिकीकरण, रक्षा तैयारियों और भविष्य की रणनीतिक आवश्यकताओं से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई थी। नई जिम्मेदारी संभालने के बाद शीर्ष राजनीतिक और संवैधानिक नेतृत्व के साथ उनकी ये मुलाकातें भारतीय सेना की भावी दिशा और संस्थागत समन्वय को मजबूत करने की प्रक्रिया का हिस्सा मानी जा रही हैं। आने वाले समय में सेना के आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता को बढ़ावा देने की दिशा में उनके नेतृत्व से महत्वपूर्ण पहल की उम्मीद की जा रही है।

  • क्रिस्टियानो रोनाल्डो का बड़ा ऐलान, फीफा वर्ल्ड कप 2026 होगा आखिरी विश्व कप, बोले- स्पेन के खिलाफ आखिरी मैच नहीं चाहता

    क्रिस्टियानो रोनाल्डो का बड़ा ऐलान, फीफा वर्ल्ड कप 2026 होगा आखिरी विश्व कप, बोले- स्पेन के खिलाफ आखिरी मैच नहीं चाहता


    नई दिल्ली । पुर्तगाल के महान फुटबॉलर और कप्तान क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने फीफा वर्ल्ड कप 2026 को लेकर बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि यह उनके करियर का आखिरी विश्व कप होगा। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि इसका मतलब अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से तत्काल संन्यास नहीं है। रोनाल्डो ने कहा कि वह अभी भी देश के लिए खेलना चाहते हैं और उनके भविष्य का फैसला कोई और नहीं बल्कि वह स्वयं करेंगे।

    स्पेन के खिलाफ राउंड ऑफ 16 मुकाबले से पहले मीडिया से बातचीत में 41 वर्षीय रोनाल्डो ने कहा कि यह उनका अंतिम विश्व कप है लेकिन उन्हें उम्मीद है कि स्पेन के खिलाफ होने वाला मुकाबला उनके करियर का आखिरी मैच नहीं होगा। उन्होंने कहा कि अब तक उनका कोई भी विश्व कप खराब नहीं रहा है और इस टूर्नामेंट में भी वह तीन गोल कर चुके हैं। उनकी कोशिश होगी कि स्पेन के खिलाफ भी गोल कर टीम की जीत में योगदान दें।

    इस विश्व कप में रोनाल्डो शानदार लय में नजर आए हैं। ग्रुप चरण में उन्होंने उज्बेकिस्तान के खिलाफ दो गोल किए थे जबकि राउंड ऑफ 32 में क्रोएशिया के खिलाफ पेनल्टी को गोल में बदलकर विश्व कप के नॉकआउट मुकाबलों में अपना पहला गोल दर्ज किया। इसके साथ ही उन्होंने लगातार छह फीफा विश्व कप संस्करणों में गोल करने का अनोखा रिकॉर्ड भी अपने नाम किया। विश्व कप इतिहास में उनके नाम अब 11 गोल दर्ज हो चुके हैं और वह लगातार छह विश्व कप में गोल करने वाले पहले खिलाड़ी बन गए हैं।

    संन्यास को लेकर लगातार उठ रहे सवालों पर रोनाल्डो ने दो टूक जवाब दिया। उन्होंने कहा कि वह कब तक खेलेंगे इसका फैसला सिर्फ वही करेंगे। उनका मानना है कि चाहे वह मैदान पर हों या नहीं उनकी राष्ट्रीय टीम में हमेशा एक अहम भूमिका रहेगी। उन्होंने कहा कि स्पेन के खिलाफ मैच में वह पूरी ताकत से खेलेंगे क्योंकि फुटबॉल को उन्होंने अपना सब कुछ दिया है और हर मुकाबले में अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करेंगे।

    रोनाल्डो का अंतरराष्ट्रीय करियर उपलब्धियों से भरा रहा है। उन्होंने पुर्तगाल के लिए अब तक 232 मैच खेले हैं और रिकॉर्ड 146 अंतरराष्ट्रीय गोल किए हैं। उनके नेतृत्व में पुर्तगाल ने 2016 में पहली बार यूरो कप का खिताब जीता था। इसके अलावा 2019 और 2025 में यूईएफए नेशंस लीग जीतने में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई।

    विश्व कप के माहौल को लेकर भी रोनाल्डो काफी भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि इस टूर्नामेंट की सबसे बड़ी पहचान दुनिया भर के फुटबॉल प्रेमियों का जुनून है। उन्होंने बताया कि अलग-अलग देशों के प्रशंसकों से मिलकर उन्हें महसूस होता है कि फुटबॉल केवल एक खेल नहीं बल्कि भावनाओं को जोड़ने वाला माध्यम है। यही प्यार उन्हें लगातार बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा देता है।

    क्लब और अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल को मिलाकर रोनाल्डो अब तक 976 गोल कर चुके हैं और उनका अगला बड़ा लक्ष्य 1000 गोल का ऐतिहासिक आंकड़ा छूना है। ऐसे में भले ही यह उनका आखिरी विश्व कप हो लेकिन फुटबॉल प्रेमियों को अभी भी मैदान पर रोनाल्डो का जादू देखने को मिलता रहेगा।

  • श्रीलंका की बढ़त बरकरार, लेकिन होप-ग्रीव्स ने संभाली वेस्टइंडीज की पारी, तीसरे दिन कैरेबियाई टीम का दबदबा

    श्रीलंका की बढ़त बरकरार, लेकिन होप-ग्रीव्स ने संभाली वेस्टइंडीज की पारी, तीसरे दिन कैरेबियाई टीम का दबदबा


    नई दिल्ली । एंटिगुआ के विवियन रिचर्ड्स क्रिकेट स्टेडियम में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मैच के तीसरे दिन वेस्टइंडीज ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए मुकाबले में दमदार वापसी की। श्रीलंका की पहली पारी के विशाल स्कोर के जवाब में कैरेबियाई बल्लेबाजों ने संयम और आक्रामकता का बेहतरीन संतुलन दिखाया। दिन का खेल समाप्त होने तक वेस्टइंडीज ने पहली पारी में चार विकेट के नुकसान पर 318 रन बना लिए और मुकाबले में अपनी स्थिति मजबूत कर ली।

    तीसरे दिन वेस्टइंडीज ने 58 रन पर एक विकेट से आगे खेलना शुरू किया। जॉन कैंपबेल और केवम हॉज ने दूसरे विकेट के लिए 89 रन जोड़कर टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई। दोनों बल्लेबाजों ने श्रीलंकाई गेंदबाजों को लंबे समय तक सफलता से दूर रखा और स्कोर को 100 रन के पार पहुंचाया। हालांकि 31 रन बनाकर हॉज प्रभात जयसूर्या का शिकार बने।

    इसके बाद पहले टेस्ट में दोहरा शतक लगाने वाले आमिर जंगू से बड़ी पारी की उम्मीद थी लेकिन वह इस बार केवल 9 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। उनके जल्दी आउट होने से श्रीलंका ने वापसी की कोशिश जरूर की लेकिन जॉन कैंपबेल ने एक छोर संभाले रखा। उन्होंने 154 गेंदों पर 72 रन की बेहतरीन पारी खेली जिसमें 9 चौके और 2 छक्के शामिल रहे। उनकी पारी ने टीम को मजबूत आधार प्रदान किया।

    कैंपबेल के आउट होने के बाद शाई होप और जस्टिन ग्रीव्स ने जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाई और श्रीलंका को दिनभर कोई और सफलता हासिल नहीं करने दी। दोनों बल्लेबाजों ने धैर्य और शानदार तकनीक का परिचय देते हुए पांचवें विकेट के लिए 174 रन की नाबाद साझेदारी कर डाली। यह साझेदारी 324 गेंदों तक चली और श्रीलंका के गेंदबाज विकेट के लिए तरसते रहे।

    दिन का खेल समाप्त होने तक शाई होप 173 गेंदों पर 86 रन बनाकर नाबाद थे। उनकी पारी में 9 शानदार चौके शामिल रहे। दूसरी ओर जस्टिन ग्रीव्स भी 162 गेंदों पर 85 रन बनाकर क्रीज पर डटे रहे। दोनों बल्लेबाजों ने चौथे दिन बड़ी साझेदारी जारी रखने के संकेत दिए हैं।

    हालांकि वेस्टइंडीज अभी भी श्रीलंका के पहली पारी के 549 रन के विशाल स्कोर से 231 रन पीछे है। श्रीलंका की ओर से तीसरे दिन असिथा फर्नांडो और प्रभात जयसूर्या ने दो-दो विकेट हासिल किए लेकिन होप और ग्रीव्स की मजबूत साझेदारी के सामने गेंदबाज ज्यादा प्रभाव नहीं छोड़ सके।

    इससे पहले श्रीलंका ने अपनी पहली पारी 9 विकेट पर 549 रन बनाकर घोषित की थी। लाहिरू उदारा ने 188 रन की शानदार पारी खेली थी जबकि कामिंदु मेंडिस ने 84 रन, सोनल दिनुशा ने 92 रन और कुशल मेंडिस ने 69 रन का योगदान दिया था। अब चौथे दिन की शुरुआत में वेस्टइंडीज की कोशिश श्रीलंका की बढ़त को कम करने और मैच में बराबरी हासिल करने की होगी।

  • इंग्लैंड ने मेक्सिको को हराकर क्वार्टर फाइनल में बनाई जगह, जूड बेलिंगहम के डबल धमाके से 3-2 की रोमांचक जीत

    इंग्लैंड ने मेक्सिको को हराकर क्वार्टर फाइनल में बनाई जगह, जूड बेलिंगहम के डबल धमाके से 3-2 की रोमांचक जीत


    नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप 2026 के प्री-क्वार्टर फाइनल में इंग्लैंड ने शानदार जुझारूपन दिखाते हुए मेक्सिको को 3-2 से हराकर क्वार्टर फाइनल में प्रवेश कर लिया। रोमांच से भरपूर इस मुकाबले में इंग्लैंड ने एक समय दो गोल की बढ़त बनाई और बाद में एक खिलाड़ी कम होने के बावजूद मेक्सिको की जोरदार चुनौती को नाकाम कर दिया। इस हार के साथ मेक्सिको का विश्व कप अभियान समाप्त हो गया, जबकि इंग्लैंड ने अंतिम आठ में अपनी जगह पक्की कर ली।

    खराब मौसम के कारण देर से शुरू हुए मुकाबले में दोनों टीमों ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया। लगातार हमलों के बीच इंग्लैंड को पहली सफलता 36वें मिनट में मिली जब जूड बेलिंगहम ने शानदार गोल कर टीम को बढ़त दिलाई। इसके महज 98 सेकंड बाद बेलिंगहम ने एक और गोल दागकर इंग्लैंड की बढ़त 2-0 कर दी और मेक्सिको पर दबाव बढ़ा दिया।

    हालांकि मेक्सिको ने भी हार नहीं मानी। 42वें मिनट में क्विनोन्स ने गोल कर टीम को मुकाबले में वापस ला दिया। पहले हाफ की समाप्ति तक इंग्लैंड 2-1 से आगे था और मुकाबला पूरी तरह खुला हुआ नजर आ रहा था।

    दूसरे हाफ की शुरुआत में इंग्लैंड को बड़ा झटका लगा जब डिफेंडर जारेल क्वान्सा को खतरनाक टैकल के कारण रेड कार्ड दिखाया गया। इसके बाद इंग्लैंड को लगभग पूरा दूसरा हाफ केवल 10 खिलाड़ियों के साथ खेलना पड़ा। बावजूद इसके टीम ने संयम बनाए रखा और आक्रामक रवैया नहीं छोड़ा।

    60वें मिनट में इंग्लैंड को पेनल्टी मिली जब मेक्सिको के गोलकीपर राउल रेंजल ने एंथनी गॉर्डन को पेनल्टी बॉक्स में गिरा दिया। कप्तान हैरी केन ने इस मौके को भुनाते हुए गेंद को गोल में पहुंचाया और टूर्नामेंट में अपना छठा गोल करते हुए इंग्लैंड की बढ़त 3-1 कर दी।

    इसके बाद 69वें मिनट में वीएआर समीक्षा के बाद मेक्सिको को भी पेनल्टी मिली। राउल जिमिनेज ने बिना कोई गलती किए गोल दागकर अंतर 3-2 कर दिया। अंतिम 20 मिनटों में मेक्सिको ने बराबरी के लिए लगातार हमले किए लेकिन इंग्लैंड का रक्षात्मक प्रदर्शन और गोलकीपर जॉर्डन पिकफोर्ड के शानदार बचाव उसकी उम्मीदों पर भारी पड़े।

    मैच के आखिरी क्षणों में पिकफोर्ड ने कई महत्वपूर्ण सेव कर इंग्लैंड की बढ़त बरकरार रखी और टीम को क्वार्टर फाइनल का टिकट दिला दिया। अब इंग्लैंड का अगला मुकाबला 12 जुलाई को नॉर्वे के खिलाफ होगा, जहां उसकी नजर सेमीफाइनल में जगह बनाने पर रहेगी।

  • तीन देशों की अहम यात्रा पर रवाना हुए प्रधानमंत्री मोदी, इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के साथ आर्थिक व रणनीतिक साझेदारी को मिलेगा नया विस्तार

    तीन देशों की अहम यात्रा पर रवाना हुए प्रधानमंत्री मोदी, इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के साथ आर्थिक व रणनीतिक साझेदारी को मिलेगा नया विस्तार

    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छह दिवसीय विदेश यात्रा पर इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के दौरे के लिए रवाना हो गए हैं। यह यात्रा भारत के लिए कूटनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस दौरान विभिन्न द्विपक्षीय बैठकों, उच्चस्तरीय वार्ताओं और भारतीय समुदाय के साथ संवाद के माध्यम से तीनों देशों के साथ सहयोग को और व्यापक बनाने पर जोर रहेगा। यात्रा का उद्देश्य व्यापार, निवेश, रक्षा, शिक्षा, तकनीक और लोगों के बीच संबंधों को नई दिशा देना भी है।

    रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री ने कहा कि यह दौरा भारत के प्रमुख विकास साझेदार देशों के साथ संबंधों को और मजबूत करने का अवसर प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को नई गति देने के साथ-साथ युवाओं के लिए अधिक अवसर उपलब्ध कराने पर भी विशेष ध्यान रहेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि इस यात्रा से भारत के वैश्विक सहयोग और क्षेत्रीय साझेदारी को नया बल मिलेगा।

    यात्रा का पहला पड़ाव इंडोनेशिया है, जहां प्रधानमंत्री कई उच्चस्तरीय कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। दोनों देशों के बीच वर्षों से मजबूत सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और समुद्री संबंध रहे हैं। इस दौरे के दौरान द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों की समीक्षा के साथ भविष्य की साझेदारी को और व्यापक बनाने पर चर्चा होने की संभावना है। सांस्कृतिक विरासत से जुड़े कार्यक्रम भी यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा होंगे, जो दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों को नई मजबूती देंगे।

    इंडोनेशिया के बाद प्रधानमंत्री ऑस्ट्रेलिया पहुंचेंगे, जहां रक्षा, सुरक्षा, व्यापार, निवेश, शिक्षा, कौशल विकास और तकनीकी सहयोग जैसे प्रमुख विषयों पर वार्ता होगी। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच पिछले कुछ वर्षों में रणनीतिक संबंध लगातार मजबूत हुए हैं। दोनों देशों के बीच इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग, उभरती प्रौद्योगिकियों, नवाचार और खेल विज्ञान जैसे क्षेत्रों में भी साझेदारी बढ़ाने पर विशेष जोर रहने की उम्मीद है।

    ऑस्ट्रेलिया प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे। विदेशों में बसे भारतीय समुदाय को भारत और संबंधित देशों के बीच सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है। ऐसे संवाद दोनों देशों के बीच लोगों के स्तर पर संपर्क को और मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

    यात्रा के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री न्यूजीलैंड जाएंगे। इस दौरान दोनों देशों के बीच आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को नई गति देने, निवेश बढ़ाने और व्यावसायिक सहयोग को विस्तार देने पर चर्चा होगी। साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत बनाने के उपायों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। भारतीय समुदाय के साथ संवाद भी इस दौरे का महत्वपूर्ण हिस्सा रहेगा।

    भारत और न्यूजीलैंड के बीच व्यापार, शिक्षा, कृषि, नवाचार और सेवा क्षेत्र में सहयोग की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में यह यात्रा दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित उच्चस्तरीय संवाद से दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी को और मजबूती मिल सकती है।

    प्रधानमंत्री की यह तीन देशों की यात्रा भारत की एक्ट ईस्ट नीति और मुक्त, समावेशी तथा नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र की अवधारणा को भी आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इसके साथ ही क्षेत्रीय स्थिरता, समुद्री सहयोग और वैश्विक साझेदारी को मजबूत करने के भारत के प्रयासों को भी इस दौरे से नई गति मिलने की उम्मीद है।

  • अंकारा में वैश्विक सुरक्षा पर बड़ा मंथन, नाटो समिट में ट्रंप का फोकस रक्षा बजट, हथियार सहयोग और रूस-यूक्रेन युद्ध पर रहेगा

    अंकारा में वैश्विक सुरक्षा पर बड़ा मंथन, नाटो समिट में ट्रंप का फोकस रक्षा बजट, हथियार सहयोग और रूस-यूक्रेन युद्ध पर रहेगा

    नई दिल्ली। वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था और बदलते भू-राजनीतिक हालात के बीच नाटो का आगामी शिखर सम्मेलन तुर्किए की राजधानी अंकारा में आयोजित होने जा रहा है। इस सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मौजूदगी सबसे अधिक चर्चा में है। सम्मेलन के दौरान उनका मुख्य फोकस रक्षा खर्च बढ़ाने, सदस्य देशों के बीच जिम्मेदारियों के संतुलित बंटवारे और रक्षा औद्योगिक सहयोग को मजबूत करने पर रहेगा। इसके साथ ही रूस-यूक्रेन युद्ध और यूरोप की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी प्रमुख एजेंडे में शामिल हैं।

    ट्रंप सम्मेलन के दौरान तुर्किए के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। दोनों नेताओं के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा, रक्षा सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को लेकर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। इसके अलावा ट्रंप यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की और सीरिया के अंतरिम राष्ट्रपति अहमद अल-शरा से भी अलग-अलग मुलाकात करेंगे। इन बैठकों में क्षेत्रीय संघर्षों, सुरक्षा सहयोग और भविष्य की रणनीति पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

    समिट के कार्यक्रम के अनुसार ट्रंप नाटो नेताओं के आधिकारिक स्वागत समारोह, सामूहिक फोटो सत्र और कार्यकारी बैठकों में हिस्सा लेंगे। सम्मेलन के दौरान सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष रक्षा और सुरक्षा से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों पर चर्चा करेंगे। समापन से पहले ट्रंप मीडिया को संबोधित करेंगे और उसके बाद अपनी निर्धारित द्विपक्षीय बैठकों को पूरा करेंगे।

    इस बार सम्मेलन का सबसे महत्वपूर्ण विषय नाटो देशों द्वारा रक्षा बजट बढ़ाने की प्रतिबद्धता माना जा रहा है। पिछले वर्ष सदस्य देशों ने अपनी सकल घरेलू उत्पाद का पांच प्रतिशत रक्षा क्षेत्र पर खर्च करने की दिशा में आगे बढ़ने का संकल्प लिया था। अब इस लक्ष्य की दिशा में हुई प्रगति की समीक्षा की जाएगी। अमेरिका चाहता है कि सभी सदस्य देश अपनी सैन्य क्षमता बढ़ाने के लिए तय समयसीमा के भीतर रक्षा निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि करें।

    अमेरिकी पक्ष का मानना है कि यूरोप के कई देशों ने रक्षा खर्च बढ़ाने की दिशा में सकारात्मक कदम उठाए हैं। पोलैंड, नॉर्डिक देशों और बाल्टिक क्षेत्र के देशों को इस मामले में अग्रणी बताया जा रहा है, जबकि जर्मनी भी निर्धारित लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है। इसके बावजूद अमेरिका का मानना है कि सभी सदस्य देशों को समान रूप से जिम्मेदारी निभानी होगी ताकि गठबंधन का सामूहिक सुरक्षा ढांचा और अधिक मजबूत बन सके।

    सम्मेलन में रक्षा उत्पादन बढ़ाने और सैन्य उपकरणों के संयुक्त निर्माण पर भी विशेष जोर दिया जाएगा। अमेरिका का उद्देश्य सहयोगी देशों के साथ आधुनिक हथियार प्रणालियों, रक्षा तकनीक और उत्पादन क्षमता को बढ़ाना है। माना जा रहा है कि सम्मेलन के दौरान रक्षा क्षेत्र में कई बड़े निवेश और सैन्य खरीद से जुड़े समझौतों की घोषणा भी हो सकती है, जिनकी कुल कीमत अरबों डॉलर तक पहुंच सकती है।

    रूस-यूक्रेन युद्ध भी सम्मेलन के सबसे अहम विषयों में रहेगा। ट्रंप और जेलेंस्की की प्रस्तावित बैठक में युद्ध समाप्त करने के संभावित विकल्पों और कूटनीतिक प्रयासों पर चर्चा होने की संभावना है। अमेरिका का कहना है कि युद्ध को जल्द समाप्त करना मानवीय और वैश्विक सुरक्षा दोनों दृष्टि से आवश्यक है। बैठक के बाद ट्रंप की रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी बातचीत हो सकती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि रूस-यूक्रेन संघर्ष के बाद यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था तेजी से बदली है और इसी कारण नाटो अपने रणनीतिक ढांचे में व्यापक बदलाव कर रहा है। ऐसे समय में अंकारा समिट को गठबंधन की भविष्य की रक्षा नीति, सामूहिक सुरक्षा और सदस्य देशों की साझा जिम्मेदारियों को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण सम्मेलन माना जा रहा है।

  • नाटो की एकजुटता पर उठे सवाल, अंकारा बैठक से पहले रक्षा बजट, अमेरिकी रणनीति और यूरोपीय असहमति बनी बड़ी परीक्षा

    नाटो की एकजुटता पर उठे सवाल, अंकारा बैठक से पहले रक्षा बजट, अमेरिकी रणनीति और यूरोपीय असहमति बनी बड़ी परीक्षा

    नई दिल्ली । अंकारा में इस सप्ताह होने जा रहे नाटो शिखर सम्मेलन से पहले संगठन के भीतर बढ़ते मतभेद एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के बीच गठबंधन जहां एकजुटता का संदेश देने की तैयारी कर रहा है, वहीं रक्षा खर्च, पश्चिम एशिया की स्थिति और भविष्य की रणनीतिक दिशा जैसे मुद्दों पर सदस्य देशों के अलग-अलग रुख ने उसकी एकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    सम्मेलन ऐसे समय आयोजित हो रहा है जब हाल के महीनों में पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव और ईरान से जुड़े घटनाक्रम ने सहयोगी देशों के बीच दृष्टिकोण का अंतर स्पष्ट कर दिया है। कई यूरोपीय देशों ने कूटनीतिक स्तर पर अमेरिका के उद्देश्य का समर्थन किया, लेकिन किसी भी सैन्य अभियान में प्रत्यक्ष भागीदारी से दूरी बनाए रखी। इससे यह संकेत मिला कि सुरक्षा संबंधी मामलों में सभी सदस्य समान रणनीति अपनाने के पक्ष में नहीं हैं।

    विश्लेषकों का मानना है कि यूरोपीय देशों की प्राथमिकताएं अमेरिका से अलग हैं। उनके लिए क्षेत्रीय स्थिरता, ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा और संभावित शरणार्थी संकट जैसे मुद्दे अधिक महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में प्रत्यक्ष सैन्य हस्तक्षेप से बचना उनकी रणनीतिक आवश्यकता माना जा रहा है। इराक, अफगानिस्तान और लीबिया जैसे संघर्षों के अनुभवों ने भी कई यूरोपीय सरकारों को सैन्य अभियानों को लेकर अधिक सतर्क बना दिया है।

    सम्मेलन का सबसे महत्वपूर्ण विषय रक्षा बजट बढ़ाने की योजना रहने की संभावना है। सदस्य देशों ने पहले 2035 तक रक्षा खर्च को सकल घरेलू उत्पाद के पांच प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य स्वीकार किया था। हालांकि इस लक्ष्य को लागू करना कई देशों के लिए आसान नहीं माना जा रहा है। आर्थिक सुस्ती, बढ़ता सार्वजनिक कर्ज और सामाजिक कल्याण पर बढ़ते खर्च के कारण अनेक सरकारों के सामने संसाधनों का संतुलन बड़ी चुनौती बन सकता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि कई यूरोपीय देशों में मतदाता स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा जैसी प्राथमिकताओं को रक्षा बजट से अधिक महत्व देते हैं। ऐसे में सरकारों के लिए सैन्य खर्च में बड़े स्तर की वृद्धि को राजनीतिक समर्थन दिलाना कठिन हो सकता है। यही कारण है कि लक्ष्य तय होने के बावजूद उसके क्रियान्वयन को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

    नाटो की रणनीतिक दिशा को लेकर भी बहस तेज होती जा रही है। अमेरिका लंबे समय से यूरोपीय देशों से अपनी सुरक्षा व्यवस्था में अधिक वित्तीय और सैन्य योगदान की अपेक्षा करता रहा है। इसके पीछे उद्देश्य यह माना जा रहा है कि यूरोप अपनी पारंपरिक रक्षा जिम्मेदारियों का बड़ा हिस्सा स्वयं संभाले, जबकि अमेरिका अपनी प्राथमिकताओं को अन्य क्षेत्रों की ओर केंद्रित कर सके।

    सम्मेलन से पहले तुर्किए के कई शहरों में नाटो विरोधी प्रदर्शन भी देखने को मिले। प्रदर्शनकारियों ने रक्षा खर्च बढ़ाने के बजाय सार्वजनिक सेवाओं, शिक्षा और स्वास्थ्य पर अधिक निवेश की मांग की। उनका कहना है कि बढ़ते सैन्य बजट का असर सामाजिक कल्याण योजनाओं पर पड़ सकता है। इसी प्रकार के विरोध प्रदर्शन हाल के वर्षों में यूरोप के अन्य देशों में भी सामने आए हैं।

    विश्लेषकों का यह भी मानना है कि सम्मेलन के दौरान रक्षा खरीद से जुड़े कई महत्वपूर्ण समझौतों पर चर्चा हो सकती है। इससे सदस्य देशों की सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने का प्रयास होगा, लेकिन साथ ही यह बहस भी जारी रहेगी कि गठबंधन की भविष्य की रणनीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी। ऐसे में अंकारा शिखर सम्मेलन केवल सुरक्षा सहयोग का मंच नहीं, बल्कि नाटो की आंतरिक एकजुटता और दीर्घकालिक भविष्य की भी अहम परीक्षा माना जा रहा है।