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  • कतर दौरे में भारत-कतर रिश्तों को नई मजबूती, एस. जयशंकर ने प्रधानमंत्री अल थानी के साथ ऊर्जा, व्यापार और क्षेत्रीय मुद्दों पर की व्यापक चर्चा

    कतर दौरे में भारत-कतर रिश्तों को नई मजबूती, एस. जयशंकर ने प्रधानमंत्री अल थानी के साथ ऊर्जा, व्यापार और क्षेत्रीय मुद्दों पर की व्यापक चर्चा


    नई दिल्ली।
    विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कतर की अपनी आधिकारिक यात्रा पूरी करते हुए दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण बातचीत की। दौरे के दौरान उन्होंने कतर के प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी से मुलाकात कर ऊर्जा, व्यापार, निवेश, कनेक्टिविटी, सुरक्षा और लोगों के बीच संबंधों सहित द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न आयामों की व्यापक समीक्षा की। दोनों नेताओं ने भविष्य में सहयोग के नए अवसरों पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया।

    यह यात्रा विदेश मंत्री के बहु-देशीय पश्चिम एशिया दौरे का पहला चरण थी। इस दौरे का उद्देश्य क्षेत्र के प्रमुख देशों के साथ भारत के रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को और मजबूत करना, क्षेत्रीय हालात पर चर्चा करना तथा साझा हितों से जुड़े मुद्दों पर समन्वय बढ़ाना है। कतर के बाद उनका कार्यक्रम बहरीन, कुवैत और ओमान की यात्राओं का भी है।

    बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने ऊर्जा सुरक्षा, व्यापारिक सहयोग, निवेश बढ़ाने की संभावनाओं और आपसी संपर्क को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया। इसके साथ ही क्षेत्रीय और वैश्विक महत्व के कई मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान हुआ। पश्चिम एशिया की मौजूदा परिस्थितियों और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़े विषय भी चर्चा के प्रमुख केंद्र रहे।

    विदेश मंत्री ने अमेरिका और ईरान के बीच जारी संवाद में कतर की सक्रिय मध्यस्थता भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय शांति और स्थिरता बनाए रखने के प्रयासों में कतर की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। दोनों नेताओं ने साझा हितों वाले बहुपक्षीय विषयों पर भी सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर सहमति व्यक्त की।

    दोहा प्रवास के दौरान डॉ. जयशंकर ने भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की। उन्होंने कतर के विकास और समाज में भारतीय समुदाय के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी भारतीय नागरिकों ने अपने दायित्वों का प्रभावी ढंग से निर्वहन किया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि विदेशों में रह रहे भारतीयों का कल्याण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

    विदेश मंत्री ने कहा कि भारतीय समुदाय के अनुभव, सुझाव और सहभागिता भारत-कतर संबंधों को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने दोनों देशों के बीच लोगों के स्तर पर मजबूत होते संबंधों को द्विपक्षीय साझेदारी की बड़ी ताकत बताया और भविष्य में इसे और विस्तार देने की प्रतिबद्धता दोहराई।

    उन्होंने कतर नेतृत्व का भारत के नागरिकों की सुरक्षा और उनके हितों का ध्यान रखने के लिए आभार भी व्यक्त किया। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि आर्थिक सहयोग के साथ-साथ सुरक्षा, कनेक्टिविटी और मानवीय संबंधों को भी आगे बढ़ाने से रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती मिलेगी।

    विदेश मंत्री का यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम एशिया में बदलते भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच भारत क्षेत्र के देशों के साथ अपने सहयोग को और गहरा करने की दिशा में सक्रिय कूटनीतिक पहल कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस यात्रा से भारत और कतर के बीच ऊर्जा, व्यापार, निवेश तथा क्षेत्रीय सहयोग के क्षेत्रों में भविष्य की साझेदारी को नया विस्तार मिलने की संभावना मजबूत हुई है।

  • भारत को इजरायल का मजबूत मित्र बता बोले नेतन्याहू, '140 करोड़ लोगों का समर्थन हमारे साथ'

    भारत को इजरायल का मजबूत मित्र बता बोले नेतन्याहू, '140 करोड़ लोगों का समर्थन हमारे साथ'

    नई दिल्ली । इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भारत को अपने सबसे मजबूत और भरोसेमंद मित्र देशों में शामिल बताते हुए कहा है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र से उन्हें व्यापक समर्थन मिलता है। उन्होंने यह टिप्पणी ऐसे समय की है जब अमेरिका और इजरायल के संबंधों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज है और अमेरिकी नेतृत्व की ओर से भी अलग-अलग बयान सामने आए हैं।

    एक साक्षात्कार में नेतन्याहू ने कहा कि अमेरिका निश्चित रूप से इजरायल का महत्वपूर्ण सहयोगी है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने कार्यकाल में इजरायल के पक्ष में कई अहम फैसले लिए हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दुनिया में इजरायल के मित्र केवल अमेरिका तक सीमित नहीं हैं। उनके अनुसार भारत उन प्रमुख देशों में शामिल है, जहां से इजरायल को मजबूत समर्थन प्राप्त होता है।

    नेतन्याहू ने भारत का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि 140 करोड़ आबादी वाले देश से उन्हें व्यापक समर्थन मिलता है। उन्होंने सोशल मीडिया पर भारतीय नागरिकों की सक्रियता का भी जिक्र किया और कहा कि उनके आधिकारिक फेसबुक पेज पर भारत से बड़ी संख्या में सकारात्मक प्रतिक्रियाएं और समर्थन देखने को मिलता है। उनके अनुसार यह दोनों देशों के बीच मजबूत जनसंपर्क और सकारात्मक भावनाओं का संकेत है।

    इजरायली प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत के अलावा कई अन्य देशों के नेता भी निजी स्तर पर इजरायल के साथ सहयोग की इच्छा रखते हैं। उन्होंने दावा किया कि रक्षा, साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आधुनिक तकनीक जैसे क्षेत्रों में अनेक देश इजरायल के साथ साझेदारी बढ़ाना चाहते हैं। उनके अनुसार सुरक्षा और तकनीकी सहयोग भविष्य में अंतरराष्ट्रीय संबंधों का महत्वपूर्ण आधार बनता जा रहा है।

    नेतन्याहू की यह टिप्पणी अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि मौजूदा समय में डोनाल्ड ट्रंप ही ऐसे प्रमुख नेता हैं जो इजरायल के प्रति सबसे अधिक सहानुभूति रखते हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए नेतन्याहू ने कहा कि ट्रंप निश्चित रूप से व्हाइट हाउस में इजरायल के सबसे बड़े मित्र रहे हैं, लेकिन इस मुद्दे पर सभी की राय समान होना जरूरी नहीं है। उन्होंने संकेत दिया कि इजरायल के कई अन्य अंतरराष्ट्रीय सहयोगी भी हैं, जिनमें भारत प्रमुख स्थान रखता है।

    साक्षात्कार के दौरान नेतन्याहू ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी अपनी सरकार का रुख दोहराया। उन्होंने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उनका कहना था कि इस मुद्दे पर उनकी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सोच समान है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में अमेरिका और ईरान के बीच किसी परमाणु समझौते पर सहमति नहीं बनती है, तब भी इजरायल अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि नेतन्याहू का भारत का उल्लेख करना दोनों देशों के बीच लगातार मजबूत होते रणनीतिक संबंधों की ओर भी संकेत देता है। हाल के वर्षों में रक्षा, प्रौद्योगिकी, कृषि, साइबर सुरक्षा और व्यापार जैसे क्षेत्रों में भारत और इजरायल के बीच सहयोग लगातार बढ़ा है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय मंच से भारत को सार्वजनिक रूप से मजबूत मित्र बताना दोनों देशों के संबंधों के महत्व को रेखांकित करने वाला बयान माना जा रहा है।

  • प्रधानमंत्री मोदी का इंडोनेशिया दौरा कई मोर्चों पर अहम, रणनीतिक सहयोग से लेकर डिजिटल कनेक्टिविटी तक बनेंगे नए आयाम

    प्रधानमंत्री मोदी का इंडोनेशिया दौरा कई मोर्चों पर अहम, रणनीतिक सहयोग से लेकर डिजिटल कनेक्टिविटी तक बनेंगे नए आयाम

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीन देशों की विदेश यात्रा के पहले चरण में होने वाला इंडोनेशिया दौरा भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। 6 से 8 जुलाई तक प्रस्तावित इस दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार, समुद्री सुरक्षा, डिजिटल सहयोग, कृषि, खनिज संसाधनों और सांस्कृतिक संबंधों सहित कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में साझेदारी को और मजबूत बनाने पर विशेष जोर रहेगा।

    भारत और इंडोनेशिया के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुई है। प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय राजनीतिक संवाद को आगे बढ़ाने के साथ-साथ विभिन्न द्विपक्षीय समझौतों की समीक्षा और भविष्य की सहयोग योजनाओं को गति देने का अवसर भी मानी जा रही है। दोनों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षित समुद्री मार्गों को साझा प्राथमिकता मानते हैं।

    रक्षा और समुद्री सुरक्षा इस यात्रा के प्रमुख एजेंडों में शामिल हैं। दोनों देशों के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास, रक्षा प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और रक्षा उद्योग में सहयोग को और व्यापक बनाने पर चर्चा होने की संभावना है। समुद्री सुरक्षा, समुद्री निगरानी और हिंद महासागर क्षेत्र में समन्वय बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। दोनों देश क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए आपसी सहयोग को और मजबूत करने के पक्षधर हैं।

    आर्थिक सहयोग भी इस यात्रा का महत्वपूर्ण पहलू रहेगा। भारत और इंडोनेशिया के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगातार बढ़ रहा है और दोनों देश निवेश के नए अवसरों की तलाश में हैं। विनिर्माण, ऊर्जा, बुनियादी ढांचा, सूचना प्रौद्योगिकी, फार्मास्यूटिकल्स और कृषि जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा होगी। दोनों देशों के दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर भी जोर दिया जाएगा।

    महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों के क्षेत्र में सहयोग को भी प्राथमिकता मिलने की संभावना है। इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी निर्माण और स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े उद्योगों के लिए आवश्यक खनिजों की उपलब्धता को देखते हुए दोनों देश आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने और औद्योगिक सहयोग बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

    डिजिटल सहयोग इस यात्रा का एक और प्रमुख आयाम है। दोनों देशों के बीच डिजिटल भुगतान प्रणाली, ई-कॉमर्स, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और तकनीकी नवाचार के क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे। इससे व्यापार, पर्यटन, निवेश और लोगों के बीच संपर्क को और अधिक सरल तथा प्रभावी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    कृषि, खाद्य सुरक्षा और सामाजिक कल्याण से जुड़े क्षेत्रों में भी अनुभव साझा करने पर जोर रहेगा। टिकाऊ कृषि, खाद्यान्न सुरक्षा, सार्वजनिक वितरण व्यवस्था, डिजिटल कृषि और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में दोनों देश एक-दूसरे के सफल मॉडलों से सीखने और सहयोग बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

    इस यात्रा का सांस्कृतिक पक्ष भी विशेष महत्व रखता है। भारत और इंडोनेशिया के बीच हजारों वर्षों पुराने सांस्कृतिक, धार्मिक और समुद्री संबंध रहे हैं। साझा विरासत, सभ्यतागत जुड़ाव और लोगों के बीच संपर्क को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों और उच्चस्तरीय मुलाकातों का आयोजन भी प्रस्तावित है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा भारत और इंडोनेशिया के संबंधों को व्यापक रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक साझेदारी के नए चरण में पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

  • 62 करोड़ का फ्लायओवर बना मुसीबत, इंदौर के सत्यसाई चौराहे पर गड्ढों और कीचड़ में रेंग रहा ट्रैफिक

    62 करोड़ का फ्लायओवर बना मुसीबत, इंदौर के सत्यसाई चौराहे पर गड्ढों और कीचड़ में रेंग रहा ट्रैफिक


    इंदौर  इंदौर के सबसे व्यस्त यातायात मार्गों में शामिल सत्यसाई चौराहा इन दिनों लोगों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बना हुआ है। यहां मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन की देखरेख में 62 करोड़ रुपए की लागत से छह लेन फ्लायओवर का निर्माण किया जा रहा है। परियोजना को मार्च 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन तय समय सीमा बीतने के तीन महीने बाद भी केवल करीब 40 प्रतिशत काम ही पूरा हो पाया है। निर्माण की धीमी रफ्तार और एजेंसी की लापरवाही का खामियाजा अब रोजाना हजारों वाहन चालकों को भुगतना पड़ रहा है।

    बारिश शुरू होने के बाद हालात और भी खराब हो गए हैं। निर्माणाधीन क्षेत्र की सर्विस रोड जगह-जगह उखड़ चुकी है और गहरे गड्ढों में बारिश का पानी भर जाने से उनकी गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल हो गया है। देवास नाका से विजय नगर की ओर जाने वाले मार्ग पर वाहन चालक हर दिन जोखिम उठाकर सफर करने को मजबूर हैं। सत्यसाई स्कूल के आसपास सड़क की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि दोपहिया और चारपहिया वाहनों के फिसलने तथा दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा लगातार बना हुआ है।

    एबी रोड से बसंत विहार कॉलोनी की ओर जाने वाले मार्ग पर भी हालात बेहतर नहीं हैं। यहां 15 से 20 फीट लंबे और करीब दो फीट गहरे गड्ढे सड़क पर बने हुए हैं। निर्माण सामग्री और गिट्टी सड़क पर बिखरी होने से वाहन चालक संतुलन खो रहे हैं। कई जगह चैंबर के ढक्कन भी धंस चुके हैं जिससे हादसे की आशंका और बढ़ गई है।

    फ्लायओवर की गर्डर लॉन्चिंग का अधिकांश कार्य पूरा हो चुका है लेकिन इसके बावजूद सर्विस रोड का बड़ा हिस्सा अब भी बैरिकेड्स से बंद पड़ा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि निर्माण एजेंसी समय रहते सड़क की मरम्मत कर बैरिकेड्स हटा देती तो यातायात के लिए अतिरिक्त जगह उपलब्ध हो जाती और रोज लगने वाले जाम से काफी राहत मिल सकती थी।

    स्थिति को और गंभीर बना रही है सड़क किनारे अव्यवस्थित पार्किंग। विजय नगर से देवास नाका की ओर जाने वाले संकरे मार्ग पर कई दुकानों के सामने वाहन खड़े रहने से यातायात प्रभावित हो रहा है। बारिश के दौरान यह समस्या और विकराल रूप ले लेती है तथा लंबा जाम लग जाता है।

    एमपीआरडीसी ने अप्रैल में दावा किया था कि मानसून से पहले सर्विस रोड को कंक्रीट से विकसित कर चौड़ा किया जाएगा और क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत भी पूरी कर दी जाएगी। हालांकि जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल अलग नजर आ रही है। न तो सर्विस रोड का काम पूरा हुआ और न ही खराब सड़कों की प्रभावी मरम्मत की गई।

    15 मार्च 2024 को शुरू हुई इस परियोजना का लगभग 60 प्रतिशत काम अब भी अधूरा है। ऐसे में शहरवासियों की चिंता बढ़ गई है कि यदि निर्माण की रफ्तार इसी तरह धीमी रही तो फ्लायओवर के पूरा होने में अभी और लंबा समय लग सकता है। तब तक लोगों को बारिश, गड्ढों, कीचड़ और ट्रैफिक जाम जैसी समस्याओं से लगातार जूझना पड़ेगा।

  • सूरत और अहमदाबाद की पहचान से आगे निकला कोयम्बटूर, जानिए क्यों तमिलनाडु का यह शहर आज भारत की असली 'टेक्सटाइल सिटी' कहलाता है

    सूरत और अहमदाबाद की पहचान से आगे निकला कोयम्बटूर, जानिए क्यों तमिलनाडु का यह शहर आज भारत की असली 'टेक्सटाइल सिटी' कहलाता है

    नई दिल्ली। भारत में कपड़ा उद्योग का इतिहास हजारों वर्षों पुराना माना जाता है। प्राचीन काल से ही यहां सूती और रेशमी वस्त्रों का निर्माण होता रहा है। समय के साथ इस उद्योग ने आधुनिक रूप लिया और देश के अलग-अलग शहर कपड़ा उत्पादन के प्रमुख केंद्र बनते गए। कभी कानपुर को टेक्सटाइल कैपिटल कहा जाता था तो अहमदाबाद और सूरत भी लंबे समय तक वस्त्र उद्योग के बड़े केंद्र रहे। हालांकि वर्तमान समय में तमिलनाडु का कोयम्बटूर भारत की ‘टेक्सटाइल सिटी’ के रूप में सबसे मजबूत पहचान बना चुका है।

    कोयम्बटूर को यह पहचान केवल कपड़ा उत्पादन की वजह से नहीं मिली, बल्कि यहां विकसित हुए संपूर्ण टेक्सटाइल उद्योग ने इसे देश के सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक शहरों में शामिल कर दिया है। शहर में बड़ी संख्या में स्पिनिंग मिल्स, टेक्सटाइल यूनिट्स, गारमेंट निर्माण केंद्र और प्रोसेसिंग प्लांट संचालित हैं। यही कारण है कि यह भारत में सूती धागे के सबसे बड़े उत्पादन केंद्रों में गिना जाता है।

    इस शहर की भौगोलिक परिस्थितियां भी कपड़ा उद्योग के लिए अनुकूल मानी जाती हैं। यहां का मौसम, औद्योगिक वातावरण और प्रशिक्षित श्रमिकों की उपलब्धता उत्पादन क्षमता को लगातार मजबूत बनाती है। वर्षों से विकसित औद्योगिक ढांचे ने कोयम्बटूर को टेक्सटाइल क्षेत्र में स्थिर और भरोसेमंद पहचान दिलाई है। यही वजह है कि देश की कई प्रमुख वस्त्र कंपनियां यहां से अपना उत्पादन संचालित करती हैं।

    कोयम्बटूर की सबसे बड़ी विशेषता इसका एकीकृत टेक्सटाइल नेटवर्क है। यहां कपास की खरीद से लेकर धागा तैयार करने, बुनाई, रंगाई, प्रिंटिंग और तैयार परिधान बनाने तक की पूरी प्रक्रिया स्थानीय स्तर पर ही पूरी हो जाती है। इससे उत्पादन लागत नियंत्रित रहती है और उद्योग की कार्यक्षमता भी बढ़ती है। इस मॉडल ने शहर को देश के सबसे संगठित टेक्सटाइल क्लस्टरों में शामिल कर दिया है।

    शहर में तैयार होने वाला कॉटन यार्न देश के अनेक राज्यों की वस्त्र इकाइयों तक पहुंचता है। उच्च गुणवत्ता वाले सूती धागे की वजह से यहां का उत्पादन गारमेंट उद्योग और निर्यात आधारित कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके अलावा निटवियर, फैब्रिक, होम टेक्सटाइल्स, तौलिये और अन्य तैयार वस्त्रों का भी बड़े पैमाने पर निर्माण किया जाता है।

    कोयम्बटूर का योगदान केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं है। यहां निर्मित टेक्सटाइल उत्पादों की आपूर्ति कई विदेशी बाजारों में भी होती है। सूती धागा, तैयार कपड़े, टेक्निकल टेक्सटाइल और होम फर्निशिंग उत्पादों का निर्यात इस शहर की औद्योगिक अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार देता है। इसी वजह से यह भारत के प्रमुख निर्यात केंद्रों में भी अपनी मजबूत उपस्थिति बनाए हुए है।

    टेक्सटाइल उत्पादन के साथ-साथ कोयम्बटूर मशीन निर्माण के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यहां टेक्सटाइल मशीनरी, मोटर्स, स्पेयर पार्ट्स और इंजीनियरिंग उपकरणों का भी बड़े पैमाने पर निर्माण होता है। इससे वस्त्र उद्योग को स्थानीय स्तर पर आवश्यक मशीनें और तकनीकी सहायता आसानी से उपलब्ध हो जाती है।

    भारत का कपड़ा उद्योग आज भी देश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बना हुआ है। कृषि के बाद यह सबसे अधिक रोजगार उपलब्ध कराने वाले क्षेत्रों में शामिल है और निर्यात में भी इसकी उल्लेखनीय हिस्सेदारी है। इसी मजबूत औद्योगिक व्यवस्था, व्यापक उत्पादन क्षमता और निर्यात में अहम योगदान के कारण कोयम्बटूर को आज भारत की ‘टेक्सटाइल सिटी’ के रूप में विशेष पहचान प्राप्त है।

  • इंदौर में साइबर ठगों का कहर, पेंशन कार्ड और सस्ती बाइक के झांसे में तीन लोगों से 4.57 लाख की ठगी

    इंदौर में साइबर ठगों का कहर, पेंशन कार्ड और सस्ती बाइक के झांसे में तीन लोगों से 4.57 लाख की ठगी


    इंदौर  इंदौर में साइबर अपराधियों का जाल लगातार फैलता जा रहा है। शहर में सामने आए तीन अलग-अलग मामलों में ठगों ने पेंशन कार्ड बनवाने, मोबाइल हैक करने और सस्ती बाइक दिलाने का झांसा देकर तीन लोगों से कुल 4.57 लाख रुपए से अधिक की ठगी कर ली। सभी मामलों में लसूडिया थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस लोगों से किसी भी अनजान कॉल, लिंक या सोशल मीडिया विज्ञापन पर भरोसा नहीं करने की अपील कर रही है।

    पहले मामले में लसूडिया थाना क्षेत्र की सेटेलाइट टाउनशिप निवासी 75 वर्षीय अखिलेश गायकवाड़ को ठगों ने निशाना बनाया। 15 जून की शाम एक व्यक्ति ने खुद को बैंक ऑफ इंडिया का अधिकारी बताते हुए उन्हें फोन किया और पेंशनधारकों के लिए नया पेंशन कार्ड जारी होने की जानकारी दी। चूंकि अखिलेश पहले इस कार्ड के लिए आवेदन कर चुके थे इसलिए उन्होंने कॉल करने वाले पर विश्वास कर लिया। आरोपी ने बैंक खाते, एटीएम कार्ड और अन्य व्यक्तिगत जानकारी लेने के साथ ऑनलाइन फोटो भी प्राप्त कर लिया। इसके कुछ ही देर बाद उनका मोबाइल ठग के नियंत्रण में चला गया और खाते से तीन अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए करीब 1.39 लाख रुपए निकाल लिए गए। घटना का पता चलते ही उन्होंने साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई।

    दूसरे मामले में स्लाइस-सी सेक्टर निवासी गोपाल वाकड़े साइबर ठगी का शिकार बने। 17 जून को उनका मोबाइल अचानक बंद हो गया। मोबाइल दोबारा चालू होने पर उन्हें खाते से 44 हजार रुपए निकलने का संदेश मिला। बैंक पहुंचने पर पता चला कि 98 हजार रुपए का एक और ट्रांजेक्शन भी हो चुका है। इस तरह उनके खाते से कुल करीब 1.42 लाख रुपए निकाल लिए गए। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।

    तीसरा मामला एक छात्रा से जुड़ा है जिसे इंस्टाग्राम पर सस्ती बाइक खरीदने का विज्ञापन भारी पड़ गया। राजाबाग कॉलोनी में किराये से रहने वाली और मूल रूप से गंधवानी की निवासी पूजा झमेले ने 25 हजार रुपए में दोपहिया वाहन मिलने का विज्ञापन देखा। संपर्क करने पर आरोपी ने पहले दो हजार रुपए बुकिंग राशि के रूप में जमा कराए और बाद में ट्रांसपोर्ट चार्ज समेत अलग-अलग बहानों से कई किश्तों में पैसे मांगता रहा। गाड़ी की फोटो भेजकर भरोसा भी दिलाया गया। आखिरकार छात्रा से करीब 1.76 लाख रुपए ट्रांसफर करा लिए गए। जब लंबे समय तक वाहन नहीं मिला तब उसे ठगी का एहसास हुआ और उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

    पुलिस तीनों मामलों में बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल ट्रांजेक्शन की जांच कर रही है। अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल पर बैंक संबंधी जानकारी साझा न करें, सोशल मीडिया पर दिखने वाले आकर्षक ऑफरों की सत्यता जांचे बिना भुगतान न करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी थाने में शिकायत करें।

  • E20, XP95 या XP100… आपकी गाड़ी के लिए कौन-सा पेट्रोल है सबसे सही? जानिए ऑक्टेन, इथेनॉल और परफॉर्मेंस का पूरा गणित

    E20, XP95 या XP100… आपकी गाड़ी के लिए कौन-सा पेट्रोल है सबसे सही? जानिए ऑक्टेन, इथेनॉल और परफॉर्मेंस का पूरा गणित

    नई दिल्ली। देश में इथेनॉल मिश्रित ईंधन को बढ़ावा दिए जाने के बाद E20 पेट्रोल अब अधिकांश पेट्रोल पंपों पर सामान्य ईंधन के रूप में उपलब्ध है। वहीं दूसरी ओर हाई-ऑक्टेन फ्यूल XP95 और XP100 को लेकर भी वाहन चालकों के बीच रुचि बढ़ी है। कई लोग यह जानना चाहते हैं कि इन तीनों प्रकार के पेट्रोल में वास्तविक अंतर क्या है और उनकी कार या बाइक के लिए कौन-सा विकल्प सबसे उपयुक्त रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल महंगा या अधिक ऑक्टेन वाला पेट्रोल हर वाहन के लिए बेहतर नहीं होता, बल्कि सही ईंधन का चुनाव वाहन निर्माता की तकनीकी सिफारिश के आधार पर किया जाना चाहिए।

    E20 पेट्रोल वर्तमान समय में सबसे अधिक उपयोग होने वाला ईंधन है। इसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है। इसकी ऑक्टेन रेटिंग 91 RON होती है, जो सामान्य उपयोग वाले पेट्रोल इंजन के लिए पर्याप्त मानी जाती है। सरकार का उद्देश्य इथेनॉल मिश्रण बढ़ाकर जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना और पर्यावरणीय प्रभाव घटाना है। जिन वाहनों को E20 के अनुरूप तैयार किया गया है, उनके लिए यह ईंधन सामान्य परिस्थितियों में उपयुक्त माना जाता है।

    हाल के समय में कुछ वाहन मालिकों ने E20 पेट्रोल के इस्तेमाल के बाद माइलेज में कमी आने और इंजन की कार्यक्षमता प्रभावित होने जैसी बातें सामने रखी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे अनुभव वाहन की तकनीक, इंजन की स्थिति और ड्राइविंग पैटर्न पर भी निर्भर करते हैं। यदि वाहन E20 के अनुकूल नहीं है, तो लंबे समय में कुछ तकनीकी चुनौतियां सामने आ सकती हैं। इसलिए वाहन निर्माता द्वारा सुझाए गए ईंधन का ही उपयोग करना सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है।

    XP95 प्रीमियम श्रेणी का हाई-ऑक्टेन पेट्रोल है, जिसकी ऑक्टेन रेटिंग 95 RON होती है। इसमें लगभग 15 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित रहता है। यह विशेष रूप से हाई-कंप्रेशन, टर्बोचार्ज्ड और आधुनिक पेट्रोल इंजनों के लिए विकसित किया गया है। अधिक ऑक्टेन रेटिंग के कारण इंजन में नॉकिंग की संभावना कम होती है, जिससे इंजन अधिक स्मूद तरीके से कार्य करता है। इसके उपयोग से बेहतर एक्सेलरेशन, संतुलित प्रदर्शन और इंजन के भीतर कार्बन जमा होने में कमी जैसी विशेषताएं देखने को मिल सकती हैं। हालांकि इसका वास्तविक लाभ उन्हीं वाहनों में मिलता है जिनके इंजन की डिजाइन इस प्रकार के ईंधन के अनुरूप होती है।

    XP100 सबसे प्रीमियम श्रेणी का पेट्रोल माना जाता है। इसकी ऑक्टेन रेटिंग 100 RON होती है और इसमें इथेनॉल का मिश्रण नहीं किया जाता। यह मुख्य रूप से हाई-परफॉर्मेंस स्पोर्ट्स कारों, सुपरकारों और सुपरबाइक्स के लिए तैयार किया गया ईंधन है। इसमें विशेष एडिटिव्स मिलाए जाते हैं जो इंजन को साफ रखने, कार्बन जमाव कम करने और अधिकतम प्रदर्शन बनाए रखने में मदद करते हैं। इसकी कीमत सामान्य पेट्रोल की तुलना में काफी अधिक होती है, इसलिए इसका उपयोग केवल उन वाहनों में व्यावहारिक माना जाता है जिन्हें वास्तव में इतने उच्च ऑक्टेन ईंधन की आवश्यकता होती है।

    ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी सामान्य कार या बाइक के निर्माता ने 91 RON ईंधन की सिफारिश की है, तो केवल अधिक महंगा पेट्रोल भरवाने से इंजन की शक्ति या माइलेज में उल्लेखनीय सुधार नहीं होता। वहीं जिन वाहनों के लिए 95 RON या उससे अधिक ऑक्टेन वाला ईंधन निर्धारित किया गया है, उनमें XP95 या XP100 बेहतर परिणाम दे सकते हैं। इसलिए ईंधन का चुनाव हमेशा वाहन के इंजन की जरूरत, निर्माता की सलाह और वास्तविक उपयोग के आधार पर करना चाहिए। सही पेट्रोल का चयन न केवल इंजन की कार्यक्षमता बनाए रखता है, बल्कि लंबे समय तक वाहन की विश्वसनीयता और प्रदर्शन को भी बेहतर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

  • एमपी में लोकसभा सीटों का बड़ा विस्तार संभव, भोपाल-इंदौर समेत 15 नई सीटों का प्रस्ताव, बदल सकता है चुनावी गणित

    एमपी में लोकसभा सीटों का बड़ा विस्तार संभव, भोपाल-इंदौर समेत 15 नई सीटों का प्रस्ताव, बदल सकता है चुनावी गणित


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश की राजनीति आने वाले वर्षों में बड़े बदलाव के दौर से गुजर सकती है। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) की एक अध्ययन रिपोर्ट में भविष्य के परिसीमन के दौरान राज्य में लोकसभा सीटों की संख्या 29 से बढ़ाकर 44 किए जाने का सुझाव दिया गया है। यानी मध्य प्रदेश को 15 नई लोकसभा सीटें मिल सकती हैं। हालांकि परिषद ने स्पष्ट किया है कि यह अंतिम परिसीमन प्रस्ताव नहीं बल्कि प्रतिनिधित्व को अधिक संतुलित और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया एक अध्ययन मॉडल है।

    रिपोर्ट में देशभर में मौजूदा 543 लोकसभा सीटों को बढ़ाकर 824 करने और बड़े संसदीय क्षेत्रों को दो या तीन हिस्सों में विभाजित करने की सिफारिश की गई है। इसी आधार पर मध्य प्रदेश में लगभग 52 प्रतिशत सीटें बढ़ने की संभावना जताई गई है। यदि भविष्य में इस दिशा में फैसला होता है तो राज्य के चुनावी और राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

    रिपोर्ट के अनुसार भविष्य का परिसीमन केवल जनसंख्या के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। इसके लिए मतदाताओं की संख्या, भौगोलिक क्षेत्रफल, शहरीकरण, अनुसूचित जाति और जनजाति की आबादी, सामाजिक और भाषाई विविधता तथा मतदान प्रतिशत जैसे कई मानकों को भी महत्व देने का सुझाव दिया गया है। परिषद का मानना है कि इससे सांसद और मतदाताओं के बीच संपर्क बेहतर होगा तथा निर्वाचन क्षेत्रों का संतुलित विकास संभव हो सकेगा।

    सबसे अधिक असर भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन, सागर, रीवा और छिंदवाड़ा जैसे बड़े संसदीय क्षेत्रों पर पड़ सकता है। इन क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है और शहरी विस्तार भी तेजी से हो रहा है। वहीं नए जिले मैहर, मऊगंज और पांढुर्णा भी भविष्य के परिसीमन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

    रिपोर्ट में मालवा-निमाड़ और महाकौशल क्षेत्रों में सबसे अधिक बदलाव की संभावना जताई गई है। मालवा-निमाड़ की मौजूदा नौ लोकसभा सीटों में इंदौर, उज्जैन, धार और खरगोन जैसे बड़े क्षेत्रों का विभाजन कर सीटों की संख्या 13 तक पहुंच सकती है। इसी तरह महाकौशल क्षेत्र की छिंदवाड़ा, जबलपुर, मंडला और बालाघाट जैसी सीटों का पुनर्गठन कर यहां लोकसभा सीटों की संख्या चार से बढ़ाकर आठ किए जाने की संभावना बताई गई है।

    यदि मध्य प्रदेश में लोकसभा सीटों की संख्या 44 होती है तो राष्ट्रीय राजनीति में राज्य की भूमिका और प्रभाव दोनों बढ़ेंगे। संसद में अधिक प्रतिनिधित्व मिलने के साथ केंद्र सरकार में राज्य की भागीदारी भी मजबूत हो सकती है। वहीं राजनीतिक दलों को नए परिसीमन के अनुसार संगठनात्मक ढांचे और चुनावी रणनीति में व्यापक बदलाव करने पड़ सकते हैं क्योंकि कई संसदीय क्षेत्रों की सीमाएं बदल जाएंगी।

    रिपोर्ट के विश्लेषण के अनुसार नए परिसीमन की स्थिति में भोपाल, इंदौर, नागदा, बीना, ग्वालियर शहर, सीहोर, मऊगंज और लांजी जैसे क्षेत्रों में भाजपा की स्थिति मजबूत रह सकती है। वहीं पांढुर्णा, सरदारपुर, बड़वानी, डिंडौरी और उमरिया जैसे क्षेत्रों में कांग्रेस को नए अवसर मिल सकते हैं। हालांकि यह केवल अध्ययन आधारित आकलन है और अंतिम निर्णय भविष्य में होने वाले आधिकारिक परिसीमन पर निर्भर करेगा।

  • कच्चा तेल 71 डॉलर के करीब, फिर भी नहीं मिली राहत; जानिए 6 जुलाई को आपके शहर में पेट्रोल-डीजल के ताजा दाम और कीमतें घटने की पूरी तस्वीर

    कच्चा तेल 71 डॉलर के करीब, फिर भी नहीं मिली राहत; जानिए 6 जुलाई को आपके शहर में पेट्रोल-डीजल के ताजा दाम और कीमतें घटने की पूरी तस्वीर


    नई दिल्ली।
    अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार नरमी आने के बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। सोमवार 6 जुलाई को भी सरकारी तेल कंपनियों ने ईंधन के दाम स्थिर रखे हैं। इससे वाहन चालकों को बढ़ोतरी से राहत तो मिली है, लेकिन सस्ते कच्चे तेल का सीधा लाभ अभी उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंच पाया है। पिछले कई दिनों से पेट्रोल और डीजल की कीमतें एक ही स्तर पर बनी हुई हैं और बाजार की नजर अब आगे होने वाले संभावित बदलाव पर टिकी है।

    अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में हाल के दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। उत्पादन बढ़ाने के फैसलों और वैश्विक आपूर्ति में सुधार की उम्मीद के चलते ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई दोनों प्रमुख बेंचमार्क नीचे आए हैं। इससे यह उम्मीद जगी कि भारत में भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत मिल सकती है। हालांकि घरेलू स्तर पर फिलहाल कीमतों में किसी प्रकार की कटौती नहीं की गई है।

    राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर पर उपलब्ध है। मुंबई में पेट्रोल 111.21 रुपये और डीजल 97.83 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। कोलकाता में पेट्रोल 113.51 रुपये तथा डीजल 99.82 रुपये प्रति लीटर है। चेन्नई में पेट्रोल 107.76 रुपये और डीजल 99.55 रुपये प्रति लीटर के भाव पर मिल रहा है। इसके अलावा नोएडा, गुरुग्राम, लखनऊ, जयपुर, पटना, बेंगलुरु, हैदराबाद और चंडीगढ़ सहित अन्य शहरों में भी निर्धारित दरों पर ईंधन की बिक्री जारी है।

    सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई हालिया गिरावट का असर घरेलू कीमतों पर तुरंत दिखाई देना संभव नहीं है। इसकी प्रमुख वजह यह है कि तेल कंपनियां अभी भी कुछ समय पहले ऊंची कीमतों पर खरीदे गए कच्चे तेल को रिफाइन कर रही हैं। इसके अलावा परिवहन, बीमा और अन्य परिचालन लागत भी ईंधन की अंतिम कीमत तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में कच्चे तेल के सस्ता होने का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचने में कुछ समय लग सकता है।

    सरकार का यह भी मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक मौजूदा स्तर पर बनी रहती हैं या और नीचे आती हैं, तभी पेट्रोल और डीजल की कीमतों की समीक्षा की जा सकती है। फिलहाल तेल कंपनियां पूर्व में हुए अतिरिक्त खर्च और लागत की भरपाई करने की प्रक्रिया में हैं, इसलिए तत्काल राहत की संभावना सीमित मानी जा रही है।

    गौरतलब है कि मई 2026 के दौरान पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कई चरणों में बढ़ोतरी की गई थी। उसके बाद से अब तक किसी प्रकार का संशोधन नहीं हुआ है। यही कारण है कि उपभोक्ता अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई गिरावट के बाद घरेलू कीमतों में कटौती की उम्मीद लगाए हुए हैं।

    जो उपभोक्ता अपने शहर के ताजा पेट्रोल और डीजल के दाम जानना चाहते हैं, वे संबंधित तेल कंपनियों की आधिकारिक डिजिटल सेवाओं या एसएमएस सुविधा के माध्यम से रोजाना अपडेट प्राप्त कर सकते हैं। चूंकि विभिन्न राज्यों में लगने वाले वैट और स्थानीय कर अलग-अलग होते हैं, इसलिए शहरों के अनुसार ईंधन की कीमतों में अंतर देखने को मिलता है। फिलहाल देशभर में कीमतें स्थिर हैं, जबकि बाजार की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की मौजूदा नरमी घरेलू ईंधन दरों में राहत का रास्ता कब खोलती है।

  • नैनीताल घूमने गया था परिवार, तीसरी मंजिल से गिरने से 3 साल के मासूम की मौत, झाबुआ में पसरा मातम

    नैनीताल घूमने गया था परिवार, तीसरी मंजिल से गिरने से 3 साल के मासूम की मौत, झाबुआ में पसरा मातम


    नई दिल्ली । मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले के राणापुर निवासी सराफा कारोबारी विशाल सोनी के तीन वर्षीय बेटे गौरांश सोनी की नैनीताल में हुए एक दर्दनाक हादसे में मौत हो गई। परिवार के साथ छुट्टियां मनाने गया मासूम होटल की तीसरी मंजिल की खिड़की से नीचे गिर गया। गंभीर रूप से घायल बच्चे को पहले नैनीताल और फिर हल्द्वानी के अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत बिगड़ने पर उसे दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस घटना से परिवार के साथ पूरे राणापुर में शोक की लहर दौड़ गई है।

    परिजनों के अनुसार परिवार एक जुलाई को इंदौर से 22 सदस्यों के साथ नैनीताल घूमने गया था। सभी लोग मल्लीताल क्षेत्र के एक होटल में ठहरे हुए थे। रविवार सुबह गौरांश कमरे में खेल रहा था। इसी दौरान कुछ क्षण के लिए परिजनों का ध्यान उससे हट गया और वह होटल की तीसरी मंजिल की खिड़की से नीचे गिर पड़ा। करीब 20 फीट की ऊंचाई से गिरने के कारण उसके सिर और गर्दन में गंभीर चोटें आईं।

    हादसे के तुरंत बाद होटल में अफरा-तफरी मच गई। परिजनों और होटल कर्मचारियों ने बिना देर किए बच्चे को बीडी पांडे जिला चिकित्सालय पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे हल्द्वानी के हायर सेंटर रेफर कर दिया। जांच में पता चला कि उसके सिर की हड्डियां टूट गई थीं और गर्दन में भी गंभीर चोट लगी थी।

    बच्चे की हालत लगातार नाजुक बनी रहने पर डॉक्टरों ने उसे बेहतर उपचार के लिए दिल्ली भेजने का निर्णय लिया। परिजनों ने बताया कि दिल्ली ले जाते समय रास्ते में गौरांश की धड़कन भी बंद हो गई थी। चिकित्सकों ने उसे दोबारा जीवित करने का प्रयास किया और फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन गंभीर सिर की चोटों के कारण डॉक्टर उसे बचा नहीं सके।

    गौरांश परिवार का इकलौता बेटा था। उसकी मौत की खबर सामने आते ही झाबुआ जिले के राणापुर कस्बे में शोक की लहर फैल गई। रिश्तेदारों और परिचितों ने परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। दिल्ली में आवश्यक कानूनी और चिकित्सकीय प्रक्रिया पूरी करने के बाद परिजन रविवार शाम एंबुलेंस से गौरांश के पार्थिव शरीर को लेकर राणापुर के लिए रवाना हो गए।