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  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर जनता में उबाल, भोपालवासियों ने कहा- यह सिर्फ पैसे नहीं आस्था की चोरी, दोषियों को मिले उम्रकैद

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर जनता में उबाल, भोपालवासियों ने कहा- यह सिर्फ पैसे नहीं आस्था की चोरी, दोषियों को मिले उम्रकैद


    नई दिल्ली । अयोध्या के राम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे से कथित रूप से रकम गायब किए जाने के मामले ने पूरे देश में नाराजगी पैदा कर दी है। पुलिस जांच के अनुसार दानपात्रों से निकाली गई नकदी में 42 दिनों के दौरान कई बार हेराफेरी किए जाने के आरोप सामने आए हैं। जांच एजेंसियां मामले की गहराई से पड़ताल कर रही हैं और अब तक कई कर्मचारियों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। इस घटना के बाद लोगों में गहरा आक्रोश है और इसे केवल धन की चोरी नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था पर चोट माना जा रहा है।

    इसी मुद्दे पर भोपाल में लोगों की राय भी सामने आई। अधिकांश लोगों ने कहा कि मंदिर में श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और विश्वास के साथ दान करते हैं। ऐसे में यदि कोई उस चढ़ावे में हेराफेरी करता है तो वह केवल कानून नहीं बल्कि धार्मिक विश्वास का भी अपराधी है। लोगों का कहना है कि ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जानी चाहिए और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।

    कई लोगों ने मांग की कि यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो दोषियों को आजीवन कारावास जैसी सख्त सजा दी जाए ताकि भविष्य में कोई भी धार्मिक संस्थानों की पवित्रता से खिलवाड़ करने का साहस न कर सके। कुछ लोगों ने कहा कि ऐसे कृत्य करने वालों को समाज में कोई स्थान नहीं मिलना चाहिए क्योंकि उन्होंने लाखों श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है।

    कुछ नागरिकों ने भरोसा जताया कि मामले की निष्पक्ष जांच होगी और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। उनका कहना था कि धार्मिक स्थलों की पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे। वहीं कुछ लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि किसी स्तर पर मिलीभगत हुई है तो उससे जुड़े सभी लोगों की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

    इस बीच जांच एजेंसियां पूरे मामले के दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की पड़ताल कर रही हैं। पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी और यदि किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    राम मंदिर देश की करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में चढ़ावे से जुड़ी किसी भी तरह की कथित अनियमितता को लोग बेहद गंभीरता से देख रहे हैं। आम लोगों का मानना है कि मंदिरों में आने वाले दान की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और जवाबदेह होनी चाहिए ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास हमेशा कायम रहे।

  • रतन टाटा की भतीजी माया टाटा को मिली बड़ी जिम्मेदारी, वेस्टसाइड के ग्लोबल विस्तार की कमान संभालेंगी

    रतन टाटा की भतीजी माया टाटा को मिली बड़ी जिम्मेदारी, वेस्टसाइड के ग्लोबल विस्तार की कमान संभालेंगी


    नई दिल्ली । टाटा समूह में नई पीढ़ी की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है। इसी क्रम में रतन टाटा की भतीजी और टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा की बेटी माया टाटा को एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार माया अब ट्रेंट लिमिटेड के प्रमुख रिटेल ब्रांड वेस्टसाइड के ओवरसीज ई कॉमर्स और अंतरराष्ट्रीय मार्केटिंग विस्तार का नेतृत्व करेंगी। यह जिम्मेदारी ऐसे समय दी जा रही है जब कंपनी घरेलू बाजार के साथ विदेशों में भी अपनी मजबूत मौजूदगी बनाने की रणनीति पर तेजी से काम कर रही है।

    माया टाटा इससे पहले टाटा डिजिटल में अहम भूमिका निभा चुकी हैं और डिजिटल रिटेल तथा ऑनलाइन बिजनेस से जुड़ा अनुभव रखती हैं। माना जा रहा है कि अब उनका मुख्य फोकस वेस्टसाइड के ऑनलाइन कारोबार को वैश्विक स्तर पर विस्तार देने और नए बाजारों में ब्रांड की पहुंच बढ़ाने पर रहेगा। कंपनी अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म को मजबूत करने के साथ ऑफलाइन स्टोर नेटवर्क का भी तेजी से विस्तार कर रही है।

    ट्रेंट लिमिटेड के लिए वेस्टसाइड सबसे अहम ब्रांड माना जाता है और कंपनी की आय का बड़ा हिस्सा इसी से आता है। हाल के वर्षों में ट्रेंट ने अपने विस्तार की रफ्तार तेज की है। कंपनी ने हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात में नया स्टोर शुरू किया है और हर साल करीब 50 नए वेस्टसाइड स्टोर खोलने का लक्ष्य रखा है। वित्त वर्ष 2026 में कंपनी ने 53 नए स्टोर शुरू किए जबकि उसका कुल रिटेल नेटवर्क बढ़कर 321 शहरों में 1286 स्टोर तक पहुंच गया। बीते वित्त वर्ष में कंपनी का कुल राजस्व लगभग 19700 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।

    माया टाटा ने अपनी पढ़ाई यूनाइटेड किंगडम से की है जहां उन्होंने बिजनेस और फाइनेंस की शिक्षा हासिल की। करियर की शुरुआत उन्होंने टाटा कैपिटल के टाटा अपॉर्च्युनिटीज फंड से की और बाद में टाटा डिजिटल का हिस्सा बनीं। वहां उन्होंने डिजिटल रिटेल और उपभोक्ता कारोबार से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स पर काम किया।

    माया टाटा लंबे समय तक सार्वजनिक जीवन और मीडिया की सुर्खियों से दूर रही हैं। पहली बार वह उस समय चर्चा में आईं जब अपने पिता नोएल टाटा के साथ जमशेदपुर में टाटा समूह के स्थापना दिवस समारोह में दिखाई दीं। इसके बाद से समूह में उनकी भविष्य की भूमिका को लेकर लगातार अटकलें लगाई जाती रही हैं।

    माया टाटा का संबंध केवल टाटा परिवार ही नहीं बल्कि मिस्त्री परिवार से भी है। उनकी मां आलू मिस्त्री उद्योगपति पालोनजी मिस्त्री की बेटी हैं। इस तरह माया दो प्रमुख कारोबारी परिवारों की विरासत से जुड़ी हुई हैं। वहीं उनकी दादी सिमोन टाटा ने लैक्मे जैसे प्रतिष्ठित ब्रांड को नई पहचान दिलाने के साथ ट्रेंट के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि माया टाटा की नई जिम्मेदारी केवल एक प्रबंधन बदलाव नहीं बल्कि टाटा समूह की अगली पीढ़ी को वैश्विक नेतृत्व देने की रणनीति का अहम हिस्सा है। आने वाले वर्षों में वेस्टसाइड के अंतरराष्ट्रीय विस्तार और डिजिटल कारोबार को नई दिशा देने में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

  • श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज से होगी जसप्रीत बुमराह की वापसी, लाल गेंद से अभ्यास करते हुए तेज गेंदबाज ने दिए संकेत

    श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज से होगी जसप्रीत बुमराह की वापसी, लाल गेंद से अभ्यास करते हुए तेज गेंदबाज ने दिए संकेत

    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम के सबसे प्रमुख और घातक तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह नौ महीने के लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर सफेद जर्सी में बल्लेबाजों के होश उड़ाने के लिए तैयार हैं। भारत और श्रीलंका के बीच आगामी अगस्त महीने में दो मैचों की टेस्ट सीरीज खेली जानी है, जो आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप 2025-27 साइकल के तहत आयोजित की जाएगी। इस महत्वपूर्ण सीरीज के लिए जसप्रीत बुमराह की टेस्ट टीम में वापसी लगभग तय मानी जा रही है। अपनी सटीक यॉर्कर और तूफानी गति से विपक्षी टीमों की गिल्लियां बिखेरने वाले बुमराह के आने से भारतीय गेंदबाजी आक्रमण की ताकत दोगुनी होना तय है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अब तक 504 विकेट चटका चुके इस मैच विनर गेंदबाज की मौजूदगी दुनिया के किसी भी मैदान पर भारतीय टीम का पलड़ा भारी कर देती है।

    मध्य प्रदेश । जसप्रीत बुमराह ने नवंबर 2025 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ गुवाहाटी में अपना आखिरी टेस्ट मैच खेला था, जिसके बाद से उन्होंने खेल के इस सबसे लंबे प्रारूप में हिस्सा नहीं लिया है। हाल ही में समाप्त हुए टी20 वर्ल्ड कप 2026 के बाद से भी वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से दूर थे। बुमराह अब सीधे 14 जुलाई से इंग्लैंड के खिलाफ शुरू होने वाली तीन मैचों की वनडे सीरीज के जरिए मैदान पर वापसी करेंगे और इसके ठीक बाद अगस्त में श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में अपनी धार दिखाएंगे। हाल ही में इस दिग्गज तेज गेंदबाज ने सोशल मीडिया पर लाल गेंद से अभ्यास करते हुए अपनी तस्वीरें साझा की हैं, जिससे यह साफ हो गया है कि उन्होंने आगामी टेस्ट असाइनमेंट के लिए अपनी तैयारियां युद्धस्तर पर शुरू कर दी हैं। वर्कलोड मैनेजमेंट के तहत एशियन गेम्स के बाद बुमराह को टी20 अंतरराष्ट्रीय प्रारूप से आराम दिया जा सकता है, ताकि वह आगामी वनडे विश्व कप 2027 तक पूरी तरह टेस्ट और वनडे प्रारूप पर अपना ध्यान केंद्रित रख सकें।

    आगामी दौरा वर्ष 2017 के बाद श्रीलंका की धरती पर भारत की पहली टेस्ट सीरीज होगी। दोनों देशों के बीच पहला टेस्ट मैच 15 से 19 अगस्त तक गॉल इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेला जाएगा, जबकि दूसरा टेस्ट मुकाबला 23 से 27 अगस्त के बीच कोलंबो के सिंहलीज स्पोर्ट्स क्लब में आयोजित होगा। वर्तमान वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप चक्र की अंक तालिका में शुभमन गिल की कप्तानी वाली भारतीय टीम नौ मैचों के बाद 48.15 के अंक प्रतिशत (पीसीटी) के साथ पांचवें स्थान पर मौजूद है, जबकि श्रीलंकाई टीम 44.44 पीसीटी के साथ छठे पायदान पर है। ऐसे में फाइनल की रेस में शीर्ष दो स्थानों पर जगह बनाने के लिहाज से दोनों टीमों के लिए यह सीरीज बेहद निर्णायक साबित होने वाली है।

    यदि 32 वर्षीय जसप्रीत बुमराह के टेस्ट करियर के आंकड़ों पर नजर डालें, तो उन्होंने अब तक खेले 52 टेस्ट मैचों में शानदार गेंदबाजी करते हुए 234 विकेट अपने नाम किए हैं। इस दौरान उन्होंने 16 बार एक पारी में पांच या उससे अधिक विकेट लेने का कारनामा किया है, जिसमें 86 रन देकर 9 विकेट उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा है। इसके अलावा उन्होंने 89 वनडे मैचों में 149 विकेट और 95 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में 121 विकेट चटकाए हैं। भारतीय समयानुसार सुबह 10 बजे से शुरू होने वाले इन टेस्ट मैचों में बुमराह की वापसी न केवल भारतीय टीम के हौसलों को बढ़ाएगी, बल्कि श्रीलंकाई बल्लेबाजों के लिए भी एक बड़ी चुनौती पेश करेगी।

  • बदरीनाथ मंदिर चढ़ावा विवाद पर तेज हुई जांच, कांग्रेस का सत्याग्रह ऐलान, CCTV फुटेज पर टिकी नजर

    बदरीनाथ मंदिर चढ़ावा विवाद पर तेज हुई जांच, कांग्रेस का सत्याग्रह ऐलान, CCTV फुटेज पर टिकी नजर


    नई दिल्ली । अयोध्या राम मंदिर के बाद अब उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम में चढ़ावे की कथित हेराफेरी का मामला चर्चा का विषय बन गया है। मंदिर प्रशासन ने पूरे प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए जांच प्रक्रिया तेज कर दी है। बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति ने चार सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी है जिसे एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। इस मामले में सबसे अहम पहलू यह सामने आया है कि मंदिर परिसर में एक जून से नए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे जबकि कथित घटना दो जुलाई की बताई जा रही है। ऐसे में जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि फुटेज से पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आ सकेगी।

    मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़ ने बताया कि जांच समिति सभी साक्ष्यों वैज्ञानिक तथ्यों और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रही है। उन्होंने चढ़ावा गणना में लगे कर्मचारियों और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी तरह के दस्तावेज सीसीटीवी फुटेज या अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखे गए हैं ताकि जांच निष्पक्ष तरीके से पूरी हो सके।

    मंदिर प्रशासन के अनुसार सीसीटीवी प्रणाली में लगभग 45 दिनों का रिकॉर्ड सुरक्षित रहता है। चूंकि नए कैमरे एक जून से सक्रिय हैं इसलिए दो जुलाई की कथित घटना से जुड़ा पूरा वीडियो रिकॉर्ड उपलब्ध होने की संभावना है। जांच टीम इन्हीं फुटेज और अन्य दस्तावेजों के आधार पर पूरे मामले की कड़ियां जोड़ रही है।

    मामले की जांच के लिए गठित समिति में वित्त नियंत्रक हेम कांडपाल विधि अधिकारी एसएस वर्त्वाल मुख्य प्रशासनिक अधिकारी राजन नैथानी और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी डीएस भुजवाण को शामिल किया गया है। समिति सभी संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ करने के साथ चढ़ावा गणना की पूरी प्रक्रिया की भी समीक्षा कर रही है।

    इस बीच मामला राजनीतिक रंग भी लेने लगा है। उत्तराखंड कांग्रेस ने आठ जुलाई को पूरे प्रदेश में उपवास और सत्याग्रह करने की घोषणा की है। कांग्रेस का आरोप है कि मंदिरों से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। पार्टी ने यह भी मांग की है कि पूरे मामले की जांच स्वतंत्र एजेंसी या न्यायिक स्तर पर कराई जाए ताकि किसी तरह का संदेह न रहे।

    उधर श्री बदरीश पंडा पंचायत ने भी मंदिर की गरिमा से जुड़े इस मामले पर चिंता जताई है। पंचायत का कहना है कि यदि किसी स्तर पर वित्तीय अनियमितता हुई है तो दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि जांच में किसी उच्च अधिकारी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए। तीर्थपुरोहितों और पुजारियों ने भी इस पूरे घटनाक्रम को धाम की प्रतिष्ठा से जुड़ा गंभीर विषय बताया है।

    अब पूरे मामले में सभी की नजर जांच समिति की रिपोर्ट और सीसीटीवी फुटेज पर टिकी हुई है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला केवल प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि धार्मिक संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर भी बड़ा संदेश देगा।

  • जेल के कड़े नियमों और भूख के आगे टूटी हिम्मत, 'लॉकअप' के सेट पर फूट-फूटकर रोईं गोविंदा की पत्नी

    जेल के कड़े नियमों और भूख के आगे टूटी हिम्मत, 'लॉकअप' के सेट पर फूट-फूटकर रोईं गोविंदा की पत्नी

    नई दिल्ली । ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स के बहुचर्चित रियलिटी शो ‘लॉकअप’ के हालिया एपिसोड में उस समय जबरदस्त हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला, जब जेल के कड़े नियमों और परिस्थितियों के आगे मशहूर अभिनेता गोविंदा की पत्नी सुनीता आहूजा की हिम्मत पूरी तरह जवाब दे गई। शो के दौरान जेल में बंद तमाम प्रतियोगियों ने रणनीतिक चूक और बजट की कमी के चलते खाना न मिलने पर कड़ा विरोध जताया। पूरे घर में फैले इस तनावपूर्ण माहौल के बीच सुनीता आहूजा मानसिक और शारीरिक रूप से बेहद परेशान नजर आईं। उन्होंने न केवल शो के प्रति अपनी तीव्र नाराजगी जाहिर की, बल्कि बीच में ही खेल छोड़कर अपने घर वापस लौटने की इच्छा भी जता दी। इस दौरान वह अपने आंसुओं पर काबू नहीं रख सकीं और फूट-फूटकर रोने लगीं।

    मध्य प्रदेश । घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब कैदियों के पास पूरे हफ्ते के राशन का प्रबंधन करने के लिए पर्याप्त बजट नहीं बचा। इस वित्तीय संकट के कारण घरवालों ने आपसी सहमति से तय किया कि एकजुटता दिखाने के लिए कोई भी सदस्य खाना नहीं खाएगा। सुबह सोकर उठने के बाद जब अन्य प्रतियोगी बाहर बैठे थे, तब सुनीता ने भोजन की अनुपलब्धता पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने निराशा में कहा कि किसी भी व्यक्ति को इतना मजबूर नहीं किया जाना चाहिए कि वह अपनी सीमाओं को लांघने पर विवश हो जाए। इसी बातचीत के दौरान वह बेहद भावुक हो गईं और उन्होंने अपने पति व अभिनेता गोविंदा (चीची) को याद करते हुए कहा कि उनके पति ने उन्हें इस शो में आने से साफ मना किया था। सुनीता ने अफसोस जताते हुए स्वीकार किया कि जब भी उन्होंने अपने पति की बात की अनदेखी की है, उन्हें हमेशा नुकसान और पछतावे का सामना करना पड़ा है।

    इसके बाद जब शो के नियमों के मुताबिक भोजन हासिल करने के लिए एक क्विज टास्क आयोजित किया गया, तो सुनीता ने किसी भी सवाल का जवाब देने से पूरी तरह इनकार कर दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह अब इस प्रतियोगिता का हिस्सा नहीं बने रहना चाहतीं और जल्द से जल्द बाहर जाना चाहती हैं। स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों और दवाओं के सेवन के बावजूद उन्होंने सुबह केवल चाय पी और नाश्ता करने से मना कर दिया। सह-प्रतियोगियों द्वारा दवाइयां लेने के आग्रह पर उन्होंने कहा कि यदि वह बीमार पड़ेंगी, तभी मेकर्स उन्हें वापस घर भेजेंगे।

    इस संवेदनशील स्थिति को संभालने और साप्ताहिक टास्क को पूरा कराने के लिए जब अभिनेता रितेश सेट पर पहुंचे, तो उन्होंने बजट का सही इस्तेमाल न करने को लेकर सभी प्रतियोगियों को जमकर फटकार लगाई। सुनीता ने रितेश के सामने अपनी बात रखते हुए शिकायत की कि वह मधुमेह (डायबिटीज) से पीड़ित हैं और रात का भोजन न मिलने की वजह से उन्हें घबराहट और मनोवैज्ञानिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है। जब रितेश ने उनसे पूछा कि बजट उपलब्ध होने के बाद भी उन्होंने अपने लिए भोजन क्यों नहीं मंगाया, तो सुनीता ने एक सीनियर सदस्य होने के नाते अकेले खाना खाने को अनुचित बताया। सुनीता के इस गंभीर भावनात्मक ब्रेकडाउन को देखते हुए रितेश ने खुद आगे बढ़कर उन्हें गले लगाया और सांत्वना देते हुए इस विषय पर अलग से व्यक्तिगत बातचीत करने का आश्वासन दिया।

  • राम मंदिर दान विवाद पर उद्धव ठाकरे का हिंदुत्व दांव, 'राम रक्षा आंदोलन' से BJP पर साधा निशाना

    राम मंदिर दान विवाद पर उद्धव ठाकरे का हिंदुत्व दांव, 'राम रक्षा आंदोलन' से BJP पर साधा निशाना


    नई दिल्ली । अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में नया मोड़ आ गया है। शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने इस मुद्दे पर राम रक्षा आंदोलन की शुरुआत करते हुए भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि हिंदुत्व के नाम पर सत्ता हासिल करने वालों ने अब मंदिरों और आस्था का भी राजनीतिक इस्तेमाल शुरू कर दिया है। साथ ही उन्होंने कहा कि हिंदुओं को जागरूक करने की जरूरत है क्योंकि उनका वशीकरण किया गया है।

    मुंबई के दादर स्थित हनुमान मंदिर में उद्धव ठाकरे ने हनुमान चालीसा हनुमान स्तोत्र और राम रक्षा स्तोत्र का पाठ किया। इसके बाद आयोजित सभा में उन्होंने राम मंदिर चढ़ावा मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि यदि किसी मंदिर में श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा धन सुरक्षित नहीं है तो इसकी जांच पूरी पारदर्शिता से होनी चाहिए। उनका कहना था कि जिस पर आरोप लगे हों उसी से जांच नहीं कराई जा सकती क्योंकि इससे निष्पक्ष परिणाम की उम्मीद नहीं की जा सकती।

    उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर हिंदुत्व के राजनीतिक उपयोग का आरोप लगाते हुए कहा कि भगवान राम किसी एक दल के नहीं बल्कि पूरे देश के हैं। उन्होंने कहा कि यदि हिंदुत्व के नाम पर मंदिरों और धार्मिक आस्था का दुरुपयोग किया जाएगा तो समाज इसे स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से राम रक्षा आंदोलन को गांव गांव तक ले जाने का आह्वान करते हुए कहा कि यह केवल राजनीतिक नहीं बल्कि आस्था और जवाबदेही का विषय है।

    उधर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उद्धव ठाकरे के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि उन्हें खुशी है कि आखिरकार उद्धव ठाकरे को भगवान राम की याद आ गई। उन्होंने कहा कि यदि वे भगवान राम के बताए मार्ग पर चलेंगे तो यह उनके लिए भी अच्छा होगा। फडणवीस ने यह भी कहा कि उन्हें उम्मीद है कि उद्धव केवल एक दिन नहीं बल्कि नियमित रूप से राम रक्षा का पाठ करेंगे।

    राम मंदिर चढ़ावा विवाद का मामला जून में सामने आया था। राज्य सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल की शुरुआती जांच के बाद एफआईआर दर्ज की गई और चढ़ावे की सुरक्षा तथा गिनती से जुड़े आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया। मामले की जांच अभी जारी है और प्रशासन का कहना है कि सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच की जाएगी।

    उद्धव ठाकरे ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि मंदिरों से जुड़े अन्य मामलों में भी पारदर्शिता जरूरी है। उन्होंने दावा किया कि यदि धार्मिक संस्थानों की गरिमा बनाए रखनी है तो किसी भी तरह की अनियमितता पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि शिवसेना ने हमेशा हिंदुत्व को सांस्कृतिक और सामाजिक मूल्यों से जोड़ा है और आगे भी उसी विचार के साथ काम करती रहेगी।

    राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बीच शुरू हुआ राम रक्षा आंदोलन अब महाराष्ट्र की राजनीति में नया मुद्दा बनता दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है जबकि जांच एजेंसियों की रिपोर्ट पर भी सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

  • घर की दक्षिण-पूर्व दिशा और किचन का है गहरा संबंध, निर्माण में हुई एक छोटी सी चूक बन सकती है भारी आर्थिक नुकसान की वजह

    घर की दक्षिण-पूर्व दिशा और किचन का है गहरा संबंध, निर्माण में हुई एक छोटी सी चूक बन सकती है भारी आर्थिक नुकसान की वजह

    नई दिल्ली । गृह निर्माण और आंतरिक साज-सज्जा में वास्तु शास्त्र के नियमों का अत्यधिक महत्व माना जाता है। वास्तु विज्ञान के अनुसार, घर का प्रत्येक कोना और दिशा एक विशेष ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करती है, जिसका सीधा प्रभाव वहां रहने वाले सदस्यों के स्वास्थ्य, मानसिक शांति और आर्थिक स्थिति पर पड़ता है। इसी क्रम में घर की रसोई यानी किचन को सबसे महत्वपूर्ण स्थान माना गया है, क्योंकि यहीं से पूरे परिवार का पालन-पोषण और स्वास्थ्य नियंत्रित होता है। वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, रसोई घर के निर्माण के लिए सबसे उपयुक्त और दोषरहित स्थान आग्नेय कोण, अर्थात दक्षिण-पूर्व दिशा को माना गया है। इस दिशा को अग्नि देव का स्थान कहा जाता है। यदि कोई व्यक्ति अनजाने में इस दिशा के नियमों की अनदेखी करता है या किसी गलत दिशा में रसोई का निर्माण करवा लेता है, तो उसे गंभीर आर्थिक संकटों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

    मध्य प्रदेश । वास्तु सिद्धांतों के मुताबिक, आग्नेय कोण में रसोई घर होने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है, जिससे घर में कभी भी अन्न और धन के भंडार खाली नहीं होते हैं। भोजन बनाने की प्रक्रिया में अग्नि का मुख्य स्थान होता है और चूंकि दक्षिण-पूर्व दिशा का स्वामी अग्नि तत्व है, इसलिए इस कोने में गैस चूल्हा या स्टोव रखना सबसे सटीक माना जाता है। इस दिशा में बनाई गई रसोई न केवल भोजन को सात्विक और स्वास्थ्यवर्धक बनाती है, बल्कि परिवार के सदस्यों के बीच आपसी सामंजस्य और प्रेम को भी बढ़ाती है। इसके विपरीत, यदि रसोई घर को ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) या किसी अन्य गलत दिशा में निर्मित कर दिया जाए, तो यह एक गंभीर वास्तु दोष बन जाता है। इस प्रकार की गलती सीधे तौर पर घर की संचित पूंजी को नष्ट करती है और व्यापार या नौकरी में लगातार नुकसान की स्थितियां पैदा होने लगती हैं।

    गलत दिशा में बनी रसोई के कारण घर के मुख्य कमाऊ सदस्य को मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है और परिवार में बिना वजह के क्लेश और बीमारियां बढ़ने लगती हैं। विशेषकर घर की महिलाओं के स्वास्थ्य पर इसका बेहद प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। वास्तु शास्त्र में यह स्पष्ट किया गया है कि अग्नि और जल का आपस में बैर होता है, इसलिए आग्नेय कोण की रसोई में भी पानी का स्थान (जैसे सिंक या वॉटर प्यूरीफायर) और अग्नि का स्थान (जैसे गैस चूल्हा) एक दूसरे के बिल्कुल समीप नहीं होने चाहिए। इन दोनों तत्वों के बीच उचित दूरी रखना अनिवार्य है, अन्यथा घर की बरकत रुक जाती है और अनावश्यक खर्चों में तेजी से बढ़ोत्तरी होने लगती हैं।

    आधुनिक जीवनशैली और फ्लैट संस्कृति के दौर में लोग अक्सर जगह की कमी के कारण वास्तु नियमों की अनदेखी कर देते हैं, जो बाद में उनके जीवन की सबसे बड़ी भूल साबित होती है। यदि किसी निर्मित मकान में रसोई घर को आग्नेय कोण में स्थानांतरित करना संभव न हो, तो वास्तु विशेषज्ञों की सलाह लेकर उचित उपाय या सुधार अवश्य कर लेने चाहिए। घर में सुख, शांति, समृद्धि और धन-धान्य की निरंतरता बनाए रखने के लिए पंचतत्वों का संतुलन बेहद जरूरी है, जिसमें आग्नेय कोण में रसोई का होना प्राथमिक और सबसे प्रभावशाली कदम माना जाता है।

  • रवि बिश्नोई का फ्लॉप शो बना हार की बड़ी वजह, स्पिन अटैक और टीम चयन पर उठे गंभीर सवाल

    रवि बिश्नोई का फ्लॉप शो बना हार की बड़ी वजह, स्पिन अटैक और टीम चयन पर उठे गंभीर सवाल


    नई दिल्ली । इंग्लैंड के खिलाफ मैनचेस्टर में खेले गए दूसरे टी20 मुकाबले में टीम इंडिया को चार विकेट से हार का सामना करना पड़ा। इस हार के कई कारण रहे लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा युवा लेग स्पिनर रवि बिश्नोई के प्रदर्शन की हो रही है। उन्होंने अपने चार ओवर के स्पेल में बिना कोई विकेट लिए 60 रन खर्च किए और तीन नो बॉल फेंक दीं। टी20 जैसे छोटे प्रारूप में किसी स्पिनर का इतना महंगा साबित होना और लगातार नो बॉल करना भारत की गेंदबाजी रणनीति पर बड़े सवाल खड़े करता है।

    भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 190 रन का चुनौतीपूर्ण स्कोर बनाया था। लक्ष्य का पीछा करने उतरी इंग्लैंड की शुरुआत बेहद खराब रही और शुरुआती ओवरों में दो विकेट जल्दी गिर गए। ऐसे समय भारतीय टीम के पास मैच पर पकड़ मजबूत करने का सुनहरा मौका था लेकिन बीच के ओवरों में रवि बिश्नोई की गेंदबाजी ने मेजबान टीम को मुकाबले में वापसी का रास्ता दे दिया।

    सबसे निर्णायक मोड़ उनके 17वें ओवर में आया। इस ओवर में उन्होंने तीन नो बॉल फेंकी जिससे इंग्लैंड को लगातार फ्री हिट मिली। बल्लेबाज जैकब बेथेल ने इन अतिरिक्त मौकों का पूरा फायदा उठाया और तेजी से रन बटोरकर मैच का रुख पूरी तरह बदल दिया। टी20 क्रिकेट में अनुशासन बेहद अहम माना जाता है और किसी स्पिनर से ऐसी गलती की उम्मीद नहीं की जाती।

    बिश्नोई की गेंदबाजी शैली पर भी सवाल उठ रहे हैं। उन्हें लेग स्पिनर माना जाता है लेकिन उनकी गेंदबाजी मुख्य रूप से गुगली पर आधारित रहती है। जब बल्लेबाज उनकी गुगली को पढ़ लेते हैं तब उनके पास न तो ज्यादा टर्न का विकल्प बचता है और न ही बल्लेबाजों को चकमा देने वाली विविधता दिखाई देती है। मैनचेस्टर में इंग्लैंड के बल्लेबाजों ने उनकी रणनीति को आसानी से समझ लिया और खुलकर रन बनाए।

    हाल के समय में आईपीएल में भी उनका प्रदर्शन लगातार चर्चा का विषय रहा है। लखनऊ सुपर जायंट्स से अलग होने के बाद वह राजस्थान रॉयल्स का हिस्सा बने लेकिन वहां भी उनकी भूमिका पूरी तरह स्थिर नहीं रही। ऐसे में भारतीय टीम में लगातार मौके मिलने को लेकर क्रिकेट विशेषज्ञ और प्रशंसक सवाल उठा रहे हैं। उनका मानना है कि टीम प्रबंधन को प्रदर्शन के आधार पर स्पष्ट चयन नीति अपनानी चाहिए।

    हालांकि केवल एक खराब मैच के आधार पर किसी खिलाड़ी के करियर पर सवाल उठाना उचित नहीं होगा। रवि बिश्नोई युवा गेंदबाज हैं और उन्होंने पहले भी कई मैचों में टीम को जीत दिलाई है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार प्रभावी बने रहने के लिए उन्हें अपनी पारंपरिक लेग ब्रेक पर काम करना होगा और गेंदबाजी में अधिक विविधता लानी होगी। साथ ही नो बॉल जैसी बुनियादी गलतियों से बचना भी बेहद जरूरी होगा।

    भारत और इंग्लैंड के बीच टी20 सीरीज अभी बाकी है और टीम प्रबंधन के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगले मुकाबले में स्पिन विभाग में बदलाव किया जाए या फिर बिश्नोई पर भरोसा बरकरार रखा जाए। आने वाले मैचों में उनका प्रदर्शन ही तय करेगा कि वह आलोचनाओं का जवाब मैदान पर किस तरह देते हैं।

  • खिताबी मुकाबले में इंग्लैंड पस्त, लॉर्ड्स में ऑस्ट्रेलिया ने सातवीं बार विमेंस टी20 वर्ल्ड कप जीत रचा नया इतिहास

    खिताबी मुकाबले में इंग्लैंड पस्त, लॉर्ड्स में ऑस्ट्रेलिया ने सातवीं बार विमेंस टी20 वर्ल्ड कप जीत रचा नया इतिहास

    नई दिल्ली । महिला टी20 अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में ऑस्ट्रेलियाई टीम का एकछत्र साम्राज्य लगातार जारी है। लंदन के ऐतिहासिक लॉर्ड्स मैदान पर खेले गए आईसीसी विमेंस टी20 वर्ल्ड कप 2026 के रोमांचक खिताबी मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया ने मेजबान इंग्लैंड को एकतरफा अंदाज में 7 विकेट से शिकस्त दी। इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही ऑस्ट्रेलियाई टीम ने रिकॉर्ड सातवीं बार टी20 विश्व कप की ट्रॉफी पर अपना कब्जा जमाया है। फाइनल मुकाबले में इंग्लैंड की टीम ने टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित 20 ओवरों में 4 विकेट के नुकसान पर 150 रनों का चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा किया था। जवाब में बल्लेबाजी करने उतरी ऑस्ट्रेलियाई टीम ने बेथ मूनी और फोएबे लिचफील्ड के बीच हुई शतकीय साझेदारी की बदौलत इस लक्ष्य को महज 17.1 ओवर में 3 विकेट खोकर बेहद आसानी से हासिल कर लिया।

    मध्य प्रदेश । खिताबी मुकाबले में 151 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी ऑस्ट्रेलिया की शुरुआत बेहद खराब रही थी और टीम ने दूसरे ही ओवर में सलामी बल्लेबाज जॉर्जिया वॉल का विकेट गंवा दिया था। शुरुआती झटके के बाद विकेटकीपर बल्लेबाज बेथ मूनी और फोएबे लिचफील्ड ने मोर्चा संभाला और दूसरे विकेट के लिए 100 रनों की शानदार मैच जिताऊ साझेदारी कर इंग्लिश गेंदबाजों को बैकफुट पर धकेल दिया। लिचफील्ड ने अपनी आक्रामक पारी में 35 गेंदों का सामना करते हुए 6 चौके और 2 छक्कों की मदद से 48 रन बनाए। वहीं दूसरी छोर पर जमीं बेथ मूनी ने कप्तानी पारी खेलते हुए 49 गेंदों पर 64 रनों का बहुमूल्य योगदान दिया, जिसमें 10 शानदार चौके शामिल रहे। मूनी के आउट होने के बाद अनुभवी एलिस पेरी ने नाबाद 13 रन और एश्ले गार्डनर ने नाबाद 3 रन बनाकर टीम को जीत की दहलीज के पार पहुंचाया। इंग्लैंड की ओर से चार्लोट डीन, सोफी एक्लेस्टोन और लॉरेन बेल ने एक-एक विकेट लिया, लेकिन वे अपनी टीम को हार से नहीं बचा सकीं।

    इससे पहले टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी मेजबान इंग्लैंड की टीम शुरुआत में लड़खड़ा गई थी। एमी जोन्स मात्र 6 रन, डैनी वायट-हॉज 8 रन और हीदर नाइट सिर्फ 2 रन बनाकर सस्ते में पवेलियन लौट गईं। इसके बाद कप्तान नेट साइवर-ब्रंट और फ्रेया केम्प ने पारी को संभाला और पांचवें विकेट के लिए 80 रनों की अटूट साझेदारी कर टीम को 150 के सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया। कप्तान नेट साइवर-ब्रंट ने 53 गेंदों पर 5 चौकों की मदद से नाबाद 58 रनों की जुझारू पारी खेली, जबकि फ्रेया केम्प ने 28 गेंदों पर 4 चौके और 1 छक्के की सहायता से नाबाद 44 रन बनाए। ऑस्ट्रेलिया की ओर से धारदार गेंदबाजी करते हुए किम गार्थ, लुसी हैमिल्टन, सोफी मोलिनक्स और एनाबेल सदरलैंड ने एक-एक सफलता हासिल की।

    इस टूर्नामेंट में सोफी मोलिनक्स की कप्तानी में उतरी ऑस्ट्रेलियाई टीम का प्रदर्शन बेहद असाधारण रहा, जहां पूरी प्रतियोगिता के दौरान टीम ने एक भी मैच नहीं गंवाया और अजेय रहते हुए विश्व विजेता का खिताब चूमा। इससे पहले ऑस्ट्रेलिया की महिला टीम ने वर्ष 2010, 2012, 2014, 2018, 2020 और 2023 में भी विश्व कप अपने नाम किया था। क्रिकेट के इस सबसे छोटे प्रारूप के इतिहास में इंग्लैंड, वेस्टइंडीज और न्यूजीलैंड की टीमें केवल एक-एक बार ही यह प्रतिष्ठित खिताब जीतने में सफल रही हैं, जो महिला क्रिकेट जगत में ऑस्ट्रेलियाई टीम के बेजोड़ दबदबे को स्पष्ट रूप से बयां करता है।

  • अभिनेता राकेश बेदी के एक अनूठे प्रयोग ने बढ़ाया फिल्म का बजट, 'धुरंधर' के इस आइकॉनिक सीन के लिए मेकर्स को कराना पड़ा था भारी वीएफएक्स

    अभिनेता राकेश बेदी के एक अनूठे प्रयोग ने बढ़ाया फिल्म का बजट, 'धुरंधर' के इस आइकॉनिक सीन के लिए मेकर्स को कराना पड़ा था भारी वीएफएक्स

    नई दिल्ली । बॉलीवुड की ब्लॉकबस्टर फिल्मों में शामिल ‘धुरंधर’ और ‘धुरंधर-2’ की सफलता की कहानियां आज भी सिनेमाई गलियारों में चर्चा का विषय बनी रहती हैं। निर्देशक आदित्य धर के कुशल निर्देशन में बनी इन दोनों फिल्मों ने न केवल बॉक्स ऑफिस पर नए रिकॉर्ड स्थापित किए, बल्कि कलाकारों के बेमिसाल अभिनय ने दर्शकों का दिल जीत लिया। इस फिल्म फ्रैंचाइजी में रणवीर सिंह, संजय दत्त और अर्जुन रामपाल जैसे दिग्गज सितारों की मौजूदगी के बावजूद, अभिनेता राकेश बेदी का किरदार ‘जमील जमाली’ सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरने में कामयाब रहा। फिल्म के पहले हिस्से में उनकी भूमिका भले ही सीमित थी, लेकिन दूसरे पार्ट में उनके अभिनय ने दर्शकों को खासा प्रभावित किया। हाल ही में इस फिल्म के एक बेहद लोकप्रिय और मजेदार सीन से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा सामने आया है, जिससे यह पता चलता है कि कैसे राकेश बेदी की एक तात्कालिक सूझबूझ यानी इंप्रोवाइजेशन के कारण मेकर्स को फिल्म का बजट बढ़ाना पड़ गया था।

    फिल्म ‘धुरंधर’ श्रृंखला में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के दृश्य के दौरान जमील जमाली का किरदार निभा रहे राकेश बेदी एक बेहद अनूठा संवाद बोलते नजर आते हैं। एक इंटरव्यू के दौरान इस बात का खुलासा खुद राकेश बेदी ने किया कि फिल्म की मूल पटकथा में वह संवाद शामिल ही नहीं था। शूटिंग के दौरान उन्होंने अपनी तरफ से ‘योर बटक्स आर वेरी व्हाइट’ वाली लाइन जोड़ दी थी। यह संवाद दरअसल अंग्रेजी के शब्द ‘बटक्स’ और बत्तख के बीच के उच्चारण के साम्य पर आधारित एक फनी तंज था। अभिनेता का यह प्रयोग निर्देशक आदित्य धर को इतना ज्यादा पसंद आया कि उन्होंने इस लाइन को फिल्म से हटाने के बजाय इसे हर हाल में स्क्रीन पर बनाए रखने का फैसला किया। हालांकि, इस एक लाइन को दृश्य के अनुकूल और तर्कसंगत बनाने के लिए पोस्ट-प्रोडक्शन के दौरान भारी तकनीकी बदलाव करने पड़े।

    अभिनेता राकेश बेदी ने इस संबंध में एक कार्यक्रम के दौरान विस्तार से बताया कि जब उन्होंने सेट पर इस संवाद की डिलीवरी की थी, तब वहां पृष्ठभूमि में न तो कोई जलस्रोत था और न ही कोई बत्तखें मौजूद थीं। यह पूरी तरह से एक खाली फ्रेम था। निर्देशक आदित्य धर ने इस बेहतरीन कॉमिक टाइमिंग को स्क्रीन पर जीवंत करने के लिए विशेष रूप से वीएफएक्स (विजुअल इफेक्ट्स) टीम की मदद ली। मेकर्स ने महंगे ग्राफिक्स और वीएफएक्स का उपयोग करते हुए दृश्य की पृष्ठभूमि में एक कृत्रिम तालाब और उसमें तैरती हुई बत्तखें तैयार करवाईं। इस तकनीकी काम के चलते फिल्म के बजट में अप्रत्याशित बढ़ोत्तरी हुई, क्योंकि यह उस समय के सबसे जटिल और महंगे वीएफएक्स कार्यों में से एक बन गया था। हालांकि, मेकर्स का यह जुआ पूरी तरह सफल रहा और जब यह सीन सिनेमाघरों में प्रदर्शित हुआ, तो दर्शकों की हंसी रोक पाना नामुमकिन हो गया।

    इस फिल्म की अप्रत्याशित सफलता और इस खास दृश्य ने राकेश बेदी के करियर ग्राफ को एक नई ऊंचाई प्रदान की। फिल्म की रिलीज के बाद मनोरंजन उद्योग में उनकी मांग तेजी से बढ़ी, जिसके बाद उन्हें कई बड़े विज्ञापनों और लोकप्रिय पॉडकास्ट में आमंत्रित किया जाने लगा। अगर फिल्म के व्यावसायिक प्रदर्शन की बात करें, तो रणवीर सिंह स्टारर ‘धुरंधर-2’ का निर्माण लगभग 250 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट के साथ किया गया था। इस बजट में वीएफएक्स के ऐसे ही कई अन्य बारीक और महंगे काम भी शामिल थे। फिल्म ने अपनी रिलीज के बाद बॉक्स ऑफिस पर कमाई के सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त करते हुए वैश्विक स्तर पर 1850 करोड़ रुपये से अधिक का कलेक्शन किया था। कलात्मक स्वतंत्रता और कलाकारों के हुनर को तवज्जो देने की निर्देशक की इसी सोच ने इस फिल्म को इतिहास के पन्नों में दर्ज करा दिया।