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  • भारत में आतंकी मिशन छोड़ मेकओवर में उलझे लश्कर के आतंकी, स्लीपर सेल प्लान बीच में रह गया अधूरा!

    भारत में आतंकी मिशन छोड़ मेकओवर में उलझे लश्कर के आतंकी, स्लीपर सेल प्लान बीच में रह गया अधूरा!

    नई दिल्ली । भारत में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की साजिश के बीच एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े दो आतंकियों की प्राथमिकता उनका मिशन नहीं बल्कि उनका लुक और व्यक्तिगत दिखावट बन गई। इन दोनों आतंकियों की योजना भारत में घुसपैठ कर स्लीपर सेल नेटवर्क तैयार करने की थी, लेकिन जांच से जुड़े तथ्यों के अनुसार उनका ध्यान अपने उद्देश्य से हटकर निजी इच्छाओं की ओर चला गया, जिससे पूरा ऑपरेशन प्रभावित हो गया।

    पहला आतंकी उस्मान जट्ट पाकिस्तान से भारत में घुसा था और उसका मकसद देश के भीतर एक संगठित नेटवर्क तैयार करना था, जो भविष्य में बड़ी आतंकी गतिविधियों को अंजाम दे सके। लेकिन भारत में आने के बाद उसने अपने मिशन को प्राथमिकता देने के बजाय अपने रूप-रंग में बदलाव पर ध्यान देना शुरू कर दिया। बताया जाता है कि वह श्रीनगर में स्थित एक निजी क्लिनिक पहुंचा और वहां हेयर ट्रांसप्लांट जैसी प्रक्रिया करवाई। इस प्रक्रिया में समय और ध्यान लगाने के कारण उसका मूल उद्देश्य पीछे छूटता चला गया और उसकी गतिविधियां संदेह के घेरे में आ गईं।

    इसी तरह एक अन्य आतंकी शब्बीर अहमद लोन भी इसी नेटवर्क से जुड़ा हुआ बताया गया है, जिसका काम भारत और आसपास के क्षेत्रों में एक स्लीपर सेल तैयार करना था। लेकिन जांच में सामने आया कि वह भी अपने काम से भटक गया और अपने स्वास्थ्य तथा व्यक्तिगत लुक से जुड़ी प्रक्रियाओं में उलझ गया। वह इलाज और डेंटल ट्रीटमेंट के लिए कई स्थानों पर गया, जिनमें एक निजी चिकित्सा केंद्र भी शामिल बताया जाता है। इस दौरान उसका ध्यान लगातार अपने मिशन से हटता गया और उसकी गतिविधियां सामान्य संदिग्ध व्यवहार से अलग दिखने लगीं।

    सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, यह मामला केवल व्यक्तिगत लापरवाही का नहीं बल्कि एक बड़ी विफल योजना का संकेत देता है, जिसमें आतंकी संगठन अपने सदस्यों को अनुशासित रखने में सफल नहीं हो पाया। आधुनिक समय में जहां सुरक्षा एजेंसियां लगातार निगरानी बढ़ा रही हैं, वहीं ऐसे मिशन में शामिल लोगों का भटक जाना पूरी साजिश को कमजोर कर देता है।

    जांच से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि यह घटनाक्रम इस बात का भी संकेत देता है कि आतंकियों की योजनाएं केवल हथियारों और नेटवर्क पर ही निर्भर नहीं होतीं, बल्कि उनकी मानसिक स्थिति और व्यक्तिगत प्राथमिकताएं भी उनके मिशन की सफलता या विफलता को प्रभावित कर सकती हैं। इस मामले ने सुरक्षा तंत्र को भी सतर्क कर दिया है कि घुसपैठ के बाद संदिग्ध गतिविधियों पर लगातार नजर रखना कितना आवश्यक है।

    फिलहाल दोनों मामलों की गहन जांच जारी है और एजेंसियां यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि आखिर कैसे ये आतंकी अपने मूल उद्देश्य से इतनी आसानी से भटक गए। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था और आतंकी नेटवर्क की अंदरूनी कमजोरियों को उजागर कर दिया है।

  • होटल में जानलेवा हमला: ग्वालियर में बदमाश ने की फायरिंग, आरोपी पुलिस की गिरफ्त में

    होटल में जानलेवा हमला: ग्वालियर में बदमाश ने की फायरिंग, आरोपी पुलिस की गिरफ्त में


    नई दिल्ली ।  ग्वालियर के हजीरा चौराहा स्थित होटल करिश्मा में उस समय हड़कंप मच गया जब सोमवार-मंगलवार की दरमियानी रात करीब 1:30 बजे कुछ बदमाशों ने फायरिंग कर दी। बताया जा रहा है कि पूरी घटना सिर्फ इसलिए हुई क्योंकि आरोपियों को देर रात खाना नहीं मिला था। होटल संचालक रवि सिंह उर्फ सोनू जब शटर बंद कर रहे थे, तभी दो बाइक पर चार युवक वहां पहुंचे और खाना मांगने लगे। होटल बंद होने और तंदूर ठंडा होने की बात कहने पर विवाद शुरू हो गया।

    गाली-गलौज से लेकर ताबड़तोड़ फायरिंग तक
    विवाद बढ़ते ही मामला हिंसक हो गया। आरोपियों ने पहले गाली-गलौज की और फिर दहशत फैलाने के लिए फायरिंग शुरू कर दी। सीसीटीवी फुटेज में साफ दिख रहा है कि आरोपी सूरज गौड़ अपने साथी को उकसाते हुए “मार दे इनको आज” कह रहा है। इसी दौरान करण बाथम ने कट्टा निकालकर होटल संचालक पर गोली चला दी, लेकिन निशाना चूकने से उनकी जान बच गई।

    होटल में तोड़फोड़, मौके से फरार हुए आरोपी
    फायरिंग के बाद आरोपियों ने होटल के शटर और काउंटर में तोड़फोड़ भी की और मौके से फरार हो गए। अचानक हुई इस घटना से इलाके में दहशत फैल गई और स्थानीय लोग मौके पर इकट्ठा हो गए।

    एक आरोपी गिरफ्तार, बाकी की तलाश जारी
    पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी सूरज गौड़ को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, अन्य आरोपियों की पहचान कर ली गई है और उनकी तलाश में पुलिस टीमें दबिश दे रही हैं। एसएसपी ग्वालियर के अनुसार, यह मामला गंभीर आपराधिक प्रवृत्ति का है और बाकी फरार आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

    CCTV बना सबसे बड़ा सबूत
    घटना की पूरी वारदात होटल में लगे सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गई है, जिससे पुलिस को आरोपियों की पहचान और कार्रवाई में मदद मिली है।

  • भोजशाला की प्रतिमा की कहानी: 26 कलाकारों ने 35 दिन में तैयार की थी वाग्देवी मूर्ति

    भोजशाला की प्रतिमा की कहानी: 26 कलाकारों ने 35 दिन में तैयार की थी वाग्देवी मूर्ति


    नई दिल्ली । मध्यप्रदेश के ग्वालियर में एक ऐसी ऐतिहासिक और भावनात्मक कहानी छिपी है, जो धार की भोजशाला से जुड़ी है। यहां रखी हुई मां वाग्देवी (सरस्वती) की अष्टधातु प्रतिमा पिछले 15 वर्षों से एक घर में सुरक्षित रखी गई है, जिसका निर्माण 2011 में मात्र 35 से 40 दिनों में 26 कलाकारों ने मिलकर किया था।

    यह प्रतिमा मूल रूप से धार स्थित भोजशाला के गर्भगृह में स्थापित की जानी थी, लेकिन उस समय उपजे धार्मिक और प्रशासनिक विवाद के कारण इसे वहां नहीं ले जाया जा सका और ग्वालियर में ही रोक दिया गया।

    लंदन म्यूजियम वाली प्रतिमा की हूबहू कॉपी
    इस प्रतिमा की सबसे खास बात यह है कि इसे लंदन म्यूजियम में रखी मूल मां वाग्देवी की मूर्ति के समान आकार और डिज़ाइन में बनाया गया है।
    यह प्रतिमा अष्टधातु (आठ धातुओं के मिश्रण) से बनी है
    ऊंचाई लगभग साढ़े 3 फीट और वजन 250 किलो से अधिक है
    2011 में इसकी लागत लगभग 2.5 से 3 लाख रुपये आई थी
    इसे पूरी तरह पारंपरिक शिल्प और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तैयार किया गया

    विवाद के कारण रुक गई प्राण-प्रतिष्ठा
    मूर्तिकार प्रभात राय के परिवार के अनुसार, जब 2011 में बसंत पंचमी पर प्रतिमा की स्थापना की तैयारी थी, तभी भोजशाला को लेकर विवाद भड़क गया। सुरक्षा कारणों से प्रशासन ने प्रतिमा को धार भेजने की अनुमति नहीं दी। इसके बाद कई वर्षों तक हर बसंत पंचमी पर पुलिस सुरक्षा में प्रतिमा को कुछ दिनों के लिए प्रदर्शित किया जाता रहा, लेकिन स्थायी स्थापना कभी नहीं हो सकी।

    15 साल से ग्वालियर में सुरक्षा के साये में
    इस प्रतिमा को लेकर स्थिति बेहद संवेदनशील रही। शुरुआती वर्षों में मूर्तिकार के घर पर पुलिस सुरक्षा तक तैनात रही। प्रतिमा को आज भी ग्वालियर में सुरक्षित रखा गया है और इसकी देखरेख परिवार कर रहा है। मूर्तिकार परिवार का कहना है कि यह केवल एक मूर्ति नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक है।

    कोर्ट फैसले के बाद फिर जगी उम्मीद
    हाल ही में भोजशाला को लेकर आए कोर्ट के फैसले के बाद इस प्रतिमा को लेकर फिर चर्चा तेज हो गई है। हिंदू पक्ष का कहना है कि मूल प्रतिमा को वापस लाकर भोजशाला में स्थापित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। हालांकि, फिलहाल इस पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है और प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।

    “अगर कोई नहीं ले गया तो मैं इसे रखूंगा” – मूर्तिकार का बयान
    मूर्तिकार प्रभात राय के बेटे अनुज राय ने भावुक होकर कहा कि यदि भविष्य में प्रतिमा को भोजशाला ले जाने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ती, तो वे इसे अपने पास ही गर्व से सुरक्षित रखेंगे। उनके अनुसार, यह प्रतिमा केवल एक कलाकृति नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा है।

    लंदन में रखी मूल प्रतिमा पर भी चर्चा
    इधर, धार की मूल मां वाग्देवी प्रतिमा के लंदन म्यूजियम में होने को लेकर भी मांगें उठ रही हैं कि उसे भारत लाकर भोजशाला में पुनः स्थापित किया जाए। हिंदू पक्ष का दावा है कि यह प्रतिमा खंडित अवस्था में है, लेकिन धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

  • बदनामी के डर से खामोशी: हनीट्रैप मामले में कई पीड़ित नहीं आ रहे सामने

    बदनामी के डर से खामोशी: हनीट्रैप मामले में कई पीड़ित नहीं आ रहे सामने


    नई दिल्ली ।  मध्य प्रदेश के इंदौर और भोपाल में सामने आए हाईप्रोफाइल हनीट्रैप केस ने पूरे सिस्टम को हिला दिया है। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि इस पूरे गैंग की शुरुआत जेल के अंदर हुई थी, जहां श्वेता विजय जैन और अलका दीक्षित की दोस्ती बनी थी। यहीं से “फंसाओ और वसूली करो” की खतरनाक साजिश का बीज पड़ा। जेल से बाहर आने के बाद दोनों ने मिलकर एक ऐसा नेटवर्क तैयार किया, जो नेताओं, कारोबारियों और प्रभावशाली लोगों को निशाना बनाकर उन्हें हनीट्रैप में फंसाता और फिर वीडियो-फोटो के जरिए मोटी रकम की मांग करता था।

    कैसे चलता था पूरा हनीट्रैप सिस्टम?
    पुलिस के अनुसार गैंग बेहद संगठित तरीके से काम करता था। पहले किसी महिला के जरिए टारगेट से नजदीकी बढ़ाई जाती थी। फिर निजी मुलाकातों में आपत्तिजनक फोटो और वीडियो रिकॉर्ड किए जाते थे। इसके बाद धमकी देकर लाखों-करोड़ों की वसूली शुरू हो जाती थी। गैंग के सदस्य खुद को कभी कारोबारी, कभी राजनीतिक संपर्क वाला व्यक्ति बताकर भरोसा जीतते थे। कई मामलों में फर्जी पहचान और सोशल मीडिया नेटवर्क का भी इस्तेमाल किया गया।

    हाईप्रोफाइल नामों तक पहुंचने की कोशिश
    जांच में यह भी सामने आया है कि इस गिरोह ने सिर्फ स्थानीय नहीं, बल्कि दिल्ली तक के नेताओं को टारगेट करने की कोशिश की थी। पुलिस को शक है कि गैंग के पास कई प्रभावशाली लोगों के निजी वीडियो और डाटा मौजूद हैं, जिनका इस्तेमाल दबाव बनाने में किया जा रहा था।

    पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 40 अफसरों की टीम एक्टिव
    मामले की गंभीरता को देखते हुए क्राइम ब्रांच ने 40 से अधिक पुलिसकर्मियों की 7 टीमें बनाकर इंदौर और भोपाल में एक साथ छापेमारी की। पांच मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और कई मोबाइल, लैपटॉप और डिजिटल सबूत जब्त किए गए हैं। पुलिस को यह भी शक है कि कुछ वीडियो एआई (AI) तकनीक से तैयार किए गए हो सकते हैं, जिसकी जांच की जा रही है।

    ड्रग्स और हथियार नेटवर्क से भी जुड़े तार
    जांच में सामने आया है कि इस गैंग के कुछ सदस्य ड्रग्स और अवैध हथियार तस्करी नेटवर्क से भी जुड़े हो सकते हैं। पुलिस अब बैंक ट्रांजैक्शन, कॉल डिटेल्स और सोशल मीडिया चैट्स की गहन जांच कर रही है।

    बदनामी के डर से कई पीड़ित सामने नहीं आए
    पुलिस का मानना है कि इस गिरोह ने कई बड़े कारोबारियों और नेताओं को पहले भी निशाना बनाया है, लेकिन सामाजिक बदनामी के डर से कई लोग शिकायत दर्ज नहीं करा रहे।

    उज्जैन से शुरू हुआ विवाद, बना बड़ा रैकेट
    सूत्रों के मुताबिक अलका दीक्षित का उज्जैन में एक जमीन विवाद था, जिसके बाद उसने हनीट्रैप का रास्ता अपनाया। धीरे-धीरे यह नेटवर्क भोपाल, इंदौर और आसपास के जिलों तक फैल गया।

    पुलिस का बयान
    डीसीपी क्राइम ब्रांच के अनुसार जांच अभी शुरुआती चरण में है और आने वाले दिनों में कई बड़े और चौंकाने वाले नाम सामने आ सकते हैं।
  • #JusticeForTwisha ट्रेंड में: सोशल मीडिया पर इंसाफ की मांग तेज

    #JusticeForTwisha ट्रेंड में: सोशल मीडिया पर इंसाफ की मांग तेज


    नई दिल्ली । भोपाल की दिवंगत अभिनेत्री ट्विशा शर्मा की मौत के बाद सोशल मीडिया पर #JusticeForTwisha अभियान तेजी से वायरल हो गया है। इंस्टाग्राम, X (ट्विटर) और व्हाट्सऐप पर लोग लगातार उनके लिए न्याय की मांग कर रहे हैं। शुरुआत उनके परिवार और दोस्तों द्वारा पोस्ट और वीडियो शेयर करने से हुई, जिसके बाद यह मुद्दा धीरे-धीरे बड़े सोशल मीडिया मूवमेंट में बदल गया।

    हजारों पोस्ट और तेजी से बढ़ता ट्रेंड
    रिपोर्ट्स के अनुसार, अब तक 6,000 से ज्यादा पोस्ट X पर और लगभग 4,000 से ज्यादा पोस्ट इंस्टाग्राम पर #JusticeForTwisha के साथ किए जा चुके हैं। जैसे-जैसे यह हैशटैग बढ़ा, सोशल मीडिया एल्गोरिदम ने इसे ट्रेंडिंग में शामिल कर दिया, जिससे यह और ज्यादा लोगों तक पहुंचने लगा।

    सोशल मीडिया अभियान कैसे बनता है ट्रेंड?
    विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे अभियान अक्सर तीन चरणों में फैलते हैं:
    परिवार या करीबी लोगों की भावनात्मक पोस्ट से शुरुआत
    सोशल मीडिया यूजर्स और क्रिएटर्स का जुड़ाव
    एल्गोरिदम द्वारा हैशटैग को ट्रेंड में प्रमोट करना
    जब किसी हैशटैग पर कम समय में ज्यादा लाइक, शेयर और कमेंट आते हैं, तो वह तेजी से वायरल हो जाता है।

    क्या इसके पीछे कोई बड़ी टीम होती है?
    ऐसे अभियानों के पीछे हमेशा संगठित टीम हो, यह जरूरी नहीं है। कई बार यह पूरी तरह ऑर्गेनिक होता है, जहां लोग भावनात्मक रूप से जुड़कर पोस्ट करते हैं। हालांकि, कुछ मामलों में डिजिटल मार्केटिंग, इन्फ्लुएंसर्स और सोशल मीडिया नेटवर्क भी इन अभियानों को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाते हैं। पिछले बड़े मामलों जैसे सुशांत सिंह राजपूत केस में भी इसी तरह के हैशटैग ट्रेंड हुए थे, जहां लाखों यूजर्स एक साथ जुड़ गए थे।

    क्या ऐसे कैंपेन में पैसा भी लगता है?
    डिजिटल मार्केटिंग विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ अभियानों में सोशल मीडिया प्रमोशन और कंटेंट पुश करने के लिए पैसे भी खर्च किए जाते हैं। हालांकि, हर ट्रेंड पेड नहीं होता। कई बार यह पूरी तरह यूजर्स की भावनाओं से प्रेरित होता है।

    फेक अकाउंट और डिजिटल पॉलिटिक्स का पहलू
    कुछ मामलों में ऐसे ट्रेंड्स को बढ़ाने के लिए फेक अकाउंट्स और संगठित डिजिटल नेटवर्क का भी इस्तेमाल होने के आरोप लगते रहे हैं। मुंबई पुलिस जैसी जांचों में पहले यह भी सामने आया था कि हजारों फेक अकाउंट्स से हैशटैग ट्रेंड करवाए गए थे।

    #JusticeForTwisha जैसे अभियान यह दिखाते हैं कि सोशल मीडिया आज सिर्फ बातचीत का नहीं, बल्कि न्याय की मांग का भी बड़ा मंच बन चुका है। लेकिन इसके साथ यह भी जरूरी है कि जानकारी और तथ्यों की जांच के बाद ही किसी ट्रेंड को आगे बढ़ाया जाए।

  • दवा बिक्री को लेकर बड़ा विरोध: भोपाल-छतरपुर में केमिस्टों की नारेबाजी

    दवा बिक्री को लेकर बड़ा विरोध: भोपाल-छतरपुर में केमिस्टों की नारेबाजी


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश में बुधवार को दवा व्यापारियों की बड़ी हड़ताल देखने को मिली। प्रदेशभर में लगभग 41 हजार मेडिकल स्टोर्स बंद रहे, जबकि अकेले भोपाल में ही 3 हजार से ज्यादा दुकानों ने कामकाज रोक दिया। यह बंद ऑनलाइन दवा बिक्री के बढ़ते प्रभाव और नियमों की कमी के विरोध में बुलाया गया था। इस दौरान केवल अस्पतालों के अंदर संचालित मेडिकल स्टोर्स को ही छूट दी गई, ताकि इमरजेंसी मरीजों को दवा मिल सके।

    केमिस्टों का आरोप: ऑनलाइन दवाएं बन रही खतरा
    केमिस्ट संगठनों का कहना है कि बिना सख्त नियमों के ऑनलाइन दवाओं की बिक्री बढ़ रही है, जिससे कई गंभीर समस्याएं पैदा हो रही हैं। उनका आरोप है कि:
    नकली या गलत दवाओं की संभावना बढ़ रही है
    पर्चियों की सत्यता की सही जांच नहीं हो रही
    छोटे स्थानीय मेडिकल स्टोर्स को भारी नुकसान हो रहा है
    भारी डिस्काउंट के कारण बाजार असंतुलित हो रहा है
    इस मुद्दे को लेकर ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स ने पूरे देश में विरोध दर्ज कराया है।

    मरीजों की परेशानी, अस्पताल स्टोर्स पर बढ़ी भीड़
    दवा दुकानों के बंद रहने से आम मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कई जगहों पर लोग जरूरी दवाइयों के लिए सरकारी अस्पतालों की ओर दौड़ते नजर आए, जिससे वहां भीड़ बढ़ गई। इमरजेंसी सेवाओं को ध्यान में रखते हुए जिला स्तर पर टास्क फोर्स बनाई गई है, जो जरूरतमंद मरीजों तक दवाएं पहुंचाने का काम कर रही है।

    भोपाल, छतरपुर और अन्य जिलों में प्रदर्शन
    भोपाल में थोक दवा बाजार में केमिस्टों ने एकत्र होकर नारेबाजी की और कलेक्टोरेट पहुंचकर ज्ञापन सौंपने की तैयारी की। छतरपुर और अन्य जिलों में भी इसी तरह विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। कई जगह केमिस्टों ने बाइक रैलियां निकालीं और प्रशासन को अपनी मांगें सौंपीं।

    केमिस्टों की प्रमुख मांगें
    हड़ताल कर रहे व्यापारियों की मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:
    ई-फार्मेसी पर सख्त और स्पष्ट नियम लागू किए जाएं
    ऑनलाइन दवा बिक्री पर नियंत्रण लगाया जाए
    भारी डिस्काउंट वाली ऑनलाइन बिक्री पर रोक लगे
    नकली और बिना निगरानी वाली दवाओं पर सख्त कार्रवाई हो

    कोविड के दौरान मिली थी छू
    कोविड-19 महामारी के दौरान ऑनलाइन दवा बिक्री को सरकार ने आवश्यक सेवा के तहत अनुमति दी थी, ताकि लोगों को घर बैठे दवाएं मिल सकें। इसी छूट का उपयोग अब केमिस्ट संगठन नियमों की कमी के रूप में बता रहे हैं।

    यह विरोध सिर्फ व्यापार का नहीं बल्कि स्वास्थ्य सुरक्षा का मुद्दा बन गया है। एक तरफ ऑनलाइन दवा बिक्री की सुविधा है, तो दूसरी तरफ केमिस्ट संगठन इसे जोखिम भरा बता रहे हैं। आने वाले समय में इस पर सरकार की नीति और नियमों की भूमिका बेहद अहम होगी।

  • PAK सैन्य अधिकारी के दावे झूठे, जिन एयरबेस को तबाह करने की बात कही, भारत में उनका अस्तित्व ही नहीं

    PAK सैन्य अधिकारी के दावे झूठे, जिन एयरबेस को तबाह करने की बात कही, भारत में उनका अस्तित्व ही नहीं


    इस्लामाबाद।
    पाकिस्तान और भारत के बीच पिछले साल पहलगाम आतंकी हमले के बाद तनाव बढ़ने की घटनाओं के बीच एक बार फिर पाकिस्तानी सेना का दावा चर्चा में आ गया है। पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई को “ऑपरेशन बुनियान उल मरसूस” नाम दिया था, जिसके तहत भारतीय क्षेत्रों और सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमलों की कोशिश की गई थी, हालांकि भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम ने इन हमलों को विफल कर दिया था।

    पाकिस्तान की ओर से 10 मई 2025 को ‘फतह-1’ रॉकेट दागने का भी दावा किया गया था, जिसे भारत ने हवा में ही नष्ट कर दिया था। पाकिस्तान ने इस दौरान जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान और गुजरात की हवाई सीमाओं में घुसपैठ की कोशिश करने की बात कही थी।

    इसी बीच सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी सेना के एक अधिकारी कैप्टन मुनीब जमाल का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वह दावा करते नजर आते हैं कि उनकी मिसाइलों ने भारत के दो एयरबेस को सफलतापूर्वक निशाना बनाया। अपने बयान में उन्होंने कहा कि लक्ष्य राजौरी और मामून एयरबेस थे, जिन्हें सफलतापूर्वक तबाह किया गया।
    हालांकि इस दावे पर सवाल खड़े हो रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, जिन स्थानों का जिक्र किया गया है, उनमें से राजौरी जम्मू-कश्मीर का एक जिला है, जहां कोई वायुसेना एयरबेस मौजूद नहीं है। वहीं मामून पंजाब के पठानकोट में स्थित एक सैन्य छावनी है, जिसे एयरबेस के रूप में नहीं जाना जाता। वीडियो में अधिकारी यह भी दावा करते हैं कि हमले के समय वहां आम नागरिक मौजूद थे, जिससे सैनिकों का हौसला बढ़ा।

    सोशल मीडिया पर इस दावे को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कई यूजर्स ने इन बयानों का मजाक उड़ाते हुए कहा कि जिन ठिकानों पर हमले का दावा किया गया है, उनका वास्तविक अस्तित्व ही स्पष्ट नहीं है। कुछ यूजर्स ने व्यंग्य करते हुए लिखा कि ये ऐसे “एयरबेस” हैं जिन्हें शायद नक्शों में ही ढूंढना पड़ेगा।

  • केवल एक फूल नहीं, श्रद्धा का प्रतीक है मंत्र पुष्पांजलि, जानिए क्यों हर धार्मिक अनुष्ठान इसके बिना माना जाता है अधूरा

    केवल एक फूल नहीं, श्रद्धा का प्रतीक है मंत्र पुष्पांजलि, जानिए क्यों हर धार्मिक अनुष्ठान इसके बिना माना जाता है अधूरा

    नई दिल्ली  : सनातन धर्म में जब कभी भी पूजा-पाठ, हवन या कोई बड़ा अनुष्ठान किया जाता है, तो उसकी समाप्ति पर पु्ष्पांजलि की जाती है. पूजन के बाद मंत्र पुष्पांजलि की परंपरा सदियों पुरानी है. कहा जाता है कि यह परंपरा वैदिक काल से चली आ रही है, जो आज के भौतिकवादी युग में भी जीवंत है. वैसे तो पूजा-पाठ करने वाला हर व्यक्ति ‘पुष्पांजलि’ इस शब्द से परिचित होता है, लेकिन कई बार लोग इसका महत्व और वास्तविक अर्थ नहीं समझ पाते, जिसकी वजह से अनुष्ठान का संपूर्ण फल प्राप्त नहीं होता. ऐसे में आइए जानते हैं कि पूजा-पाठ या हवन इत्यादि धार्मिक अनुष्ठान के बाद पुष्पांजलि क्यों की जाती है, इसका महत्व क्या है और इसके फायदे क्या हैं.

    क्या होती है मंत्र पुष्पांजलि?

    किसी भी पूजा-पाठ या हवन या अन्य धार्मिक अनुष्ठान की समाप्ति पर देवी-देवताओं के प्रति आदर प्रकट करने के लिए दोनों हाथों को जोड़कर उसमें फूल रखे जाते हैं. इसके बाद विशेष मंत्रों का उच्चारण करते हुए उस फूल को देवी-देवताओं को अर्पित किया जाता है. शास्त्रों के मुताबिक, इसे ही पुष्पांजलि का जाता है. चूंकि यह प्रक्रिया विशेष मंत्र और फूल के साथ की जाती है, इसलिए इसे मंत्र पुष्पांजलि भी कहते हैं.

    क्या है मंत्र पुष्पांजलि का महत्व?

    शास्त्रों के अनुसार, मंत्र पुष्पांजलि देवी-देवताओं के प्रति भक्ति और निष्ठा को प्रकट करने के लिए की जाती है. कहा जाता है देवी-देवताओं को मंत्रों के साथ पुष्प अर्पित करने से मन रहता है और विचारों में शुद्धता आती है. ऐसा करने से आत्मिक शांति और संतोष मिलता है. पुराणों के मुताबिक, मंत्र पुष्पांजलि भगवान को धन्यवाद ज्ञापित करने और परिवार के सदस्यों की सुख-शांति के लिए की जाती है. मान्यतानुसार, मंत्र पुष्पांजलि करने से देवी-देवता प्रसन्न होकर भक्तों की मनोकामना पूर्ण करते हैं.
    पुष्पांजलि मंत्र
    “ॐ यज्ञेन यज्ञमयजन्त देवास्तनि धर्माणि प्रथमान्यासन्
    ते ह नाकं महिमान: सचंत यत्र पूर्वे साध्या: संति देवा:”
    “ॐ राजाधिराजाय प्रसह्य साहिने
    नमो वयं वैश्रवणाय कुर्महे
    स मस कामान् काम कामाय मह्यं
    कामेश्र्वरो वैश्रवणो ददातु कुबेराय वैश्रवणाय
    महाराजाय नम:”
    “ॐ स्वस्ति, साम्राज्यं भौज्यं स्वाराज्यं
    वैराज्यं पारमेष्ट्यं राज्यं महाराज्यमाधिपत्यमयं
    समन्तपर्यायीस्यात् सार्वभौमः सार्वायुषः आन्तादापरार्धात्
    पृथीव्यै समुद्रपर्यंताया एकराळ इति”

  • तमिलनाडु में बढ़ा सियासी तनाव, AIADMK से नजदीकी पर TVK सरकार को माकपा की चेतावनी, समर्थन वापसी की धमकी

    तमिलनाडु में बढ़ा सियासी तनाव, AIADMK से नजदीकी पर TVK सरकार को माकपा की चेतावनी, समर्थन वापसी की धमकी

    चेन्नई। तमिलनाडु में नई सरकार बनने के कुछ ही दिनों बाद राजनीतिक माहौल गर्माने लगा है। मुख्यमंत्री थलपति विजय की पार्टी ‘तमिझगा वेत्री कझगम’ (TVK) को बाहर से समर्थन दे रही मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPI-M) ने सरकार को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। माकपा ने साफ संकेत दिए हैं कि यदि TVK ने विपक्षी दल AIADMK के साथ किसी प्रकार का समझौता किया या उन्हें सरकार में शामिल करने की कोशिश की, तो पार्टी अपना समर्थन वापस लेने पर विचार कर सकती है।

    माकपा के वरिष्ठ नेता शनमुगम ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि तमिलनाडु की जनता ने इस बार DMK और AIADMK दोनों के खिलाफ मतदान कर एक नया जनादेश दिया है। उन्होंने कहा कि वामपंथी दलों और वीसीके ने केवल इसलिए TVK सरकार को बाहर से समर्थन दिया ताकि राज्य में एक साफ-सुथरी और भ्रष्टाचार मुक्त सरकार स्थापित हो सके।

    शनमुगम ने विजय के चुनावी वादों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने प्रचार के दौरान “क्लीन गवर्नेंस” और भ्रष्टाचार मुक्त शासन देने का भरोसा दिलाया था। ऐसे में यदि सरकार चलाने के लिए AIADMK नेताओं का सहारा लिया जाता है या उन्हें कैबिनेट में शामिल किया जाता है, तो यह जनता के भरोसे और जनादेश दोनों के साथ विश्वासघात माना जाएगा।

    उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि TVK नेतृत्व ऐसा कदम नहीं उठाएगा। हालांकि, यदि AIADMK को सरकार में शामिल करने या उनके सहयोग से सत्ता चलाने की कोशिश हुई, तो माकपा अपने समर्थन पर दोबारा विचार करेगी। ऐसे हालात में सरकार पर संकट भी खड़ा हो सकता है।

    माकपा के इस बयान के बाद तमिलनाडु की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। अब सभी की नजर मुख्यमंत्री विजय के अगले राजनीतिक कदम पर टिकी हुई है।

  • 20 मई OTT धमाका: Netflix से Apple TV तक रिलीज़ हुईं 5 फिल्में और सीरीज, एक्शन-रोमांस और थ्रिलर का जबरदस्त कॉम्बो

    20 मई OTT धमाका: Netflix से Apple TV तक रिलीज़ हुईं 5 फिल्में और सीरीज, एक्शन-रोमांस और थ्रिलर का जबरदस्त कॉम्बो


    नई दिल्ली(New Delhi)।
    अगर आप भी हर हफ्ते नई फिल्में और वेब सीरीज देखने का इंतजार करते हैं, तो 20 मई 2026 आपके लिए खास साबित होने वाला है। आज नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम वीडियो, सन नेक्स्ट और एप्पल टीवी जैसे बड़े ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर कई दमदार फिल्में और सीरीज रिलीज हुई हैं। इनमें रिएलिटी ड्रामा, स्पाई थ्रिलर, रोमांटिक-कॉमेडी और डार्क कॉमेडी जैसे अलग-अलग जॉनर शामिल हैं। करण कुंद्रा और तेजस्वी प्रकाश की ग्लैमरस दुनिया से लेकर जैक रायन के हाई-वोल्टेज मिशन तक, आज दर्शकों को भरपूर एंटरटेनमेंट मिलने वाला है।

    1. Desi Bling
    ओटीटी प्लेटफॉर्म: Netflix
    भाषा: हिंदी और अंग्रेजी
    जॉनर: रिएलिटी ड्रामा

    टीवी इंडस्ट्री के चर्चित कपल Karan Kundrra और Tejasswi Prakash इस शो में पहली बार अपनी लग्जरी लाइफस्टाइल के साथ नजर आ रहे हैं। दुबई के हाई-प्रोफाइल सोशल सर्कल, चमकदार पार्टियों और रिश्तों के उतार-चढ़ाव को इस शो में करीब से दिखाया गया है। ग्लैमर और पर्सनल ड्रामे का तड़का इस शो को और भी दिलचस्प बनाता है।

    2. Married To The Game Season 2
    ओटीटी प्लेटफॉर्म: Amazon Prime Video
    भाषा: अंग्रेजी
    जॉनर: रिएलिटी शो

    यह पॉपुलर रिएलिटी शो अपने दूसरे सीजन के साथ लौट आया है। इसमें प्रीमियर लीग फुटबॉलर्स की पत्नियों और गर्लफ्रेंड्स की निजी जिंदगी, फेम, रिश्तों और ग्लैमर के पीछे छिपे दबाव को दिखाया गया है। शो में इमोशनल मोमेंट्स के साथ हाई-प्रोफाइल लाइफस्टाइल की झलक भी देखने को मिलती है।

    3. Sathi Leelavathi
    ओटीटी प्लेटफॉर्म: Sun NXT
    भाषा: तेलुगू और तमिल
    जॉनर: रोमांटिक-कॉमेडी

    Lavanya Tripathi की शादी के बाद रिलीज होने वाली यह पहली फिल्म है, जिसमें उनके साथ Dev Mohan लीड रोल में नजर आ रहे हैं। फिल्म की कहानी लीला और राम सेतु की शादीशुदा जिंदगी के इर्द-गिर्द घूमती है। बिजी करियर, रिश्तों में बढ़ती दूरियां और शक की वजह से दोनों के रिश्ते में तनाव बढ़ता जाता है। इमोशनल ड्रामा और हल्के-फुल्के कॉमेडी मोमेंट्स फिल्म को खास बनाते हैं।

    4. Jack Ryan – Ghost War
    ओटीटी प्लेटफॉर्म: Prime Video
    भाषा: हिंदी और अंग्रेजी
    जॉनर: स्पाई थ्रिलर और एक्शन

    John Krasinski एक बार फिर सीआईए एजेंट जैक रायन के किरदार में लौटे हैं। इस बार कहानी ग्लोबल साजिशों, खतरनाक मिशन और बड़े राजनीतिक संकटों के इर्द-गिर्द घूमती है। जबरदस्त एक्शन सीक्वेंस और सस्पेंस से भरपूर यह सीरीज थ्रिलर पसंद करने वालों के लिए शानदार विकल्प साबित हो सकती है।

    5. Maximum Pleasure Guaranteed
    ओटीटी प्लेटफॉर्म: Apple TV+
    भाषा: अंग्रेजी
    जॉनर: डार्क कॉमेडी थ्रिलर

    यह सीरीज एक तलाकशुदा महिला की कहानी दिखाती है, जो अपने बच्चे की कस्टडी के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रही होती है। लेकिन उसकी जिंदगी तब पूरी तरह बदल जाती है, जब वह गलती से एक किडनैपिंग की घटना देख लेती है। इसके बाद ब्लैकमेल, डर और कॉमिक ट्विस्ट से भरी घटनाएं कहानी को बेहद रोमांचक बना देती हैं।

    20 मई का दिन ओटीटी दर्शकों के लिए पूरी तरह एंटरटेनमेंट से भरा हुआ है। चाहे आपको एक्शन पसंद हो, रोमांस या फिर रियलिटी ड्रामा, आज रिलीज हुई ये फिल्में और सीरीज आपके वीकेंड मूड को पूरी तरह फ्रेश कर सकती हैं।