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  • Magh Purnima 2026: माघ पूर्णिमा की रात दान करना अधिक फलदायी, जानें कैसे करें पुण्यकारी दान

    Magh Purnima 2026: माघ पूर्णिमा की रात दान करना अधिक फलदायी, जानें कैसे करें पुण्यकारी दान


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में माघ पूर्णिमा को अत्यंत पावन और शुभ माना जाता है। यह दिन केवल स्नान और पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि इस दिन की रात किए गए दान को विशेष पुण्यकारी माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, माघ पूर्णिमा की रात किया गया दान सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक फल देता है। इस दिन दान करना पूर्वजन्म के दोषों और अशुभ कर्मों के प्रभाव को कम करता है।

    इस साल माघ पूर्णिमा 1 फरवरी 2026 को है। इस दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से पूर्ण होता है, जिससे वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस रात देवता पृथ्वी के निकट आते हैं और श्रद्धा के साथ किए गए कर्म तुरंत स्वीकार करते हैं। साथ ही, ऐसा माना जाता है कि माघ पूर्णिमा का दान व्यक्ति, परिवार और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी पुण्यकारी होता है।

    माघ पूर्णिमा पर क्या दान करें?

    शास्त्रों के अनुसार इस दिन अन्न, वस्त्र, तिल, घी, गुड़, कंबल और गर्म कपड़े दान करना शुभ माना जाता है। अगर दान सीधे गरीब और जरूरतमंदों तक पहुँचता है, तो इसका लाभ और भी अधिक होता है। इससे न केवल जीवन में आर्थिक स्थिरता और सुख-समृद्धि आती है, बल्कि दान करने वाले को मानसिक शांति और आत्मिक संतोष भी प्राप्त होता है।

    दान करते समय ध्यान रखें ये बातें

    दान केवल मात्रा से नहीं, बल्कि भावना और विधि से पुण्यकारी होता है। कुछ खास बातों का ध्यान रखना आवश्यक है। जैसे-दान ईश्वर का स्मरण करते हुए करें। हमेशा दाएं हाथ से दान दें। दान के बाद मन में पश्चाताप या खेद न रखें। दान की चर्चा न करें, इसे गुप्त रखना श्रेष्ठ माना गया है। क्रोध, अहंकार और जल्दबाजी से बचें, क्योंकि ये दान के पुण्य को कम कर सकते हैं। श्रद्धा और सही मनोभाव से किया गया दान आध्यात्मिक शांति और पुण्य दोनों प्रदान करता है। माघ पूर्णिमा की यह रात इसलिए खास है क्योंकि इस दिन किए गए छोटे-से छोटे दान का भी अत्यधिक फल प्राप्त होता है।

  • असम चुनाव से पहले कांग्रेस निकालेगी मेगा यात्रा, राहुल नहीं गौरव गोगोई संभालेंगे कमान

    असम चुनाव से पहले कांग्रेस निकालेगी मेगा यात्रा, राहुल नहीं गौरव गोगोई संभालेंगे कमान


    गुवाहाटी । असम विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस राज्य में अपनी चुनावी तैयारियों को तेज कर रही है। पार्टी ने फरवरी में एक बड़ी मेगा यात्रा आयोजित करने का योजना बनाई है। सूत्रों के मुताबिक इस यात्रा का नेतृत्व कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई करेंगे, जबकि राहुल गांधी और महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा अलग-अलग चरणों में इसमें शामिल होंगे।

    यात्रा हाइब्रिड मोड में होगी, जिसमें बस यात्रा, पदयात्रा, नुक्कड़ सभाएं और बड़े जनसमूह के कार्यक्रम शामिल होंगे। पार्टी का उद्देश्य सीधे जनता से संवाद करना और राज्य में सरकार के खिलाफ माहौल तैयार करना है। यात्रा की सटीक तारीख और नाम को अंतिम रूप दिया जा रहा है, और संभावना है कि संसद सत्र समाप्त होने के बाद इसकी शुरुआत की जाएगी।

    कांग्रेस पूरी ताकत झोंक रही

    असम में कांग्रेस चुनाव से पहले पूरी ताकत झोंक रही है। संगठन को मजबूत करने और चुनावी बढ़त हासिल करने के लिए कई वरिष्ठ नेताओं को अहम जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। गौरव गोगोई, जो प्रदेश अध्यक्ष होने के साथ लोकसभा में उपनेता भी हैं, को चुनावी चेहरा बनाया जा रहा है। पार्टी इस कदम से भाजपा के लगातार हमलों का सामना करना चाहती है, खासकर राहुल गांधी पर गमछा विवाद के बाद।

    अमित शाह का हमला
    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि कांग्रेस शासन के दौरान असम की जनसांख्यिकी बदल गई। शाह ने करेनग चापोरी में आयोजित ‘मिसिंग युवा महोत्सव’ में जनता से अपील की कि भाजपा को वोट दें ताकि राज्य को अवैध घुसपैठ से मुक्त किया जा सके।

    घुसपैठ और भूमि सुधार

    अमित शाह ने बताया कि कांग्रेस शासन के दौरान घुसपैठियों की संख्या बढ़कर 64 लाख हो गई और सात जिलों में वे बहुसंख्यक बन गए। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार और असम की भाजपा सरकारें अब इस प्रवृत्ति को पलटने के लिए काम कर रही हैं। इसके तहत 1.26 लाख एकड़ अतिक्रमित भूमि को घुसपैठियों से मुक्त कराया गया है। शाह ने यह भी कहा कि अवैध प्रवासियों के खिलाफ लड़ाई में मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा के हाथ मजबूत करने के लिए भाजपा को तीसरी बार सत्ता में लाना जरूरी है।

  • असम CM का बयान मुस्लिम-विरोधी AIMPLB ने की SC और राष्ट्रपति से संज्ञान लेने की मांग

    असम CM का बयान मुस्लिम-विरोधी AIMPLB ने की SC और राष्ट्रपति से संज्ञान लेने की मांग

    नई दिल्ली। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड AIMPLB ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा के हालिया बयान को मुस्लिम-विरोधी और असंवैधानिक करार दिया है। बोर्ड ने शुक्रवार को मांग की कि सर्वोच्च न्यायालय इस मामले का स्वतः संज्ञान ले। शर्मा ने अपने बयान में कहा था कि असम में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण के दौरान “मियां” समुदाय के लोग परेशान हैं और उन्हें मतदान करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इस दौरान उन्होंने बांग्लाभाषी मुसलमानों के लिए ‘मियां’ शब्द का इस्तेमाल किया।

    AIMPLB ने किया गंभीर आरोप

    बोर्ड के प्रवक्ता सैयद कासिम रसूल इलियास ने कहा कि मुख्यमंत्री का बयान मुस्लिम-विरोधी और अत्यंत विभाजनकारी है। उन्होंने चेताया कि नफरत भरी भाषा और उकसावे का प्रयोग अब राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनता जा रहा है। इलियास ने आरोप लगाया कि उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और असम के मुख्यमंत्री लगातार मुसलमानों को निशाना बनाकर भड़काऊ और असंवैधानिक बयान दे रहे हैं।

    CJI और राष्ट्रपति से अपील

    बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट से तुरंत स्वतः संज्ञान लेने की अपील की है। उनका कहना है कि एक मुख्यमंत्री के रूप में शर्मा ने संविधान की रक्षा की शपथ ली है, लेकिन उनके बयान खुले तौर पर किसी विशेष समुदाय के खिलाफ भेदभाव, उत्पीड़न और मताधिकार से वंचित करने का संकेत देते हैं। AIMPLB ने CJI और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी संवैधानिक कार्रवाई की मांग की है।

    सेक्युलर दलों और नागरिकों से आग्रह

    AIMPLB ने सभी सेक्युलर राजनीतिक पार्टियों, सिविल सोसाइटी समूहों और न्याय पसंद नागरिकों से संवैधानिक मूल्यों की रक्षा में एकजुट होने का आग्रह किया है।

    मुख्यमंत्री का बयान

    हिमंत शर्मा ने बुधवार को कहा कि असम में “बांग्लादेशी मियां” रहते हैं। भाजपा कार्यकर्ताओं ने मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण के दौरान ऐसे “विदेशियों” के खिलाफ पांच लाख से अधिक शिकायतें दर्ज कराई हैं। शर्मा ने शिवसागर जिले के डेमो में कहा कि “अज्ञात लोग” अब यहां से चले गए हैं और अपर असम के कुछ जिलों में ऐसे लोग रहते हैं, जहां पांच साल पहले कोई संदिग्ध नहीं था।

    उन्होंने यह भी कहा कि बांग्लादेशी मियां असम में बस गए हैं। यदि इनमें से किसी को एसआर नोटिस नहीं मिलता, तो इसका मतलब है कि राज्य में कोई विदेशी नहीं है। भाजपा कार्यकर्ता ऐसे संदिग्ध लोगों के खिलाफ शिकायतें दर्ज कर रहे हैं, और सरकार या निर्वाचन आयोग इसकी जांच करेगा। शर्मा ने कहा कि यदि शिकायतें दर्ज नहीं की जातीं, तो लोग सवाल उठाएंगे कि विदेशियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

  • पश्चिम बंगाल: हुमायूं कबीर ने 11 फरवरी से बाबरी मस्जिद निर्माण का किया ऐलान, ओवैसी से बढ़ी नजदीकियां

    पश्चिम बंगाल: हुमायूं कबीर ने 11 फरवरी से बाबरी मस्जिद निर्माण का किया ऐलान, ओवैसी से बढ़ी नजदीकियां


    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। ‘जनता उन्नयन पार्टी  के अध्यक्ष हुमायूं कबीर और एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष इमरान सोलंकी के बीच शुक्रवार शाम मुर्शिदाबाद में हुई मुलाकात ने नए गठबंधन की अटकलों को हवा दे दी है। इसी बैठक के दौरान कबीर ने बड़ा बयान देते हुए 11 फरवरी से बाबरी मस्जिद के निर्माण कार्य की शुरुआत होने की घोषणा की।

    हुमायूं कबीर के मुताबिक, 11 फरवरी को निर्माण स्थल पर करीब पांच हजार लोगों की मौजूदगी रहेगी। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 10 बजे पवित्र कुरान के पाठ से होगी, जो लगभग डेढ़ घंटे तक चलेगा। इसके बाद दोपहर 12 बजे राज्य के विभिन्न हिस्सों से आए मुस्लिम बुद्धिजीवी, शिक्षाविद और ट्रस्ट के सदस्य मिलकर मस्जिद की नींव रखेंगे। कबीर ने स्पष्ट किया कि इस कार्यक्रम में केवल समाज के प्रबुद्ध लोग शामिल होंगे और इसे राजनीति से अलग रखा जाएगा।

    ममता सरकार पर सीधा हमला

    बैठक के बाद हुमायूं कबीर ने तृणमूल कांग्रेस सरकार के खिलाफ तीखा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि AIMIM और SDPI के साथ गठबंधन को लेकर बातचीत जारी है। कबीर ने दावा किया कि मार्च महीने में कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में एक बड़ी रैली आयोजित की जाएगी, जिसमें AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की मौजूदगी तय मानी जा रही है। कबीर ने इसे ममता सरकार के पतन की शुरुआत बताया।

    पुरानी बातचीत, नई मजबूती
    गौरतलब है कि दिसंबर से ही हुमायूं कबीर और असदुद्दीन ओवैसी के बीच बढ़ती नजदीकियों के संकेत मिलते रहे हैं। अब मुर्शिदाबाद में इमरान सोलंकी के साथ हुई ताजा बैठक के बाद इन अटकलों को और बल मिला है। AIMIM की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि पार्टी पश्चिम बंगाल में मुस्लिम, दलित और वंचित समाज के अधिकारों के लिए पूरी ताकत के साथ संघर्ष करेगी।

  • मौसम का नया सिस्टम एक्टिव, उत्तर भारत में बारिश की होगी एंट्री, कुछ राज्यों में लौटेगी सर्दी

    मौसम का नया सिस्टम एक्टिव, उत्तर भारत में बारिश की होगी एंट्री, कुछ राज्यों में लौटेगी सर्दी


    नई दिल्ली। उत्तर भारत के मौसम में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। सक्रिय हो रहे नए पश्चिमी विक्षोभ के कारण दिल्ली, राजस्थान और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में अगले तीन दिनों तक बारिश होने के संकेत मिले हैं। इस बदलाव से जहां कुछ इलाकों में ठंड से राहत मिली है, वहीं कई जगह ठिठुरन फिर बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

    मौसम विभाग के अनुसार दिल्ली और राजस्थान में आने वाले तीन दिन मौसम अस्थिर रहेंगे। पंजाब और हरियाणा में फिलहाल तापमान सामान्य के आसपास बना हुआ है, जबकि उत्तर प्रदेश में तेज हवाओं के कारण ठंड का असर तेज हो गया है। शनिवार को यूपी के कई हिस्सों में कोहरा छाने की संभावना है और 1 से 3 फरवरी के बीच बारिश होने से सर्दी और तीखी हो सकती है।

    कश्मीर घाटी में सर्दी का सबसे कठिन दौर ‘चिल्ला-ए-कलां’ अब समाप्त हो चुका है। इसके बाद घाटी के अधिकतर इलाकों में रात के तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक श्रीनगर में न्यूनतम तापमान 1.3 डिग्री सेल्सियस, कोनिबल में 1.0 डिग्री, पुलवामा में 0.1 डिग्री और कुलगाम में 1.1 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। कई स्थानों पर तापमान जमाव बिंदु से ऊपर पहुंचने के कारण कड़ाके की ठंड से कुछ राहत महसूस की जा रही है।

    पंजाब के अधिकांश इलाकों में शुक्रवार को रात का तापमान सामान्य से ऊपर दर्ज किया गया, जबकि हरियाणा में यह औसत के करीब बना रहा। मौसम विभाग का कहना है कि फिलहाल तापमान में बड़े बदलाव के आसार नहीं हैं, लेकिन 1 फरवरी से पश्चिमी विक्षोभ के असर से दोनों राज्यों के कुछ हिस्सों में बारिश हो सकती है, जिससे हल्की ठंड लौट सकती है।

    राजधानी दिल्ली में भी शुक्रवार को मौसम थोड़ा नरम रहा। यहां अधिकतम तापमान 22.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस समय के औसत से 0.5 डिग्री अधिक है। हालांकि भारत मौसम विज्ञान विभाग ने चेतावनी दी है कि यह राहत अस्थायी है और अगले तीन दिनों में बारिश के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं।

    राजस्थान में भी मौसम एक बार फिर सक्रिय होने जा रहा है। मौसम विभाग जयपुर के अनुसार शनिवार से अजमेर, कोटा, जयपुर, भरतपुर संभाग और शेखावाटी क्षेत्र में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इन इलाकों में आकाशीय बिजली गिरने की भी संभावना जताई गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि 1 और 2 फरवरी को उत्तरी और पूर्वी राजस्थान के यही जिले बारिश से प्रभावित रहेंगे, जबकि जोधपुर और बीकानेर संभाग के अधिकांश क्षेत्रों में मौसम शुष्क रहने के आसार हैं।

  • डॉलर मजबूत होने और भारी मुनाफावसूली के चलते सोने-चांदी की कीमतों में तेज गिरावट निवेशकों में बेचैनी का माहौल

    डॉलर मजबूत होने और भारी मुनाफावसूली के चलते सोने-चांदी की कीमतों में तेज गिरावट निवेशकों में बेचैनी का माहौल


    नई दिल्ली। इस हफ्ते सोने और चांदी के बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली। निवेशकों ने भारी मुनाफावसूली की और डॉलर के मजबूत होने के चलते कीमती धातुओं के दाम अचानक नीचे आ गए। एमसीएक्स पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना करीब 9 प्रतिशत गिरा जबकि मार्च डिलीवरी वाली चांदी में 25 प्रतिशत तक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। फिलहाल सोने का भाव 1,49,075 रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी का भाव 2,91,922 रुपए प्रति किलो रिकॉर्ड किया गया।

    इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के आंकड़ों के अनुसार 24 कैरेट सोना 10 ग्राम पर घटकर 1,65,795 रुपए पर आ गया था, जबकि इससे पहले यह 1,75,340 रुपए पर बंद हुआ था। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने की वजह से निवेशकों ने तेजी से बिकवाली शुरू की। डॉलर के मजबूती का मुख्य कारण अमेरिकी राष्ट्रपति ने फेडरल रिजर्व चेयरमैन के रूप में केविन वार्श के नाम की घोषणा करना बताया गया है। केविन वार्श महंगाई को काबू में रखने के लिए सख्त रुख रखते हैं और कम ब्याज दरों के पक्ष में नहीं माने जाते।

    विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ, वास्तविक बॉन्ड यील्ड बढ़ीं और सोने व चांदी में लीवरेज्ड पोजीशन, जिन्हें करेंसी वैल्यू घटने से बचाव के तौर पर लिया गया था, तेजी से खत्म कर दी गई। इसके चलते बाजार में अरबों डॉलर का मार्केट वैल्यू साफ हुआ और कमजोर निवेशक बाहर हो गए। विशेषज्ञों के मुताबिक यह गिरावट लंबी अवधि की मंदी की शुरुआत नहीं है बल्कि एक जरूरी सुधार प्रक्रिया है।लंबी अवधि के बुनियादी कारक अब भी मजबूत बने हुए हैं। केंद्रीय बैंकों द्वारा लगातार सोने की खरीद, ग्रीन एनर्जी, इलेक्ट्रिक वाहनों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रॉनिक्स में बढ़ती औद्योगिक मांग के कारण चांदी की आपूर्ति में संरचनात्मक कमी बनी हुई है। यही वजह है कि विशेषज्ञों का कहना है कि लंबी अवधि में सोने और चांदी के लिए तेजी का नजरिया बरकरार है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि इस गिरावट के बाद जरूरत से ज्यादा सट्टेबाजी और जोखिम भरे निवेश बाहर हो गए हैं जिससे आगे चलकर बाजार स्थिर तरीके से ऊपर जा सकता है। चांदी की कीमत यदि 3 लाख से 3.10 लाख रुपए प्रति किलो के स्तर पर आती है तो वहां से दोबारा खरीदारी शुरू हो सकती है। इसके चलते चांदी संभावित रूप से 3.40 लाख से 3.50 लाख रुपए प्रति किलो तक पहुंच सकती है।इस गिरावट को निवेशकों के लिए मौका भी माना जा रहा है क्योंकि बाजार में स्थिरता आने के बाद धातुओं की कीमतें फिर से ऊपर जा सकती हैं।

  • महाकाल भस्म आरती: भांग, चंदन और त्रिनेत्र से सजा बाबा का 'राजा स्वरूप', त्रयोदशी पर उज्जैन में उमड़ा आस्था का सैलाब

    महाकाल भस्म आरती: भांग, चंदन और त्रिनेत्र से सजा बाबा का 'राजा स्वरूप', त्रयोदशी पर उज्जैन में उमड़ा आस्था का सैलाब


    उज्जैन । विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में माघ माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर शनिवार को भक्ति और शक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। तड़के 4 बजे जैसे ही मंदिर के रजत कपाट खुले, पूरा परिसर ‘जय महाकाल’ के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। बाबा महाकाल की विशेष भस्म आरती के दौरान भगवान का ऐसा दिव्य श्रृंगार किया गया कि श्रद्धालु मंत्रमुग्ध रह गए।

    पंचामृत अभिषेक और शाही श्रृंगार परंपरा के अनुसार, मंदिर के पट खुलने के बाद पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं का पूजन किया। इसके पश्चात भगवान महाकाल का जलाभिषेक कर उन्हें दूध, दही, घी, शहद और फलों के रसों से बने पंचामृत से स्नान कराया गया। स्नान के उपरांत बाबा का श्रृंगार शुरू हुआ, जिसमें चंदन का त्रिपुंड, मस्तक पर त्रिनेत्र और भांग के विशेष लेपन से उन्हें ‘राजा स्वरूप’ दिया गया। भगवान का यह रूप इतना मनमोहक था कि हर आँख बस उन्हें निहारती रह गई।

    भस्म रमाई और दिव्य आभूषण भस्म अर्पण की प्रक्रिया से पूर्व प्रथम घंटाल बजाकर ‘हरिओम’ का जल अर्पित किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कपूर आरती हुई और फिर ज्योतिर्लिंग को सूती कपड़े से ढांककर पवित्र भस्म रमाई गई। भस्म आरती के पश्चात बाबा को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुण्डमाल और रुद्राक्ष की मालाएं धारण कराई गईं। सुगंधित पुष्पों और आभूषणों से सुसज्जित होकर बाबा महाकाल अपने पूर्ण वैभव में नजर आए।

    नंदी के कान में मनोकामनाएं और गूंजते जयकारे इस अलौकिक आरती का गवाह बनने के लिए देशभर से सैकड़ों श्रद्धालु उज्जैन पहुँचे थे। भस्म आरती के दौरान श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के दर्शन किए और परंपरा के अनुसार उनके कान में अपनी मनोकामनाएं कहीं। मान्यता है कि नंदी जी के माध्यम से भक्तों की पुकार बाबा महाकाल तक शीघ्र पहुँचती है। आरती के अंत तक पूरा मंदिर परिसर शिव भक्ति के रंग में डूबा रहा और भक्तों ने इस पुण्य लाभ से स्वयं को धन्य महसूस किया।

    उज्जैन । विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में माघ माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर शनिवार को भक्ति और शक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। तड़के 4 बजे जैसे ही मंदिर के रजत कपाट खुले, पूरा परिसर ‘जय महाकाल’ के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। बाबा महाकाल की विशेष भस्म आरती के दौरान भगवान का ऐसा दिव्य श्रृंगार किया गया कि श्रद्धालु मंत्रमुग्ध रह गए।

    पंचामृत अभिषेक और शाही श्रृंगार परंपरा के अनुसार, मंदिर के पट खुलने के बाद पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं का पूजन किया। इसके पश्चात भगवान महाकाल का जलाभिषेक कर उन्हें दूध, दही, घी, शहद और फलों के रसों से बने पंचामृत से स्नान कराया गया। स्नान के उपरांत बाबा का श्रृंगार शुरू हुआ, जिसमें चंदन का त्रिपुंड, मस्तक पर त्रिनेत्र और भांग के विशेष लेपन से उन्हें ‘राजा स्वरूप’ दिया गया। भगवान का यह रूप इतना मनमोहक था कि हर आँख बस उन्हें निहारती रह गई।

    भस्म रमाई और दिव्य आभूषण भस्म अर्पण की प्रक्रिया से पूर्व प्रथम घंटाल बजाकर ‘हरिओम’ का जल अर्पित किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कपूर आरती हुई और फिर ज्योतिर्लिंग को सूती कपड़े से ढांककर पवित्र भस्म रमाई गई। भस्म आरती के पश्चात बाबा को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुण्डमाल और रुद्राक्ष की मालाएं धारण कराई गईं। सुगंधित पुष्पों और आभूषणों से सुसज्जित होकर बाबा महाकाल अपने पूर्ण वैभव में नजर आए।

    नंदी के कान में मनोकामनाएं और गूंजते जयकारे इस अलौकिक आरती का गवाह बनने के लिए देशभर से सैकड़ों श्रद्धालु उज्जैन पहुँचे थे। भस्म आरती के दौरान श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के दर्शन किए और परंपरा के अनुसार उनके कान में अपनी मनोकामनाएं कहीं। मान्यता है कि नंदी जी के माध्यम से भक्तों की पुकार बाबा महाकाल तक शीघ्र पहुँचती है। आरती के अंत तक पूरा मंदिर परिसर शिव भक्ति के रंग में डूबा रहा और भक्तों ने इस पुण्य लाभ से स्वयं को धन्य महसूस किया।

  • न्यायालय ने कहा केवल अदालत को है सजा देने का अधिकार पुलिस नहीं कर सकती एनकाउंटर

    न्यायालय ने कहा केवल अदालत को है सजा देने का अधिकार पुलिस नहीं कर सकती एनकाउंटर

    नई दिल्ली। प्रयागराज में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस की हाफ एनकाउंटर प्रथा पर गहरी चिंता और तीखी नाराजगी व्यक्त की है। न्यायालय ने इस मामले में प्रदेश के डीजीपी और गृह सचिव को तलब किया है और स्पष्ट जवाब देने को कहा है। हाईकोर्ट ने पूछा कि क्या पुलिस अधिकारियों को आरोपियों के पैरों या शरीर के किसी अन्य हिस्से में गोली मारने के संबंध में कोई मौखिक या लिखित निर्देश दिए गए हैं।

    जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकल पीठ ने यह आदेश मिर्जापुर के राजू उर्फ राजकुमार समेत अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया। कोर्ट ने टिप्पणी की कि ऐसी मुठभेड़ अब नियमित होती जा रही हैं और कथित तौर पर इसका उद्देश्य वरिष्ठ अधिकारियों को खुश करना या आरोपियों को सबक सिखाना हो सकता है।

    हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पुलिस आरोपी के पैरों में गोली मारकर इसे मुठभेड़ बताती है और यह पूरी तरह अस्वीकार्य है। न्यायालय ने कहा कि संविधान के अनुसार किसी भी व्यक्ति को सजा देने का अधिकार केवल अदालत के पास है पुलिस के पास नहीं है। कोर्ट ने चिंता जताई कि छोटे मोटे अपराधों जैसे चोरी के मामलों में भी पुलिस एनकाउंटर का सहारा ले रही है।

    कोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि ऐसे निर्देश जारी किए गए और उनका पालन किया गया तो संबंधित जिले के पुलिस प्रमुख यानी SP SSP या कमिश्नर व्यक्तिगत रूप से कोर्ट की अवमानना के लिए जिम्मेदार होंगे। इस स्थिति में उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे निर्देश और प्रथाएं कानून व्यवस्था के नाम पर अनुचित और असंवैधानिक हैं।अदालत ने यह भी कहा कि हाफ एनकाउंटर प्रथा से न केवल आरोपी का जीवन खतरे में पड़ता है बल्कि यह पुलिस के प्रति आम जनता के विश्वास को भी प्रभावित करती है। न्यायालय ने डीजीपी और गृह सचिव से पूछा कि इस तरह के निर्देश किसी प्रकार से नीति या प्रशिक्षण का हिस्सा तो नहीं बन गए।

    हाईकोर्ट के आदेश के बाद यूपी पुलिस में हलचल मची है और सभी वरिष्ठ अधिकारी इस मामले में लिखित रूप से स्पष्ट जवाब देने की तैयारी में हैं। पुलिस विभाग का कहना है कि कानून का पालन किया जाएगा और भविष्य में किसी भी प्रकार की असंवैधानिक कार्रवाई नहीं होने दी जाएगी।इस आदेश को पुलिस प्रशासन और न्यायपालिका के बीच जवाबदेही और संवैधानिक अधिकारों की सीमा तय करने वाला एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • MP Morning News: रीवा में भैरव लोक का उदय, IFS मीट का भव्य समापन और PM आवास योजना में बड़ा बदलाव

    MP Morning News: रीवा में भैरव लोक का उदय, IFS मीट का भव्य समापन और PM आवास योजना में बड़ा बदलाव

    भोपाल/रीवा । मध्य प्रदेश आज विकास और परंपरा के अनूठे संगम का साक्षी बनने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज विंध्य क्षेत्र के रीवा जिले के प्रवास पर रहेंगे, जहाँ वे सहस्राब्दी प्राचीन विरासत को आधुनिक स्वरूप में जनता को समर्पित करेंगे। इसके साथ ही राजधानी भोपाल में भारतीय वन सेवा के अधिकारियों का समागम अपने अंतिम पड़ाव पर है, और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर एक महत्वपूर्ण व्यवस्था लागू की गई है।

    रीवा को मिलेगी भैरव लोक की सौगात

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज रीवा जिले के गुढ़ क्षेत्र में लगभग 1000 वर्ष पुरानी विश्वविख्यात भैरव प्रतिमा के परिसर में विकसित किए गए भैरव लोक काल भैरव लोक का लोकार्पण करेंगे। मुख्यमंत्री दोपहर करीब 1:50 बजे गुढ़ पहुँचकर भगवान भैरवनाथ की पूजा-अर्चना करेंगे। इसके पश्चात वे एक विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे और क्षेत्र के लिए करोड़ों रुपये के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन करेंगे। मुख्यमंत्री के दौरे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा स्वास्थ्य सेवाओं से भी जुड़ा है; वे श्यामशाह मेडिकल कॉलेज और संजय गांधी अस्पताल पहुँचकर सुपर स्पेशलिटी भवन के विस्तार कार्यों का बारीकी से निरीक्षण करेंगे।

    IFS सर्विस मीट 2026: खेल और संस्कृति का संगम

    राजधानी भोपाल में चल रही दो दिवसीय IFS सर्विस मीट 2026′ का आज समापन होने जा रहा है। भारतीय वन सेवा के अधिकारियों के इस समागम का दूसरा दिन खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों के नाम रहेगा। सुबह से ही मैनिट MANIT के स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में क्रिकेट और बैडमिंटन जैसे मुकाबलों में अधिकारी अपना दमखम दिखा रहे हैं। वहीं, शाम को भारतीय वन प्रबंधन संस्थान IIFM के परिसर में सांस्कृतिक संध्या का आयोजन होगा, जहाँ अधिकारी और उनके परिजन कलात्मक प्रस्तुतियां देंगे। यह मीट वन संरक्षण के साथ-साथ अधिकारियों के बीच समन्वय और सौहार्द बढ़ाने का एक बड़ा मंच साबित हुई है।

    PM आवास योजना: अब तीन किस्तों में मिलेगी राशि

    ग्रामीण क्षेत्र के आवासहीनों के लिए एक बड़ी खबर है। प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत अब पक्के मकान के निर्माण के लिए मिलने वाली सहायता राशि का भुगतान तीन समान किस्तों में किया जाएगा। नए वित्तीय वर्ष 2025-26 के लाभार्थियों को अब ₹1,20,000 की कुल राशि ₹40,000-₹40,000 की तीन किस्तों में दी जाएगी। यह व्यवस्था निर्माण कार्य की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए लागू की गई है। पहली किस्त स्वीकृति के तुरंत बाद, दूसरी किस्त नींव प्लिंथ लेवल तैयार होने पर और तीसरी किस्त छत के स्तर लिंटल लेवल तक काम पहुँचने पर सीधे हितग्राही के खाते में भेजी जाएगी।

  • शहर में तेंदुआ देखा गया वन विभाग ने सुरक्षित पकड़कर किया रेस्क्यू

    शहर में तेंदुआ देखा गया वन विभाग ने सुरक्षित पकड़कर किया रेस्क्यू


    इंदौर के देव गुराडिया इलाके के पास शनिवार सुबह रिहायशी क्षेत्र में तेंदुए की गतिविधि ने स्थानीय लोगों में दहशत फैला दी। स्थानीय लोगों ने खेत और मकानों के आसपास जंगली जानवर जैसी मूवमेंट देखी और तुरंत वन विभाग को सूचित किया। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और इलाके की घेराबंदी कर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।

    कुछ देर की मशक्कत के बाद तेंदुए को सुरक्षित तरीके से पकड़ लिया गया। इस दौरान इलाके में जमा भीड़ को हटा कर स्थिति को काबू में किया गया। वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक यह तेंदुआ अक्सर पास के रालामंडल जंगल से भटक कर शहरी इलाके की ओर आ जाता है। पिछले वर्षों में भी देव गुराडिया और आसपास की कॉलोनियों में तेंदुए दिखाई देने की कई घटनाएं दर्ज की गई हैं।रेस्क्यू के बाद तेंदुए को जांच और मेडिकल परीक्षण के लिए कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय लाया गया। प्रभारी डॉक्टर उत्तम यादव ने बताया कि पकड़ा गया तेंदुआ फीमेल है और फिलहाल स्वस्थ नजर आ रहा है। तेंदुए का फिजिकल एनालिसिस और मेडिकल एग्जामिनेशन किया जा रहा है ताकि किसी प्रकार की चोट या बीमारी का पता लगाया जा सके।

    वन विभाग का कहना है कि पूरी तरह फिट पाए जाने पर तेंदुए को वापस जंगल में छोड़ दिया जाएगा। विभाग के अधिकारी इसे शहरी इलाकों में सुरक्षित छोड़ने के लिए उपयुक्त समय और स्थान का इंतजार कर रहे हैं। वन विभाग का मानना है कि रिहायशी इलाकों में जंगली जानवरों की मूवमेंट में वृद्धि का कारण आसपास के जंगलों और मानव गतिविधियों का बढ़ना है।

    स्थानीय लोगों से भी अपील की गई है कि तेंदुए या अन्य जंगली जानवर दिखाई देने पर किसी भी तरह का खतरा  लें और तुरंत वन विभाग को सूचित करें। वन विभाग ने इस घटना से जुड़ी पूरी प्रक्रिया को रिकॉर्ड किया है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा उपायों को और मजबूत किया जाएगा।

    विशेषज्ञों का कहना है कि शहर और जंगल के बीच बढ़ता इंटरेक्शन वन्य जीवों और लोगों दोनों के लिए जोखिम बढ़ाता है। इस मामले में रेस्क्यू टीम की तत्परता ने न केवल तेंदुए की जान बचाई बल्कि स्थानीय निवासियों को भी सुरक्षित रखा।वन विभाग इस घटना को सफल ऑपरेशन के रूप में देख रहा है और तेंदुए को जल्द ही वापस जंगल में छोड़कर उसकी प्राकृतिक स्थिति में लौटाने की तैयारी कर रहा है। इस तरह की घटनाएं यह भी दर्शाती हैं कि वन्यजीवों और शहरी क्षेत्रों के बीच तालमेल बनाए रखना कितना आवश्यक है।