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  • तेल कंपनियां कमाई कर रहीं या नुकसान झेल रही हैं? पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर सरकार और बाजार विशेषज्ञ आमने-सामने

    तेल कंपनियां कमाई कर रहीं या नुकसान झेल रही हैं? पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर सरकार और बाजार विशेषज्ञ आमने-सामने

    नई दिल्ली । देश में पेट्रोल और डीजल की बिक्री से सरकारी तेल कंपनियों को मुनाफा हो रहा है या वे अब भी घाटे में हैं, इसे लेकर सरकार और बाजार विशेषज्ञों के बीच मतभेद गहरा गया है। एक ओर ब्रोकरेज फर्मों का कहना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में तेल कंपनियां प्रति लीटर अच्छा लाभ कमा रही हैं, वहीं सरकार और रिफाइनरी अधिकारियों का दावा है कि विशेष रूप से डीजल की बिक्री पर कंपनियां अब भी नुकसान उठा रही हैं। इस विरोधाभास ने ईंधन मूल्य निर्धारण के तरीके को लेकर नई बहस शुरू कर दी है।

    ब्रोकरेज फर्मों के आकलन के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की मौजूदा कीमतों को देखते हुए सरकारी तेल विपणन कंपनियों का मार्जिन सकारात्मक स्थिति में होना चाहिए। उनका मानना है कि वर्तमान मूल्य स्तर पर पेट्रोल और डीजल की खुदरा बिक्री से कंपनियों को प्रति लीटर उल्लेखनीय लाभ मिल रहा है। इसी आधार पर बाजार विशेषज्ञ तेल कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन को मजबूत मान रहे हैं।

    इसके विपरीत सरकार और रिफाइनरी क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि वास्तविक स्थिति केवल कच्चे तेल की कीमत देखकर तय नहीं की जा सकती। उनका तर्क है कि तैयार पेट्रोल और डीजल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें अभी भी अपेक्षाकृत ऊंची बनी हुई हैं, जिसके कारण लागत बढ़ रही है। उनके अनुसार डीजल पर नुकसान अभी भी अधिक है, जबकि पेट्रोल पर भी सीमित स्तर का घाटा बना हुआ है, हालांकि पहले की तुलना में इसमें कमी आई है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि ईंधन की खुदरा कीमतें केवल कच्चे तेल के भाव पर निर्भर नहीं करतीं। मूल्य निर्धारण में तैयार पेट्रोल और डीजल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें, समुद्री परिवहन लागत, बीमा व्यय, आयात से जुड़ी लागत और रुपये-डॉलर की विनिमय दर जैसे कई कारक शामिल होते हैं। यही कारण है कि कई बार कच्चा तेल सस्ता होने के बावजूद तैयार ईंधन की लागत अपेक्षाकृत अधिक बनी रहती है।

    हाल के महीनों में सरकार ने उत्पाद शुल्क में कटौती करने के साथ-साथ पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में भी बदलाव किए हैं। इन कदमों का उद्देश्य उपभोक्ताओं को राहत देने के साथ-साथ बाजार की परिस्थितियों के अनुरूप मूल्य संतुलन बनाए रखना रहा है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तैयार ईंधन और कच्चे तेल की कीमतों के बीच मौजूद अंतर अभी भी कंपनियों की लागत को प्रभावित कर रहा है।

    ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि वैश्विक बाजार में केवल कच्चे तेल की कीमतों के आधार पर तेल कंपनियों के लाभ या हानि का सही आकलन नहीं किया जा सकता। रिफाइनिंग मार्जिन, आयात लागत, मुद्रा विनिमय दर और तैयार उत्पादों की वैश्विक मांग जैसे कारकों का भी अंतिम वित्तीय परिणाम पर सीधा प्रभाव पड़ता है।

    मौजूदा विवाद यह संकेत देता है कि सरकार और बाजार विशेषज्ञ अलग-अलग मानकों के आधार पर तेल कंपनियों की वित्तीय स्थिति का आकलन कर रहे हैं। जहां ब्रोकरेज संस्थाएं बाजार आधारित गणनाओं को प्रमुख मान रही हैं, वहीं सरकारी पक्ष वास्तविक खरीद लागत और परिचालन खर्च को अधिक महत्व दे रहा है।

    आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक ईंधन बाजार की स्थिति और रुपये की विनिमय दर में होने वाले उतार-चढ़ाव से यह स्पष्ट होगा कि सरकारी तेल कंपनियों का लाभ-हानि संतुलन किस दिशा में आगे बढ़ता है। फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतों और तेल कंपनियों की कमाई को लेकर दोनों पक्षों के दावों के बीच अंतर बना हुआ है।

  • देवास से जैश मॉड्यूल का संदिग्ध गिरफ्तार, गुजरात ATS का दावा- पाकिस्तान हैंडलर्स से जुड़े थे तार

    देवास से जैश मॉड्यूल का संदिग्ध गिरफ्तार, गुजरात ATS का दावा- पाकिस्तान हैंडलर्स से जुड़े थे तार


    देवास । मध्य प्रदेश के देवास से गुजरात एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) ने जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से जुड़े कथित मॉड्यूल के एक संदिग्ध सदस्य को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार युवक की पहचान 18 वर्षीय बिलाल दुरानी मोहम्मद अम्मार घाघा उर्फ अबू दुजाना के रूप में हुई है। गुजरात ATS का दावा है कि वह उस मॉड्यूल का हिस्सा था, जिसके खिलाफ गुजरात और मध्य प्रदेश में संयुक्त अभियान चलाकर कुल आठ संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और आरोपों की न्यायिक प्रक्रिया अभी शेष है।

    गुरुवार रात गुजरात ATS की टीम देवास के नाहर दरवाजा क्षेत्र स्थित गफूर बस्ती पहुंची। स्थानीय पुलिस की मौजूदगी में टीम ने युवक के घर पर पूछताछ की और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे अपनी अभिरक्षा में ले लिया। देवास पुलिस अधीक्षक पुनीत गहलोद ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि गुजरात ATS एक संदिग्ध की तलाश में आई थी और नियमानुसार उसे एजेंसी को सौंप दिया गया।

    गुजरात ATS के अनुसार, खुफिया सूचना के आधार पर पता चला था कि कुछ लोग प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की विचारधारा का प्रचार करने और गुजरात में उसका नेटवर्क तैयार करने की कोशिश कर रहे थे। इसके बाद तकनीकी और मानव खुफिया इनपुट के आधार पर गुजरात के बनासकांठा, मेहसाणा, पाटन, नवसारी तथा मध्य प्रदेश के देवास सहित विभिन्न स्थानों पर एक साथ कार्रवाई की गई। एजेंसी का दावा है कि आरोपियों ने कथित तौर पर “दारुल इस्लाम गुजरात जैश-ए-मोहम्मद” नाम से एक संगठन बनाकर नए लोगों को जोड़ने का प्रयास किया।

    जांच एजेंसी का यह भी दावा है कि गिरफ्तार आरोपियों के पाकिस्तान स्थित कथित हैंडलर्स अब्दुल्ला और मोहम्मद उमर से संपर्क के सबूत मिले हैं। ATS के अनुसार, मॉड्यूल को लगभग तीन लाख रुपए की फंडिंग मिली थी, जिससे एक पुरानी कार खरीदी गई। आरोप है कि जैश से जुड़े साहित्य का गुजराती भाषा में अनुवाद कर कट्टरपंथी विचारधारा फैलाने का प्रयास भी किया जा रहा था।

    ATS ने छापेमारी के दौरान मोबाइल फोन, कथित जिहादी दस्तावेज, ऑडियो-वीडियो सामग्री, तस्वीरें, संगठन का झंडा, मसूद अजहर से जुड़ी किताबें, उर्दू में लिखे पत्र और गुजराती में अनूदित साहित्य बरामद करने का दावा किया है। इन आधारों पर सभी आठ आरोपियों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। मामले की जांच जारी है और आरोपों की पुष्टि न्यायालय में होने वाली सुनवाई और जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।

  • RBI की बड़ी कार्रवाई, नियमों के उल्लंघन पर बैंक ऑफ बड़ौदा और GIC हाउसिंग फाइनेंस पर लाखों रुपये का जुर्माना

    RBI की बड़ी कार्रवाई, नियमों के उल्लंघन पर बैंक ऑफ बड़ौदा और GIC हाउसिंग फाइनेंस पर लाखों रुपये का जुर्माना

    नई दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग नियमों के पालन में लापरवाही बरतने पर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक बैंक ऑफ बड़ौदा और जीआईसी हाउसिंग फाइनेंस के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। केंद्रीय बैंक ने दोनों संस्थानों पर कुल 66.7 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई नियामकीय प्रावधानों के उल्लंघन के मामलों में की गई है। साथ ही RBI ने स्पष्ट किया है कि इस निर्णय का ग्राहकों के खातों, जमा राशि या बैंकिंग सेवाओं पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

    RBI के अनुसार बैंक ऑफ बड़ौदा पर 63.6 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। जांच के दौरान पाया गया कि बैंक ने कुछ ऋण खातों में निर्धारित सीमा से अधिक ब्याज वसूला, जो लागू नियामकीय निर्देशों के अनुरूप नहीं था। इसके अलावा बैंक कुछ ग्राहकों से संबंधित केवाईसी दस्तावेज निर्धारित समय के भीतर केंद्रीय रजिस्ट्री में अपलोड करने में भी विफल रहा। केंद्रीय बैंक ने इसे अनुपालन संबंधी गंभीर चूक माना है।

    वहीं जीआईसी हाउसिंग फाइनेंस पर 3.1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। जांच में सामने आया कि कंपनी अपने ऋण खातों के जोखिम का निर्धारित अंतराल पर मूल्यांकन नहीं कर रही थी। नियमानुसार ऐसे खातों की कम से कम प्रत्येक छह महीने में समीक्षा की जानी चाहिए, लेकिन कंपनी इस प्रक्रिया का समय पर पालन नहीं कर सकी। इसी आधार पर नियामकीय कार्रवाई की गई।

    RBI ने कहा है कि वित्तीय संस्थानों के लिए नियामकीय मानकों का पालन अनिवार्य है। बैंकिंग प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और ग्राहकों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर निरीक्षण और अनुपालन की समीक्षा की जाती है। जहां भी नियमों के उल्लंघन के मामले सामने आते हैं, वहां निर्धारित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाती है।

    केंद्रीय बैंक ने यह भी स्पष्ट किया कि लगाया गया जुर्माना केवल नियामकीय कमियों से संबंधित है और इसका उद्देश्य संस्थानों को नियमों के बेहतर पालन के लिए प्रेरित करना है। यह कार्रवाई किसी ग्राहक के खाते, जमा राशि, ऋण अनुबंध या बैंकिंग लेनदेन की वैधता पर कोई प्रभाव नहीं डालती। ग्राहकों की धनराशि पूरी तरह सुरक्षित है और बैंकिंग सेवाएं पहले की तरह सामान्य रूप से जारी रहेंगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में RBI ने अनुपालन मानकों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। बैंकों और वित्तीय संस्थानों से अपेक्षा की जाती है कि वे ग्राहक हितों की सुरक्षा, पारदर्शिता और जोखिम प्रबंधन से जुड़े सभी दिशा-निर्देशों का समय पर पालन करें। नियमों में किसी भी प्रकार की लापरवाही पर केंद्रीय बैंक लगातार निगरानी रख रहा है और आवश्यक होने पर दंडात्मक कार्रवाई भी कर रहा है।

    इस ताजा कार्रवाई को भी वित्तीय क्षेत्र में बेहतर प्रशासन और मजबूत नियामकीय व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। RBI का संदेश स्पष्ट है कि बैंकिंग प्रणाली में नियमों के पालन से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा और भविष्य में भी ऐसे मामलों में आवश्यक कार्रवाई जारी रहेगी।

  • महाकाल की दिव्य भस्म आरती, रजत ॐ-बिल्वपत्र मुकुट और रुद्राक्ष माला से हुआ अलौकिक श्रृंगार

    महाकाल की दिव्य भस्म आरती, रजत ॐ-बिल्वपत्र मुकुट और रुद्राक्ष माला से हुआ अलौकिक श्रृंगार


    उज्जैन । उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार तड़के ब्रह्ममुहूर्त के दौरान भगवान महाकाल की दिव्य भस्म आरती श्रद्धा और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुई। सुबह चार बजे मंदिर के पट खुलने के साथ ही गर्भगृह में विराजमान सभी देवी-देवताओं का विधिवत पूजन किया गया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक कर दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से तैयार पंचामृत से अभिषेक किया गया। प्रथम घंटाल के साथ हरि ॐ का जल अर्पित कर विशेष पूजा संपन्न हुई।

    अभिषेक के बाद भगवान महाकाल का आकर्षक और दिव्य श्रृंगार किया गया। उन्हें रजत का ॐ और बिल्वपत्र मुकुट धारण कराया गया। रुद्राक्ष की माला, रजत की मुंडमाला, डमरू और शेषनाग से सुशोभित रजत मुकुट से अलंकृत किया गया। मस्तक पर त्रिपुंड और त्रिशूल का तिलक सजाया गया, जबकि सुगंधित पुष्पों की मनमोहक मालाओं से बाबा महाकाल का स्वरूप और भी दिव्य दिखाई दिया।

    श्रृंगार के पश्चात भगवान गणेश, माता पार्वती और भगवान कार्तिकेय का पूजन किया गया। भगवान महाकाल को फल और मिष्ठान का नैवेद्य अर्पित करने के बाद कपूर आरती की गई। इसके उपरांत महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से पवित्र भस्म अर्पित की गई और परंपरानुसार भस्म आरती संपन्न हुई।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी आस्था के साथ देशभर से पहुंचे श्रद्धालुओं ने भस्म आरती में शामिल होकर बाबा महाकाल के दर्शन किए और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। आरती के दौरान पूरा मंदिर परिसर ‘जय श्री महाकाल’ के जयघोष से गूंज उठा और भक्तिमय वातावरण ने सभी श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति से भर दिया।

  • रेवाबाग में आबकारी का छापा, 63 बल्क लीटर अवैध शराब बरामद; तस्कर फरार

    रेवाबाग में आबकारी का छापा, 63 बल्क लीटर अवैध शराब बरामद; तस्कर फरार


    देवास । देवास में अवैध शराब के कारोबार के खिलाफ आबकारी विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 7 पेटी देशी शराब जब्त की है। मुखबिर से मिली सूचना पर रेवाबाग क्षेत्र में की गई इस कार्रवाई के दौरान करीब 63 बल्क लीटर अवैध शराब बरामद हुई, जिसकी अनुमानित कीमत 33,400 रुपए बताई जा रही है। हालांकि कार्रवाई के दौरान आरोपी मौके से फरार होने में सफल रहा। आबकारी विभाग ने उसके खिलाफ प्रकरण दर्ज कर तलाश शुरू कर दी है।

    आबकारी विभाग को सूचना मिली थी कि रेवाबाग क्षेत्र में एक व्यक्ति अपने घर के पास बड़ी मात्रा में अवैध शराब छिपाकर रखता है और स्कूटर के जरिए शहर की अलग-अलग गलियों में इसकी सप्लाई करता है। सूचना के आधार पर विभाग की टीम ने शुक्रवार को इलाके में दबिश दी।

    छापेमारी के दौरान टीम ने मौके से 4 पेटी देशी मसाला और 3 पेटी देशी प्लेन शराब बरामद की। कुल मिलाकर 63 बल्क लीटर अवैध मदिरा जब्त की गई। अधिकारियों के मुताबिक आरोपी आबकारी टीम के पहुंचने से पहले ही मौके से भाग निकला।

    आबकारी विभाग ने जब्त शराब को अपने कब्जे में लेकर आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। अब उसके ठिकानों और संभावित संपर्कों की जानकारी जुटाई जा रही है ताकि जल्द गिरफ्तारी की जा सके।

    कार्रवाई आबकारी उपनिरीक्षक प्रेम यादव के नेतृत्व में की गई। विभाग का कहना है कि जिले में अवैध शराब के निर्माण, भंडारण और तस्करी के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा तथा ऐसे कारोबार में शामिल लोगों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।

  • महंगा हुआ कच्चा तेल, नहीं बढ़े खुदरा दाम; पेट्रोल-डीजल की बिक्री पर सरकारी तेल कंपनियों को प्रति लीटर हो रहा नुकसान

    महंगा हुआ कच्चा तेल, नहीं बढ़े खुदरा दाम; पेट्रोल-डीजल की बिक्री पर सरकारी तेल कंपनियों को प्रति लीटर हो रहा नुकसान

    नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और घरेलू स्तर पर पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों में सीमित बदलाव के कारण सरकारी तेल विपणन कंपनियों की वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ गया है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में कंपनियों का रिटेल मार्जिन सकारात्मक रहने के बजाय नुकसान में पहुंच गया। इससे स्पष्ट है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव का सीधा असर घरेलू ईंधन कारोबार पर पड़ रहा है।

    उपलब्ध वित्तीय आकलनों के अनुसार अप्रैल से जून 2026 की तिमाही के दौरान सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को पेट्रोल की खुदरा बिक्री पर प्रति लीटर लगभग 6 रुपये और डीजल पर करीब 18.9 रुपये का नुकसान हुआ। इसके विपरीत पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यही कंपनियां पेट्रोल और डीजल दोनों पर प्रति लीटर लाभ दर्ज कर रही थीं। एक वर्ष के भीतर रिटेल मार्जिन का मुनाफे से नुकसान में बदल जाना ऊर्जा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और परिष्कृत ईंधन की कीमतों में तेज वृद्धि रही। हालांकि वैश्विक बाजार में लागत बढ़ने के बावजूद घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल के दाम उसी अनुपात में नहीं बढ़ाए गए। परिणामस्वरूप कंपनियों की लागत और बिक्री मूल्य के बीच का अंतर बढ़ गया, जिससे रिटेल मार्जिन नकारात्मक हो गया।

    सरकारी तेल कंपनियां रिफाइनरी से तैयार ईंधन की कीमतें अंतरराष्ट्रीय मानकों और आयात लागत के आधार पर तय करती हैं। इसके बाद परिवहन, भंडारण, विपणन, वितरण, डीलर कमीशन और अन्य परिचालन खर्च जोड़कर अंतिम खुदरा मूल्य निर्धारित किया जाता है। जब वैश्विक कीमतें तेजी से बढ़ती हैं और घरेलू खुदरा कीमतें स्थिर रहती हैं, तब कंपनियों को प्रति लीटर नुकसान उठाना पड़ता है।

    ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों के अनुसार अप्रैल-जून तिमाही के दौरान पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस और विमान ईंधन की बिक्री में भी कंपनियों पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव बना रहा। बाजार मूल्य की तुलना में कम दरों पर आपूर्ति करने के कारण सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को कुल मिलाकर भारी राजस्व प्रभाव का सामना करना पड़ा। इससे कंपनियों की परिचालन आय और लाभप्रदता दोनों प्रभावित हुई हैं।

    विश्लेषकों का मानना है कि वर्ष 2022 में वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों और यूक्रेन संघर्ष के बाद अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ी थी। इसके बाद घरेलू ईंधन मूल्य निर्धारण की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक संतुलित और नियंत्रित तरीके से अपनाई गई। इस नीति का लाभ तब मिलता है जब वैश्विक बाजार में तेल सस्ता होता है और घरेलू कीमतें स्थिर रहती हैं, लेकिन कीमतों में तेजी आने पर यही स्थिति कंपनियों के लिए नुकसान का कारण बन जाती है।

    ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले महीनों में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें, विनिमय दर और घरेलू मूल्य निर्धारण नीति तेल कंपनियों की वित्तीय स्थिति तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। यदि वैश्विक बाजार में कीमतों का दबाव लंबे समय तक बना रहता है और खुदरा कीमतों में समानुपातिक संशोधन नहीं होता, तो सरकारी तेल कंपनियों के रिटेल मार्जिन पर दबाव जारी रह सकता है। वहीं कीमतों में नरमी आने की स्थिति में कंपनियों की लाभप्रदता में दोबारा सुधार की संभावना भी बनी रहेगी।

  • मानसून ने इंदौर को किया तरबतर, सीजन में 11 इंच से ज्यादा बारिश; अगले 3-4 दिन भी राहत नहीं

    मानसून ने इंदौर को किया तरबतर, सीजन में 11 इंच से ज्यादा बारिश; अगले 3-4 दिन भी राहत नहीं


    इंदौर । इंदौर में मानसून लगातार मेहरबान बना हुआ है। जुलाई की शुरुआत से ही शहर में बारिश का दौर जारी है और पिछले तीन दिनों में छह इंच से अधिक पानी बरस चुका है। शुक्रवार शाम हुई जोरदार बारिश के बाद रातभर रुक-रुककर बारिश होती रही, जबकि शनिवार सुबह भी आसमान में बादल छाए रहे और कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग ने शनिवार को भी तेज बारिश की संभावना जताई है। लगातार हो रही बारिश के चलते इस सीजन में अब तक 11 इंच से अधिक वर्षा रिकॉर्ड की जा चुकी है।

    शुक्रवार शाम करीब दो घंटे तक हुई तेज बारिश के दौरान लगभग ढाई इंच पानी बरसा। इसके बाद देर रात फिर बारिश का सिलसिला शुरू हो गया। लगातार बारिश के बावजूद दिन का अधिकतम तापमान 30 से 32 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है, जबकि न्यूनतम तापमान 21 से 22 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया जा रहा है। बारिश के दौरान मौसम सुहावना हो जाता है, लेकिन कुछ समय बाद उमस का असर भी महसूस किया जा रहा है।

    मौसम वैज्ञानिक अजय कुमार शुक्ला के अनुसार फिलहाल इंदौर पर दोहरे मानसूनी सिस्टम का प्रभाव है। अरब सागर में सक्रिय मौसम प्रणाली का असर मालवा क्षेत्र तक पहुंच रहा है, जबकि बंगाल की खाड़ी में बना सिस्टम मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा और भोपाल संभाग में अच्छी बारिश करा रहा है। दोनों सिस्टम के सक्रिय रहने से पूरे प्रदेश में व्यापक वर्षा हो रही है। मौसम विभाग का अनुमान है कि यह स्थिति अगले तीन से चार दिनों तक बनी रह सकती है और जुलाई का पहला सप्ताह अच्छी बारिश के साथ गुजरने की संभावना है।

    लगातार बारिश के बीच स्वास्थ्य विभाग ने भी लोगों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। विभाग ने चेतावनी दी है कि मानसून के दौरान दूषित पानी और अस्वच्छ वातावरण के कारण डायरिया, टाइफाइड, पीलिया, पैचिश, हैजा, डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

    स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से केवल स्वच्छ और उबला हुआ पानी पीने, ताजा भोजन करने और भोजन से पहले तथा शौच के बाद साबुन से हाथ धोने की अपील की है। दस्त और उल्टी की स्थिति में चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ओआरएस घोल और जिंक का उपयोग करने की सलाह भी दी गई है। साथ ही खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों और सड़े-गले फलों से बचने की हिदायत दी गई है।

    मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए घरों और आसपास पानी जमा नहीं होने देने की सलाह दी गई है। कूलर, फ्रिज की ट्रे, फुलदान, पुराने टायर और अन्य बर्तनों में जमा पानी नियमित रूप से खाली करने को कहा गया है। स्वास्थ्य विभाग ने पूरी आस्तीन के कपड़े पहनने, मच्छरदानी का उपयोग करने और बुखार आने पर तुरंत जांच कराने की अपील की है।

    बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो 1 जुलाई को 63.6 मिमी, 2 जुलाई को 41.9 मिमी और 3 जुलाई को 64.1 मिमी वर्षा दर्ज की गई। इस तरह जुलाई के शुरुआती तीन दिनों में ही 169 मिमी से अधिक बारिश हो चुकी है, जबकि पूरे मानसून सीजन में अब तक करीब 283.9 मिमी यानी 11 इंच से अधिक वर्षा रिकॉर्ड की जा चुकी है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान को देखते हुए आने वाले दिनों में भी इंदौर और आसपास के क्षेत्रों में अच्छी बारिश जारी रहने की संभावना है।

  • नौकरी दिलाने के नाम पर युवक से 44 हजार ऐंठे, इंटरव्यू और GST के बहाने करते रहे वसूली

    नौकरी दिलाने के नाम पर युवक से 44 हजार ऐंठे, इंटरव्यू और GST के बहाने करते रहे वसूली


    इंदौर  इंदौर में ऑनलाइन नौकरी दिलाने के नाम पर साइबर ठगी का मामला सामने आया है। डेटा एंट्री जॉब का झांसा देकर ठगों ने एक छात्र से अलग-अलग बहानों से करीब 44 हजार रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर करा लिए। नौकरी और रिफंड का भरोसा देते हुए आरोपियों ने कई किस्तों में रकम वसूली, लेकिन न तो नौकरी दी और न ही पैसा लौटाया। शिकायत के बाद एमआईजी थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी हैइंदौर 

    पुलिस के अनुसार नेहरू नगर निवासी छात्र राजेश पाटीदार ने शिकायत में बताया कि 17 जून को उसके मोबाइल पर एक युवती का फोन आया। उसने अपना नाम अनुष्का बताया और कहा कि नौकरी के लिए किया गया उसका आवेदन चयनित हो गया है। बातचीत के दौरान उसने व्यक्तिगत जानकारी और कार्य से जुड़ी कुछ जानकारियां लीं तथा बताया कि डेटा एंट्री की नौकरी के लिए उसका चयन किया गया है। साथ ही जल्द ही टेलीफोनिक इंटरव्यू कराने की बात कही गई।

    कुछ देर बाद युवती ने चयन प्रक्रिया पूरी करने के लिए 1800 रुपए जमा करने को कहा। उसने भरोसा दिलाया कि प्रक्रिया पूरी होने के बाद 50 रुपए काटकर बाकी रकम वापस कर दी जाएगी। इसके बाद एक अन्य व्यक्ति ने फोन कर इंटरव्यू की जानकारी दी और मोबाइल पर ही इंटरव्यू लेने की बात कही।

    शिकायत के मुताबिक इंटरव्यू के बाद आरोपियों ने चयन होने का दावा करते हुए फिर 1800 रुपए जमा कराए। इसके बाद सुरक्षा राशि, सर्विस चार्ज और जीएसटी समेत अलग-अलग मदों के नाम पर लगातार पैसे मांगे जाते रहे। हर बार यह आश्वासन दिया गया कि पूरी प्रक्रिया समाप्त होने पर जमा की गई पूरी राशि वापस कर दी जाएगी।

    आरोपियों ने राजेश से कुल आठ ऑनलाइन ट्रांजेक्शन कराए और करीब 44 हजार रुपए अपने खातों में ट्रांसफर करा लिए। रकम जमा कराने के बाद भी न तो नियुक्ति पत्र भेजा गया और न ही किसी प्रकार की नौकरी उपलब्ध कराई गई। जब लगातार संपर्क करने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला, तब छात्र को ठगी का एहसास हुआ।

    इसके बाद पीड़ित ने साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर एमआईजी थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस मोबाइल नंबर, बैंक खातों और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन की जानकारी के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

    पुलिस ने युवाओं से अपील की है कि नौकरी दिलाने के नाम पर रजिस्ट्रेशन फीस, प्रोसेसिंग फीस, सिक्योरिटी डिपॉजिट या जीएसटी जैसी कोई भी रकम मांगने वाले कॉल और मैसेज से सतर्क रहें। किसी भी कंपनी या भर्ती एजेंसी की सत्यता की पुष्टि किए बिना ऑनलाइन भुगतान न करें और संदिग्ध मामलों की तुरंत साइबर हेल्पलाइन या पुलिस को सूचना दें।

  • इंदौर के चर्चित हाउसिंग घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच तेज, करोड़ों की अनियमितताओं पर ED का एक्शन

    इंदौर के चर्चित हाउसिंग घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच तेज, करोड़ों की अनियमितताओं पर ED का एक्शन


    इंदौर  इंदौर की चर्चित नवभारत हाउसिंग सोसायटी घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय ने अपनी जांच तेज करते हुए बड़ी कार्रवाई की है। करीब 4.64 करोड़ रुपए की कथित वित्तीय अनियमितताओं और जमीन घोटाले से जुड़े मामले में ईडी ने पांच आरोपियों के खिलाफ धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत विशेष न्यायालय इंदौर में अभियोजन चालान पेश किया है। अदालत ने मामले का संज्ञान लेते हुए आरोपियों को नोटिस जारी कर सुनवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

    ईडी की कार्रवाई उन आरोपों पर आधारित है जिनमें नवभारत गृह निर्माण सहकारी समिति के तत्कालीन पदाधिकारियों पर सोसायटी की संपत्तियों और फंड में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी करने का आरोप है। इस मामले की शुरुआत इंदौर के एमजी रोड थाना में दर्ज एफआईआर से हुई थी। इसी एफआईआर के आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की जांच शुरू की और वित्तीय लेनदेन की गहन पड़ताल की।

    जांच एजेंसी के अनुसार आरोपी श्रीकांत घंटे सुभाष चंद्र दुबे राकेश जैन अंतिम जोशी और आनंद शाह ने कथित रूप से सोसायटी की संपत्तियों का दुरुपयोग करते हुए योजनाबद्ध तरीके से करोड़ों रुपए की हेराफेरी की। आरोप है कि सोसायटी के फंड से खरीदी गई जमीनों को विभिन्न संस्थाओं और अन्य पक्षों को बेच दिया गया तथा बिक्री से प्राप्त रकम का सही हिसाब सोसायटी के रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया गया। इससे सोसायटी के सदस्यों को आर्थिक नुकसान पहुंचा और फंड का कथित रूप से गबन किया गया।

    ईडी का दावा है कि इस पूरे मामले में सोसायटी के सदस्यों को वास्तविक जानकारी से दूर रखा गया। जांच के दौरान ऐसे संकेत भी मिले कि जमीन बिक्री और वित्तीय लेनदेन से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों को नष्ट या गायब किया गया ताकि कथित गड़बड़ियों का खुलासा न हो सके। एजेंसी का आरोप है कि गबन की गई राशि को बाद में अलग-अलग माध्यमों से वैध दिखाने का प्रयास किया गया और उससे अचल संपत्तियां भी खरीदी गईं। इसी आधार पर मामले में धनशोधन के प्रावधान लागू किए गए हैं।

    इससे पहले भी ईडी इस मामले में कार्रवाई कर चुकी है। एजेंसी ने 12 फरवरी को पीएमएलए के तहत आरोपी श्रीकांत घंटे और सुभाष चंद्र दुबे से जुड़ी करीब 64 लाख रुपए मूल्य की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया था। जांच एजेंसी का कहना है कि यह कार्रवाई कथित अवैध आय से अर्जित संपत्तियों के आधार पर की गई थी।

    ईडी के अनुसार मामले की जांच अभी जारी है और वित्तीय लेनदेन की कई अन्य कड़ियों की भी पड़ताल की जा रही है। यदि जांच में नए तथ्य सामने आते हैं तो आगे और लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल विशेष अदालत में प्रस्तुत चालान के बाद अब मामले की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और आरोपों की सुनवाई होगी।

  • हॉस्टल कारोबार की रंजिश ने लिया हिंसक रूप, आठ युवकों ने बरसाए पत्थर, पुलिस जांच में जुटी

    हॉस्टल कारोबार की रंजिश ने लिया हिंसक रूप, आठ युवकों ने बरसाए पत्थर, पुलिस जांच में जुटी


    भोपाल  राजधानी भोपाल के पिपलानी थाना क्षेत्र स्थित पटेल नगर में शुक्रवार देर रात एक हॉस्टल पर हुए पथराव से इलाके में हड़कंप मच गया। करीब आठ युवकों ने अचानक हॉस्टल पर पत्थर बरसाकर दहशत फैला दी। पूरी घटना आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हो गई है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू करते हुए कुछ संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पुलिस ने शांति भंग की आशंका के आधार पर कुछ लोगों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई भी की हैभोपाल 

    हॉस्टल संचालक दुर्गेश तिवारी और शिवम सिंह ने आरोप लगाया है कि यह हमला कारोबारी रंजिश के चलते कराया गया। उनका कहना है कि क्षेत्र में हॉस्टल संचालन को लेकर प्रतिस्पर्धा है और दूसरे हॉस्टल संचालक पुष्पराज यादव उनके व्यवसाय को नुकसान पहुंचाना चाहते हैं। इसी वजह से उन्होंने अपने साथियों के जरिए हॉस्टल पर हमला करवाया। हालांकि पुलिस ने फिलहाल इन आरोपों की पुष्टि नहीं की है और सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार शुक्रवार रात कुछ युवक अचानक हॉस्टल के बाहर पहुंचे और बिना किसी विवाद के पथराव शुरू कर दिया। कुछ मिनट तक लगातार पत्थर फेंके गए जिससे हॉस्टल परिसर में अफरा तफरी मच गई। घटना में भवन की खिड़कियों और अन्य हिस्सों को नुकसान पहुंचा लेकिन राहत की बात यह रही कि किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।

    घटना की सबसे अहम कड़ी सीसीटीवी फुटेज बनी है जिसमें कथित आरोपी पत्थर फेंकते हुए दिखाई दे रहे हैं। पुलिस अब इन फुटेज के आधार पर सभी आरोपियों की पहचान करने और उनकी भूमिका तय करने में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी साक्ष्यों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है।

    पिपलानी थाना पुलिस के अनुसार शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी गई है। फरियादियों के विस्तृत बयान दर्ज किए जा रहे हैं और घटनास्थल से मिले अन्य साक्ष्यों का भी परीक्षण किया जा रहा है। जांच के दौरान जो भी तथ्य सामने आएंगे उनके आधार पर आरोपियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    पुलिस ने घटना के बाद कुछ संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। इनमें से कुछ लोगों के खिलाफ शांति व्यवस्था भंग होने की आशंका को देखते हुए प्रतिबंधात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें न्यायालय के माध्यम से जेल भेजा गया है। वहीं पुलिस का कहना है कि यदि जांच में पथराव और साजिश के आरोपों की पुष्टि होती है तो संबंधित आरोपियों के खिलाफ कड़ी धाराओं में कार्रवाई की जाएगी।