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  • राज कुमार की अनोखी आदत का हुआ खुलासा, मूडी नेचर के कारण अमिताभ बच्चन से भी ज्यादा कठिन थे संभालना

    राज कुमार की अनोखी आदत का हुआ खुलासा, मूडी नेचर के कारण अमिताभ बच्चन से भी ज्यादा कठिन थे संभालना

    नई दिल्ली ।
    राज कुमार सबको जानी कहकर बात करते थे। आपने फिल्मों में भी कई बार देखा होगा कि वह सामने वाले किरदार को जानी बोलते थे, लेकिन क्या आप जानते हैं कि राज, जानी क्यों बोलते थे। इसके पीछे की वजह काफी अलग है और खास भी। फिल्ममेकर केसी बोकादिया ने इसका खुलासा किया है। उन्होंने यह भी बताया कि राज कुमार को हैंडल करना अमिताभ बच्चन से भी ज्यादा मुश्किल होता था।

    क्यों सबको जानी बोलते थे राज कुमार

    केसी ने इंडिया टीवी से बात करते हुए कहा, ‘उनके कुत्ते का नाम जानी था, यही वजह है कि वह सबको जानी कहते थे। अच्छी बात यह है कि उन्होंने कभी मुझे इस नाम से नहीं बुलाया और मुझे सिर्फ बोकादिया साब बोलते थे।’ हालांकि उन्होंने यह भी क्लीयर किया कि राज के इरादे इसके पीछे नेगेटिव नहीं थे। वह अपने डॉग को काफी प्यार करते थे और उन्हें ये शब्द काफी पसंद था इसलिए वे सबको जानी बोलते थे।
    राज कुमार को कैसे अपनी फिल्म के लिए मनाया
    केसी ने आगे बताया कि कैसे उनकी फिल्म पुलिस और मुजरिम के लिए उन्होंने राज कुमार को लिया था। वह बोले, मैंने उन्हें एक शाम को फोन किया। हमने फिर अगले दिन मुहर्रत शॉट प्लान किया। अगर वह किसी इंसान का चेहरा नहीं जानते तो वह फिल्म नहीं करते। फिल्म की स्टोरी उनके लिए दूसरे नंबर पर होती थी। अब जैसे ही उन्होंने फोन उठाया मैंने कहा राज साहब, मैं आपको एक लाइन कहना चाहता हूं। वह मान गए। उन्हें हैंडल करना, अमिताभ बच्चन को हैंडल करने से काफी मुश्किल होता था। बच्चन कैलकुलेटिव इंसान हैं और राज साहब मूडी थे।
    अमिताभ बच्चन से ज्यादा मुश्किल था राज कुमार को हैंडल करना
    वह आगे बोले, ‘कैलकुलेटिव इंसान को समझाना आसान होता है, लेकिन जब बात मूडी इंसान की आती है तो ये उनकी मूड पर डिपेंड करता है जो हर समय बदलता रहता है। एक गाय भी तभी दूध देती है जब उसका मन हो, नहीं तो नहीं। तो मेरे सीन के डिसक्रिप्शन को पढ़कर उन्होंने कहा कि ये अच्छा है। मैंने फिर उनसे तुरंत मूवी करने की रिक्वेस्ट की। उन्होंने मुझे कहा कि वह मुझे ना नहीं कह सकते हैं।’
    राज कुमार को ज्यादा पैसे किए ऑफर
    केसी ने आगे कहा, ‘मैंने उनसे पूछा कि उन्हें कितना पैसा चाहिए तो उन्होंने कहा लास्ट टाइम तुमने कितना दिया था? मैंने कहा 21 लाख तो उन्होंने मुझे ज्यादा अमाउंट देने को कहा तो मैंने 24 लाख कहा और फिर तुरंत मैंने 25 लाख का ऑफर दिया। इसके साथ मैंने उनसे एक और फेवर मांगा और रिक्वेस्ट किया कि आप अगली सुबह ही मुझे ज्वाइन करोगे क्योंकि मुहूर्त अगले दिन का शेड्यूल है।’
    पुराना आउटफिट पहन दिया था मुहूर्त शॉट
    राज ने फिर पूछा कि इतनी जल्दी कॉस्ट्यूम कैसे तैयार होंगे तो मैंने उन्हें कहा कि आप पिछले 25-30 साल से वैसे ही लग रहे हो तो न्यू कॉस्ट्यूम की क्या जरूरत। मुझे बस आपसे मुहूर्त शॉट चाहिए। दिलचस्प बात यह है कि राज फिर आए और उन्होंने वही येलो कलर का कोट पहना है जो उन्होंने नीले गगन के तले पहना था, हमराज फिल्म में।

  • IPL 2026 Playoffs: एक अनार, कई दावेदार… आखिरी जगह के लिए जोरदार टक्कर

    IPL 2026 Playoffs: एक अनार, कई दावेदार… आखिरी जगह के लिए जोरदार टक्कर


    नई दिल्ली। इंडियन प्रीमियर लीग 2026 का सीजन अब अपने सबसे रोमांचक पड़ाव पर पहुंच चुका है, जहां प्लेऑफ्स की जंग ने पूरी तरह से समीकरण बदल दिए हैं। क्रिकेट फैंस के लिए यह स्थिति बिल्कुल वैसी हो गई है जैसे कहावत “एक अनार और सौ बीमार”, फर्क सिर्फ इतना है कि यहां एक नहीं बल्कि सिर्फ एक प्लेऑफ स्पॉट के लिए पांच टीमें मैदान में जूझ रही हैं।

    अब तक मिली जानकारी के अनुसार, रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB), सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) और गुजरात टाइटन्स (GT) ने प्लेऑफ्स में अपनी जगह पक्की कर ली है। SRH की चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ जीत के बाद यह तस्वीर और साफ हो गई कि टॉप-4 की तीन सीटें भर चुकी हैं, जबकि चौथे स्थान के लिए घमासान जारी है।

    इस आखिरी जगह के लिए पंजाब किंग्स (PBKS), राजस्थान रॉयल्स (RR), चेन्नई सुपर किंग्स (CSK), कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) और दिल्ली कैपिटल्स (DC) के बीच जबरदस्त टक्कर देखने को मिल रही है। पॉइंट्स टेबल की स्थिति इतनी पेचीदा हो गई है कि हर मैच सीधे प्लेऑफ समीकरण को बदल सकता है।

    फिलहाल पंजाब किंग्स चौथे स्थान पर बनी हुई है, लेकिन उनके लिए आगे की राह आसान नहीं है क्योंकि अधिकतम 15 अंकों तक ही पहुंचने की संभावना है। वहीं राजस्थान रॉयल्स इस रेस में सबसे मजबूत दावेदार बनकर उभरी है, क्योंकि वह अकेली टीम है जो 16 अंकों तक पहुंचकर सीधे प्लेऑफ का टिकट हासिल कर सकती है।

    राजस्थान के पास अभी दो अहम मुकाबले बचे हैं, और खास बात यह है कि ये दोनों टीमें पहले ही प्लेऑफ रेस से बाहर हो चुकी हैं। ऐसे में अगर राजस्थान दोनों मैच जीत लेती है तो वह बिना किसी अन्य परिणाम पर निर्भर हुए क्वालीफाई कर जाएगी। लेकिन यदि एक भी मैच में हार होती है, तो पूरा गणित बिगड़ जाएगा और फिर पंजाब, KKR और अन्य टीमों के बीच नेट रन रेट का खेल शुरू हो जाएगा।

    दूसरी ओर, कोलकाता नाइट राइडर्स के पास भी उम्मीद बाकी है, लेकिन उन्हें अपने दोनों मैच जीतने होंगे ताकि वे 15 अंकों तक पहुंच सकें। वहीं दिल्ली कैपिटल्स और चेन्नई सुपर किंग्स की उम्मीदें भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं, लेकिन उनका सफर अब दूसरों के परिणामों पर निर्भर हो चुका है।

    इस पूरे परिदृश्य ने IPL 2026 के लीग स्टेज को बेहद रोमांचक बना दिया है, जहां हर ओवर, हर रन और हर विकेट प्लेऑफ की तस्वीर बदल सकता है। क्रिकेट प्रेमियों के लिए यह अंतिम सप्ताह किसी फाइनल से कम नहीं होगा।

  • परिवार के दर्द को दिल में दबाकर मैदान में उतरे ईशान किशन, तूफानी पारी खेल SRH को दिलाई यादगार जीत

    परिवार के दर्द को दिल में दबाकर मैदान में उतरे ईशान किशन, तूफानी पारी खेल SRH को दिलाई यादगार जीत

    नई दिल्ली ।  चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ सनराइजर्स हैदराबाद को आईपीएल 2026 के मैच में जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाले ईशान किशन एक असहनीय दर्द में थे। यह दर्द उनके शरीर में नहीं, बल्कि उनके दिल और दिमाग पर हावी था। 70 रनों की मैच विनिंग पारी खेलने के बाद प्लेयर ऑफ द मैच चुने गए ईशान किशन ने बताया कि उनके कजिन की बहन का हाल ही में देहांत हो गया था। वह उनके लिए आज की पारी की मोटिवेशन था। उनका कजिन स्टैंड्स में था। पूरे परिवार के लिए मैंने यह मैच जीता।

    पोस्ट मैच प्रेजेंटेशन सेरेमनी में ईशान किशन ने कहा, “मुझे लगता है, जब मैं विकेट कीपिंग कर रहा था, तो मुझे लगा कि यह विकेट आसान नहीं है। मुझे अब भी लगता है कि इस टोटल का पीछा करना थोड़ा मुश्किल था, क्योंकि विकेट बिल्कुल भी आसान नहीं था, खासकर जब स्पिनर बॉलिंग कर रहे थे और वे स्लो बॉल बहुत अच्छी तरह से काम कर रही थीं, लेकिन साथ ही, नंबर तीन बैटर के तौर पर, मुझे लगा कि मेरा काम बस गेम खत्म करने की कोशिश करना है, क्योंकि बैट्समैन जो अंदर आ रहे हैं, खासकर बैक एंड पर, उनके लिए सिंगल लेना और साथ ही बाउंड्री लगाना मुश्किल होता है। इसलिए मुझे बस आखिरी ओवर तक खेलना था।”
    IPL 2026 News in Hindi – आईपीएल 2026 न्यूज़,आईपीएल समाचार
    ऐसी पिच पर कैसे अप्रोच करनी चाहिए? इस पर ईशान ने कहा, “यह बस वहां रहने, खुद पर विश्वास करने के बारे में था। कभी-कभी वह सिचुएशन मुश्किल होती है, लेकिन हम सब जानते हैं कि कैसे, ये गेम जीते जाते हैं, क्योंकि आपको खुद पर विश्वास करने की जरूरत होती है। आप किसी भी समय खुद पर शक नहीं कर सकते। इसलिए मैं बस इसे सिंपल रखने की कोशिश कर रहा था, जितना हो सके उतने ओवर बैटिंग करने की कोशिश कर रहा था, क्योंकि लेफ्ट-हैंडर होने के नाते, बीच में होने के कारण, बॉलर्स के लिए हर बार एरिया सही रखना मुश्किल होता है। ऐसे में, मैं बस इसे सिंपल रख रहा था और आखिरी ओवर तक खेलने की कोशिश कर रहा था।”

    परिवार में आई त्रासदी को लेकर ईशान किशन ने कहा, “कभी-कभी मुझे लगता है कि यह मोटिवेशन के बारे में भी है और मेरे लिए मेरा मोटिवेशन आज था, मेरा कजिन बस वहीं खड़ा था। उसने अपनी बहन को खो दिया। यह हमारे परिवार में एक मुश्किल समय था और वे यहां पहली बार मैच देख रहे थे। इसलिए मैं बस उनके लिए गेम फिनिश करना चाहता था और मुझे खुशी है कि वे इस इनिंग्स को देखने के लिए यहां थे और मैं यह गेम खत्म कर पाया। मैं भगवार का शुक्रगुजार हूं। मुझे पावर का एहसास हो रहा था।
  • फिल्म सेट पर अचानक फैली दहशत, सांप के डसने से मचा हड़कंप

    फिल्म सेट पर अचानक फैली दहशत, सांप के डसने से मचा हड़कंप


    नई दिल्ली। बॉलीवुड में आज भले ही VFX और CGI ने फिल्मों की दुनिया को सुरक्षित और तकनीकी रूप से उन्नत बना दिया हो, लेकिन एक दौर ऐसा भी था जब कलाकारों को असली खतरे के बीच शूटिंग करनी पड़ती थी। ऐसा ही एक खौफनाक और चर्चित किस्सा 1982 में आई फिल्म ‘अशांति’ से जुड़ा हुआ है, जिसने उस समय दर्शकों के रोंगटे खड़े कर दिए थे।

    इस फिल्म में एक ऐसा सीन फिल्माया गया था, जो आज भी भारतीय सिनेमा के सबसे जोखिम भरे दृश्यों में गिना जाता है। कहानी के मुताबिक, फिल्म में विलेन का किरदार निभा रहे अभिनेता को एक जिंदा कोबरा सांप के साथ सीन करना था। दृश्य यह था कि वह सांप को अपने हाथ में उठाकर उसकी मौजूदगी को अपने चेहरे के बेहद करीब लाएगा और अपनी जीभ बाहर निकालकर ऐसा दिखाएगा कि सांप उसे काट रहा है।

    सेट पर असली कोबरा मौजूद था और पूरी यूनिट इस सीन को बेहद सतर्कता के साथ शूट कर रही थी। जैसे ही अभिनेता ने सांप को उठाकर अपने चेहरे के करीब लाया और अभिनय शुरू किया, तभी अचानक एक अप्रत्याशित घटना हुई सांप ने उसकी जीभ के बेहद पास डसने की कोशिश की और उसे काट लिया।

    इस घटना के बाद सेट पर कुछ पलों के लिए पूरी तरह सन्नाटा पसर गया। हर कोई घबरा गया, लेकिन बाद में पता चला कि सांप का जहर पहले ही निकाला जा चुका था, इसलिए किसी बड़ी अनहोनी से बचाव हो गया।

    यह खतरनाक सीन फिल्म में अमरीश पुरी द्वारा निभाए गए राजा भीष्म बहादुर सिंह के किरदार का हिस्सा था। उनके इस किरदार को और भी अधिक डरावना और प्रभावशाली दिखाने के लिए यह दृश्य फिल्माया गया था, जिसमें वे खुद को इतना निर्दयी दिखाते हैं कि सांप के जहर का भी उन पर कोई असर नहीं होता।

    फिल्म रिलीज होने के बाद यह सीन इतना चर्चित हुआ कि कई दर्शकों को यकीन ही नहीं हुआ कि यह वास्तविक शूटिंग थी। अमरीश पुरी की दमदार स्क्रीन प्रेजेंस और इस खतरनाक स्टंट ने उन्हें हिंदी सिनेमा के सबसे यादगार खलनायकों में और भी मजबूत जगह दिलाई।

    आज भी ‘अशांति’ का यह सीन भारतीय फिल्म इतिहास के उन दुर्लभ दृश्यों में गिना जाता है, जिन्हें देखकर दर्शक हैरान भी होते हैं और उस दौर की फिल्ममेकिंग के साहस को सलाम भी करते हैं।

  • कोरियोग्राफी में बदलाव के बाद बिना डांसर्स के शूट हुआ गाना

    कोरियोग्राफी में बदलाव के बाद बिना डांसर्स के शूट हुआ गाना


    नई दिल्ली। बॉलीवुड की दिग्गज अदाकारा श्रीदेवी को इंडस्ट्री की पहली महिला सुपरस्टार माना जाता है। अपनी अदाकारी, एक्सप्रेशन और डांस के दम पर उन्होंने लंबे समय तक फिल्म इंडस्ट्री पर राज किया। लेकिन हाल ही में सामने आए एक पुराने किस्से ने उनके करियर से जुड़ा एक दिलचस्प पहलू फिर चर्चा में ला दिया है।

    यह दावा किया है एक इंटरव्यू में श्रीदेवी के साथ बैकग्राउंड डांसर रह चुकी रुबीना खान ने, जिन्होंने बताया कि एक समय ऐसा भी आया जब एक गाने की शूटिंग को लेकर बड़ा बदलाव करना पड़ा।

    मामला फिल्म ‘चांद का टुकड़ा’ के टाइटल ट्रैक ‘तू लगे चांद का टुकड़ा’ से जुड़ा बताया जाता है। इस गाने की कोरियोग्राफी मशहूर कोरियोग्राफर सरोज खान द्वारा की जा रही थी। सेट पर श्रीदेवी को सफेद ड्रेस में एक खास थीम के तहत शूट किया गया था, जबकि करीब 10 बैकग्राउंड डांसर्स को अलग-अलग आउटफिट्स में रखा गया था ताकि गाने को भव्य रूप दिया जा सके।

    हालांकि, शूटिंग के बाद जब गाने का फाइनल वर्जन तैयार हुआ, तो कथित तौर पर श्रीदेवी इससे संतुष्ट नहीं थीं। दावा किया जाता है कि उन्हें लगा कि बैकग्राउंड डांसर्स के बीच उनका लुक अपेक्षाकृत फीका पड़ रहा है। इसी वजह से उन्होंने गाने को लेकर असंतोष जताया और पूरे सीन को दोबारा बनाने की बात सामने आई।

    इसके बाद गाने में बड़ा बदलाव किया गया। पहले जहां सरोज खान इसकी कोरियोग्राफी संभाल रही थीं, वहीं बाद में इसे दोबारा तैयार करने के लिए कोरियोग्राफर चुन्नी प्रकाश को जिम्मेदारी दी गई। नए वर्जन में सबसे बड़ा बदलाव यह था कि गाने को बिना किसी बैकग्राउंड डांसर्स के शूट किया गया, जिससे पूरा फोकस केवल श्रीदेवी पर रहा।

    इस किस्से को लेकर फिल्म इंडस्ट्री में लंबे समय तक चर्चा होती रही है। हालांकि यह पूरी तरह से एक पुराना दावा और इंटरव्यू पर आधारित कहानी है, जिसे लेकर अलग-अलग पक्षों की राय भी सामने आती रही है।

    फिर भी यह घटना उस दौर की फिल्म मेकिंग और स्टार पावर को समझने का एक दिलचस्प उदाहरण मानी जाती है, जहां एक कलाकार की स्क्रीन प्रेजेंस पूरी फिल्म की दिशा बदल सकती थी।

  • ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ सुनकर भावुक हो उठे थे नेहरू, जानिए पूरा किस्सा

    ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ सुनकर भावुक हो उठे थे नेहरू, जानिए पूरा किस्सा


    नई दिल्ली। भारत के सांस्कृतिक और देशभक्ति इतिहास में कुछ गीत ऐसे हैं जो केवल संगीत नहीं, बल्कि भावनाओं और बलिदान की जीवंत तस्वीर बन जाते हैं। ऐसा ही एक अमर गीत है ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’, जिसने न सिर्फ देशवासियों की आंखें नम कीं, बल्कि तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को भी भावुक कर दिया था।

    यह कहानी 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद की है, जब देश अपने कई वीर सैनिकों के बलिदान से शोक में डूबा हुआ था। इसी दर्द को शब्दों में ढालने का काम किया प्रसिद्ध गीतकार कवि प्रदीप (रामचंद्र नारायणजी द्विवेदी) ने। उन्होंने यह गीत शहीदों की याद और उनके परिजनों के सम्मान में लिखा था।

    इस गीत को 26 जनवरी 1963 को गणतंत्र दिवस के अवसर पर दिल्ली के रामलीला मैदान में पहली बार लता मंगेशकर की आवाज में प्रस्तुत किया गया। जैसे ही लता मंगेशकर ने अपनी भावपूर्ण आवाज में इसे गाना शुरू किया, पूरा माहौल गहरे सन्नाटे और भावनाओं में डूब गया। हजारों की भीड़ के साथ-साथ मंच पर मौजूद पंडित जवाहरलाल नेहरू की आंखों में भी आंसू आ गए। यह क्षण भारतीय इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो गया।

    कहा जाता है कि इस गीत ने शहीदों के प्रति सम्मान और देशभक्ति की भावना को एक नई ऊंचाई दी। बाद में कवि प्रदीप ने इस गीत से प्राप्त धनराशि को युद्ध में शहीद हुए सैनिकों की विधवाओं के कल्याण के लिए समर्पित कर दिया।

    कवि प्रदीप का जीवन भी संघर्षों से भरा रहा। उनका जन्म उज्जैन में हुआ था और उन्होंने 1940 में फिल्म ‘बंधन’ से अपने गीत लेखन करियर की शुरुआत की। 1943 में फिल्म ‘किस्मत’ का प्रसिद्ध गीत ‘दूर हटो ऐ दुनिया वालों हिंदुस्तान हमारा है’ उस समय इतना प्रभावशाली था कि ब्रिटिश सरकार इससे नाराज हो गई और उनके खिलाफ गिरफ्तारी के आदेश जारी कर दिए गए। गिरफ्तारी से बचने के लिए उन्हें कुछ समय तक भूमिगत रहना पड़ा।

    इसके बावजूद उन्होंने अपने लेखन को जारी रखा और आगे चलकर ‘जागृति’, ‘जय संतोषी मां’ जैसी फिल्मों के लिए कई अमर गीत लिखे, जो आज भी लोगों की जुबान पर हैं। 1998 में 83 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया, लेकिन उनके गीत आज भी देशभक्ति की प्रेरणा बने हुए हैं।

    ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत के शहीदों के प्रति श्रद्धांजलि और राष्ट्रीय एकता की अमर गाथा बन चुका है।

  • पासपोर्ट विवाद में बढ़ी कांग्रेस नेताओं की मुश्किलें, पवन खेड़ा के बाद अब रणदीप सुरजेवाला को समन

    पासपोर्ट विवाद में बढ़ी कांग्रेस नेताओं की मुश्किलें, पवन खेड़ा के बाद अब रणदीप सुरजेवाला को समन



    नई दिल्ली। असम में कथित पासपोर्ट विवाद को लेकर कांग्रेस नेताओं की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। गुवाहाटी पुलिस की क्राइम ब्रांच ने अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला को पूछताछ के लिए समन जारी किया है। उन्हें 23 मई को क्राइम ब्रांच पुलिस स्टेशन में उपस्थित होने को कहा गया है।

    यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा के पासपोर्ट से जुड़े आरोपों से संबंधित है। असम पुलिस के अनुसार, इस प्रकरण में लगाए गए आरोपों की जांच क्राइम ब्रांच द्वारा की जा रही है।

    इससे पहले कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को भी इसी मामले में समन भेजा गया था। दरअसल, अप्रैल 2026 में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पवन खेड़ा ने आरोप लगाया था कि रिनिकी भुइयां सरमा के पास भारत के अलावा यूएई, मिस्र और एंटीगुआ जैसे देशों के पासपोर्ट भी हैं। साथ ही उन्होंने सरमा परिवार पर विदेशों में अघोषित संपत्ति रखने का आरोप लगाया था।

    इन आरोपों के बाद रिनिकी भुइयां सरमा ने गुवाहाटी क्राइम ब्रांच में पवन खेड़ा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में धोखाधड़ी, जालसाजी, चुनाव के दौरान भ्रामक बयान देने और मानहानि जैसे आरोप लगाए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत मिलने के बाद पवन खेड़ा को जांच में सहयोग करने के निर्देश दिए गए थे।

    पवन खेड़ा 13 मई 2026 को गुवाहाटी क्राइम ब्रांच के सामने पेश हुए थे, जहां उनसे पहले दिन 10 घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की गई। इसके अगले दिन 14 मई को भी उनसे करीब 8 घंटे तक सवाल-जवाब किए गए। अब उन्हें आगे की जांच के लिए 25 मई 2026 को फिर से पेश होने का निर्देश दिया गया है।

  • एमपी में भीषण गर्मी का दौर जारी, खजुराहो 46.8 डिग्री के साथ सबसे गर्म, 22 शहरों में पारा 44 डिग्री के पार

    एमपी में भीषण गर्मी का दौर जारी, खजुराहो 46.8 डिग्री के साथ सबसे गर्म, 22 शहरों में पारा 44 डिग्री के पार


    भोपाल। मध्य प्रदेश इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में है। सोमवार को प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में तेज गर्मी और लू का असर देखने को मिला। छतरपुर जिले के खजुराहो में अधिकतम तापमान 46.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस सीजन का सबसे अधिक तापमान रहा। वहीं नौगांव में पारा 46 डिग्री तक पहुंच गया। प्रदेश के 22 शहरों में पहली बार तापमान 44 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक दर्ज किया गया। राजधानी भोपाल में तापमान 44 डिग्री पहुंचने से सड़कों तक पर गर्मी का असर दिखाई दिया।

    मौसम विभाग के अनुसार, मई महीने में पहली बार पूरा मध्य प्रदेश भीषण गर्मी से तपता नजर आया। खजुराहो में यह अब तक का दूसरा सबसे गर्म दिन रिकॉर्ड किया गया। इससे पहले 29 अप्रैल 1993 को यहां 46.9 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ था। इंदौर में 44.3 डिग्री, ग्वालियर में 43.7 डिग्री, उज्जैन में 44 डिग्री और जबलपुर में 44.2 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। भोपाल, इंदौर, उज्जैन और जबलपुर में इस बार पिछले साल की तुलना में अधिक गर्मी महसूस की गई।

    प्रदेश में सबसे ज्यादा गर्मी छतरपुर जिले में दर्ज हुई, जहां खजुराहो और नौगांव दोनों सबसे गर्म शहर रहे। इसके अलावा राजगढ़ में 45.5 डिग्री, रतलाम में 45.4 डिग्री, खंडवा में 45.1 डिग्री तथा शाजापुर, श्योपुर और मुरैना में 45 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया। दमोह और सतना में 44.8 डिग्री, सागर में 44.7 डिग्री, गुना और रीवा में 44.5 डिग्री, रायसेन में 44.4 डिग्री, खरगोन में 44.2 डिग्री तथा धार में 44.1 डिग्री तापमान दर्ज हुआ। टीकमगढ़ और मंडला में पारा 44 डिग्री तक पहुंच गया। मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक और बढ़ोतरी हो सकती है।

    मंगलवार के लिए मौसम विभाग ने भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर जिलों में तीव्र लू का अलर्ट जारी किया है। इन इलाकों में तापमान 45 डिग्री या उससे अधिक रहने की संभावना जताई गई है। इसके अलावा भोपाल, ग्वालियर, इंदौर, उज्जैन, नीमच, मंदसौर, रतलाम, राजगढ़, धार, खरगोन, खंडवा, देवास, रायसेन, सागर, दमोह, पन्ना, शिवपुरी, मुरैना सहित कई जिलों में हीट वेव की चेतावनी जारी की गई है।

    जबलपुर, झाबुआ, आलीराजपुर, हरदा, नर्मदापुरम, बैतूल, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट, शहडोल, रीवा और सिंगरौली समेत कई जिलों में लू का अलर्ट नहीं है, लेकिन यहां भी तेज गर्मी का असर बना रहेगा। मौसम विभाग ने लोगों को दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलने की सलाह दी है। मौसम विभाग के अनुसार अगले तीन दिन प्रदेश में भीषण गर्मी का दौर जारी रहेगा।

  • क्या आपका बच्चा खाने की समस्या से जूझ रहा है? जानें ईटिंग डिसऑर्डर के संकेत और समाधान

    क्या आपका बच्चा खाने की समस्या से जूझ रहा है? जानें ईटिंग डिसऑर्डर के संकेत और समाधान

    नई दिल्ली ।आज की तेज रफ्तार जीवनशैली और डिजिटल दुनिया के बढ़ते प्रभाव ने बच्चों और किशोरों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाला है। इन्हीं समस्याओं में से एक गंभीर स्थिति ईटिंग डिसऑर्डर यानी खाने से जुड़ी अनियमितता है, जो धीरे-धीरे बच्चे के शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ उसके मानसिक संतुलन को भी प्रभावित कर सकती है। इस समस्या में बच्चा खाने, वजन और शरीर की छवि को लेकर असामान्य सोच विकसित करने लगता है और अक्सर अपनी आत्म-छवि को केवल शरीर के आकार या वजन से जोड़ने लगता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार यह समस्या किसी एक कारण से नहीं होती, बल्कि इसके पीछे कई मानसिक, सामाजिक और पारिवारिक कारक जिम्मेदार हो सकते हैं। बच्चों में बढ़ता तनाव, चिंता और अवसाद जैसी स्थितियां इस समस्या को जन्म दे सकती हैं। इसके अलावा आनुवंशिक प्रभाव, परिवार में पहले से किसी सदस्य को ऐसी समस्या होना और सोशल मीडिया पर दिखाए जाने वाले अवास्तविक सुंदरता के मानक भी बच्चों के सोचने के तरीके को प्रभावित करते हैं। इससे बच्चा अक्सर खुद को दूसरों से कमतर समझने लगता है और खाने-पीने के व्यवहार में बदलाव आने लगता है।

    ईटिंग डिसऑर्डर के शुरुआती संकेतों को समझना बेहद जरूरी है ताकि समय रहते स्थिति को नियंत्रित किया जा सके। इसमें बच्चा खाने के समय घबराहट या बेचैनी महसूस कर सकता है, कुछ विशेष खाद्य पदार्थों से दूरी बनाने लगता है, बार-बार कैलोरी गिनने या वजन को लेकर अत्यधिक चिंता करने लगता है। कई मामलों में बच्चा खाना छिपाकर खाने या खाने के बारे में झूठ बोलने जैसी आदतें भी विकसित कर सकता है। इसके साथ ही अत्यधिक व्यायाम करना और अपने शरीर या दिखावट को लेकर लगातार असंतोष जताना भी इसके संकेतों में शामिल हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह समस्या किसी भी उम्र, लिंग या शारीरिक संरचना वाले बच्चे को प्रभावित कर सकती है। इसलिए माता-पिता और परिवार के सदस्यों की भूमिका इसमें सबसे महत्वपूर्ण होती है। बच्चों से बातचीत करते समय उन्हें डराने या दोष देने की बजाय समझ और सहानुभूति के साथ पेश आना चाहिए। उन्हें यह एहसास दिलाना जरूरी है कि स्वस्थ भोजन और संतुलित जीवनशैली आत्म-देखभाल का हिस्सा है, न कि कोई सजा या दबाव।

    घर के वातावरण में छोटे-छोटे बदलाव भी बड़े प्रभाव डाल सकते हैं। भोजन को ‘अच्छा’ या ‘बुरा’ कहने की बजाय संतुलित और पौष्टिक आहार पर जोर देना चाहिए। बच्चों को अपने शरीर की जरूरतों को समझना सिखाना चाहिए, जैसे भूख लगने पर खाना और पेट भरने पर रुक जाना। माता-पिता को खुद भी स्वस्थ खान-पान और संतुलित जीवनशैली अपनाकर उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए, क्योंकि बच्चे अक्सर अपने आसपास के व्यवहार को ही सीखते हैं।

    इसके अलावा परिवार के साथ समय बिताना, साथ मिलकर खाना बनाना और खाना खाने की प्रक्रिया को सकारात्मक अनुभव बनाना भी मददगार साबित हो सकता है। शारीरिक गतिविधियों को दबाव की बजाय खेल और मनोरंजन के रूप में अपनाना बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत करता है। साथ ही डिजिटल माध्यमों पर नजर रखना भी जरूरी है, ताकि बच्चे ऐसे कंटेंट से दूर रहें जो उन्हें अवास्तविक शरीर छवि और अस्वस्थ तुलना की ओर प्रेरित करता हो।

    यदि स्थिति गंभीर लगे तो देर न करते हुए विशेषज्ञ डॉक्टर या मनोवैज्ञानिक की मदद लेना सबसे सही कदम होता है। सही समय पर पहचान, सही संवाद और उचित मार्गदर्शन से ईटिंग डिसऑर्डर जैसी समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है और बच्चे को एक स्वस्थ व संतुलित जीवन की ओर आगे बढ़ाया जा सकता है।

  • पोषक तत्वों से भरपूर कटहल बना सेहत का साथी, जानें इसके औषधीय और पर्यावरणीय लाभ

    पोषक तत्वों से भरपूर कटहल बना सेहत का साथी, जानें इसके औषधीय और पर्यावरणीय लाभ

    नई दिल्ली ।प्रकृति ने मानव जीवन को संतुलित और स्वस्थ बनाए रखने के लिए अनेक ऐसे फल और सब्जियां प्रदान की हैं, जो न केवल स्वाद में लाजवाब होते हैं बल्कि शरीर को आवश्यक पोषण भी देते हैं। इन्हीं में से एक प्रमुख फल है कटहल, जिसे पोषक तत्वों का खजाना माना जाता है। यह फल अपने अनोखे स्वाद और बहुआयामी गुणों के कारण लंबे समय से भारतीय खानपान और परंपराओं का हिस्सा रहा है।

    कटहल का वैज्ञानिक नाम आर्टोकार्पस हेटरोफिलस है और यह एक मध्यम आकार का सदाबहार पेड़ होता है। इसकी सबसे खास पहचान इसका विशाल आकार वाला फल है, जिसकी बाहरी सतह छोटी-छोटी कांटेदार संरचनाओं से ढकी होती है। अंदर से यह फल न केवल स्वादिष्ट होता है, बल्कि इसमें पोषक तत्वों की भरपूर मात्रा पाई जाती है, जो शरीर के संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए लाभकारी मानी जाती है।

    कटहल विटामिन सी का एक उत्कृष्ट स्रोत माना जाता है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है और संक्रमण से लड़ने में सहायता करता है। इसके नियमित सेवन से शरीर की इम्युनिटी बेहतर होती है, जिससे मौसमी बीमारियों का खतरा कम हो सकता है। इसके अलावा इसमें पर्याप्त मात्रा में फाइबर पाया जाता है, जो पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह कब्ज जैसी समस्याओं को दूर करने में सहायक होता है और आंतों की कार्यक्षमता को सुधारता है।

    इस फल में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट तत्व त्वचा की सेहत को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। ये तत्व शरीर में हानिकारक फ्री रेडिकल्स को कम करते हैं, जिससे त्वचा पर समय से पहले उम्र बढ़ने के प्रभाव धीमे हो सकते हैं और त्वचा अधिक चमकदार और स्वस्थ दिखाई देती है। कटहल का सेवन शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है और थकान को कम करने में भी सहायक माना जाता है, जिससे व्यक्ति अधिक सक्रिय और ऊर्जावान महसूस करता है।

    कटहल को वजन नियंत्रण के लिए भी उपयोगी माना जाता है। इसमें कैलोरी की मात्रा अपेक्षाकृत कम और फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जिससे यह लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराता है और अनावश्यक भोजन की इच्छा को कम करता है। यही कारण है कि इसे संतुलित आहार का एक अच्छा हिस्सा माना जाता है।

    इसके अलावा कटहल के बीज भी अत्यंत पौष्टिक होते हैं। इन बीजों को उबालकर या भूनकर सेवन किया जा सकता है, जो प्रोटीन और अन्य महत्वपूर्ण पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत हैं। यह न केवल शरीर को ताकत देते हैं बल्कि विविध प्रकार के व्यंजनों में भी उपयोग किए जाते हैं।

    कटहल केवल स्वास्थ्य के लिए ही नहीं बल्कि पर्यावरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इसका पेड़ बड़े पैमाने पर ऑक्सीजन प्रदान करता है और मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखने में मदद करता है। साथ ही इसकी खेती किसानों के लिए आय का एक अच्छा स्रोत बन सकती है, जिससे स्थानीय आजीविका को मजबूती मिलती है।

    इस प्रकार कटहल एक ऐसा प्राकृतिक उपहार है जो स्वाद, स्वास्थ्य और पर्यावरण तीनों के संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।