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  • PM मोदी के दिमागी नक्सल वाले बयान पर सियासी घमासान… विपक्षी दलों ने दी कड़ी प्रतिक्रिया

    PM मोदी के दिमागी नक्सल वाले बयान पर सियासी घमासान… विपक्षी दलों ने दी कड़ी प्रतिक्रिया


    नई दिल्ली।
    80वें स्वतंत्रता दिवस (80th Independence Day) (15 अगस्त 2026) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के लाल किले से दिए गए भाषण में “दिमागी नक्सल” (“Intellectual Naxal”) शब्द के इस्तेमाल ने देश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है।

    प्रधानमंत्री ने कहा था कि देश में जहां एक तरफ हथियारबंद नक्सलवाद खात्मे की कगार पर है, वहीं दूसरी तरफ ‘दिमागी नक्सल’ समाज में अराजकता फैलाने और युवाओं को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं। इस बयान पर कांग्रेस, सीपीआई, तृणमूल कांग्रेस और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) समेत तमाम विपक्षी दलों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

    लाल किले से PM मोदी का क्या था बयान?
    प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में वैचारिक विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा, “सुरक्षा बलों ने जंगलों में जारी बंदूकधारी माओवादी उग्रवाद को लगभग ध्वस्त कर दिया है।” उन्होंने आगे कहा, “लेकिन नक्सली विचारधारा वाले लोग अब ‘दिमागी नक्सल’ के रूप में देश को गलत रास्ते पर ले जाने और युवाओं को गुमराह करने के मौकों की तलाश में हैं।”

    पीएम ने कहा कि माओवादी विचारधारा ने दशकों तक सत्ता के गलियारों और सलाहकार समितियों में पैठ बनाकर सरकारी नीतियों को प्रभावित किया था। हमें इन ‘दिमागी नक्सलियों’ को अलग-थलग करना होगा।

    विपक्षी नेताओं का तीखा पलटवार
    प्रधानमंत्री के इस बयान के सामने आते ही विपक्षी दलों ने उन पर स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों और आलोचकों को निशाना बनाने के लिए करने का आरोप लगाया।

    कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया X पर पोस्ट करते हुए लिखा, “पहले उन्होंने अपने विरोधियों को ‘अर्बन नक्सल’ कहा, अब वे उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ कह रहे हैं। यह उनकी हताशा का स्पष्ट संकेत है। पीएम अक्सर उन्हीं नीतियों को अपनाते हैं जिनकी सलाह उनकी तरफ से निशाना बनाए गए लोग देते हैं।”

    वहीं CJP के मुख्य प्रवक्ता और स्वतंत्र पत्रकार सौरभ दास ने पीएम की शब्दावली पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा, “दिमागी नक्सल या ऐसा कोई भी ठप्पा काम नहीं आने वाला, प्रधानमंत्री जी! आप देश के शिक्षित युवाओं को सिर्फ इसलिए ‘नक्सली’ कैसे कह सकते हैं क्योंकि वे आपकी सरकार से सवाल पूछते हैं? यह सरासर अहंकार और युवाओं की समस्याओं को हल करने में नाकामी है।”

    भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के महासचिव डी. राजा ने कहा कि राइट-विंग ट्रॉप्स में ‘एंटी-नेशनल’ और ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ के बाद अब पीएम ने ‘दिमागी नक्सल’ का एक नया निरर्थक लेबल जोड़ दिया है। यह असहमति की आवाजों को दबाने और रोजगार-शिक्षा मांगने वाले युवाओं के मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास है।

    टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने पीएम के बयान पर तंज कसते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, “हां, मैं एक दिमागी नक्सल हूं। परिभाषा के मुताबिक सभी कॉकरोच होते हैं।” 2027 और 2028 के आगामी राज्य विधानसभा चुनावों से पहले लाल किले से आया यह बयान आने वाले दिनों में राष्ट्रीय राजनीति और सुरक्षा बहस का एक मुख्य केंद्र बनने वाला है।

  • गांधी नहीं, भगत सिंह के रास्ते पर आंदोलन… आज हेमंत सोरेन-राहुल गांधी के पुतले जलाएंगे छात्र

    गांधी नहीं, भगत सिंह के रास्ते पर आंदोलन… आज हेमंत सोरेन-राहुल गांधी के पुतले जलाएंगे छात्र


    रांची।
    झारखंड (Jharkhand) में जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं (JPSC and JSSC examinations) में कथित अनियमितता के खिलाफ पिछले 21 दिनों से चल रहे छात्र आंदोलन को अब और तेज करने की तैयारी है। जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच ने आज सरकार पर छात्रों की मांगों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए पहली बार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Chief Minister Hemant Soren) के इस्तीफे की मांग की है। मंच ने आंदोलन के अगले चरण के कार्यक्रमों का भी ऐलान किया है। आज छात्रों ने एक बड़ा ऐलान किया है। आइए जानते हैं छात्रों ने क्या-क्या कहा है।


    ‘गांधी नहीं, भगत सिंह के रास्ते पर’

    सरकार की बेरुखी को देखते हुए प्रदर्शन कर रहे छात्र रवींद्र पासवान ने कहा कि अब आंदोलन गांधी के रास्ते पर नहीं, बल्कि भगत सिंह के रास्ते पर आगे बढ़ेगा। वहीं, मंच के पीयूष कुमार ने सरकार पर छात्रों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार उन्हें ‘कीड़ा-मकोड़ा’ समझ रही है। उन्होंने कहा कि अब छात्र ‘दिशोम गुरु’ के रास्ते पर चलकर अपनी आवाज बुलंद करेंगे।


    आज राहुल गांधी और हेमंत सोरेन का पुतला दहन का प्लान

    मंच के अनुसार, 16 अगस्त को पूरे झारखंड में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला दहन किया जाएगा जबकि 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा। छात्र नेता रविंद्र पासवान ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के प्रति भी नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि सरकार में उनकी बात नहीं सुनी जा रही है, तो उन्हें राज्य सरकार से समर्थन वापस लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्रों के साथ खड़े रहने की बात कहकर उन्हें भ्रमित नहीं किया जाना चाहिए।


    10 अगस्त को छात्रों पर पुलिस ने बरसाई थीं लाठियां

    बता दें कि जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितता के खिलाफ छात्रों का आंदोलन पिछले 21 दिनों से जारी है। 10 अगस्त को राज्य भर से बड़ी संख्या में छात्र रांची पहुंचे थे और विधानसभा घेराव का प्रयास किया था। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव हुआ था। पुलिस ने लाठीचार्ज, आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया था। कार्रवाई में कई छात्रों के घायल होने की बात सामने आई थी। इसके बाद से छात्रों में सरकार के प्रति नाराजगी और बढ़ गई है।

    सदर अस्पताल में 5 दिनों से भर्ती देवेंद्र नाथ महतो की भूख हड़ताल 14वें दिन भी जारी रही. उन्होंने अस्पताल के अपने बेड को छोड़कर कॉरिडोर की जमीन पर लेटकर धरना जारी रखा। देवेंद्र नाथ महतो ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में तिरंगा फहराने और इसके बाद प्रस्तावित तिरंगा यात्रा में शामिल होने के लिए सदर अस्पताल से बाहर निकलने का प्रयास किया था।


    धक्का- मुक्की हुई

    इस संबंध में देवेंद्र नाथ महतो ने पहले ही जिला प्रशासन को पत्र देकर अपनी इच्छा से अवगत कराया था.इसके साथ ही, पुलिसकर्मियों की ओर से उनके साथ जाकर वापस अस्पताल लाने की बात भी कही गई थी. सुबह करीब 8 बजे देवेंद्र नाथ महतो सदर अस्पताल से निकलने लगे. लेकिन उन्हें बार-बार लगभग 10-10 मिनट के अंतराल में रोक दिया गया और काफी देर तक बाहर जाने नहीं दिया गया. इस दौरान उनके साथ धक्का-मुक्की भी हुई।

    करीब 9 से 10 बजे के बीच मौके पर भारी पुलिस बल की मौजूदगी में स्थिति और गंभीर हो गई. देवेंद्र नाथ महतो के अनुसार, उनके साथ धक्का-मुक्की की गई, जिससे उन्हें चोट भी आई. उनके साथ मौजूद साथियों के साथ भी कथित रूप से बल प्रयोग किया गया और कुछ साथियों को उठाकर पटके जाने की बात कही गई. घटना के बाद देवेंद्र नाथ महतो अस्पताल के अपने कमरे के गेट के बाहर बैठ गए और अपना अनशन जारी रखा।


    विधानसभा से जवाब मांगा जाएगा- जयराम महतो

    इसके बाद देवेंद्र नाथ महतो की बातचीत विधायक टाइगर जयराम महतो से हुई. बातचीत के दौरान जयराम महतो ने स्वतंत्रता दिवस के दिन हुई इस घटना को गंभीर और निंदनीय बताया. विधायक टाइगर जयराम महतो ने कहा कि इस पूरे मामले को विधानसभा के माध्यम से उठाया जाएगा और सरकार से जवाब मांगा जाएगा. इसके बाद करीब 2 से 4 बजे के बीच पुलिसकर्मी अस्पताल परिसर से हट गए, जिसके बाद मीडिया प्रतिनिधियों को अस्पताल के अंदर आने का अवसर मिला और उन्होंने पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली।

  • ट्रंप के बयान पर ईरान का पलटवार… कहा- ट्वीट कर देने से नहीं हो जाएगा होर्मुज पर कब्जा

    ट्रंप के बयान पर ईरान का पलटवार… कहा- ट्वीट कर देने से नहीं हो जाएगा होर्मुज पर कब्जा


    वाशिंगटन।
    ईरान (Iran) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ((American President Donald Trump)) के उस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने युद्ध में ईरान को हराने के बाद होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को अपना क्षेत्र घोषित करने की बात कही थी। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने एक्स पर कहा कि होर्मुज को न तो किसी ट्वीट के जरिए कब्जे में लिया जा सकता है और न ही विमानवाहक पोत, सैन्य आदेश या चुनावी भाषण के जरिए। उन्होंने कहा कि ईरान धमकियों से डरने वाला नहीं है और शक्ति प्रदर्शन के आगे झुकता नहीं है। गरीबाबादी ने दो टूक कहा कि होर्मुज ईरान का था, ईरान का है और ईरान का ही रहेगा।

    उप विदेश मंत्री ने डोनाल्ड ट्रंप के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिका को वास्तविकता स्वीकार करनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि अब तक ईरान के खिलाफ अमेरिका को रणनीतिक और भारी नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने कहा कि होर्मुज को बंद या खोलने का फैसला केवल ईरान के नियंत्रण में होगा। जब तक अमेरिका ईरान की शर्तों को स्वीकार नहीं करता और अपनी हार की वास्तविकता को नहीं मानता, तब तक ईरान स्ट्रेट पर लगाए गए अवरोध को जारी रखेगा। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा हुआ है और होर्मुज को फिर से खोलने को लेकर बातचीत में गतिरोध बना हुआ है।


    डोनाल्ड ट्रंप ने क्या किया था दावा

    इससे पहले न्यूयॉर्क के लॉन्ग आइलैंड में रैली को संबोधित करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि ईरान को हराने के बाद वह जल्द ही होर्मुज को अमेरिका का क्षेत्र घोषित करेंगे। ट्रंप ने इससे पहले यह भी दावा किया था कि अमेरिका का इस जलमार्ग पर पूर्ण नियंत्रण है और वह इसे अपने नियंत्रण में बनाए रखेगा। उन्होंने अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को स्टील की दीवार बताते हुए कहा कि ईरान इसका कुछ नहीं कर सकता। ट्रंप ने ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर किए जाने का दावा भी किया और तेहरान पर महंगाई व केवल बयानबाजी करने का आरोप लगाया।

    राष्ट्रपति ट्रंप के दावों के तुरंत बाद ईरान ने उन्हें खारिज करते हुए कहा कि होर्मुज अभी भी बंद है और ईरान की शर्तें स्वीकार होने तक इसे नहीं खोला जाएगा। अमेरिकी अधिकारियों के बार-बार किए जा रहे दावे वास्तविक स्थिति को नहीं बदल सकते। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में शामिल है। यहां तनाव बढ़ने पर वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और व्यापक संघर्ष की आशंका बढ़ जाती है। मौजूदा तनाव के बीच नौसैनिक गश्त बढ़ाई गई है, कई वाणिज्यिक जहाजों ने अपने मार्गों में बदलाव किया है।

  • LPG e-KYC की 16 अगस्त आखिरी डेडलाइन, रात 12 बजे के बाद बुकिंग और सब्सिडी पर पड़ेगा असर

    LPG e-KYC की 16 अगस्त आखिरी डेडलाइन, रात 12 बजे के बाद बुकिंग और सब्सिडी पर पड़ेगा असर


    नई दिल्‍ली । अगर घर में खाना बनाने के लिए LPG गैस सिलेंडर (LPG Gas Cylinder) का इस्तेमाल करते हैं, तो 16 अगस्त की तारीख बेहद खास है. आज अगर रविवार की छुट्टी मनाने और आराम के चक्कर में पड़कर आप कुकिंग गैस (Cooking gas) से e KYC का काम भूलते हैं, तो सिलेंडर की कीमत आपके लिए बढ़ जाएगी. सिर्फ कीमत ही नहीं, LPG गैस मिलने में भी दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है.

    16 अगस्त LPG सिलेंडर के आधार बेस्ड e-KYC की डेडलाइन
    तेल कंपनियों ने गैस सिलेंडर की सप्लाई में किसी भी तरह के फर्जीवाड़े को रोकने के लिए घरेलू LPG सिलेंडर के लिए आधार बेस्ड e-KYC को अनिवार्य कर दिया है. 16 अगस्त की रात 12 बजे के बाद e-KYC नहीं कराने वाले ग्राहकों की मुश्किल बढ़ जाएगी. ग्राहकों को सिलेंडर के लिए ज्यादा दाम चुकाने पड़ सकते हैं.

    16 अगस्त की डेडलाइन मिस हुई, तो क्या होगा?
    अगर आप आज भी सिलेंडर की ई-केवाईसी नहीं करवाते हैं, तो आपके एलपीजी की सप्लाई अटक सकती है. गैस एजेंसियां आपकी बुकिंग रोक सकती हैं. गैस सिलेंडर पर मिलने वाली सब्सिडी रुक जाएगी. उज्ज्वला कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं के लिए भी बिना ई-केवाईसी वाले कनेक्शन पर सब्सिडी बंद हो सकती है.

    कैसे करवा सकते हैं LPG की e-KYC ?
    एलपीजी सिलेंडर को आधार से लिंक करते हुए उसकी केवाईसी बेहद आसान है. आप ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों तरीके से इसे पूरा कर सकते हैं.

    ऑनलाइन प्रोसेस: आपका कनेक्शन जिस गैस कंपनी का है, जैसे कि Indane, HP, Bharat Gas उसका ऐप डाउनलोड कर कुछ मिनटों में केवाईसी को पूरा किया जा सकता है. गैंस कंपनी के ऐप पर जाकर e-KYC का ऑप्शन चुनें. गैस कनेक्शन नबंर भरे. आधार नंबर भरने के बाद फेस ऑथेंटिफिकेशन के लिए Aadhaar FACE RD पर जाएं. ऐप के सामने के सामने अपना चेहरा स्कैन करें. स्कैनिंग पूरा होने के बाद सारी डिलीट सब्सिट करें. ओटीपी भरने के साथ ही आपका ई-केवाईसी पूरा हो जाएगा.

    ऑफलाइन प्रोसेस: आप ऑनलाइन नहीं कर पा रहे हैं, तो अपने LPG डिस्ट्रीब्यूटर या गैस एजेंसी में जाकर केवाईसी फॉर्म भरकर इसे पूरा कर सकते हैं. अगर गैस एजेंसी भी नहीं जाना चाहते हैं, तो गैस सिलेंडर लेकर आने वाले डिलीवरी ब्वॉय की मदद लें. डिलीवरी ब्वॉय के पास उपलब्ध आधिकारिक डिवाइस के जरिए भी बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन कराया जा सकता है.

    LPG eKYC से जुड़े मन में उठ रहे इन सवालों के जवाब जानिए…

    सवाल: क्या LPG ई-केवाईसी के लिए पैसे देने होंगे?
    जवाब: बिल्कुल भी नहीं, ई-केवाईसी पूरी तरह से निशुल्क है. गैस एजेंसी, डिलीवरी ब्वॉय कोई भी केवाईसी के लिए आपसे पैसे नहीं मांग सकता है.

    सवाल: अगर e-KYC नहीं कराया, तो क्या गैस कनेक्शन कैंसिल हो जाएगा?
    जवाब: नहीं,डेडलाइन खत्म होने के बाद भी अगर आपने ई-केवाईसी को पूरा नहीं करते हैं, तो कनेक्शन रद्द नहीं होगा, लेकिन सिलेंडर की डिलीवरी मिलने में दिक्कत हो सकती है. गैस सिलेंडर पर मिलने वाली छूट खत्म हो सकती है.

    सवाल: अगर ई-केवाईसी नहीं करवाया, तो क्या सिलेंडर के दाम बढ़ा दिए जाएंगे?
    जवाब: गैस एजेंसियों की ओर से साझा किए गए पोस्ट के मुताबिक ई-केवाईसी न होने पर ग्राहकों को घरेलू के बजाय कॉमर्शियल दरों पर सिलेंडर खरीदना पड़ सकता है. मतलब ये कि अगर आप दिल्ली में रहते हैं और 16 अगस्त तक अपने घरेलू सिलेंडर कनेक्शन का केवाईसी पूरा नहीं करते हैं, तो 942 रुपये के बजाए आपको 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर के दाम यानी करीब 2738 रुपये में सिलेंडर लेना होगा.

  • MP के 18 जिलों में हैवी रेन का अलर्ट, जबलपुर-रीवा-शहडोल संभाग में स्ट्रॉन्ग सिस्टम, अगले 3 दिन भारी बारिश

    MP के 18 जिलों में हैवी रेन का अलर्ट, जबलपुर-रीवा-शहडोल संभाग में स्ट्रॉन्ग सिस्टम, अगले 3 दिन भारी बारिश


    भोपाल। लो प्रेशर एरिया और मानसून टर्फ के असर से मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से में बारिश का स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव है। इसके चलते जबलपुर, रीवा और शहडोल संभाग में अगले 3 दिन भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। रविवार को जबलपुर, सागर, नरसिंहपुर, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, अनूपपुर, शहडोल, उमरिया, कटनी, पन्ना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, रायसेन और नर्मदापुरम में तेज बारिश होगी। मौसम केंद्र के अनुसार, अगले 24 घंटे में इन जिलों में 4 इंच या इससे ज्यादा बारिश हो सकती है।

    भोपाल, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, अलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सतना, मैहर, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश जारी रहने का अनुमान है।

    भोपाल-ग्वालियर-चंबल में भी असर
    मौसम विभाग के मुताबिक, सिस्टम का असर भोपाल, ग्वालियर और चंबल संभाग में भी रहेगा। 16, 17 और 18 अगस्त को इन संभागों के कुछ जिलों में तेज बारिश का अलर्ट है।

    प्रदेश में अब तक 21.4 इंच बारिश
    मौसम केंद्र के अनुसार, मध्य प्रदेश में अब तक 544.4 मिमी यानी 21.4 इंच बारिश हो चुकी है। यह सामान्य बारिश 24.4 इंच (618.8 मिमी) से करीब 3 इंच कम है। प्रदेश में अब तक 12% कम बारिश हुई है। पूर्वी हिस्से में सामान्य से 18% और पश्चिमी हिस्से में 6% कम बारिश दर्ज की गई है।

    43 जिलों में 2% से 54% तक कम बारिश
    पूर्वी हिस्से के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश 19% तक कम हुई है। बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़ और उमरिया में सामान्य से 2% से 54% तक कम बारिश हुई है।

    पश्चिमी हिस्से के आगर-मालवा, अलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, दतिया, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 1% से 48% तक कम बारिश हुई है।

    इन 12 जिलों में औसत से ज्यादा बारिश
    भोपाल, गुना, सीहोर, राजगढ़, ग्वालियर, अनूपपुर, भिंड, बुरहानपुर, देवास, बड़वानी, खंडवा और खरगोन में ही अब तक सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

  • ईरान युद्ध के बीच ट्रंप ने पश्चिमी प्रशांत से हटाया एयरक्राफ्ट कैरियर, चीन खुश

    ईरान युद्ध के बीच ट्रंप ने पश्चिमी प्रशांत से हटाया एयरक्राफ्ट कैरियर, चीन खुश


    नई दिल्ली। ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान के बीच अमेरिका ने पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र से अपना आखिरी विमानवाहक पोत यूएसएस जॉर्ज वाशिंगटन हटा लिया है। इसे मिडिल ईस्ट में लंबे समय से तैनात यूएसएस अब्राहम लिंकन की जगह भेजा जा रहा है। अमेरिका के इस फैसले से जापान और फिलीपींस जैसे सहयोगियों की चिंता बढ़ी है, जबकि चीन को पश्चिमी प्रशांत में अपनी सैन्य मौजूदगी और प्रभाव बढ़ाने का मौका मिल गया है।

    मिडिल ईस्ट में बढ़ा अमेरिकी नौसेना पर दबाव

    यूएसएस जॉर्ज वाशिंगटन को मिडिल ईस्ट भेजने का मुख्य उद्देश्य यूएसएस अब्राहम लिंकन को राहत देना है। लिंकन की वापसी मई में तय थी, लेकिन ईरान के खिलाफ अमेरिकी अभियानों के कारण उसकी तैनाती बढ़ा दी गई। यह पोत 240 से ज्यादा दिन लगातार समुद्र में रह चुका है। लंबी तैनाती के कारण अमेरिकी नौसैनिकों के तनाव और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

    प्रशांत से अमेरिकी पोत हटने पर सहयोगी चिंतित

    पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में अमेरिकी विमानवाहक पोत की गैरमौजूदगी से जापान और फिलीपींस जैसे सहयोगियों में बेचैनी बढ़ी है। रणनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका का यह कदम उसके उस रुख से अलग दिखाई देता है, जिसमें वह एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बनाए रखने की बात करता रहा है। हालांकि, अमेरिकी नौसेना आने वाले महीनों में किसी अन्य विमानवाहक पोत को इस क्षेत्र में तैनात कर सकती है।

    चीन को मिला ताकत दिखाने का मौका

    अमेरिकी पोत के हटने से चीन को पश्चिमी प्रशांत में अपना प्रभाव बढ़ाने का अवसर मिला है। विशेषज्ञों के अनुसार, बीजिंग यह संदेश देने की कोशिश कर सकता है कि इस क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी कमजोर हो रही है और वॉशिंगटन अपने सहयोगियों को पहले जैसी सुरक्षा गारंटी देने की स्थिति में नहीं है।

    इसी बीच चीन ने इंडोनेशिया के साथ नौसैनिक अभ्यास किया है। दक्षिण चीन सागर में स्कारबोरो शोल के पास भी चीनी सैन्य गतिविधियां बढ़ी हैं। जापान के आसपास भी चीनी नौसेना की गतिविधियों को लेकर तनाव बना हुआ है।

    लगातार तैनाती से अमेरिकी नौसेना पर बढ़ रहा दबाव

    अमेरिकी नौसेना के पास कुल 11 विमानवाहक पोत हैं और सामान्य तौर पर इनमें से दो या तीन ही एक समय में तैनात रहते हैं। लगातार लंबी तैनाती के कारण जहाजों के रखरखाव और मरम्मत पर भी दबाव बढ़ रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सीमित शिपयार्ड क्षमता के कारण आने वाले समय में यह चुनौती और गंभीर हो सकती है।

    बड़े एयरक्राफ्ट कैरियर की उपयोगिता पर भी सवाल

    आधुनिक युद्ध में ड्रोन और लंबी दूरी की मिसाइलों के बढ़ते इस्तेमाल ने बड़े विमानवाहक पोतों की सुरक्षा और उपयोगिता पर भी सवाल खड़े किए हैं। कुछ रक्षा विशेषज्ञ छोटे युद्धपोतों और पनडुब्बियों के इस्तेमाल को बढ़ाने की वकालत कर रहे हैं। अमेरिकी नौसेना के संचालन प्रमुख भी बड़े विमानवाहक पोतों पर अत्यधिक निर्भरता कम करने और छोटे युद्धपोतों के इस्तेमाल की जरूरत जता चुके हैं।

  • इंडोनेशिया में 7.7 के बाद 6.9 तीव्रता का भूकंप, 40 लोगों की मौत; भूस्खलन से बढ़ी तबाही

    इंडोनेशिया में 7.7 के बाद 6.9 तीव्रता का भूकंप, 40 लोगों की मौत; भूस्खलन से बढ़ी तबाही


    जकार्ता।
    इंडोनेशिया के फ्लोरेस द्वीप के पास शनिवार को आए शक्तिशाली भूकंप ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी। 7.7 तीव्रता के भूकंप के बाद 6.9 तीव्रता का एक और तेज झटका महसूस किया गया। भूकंप और उसके बाद हुए भूस्खलन में अब तक कम से कम 40 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान जारी है।

    भूकंप के तेज झटकों से कई मकान और अन्य इमारतें क्षतिग्रस्त हुई हैं। कई स्थानों पर सड़कें भूस्खलन के मलबे से बंद हो गईं। दहशत के कारण लोग घरों से बाहर निकल आए। इंडोनेशिया की आपदा प्रबंधन एजेंसी (BNPB) के प्रमुख सुहार्यांतो के अनुसार राहत और बचाव दल प्रभावित इलाकों में पहुंच रहे हैं। ऐसे में मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है।

    भूस्खलन में दबे लोग, कई इलाकों में तबाही

    भूकंप के बाद फ्लोरेस के कई हिस्सों में भूस्खलन हुआ। सिक्का, वेस्ट मंग्गाराई और ईस्ट मंग्गाराई क्षेत्रों से कम से कम 20 शव बरामद किए जाने की जानकारी है। इनमें रेओके गांव में भूस्खलन की चपेट में आकर जान गंवाने वाले आठ लोग भी शामिल हैं।

    हादसे में छह लोग घायल हुए हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहीं, दो ग्रामीणों के मलबे में दबकर लापता होने की सूचना भी सामने आई है। राहत दल मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटे हैं।

    सड़कें मलबे से बंद, इमारतों को नुकसान

    भूकंप के कारण फ्लोरेस में कई घरों और सरकारी समेत अन्य इमारतों को नुकसान पहुंचा है। सामने आए वीडियो में कुछ इमारतें क्षतिग्रस्त और गिरी हुई दिखाई दे रही हैं। भूकंप के झटकों के बाद बड़ी संख्या में लोग सुरक्षित स्थानों की ओर निकल गए।

    भूस्खलन के कारण कई सड़कों पर आवाजाही प्रभावित हुई है। राहत एवं बचाव दलों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

    सुनामी की चेतावनी से मचा डर

    शक्तिशाली भूकंप के बाद अधिकारियों ने सुनामी की चेतावनी जारी की थी। इससे समुद्र तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों में दहशत फैल गई। हालांकि, बाद में समुद्र के जलस्तर में कोई बड़ा बदलाव नहीं मिलने पर सुनामी की चेतावनी वापस ले ली गई।

    फिलहाल प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य जारी है। टीमें मलबे में फंसे लोगों की तलाश कर रही हैं और भूकंप से हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि अभियान आगे बढ़ने के साथ मृतकों और घायलों की संख्या में बदलाव हो सकता है।

  • तिरंगा लेकर सड़कों पर उतरे युवा, इंदौर में भाजपा की यात्रा में दिखा जोरदार उत्साह..

    तिरंगा लेकर सड़कों पर उतरे युवा, इंदौर में भाजपा की यात्रा में दिखा जोरदार उत्साह..

     मध्य प्रदेश:  के इंदौर में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी की ओर से बड़ी तिरंगा यात्रा निकाली गई। टंट्या भील चौराहे से शुरू हुई इस यात्रा में बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता, युवा, नेता और आम नागरिक शामिल हुए। हाथों में तिरंगा लेकर लोग देशभक्ति के नारे लगाते हुए शहर की सड़कों से आगे बढ़े।

    यात्रा के दौरान कई स्थानों पर तिरंगे नजर आए और माहौल में देशभक्ति का रंग दिखाई दिया। आयोजन में भाजपा के कई वरिष्ठ नेता, विधायक और पदाधिकारी भी मौजूद रहे। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आयोजित इस कार्यक्रम को पार्टी की ओर से बड़े जनसंपर्क और संगठनात्मक सक्रियता के प्रदर्शन के तौर पर भी देखा गया।

    इंदौर में यह यात्रा ऐसे समय निकाली गई, जब शहर का टंट्या भील चौराहा पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यहां युवाओं की ओर से शिक्षा और परीक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया गया था। इसी पृष्ठभूमि में भाजपा की तिरंगा यात्रा को राजनीतिक संदेश से जोड़कर भी देखा जा रहा है।

    हालांकि यात्रा में किसी एक मुद्दे को केंद्र में रखने के बजाय राष्ट्रभक्ति को प्रमुख विषय बनाया गया। कार्यकर्ताओं और युवाओं ने हाथों में तिरंगा लेकर यात्रा में हिस्सा लिया। बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के कारण शहर में कई जगह आयोजन को लेकर लोगों का ध्यान आकर्षित हुआ।

    यात्रा में कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के अलावा विधायक मधु वर्मा, रमेश मेंदोला और भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा समेत कई नेता और पदाधिकारी शामिल हुए। पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ आम नागरिक भी यात्रा का हिस्सा बने। इससे आयोजन का दायरा केवल पार्टी कार्यकर्ताओं तक सीमित नहीं रहा।

    तिरंगा यात्रा में युवाओं की भागीदारी विशेष रूप से दिखाई दी। बड़ी संख्या में युवा तिरंगा लेकर आगे बढ़ते नजर आए। भाजपा की ओर से युवाओं की इस भागीदारी को संगठन के प्रति समर्थन और स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रभक्ति की भावना से जोड़कर प्रस्तुत किया गया।

    टंट्या भील चौराहे पर हाल में हुए प्रदर्शन के बाद भाजपा की ओर से निकाली गई यह यात्रा शहर की राजनीतिक गतिविधियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण रही। एक ओर जहां युवाओं से जुड़े मुद्दों पर प्रदर्शन हुआ, वहीं दूसरी ओर भाजपा ने तिरंगा यात्रा के जरिए राष्ट्रभक्ति को केंद्र में रखते हुए अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

    यात्रा के दौरान कार्यकर्ताओं में उत्साह देखने को मिला। सड़क पर तिरंगा लेकर चल रहे लोगों और देशभक्ति के नारों से माहौल में उत्सव जैसा वातावरण बना रहा। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम के जरिए भाजपा ने संगठन की सक्रियता के साथ युवाओं और आम लोगों की भागीदारी को भी सामने रखा।

    इंदौर में स्वतंत्रता दिवस के दौरान आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों के बीच भाजपा की यह तिरंगा यात्रा राजनीतिक और सामाजिक दोनों दृष्टि से चर्चा में रही। बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी ने आयोजन को व्यापक रूप दिया और शहर में राष्ट्रभक्ति से जुड़े कार्यक्रमों के बीच इसकी अलग पहचान बनी।

  • उज्जैन में स्वतंत्रता दिवस का मुख्य समारोह, गौतम टेटवाल ने फहराया तिरंगा और शहीद परिवारों को किया सम्मानित

    उज्जैन में स्वतंत्रता दिवस का मुख्य समारोह, गौतम टेटवाल ने फहराया तिरंगा और शहीद परिवारों को किया सम्मानित


    मध्य प्रदेश:
    के उज्जैन में स्वतंत्रता दिवस का मुख्य समारोह दशहरा मैदान पर आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत वंदे मातरम के साथ हुई। इसके बाद प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल ने ध्वजारोहण किया। तिरंगा फहराए जाने के बाद राष्ट्रगान हुआ और परेड का आयोजन किया गया।

    ध्वजारोहण के बाद प्रभारी मंत्री ने परेड की सलामी ली। समारोह में प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि, स्कूली विद्यार्थी और शहर के नागरिक बड़ी संख्या में मौजूद रहे। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में देशभक्ति और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का विशेष आयोजन किया गया।

    दशहरा मैदान पर ध्वजारोहण के दौरान संभागायुक्त आशीष सिंह, कलेक्टर रौशन सिंह, एसपी प्रदीप शर्मा, डीआईजी नवनीत भसीन, विधायक अनिल जैन कालूखेड़ा और सांसद अनिल फिरोजिया सहित अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और उनके परिजन भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

    ध्वजारोहण के बाद समारोह में परेड निरीक्षण और मार्च पास्ट हुआ। इसके साथ ही परेड कमांडरों से परिचय कराया गया। कार्यक्रम में हर्ष फायर के बाद राष्ट्रगान और मध्य प्रदेश गान भी हुआ। स्वतंत्रता दिवस समारोह की निर्धारित गतिविधियों के तहत विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।

    समारोह में स्कूली विद्यार्थियों ने पीटी का प्रदर्शन किया। इसके बाद बच्चों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। देशभक्ति गीतों पर विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का ध्यान आकर्षित किया। बच्चों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देशभक्ति का संदेश दिया।

    कार्यक्रम के दौरान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान किया गया। इसके अलावा कारगिल शहीदों के परिवारों को भी सम्मानित किया गया। देहदान करने वाले लोगों के परिजनों का भी समारोह में सम्मान किया गया।

    सम्मान समारोह स्वतंत्रता दिवस के मुख्य कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। शहीद परिवारों और अन्य सम्मानित लोगों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए उन्हें मंच पर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में स्वतंत्रता संग्राम और देश के लिए योगदान देने वाले लोगों को याद किया गया।

    समारोह के दौरान मुख्यमंत्री के संदेश का प्रसारण भी किया गया। इसके बाद मुख्य अतिथि प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल ने उपस्थित लोगों को संबोधित किया। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय भावना, देश के लिए बलिदान और सामाजिक योगदान से जुड़े विषय प्रमुख रहे।

    दशहरा मैदान पर आयोजित समारोह में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के साथ बड़ी संख्या में शहरवासी भी शामिल हुए। विद्यार्थियों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और परेड के कारण कार्यक्रम में विविध गतिविधियां देखने को मिलीं।

    उज्जैन के मुख्य स्वतंत्रता दिवस समारोह में ध्वजारोहण, परेड, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सम्मान समारोह को एक साथ शामिल किया गया। प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल ने तिरंगा फहराकर कार्यक्रम की शुरुआत की और परेड की सलामी ली। इसके बाद विभिन्न प्रस्तुतियों और सम्मान कार्यक्रमों के साथ समारोह आगे बढ़ा।

    इस दौरान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, लोकतंत्र सेनानियों और कारगिल शहीदों के परिवारों का सम्मान कर उनके योगदान को याद किया गया। स्कूली बच्चों ने पीटी और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए समारोह में भागीदारी की। बड़ी संख्या में अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और नागरिकों की मौजूदगी में उज्जैन का मुख्य स्वतंत्रता दिवस समारोह संपन्न हुआ।

  • अभिनेता ऋतिक रोशन और सबा आजाद के रिश्ते को लेकर सोशल मीडिया पर तेज हुईं कई तरह की अटकलें

    अभिनेता ऋतिक रोशन और सबा आजाद के रिश्ते को लेकर सोशल मीडिया पर तेज हुईं कई तरह की अटकलें

    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेता ऋतिक रोशन और अभिनेत्री व संगीतकार सबा आजाद के व्यक्तिगत संबंधों को लेकर सोशल मीडिया पर विभिन्न प्रकार की चर्चाएं और अटकलें तेजी से फैल रही हैं। पिछले कुछ समय से दोनों कलाकारों के रिश्ते में बदलाव को लेकर इंटरनेट पर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं। इन चर्चाओं की मुख्य वजह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सामने आई कुछ कथित तस्वीरें और प्रोफाइल बताई जा रही हैं, जिन्हें लेकर नेटिजन्स तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं व्यक्त कर रहे हैं।

    सोशल मीडिया पर एक नेटवर्किंग ऐप से जुड़े प्रोफाइल की तस्वीरें प्रसारित हो रही हैं, जिसमें अभिनेता ऋतिक रोशन की तस्वीर और उनके पेशे का विवरण दर्ज है। इन वायरल तस्वीरों के आधार पर कई लोग यह अनुमान लगा रहे हैं कि अभिनेता और सबा आजाद के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। हालांकि, प्रसारित की जा रही इन जानकारियों और तस्वीरों की सत्यता तथा प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।

    ऑनलाइन मंचों पर इन खबरों के सामने आने के बाद प्रशंसकों और इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की ओर से मिला-जुला रुख देखने को मिल रहा है। जहां कुछ लोग इन अफवाहों के आधार पर तरह-तरह के कयास लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अभिनेता के कई प्रशंसकों ने उनका बचाव किया है। प्रशंसकों का कहना है कि किसी भी वायरल सामग्री के आधार पर निष्कर्ष निकालना अनुचित है और संभव है कि यह किसी फर्जी प्रोफाइल या पुरानी जानकारी का परिणाम हो।

    गौरतलब है कि ऋतिक रोशन और सबा आजाद के बीच संबंधों की खबरें पहली बार वर्ष 2021 के अंत में सामने आई थीं। इसके बाद वर्ष 2022 की शुरुआत में दोनों को कई सार्वजनिक स्थलों और कार्यक्रमों में एक साथ देखा गया, जिसके बाद उनके रिश्ते को लेकर आधिकारिक रूप से बातें सामने आईं। दोनों कलाकारों को अक्सर विभिन्न फिल्म समारोहों, पारिवारिक आयोजनों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में साथ देखा जाता रहा है, जहां उनकी बॉन्डिंग की काफी सराहना भी की जाती थी।

    ऋतिक रोशन के व्यक्तिगत जीवन की बात करें तो उन्होंने वर्ष 2000 में सुजैन खान से विवाह किया था। हालांकि, वर्ष 2014 में दोनों ने आपसी सहमति से एक-दूसरे से अलग होने का निर्णय लिया था। इसके बाद से ही ऋतिक रोशन अपनी व्यक्तिगत और व्यावसायिक जिंदगी को लेकर अक्सर चर्चा में बने रहते हैं। वहीं दूसरी तरफ सबा आजाद भी फिल्म उद्योग का एक जाना-माना नाम हैं, जो अभिनय के साथ-साथ संगीत और रंगमंच के क्षेत्र में भी सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं।

    वर्तमान में प्रसारित हो रही इन तमाम अटकलों और सोशल मीडिया दावों पर ऋतिक रोशन या सबा आजाद की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी या स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। दोनों ही कलाकारों ने इस पूरे विषय पर चुप्पी साध रखी है। फिल्म उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि सेलिब्रिटीज के व्यक्तिगत जीवन को लेकर अक्सर इस तरह की निराधार अफवाहें उड़ती रहती हैं और जब तक संबंधित पक्षों की ओर से कोई बयान नहीं आता, तब तक इन खबरों को महज एक अटकलबाजी ही माना जाना चाहिए।