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  • मिस वर्ल्ड की ग्लैमरस छवि बदलकर ऐश्वर्या राय को बनाया ताल की मानसी, निर्देशक सुभाष घई ने पुरानी यादें कीं ताजा

    मिस वर्ल्ड की ग्लैमरस छवि बदलकर ऐश्वर्या राय को बनाया ताल की मानसी, निर्देशक सुभाष घई ने पुरानी यादें कीं ताजा

    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा की कल्ट क्लासिक फिल्मों में शुमार संगीत आधारित रोमांटिक ड्रामा फिल्म ताल के प्रदर्शन को 27 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं। इस अवसर पर फिल्म के निर्माता एवं निर्देशक सुभाष घई ने फिल्म निर्माण और कलाकारों के चयन से जुड़े कई दिलचस्प और अनसुने संस्मरण साझा किए हैं। उन्होंने विशेष रूप से अभिनेत्री ऐश्वर्या राय और अभिनेता अक्षय खन्ना की कास्टिंग के दौरान आई चुनौतियों और अनुभवों के बारे में विस्तार से चर्चा की।

    सुभाष घई ने बताया कि फिल्म में मुख्य महिला किरदार मानसी के लिए एक ऐसे चेहरे की तलाश थी जो न केवल अभिनय में निपुण हो बल्कि जटिल नृत्य शैलियों को भी सहजता से पर्दे पर उतार सके। उस समय ऐश्वर्या राय मिस वर्ल्ड का खिताब जीतने के बाद सौंदर्य और ग्लैमर जगत में एक स्थापित पहचान बना चुकी थीं। प्रसिद्ध कोरियोग्राफर सरोज खान ने सुभाष घई को इस भूमिका के लिए ऐश्वर्या राय का नाम सुझाया था।

    फिल्म में ऐश्वर्या राय के किरदार को प्रामाणिक बनाने के लिए सुभाष घई ने उनकी सौंदर्य प्रतियोगिता वाली छवि को पूरी तरह बदलने का निर्णय लिया था। उन्होंने अभिनेत्री से कहा था कि फिल्म के शुरुआती हिस्से में उन्हें बिना किसी मेकअप के एक साधारण और सहज ग्रामीण युवती के रूप में दिखना होगा। इस प्रयोग का मुख्य उद्देश्य उनकी ग्लैमरस छवि को हटाकर दर्शक का ध्यान पूरी तरह उनके अभिनय और किरदार की गहराई पर केंद्रित करना था।

    फिल्म में मुख्य अभिनेता के रूप में अक्षय खन्ना के चयन का किस्सा भी काफी दिलचस्प है। सुभाष घई के अनुसार, अक्षय खन्ना के पिता और दिग्गज अभिनेता विनोद खन्ना उन्हें अपने साथ लेकर आए थे। अक्षय खन्ना के चेहरे की गंभीरता और उनके अभिनय में मौजूद गहराई को देखते हुए सुभाष घई ने उन्हें इस महत्वपूर्ण भूमिका के लिए चुन लिया। उस समय अक्षय खन्ना अपने करियर के शुरुआती चरण में थे, लेकिन इस फिल्म ने उन्हें रातोंरात बड़ा स्टार बना दिया।

    वर्ष 1999 में रिलीज हुई फिल्म ताल न केवल अपनी मनोरम कहानी और शानदार अभिनय के लिए जानी जाती है, बल्कि एआर रहमान द्वारा तैयार किए गए इसके सदाबहार संगीत ने भी इतिहास रचा था। अनिल कपूर, ऐश्वर्या राय और अक्षय खन्ना के अभिनय से सजी इस फिल्म को भारत के साथ-साथ विदेशों में भी भारी व्यावसायिक सफलता मिली थी। फिल्म के गीत आज भी दर्शकों और संगीत प्रेमियों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं।

    इस कल्ट क्लासिक फिल्म के 27 साल पूरे होने के अवसर पर सुभाष घई द्वारा साझा की गई इन यादों ने एक बार फिर हिंदी सिनेमा के उस सुनहरे दौर को ताजा कर दिया है। ऐश्वर्या राय और अक्षय खन्ना के करियर के लिए यह फिल्म एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई थी, जिसने उन्हें उद्योग में एक मजबूत पहचान दिलाई।

  • 'कौन हैं आप और कहां जा रहे हैं?' केबीसी में अमिताभ बच्चन ने खोला धर्मेंद्र के घर का बड़ा राज..

    'कौन हैं आप और कहां जा रहे हैं?' केबीसी में अमिताभ बच्चन ने खोला धर्मेंद्र के घर का बड़ा राज..


    नई दिल्ली। 
    टेलीविज़न के लोकप्रिय ज्ञान आधारित शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के 18वें सीजन के दौरान भारतीय सिनेमा के महानायक अमिताभ बच्चन ने अपने प्रिय मित्र और दिवंगत दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र को याद करते हुए एक बेहद भावुक और दिलचस्प संस्मरण साझा किया। उन्होंने शो में धर्मेंद्र के सरल स्वभाव, आतिथ्य सत्कार और उनके विशाल हृदय की जमकर सराहना की।

    अमिताभ बच्चन ने बताया कि धर्मेंद्र का निवास स्थान हमेशा हर किसी के लिए खुला रहता था। उनके घर आने वाले प्रत्येक व्यक्ति का स्वागत बेहद अपनेपन और आत्मीयता के साथ किया जाता था। धर्मेंद्र की इसी दरियादिली का उल्लेख करते हुए उन्होंने एक घटना का जिक्र किया जब खुद धर्मेंद्र को भी अपने घर में आने-जाने वाले मेहमानों की पूरी संख्या का अंदाजा नहीं रहता था।

    संस्मरण सुनाते हुए उन्होंने बताया कि एक बार धर्मेंद्र ने अपने ही घर की सीढ़ियों पर चार-पांच अनजान लोगों को चढ़ते हुए देखा। जब उन्होंने उत्सुकता से उनसे पूछा कि वे कौन हैं और कहां जा रहे हैं, तो उन लोगों ने बड़ी सादगी से जवाब दिया कि वे गांव से आए हैं। धर्मेंद्र के घर का माहौल ऐसा था जहां कोई भी व्यक्ति बिना किसी हिचकिचाहट के आ-जा सकता था और उनका घर सबके लिए हमेशा खुला रहता था।

    भारतीय सिनेमा में अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र की जोड़ी को हमेशा से ही गहरी दोस्ती की मिसाल माना जाता रहा है। यद्यपि धर्मेंद्र फिल्म उद्योग में अमिताभ बच्चन से वरिष्ठ थे, लेकिन दोनों के बीच का संबंध बेहद आत्मीय रहा। दोनों कलाकारों ने कई यादगार फिल्मों में एक साथ अभिनय किया है। विशेष रूप से 1975 में आई ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘शोले’ में जय और वीरू के उनके किरदारों ने दर्शकों के दिलों पर ऐसी अमिट छाप छोड़ी कि आज भी सच्ची दोस्ती की मिसाल देने के लिए इन्हीं किरदारों का नाम लिया जाता है।

    गौरतलब है कि दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र का निधन नवंबर 2025 में हुआ था। उनके जाने से न केवल उनका परिवार, बल्कि संपूर्ण फिल्म उद्योग और उनके करोड़ों प्रशंसक गहरे शोक में डूब गए थे। हिंदी सिनेमा के कई बड़े कलाकार धर्मेंद्र को अपने अभिभावक और पिता समान मानते थे, और उनकी कमी आज भी पूरी इंडस्ट्री में महसूस की जाती है।

    हाल ही में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर रिलीज हुई फिल्म ‘बंटवारा 1947’ में भी धर्मेंद्र के पुत्र और अभिनेता सनी देओल ने अपने पिता को विशेष श्रद्धांजलि अर्पित की है। विभाजन की पृष्ठभूमि पर आधारित इस भावुक फिल्म की शुरुआत में ही महान अभिनेता को याद किया गया है।

    अमिताभ बच्चन द्वारा शो के दौरान साझा की गई यह याद दर्शाती है कि धर्मेंद्र केवल पर्दे पर ही नहीं, बल्कि वास्तविक जीवन में भी एक महान और बड़े दिल वाले इंसान थे, जिनकी यादें आज भी लोगों के दिलों में तरोताजा हैं।

  • सनी देओल की बंटवारा 1947 में विभाजन की कहानी, भावनाएं और एक्शन साथ-साथ नजर आते हैं

    सनी देओल की बंटवारा 1947 में विभाजन की कहानी, भावनाएं और एक्शन साथ-साथ नजर आते हैं


    नई दिल्ली। 
    स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देश के विभाजन की त्रासदी और मानवीय संवेदनाओं को उजागर करने वाली नई बॉलीवुड फिल्म बंटवारा 1947 सिनेमाघरों में दर्शकों के सामने आ चुकी है। प्रसिद्ध निर्देशक राजकुमार संतोषी के कुशल निर्देशन में तैयार की गई यह फिल्म भारत और पाकिस्तान के बंटवारे के दौर पर आधारित एक बेहद संवेदनशील कहानी प्रस्तुत करती है। यह फिल्म प्रसिद्ध नाटक ‘जिस लाहौर नई वेख्या, ओ जम्या ए नई’ पर आधारित है और इसमें ऐतिहासिक परिदृश्य के साथ मानवीय रिश्तों की मिसाल पेश की गई है।

    कहानी की शुरुआत 14 अगस्त 1947 के घटनाक्रम से होती है, जब देश की आजादी की घोषणा के समय मेरठ में रहने वाला सिकंदर मिर्जा का परिवार जश्न की तैयारियों में जुटा होता है। हालांकि, अचानक भड़की सांप्रदायिक हिंसा के कारण मिर्जा को अपने परिवार की सुरक्षा के लिए लाहौर पलायन करने का कठिन फैसला लेना पड़ता है। लाहौर पहुंचने पर शहर की राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल के बीच उन्हें हबीब अंसारी नामक मित्र का सहयोग मिलता है, जिनकी मदद से मिर्जा परिवार को रहने के लिए एक हवेली मिल जाती है।

    इस हवेली में पहले से ही एक बुजुर्ग हिंदू महिला रह रही होती है। फिल्म का मुख्य ताना-बाना इसी बुजुर्ग महिला, जिन्हें परिवार प्यार से माई कहकर संबोधित करता है, और मुस्लिम मिर्जा परिवार के बीच विकसित होते आत्मीय संबंधों के इर्द-गिर्द बुना गया है। विपरीत परिस्थितियों और सामाजिक दबाव के बावजूद सिकंदर मिर्जा उस बुजुर्ग महिला की रक्षा का जिम्मा उठाते हैं। यह कहानी दर्शकों को बेहद भावुक करती है और स्क्रीन पर विभाजन का दर्द तथा मानवीय आत्मीयता को बखूबी उकेरा गया है।

    अभिनय के दृष्टिकोण से मुख्य कलाकार सनी देओल अपने चिरपरिचित तेवर और संजीदा अंदाज में नजर आए हैं। उन्होंने अपने किरदार के माध्यम से जहां एक तरफ गुस्सा और दृढ़ता दिखाई है, वहीं माई के प्रति सुरक्षात्मक रवैया भी बखूबी निभाया है। लंबे समय के बाद बड़े पर्दे पर वापसी कर रहीं अभिनेत्री प्रीति जिंटा ने भी अपनी प्रभावी भूमिका से दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया है। दोनों ही कलाकारों का अभिनय कहानी को एक मजबूती प्रदान करता है।

    वरिष्ठ अभिनेत्री शबाना आजमी ने फिल्म में माई का केंद्रीय किरदार निभाया है। बंटवारे की हिंसा में अपनों को खोने का दुख और अपना घर न छोड़ने की जिद्द को उन्होंने अपने बेहतरीन अभिनय से जीवित कर दिया है। इसके अलावा, अली फजल ने एक शायर और शांतिप्रिय नागरिक के रूप में प्रभावशाली काम किया है, जो हर विषम परिस्थिति में अमन की बात करता है। वहीं नकारात्मक भूमिका में नजर आए अभिमन्यु सिंह ने अपने सशक्त प्रदर्शन से खलनायक के रूप में गहरी छाप छोड़ी है।

    फिल्म में मुख्य अभिनेता के पुत्र करण देओल भी नजर आते हैं, हालांकि उनका स्क्रीन टाइम अपेक्षाकृत कम रखा गया है। फिल्म का पहला हाफ जहां कहानी की पृष्ठभूमि और भावुक लम्हों को स्थापित करता है, वहीं दूसरे हाफ में सनी देओल का ट्रेडमार्क एक्शन देखने को मिलता है। एक्शन दृश्यों में बग्गी की दौड़ और दुश्मनों से मुकाबले के सीन शामिल हैं, जो एक्शन प्रेमियों को पसंद आ सकते हैं।

    सिनेमाई निर्माण और प्रस्तुतीकरण के लिहाज से फिल्म दर्शकों को बोर नहीं होने देती। संवाद अदायगी और पटकथा लेखन में ऐतिहासिक गंभीरता बनाए रखी गई है। विभाजन के उस भयावह दौर को बड़े पर्दे पर एक भावुक और मानवीय दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने में निर्माण टीम पूरी तरह सफल नजर आ रही है।

    कुल मिलाकर, बंटवारा 1947 एक ऐसी सिनेमाई कृति है जो केवल अतीत के जख्मों को याद नहीं दिलाती, बल्कि संकट के समय इंसानियत की मिसाल भी पेश करती है। बेहतरीन अभिनय, मजबूत निर्देशन और एक्शन का संतुलन इसे एक बार देखने लायक फिल्म बनाता है।

  • उज्जैन में स्वतंत्रता दिवस की सुबह बदला बाबा महाकाल का स्वरूप, तिरंगे रंगों में हुए विशेष श्रृंगार के दर्शन

    उज्जैन में स्वतंत्रता दिवस की सुबह बदला बाबा महाकाल का स्वरूप, तिरंगे रंगों में हुए विशेष श्रृंगार के दर्शन

    मध्य प्रदेश: के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बाबा महाकाल का विशेष तिरंगा श्रृंगार किया गया। शनिवार तड़के हुई भस्म आरती में भगवान महाकाल को केसरिया, सफेद और हरे रंगों से सजाया गया। इस विशेष स्वरूप के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे।

    सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर मंदिर के कपाट तड़के 2.30 बजे खोले गए। कपाट खुलने के बाद पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित देवी-देवताओं का पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया और पंचामृत से अभिषेक की प्रक्रिया संपन्न हुई।

    पंचामृत में दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस का उपयोग किया गया। अभिषेक और पूजन के बाद बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार शुरू हुआ। इस दौरान भांग, चंदन और विभिन्न आभूषणों के साथ भगवान का अलंकरण किया गया।

    स्वतंत्रता दिवस के कारण इस बार श्रृंगार में तिरंगे के रंगों को प्रमुखता दी गई। बाबा महाकाल के मस्तक पर केसरिया, सफेद और हरे रंग का तिरंगा त्रिपुंड लगाया गया। इसके साथ रजत मुकुट पर भारत के तिरंगे का प्रतीक भी सजाया गया।

    श्रृंगार के दौरान भगवान के दोनों ओर हाथी के आभूषण लगाए गए। इसके अलावा रंग-बिरंगी पुष्प मालाओं से भी बाबा महाकाल का अलंकरण किया गया। भस्म आरती की धार्मिक परंपराओं के अनुसार विभिन्न पूजन और श्रृंगार की प्रक्रियाएं पूरी की गईं।

    भस्म अर्पण से पहले प्रथम घंटाल बजाया गया और हरिओम का जल अर्पित किया गया। इसके बाद मंत्रोच्चार के बीच भगवान का ध्यान किया गया। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढंककर भस्म अर्पित की गई।

    भस्म अर्पण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद बाबा महाकाल को विभिन्न रजत आभूषणों से सजाया गया। शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुण्डमाल और रुद्राक्ष की माला अर्पित की गई। इसके साथ पुष्प मालाओं और सुगंधित फूलों से भी भगवान का श्रृंगार किया गया।

    भस्म आरती के बाद बाबा महाकाल को राजा स्वरूप में सजाया गया और फल-मिष्ठान का भोग लगाया गया। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हुए इस विशेष श्रृंगार में धार्मिक परंपरा के साथ तिरंगे रंगों की झलक देखने को मिली।

    मान्यता के अनुसार भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी धार्मिक परंपरा के बीच श्रद्धालुओं ने भस्म आरती में बाबा महाकाल के विशेष स्वरूप के दर्शन किए।

    भस्म आरती के दौरान मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। भक्तों ने बाबा महाकाल के दर्शन के साथ नंदी महाराज के भी दर्शन किए। कई श्रद्धालुओं ने नंदी के कान के समीप अपनी मनोकामना व्यक्त की और आशीर्वाद मांगा।

    आरती के दौरान श्रद्धालु बाबा महाकाल के जयकारे लगाते रहे। जयकारों से मंदिर परिसर गूंजता रहा। स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगे रंगों में सजे बाबा महाकाल के दर्शन श्रद्धालुओं के लिए इस दिन के धार्मिक आयोजन की खास झलक रहे।

  • भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने फहराया तिरंगा, परेड की सलामी के साथ दोहराया विकास का संकल्प

    भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने फहराया तिरंगा, परेड की सलामी के साथ दोहराया विकास का संकल्प


    मध्य प्रदेश
    : में स्वतंत्रता दिवस का राज्य स्तरीय मुख्य समारोह भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में आयोजित किया गया। समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तिरंगा फहराया और इसके बाद परेड की सलामी ली। इस दौरान बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे और पूरे आयोजन के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ध्वजारोहण के बाद देश की आजादी के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले अमर शहीदों को नमन किया। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर उन्होंने विकसित और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के निर्माण का संकल्प दोहराया।

    लाल परेड ग्राउंड में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में स्वतंत्रता दिवस से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम हुए। मुख्यमंत्री की मौजूदगी में ध्वजारोहण और परेड की सलामी समारोह के प्रमुख कार्यक्रम रहे। आयोजन स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए विशेष इंतजाम किए गए थे।

    मुख्यमंत्री ने परेड की सलामी लेकर समारोह में शामिल दलों का अभिवादन स्वीकार किया। स्वतंत्रता दिवस के राज्य स्तरीय आयोजन में परेड को विशेष महत्व दिया गया। अनुशासन और राष्ट्रीय भावना से जुड़े इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।

    भोपाल में आयोजित इस समारोह के दौरान नागरिकों की मौजूदगी भी देखने को मिली। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राज्य के मुख्य समारोह में शामिल होने के लिए लोग लाल परेड ग्राउंड पहुंचे। कार्यक्रम को व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखी गई।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस अवसर पर शहीदों के योगदान को याद किया और उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया। देश की स्वतंत्रता के लिए बलिदान देने वाले वीरों को नमन करते हुए उन्होंने प्रदेश के विकास की दिशा में आगे बढ़ने का संकल्प दोहराया।

    विकसित और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के निर्माण का संकल्प मुख्यमंत्री के संबोधन और कार्यक्रम का प्रमुख हिस्सा रहा। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राज्य के विकास को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई।

    लाल परेड ग्राउंड में आयोजित समारोह में तिरंगा फहराए जाने के बाद परेड की सलामी का कार्यक्रम हुआ। राज्य स्तरीय मुख्य समारोह होने के कारण यहां सुरक्षा और व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया।

    स्वतंत्रता दिवस के मौके पर भोपाल में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान और देश के लिए बलिदान देने वाले शहीदों को याद किया गया। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों के साथ स्वतंत्रता दिवस का यह महत्वपूर्ण अवसर साझा किया।

    समारोह में बड़ी संख्या में नागरिकों की मौजूदगी रही। आयोजन स्थल और आसपास सुरक्षा के इंतजाम किए गए थे। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने तिरंगा फहराने के बाद परेड की सलामी ली और अमर शहीदों को नमन करते हुए विकसित एवं आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के निर्माण का संकल्प दोहराया।

  • पेट्रोल पर विंडफॉल टैक्स हुआ शून्य ….., डीजल और एटीएफ पर भी राहत…. आमजन को No Relief

    पेट्रोल पर विंडफॉल टैक्स हुआ शून्य ….., डीजल और एटीएफ पर भी राहत…. आमजन को No Relief


    नई दिल्ली।
    भारत सरकार (Government of India) ने शनिवार से पेट्रोल, डीजल (Petrol, Diesel) और हवाई जहाजों में इस्तेमाल होने वाले तेल एविएशन टर्बाइन फ्यूल (Aviation Turbine Fuel) यानी ATF के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स (Windfall tax) को कम कर दिया है। यह जानकारी सरकार के एक आधिकारिक आदेश से मिली है। इस आदेश के अनुसार, डीजल निर्यात पर शुल्क को घटाकर 25.5 रुपये प्रति लीटर से 24 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। वहीं, पेट्रोल निर्यात पर पहले 3.5 रुपये प्रति लीटर शुल्क लगता था, अब इसे पूरी तरह से शून्य कर दिया गया है। एटीएफ के निर्यात पर भी शुल्क में कमी की गई है, जो 22 रुपये से घटकर 19.5 रुपये प्रति लीटर हो गया है।


    आपकी जेब पर क्या पड़ेगा असर

    टैक्स में इस कमी से आम जनता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इस कटौती से निर्यातक कंपनियों को थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, हालांकि सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थितियों पर नजर बनाए हुए है और आने वाले दिनों में भी संशोधन जारी रह सकते हैं।

    गौरतलब है कि भारत ने जुलाई 2022 में पहली बार विंडफॉल टैक्स लागू किया था, ताकि तेल की बढ़ती कीमतों से होने वाले असाधारण मुनाफे पर नियंत्रण पाया जा सके। दो साल बाद इसे समाप्त कर दिया गया था, लेकिन मार्च 2026 में अमेरिका-इजराइल युद्ध के कारण ईरान पर हमले के बाद तेल की कीमतें फिर से बढ़ गईं, जिसके चलते इस कर को दोबारा लागू करना पड़ा।

    अभी भारत हर दो सप्ताह में कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय कीमतों के आधार पर इन निर्यात शुल्कों में संशोधन करता है। लेटेस्ट रेट के अनुसार, 1 अमेरिकी डॉलर लगभग 95.44 भारतीय रुपये के बराबर है।


    पिछली बार बढ़ा था विंडफॉल टैक्स

    पिछली बार 3 अगस्त को पेट्रोल निर्यात पर शुल्क 2.5 रुपये से बढ़ाकर 3.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया था। डीजल निर्यात पर विंडफॉल टैक्स 15.5 रुपये से बढ़कर 25.5 रुपये प्रति लीटर हो गया था। इसमें लगभग 10 रुपये की भारी बढ़ोतरी की गई। वहीं, एटीएफ के निर्यात पर शुल्क 14.5 रुपये से बढ़ाकर 22 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया था।


    जुलाई में डीजल-एटीएफ पर टैक्स बढ़ा, पेट्रोल का घटा

    गौरतलब है कि इससे पहले 16 जुलाई को हुई समीक्षा में सरकार ने डीजल और एटीएफ के शुल्क बढ़ाए थे, जबकि पेट्रोल पर शुल्क घटाया था। उस समय डीजल 8.5 से बढ़कर 15.5 रुपये, एटीएफ 7.5 से बढ़कर 14.5 रुपये, और पेट्रोल 4 रुपये से घटकर 2.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया था। इससे पहले की समीक्षा में पेट्रोल पर शुल्क 1.5 से बढ़ाकर 4 रुपये, डीजल 14 से घटाकर 8.5 रुपये और एटीएफ 12.5 से घटाकर 7.5 रुपये किया गया था।


    अप्रैल का क्या रहा हाल

    अगर हालिया बदलावों पर नजर डालें तो 30 अप्रैल को डीजल पर 23 रुपये और एटीएफ पर 33 रुपये का शुल्क लगाया गया था, जबकि पेट्रोल पर शून्य था। वहीं, 30 जून को पेट्रोल पर 4 रुपये, डीजल पर 8.5 रुपये और एटीएफ पर 7.5 रुपये का शुल्क निर्धारित किया गया था।

  • श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज आज से… टीम इंडिया बनेगी 600 टेस्ट खेलने वाली तीसरी टीम

    श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज आज से… टीम इंडिया बनेगी 600 टेस्ट खेलने वाली तीसरी टीम


    नई दिल्ली।
    इंडिया वर्सेस श्रीलंका (India vs Sri Lanka) दो मैच की टेस्ट सीरीज (Test series) का आगाज आज यानी शनिवार, 15 अगस्त से होने जा रहा है। सीरीज का पहला मैच गॉल इंटरनेशनल स्टेडियम में खेला जाएगा। भारतीय टीम (Indian team) के लिए यह टेस्ट मैच काफी खास रहने वाला है क्योंकि यह टीम इंडिया (Team India) के टेस्ट क्रिकेट के इतिहास का 600वां मैच होगा। भारत इस मुकाम तक पहुंचने वाला मात्र तीसरा देश बनेगा। टीम इंडिया से ज्यादा अभी तक सिर्फ दो ही देशों ने मैच खेले हैं, इस लिस्ट में क्रिकेट के इतिहास की दो सबसे पुरानी टीम इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया का नाम दर्ज है। इंग्लैंड के नाम तो सबसे ज्यादा टेस्ट मैच खेलने का भी वर्ल्ड रिकॉर्ड है।


    इंग्लैंड के नाम 1000 से अधिक टेस्ट खेलने का वर्ल्ड रिकॉर्ड

    क्रिकेट का जनक इंग्लैंड को कहा जाता है। उनके नाम इस खेल के सबसे लंबे फॉर्मेट में सबसे ज्यादा मैच खेलने का वर्ल्ड रिकॉर्ड है। क्रिकेट इतिहास में इंग्लैंड एकमात्र टीम है जिसने 1000 से अधिक टेस्ट मैच खेले हैं। जी हां, इंग्लैंड की टीम अभी तक रेड बॉल क्रिकेट में 1097 मैच खेल चुके हैं, जिसमें 405 में उन्हें जीत मिली 336 में हार का सामना करना पड़ा, जबकि 356 मैच ड्रॉ रहे।


    टॉप-2 में ऑस्ट्रेलिया भी

    इंग्लैंड के बाद अगर किसी टीम ने सबसे ज्यादा टेस्ट मैच खेले हैं तो वह है ऑस्ट्रेलिया की टीम। कंगारू टीम बांग्लादेश के खिलाफ जारी टेस्ट सीरीज में अपना 883वां मुकाबला खेल रही है। उनका जीत का रिकॉर्ड इंग्लैंड से काफी बेहतर रहा है। उन्होंने अभी तक रेड बॉल क्रिकेट में 426 मैच जीता है, 235 हारे हैं जबकि 219 मुकाबले ड्रॉ रहे हैं।

    भारत 600 टेस्ट खेलने वाला बनेगा तीसरा देश
    इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बाद भारत टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में 600 टेस्ट मैच खेलने वाला तीसरा देश बनेगा। टीम इंडिया ने अभी तक इस फॉर्मेट में खेले 599 मुकाबलों में से 186 जीते, 188 हारे और 224 ड्रॉ रहे।


    वेस्टइंडीज बेहद नजदीक

    वेस्टइंडीज की टीम भी 600 टेस्ट मैच के रिकॉर्ड के बेहद नजदीक है। उन्होंने भी इस फॉर्मेट में अभी तक 596 मैच खेल लिए हैं। जबकि अन्य टीम अभी काफी पीछे हैं। न्यूजीलैं, पाकिस्तान और साउथ अफ्रीका जैसी टीमों ने अभी तक 450 से अधिक टेस्ट मैच खेले हैं। वहीं श्रीलंका ने अभी तक 350 टेस्ट मैच भी नहीं खेले हैं।

  • डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा ऐलान, बोले- ईरान को हराकर होर्मुज को करेंगे अमेरिका में शामिल

    डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा ऐलान, बोले- ईरान को हराकर होर्मुज को करेंगे अमेरिका में शामिल


    वाशिंगटन।
    ईरान (Iran) के साथ जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने बड़ा ऐलान कर दिया है। उन्होंने कहा कि जल्द ही वह होर्मुज को अमेरिका का हिस्सा घोषित कर देंगे। उन्होंने कहा, ईरान को हराने के बाद होर्मुज (Hormuz) को अमेरिका में शामिल कर लिया जाएगा। वह न्यूयॉर्क में एक रैली को संबोधित कर रहे थे। ट्रंप ने यह नहीं बताया कि अंतरराष्ट्रीय कानून के अंतरगत यह कैसे संभव होगा।


    ईरान ने दिया जवाब

    एक दिन पहले ही डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि होर्मुज पर उनका पूरा नियंत्रण स्थापित हो गया है। उन्होंने अमेरिकी नाकेबंदी को स्टील की दीवार बताया था। वहीं ईरान के उप विदेश मंत्री काजिम घारिबाबादी ने कहा था कि होर्मुज ईरान के ही नियंत्रण में था और आगे भी रहेगा। उन्होंने कहा कि ईरान ही फैसला लेगा कि होर्मुज को कब खोला जाएगा। इसके अलावा जब तक अमेरिका अपनी हार नहीं मान लेता है, होर्मुज में नाकेबंदी जारी रहेगी।

    उन्होंने कहा, सबको वास्तविकता स्वीकार कर लेनी चाहिए। अमेरिका को करारी हार मिली है। होर्मुज हमेशा से ईरानियों का ही था और ईरान का ही रहेगा। ईरान के आदेश पर ही होर्मुज खुलेगा या बंद होगा। अगर इस वास्तविकता को आप नहीं स्वीकार करते तो फिर आप भ्रम में जी रहे हैं। वॉशिंगटन और तेहरान के बीच इस तनाव को लेकर इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की परेशानी बढ़ गई है। डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि नाकेबंदी का मतलब है कि बिना उनकी इजाजत के एक भी जहाज नहीं गुजर सकता।


    विमान वाहक पोतों में पुरानी तकनीक पर क्यों जोर दे रहे ट्रंप

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नौसेना को अपने भावी विमान वाहक जंगी पोतों से अत्याधुनिक इलेक्ट्रोमैग्नेटिक प्रणाली को हटाकर पुरानी स्टीम (भाप) आधारित कैटापुल्ट तकनीक पर लौटने का निर्देश दिया है। हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों और अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि इस फैसले से जहाजों की निर्माण लागत घटने के बजाय काफी बढ़ सकती है।

    यह आदेश वर्तमान में निर्माणाधीन ‘डोरिस मिलर’ सहित भविष्य के फोर्ड-क्लास विमान वाहकों पर लागू होगा। ट्रंप चाहते हैं कि इन जहाजों में इलेक्ट्रोमैग्नेटिक एयरक्राफ्ट लॉन्च सिस्टम और एडवांस वेपन्स एलिवेटर्स की जगह स्टीम-संचालित कैटापुल्ट और हाइड्रोलिक सिस्टम लगाये जायें। फैसले की व्याख्या करते हुए एक ज्ञापन में ट्रंप ने कहा कि युद्ध मंत्रालय को नौसैनिक बल संरचना के विस्तार के साथ समुद्री औद्योगिक आधार में क्षमता और प्रतिस्पर्धा दोनों को बहाल करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यह दृष्टिकोण स्थापित और भरोसेमंद तकनीक पर निर्भर करता है और घरेलू पोत निर्माण उद्योग में निवेश को बढ़ावा देता है।

    गौरतलब है कि इलेक्ट्रोमैग्नेटिक प्रणाली के खिलाफ ट्रंप का रुख नया नहीं है। अपने पहले कार्यकाल से ही वे अमेरिकी नौसेना के सबसे बड़े विमान वाहक ‘यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड’ में इस्तेमाल हो रहे इस सिस्टम की आलोचना करते रहे हैं और इसे अत्यधिक जटिल व अत्यधिक महंगा बताते आए हैं। हालांकि, रक्षा उद्योग इस फैसले से असहमत नजर आ रहा है। ‘डोरिस मिलर’ के लिए इलेक्ट्रोमैग्नेटिक प्रणाली के निर्माण का 1.2 अरब डॉलर का ठेका रखने वाली कैलिफोर्निया की कंपनी ‘जनरल एटॉमिक्स’ ने इसका कड़ा विरोध किया है। कंपनी ने कहा कि निर्माण कार्य लगभग आधा पूरा हो चुका है और इस मोड़ पर दिशा बदलने से लागत, समय-सारणी और एकीकरण में गंभीर समस्याएं पैदा होंगी, जिससे अमेरिका की तकनीकी श्रेष्ठता पर भी असर पड़ सकता है।

  • लाल किले से पीएम मोदी का बड़ा ऐलान, एक साल में 1 करोड़ युवाओं को AI प्रशिक्षण देने का लक्ष्य

    लाल किले से पीएम मोदी का बड़ा ऐलान, एक साल में 1 करोड़ युवाओं को AI प्रशिक्षण देने का लक्ष्य

    नई दिल्ली ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए युवाओं, तकनीक और आत्मनिर्भरता को भारत की विकास यात्रा का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने घोषणा की कि आने वाले एक साल में देश के एक करोड़ युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की स्किल ट्रेनिंग दी जाएगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि इसका उद्देश्य भारतीय युवाओं में AI के क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व करने की क्षमता विकसित करना है।

    प्रधानमंत्री ने 2047 तक विकसित भारत बनाने के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि इस लक्ष्य को देश के 140 करोड़ नागरिकों के सामूहिक प्रयास से हासिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बड़े सपनों को पूरा करने के लिए ऊंचे संकल्प और उसी स्तर के सामर्थ्य व प्रयास जरूरी हैं। उनके संबोधन में युवाओं को विकसित भारत की यात्रा की प्रमुख शक्ति के रूप में रेखांकित किया गया।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि मौजूदा दौर में डेटा सेंटर, AI और क्वांटम तकनीक का महत्व तेजी से बढ़ रहा है। उभरती तकनीकें भारत के सामने नई चुनौतियां और अवसर दोनों लेकर आ रही हैं। ऐसे में देश को इनोवेशन का केंद्र बनाने के साथ डिजिटल पब्लिक टेक्नोलॉजी को दुनिया के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाने की दिशा में प्रयास बढ़ाने की जरूरत है।

    तकनीकी विकास के साथ सेमीकंडक्टर निर्माण को भी प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत के लिए अहम बताया। उन्होंने कहा कि आज इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और डिजिटल तकनीक में चिप की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। भारत ने सेमीकंडक्टर निर्माण की दिशा में कदम बढ़ाए हैं और तीन प्लांट शुरू होने की जानकारी दी गई। आने वाले सात से आठ वर्षों में और संयंत्र शुरू करने की दिशा में भी काम किया जाएगा।

    प्रधानमंत्री ने ऊर्जा सुरक्षा को भविष्य की तकनीकी अर्थव्यवस्था से जोड़ते हुए कहा कि AI, चिप निर्माण और डेटा सेंटर के विस्तार के लिए बड़ी मात्रा में बिजली की आवश्यकता होगी। ऐसे में पर्याप्त और भरोसेमंद ऊर्जा उपलब्धता भारत की विकास रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी। उन्होंने परमाणु ऊर्जा को ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के प्रमुख माध्यमों में शामिल किया।

    प्रधानमंत्री ने देश की परमाणु ऊर्जा क्षमता को 100 गीगावाट तक पहुंचाने का लक्ष्य बताया। उन्होंने कहा कि इस दशक में पांच परमाणु रिएक्टरों के काम शुरू करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। उनका कहना था कि भविष्य की अर्थव्यवस्था में तकनीक और ऊर्जा दोनों की जरूरत बढ़ेगी, इसलिए दोनों क्षेत्रों में क्षमता निर्माण जरूरी है।

    संबोधन में ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी पर भी जोर दिया गया। प्रधानमंत्री ने ग्रीन हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण, ग्रीन मोबिलिटी और ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग को वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि भारत के पास लंबी समुद्री तटरेखा, मत्स्य संसाधन, तटीय पर्यटन और तटीय तकनीक के जरिए ब्लू इकोनॉमी को मजबूत करने की भी व्यापक संभावनाएं हैं।

    प्रधानमंत्री के भाषण में AI प्रशिक्षण से लेकर सेमीकंडक्टर निर्माण, परमाणु ऊर्जा और हरित अर्थव्यवस्था तक कई क्षेत्रों को विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ा गया। एक करोड़ युवाओं को AI स्किल देने की घोषणा से तकनीकी रूप से सक्षम कार्यबल तैयार करने पर विशेष ध्यान का संकेत मिला है। इसके साथ ही ऊर्जा और विनिर्माण क्षमता बढ़ाने को भी भविष्य की आर्थिक जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।

  • नेतनयाहू बोले- परमाणु हथियारों वाला पहला इस्लामिक गणराज्य बन सकता है ब्रिटेन..

    नेतनयाहू बोले- परमाणु हथियारों वाला पहला इस्लामिक गणराज्य बन सकता है ब्रिटेन..


    तेल अवीव।
    इजरायल (Israel) के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Prime Minister Benjamin Netanyahu) ने ब्रिटेन (Britain) को लेकर बेहद तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने ब्रिटेन को ‘इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ब्रिटेन’ (‘Islamic Republic of Britain’) तक कह दिया और कहा कि वह ‘परमाणु हथियारों वाला पहला इस्लामिक गणराज्य’ बन सकता है। नेतन्याहू ने ये बातें इजरायल के आर्मी रेडियो के लिए दिए एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में कहीं।


    ब्रिटेन के रवैये पर जताई नाराजगी

    पॉडकास्ट में नेतन्याहू इजरायल के प्रति ब्रिटेन के रुख में आए बदलाव पर बात कर रहे थे। उन्होंने पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल के बेटे और पत्रकार रैंडोल्फ चर्चिल का जिक्र करते हुए कहा कि पांच दशक से भी ज्यादा समय पहले इजरायल को ब्रिटेन में सकारात्मक कवरेज मिली थी।

    इसके बाद उन्होंने आज के ब्रिटेन की स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा, “आज के ब्रिटेन में इसे ढूंढिए, जिसे इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ब्रिटेन कहा जाता है।” जब कार्यक्रम के होस्ट ने पूछा कि क्या नेतन्याहू ब्रिटेन को अलग से निशाना बनाकर उसके साथ अनुचित व्यवहार कर रहे हैं और क्या पूरा यूरोप ऐसा ही नहीं है, तो नेतन्याहू ने अपनी बात और स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि हां, लेकिन किसी ने कहा है कि ‘परमाणु हथियारों वाला पहला इस्लामिक गणराज्य इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ब्रिटेन होगा।’


    गाजा युद्ध को लेकर ब्रिटेन और इजरायल के रिश्तों में तनाव

    नेतन्याहू की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब गाजा युद्ध को लेकर ब्रिटेन और इजरायल के रिश्तों में तनाव बढ़ा हुआ है। लेबर पार्टी की ओर से गाजा में इजरायल के सैन्य अभियान को लेकर शुरुआती प्रतिक्रिया पर एंडी बर्नहैम ने प्रधानमंत्री बनने से कुछ समय पहले माफी मांगी थी। उन्होंने कहा था कि पार्टी का शुरुआती रुख सही नहीं था और उनके नेतृत्व में उसे बेहतर करना होगा।


    गाजा युद्ध खत्म करने की अमेरिकी योजना पर भी असहमति

    नेतन्याहू ने गाजा युद्ध खत्म करने के लिए अमेरिका के समर्थन वाली योजना का भी विरोध किया। इससे इस मुद्दे पर वॉशिंगटन और इजरायल के बीच मतभेद का संकेत मिला। उन्होंने कहा कि जब तक हमास को पूरी तरह निहत्था नहीं किया जाता, तब तक इजरायल गाजा में अपनी मौजूदा स्थिति से पीछे नहीं हटेगा।

    प्रस्तावित समझौते के तहत हमास को हथियार छोड़ने की प्रक्रिया शुरू करनी थी, जबकि इजरायल को हमले रोकने और उसके नियंत्रण वाले करीब 60 फीसदी इलाके से पीछे हटने की बात कही गई थी।

    नेतन्याहू ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में कहा कि ट्रंप प्रशासन ने इजरायल को एक मसौदा भेजा था। इजरायल इससे सहमत नहीं था और उसने अपनी टिप्पणियां भेज दी हैं। उन्होंने इसे इजरायल की स्थिति बताया। नेतन्याहू ने यह भी कहा कि इजरायली सेना अपनी, अपने क्षेत्र और अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए जो जरूरी होगा, वह करती रहेगी।


    गाजा में मारे गए 100 से ज्यादा लोगों के शव बरामद

    नेतन्याहू की इन टिप्पणियों के बीच गाजा सिटी के सबरा इलाके में एक बड़े सामूहिक अंतिम संस्कार का आयोजन हुआ। यहां नवंबर 2023 में इजरायली हमले में तबाह हुए एक आवासीय ब्लॉक के मलबे से 100 से ज्यादा लोगों के शव बरामद किए गए थे। नाजुक युद्धविराम के दौरान बचावकर्मियों ने मलबे से 112 लोगों के शव निकाले। इनमें 40 बच्चे भी शामिल थे। गाजा सिविल डिफेंस के मुताबिक, इस जगह से अभी भी 157 लोगों के शव लापता हैं।