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  • दिग्विजय सिंह के 'फैक्ट चेक' से बदला सियासी समीकरण, भाजपा ने की तारीफ तो कांग्रेस में उठे सवाल

    दिग्विजय सिंह के 'फैक्ट चेक' से बदला सियासी समीकरण, भाजपा ने की तारीफ तो कांग्रेस में उठे सवाल


    भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का एक बयान इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। उज्जैन की एक जमीन से जुड़े मामले में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के आरोपों पर सवाल उठाने के बाद जहां भाजपा नेताओं ने दिग्विजय सिंह की खुले तौर पर सराहना की, वहीं कांग्रेस के भीतर उनके बयान को लेकर असहजता और विरोध के स्वर भी सुनाई देने लगे।

    वीर भारत न्यास की जमीन से शुरू हुआ विवाद
    पूरा विवाद 24 जून को उस समय शुरू हुआ, जब कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने पार्टी के मीडिया विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा के साथ दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया कि उज्जैन में लगभग 500 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीन ‘वीर भारत न्यास’ को मात्र एक रुपये में आवंटित कर दी गई। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सांस्कृतिक सलाहकार श्रीराम तिवारी इस ट्रस्ट से जुड़े रहे हैं और आवंटन की प्रक्रिया पर सवाल उठाए।

    दिग्विजय सिंह ने दस्तावेजों का हवाला देकर रखा अलग पक्ष
    कुछ दिनों बाद उज्जैन दौरे के दौरान पत्रकारों से बातचीत में दिग्विजय सिंह ने कहा कि उनके पास उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार संबंधित जमीन किसी निजी ट्रस्ट को नहीं, बल्कि एक सरकारी ट्रस्ट को दी गई थी।

    उन्होंने कहा कि वह किसी भी विषय पर सार्वजनिक टिप्पणी करने से पहले तथ्यों और दस्तावेजों की जांच करते हैं। उनके अनुसार संबंधित ट्रस्ट का पदेन अध्यक्ष राज्य का मुख्यमंत्री होता है, इसलिए इसे निजी ट्रस्ट कहना सही नहीं है।

    इसी दौरान उन्होंने यह भी कहा कि बिना तथ्यों की पुष्टि किए आरोप लगाने वाले लोगों की कमी नहीं है। बाद में इस टिप्पणी को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई।

    भाजपा विधायक से मिली थी शुरुआती जानकारी
    बड़वानी में मीडिया से बातचीत के दौरान दिग्विजय सिंह ने बताया कि जिस जानकारी के आधार पर विवाद खड़ा हुआ, वही जानकारी उन्हें भी एक भाजपा विधायक और स्थानीय अखबार के माध्यम से मिली थी। उन्होंने कहा कि दस्तावेजों की जांच के बाद उन्हें पता चला कि संबंधित ट्रस्ट सरकारी स्वरूप का है, जिसके बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रखा।

    भाजपा नेताओं ने की सराहना
    दिग्विजय सिंह के बयान के बाद भाजपा नेताओं ने उनकी तथ्य आधारित टिप्पणी की प्रशंसा की। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष उषा अग्रवाल ने सोशल मीडिया पर लिखा कि झूठ ज्यादा समय तक नहीं टिकता और दावा किया कि कांग्रेस के आरोपों को उनकी ही पार्टी के वरिष्ठ नेता ने तथ्यों के आधार पर खारिज कर दिया।

    भाजपा प्रवक्ता हितेश बाजपेयी ने भी कहा कि सार्वजनिक आरोप लगाने से पहले तथ्यों की जांच जरूरी है और दिग्विजय सिंह ने यही किया।

    इतना ही नहीं, भाजपा विधायक प्रीतम लोधी ने उनकी कार्यशैली की प्रशंसा करते हुए उन्हें भाजपा में शामिल होने का खुला निमंत्रण भी दे डाला। उन्होंने कहा कि यदि दिग्विजय सिंह भाजपा में आते हैं तो उनका सम्मानपूर्वक स्वागत किया जाएगा।

    कांग्रेस के भीतर उठे विरोध के स्वर
    दूसरी ओर, कांग्रेस के अंदर इस बयान को लेकर असहमति सामने आई। पार्टी की राजनीतिक मामलों की समिति की बैठक में विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि यदि दिग्विजय सिंह को प्रदेश अध्यक्ष के बयान पर आपत्ति थी तो उन्हें यह बात सार्वजनिक मंच की बजाय पार्टी के भीतर उठानी चाहिए थी।

    वहीं, कांग्रेस महासचिव निधि चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हुए सवाल उठाया कि कांग्रेस आखिर कब “दिग्विजय सिंह के नागपाश” से मुक्त होगी।

    साथ आए दिग्विजय और पटवारी, कहा- पार्टी एकजुट
    बढ़ते विवाद के बीच मंगलवार शाम दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी संयुक्त रूप से मीडिया के सामने आए। दोनों नेताओं ने स्पष्ट किया कि मध्य प्रदेश कांग्रेस मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सरकार से जुड़े कथित भूमि मामलों और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर पूरी तरह एकजुट होकर संघर्ष कर रही है।

    इस दौरान दिग्विजय सिंह ने अपनी ‘दलाल’ वाली टिप्पणी पर भी सफाई दी। उन्होंने कहा कि उनके बयान को गलत संदर्भ में प्रस्तुत किया गया। सिंह ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कांग्रेस के किसी नेता, विशेषकर प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, के लिए इस शब्द का इस्तेमाल नहीं किया। उन्होंने कहा कि जीतू पटवारी उनके लिए पुत्र समान हैं और पार्टी में लंबे सार्वजनिक जीवन के दौरान उन्होंने कभी अपने किसी सहयोगी के लिए इस तरह की भाषा का प्रयोग नहीं किया।

  • मंदिरों के दान पर बढ़ेगी निगरानी: बिहार धार्मिक न्यास परिषद का बड़ा फैसला, अब हर तीन महीने होगी खातों की समीक्षा

    मंदिरों के दान पर बढ़ेगी निगरानी: बिहार धार्मिक न्यास परिषद का बड़ा फैसला, अब हर तीन महीने होगी खातों की समीक्षा


    पटना। अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े गबन मामले के बाद बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद ने अपने अधीन आने वाले मंदिरों और मठों की वित्तीय निगरानी को और मजबूत करने का निर्णय लिया है। परिषद ने अब सभी पंजीकृत मंदिरों और मठों से हर तीन महीने में आय-व्यय और खातों का विवरण लेने की व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है।

    परिषद के अध्यक्ष प्रोफेसर रणवीर नंदन ने बताया कि बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद के अधीन करीब 4,500 मंदिर और मठ आते हैं। अब तक इन सभी संस्थानों का वर्ष में एक बार ऑडिट कराया जाता था, लेकिन नई व्यवस्था के तहत त्रैमासिक स्तर पर भी खातों की समीक्षा की जाएगी, ताकि दान राशि के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।

    अब हर तिमाही होगी वित्तीय निगरानी
    प्रो. रणवीर नंदन के अनुसार, वार्षिक ऑडिट में मंदिरों और मठों को प्राप्त दान, उसके उपयोग और खर्च का विस्तृत रिकॉर्ड जांचा जाता है। परिषद यह सुनिश्चित करती है कि दान की राशि का उपयोग केवल मंदिरों और मठों के रखरखाव, विकास और आवश्यक कार्यों पर ही किया जाए।

    उन्होंने बताया कि नई व्यवस्था के तहत हर तीन महीने में खातों का विवरण लेने से किसी भी संभावित वित्तीय अनियमितता की समय रहते पहचान की जा सकेगी और निगरानी व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक प्रभावी होगी।

    प्रत्येक मंदिर की अपनी न्यास समिति
    परिषद अध्यक्ष ने बताया कि परिषद के अधीन आने वाले प्रत्येक मंदिर और मठ की अपनी अलग न्यास समिति होती है। यही समिति स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार विकास कार्यों और खर्च से जुड़े निर्णय लेती है। बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद की भूमिका निर्माण और अन्य कार्यों के लिए आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी करने तथा प्रशासनिक निगरानी बनाए रखने की होती है।

    पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में पहल
    परिषद का मानना है कि नियमित वित्तीय समीक्षा से दान राशि के उपयोग में पारदर्शिता बढ़ेगी और श्रद्धालुओं का भरोसा भी मजबूत होगा। अधिकारियों के अनुसार, यह कदम मंदिरों और मठों की वित्तीय व्यवस्था को अधिक जवाबदेह और व्यवस्थित बनाने की दिशा में उठाया गया है।

    अयोध्या मामले के बाद बढ़ी सतर्कता
    अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में गबन का मामला इन दिनों जांच के दायरे में है। शिकायत के आधार पर गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) मामले की जांच कर रहा है। इस प्रकरण में अब तक आठ आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि संबंधित ट्रस्ट के पिछले पांच वर्षों के वित्तीय रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।

  • आतंकवाद पर भारत-जापान का सख्त संदेश: संयुक्त बयान में पाकिस्तान से सीमा पार आतंकवाद रोकने की अपील

    आतंकवाद पर भारत-जापान का सख्त संदेश: संयुक्त बयान में पाकिस्तान से सीमा पार आतंकवाद रोकने की अपील


    नई दिल्ली। भारत और जापान ने आतंकवाद के खिलाफ साझा और सख्त रुख अपनाते हुए पाकिस्तान से सीमा पार आतंकवाद पर प्रभावी कार्रवाई करने की अपील की है। नई दिल्ली में आयोजित भारत-जापान वार्षिक शिखर बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में दोनों देशों ने आतंकवाद के हर स्वरूप की कड़ी निंदा करते हुए इसे वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बताया।

    पहलगाम और दिल्ली आतंकी हमलों की निंदा
    संयुक्त बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सना तकाइची ने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की। इसके साथ ही 29 जुलाई 2025 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मॉनिटरिंग टीम की रिपोर्ट का उल्लेख किया गया, जिसमें द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) का जिक्र किया गया था।

    दोनों नेताओं ने नवंबर 2025 में दिल्ली में हुए आतंकी हमले की भी निंदा करते हुए कहा कि इस हमले के दोषियों, साजिशकर्ताओं और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने वालों को बिना किसी देरी के कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए।

    प्रतिबंधित आतंकी संगठनों पर निर्णायक कार्रवाई की मांग
    संयुक्त बयान में कहा गया कि भारत और जापान आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद के हर रूप की बिना किसी शर्त के निंदा करते हैं। दोनों देशों ने विशेष रूप से पाकिस्तान से होने वाले सीमा पार आतंकवाद को गंभीर चिंता का विषय बताया।

    साथ ही संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के खिलाफ प्रभावी और निर्णायक कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया गया। बयान में अल-कायदा, आईएसआईएस (ISIS), लश्कर-ए-तैयबा (LeT), जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और इनके सहयोगी संगठनों का भी उल्लेख किया गया।

    आतंक की फंडिंग और सुरक्षित ठिकानों पर सख्ती की अपील
    भारत और जापान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवाद के सुरक्षित ठिकानों को समाप्त करने, आतंकियों की वित्तीय मदद रोकने, अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क से उनके संबंध तोड़ने और सीमा पार आतंकियों की आवाजाही पर प्रभावी रोक लगाने के लिए समन्वित कार्रवाई करने का आह्वान किया।

    रणनीतिक साझेदारी को मिला नया संदेश
    यह संयुक्त बयान ऐसे समय सामने आया है, जब भारत विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा लगातार उठा रहा है। विश्लेषकों के अनुसार, भारत और जापान का यह साझा रुख दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के साथ-साथ आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देने का संकेत भी माना जा रहा है।

  • पूरे मध्य प्रदेश में सक्रिय हुआ मानसून, खंडवा-हरदा में रेड अलर्ट, 19 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी

    पूरे मध्य प्रदेश में सक्रिय हुआ मानसून, खंडवा-हरदा में रेड अलर्ट, 19 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून अब पूरी तरह सक्रिय हो गया है। 24 जून को नौ दिन की देरी से प्रदेश में प्रवेश करने वाला मानसून गुरुवार को उज्जैन, ग्वालियर और चंबल संभाग तक पहुंच गया। इसके साथ ही महज नौ दिनों में मानसून ने पूरे प्रदेश को कवर कर लिया है। हालांकि, अब भी 38 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है, जबकि भोपाल, इंदौर और देवास में सबसे अधिक वर्षा हुई है।

    खंडवा और हरदा में रेड अलर्ट
    भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के भोपाल केंद्र ने शुक्रवार को खंडवा और हरदा जिलों के लिए अति भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा धार, बड़वानी, खरगोन, देवास, बुरहानपुर और बैतूल में भी अति भारी बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले 24 घंटों में इन जिलों में 4 से 8 इंच तक वर्षा हो सकती है।

    19 जिलों में भारी बारिश का अनुमान
    रतलाम, उज्जैन, राजगढ़, रायसेन, नर्मदापुरम, सागर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, डिंडौरी और अनूपपुर सहित कई जिलों में भारी बारिश का पूर्वानुमान जारी किया गया है।

    इसके अलावा अलीराजपुर, झाबुआ, नीमच, मंदसौर, आगर-मालवा, इंदौर, शाजापुर, सीहोर, विदिशा, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, श्योपुर, ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, दमोह, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, जबलपुर, सिंगरौली, मैहर, उमरिया, कटनी, शहडोल और मंडला में भी गरज-चमक के साथ बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।

    सीजन का पहला रेड अलर्ट
    मौसम विभाग ने प्रदेश में 6 जुलाई तक भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। अगले दो दिनों के लिए रेड अलर्ट घोषित किया गया है, जो इस मानसून सीजन का पहला रेड अलर्ट है। गुरुवार को भोपाल समेत 15 से अधिक जिलों में तेज बारिश दर्ज की गई।

    जुलाई में बेहतर बारिश की उम्मीद
    मौसम विभाग के अनुसार, जून में अपेक्षाकृत कम वर्षा हुई, लेकिन जुलाई में मानसून के अधिक सक्रिय रहने की संभावना है। आमतौर पर प्रदेश की कुल मानसूनी बारिश का लगभग एक-तिहाई हिस्सा जुलाई में होता है।

    उदाहरण के तौर पर भोपाल में सामान्य मानसूनी वर्षा करीब 39 इंच मानी जाती है, जिसमें लगभग 14 इंच बारिश केवल जुलाई में दर्ज होती है। वहीं, बड़े शहरों में जबलपुर ऐसा शहर है, जहां जुलाई के दौरान 17 इंच से अधिक वर्षा होती है। मौसम विभाग का कहना है कि जुलाई में प्रदेश की कुल मानसूनी वर्षा का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा रिकॉर्ड किया जाता है।

  • आज का राशिफल 3 जुलाई शुक्रवार किस राशि पर होगी धन वर्षा और किसे बरतनी होगी विशेष सावधानी

    आज का राशिफल 3 जुलाई शुक्रवार किस राशि पर होगी धन वर्षा और किसे बरतनी होगी विशेष सावधानी


    नई दिल्ली । आज शुक्रवार 3 जुलाई का दिन कई राशियों के लिए नई संभावनाएं लेकर आया है जबकि कुछ लोगों को धैर्य और समझदारी से फैसले लेने की जरूरत रहेगी। ग्रहों की चाल करियर कारोबार आर्थिक स्थिति पारिवारिक जीवन और स्वास्थ्य पर अलग अलग प्रभाव डाल सकती है। यदि आप किसी नए कार्य की शुरुआत करने की योजना बना रहे हैं तो समय और परिस्थितियों का आकलन अवश्य करें।

    मेष राशि के जातकों के लिए दिन उत्साह और ऊर्जा से भरपूर रहेगा। कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। परिवार का सहयोग मिलेगा।

    वृषभ राशि वालों को खर्चों पर नियंत्रण रखने की जरूरत है। निवेश सोच समझकर करें। नौकरी में वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलेगा और रुके हुए कार्य पूरे होने की संभावना है।

    मिथुन राशि के लिए दिन लाभदायक रहेगा। व्यापार में नए अवसर मिल सकते हैं। विद्यार्थियों को सफलता मिलने के संकेत हैं और परिवार में सुखद वातावरण रहेगा।

    कर्क राशि के लोगों को करियर में सकारात्मक समाचार मिल सकते हैं। नौकरी बदलने की सोच रहे हैं तो जल्दबाजी न करें। स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें।

    सिंह राशि के लिए भाग्य का अच्छा साथ मिलेगा। लंबे समय से रुका कार्य पूरा हो सकता है। आर्थिक लाभ के योग बन रहे हैं और सामाजिक सम्मान बढ़ेगा।

    कन्या राशि वालों को विवादों से दूर रहना चाहिए। कार्यक्षेत्र में धैर्य से काम लें। परिवार के साथ समय बिताने से मानसिक शांति मिलेगी।

    तुला राशि के जातकों के लिए साझेदारी के कार्यों में सफलता मिलने के संकेत हैं। दांपत्य जीवन मधुर रहेगा और आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।

    वृश्चिक राशि वालों को मेहनत का पूरा फल मिल सकता है। नई योजनाओं पर काम शुरू करने का अच्छा समय है। सेहत को लेकर लापरवाही न करें।

    धनु राशि के लिए दिन शुभ रहेगा। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को अच्छी खबर मिल सकती है। कारोबार में लाभ के योग हैं।

    मकर राशि के लोगों को पारिवारिक मामलों में संयम रखना होगा। संपत्ति से जुड़े मामलों में लाभ मिलने की संभावना है। नौकरी में प्रगति के अवसर मिलेंगे।

    कुंभ राशि वालों का आत्मविश्वास बढ़ेगा। यात्रा के योग बन सकते हैं। व्यापार में नए संपर्क भविष्य के लिए लाभदायक साबित होंगे।

    मीन राशि के लिए आर्थिक दृष्टि से दिन अनुकूल रहेगा। पुराने निवेश से लाभ मिल सकता है। परिवार में खुशियों का माहौल रहेगा और मन प्रसन्न रहेगा।

    कुल मिलाकर 3 जुलाई का दिन अधिकांश राशियों के लिए सकारात्मक संकेत लेकर आया है। सफलता पाने के लिए मेहनत के साथ सही समय पर सही निर्णय लेना भी आवश्यक होगा। धैर्य संयम और सकारात्मक सोच आपको हर चुनौती से आगे बढ़ने की ताकत देगी। आज का दिन नए अवसरों का स्वागत करने और अपने लक्ष्यों की ओर आत्मविश्वास के साथ कदम बढ़ाने का संदेश देता है।

  • स्किन को रखें हमेशा जवान और चमकदार जानें रोजाना की सही स्किन केयर टिप्स

    स्किन को रखें हमेशा जवान और चमकदार जानें रोजाना की सही स्किन केयर टिप्स

    नई दिल्ली । स्वस्थ और चमकदार त्वचा हर किसी की चाहत होती है लेकिन इसके लिए केवल महंगे कॉस्मेटिक उत्पादों पर निर्भर रहना जरूरी नहीं है। सही दिनचर्या संतुलित आहार और नियमित देखभाल से त्वचा लंबे समय तक स्वस्थ और खूबसूरत बनी रह सकती है। त्वचा की देखभाल का पहला नियम है कि उसे हमेशा साफ रखें। दिन में दो बार अपनी स्किन टाइप के अनुसार हल्के फेसवॉश से चेहरा साफ करें ताकि धूल मिट्टी अतिरिक्त तेल और प्रदूषण से त्वचा को होने वाले नुकसान से बचाया जा सके।

    चेहरा धोने के बाद मॉइस्चराइजर लगाना बेहद जरूरी है। तैलीय त्वचा हो या रूखी हर प्रकार की त्वचा को नमी की आवश्यकता होती है। सही मॉइस्चराइजर त्वचा की प्राकृतिक नमी बनाए रखने में मदद करता है और उसे मुलायम बनाता है।

    धूप से बचाव भी स्किन केयर का महत्वपूर्ण हिस्सा है। घर से बाहर निकलने से पहले सनस्क्रीन जरूर लगाएं। तेज धूप त्वचा पर झुर्रियां पिग्मेंटेशन और समय से पहले एजिंग की समस्या पैदा कर सकती है। हर तीन से चार घंटे में जरूरत के अनुसार सनस्क्रीन दोबारा लगाना भी लाभदायक माना जाता है।

    स्वस्थ त्वचा के लिए पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी है। दिनभर में आठ से दस गिलास पानी पीने से शरीर हाइड्रेट रहता है और त्वचा में प्राकृतिक चमक बनी रहती है। इसके साथ ही मौसमी फल हरी सब्जियां सूखे मेवे और प्रोटीन युक्त भोजन त्वचा को भीतर से पोषण देते हैं। अधिक तला भुना जंक फूड और अत्यधिक मीठे खाद्य पदार्थों का सेवन कम करना चाहिए।

    अच्छी नींद भी त्वचा के लिए किसी प्राकृतिक उपचार से कम नहीं है। रोजाना सात से आठ घंटे की पर्याप्त नींद लेने से त्वचा खुद को रिपेयर करती है और चेहरा अधिक ताजा तथा चमकदार दिखाई देता है। तनाव कम रखने के लिए योग ध्यान और नियमित व्यायाम भी फायदेमंद होते हैं क्योंकि मानसिक तनाव का असर सीधे त्वचा पर दिखाई देता है।

    सप्ताह में एक या दो बार हल्का एक्सफोलिएशन करने से मृत कोशिकाएं हटती हैं और नई कोशिकाओं के बनने की प्रक्रिया बेहतर होती है। हालांकि बहुत अधिक स्क्रब करने से त्वचा को नुकसान भी हो सकता है इसलिए संतुलित देखभाल जरूरी है।

    यदि त्वचा पर लगातार मुंहासे दाग धब्बे एलर्जी या किसी प्रकार की गंभीर समस्या बनी रहती है तो घरेलू उपायों के बजाय त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेना सबसे बेहतर विकल्प होता है। सही देखभाल नियमित दिनचर्या और संतुलित जीवनशैली अपनाकर लंबे समय तक स्वस्थ और प्राकृतिक रूप से चमकदार त्वचा पाई जा सकती है।

  • भारत-जापान संबंधों को नई दिशा, रणनीतिक साझेदारी से समुद्री सुरक्षा तक कई बड़े फैसले; ताकाइची ने मजबूत सहयोग का दिया संदेश

    भारत-जापान संबंधों को नई दिशा, रणनीतिक साझेदारी से समुद्री सुरक्षा तक कई बड़े फैसले; ताकाइची ने मजबूत सहयोग का दिया संदेश

    नई दिल्ली । भारत और जापान ने बदलते वैश्विक परिदृश्य के बीच अपनी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाए हैं। नई दिल्ली में दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच हुई उच्चस्तरीय वार्ता के बाद रक्षा, समुद्री सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में साझा रणनीति को आगे बढ़ाने पर व्यापक सहमति बनी। दोनों देशों ने स्पष्ट किया कि क्षेत्रीय स्थिरता, सुरक्षित समुद्री मार्ग और नियम-आधारित व्यवस्था को बनाए रखने के लिए आपसी सहयोग लगातार मजबूत किया जाएगा।

    वार्ता के बाद जापान की प्रधानमंत्री ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में समान सोच रखने वाले देशों के बीच सहयोग पहले से अधिक आवश्यक हो गया है। उनका कहना था कि भारत और जापान अपनी-अपनी क्षमताओं का बेहतर उपयोग करते हुए साझा विकास और समृद्धि की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। उन्होंने दोनों देशों के संबंधों को भरोसे, सम्मान और दीर्घकालिक साझेदारी पर आधारित बताया।

    बैठक के दौरान रणनीतिक सहयोग को भविष्य की प्राथमिकताओं में प्रमुख स्थान दिया गया। दोनों पक्षों ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्वतंत्र, खुला और सुरक्षित समुद्री वातावरण बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों से निपटने और आपसी समन्वय को बढ़ाने के लिए रक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर भी सहमति बनी।

    समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में दोनों देशों ने संयुक्त नौसैनिक गतिविधियों का विस्तार करने का निर्णय लिया। हिंद महासागर क्षेत्र में संयुक्त अभ्यास बढ़ाने, नौसैनिक समन्वय को मजबूत करने तथा समुद्री निगरानी और परिचालन क्षमता में सहयोग बढ़ाने पर सकारात्मक चर्चा हुई। इसके साथ ही नौसेना से जुड़े रखरखाव, मरम्मत और तकनीकी सहयोग के क्षेत्रों में भी साझेदारी को आगे बढ़ाने की योजना बनाई गई।

    वार्ता में रक्षा उत्पादन और औद्योगिक सहयोग भी प्रमुख विषय रहा। दोनों देशों ने आधुनिक रक्षा तकनीकों, विनिर्माण क्षमता और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने के लिए मिलकर काम करने की इच्छा व्यक्त की। इससे रक्षा क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग के नए अवसर विकसित होने की संभावना जताई गई।

    आर्थिक सहयोग को लेकर भी दोनों पक्षों ने निवेश, औद्योगिक विकास और भविष्य की तकनीकों में साझेदारी बढ़ाने पर जोर दिया। दोनों देशों का मानना है कि मजबूत आर्थिक संबंध न केवल द्विपक्षीय व्यापार को गति देंगे बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को भी अधिक स्थिर और लचीला बनाएंगे। नवाचार, आधारभूत संरचना और उन्नत प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी सकारात्मक चर्चा हुई।

    इस वर्ष दोनों देशों के राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर दोनों नेताओं ने विश्वास व्यक्त किया कि भारत-जापान संबंध अब नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने साझा मूल्यों, लोकतांत्रिक परंपराओं और पारस्परिक विश्वास को भविष्य की साझेदारी की सबसे बड़ी ताकत बताया। दोनों देशों ने यह भी दोहराया कि क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और सतत विकास के लिए उनका सहयोग आने वाले वर्षों में और अधिक व्यापक तथा प्रभावी रूप लेगा।

  • ईमेल से मिली बम धमकी के बाद ISRO परिसर में हाई अलर्ट, सुरक्षा एजेंसियों का व्यापक सर्च ऑपरेशन; स्रोत की पड़ताल जारी

    ईमेल से मिली बम धमकी के बाद ISRO परिसर में हाई अलर्ट, सुरक्षा एजेंसियों का व्यापक सर्च ऑपरेशन; स्रोत की पड़ताल जारी

    नई दिल्ली । बेंगलुरु स्थित भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के न्यू BEL रोड परिसर को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह सतर्क कर दी गई। धमकी भरा ईमेल प्राप्त होते ही एहतियात के तौर पर पूरे परिसर को तत्काल खाली कराया गया और सुरक्षा एजेंसियों ने व्यापक तलाशी अभियान शुरू कर दिया। घटना के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई तथा सभी प्रवेश और निकास बिंदुओं पर निगरानी बढ़ा दी गई।

    सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, बम निरोधक दस्ता और अन्य सुरक्षा इकाइयों की टीमें मौके पर पहुंचीं। इसके बाद भवन और परिसर के प्रत्येक हिस्से की सावधानीपूर्वक जांच की गई। कई घंटों तक चले सर्च ऑपरेशन के दौरान किसी भी प्रकार का विस्फोटक, संदिग्ध सामग्री या सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वाली वस्तु बरामद नहीं हुई। प्रारंभिक जांच में धमकी को फर्जी माना जा रहा है, हालांकि सुरक्षा एजेंसियां मामले को पूरी गंभीरता से लेते हुए सभी पहलुओं की जांच कर रही हैं।

    अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों से जुड़ी किसी भी प्रकार की धमकी को हल्के में नहीं लिया जा सकता। यही कारण है कि सूचना मिलते ही निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल के अनुसार परिसर को खाली कराया गया और विशेषज्ञ टीमों की निगरानी में विस्तृत तलाशी अभियान चलाया गया। जांच पूरी होने तक सुरक्षा व्यवस्था को अतिरिक्त रूप से मजबूत रखा गया।

    जांच एजेंसियां अब धमकी भरे ईमेल के स्रोत, उसकी तकनीकी जानकारी और उसे भेजने वाले व्यक्ति या समूह की पहचान करने में जुटी हैं। डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि ईमेल किस माध्यम से भेजा गया और इसके पीछे किसी संगठित नेटवर्क की भूमिका तो नहीं है। साइबर विशेषज्ञ भी तकनीकी जांच में सहयोग कर रहे हैं।

    हाल के समय में कई सरकारी संस्थानों, न्यायिक परिसरों, शैक्षणिक संस्थानों और अन्य सार्वजनिक प्रतिष्ठानों को भी इसी प्रकार के धमकी भरे ईमेल प्राप्त होने की घटनाएं सामने आई हैं। अधिकांश मामलों में तलाशी के दौरान कोई विस्फोटक नहीं मिला, लेकिन प्रत्येक सूचना पर सुरक्षा एजेंसियां पूरी सतर्कता के साथ कार्रवाई कर रही हैं ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके।

    इसी क्रम में एक संदिग्ध व्यक्ति को विभिन्न संस्थानों को कथित रूप से फर्जी बम धमकी वाले ईमेल भेजने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि क्या वर्तमान घटना का उससे कोई संबंध है या यह मामला अलग है। फिलहाल इस संबंध में विस्तृत जांच जारी है और सभी तथ्यों का सत्यापन किया जा रहा है।

    सुरक्षा एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि संबंधित परिसर पूरी तरह सुरक्षित है और सामान्य स्थिति बहाल करने की प्रक्रिया जारी है। अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अपुष्ट जानकारी या अफवाह पर विश्वास न करें तथा केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें। मामले की जांच पूरी होने तक सुरक्षा व्यवस्था पर लगातार नजर रखी जाएगी।

  • पहली बारिश में ही खुली करोड़ों की परियोजना की पोल, अटल भवन में जलभराव से निर्माण और निगरानी व्यवस्था पर सवाल

    पहली बारिश में ही खुली करोड़ों की परियोजना की पोल, अटल भवन में जलभराव से निर्माण और निगरानी व्यवस्था पर सवाल


    मध्य प्रदेश:
    की राजधानी भोपाल में हाल ही में तैयार किए गए नगर निगम के नए मुख्यालय अटल भवन की निर्माण गुणवत्ता पहली ही बारिश में सवालों के घेरे में आ गई। करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित इस भवन में वर्षा का पानी प्रवेश कर जाने से कार्यालय परिसर के भीतर जलभराव की स्थिति बन गई। घटना के सामने आने के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता, तकनीकी मानकों के पालन और निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

    करीब 73 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए गए इस भवन को आधुनिक सुविधाओं से लैस प्रशासनिक केंद्र के रूप में विकसित किया गया था। उद्देश्य यह था कि नगर निगम की विभिन्न शाखाओं को एक ही परिसर में बेहतर सुविधाओं के साथ संचालित किया जा सके। लेकिन पहली ही बारिश के दौरान भवन के भीतर पानी पहुंचने की घटना ने इस परियोजना की गुणवत्ता पर बहस छेड़ दी है।

    बारिश के दौरान भवन के विभिन्न हिस्सों में पानी जमा होने से कर्मचारियों और अधिकारियों को कामकाज में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। कार्यालय के भीतर जलभराव की स्थिति बनने से यह सवाल भी उठने लगा कि क्या भवन के निर्माण में जल निकासी और वर्षा प्रबंधन से जुड़े आवश्यक मानकों का पर्याप्त ध्यान रखा गया था।

    इस घटना ने निर्माण एजेंसियों की कार्यप्रणाली के साथ-साथ परियोजना की तकनीकी निगरानी पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। आमतौर पर इस स्तर की सार्वजनिक परियोजनाओं में निर्माण के दौरान गुणवत्ता परीक्षण, निरीक्षण और तकनीकी मूल्यांकन की कई प्रक्रियाएं अपनाई जाती हैं। ऐसे में पहली ही बारिश में सामने आई यह स्थिति इन व्यवस्थाओं की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े करती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी नए सरकारी भवन में वर्षा जल निकासी, छत की सीलिंग, ड्रेनेज नेटवर्क और जलरोधक व्यवस्था का विशेष महत्व होता है। यदि इन पहलुओं में किसी स्तर पर कमी रह जाए तो शुरुआती बारिश में ही ऐसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। इसलिए तकनीकी कारणों की विस्तृत जांच आवश्यक मानी जा रही है।

    घटना के बाद भवन की गुणवत्ता को लेकर लोगों के बीच भी चर्चा तेज हो गई है। सार्वजनिक धन से निर्मित बड़ी परियोजनाओं से उच्च गुणवत्ता और दीर्घकालिक उपयोग की अपेक्षा की जाती है। ऐसे में निर्माण के तुरंत बाद सामने आई इस तरह की समस्या ने जवाबदेही और गुणवत्ता नियंत्रण को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

    अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संबंधित विभाग निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराता है या नहीं और यदि किसी स्तर पर लापरवाही या मानकों की अनदेखी पाई जाती है तो उसके लिए जिम्मेदार पक्षों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है। फिलहाल यह घटना सार्वजनिक निर्माण परियोजनाओं में गुणवत्ता नियंत्रण और प्रभावी निगरानी व्यवस्था की आवश्यकता को एक बार फिर प्रमुखता से सामने लेकर आई है।

  • 'एनर्जी ड्रिंक' दावों पर सख्त हुआ एफएसएसएआई, रेड बुल, स्टिंग, कैम्पा समेत कई ब्रांड्स को जारी किए नोटिस

    'एनर्जी ड्रिंक' दावों पर सख्त हुआ एफएसएसएआई, रेड बुल, स्टिंग, कैम्पा समेत कई ब्रांड्स को जारी किए नोटिस


    नई दिल्ली । भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने ‘एनर्जी ड्रिंक’ शब्द के उपयोग और उत्पादों पर किए जा रहे कथित भ्रामक दावों को लेकर कई प्रमुख पेय पदार्थ ब्रांड्स को नोटिस जारी किए हैं। यह कार्रवाई खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुपालन को सुनिश्चित करने और उपभोक्ताओं को भ्रमित करने वाले प्रचार-प्रसार पर रोक लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

    नियामक के अनुसार, मौजूदा खाद्य सुरक्षा कानून और संबंधित नियमों में ‘एनर्जी ड्रिंक’ श्रेणी के लिए कोई अलग मानक निर्धारित नहीं किया गया है। ऐसे में किसी उत्पाद को इस नाम से प्रस्तुत करना या उसकी पैकेजिंग एवं प्रचार सामग्री में ऐसे शब्दों का उपयोग करना नियामकीय जांच के दायरे में आता है। इसी आधार पर संबंधित कंपनियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है।

    नोटिस में यह भी कहा गया है कि उत्पादों की ब्रांडिंग और लेबलिंग के दौरान ऐसे दावों से बचना आवश्यक है, जिनसे यह संकेत मिले कि संबंधित पेय शरीर या मस्तिष्क की कार्यक्षमता बढ़ाता है, ऊर्जा स्तर में वृद्धि करता है, ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है या सामान्य कमजोरी दूर करने जैसे चिकित्सीय अथवा कार्यात्मक लाभ प्रदान करता है। खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत इस प्रकार के दावों को स्वीकृति प्राप्त नहीं है।

    खाद्य नियामक का कहना है कि उत्पादों की पैकेजिंग, विज्ञापन और प्रचार सामग्री उपभोक्ताओं को स्पष्ट, तथ्यात्मक और नियमों के अनुरूप जानकारी उपलब्ध कराए। यदि किसी उत्पाद के बारे में ऐसे दावे किए जाते हैं जो निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं हैं, तो उन्हें भ्रामक माना जा सकता है। इसी कारण संबंधित कंपनियों से जवाब तलब किया गया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि खाद्य एवं पेय उद्योग में ब्रांडिंग और मार्केटिंग के दौरान किए जाने वाले दावों की पारदर्शिता उपभोक्ता हितों की रक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है। किसी भी उत्पाद की वास्तविक प्रकृति और उसके संभावित प्रभावों के बारे में सही जानकारी उपलब्ध होना उपभोक्ताओं के सूचित निर्णय लेने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

    हाल के समय में खाद्य उत्पादों की लेबलिंग, प्रचार और गुणवत्ता को लेकर नियामकीय निगरानी लगातार बढ़ी है। इससे पहले भी विभिन्न खाद्य कारोबार संचालकों को उत्पादों के दावों, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और उपभोक्ता शिकायतों से जुड़े नियमों के कथित उल्लंघन के मामलों में नोटिस जारी किए जा चुके हैं। साथ ही उन्हें निर्धारित नियमों के अनुरूप आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश भी दिए गए थे।

    विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकार की कार्रवाई का उद्देश्य उद्योग में पारदर्शिता बढ़ाना, उपभोक्ताओं का विश्वास मजबूत करना और यह सुनिश्चित करना है कि बाजार में उपलब्ध खाद्य एवं पेय उत्पाद निर्धारित कानूनी मानकों और लेबलिंग नियमों का पूरी तरह पालन करें। इससे भविष्य में उत्पादों की प्रस्तुति और विपणन के तौर-तरीकों में भी अधिक जवाबदेही देखने को मिल सकती है।