Blog

  • IPL 2027 में ऑस्ट्रेलियाई दिग्गजों के खेलने पर सस्पेंस, मैकडोनाल्ड के बयान से मची हलचल

    IPL 2027 में ऑस्ट्रेलियाई दिग्गजों के खेलने पर सस्पेंस, मैकडोनाल्ड के बयान से मची हलचल


    नई दिल्ली । आईपीएल 2027 के शुरू होने से काफी पहले ही ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों की उपलब्धता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। ऑस्ट्रेलिया के हेड कोच एंड्रयू मैकडोनाल्ड के बयान ने इस चर्चा को और हवा दे दी है। दरअसल अगले साल ऑस्ट्रेलियाई टीम का इंटरनेशनल शेड्यूल बेहद व्यस्त रहने वाला है और इसी वजह से टीम के प्रमुख टेस्ट खिलाड़ियों को आईपीएल में खेलने को लेकर मुश्किल फैसले लेने पड़ सकते हैं। हालांकि मैकडोनाल्ड ने यह साफ नहीं किया है कि ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी आईपीएल 2027 से पूरी तरह बाहर रहेंगे। उन्होंने संकेत दिया है कि खिलाड़ियों की फिटनेस, वर्कलोड और इंटरनेशनल प्रतिबद्धताओं को देखते हुए अलग-अलग फैसले लिए जा सकते हैं।

    आईपीएल 2027 के मार्च के मध्य से मई के अंत तक चलने की उम्मीद है। इसके बाद जून में संभावित वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल होना है। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया के पास इंटरनेशनल क्रिकेट से आराम का समय काफी सीमित रह सकता है। अगले 12 महीनों में ऑस्ट्रेलियाई टीम को करीब 20 टेस्ट और 14 व्हाइट-बॉल इंटरनेशनल मुकाबले खेलने हैं। इस व्यस्त कार्यक्रम में भारत के खिलाफ पांच टेस्ट मैचों की सीरीज भी शामिल है। इसके अलावा टेस्ट क्रिकेट की 150वीं वर्षगांठ के मौके पर इंग्लैंड के खिलाफ एक विशेष टेस्ट और फिर एशेज सीरीज भी ऑस्ट्रेलिया के कार्यक्रम का हिस्सा है।

    ऐसे में ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख टेस्ट खिलाड़ियों के लिए आईपीएल और इंटरनेशनल क्रिकेट के बीच संतुलन बनाना बड़ी चुनौती हो सकता है। हालांकि एंड्रयू मैकडोनाल्ड का मानना है कि आईपीएल ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों के मैनेजमेंट प्लान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि दुनिया की सबसे बेहतरीन टी20 प्रतियोगिताओं में से एक आईपीएल में अपने प्रमुख खिलाड़ियों को खेलने का मौका मिलने से उन्हें फायदा हो सकता है। लेकिन इसके साथ ही खिलाड़ियों के वर्कलोड और फिटनेस को ध्यान में रखते हुए संतुलन बनाना जरूरी होगा।

    ऑस्ट्रेलिया के कई बड़े सितारे फिलहाल आईपीएल फ्रेंचाइजी से जुड़े हुए हैं। पैट कमिंस, मिचेल स्टार्क, जोश हेजलवुड, कैमरन ग्रीन और ट्रेविस हेड जैसे खिलाड़ी आईपीएल में अपनी पहचान बना चुके हैं। इसके अलावा जोश इंग्लिस भी लखनऊ सुपर जायंट्स का हिस्सा हैं। ऐसे में अगर ऑस्ट्रेलिया के नियमित टेस्ट खिलाड़ी अगले सीजन में अपनी उपलब्धता सीमित करते हैं या टूर्नामेंट से बाहर रहने का फैसला करते हैं तो इसका सीधा असर आईपीएल फ्रेंचाइजियों की रणनीति पर पड़ सकता है। खासकर रिटेंशन और टीम संयोजन को लेकर फ्रेंचाइजियों को पहले से योजना बनानी होगी।

    मैकडोनाल्ड के बयान में सबसे ज्यादा जोर तेज गेंदबाजों के वर्कलोड और रिकवरी पर रहा। ऑस्ट्रेलिया के पास अगले कुछ समय में बेहद महत्वपूर्ण मुकाबले हैं और टीम मैनेजमेंट नहीं चाहता कि लगातार क्रिकेट खेलने की वजह से उसके प्रमुख तेज गेंदबाजों की फिटनेस प्रभावित हो। भारत दौरा, एशेज और वनडे विश्व कप जैसे बड़े लक्ष्य सामने होने के कारण खिलाड़ियों को पर्याप्त आराम देना ऑस्ट्रेलिया की प्राथमिकता हो सकती है।

    मैकडोनाल्ड ने यह भी संकेत दिया कि देश और फ्रेंचाइजी क्रिकेट के बीच किसी एक को चुनने का फैसला सभी खिलाड़ियों के लिए एक जैसा नहीं होगा। खिलाड़ियों की शारीरिक और मानसिक स्थिति के आधार पर अलग-अलग फैसले लिए जा सकते हैं। अगर किसी खिलाड़ी के लिए आईपीएल उसके वर्कलोड प्लान में फिट बैठता है तो वह टूर्नामेंट में हिस्सा ले सकता है और अगर ऐसा संभव नहीं होता है तो खिलाड़ी और टीम मैनेजमेंट मिलकर फैसला कर सकते हैं।

    इसलिए फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी आईपीएल 2027 में नहीं खेलेंगे। मैकडोनाल्ड के बयान से इतना जरूर साफ है कि इस बार खिलाड़ियों की उपलब्धता केवल फ्रेंचाइजी या व्यक्तिगत इच्छा से तय नहीं होगी बल्कि फिटनेस, इंटरनेशनल शेड्यूल और टीम की जरूरतों को ध्यान में रखकर फैसला लिया जाएगा। ऐसे में आईपीएल 2027 की नीलामी और रिटेंशन से पहले ऑस्ट्रेलियाई सितारों की उपलब्धता पर सभी फ्रेंचाइजियों की नजरें टिकी रहेंगी।

  • हरियाली तीज 2026 को बनाएं यादगार, शादी के बाद पहली तीज पर कपल्स जरूर करें ये खास काम

    हरियाली तीज 2026 को बनाएं यादगार, शादी के बाद पहली तीज पर कपल्स जरूर करें ये खास काम


    नई दिल्ली । शादी के बाद आने वाला पहला त्योहार हर नवविवाहित कपल के लिए बेहद खास होता है। खासकर हरियाली तीज का उत्सव नई दुल्हन के लिए प्यार, उत्साह और पारिवारिक परंपराओं से जुड़ी कई खूबसूरत यादें लेकर आता है। हरी चूड़ियां, मेहंदी, सोलह श्रृंगार, पारंपरिक कपड़े, झूले और तीज की रस्मों के बीच पहली तीज को लेकर नवविवाहित महिलाओं में अलग ही उत्साह देखने को मिलता है। अगर शादी के बाद आपकी भी यह पहली तीज है तो इसे केवल पूजा और व्रत तक सीमित रखने के बजाय पति के साथ मिलकर इस दिन को खास और यादगार बनाया जा सकता है।

    पहली तीज को खास बनाने की शुरुआत तैयारियों से ही की जा सकती है। पति-पत्नी मिलकर घर की सजावट से लेकर कपड़ों और पूजा की तैयारियों तक में एक-दूसरे का साथ दें। दुल्हन इस मौके पर हरे रंग की साड़ी, लहंगा या सूट पहन सकती हैं। पति भी पारंपरिक कुर्ता-पायजामा या किसी एथनिक आउटफिट में तैयार होकर पत्नी के साथ ट्विनिंग कर सकते हैं। घर को फूलों, पत्तियों और पारंपरिक सजावट से सजाया जा सकता है। अगर घर में झूले की व्यवस्था हो तो उसे भी फूलों से सजाकर तीज के माहौल को और खूबसूरत बनाया जा सकता है। साथ मिलकर की गई ये छोटी-छोटी तैयारियां पति-पत्नी के बीच अपनापन बढ़ाने का काम कर सकती हैं।

    पहली तीज पर दुल्हन के श्रृंगार का भी खास महत्व होता है। हरी चूड़ियां, मेहंदी, बिंदी, सिंदूर, पायल और पारंपरिक गहने इस दिन के लुक को और आकर्षक बना सकते हैं। दुल्हन अपनी शादी के गहनों में से किसी खास आभूषण को पहली तीज पर पहन सकती हैं। इससे शादी के बाद के इस पहले बड़े त्योहार की भावनात्मक याद और मजबूत हो सकती है। मेहंदी में पति के नाम या दोनों से जुड़ा कोई छोटा डिजाइन भी शामिल किया जा सकता है।

    तीज की पूजा और पारंपरिक रस्मों में भी पति अपनी पत्नी का साथ दे सकते हैं। अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में तीज मनाने की परंपराएं अलग होती हैं इसलिए पूजा और व्रत अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार करना बेहतर है। पति पूजा की सामग्री तैयार करने से लेकर अन्य जरूरी कामों में पत्नी की मदद कर सकते हैं। अगर पत्नी व्रत रख रही हैं तो उनकी सुविधा और स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है। व्रत को लेकर अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार उचित निर्णय लेना चाहिए और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

    पहली तीज को यादगार बनाने के लिए कपल एक छोटा फोटोशूट भी कर सकते हैं। इसके लिए किसी महंगे स्टूडियो की जरूरत नहीं है। घर की बालकनी, फूलों से सजा झूला, पूजा का स्थान या घर का कोई खूबसूरत कोना ही शानदार बैकग्राउंड बन सकता है। पारंपरिक कपड़ों में कुछ कैंडिड तस्वीरें इस खास दिन की यादों को लंबे समय तक सहेजकर रख सकती हैं।

    इस दिन पति-पत्नी एक-दूसरे के लिए छोटा सा सरप्राइज भी प्लान कर सकते हैं। इसके लिए महंगा गिफ्ट जरूरी नहीं है। फूल, पसंदीदा मिठाई, चूड़ियां, किताब, छोटी ज्वेलरी या हाथ से लिखा हुआ प्रेम पत्र भी इस दिन को खास बना सकता है। पत्नी भी पति की पसंद की कोई छोटी चीज देकर उन्हें सरप्राइज कर सकती हैं। पूजा और व्रत के बाद समय मिले तो दोनों मिलकर घर पर पारंपरिक भोजन तैयार कर सकते हैं और परिवार के साथ त्योहार का आनंद ले सकते हैं।

    सबसे जरूरी बात यह है कि पहली हरियाली तीज को केवल एक धार्मिक रस्म की तरह न मनाएं बल्कि इसे एक-दूसरे के साथ समय बिताने और नई यादें बनाने का अवसर बनाएं। पारिवारिक परंपराओं का सम्मान करते हुए स्वास्थ्य का ध्यान रखें और महंगे उपहारों के बजाय साथ, सम्मान और भावनात्मक जुड़ाव को प्राथमिकता दें। कुछ साल बाद जब पहली तीज की तस्वीरें और यादें सामने आएंगी तो यही छोटी-छोटी खुशियां इस त्योहार को सबसे खास बना देंगी।

  • कम उम्र में भी बढ़ रहा ब्लड क्लॉट का खतरा, पानी की कमी से लेकर मोटापा-धूम्रपान तक हो सकते हैं कारण; ऐसे रखें खून को स्वस्थ

    कम उम्र में भी बढ़ रहा ब्लड क्लॉट का खतरा, पानी की कमी से लेकर मोटापा-धूम्रपान तक हो सकते हैं कारण; ऐसे रखें खून को स्वस्थ


    नई दिल्ली । खून हमारे शरीर के हर हिस्से तक ऑक्सीजन और जरूरी पोषक तत्व पहुंचाने का काम करता है लेकिन जब रक्त का प्रवाह सामान्य से प्रभावित होने लगे या खून में थक्का बनने की प्रवृत्ति बढ़ जाए तो यह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। आम बोलचाल में इसे खून गाढ़ा होना कहा जाता है। मेडिकल तौर पर कुछ स्थितियों में इसे हाइपरकोएगुलेबिलिटी या हाइपरविस्कॉसिटी से जोड़ा जाता है। हालांकि हर बार खून गाढ़ा होने का मतलब एक ही बीमारी नहीं होता और इसके पीछे अलग-अलग कारण हो सकते हैं।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक शरीर में पानी की कमी खून के तरल हिस्से को कम कर सकती है। इससे रक्त अधिक कंसंट्रेटेड दिखाई दे सकता है। इसके अलावा कुछ लोगों में लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या असामान्य रूप से बढ़ने पर भी रक्त अधिक गाढ़ा हो सकता है। एरिथ्रोसाइटोसिस जैसी स्थितियां इसके उदाहरण हैं। लंबे समय तक एक जगह बैठे रहना, शारीरिक गतिविधि की कमी, मोटापा और धूम्रपान भी ब्लड क्लॉट बनने के जोखिम को बढ़ाने वाले कारकों में शामिल हैं।

    कुछ परिस्थितियों में शरीर में खून के थक्के बनने की संभावना सामान्य से अधिक हो सकती है। सर्जरी के बाद लंबे समय तक आराम करना, गंभीर चोट, लंबी यात्रा या लगातार कई घंटे बैठे रहना ऐसे कारण हैं जिनमें विशेष सावधानी की जरूरत होती है। गर्भावस्था और प्रसव के आसपास का समय तथा कुछ हार्मोनल दवाएं भी कुछ लोगों में क्लॉटिंग के जोखिम को प्रभावित कर सकती हैं। इसके अलावा कुछ आनुवंशिक स्थितियों के कारण भी किसी व्यक्ति में ब्लड क्लॉट बनने की संभावना अधिक हो सकती है।

    खून में थक्का बनने की सबसे बड़ी चिंता यह है कि वह शरीर की नस या धमनी में रक्त के सामान्य प्रवाह को रोक सकता है। अगर पैर की किसी गहरी नस में थक्का बनता है तो इसे डीप वेन थ्रोम्बोसिस यानी डीवीटी कहा जाता है। इसमें आमतौर पर पैर में सूजन, दर्द या असहजता जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। स्थिति तब गंभीर हो सकती है जब यह थक्का टूटकर रक्त के साथ फेफड़ों तक पहुंच जाए। ऐसा होने पर पल्मोनरी एम्बोलिज्म जैसी जानलेवा स्थिति पैदा हो सकती है।

    इसी तरह यदि कोई थक्का मस्तिष्क तक जाने वाली रक्त वाहिका में रक्त प्रवाह को बाधित करता है तो स्ट्रोक का खतरा हो सकता है। इसलिए शरीर में अचानक दिखाई देने वाले कुछ लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। पैर में अचानक सूजन या दर्द, सांस लेने में अचानक परेशानी, सीने में दर्द या स्ट्रोक जैसे लक्षण दिखने पर तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है।

    ब्लड क्लॉट का खतरा केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं माना जाता। लंबे समय तक बैठे रहने वाले लोगों, बहुत कम शारीरिक गतिविधि करने वालों, मोटापे से जूझ रहे लोगों और धूम्रपान करने वालों में इसका जोखिम बढ़ सकता है। लंबी यात्रा करने वाले लोगों को भी लगातार कई घंटे एक ही स्थिति में बैठे रहने से बचना चाहिए। जिन लोगों में पहले ब्लड क्लॉट की समस्या हो चुकी है या परिवार में ऐसी समस्या का इतिहास रहा है उन्हें डॉक्टर की सलाह के अनुसार अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।

    बचाव के लिए सबसे जरूरी बात लंबे समय तक लगातार निष्क्रिय रहने से बचना है। यदि आपका काम कई घंटे बैठकर करने वाला है तो बीच-बीच में उठकर कुछ देर चलना और पैरों को सक्रिय रखना फायदेमंद हो सकता है। लंबी यात्रा के दौरान भी समय-समय पर चलने-फिरने की कोशिश करनी चाहिए। नियमित शारीरिक गतिविधि स्वस्थ वजन बनाए रखने और शरीर में रक्त संचार को बेहतर रखने में मदद कर सकती है।

    इसके साथ ही पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, धूम्रपान से दूरी बनाना और वजन को नियंत्रित रखना भी महत्वपूर्ण है। हालांकि केवल लक्षणों के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि किसी व्यक्ति का खून गाढ़ा है या नहीं। ऐसी स्थिति का कारण जानने के लिए डॉक्टर जांच की सलाह दे सकते हैं। इसलिए बिना चिकित्सकीय सलाह के ब्लड थिनर या कोई अन्य दवा लेना उचित नहीं है। अगर आपको ब्लड क्लॉट के लक्षण दिखाई दें या किसी कारण से इसका जोखिम अधिक हो तो समय पर डॉक्टर से संपर्क करना ही सबसे सुरक्षित कदम है।

  • इस्तीफे के बाद पहली बार खुलकर बोले धर्मेंद्र प्रधान, NEET विवाद और विरोध पर कहा- मैं किसान का बेटा हूं, वापस नहीं जाऊंगा

    इस्तीफे के बाद पहली बार खुलकर बोले धर्मेंद्र प्रधान, NEET विवाद और विरोध पर कहा- मैं किसान का बेटा हूं, वापस नहीं जाऊंगा


    नई दिल्ली । नीट पेपर लीक विवाद और छात्रों के विरोध के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देने वाले धर्मेंद्र प्रधान ने पहली बार विस्तार से अपनी चुप्पी तोड़ी है। ओडिशा के संबलपुर से भाजपा सांसद और वरिष्ठ भाजपा नेता धर्मेंद्र प्रधान ने भुवनेश्वर के जीएम विश्वविद्यालय में छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए अपने इस्तीफे के फैसले और युवा पीढ़ी को लेकर अपनी सोच सामने रखी। उन्होंने कहा कि जेन जी उनके लिए अपने बच्चों की तरह हैं और कुछ लोगों ने उन्हें गुमराह करने की कोशिश की। प्रधान ने कहा कि उनके लिए मंत्री पद से ज्यादा महत्वपूर्ण देश के बच्चों का भविष्य और उनकी सुरक्षा है।

    धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि भारत में हर साल कम से कम दो करोड़ बच्चे जन्म लेते हैं। पिछले 10 वर्षों में करीब 20 करोड़ बच्चे देश में पैदा हुए हैं और इन बच्चों की अपनी आकांक्षाएं हैं। उनके मुताबिक यही युवा आने वाले समय में भारत को विश्व गुरु बनाने की दिशा में काम करेंगे। उन्होंने कहा कि पद उनके लिए कभी महत्वपूर्ण नहीं रहा। नीट विवाद के बीच उन्होंने देश और बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस्तीफा देने का फैसला किया।

    प्रधान ने इससे पहले भी अपने इस्तीफे को लेकर यही तर्क दिया था। उन्होंने कहा था कि 20 जुलाई की घटना को देखते हुए और बच्चों तथा देश की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्होंने पद छोड़ने का फैसला किया। उनका आरोप रहा कि जेन जी के युवाओं को गुमराह करने की कोशिश की गई। अब भुवनेश्वर में छात्रों और शिक्षकों के बीच दिए गए संबोधन में उन्होंने एक बार फिर अपने इसी रुख को दोहराया।

    हालांकि राष्ट्रीय स्तर पर विवाद के साथ ही धर्मेंद्र प्रधान को अपने गृह राज्य ओडिशा में भी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। बीजू जनता दल के कार्यकर्ता उनके कई कार्यक्रमों में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। रायराखोल में एक कार्यक्रम के दौरान भी प्रधान के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई। विरोध के बीच प्रधान ने कहा कि वह इस तरह की नारेबाजी से परेशान नहीं हैं। उन्होंने खुद को किसान का बेटा बताते हुए कहा कि उन्हें वापस जाने के लिए कहा जाएगा तब भी वह वापस नहीं जाएंगे बल्कि लौटकर आएंगे।

    धर्मेंद्र प्रधान ने अपने संबोधन में बीजू जनता दल के अध्यक्ष और ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि नवीन पटनायक युवाओं को उनके खिलाफ भड़काने की कोशिश कर रहे हैं। प्रधान ने कहा कि नवीन बाबू उन्हें ओडिशा के लोगों के लिए शर्म की बात और बुरा व्यक्ति बताते हैं लेकिन सवाल यह है कि क्या उन्होंने कभी ऐसा कोई काम किया है जिससे राज्य के लोगों को शर्मिंदगी उठानी पड़ी हो।

    प्रधान ने कहा कि संभव है कि वह राज्य के लिए सम्मान न ला पा रहे हों लेकिन उन्होंने अपने काम से कभी भी ओडिशा के लोगों को शर्मिंदा नहीं किया। उन्होंने यह भी कहा कि वह भविष्य में भी ऐसा कोई काम नहीं करेंगे जिससे राज्य की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचे। इस दौरान सभा में मौजूद लोगों ने उनके सवाल के जवाब में समर्थन जताया। कार्यक्रम में बीजेडी विधायक और ओडिशा विधानसभा के उपनेता प्रसन्ना आचार्य भी मौजूद थे।

    धर्मेंद्र प्रधान का यह बयान ऐसे समय में आया है जब उनके इस्तीफे को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। एक तरफ विपक्ष और प्रदर्शनकारी छात्र नीट से जुड़े विवादों को लेकर सवाल उठा रहे हैं तो दूसरी ओर प्रधान अपने फैसले को युवाओं और देश की सुरक्षा से जोड़कर देख रहे हैं। उन्होंने साफ संकेत दिया है कि पद छोड़ने के बावजूद वह सार्वजनिक जीवन और ओडिशा की राजनीति से पीछे हटने वाले नहीं हैं। उनके बयान से यह भी स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में नीट विवाद के साथ ओडिशा की राजनीतिक लड़ाई में भी उनका मुद्दा प्रमुख बना रह सकता है।

  • मंगल के नक्षत्र में राहु का बड़ा गोचर, जानिए किन 3 राशियों को साल के अंत तक मिलेगा अचानक धन लाभ

    मंगल के नक्षत्र में राहु का बड़ा गोचर, जानिए किन 3 राशियों को साल के अंत तक मिलेगा अचानक धन लाभ

    नई दिल्ली ।ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों और नक्षत्रों के परिवर्तन को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इनका सीधा प्रभाव सभी राशियों के जीवन पर पड़ता है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, राहु ग्रह ने मंगल के स्वामित्व वाले धनिष्ठा नक्षत्र में प्रवेश कर लिया है। ज्योतिष में धनिष्ठा नक्षत्र को धन, पद, प्रतिष्ठा, समृद्धि और सफलता का प्रतीक माना गया है, जबकि राहु को अचानक शुभ या अशुभ परिणाम देने वाले ग्रह के रूप में देखा जाता है। राहु के इस नक्षत्र परिवर्तन से राशि चक्र की तीन विशेष राशियों मेष, सिंह और कन्या को साल के अंत तक जबरदस्त आर्थिक लाभ और करियर में प्रगति मिलने के संकेत दिखाई दे रहे हैं।

    मेष राशि के जातकों के लिए राहु का यह गोचर बेहद अनुकूल रहने की संभावना है। मेष राशि का स्वामी ग्रह स्वयं मंगल है और धनिष्ठा नक्षत्र का स्वामित्व भी मंगल के ही पास है। इस शुभ संयोग के प्रभाव से मेष राशि के जातकों के आत्मविश्वास में अप्रत्याशित वृद्धि देखने को मिलेगी। लंबे समय से अटके हुए कार्य गति पकड़ेंगे और सफलतापूर्वक पूरे होंगे। कार्यक्षेत्र में पदोन्नति या कोई बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है, वहीं व्यापारियों को भी अच्छा वित्तीय मुनाफा होने की संभावना है। हालांकि, ज्योतिषविदों ने किसी भी बड़े निर्णय को जल्दबाजी में न लेने की सलाह दी है।

    सिंह राशि के जातकों के लिए भी राहु का यह नक्षत्र परिवर्तन अत्यधिक शुभ एवं लाभकारी सिद्ध हो सकता है। इस दौरान जातकों की कई पुरानी इच्छाएं पूरी होने के योग बन रहे हैं। आय के नए स्रोत विकसित होंगे और आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा। अचल संपत्ति या पैतृक संपत्ति से जुड़े मामलों में सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। अचानक किसी बड़े वित्तीय लाभ के अवसर प्राप्त हो सकते हैं। इसके अतिरिक्त, सरकारी क्षेत्र या प्रशासनिक सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों को पदोन्नति और उच्च पद मिलने के प्रबल संकेत हैं।

    कन्या राशि के लोगों के लिए राहु का मंगल के नक्षत्र में जाना करियर और व्यापार में नए अवसर लेकर आएगा। नौकरीपेशा लोगों को मनपसंद स्थान या विभाग में काम करने का मौका मिल सकता है। जो लोग नई नौकरी की तलाश में हैं या नौकरी छोड़कर अपना स्वयं का व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, उनके लिए यह समय बेहद अनुकूल रहेगा। अतिरिक्त आय के साधन बनने से बैंक बैलेंस में बढ़ोतरी होगी। कुल मिलाकर यह अवधि तीनों राशियों के जातकों के लिए प्रगतिशील और लाभदायक सिद्ध होगी।

  • ईरान और ओमान समुद्री मार्ग समझौते के करीब, अमेरिका के सामने तेहरान ने रखीं कड़ी शर्तें

    ईरान और ओमान समुद्री मार्ग समझौते के करीब, अमेरिका के सामने तेहरान ने रखीं कड़ी शर्तें


    नई दिल्ली । 
    पश्चिम एशिया में जारी रणनीतिक और कूटनीतिक तनाव के बीच ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अत्यंत सख्त रुख अपनाया है। ईरानी सैन्य प्रतिष्ठान ने स्पष्ट कर दिया है कि दुनिया के इस सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को फिर से खोलने की प्रक्रिया पूरी तरह से अमेरिका द्वारा रखी गई शर्तों को स्वीकार करने पर निर्भर करेगी। जब तक अमेरिका ईरान की सभी मांगों और शर्तों को पूरी तरह से नहीं मान लेता, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य से आवाजाही बहाल नहीं की जाएगी।

    आईआरजीसी के आधिकारिक प्रवक्ता सरदार मोहेबी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि इस महत्वपूर्ण जलडमरूमध्य को खोलने के लिए कुछ विशेष व्यवस्थाएं और कड़ी शर्तें तय की गई हैं। उन्होंने कहा कि यह मार्ग तभी खोला जाएगा जब अमेरिकी प्रशासन क्षेत्रीय बातचीत और मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप पूरी तरह बंद करेगा। इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिकी प्रशासन के समक्ष रखी गई शर्तें ओमान के साथ चल रही कूटनीतिक वार्ताओं से अलग हैं।

    दूसरी तरफ, कूटनीतिक मोर्चे पर ईरान और ओमान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को लेकर नए प्रोटोकॉल पर सहमति बनती दिख रही है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पुष्टि की है कि दोनों देश एक व्यावहारिक और नई जहाजरानी व्यवस्था पर समझौते के बेहद करीब पहुंच चुके हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि जलमार्ग को पूर्ण रूप से चालू करने से पहले अमेरिका से जुड़े कुछ आर्थिक और तकनीकी मुद्दों का समाधान होना बाकी है।

    ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहम्मद बाघेर ज़ोलघद्र ने अमेरिका के समक्ष रखी गई शर्तों की विस्तृत रूपरेखा साझा की है। ईरान की प्रमुख मांगों में उसके खिलाफ किसी भी प्रकार की सैन्य धमकियों और कार्रवाइयों को तुरंत रोकना, फारस की खाड़ी क्षेत्र में नाकाबंदी में शामिल नौसैनिक और वायुसैनिक बलों की वापसी, संघर्ष के दौरान हुए वित्तीय और ढांचागत नुकसान का उचित मुआवजा देना, आर्थिक प्रतिबंधों को पूरी तरह हटाना और विदेश में जब्त की गई ईरानी परिसंपत्तियों को तत्काल जारी करना शामिल है।

    ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियां कूटनीतिक समझौते के लिए सबसे उपयुक्त अवसर प्रस्तुत करती हैं। हालांकि, उन्होंने दृढ़ता से दोहराया कि तेहरान अपने नागरिकों के अधिकारों और राष्ट्रीय स्वाभिमान से किसी भी सूरत में समझौता नहीं करेगा। उन्होंने देश की आंतरिक क्षमताओं और जनता के भरोसे को प्राथमिकता देने की बात कही।

    इसके अतिरिक्त, क्षेत्र में यमन के मारिब शहर से भी हिंसा की खबरें सामने आई हैं। यमनी सशस्त्र बलों ने ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों पर आवासीय इलाकों और विस्थापित लोगों के शिविरों को निशाना बनाकर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमले करने का आरोप लगाया है। इन हमलों में दो लोगों की मौत हुई है और चौदह अन्य नागरिक गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। यमनी सैन्य नेतृत्व ने उचित समय और स्थान पर इन हमलों का कड़ा जवाब देने की घोषणा की है।

  • मशहूर टीवी शो में काम करने का ऐसा चढ़ा जुनून, छिंदवाड़ा से 900 किमी दूर मुंबई फिल्म सिटी पहुंचा नाबालिग

    मशहूर टीवी शो में काम करने का ऐसा चढ़ा जुनून, छिंदवाड़ा से 900 किमी दूर मुंबई फिल्म सिटी पहुंचा नाबालिग

    मध्य प्रदेश। के छिंदवाड़ा जिले का निवासी एक 16 वर्षीय नाबालिग लड़का अभिनय क्षेत्र में अपना करियर बनाने और एक प्रसिद्ध टेलीविजन धारावाहिक में काम करने की चाहत में बिना बताए घर से निकलकर मुंबई पहुंच गया। लगभग 900 किलोमीटर की दूरी तय करके पहुंचे इस किशोर को मुंबई की गोरेगांव स्थित फिल्म सिटी परिसर में पुलिस की सतर्कता से सकुशल बरामद कर लिया गया है।

    प्राप्त विवरण के अनुसार, आरे पुलिस स्टेशन की गश्ती टीम को गोरेगांव स्थित फिल्म सिटी के पास एक नाबालिग अकेले घूमता हुआ दिखाई दिया। संदिग्ध स्थिति में घूम रहे लड़के को सुरक्षाकर्मियों और पुलिसकर्मियों ने रोककर पूछताछ की। शुरुआती पूछताछ के बाद उसे आरे पुलिस स्टेशन लाया गया, जहां उसने अपने घर से भागकर मुंबई आने की पूरी जानकारी पुलिस अधिकारियों के सामने साझा की।

    नाबालिग ने बताया कि वह गुरुवार दोपहर को अपने घर से स्कूल जाने का बहाना बनाकर निकला था, लेकिन वह स्कूल न जाकर सीधे छिंदवाड़ा रेलवे स्टेशन पहुंच गया। वहां से उसने ट्रेन पकड़कर पहले नागपुर का सफर किया और फिर नागपुर से कनेक्टिंग ट्रेन लेकर मुंबई के लिए रवाना हो गया। अगले दिन सुबह गोरेगांव रेलवे स्टेशन उतरने के बाद वह पैदल ही फिल्म सिटी परिसर तक पहुंच गया।

    पूछताछ में लड़के ने स्वीकार किया कि वह देश के लोकप्रिय कॉमेडी टेलीविजन धारावाहिक ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ से अत्यधिक प्रभावित था और उसमें अभिनय का अवसर प्राप्त करना चाहता था। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा से अभिनय के जुनून में आए इस लड़के के संदर्भ में जब मुंबई पुलिस ने स्थानीय पुलिस और परिजनों से संपर्क किया, तो पता चला कि परिजनों ने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा रखी थी।

    मुंबई पुलिस ने बालक के परिजनों को उसके सुरक्षित मिलने की जानकारी दे दी है। फिलहाल नाबालिग को आरे पुलिस स्टेशन में सुरक्षा और देखरेख में रखा गया है। सूचना मिलने के बाद उसके पिता छिंदवाड़ा से मुंबई के लिए रवाना हो चुके हैं, ताकि कानूनी औपचारिकताओं को पूरा कर अपने पुत्र को सकुशल घर वापस ले जा सकें।

  • 83 की उम्र में भी अमिताभ बच्चन का जुनून कायम, KBC डायरेक्टर ने बताया हर एपिसोड की तैयारी का राज

    83 की उम्र में भी अमिताभ बच्चन का जुनून कायम, KBC डायरेक्टर ने बताया हर एपिसोड की तैयारी का राज


    नई दिल्ली । कौन बनेगा करोड़पति अपने 18वें सीजन के साथ एक बार फिर दर्शकों के बीच लौटने की तैयारी में है और इस बार भी शो की सबसे बड़ी पहचान अमिताभ बच्चन ही हैं। शो की शुरुआत से ही बिग बी इसके चेहरे रहे हैं। तीसरे सीजन को छोड़ दिया जाए तो पिछले 26 वर्षों से अमिताभ बच्चन और KBC का रिश्ता लगातार कायम है। दर्शकों को हर एपिसोड में उनका सवाल पूछने का अंदाज और कंटेस्टेंट्स के साथ उनकी बातचीत दिखाई देती है लेकिन कैमरे के पीछे बिग बी जिस तरह हर एपिसोड की तैयारी करते हैं उसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। KBC के डायरेक्टर अरुण शेषकुमार ने एक खास बातचीत में अमिताभ बच्चन की कार्यशैली और उनकी ऊर्जा से जुड़े कई दिलचस्प पहलुओं का खुलासा किया है।

    अरुण शेषकुमार के मुताबिक 26 साल बीत जाने के बावजूद अमिताभ बच्चन के काम करने का तरीका आज भी पहले जैसा ही है। वह शूटिंग के दिन सुबह सेट पर पहुंचते हैं और सबसे पहले स्क्रिप्ट देखते हैं। शो की शुरुआत और अंत का हिस्सा स्क्रिप्टेड होता है जबकि बाकी पूरा एपिसोड कंटेस्टेंट के साथ मौके पर होने वाली बातचीत के आधार पर आगे बढ़ता है। यही वजह है कि हर कंटेस्टेंट को समझना उनके लिए बेहद जरूरी हो जाता है।

    डायरेक्टर ने बताया कि टीम को पहले से यह पता नहीं होता कि हॉट सीट पर आखिर कौन पहुंचेगा। ऐसे में हर एपिसोड से पहले करीब 10 संभावित कंटेस्टेंट्स की प्रोफाइल और उनकी जिंदगी से जुड़ी कहानियां तैयार रखी जाती हैं। अमिताभ बच्चन इन सभी प्रोफाइल को ध्यान से पढ़ते हैं और कंटेस्टेंट्स की जिंदगी को समझने की कोशिश करते हैं। जब कोई व्यक्ति हॉट सीट पर पहुंचता है तो बिग बी उसकी कहानी और संघर्ष के मुताबिक बातचीत का अंदाज तय करते हैं। यही खूबी उन्हें सिर्फ एक टीवी होस्ट नहीं बल्कि कंटेस्टेंट्स के साथ जुड़ने वाला कलाकार बनाती है।

    अरुण शेषकुमार के मुताबिक अमिताभ बच्चन की एक और बड़ी खासियत यह है कि वह सामने बैठे व्यक्ति की बॉडी लैंग्वेज और घबराहट को तुरंत समझ लेते हैं। अगर कोई कंटेस्टेंट तनाव में होता है या अपनी बात खुलकर नहीं रख पाता तो बिग बी पहले उसे सहज करने की कोशिश करते हैं। वह बातचीत के जरिए उसका आत्मविश्वास बढ़ाते हैं और फिर उसे अपनी कहानी साझा करने के लिए प्रेरित करते हैं। यही कारण है कि KBC में कंटेस्टेंट और होस्ट के बीच होने वाली बातचीत कई बार बेहद व्यक्तिगत और भावनात्मक नजर आती है।

    अमिताभ बच्चन की भूमिका केवल शो की मेजबानी तक सीमित नहीं है। डायरेक्टर के अनुसार हर सीजन में बिग बी के सुझाव मिलते हैं और उनका योगदान शो को बेहतर बनाने में अहम रहता है। वह सिर्फ गेम से जुड़े बदलावों पर सुझाव नहीं देते बल्कि पूरे कार्यक्रम को और प्रभावी बनाने के लिए अपनी राय साझा करते हैं। इतने लंबे समय से शो का हिस्सा होने के बावजूद उनका उत्साह और नएपन को लेकर नजरिया आज भी बरकरार है।

    सबसे ज्यादा चर्चा अमिताभ बच्चन की उम्र और उनकी ऊर्जा को लेकर होती है। अरुण शेषकुमार बताते हैं कि 83 साल की उम्र में भी सेट पर कई बार सबसे ज्यादा ऊर्जा अमिताभ बच्चन में ही दिखाई देती है। वह कहते हैं कि टीम के कई सदस्य उनसे उम्र में काफी छोटे होने के बावजूद उनकी ऊर्जा की बराबरी नहीं कर पाते। बिग बी का काम के प्रति जुनून और समर्पण पूरी टीम के लिए प्रेरणा है।

    हालांकि उनकी उम्र को देखते हुए KBC की टीम शूटिंग के दौरान उनकी सेहत और आराम का विशेष ध्यान रखती है। कोशिश की जाती है कि काम के घंटे बहुत लंबे न हों और उन्हें पर्याप्त ब्रेक मिलता रहे। सेट पर उनकी सुविधा और आराम का पूरा ध्यान रखा जाता है। इसके बावजूद कैमरा ऑन होते ही उनकी ऊर्जा और पेशेवर अंदाज ऐसा दिखाई देता है कि उनकी उम्र का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है। यही वजह है कि 26 साल बाद भी अमिताभ बच्चन KBC की सबसे बड़ी ताकत बने हुए हैं।

  • मोटापा घटाने में GLP-1 दवाओं ने बढ़ाई उम्मीद लेकिन गंभीर मरीजों के लिए सर्जरी अब भी क्यों जरूरी

    मोटापा घटाने में GLP-1 दवाओं ने बढ़ाई उम्मीद लेकिन गंभीर मरीजों के लिए सर्जरी अब भी क्यों जरूरी


    नई दिल्ली। मोटापा आज दुनिया भर में तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं में शामिल है और इसके कारण डायबिटीज दिल की बीमारी फैटी लिवर नींद के दौरान सांस रुकने जैसी कई गंभीर परेशानियों का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में वजन कम करने के लिए पिछले कुछ समय में GLP-1 दवाओं की चर्चा तेजी से बढ़ी है। इन दवाओं ने मोटापे के इलाज में एक नया विकल्प जरूर दिया है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वजन घटाने वाली सर्जरी की जरूरत पूरी तरह खत्म हो गई है। डॉक्टरों के मुताबिक हर व्यक्ति के लिए मोटापे का इलाज अलग हो सकता है और इसका फैसला उसकी पूरी स्वास्थ्य स्थिति को देखकर किया जाना चाहिए।

    GLP-1 दवाएं शरीर में भूख और खाने की इच्छा को नियंत्रित करने वाले तंत्र पर असर डालती हैं। इनसे कुछ लोगों को कम खाने और लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस करने में मदद मिल सकती है। इसके कारण वजन कम करने में सहायता मिलती है। यही वजह है कि जो लोग वजन घटाने की सर्जरी से बचना चाहते हैं उनके लिए GLP-1 दवाएं एक महत्वपूर्ण विकल्प बनकर सामने आई हैं। हालांकि इन दवाओं को किसी आसान या जादुई तरीके के रूप में देखना सही नहीं है।

    मोटापे के इलाज में केवल वजन कम करना ही लक्ष्य नहीं होता बल्कि व्यक्ति की पूरी सेहत में सुधार करना भी जरूरी होता है। अगर किसी व्यक्ति को गंभीर मोटापे के साथ टाइप 2 डायबिटीज दिल से जुड़ी समस्या फैटी लिवर या स्लीप एपनिया जैसी बीमारी है तो डॉक्टर इलाज के दूसरे विकल्पों पर भी विचार कर सकते हैं। कुछ गंभीर मामलों में वजन घटाने की सर्जरी अब भी प्रभावी उपचार विकल्प हो सकती है। इसलिए यह मान लेना सही नहीं होगा कि GLP-1 दवाओं के आने के बाद सर्जरी की जरूरत खत्म हो गई है।

    GLP-1 दवाओं की बढ़ती लोकप्रियता के बीच विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि इन्हें बिना डॉक्टर की सलाह के इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। दवा शुरू करने से पहले व्यक्ति की मेडिकल हिस्ट्री वजन बढ़ने के कारण दूसरी बीमारियों और इस्तेमाल की जा रही दवाओं की जानकारी लेना जरूरी होता है। दवा की मात्रा और उपचार की अवधि भी डॉक्टर ही तय करते हैं। कुछ लोगों में दवा से पाचन संबंधी परेशानी सहित अन्य दुष्प्रभाव हो सकते हैं इसलिए नियमित चिकित्सकीय निगरानी जरूरी है।

    वजन कम करने के दौरान खानपान की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण रहती है। GLP-1 दवाओं से भूख कम हो सकती है लेकिन शरीर को पर्याप्त प्रोटीन फाइबर विटामिन खनिज और पानी मिलना जरूरी है। केवल कम खाना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि पौष्टिक भोजन लेना भी जरूरी है। इसके साथ नियमित शारीरिक गतिविधि अच्छी नींद और तनाव को नियंत्रित करना वजन को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद कर सकता है।

    एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि दवा बंद करने के बाद कुछ लोगों में वजन दोबारा बढ़ सकता है। इसलिए लंबे समय तक बेहतर परिणाम बनाए रखने के लिए जीवनशैली में बदलाव जरूरी है। जरूरत के अनुसार डॉक्टर के साथ डाइट एक्सपर्ट और व्यायाम विशेषज्ञ की मदद भी ली जा सकती है।


    एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि दवा बंद करने के बाद कुछ लोगों में वजन दोबारा बढ़ सकता है। इसलिए लंबे समय तक बेहतर परिणाम बनाए रखने के लिए जीवनशैली में बदलाव जरूरी है। जरूरत के अनुसार डॉक्टर के साथ डाइट एक्सपर्ट और व्यायाम विशेषज्ञ की मदद भी ली जा सकती है।

    कुल मिलाकर GLP-1 दवाओं ने मोटापे के इलाज के क्षेत्र में नई संभावनाएं जरूर खोली हैं लेकिन हर मरीज के लिए यही सबसे अच्छा विकल्प हो ऐसा जरूरी नहीं है। कुछ लोगों को दवाओं से अच्छा लाभ मिल सकता है जबकि गंभीर मोटापे और उससे जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं वाले मरीजों में सर्जरी की भूमिका बनी रह सकती है। इसलिए वजन घटाने के लिए किसी भी दवा या सर्जरी का फैसला खुद से लेने के बजाय योग्य डॉक्टर से पूरी जांच और सलाह के बाद ही करना चाहिए। सही इलाज के साथ संतुलित खानपान और नियमित शारीरिक गतिविधि को अपनाना ही लंबे समय तक स्वस्थ वजन बनाए रखने की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

  • दिग्गज फुटबॉलर लियोनेल मेसी के सिर से उठा पिता का साया, 68 साल की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा

    दिग्गज फुटबॉलर लियोनेल मेसी के सिर से उठा पिता का साया, 68 साल की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा

    नई दिल्ली । विश्व फुटबॉल के दिग्गज खिलाड़ी और अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी के पिता जॉर्ज मेसी का 68 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। उन्होंने अर्जेंटीना के रोसारियो शहर में लंबी बीमारी से जूझने के बाद अंतिम सांस ली। खेल जगत और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के माध्यम से शनिवार को उनके निधन की दुखद खबर सामने आई।

    जॉर्ज मेसी का अपने बेटे लियोनेल मेसी के जीवन और पेशेवर करियर में अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान रहा। वे केवल एक पिता ही नहीं थे, बल्कि उन्होंने वर्षों तक मेसी के आधिकारिक एजेंट के रूप में भी जिम्मेदारियां संभालीं। मेसी के बचपन से लेकर पेशेवर फुटबॉल में वैश्विक पहचान बनाने और करियर से जुड़े बड़े फैसलों को आकार देने में उनकी मुख्य भूमिका मानी जाती है।

    बीते जून महीने में जॉर्ज मेसी के स्वास्थ्य को लेकर विभिन्न प्रकार की खबरें सामने आने लगी थीं, जिसके बाद मेसी परिवार को सार्वजनिक रूप से एक बयान जारी करना पड़ा था। उस समय परिवार ने पुष्टि की थी कि वे स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से पीड़ित हैं और चिकित्सकों की सख्त देखरेख में इलाज करा रहे हैं। परिवार ने उस वक्त लोगों और मीडिया से निजता का सम्मान करने तथा अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की थी।

    पिता की गंभीर स्थिति का प्रभाव लियोनेल मेसी की खेल गतिविधियों पर भी देखा गया था। एक महत्वपूर्ण मैच के दौरान गोल करने के बाद वे काफी भावुक नजर आए थे और उन्होंने स्वीकार किया था कि व्यक्तिगत जीवन में उनके लिए समय कठिन चल रहा है। इसके अलावा, हाल ही में आयोजित एक प्रमुख प्रदर्शनी मैच से भी उन्होंने दूरी बनाई थी, जिसे उनके पिता के स्वास्थ्य से जोड़कर देखा गया था।

    उल्लेखनीय है कि लियोनेल मेसी की कप्तानी में अर्जेंटीना की टीम ने वर्ष 2022 में कतर में आयोजित फीफा विश्व कप का खिताब अपने नाम किया था। इसके अलावा हालिया दौर में भी उनकी टीम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई महत्वपूर्ण प्रतियोगिताओं के फाइनल तक का सफर तय किया है। पिता के निधन की खबर से वैश्विक फुटबॉल समुदाय और मेसी के प्रशंसकों में शोक की लहर व्याप्त है।