Blog

  • यूपी: राम मंदिर ट्रस्ट की CEO सर्च कमेटी ने सौंपी रिपोर्ट, पैनल में शामिल नामों पर अब ट्रस्ट करेगा फैसला

    यूपी: राम मंदिर ट्रस्ट की CEO सर्च कमेटी ने सौंपी रिपोर्ट, पैनल में शामिल नामों पर अब ट्रस्ट करेगा फैसला

    लखनऊ। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। CEO के चयन के लिए गठित तीन सदस्यीय सर्च कमेटी ने मंगलवार को अपनी रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंप दी। अब ट्रस्ट पैनल में शामिल नामों पर विचार कर अंतिम नाम तय करेगा।

    राम मंदिर परिसर में हुई बैठक
    राम मंदिर परिसर में हुई बैठक के बाद सर्च कमेटी के अध्यक्ष और सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली ने ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी महाराज को रिपोर्ट सौंपी। इस दौरान ट्रस्ट के अन्य पदाधिकारी भी मौजूद रहे। तीन सदस्यीय सर्च कमेटी में रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल विष्णु कांत चतुर्वेदी और पूर्व वैज्ञानिक सुरेश हावड़े भी शामिल हैं।

    CEO के लिए नामों का पैनल तैयार
    जानकारी के मुताबिक, चयन प्रक्रिया पूरी करने के बाद कमेटी ने CEO पद के लिए नामों का पैनल तैयार किया है। अब ट्रस्ट इस पैनल में शामिल नामों पर चर्चा करेगा और किसी एक नाम पर अंतिम मुहर लगाएगा। ट्रस्ट की 2 सितंबर को अहम बैठक प्रस्तावित है। इसी बैठक में राम मंदिर ट्रस्ट के पहले पूर्णकालिक CEO के नाम की घोषणा होने की संभावना है।

    मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था में होगी अहम भूमिका
    CEO की नियुक्ति को राम मंदिर के संचालन और प्रबंधन को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। नियुक्ति के बाद CEO मंदिर की प्रशासनिक और प्रबंधकीय व्यवस्थाओं के संचालन में अहम भूमिका निभाएगा। अब सभी की निगाहें 2 सितंबर की ट्रस्ट बैठक पर टिकी हैं, जहां राम मंदिर ट्रस्ट के पहले पूर्णकालिक CEO के नाम पर अंतिम फैसला हो सकता है।

  • तेज बुखार और बॉडी पेन के बाद ममिता बैजू अस्पताल में भर्ती, डॉक्टर ने दी बेड रेस्ट की सलाह, ऑस्ट्रेलिया विजिट भी रद्द

    तेज बुखार और बॉडी पेन के बाद ममिता बैजू अस्पताल में भर्ती, डॉक्टर ने दी बेड रेस्ट की सलाह, ऑस्ट्रेलिया विजिट भी रद्द


    नई दिल्ली । साउथ सिनेमा की लोकप्रिय अभिनेत्री ममिता बैजू की तबीयत अचानक खराब होने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। तेज बुखार और शरीर में दर्द की शिकायत के बाद डॉक्टरों की सलाह पर उनका इलाज शुरू किया गया। अभिनेत्री की बिगड़ती तबीयत के कारण उन्हें फिलहाल पूरी तरह आराम करने की सलाह दी गई है। स्वास्थ्य संबंधी इस परेशानी का असर उनके पहले से तय कार्यक्रमों पर भी पड़ा है और उन्हें अपनी ऑस्ट्रेलिया यात्रा रद्द करनी पड़ी है। ममिता बैजू वहां होने वाले एक खास ओणम कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होने वाली थीं लेकिन स्वास्थ्य ठीक नहीं होने के कारण वह इस कार्यक्रम में पहुंच नहीं सकीं।

    ममिता बैजू ने खुद भी अपनी तबीयत और अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि वह अपने तय कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाने से काफी निराश हैं। अभिनेत्री के अनुसार अगर उनकी तबीयत अनुमति देती तो वह निश्चित रूप से कार्यक्रम में शामिल होने की कोशिश करतीं लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें पूरी तरह आराम करने की सलाह दी है। इसी वजह से उन्हें यात्रा और सार्वजनिक कार्यक्रम रद्द करने का कठिन फैसला लेना पड़ा। उन्होंने कार्यक्रम के आयोजकों और उन लोगों से भी माफी मांगी जो उनसे मिलने और उनके कार्यक्रम में शामिल होने का इंतजार कर रहे थे।

    ममिता के ऑस्ट्रेलिया दौरे को लेकर आयोजकों की ओर से भी जानकारी साझा की गई। बताया गया कि अभिनेत्री की तबीयत ठीक नहीं होने और अस्पताल में इलाज चलने के कारण वह यात्रा करने की स्थिति में नहीं हैं। ऐसे में 5 सितंबर को आयोजित होने वाले ओणम कार्यक्रम को भी आगे के लिए टाल दिया गया है। आयोजकों ने अभिनेत्री के जल्द स्वस्थ होने की कामना की और कहा कि ममिता की टीम के साथ मिलकर कार्यक्रम की नई तारीख और स्थान को लेकर जल्द फैसला किया जाएगा।

    आयोजकों ने यह भी माना कि कार्यक्रम के स्थगित होने से फैंस और प्रतिभागियों को निराशा हुई है क्योंकि इसके लिए लंबे समय से तैयारियां की जा रही थीं। वॉलंटियर्स से लेकर परफॉर्मर्स और स्पॉन्सर्स तक कई लोग इस आयोजन को सफल बनाने के लिए काम कर रहे थे। हालांकि ममिता की सेहत को प्राथमिकता देते हुए कार्यक्रम को फिलहाल टालने का फैसला किया गया है। आयोजकों ने लोगों से धैर्य बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि ओणम समारोह जरूर आयोजित किया जाएगा और इसके लिए नई जानकारी जल्द साझा की जाएगी।

    ममिता बैजू ने अपने अभिनय करियर में कम उम्र से ही काम करना शुरू कर दिया था। उन्होंने वर्ष 2016 में चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर फिल्मी दुनिया में कदम रखा और इसके बाद कई फिल्मों में अपनी अभिनय प्रतिभा का प्रदर्शन किया। समय के साथ उन्होंने दक्षिण भारतीय सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई और अपनी एक्टिंग के कारण दर्शकों के बीच लोकप्रिय होती चली गईं। उनके करियर में कई फिल्मों और अलग-अलग तरह के किरदारों ने उन्हें दर्शकों के करीब पहुंचाया।

    वर्क फ्रंट की बात करें तो ममिता बैजू के पास आने वाले समय में भी कई प्रोजेक्ट हैं। वह अलग-अलग फिल्मों में नजर आने वाली हैं और उनके प्रशंसक उनकी नई फिल्मों का इंतजार कर रहे हैं। फिलहाल अभिनेत्री की तबीयत को लेकर फैंस चिंता जता रहे हैं और सोशल मीडिया पर उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं। अस्पताल में इलाज और डॉक्टरों की सलाह के बाद उम्मीद की जा रही है कि ममिता जल्द ठीक होकर अपने काम और आगामी प्रोजेक्ट्स में वापसी करेंगी।

  • खाड़ी संकट और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की तेज आर्थिक छलांग, 7.8 प्रतिशत जीडीपी पर भाजपा का राहुल गांधी को जवाब

    खाड़ी संकट और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की तेज आर्थिक छलांग, 7.8 प्रतिशत जीडीपी पर भाजपा का राहुल गांधी को जवाब


    नई दिल्ली । नई दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद रविशंकर प्रसाद ने भारत की 7.8 प्रतिशत आर्थिक विकास दर को देश की बदलती आर्थिक ताकत का बड़ा प्रमाण बताया है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता के बीच भारत का यह प्रदर्शन बेहद महत्वपूर्ण है। खाड़ी क्षेत्र में संकट तेल आपूर्ति को लेकर चुनौतियां सप्लाई चेन में रुकावट और दुनिया के कई हिस्सों में जारी तनाव के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूत गति बनाए रखी है। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि ऐसे कठिन वैश्विक माहौल में 7.8 प्रतिशत की विकास दर हासिल करना सामान्य उपलब्धि नहीं बल्कि देश की आर्थिक क्षमता और मजबूत नीतिगत प्रबंधन का संकेत है।

    भाजपा नेता ने भारत की विकास दर की तुलना दुनिया की अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं से करते हुए कहा कि कई विकसित और उभरते देशों की विकास रफ्तार भारत की तुलना में काफी कम रही है। उन्होंने कनाडा जर्मनी ब्रिटेन अमेरिका मलेशिया और दक्षिण कोरिया जैसी अर्थव्यवस्थाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि वैश्विक चुनौतियों के दौर में भारत ने अपेक्षाकृत अधिक मजबूत प्रदर्शन किया है। उनके अनुसार खाड़ी क्षेत्र में तनाव और तेल आपूर्ति से जुड़े जोखिमों का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ा लेकिन भारत ने इन परिस्थितियों में भी अपनी विकास गति को बनाए रखा।

    रविशंकर प्रसाद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों को इस प्रदर्शन का प्रमुख आधार बताया। उन्होंने कहा कि मजबूत और स्थिर नेतृत्व किसी भी देश की आर्थिक प्रगति के लिए बेहद जरूरी होता है। संकट के समय सही फैसले लेने और चुनौतियों को अवसर में बदलने की क्षमता ही किसी अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाती है। उन्होंने वित्त मंत्रालय और वित्त मंत्री के आर्थिक प्रबंधन की भी सराहना की और कहा कि सरकार की नीतियों के साथ मैन्युफैक्चरिंग व्यापार निर्माण और सेवा क्षेत्र के योगदान ने देश की विकास दर को मजबूत बनाया है।

    भाजपा सांसद ने वर्ष 2013 की आर्थिक स्थिति और वर्तमान भारत के बीच तुलना करते हुए कहा कि एक समय देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फ्रैजाइल फाइव यानी कमजोर मानी जाने वाली प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल किया जाता था। उस दौर में निवेशकों के बीच भारत की आर्थिक स्थिति को लेकर चिंता थी और नीतिगत ठहराव की चर्चा होती थी। उन्होंने अपने पुराने अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय कुछ निवेशक भारत में अपने निवेश को लेकर चिंतित थे लेकिन आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। उनके अनुसार फ्रैजाइल फाइव से निकलकर 7.8 प्रतिशत की विकास दर तक पहुंचना भारत की आर्थिक यात्रा में बड़े बदलाव को दर्शाता है।

    रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था को मृत अर्थव्यवस्था बताने वाला दावा ताजा जीडीपी आंकड़ों के सामने टिकता नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी आर्थिक विकास और आर्थिक प्रबंधन को समझने में असफल रहे हैं और लगातार ऐसे बयान देते हैं जो देश की आर्थिक उपलब्धियों के विपरीत दिखाई देते हैं। भाजपा नेता ने कहा कि एक ओर विपक्ष देश की अर्थव्यवस्था को कमजोर बताने की कोशिश करता है जबकि दूसरी ओर ताजा आंकड़े भारत की तेज विकास गति का प्रमाण दे रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि भारत की मौजूदा आर्थिक उपलब्धि को केवल एक तिमाही के आंकड़े तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। यह पिछले कई वर्षों में हुए व्यापक बदलाव का परिणाम है। वैश्विक संकटों युद्धों तेल आपूर्ति की अनिश्चितताओं और सप्लाई चेन की चुनौतियों के बावजूद भारत का मजबूत प्रदर्शन यह संकेत देता है कि देश की अर्थव्यवस्था कठिन परिस्थितियों का सामना करने में पहले से अधिक सक्षम हुई है। रविशंकर प्रसाद के अनुसार भारत आज वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच मजबूती के साथ खड़ा है और 7.8 प्रतिशत की विकास दर उसी बदलती आर्थिक तस्वीर का सबसे बड़ा प्रमाण है।

  • मानसून में सर्दी जुकाम से बचने के लिए अपनाएं ये आसान उपाय! शरीर को गर्म और इम्युनिटी को मजबूत रखने में मिलेगी मदद

    मानसून में सर्दी जुकाम से बचने के लिए अपनाएं ये आसान उपाय! शरीर को गर्म और इम्युनिटी को मजबूत रखने में मिलेगी मदद


    नई दिल्ली। बरसात का मौसम गर्मी से राहत जरूर देता है लेकिन इस दौरान मौसम में नमी बढ़ने और तापमान में उतार चढ़ाव के कारण कई लोगों को सर्दी जुकाम खांसी और गले में खराश जैसी परेशानियां होने लगती हैं। बारिश में भीगने के बाद लंबे समय तक गीले कपड़ों में रहना या अचानक ठंडी और गर्म जगह के बीच जाना भी परेशानी बढ़ा सकता है। हालांकि केवल बारिश में भीगना ही सर्दी जुकाम का सीधा कारण नहीं होता बल्कि वायरल संक्रमण इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं। ऐसे में मानसून के दौरान साफ सफाई और रोजमर्रा की कुछ आदतों पर ध्यान देकर संक्रमण के जोखिम को कम करने की कोशिश की जा सकती है।

    बारिश के मौसम में सबसे पहले शरीर को गीला होने से बचाना जरूरी है। अगर आप बारिश में भीग जाते हैं तो घर पहुंचने के बाद गीले कपड़े तुरंत बदलें और शरीर को अच्छी तरह सुखाएं। गीले कपड़ों में लंबे समय तक रहने से असहजता बढ़ सकती है और शरीर को ठंड महसूस हो सकती है। बारिश के दिनों में बाहर निकलते समय छाता या रेनकोट साथ रखना भी उपयोगी आदत है।

    मानसून के दौरान हाथों की साफ सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए। बाहर से घर लौटने के बाद साबुन और पानी से हाथ अच्छी तरह धोएं। बिना हाथ धोए आंख नाक और मुंह को छूने से बचें क्योंकि वायरस और अन्य संक्रमण फैलाने वाले कण हाथों के जरिए शरीर तक पहुंच सकते हैं। अगर आसपास किसी व्यक्ति को सर्दी जुकाम है तो उसके बेहद करीब जाने से बचना और व्यक्तिगत सामान साझा न करना भी संक्रमण के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।

    खानपान भी मानसून में सेहत के लिए महत्वपूर्ण है। इस मौसम में ताजा और अच्छी तरह पका हुआ भोजन करना बेहतर माना जाता है। पर्याप्त पानी पीते रहें और डाइट में फल सब्जियां दालें और अन्य पोषक खाद्य पदार्थ शामिल करें। संतुलित आहार शरीर को जरूरी पोषक तत्व उपलब्ध कराने में मदद करता है। बहुत ज्यादा तला भुना या लंबे समय तक रखा हुआ भोजन खाने से बचना भी बेहतर है।

    मानसून में पर्याप्त नींद लेना और शरीर को आराम देना भी जरूरी है। लगातार कम नींद और खराब दिनचर्या से शरीर की सामान्य प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसलिए रोजाना पर्याप्त नींद लेने की कोशिश करें। कमरे में पर्याप्त हवा का आवागमन रखें और बहुत ज्यादा ठंडी हवा के सीधे संपर्क से बचें।

    अगर सर्दी जुकाम हो भी जाए तो पर्याप्त आराम और तरल पदार्थों का सेवन मददगार हो सकता है। गले में खराश या नाक बंद होने जैसी परेशानी लगातार बनी रहे तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। तेज बुखार सांस लेने में परेशानी सीने में दर्द या लक्षणों के लंबे समय तक बने रहने पर खुद से दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। मानसून में थोड़ी सावधानी और अच्छी स्वच्छता की आदतें अपनाकर सर्दी जुकाम समेत कई संक्रमणों के जोखिम को कम किया जा सकता है।

  • बंदरगाहों पर घटेगी देरी, कारोबार को मिलेगी तेजी: नए कस्टम और बैंकिंग सुधारों से विकसित भारत के लक्ष्य को मजबूती

    बंदरगाहों पर घटेगी देरी, कारोबार को मिलेगी तेजी: नए कस्टम और बैंकिंग सुधारों से विकसित भारत के लक्ष्य को मजबूती


    नई दिल्ली । भारत को विकसित भारत 2047 के लक्ष्य तक पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार अब आर्थिक सुधारों के अगले चरण की तैयारी में जुट गई है। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था में बदलाव के बाद सरकार की नजर अब सीमा शुल्क प्रणाली को आधुनिक बनाने और बैंकिंग क्षेत्र को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप मजबूत करने पर है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में आयात प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए नई तकनीक और रिस्क आधारित जांच प्रणाली लागू की जा सकती है। साथ ही विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में बैंकिंग सेक्टर की भूमिका तय करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति भी बनाई गई है। सरकार का मानना है कि कारोबार की राह आसान करने और वित्तीय व्यवस्था को अधिक मजबूत बनाने से भारत की आर्थिक रफ्तार को नई मजबूती मिलेगी।

    जी20 वित्त मंत्रियों की बैठक के दौरान एक विशेष बातचीत में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार ने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों के क्षेत्र में पहले ही कई महत्वपूर्ण सुधार किए हैं लेकिन सीमा शुल्क व्यवस्था में अभी और बदलाव की जरूरत है। सरकार का फोकस भारतीय बंदरगाहों से आयात होने वाले सामान की आवाजाही को तेज और आसान बनाने पर है ताकि कारोबारियों को अनावश्यक देरी का सामना न करना पड़े और देश के प्रमुख बंदरगाहों पर भीड़ कम हो सके।

    सरकार जिस नई व्यवस्था पर विचार कर रही है उसमें आधुनिक स्कैनर और रिस्क आधारित आयात स्क्रीनिंग को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके तहत ज्यादा जोखिम वाले आयात की गहन जांच की जाएगी जबकि कम जोखिम वाले कंसाइनमेंट को तेजी से मंजूरी मिल सकेगी। इस व्यवस्था से सीमा शुल्क अधिकारियों को संदिग्ध और संवेदनशील मामलों पर अधिक ध्यान देने में मदद मिलेगी जबकि सामान्य व्यापारिक गतिविधियां बिना अनावश्यक रुकावट के आगे बढ़ सकेंगी। इसका सीधा फायदा आयातकों के साथ-साथ लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन से जुड़े क्षेत्रों को भी मिल सकता है।

    सरकार का यह कदम कारोबार करने की प्रक्रिया को आसान बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। तेज कस्टम क्लियरेंस से बंदरगाहों पर माल के लंबे समय तक रुके रहने की समस्या कम हो सकती है। इससे व्यापार की लागत घटने और कंपनियों की कार्यक्षमता बढ़ने की संभावना है। हालांकि वित्त मंत्री ने स्कैनर आधारित प्रणाली और ऑटोमैटिक मंजूरी व्यवस्था को लागू करने के लिए कोई निश्चित समय-सीमा नहीं बताई है लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया है कि सीमा शुल्क क्षेत्र में व्यापक सुधारों पर काम जारी है।

    दूसरी ओर सरकार बैंकिंग सेक्टर को भी विकसित भारत 2047 की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मान रही है। इसके लिए एक उच्चस्तरीय समिति बनाई गई है जो भविष्य की भारतीय अर्थव्यवस्था की जरूरतों के हिसाब से बैंकिंग व्यवस्था की भूमिका और दिशा पर विचार करेगी। यह समिति अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी जिसके आधार पर बैंकिंग क्षेत्र में आगे की रणनीति तय की जा सकती है। मजबूत बैंकिंग व्यवस्था को निवेश बढ़ाने, उद्योगों को वित्त उपलब्ध कराने और देश की विकास यात्रा को गति देने के लिए बेहद जरूरी माना जा रहा है।

    वित्त मंत्री ने यह भी बताया कि केंद्र सरकार राज्य सरकारों के साथ मिलकर नियमों के अनुपालन का बोझ कम करने पर लगातार काम कर रही है। अब तक एक हजार से अधिक पुराने कानून हटाए जा चुके हैं और लगभग 40 हजार नियमों को सरल बनाया गया है। सरकार का उद्देश्य नागरिकों और कंपनियों को जटिल प्रक्रियाओं से राहत देना और निवेश के लिए अधिक अनुकूल माहौल तैयार करना है।

    ये प्रस्तावित सुधार ऐसे समय में सामने आए हैं जब भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है। मैन्युफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्रों में मजबूत प्रदर्शन ने आर्थिक गतिविधियों को सहारा दिया है। ऐसे में सरकार का नया सुधार एजेंडा स्पष्ट संकेत देता है कि तेज कारोबार आधुनिक सीमा शुल्क प्रणाली मजबूत बैंकिंग व्यवस्था और सरल नियमों के जरिए भारत को विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।

  • महंगाई और जमाखोरी पर लगाम की तैयारी: त्योहारों से पहले चीनी स्टॉक की सीमा घटाई, कीमतों को काबू में रखने की बड़ी कवायद

    महंगाई और जमाखोरी पर लगाम की तैयारी: त्योहारों से पहले चीनी स्टॉक की सीमा घटाई, कीमतों को काबू में रखने की बड़ी कवायद


    नई दिल्ली । त्योहारी सीजन से पहले चीनी की कीमतों को नियंत्रण में रखने और जमाखोरी पर सख्त लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला किया है। सरकार ने देशभर में चीनी व्यापारियों के लिए स्टॉक रखने की सीमा को 4 हजार क्विंटल से घटाकर 2 हजार क्विंटल कर दिया है। यह नई व्यवस्था 15 सितंबर से लागू होकर 30 नवंबर तक प्रभावी रहेगी। सरकार का उद्देश्य साफ है कि त्योहारों के दौरान बाजार में चीनी की कृत्रिम कमी पैदा न हो और जमाखोरी के जरिए कीमतों को बढ़ाने की कोशिशों पर समय रहते रोक लगाई जा सके। उपभोक्ता मामले खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अनुसार नई सीमा लागू होने के बाद कोई भी व्यापारी किसी भी समय और किसी भी स्थान पर 2 हजार क्विंटल से अधिक चीनी का स्टॉक नहीं रख सकेगा। इसके साथ ही स्टॉक मिलने की तारीख से 30 दिनों से अधिक समय तक चीनी जमा रखने की भी अनुमति नहीं होगी।

    सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है जब आने वाले महीनों में देशभर में त्योहारों का दौर शुरू होने वाला है और चीनी की मांग बढ़ने की संभावना रहती है। मांग बढ़ने के साथ जमाखोरी और सट्टेबाजी की आशंका भी पैदा होती है जिससे आम उपभोक्ताओं को अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है। सरकार का मानना है कि स्टॉक की सीमा कम करने से बाजार में चीनी की लगातार आवाजाही बनी रहेगी और बड़े पैमाने पर माल जमा कर कृत्रिम कमी पैदा करने की संभावना कम होगी। इसका सीधा फायदा उपभोक्ताओं को उचित कीमतों पर चीनी की उपलब्धता के रूप में मिल सकता है।

    हालांकि सरकार ने देश के सभी क्षेत्रों के लिए एक जैसी सीमा लागू नहीं की है। कोलकाता और उसके आसपास के महानगरीय इलाकों के लिए चीनी स्टॉक की सीमा 4 हजार क्विंटल ही रखी गई है। इसके पीछे उस क्षेत्र की विशेष बाजार और आपूर्ति जरूरतों को ध्यान में रखा गया है। कोलकाता उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों से चीनी मंगाकर पूर्वी भारत और उत्तर पूर्वी राज्यों तक इसकी आपूर्ति करता है। ऐसे में वहां स्टॉक सीमा कम करने से सप्लाई चेन प्रभावित होने की आशंका हो सकती थी। सरकार ने इसी कारण कोलकाता क्षेत्र को नई सीमा से अलग रखते हुए पुरानी व्यवस्था जारी रखने का फैसला किया है।

    केंद्र सरकार ने केवल नियम बदलने तक ही अपनी कार्रवाई सीमित नहीं रखी है बल्कि देशभर में चीनी मिलों डीलरों और व्यापारियों के पास मौजूद स्टॉक की सघन निगरानी और भौतिक सत्यापन भी किया जा रहा है। इस प्रक्रिया के जरिए जरूरत से ज्यादा स्टॉक जमा करने जानकारी छिपाने और चीनी की बिक्री व आवाजाही में होने वाली अनियमितताओं का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि इन सख्त कदमों और बाजार में चीनी की बेहतर उपलब्धता का असर कीमतों पर भी दिखाई देने लगा है। हाल के दिनों में एक्स मिल स्तर पर चीनी की कीमतों में करीब 20 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है जबकि खुदरा बाजार में भी कीमतों में कमी का रुझान दिखने लगा है।

    आने वाले हफ्तों में सरकार की निगरानी और तेज रहने वाली है। चीनी मिलों व्यापारियों और डीलरों के स्टॉक का भौतिक सत्यापन लगातार जारी रखा जाएगा ताकि कोई भी व्यक्ति या संस्था तय सीमा से अधिक चीनी जमा कर बाजार की स्थिति को प्रभावित न कर सके। त्योहारों के दौरान बढ़ती मांग के बीच सरकार की यह रणनीति उपभोक्ताओं को राहत देने और बाजार में कीमतों को स्थिर रखने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब यह देखना होगा कि स्टॉक सीमा में कटौती और लगातार निगरानी का असर खुदरा बाजार में चीनी की कीमतों को कितना नियंत्रित कर पाता है।

  • टेकऑफ के कुछ मिनट बाद तकनीकी खराबी, इंडिगो की दिल्ली फ्लाइट वापस गोवा लौटी; एयरपोर्ट पर घोषित हुई फुल इमरजेंसी

    टेकऑफ के कुछ मिनट बाद तकनीकी खराबी, इंडिगो की दिल्ली फ्लाइट वापस गोवा लौटी; एयरपोर्ट पर घोषित हुई फुल इमरजेंसी


    नई दिल्ली । गोवा से दिल्ली जा रही इंडिगो की एक उड़ान में मंगलवार सुबह उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद तकनीकी समस्या सामने आने से यात्रियों और एयरपोर्ट प्रशासन में सतर्कता बढ़ गई। इंडिगो की उड़ान संख्या 6ई 2102 ने उत्तरी गोवा से सुबह करीब 9 बजकर 16 मिनट पर दिल्ली के लिए उड़ान भरी थी लेकिन हवा में कुछ देर रहने के बाद चालक दल को विमान में तकनीकी खराबी का संकेत मिला। सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पायलटों ने तत्काल विमान को वापस गोवा की ओर मोड़ने का फैसला किया और संबंधित अधिकारियों को स्थिति की जानकारी दी गई।

    तकनीकी समस्या की सूचना मिलते ही मनोहर अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर आपातकालीन तैयारियां शुरू कर दी गईं। करीब 9 बजकर 30 मिनट पर एयरपोर्ट प्रशासन ने फुल इमरजेंसी घोषित कर दी ताकि किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए सभी सुरक्षा और राहत एजेंसियां पूरी तरह तैयार रह सकें। हालांकि स्थिति नियंत्रण में रही और विमान ने गोवा एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंडिंग की। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी यात्री या चालक दल के सदस्य के घायल होने की कोई सूचना नहीं मिली।

    सुरक्षित लैंडिंग के बाद सभी यात्रियों को विमान से उतारकर बोर्डिंग क्षेत्र में पहुंचाया गया। एयरलाइन की ओर से यात्रियों की सुविधा और उनके आगे के सफर के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई। इंडिगो ने बताया कि तकनीकी खराबी का पता लगते ही मानक संचालन प्रक्रिया के तहत सभी आवश्यक कदम उठाए गए और पायलटों ने सावधानी बरतते हुए विमान को उसी एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतारने का निर्णय लिया जहां से उड़ान भरी गई थी।

    एयरलाइन के अनुसार विमान को फिलहाल रखरखाव और तकनीकी जांच के लिए रोक दिया गया है। विशेषज्ञों द्वारा विमान की पूरी जांच की जा रही है और सभी आवश्यक मंजूरियां मिलने के बाद ही उसे दोबारा परिचालन में शामिल किया जाएगा। इंडिगो ने यात्रियों को हुई असुविधा के लिए खेद भी जताया और कहा कि उन्हें जलपान उपलब्ध कराने के साथ लगातार जरूरी जानकारी दी गई। एयरलाइन ने स्पष्ट किया कि यात्रियों को उनके निर्धारित गंतव्य तक पहुंचाने के लिए वैकल्पिक इंतजाम किए गए हैं।

    इंडिगो ने अपने बयान में कहा कि यात्रियों चालक दल और विमान की सुरक्षा कंपनी की सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी तकनीकी संकेत को नजरअंदाज नहीं किया जाता। इसी कारण उड़ान के दौरान समस्या सामने आते ही एहतियातन विमान को वापस गोवा लाने का फैसला किया गया। समय रहते लिया गया यह निर्णय एक बार फिर विमानन क्षेत्र में सुरक्षा प्रोटोकॉल की अहमियत को रेखांकित करता है।

    यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब पिछले महीने इंडिगो को अपनी डिजिटल सेवाओं से जुड़ी तकनीकी परेशानियों का भी सामना करना पड़ा था। एयरलाइन की वेबसाइट और मोबाइल एप्लिकेशन पर रुक रुक कर तकनीकी समस्याएं आने से कई यात्रियों को फ्लाइट बुकिंग वेब चेक इन और अन्य ऑनलाइन सेवाओं का इस्तेमाल करने में परेशानी हुई थी। कंपनी ने उस समय अपने मुख्य आरक्षण प्लेटफॉर्म में तकनीकी दिक्कत की बात स्वीकार की थी। अब उड़ान के दौरान सामने आई तकनीकी समस्या के बाद एयरलाइन ने एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था और वैकल्पिक प्रबंधन के जरिए यात्रियों को सुरक्षित रखने की प्राथमिकता दोहराई है। सबसे बड़ी राहत यही रही कि गोवा से दिल्ली जा रही यह फ्लाइट समय रहते वापस लौट आई और फुल इमरजेंसी के बावजूद सभी यात्री पूरी तरह सुरक्षित रहे।

  • ट्रेन हादसों पर और मजबूत होगी सुरक्षा की ढाल: रेलवे ने कवच 4.0 के लिए 170 करोड़ मंजूर किए, 712 किमी ट्रैक होगा सुरक्षित

    ट्रेन हादसों पर और मजबूत होगी सुरक्षा की ढाल: रेलवे ने कवच 4.0 के लिए 170 करोड़ मंजूर किए, 712 किमी ट्रैक होगा सुरक्षित


    नई दिल्ली । भारतीय रेलवे ने रेल यात्रियों की सुरक्षा को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। रेलवे ने स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम कवच 4.0 की तैनाती के लिए 170 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं। इस राशि से उत्तरी रेलवे के मुरादाबाद डिवीजन के 712 रूट किलोमीटर बचे हुए ट्रैक पर कवच सिस्टम लगाया जाएगा। सरकार के मुताबिक यह परियोजना रेलवे के सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने के साथ ट्रेन हादसों के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    कवच भारत में विकसित एक आधुनिक ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम है जिसे रेलवे संचालन के दौरान होने वाले संभावित खतरों को समय रहते पहचानने और दुर्घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यह तकनीक खासतौर पर सिग्नल पासिंग एट डेंजर यानी एसपीएडी जैसी स्थितियों को रोकने में मदद करती है। यदि किसी कारणवश ट्रेन चालक खतरे वाले सिग्नल को पार करने की स्थिति में पहुंचता है तो सिस्टम आवश्यक परिस्थितियों में स्वतः हस्तक्षेप कर सकता है।

    कवच 4.0 की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह ट्रेन संचालन के दौरान सुरक्षा की एक अतिरिक्त और उन्नत परत प्रदान करता है। असुरक्षित स्थिति बनने पर यह सिस्टम जरूरत के अनुसार अपने आप ब्रेक लगाने में मदद कर सकता है। खराब दृश्यता या अन्य चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में ट्रेन की गति को नियंत्रित करने में भी इसकी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। इसके जरिए आमने सामने या पीछे से होने वाली संभावित टक्कर के खतरे को काफी हद तक कम करने का लक्ष्य रखा गया है।

    रेल मंत्रालय का कहना है कि यह मंजूरी भारतीय रेलवे नेटवर्क पर कवच सिस्टम के विस्तार की व्यापक योजना का हिस्सा है। रेलवे लगातार अपनी सिग्नलिंग व्यवस्था और ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम को आधुनिक तकनीक से मजबूत कर रही है। मुरादाबाद डिवीजन के शेष 712 रूट किलोमीटर हिस्से में कवच 4.0 की तैनाती से इस महत्वपूर्ण रेल नेटवर्क पर यात्रियों और ट्रेन संचालन की सुरक्षा को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    सरकार के आंकड़ों के अनुसार रेलवे सुरक्षा के क्षेत्र में पिछले वर्षों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। 2014-15 में जहां ट्रेन दुर्घटनाओं की संख्या 135 थी वहीं 2025-26 में यह घटकर 16 रह गई। चालू वित्तीय वर्ष में जून तक केवल दो दुर्घटनाएं दर्ज होने की जानकारी दी गई है। प्रति मिलियन ट्रेन किलोमीटर होने वाली दुर्घटनाओं का कॉन्सिक्वेंशियल एक्सीडेंट इंडेक्स भी 2014-15 के 0.11 से घटकर 2025-26 में 0.01 तक पहुंच गया है।

    रेलवे ने सुरक्षा पर खर्च भी लगातार बढ़ाया है। 2013-14 में सुरक्षा संबंधी कार्यों पर करीब 39 हजार 200 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे जबकि 2026-27 में यह राशि बढ़कर 1 लाख 20 हजार 389 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है। इसके अलावा हजारों स्टेशनों पर आधुनिक इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम तथा ट्रैक सर्किटिंग जैसी सुविधाएं स्थापित की गई हैं।

    कुल मिलाकर 170 करोड़ रुपए की नई मंजूरी केवल एक तकनीकी परियोजना नहीं बल्कि भारतीय रेलवे की उस बड़ी रणनीति का हिस्सा है जिसमें भविष्य की रेल यात्रा को अधिक सुरक्षित और आधुनिक बनाने पर जोर दिया जा रहा है। कवच 4.0 के विस्तार के साथ रेलवे का लक्ष्य है कि तकनीक के जरिए मानवीय भूल और परिचालन संबंधी जोखिमों को कम किया जाए ताकि करोड़ों यात्रियों का सफर पहले से ज्यादा सुरक्षित बनाया जा सके।

  • मध्य एशिया से मॉस्को और बीजिंग तक भारत का कूटनीतिक मिशन: अगस्त में दुनिया के अहम देशों के बीच सक्रिय रही मोदी सरकार

    मध्य एशिया से मॉस्को और बीजिंग तक भारत का कूटनीतिक मिशन: अगस्त में दुनिया के अहम देशों के बीच सक्रिय रही मोदी सरकार

    नई दिल्ली । अगस्त 2026 भारतीय कूटनीति के लिए बेहद सक्रिय और महत्वपूर्ण महीना साबित हुआ। नई दिल्ली ने एक साथ मध्य एशिया रूस चीन श्रीलंका फिलिस्तीन और पाकिस्तान से जुड़े अलग अलग कूटनीतिक मोर्चों पर सक्रिय रहकर यह संदेश दिया कि भारत अपनी विदेश नीति में किसी एक क्षेत्र या शक्ति तक सीमित रहने के बजाय बहुआयामी रणनीति पर आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मध्य एशिया यात्रा से लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर की मॉस्को यात्रा और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की बीजिंग वार्ता तक अगस्त में भारत की कूटनीतिक सक्रियता लगातार सुर्खियों में रही।

    महीने के अंतिम दिनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 29 अगस्त से 1 सितंबर तक उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान की यात्रा पर रहे। ताशकंद में उन्होंने उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के साथ व्यापार निवेश रक्षा डिजिटल कनेक्टिविटी ऊर्जा और शिक्षा समेत कई अहम क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक पहुंचे जहां उन्होंने 26वें शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया। मध्य एशिया भारत की ऊर्जा सुरक्षा कनेक्टिविटी और रणनीतिक हितों के लिहाज से लगातार महत्वपूर्ण बनता जा रहा है। एससीओ के मंच पर भारत ने सुरक्षा कनेक्टिविटी और अवसर के अपने विजन को आगे बढ़ाते हुए आतंकवाद अलगाववाद और उग्रवाद के खिलाफ साझा कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया।

    अगस्त में भारत रूस संबंधों को भी नई मजबूती मिली। विदेश मंत्री एस जयशंकर 23 और 24 अगस्त को मॉस्को पहुंचे जहां उन्होंने भारत रूस अंतर सरकारी आयोग की बैठक की सह अध्यक्षता की। इस दौरान रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ बातचीत में ऊर्जा उर्वरक परमाणु ऊर्जा हाई टेक्नोलॉजी और व्यापार जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ मुलाकात ने भी दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने का संकेत दिया। वैश्विक दबाव और बदलते अंतरराष्ट्रीय समीकरणों के बीच भारत ने साफ किया कि वह अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर रूस के साथ आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को आगे बढ़ाता रहेगा।

    भारत चीन संबंधों के मोर्चे पर भी अगस्त अहम रहा। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने 25 अगस्त को बीजिंग में चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ सीमा प्रश्न पर विशेष प्रतिनिधियों की 25वीं बैठक में हिस्सा लिया। दोनों पक्षों के बीच सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने के साथ द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। सीमा विवाद अब भी भारत चीन संबंधों का सबसे संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है लेकिन लगातार संवाद यह संकेत देता है कि दोनों देश तनाव कम करने और संपर्क बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।

    श्रीलंका के साथ भारत की विकास साझेदारी भी अगस्त में चर्चा में रही। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने श्रीलंका का दौरा कर वहां के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात की और भारत की सहायता से चल रही विकास परियोजनाओं की समीक्षा की। दोनों देशों के बीच व्यापार सामाजिक सुरक्षा और बुनियादी ढांचे से जुड़े सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

    वहीं भारत ने फिलिस्तीन के साथ मानवीय और विकास साझेदारी को नया आयाम दिया। वेस्ट बैंक में 200 बिस्तरों वाले सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल और एक व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना से जुड़े समझौते हुए। इससे यह संकेत मिला कि भारत संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में भी स्वास्थ्य और मानवीय विकास से जुड़े प्रयासों में अपनी भूमिका मजबूत करना चाहता है।

    अगस्त में भारत पाकिस्तान संबंधों में भी तनावपूर्ण कूटनीतिक गतिविधियां देखने को मिलीं। दोनों देशों के उच्चायोगों के बाहर अस्थायी और अनधिकृत ढांचे हटाने को लेकर पारस्परिक कार्रवाई हुई जिसे भारत ने आनुपातिक प्रतिक्रिया बताया। यह घटनाक्रम दोनों देशों के बीच जारी तनाव और कूटनीतिक सतर्कता की तस्वीर पेश करता है।

    पूरे अगस्त की कूटनीतिक गतिविधियों पर नजर डालें तो भारत की विदेश नीति का स्पष्ट संदेश सामने आता है। नई दिल्ली एक साथ कई देशों और क्षेत्रों के साथ संवाद कर रही है और अपने आर्थिक सुरक्षा तथा रणनीतिक हितों को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। मध्य एशिया से रूस और चीन तक सक्रिय संपर्क और दक्षिण एशिया तथा पश्चिम एशिया में विकास साझेदारी भारत की उस व्यापक कूटनीतिक रणनीति को दर्शाती है जिसमें संवाद सहयोग और राष्ट्रीय हितों को एक साथ आगे बढ़ाया जा रहा है।

  • SCO मंच से पीएम मोदी का बड़ा विजन: सिक्योरिटी, कनेक्टिविटी और अपॉर्च्युनिटी पर दिया जोर, आतंकवाद पर भी कड़ा संदेश

    SCO मंच से पीएम मोदी का बड़ा विजन: सिक्योरिटी, कनेक्टिविटी और अपॉर्च्युनिटी पर दिया जोर, आतंकवाद पर भी कड़ा संदेश


    नई दिल्ली । बिश्केक में आयोजित 26वें शंघाई सहयोग संगठन यानी एससीओ समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत का स्पष्ट और व्यापक विजन दुनिया के सामने रखा। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ समेत कई शीर्ष नेताओं की मौजूदगी में पीएम मोदी ने आतंकवाद वैश्विक सुरक्षा संवाद कूटनीति कनेक्टिविटी और लोगों के बीच संबंधों जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भारत की सोच रखी। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 25 वर्षों में एससीओ ने संवाद और सहयोग की मजबूत नींव तैयार की है और अब आने वाले 25 वर्षों में इस सहयोग को ठोस परिणामों में बदलने का समय आ गया है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने एससीओ को लेकर भारत की सोच के तीन प्रमुख स्तंभों सिक्योरिटी कनेक्टिविटी और अपॉर्च्युनिटी को फिर से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि अब इन विचारों को केवल विजन तक सीमित रखने के बजाय वास्तविक परिणामों में बदलना होगा और इसके लिए सबसे पहली जरूरत शांति और सुरक्षा की है। पीएम मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ बेहद कड़ा संदेश देते हुए कहा कि केवल आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई या जवाबी कार्रवाई पर्याप्त नहीं है बल्कि आतंकवाद के पूरे तंत्र को समाप्त करना जरूरी है। आतंकवाद की फंडिंग भर्ती कट्टरपंथ और आतंकियों को मिलने वाले सुरक्षित ठिकानों को खत्म किए बिना इस चुनौती का समाधान संभव नहीं है। उन्होंने साफ कहा कि इस मुद्दे पर किसी तरह के दोहरे रवैये की कोई जगह नहीं होनी चाहिए और सभी देशों को एकजुट होकर कार्रवाई करनी होगी।

    प्रधानमंत्री ने नशीले पदार्थों की तस्करी को भी क्षेत्रीय सुरक्षा और युवा पीढ़ी के लिए गंभीर खतरा बताया। उन्होंने कहा कि ड्रग ट्रैफिकिंग केवल अपराध नहीं बल्कि समाज और भविष्य के लिए बड़ा संकट है। सुरक्षा संबंधी खतरे संगठित अपराध सूचना सुरक्षा और नार्कोटिक्स जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए एससीओ के तहत बनाए जा रहे केंद्रों को उन्होंने सकारात्मक कदम बताया।

    वैश्विक संघर्षों का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने शांति के लिए संवाद और कूटनीति को सबसे प्रभावी रास्ता बताया। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संकट ने साबित किया है कि किसी एक क्षेत्र में होने वाला संघर्ष केवल उसी इलाके तक सीमित नहीं रहता बल्कि उसका असर पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा समुद्री व्यापार और सप्लाई चेन पर पड़ता है। इसका सबसे अधिक नुकसान ग्लोबल साउथ के देशों को उठाना पड़ता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि युद्ध और तनाव का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं बल्कि बातचीत और कूटनीति के जरिए ही खोजा जाना चाहिए।

    पीएम मोदी ने साझा विकास और कनेक्टिविटी की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि भारत उन सभी प्रयासों का समर्थन करता है जो बाजारों को जोड़ते हैं व्यापार को आसान बनाते हैं और विकास के नए अवसर पैदा करते हैं। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी कनेक्टिविटी पहल में सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने इसे एससीओ चार्टर की मूल भावना से भी जोड़ा।

    प्रधानमंत्री ने एससीओ की सबसे बड़ी पूंजी सदस्य देशों के लोगों के बीच आपसी संबंधों को बताया। उनके अनुसार महान सभ्यताओं संस्कृतियों और विचारों का यह संगठन तभी मजबूत होगा जब इसका लाभ सीधे आम लोगों तक पहुंचे। उन्होंने युवाओं के लिए नए अवसर खोलने उद्यमियों के लिए नए बाजार तैयार करने किसानों तक आधुनिक तकनीक पहुंचाने और नागरिकों का जीवन बेहतर बनाने को सफलता की वास्तविक कसौटी बताया। पीएम मोदी ने सहयोग को केवल सरकारों तक सीमित न रखकर लोगों द्वारा संचालित बनाने की जरूरत बताई। स्टार्टअप फोरम यंग ऑथर्स कॉन्क्लेव और यंग साइंटिस्ट्स फोरम जैसे भारतीय प्रयासों का उल्लेख करते हुए उन्होंने एससीओ के भविष्य को युवा शक्ति संवाद और जनसंपर्क से जोड़ने का संदेश दिया। बिश्केक के मंच से भारत ने साफ कर दिया कि आने वाले वर्षों में उसकी प्राथमिकता सुरक्षित शांतिपूर्ण और अधिक सहयोगपूर्ण विश्व व्यवस्था बनाने की होगी।