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  • Mardaani 3 Twitter Review: अंदर तक झकझोर कर रख देगी रानी मुखर्जी की फिल्म, रिव्यू पढ़ने के बाद खुद को रोक पाना होगा मुश्किल

    Mardaani 3 Twitter Review: अंदर तक झकझोर कर रख देगी रानी मुखर्जी की फिल्म, रिव्यू पढ़ने के बाद खुद को रोक पाना होगा मुश्किल

    नई दिल्ली | रानी मुखर्जी की सुपर कॉप फ्रेंचाइजी की तीसरी फिल्म ‘मर्दानी 3’ आज सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है. फिल्म में रानी एक बार फिर उनके सुपरकॉप शिवानी शिवाजी रॉय के किरदार में नजर आने वाली है. फिल्म को लेकर लोगों के बीच एक्साइटमेंट देखने को मिल रहा है, जिसका अंदाजा सोशल मीडिया रिव्यू से लगाया जा सकता है. चलिए जाते हैं लोगों को कैसी लगी ये फिल्म?

    Mardaani 3 Twitter Review: बॉलीवुड एक्ट्रेस रानी मुखर्जी की फिल्म ‘मर्दानी 3’ आखिरकार आज सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है. इस फिल्म का दर्शक काफी समय से इंतजार कर रहे थे. रिलीज के साथ ही फिल्म को लेकर सोशल मीडिया पर भी चर्चा शुरू हो गई है. खासकर एक्स (ट्विटर) पर ‘मर्दानी 3’ ट्रेंड करने लगी है. सुबह के शोज से ही दर्शक थिएटर पहुंचने लगे हैं. लोग फिल्म देखकर अपनी राय खुलकर शेयर कर रहे हैं और ज्यादातर रिएक्शन पॉजिटिव नजर आ रहे हैं.

    जब ‘मर्दानी 3’ का ट्रेलर रिलीज हुआ था, तभी से दर्शकों में उत्सुकता बढ़ गई थी. ट्रेलर से साफ हो गया था कि इस बार कहानी पहले से ज्यादा गंभीर और अलग होने वाली है. इस बार फिल्म की कहानी समाज की एक और काली और बेरहम सच्चाई को सामने लाने का काम करेगी, जो चाइल्ड ट्रैफिकिंग के सामने है. यही वजह है कि रिलीज के दिन ही लोग इसे देखने पहुंच गए. रानी मुखर्जी का दमदार पुलिस ऑफिसर वाला अंदाज दर्शकों को खासा पसंद आ रहा है.
    लोगों को कैसी लगी रानी मुखर्जी की फिल्म?

    ‘मर्दानी 3’ में रानी मुखर्जी के अलावा जानकी बोदीवाला, जीशु सेनगुप्ता, मिखाइल यावलकर, इंद्रनील भट्टाचार्य जैसे और कई शानदार कलाकार नजर आ रहे हैं. साथ ही एक्ट्रेस मल्लिका प्रसाद भी हैं, जो मेन विलेन अम्मा का रोल निभा रही हैं. फिल्म रिलीज होते ही एक्स पर यूजर्स ने रिव्यू देना शुरू कर दिया. कई लोगों ने फिल्म की कहानी की तारीफ की है, तो कई रानी मुखर्जी की एक्टिंग से काफी इम्प्रेस दिखे. एक यूजर ने लिखा, ‘फिल्म की कहानी इमोशनल और मजबूत है. रानी मुखर्जी का रोल दिल छू जाता है’.
    वहीं दूसरे यूजर का कहना है, ‘ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अच्छा परफॉर्म करने वाली है’. ऐसे कई रिव्यू सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं. एक यूजर ने बताया कि ‘मर्दानी 3’ सिर्फ एंटरटेनमेंट तक सीमित नहीं है, बल्कि एक जरूरी सामाजिक मुद्दे को भी उठाती है. फिल्म में ट्रैफिकिंग की गहराई से जांच दिखाई गई है. रानी मुखर्जी की परफॉर्मेंस को फिर से शानदार बताया गया है. इसके साथ ही विजय वर्मा के किरदार ने भी लोगों का ध्यान खींचा है. कई लोग उन्हें इस साल का सबसे खतरनाक विलेन बता रहे हैं.

    एक और यूजर ने एक्स पर लिखा, ‘#Mardaani 3 Review: THE LIONESS ROARS. रानी मुखर्जी पूरी तरह छाई हुई हैं. विजय वर्मा बेहद डरावने विलेन लगे. कहानी डार्क वेब की सच्चाई दिखाती है. फिल्म ब्रूटल है लेकिन जरूरी भी. जरूर देखें. रेटिंग 4/5’. इस तरह के रिव्यू से साफ है कि फिल्म को अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है.
    ‘मर्दानी 3’ की कमाई पर भी हो रही चर्चा

    इतनी ही नहीं, इस फिल्म की कमाई को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं. ट्रेड रिपोर्ट्स के मुताबिक ‘मर्दानी 3’ ने एडवांस बुकिंग से ही करीब 1.16 करोड़ की कमाई कर ली है. माना जा रहा है कि पहले दिन फिल्म 3 से 4 करोड़ तक का बिजनेस कर सकती है. हालांकि, बॉक्स ऑफिस पर सनी देओल की ‘बॉर्डर 2’ पहले से मजबूत स्थिति में है. ऐसे में दोनों फिल्मों के बीच मुकाबला दिलचस्प रहने वाला है.

  • महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा मोड़ टला एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की तैयारी अंतिम दौर में थी, 8 फरवरी को होना था ऐलान

    महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा मोड़ टला एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की तैयारी अंतिम दौर में थी, 8 फरवरी को होना था ऐलान


    नई दिल्ली। महाराष्ट्र की राजनीति में फरवरी के पहले हफ्ते एक बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिल सकता था। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के दोनों धड़ोंशरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (एसपी) और उपमुख्यमंत्री अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपीके एक होने की पटकथा लगभग तैयार थी। पार्टी सूत्रों के मुताबिक 8 फरवरी 2026 को औपचारिक विलय की घोषणा होनी थी, लेकिन कुछ राजनीतिक और रणनीतिक कारणों से यह प्रक्रिया फिलहाल टाल दी गई।

    बीते कुछ महीनों से चाचा-भतीजे की बढ़ती नजदीकियां महाराष्ट्र की राजनीति में चर्चा का केंद्र बनी रहीं। पुणे और बारामती क्षेत्र में स्थानीय निकाय स्तर पर दोनों गुटों के नेताओं का साथ आना इस बात का संकेत माना जा रहा था कि पार्टी में आई टूट स्थायी नहीं रहेगी। इसी बीच बंद कमरे में हुई कई बैठकों ने सियासी हलचल और तेज कर दी थी।

    जिला परिषद चुनाव के बाद ऐलान की रणनीति
    एक रिपोर्ट के अनुसार, विलय को लेकर बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी थी। जिला परिषद और नगर निकाय चुनावों के बाद औपचारिक घोषणा की रणनीति तय की गई थी। दोनों पक्ष इस बात पर सहमत थे कि बंटा हुआ जनाधार आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में नुकसान पहुंचा सकता है।

    एनसीपी (एसपी) के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल ने पुष्टि की कि दोनों गुटों के बीच लगातार संवाद चल रहा था। उन्होंने बताया कि 16 जनवरी को उनके आवास पर अहम बैठक हुई, जिसमें चुनाव साथ लड़ने और संगठनात्मक ढांचे को लेकर अंतिम दौर की चर्चा की गई। इसके अगले दिन 17 जनवरी को शरद पवार के आवास पर भी भविष्य की रणनीति पर मंथन हुआ।

    कैबिनेट फेरबदल पर भी हुई चर्चा
    एनसीपी (एसपी) नेता शशिकांत शिंदे ने भी स्वीकार किया कि विलय को लेकर बातचीत नई नहीं है और दोनों पक्षों की सहमति से आगे बढ़ रही थी। उनके अनुसार, अजित पवार पहले ही संकेत दे चुके थे कि स्थानीय निकाय चुनावों के बाद दोनों गुट साथ आ सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि इस दौरान संभावित कैबिनेट फेरबदल और नए चेहरों को सरकार में शामिल करने पर भी अनौपचारिक चर्चा हुई थी।

    दोनों गुटों ने हाल के पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम चुनावों में गठबंधन किया था और 5 फरवरी को होने वाले जिला परिषद चुनावों में भी साथ लड़ने की योजना बनाई गई थी।

    दुर्घटना के बाद रुकी प्रक्रिया
    28 जनवरी 2026 को विमान दुर्घटना में अजित पवार के असामयिक निधन के बाद विलय की आधिकारिक घोषणा पर फिलहाल विराम लग गया। हालांकि शिंदे ने संकेत दिए हैं कि प्रक्रिया पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है और अनुकूल परिस्थितियों में इसे आगे बढ़ाया जा सकता है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह विलय होता, तो यह शरद पवार की पार्टी के लिए सरकार में शामिल होने की दिशा में बड़ा कदम साबित होता। फिलहाल एनसीपी (एसपी) महाविकास अघाड़ी का हिस्सा है, जबकि अजित पवार की एनसीपी सत्तारूढ़ महायुति में शामिल रही है। ऐसे में दोनों गुटों का एक होना राज्य की सत्ता राजनीति के समीकरण पूरी तरह बदल सकता था।

    भले ही 8 फरवरी को होने वाला संभावित ऐलान टल गया हो, लेकिन एनसीपी के दोनों गुटों के एक होने की कहानी अभी खत्म नहीं हुई है। आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति में इससे जुड़ा कोई बड़ा फैसला फिर सुर्खियों में आ सकता है।

  • आईटीआई संबद्धता मानदंड–2025 से कौशल प्रशिक्षण को रोजगार से जोड़े जाने की दिशा में मिलेगा मजबूती: मंत्री श्री टेटवाल

    आईटीआई संबद्धता मानदंड–2025 से कौशल प्रशिक्षण को रोजगार से जोड़े जाने की दिशा में मिलेगा मजबूती: मंत्री श्री टेटवाल

    भोपाल । मध्यप्रदेश में कौशल विकास को केवल प्रशिक्षण तक सीमित न रखते हुए उसे रोजगार और उद्योग की जरूरतों से सीधे जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभारश्री गौतम टेटवाल ने कहा कि आईटीआई संबद्धता मानदंड–2025 इस दिशा में एक ठोस और दूरदर्शी पहल साबित होगी। उन्होंने यह बात संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क, भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला में कही।

    कार्यशाला का उद्देश्य औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों को नए संबद्धता मानदंडों की स्पष्ट, व्यवहारिक और प्रक्रियात्मक जानकारी प्रदान करना था। राज्यमंत्री श्री टेटवाल ने कहा कि औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित किए बिना रोजगारोन्मुख कौशल विकास संभव नहीं है। नए मानदंड संस्थानों को अधिक सक्षम, उत्तरदायी और उद्योग के अनुकूल बनाएंगे।

    उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए इन नए मानदंडों से प्रशिक्षण प्रणाली में एकरूपता आएगी और संचालन में स्पष्टता सुनिश्चित होगी। इससे न केवल प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि उद्योगों को उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप कुशल मानव संसाधन भी उपलब्ध होगा। श्री टेटवाल ने राज्य संचालनालयों, शासकीय और निजी आईटीआई प्रबंधन तथा उद्योग प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे इन मानदंडों को सकारात्मक दृष्टिकोण से अपनाएं और उनके प्रभावी क्रियान्वयन में सक्रिय भूमिका निभाएं।

    कार्यशाला में यह तथ्य सामने आया कि संशोधित मानदंडों के माध्यम से आईटीआई संस्थानों की संबद्धता प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल, पारदर्शी और समयबद्ध होगी। नए आईटीआई की स्थापना, ट्रेड एवं यूनिट की स्वीकृति, नवीनीकरण, निरीक्षण और मूल्यांकन प्रणाली को सरल एवं स्पष्ट बनाया गया है, जिससे संस्थानों को अनावश्यक प्रक्रियागत जटिलताओं से राहत मिलेगी।

    कार्यशाला में प्रशिक्षण संस्थानों, उद्योग जगत और शासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी चर्चा हुई। आईटीआई संबद्धता मानदंड–2025 इस समन्वय को मजबूत करने और कौशल प्रशिक्षण को वास्तविक रोजगार से जोड़ने का प्रभावी माध्यम साबित होंगे।

    इस अवसर पर केन्द्रीय कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय (डीजीटी) नई दिल्ली, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के अधिकारी, शासकीय एवं निजी आईटीआई, इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक संस्थानों के प्रतिनिधि तथा उद्योग जगत से जुड़े हितधारक शामिल थे। महानिदेशालय प्रशिक्षण DGT नई दिल्ली के प्रतिनिधियों ने संबद्धता मानदंडों पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया, जिसमें प्रक्रियाओं और प्रावधानों की चरणबद्ध जानकारी साझा की गई।

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रो. राजेन्द्र सिंह 'रज्जू भैया' का किया पुण्य स्मरण

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रो. राजेन्द्र सिंह 'रज्जू भैया' का किया पुण्य स्मरण


    भोपाल। गुरूवार, 29 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चतुर्थ सरसंघचालक प्रो. राजेन्द्र सिंह ‘रज्जू भैया’ की जयंती पर उनका पुण्य स्मरण किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रो. रज्जू भैया का प्रखर व्यक्तित्व, उनके विचार और कृतित्व हमेशा राष्ट्रसेवकों के लिए प्रेरणा स्रोत रहेंगे। उन्होंने विशेष रूप से रज्जू भैया की मां भारती और राष्ट्र की सेवा में समर्पित जीवन की सराहना की और कहा कि उनके आदर्श आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शन का काम करेंगे।

    मुख्यमंत्री के इस स्मरण ने राष्ट्र निर्माण और समाज सेवा के क्षेत्र में रज्जू भैया की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर किया। उनकी जयंती पर देशभर में उनके योगदान और विचारों को याद किया जा रहा है।

  • राज्य शिक्षा केन्द्र ने घोषित किए जिला स्तरीय शैक्षिक ओलम्पियाड के परिणाम, 1–20 फरवरी तक विजेताओं का होगा सम्मान

    राज्य शिक्षा केन्द्र ने घोषित किए जिला स्तरीय शैक्षिक ओलम्पियाड के परिणाम, 1–20 फरवरी तक विजेताओं का होगा सम्मान


    भोपाल । मध्यप्रदेश के समस्त शासकीय प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में कक्षा 2 से 8 के विद्यार्थियों के लिए आयोजित जिला स्तरीय शैक्षिक ओलम्पियाड के परिणाम राज्य शिक्षा केन्द्र द्वारा घोषित कर दिए गए हैं। इस ओलम्पियाड का उद्देश्य विद्यार्थियों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, बौद्धिक विकास और शैक्षिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देना रहा।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रत्येक जिले से प्रत्येक विषय और प्रत्येक कक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को जिला विजेता घोषित किया गया है। कुल मिलाकर प्रत्येक जिले से 32 विद्यार्थियों को जिला स्तरीय विजेता के रूप में चयनित किया गया है। इनके मार्गदर्शक शिक्षक भी इस अवसर पर सम्मानित होंगे।

    जिला स्तर पर विजेताओं के सम्मान समारोह का आयोजन 1 से 20 फरवरी 2026 के बीच किया जाएगा। इस दौरान विद्यार्थियों और उनके मार्गदर्शक शिक्षकों को पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र प्रदान किए जाएंगे। इस आयोजन से शैक्षिक प्रतिभाओं को पहचान मिलने के साथ-साथ उन्हें प्रेरणा भी मिलेगी।

    उल्लेखनीय है कि शैक्षिक ओलम्पियाड की जिला स्तरीय परीक्षाएं 16 एवं 17 जनवरी 2026 को प्रदेश के सभी विकासखंडों में संपन्न हुई थीं। इस प्रतियोगिता में लगभग 2 लाख विद्यार्थियों ने भाग लिया था। राज्य शिक्षा केन्द्र ने इस प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों में ज्ञान, तार्किक क्षमता और सृजनात्मक सोच को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

  • विदिशा:लव जिहाद, धर्मांतरण और तीन तलाक का सनसनीखेज मामला सामने आया

    विदिशा:लव जिहाद, धर्मांतरण और तीन तलाक का सनसनीखेज मामला सामने आया


    विदिशा। मध्यप्रदेश के विदिशा जिले में एक बार फिर लव जिहाद और धर्म परिवर्तन का मामला सामने आया है। आरोपी सलीम खान पर आरोप है कि उसने पहले एक हिंदू युवती से दोस्ती की, भावनात्मक रूप से करीब आया और फिर शादी कर उसे जबरन इस्लाम कबूल करवाया।

    युवती ने शिकायत में बताया कि शादी के बाद वह एक बच्चे की मां बनी, लेकिन आरोपी ने किसी अन्य युवती से दूसरी शादी कर ली।

    साथ ही, युवती ने आरोप लगाया कि आरोपी उसे प्रताड़ित करता रहा और तीन बार तलाक बोलकर छोड़ दिया।

    इसके अलावा, युवती ने यह भी आरोप लगाया कि काजी ने उसे हलाला कराने का प्रयास किया, जो विवादास्पद धार्मिक प्रथा है।

    पुलिस कार्रवाई: कोतवाली थाना में भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रशांत चौबे ने बताया कि जांच के लिए विशेष टीम गठित की गई है और आरोपी की तलाश जारी है।

    विदिशा जिले से आने वाले इस मामले ने एक बार फिर लव जिहाद और धर्मांतरण के मुद्दे पर बहस तेज कर दी है। राज्य में पिछले कुछ वर्षों में ऐसे मामलों में कानूनी कार्रवाई और जांच लगातार जारी है।

  • MP में लाइनमैन की जिज्ञासा बनी जानलेवा, बंदूक चलाते समय लगी गोली, गंभीर हालत में इंदौर रेफर

    MP में लाइनमैन की जिज्ञासा बनी जानलेवा, बंदूक चलाते समय लगी गोली, गंभीर हालत में इंदौर रेफर


    राजगढ़।  एक मामूली जिज्ञासा भारी पड़ गई जब पचोर में स्थित एक बिजली कंपनी के कार्यालय में लाइनमैन ने बंदूक कैसे चलती है यह देखना चाहा और हादसा हो गया। जानकारी के अनुसार, कंपनी के गार्ड भगवानसिंह दांगी, जो कि कांकरिया थाना छापीहेड़ा के निवासी हैं, के पास 12 बोर की लाइसेंसी बंदूक थी। उसी कार्यालय में दो लाइनमैन, रामबाबू परमार (सूरजखेड़ी थाना करनवास) और अजय बैरागी (नरसिंहगढ़ निवासी), जो गार्ड के मित्र भी हैं, कार्यरत थे।

    हादसे के दिन, लाइनमैन ने मजाक-मजाक में बंदूक के काम करने का तरीका देखना चाहा। इसी दौरान बंदूक से अचानक गोली निकल गई और रामबाबू परमार के दाहिने हाथ की कोहनी में जाकर लगी। गोली लगते ही वह बुरी तरह से घायल हो गया। तुरंत मौके पर मौजूद कर्मचारियों ने उसे पचोर अस्पताल पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उसे इंदौर रेफर कर दिया गया।

    पुलिस ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि यह हादसा किसी आपसी विवाद या बदइच्छा से नहीं, बल्कि जिज्ञासा और सुरक्षा नियमों की अनदेखी के कारण हुआ। घटना ने यह साफ कर दिया कि लाइसेंसी बंदूक भी सही सुरक्षा उपाय और प्रशिक्षण के बिना कितना खतरनाक साबित हो सकती है।

    स्थानीय अधिकारियों ने इस घटना को गंभीरता से लिया है और कंपनी प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि भविष्य में ऐसे हादसों से बचने के लिए सभी कर्मचारियों को हथियारों के सही उपयोग और सुरक्षा नियमों का प्रशिक्षण अनिवार्य रूप से दिया जाए। इसके साथ ही कार्यालय में बंदूकों को सुरक्षित स्थान पर रखने और अनुचित प्रयोग पर रोक लगाने की भी चेतावनी दी गई है।

    हादसे के बाद रामबाबू परमार की हालत स्थिर बताई जा रही है, लेकिन डॉक्टरों ने कहा कि उसे लंबी अवधि तक फिजियोथेरेपी और देखभाल की आवश्यकता हो सकती है। यह घटना न सिर्फ पचोर बल्कि पूरे राजगढ़ जिले के लिए चेतावनी बनकर आई है कि हथियारों के प्रति लापरवाही कभी-कभी जानलेवा साबित हो सकती है।

    इस घटना ने स्थानीय लोगों और कर्मचारियों को यह याद दिलाया कि सुरक्षा नियमों का पालन करना किसी भी परिस्थिति में अनिवार्य है, चाहे मामला मजाक का ही क्यों न हो। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि हादसे की पूरी जांच की जाएगी और जिम्मेदार पक्षों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो।

    इस पूरे मामले ने सुरक्षा नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और हथियारों के सुरक्षित उपयोग की आवश्यकता को फिर से सबके सामने रखा है।

  • 'मुसलमान रिक्शावाला अगर 5 रुपये मांगे तो उसे 4 रुपये दो', हिमंत बिस्वा सरमा के बयान पर भड़की कांग्रेस

    'मुसलमान रिक्शावाला अगर 5 रुपये मांगे तो उसे 4 रुपये दो', हिमंत बिस्वा सरमा के बयान पर भड़की कांग्रेस

    नई दिल्ली । असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के एक विवादित बयान ने देश की राजनीति में नया बवंडर खड़ा कर दिया है। मुस्लिम समुदाय को लेकर की गई टिप्पणी पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और मुख्यमंत्री पर संविधान की शपथ का उल्लंघन करने तथा समाज में नफरत फैलाने का आरोप लगाया है। कांग्रेस ने इस मामले में भाजपा और आरएसएस को भी कटघरे में खड़ा किया है।

    रिक्शावाले वाले बयान पर कांग्रेस का तीखा हमला

    कांग्रेस ने गुरुवार (29 जनवरी 2026) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर हिमंता बिस्वा सरमा का एक वीडियो साझा किया, जिसमें वे कथित तौर पर कहते सुनाई दे रहे हैं, “अगर कोई मुसलमान रिक्शावाला 5 रुपये मांगे तो उसे 4 रुपये दो… खूब परेशान करो।”
    इस वीडियो को साझा करते हुए कांग्रेस ने कहा कि यह बयान न सिर्फ असंवैधानिक है, बल्कि समाज को बांटने वाला और नफरत फैलाने वाला है।

    ‘संविधान और गंगा-जमुनी तहजीब पर हमला’

    कांग्रेस ने अपने बयान में कहा,
    “यह घटिया बयान असम के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लाडले हिमंता बिस्वा सरमा का है। वे संविधान की शपथ लेकर उसी की धज्जियां उड़ा रहे हैं। यह भाजपा-आरएसएस की नफरती सोच का प्रतिबिंब है। यह बयान बाबा साहेब अंबेडकर के संविधान और हमारी गंगा-जमुनी तहजीब पर सीधा हमला है।”
    पार्टी ने मांग की कि इस बयान के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा पूरे देश से माफी मांगें।

    ‘मियां’ समुदाय को लेकर पहले भी दे चुके हैं बयान

    यह पहला मौका नहीं है जब असम के मुख्यमंत्री अपने बयानों को लेकर विवादों में आए हों। इससे पहले मंगलवार (27 जनवरी 2026) को डिगबोई में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने मतदाता सूची के विशेष संशोधन (एसआईआर) को लेकर कहा था कि इस प्रक्रिया से किसी असमिया नागरिक को दिक्कत नहीं हो रही, बल्कि केवल ‘मियां’ (बांग्ला भाषी मुस्लिम) समुदाय को ही परेशानी है।

    ‘बांग्लादेश में वोट दें’ वाले बयान ने बढ़ाया विवाद

    हिमंता बिस्वा सरमा ने यह भी कहा था कि ‘मियां’ समुदाय के लोगों को असम में वोट देने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए और उन्हें बांग्लादेश में वोट देना चाहिए। उन्होंने कहा,
    “हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि वे असम में वोट न दे सकें। अगर उन्हें दिक्कत हो रही है, तो हमें क्यों चिंता करनी चाहिए?”

    राजनीतिक और सामाजिक असर पर सवाल

    मुख्यमंत्री के इन बयानों के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है। विपक्ष का आरोप है कि ऐसे बयान सामाजिक सौहार्द, संवैधानिक मूल्यों और लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरा हैं। वहीं, यह मुद्दा आने वाले समय में असम की राजनीति में और तीखा होने के संकेत दे रहा है।

  • फिर खुली इंदौर की 'सोनम फाइल्स', राजा रघुवंशी हत्याकांड का रहस्य हुआ उजागर

    फिर खुली इंदौर की 'सोनम फाइल्स', राजा रघुवंशी हत्याकांड का रहस्य हुआ उजागर



    इंदौर। इंदौर का बहुचर्चित सोनम रघुवंशी हत्याकांड एक बार फिर सुर्खियों में है। हाल ही में इस केस पर आधारित एक वेब सीरीज रिलीज हुई है, जिसने केवल अपराध की क्रूरता को ही नहीं दिखाया, बल्कि उन पहलुओं को भी सामने लाया, जो लंबे समय तक पुलिस फाइलों में दबे हुए थे। इस केस ने ना सिर्फ मध्यप्रदेश, बल्कि पूरे देश को हिला कर रख दिया था।

    राजा रघुवंशी अपने जीवन के सबसे खूबसूरत पल शादी और हनीमून के लिए शिलांग गए थे।

    लेकिन नियति ने उनके इस हसीन सफर को मौत और धोखे का साया बना दिया। वेब सीरीज में दिखाया गया है कि कैसे शादी और हनीमून की खुशियों के बीच एक सुनियोजित हत्या की साजिश रची गई।

    साल 2025 में हुए इस हादसे ने पूरे इंदौर को स्तब्ध कर दिया था। राजा रघुवंशी की हत्या के पीछे की साजिश और हत्यारे के मानसिक पक्ष पर अब तक बहुत कम प्रकाश डाला गया था। वेब सीरीज ने इसे ‘डिकोड’ करते हुए दिखाया है कि हत्यारे ने किस तरह से योजना बनाई और घटना को अंजाम दिया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस केस की खासियत इसके सतह के पीछे की रणनीति और मानसिक चालाकी में है।

    हत्यारे ने इतना सावधानीपूर्वक कदम उठाया कि शुरुआती जांच में कोई ठोस सुराग नहीं मिल पाए। पुलिस ने भी शुरुआती जांच में कई बाधाओं का सामना किया। लेकिन अब, नई जानकारी और वेब सीरीज के माध्यम से जनता के सामने यह सब खुलकर आया है।

    वेब सीरीज दर्शकों को राजा रघुवंशी के अंतिम दिनों की भावनात्मक यात्रा, हनीमून के दौरान घटित घटनाओं और हत्या के पीछे की साजिश को विस्तार से दिखाती है। इसमें यह भी बताया गया है कि किस तरह हत्या के बाद हत्यारे ने अपने कदमों को छुपाने की कोशिश की। इसके साथ ही, कई ऐसे तथ्य उजागर किए गए हैं, जो पहले सार्वजनिक नहीं किए गए थे।

    पुलिस और फॉरेंसिक टीम की जांच भी इस केस की जटिलता को दर्शाती है। रिपोर्टों में यह सामने आया कि हत्या सुनियोजित और प्लान्ड थी।

    हत्यारे की मानसिक स्थिति, योजना की बारीकियां और अपराध की गहनता को समझना ही इस केस की सबसे बड़ी चुनौती थी।

    इंदौर के लोग अब भी इस क्राइम ड्रामा को लेकर चर्चा कर रहे हैं। केस की सच्चाई और वेब सीरीज में दिखाई गई घटनाओं के बीच तुलना करने के लिए कई दर्शक इसे देख रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की वेब सीरीज न केवल मनोरंजन का साधन हैं, बल्कि यह लोगों को अपराध की मनोरोग मानसिकता और जटिलताओं के बारे में जागरूक भी करती हैं।

    इस केस ने साबित किया कि प्यार, धोखा और मौत कभी-कभी एक ही सफर में साथ चल सकते हैं। राजा रघुवंशी हत्याकांड ने यह संदेश दिया कि अपराध का मनोवैज्ञानिक पहलू समझना उतना ही जरूरी है जितना कि अपराध की तकनीकी जांच।

    अब सवाल यह उठता है कि क्या इस केस में हत्यारे के सभी रहस्य उजागर हो पाए हैं? या फिर पुलिस जांच और अदालत की प्रक्रिया के दौरान कुछ और राज खुलेंगे। इंदौर की जनता और पूरे देश की नजरें इस केस और वेब सीरीज पर बनी हुई हैं।