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  • नया टैक्स कानून 2025: 1 अप्रैल से होंगे बड़े बदलाव, जानें कैसे प्रभावित होंगे आपका पैसा

    नया टैक्स कानून 2025: 1 अप्रैल से होंगे बड़े बदलाव, जानें कैसे प्रभावित होंगे आपका पैसा

    नई दिल्ली| देश में इनकम टैक्स को लेकर सबसे बड़ी शिकायत हमेशा यही रही है कि कानून बहुत जटिल है. आम आदमी के लिए यह समझ पाना मुश्किल हो जाता है कि उसे किस सेक्शन में क्या करना है और कितना टैक्स देना है. इसी परेशानी को दूर करने के लिए सरकार अब एक नया और ज्यादा सरल कानून लेकर आ रही है, जिसका नाम है इनकम टैक्स एक्ट 2025. यह नया कानून 1 अप्रैल से पूरे देश में लागू होगा और करीब 64 साल पुराने इनकम टैक्स एक्ट 1961 की जगह लेगा.
    इनकम टैक्स एक्ट 1961 उस दौर में बनाया गया था, जब भारत की अर्थव्यवस्था आज जैसी डिजिटल और आधुनिक नहीं थी. समय के साथ इसमें सैकड़ों संशोधन होते चले गए. नतीजा यह हुआ कि कानून इतना भारी और उलझा हो गया कि टैक्स भरना तो दूर, उसे पढ़ना भी मुश्किल हो गया. छोटे टैक्सपेयर्स, नौकरीपेशा लोगों और सीनियर सिटीज़न्स के लिए यह एक बड़ी समस्या बन चुका था. सरकार का मानना है कि अब समय आ गया था कि पूरे कानून को नए सिरे से लिखा जाए.
    इनकम टैक्स एक्ट 2025 में क्या है खास
    सरकार के मुताबिक नया टैक्स कानून लगभग 50 फीसदी छोटा होगा. इसमें भाषा को आसान किया गया है ताकि आम लोग भी बिना टैक्स एक्सपर्ट की मदद के नियम समझ सकें. गैरज़रूरी सेक्शन हटाए गए हैं और कई पुराने व बेकार टैक्स प्रावधानों को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है. सरकार का दावा है कि इससे टैक्स को लेकर होने वाले विवाद और कोर्ट-कचहरी के मामले भी कम होंगे.
    टैक्स रेट वही, नियम हुए आसान
    सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि टैक्स की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. यानी आपकी टैक्स स्लैब वही रहेगी, जो पहले थी. यह कानून रेवेन्यू न्यूट्रल है, मतलब सरकार की कमाई पर भी इसका कोई असर नहीं पड़ेगा. फर्क सिर्फ इतना होगा कि अब टैक्स भरने के नियम ज्यादा साफ और समझने में आसान होंगे.

    Assessment Year का झंझट खत्म
    अब तक इनकम टैक्स में प्रीवियस ईयर और असेसमेंट ईयर जैसे मुश्किल शब्द लोगों को भ्रम में डालते थे. नए कानून में इसे खत्म कर दिया गया है. अब सिर्फ एक ही शब्द होगा टैक्स ईयर. इससे ITR भरने की प्रक्रिया और भी सरल हो जाएगी. इसके अलावा, अगर कोई टैक्सपेयर तय तारीख के बाद भी रिटर्न फाइल करता है, तो उसे TDS रिफंड पाने का अधिकार मिलेगा, जो पहले आसान नहीं था.

    सरकार ने साफ किया है कि बजट 2026-27 में टैक्स से जुड़े जो भी नए बदलाव होंगे, चाहे वो पर्सनल टैक्स हों, कॉरपोरेट टैक्स या HUF से जुड़े नियम, सभी को इसी नए इनकम टैक्स एक्ट 2025 के तहत शामिल किया जाएगा. संसद से मंजूरी मिलने के बाद अब इसके नियम और टैक्स फॉर्म तैयार किए जा रहे हैं.

    पहले भी हो चुकी है कोशिश
    यह पहली बार नहीं है जब टैक्स सिस्टम को नया रूप देने की कोशिश हुई है. साल 2010 में डायरेक्ट टैक्स कोड लाने का प्रयास हुआ था, लेकिन वह सफल नहीं हो सका. बाद में 2017 में एक कमेटी बनाई गई, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर अब यह नया कानून तैयार किया गया है. इनकम टैक्स एक्ट 2025 का मकसद साफ है. टैक्स सिस्टम को सरल, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना. टैक्स वही रहेगा, लेकिन समझना अब आसान होगा. नौकरीपेशा लोगों, छोटे कारोबारियों और सीनियर सिटीज़न्स के लिए यह बदलाव बड़ी राहत माना जा रहा है.

  • धुरंधर में डोंगा के खतरनाक एक्शन सीन्स बॉडी डबल ने किए, नवीन कौशिक ने किया बड़ा खुलासा

    धुरंधर में डोंगा के खतरनाक एक्शन सीन्स बॉडी डबल ने किए, नवीन कौशिक ने किया बड़ा खुलासा


    नई दिल्ली। साल 2025 की ब्लॉकबस्टर फिल्म धुरंधर ने न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त रिकॉर्ड बनाए बल्कि इसके किरदार भी दर्शकों के दिलों में खास जगह बना गए। इन्हीं किरदारों में से एक था डोंगा जिसे एक्टर नवीन कौशिक ने निभाया था। फिल्म के क्लाइमैक्स तक डोंगा का किरदार इतना प्रभावशाली हो चुका था कि वह दर्शकों के दिमाग पर गहरी छाप छोड़ गया। अब इस किरदार को लेकर नवीन कौशिक ने एक ऐसा खुलासा किया है जिसने फैंस को हैरान कर दिया है।

    नवीन कौशिक ने हाल ही में सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें साझा की हैं। इन तस्वीरों में वह अपने ही जैसे दिखने वाले एक शख्स के साथ नजर आ रहे हैं वही गेटअप वही लुक और वही अंदाज़। यह शख्स कोई और नहीं बल्कि शेख बुरहानुद्दीन नसीरुद्दीन हैं जिन्होंने फिल्म धुरंधर में डोंगा के बॉडी डबल के तौर पर काम किया था।नवीन कौशिक ने अपनी पोस्ट के जरिए बताया कि फिल्म के कुछ बेहद खतरनाक एक्शन सीन्स उनके बॉडी डबल ने किए थे। उन्होंने लिखा कि ये वही सीक्वेंस है जो डोंगा को असल में डोंगा बनाता है। उस सीन में सारा गुस्सा और आक्रोश एक ही पल में स्क्रीन पर नजर आता है। खास बात यह थी कि उस सीन में सिर में गोली नहीं लगती बल्कि हमजा शीशे में देखकर गोली चलाता है। इस पर नवीन ने मजाकिया अंदाज में लिखा बहुत कमीना आदमी है हमजा।

    नवीन कौशिक ने आगे बताया कि कुछ स्टंट्स इतने जोखिम भरे थे कि वहां उन पर भरोसा नहीं किया जा सकता था कि काम पूरी तरह सुरक्षित तरीके से हो पाए। ऐसे में शेख बुरहानुद्दीन नसीरुद्दीन ने बॉडी डबल के रूप में जिम्मेदारी संभाली और इन एक्शन सीन्स को परफेक्ट बनाया। फिल्म में कई ऐसे सीन हैं जिन्हें देखकर दर्शक दांतों तले उंगलियां दबा लेते हैं और इन सीन्स के पीछे शेख की मेहनत छुपी हुई है।अपने पोस्ट में नवीन कौशिक ने शेख बुरहानुद्दीन के लिए दिल से धन्यवाद भी लिखा। उन्होंने कहा कि शेख भाई ने उनके साथ मिलकर डोंगा के एक्शन सीक्वेंस को सुपरहिट बना दिया। नवीन ने माना कि बिना उनके सहयोग के डोंगा का किरदार शायद इतना दमदार नहीं बन पाता।

    गौरतलब है कि धुरंधर फिल्म ने रिलीज के बाद एक-दो नहीं बल्कि दर्जनों रिकॉर्ड तोड़े हैं। फिल्म में रणवीर सिंह हमजा के किरदार में नजर आए थे और उनकी परफॉर्मेंस को भी जमकर सराहा गया। लेकिन डोंगा जैसे सहायक किरदारों ने फिल्म को अलग स्तर पर पहुंचा दिया।नवीन कौशिक का यह खुलासा एक बार फिर साबित करता है कि पर्दे पर दिखने वाले हर शानदार सीन के पीछे कई अनसुने हीरो होते हैं जिनकी मेहनत दर्शकों तक सीधे नहीं पहुंच पाती लेकिन फिल्म की सफलता में उनका योगदान बेहद अहम होता है।

  • इंडियन आइडल 3 के विजेता प्रशांत तमांग का 43 साल की उम्र में निधन, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

    इंडियन आइडल 3 के विजेता प्रशांत तमांग का 43 साल की उम्र में निधन, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार


    नई दिल्ली। इंडियन आइडल सीजन 3 के विजेता और अभिनेता प्रशांत तमांग का 43 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके अचानक चले जाने की खबर से न सिर्फ म्यूजिक इंडस्ट्री बल्कि उनके प्रशंसकों में भी शोक की लहर दौड़ गई है। दिल्ली स्थित उनके आवास पर तबीयत बिगड़ने के बाद उनकी पत्नी उन्हें इलाज के लिए माता चानन देवी अस्पताल लेकर पहुंचीं जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार प्रशांत तमांग को स्ट्रोक आने की आशंका जताई जा रही है।दिल्ली पुलिस के मुताबिक अस्पताल से उन्हें मेडिकल लीगल केस एमएलसी की सूचना मिली थी। दक्षिण-पश्चिमी दिल्ली के अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त अभिमन्यु पोसवाल ने बताया कि रात करीब 3:10 बजे माता चानन देवी अस्पताल से पुलिस को सूचना मिली कि रघु नगर निवासी प्रशांत तमांग को मृत घोषित किया गया है। इसके बाद एक जांच अधिकारी अस्पताल पहुंचा और एमएलसी प्राप्त की गई।

    पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रशांत तमांग के घर पर क्राइम टीम और फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी एफएसएल की टीम को भेजा। टीम ने मौके से जरूरी साक्ष्य जुटाए हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल किसी भी तरह की संदिग्ध स्थिति की पुष्टि नहीं की जा सकती। मौत के सही कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चलेगा।प्रशांत तमांग का शव पोस्टमार्टम के लिए दीन दयाल उपाध्याय डीडीयू अस्पताल भेजा गया है। पुलिस ने उनकी पत्नी और अन्य परिजनों के बयान दर्ज कर लिए हैं। पुलिस का कहना है कि जब तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने नहीं आती तब तक किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

    प्रशांत तमांग के निधन की खबर सबसे पहले उनके करीबी मित्र राजेश घाटानी ने सोशल मीडिया पर साझा की। उन्होंने फेसबुक पर भावुक पोस्ट लिखते हुए कहा कि यह खबर उनके लिए बेहद दुखद है और उन्होंने प्रशांत तमांग को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद यह खबर तेजी से सोशल मीडिया पर फैल गई।उनके निधन पर कई दिग्गज हस्तियों ने शोक जताया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर प्रशांत तमांग के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने लिखा कि प्रशांत तमांग न सिर्फ एक बेहतरीन गायक थे बल्कि बंगाल के लोगों के लिए बेहद खास कलाकार भी थे।

    प्रशांत तमांग का जन्म 4 जनवरी 1983 को दार्जिलिंग के एक गोरखा परिवार में हुआ था। उनके पिता पश्चिम बंगाल पुलिस में कार्यरत थे और सेवा के दौरान उनका निधन हो गया था। परिवार की जिम्मेदारी संभालने के लिए प्रशांत ने स्कूल छोड़ दिया था। दोस्तों के प्रोत्साहन पर उन्होंने 2007 में इंडियन आइडल में हिस्सा लिया और अपनी गायकी से देशभर के दिल जीत लिए।गायन के साथ-साथ उन्होंने अभिनय में भी अपनी पहचान बनाई। हाल ही में वह वेब सीरीज पाताल लोक 2 में नजर आए थे और आने वाले समय में वह सलमान खान की फिल्म बैटल ऑफ गलवान में दिखाई देने वाले थे जो 17 अप्रैल को रिलीज होने वाली है। उनके अचानक निधन ने उनके अधूरे सपनों को वहीं थाम दिया।

  • वेनेजुएला के बाद अब ट्रंप की क्यूबा को धमकी, कहा-समझौता कर ले नहीं तो परिणआम भुगतने तैयार

    वेनेजुएला के बाद अब ट्रंप की क्यूबा को धमकी, कहा-समझौता कर ले नहीं तो परिणआम भुगतने तैयार

    वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के करीबी सहयोगी क्यूबा को रविवार को एक और चेतावनी जारी की। वेनेजुएला में अमेरिका के हवाई हमलों और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अपदस्थ किए जाने के बाद क्यूबा में बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन भड़कने की आशंका है। ऐसे में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि या तो क्यूबा अमेरिका के साथ समझौता कर ले नहीं तो उसे परिणआम भुगतने के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने कहा, क्यूबा समय रहते फैसला कर ले, कहीं ऐसा ना हो कि देर हो जाए।

    वेनेजुएला के तेल का प्रमुख खरीदार रहा क्यूबा अब इसकी खेप से वंचित हो गया है, क्योंकि अमेरिकी सेना वेनेजुएला के तेल उत्पादों के उत्पादन, शोधन और वैश्विक वितरण को नियंत्रित करने के प्रयासों के तहत टैंकर को जब्त करना जारी रखे हुए है। ट्रंप ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ‘क्यूबा लंबे समय से वेनेजुएला के तेल और धन का इस्तेमाल कर रहा था और बदले में उसे सुरक्षा प्रदान कर रहा था, लेकिन अब और नहीं! क्यूबा को अब न तो तेल मिलेगा और न ही धन।’

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने लिखा, ‘मैं उन्हें कड़ी सलाह देता हूं कि वे बहुत देर होने से पहले समझौता कर लें।’ हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि वह किस तरह के समझौते की बात कर रहे हैं। क्यूबा सरकार ने कहा है कि पिछले वीकेंड मादुरो को पकड़ने के लिए चलाए गए अमेरिकी अभियान में उसके 32 सैन्यकर्मी मारे गए। क्यूबा की दो मुख्य सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े ये कर्मी क्यूबा और वेनेजुएला के बीच हुए समझौते के तहत वेनेजुएला की राजधानी काराकास में तैनात थे।

    ट्रंप ने कहा, ‘वेनेजुएला को अब उन गुंडों और जबरन वसूली करने वालों से सुरक्षा की जरूरत नहीं है, जिन्होंने उन्हें इतने वर्षों तक बंधक बनाकर रखा था। अब वेनेजुएला के पास अमेरिका है, जो (निस्संदेह!) दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेना है। हम उनकी रक्षा जरूर करेंगे।’
    वेनेजुएला ऑपरेशन के बाद कैसे बदले समीकरण

    क्यूबा की अर्थव्यवस्था वेनेजुएला पर निर्भर है। वेनेजुएला से ही क्यूबा को पैसा और ईंधन मिलता है। बदले में क्यूब वेनेजुएला को मेडिकल फैसिलिटी और एक्सपर्ट देता है। ट्रंप दबाव डाल रहे हैं कि वेनेजुएला अमेरिका को तेल सप्लाई करे और ऐसे में क्यूबा बदहाल हो जाएगा। डोनाल्ड ट्रंप की नजर अब क्यूबा पर भी है।
    क्यूबा पर कई बार कब्जे की कोशिश कर चुका है अमेरिका

    पहली बार नहीं जब किसी अमेरिकी राष्ट्रपति की नजर क्यूबा पर है.। क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति फिदेल कास्त्रों और अमेरिका की दुश्मनी काफी लंबी चली। क्यूबा के ही खुफिया विभाग ने कहा था कि अमेरिका ने सैकड़ों बार क्यूबा की सरकार गिराने और कब्जा करने का प्रयास किया। कई बार फिदेल कास्त्रो को मारने का प्लान भी बनाया गया।

    अमेरिका ने क्यूबा से निर्वासित लोगों की फौज तैयार कर दी थी और ऑपरेशन चलाया था लेकिन यह ऑपरेशन तीन दिन में ही फेल हो गया।
    1961-62 का ऑपरेशन मॉन्गूज

    राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी के कार्यकाल में क्यूबा में ऑपरेशन मॉन्गूज चलाया गया था। वहीं फिदेल कास्त्रो को मारने के लिए कई तरह के प्लान बनाए गए। इसमें उनकी सिगार में विस्फोट करवाने का प्लान भी शामिल था। इसके अलावा फिदेल कास्त्रो के मिल्कशेक में जहर मिलवाने का प्रयास किया गया। उनके डाइविंग सूट में जानलेवा केमिकल लगाए गए।
    पूर्व प्रेमिका से हत्या का प्लान

    अमेरिका ने फिदेल कास्त्रो की पूर्व प्रेमिका को भी उनकी हत्या करने के लिए राजी कर लिया था। उससे कास्त्रो को जहर देने को कहा गया था। हालांकि इस बात का पता कास्त्रो को चल गया और उन्होंने खुद ही पूर्व प्रेमिका को पिस्तौल दे दी और कहा कि मुझे शूट कर दो। उनकी प्रेमिका ने ऐसा करने से इनकार कर दिया। 1975 की चर्च कमेटी ने बताया था कि 1960 से 65 के बीच अमेरिका ने कम से कम 8 बार फिदेल कास्त्रो को मरवाने का प्लान बनाया था।

    क्यूबा के एक पूर्व अधिकारी फैबियान एस्कलांते के मुताबिक अमेरिका ने फिदेल कास्त्रो को मरवाने के 638 प्रयास किए. इनमें से 184 बार निक्सन के कार्यकाल में उनपर हमला करवाने का प्रयास किया गया।

  • UN से रोहिंग्याओं को मिलेगी राहत? 'सबसे बड़ी अदालत' में शुरू हो रहा नरसंहार का ऐतिहासिक मामला

    नई दिल्‍ली। हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) में म्यांमार के खिलाफ रोहिंग्या मुस्लिम अल्पसंख्यकों के कथित नरसंहार से जुड़ी ऐतिहासिक सुनवाई शुरू हो रही है। इस कोर्ट को संयुक्त राष्ट्र की सबसे बड़ी अदालत या विश्व न्यायालय भी कहा जाता है। यह सुनवाई द गैंबिया बनाम म्यांमार के तहत हो रही है, जिसमें 11 देशों ने हस्तक्षेप किया है।

    यह एक दशक से अधिक समय में पहला ऐसा मामला होगा, जिसकी अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में पूरी सुनवाई होगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले के नतीजे न सिर्फ म्यांमार बल्कि अन्य अंतरराष्ट्रीय मामलों- खासतौर पर दक्षिण अफ्रीका द्वारा इजरायल के खिलाफ दायर गाजा युद्ध से जुड़े नरसंहार केस पर भी असर डाल सकते हैं।

    म्यांमार सरकार ने नरसंहार के सभी आरोपों से इनकार किया है। संयुक्त राष्ट्र की म्यांमार के लिए स्वतंत्र जांच तंत्र के प्रमुख निकोलस कूंजियन ने रॉयटर्स से कहा- यह मामला तय करेगा कि नरसंहार की परिभाषा क्या है, उसे साबित करने के मानक क्या होंगे और उल्लंघनों के निवारण कैसे किए जाएंगे। ये सब भविष्य के मामलों के लिए अहम मिसाल बनेंगे।

    2019 में दर्ज हुआ मामला

    यह केस 2019 में द गैंबिया ने दायर किया था, जिसमें आरोप लगाया गया है कि म्यांमार ने 1948 के जेनोसाइड कन्वेंशन (नरसंहार रोकथाम और दंड संधि) का उल्लंघन करते हुए रोहिंग्या मुस्लिमों के खिलाफ नरसंहार किया है। यह पिछले एक दशक से अधिक समय में ICJ में नरसंहार के किसी मामले की पहली पूरी मेरिट्स सुनवाई है।
    2017 की सैन्य कार्रवाई और पलायन
    2017 में म्यांमार की सेना द्वारा चलाए गए अभियान के बाद कम से कम 7.30 लाख रोहिंग्या अपने घर छोड़कर पड़ोसी बांग्लादेश चले गए थे। शरणार्थियों ने हत्या, सामूहिक बलात्कार और गांवों को जलाने जैसे आरोप लगाए। संयुक्त राष्ट्र की एक तथ्य-जांच मिशन ने निष्कर्ष निकाला था कि उस सैन्य अभियान में नरसंहारात्मक कृत्य शामिल थे। हालांकि, म्यांमार के अधिकारियों ने इस रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा कि सेना का अभियान मुस्लिम उग्रवादियों के हमलों के जवाब में एक वैध आतंकवाद-रोधी कार्रवाई था।
    सू की का बचाव, अब बंद कमरे में सुनवाई
    2019 की प्रारंभिक सुनवाई के दौरान म्यांमार की तत्कालीन नेता आंग सान सू की ने गाम्बिया के आरोपों को अधूरे और भ्रामक करार दिया था। मौजूदा सुनवाई का एक अहम पहलू यह है कि पहली बार कथित अत्याचारों को लेकर रोहिंग्या पीड़ितों की बातें किसी अंतरराष्ट्रीय अदालत में सुनी जाएंगी। संवेदनशीलता और निजता के कारण ये सत्र बंद कमरे में होंगे और मीडिया के लिए खुले नहीं होंगे। आईसीजे में सुनवाई सोमवार सुबह 10 बजे (0900 GMT) से शुरू होकर तीन सप्ताह तक चलेगी।

    पहले सप्ताह गैंबिया और उसके समर्थक अपनी दलीलें पेश करेंगे।

    फिर म्यांमार अपनी सफाई पेश करेगा। गवाहों और विशेषज्ञों की गवाही भी होगी (कुछ बंद कमरों में, जहां रोहिंग्या पीड़ित अपनी कहानियां सुनाएंगे)। 11 देशों ने हस्तक्षेप किया है जिनमें- कनाडा, डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड, यूनाइटेड किंगडम, मालदीव, स्लोवेनिया, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, बेल्जियम और आयरलैंड। ये देश द गैंबिया के पक्ष में हैं।
    हालांकि, ICJ के फैसले बाध्यकारी होते हैं, लेकिन लागू करने की कोई सीधी ताकत नहीं। म्यांमार की मौजूदा जंटा सरकार पहले ही अंतरिम आदेशों की अनदेखी कर चुकी है।
    इसलिए असल राहत के लिए अंतरराष्ट्रीय दबाव जरूरी होगा।
    म्यांमार का मौजूदा संकट

    गौरतलब है कि 2021 में म्यांमार की सेना ने निर्वाचित असैन्य सरकार को सत्ता से हटा दिया था। इसके बाद लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनों को बलपूर्वक दबाया गया, जिससे देशव्यापी सशस्त्र विद्रोह भड़क उठा। इस बीच, म्यांमार में चरणबद्ध चुनाव कराए जा रहे हैं, जिन्हें संयुक्त राष्ट्र, कई पश्चिमी देशों और मानवाधिकार संगठनों ने न निःशुल्क और न निष्पक्ष बताया है।

  • आज भी फोन और इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं करते हैं NSA अजीत डोभाल

    आज भी फोन और इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं करते हैं NSA अजीत डोभाल

    नई दिल्‍ली। आज के दौर में जहां मोबाइल फोन और इंटरनेट जीवन की अनिवार्य जरूरत बन चुके हैं, वहीं भारत के सबसे ताकतवर सुरक्षा विशेषज्ञों में से एक राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एनएसए (NSA) अजीत डोभाल ने अपनी एक अनूठी आदत से सबको चौंका दिया है। शनिवार को दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026’ के उद्घाटन सत्र में उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए बताया कि वे आज भी मोबाइल फोन और इंटरनेट का उपयोग नहीं करते हैं।

    डोभाल ने कहा, “फोन और इंटरनेट ही संवाद के एकमात्र माध्यम नहीं हैं। संपर्क करने के ऐसे कई अन्य तरीके हैं जिनके बारे में ज्यादातर लोगों को पता तक नहीं है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि वे केवल विशेष परिस्थितियों में ही फोन का उपयोग करते हैं, जैसे कि विदेश में रहने वाले लोगों या अपने परिवार से बात करने के लिए।

    उन्होंने युवाओं को धैर्य का पाठ पढ़ाते हुए कहा कि संदेश हमेशा ईमानदारी से संप्रेषित होने चाहिए, न कि प्रोपेगेंडा के माध्यम से।
    कौन हैं अजीत डोभाल?
    अजीत डोभाल भारत के 5वें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं। 1945 में उत्तराखंड में जन्मे डोभाल केरल कैडर के रिटायर्ड IPS अधिकारी हैं। उनके नाम कई ऐसी उपलब्धियां दर्ज हैं जो किसी फिल्म की पटकथा जैसी लगती हैं। वे भारत के इतिहास में ‘कीर्ति चक्र’ पाने वाले सबसे युवा पुलिस अधिकारी हैं। सितंबर 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 के बालाकोट एयरस्ट्राइक की योजना बनाने और उन्हें सफलतापूर्वक अंजाम देने में उनकी मुख्य भूमिका रही है। डोकलाम विवाद को सुलझाने और पूर्वोत्तर भारत में उग्रवाद को खत्म करने में उन्होंने कड़ा रुख अपनाया।
    पाकिस्तान में 7 साल ‘अंडरकवर’

    अजीत डोभाल का करियर हैरतअंगेज कारनामों से भरा रहा है। कहा जाता है कि उन्होंने पाकिस्तान में एक ‘अंडरकवर’ एजेंट के रूप में 7 साल बिताए, जहां उन्होंने चरमपंथी समूहों की खुफिया जानकारी इकट्ठा की। इसके बाद उन्होंने इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग में 6 साल तक काम किया। 1971 से 1999 के बीच उन्होंने इंडियन एयरलाइंस के कम से कम 15 अपहरण मामलों को सुलझाया। 1999 के कुख्यात कंधार कांड (IC-814) में वे मुख्य वार्ताकारों में से एक थे। मिजोरम और पंजाब में आतंकवाद और उग्रवाद के खिलाफ उन्होंने जमीनी स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाई।

    युवा नेताओं को संबोधित करते हुए डोभाल ने भावुक होकर कहा कि भारत ने अपनी आजादी के लिए बहुत भारी कीमत चुकाई है। कई पीढ़ियों ने इसके लिए नुकसान और कठिनाइयां झेली हैं। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे भारत के समृद्ध इतिहास और उसकी उन्नत सभ्यता से प्रेरणा लें और देश के मूल्यों, अधिकारों और विश्वासों के आधार पर एक शक्तिशाली भारत का निर्माण करें।

  • भारत में 100 करोड़ की 'डिजिटल डकैती' का भंडाफोड़

    भारत में 100 करोड़ की 'डिजिटल डकैती' का भंडाफोड़

    नई दिल्‍ली। दिल्ली पुलिस ने शनिवार को एक अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी रैकेट का भंडाफोड़ किया है। इसमें हजारों लोगों को कथित तौर पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर डरा-धमकाकर लगभग 100 करोड़ रुपये की ठगी की गई। आरोप है कि यह ठगी करने वाला गिरोह खुद को एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) का अधिकारी बताकर लोगों को कॉल करता था और कहता था कि उनके मोबाइल नंबर आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े मामलों में इस्तेमाल हुए हैं। इस सिंडिकेट के तार पाकिस्तान समेत कई देशों तक फैले हुए हैं।
    पुलिस ने अब तक 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

    कैसे दिया जाता था ठगी को अंजाम
    दिल्ली पुलिस के डिप्टी कमिश्नर (IFSO) विनीत कुमार ने बताया कि सितंबर 2025 से शुरू हुई इस ठगी में फ्रॉडस्टर्स पीड़ितों को फोन कर पहलगाम हमला और दिल्ली के रेड फोर्ट ब्लास्ट जैसे आतंकी मामलों से उनके फोन नंबरों के जुड़े होने का आरोप लगाते थे। उन्हें तत्काल गिरफ्तारी की धमकी दी जाती थी और ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखकर पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया जाता था। इस पूरे नेटवर्क का संचालन चीन, नेपाल, कंबोडिया, ताइवान और पाकिस्तान से जुड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराधियों द्वारा किया जा रहा था। अब तक इस मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें एक ताइवान का नागरिक भी शामिल है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, इस सिंडिकेट ने अवैध SIMBOX डिवाइसों का इस्तेमाल किया, जो कई SIM कार्ड रखकर अंतरराष्ट्रीय कॉल्स को भारतीय नंबरों के रूप में दिखाते हैं। ये कॉल्स विदेशों (खासकर कंबोडिया) से आती थीं, लेकिन SIMBOX के जरिए स्थानीय दिखाई देती थीं।

    यानी विदेशी कॉल भी भारत की लोकल कॉल जैसी दिखाई देती है। फ्रॉडस्टर्स ने जानबूझकर 2G नेटवर्क का उपयोग किया ताकि रीयल-टाइम ट्रैकिंग मुश्किल हो जाए। SIMBOX में IMEI नंबरों को ओवरराइट और रोटेट किया जाता था, जिससे एक ही नंबर एक दिन में कई शहरों से आता दिखता था, जिससे जांच एजेंसियां भ्रमित हो जाती थीं।
    फॉरेंसिक जांच में 5,000 से ज्यादा कम्प्रोमाइज्ड IMEI नंबर और करीब 20,000 SIM कार्ड इस नेटवर्क से जुड़े पाए गए। पुलिस ने दिल्ली, मुंबई और मोहाली से 22 SIMBOX डिवाइस, मोबाइल फोन, लैपटॉप, राउटर, CCTV कैमरे, पासपोर्ट और विदेशी SIM कार्ड बरामद किए।
    जांच और गिरफ्तारी
    दिल्ली पुलिस की IFSO यूनिट के डिप्टी कमिश्नर विनीत कुमार ने बताया कि सितंबर में कई शिकायतें मिलने के बाद मामला दर्ज किया गया और करीब 25 पुलिसकर्मियों की एक विशेष टीम बनाई गई। इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) और डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस (DoT) की मदद से तकनीकी जांच शुरू की गई।

    सबसे पहला SIM बॉक्स इंस्टॉलेशन गॉयला डेयरी, दक्षिण-पश्चिम दिल्ली में ट्रेस किया गया। इसके बाद एक महीने की गोपनीय निगरानी में दिल्ली के चार अलग-अलग इलाकों में सक्रिय ठिकानों का पता चला। छापेमारी में शशि प्रसाद (53) और परविंदर सिंह (38) को गिरफ्तार किया गया, जो कथित तौर पर दिल्ली में पांच जगहों पर इस अवैध इंफ्रास्ट्रक्चर को संभाल रहे थे।

  • शहडोल: जहां छात्राएं हो रही हैं लापता, उसी गर्ल्स हॉस्टल में अश्लील गानों पर रील, शिक्षा परिसर पर उठे गंभीर सवाल

    शहडोल: जहां छात्राएं हो रही हैं लापता, उसी गर्ल्स हॉस्टल में अश्लील गानों पर रील, शिक्षा परिसर पर उठे गंभीर सवाल


    शहडोल । मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के सोहागपुर क्षेत्र स्थित माता शबरी शासकीय कन्या शिक्षा परिसर कंचनपुर एक बार फिर विवादों में है। यहां के गर्ल्स हॉस्टल से दो छात्राओं के लापता होने की घटना के बाद अब एक नया विवाद खड़ा हो गया है। एक वायरल वीडियो में दिख रहा है कि एक शिक्षिका और छात्राएं स्कूल ड्रेस में क्लासरूम के अंदर अश्लील भोजपुरी गाने पर डांस करते हुए रील बना रही हैं। इस वीडियो ने न केवल शिक्षा परिसर की मर्यादा को सवालों के घेरे में डाल दिया है बल्कि परिसर की सुरक्षा और अनुशासन पर भी गंभीर चिंताएं उत्पन्न कर दी हैं।

    वीडियो में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि छात्राएं स्कूल ड्रेस में क्लासरूम में मौजूद हैं और एक शिक्षिका उनके साथ लोकप्रिय भोजपुरी गाने पतली कमरिया मोरी हाय-हाय पर ठुमके लगाती दिख रही हैं। क्लासरूम जैसा पवित्र शैक्षिक स्थान इस तरह की गतिविधियों के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता जिससे अभिभावकों और समाज में नाराजगी फैल गई है। स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब शिक्षिका खुद इस प्रकार का व्यवहार करेंगी तो छात्राओं पर इसका क्या असर पड़ेगा।

    गौरतलब है कि इसी शिक्षा परिसर से 28 दिसंबर 2025 को कक्षा 12वीं की एक छात्रा हॉस्टल से मामा के साथ घर जाने की बात कहकर निकली थी, लेकिन वह घर नहीं पहुंची। इस मामले में तत्कालीन हॉस्टल अधीक्षिका सुलोचना बट्टे की शिकायत पर सोहागपुर थाना पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज किया था। पुलिस अभी तक इस मामले की जांच कर रही थी कि 8 जनवरी 2026 को कक्षा 10वीं की एक और छात्रा के लापता होने की घटना सामने आई। इस छात्रा ने अपने नाना और दो सहेलियों के साथ हॉस्टल में प्रवेश किया था लेकिन छात्रा बाद में सहेलियों से कहकर बाहर निकली और फिर लौटकर नहीं आई।

    रोल कॉल के दौरान उसकी अनुपस्थिति का पता चलने पर प्रबंधन में हड़कंप मच गया। इसके बाद प्रिंसिपल देवेंद्र श्रीवास्तव ने भी सोहागपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई जिस पर पुलिस ने फिर से अज्ञात आरोपियों के खिलाफ अपहरण का प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी।इन घटनाओं के बीच शिक्षिका का यह वायरल वीडियो पूरे शिक्षा परिसर की साख पर बट्टा लगा रहा है। इस मामले पर सहायक आयुक्त जन जातीय कार्य विभाग आनंद राय सिन्हा का कहना है कि वीडियो संभवत 26 जनवरी की तैयारी के दौरान का हो सकता है जब बच्चे प्रैक्टिस कर रहे थे। हालांकि उन्होंने मामले की गंभीरता से लिया और कहा कि जांच की जाएगी और उचित कार्यवाही की जाएगी।

  • नाबालिग को जेल में रखने के मामले में HC ने सरकार को लगाई फटकार, 5 लाख मुआवज़ा देने का आदेश

    नाबालिग को जेल में रखने के मामले में HC ने सरकार को लगाई फटकार, 5 लाख मुआवज़ा देने का आदेश

    पटना। पटना हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते एक नाबालिग को ₹5 लाख का मुआवज़ा देने का आदेश दिया, जिसे बिहार पुलिस ने गैर-कानूनी तरीके से गिरफ्तार किया था। कोर्ट ने इस काम को भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत उसके मौलिक अधिकार का घोर उल्लंघन बताया।

    जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद और जस्टिस रितेश कुमार की डिवीजन बेंच ने कहा कि गिरफ्तारी कानून की तय प्रक्रिया की पूरी तरह से अनदेखी करके सिर्फ़ डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस (DIG) के कहने पर की गई, जबकि नाबालिग को पहले ही चार्जशीट में बरी कर दिया गया।
    हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि मुआवज़े की रकम और ₹15,000 का मुक़दमे का खर्च राज्य सरकार देगी। हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि यह खर्च उन दोषी पुलिस अधिकारियों की सैलरी से वसूला जाना चाहिए, जो प्रशासनिक जांच के बाद ज़िम्मेदार पाए जाएंगे।

    संक्षेप में मामला
    याचिकाकर्ता (एक नाबालिग) ने गैर-कानूनी हिरासत से रिहाई के लिए बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) की रिट याचिका दायर की। याचिकाकर्ता का नाम शुरू में ज़मीन विवाद और मारपीट के मामले में FIR में है।
    हालांकि, शुरुआती जांच के दौरान, IO को याचिकाकर्ता सहित दस आरोपियों के खिलाफ़ अपर्याप्त सबूत मिले। नतीजतन, 1 सितंबर, 2025 को चार्जशीट दायर की गई, जिसमें याचिकाकर्ता का नाम आरोपी के तौर पर था, लेकिन उस पर आरोप नहीं लगाए गए। इसलिए उसे ट्रायल के लिए नहीं भेजा गया।

    हालांकि, इसके बाद शिकायतकर्ता ने DIG, कोसी रेंज, सहरसा से संपर्क किया और याचिकाकर्ता-नाबालिग सहित दस आरोपियों को बरी किए जाने की शिकायत की।

    DIG ने एक सुपरविज़न नोट में IO को जांच आगे बढ़ाने का यह मानते हुए निर्देश दिया कि आरोप सच हैं और निर्देश दिया कि बाकी आरोपियों को गिरफ्तार किया जाए।
    DIG के सुपरविज़न नोट को केस डायरी में शामिल किया गया और फिर IO सीधे आरोपी के घर पर छापा मारने गया। उसने मौजूदा याचिकाकर्ता को गिरफ्तार कर लिया, उसकी उम्र 19 साल बताई और उसे कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।

    दरअसल, मजिस्ट्रेट के सामने पेशी के समय भी इस बात पर ध्यान नहीं दिलाया गया कि याचिकाकर्ता का नाम केस में चार्जशीट न किए गए लोगों की लिस्ट में था। यहां तक ​​कि संबंधित मजिस्ट्रेट ने भी मामले के इन पहलुओं पर ध्यान नहीं दिया।

    सीधे-सीधे, बिना सोचे-समझे, याचिकाकर्ता को जेल भेज दिया।
    हाईकोर्ट की टिप्पणियां
    बेंच ने पुलिस के काम करने के तरीके पर कड़ी आपत्ति जताई। उसने कहा कि एक बार जब चार्जशीट दायर हो गई, जिसमें याचिकाकर्ता को ट्रायल के लिए नहीं भेजा गया दिखाया गया, तो IO मजिस्ट्रेट के सामने आगे की जांच के लिए आवेदन किए बिना उसे गिरफ्तार नहीं कर सकता।

    कोर्ट ने कहा:
    “इस मामले में याचिकाकर्ता की आज़ादी छीन ली गई और पुलिस अधिकारियों की कार्रवाई से उसके जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन हुआ। DIG, कोशी रेंज का आरोपों को सच मानकर मामले की जांच करने का निर्देश निर्दोषता की धारणा के सिद्धांतों के खिलाफ है, जो आपराधिक कानून न्यायशास्त्र का मुख्य सिद्धांत है। I.O. ने बिना किसी ठोस सबूत के 16 साल से कम उम्र के छात्र याचिकाकर्ता को गिरफ्तार कर लिया।

    वह इस मामले में ऐसा नहीं कर सकता था।”
    हाईकोर्ट ने इस मामले में क्षेत्राधिकार मजिस्ट्रेट की भूमिका पर भी असंतोष व्यक्त किया। उसने कहा कि जब याचिकाकर्ता को पेश किया गया तो मजिस्ट्रेट यह देखने में विफल रहा कि पिछली रिपोर्ट में उसे ‘चार्जशीटेड नहीं’ के रूप में सूचीबद्ध किया गया।
    इसके अलावा, उसने कहा कि याचिकाकर्ता के नाबालिग होने के बावजूद (बाद में जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने पुष्टि की कि घटना के समय उसकी उम्र 15 साल, 06 महीने और 08 दिन थी), मजिस्ट्रेट ने उसे ऑब्जर्वेशन होम के बजाय जेल भेज दिया क्योंकि उसने बिना सोचे-समझे काम किया।

    कोर्ट ने दुख जताते हुए कहा,
    “जांच एजेंसी द्वारा पावर के गलत इस्तेमाल और याचिकाकर्ता के अधिकार और आज़ादी की रक्षा करने में कोर्ट की नाकामी के कारण उसे अब तक ढाई महीने से ज़्यादा समय तक जेल में रहना पड़ा है”।
    इस पृष्ठभूमि में हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड द्वारा ऑब्जर्वेशन होम/चिल्ड्रन होम से तुरंत रिहा किया जाए। इस संबंध में, जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड, मधेपुरा द्वारा तुरंत एक उचित रिहाई आदेश जारी किया जाएगा।

    कोर्ट ने राज्य को आदेश दिया कि वह उस युवा लड़के को एक महीने के अंदर शारीरिक और मानसिक पीड़ा के लिए मुआवजे के तौर पर ₹5 लाख का भुगतान करे। इसके अलावा, उसे मुकदमेबाजी के खर्च के तौर पर ₹15,000 दिए गए।
    कोर्ट ने सक्षम अथॉरिटी/पुलिस महानिदेशक, बिहार को भी निर्देश दिया कि वे इस मामले में प्रशासनिक स्तर पर जांच करें, जांच के दौरान सामने आने वाले सबूतों के आधार पर उचित कार्रवाई करें, और दोषी अधिकारियों से लागत और मुआवजे की रकम वसूल करें।

    कोर्ट ने आदेश दिया,
    “याचिकाकर्ता को दिए जाने वाला जुर्माना और मुआवजे की रकम जांच पूरी होने के बाद इस आदेश की कॉपी मिलने/सूचित होने की तारीख से छह महीने के अंदर दोषी अधिकारियों से वसूल की जाएगी”। याचिकाकर्ता की ओर से वकील शाश्वत कुमार, अमन आलम और अमरनाथ कुमार पेश हुए।

  • Bharat Coking Coal IPO GMP Day 2: बीसीसीएल आईपीओ पर टूटे निवेशक! जीएमपी दे रहा तगड़े मुनाफे का संकेत, निवेश करें या नहीं?

    Bharat Coking Coal IPO GMP Day 2: बीसीसीएल आईपीओ पर टूटे निवेशक! जीएमपी दे रहा तगड़े मुनाफे का संकेत, निवेश करें या नहीं?

    नई दिल्ली| भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) का आईपीओ 9 जनवरी 2026 को खुला और 13 जनवरी तक निवेशकों के लिए उपलब्ध रहेगा। BCCL, कोल इंडिया लिमिटेड की सब्सिडियरी कंपनी है और यह कोकिंग कोल के खनन में देश में अहम भूमिका निभाती है। आईपीओ पूरी तरह ऑफर फॉर सेल है, जिसमें कुल 46.57 करोड़ शेयर प्रमोटर यानी कोल इंडिया लिमिटेड द्वारा बेचे जा रहे हैं। इससे BCCL को सीधे कोई नया पैसा नहीं मिलेगा, बल्कि यह राशि कोल इंडिया के पास जाएगी। आईपीओ के प्राइस बैंड को 21 से 23 रुपये प्रति शेयर रखा गया है। रिटेल निवेशकों को कम से कम 600 शेयरों के लिए आवेदन करना होगा, जिसका ऊपरी प्राइस बैंड पर निवेश करीब 13,800 रुपये आएगा। शेयर का अलॉटमेंट 14 जनवरी को और डीमैट खाते में क्रेडिट 15 जनवरी को होने की संभावना है, वहीं 16 जनवरी को बीएसई और एनएसई पर लिस्टिंग होने की उम्मीद है।

    ग्रे मार्केट प्रीमियम और निवेशकों की उम्मीद
    ग्रे मार्केट में BCCL के आईपीओ को शानदार रिस्पॉन्स मिल रहा है। 12 जनवरी 2026 तक इस आईपीओ का ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) 10.6 रुपये तक पहुंच गया है। यदि इसे अपर प्राइस बैंड 23 रुपये के हिसाब से देखें तो लिस्टिंग के समय शेयर की कीमत लगभग 33.6 रुपये हो सकती है। इससे निवेशकों को लिस्टिंग पर करीब 46 प्रतिशत तक रिटर्न मिलने की उम्मीद है। ब्रोकरेज फर्म एसबीआई सिक्योरिटीज के अनुसार, बीसीसीएल ने वित्त वर्ष 2023-25 के दौरान आय, मुनाफा और ऑपरेटिंग कमाई में लगातार सुधार दिखाया है। कंपनी अपनी कोल वॉशरी क्षमता को 13.65 मिलियन टन से बढ़ाकर 20.65 मिलियन टन करने की योजना पर काम कर रही है। नई वॉशरी और मौजूदा मूनिडीह वॉशरी का विस्तार करके उत्पादन क्षमता दोगुनी की जाएगी।

    BCCL का महत्व और बाजार में स्थिति
    बीसीसीएल का मुख्य काम कोकिंग कोल का खनन करना है, जो स्टील उत्पादन के लिए अनिवार्य कच्चा माल है। इस वजह से इसकी अहमियत देश के स्टील सेक्टर में बेहद ज्यादा है। कंपनी का कारोबार झारखंड और पश्चिम बंगाल में फैले खदान क्षेत्रों में केंद्रित है, जिसमें झरिया और रानीगंज क्षेत्र शामिल हैं। कुल लीज एरिया करीब 288 वर्ग किलोमीटर है। कंपनी का प्रशासनिक केंद्र धनबाद और क्षेत्रीय कार्यालय कोलकाता में स्थित हैं। ब्रोकरेज फर्म आनंद राठी रिसर्च का मानना है कि बीसीसीएल की बाजार में मजबूत पकड़ और भरोसेमंद रिकॉर्ड इसे लिस्टिंग गेन के लिहाज से निवेशकों के लिए आकर्षक बनाता है।

    बीसीसीएल आईपीओ में निवेश करने से रिटेल निवेशकों को लिस्टिंग पर तगड़ा फायदा मिलने की संभावना है। ग्रे मार्केट प्रीमियम और कंपनी के मजबूत वित्तीय प्रदर्शन के मद्देनजर, यह आईपीओ अल्पकालिक निवेशकों के लिए लाभकारी अवसर प्रदान कर सकता है। हालांकि, निवेश करने से पहले प्राइस बैंड, कंपनी की योजना और स्टील उद्योग की स्थिति का ध्यान रखना आवश्यक है।