Blog

  • अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों की परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार लघु वित्त क्षेत्र में भी मजबूती

    अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों की परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार लघु वित्त क्षेत्र में भी मजबूती

    नई दिल्ली । देश के अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (एससीबी) की परिसंपत्ति गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को पेश आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में जानकारी दी कि कुल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति अनुपात (जीएनपीए) और कुल एनपीए अनुपात कई दशकों की निम्नतम सीमा और रिकॉर्ड निम्न स्तर पर पहुंच गए हैं। यही नहीं, एनपीए रिकवरी दर वित्त वर्ष 2018 के 13.2 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 26.2 प्रतिशत हो गई, जो पिछले वर्षों की तुलना में लगभग दोगुनी है। एनपीए रिकवरी में सुधार का प्रमुख कारण दिवालिया और दिवालियापन संहिता 2016 (आईबीसी कोड) को बताया गया।

    पूंजी-जोखिम-भारित परिसंपत्ति अनुपात मजबूत

    आर्थिक सर्वेक्षण में यह भी बताया गया कि सितंबर 2025 तक एससीबी का पूंजी-जोखिम-भारित परिसंपत्ति अनुपात (सीआरएआर) 17.2 प्रतिशत पर मजबूत बना हुआ है। इससे बैंकों की वित्तीय मजबूती और जोखिम सहनशीलता स्पष्ट होती है। सरकारी पहलों के कारण क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) के प्रदर्शन में भी सुधार आया है। चार चरणों में आरआरबी के समेकन से उनकी संख्या 1 मई 2025 तक 196 से घटकर 28 रह गई। इससे ग्रामीण बैंकों की वित्तीय स्थिति बेहतर हुई और वे अधिक स्थिर हुए।

    ग्रामीण बैंकों और लाभ में सुधार

    वित्त वर्ष 2024 में ग्रामीण बैंकों ने 7.6 हजार करोड़ रुपए का रिकॉर्ड समेकित कुल लाभ अर्जित किया। वित्त वर्ष 2025 में यह लाभ 6.8 हजार करोड़ रुपए रहा, जो पिछले वर्षों के मुकाबले दूसरी सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। आरआरबी के इस सुधार से ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय स्थिरता और भरोसा दोनों बढ़े हैं।

    लघु वित्त क्षेत्र में तेजी

    आर्थिक सर्वेक्षण में यह भी उल्लेख किया गया कि लघु वित्त क्षेत्र में पिछले दशक में लगातार वृद्धि हुई है। सक्रिय ऋण प्राप्तकर्ताओं की संख्या वित्त वर्ष 2014 के 330 लाख से बढ़कर 2025 में 627 लाख हो गई। इसी अवधि में एमएफआई के सकल ऋण में लगभग सात गुना वृद्धि हुई, जो वित्त वर्ष 2014 के 33,517 करोड़ रुपए से बढ़कर 2,38,198 करोड़ रुपए हो गया। एमएफआई शाखा नेटवर्क भी 11,687 से बढ़कर 37,380 शाखाओं तक पहुंच गया।

    वित्तीय क्षेत्र में सुधार के प्रभाव

    एससीबी और आरआरबी के सुधार के साथ-साथ लघु वित्त क्षेत्र की तेजी ने देश में बैंकिंग और वित्तीय स्थिरता को मजबूती दी है। एनपीए में कमी और रिकवरी दर में वृद्धि ने बैंकों के परिसंपत्ति पोर्टफोलियो को स्वस्थ बनाया है। ग्रामीण और लघु वित्त क्षेत्र में विस्तार ने वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दिया है और छोटे ऋणधारकों को लाभ पहुंचाया है।

    इस प्रकार आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 ने यह स्पष्ट किया है कि बैंकिंग क्षेत्र की परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार और वित्तीय समावेशन के प्रयास देश की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो रहे हैं।

  • बर्थडे स्पेशल अनूप सोनी: संघर्ष से सफलता तक का सफर

    बर्थडे स्पेशल अनूप सोनी: संघर्ष से सफलता तक का सफर

    नई दिल्ली ।  ‘क्राइम पेट्रोल’ टेलीविजन का पॉपुलर शो है, जिसका नाम लेते ही आंखों के सामने अनूप सोनी का चेहरा आ जाता है. अनूप सोनी कई साल से ‘क्राइम पेट्रोल’ की एंकरिंग कर रहे हैं. इस शो ने उन्हें नाम और पैसा दोनों ही दिया है. पर एक समय था जब अनूप सोनी हार मानकर एक्टिंग करियर को बाय कहने वाले थे. एक इंटरव्यू के दौरान अनूप सोनी ने अपने डिप्रेसिव फेज पर बात की है. ये भी बताया कि कैसे उन्होंने उस दौर को पीछे छोड़कर नई शुरुआत की.

    जयपुर से लगा एक्टिंग का शौक
    जोश टॉक के मंच पर अपने एक्टिंग पर बात करते हुए अनूप सोनी ने जिंदगी में आए उतार-चढ़ाव पर कई बातें शेयर की. वो बताते हैं, ’13 से 20 साल की उम्र तक मैं जयपुर में रहा. वहीं से मुझे एक्टर बनने का ख्याल आया. मेरे लिए सब कुछ नया था. नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में जाने से पहले मेरे लिए एक्टिंग का मतलब सिर्फ डायलॉग था. पर नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा जाने के बाद पता चला कि एक्टिंग क्या होती है. एक एक्टर और इंसान के तौर पर नेशनल स्कूल ऑफ ने मेरी जिंदगी संवार दी.’

    ‘वहां से निकलने के बाद एक-दो साल तक वर्कशॉप की. फिर ये डिसाइड हुआ कि खुद को स्क्रीन पर आने का एक मौका दिया जाए. 90s के दौरान मैं मुंबई आया. सब सीनियर्स ने यही कहा कि यहां आ गए हो, तो लगना पड़ेगा. सिनेमा का माहौल देखकर पता चल गया था कि मैं हीरो नहीं बन पाऊंगा. उस वक्त कास्टिंग डायरेक्टर नहीं हुआ करते थे. कई मौके आए जब लगा कि क्या कर रहे हैं. धक्के खा रहे हैं. खाने का ठिकाना नहीं है. खाना भी अच्छा नहीं था. मुझे लगा कि ये मैं नहीं कर सकता था. दिल में ये था कि पेरेंट्स से बार-बार पैसे नहीं मांगने हैं. पिता की सरकारी नौकरी थी. एक-दो मूमेंट ऐसे आए, जब मुझे लगा कि अब मैं नहीं रह पाऊंगा यहां.’
    जब टेलीविजन संवारा करियर
    अनूप सोनी बताते हैं कि उनके पास फोटोशूट कराने के पैसे नहीं थे. इसलिए उन्होंने अपनी पुरानी फोटोज का फोल्डर बनाया हुआ था. जिसे लेकर वो डायरेक्टर्स से मिलने जाया करते थे. वो कहते हैं, ‘एक बार मैं फोल्डर लेकर मीटिंग के लिए गया, लेकिन बारिश हुई और वो फोल्डर भीग गया. वो ऐसा फेज था जब लगा कि अब नहीं जी पाऊंगा. बारिश में फोटो का फोल्डर भीग गया था. उसे देखकर यही सोच रहा था कि इसे उठाऊं या नहीं. घर गया, तो कमरे में अकेला था. बहुत ही डिप्रेसिव फील हो रहा था. ‘

    धीरे-धीरे दिन गुजरते गए. अनूप सोनी ने एक्टिंग स्कूल में पढ़ाना शुरू किया. इस दौरान उन्हें अभिनव सिन्हा के Sea Hawks नाम के शो में काम करने का मौका मिला. इस शो ने अनूप सोनी को इतनी पॉपुलैरिटी दी कि फिर उन्हें पीछे मुड़कर नहीं देखना पड़ा. Sea Hawks के बाद अनूप सोनी को ‘बालिका वधू’ और ‘क्राइम पेट्रोल’ जैसे शोज ऑफर हुए.

    अनूप सोनी अपने करियर के पीक पर थे. इसलिए उन्होंने दोनों ही शोज पर दिल से काम किया. ‘बालिक वधू’ और ‘क्राइम पेट्रोल’ ने उनके करियर को नई उड़ान दी. अनूप सोनी कहते हैं, ‘क्राइम पेट्रोल गेम चेंजर साबित हुआ. 10 साल मैंने दोनों शोज को दिए. सोसायटी में सम्मान मिला. ऐसा हो गया था कि अब मेरी पहचान हो गई थी ये ‘क्राइम पैट्रोल’ एंकर है. हालांकि, कई लोग ऐसे थे, जो क्राइम पेट्रोल के बाद मुझे एक्टर नहीं मानते थे.’
    हालांकि, टेलीविजन शोज के अलावा अनूप सोनी ‘गंगाजल’, ‘फिजा’, ‘राज’ और ‘सत्यमेव जयते 2’ जैसी तमाम बेहतरीन फिल्मों में भी नजर आ चुके हैं. वो एक अच्छे एंकर तो हैं ही. साथ ही एक्टर के तौर पर भी अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रहे हैं.

  • न्यूजीलैंड भारत के खिलाफ T20I में नंबर-1 बनने के करीब, वेस्टइंडीज को पीछे छोड़ा

    न्यूजीलैंड भारत के खिलाफ T20I में नंबर-1 बनने के करीब, वेस्टइंडीज को पीछे छोड़ा

    नई दिल्ली। विशाखापत्तनम में चौथे टी20 में भारत को न्यूजीलैंड के खिलाफ 50 रनों से हार का सामना करना पड़ा। टीम इंडिया ने वर्ल्ड कप से पहले कुछ प्रयोग करते हुए पांच स्पेशलिस्ट गेंदबाजों के साथ खेला, जिससे बैटिंग कमजोर पड़ गई और भारत 215 रनों के टारगेट का पीछा करते हुए 165 पर ही ढेर हो गया।

    न्यूजीलैंड ने इस जीत के साथ भारत के खिलाफ सीरीज में अपना खाता खोला और भारत के खिलाफ सबसे ज्यादा T20I मैच जीतने वाली तीसरी टीम बन गई। कीवी टीम ने इस दौरान वेस्टइंडीज को पीछे छोड़ दिया। न्यूजीलैंड की भारत के खिलाफ अब तक 29 मैचों में 11 जीत और 15 हार दर्ज हैं।

    इस लिस्ट में साउथ अफ्रीका भारत के खिलाफ सबसे आगे है, जिसके नाम 35 मैचों में 13 जीत हैं। ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड ने 12-12 जीत दर्ज की हैं। न्यूजीलैंड को केवल 3 और जीत चाहिए ताकि वह इस सूची में टॉप पर पहुंच जाए।

    भारत के खिलाफ T20I में सबसे ज्यादा मैच जीतने वाली टीमें:
    साउथ अफ्रीका: 13
    इंग्लैंड: 12
    ऑस्ट्रेलिया: 12
    न्यूजीलैंड: 11
    वेस्टइंडीज: 10
    श्रीलंका: 9
    पाकिस्तान: 3
    जिम्बाब्वे: 3

    पाकिस्तान की भारत के खिलाफ पहली T20I जीत 2012 में आई थी। इसके बाद 2021 वर्ल्ड कप में टीम इंडिया को 10 विकेट से हराया और तीसरी जीत 2022 एशिया कप में मिली।

  • अरिजीत सिंह के संन्यास और बॉर्डर 2 विवाद पर भूषण कुमार की दो टूक: जबरदस्ती गाना गवाने की खबरें पूरी तरह बकवास

    अरिजीत सिंह के संन्यास और बॉर्डर 2 विवाद पर भूषण कुमार की दो टूक: जबरदस्ती गाना गवाने की खबरें पूरी तरह बकवास


    नई दिल्ली। भारतीय संगीत जगत के बेताज बादशाह अरिजीत सिंह द्वारा प्लेबैक सिंगिंग से अचानक संन्यास की घोषणा ने उनके करोड़ों प्रशंसकों को स्तब्ध कर दिया है। मंगलवार को सोशल मीडिया पर की गई इस घोषणा के बाद से ही कयासों और अफवाहों का बाजार गर्म है। सबसे बड़ी चर्चा फिल्म बॉर्डर 2के प्रतिष्ठित गाने संदेशे आते हैंके रीमेक को लेकर हो रही थी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेड्डिट और अन्य जगहों पर यह दावा किया गया कि अरिजीत को बड़े म्यूजिक लेबल्स द्वारा यह गाना गाने के लिए मजबूर किया गया था। अब इन गंभीर आरोपों पर फिल्म के निर्माता और टी-सीरीज के प्रमुख भूषण कुमार ने चुप्पी तोड़ते हुए सख्त प्रतिक्रिया दी है।

    भूषण कुमार की तीखी प्रतिक्रिया एचटी सिटी से बातचीत के दौरान भूषण कुमार ने अरिजीत से जबरदस्ती काम करवाने वाली सभी खबरों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, यह सब पूरी तरह बकवास है। अगर किसी को शक है तो कृपया अरिजीत को फोन करें और उनसे खुद पूछ लें। दरअसल, सोशल मीडिया पर यह अफवाह फैली थी कि अरिजीत कुछ बड़े म्यूजिक लेबल्स के काम करने के तरीके से परेशान थे और बॉर्डर 2के गाने के दौरान उन्हें रचनात्मक स्वतंत्रता नहीं मिल रही थी। भूषण कुमार के बयान ने अब इन चर्चाओं पर विराम लगाने की कोशिश की है।

    अरिजीत सिंह का भावुक संन्यास पोस्ट अरिजीत सिंह ने इंस्टाग्राम पर एक बेहद सादगी भरा पोस्ट साझा कर अपने संन्यास की जानकारी दी। उन्होंने लिखा सभी को नया साल मुबारक। मैं उन सभी को धन्यवाद देना चाहता हूं जिन्होंने इतने सालों तक मुझे प्यार दिया और सुना। मैं बहुत खुशी के साथ यह घोषणा कर रहा हूं कि अब मैं बतौर प्लेबैक वोकलिस्ट कोई नया प्रोजेक्ट नहीं लूंगा। यह यात्रा वास्तव में शानदार रही है।

    संन्यास के पीछे की वजह बताते हुए गायक ने स्वीकार किया कि उनकी रुचि किसी एक चीज में बहुत जल्दी खत्म हो जाती है। अरिजीत के अनुसार, यही कारण है कि मैं अक्सर अपने गानों की व्यवस्था में बदलाव करता रहता हूं और उन्हें लाइव परफॉर्म करना पसंद करता हूं। उनके इस बयान से स्पष्ट है कि वे अब प्लेबैक सिंगिंग की रूढ़ियों से निकलकर संगीत के अन्य पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं।

    एक युग का अंत: 2005 से 2026 तक का सफर अरिजीत सिंह के करियर की शुरुआत 2005 में रियलिटी शो फेम गुरुकुलसे हुई थी। हालांकि वहां उन्हें जीत नहीं मिली लेकिन उनके संघर्ष ने उन्हें बॉलीवुड का सबसे बड़ा गायक बना दिया। 2010 में तेलुगु फिल्म से डेब्यू करने के बाद उन्हें बॉलीवुड में पहला ब्रेक मर्डर 2के गाने फिर मोहब्बतसे मिला। उनके करियर का टर्निंग पॉइंट 2013 में आई फिल्म आशिकी 2 रही जिसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। तुम ही होसे लेकर केसरियातक, अरिजीत ने हर भावना को अपनी आवाज दी है। उनका संन्यास भारतीय फिल्म संगीत के एक बड़े अध्याय के अंत जैसा है।

  • IND vs NZ 4th T20I: विशाखापत्तनम में टीम इंडिया की हार के 5 बड़े कारण, इन खिलाड़ियों का रहा कमजोर प्रदर्शन

    IND vs NZ 4th T20I: विशाखापत्तनम में टीम इंडिया की हार के 5 बड़े कारण, इन खिलाड़ियों का रहा कमजोर प्रदर्शन

    नई दिल्ली। विशाखापत्तनम के एसीए-वीडीसीए क्रिकेट स्टेडियम में भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेले गए चौथे टी20 में टीम इंडिया को 50 रन से हार का सामना करना पड़ा। पांच मैचों की सीरीज में यह न्यूजीलैंड की पहली जीत रही, जबकि भारत पहले ही बढ़त बनाए हुए था। इस हार के पीछे केवल एक कारण नहीं था, बल्कि कई खिलाड़ियों के कमजोर प्रदर्शन ने टीम को प्रभावित किया।

    1. संजू सैमसन का निराशाजनक प्रदर्शन
    टी20 सीरीज में बड़ी पारी की उम्मीदें संजू सैमसन से थीं, लेकिन चौथे मैच में उन्होंने 15 गेंदों में केवल 24 रन बनाए। रनचेज के दबाव में जल्दी आउट होने से टीम का संतुलन बिगड़ा और हार का रास्ता आसान हो गया।

    2. कप्तान सूर्यकुमार यादव का कमजोर प्रदर्शन
    ओपनर अभिषेक शर्मा जल्दी आउट होने के बाद टीम ने कप्तान सूर्यकुमार यादव से पारी संभालने की उम्मीद की, लेकिन उन्होंने 8 गेंदों में सिर्फ 8 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। इससे मिडिल ऑर्डर पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया।

    3. हार्दिक पंड्या का फ्लॉप स्पेल
    अनुभवी ऑलराउंडर हार्दिक पंड्या भी केवल 5 गेंदों में 2 रन बनाकर आउट हो गए। उनके जल्दी आउट होने से रन बनाने के संतुलन पर असर पड़ा और टीम के लिए मैच जीतना मुश्किल हो गया।

    4. हर्षित राणा का निराशाजनक खेल
    ऑलराउंडर हर्षित राणा का प्रदर्शन टीम के लिए लाभकारी साबित नहीं हुआ। उन्होंने 4 ओवर में 54 रन खर्च किए और कोई विकेट नहीं लिया। बल्लेबाजी में भी 13 गेंदों में केवल 9 रन बनाए।

    5. रवि बिश्नोई की स्पिन फ्लॉप
    लेग स्पिनर रवि बिश्नोई भी बीच के ओवरों में प्रभावी नहीं रह पाए। उन्होंने 49 रन दिए और केवल 1 विकेट लिया। उनकी गेंदबाजी न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों को रोकने में नाकाम रही, जिससे विरोधी टीम आसानी से रन बना सकी।

    इस मुकाबले में भारतीय टीम के मुख्य खिलाड़ियों का कमजोर प्रदर्शन और रन बनाने में संतुलन की कमी टीम की हार का प्रमुख कारण बनी।

  • RCEP पर भारत का क्लियर कट मैसेज, चीन समर्थित व्यापार समझौते शामिल नहीं होगा

    RCEP पर भारत का क्लियर कट मैसेज, चीन समर्थित व्यापार समझौते शामिल नहीं होगा

    नई दिल्ली । भारत ने साफ किया है कि वह चीन समर्थित क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (RCEP) में शामिल होने पर फिलहाल कोई विचार नहीं कर रहा है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस संबंध में अभी कोई प्रस्ताव मौजूद नहीं है और आरसीईपी भारत की सक्रिय व्यापार नीति का हिस्सा नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत इस समय आरसीईपी में शामिल होने को लेकर न तो औपचारिक और न ही अनौपचारिक स्तर पर कोई पहल कर रहा है। सूत्रों ने उन अटकलों को खारिज किया है, जिनमें कहा जा रहा था कि पश्चिमी देशों के साथ व्यापार समझौतों को गति देने और एशिया में चुनिंदा द्विपक्षीय करार मजबूत करने के चलते भारत इस मुद्दे पर दोबारा विचार कर सकता है।

    एक सरकारी सूत्र ने स्पष्ट कहा कि इस पर फिलहाल कोई विचार नहीं है। हमने इस विषय को एजेंडे में नहीं रखा है। वहीं, एक अन्य सूत्र ने राजनीतिक दृष्टिकोण रखते हुए कहा कि आरसीईपी को देखने का एक नजरिया यह भी है कि यह मूल रूप से चीन के हितों को आगे बढ़ाने का माध्यम है। ये टिप्पणियां भारत की व्यापक व्यापार रणनीति के संदर्भ में सामने आई हैं, जिसमें बड़े बहुपक्षीय समझौतों के बजाय प्रमुख साझेदार देशों के साथ द्विपक्षीय समझौतों को प्राथमिकता दी जा रही है। सरकार का मानना है कि व्यापक क्षेत्रीय समझौते आयात से जुड़ी संवेदनशीलताओं को संभालने की भारत की क्षमता को कमजोर कर सकते हैं।

    सूत्रों के अनुसार, चीन को छोड़कर आरसीईपी के अधिकांश सदस्य देशों के साथ भारत के पहले से ही द्विपक्षीय व्यापार समझौते मौजूद हैं, या तो वे पूरे हो चुके हैं या बातचीत के चरण में हैं। इसका अर्थ यह है कि भारत किसी बड़े क्षेत्रीय गुट में शामिल हुए बिना भी अपने बाजार पहुंच के लक्ष्यों को हासिल कर सकता है। अधिकारियों ने संकेत दिया कि भारत अन्य क्षेत्रीय और द्विपक्षीय ढांचों पर भी विचार कर रहा है। उनका कहना है कि जब भारत पर्याप्त संख्या में द्विपक्षीय समझौते कर लेगा, तब बड़े ढांचों में शामिल होने का सवाल भविष्य में उठ सकता है, लेकिन फिलहाल आरसीईपी भारत की नीतिगत प्राथमिकताओं में शामिल नहीं है।

    सरकार का यह रुख उन चिंताओं से भी जुड़ा है, जो उसने यूरोपीय संघ के साथ व्यापार वार्ताओं के दौरान ऑटोमोबाइल और कृषि जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को लेकर जताई थीं। भारत ने यूरोपीय संघ के साथ समझौते में समय के साथ लगभग 92 प्रतिशत टैरिफ लाइनों को खोलने पर सहमति जताई है, लेकिन संवेदनशील क्षेत्रों के लिए चरणबद्ध कटौती, कोटा और टैरिफ-रेट कोटा जैसे उपाय अपनाए गए हैं। सूत्रों का कहना है कि आरसीईपी से दूरी बनाए रखने का एक प्रमुख कारण यह आशंका है कि चीन के साथ व्यापक टैरिफ कटौती का ढांचा भारत की संवेदनशील क्षेत्रों में जोखिम प्रबंधन की क्षमता को सीमित कर सकता है।

    उन्होंने यह भी बताया कि कोविड महामारी के बाद आपूर्ति श्रृंखला में आए झटकों और व्यापार दुरुपयोग के अनुभवों के चलते वैश्विक व्यापार व्यवस्था एक समान, WTO-केंद्रित मॉडल से हटकर द्विपक्षीय समझौतों के जटिल नेटवर्क की ओर बढ़ रही है। ऐसे माहौल में भारत लचीलापन चाहता है, कुछ चुनिंदा साझेदारों के साथ गहरे संबंध, लेकिन किसी एक क्षेत्र या देश पर अत्यधिक निर्भरता से बचाव।

    सूत्रों ने भारत–यूरोपीय संघ समझौते को ‘जोखिम कम करने और विविधीकरण’ की वैश्विक प्रवृत्ति का हिस्सा बताया और कहा कि किसी एक बाजार या आपूर्ति स्रोत पर अत्यधिक निर्भरता खतरनाक हो सकती है। यही सोच अप्रत्यक्ष रूप से आरसीईपी के पक्ष में दिए जाने वाले तर्कों के विपरीत जाती है, जिसके चलते भारत ने 2019 में बाजार पहुंच, मूल नियमों और आयात में अचानक बढ़ोतरी की आशंकाओं का हवाला देते हुए इससे बाहर रहने का फैसला किया था।

    फिलहाल नई दिल्ली का संदेश साफ है कि गुटीय व्यवस्था के बजाय द्विपक्षीय समझौते, व्यापक उदारीकरण के बजाय संतुलित खुलापन और चीन से जुड़े जोखिम बढ़ाने वाली किसी भी व्यवस्था से दूरी। सरकार का ‘अभी कोई प्रस्ताव नहीं’ पर जोर घरेलू उद्योग के लिए भी एक स्पष्ट संकेत है, जो आरसीईपी को लेकर पहले से ही सतर्क रुख अपनाए हुए है।

  • The 50 Contestants: Reality Show में उतरेंगे 6 Ex-Splitsvilla Stars, देखें पूरी लिस्ट

    The 50 Contestants: Reality Show में उतरेंगे 6 Ex-Splitsvilla Stars, देखें पूरी लिस्ट

    नई दिल्ली | नया रियलिटी शो ‘The 50’ 1 फरवरी 2026 से शुरू होने जा रहा है और लॉन्च से पहले ही शो को लेकर जबरदस्त बज़ बना हुआ है। मेकर्स ने शो के सभी कंटेस्टेंट्स के नाम अनाउंस कर दिए हैं। खास बात यह है कि The 50 में Splitsvilla के 6 मशहूर एक्स-कंटेस्टेंट्स भी हिस्सा ले रहे हैं।

    यह शो भारतीय वर्जन के तौर पर पेश किया जा रहा है, जिसे Squid Game-स्टाइल कॉन्सेप्ट पर आधारित बताया जा रहा है, जहां कंटेस्टेंट्स को एक भव्य पैलेस में रहकर खतरनाक और रोमांचक टास्क खेलने होंगे।

    The 50 में शामिल Splitsvilla के 6 सितारे
    Arbaz Patel

    Splitsvilla X5 से पहचान बनाने वाले अरबाज पटेल The 50 में अपनी गर्लफ्रेंड निकी तंबोली के साथ नजर आएंगे। Splitsvilla के बाद वे Bigg Boss Marathi 5 और Rise And Fall जैसे शोज़ का हिस्सा रह चुके हैं।

    Digvijay Rathee

    Splitsvilla X5 में ‘मास्टरमाइंड’ के नाम से मशहूर दिग्विजय राठी अब The 50 के पैलेस में एंट्री लेने जा रहे हैं। वे इससे पहले Bigg Boss 18 में भी नजर आ चुके हैं।

    Divya Agarwal

    Splitsvilla 10 में प्रियंक शर्मा के साथ जोड़ी बनाने वाली दिव्या अग्रवाल, Bigg Boss OTT 1 की विनर रह चुकी हैं। अब दिव्या The 50 में अपनी स्ट्रॉन्ग पर्सनैलिटी के साथ गेम खेलने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

    Hamid Barkzi

    Roadies Revolution और Splitsvilla X4 के विनर हामिद बरकज़ी भी The 50 का हिस्सा होंगे। टास्क परफॉर्मेंस और स्ट्रैटेजी में माहिर हामिद से शो में बड़ी उम्मीदें हैं।

    Prince Narula

    रियलिटी शो के किंग कहे जाने वाले प्रिंस नरूला अपनी पत्नी युविका चौधरी के साथ The 50 में नजर आएंगे। प्रिंस Roadies X2, Splitsvilla 8, Bigg Boss 9 और Nach Baliye 9 के विनर रह चुके हैं।

  • Magh Purnima 2026 Date : माघ पूर्णिमा कब? जानें सही तारीख, पूजा विधि, स्नान दान और चंद्रोदय का समय

    Magh Purnima 2026 Date : माघ पूर्णिमा कब? जानें सही तारीख, पूजा विधि, स्नान दान और चंद्रोदय का समय

    नई दिल्ली | Magh Purnima Kab Hai 2026 : माघ मास में पड़ने वाली पूर्णिमा तिथि का शास्त्रों में बेहद खास महत्व बताया गया है। वहीं, यह पूर्णिमा तिथि बेहद खास रहेगी क्योंकि, इस दिन रवि पुष्य योग का संयोग भी बन रहा है। इस दिन स्नान, दान व्रत आदि करने से अत्यंत पुण्य फल की प्राप्ति होती है। ऐसे में आइए जानें माघ पूर्णिमा की तारीख, पूजा विधि, स्नान दान और चंद्रोदय का समय…
    Magh Purnima 2026 Date
    माघ पूर्णिमा का हिंदू धर्म में खास महत्व है। इस दिन स्नान, दान और व्रत करने से बेहद पुण्य फल की प्राप्ति होती है। इस दिन पवित्र नदी में स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। साथ ही, पूर्णिमा का व्रत करने वाले चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देते हैं। वहीं, इस बार की माघ पूर्णिमा बेहद खास रहने वाली है क्योंकि इस दिन रवि पुष्य योग का संयोग बन रहा है। पूर्णिमा तिथि पर विधि-विधान से पूजा और व्रत करने से जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। आइए जानते हैं कि माघ पूर्णिमा कब है, स्नान-दान व चंद्रोदय का समय और पूजन विधि…

    माघ पूर्णिमा 2026 कब है ?
    माघ मास की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 1 फरवरी, रविवार को सुबह 5 बजकर 53 मिनट पर होगी। वहीं, इसका समापन 1 फरवरी को मध्य रात्रि के पश्चात 3 बजकर 39 मिनट पर होगा। शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष काल में पूर्णिमा तिथि पर पड़ने पर पूर्णिमा का व्रत रखा जाता है। ऐसे में 1 फरवरी के दिन ही माघ पूर्णिमा का व्रत स्नान दान आदि कार्य किए जाएंगे। वहीं, इस दिन रविवार का दिन होने और पुष्य नक्षत्र के चलते रवि पुष्य योग का संयोग भी बन रहा है।
    माघ पूर्णिमा 2026 स्नान दान का शुभ मुहूर्त
    लाभ चौघड़िया : सुबह 5 बजकर 30 मिनट से लेकर 7 बजकर 9 मिनट तक का समय स्नान-दान के लिए सबसे उत्तम रहेगा। माघ मास की पूर्णिमा को तिल, कंबल, वस्त्र, घी, फल, अन्न आदि का दान करना शुभ माना जाता है। साथ ही, इस दिन पितरों का श्राद्ध भी किया जाता है। माघी पूर्णिमा पर विष्णुजी की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है।

    माघ पूर्णिमा 2026 चंद्रोदय का समय
    माघ पूर्णिमा पर चांद निकलने का समय शाम को 5 बजकर 46 मिनट पर होगा। चंद्रोदय के पश्चात चंद्रमा को अर्घ्य देने का विधान होता है।

    माघ पूर्णिमा पूजा विधि
    पूर्णिमा तिथि के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नानादि के पश्चात सूर्यदेव को अर्घ्य देना चाहिए। फिर, शांत मन से व्रत का संकल्प लें।
    अपने घर के पूजा स्थल पर एक चौकी पर साफ लाल या पीले रंग का वस्त्र बिछाएं। अब उस पर भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
    चारों ओर गंगाजल का छिड़काव करें। चौकी के चारों तरफ कलावा अवश्य बांधें। फिर, विष्णुजी का पंचामृत से स्नान कराएं।

    भगवान विष्णु को वस्त्र आदि अर्पित करके उनका तिलक करें। अब केले, पंचामृत, कसाल आदि चढ़ाएं और विधि पूर्वक पूजा आरती करें।

  • आम बजट 2026-27: लंबाई बढ़ाने के बजाय ग्रीन और इलेक्ट्रिक नेशनल हाईवे को प्राथमिकता

    आम बजट 2026-27: लंबाई बढ़ाने के बजाय ग्रीन और इलेक्ट्रिक नेशनल हाईवे को प्राथमिकता

    नई दिल्ली। इस बार आम बजट 2026-27 (General Budget 2026-27) में पारंपरिक नेशनल हाईवे (Conventional National Highway.) की लंबाई बढ़ाने के बजाय ग्रीन और इलेक्ट्रिक नेशनल हाईवे (Green and Electric National Highway) को प्राथमिकता दी जाएगी। यही कारण है गत वर्ष की अपेक्षा सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की बजटीय सहायता में महज 2-3 फीसदी की बढ़ोतरी होने की संभावना है।

    मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार आम बजट में बड़े नीतिगत बदलाव किए जा सकते हैं। इसमें सड़क निर्माण के साथ-साथ ग्रीन एनर्जी और ई-मोबिलिटी को पहली प्राथमिकता दी जा सकती है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट से इस बार विभाग को 2.92 लाख करोड़ रुपये (पिछले वर्ष से 1.8 फीसदी ज्यादा) की बजटीय सहायता मिल सकती है। सरकार का पीपीपी मोड के तहत अधिक से अधिक राशि जुटाने का प्रयास होगा।


    इलेक्ट्रिक नेशनल हाईवे के लिए 5000 करोड़ का विशेष फंड

    सरकार सड़कों के मुद्रीकरण से अतिरिक्त 35,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखेगी। इसे सीधे ग्रीन प्रोजेक्ट्स में निवेश किया जाएगा। बजट में इलेक्ट्रिक नेशनल हाईवे के लिए 5000 करोड़ का विशेष फंड का प्रावधान किया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि आम बजट में दिल्ली-जयपुर और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के चुनिंदा सेक्शन को पायलट इलेक्ट्रिक नेशनल हाईवे के रूप में विकसित करने के लिए एक विशेष प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा की जा सकती है।

    इसमें स्वीडन और जर्मनी की तर्ज पर ओवरहेड केबल तकनीक, भारी ट्रकों के लिए ओवरहेड इलेक्ट्रिक लाइनों का ट्रायल अब बड़े स्तर पर शुरू किया जाएगा। हर 40-50 किलोमीटर पर सड़क किनारे फास्ट चार्जिंग स्टेशनों के लिए निजी ऑपरेटरों को 20-25 फीसदी की कैपिटल सब्सिडी मिलने की उम्मीद है। बजट में 10,000 से 11,000 किलोमीटर हाईवे निर्माण का लक्ष्य रखा जा सकता है। यानी प्रतिदिन 27 से 30 किलोमीटर सड़कों का निर्माण होगा।


    सड़क निर्माण में कचरे का उपयोग

    सरकार अब सर्कुलर इकोनॉमी के तहत नई सड़कों के निर्माण में नगर निगम के कचरे और प्लास्टिक के अनिवार्य उपयोग के लिए प्रोत्साहित कर सकती है। इसमें सड़क बनाने वाली कंपनियों को कार्बन क्रेडिट दिए जाएंगे, जिन्हें वे बाजार में बेच सकेंगी।


    सैटेलाइट से टोल कलेक्शन

    इस साल मंत्रालय सैटेलाइट टोलिंग योजना शुरू करेगा। इसके तहत टोल प्लाजा के बजाय सैटेलाइट से टोल टैक्स कलेक्शन किया जाएगा। इससे ईंधन की बचत होगी और ट्रैफिक जाम नहीं होगा। सड़क बनाने से पहले उसका डिजिटल मॉडल तैयार होगा, जो निर्माण की गलतियों में कमी और पारदर्शिता लाएगा। सरकार नया बिजनेस मॉडल ला सकती है, जहां निजी कंपनियां हाईवे पर बिजली की बुनियादी संरचना लगाएंगी और ट्रकों से बिजली खपत के आधार पर शुल्क वसूलेंगी।

  • कनाड़ा के साथ राजनयिक-व्यापारिक तनाव के बीच US की चेतावनी… जानें क्या बोले अमेरिकी राजदूत?

    कनाड़ा के साथ राजनयिक-व्यापारिक तनाव के बीच US की चेतावनी… जानें क्या बोले अमेरिकी राजदूत?


    ओटावा।
    अमेरिका और कनाडा (America and Canada) के बीच चल रहे राजनयिक और व्यापारिक तनाव (Diplomatic and trade tensions) ने अब रक्षा संबंधों को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है। कनाडा (Canada) में अमेरिकी राजदूत पीट होकस्ट्रा (US Ambassador Pete Hoekstra) ने चेतावनी दी है कि अगर कनाडा 88 F-35 लड़ाकू विमान खरीदने के अपने वादे से पीछे हटता है, तो नॉर्थ अमेरिकन एयरोस्पेस डिफेंस कमांड (NORAD) की संरचना में बड़ा बदलाव करना पड़ सकता है।


    मुख्य विवाद क्या है?

    होकस्ट्रा का यह बयान तब आया है जब पिछले महीने कनाडा ने अमेरिका से 19 बिलियन डॉलर की F-35 स्टील्थ फाइटर जेट्स की डील की ‘समीक्षा’ करने का फैसला किया। कनाडा सरकार ने यह निर्णय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कनाडा पर टैरिफ (आयात शुल्क) लगाने की धमकी के बाद लिया है। 2023 में, कनाडा ने लॉकहीड मार्टिन से 88 F-35 जेट खरीदने का सौदा किया था। इसमें से 16 विमानों का भुगतान किया जा चुका है और उनकी डिलीवरी 2026 में होनी है।


    NORAD पर क्या असर पड़ेगा?

    1957 में स्थापित NORAD अमेरिका और कनाडा का एक संयुक्त सैन्य संगठन है। इसका मुख्य काम उत्तरी अमेरिका की हवाई और समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करना है, जिसमें मिसाइलों और दुश्मन के विमानों का पता लगाना शामिल है। यह समझौता दोनों देशों को यह अनुमति देता है कि खतरा दिखने पर किसी भी देश का निकटतम विमान कार्रवाई कर सकता है, चाहे वह किसी भी हवाई क्षेत्र में हो।

    अमेरिकी राजदूत ने CBC News को बताया- अगर कनाडा यह क्षमता (F-35) प्रदान नहीं करने जा रहा है, तो हमें उन कमियों को खुद भरना होगा। उनका कहना है कि अगर कनाडा इन आधुनिक विमानों की खरीद से पीछे हटता है, तो उत्तरी अमेरिका की सुरक्षा व्यवस्था को नए सिरे से डिजाइन करना पड़ेगा।


    कनाडा का ‘प्लान बी’ और अमेरिका की आपत्ति

    अपनी F-35 डील की समीक्षा के साथ-साथ, कनाडा अब स्वीडन की डिफेंस कंपनी Saab से बात कर रहा है। कनाडा कई विकल्पों पर विचार कर रहा है। जैसे-72 ग्रिपेन ई जेट्स और 6 ग्लोबलआई सर्विलांस एयरक्राफ्ट। अमेरिकी राजदूत होकस्ट्रा ने स्पष्ट किया कि यदि कनाडा सरकार ‘ग्रिपेन’ जेट्स का विकल्प चुनती है, तो भी NORAD व्यवस्था पर पुनर्विचार करना होगा। उन्होंने स्वीडिश विमानों को अमेरिकी F-35 की तुलना में कमजोर बताया।

    होकस्ट्रा ने कहा- अगर वे फैसला करते हैं कि वे एक ऐसे ‘कमतर उत्पाद’ के साथ जा रहे हैं जो F-35 की तरह ‘इंटरऑपरेबल’ (एक-दूसरे के सिस्टम के साथ काम करने योग्य) नहीं है, तो इससे हमारी रक्षा क्षमता बदल जाती है। और ऐसे में, हमें यह पता लगाना होगा कि हम उस कमी को कैसे पूरा करेंगे।

    इस बयान से स्पष्ट है कि अमेरिका चाहता है कि कनाडा अपनी रक्षा जरूरतों के लिए अमेरिकी तकनीक पर ही निर्भर रहे, ताकि दोनों देशों की सेनाएं आसानी से मिलकर काम कर सकें। वहीं, कनाडा व्यापारिक दबावों (टैरिफ) के जवाब में अपनी संप्रभुता और अन्य विकल्पों को तलाशने का संकेत दे रहा है।