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  • दूषित पानी हादसे के बाद प्रशासन अलर्ट, कलेक्टर ने जलदाय व्यवस्था का किया निरीक्षण

    दूषित पानी हादसे के बाद प्रशासन अलर्ट, कलेक्टर ने जलदाय व्यवस्था का किया निरीक्षण


    नई दिल्ली । इंदौर में दूषित पेयजल से हुई गंभीर घटनाओं के बाद जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। शहर में कहीं भी पीने के पानी में गंदगी की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। शनिवार को कलेक्टर ऋतुराज सिंह, नगर निगम आयुक्त दलीप कुमार और नगर निगम सभापति रवि जैन ने शहर के वार्ड क्रमांक 44 और 45 के अंतर्गत आने वाले नागदा और पालनगर क्षेत्रों का दौरा कर जलदाय व्यवस्था का गहन निरीक्षण किया।निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने क्षेत्र की पानी की टंकियों, सप्लाई लाइनों और नल कनेक्शनों की स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान कई स्थानों पर गंभीर खामियां सामने आईं। कुछ नल कनेक्शन नालियों के बेहद पास पाए गए, वहीं कई जगह नलों में टोटियां तक नहीं लगी थीं, जिससे गंदा पानी पाइपलाइन में जाने का खतरा बना हुआ था। अधिकारियों ने मौके पर ही नगर निगम की टीम को तत्काल टोटियां लगाने और कनेक्शन दुरुस्त करने के निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री के निर्देश पर किया गया निरीक्षण

    कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने बताया कि यह निरीक्षण मुख्यमंत्री के निर्देश पर किया गया है। दूषित पानी से हुई मौतों को प्रशासन बेहद गंभीरता से ले रहा है और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि जनता को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।निरीक्षण के दौरान पानी की हार्डनेस की भी जांच की गई और विभिन्न स्थानों से पानी के सैंपल लिए गए। अधिकारियों ने यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि सभी सैंपल्स की लैब में समयबद्ध जांच हो और रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक सुधार किए जाएं।

    नालियों के पास पाइपलाइन बनी खतरे की वजह

    स्थानीय रहवासियों ने अधिकारियों को बताया कि गणेश मंदिर जाने वाले मार्ग पर नाली का गंदा पानी अक्सर सड़क पर बहता रहता है। चूंकि अधिकांश पानी की लाइनें और नल कनेक्शन नालियों के पास हैं, ऐसे में सीवेज का पानी पीने की सप्लाई में मिलने का खतरा बना रहता है। निरीक्षण के दौरान एक खुली टोटी भी मिली, जिससे दूषित पानी सीधे पाइपलाइन में जा रहा था। इस पर निगम अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

    टंकियों की सफाई और क्लोरीनेशन के आदेश

    कलेक्टर ने बताया कि शहर की सभी पानी की टंकियों की साफ-सफाई का काम एक दिन पहले ही शुरू कर दिया गया है। साथ ही सात दिनों के भीतर पूरे शहर में पानी की व्यापक टेस्टिंग कराने के निर्देश दिए गए हैं। नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों को सभी वार्डों में टंकियों की गहन सफाई, क्लोरीनेशन और नियमित निगरानी सुनिश्चित करने को कहा गया है।उन्होंने स्पष्ट किया कि जहां-जहां पानी की सप्लाई में गंदगी मिलने की आशंका है, वहां संबंधित प्वाइंट्स को अस्थायी रूप से बंद किया जाएगा। इसके अलावा सीवरेज लाइनों में लीकेज की जांच कर कहीं भी पानी और सीवर की मिक्सिंग पाए जाने पर तत्काल सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    सभापति ने बताई निरीक्षण की स्थिति

    नगर निगम सभापति रवि जैन ने बताया कि वार्ड क्रमांक 44 और 45 में कई जगह नाली और पानी की लाइनें साथ-साथ चल रही हैं। कुछ स्थानों पर लीकेज भी सामने आए हैं। निरीक्षण के दौरान गणेश मंदिर पहुंच मार्ग पर नाली का पानी ऊपर आता हुआ पाया गया, जो बेहद चिंताजनक है। इन सभी बिंदुओं पर निगम की टीम को तुरंत सुधार कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के आदेशानुसार अब सभी वार्डों में नियमित और सतत निरीक्षण किया जाएगा, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो।

    नागरिकों से की गई अपील

    प्रशासन की ओर से आम नागरिकों से भी अपील की गई है कि यदि कहीं भी पीने के पानी में गंदगी, बदबू या रंग बदलने जैसी समस्या नजर आए, तो तुरंत नगर निगम या संबंधित वार्ड कार्यालय को इसकी सूचना दें। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि शिकायत मिलते ही तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
    दूषित पानी की घटना के बाद प्रशासन की इस सक्रियता को शहरवासियों के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है, हालांकि लोग चाहते हैं कि यह सतर्कता सिर्फ निरीक्षण तक सीमित न रहे, बल्कि स्थायी समाधान भी सुनिश्चित किया जाए।

  • सरेराह युवक की हत्या, दो बाइक पर सवार छह युवकों ने चाकू से किया हमला, CCTV के सहारे जांच में जुटी पुलिस

    सरेराह युवक की हत्या, दो बाइक पर सवार छह युवकों ने चाकू से किया हमला, CCTV के सहारे जांच में जुटी पुलिस


    जबलपुर । मध्यप्रदेश के पाटन थाना क्षेत्र में दिनदहाड़े हुई एक सनसनीखेज हत्या की वारदात से इलाके में हड़कंप मच गया। दो मोटरसाइकिलों पर सवार होकर आए छह युवकों ने सरेराह एक युवक पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर उसकी हत्या कर दी। घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर लिया है और CCTV फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान करने में जुटी हुई है।एसडीओपी बरगी अर्जुन अयंक मिश्रा के अनुसार, मृतक की पहचान अभिषेक उर्फ महेन्द्र साहू 27 वर्ष के रूप में हुई है, जो पाटन थाना क्षेत्र का निवासी था। महेन्द्र पेशे से ट्रैवल्स एजेंसी का संचालन करता था और साथ ही लोगों को प्राथमिक उपचार भी उपलब्ध कराता था। वह अपने परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य था। परिवार में उसकी पत्नी और दो छोटे बच्चे हैं।

    उज्जैन जाने के दौरान हुई वारदात

    पुलिस के मुताबिक, महेन्द्र बीते दिन अपने दोस्तों के साथ उज्जैन जाने के लिए घर से निकला था। यात्रा के दौरान सहजपुर के पास उसकी स्कॉर्पियो गाड़ी खराब हो गई। रात होने के कारण उसने गाड़ी को सड़क किनारे खड़ा कर दिया और वहीं रुक गया। अगले दिन सुबह उसने वाहन सुधारने के लिए एक मैकेनिक को बुलाया और दोपहर करीब एक बजे गाड़ी में बैठकर उसके आने का इंतजार कर रहा था।

    दो बाइक पर पहुंचे आरोपी, मच गई अफरातफरी

    इसी दौरान अचानक दो मोटरसाइकिलों पर सवार छह युवक मौके पर पहुंचे। आरोपियों ने महेन्द्र को जबरन गाड़ी से बाहर निकाला और उस पर चाकू से लगातार वार करने लगे। अचानक हुए हमले से महेन्द्र संभल नहीं पाया और गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर पड़ा। आसपास मौजूद लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले ही आरोपी वारदात को अंजाम देकर मौके से फरार हो गए।

    भागते समय बदले कपड़े

    प्रत्यक्षदर्शियों और CCTV फुटेज के अनुसार, आरोपी कुछ दूरी पर जाकर रुके और अपनी पहचान छिपाने के इरादे से आपस में कपड़े बदल लिए। इसके बाद चार युवक मोटरसाइकिलों पर सवार होकर फरार हो गए, जबकि दो युवक पैदल ही अलग दिशा में निकल गए। यह पूरी गतिविधि आसपास लगे CCTV कैमरों में कैद हो गई है।

    CCTV फुटेज बनी जांच का आधार

    पुलिस ने घटनास्थल और आसपास के इलाकों में लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी है। फुटेज में आरोपी युवक, उनकी मोटरसाइकिलें और वारदात के बाद भागने का तरीका स्पष्ट रूप से नजर आ रहा है। इन्हीं फुटेज के आधार पर पुलिस अज्ञात आरोपियों की पहचान और उनकी तलाश कर रही है।

    अस्पताल में मृत घोषित, हत्या का केस दर्ज

    घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घायल महेन्द्र को अस्पताल भिजवाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद पुलिस ने पंचनामा कार्रवाई पूरी कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। फिलहाल अज्ञात आरोपियों के खिलाफ हत्या का प्रकरण दर्ज कर लिया गया है।

    पुरानी रंजिश या साजिश की जांच

    पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि हत्या के पीछे कोई पुरानी रंजिश, आपसी विवाद या साजिश तो नहीं है। मृतक के दोस्तों, परिजनों और परिचितों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा।

    इलाके में दहशत का माहौल

    दिनदहाड़े हुई इस वारदात के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल है। वहीं मृतक के घर में मातम पसरा हुआ है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और उन्होंने पुलिस से आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी और कड़ी सजा की मांग की है।पुलिस का कहना है कि तकनीकी साक्ष्यों और CCTV फुटेज के आधार पर लगातार दबिश दी जा रही है और जल्द ही आरोपियों को पकड़ लिया जाएगा।

  • भोपाल वार्ड-31 की BJP पार्षद बृजला सचान को SDM का नोटिस, जाति प्रमाण पत्र पर जवाब तलब

    भोपाल वार्ड-31 की BJP पार्षद बृजला सचान को SDM का नोटिस, जाति प्रमाण पत्र पर जवाब तलब


    भोपाल। भोपाल नगर निगम के वार्ड-31 से भाजपा पार्षद बृजला सचान की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। चुनाव के दौरान उपयोग किए गए जाति प्रमाण पत्र को लेकर दर्ज शिकायत पर टीटी नगर एसडीएम अर्चना शर्मा ने पार्षद को नोटिस जारी किया है। नोटिस में 23 जनवरी तक जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं। तय समय सीमा में जवाब नहीं देने पर एकतरफा कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

    बृजला सचान को भोपाल की महापौर मालती राय की करीबी माना जाता है और वे कई सार्वजनिक कार्यक्रमों में उनके साथ नजर आती रही हैं।

    हाल ही में हुए नगर निगम चुनाव में उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी राज सिंह को 1144 वोटों के बड़े अंतर से हराया था। चुनाव में बृजला सचान को कुल 2722 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार राज सिंह को 1578 वोटों से संतोष करना पड़ा था।

    चुनाव परिणाम आने के बाद उनके जाति प्रमाण पत्र को लेकर विवाद खड़ा हो गया। कोलार क्षेत्र के प्रियंका नगर निवासी शैलेष सेन ने पार्षद के निर्वाचन के दौरान प्रस्तुत जाति प्रमाण पत्र को संदिग्ध बताते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। इसी शिकायत के आधार पर प्रशासन ने मामले की जांच शुरू की और अब एसडीएम द्वारा नोटिस जारी किया गया है।

    नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि 23 जनवरी को दोपहर 3 बजे पार्षद स्वयं या उनके द्वारा नियुक्त अधिवक्ता को उपस्थित होकर अपना पक्ष रखना होगा।

    यदि निर्धारित समय पर न तो पार्षद और न ही उनका प्रतिनिधि उपस्थित होता है, तो प्रशासन एकतरफा कार्रवाई कर सकता है।

    इस मामले में यह भी सामने आया है कि इससे पहले भी पार्षद बृजला सचान को दो बार नोटिस जारी किए जा चुके हैं, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिलने के कारण अब प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि संदिग्ध जाति प्रमाण पत्र के आधार पर चुनाव लड़कर पार्षद ने जीत हासिल की।

    वहीं, जब इस पूरे मामले पर पार्षद बृजला सचान से प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई, तो उन्होंने खुद को व्यस्त बताते हुए फिलहाल कोई स्पष्ट जवाब देने से बचती नजर आईं। अब सबकी नजरें 23 जनवरी की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां पार्षद के जवाब के बाद ही यह तय हो पाएगा कि आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।

  • बांध से अचानक छोड़ा गया पानी, खेड़ी घाट में नदी के बीच फंसे 10 से ज्यादा मजदूर, टली बड़ी त्रासदी

    बांध से अचानक छोड़ा गया पानी, खेड़ी घाट में नदी के बीच फंसे 10 से ज्यादा मजदूर, टली बड़ी त्रासदी


    खंडवा जिले के खेड़ी घाट क्षेत्र में उस समय हड़कंप मच गयाजब ओंकारेश्वर बांध से अचानक बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण नर्मदा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया। इस दौरान रेलवे स्टेशन ओंकारेश्वर रोड से बड़वाह के बीच मोरटक्का-खेड़ी घाट पर चल रहे पुल निर्माण कार्य में लगे 10 से अधिक मजदूर और इंजीनियर नदी के बीच फंस गए। हालात कुछ ही पलों में गंभीर हो गएलेकिन स्थानीय नाविकों और गोताखोरों की सूझबूझ और तत्परता से सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। यदि पानी का बहाव कुछ और बढ़ जातातो यह घटना एक बड़ी जनहानि में बदल सकती थी।

    पुल निर्माण स्थल पर मची अफरातफरी


    खेड़ी घाट पर नर्मदा नदी पर पुराने पुल को तोड़कर मंगलम कंपनी द्वारा नए पुल का निर्माण किया जा रहा है। इसके लिए नदी के दोनों किनारों को जोड़ने वाली एप्रोच रोड बनाई गई हैपिलर खड़े किए जा रहे हैं और भारी मशीनें नदी के अंदर काम कर रही हैं। शनिवार को भी मजदूर रोज़ की तरह निर्माण कार्य में जुटे थे। इसी दौरान ओंकारेश्वर बांध से अचानक पानी छोड़े जाने से नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा और देखते ही देखते मजदूरों का रास्ता कट गया।पानी बढ़ते ही मौके पर अफरातफरी मच गई। कुछ मजदूर ऊंचे पिलरों और चट्टानों पर चढ़ गएजबकि कुछ लोग बहाव के बीच फंस गए। गनीमत यह रही कि आसपास मौजूद नाविकों को स्थिति की जानकारी मिल गई और उन्होंने तुरंत राहत कार्य शुरू किया।

    नाविकों ने दिखाया साहस


    स्थानीय नाविकों और गोताखोरों ने बिना देर किए अपनी जान जोखिम में डालकर सभी मजदूरों और इंजीनियरों को सुरक्षित बाहर निकाला। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसारअगर कुछ मिनट की भी देरी हो जातीतो पानी का बहाव इतना तेज हो सकता था कि किसी को बचाना मुश्किल हो जाता। इस त्वरित कार्रवाई से एक बड़ा हादसा टल गया।

    कंपनी प्रबंधन ने जताई नाराजगी


    मंगलम कंपनी के मैनेजर पंकज पटेल ने ओंकारेश्वर बांध प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि बांध प्रबंधन जितना पानी छोड़े जाने की सूचना देता हैअसल में उससे कहीं ज्यादा पानी छोड़ा जाता है। इससे पहले भी कंपनी को इस कारण करोड़ों रुपये का नुकसान हो चुका है और इस बार तो मजदूरों की जान पर बन आई थी।उन्होंने बताया कि कंपनी की ओर से कई बार शासन-प्रशासन और बांध प्रबंधन को लिखित और मौखिक रूप से सूचित किया गया है कि यदि अधिक मात्रा में पानी छोड़ा जाना होतो कम से कम दो दिन पहले स्पष्ट और सही जानकारी दी जाए। लेकिन अब तक कोई प्रभावी सूचना प्रणाली लागू नहीं की गई है।

    स्थानीय लोगों और व्यापारियों को भी नुकसान


    अचानक जलस्तर बढ़ने का असर सिर्फ निर्माण स्थल तक सीमित नहीं रहा। खेड़ी घाट क्षेत्र में नर्मदा तट पर स्थित कई छोटी दुकानें पानी में डूब गईंजिससे स्थानीय व्यापारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। स्थानीय निवासी दशरथ केवटमुकेश शुक्ला और सत्यदेव जोशी ने बताया कि कई बार दिन या रात किसी भी समय अचानक पानी छोड़ दिया जाता हैजिसकी कोई पूर्व जानकारी नहीं मिलती। उनका कहना है कि श्रद्धालुमजदूर और पर्यटक अक्सर नदी किनारे या चट्टानों पर फंस जाते हैं। समय पर नाविक न पहुंचेंतो बड़ी दुर्घटना हो सकती है।

    सूचना व्यवस्था पर सवाल


    स्थानीय लोगों का आरोप है कि बांध प्रबंधन केवल यह कहकर जिम्मेदारी से बच जाता है कि प्रशासन को सूचना दे दी गई है। लेकिन कितना पानी छोड़ा जाएगाजलस्तर कितनी तेजी से बढ़ेगा और निचले इलाकों पर इसका क्या असर पड़ेगाइसकी स्पष्ट जानकारी न तो निर्माण कंपनियों को मिलती है और न ही आम जनता को।इस मामले में ओंकारेश्वर बांध परियोजना के प्रमुख एवं महाप्रबंधक धीरेंद्र दीक्षित से संपर्क करने की कोशिश की गईलेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हुआ। इससे बांध प्रबंधन की जवाबदेही पर और सवाल खड़े हो गए हैं। यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी ओंकारेश्वर क्षेत्र में श्रद्धालु और स्थानीय लोग चट्टानों पर फंस चुके हैंजिन्हें नाविकों ने बचाया था। बावजूद इसकेव्यवस्था में कोई ठोस सुधार नजर नहीं आ रहा है। यदि समय रहते प्रभावी सूचना प्रणाली लागू नहीं की गईतो भविष्य में किसी बड़ी त्रासदी से इनकार नहीं किया जा सकता।

  • कोहरे की गिरफ्त में मध्यप्रदेश, दिन में भी ठिठुरन, ट्रेनों और सड़कों की रफ्तार थमी..

    कोहरे की गिरफ्त में मध्यप्रदेश, दिन में भी ठिठुरन, ट्रेनों और सड़कों की रफ्तार थमी..


    नई दिल्ली । मध्यप्रदेश में एक बार फिर मौसम ने करवट ले ली है। पश्चिमी विक्षोभ के असर से वातावरण में नमी बढ़ गई है, जिसके चलते प्रदेशभर में घने कोहरे की चादर छाई हुई है। हालात ऐसे हैं कि ठंड का असर सिर्फ सुबह-शाम ही नहीं, बल्कि दिन के समय भी साफ महसूस किया जा रहा है। कई जिलों में दिन का तापमान सामान्य से नीचे चला गया है और शीतल दिन जैसी स्थिति बन गई है।

    शनिवार को प्रदेश के 11 से 12 शहरों में अधिकतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया गया। दतिया और रीवा में पूरे दिन ठंड का असर बना रहा। ग्वालियर में सुबह के समय अति घना कोहरा छाया रहा, जबकि इंदौर और जबलपुर में घने कोहरे के कारण दृश्यता विजिबिलिटी काफी कम हो गई। राजधानी भोपाल और नर्मदापुरम में मध्यम कोहरा दर्ज किया गया।मौसम विभाग के अनुसार, इस सर्दी के सीजन में यह कोहरे का अब तक का सबसे लंबा दौर माना जा रहा है। भोपाल में शनिवार को दिनभर कोहरा बना रहा, जिससे धूप के दर्शन भी मुश्किल हो गए। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अगले दो से तीन दिनों तक प्रदेश में इसी तरह का मौसम बने रहने की संभावना है। कोहरे के साथ-साथ शीतलहर का असर भी तेज हो सकता है, जिससे रात के तापमान में और गिरावट आ सकती है।

    इंदौर में विजिबिलिटी शून्य के करीब

    शनिवार रात इंदौर में हालात सबसे ज्यादा खराब नजर आए। घने कोहरे के कारण विजिबिलिटी लगभग शून्य हो गई, जिससे सड़कों पर चल रहे वाहन एक-दूसरे को मुश्किल से देख पा रहे थे। इसका सीधा असर यातायात पर पड़ा और वाहनों की रफ्तार बेहद धीमी हो गई। कई जगहों पर जाम जैसे हालात भी बने।

    रेल यातायात पर पड़ा असर


    कोहरे का असर रेल यातायात पर भी साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। दिल्ली की ओर से भोपाल, इंदौर और उज्जैन आने वाली मालवा एक्सप्रेस, सचखंड एक्सप्रेस, शताब्दी एक्सप्रेस सहित एक दर्जन से अधिक ट्रेनें 30 मिनट से लेकर 6 घंटे तक की देरी से चल रही हैं। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, रविवार को भी ट्रेनों के लेट होने की आशंका बनी हुई है, जिससे यात्रियों की परेशानियां बढ़ सकती हैं।

    इन जिलों में ज्यादा असर


    रविवार को भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर के अलावा श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, राजगढ़, विदिशा, रायसेन, सागर, दमोह, टीकमगढ़, निवाड़ी, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, उमरिया, कटनी और मैहर समेत कई जिलों में कोहरे का असर बना हुआ है।

    अगले दो दिन का अलर्ट


    मौसम विभाग ने आगामी दो दिनों के लिए भी घने कोहरे की चेतावनी जारी की है।5 जनवरी को ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, मैहर, रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में घना कोहरा रहने की संभावना है।6 जनवरी को भी शिवपुरी, श्योपुर, ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में कोहरे का असर बना रह सकता है।

    क्यों बन रहा है ऐसा मौसम 


    मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा के अनुसार, उत्तर भारत के बड़े हिस्से में इस समय कोहरे की स्थिति बनी हुई है। राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तरप्रदेश और बिहार में भी इसी तरह का मौसम है। पश्चिमी विक्षोभ के गुजरने के बाद वातावरण में बची नमी के कारण कोहरा लगातार बन रहा है। हालांकि एक-दो दिन बाद इसकी तीव्रता में कुछ कमी आने की संभावना जताई गई है।

  • भोपाल हॉस्पिटल कांड: युवक की मौत पर परिजनों का हंगामा, डॉक्टर नदारद, नर्स करती रही CPR

    भोपाल हॉस्पिटल कांड: युवक की मौत पर परिजनों का हंगामा, डॉक्टर नदारद, नर्स करती रही CPR




    भोपाल।
    भोपाल के हबीबगंज थाना क्षेत्र स्थित अक्षय अस्पताल में इलाज के दौरान 32 वर्षीय युवक की मौत के बाद शनिवार देर रात जमकर हंगामा हुआ। मृतक के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए तोड़फोड़ की। इस बीच एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें एक नर्स मरीज को सीपीआर देकर रिवाइव करने की कोशिश करती दिख रही है, जबकि वार्ड में कोई डॉक्टर मौजूद नजर नहीं आ रहा। यही वीडियो परिजनों ने रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर साझा किया है।

    जानकारी के अनुसार, बरखेड़ी निवासी विशाल जोगी को इलाज के लिए अक्षय अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शनिवार शाम से ही उसकी हालत लगातार बिगड़ने लगी थी। परिजनों का आरोप है कि उन्होंने कई बार अस्पताल स्टाफ से सीनियर डॉक्टर को बुलाने की मांग की, लेकिन लंबे समय तक कोई विशेषज्ञ डॉक्टर मौके पर नहीं पहुंचा। देर रात विशाल की मौत हो गई, जिसके बाद परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा।

    मृत्यु से पहले का जो वीडियो सामने आया है, उसमें साफ देखा जा सकता है कि अस्पताल के बेड पर लेटे विशाल को एक नर्स सीपीआर देकर बचाने का प्रयास कर रही है। आसपास मौजूद परिजन रोते-बिलखते दिखाई दे रहे हैं और वीडियो बना रहा व्यक्ति अस्पताल में डॉक्टरों की गैरमौजूदगी का आरोप लगा रहा है। परिजनों का कहना है कि गंभीर स्थिति में भी अस्पताल में सिर्फ नर्स ही मौजूद थी, जबकि डॉक्टर और अन्य स्टाफ नजर नहीं आए।

    वहीं, अस्पताल स्टाफ की ओर से इस मामले में अलग ही दावा किया गया है। स्टाफ का कहना है कि विशाल की हालत पहले से ही बेहद गंभीर थी और इसकी जानकारी परिजनों को समय रहते दे दी गई थी। डॉक्टरों ने मरीज को बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन हालत ज्यादा बिगड़ने के कारण उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक, मौत के बाद करीब 30 से ज्यादा लोग एक साथ अस्पताल में आ गए और हंगामा करने लगे।

    अस्पताल स्टाफ का यह भी कहना है कि परिजनों और उनके साथ आए लोगों ने जमकर तोड़फोड़ की।

    गुस्साए लोगों ने अस्पताल के कांच, कुर्सियां, बोर्ड और अन्य सामान तोड़ दिए। हालात बेकाबू होते देख अस्पताल का स्टाफ और गार्ड अपनी जान बचाने के लिए मौके से निकल गए। स्टाफ के अनुसार, उस वक्त अस्पताल में सिर्फ नाइट ड्यूटी पर तैनात दो सफाई कर्मचारी ही मौजूद रह गए थे।

    हंगामे की सूचना मिलने पर पुलिस को बुलाया गया। हबीबगंज थाना पुलिस के अनुसार, मृतक के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि पीएम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का खुलासा हो सकेगा और उसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल इस घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन और परिजनों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच सवाल यह उठ रहा है कि गंभीर मरीज की हालत में डॉक्टरों की मौजूदगी क्यों नहीं दिखी और क्या इलाज में वास्तव में लापरवाही बरती गई। अब पूरे मामले पर पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच के बाद ही स्थिति साफ हो पाएगी।

  • नर्मदा जल में सीवर की मिलावट का खुलासा, खतरनाक बैक्टीरिया मिलने से बढ़ा हैजा-डायरिया का खतरा

    नर्मदा जल में सीवर की मिलावट का खुलासा, खतरनाक बैक्टीरिया मिलने से बढ़ा हैजा-डायरिया का खतरा


    नई दिल्ली। इंदौर शहर से एक बेहद गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है। भागीरथपुरा क्षेत्र में पिछले कई दिनों से सप्लाई हो रहे नर्मदा जल को लेकर की गई जांच में चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए हैं। सरकारी और निजी प्रयोगशालाओं में लिए गए पानी के सैंपल्स में कई खतरनाक और जानलेवा बैक्टीरिया पाए गए हैं जिससे इलाके में हैजा डायरिया और अन्य पेट संबंधी बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ गया है।लैब रिपोर्ट के अनुसार पानी में फीकल कॉलिफॉर्म ई-कोलाई विब्रियो कोलेरी स्यूडोमोनास क्लेबसेला सिट्रोबैक्टर और प्रोटोजोआ जैसे सूक्ष्म जीव मौजूद हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इन बैक्टीरिया की मौजूदगी इस बात का सीधा संकेत है कि पीने के पानी की पाइपलाइन में सीवर का गंदा पानी मिल रहा है। इसी कारण पानी को जांच रिपोर्ट में अनसैटिस्फैक्ट्री यानी पूरी तरह असंतोषजनक श्रेणी में रखा गया है।

    स्थानीय लोगों के अनुसार पिछले कुछ दिनों से इलाके में लगातार लोग बीमार पड़ रहे हैं। कई घरों में उल्टी-दस्त पेट दर्द और बुखार की शिकायतें सामने आई हैं। इसी के बाद स्वास्थ्य विभाग ने पानी की सैंपलिंग शुरू की। रविवार से लगातार पानी के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे जा रहे हैं। यह सैंपल्स शहर के 100 से अधिक कॉलेजों और निजी अस्पतालों की लैब में भी भेजे गए जहां रिपोर्ट ने स्थिति को गंभीर बताया है।हालांकि स्वास्थ्य विभाग की ओर से अब तक इन रिपोर्ट्स को सार्वजनिक नहीं किया गया है। सूत्रों के मुताबिक विभाग के पास मौजूद रिपोर्ट में साफ तौर पर लिखा है कि यह पानी न तो पीने योग्य है और न ही घरेलू उपयोग के लिए सुरक्षित। इसके बावजूद आधिकारिक तौर पर कोई विस्तृत बयान सामने नहीं आया है जिससे लोगों में नाराजगी और डर दोनों बढ़ रहे हैं।

    इसी बीच कलेक्टर शिवम वर्मा ने क्षेत्र का दौरा किया और लोगों को भरोसा दिलाने के लिए मौके पर पानी पीकर दिखाया। लेकिन संक्रमण के समय लिए गए पानी की लैब कल्चर रिपोर्ट कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि सीपेज के जरिए सीवर का पानी सप्लाई लाइन में मिल रहा है जिससे यह स्थिति पैदा हुई है।रिपोर्ट में विब्रियो कोलेरी बैक्टीरिया की मौजूदगी विशेष रूप से चिंता का विषय है क्योंकि यही बैक्टीरिया हैजा फैलाने के लिए जिम्मेदार होता है। समय पर इलाज न मिलने पर यह बीमारी जानलेवा भी साबित हो सकती है। इसके अलावा ई-कोलाई और फीकल कॉलिफॉर्म की मौजूदगी यह दर्शाती है कि पानी में मलजनित प्रदूषण है जो किसी भी हालत में सुरक्षित नहीं माना जा सकता।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कमजोर इम्युनिटी वाले लोग बुजुर्ग और बच्चे इस दूषित पानी से सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं। स्यूडोमोनास और क्लेबसेला जैसे बैक्टीरिया फेफड़ों मूत्र मार्ग और खून में संक्रमण का खतरा बढ़ा सकते हैं।फिलहाल जरूरत इस बात की है कि जल सप्लाई सिस्टम की तत्काल जांच कर ली जाए पाइपलाइनों की मरम्मत की जाए और लोगों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जाए। साथ ही प्रभावित इलाकों में मेडिकल कैंप और जागरूकता अभियान चलाने की भी सख्त जरूरत है ताकि किसी बड़े स्वास्थ्य संकट को समय रहते रोका जा सके।

  • तीन फीसदी भी स्वयंसेवक बनें तो समाज में आ सकता है सकारात्मक बदलाव सुनील आंबेकर

    तीन फीसदी भी स्वयंसेवक बनें तो समाज में आ सकता है सकारात्मक बदलाव सुनील आंबेकर


    नई दिल्ली । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ RSS के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने रविवार को ‘दिल्ली महोत्सव 2026’ में हिस्सा लिया और संघ के 100 साल की यात्रा पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि यदि समाज के महज तीन फीसदी लोग भी स्वयंसेवक बनेंतो इससे समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।

    सुनील आंबेकर ने कहा कि संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार का जीवन और कार्य राष्ट्रीयता से प्रेरित था। उनका मानना था कि स्वतंत्रता के बाद भी देश की स्वाधीनता कायम रहनी चाहिए और राष्ट्र को समृद्धि की दिशा में ले जाना चाहिए। हेडगेवार ने इसी उद्देश्य से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की थीताकि हिंदू समाज को एकजुट किया जा सके और देश में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सके।

    संघ की शाखाओं का महत्व

    आंबेकर ने संघ की शाखाओं के बारे में विस्तार से बतायाजो जीवन के मूल्यों को सिखाने का एक मंच प्रदान करती हैं। एक घंटे की शाखाओं में स्थानीय लोग इकट्ठा होते हैंव्यायाम करते हैंचर्चाएं होती हैं और महापुरुषों के जीवन को याद किया जाता है। उन्होंने कहा कि शाखाओं में अनुशासन का अभ्यास कराया जाता हैऔर भगवा ध्वज के सामने रोज संकल्प लिया जाता है कि मैं ऐसा व्यक्ति बनूं जैसा देश और समाज के लिए आवश्यक है। आंबेकर ने बताया कि देशभर में रोजाना 87,000 से अधिक शाखाएं लगती हैंजबकि 32,000 शाखाएं सप्ताह में एक बार होती हैं। इसके अलावासुबह और शाम के समय भी विभिन्न शाखाएं आयोजित होती हैं।

    संघ की विचारधारा और समाज में बदलाव

    सुनील आंबेकर ने संघ की विचारधारा और उसके कार्यों पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि संघ के विचारों को कई लोग मानते हैंजबकि अन्य लोग उसके कार्यों में सहयोग करते हैं। डॉ. हेडगेवार ने कहा था कि यदि शहरों और गांवों में एक से तीन फीसदी लोग भी स्वयंसेवक बनते हैंतो समाज में वह सकारात्मक वातावरण उत्पन्न किया जा सकता हैजिसे संघ बनाना चाहता है।

    आंबेकर ने यह भी जोड़ा कि संघ का संगठन और शाखाएं देश के विभिन्न हिस्सों में अपने कार्यों को लेकर सक्रिय हैं और आने वाले समय में जब तक देश को इसकी आवश्यकता होगीसंघ का यह प्रयास जारी रहेगा।सुनील आंबेकर का यह बयान संघ के कार्यों और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के महत्व को उजागर करता है। उन्होंने स्वयंसेवकों की भूमिका पर जोर देते हुए यह संदेश दिया कि समाज को बेहतर बनाने के लिए हमें अपने व्यक्तिगत और सामाजिक जिम्मेदारियों को निभाने की आवश्यकता है।

  • 72वीं सीनियर नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप जम्मू-कश्मीर के खिलाड़ी वाराणसी में स्वागत से खुश

    72वीं सीनियर नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप जम्मू-कश्मीर के खिलाड़ी वाराणसी में स्वागत से खुश


    वाराणसी । वाराणसी में 72वीं सीनियर नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप का आयोजन काशी के सिगरा स्टेडियम में चल रहा है। इसमें देशभर की 58 संस्थाओं की 1,000 से ज्यादा टीमों के खिलाड़ी हिस्सा लेने पहुंचे हैं। खासकर जम्मू-कश्मीर की महिला टीम ने यहां अपने स्वागत को लेकर काफी खुशी व्यक्त की।

    जम्मू-कश्मीर महिला टीम के मुख्य कोच बलविंदर सिंह जंबाल ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा”सरकार और हमारी एसोसिएशन के सहयोग से जम्मू-कश्मीर में खेल को बढ़ावा मिला है। यही वजह है कि हम यहां तक पहुंचे हैं। वाराणसी में हमें जो स्वागत मिला हैवह बहुत दिलचस्प और प्रेरणादायक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र होने के नातेयह धार्मिक नगरी है और हम यहां आकर बहुत खुश हैं।

    टीम की सदस्य सदफ मंजूर ने बताया”यहां प्रतियोगिता काफी कठिन हैक्योंकि देश भर से मजबूत टीमें आई हैं। हम भी अपनी पूरी कोशिश करेंगे।” उन्होंने कहा कि यह उनका पहला मौका है जब वे वाराणसी आई हैं और यहां के लोगों ने उन्हें दिल से स्वागत कियाजिसके लिए वे आभारी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पहले लड़कियों के लिए खेल के क्षेत्र में आना बहुत मुश्किल थालेकिन केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों से अब जम्मू-कश्मीर में लड़कियों की खेलों में भागीदारी बढ़ी है।

    सदफ ने हिजाब पहनकर खेलने पर भी चर्चा की और कहा”हम हिजाब पहनकर खेलते हैं और हमें कोई समस्या नहीं होती। हमारी संस्कृति और पहनावे का सम्मान किया जाता है।कश्मीर की आयत ने भी प्रतियोगिता की चुनौतीपूर्ण प्रकृति को स्वीकार किया और कहा”यह राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता हैऔर हम अच्छी सुविधाओं के लिए सरकार का धन्यवाद करते हैं। हमें यहां बहुत अच्छा लगाऔर स्वागत बहुत अच्छा हुआ।

    चैंपियनशिप का आयोजन

    यह चैंपियनशिप 4 जनवरी से 11 जनवरी तक चलेगी। उद्घाटन कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्चुअली किया जाएगा।

  • शक्ति कपूर का खुलासा: ऑनस्क्रीन सीन देखकर थिएटर से उठकर चले गए थे माता-पिता

    शक्ति कपूर का खुलासा: ऑनस्क्रीन सीन देखकर थिएटर से उठकर चले गए थे माता-पिता


    नई दिल्ली। बॉलीवुड के लीजेंडरी एक्टर शक्ति कपूर ने हाल ही में अपने करियर और परिवार के साथ जुड़ी एक दिलचस्प याद साझा की। शक्ति कपूर ने बताया कि उनके माता-पिता को उनके नेगेटिव किरदार और फिल्मों में महिलाओं के साथ निभाए गए सीन देखकर अक्सर शर्मिंदगी महसूस होती थी। एक बार तो ऐसा हुआ कि जब शक्ति कपूर के पहले ही सीन में उन्होंने एक लड़की का दुपट्टा खींचा, तो उनके माता-पिता थिएटर से उठकर बाहर चले गए।

    थिएटर में माता-पिता का रिएक्शन
    शक्ति कपूर ने अल्फा नियॉन स्टूडियोज के साथ बातचीत में बताया, मेरी दो बड़ी फिल्में रिलीज़ हो चुकी थीं और एक और फिल्म ‘इंसानियत के दुश्मन’ रिलीज़ हुई। मैंने अपने माता-पिता को फिल्म देखने के लिए बुलाया। लेकिन पहले ही सीन में मुझे एक लड़की का दुपट्टा खींचते देखा तो मेरे पापा ने तुरंत मेरी मां से कहा कि बाहर चले जाएं। उन्होंने कहा, ‘यह पहले बाहर ऐसा करता था और अब बड़े पर्दे पर भी कर रहा है। मैं यह फिल्म नहीं देखना चाहता।’”

    माता-पिता का सवाल: गुंडों के रोल क्यों?
    शक्ति कपूर ने आगे बताया कि उनके माता-पिता ने उनसे पूछा, “तुम गुंडों के रोल क्यों कर रहे हो? तुम्हें अच्छे इंसान के किरदार निभाने चाहिए। हेमा मालिनी और जीनत अमान जैसी एक्ट्रेस के साथ क्यों ऐसा काम कर रहे हो? लेकिन शक्ति कपूर ने अपनी राह चुनी। उन्होंने कहा, “मैंने उनसे कहा कि आपने मुझे जन्म दिया है और सिर्फ यही चेहरा दिया है। इस चेहरे को देखकर कोई मुझे अच्छे इंसान या हीरो का रोल नहीं देगा।

    मैं अपनी पहचान के अनुसार ही रोल चुनता हूँ।”

    बेटी श्रद्धा कपूर को भी होती थी शर्मिंदगी
    शक्ति कपूर की बेटी श्रद्धा कपूर, जो आज बॉलीवुड की सफल एक्ट्रेस हैं, भी बचपन में अपने पिता के निगेटिव रोल्स से शर्मिंदा हुआ करती थीं। श्रद्धा ने एक इंटरव्यू में कहा, “जब मैं छोटी थी, तो उनके विलेन रोल्स देखकर मैं नाराज हो जाती थी। मुझे यह पसंद नहीं आता था, लेकिन मेरी मां ने समझाया कि यह सिर्फ एक्टिंग है। अब मैं समझ गई हूँ कि पिता अपनी कला के प्रति कितने समर्पित हैं।”

    शक्ति कपूर के यादगार निगेटिव रोल
    1990 के दशक में शक्ति कपूर ने कई यादगार निगेटिव किरदार निभाए, जिन्होंने उन्हें बॉलीवुड में अलग पहचान दिलाई।

    भले ही उनके माता-पिता को शुरुआती दौर में ये रोल स्वीकार्य नहीं लगे, लेकिन शक्ति कपूर ने अपनी कला और अभिनय के दम पर नेगेटिव किरदारों में भी दर्शकों का दिल जीत लिया।

    शक्ति कपूर का यह खुलासा दर्शाता है कि बॉलीवुड में संघर्ष और परिवार की अपेक्षाओं के बीच संतुलन बनाए रखना कितना चुनौतीपूर्ण होता है। माता-पिता का विरोध, बेटी की नाराजगी और आलोचना के बावजूद शक्ति कपूर ने अपनी कला और पहचान बनाए रखी। यह कहानी दर्शकों को यह भी याद दिलाती है कि सच्ची प्रतिभा और आत्मविश्वास के सामने किसी भी आलोचना का असर कम होता है।