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  • सीजफायर में फिर फेल हुए डोनाल्ड ट्रंप, कंबोडिया ने बताया थाई सेना अभी भी हमलावर, बमबारी जारी

    सीजफायर में फिर फेल हुए डोनाल्ड ट्रंप, कंबोडिया ने बताया थाई सेना अभी भी हमलावर, बमबारी जारी


    नई दिल्‍ली । दुनिया में किन्हीं दो देशों के बीच युद्ध शुरू हो जाए और उसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump)दखल देने की कोशिश न करें ऐसा होना मुश्किल है। इस साल की शुरुआत में ट्रंप के दबाव में सीजफायर(Ceasefire) करने के लिए राजी हुए थाईलैंड (Thailand)और कंबोडिया (Cambodia)एक बार फिर से युद्ध में उलझ गए थे। हालांकि, ट्रंप ने एक बार फिर से सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि दोनों देश फिर से सीजफायर करने के लिए राजी हो गए हैं। ट्रंप के इस बयान के बाद भी थाईलैंड और कंबोडिया के नेताओं ने एक-दूसरे पर बमबारी जारी रखने का आरोप लगाया है।

    इस साल की शुरुआत में हुई भीषण लड़ाई के बाद दोनों ही देश मलेशिया और ट्रंप की मध्यस्थता के बाद सीजफायर पर पहुंचे थे। इसके बाद भी दोनों के बीच में हल्की झड़पें जारी थी। जुलाई में हुए इस सीजफायर में ट्रंप ने दोनों देशों को व्यापारिक विशेषाधिकार समाप्त करने की धमकी दी थी। इसके बाद दोनों ही देश शांति के लिए मान गए थे। ट्रंप ने इस युद्ध को सुलझाने का दावा करते हुए इसे भी अपने नोबेल जीतने की कोशिश में शामिल कर लिया था। लेकिन अभी फिर से इन दोनों देशों के बीच में हालात जरूरत से ज्यादा बिगड़ गए इसके बाद ट्रंप को दोबारा दोनों देशों के नेताओं से बात करनी पड़ी।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक थाई प्रधानमंत्री अनुतिन चर्नविरकुल और कंबोडियाई प्रधानमंत्री हुन मानेट के साथ बातचीत के बाद सोशल मीडिया पर यह घोषणा की। ट्रंप ने अपने ‘ट्रुथ सोशल’ हैंडल पर पोस्ट में कहा, ‘‘दोनों नेता आज शाम से हर तरह की गोलीबारी रोकने और मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम की सहायता से मेरे साथ हुए मूल शांति समझौते को बहाल करने पर सहमत हो गए हैं। दोनों देश शांति और अमेरिका के साथ निरंतर व्यापार के लिए तैयार हैं।’’

    ट्रंप के इस दावे के बाद कंबोडिया की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया कि थाईलैंड अभी भी उनकी सीमा पर बम बरसा रहा है। कंबोडियाई रक्षा मंत्रायल की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि 13 दिसंबर 2025 को थाई सेना ने दो एफ-16 लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल कर कई ठिकानों पर सात बम गिराए। थाई सेना ट्रंप की घोषणा के बाद भी बमबारी बंद नहीं कर रहा है।

  • उच्च शिक्षा में बड़े बदलाव की तैयारी, UGC, AICTE और NCTE की जगह सिंगल रेगुलेटर को कैबिनेट ने दी मंजूरी

    उच्च शिक्षा में बड़े बदलाव की तैयारी, UGC, AICTE और NCTE की जगह सिंगल रेगुलेटर को कैबिनेट ने दी मंजूरी


    नई दिल्‍ली । देश के हायर एजुकेशन(Higher Education) सिस्टम में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। केंद्रीय मंत्रिमंडल(Union Cabinet) ने यूजीसी,(UGC,) एआईसीटीई(AICTE) और एनसीटीई ( एनसीटीई )जैसे निकायों की जगह उच्च शिक्षा नियामक निकाय स्थापित करने वाले विधेयक को शुक्रवार को मंजूरी दे दी। प्रस्तावित विधेयक जिसे पहले भारत का उच्च शिक्षा आयोग (एचईसीआई) विधेयक नाम दिया गया था, अब विकसित भारत शिक्षा अधीक्षण विधेयक के नाम से जाना जाएगा। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में प्रस्तावित एकल उच्च शिक्षा नियामक का मकसद विश्वविद्यालय(university) अनुदान आयोग (यूजीसी), अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) की जगह लेना है।

    अधिकारी ने बताया, विकसित भारत शिक्षा अधीक्षण की स्थापना से संबंधित विधेयक को मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी है। यूजीसी गैर-तकनीकी उच्च शिक्षा क्षेत्र की, जबकि एआईसीटीई तकनीकी शिक्षा की देखरेख करती है और एनसीटीई शिक्षकों की शिक्षा के लिए नियामक निकाय है।

    मेडिकल-लॉ कॉलेज दायरे में नहीं
    प्रस्तावित आयोग को उच्च शिक्षा के एकल नियामक के रूप में स्थापित किया जाएगा, लेकिन मेडिकल और लॉ कॉलेज इसके दायरे में नहीं आएंगे। इसके तीन प्रमुख कार्य प्रस्तावित हैं-विनियमन, मान्यता और व्यावसायिक मानक निर्धारण। वित्त पोषण, जिसे चौथा क्षेत्र माना जाता है, अभी तक नियामक के अधीन प्रस्तावित नहीं है।

    HECI के अंतर्गत चार वर्टिकल (प्रभाग) होंगे
    – राष्ट्रीय उच्च शिक्षा विनियामक परिषद – चिकित्सा और विधि शिक्षा को छोड़कर सभी क्षेत्रों का नियमन करेगी

    – राष्ट्रीय प्रत्यायन परिषद – गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए प्रत्यायन ( एक्रीडिएशन) निकाय

    – सामान्य शिक्षा परिषद (जनरल एजुकेशन काउंसिल )- शिक्षण के तौर तरीके और मानक निर्धारित करेगी

    – उच्च शिक्षा अनुदान परिषद – फंड से जुड़े मामले देखेगी (सरकार का नियंत्रण बना रहेगा)

    क्या होगा फायदा
    – एक रिपोर्ट के मुताबिक अधिकारियों ने कहा कि नए फ्रेमवर्क से गवर्नेंस सरल होगी। रेगुलेटर का ओवरलैप कम होगा। सरकारी और प्राइवेट संस्थानों में शैक्षणिक गुणवत्ता तथा सीखने के रिजल्ट पर ज्यादा फोकस होगा। शिक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, ‘इस विभाजन का उद्देश्य हितों के टकराव को रोकना, सूक्ष्म प्रबंधन (माइक्रोमैनेजमेंट) को कम करना और एक अधिक पारदर्शी नियामकीय ढांचा तैयार करना है।’

    – प्रस्तावित कानून के तहत उच्च शिक्षा के कामकाज का व्यवस्थित तरीके से बंटवारा होगा। रेगुलेशन, एक्रीडिएशन, पढ़ने पढ़ाने के मानक सेट करना और फंड, इन सभी कार्यों को अलग-अलग वर्टिकल्स के माध्यम से संचालित किया जाएगा। इससे किसी एक संस्था में लंबे समय से चली आ रही बहु-शक्तियों की केंद्रीकरण की स्थिति समाप्त होगी।

    – नए विधेयक के समर्थकों का तर्क है कि यह उच्च शिक्षा क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक खामियों को दूर करता है। एक-दूसरे के अधिकार क्षेत्रों से टकराने वाले कई नियामक निकायों के कारण अकसर विरोधाभासी नियम बनते रहे हैं, मंजूरियों में देरी हुई है। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (पूर्व में कानपुर विश्वविद्यालय) के कुलपति प्रोफेसर विनय पाठक ने कहा, ‘सिंगल रेगुलटर शैक्षणिक मानकों में सामंजस्य ला सकता है, समान गुणवत्ता मानक सुनिश्चित कर सकता है और विश्वविद्यालयों को पाठ्यक्रम, शिक्षण पद्धति और शोध में नवाचार के लिए अधिक स्वतंत्रता दे सकता है, साथ ही परिणामों के प्रति जवाबदेह भी बनाए रखेगा।’

    2018 में भी इस बिल का तैयार हुआ था ड्राफ्ट
    यूनिफाइड रेगुलेटर (एक ही संस्था द्वारा पूरी उच्च शिक्षा की निगरानी) का विचार कई सालों से चल रहा है। एचईसीआई बिल का पहला ड्राफ्ट 2018 में आया था। उस समय इसका मकसद यूजीसी को खत्म करके एक नया केंद्रीय आयोग बनाना था, लेकिन उस वक्त राज्य स्तर पर इसका विरोध हुआ। राज्य सरकारों ने कहा कि इससे सब कुछ केंद्र सरकार के नियंत्रण में आ जाएगा। इस वजह से इस बिल पर काम आगे नहीं बढ़ा। अब जो नया बिल लाया जा रहा है, वह एनईपी 2020 में दिए गए विजन को लागू करने की कोशिश है। एनईपी 2020 कहता है कि उच्च शिक्षा की व्यवस्था को आधुनिक और सरल बनाने के लिए एक ही रेगुलेटर होना चाहिए, जो तकनीकी शिक्षा और शिक्षक शिक्षा जैसी सभी चीजों को देखे।

  • मध्य प्रदेश में पदोन्नति और ओबीसी आरक्षण विवाद कर्मचारियों और भर्तियों पर गहरा असर

    मध्य प्रदेश में पदोन्नति और ओबीसी आरक्षण विवाद कर्मचारियों और भर्तियों पर गहरा असर



    भोपाल ।
    मध्य प्रदेश में पदोन्नति और ओबीसी आरक्षण जैसे मुद्दे लंबे समय से विवादों में घिरे हुए हैं। इन मुद्दों को लेकर न केवल सरकारी कर्मचारियों का भविष्य अंधकारमय हो गया हैबल्कि राज्य में सरकारी नौकरी और भर्ती प्रक्रियाएं भी प्रभावित हो रही हैं। विशेष रूप सेराज्य सरकार की ओर से समय-समय पर किए गए प्रयासों के बावजूद इन मुद्दों का समाधान नहीं हो सका है। यह स्थिति राज्य के कर्मचारियों के लिए बेहद कठिन और निराशाजनक बन गई है।

    पदोन्नति का मुद्दा

    मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के लिए पदोन्नति एक बड़ा मुद्दा बन चुका है। पिछले कुछ वर्षों मेंपदोन्नति से संबंधित मामलों ने अदालतों का रुख किया है और इन विवादों के कारण राज्य सरकार को कई बार अपने फैसले पर पुनर्विचार करना पड़ा है। नए पदोन्नति नियमों को लागू किया गया थालेकिन ओबीसी आरक्षण के मामले में कानूनी अड़चनें सामने आ गईंजिससे यह मामला फिर से अदालतों में चला गया। इसके परिणामस्वरूपराज्य के 80 हजार से अधिक सरकारी कर्मचारी बिना पदोन्नति के ही सेवानिवृत्त हो गए। इस स्थिति ने कर्मचारियों के बीच असंतोष और निराशा को बढ़ावा दिया है।

    ओबीसी आरक्षण का मुद्दा

    ओबीसी आरक्षण भी एक बड़ा विवादित मुद्दा बन चुका है। मध्य प्रदेश में ओबीसी समुदाय के लिए 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया था। यह कदम 2019 के लोकसभा चुनावों में राजनीतिक लाभ के लिए उठाया गया था। हालांकिइस फैसले के बाद भी ओबीसी को आरक्षण का लाभ नहीं मिल सका हैक्योंकि मामला कोर्ट में विचाराधीन है। कोर्ट में लंबित होने के कारण राज्य में कई पदों पर भर्ती प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। इससे न केवल ओबीसी समुदायबल्कि सामान्य वर्ग और अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग के कर्मचारियों के लिए भी असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

    भर्तियों पर प्रभाव

    पदोन्नति और आरक्षण के विवादों के चलते सरकारी भर्तियों पर भी गहरा असर पड़ा है। कई पदों पर भर्ती प्रक्रिया ठप पड़ी हुई है और उम्मीदवारों को इसका नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसके परिणामस्वरूप राज्य में सरकारी सेवा में रिक्तियों की संख्या में वृद्धि हो गई हैलेकिन भर्ती प्रक्रिया की अड़चनों के कारण इन रिक्तियों को भरा नहीं जा सका है।

    राजनीतिक और प्रशासनिक पहल

    मध्य प्रदेश की कमल नाथ सरकार ने 2019 में ओबीसी के लिए आरक्षण की सीमा बढ़ाने का कदम उठाया थालेकिन कोर्ट में मामला लंबित होने के कारण इसका कोई ठोस प्रभाव नहीं पड़ा। राज्य सरकार ने यह दावा किया था कि यह कदम ओबीसी समुदाय के लिए विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैलेकिन कोर्ट के फैसले से पहले यह योजना लागू नहीं हो पाई। इसके अलावापदोन्नति के नए नियमों को लेकर भी प्रशासनिक स्तर पर निरंतर प्रयास किए गएलेकिन कानूनी अड़चनों के कारण यह मामला अब भी उलझा हुआ है।

    भविष्य की दिशा

    पदोन्नति और आरक्षण जैसे मुद्दों का समाधान करना राज्य सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण हो गया है। राज्य सरकार को इन मुद्दों पर उच्च न्यायालय में लंबित मामलों को जल्द सुलझाने के लिए रणनीति बनानी होगी। साथ हीकर्मचारियों और बेरोजगार युवाओं को यह विश्वास दिलाना होगा कि सरकार उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुलझाने के लिए कदम उठा रही है।राज्य सरकार को इन मुद्दों का हल निकालने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्तिकानूनी विशेषज्ञता और प्रशासनिक दक्षता का संयोजन करना होगा।

    अगर ये विवाद जल्द नहीं सुलझेतो कर्मचारियों में असंतोष और बेरोजगार युवाओं में निराशा का माहौल बन सकता हैजो राज्य की सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है आखिरकारयह स्थिति मध्य प्रदेश के विकास की गति को प्रभावित कर रही है और राज्य सरकार को इन जटिल मुद्दों का समाधान शीघ्रता से करना होगाताकि राज्य में एक स्थिर और समृद्ध प्रशासनिक माहौल बन सके।

  • वर्ल्ड चैंपियन बनीं MP की ब्लाइंड बेटियां, लेकिन सम्मान से वंचित: न नौकरी, न इनाम-क्यों हो रहा दिव्यांग खिलाड़ियों से भेदभाव?

    वर्ल्ड चैंपियन बनीं MP की ब्लाइंड बेटियां, लेकिन सम्मान से वंचित: न नौकरी, न इनाम-क्यों हो रहा दिव्यांग खिलाड़ियों से भेदभाव?


    मध्य प्रदेश।  भारत ने जब पहला ब्लाइंड विमेंस टी-20 वर्ल्ड कप जीता तो यह सिर्फ एक खेल जीत नहीं थी बल्कि जज़्बे संघर्ष औरआत्मनिर्भरता की ऐतिहासिक कहानी थी। इस जीत में मध्य प्रदेश की तीन बेटियों-सुनीता सराठे नर्मदापुरम सुषमापटेल दमोह और दुर्गा येवले बैतूल-ने अहम भूमिका निभाई। लेकिन विडंबना देखिए कि वर्ल्ड चैंपियन बनने के बावजूदइन बेटियों को अपने ही राज्य में अब तक न सम्मान मिला न पुरस्कार और न ही नौकरी की कोई घोषणा।इस ऐतिहासिक टूर्नामेंट में भारतीय टीम पूरे सफर में अजेय रही। फाइनल मुकाबले में भारत ने नेपाल को 7 विकेट सेहराकर ट्रॉफी पर कब्जा जमाया। खास बात यह रही कि जीत दिलाने वाले प्रदर्शन में MP की बेटियों का योगदान निर्णायक था। इसके बावजूद राज्य सरकार की चुप्पी अब सवालों के घेरे में है।

    दूसरे राज्यों ने बढ़ाया मान MP पीछे क्यों?
    जहां ओडिशा सरकार ने अपनी खिलाड़ियों को 11 लाख रुपए और सरकारी नौकरी कर्नाटक ने 10 लाख रुपए और नौकरीऔर आंध्र प्रदेश ने 15 लाख रुपए देने की घोषणा की वहीं मध्य प्रदेश सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ। हैरानी की बात यह है कि इन तीनों खिलाड़ियों का आंध्र प्रदेश में भव्य सम्मान हुआ। वहां के डिप्टी सीएम पवन कल्याण ने प्रत्येक खिलाड़ी को 5-5 लाख रुपए की पुरस्कार राशि दी। यानी दूसरे राज्य ने MP की बेटियों को वह सम्मान दिया जो उनका अपना राज्य नहीं दे सका।

    क्रांति को फोन आया इन बेटियों को अपॉइंटमेंट भी नहीं
    क्रिकेट एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड मध्य प्रदेश के जनरल सेक्रेटरी और कोच सोनू गोलकर ने नाराज़गी जताते हुए कहा कि जब महिला क्रिकेटर क्रांति गौड़ वर्ल्ड कप जीतकर लौटीं तो नेताओं के फोन आए घोषणाएं हुईं। लेकिन इन दिव्यांग बेटियों के लिए एक अपॉइंटमेंट तक नहीं मिल रहा।गोलकर ने सवाल उठाया- क्या ये बेटियां सिर्फ इसलिए नजरअंदाज की जा रही हैं क्योंकि ये दिव्यांग हैं? अगर सम्मान नहीं मिला तो यह सीधा भेदभाव है। खिलाड़ियों का दर्द: फोन पर बधाई मिली मिलने कोई नहीं आया वर्ल्ड कप में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाली ऑलराउंडर सुनीता सराठे कहती हैं मैंने दो विकेट लिए छह रन आउट किए लेकिन सरकार ने न बुलाया न सम्मानित किया। विधायक-सांसदों ने फोन पर बधाई दी पर मिलने कोई नहीं आया। दुर्गा येवले बताती हैं कि उन्होंने तीन रन आउट और दो स्टंपिंग की फिर भी सरकार की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। हम गांव से हैं परिवार हम पर निर्भर है। अगर नौकरी मिल जाए तो ज़िंदगी बदल सकती है।

    सुषमा पटेल का कहना है-
    यह हमारा पहला वर्ल्ड कप था और हम ट्रॉफी लेकर लौटे। सामान्य खिलाड़ियों को तुरंत सम्मान मिलता है लेकिन हमारे साथ भेदभाव क्यों? दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए अलग स्पोर्ट्स पॉलिसी की मांग कोच सोनू गोलकर का कहना है कि जब तक दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए अलग और ठोस स्पोर्ट्स पॉलिसी नहीं बनेगी तब तक ऐसी अनदेखी होती रहेगी। अगर क्रांति गौड़ के लिए खजाना खुल सकता है तो इन बेटियों के लिए क्यों नहीं? अब सवाल साफ है-क्या वर्ल्ड चैंपियन बनना भी दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए काफी नहीं? क्या सम्मान सिर्फ कुछ चुनिंदा चेहरों तक सीमित है?

  • 14 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी ने U19 क्रिकेट में मचाया धमाल… 14 छक्के जड़ रचा इतिहास

    14 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी ने U19 क्रिकेट में मचाया धमाल… 14 छक्के जड़ रचा इतिहास


    नई दिल्ली।
    वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Suryavanshi) अभी 14 साल के हैं, मगर उनके बल्ले की गूंज अभी से ही पूरी दुनिया को सुनाई दे रही है। आईपीएल 2025 (IPL 2025) के जरिए हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींचने के बाद यह युवा खिलाड़ी अंडर-19 क्रिकेट (Under-19 cricket) में धमाल मचा रहा है। भारतीय U19 टीम इस समय दुबई में जारी अंडर-19 एशिया कप (Under-19 Asia Cup) में हिस्सा ले रही है। भारत का पहला मैच यूएई से हुआ, जिसे टीम इंडिया ने 234 रनों की विशाल अंतर से जीता। भारत की इस जीत में अहम भूमिका वैभव सूर्यवंशी ने ही 171 रनों की धुआंधार पारी खेलकर निभाई। वैभव ने अपनी इस पारी के दौरान 95 गेंदों का सामना किया, जिसमें 9 चौके और 14 गगनचुंबी छक्के लगाए। इन 14 छक्कों के साथ उन्होंने एक ऐसा रिकॉर्ड बनाया जो U19 क्रिकेट के इतिहास में आजतक कोई बल्लेबाज नहीं बना पाया था।

    यह रिकॉर्ड है U19 ODI सबसे ज्यादा छक्के लगाने का। वैसे तो इस मैच से पहले ही वैभव सूर्यवंशी इस लिस्ट में पहले पायदान पर थे, मगर इन 14 छक्कों के साथ वह यूथ वनडे में 50 छक्के लगाने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज बन गए हैं। जी हां, वैभव सूर्यवंशी ने अभी तक U19 वनडे में 12 ही मुकाबले खेले हैं, जिसमें वह 57 छक्के जड़ चुके हैं। इस लिस्ट में दूसरे पायदान पर भारत के ही उनमुक्त चंद हैं, जिन्होंने 38 छक्के लगाए थे।


    वैभव सूर्यवंशी के निशाने पर विराट कोहली का रिकॉर्ड

    वैभव सूर्यवंशी के नाम अब U19 वनडे में कुल 727 रन हो गए हैं। उनकी नजरें अब विराट कोहली का रिकॉर्ड तोड़ने पर होगी। विराट ने अपने U19 करियर में 28 मैचों में 978 रन बनाए थे। विराट कोहली और वैभव सूर्यवंशी के बीच अब 251 रनों का ही अंतर रह गया है। वहीं भारत के लिए U19 वनडे में सबसे ज्यादा 1404 रन बनाने का रिकॉर्ड विजय जोल के नाम है, हालांकि वह भारतीय सीनियर टीम में कभी अपनी जगह नहीं बना पाए। लिस्ट में यशस्वी जायसवाल 1386 रनों के साथ दूसरे पायदान पर हैं।

  • UP बीजेपी अध्यक्ष के लिए पंकज चौधरी का नाम तय… आज नामांकन और कल लगगी मुहर

    UP बीजेपी अध्यक्ष के लिए पंकज चौधरी का नाम तय… आज नामांकन और कल लगगी मुहर


    लखनऊ।
    यूपी भाजपा (UP BJP) का 18वां अध्यक्ष चुनने के लिए प्रदेश भाजपा कार्यालय (State BJP office) में शनिवार को नामांकन होगा। रविवार को एक बड़े आयोजन में प्रदेश अध्यक्ष के नाम की औपचारिक घोषणा केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल (Union Minister Piyush Goyal) करेंगे। इस पद के दावेदार तो कई माने जा रहे हैं, लेकिन केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी (Pankaj Chaudhary) के नाम लगभग तय हो गया है। पंकज शनिवार को दिल्ली से लखनऊ आ रहे हैं। वह चौधरी चरण सिंह हवाई अड्डे से प्रदेश भाजपा कार्यालय पहुंचेंगे। सूत्रों के मुताबिक नामांकन के पूर्वनियोजित समय भी तब्दीली करके उसे आगे बढ़ाया गया है। पहले दोपहर दो से तीन बजे के बीच नामांकन की प्रक्रिया पूरी होनी थी।

    इससे पहले शुक्रवार दोपहर को भाजपा के राष्ट्रीय संगठन मंत्री बीएल संतोष राजधानी लखनऊ पहुंचे और उन्होंने सबसे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनके सरकारी आवास पर मुलाकात की। उसके बाद वह प्रदेश भाजपा कार्यालय में चुनाव संबंधी बैठक में शामिल हुए। बैठक के बाद वह दिल्ली वापस लौट गए हैं। पार्टी के प्रदेश चुनाव अधिकारी डॉ. महेंद्रनाथ पांडेय के मुताबिक शनिवार को प्रदेश अध्यक्ष और राष्ट्रीय परिषद सदस्यों के लिए नामांकन, नामांकन पत्रों की जांच और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। वहीं, रविवार को अगर जरूरी हुआ तो मतदान होगा अन्यथा दोपहर में नए प्रदेश अध्यक्ष और राष्ट्रीय परिषद के सदस्यों की घोषणा कर दी जाएगी।


    ओबीसी चेहरे पर कयास

    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के निर्वाचन के लिए गुरुवार को कार्यक्रम जारी होने के बाद से ही इस कुर्सी के दावेदारों को लेकर कयासों का दौर जारी है। विपक्ष के पीडीए की काट के लिए ओबीसी चेहरे पर दांव लगाना लगभग तय है। गुरुवार से ही तमाम नाम चर्चा में हैं, जिनमें केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी, कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, धर्मपाल सिंह, केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा, राज्यसभा सांसद बाबू राम निषाद आदि के नाम हैं। शुक्रवार को भी इन नामों पर पार्टी के भीतर ही लोग अपनी-अपनी राय जाहिर करते सुने गए। हालांकि, शुक्रवार देर रात पंकज चौधरी के नाम की चर्चा बाकियों से कहीं ज्यादा थी।

    बीएल संतोष ने दोनों डिप्टी सीएम संग की बैठक
    शुक्रवार शाम को बीएल संतोष की अगुआई में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी, प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह, दोनों उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व ब्रजेश पाठक संग बैठक हुई, जिसमें केंद्रीय संगठन से आए निर्देश और चुनाव की प्रक्रिया को लेकर चर्चा की गई। गुरुवार देर रात चुनाव का कार्यक्रम घोषित होने के बाद शुक्रवार सुबह से ही भाजपा के प्रदेश कार्यालय पर तेज चहलकदमी देखी जा रही थी। पार्टी के तमाम पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की आवाजाही का सिलसिला बना रहा। हर पदाधिकारी के आने-जाने के दरम्यान प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए एक नाम सुर्खियों में तैरता और फिर धीरे-धीरे उसका असर फीका पड़ता और दूसरे नाम पर कयासबाजी शुरू हो जा रही थी। इन्हीं चर्चाओं में रेखा वर्मा और साध्वी निरंजन ज्योति के नाम के भी दावे किए जाते रहे।


    464 मतदाताओं के नाम तय

    प्रदेश भाजपा कार्यालय में दिन भर अलग-अलग बैठकों के बाद 464 मतदाताओं के नाम तय किए गए हैं। तय मतदाताओं में प्रदेश परिषद सदस्यों के अलावा पांच सांसदों और 34 विधायक शामिल हैं। भाजपा की चुनाव प्रक्रिया के मुताबिक, भाजपा विधानमंडल के सदस्यों की कुल संख्या का 10 प्रतिशत और यूपी कोटे के लोकसभा व राज्यसभा सांसदों में से दस को मतदाता सूची में जगह मिलती है। प्रदेश में भाजपा के विधायकों की संख्या 258 और विधान परिषद सदस्यों की संख्या 79 है। पार्टी के 33 लोकसभा और 24 राज्यसभा सांसद हैं। पार्टी द्वारा जारी आधिकारिक कार्यक्रम के मुताबिक केंद्रीय चुनाव अधिकारी बनाए गए केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल प्रदेश अध्यक्ष के नाम की घोषणा करेंगे।


    दस साल में चार अध्यक्ष, तीन ओबीसी

    मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी भाजपा के 17वें प्रदेश अध्यक्ष हैं। हालांकि, व्यक्तियों की संख्या के मुताबिक गिना जाए तो वह पार्टी के प्रदेश मुखिया का 15वां चेहरा हैं। वर्ष 1980 में बनी पार्टी के पहले प्रदेश अध्यक्ष माधो प्रसाद त्रिपाठी थे। इसके बाद 2017 तक कल्याण सिंह और विनय कटियार को छोड़ दिया जाए तो पार्टी के प्रदेश प्रमुख के पद पर ज्यादातर ब्राह्मणों और क्षत्रियों का ही कब्जा रहा। हालांकि, बीते लगभग एक दशक में पार्टी की पॉलिटिक्स ओबीसी केंद्रित हुई है। वर्ष 2016 के बाद से अब तक चार प्रदेश अध्यक्ष चुने जा चुके हैं, जिनमें तीन ओबीसी हैं। इनमें 2016-17 में केशव प्रसाद मौर्य, 2019-22 तक स्वतंत्र देव सिंह और 2022 से अब तक चौधरी भूपेंद्र सिंह प्रदेश अध्यक्ष बने। इस बीच 2017-19 में डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष थे।


    आज-कल के कार्यक्रम की जिम्मेदारी तय

    दोनों दिनों के कार्यक्रमों के लिए दिनभर सिलसिलेवार बैठकें हुईं। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और प्रदेश महामंत्री संजय राय को शनिवार को होने वाले नामांकन कार्यक्रम की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, रविवार को प्रदेश भाजपा अध्यक्ष की घोषणा का कार्यक्रम डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के सभागार में होगा। इस कार्यक्रम की जिम्मेदारी उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और प्रदेश महामंत्री गोविंद नारायण शुक्ला को दी गई है। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने अध्यक्ष के चुनाव को लेकर कहा कि ‘भाजपा एक लोकतांत्रिक पार्टी है और हमारे यहां एक चुनाव की पद्धति है और उसके आधार पर चुनाव की प्रक्रिया होती है।

    पार्षद से केंद्रीय मंत्री का सफर
    केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी सात बार के सांसद हैं। वह कुर्मी समाज से आते हैं। वर्ष 1989 में उन्होंने गोरखपुर नगर निगम के लिए पार्षद का चुनाव जीतकर राजनीति में कदम रखा था। उसके बाद से उन्होंने पार्टी और संगठन दोनों में कई जिम्मेदारियां निभाईं। वह फिलहाल केंद्र सरकार में वित्त राज्य मंत्री हैं।

  • भोपाल में SIR प्रक्रिया के तहत 4.43 लाख मतदाताओं के नाम कटेआंकड़ा चौंकाने वाला

    भोपाल में SIR प्रक्रिया के तहत 4.43 लाख मतदाताओं के नाम कटेआंकड़ा चौंकाने वाला


    भोपाल ।भोपाल में चुनावी प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन SIR प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची का पुनरीक्षण चल रहा है। इस प्रक्रिया में अब तक 39 दिनों में 4 लाख 43 हजार 633 मतदाताओं के नाम कटने की संभावना जताई गई है। ये नाम मुख्य रूप से मृतशिफ्टेडअनुपस्थितडबल एंट्री और अन्य कारणों से कटे हैं। सबसे ज्यादा प्रभावित वह मतदाता हैं जिनके नाम ‘नो-मैपिंग’ सूची में थेजिनकी संख्या घटकर 1 लाख 35 हजार 765 रह गई है। इस पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर राजनीति में हलचल तेज हो गई हैऔर विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने निर्वाचन आयोग से प्रक्रिया की पारदर्शिता की मांग की है।

    SIR प्रक्रिया और नाम कटने की वजह

    SIR प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को साफ और सही बनाना है ताकि चुनावों में कोई धोखाधड़ी न हो। इस दौरान मृतशिफ्टेड या अनुपस्थित मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैंऔर जिनका नाम डबल एंट्री के रूप में दर्ज हैउनका नाम भी हटाया जाता है। इन कदमों से सूची में वास्तविक और सक्रिय मतदाताओं की संख्या सुनिश्चित होती है।

    भोपाल में जिन 4.43 लाख मतदाताओं के नाम कटने की संभावना जताई गई हैउनमें से अधिकांश मृत और शिफ्टेड मतदाता हैंजिनकी जानकारी नियमित रूप से अपडेट नहीं की गई थी। इसके अलावाकई मतदाताओं के नाम डबल एंट्री के कारण भी कटने जा रहे हैं। इस प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग ने बूथ लेवल अधिकारी से सभी नामों की वेरिफिकेशन कराने का निर्देश दिया है।

    राजनीतिक दलों का रुख और आयोग की प्रतिक्रिया

    चुनाव आयोग के आब्जर्वर ब्रजमोहन मिश्रा ने शुक्रवार को सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। इस बैठक में उन्होंने इन नामों को वेरिफाई कराने का सुझाव दिया ताकि कोई भी मतदाता बिना वजह सूची से बाहर न हो जाए। आयोग ने यह भी निर्देश दिया कि 18 दिसंबर तक गणना पत्रक जमा किए जाएं।

    हालांकिविधानसभा क्षेत्रों में जहां ज्यादा मतदाता सूची का पुनरीक्षण किया जा रहा हैआयोग ने कुछ क्षेत्रों में बीएलओ की कामकाजी स्थिति की भी समीक्षा की। नरेलामध्यगोविंदपुरा और हुजूर जैसी विधानसभाओं में बीएलओ के काम को और कड़ी निगरानी में रखने का निर्णय लिया गया थालेकिन आयोग के वरिष्ठ अधिकारी छत्तीसगढ़ के लिए रवाना हो गए।

    भविष्य की दिशा और चुनौती

    इस पुनरीक्षण प्रक्रिया से निश्चित रूप से मतदाता सूची में सुधार होगालेकिन इसके परिणामस्वरूप कुछ राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को असंतोष भी हो सकता हैविशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां नाम काटे गए हैं। चुनाव आयोग को यह सुनिश्चित करना होगा कि यह प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और निष्पक्ष रहेताकि भविष्य में कोई विवाद न उठे।

    इतना ही नहींराजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को भी मतदाता सूची में सुधार की इस प्रक्रिया को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखना चाहिएक्योंकि यह चुनावी प्रणाली को मजबूत और निष्पक्ष बनाता है। अगर प्रक्रिया ठीक से लागू होती है तो यह चुनावों की विश्वसनीयता को बढ़ाएगा और लोगों का विश्वास बनाए रखेगा।

  • सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के बीच 4 क्रिकेटर निलंबित… लगे भ्रष्टाचार के आरोप

    सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के बीच 4 क्रिकेटर निलंबित… लगे भ्रष्टाचार के आरोप


    गुवाहाटी।
    असम क्रिकेट संघ (एसीए) (Assam Cricket Association – ACA) ने चार क्रिकेटरों अमित सिन्हा, इशान अहमद, अमन त्रिपाठी और अभिषेक ठाकुरी को सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी 2025 (Syed Mushtaq Ali Trophy 2025) के दौरान कथित भ्रष्ट आचरण में शामिल होने के आरोपों के चलते निलंबित कर दिया है। इन खिलाड़ियों ने अलग-अलग चरण पर असम का प्रतिनिधित्व किया है और उनके खिलाफ राज्य पुलिस की अपराध शाखा में एफआईआर दर्ज की गई है। इन पर असम के कुछ खिलाड़ियों को प्रभावित करने और उकसाने का प्रयास का आरोप लगाया गया है जिन्होंने सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में हिस्सा लिया था।

    एसीए सचिव सनातन दास ने कहा, ‘‘आरोप सामने आने के बाद बीसीसीआई की भ्रष्टाचार रोधी एवं सुरक्षा इकाई (एसीएसयू) ने जांच की। एसीए ने भी आपराधिक कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रथम दृष्टया इनके गंभीर कदाचार में शामिल होने के संकेत मिलते हैं जो खेल की अखंडता को प्रभावित करता है। ’’

    असम के सैयद मुश्ताक लीग मैच 26 नवंबर से आठ दिसंबर तक लखनऊ में आयोजित हुए थे और वह वर्तमान में जारी सुपर लीग चरण में प्रवेश करने में असफल रहा। दास ने कहा, ‘‘स्थिति के और अधिक बिगड़ने की किसी भी संभावना को रोकने के लिए उन्हें निलंबित किया गया है। निलंबन तब तक जारी रहेगा जब तक जांच का अंतिम परिणाम नहीं आ जाता या संघ द्वारा कोई और निर्णय नहीं लिया जाता। ’’

    निलंबन अवधि के दौरान इन खिलाड़ियों को एसीए, उसकी जिला इकाइयों या संबद्ध क्लबों द्वारा आयोजित किसी भी राज्य-स्तरीय टूर्नामेंट या मैच में भाग लेने से रोक दिया गया है। निलंबन के दौरान मैच रेफरी, कोच, अंपायर आदि के रूप में किसी भी क्रिकेट संबंधित गतिविधि में भाग लेना भी प्रतिबंधित है। दास ने कहा कि सभी जिला संघों को आदेश का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने और अपने अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले क्लबों और अकादमियों को एसीए के निर्णय की जानकारी देने का निर्देश दिया गया है।

  • SBI के ग्राहकों के लिए लोन लेना हुआ सस्ता, 15 दिसंबर से लागू होंगी नई दरें

    SBI के ग्राहकों के लिए लोन लेना हुआ सस्ता, 15 दिसंबर से लागू होंगी नई दरें


    नई दिल्ली।
    देश के सबसे बड़े लेंडर स्टेट (India’s largest lender) बैंक ऑफ इंडिया (State Bank of India- SBI) ने अपने ग्राहकों को बड़ा तोहफा दिया है। एसबीआई ने रिजर्व बैंक की पॉलिसी रेट (Reserve Bank’s policy rate) में कटौती के बाद अपनी लेंडिंग रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स की कमी की है, जिससे मौजूदा और नए कर्जदारों के लिए लोन सस्ता हो गया है। इस लेटेस्ट कटौती के साथ SBI का एक्सटर्नल बेंचमार्क लिंक्ड रेट (EBLR) 25 बेसिस पॉइंट्स कम होकर 7.90% हो जाएगा। संशोधित दरें 15 दिसंबर, 2025 से लागू होंगी।


    MCLR में भी 5 बेसिस पॉइंट्स की कटौती

    बैंक ने सभी टेन्योर के लिए मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स-बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) में भी 5 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की है। इस संशोधन के साथ, एक साल की मैच्योरिटी वाला MCLR मौजूदा 8.75% से घटकर 8.70% हो जाएगा। इसी तरह, एक साल की मैच्योरिटी दर क्रमशः 5 प्रतिशत सस्ती होकर 8.75% और 8.80% हो जाएगी। बैंक ने कहा कि उसने बेस रेट/BPLR को मौजूदा 10% से घटाकर 9.90% कर दिया है, जो 15 दिसंबर से प्रभावी होगा। इसके अलावा, बैंक ने 15 दिसंबर से प्रभावी दो साल से कम तीन साल की मैच्योरिटी के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट दर में भी 5 बेसिस पॉइंट्स की कटौती करके 6.40% करने का फैसला किया है। हालांकि, बैंक ने दूसरी मैच्योरिटी बकेट पर ब्याज दरें बरकरार रखी हैं। एसबीआई ने ‘444 दिन’ की खास स्कीम अमृत वृष्टि की ब्याज दर में भी कटौती की है। अब ब्याज दर 15 दिसंबर से 6.60 प्रतिशत से घटाकर 6.45 प्रतिशत कर दी गई है।


    इंडियन ओवरसीज बैंक का भी ऐलान

    एक और सरकारी बैंक इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB) ने भी 15 दिसंबर, 2025 से अपनी लेंडिंग रेट में कमी की घोषणा की है। IOB ने एक बयान में कहा कि बैंक ने अपने एक्सटर्नल बेंचमार्क लेंडिंग रेट (EBLR) – खासकर रेपो लिंक्ड लेंडिंग रेट (RLLR) को 25 बेसिस पॉइंट्स घटाकर 8.35% से 8.10% कर दिया है, जिससे पॉलिसी रेट में कटौती का पूरा फायदा ग्राहकों को मिलेगा। इसके अलावा, बैंक की एसेट लायबिलिटी मैनेजमेंट कमेटी (ALCO) ने तीन महीने से लेकर तीन साल तक की सभी टेन्योर के लिए मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स-बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) में 5 बेसिस पॉइंट की कमी को मंजूरी दी है। बैंक ने कहा कि इन बदलावों से मौजूदा और नए दोनों तरह के कर्जदारों की इक्वेटेड मंथली इंस्टॉलमेंट (EMI) कम हो जाएगी, जिनके लोन इन बेंचमार्क से जुड़े हुए हैं।

  • IMP ने कसी पाकिस्तान पर नकेल… 7 अरब डॉलर के बेलआउट कार्यक्रम के साथ जोड़ी 11 नई शर्तें

    IMP ने कसी पाकिस्तान पर नकेल… 7 अरब डॉलर के बेलआउट कार्यक्रम के साथ जोड़ी 11 नई शर्तें


    इस्लामाबाद।
    अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund- IMF) ने पाकिस्तान (Pakistan) के लिए अपने 7 अरब डॉलर के बेलआउट कार्यक्रम ($7 Billion Bailout program) के तहत 11 नई शर्तें जोड़ दी हैं। गुरुवार को जारी दूसरी समीक्षा की स्टाफ-लेवल रिपोर्ट में शामिल इन शर्तों के बाद पिछले 18 महीनों में लगाई गई कुल शर्तों की संख्या बढ़कर 64 हो गई है। नई शर्तें पाकिस्तान के सुशासन ढांचे की पुरानी खामियों, व्यापक भ्रष्टाचार जोखिमों और घाटे वाले क्षेत्रों में सुधार से जुड़ी हैं।


    उच्च अधिकारियों की संपत्ति का सार्वजनिक खुलासा अनिवार्य

    सबसे अहम शर्तों में से एक यह है कि दिसंबर 2026 तक सभी उच्च स्तरीय केंद्रीय सिविल सेवकों (ग्रेड-19 और ऊपर) की संपत्ति घोषणाएं आधिकारिक सरकारी वेबसाइट पर सार्वजनिक की जाएंगी। आईएमएफ का कहना है कि इससे आय और संपत्ति में विसंगतियों का पता लगाना आसान होगा। सरकार ने प्रांतीय स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों पर भी यह नियम लागू करने का इरादा जाहिर किया है। बैंकिंग क्षेत्र को इन घोषणाओं की पूरी जानकारी दी जाएगी।


    भ्रष्टाचार पर बड़ा हमला

    आईएमएफ ने अक्टूबर 2026 तक 10 सबसे अधिक जोखिम वाले विभागों में भ्रष्टाचार के खतरे को कम करने के लिए विस्तृत कार्ययोजना जारी करने को कहा है। नेशनल अकाउंटेबिलिटी ब्यूरो (NAB) इन योजनाओं का समन्वय करेगा। प्रांतीय एंटी-करप्शन संस्थाओं को वित्तीय खुफिया जानकारी प्राप्त करने और वित्तीय अपराधों की जांच क्षमता बढ़ाने के लिए अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है। ये कदम आईएमएफ-प्रायोजित गवर्नेंस एंड करप्शन डायग्नोस्टिक असेसमेंट की सिफारिशों पर आधारित हैं, जिसमें पाकिस्तान के कानूनी, प्रशासनिक और निगरानी ढांचे में व्यापक कमियां उजागर हुई थीं।


    सीमा-पार भुगतान और रेमिटेंस लागत की समीक्षा

    आईएमएफ ने पाकिस्तान को मई 2026 तक विदेशी रेमिटेंस भेजने की लागत और बाधाओं की व्यापक समीक्षा पूरी करने को कहा है। अनुमान है कि रेमिटेंस लागत आने वाले वर्षों में 1.5 अरब डॉलर तक बढ़ सकती है, जबकि यही राशि पाकिस्तान के सीमित आयातों के लिए सबसे बड़ा वित्तीय स्रोत है। सितंबर 2026 तक स्थानीय मुद्रा बॉन्ड मार्केट के विकास में बाधाओं की जांच कर सुधारों की रणनीतिक योजना प्रकाशित करनी होगी।


    चीनी उद्योग में एकाधिकार तोड़ने की कवायद

    जून 2026 तक कंद्र और प्रांतीय सरकारों को मिलकर राष्ट्रीय चीनी बाजार उदारीकरण नीति पर सहमति बनानी होगी। इस नीति में लाइसेंसिंग नियम, मूल्य नियंत्रण, आयात-निर्यात अनुमति, जोनिंग मानदंड और कार्यान्वयन की स्पष्ट समय-सीमा शामिल होगी। नीति को संघीय कैबिनेट से मंजूरी लेनी होगी। इसे लंबे समय से शक्तिशाली माने जाने वाले शुगर उद्योग में प्रभाव के केंद्रीकरण को खत्म करने का प्रयास माना जा रहा है।


    एफबीआर (FBR) की खराब कार्यक्षमता पर सख्ती

    दिसंबर 2025 के अंत तक एफबीआर सुधारों का पूरा रोडमैप तैयार करना होगा जिसमें प्राथमिकता वाले क्षेत्र, स्टाफिंग जरूरतें, समय-सारिणी, माइलस्टोन, अपेक्षित राजस्व परिणाम और KPI शामिल होंगे। इसके बाद कम-से-कम तीन प्राथमिकता वाले सुधारों को पूरी तरह लागू करना होगा। दिसंबर 2026 तक मध्यम अवधि की टैक्स सुधार रणनीति भी प्रकाशित करनी होगी।

    बिजली क्षेत्र में निजीकरण की तैयारी
    अगले केंद्रीय बजट से पहले हैदराबाद इलेक्ट्रिक सप्लाई कंपनी (HESCO) और सुक्कूर इलेक्ट्रिक पावर कंपनी (SEPCO) में निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए आधार तैयार करने होंगे और सात सबसे बड़ी बिजली वितरण कंपनियों के साथ पब्लिक सर्विस ऑब्लिगेशन समझौते पूरे करने होंगे। कंपनीज एक्ट 2017 में संशोधन संसद में पेश करने होंगे ताकि गैर-सूचीबद्ध कंपनियों के लिए अनुपालन जरूरतें बढ़ाई जा सकें। विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) कानून में प्रस्तावित संशोधनों के लिए कॉन्सेप्ट नोट भी जारी करना होगा।


    राजस्व कम हुआ तो मिनी-बजट लाना होगा

    आईएमएफ रिपोर्ट में दर्ज है कि यदि दिसंबर 2025 के अंत तक राजस्व लक्ष्य से चूक हुई तो सरकार मिनी-बजट लाएगी। इसमें उर्वरक और कीटनाशकों पर फेडरल एक्साइज ड्यूटी 5% बढ़ाना, उच्च चीनी वाले उत्पादों पर नया एक्साइज ड्यूटी लगाना और कई वस्तुओं को स्टैंडर्ड सेल्स टैक्स दर में लाना शामिल होगा। आईएमएफ ने गवर्नेंस और भ्रष्टाचार डायग्नोस्टिक रिपोर्ट में चिह्नित कमियों को दूर करने की कार्ययोजना प्रकाशित करने की समय-सीमा भी बढ़ा दी है। पाकिस्तान पहले ही 7 अरब डॉलर के EFF कार्यक्रम के तहत कड़ी निगरानी में है और इन नई शर्तों से आर्थिक सुधारों की गति और तेज करने का दबाव बढ़ गया है।