Blog

  • वैश्विक व्यापार पर मंडराया खतरा: बाब-अल-मंदेब पर संकट, भारतीय नौसेना सतर्क

    वैश्विक व्यापार पर मंडराया खतरा: बाब-अल-मंदेब पर संकट, भारतीय नौसेना सतर्क


    नई दिल्ली । नई दिल्ली में वेस्ट एशिया का बढ़ता संघर्ष अब वैश्विक स्तर पर गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी टकराव में अब हूती विद्रोही भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, जिससे क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ गई है। हूतियों द्वारा इजरायल पर किए गए मिसाइल हमलों ने इस संघर्ष को और व्यापक बना दिया है।

    पहले ही स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज के बाधित होने की आशंका से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो रही है, और अब स्ट्रेट ऑफ बाब-अल-मंदेब पर भी संकट गहराने की संभावना जताई जा रही है। यह अहम समुद्री मार्ग रेड सी और अदन की खाड़ी को जोड़ता है और दुनिया के करीब 12 प्रतिशत व्यापार का रास्ता है।

    इसी बढ़ते खतरे को देखते हुए भारतीय नौसेना पूरी तरह अलर्ट मोड में है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, ओमान की खाड़ी और अदन की खाड़ी के आसपास उत्तरी अरब सागर में भारतीय नौसेना के कई युद्धपोत तैनात किए गए हैं। एंटी-पायरेसी मिशन के तहत पहले से मौजूद निगरानी को अब और मजबूत किया गया है।

    भारतीय नौसेना इस समय कच्चे तेल और एलपीजी ले जाने वाले भारतीय टैंकरों को एस्कॉर्ट कर रही है ताकि उन्हें किसी भी संभावित खतरे से सुरक्षित रखा जा सके। आवश्यकता पड़ने पर भारतीय ध्वज वाले जहाजों को अतिरिक्त सुरक्षा देने की भी तैयारी है।

    हालांकि अभी तक हूती विद्रोहियों ने रेड सी में किसी बड़े जहाज को निशाना नहीं बनाया है, लेकिन हालात तेजी से बदल सकते हैं। रक्षा विशेषज्ञ संजय कुलकर्णी का मानना है कि ईरान पर बढ़ते दबाव के चलते हूती इस रणनीतिक मार्ग को ‘वेपोनाइज’ कर सकते हैं, यानी इसे दबाव बनाने के साधन के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं।

    यदि ऐसा होता है, तो इसका असर केवल क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया के व्यापार पर पड़ेगा। भारत भी इससे अछूता नहीं रहेगा। महंगाई बढ़ सकती है, उर्वरकों की कीमतों में इजाफा हो सकता है और निर्यात प्रभावित हो सकता है।

    जिबूती जैसे रणनीतिक स्थानों पर अमेरिका, चीन, जापान और फ्रांस की सैन्य मौजूदगी के कारण इस क्षेत्र को पूरी तरह बाधित करना आसान नहीं है, लेकिन खतरा पूरी तरह टला भी नहीं है। यह क्षेत्र वैश्विक व्यापार की जीवनरेखा है। एक प्रमुख मार्ग फारस की खाड़ी से होकर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज, ओमान की खाड़ी और अरब सागर तक जाता है, जबकि दूसरा मार्ग स्वेज नहर, रेड सी और अदन की खाड़ी के जरिए अरब सागर से जुड़ता है।

    यदि ये दोनों मार्ग प्रभावित होते हैं, तो जहाजों को केप ऑफ गुड होप के लंबे रास्ते से गुजरना पड़ेगा, जिससे समय और लागत दोनों में भारी बढ़ोतरी होगी। भारत के लिए यह स्थिति और भी संवेदनशील है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का लगभग 80 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, जो मुख्य रूप से इराक, सऊदी अरब, यूएई, रूस और अमेरिका से आता है।

    कुल मिलाकर, वेस्ट एशिया में बढ़ता यह संघर्ष अब वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। आने वाले समय में स्थिति किस दिशा में जाएगी, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।

  • मध्य पूर्व तनाव का असर: अमेरिका और UAE में पेट्रोल-डीजल के दाम 72% तक बढ़े

    मध्य पूर्व तनाव का असर: अमेरिका और UAE में पेट्रोल-डीजल के दाम 72% तक बढ़े


    नई दिल्ली मध्य पूर्व में बढ़ते राजनीतिक तनाव का असर पूरी दुनिया में महसूस किया जा रहा है। इस संघर्ष ने खासतौर पर तेल बाजार को हिला दिया है, जिससे अमेरिका और खाड़ी देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 30 से 72 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है।

    अमेरिका में गैसोलीन और डीजल महंगे

    अमेरिका में गैसोलीन (पेट्रोल) की कीमतें 4 डॉलर प्रति गैलन (लगभग 380 रुपए) के पार चली गई हैं। यह बीते तीन वर्षों में पहला मौका है जब अमेरिकी उपभोक्ताओं को इतने महंगे दाम चुकाने पड़ रहे हैं। अमेरिकी मीडिया के अनुसार, देश में औसत गैसोलीन की कीमत 4.018 डॉलर प्रति गैलन हो गई है।

    डीजल की कीमतों में भी तेजी देखी गई है। डीजल अब 5 डॉलर प्रति गैलन (करीब 475 रुपए) के पार बिक रहा है। विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान पर संभावित हमलों और मध्य पूर्व में तनाव के कारण गैसोलीन और डीजल की कीमतों में क्रमशः 30 और 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है।

    खाड़ी देश यूएई में रिकार्ड बढ़ोतरी

    यूएई की फ्यूल प्राइस कमेटी ने 1 अप्रैल से लागू होने वाली नई कीमतों का ऐलान किया है। नए दामों के अनुसार:

    सुपर 98 पेट्रोल की कीमत 30% बढ़कर 3.39 दिरहम प्रति लीटर (लगभग 87 रुपए) हो गई है, जो पहले 2.59 दिरहम थी।
    स्पेशल 95 पेट्रोल का दाम 32% बढ़कर 3.28 दिरहम प्रति लीटर (लगभग 84 रुपए) हो गया है, जो पहले 2.48 दिरहम था।
    डीजल की कीमत में सबसे बड़ी बढ़ोतरी हुई, जो 72% बढ़कर 4.69 दिरहम प्रति लीटर (करीब 120 रुपए) पहुंच गई है, जबकि पहले यह 2.72 दिरहम थी।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यूएई में डीजल की यह सबसे तेज और रिकॉर्ड बढ़ोतरी है, जो घरेलू और वाणिज्यिक वाहनों के लिए महंगी होगी।

    कच्चे तेल की कीमत में उछाल

    मध्य पूर्व में तनाव और अमेरिका-इजरायल-ईरान संघर्ष के चलते कच्चे तेल (ब्रेंट क्रूड) की कीमत में जबरदस्त तेजी देखी गई है। पिछले एक महीने में ब्रेंट क्रूड के दाम 48 प्रतिशत बढ़कर 107.28 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँच गए हैं। इस उछाल का सीधा असर ग्लोबल फ्यूल प्राइस पर पड़ रहा है, जिससे उपभोक्ताओं की जेब पर दबाव बढ़ा है।

    वैश्विक तेल बाजार पर प्रभाव

    विश्लेषकों का कहना है कि इस बढ़ोतरी का असर केवल अमेरिका और यूएई तक सीमित नहीं है। यूरोप, एशिया और भारत सहित कई देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं। उभरते देशों में तेल आयातक देशों के लिए यह स्थिति चिंता का कारण बन सकती है।

  • बढ़ते तनाव के बीच ईरान का कड़ा कानून: दुश्मन देशों को सूचना भेजना पड़ेगा भारी

    बढ़ते तनाव के बीच ईरान का कड़ा कानून: दुश्मन देशों को सूचना भेजना पड़ेगा भारी


    नई दिल्ली । तेहरान में बढ़ते अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच ईरान ने एक बड़ा और सख्त फैसला लेते हुए स्पष्ट चेतावनी जारी की है कि अमेरिका और इजरायल को किसी भी प्रकार की संवेदनशील जानकारी फोटो या वीडियो भेजने वालों को मौत की सजा दी जा सकती है। यह बयान ईरान की न्यायपालिका के प्रवक्ता असगर जहांगीर ने दिया है जिसने इस पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।

    असगर जहांगीर ने कहा कि दुश्मन देशों को किसी भी प्रकार की सूचना देना सीधे तौर पर जासूसी की श्रेणी में आता है और इसके लिए कठोरतम दंड का प्रावधान है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति हमले से प्रभावित क्षेत्रों की तस्वीरें या वीडियो साझा करता है तो यह दुश्मन को यह संकेत देने जैसा है कि उनका हमला सही जगह पर हुआ है। इस तरह की गतिविधियां राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ मानी जाएंगी।

    यह सख्त रुख ऐसे समय में सामने आया है जब डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका द्वारा हाल ही में ईरान के तेल भंडार को निशाना बनाते हुए हमला किया गया। इस हमले के वीडियो भी सार्वजनिक किए गए जिसके बाद ईरान की ओर से सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर दिया गया है।

    ईरान के अधिकारियों के मुताबिक पिछले अक्टूबर में पारित किए गए नए जासूसी कानून के तहत अब दुश्मन देशों को किसी भी प्रकार की सूचना भेजना गंभीर अपराध माना जाएगा। इस कानून में दोषी पाए जाने पर न सिर्फ संपत्ति जब्त की जा सकती है बल्कि मौत की सजा तक दी जा सकती है।

    इसी क्रम में ईरानी सुरक्षा एजेंसियों ने कार्रवाई तेज कर दी है। उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है जिन पर अमेरिका और इजरायल से जुड़ी खुफिया एजेंसियों को संवेदनशील जानकारी भेजने का आरोप है। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने कथित तौर पर सुरक्षित स्थानों की जानकारी देने के बदले क्रिप्टोकरेंसी प्राप्त की थी।

    ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इन दोनों को पूर्वी अजरबैजान प्रांत के ओस्कू इलाके से हिरासत में लिया गया और आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए न्यायिक अधिकारियों को सौंप दिया गया है। इससे पहले भी इसी तरह के आरोपों में दो अन्य लोगों को मौत की सजा दी जा चुकी है जिससे यह साफ है कि ईरान इस मुद्दे पर कोई नरमी बरतने के मूड में नहीं है।

    इस बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने क्षेत्रीय समर्थन को लेकर इराक का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि इराकी लोग इस संघर्ष में मजबूरी से नहीं बल्कि साझा इतिहास पहचान और धार्मिक मूल्यों के आधार पर ईरान के साथ खड़े हैं।

    कुल मिलाकर अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़ते तनाव के बीच ईरान का यह कड़ा रुख यह संकेत देता है कि देश अपनी आंतरिक सुरक्षा को लेकर बेहद सतर्क है और किसी भी प्रकार की जासूसी गतिविधि को सख्ती से कुचलने के लिए तैयार है।

  • भारत में 2025 में डेटा का क्रेज़, प्रति यूजर औसत मासिक खपत 31GB से अधिक

    भारत में 2025 में डेटा का क्रेज़, प्रति यूजर औसत मासिक खपत 31GB से अधिक


    नई दिल्ली भारत में मोबाइल डेटा का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। नोकिया की नई मोबाइल ब्रॉडबैंड इंडेक्स रिपोर्ट 2025 के अनुसार, देश में प्रति यूजर औसत मासिक डेटा उपभोग 31 जीबी से अधिक हो गया है। बीते पांच वर्षों में इसमें 18 प्रतिशत का कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) दर्ज किया गया है। रिपोर्ट में मुख्य कारण के रूप में 5जी की बढ़ती लोकप्रियता, डेटा-हेवी एप्लीकेशन और डिजिटल मनोरंजन को बताया गया है।

    डेटा ट्रैफिक में 5जी का बढ़ता योगदान

    2025 में भारत में कुल मोबाइल डेटा ट्रैफिक 27 एक्सबाइट प्रति माह से अधिक हो गया, जिसमें अकेले 5जी का योगदान 47 प्रतिशत था। 5जी ट्रैफिक सालाना आधार पर 70 प्रतिशत बढ़कर 12.9 एक्सबाइट प्रति माह तक पहुंच गया। मेट्रो शहर 5जी अपनाने में सबसे आगे हैं, जहां कुल डेटा ट्रैफिक में 5जी की हिस्सेदारी 58 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है।

    छोटे शहरों में 5जी का प्रसार

    रिपोर्ट में बताया गया है कि 5जी अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। छोटे शहरों में भी इसका तेजी से विस्तार हो रहा है। यह बदलाव भारत के डिवाइस इकोसिस्टम और 5जी-सक्षम स्मार्टफोन की उपलब्धता से संभव हुआ है। 2025 में सक्रिय 4जी उपकरणों की संख्या 892 मिलियन थी, जिनमें से 383 मिलियन से अधिक उपकरण 5जी-सक्षम थे। साथ ही, वर्ष के दौरान बेचे गए स्मार्टफोनों में 90 प्रतिशत से अधिक 5जी-सक्षम थे, जिससे उपयोगकर्ताओं के लिए 5जी अपनाना आसान हो गया।

    4के स्ट्रीमिंग, क्लाउड गेमिंग और एआई एप्स

    भारतीय यूजर पहले से कहीं अधिक डेटा का उपभोग कर रहे हैं। इसके पीछे मुख्य कारण 4के वीडियो स्ट्रीमिंग, क्लाउड गेमिंग और एआई-आधारित एप्लीकेशन हैं। इन सेवाओं की बढ़ती लोकप्रियता ने नेटवर्क पर लोड बढ़ा दिया है और इससे उच्च गति, कम विलंबता और बेहतर कनेक्टिविटी की आवश्यकता उत्पन्न हुई है।

    भविष्य में नेटवर्क और एआई की भूमिका

    रिपोर्ट में भविष्य के दृष्टिकोण पर भी जोर दिया गया है। जैसे-जैसे एआई-आधारित एप्लिकेशन और डिजिटल अनुभव आम होंगे, नेटवर्क को उच्च डेटा लोड, जटिल कंप्यूटिंग और कम विलंबता संभालने के लिए विकसित होने की आवश्यकता होगी।

    2031 तक 5जी ग्राहकों का अनुमान

    भविष्य में भारत में 5जी ग्राहकों की संख्या 2031 तक 1 अरब से अधिक होने का अनुमान है। यह संकेत देता है कि मोबाइल डेटा उपभोग और डिजिटल सेवाओं की मांग लगातार बढ़ती रहेगी।

  • 1 अप्रैल से F&O पर बढ़ेगा STT, विशेषज्ञों के अनुसार लंबी अवधि में सीमित असर

    1 अप्रैल से F&O पर बढ़ेगा STT, विशेषज्ञों के अनुसार लंबी अवधि में सीमित असर


    नई दिल्ली वित्त वर्ष 2025-26 के समापन के साथ निवेशकों को कई नए बदलावों का सामना करना पड़ रहा है। इसमें फ्यूचर्स और ऑप्शंस (एफएंडओ) पर लागू सिक्योरिटीज़ ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) में बढ़ोतरी सबसे अहम बदलाव है, जो 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा बजट में घोषित ये संशोधन विशेष रूप से ऑप्शंस ट्रेडिंग पर ध्यान केंद्रित करते हैं, जिससे ट्रेडिंग लागत बढ़ जाएगी।

    फ्यूचर्स और ऑप्शंस पर नई एसटीटी दरें

    नई दरों के अनुसार फ्यूचर्स पर एसटीटी 0.02% से बढ़कर 0.05%, जबकि ऑप्शंस प्रीमियम और एक्सरसाइज पर एसटीटी 0.10% और 0.125% से बढ़कर 0.15% हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे डेरिवेटिव्स सेगमेंट में निवेश की लागत बढ़ेगी, खासकर उन विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के लिए, जो हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग और डेरिवेटिव आधारित रणनीतियों पर निर्भर हैं।

    एफपीआई और बाजार पर अल्पकालिक असर

    जनवरी 2026 में एफपीआई ने भारतीय बाजार से 41,000 करोड़ रुपए से अधिक की निकासी की थी, जो वैश्विक अनिश्चितता, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और करेंसी दबाव को दर्शाती है। एसटीटी बढ़ने से टैक्स के बाद रिटर्न कम हो सकता है, जिससे शॉर्ट-टर्म विदेशी निवेश के लिए भारत का आकर्षण थोड़ी मात्रा में घट सकता है। कुछ निवेशक इस कारण एशिया के अन्य बाजारों जैसे अमेरिका, ताइवान और दक्षिण कोरिया में निवेश की ओर रुख कर सकते हैं।

    लंबी अवधि के निवेशकों पर सीमित प्रभाव

    विशेषज्ञों का कहना है कि लंबी अवधि के निवेशकों पर इसका असर सीमित रहेगा। उनके निवेश निर्णय कंपनी की कमाई, मुद्रा स्थिरता और नीतिगत स्पष्टता जैसे कारकों पर आधारित होते हैं। वहीं, सरकार को टैक्स कलेक्शन में वृद्धि का लाभ मिलेगा, जबकि ट्रेडिंग वॉल्यूम पर अल्पकालिक दबाव पड़ सकता है।

    रिटेल और हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स पर असर

    एसटीटी बढ़ोतरी से रिटेल और हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स की ट्रेडिंग लागत बढ़ेगी। हालांकि विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह प्रभाव अल्पकालिक होगा। शुरुआती समय में बाजार में हलचल दिखाई दे सकती है, लेकिन जैसे-जैसे निवेशक समायोजित होंगे, ट्रेडिंग गतिविधियां सामान्य हो जाएंगी।

    1 अप्रैल 2026 से लागू हुए नए एसटीटी नियमों के तहत फ्यूचर्स और ऑप्शंस पर टैक्स बढ़ गया है। अल्पकालिक प्रभाव: ट्रेडिंग लागत बढ़ी- एफपीआई और शॉर्ट-टर्म निवेश प्रभावित। दीर्घकालिक असर: सीमित → लंबी अवधि के निवेशक कंपनी की स्थिति, मुद्रा स्थिरता और नीतिगत स्पष्टता पर ध्यान देंगे। सरकार को टैक्स में लाभ, बाजार में मामूली दबाव और विदेशी निवेश में थोड़ी नरमी संभव है।

  • 36% हिस्सेदारी के साथ गोल्ड लोन भारत में सबसे बड़े क्रेडिट सेगमेंट में शामिल

    36% हिस्सेदारी के साथ गोल्ड लोन भारत में सबसे बड़े क्रेडिट सेगमेंट में शामिल


    नई दिल्ली भारत के रिटेल क्रेडिट मार्केट में गोल्ड लोन अब सबसे बड़ा सेगमेंट बन गया है। मंगलवार को जारी ट्रांसयूनियन सीआईबीएल की रिपोर्ट के अनुसार, कुल लोन वॉल्यूम में गोल्ड लोन की हिस्सेदारी 36 प्रतिशत और वैल्यू (मूल्य) के हिसाब से करीब 40 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इसके पीछे मुख्य कारण सोने की बढ़ती कीमतें और सुरक्षित लोन की ओर बढ़ता ग्राहक रुझान माना गया है।

    गोल्ड लोन में वृद्धि और औसत राशि

    रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दो वर्षों में गोल्ड लोन की औसत राशि काफी बढ़ी है। दिसंबर 2025 की तिमाही में औसत गोल्ड लोन करीब 1.9 लाख रुपए तक पहुंच गया, जो इस सेगमेंट की तेजी को दर्शाता है। इसी दौरान कंज्यूमर मार्केट इंडिकेटर (CMI), जो क्रेडिट मार्केट की स्थिति को दर्शाता है, दिसंबर तिमाही में बढ़कर 102 हो गया। एक साल पहले यह 97 और सितंबर तिमाही में 100 था, यानी लगातार तीसरी तिमाही में सुधार देखा गया।

    क्षेत्रीय और ग्राहक विस्तार

    पहले गोल्ड लोन का दबदबा दक्षिण भारत में था, लेकिन अब उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे उत्तर और पश्चिम राज्यों में भी इसकी तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। इस सेगमेंट में अब अलग-अलग तरह के ग्राहक जुड़ रहे हैं। रिपोर्ट में बताया गया कि आधे से ज्यादा लोन प्राइम और उससे ऊपर की कैटेगरी के ग्राहकों द्वारा लिए जा रहे हैं, जिससे गोल्ड लोन मुख्यधारा का क्रेडिट विकल्प बनता जा रहा है।

    मांग में प्रवृत्ति और नॉन-मेट्रो क्षेत्र

    त्योहारों और जीएसटी से जुड़े असर के बावजूद क्रेडिट सप्लाई में केवल मौसमी नरमी देखी गई है, न कि स्थायी गिरावट। खासकर अर्ध-शहरी और ग्रामीण इलाकों में मांग मजबूत बनी हुई है। नॉन-मेट्रो क्षेत्रों का कुल उधारकर्ताओं में हिस्सा बढ़कर 54 प्रतिशत हो गया है, जो पिछले साल की तुलना में 3 प्रतिशत ज्यादा है। वहीं, पहली बार लोन लेने वाले ग्राहकों की हिस्सेदारी 15 प्रतिशत तक बढ़ गई है।

    ऑटो लोन सेगमेंट में स्थिरता

    रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि ऑटो लोन सेगमेंट में स्थिर ग्रोथ बनी हुई है। मिड-सेगमेंट वाहनों की मजबूत मांग के कारण इस क्षेत्र में संतुलित विकास देखा गया और पिछले साल की तुलना में सप्लाई भी बढ़ी है।

  • PSL में पाकिस्तान क्रिकेट पर कलंक, फखर जमान को बॉल टैंपरिंग पर 2 मैच का बैन

    PSL में पाकिस्तान क्रिकेट पर कलंक, फखर जमान को बॉल टैंपरिंग पर 2 मैच का बैन


    नई दिल्ली पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने पाकिस्तान सुपर लीग (PSL) 2026 में बॉल टैंपरिंग के आरोप में दिग्गज बल्लेबाज Fakhar Zaman को दो मुकाबलों के लिए सस्पेंड कर दिया है। फखर को टूर्नामेंट के आचार संहिता के लेवल 3 के उल्लंघन का दोषी पाया गया।

    घटना का विवरण

    29 मार्च को गद्दाफी स्टेडियम में लाहौर कलंदर्स और कराची किंग्स के बीच मुकाबले में आखिरी ओवर शुरू होने से पहले फखर जमान गेंद को खुरचते नजर आए। मैदान पर मौजूद अंपायर ने गेंद में जानबूझकर बदलाव पाया। इसके चलते लाहौर कलंदर्स पर 5 रनों की पेनाल्टी लगी और पुरानी गेंद बदलकर नई गेंद मैच में शामिल की गई। इस घटना के बाद कराची किंग्स ने आखिरी ओवर में 4 विकेट से जीत दर्ज की।

    नियम और सुनवाई

    फखर पर यह आरोप आर्टिकल 2.14 के तहत लगा, जो गेंद की स्थिति बदलने से संबंधित है। ऑन-फील्ड अंपायर शाहिद सैकत और फैसल खान अफरीदी, टीवी अंपायर आसिफ याकूब और फोर्थ अंपायर तारिक राशिद ने फखर पर आरोप लगाए। फखर ने इन आरोपों से इनकार किया और अपील की, जिसके बाद अनुशासनात्मक सुनवाई हुई।

    लेवल-3 के अपराध के लिए कम से कम एक और अधिकतम दो मुकाबलों तक का बैन लगाया जा सकता है। मैच रेफरी Roshan Mahanama ने सबूतों की समीक्षा करने और फखर की बात सुनने के बाद यह फैसला सुनाया। सुनवाई में लाहौर कलंदर्स के कप्तान शाहीन शाह आफरीदी, टीम डायरेक्टर समीन राणा और मैनेजर फारूक अनवर उपस्थित थे।

    प्रतिबंधित मैच

    फखर जमान 3 अप्रैल को मुल्तान सुल्तांस और 9 अप्रैल को इस्लामाबाद यूनाइटेड के खिलाफ होने वाले मुकाबलों में हिस्सा नहीं ले सकेंगे।

  • इंडिगो का नया CEO, विलियम वॉल्श लेंगे कमान संभालने का जिम्मा

    इंडिगो का नया CEO, विलियम वॉल्श लेंगे कमान संभालने का जिम्मा


    नई दिल्लीइंडिगो की पैरेंट कंपनी InterGlobe Aviation Limited ने मंगलवार को घोषणा की कि विलियम वॉल्श को नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति नियामकीय मंजूरी के अधीन है। इससे पहले इसी महीने पीटर एल्बर्स ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।

    नियुक्ति का समय और पृष्ठभूमि

    वॉल्श, जिन्हें ‘विली’ के नाम से भी जाना जाता है, वर्तमान में International Air Transport Association (IATA) के डायरेक्टर जनरल हैं। उनका कार्यकाल 31 जुलाई 2026 को समाप्त होगा और वह 3 अगस्त 2026 से इंडिगो से जुड़ सकते हैं।

    एयरलाइनिंग अनुभव

    वॉल्श पहले British Airways और International Airlines Group (IAG) के CEO रह चुके हैं। IAG के तहत एयरलिंगस, इबेरिया, लेवल और वुएलिंग जैसी एयरलाइंस आती हैं। उनके पास बड़े पैमाने पर एयरलाइन संचालन का अनुभव और जटिल बाजार स्थितियों को संभालने की क्षमता है।

    इंडिगो का बयान

    इंडिगो के चेयरमैन Vikram Singh Mehta ने कहा कि वॉल्श एयरलाइन संचालन और रणनीतिक नेतृत्व के लिए उपयुक्त हैं। मैनेजिंग डायरेक्टर Rohit Bhatia ने बताया कि कंपनी अब बदलाव और विकास के नए दौर में प्रवेश कर रही है, ऐसे समय में वॉल्श का योगदान अहम रहेगा।

    जिम्मेदारियां और फोकस

    वॉल्श अपने नए पद पर इंडिगो के पूरे ऑपरेशन और रणनीतिक दिशा के लिए जिम्मेदार होंगे। उनका मुख्य फोकस ऑपरेशनल परफॉर्मेंस को मजबूत करना, नेटवर्क और कमर्शियल रणनीति को आगे बढ़ाना और ग्राहकों के अनुभव को बेहतर बनाना रहेगा।

    वॉल्श का बयान

    वॉल्श ने कहा कि एविएशन सेक्टर तेजी से बदल रहा है और इंडिगो इस बदलाव में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार है। उन्होंने उत्कृष्टता, नवाचार और सहयोग की संस्कृति को मजबूत करने का संकल्प जताया।

  • सेवा भाव ही प्राथमिकता: राज्यपाल श्री पटेल ने सिकल सेल और टी.बी. उन्मूलन कार्यक्रम की समीक्षा की

    सेवा भाव ही प्राथमिकता: राज्यपाल श्री पटेल ने सिकल सेल और टी.बी. उन्मूलन कार्यक्रम की समीक्षा की


    भोपाल । भोपाल में राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि दीन-दुखियों की सेवा मानवता की सेवा है और इससे आत्मसंतोष मिलता है। उन्होंने जोर दिया कि मध्यप्रदेश को सिकल सेल और टी.बी. मुक्त बनाने के प्रयासों में सेवा भाव को सर्वोपरि रखना चाहिए।

    राज्यपाल श्री पटेल मंगलवार को लोकभवन में सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन 2047 एवं टी.बी. मुक्त भारत अभियान के तहत लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और आयुष विभाग की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में उपमुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल और आयुष मंत्री श्री इंदर सिंह परमार सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

    श्री पटेल ने सिकल सेल रोगियों को आयुष्मान योजना के तहत दी जाने वाली सुविधाओं और पात्रता की जानकारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने 0 से 40 वर्ष तक के व्यक्तियों की विशेष जांच, जांच शिविरों में आमजन को जानकारी देने और जिलेवार उपचार की समीक्षा पर जोर दिया।

    राज्यपाल ने टी.बी. उन्मूलन कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए स्थानीय जनप्रतिनिधियों से सक्रिय सहयोग की अपील की। विशेषकर जनजातीय क्षेत्रों में टी.बी. रोगियों के पोषण आहार वितरण में जनप्रतिनिधियों की भागीदारी बढ़ाने के निर्देश दिए। नि:क्षय मित्रों की संख्या बढ़ाकर पोषण आहार वितरण को मजबूत करने का भी मार्गदर्शन किया।

    खनन क्षेत्रों में निवासरत और कार्यरत व्यक्तियों की टी.बी. सघन जांच कराने का निर्देश भी राज्यपाल ने दिया। उन्होंने सिकल सेल कार्यक्रम के अंतर्गत जाँच लक्ष्य, जेनेटिक कार्ड वितरण, हाईड्राक्सी यूरिया की उपलब्धता, गर्भवती माताओं और शिशुओं का प्रबंधन, आयुष्मान कार्ड वितरण, दिव्यांगता प्रमाण पत्र वितरण और 125 दिवसीय जागरूकता अभियान की विस्तृत समीक्षा की।

    उपमुख्यमंत्री और लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्ति के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए। आयुष विभाग के प्रमुख सचिव श्री शोभित जैन ने जिलेवार दवा वितरण, घर-घर दवा वितरण, जाँच और अनुसूचित जनजाति बाहुल्य जिलों में विशेष प्रयासों की जानकारी दी।

    राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की संचालक डॉ. सलोनी सिडाना ने राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम की उपलब्धियों, सघन स्क्रीनिंग, 100 दिवसीय नि:क्षय अभियान, नि:क्षय मित्र और पोषण आहार वितरण की जानकारी साझा की। राज्यपाल के निर्देशानुसार अनुसूचित जनजाति छात्रावासों में विद्यार्थियों की टी.बी. जाँच, परामर्श और उपचार की प्रक्रिया भी साझा की गई।

    बैठक में जनजातीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष श्री दीपक खांडेकर, लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण के अपर मुख्य सचिव श्री अशोक कुमार बर्णवाल, राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, जनजातीय प्रकोष्ठ की सचिव श्रीमती मीनाक्षी सिंह, लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण एवं आयुष विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और लोकभवन के अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

  • पीएमएवाई-जी योजना: 3 करोड़ से ज्यादा ग्रामीण घरों का निर्माण पूरा

    पीएमएवाई-जी योजना: 3 करोड़ से ज्यादा ग्रामीण घरों का निर्माण पूरा


    नई दिल्ली केंद्र सरकार ने मंगलवार को बताया कि Pradhan Mantri Awas Yojana-Gramin (PMAY-G) के तहत अब तक लगभग 3 करोड़ ग्रामीण घरों का निर्माण पूरा हो चुका है। योजना के पहले और दूसरे चरण में कुल 4.15 करोड़ घरों का लक्ष्य रखा गया था, जिसमें से 3.90  करोड़ घर स्वीकृत किए गए और 2.99 करोड़ घर बनकर तैयार हो चुके हैं।

    वित्तीय सहायता और लक्ष्य

    सरकार के अनुसार, इस योजना में घरों के निर्माण और लाभार्थियों को समय पर सहायता देने के लिए अब तक कुल 4,03,886 करोड़ रुपए जारी किए जा चुके हैं। योजना का अंतिम लक्ष्य 2029 तक कुल 4.95 करोड़ घर बनाना है।

    लाभार्थी-आधारित निर्माण

    पीएमएवाई-जी लाभार्थी-आधारित है, यानी परिवार खुद अपने घर का निर्माण करते हैं और वित्तीय सहायता सीधे उनके बैंक खाते में जाती है। योजना में घरों की जियो-टैगिंग की जाती है, जिसमें समय और तारीख के साथ फोटो अपलोड की जाती है। इससे रियल-टाइम निगरानी संभव होती है और यह सुनिश्चित होता है कि घर तय मानकों के अनुसार बन रहे हैं।

    एआई और तकनीक से बढ़ी पारदर्शिता

    योजना में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित निगरानी टूल्स का इस्तेमाल किया जा रहा है। AI मॉडल घरों की दीवार, छत, दरवाजे और खिड़कियों जैसी चीजों की पहचान कर सही तस्वीर को मंजूरी के लिए चुनते हैं। इससे केवल पूरी तरह तैयार घरों को ही पूर्ण माना जाता है।
    लाभार्थियों की पहचान आधार आधारित-एआई फेस ऑथेंटिकेशन के जरिए होती है, जिसमें आंख झपकने और मूवमेंट डिटेक्शन जैसी तकनीकें भी शामिल हैं। इससे सुनिश्चित होता है कि केवल योग्य लोग ही योजना का लाभ प्राप्त करें।

    अन्य योजनाओं के साथ समन्वय

    पीएमएवाई-जी को स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण, जल जीवन मिशन और पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना जैसी अन्य योजनाओं के साथ जोड़ा गया है, ताकि लाभार्थियों को ज्यादा सुविधाएं मिल सकें।

    लगातार प्रगति

    पिछले 10 वर्षों में पीएमएवाई-जी ने लगातार अच्छा प्रदर्शन किया है। हर साल बड़ी संख्या में घरों का निर्माण पूरा हुआ है, जो इसकी स्थिर प्रगति को दर्शाता है। AI और मशीन लर्निंग तकनीकों के इस्तेमाल से निगरानी और ज्यादा सटीक हो गई है, जिससे फर्जीवाड़े की संभावना कम हुई है।