Blog

  • अमित शाह ने सीमा सुरक्षा पर जवानों से की चर्चा, बंगाल में BSF के लिए जमीन उपलब्ध कराने का दावा किया

    अमित शाह ने सीमा सुरक्षा पर जवानों से की चर्चा, बंगाल में BSF के लिए जमीन उपलब्ध कराने का दावा किया


    नई दिल्ली । 
    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी पहुंचे, जहां उन्होंने दो दिवसीय दौरे के दौरान सीमा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सुरक्षा बलों के अधिकारियों और जवानों से चर्चा की। बागडोगरा एयरपोर्ट पहुंचने के बाद उनका स्वागत राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने किया। इसके बाद अमित शाह एसएसबी कैंप पहुंचे और जवानों से मुलाकात की।

    एसएसबी कैंप में गृह मंत्री ने सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था, ऑपरेशनल तैयारियों और बॉर्डर मैनेजमेंट से संबंधित विभिन्न विषयों की जानकारी ली। उन्होंने सीमा क्षेत्रों में तैनात जवानों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि देश की सीमाओं की सुरक्षा में सुरक्षा बलों का योगदान महत्वपूर्ण है। उन्होंने जवानों के साथ संवाद करते हुए सीमा पर आने वाली चुनौतियों और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया।

    इसी दौरान अमित शाह ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भी राजनीतिक निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब वह पहले गृह मंत्री के तौर पर जिम्मेदारी संभाल रहे थे, तब ममता बनर्जी को सशस्त्र सीमा बल के कार्यक्रमों में आमंत्रित किया जाता था, लेकिन वह इन कार्यक्रमों में शामिल नहीं हुईं। शाह ने सुरक्षा बलों के साथ राज्य सरकार के समन्वय को महत्वपूर्ण बताते हुए अपनी बात रखी।

    अमित शाह ने पश्चिम बंगाल में सीमा सुरक्षा के लिए जमीन उपलब्ध कराने के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने दावा किया कि राज्य में सीमा सुरक्षा बल के लिए 1,129 एकड़ जमीन उपलब्ध कराई गई है। उनके मुताबिक, सीमा सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए 29 एकड़ अतिरिक्त जमीन भी जल्द उपलब्ध कराई जाएगी।

    गृह मंत्री ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अंतरराष्ट्रीय सीमा के संवेदनशील हिस्सों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और बाड़ लगाने की दिशा में लगातार काम करना चाहती थी, लेकिन राज्य स्तर पर जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण कुछ स्थानों पर काम प्रभावित हुआ। उन्होंने मौजूदा सरकार द्वारा जमीन उपलब्ध कराने को सीमा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम बताया।

    अमित शाह के सिलीगुड़ी दौरे का राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर महत्व माना जा रहा है। उत्तर बंगाल का यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय सीमाओं और रणनीतिक दृष्टि से संवेदनशील इलाकों के नजदीक है। ऐसे में गृह मंत्री के दौरे के दौरान सीमा प्रबंधन, घुसपैठ और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े विषयों पर चर्चा होना महत्वपूर्ण रहा।

    दौरे के दौरान अमित शाह सिलीगुड़ी के कावाखाली मैदान में आयोजित कार्यक्रम में भी शामिल होंगे। यहां वह आपराधिक प्रक्रिया से संबंधित प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे। इसके बाद उनकी पार्टी की बैठक में शामिल होने की भी योजना है। शुक्रवार रात उनके सुकना स्थित एक होटल में ठहरने का कार्यक्रम है।

    शनिवार को गृह मंत्री पहाड़ी जिलों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर बैठक करेंगे। इसके बाद उनका दिल्ली लौटने का कार्यक्रम है। उनके दौरे में सुरक्षा व्यवस्था के साथ उत्तर बंगाल के पहाड़ी क्षेत्रों से जुड़े विषयों को भी प्रमुखता मिलने की संभावना है।

    पश्चिम बंगाल में सीमा सुरक्षा और घुसपैठ लंबे समय से राजनीतिक बहस के प्रमुख मुद्दे रहे हैं। अमित शाह के ताजा दौरे में इन विषयों के साथ राज्य सरकार और केंद्र के बीच समन्वय का मुद्दा भी सामने आया। सिलीगुड़ी में उनकी गतिविधियों के बाद आने वाले समय में सीमा सुरक्षा और उत्तर बंगाल से जुड़े राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा और तेज होने की संभावना है।

  • पहली बार यूपी में नेताओं को दी गई बुलेट प्रूफ जैकेट, 11 मंत्रियों समेत 52 नाम शामिल; जानिए किसे मिली कौन सी सुरक्षा

    पहली बार यूपी में नेताओं को दी गई बुलेट प्रूफ जैकेट, 11 मंत्रियों समेत 52 नाम शामिल; जानिए किसे मिली कौन सी सुरक्षा


    उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। योगी सरकार ने समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती समेत 52 नेताओं को बुलेट प्रूफ जैकेट उपलब्ध कराई है। खास बात यह है कि उत्तर प्रदेश में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में राजनीतिक नेताओं को इस तरह की सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा बनाया गया है। सूची में सत्ता पक्ष के नेताओं के साथ विपक्ष के प्रमुख चेहरे और अलग-अलग दलों से जुड़े कई नेता भी शामिल हैं।

    जानकारी के मुताबिक सुरक्षा मुख्यालय की ओर से इन बुलेट प्रूफ जैकेट की खरीद की गई है। एक जैकेट की कीमत करीब डेढ़ लाख रुपये बताई जा रही है। पहले चरण में आठ नेताओं को जैकेट दी गई थी जबकि दूसरे चरण में 44 और नेताओं को यह सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराया गया है। इस तरह कुल 52 नेता अब बुलेट प्रूफ जैकेट पाने वालों की सूची में शामिल हो गए हैं। इनमें प्रदेश सरकार के 11 कैबिनेट मंत्री भी बताए जा रहे हैं।

    जिन प्रमुख नामों को जैकेट दी गई है उनमें मंत्री संजय निषाद नंद गोपाल गुप्ता नंदी ओम प्रकाश राजभर और अपर्णा यादव शामिल हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के चर्चित भाजपा नेताओं संगीत सोम और सुरेश राणा का नाम भी सूची में बताया गया है। हालांकि सरकार ने आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट नहीं किया है कि किन विशेष परिस्थितियों को देखते हुए नेताओं को बुलेट प्रूफ जैकेट देने का फैसला किया गया। सुरक्षा मुख्यालय के एक अधिकारी के मुताबिक पहले बुलेट प्रूफ जैकेट सुरक्षा मानकों में शामिल नहीं थी लेकिन अब इसे सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा बनाया गया है।

    इस फैसले को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सुरक्षा तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। प्रदेश में कई नेताओं को पहले से ही अलग-अलग श्रेणियों की सुरक्षा उपलब्ध है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश में कुल 98 नेताओं और अन्य महत्वपूर्ण लोगों को विभिन्न सुरक्षा श्रेणियां मिली हुई हैं। इनमें सबसे अधिक लोगों को Y श्रेणी की सुरक्षा हासिल है जबकि कुछ लोगों को Y प्लस और एस्कॉर्ट के साथ अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान की गई है।

    राज्य की सबसे ऊंची सुरक्षा श्रेणियों में शामिल Z प्लस सुरक्षा पाने वालों में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अलावा अखिलेश यादव और मायावती भी शामिल बताए गए हैं। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पूर्व सांसद मुरली मनोहर जोशी और विनय कटियार समेत कई अन्य प्रमुख नेताओं को भी इस श्रेणी में सुरक्षा दी गई है। भाजपा के वरिष्ठ नेता सुरेश राणा उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य पूर्व उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा और हाईकोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश का नाम भी Z प्लस सुरक्षा सूची में बताया गया है।

    वहीं उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और बसपा नेता सतीश चंद्र मिश्रा को Z श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई है। भाजपा के पूर्व विधायक संगीत सोम पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह और प्रदेश सरकार के मंत्री नंद गोपाल नंदी समेत कई नेताओं को भी इसी स्तर की सुरक्षा हासिल है। दूसरी ओर ओम प्रकाश राजभर बेबी रानी मौर्य लक्ष्मी नारायण चौधरी और बलदेव सिंह औलख समेत कई नेताओं को Y प्लस श्रेणी की सुरक्षा दी गई है।

    मंत्री संजय निषाद को Y श्रेणी की सुरक्षा एस्कॉर्ट के साथ मिली हुई है। उनके अलावा कई सांसद विधायक पूर्व राज्यपाल और अन्य राजनीतिक हस्तियों को भी अलग-अलग श्रेणियों में सुरक्षा उपलब्ध कराई गई है। बुलेट प्रूफ जैकेट के मामले में मंत्री संजय निषाद ने बताया कि उन्हें अभी इसे पहनने का प्रशिक्षण नहीं मिला है।

    कुल मिलाकर चुनावी वर्ष से पहले उत्तर प्रदेश में नेताओं की सुरक्षा को लेकर सरकार की तैयारियां तेज होती दिखाई दे रही हैं। हालांकि बुलेट प्रूफ जैकेट बांटने के फैसले की विस्तृत वजह सरकार की ओर से सार्वजनिक नहीं की गई है। ऐसे में यह कदम सुरक्षा समीक्षा का हिस्सा है या चुनाव से पहले संभावित खतरे को देखते हुए एहतियाती व्यवस्था इसका स्पष्ट जवाब आने वाले समय में ही सामने आएगा।

  • इंडिगो वेबसाइट डाउन: टिकट बुकिंग और वेब चेक-इन प्रभावित, एक सप्ताह में दूसरी बार डिजिटल सेवाओं में आई परेशानी

    इंडिगो वेबसाइट डाउन: टिकट बुकिंग और वेब चेक-इन प्रभावित, एक सप्ताह में दूसरी बार डिजिटल सेवाओं में आई परेशानी

    नई दिल्ली । देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो की वेबसाइट और कुछ ऑनलाइन सेवाओं में शुक्रवार को एक बार फिर तकनीकी समस्या सामने आई। वेबसाइट के काम नहीं करने के कारण यात्रियों को टिकट बुक करने, वेब चेक-इन पूरा करने और अन्य डिजिटल सुविधाओं का इस्तेमाल करने में परेशानी हुई। कुछ यात्रियों ने मोबाइल एप में लॉगिन से जुड़ी समस्या की भी जानकारी दी। खास बात यह है कि एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार एयरलाइन की ऑनलाइन सेवाएं प्रभावित हुई हैं।

    तकनीकी गड़बड़ी के दौरान कई यात्रियों के लिए बुकिंग प्रक्रिया पूरी करना मुश्किल रहा। कुछ लोगों को फ्लाइट टिकट बुक करते समय परेशानी हुई, जबकि कुछ यात्रियों ने वेब चेक-इन नहीं हो पाने की शिकायत की। इसके अलावा भुगतान प्रक्रिया पूरी होने के बाद पेमेंट कन्फर्मेशन नहीं मिलने की समस्या भी सामने आई। यात्रा के करीब पहुंच चुके यात्रियों के लिए ऑनलाइन चेक-इन में बाधा विशेष चिंता का विषय बनी।

    इंडिगो ने अपनी सेवा व्यवस्था में आ रही तकनीकी परेशानी को स्वीकार करते हुए बताया कि ऑनलाइन सेवाओं में रुक-रुककर व्यवधान आ रहा है। एयरलाइन की तकनीकी टीमें समस्या को दूर करने में जुटी हैं। कंपनी ने यात्रियों को सलाह दी कि जिन लोगों को तत्काल यात्रा संबंधी सहायता की जरूरत है, वे ग्राहक सहायता केंद्र से संपर्क करें।

    एयरलाइन ने उन यात्रियों को कुछ समय बाद दोबारा डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल करने की सलाह दी, जिनकी यात्रा तत्काल नहीं है। यात्रियों से कहा गया कि वे वेबसाइट या मोबाइल एप पर बाद में फिर से प्रयास करें। इस दौरान सोशल मीडिया पर कई उपयोगकर्ताओं ने ऑनलाइन सेवाओं में आ रही दिक्कतों को लेकर अपनी शिकायतें दर्ज कराईं।

    यह समस्या उस तकनीकी व्यवधान के कुछ ही दिन बाद सामने आई है, जिसका असर इंडिगो की मुख्य आरक्षण व्यवस्था पर पड़ा था। आरक्षण प्रणाली एयरलाइन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि टिकट बुकिंग और यात्रियों से जुड़ी कई ऑनलाइन प्रक्रियाएं इसी व्यवस्था पर निर्भर करती हैं। सिस्टम में तकनीकी बाधा आने पर एक साथ बड़ी संख्या में यात्रियों की सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।

    इंडिगो की तकनीकी टीमें अपने तकनीकी सहयोगी के साथ मिलकर समस्या को प्राथमिकता के आधार पर ठीक करने में लगी हुई हैं। एयरलाइन की डिजिटल सेवाओं पर यात्रियों की निर्भरता काफी अधिक है। टिकट खरीदने से लेकर बुकिंग प्रबंधन और वेब चेक-इन तक कई प्रक्रियाएं अब ऑनलाइन पूरी की जाती हैं। ऐसे में डिजिटल सिस्टम में व्यवधान होने पर यात्रियों को वैकल्पिक सहायता की जरूरत पड़ती है।

    इंडिगो घरेलू विमानन बाजार में सबसे बड़ी हिस्सेदारी वाली एयरलाइन है। जुलाई में घरेलू बाजार में कंपनी की हिस्सेदारी करीब 67 प्रतिशत बताई गई थी। एयरलाइन का नेटवर्क देश के कई शहरों में फैला हुआ है और बड़ी संख्या में यात्री रोजाना उसकी उड़ानों से यात्रा करते हैं। इसलिए डिजिटल सिस्टम में आने वाली तकनीकी समस्या का प्रभाव व्यापक हो सकता है।

    लगातार दूसरी बार ऑनलाइन सेवाओं में रुकावट सामने आने से एयरलाइन की डिजिटल व्यवस्था की स्थिरता भी चर्चा में आ गई है। हालांकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार कंपनी ने समस्या को ठीक करने के लिए तकनीकी स्तर पर काम शुरू कर दिया है। यात्रियों के लिए फिलहाल सलाह यही है कि तत्काल सहायता की आवश्यकता होने पर ग्राहक सहायता केंद्र से संपर्क करें और अन्य यात्री कुछ समय बाद वेबसाइट या मोबाइल एप के माध्यम से अपनी प्रक्रिया दोबारा पूरी करने का प्रयास करें।

  • कटनी में सीएसपी नेहा पच्चीसिया पर मुख्यमंत्री मोहन यादव का बड़ा एक्शन, निलंबन के निर्देश और कार्यालय सील

    कटनी में सीएसपी नेहा पच्चीसिया पर मुख्यमंत्री मोहन यादव का बड़ा एक्शन, निलंबन के निर्देश और कार्यालय सील

    मध्य प्रदेश:के कटनी में पुलिस प्रशासन से जुड़े गंभीर आरोपों के मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कड़ा रुख अपनाते हुए सीएसपी नेहा पच्चीसिया को तत्काल निलंबित करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के मुख्य सचिव को इस संबंध में कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।

    यह मामला कटनी के कुठला थाना क्षेत्र में दर्ज हत्या के एक प्रकरण से जुड़ा है। आरोप है कि हत्या के मामले में नामजद आरोपी रमेश लोधी पर दबाव बनाकर उसकी कंहवारा स्थित जमीन को कथित तौर पर वास्तविक मूल्य से काफी कम कीमत पर दूसरे व्यक्ति के नाम हस्तांतरित कराया गया। इसी प्रकरण में सीएसपी नेहा पच्चीसिया की भूमिका को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं।

    जांच से जुड़े तथ्यों के अनुसार, संबंधित जमीन का गाइडलाइन मूल्य 82.86 लाख रुपये बताया गया है, जबकि उसे कथित रूप से 18.20 लाख रुपये में मारूफ अहमद हनफी के नाम हस्तांतरित कराया गया। मामले में मारूफ अहमद हनफी को कथित फ्रंटमैन के तौर पर बताया गया है। जमीन के लेनदेन को लेकर पुलिस प्रशासन के स्तर पर भी जांच की जा रही है।

    आरोपों की गंभीरता को देखते हुए कटनी में सीएसपी कार्यालय को भी सील कर दिया गया है। यह कार्रवाई पुलिस मुख्यालय से मिले निर्देशों के बाद प्रशासनिक टीम ने की। कार्यालय सील करने का उद्देश्य मामले से संबंधित केस डायरी, सरकारी रिकॉर्ड और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों को सुरक्षित रखना बताया गया है, ताकि जांच के दौरान किसी प्रकार की छेड़छाड़ या साक्ष्यों पर प्रभाव की आशंका न रहे।

    मामले में कुठला थाने में एफआईआर संख्या 0738/2026 दर्ज की गई है। सीएसपी नेहा पच्चीसिया के अलावा क्षितिज राज बारापत्रे और मारूफ अहमद हनफी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। दर्ज धाराओं में 61, 198, 199(बी), 308(7) और 318(4) शामिल हैं।

    जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आने का दावा किया गया है कि जमीन के कथित सौदे में सीएसपी से करीबी बताए जा रहे क्षितिज राज बारापत्रे के खातों से धनराशि की फंडिंग की गई थी। इस पहलू की भी जांच की जा रही है, ताकि पूरे लेनदेन की प्रकृति और इसमें शामिल लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सके।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया है कि कानून-व्यवस्था और पुलिस प्रशासन से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही, दबाव या पद के कथित दुरुपयोग को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिया है कि पूरे मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से की जाए और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर वैधानिक कार्रवाई की जाए।

    निलंबन की कार्रवाई के साथ गृह विभाग की ओर से विभागीय जांच की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है। इसके अलावा मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी जांच को भी तेज किए जाने की बात सामने आई है। अब जांच के दौरान जमीन सौदे, कथित वित्तीय लेनदेन, पुलिस पद के संभावित दुरुपयोग और संबंधित दस्तावेजों की भूमिका की पड़ताल की जाएगी।

    सरकार की इस कार्रवाई को पुलिस प्रशासन में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि विस्तृत जांच और संबंधित कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।

  • तलाक की सुनवाई के बाद रची खौफनाक साजिश 3 हथियार खरीदे पत्नी की रेकी की और 30 मिनट में उजाड़ दिया पूरा परिवार

    तलाक की सुनवाई के बाद रची खौफनाक साजिश 3 हथियार खरीदे पत्नी की रेकी की और 30 मिनट में उजाड़ दिया पूरा परिवार


    उत्तर प्रदेश। लखनऊ में एक बैंक अधिकारी द्वारा अपनी पत्नी और बहन की हत्या के बाद खुदकुशी किए जाने के मामले ने सनसनी फैला दी है। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि पति-पत्नी के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था और दोनों के बीच तलाक की कानूनी प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी थी। पुलिस सूत्रों के मुताबिक 18 अगस्त को फैमिली कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान गुजारा भत्ते की रकम को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ था। इसके बाद आरोपी मानस बाजपेयी ने कथित तौर पर पत्नी और अपनी बहन की हत्या करने के साथ खुदकुशी की योजना बनाई। हालांकि इस मामले में सामने आई कई बातें अभी पुलिस जांच का हिस्सा हैं और अंतिम निष्कर्ष जांच तथा साक्ष्यों के आधार पर ही सामने आएगा।

    बताया जा रहा है कि मानस और दिव्या की करीब नौ साल पहले लव मैरिज हुई थी। शादी के शुरुआती वर्षों में दोनों का रिश्ता सामान्य रहा लेकिन बाद में पारिवारिक विवाद बढ़ने लगे। सबसे बड़ा विवाद मानस की बहन शीबा के साथ रहने को लेकर बताया जा रहा है। परिवार के मुताबिक दिव्या अपनी ननद के साथ नहीं रहना चाहती थीं जबकि मानस अपनी बहन को अकेला छोड़ने के लिए तैयार नहीं था। इसी बात को लेकर पति-पत्नी के बीच दूरी बढ़ती गई और आखिरकार दोनों अलग रहने लगे।

    पुलिस जांच के मुताबिक वर्ष 2025 में विवाद दोबारा गहराने के बाद दिव्या ने घर छोड़ दिया था। इसके बाद उन्होंने तलाक के लिए परिवार न्यायालय का रुख किया। 18 अगस्त की सुनवाई के दौरान कथित तौर पर आर्थिक समझौते और एलिमनी को लेकर भी चर्चा हुई। पुलिस को शक है कि इसी घटनाक्रम के बाद मानस ने बेहद खतरनाक कदम उठाने का फैसला किया। जांच में यह बात भी सामने आई है कि उसने दो दिन के भीतर तीन हथियारों का इंतजाम किया। इनमें दो पिस्टल और एक तमंचा शामिल बताए जा रहे हैं। पुलिस ने हथियार बरामद कर लिए हैं और अब उनके स्रोत की जांच की जा रही है।

    20 अगस्त को मानस कथित तौर पर दिव्या के ऑफिस के बाहर पहुंचा। दिव्या एक बैंक में मैनेजर के तौर पर काम कर रही थीं। पुलिस के अनुसार मानस ने उन्हें इशारे से बाहर बुलाया और बातचीत के दौरान दोनों के बीच विवाद बढ़ गया। आरोप है कि उसने पहले पत्नी के साथ मारपीट की और फिर गोली चला दी। बैंक के गार्ड और कर्मचारी मदद के लिए दौड़े लेकिन तब तक दिव्या गंभीर रूप से घायल हो चुकी थीं। घटना के बाद मानस वहां से फरार हो गया और अपने घर पहुंचा।

    पुलिस के अनुसार घर पहुंचने के बाद उसने अपनी बहन शीबा को गोली मार दी और फिर खुद को भी गोली मारकर जान दे दी। घटना से पहले उसके वॉट्सऐप स्टेटस को लेकर भी जांच की जा रही है। बताया गया है कि स्टेटस में उसने पत्नी पर धोखा देने का आरोप लगाया था और परिवार के कुछ अन्य सदस्यों का भी जिक्र किया था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि स्टेटस में किए गए दावों की वास्तविकता क्या थी और वारदात के पीछे उसकी मानसिक स्थिति तथा पारिवारिक विवाद की क्या भूमिका रही।

    दिव्या की बहन और यूट्यूबर प्रज्ञा मिश्रा ने भी मानस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि उनकी बहन लंबे समय से परेशान थी और मानस कथित तौर पर उसका पीछा भी करता था। प्रज्ञा ने सोशल मीडिया पर परिवार से जुड़े कई आरोप लगाए हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस इन आरोपों की भी जांच कर रही है।

    यह घटना एक ऐसे रिश्ते का भयावह अंत है जिसकी शुरुआत प्रेम विवाह से हुई थी। पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज हथियारों की बरामदगी वॉट्सऐप स्टेटस और परिवार के सदस्यों के बयानों के आधार पर पूरी घटना की कड़ियां जोड़ रही है। फिलहाल यह स्पष्ट है कि लंबे समय से चले आ रहे पारिवारिक विवाद ने बेहद गंभीर रूप ले लिया और कुछ ही समय में तीन जिंदगियां खत्म हो गईं। मामले की जांच पूरी होने के बाद ही हत्या की साजिश और उसके पीछे की वास्तविक वजहों की पूरी तस्वीर साफ हो सकेगी।

  • रात में सोए अफसर की सुबह नहीं खुली आंखें, कमरे में मिला शव; न सुसाइड नोट मिला न चोट के निशान

    रात में सोए अफसर की सुबह नहीं खुली आंखें, कमरे में मिला शव; न सुसाइड नोट मिला न चोट के निशान


    कटनी । मध्य प्रदेश के कटनी जिले में आयकर विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। मूलरूप से उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के रहने वाले मानवेंद्र प्रताप सिंह कटनी में आयकर विभाग में तैनात थे और विभागीय गेस्ट हाउस में रह रहे थे। गुरुवार रात वह अपने कमरे में सोने गए थे लेकिन शुक्रवार सुबह काफी देर तक कमरे से कोई हलचल नहीं हुई। जब सरकारी ड्राइवर उन्हें लेने पहुंचा और कई बार दरवाजा खटखटाने के बावजूद भीतर से कोई जवाब नहीं मिला तो गेस्ट हाउस के कर्मचारियों को अनहोनी की आशंका हुई। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और कमरे का दरवाजा तोड़कर अंदर दाखिल हुई। वहां अधिकारी बिस्तर पर अचेत अवस्था में मिले।

    घटना माधवनगर थाना क्षेत्र के बरगवां इलाके की बताई जा रही है। पुलिस ने मृतक की पहचान मानवेंद्र प्रताप सिंह के रूप में की है। वह बाराबंकी के निलालडिया असंदा क्षेत्र के रहने वाले विजेंद्र प्रताप सिंह के बेटे थे। शुरुआती जांच में कमरे के भीतर किसी तरह के संघर्ष या हिंसा के स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं। पुलिस को न तो कोई सुसाइड नोट मिला और न ही अधिकारी के शरीर पर चोट के निशान पाए गए हैं। यही वजह है कि फिलहाल मौत की परिस्थितियों को लेकर कई सवाल बने हुए हैं।

    बताया गया है कि शुक्रवार सुबह सरकारी ड्राइवर मानवेंद्र प्रताप सिंह के कमरे पर कार की चाबी लेने पहुंचा था। उसने दरवाजे की घंटी बजाई और कई बार दस्तक दी लेकिन अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। काफी देर तक कमरे से आवाज या किसी प्रकार की हलचल नहीं आने पर गेस्ट हाउस के कर्मचारियों को शक हुआ। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस टीम के पहुंचने के बाद कमरे का दरवाजा तोड़ा गया और अधिकारी को बिस्तर पर पड़ा देखा गया। इसके बाद आवश्यक कार्रवाई शुरू की गई।

    प्रारंभिक स्तर पर अधिकारी की मौत को हार्ट अटैक से जोड़कर देखा जा रहा है लेकिन पुलिस ने अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। मौत की वास्तविक वजह पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि अधिकारी की तबीयत पहले से खराब थी या रात के दौरान अचानक कोई स्वास्थ्य संबंधी समस्या हुई। कमरे के अंदर किसी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश या किसी आपराधिक घटना के संकेत मिले हैं या नहीं इसकी भी जांच की जा रही है।

    मानवेंद्र प्रताप सिंह की कटनी में आयकर विभाग के कार्यालय में पोस्टिंग वर्ष 2024-25 के दौरान हुई थी। पोस्टिंग के बाद से वह बरगवां स्थित विभागीय गेस्ट हाउस में ही रह रहे थे। उनका परिवार बाराबंकी में रहता था और नौकरी के कारण वह कटनी में अकेले रह रहे थे। परिवार को घटना की जानकारी दे दी गई है और उनके कटनी पहुंचने का इंतजार किया जा रहा है।

    माधवनगर थाना प्रभारी शैलेंद्र सिंह यादव के मुताबिक मामले की जांच जारी है। परिवार के सदस्यों के पहुंचने के बाद पोस्टमॉर्टम कराया जाएगा और रिपोर्ट मिलने के बाद ही मौत की सही वजह सामने आएगी। फिलहाल पुलिस ने घटना को लेकर किसी निष्कर्ष की पुष्टि नहीं की है। ऐसे में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और जांच के निष्कर्ष इस मामले में सबसे अहम होंगे। बंद कमरे में अधिकारी की मौत ने विभागीय गेस्ट हाउस में भी चिंता बढ़ा दी है और पुलिस हर पहलू से मामले की जांच कर रही है।

  • तेलंगाना सीएम रेवंत रेड्डी का अमेरिकी दौरा रद्द, केंद्र से मंजूरी नहीं मिलने का आरोप लगाकर सरकार पर साधा निशाना

    तेलंगाना सीएम रेवंत रेड्डी का अमेरिकी दौरा रद्द, केंद्र से मंजूरी नहीं मिलने का आरोप लगाकर सरकार पर साधा निशाना

    नई दिल्ली । तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी का प्रस्तावित अमेरिका दौरा रद्द हो गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से बताया गया है कि केंद्र सरकार से आवश्यक मंजूरी नहीं मिलने के कारण मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल की अमेरिका यात्रा आगे नहीं बढ़ सकी। रेवंत रेड्डी फिलहाल लंदन के दौरे पर हैं और अमेरिका की यात्रा के बजाय लंदन से सीधे हैदराबाद लौट सकते हैं।

    मुख्यमंत्री का विदेश दौरा राज्य में निवेश, शिक्षा और विभिन्न संस्थानों के साथ संभावित सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा था। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार लंदन के बाद रेवंत रेड्डी को 24 अगस्त को अमेरिका पहुंचना था। वहां कई प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों और अन्य प्रतिनिधियों के साथ बैठकें प्रस्तावित थीं। दौरे में तेलंगाना राइजिंग टीम के अधिकारी भी शामिल थे।

    जानकारी के मुताबिक, रेवंत रेड्डी 20 अगस्त को लंदन पहुंचे थे। लंदन प्रवास के दौरान उनके ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी, कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी और लंदन बिजनेस स्कूल जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में जाने का कार्यक्रम था। इन मुलाकातों के जरिए शिक्षा, कौशल, निवेश और राज्य के विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर बातचीत की योजना बनाई गई थी।

    लंदन के बाद अमेरिका में भी मुख्यमंत्री के कई कार्यक्रम निर्धारित थे। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार हार्वर्ड यूनिवर्सिटी और मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी एमआईटी में जाने की योजना थी। इसके अलावा बोस्टन में 25 अगस्त को एक टीम के साथ बातचीत और 26 अगस्त को न्यूयॉर्क में एक कार्यक्रम में शामिल होने का कार्यक्रम प्रस्तावित था।

    मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, विदेश मंत्रालय से आवश्यक अनुमति नहीं मिलने के कारण अमेरिका की यात्रा रद्द करनी पड़ी। कार्यालय ने कहा कि रेवंत रेड्डी के नेतृत्व में तेलंगाना राइजिंग प्रतिनिधिमंडल को अमेरिका जाने की मंजूरी नहीं मिली। इसके बाद यात्रा कार्यक्रम में बदलाव किया गया है।

    अमेरिका दौरे के दौरान जिन संस्थानों और प्रतिनिधियों के साथ बैठकें प्रस्तावित थीं, उनमें से कुछ कार्यक्रमों को पूरी तरह समाप्त करने के बजाय आगे की तारीखों के लिए निर्धारित करने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य सरकार की ओर से संबंधित अधिकारियों को इस संबंध में कार्यक्रमों को पुनर्निर्धारित करने के लिए कहा गया है।

    मुख्यमंत्री के इस दौरे की पृष्ठभूमि में तेलंगाना में निवेश आकर्षित करने और राज्य के विकास से जुड़े अंतरराष्ट्रीय संपर्कों को मजबूत करने की कोशिश भी देखी जा रही थी। प्रस्तावित अमेरिकी यात्रा के दौरान उद्योग, शिक्षा और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोगों के साथ संवाद की संभावना थी।

    रेवंत रेड्डी 19 अगस्त को कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में शामिल होने के लिए दिल्ली में थे। इसके बाद वह 20 अगस्त को लंदन के लिए रवाना हुए। पहले तय कार्यक्रम के अनुसार उनकी विदेश यात्रा के बाद 30 अगस्त को हैदराबाद लौटने की योजना थी। हालांकि अमेरिका दौरा रद्द होने के बाद अब उनकी वापसी की समय-सारणी में बदलाव हो सकता है।

    अमेरिकी यात्रा को लेकर अनुमति नहीं मिलने का मुद्दा केंद्र और तेलंगाना सरकार के बीच राजनीतिक मतभेदों को लेकर भी चर्चा में आ गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने अनुमति नहीं मिलने की बात कही है, जबकि इस घटनाक्रम के बाद राज्य सरकार के आगामी विदेश संपर्क कार्यक्रमों में भी बदलाव की संभावना बनी हुई है।

  • युवा, बेरोजगारी और महंगाई को लेकर कांग्रेस का केंद्र पर हमला, इमरान मसूद और रेणुका चौधरी ने उठाए सवाल हेडलाइन 2:

    युवा, बेरोजगारी और महंगाई को लेकर कांग्रेस का केंद्र पर हमला, इमरान मसूद और रेणुका चौधरी ने उठाए सवाल हेडलाइन 2:


    नई दिल्ली । 
    राष्ट्रगीत, झंडा फहराने और राष्ट्रगान को लेकर राजनीतिक बहस के बीच कांग्रेस ने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा है। कांग्रेस नेताओं ने देशभक्ति से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ युवाओं की बेरोजगारी, बढ़ती महंगाई, टैक्स का बोझ और महंगी होती ईएमआई जैसे विषयों को प्रमुखता से उठाते हुए सरकार से इन पर चर्चा करने की मांग की है।

    कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने राष्ट्रगीत को लेकर बीजेपी पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी को राष्ट्रगीत के मुद्दे पर अचानक इतना जोर देने की जरूरत क्यों महसूस हो रही है। मसूद ने कहा कि देश में जब राष्ट्रगीत गाने को लेकर विरोध और कार्रवाई की स्थिति बनी थी, तब बीजेपी के लोग इस तरह सामने नहीं आए थे।

    उन्होंने आजादी के बाद के राजनीतिक इतिहास का उल्लेख करते हुए बीजेपी पर आरोप लगाया कि उसके लोगों ने लंबे समय तक राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान और झंडा फहराने जैसे विषयों को लेकर वह भूमिका नहीं निभाई, जिसका दावा अब किया जा रहा है। मसूद ने कहा कि देश की जनता शिक्षित है और राजनीतिक दलों के पुराने रुख तथा उनके वर्तमान बयानों के बीच अंतर को समझती है।

    मसूद ने यह भी कहा कि आज सूचना तकनीक के दौर में लोगों के पास पुराने घटनाक्रमों और बयानों को जानने के कई साधन मौजूद हैं। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का जिक्र करते हुए कहा कि किसी भी पुराने तथ्य की जानकारी हासिल की जा सकती है। उनके अनुसार देशभक्ति से जुड़े इतिहास को किसी एक संगठन या विचारधारा तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए।

    कांग्रेस नेता ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन का इतिहास व्यापक रहा है और इसमें अलग-अलग विचारधाराओं तथा समुदायों से जुड़े लोगों ने योगदान दिया था। इसलिए देशभक्ति पर किसी एक संगठन या राजनीतिक विचारधारा का अधिकार नहीं माना जा सकता। उनके इस बयान के जरिए कांग्रेस ने राष्ट्रवाद की मौजूदा राजनीतिक बहस को स्वतंत्रता आंदोलन के व्यापक इतिहास से जोड़ने की कोशिश की।

    वहीं कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने सरकार और बीजेपी नेताओं से जनता से जुड़े वास्तविक मुद्दों पर चर्चा करने की अपील की। उन्होंने रोजगार की स्थिति को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि देश के युवाओं के सामने नौकरियों की चुनौती बनी हुई है। चौधरी ने कहा कि राजनीतिक बहस को उन मुद्दों पर भी केंद्रित किया जाना चाहिए जिनका सीधा असर आम लोगों के जीवन पर पड़ता है।

    रेणुका चौधरी ने बढ़ती महंगाई, टैक्स के बोझ और ईएमआई महंगी होने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि आम लोगों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है और ऐसे समय में सरकार को इन समस्याओं पर जवाब देना चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि रुपये की स्थिति में गिरावट का असर लोगों की आर्थिक परिस्थितियों पर पड़ रहा है।

    कांग्रेस नेताओं के इन बयानों से स्पष्ट है कि पार्टी राष्ट्रगीत और देशभक्ति से जुड़ी बहस के समानांतर आर्थिक और रोजगार संबंधी मुद्दों को राजनीतिक विमर्श के केंद्र में लाना चाहती है। पार्टी का कहना है कि युवाओं के लिए रोजगार, महंगाई से राहत और आम परिवारों पर बढ़ते आर्थिक बोझ जैसे विषयों पर सरकार को जवाब देना चाहिए।

    दूसरी ओर, राष्ट्रगीत और राष्ट्रीय प्रतीकों से जुड़े मुद्दे को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह बहस केवल राष्ट्रगीत की स्वीकार्यता तक सीमित रहने के बजाय देशभक्ति की राजनीतिक व्याख्या और जनता से जुड़े आर्थिक मुद्दों तक भी फैल सकती है।

  • यूपी में मानसून बना मुसीबत कहीं सड़क पर नाव तो कहीं छत पर अंतिम संस्कार, 25 अगस्त तक बारिश का अनुमान

    यूपी में मानसून बना मुसीबत कहीं सड़क पर नाव तो कहीं छत पर अंतिम संस्कार, 25 अगस्त तक बारिश का अनुमान

    उत्तर प्रदेशउत्तर प्रदेश में लगातार हो रही मानसूनी बारिश ने कई जिलों में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। गंगा और घाघरा समेत कई प्रमुख नदियां खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं और प्रदेश के 13 जिलों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं और कई गांवों का संपर्क आसपास के इलाकों से टूटने लगा है। चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का पानी बाजार तक पहुंच गया है जिससे सड़कें जलमग्न हो गई हैं और लोगों को आवागमन के लिए नावों का सहारा लेना पड़ रहा है। बाढ़ की स्थिति को देखते हुए गुप्त गोदावरी की दोनों गुफाओं को पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है।

    बहराइच में भी कई गांवों में पानी भर गया है। हालात का जायजा लेने पहुंचे मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने ट्रैक्टर के जरिए बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और ग्रामीणों से मुलाकात कर उन्हें प्रशासन की ओर से हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया। दूसरी ओर प्रयागराज में गंगा और यमुना का जलस्तर लगातार चिंता बढ़ा रहा है। नदी का पानी रिवर फ्रंट रोड तक पहुंच गया है और कई निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। गंगा का पानी लेटे हुए हनुमान मंदिर कॉरिडोर के आसपास भी पहुंच गया है।

    वाराणसी में भी गंगा का बढ़ता जलस्तर जनजीवन और धार्मिक गतिविधियों पर असर डाल रहा है। विश्वनाथ मंदिर का गंगा द्वार बंद करना पड़ा है। मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट के नियमित शवदाह स्थल पानी में डूब गए हैं। इसके चलते अंतिम संस्कार के लिए वैकल्पिक स्थानों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। हरिश्चंद्र घाट पर गलियों और सीढ़ियों के आसपास अंतिम संस्कार किया गया जबकि मणिकर्णिका घाट पर छत के हिस्से में यह प्रक्रिया करनी पड़ी। दशाश्वमेध घाट की प्रसिद्ध गंगा आरती भी छत से कराई गई। नमो घाट का बड़ा हिस्सा भी जलमग्न हो चुका है।

    प्रयागराज में पिछले कई दिनों से रुक-रुककर बारिश हो रही है। दारागंज करेली और सलोरी जैसे इलाकों में कई घरों में कई फीट तक पानी भरने की सूचना है। जलभराव और बिगड़ते हालात के कारण बड़ी संख्या में छात्रों को हॉस्टल खाली करना पड़ा है। कौशांबी और आसपास के जिलों में भी बारिश का असर देखने को मिला है। फर्रुखाबाद में करीब 30 गांव बाढ़ की चपेट में बताए जा रहे हैं और कई संपर्क मार्गों पर पानी बह रहा है। कुछ गांवों के टापू में बदल जाने के कारण प्रशासन ने राहत और बचाव के लिए नावों तथा मोटर बोट की व्यवस्था की है।

    राज्य के अलग-अलग हिस्सों में नदियों का जलस्तर लगातार निगरानी में है। घाघरा सरयू गंगा शारदा टोंस सोन और मंदाकिनी जैसी नदियां कई स्थानों पर खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं। पिछले 72 घंटों में बारिश से जुड़े हादसों में मकान गिरने के कारण छह लोगों की मौत की भी सूचना है। इनमें मिर्जापुर जौनपुर और अमेठी के मामले शामिल हैं।

    मौसम विभाग ने प्रदेश के बड़े हिस्से में बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया है। हालांकि लखनऊ कानपुर और वाराणसी जैसे कई शहरों में फिलहाल मौसम अपेक्षाकृत साफ है लेकिन बादलों की आवाजाही बनी हुई है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक बंगाल की खाड़ी से आने वाली नम हवाओं के प्रभाव से उत्तर प्रदेश में बारिश का दौर जारी है और 25 अगस्त तक कई इलाकों में रुक-रुककर बारिश होने की संभावना बनी हुई है। ऐसे में नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए आने वाले दिन भी चुनौतीपूर्ण रह सकते हैं और प्रशासन को राहत एवं बचाव कार्यों को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है।

  • E20 पेट्रोल पर सियासी बहस तेज, कांग्रेस ने गन्ने से इथेनॉल उत्पादन और चीनी कीमतों पर उठाए सवाल

    E20 पेट्रोल पर सियासी बहस तेज, कांग्रेस ने गन्ने से इथेनॉल उत्पादन और चीनी कीमतों पर उठाए सवाल


    नई दिल्ली । 
    देश में चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण वाली E20 नीति को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस ने केंद्र सरकार की इथेनॉल नीति पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि गन्ने और अनाज के एक हिस्से का इस्तेमाल इथेनॉल उत्पादन में होने से खाद्य वस्तुओं की उपलब्धता और कीमतों पर असर पड़ रहा है।

    कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने दावा किया कि लोगों को एक तरफ सड़क पर वाहन चलाने के दौरान और दूसरी तरफ रसोई में खाद्य सामग्री खरीदते समय कीमत चुकानी पड़ रही है। उन्होंने E20 नीति की दोबारा समीक्षा करने और उपभोक्ताओं को बिना इथेनॉल वाला पेट्रोल उपलब्ध कराने का विकल्प देने की मांग की है।

    कांग्रेस की ओर से चीनी की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी को लेकर गन्ने के इस्तेमाल का मुद्दा उठाया गया है। पार्टी का दावा है कि लगभग 25 लाख टन चीनी बनाने में इस्तेमाल होने वाला गन्ना इथेनॉल उत्पादन की ओर गया। जयराम रमेश ने इसी संदर्भ में चीनी और अन्य खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी का मुद्दा उठाया।

    उन्होंने दावा किया कि पिछले तीन महीनों में चीनी की कीमत 48 रुपये से बढ़कर 67 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। कांग्रेस ने गुड़, चावल और मक्के के आटे जैसी कुछ अन्य खाद्य वस्तुओं की कीमतों में भी बढ़ोतरी का उल्लेख किया है। हालांकि, अलग-अलग बाजारों और क्षेत्रों में इन वस्तुओं की कीमतों में अंतर हो सकता है।

    E20 पेट्रोल को लेकर कांग्रेस ने वाहनों के माइलेज का मुद्दा भी उठाया है। पार्टी का कहना है कि पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा बढ़ने से कुछ वाहनों में ईंधन दक्षता प्रभावित हो सकती है। खासकर पुराने वाहनों को लेकर भी कांग्रेस ने संभावित तकनीकी समस्याओं की चिंता जताई है।

    कांग्रेस की मांग है कि उपभोक्ताओं को उनकी जरूरत और वाहन की तकनीकी क्षमता के अनुसार बिना इथेनॉल वाला पेट्रोल खरीदने का विकल्प मिलना चाहिए। पार्टी का तर्क है कि ईंधन संबंधी नीतियों में उपभोक्ता हितों और वाहन मालिकों की अलग-अलग जरूरतों को ध्यान में रखना जरूरी है।

    दूसरी ओर, चीनी की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए केंद्र सरकार ने कदम उठाया है। सरकार ने 20 अगस्त को 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी को बिना आयात शुल्क के देश में लाने की मंजूरी दी। इसका उद्देश्य घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखना और कीमतों पर दबाव कम करना है।

    दिल्ली में 21 अगस्त को चीनी की कीमत करीब 65 रुपये प्रति किलोग्राम बताई गई। कीमतों में बढ़ोतरी और सरकार के आयात फैसले के बाद E20 नीति को लेकर राजनीतिक चर्चा और तेज हो गई है। कांग्रेस इसे खाद्य महंगाई और वाहन माइलेज से जोड़ रही है, जबकि सरकार का चीनी आयात का कदम बाजार में आपूर्ति बढ़ाने की दिशा में है।

    इथेनॉल मिश्रण नीति का उद्देश्य पेट्रोल में वैकल्पिक ईंधन की हिस्सेदारी बढ़ाना, आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना और किसानों के लिए गन्ने तथा अन्य फीडस्टॉक से अतिरिक्त बाजार तैयार करना रहा है। हालांकि, खाद्य वस्तुओं की कीमतों और वाहन ईंधन दक्षता पर इसके प्रभाव को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस जारी है।

    आने वाले समय में चीनी की कीमतों, घरेलू आपूर्ति और E20 ईंधन के वास्तविक प्रभाव के आंकड़े इस बहस की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगे। फिलहाल कांग्रेस ने नीति की समीक्षा और उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प देने की मांग को केंद्र में रखा है, जबकि सरकार का ताजा कदम चीनी की उपलब्धता बढ़ाकर बाजार कीमतों को नियंत्रित करने पर केंद्रित है।