Blog

  • फ्रांस से भिड़ंत से पहले स्वीडन को तगड़ा झटका: डिफेंस की दीवार इसाक हिएन टूर्नामेंट से बाहर

    फ्रांस से भिड़ंत से पहले स्वीडन को तगड़ा झटका: डिफेंस की दीवार इसाक हिएन टूर्नामेंट से बाहर


    नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप 2026 के नॉकआउट मुकाबलों से पहले स्वीडन को बड़ा झटका लगा है। टीम के स्टार डिफेंडर इसाक हिएन हैमस्ट्रिंग चोट के कारण पूरे टूर्नामेंट से बाहर हो गए हैं। फ्रांस के खिलाफ होने वाले राउंड ऑफ 32 के अहम मुकाबले से पहले यह खबर स्वीडिश टीम के लिए बड़ी चिंता लेकर आई है, क्योंकि हिएन टीम की रक्षापंक्ति के सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में शामिल थे।

    27 वर्षीय इसाक हिएन को गुरुवार को जापान के खिलाफ खेले गए ग्रुप मुकाबले के दौरान चोट लगी थी। यह मैच 1-1 की बराबरी पर समाप्त हुआ था और इसी नतीजे के साथ स्वीडन ने तीसरे स्थान की सर्वश्रेष्ठ आठ टीमों में जगह बनाते हुए नॉकआउट चरण के लिए क्वालिफाई किया था। हालांकि मैच के दौरान लगी चोट अब इतनी गंभीर साबित हुई कि उन्हें पूरे टूर्नामेंट से बाहर होना पड़ा।

    स्वीडिश फुटबॉल एसोसिएशन ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि हिएन अब विश्व कप में आगे हिस्सा नहीं ले पाएंगे। मेडिकल जांच में उनके बाएं पैर की हैमस्ट्रिंग में गंभीर चोट पाई गई है। टीम के डॉक्टर जोनास वर्नर ने बताया कि खिलाड़ी को तुरंत रिहैबिलिटेशन के लिए अपने क्लब लौटना होगा और पूरी तरह फिट होने में कुछ समय लगेगा। उन्होंने कहा कि इस चोट के कारण हिएन फिलहाल फुटबॉल से दूर रहेंगे।

    स्वीडन के मुख्य कोच ग्राहम पॉटर ने भी इसाक हिएन के बाहर होने पर निराशा जताई। उन्होंने कहा कि विश्व कप जैसे बड़े मंच पर किसी खिलाड़ी का चोट के कारण सफर खत्म होना बेहद दुखद होता है। टीम हिएन के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है और उन्हें विश्वास है कि वह पूरी तरह फिट होकर पहले से अधिक मजबूत वापसी करेंगे। कोच ने यह भी संकेत दिया कि फ्रांस के खिलाफ मुकाबले के लिए टीम को अपनी रक्षापंक्ति में बदलाव करना पड़ेगा।

    जापान के खिलाफ मैच में हिएन को चोट उस समय लगी थी जब उन्होंने पेनल्टी बॉक्स के अंदर युकिनारी सुगावारा के क्रॉस को रोकने के लिए लंबा स्ट्रेच किया। इसी प्रयास में उनकी हैमस्ट्रिंग खिंच गई और उन्हें मैदान छोड़ना पड़ा। उनकी जगह युवा मिडफील्डर लुकास बर्गवैल को उतारा गया, जबकि कप्तान विक्टर लिंडेलोफ ने सेंटर बैक की जिम्मेदारी संभाली।

    अब स्वीडन के सामने सबसे बड़ी चुनौती फ्रांस जैसी मजबूत टीम के खिलाफ अपनी रक्षापंक्ति को संतुलित रखना होगी। हिएन की गैरमौजूदगी निश्चित रूप से टीम की रणनीति और डिफेंस पर असर डालेगी। ऐसे में बाकी खिलाड़ियों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी होगी कि वे इस कमी को पूरा करते हुए टीम को नॉकआउट मुकाबले में जीत दिलाने का प्रयास करें।

  • अयोध्या के संत समाज को बड़ा झटका, हनुमानगढ़ी के महंत संत रामदास नहीं रहे

    अयोध्या के संत समाज को बड़ा झटका, हनुमानगढ़ी के महंत संत रामदास नहीं रहे


    अयोध्या। श्रीहनुमानगढ़ी के महंत संत रामदास का शनिवार को 85 वर्ष की आयु में निधन हो गया। लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे महंत ने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर मिलते ही अयोध्या के संत समाज और श्रद्धालुओं में शोक की लहर दौड़ गई। उनका अंतिम संस्कार शाम 4 बजे नया घाट पर पूरे धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ किया जाएगा।

    महंत संत रामदास लंबे समय से उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। हाल ही में उन्हें इलाज के लिए मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उपचार के बाद वह तीन दिन पहले ही अयोध्या लौटे थे, लेकिन स्वास्थ्य में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका और उनका निधन हो गया।

    मुख्यमंत्री योगी ने जताया गहरा शोक

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महंत संत रामदास के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। अपने शोक संदेश में उन्होंने कहा कि संत रामदास का आध्यात्मिक जीवन, धर्म और समाज के प्रति उनका समर्पण सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा।

    मुख्यमंत्री ने प्रभु श्रीराम से प्रार्थना करते हुए दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने तथा उनके अनुयायियों और श्रद्धालुओं को इस अपार दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की कामना की।

    संत समाज में था विशेष सम्मान

    महंत संत रामदास अयोध्या के संत समाज के अत्यंत सम्मानित संतों में गिने जाते थे। धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों में उनकी सक्रिय भूमिका रही और श्रद्धालुओं के बीच उनका विशेष स्थान था। अयोध्या प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी समय-समय पर उनके आश्रम पहुंचकर उनका आशीर्वाद लेते रहे थे। उनके निधन को अयोध्या के संत समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। बड़ी संख्या में संत, श्रद्धालु और स्थानीय लोग उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए पहुंच रहे हैं।
  • अलीगंज अग्निकांड में बड़ा एक्शन, LDA के वर्तमान और पूर्व अधिकारियों से होगी पूछताछ

    अलीगंज अग्निकांड में बड़ा एक्शन, LDA के वर्तमान और पूर्व अधिकारियों से होगी पूछताछ


    लखनऊ। अलीगंज स्थित कोचिंग सेंटर में हुए भीषण अग्निकांड की जांच अब नए चरण में पहुंच गई है। इस मामले में गठित विशेष जांच दल (SIT) ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के 100 से अधिक वर्तमान और पूर्व अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल शुरू कर दी है। वर्ष 2014 से 2026 तक इस भवन से जुड़े अधिकारियों का रिकॉर्ड जुटाया जा रहा है और सूची तैयार कर एसआईटी को सौंपी जाएगी। इसके बाद संबंधित अधिकारियों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे।

    22 जून को अलीगंज के सेक्टर-डी स्थित चार मंजिला कोचिंग कॉम्प्लेक्स में लगी भीषण आग में 15 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। हादसे के बाद एलडीए ने पांच सदस्यीय जांच समिति गठित की थी, जिसने अपनी रिपोर्ट प्राधिकरण के उपाध्यक्ष को सौंप दी है।

    रिपोर्ट में सामने आईं कई गंभीर खामियां
    जांच समिति की रिपोर्ट के अनुसार भवन में निर्धारित मानकों से अधिक निर्माण किया गया था। इसके अलावा आने-जाने का रास्ता बेहद संकरा था, जबकि आग लगने की स्थिति में सुरक्षित निकासी और बचाव के पर्याप्त इंतजाम भी नहीं थे। प्रारंभिक जांच में इन्हीं कमियों को हादसे की प्रमुख वजह माना गया है।

    अब एसआईटी यह जांच करेगी कि भवन निर्माण की स्वीकृति, निरीक्षण और मानकों के पालन में किन अधिकारियों की क्या भूमिका रही और कहीं प्रशासनिक लापरवाही तो नहीं हुई।

    हादसे का घटनाक्रम
    22 जून को दोपहर करीब 2:15 बजे अलीगंज के सेक्टर-डी स्थित चार मंजिला इमारत में आग लग गई। स्थानीय लोगों ने शुरुआती स्तर पर आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन आग तेजी से फैलने लगी। दोपहर 2:30 बजे फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई। करीब 3:10 बजे पहली दमकल मौके पर पहुंची और आग की गंभीरता को देखते हुए कुल 13 दमकल गाड़ियों को बुलाया गया। कई घंटे की मशक्कत के बाद शाम लगभग 6:30 बजे आग पर काबू पाया गया। इस दर्दनाक हादसे में 15 युवाओं की मौत हो गई।

    कोचिंग संस्थानों पर भी कार्रवाई
    हादसे के बाद प्रशासन ने शहर के प्रमुख कोचिंग हब काकादेव में बड़े पैमाने पर अभियान चलाया। जांच के दौरान भवन और अग्नि सुरक्षा मानकों के उल्लंघन पाए जाने पर फिजिक्स वाला समेत 22 कोचिंग संस्थानों को सील कर दिया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वाले अन्य संस्थानों के खिलाफ भी कार्रवाई जारी रहेगी।

    अब सभी की नजर एसआईटी जांच पर है, जिससे यह स्पष्ट होगा कि इस हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।

  • NCERT की कक्षा 9 की नई किताब में SIR के बारे में पढ़ेंगे बच्चे, समाजवाद-धर्मनिरपेक्षता की पुरानी व्याख्या हटाई

    NCERT की कक्षा 9 की नई किताब में SIR के बारे में पढ़ेंगे बच्चे, समाजवाद-धर्मनिरपेक्षता की पुरानी व्याख्या हटाई


    नई दिल्ली। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 9 की नई पाठ्यपुस्तक में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। इस बार छात्रों को चुनाव प्रक्रिया से जुड़े स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बारे में पढ़ाया जाएगा। वहीं, समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र से संबंधित कुछ व्याख्याओं को पहले की तुलना में बदले हुए स्वरूप में प्रस्तुत किया गया है। नई सामग्री का उद्देश्य विद्यार्थियों को संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था की व्यापक समझ देना बताया गया है। इन बदलावों को लेकर शिक्षा और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।

    संविधान की व्याख्या का बदला स्वरूप
    नई पुस्तक में संविधान को समझाने का तरीका भी बदला गया है। इसमें संविधान निर्माण की प्रक्रिया, संविधान सभा की भूमिका और देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं के कार्यों पर अधिक जोर दिया गया है। इसके अलावा समानता, स्वतंत्रता, अधिकार और नागरिकों की जिम्मेदारियों जैसे विषयों को भी प्रमुखता से शामिल किया गया है।

    पहले की पुस्तकों में संविधान की प्रस्तावना और उसमें शामिल शब्दों की विस्तृत व्याख्या दी जाती थी, जबकि नई किताब में प्रस्तावना को सीधे तौर पर शामिल नहीं किया गया है। साथ ही समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता जैसे शब्दों को भी पहले की तरह विस्तार से प्रस्तुत नहीं किया गया है।

    पहली बार कक्षा 9 के पाठ्यक्रम में इमरजेंसी
    नई किताब में पहली बार वर्ष 1975 की इमरजेंसी को भी शामिल किया गया है। इसमें बताया गया है कि उस दौर में देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ा और उस समय लिए गए फैसलों को लेकर किस तरह की चर्चाएं हुईं। इसे लोकतंत्र के सामने आने वाली चुनौतियों के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

    SIR को पाठ्यक्रम में क्यों मिली जगह
    पुस्तक में चुनाव आयोग की जिम्मेदारियों के साथ स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया को भी समझाया गया है। इसमें बताया गया है कि मतदाता सूची को अद्यतन और त्रुटिरहित बनाए रखने की प्रक्रिया किस प्रकार पूरी की जाती है।

    चार विषय अब एक ही पुस्तक में
    इस बार इतिहास, भूगोल, राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र को अलग-अलग पुस्तकों के बजाय एकीकृत कर एक ही पुस्तक में शामिल किया गया है। NCERT का उद्देश्य विद्यार्थियों को विभिन्न विषयों के बीच आपसी संबंधों की समग्र समझ प्रदान करना है।

    शिक्षा मंत्री का बयान
    केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि विद्यार्थियों को देश के इतिहास और लोकतंत्र से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी होना आवश्यक है। उनके अनुसार, ऐसे विषयों का अध्ययन करने से नई पीढ़ी में देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और इतिहास के प्रति बेहतर समझ विकसित होगी।

  • अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति का कल्याण ही लक्ष्य', प्रशिक्षण महाअभियान में बोले CM योगी

    अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति का कल्याण ही लक्ष्य', प्रशिक्षण महाअभियान में बोले CM योगी


    गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को गोरखपुर में दो दिवसीय ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान-2026’ का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की विकास यात्रा को समर्पित प्रदर्शनी का अवलोकन किया और कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों को भाजपा की वैचारिक नींव बताया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि यह प्रशिक्षण शिविर केवल एक संगठनात्मक कार्यक्रम नहीं, बल्कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों और आदर्शों को कार्यकर्ताओं के जीवन में उतारने का अभियान है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में मिले संस्कारों के आधार पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने भारतीय जनसंघ के संगठन महामंत्री के रूप में संगठन को मजबूत आधार प्रदान किया।

    अंत्योदय को बताया विकास की मूल अवधारणा
    सीएम योगी ने कहा कि भारतीय राजनीति में ‘अंत्योदय’ का विचार पंडित दीनदयाल उपाध्याय की सबसे बड़ी देन है। उन्होंने कहा कि किसी भी सरकार की नीतियों का केंद्र समाज के अंतिम पायदान पर खड़ा व्यक्ति होना चाहिए। जब तक विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक नहीं पहुंचता, तब तक सुशासन की अवधारणा अधूरी रहती है।

    उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने भारतीय आर्थिक चिंतन को नई दिशा देते हुए अंत्योदय का सिद्धांत दिया, जिसे भारतीय जनता पार्टी अपने संगठन और शासन दोनों में आत्मसात करने का प्रयास कर रही है।

    कार्यकर्ताओं को दिए संगठनात्मक मूल्यों के संदेश
    मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरे देश में चलाया जा रहा यह प्रशिक्षण महाअभियान कार्यकर्ताओं को राष्ट्रसेवा, संगठन, पारदर्शिता और जनकल्याण के मूल्यों से जोड़ने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि भाजपा का प्रत्येक कार्यकर्ता इन आदर्शों को अपने व्यवहार और कार्यशैली का हिस्सा बनाए, यही इस अभियान का उद्देश्य है।

    सोशल मीडिया पर भी दी शुभकामनाएं
    कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कार्यक्रम की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि भारतीय जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी के महापुरुषों के आदर्श आज भी सार्वजनिक जीवन में शुचिता, पारदर्शिता और राष्ट्रसेवा के प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं को शुभकामनाएं देते हुए प्रशिक्षण शिविर के सफल आयोजन की कामना की।

    उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम संगठन को मजबूत बनाने के साथ-साथ कार्यकर्ताओं में वैचारिक स्पष्टता और जनसेवा की भावना को भी सुदृढ़ करते हैं।

  • देवास हादसे में उजड़ा परिवार: एक ही दिन पत्नी और बेटी को खोने का दर्द, अंतिम विदाई में छलक पड़े आंसू

    देवास हादसे में उजड़ा परिवार: एक ही दिन पत्नी और बेटी को खोने का दर्द, अंतिम विदाई में छलक पड़े आंसू


    देवास । देवास के खटांबा गांव में सूरज पूजा के दौरान हुए दर्दनाक हादसे के बाद शनिवार को मां-बेटी को नम आंखों से अंतिम विदाई दी गई। छज्जा गिरने से जान गंवाने वाली 41 वर्षीय लक्ष्मी और उनकी मां के शव पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंपे गए। जिला अस्पताल में उस समय माहौल बेहद भावुक हो गया, जब बुजुर्ग पिता धारूलाल सोलंकी ने कफन में लिपटी अपनी बेटी का अंतिम बार चेहरा देखा और कांपते हाथों से उसके चरण स्पर्श कर विदा दी। वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। इसके बाद लक्ष्मी का पार्थिव शरीर अंतिम संस्कार के लिए उज्जैन रवाना किया गया, जहां उनका ससुराल है।

    इस हादसे ने एक ही परिवार की खुशियां पलभर में उजाड़ दीं। बेटी को विदा करने के बाद धारूलाल सोलंकी को अपनी पत्नी के शव से भी अंतिम विदाई लेनी पड़ी। पत्नी का पार्थिव शरीर पोस्टमार्टम रूम से बाहर लाया गया तो वे खुद को संभाल नहीं सके। परिजनों ने उन्हें ढांढस बंधाया और शव को अंतिम संस्कार के लिए देवास के संजय नगर ले जाया गया। एक ही दिन में पत्नी और बेटी को खो देने का यह दर्द पूरे परिवार पर भारी पड़ता दिखाई दिया।

    शुक्रवार दोपहर खटांबा गांव में सूरज पूजा और मान कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। धार्मिक अनुष्ठान के बाद बड़ी संख्या में लोग भोजन कर रहे थे। इसी दौरान तेज आंधी और बारिश शुरू हो गई। खराब मौसम के बीच मकान की छत का छज्जा अचानक भरभराकर नीचे गिर पड़ा और उसके नीचे बैठी कई महिलाएं दब गईं। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोगों ने तत्काल मलबा हटाकर घायलों को बाहर निकाला और जिला अस्पताल पहुंचाया।

    अस्पताल में डॉक्टरों ने मां और बेटी को मृत घोषित कर दिया, जबकि तीन अन्य लोग घायल हो गए। घायलों का इलाज जारी है। हादसे की सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी। अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण कर छज्जा गिरने के कारणों की जानकारी जुटाई।

    शनिवार को पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों शव परिजनों को सौंप दिए गए। लक्ष्मी के शव को अंतिम संस्कार के लिए उज्जैन भेजा गया, जबकि उनकी मां का अंतिम संस्कार देवास के संजय नगर में किया जाएगा। इस दर्दनाक हादसे के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है। स्थानीय लोग भी परिवार के दुख में शामिल हुए और अंतिम यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में मौजूद रहे। एक धार्मिक आयोजन में हुआ यह हादसा कई परिवारों के लिए कभी न भूलने वाला दर्द बन गया।

  • चढ़ावा गबन मामले पर गरमाई सियासत, पवन पांडेय बोले- 'बुलडोजर नहीं चला, न्याय में भी दो आंख'

    चढ़ावा गबन मामले पर गरमाई सियासत, पवन पांडेय बोले- 'बुलडोजर नहीं चला, न्याय में भी दो आंख'


    अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े कथित चढ़ावा गबन मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी लगातार जारी है। समाजवादी पार्टी के पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने एक बार फिर इस मुद्दे पर भाजपा सरकार और ट्रस्ट के पदाधिकारियों पर निशाना साधते हुए तीखी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं ने करोड़ों लोगों की आस्था को ठेस पहुंचाई है।

    पवन पांडेय ने कहा कि इतिहास में महमूद गजनवी पर कई बार मंदिरों को लूटने के आरोप लगाए जाते हैं, लेकिन उनके अनुसार राम मंदिर चढ़ावा मामले में जिस तरह की कथित घटनाएं सामने आई हैं, वे उससे भी अधिक गंभीर हैं। उन्होंने कहा, “40 दिनों में 70 बार लूटा, इन्होंने तो लूटने में गजनवी को भी पीछे छोड़ दिया।”

    उन्होंने आगे आरोप लगाया कि जिन लोगों पर राम मंदिर की व्यवस्था, सुरक्षा और श्रद्धालुओं के चढ़ावे की जिम्मेदारी थी, वही लोग कथित तौर पर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने में विफल रहे। उनके अनुसार यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह केवल आर्थिक अनियमितता नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं के विश्वास के साथ विश्वासघात है।

    पूर्व मंत्री ने उत्तर प्रदेश सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि सरकार अपराधों पर सख्त कार्रवाई का दावा करती है, लेकिन इस मामले में वैसी कठोर कार्रवाई दिखाई नहीं दी। उन्होंने कहा कि यदि यह इतना बड़ा मामला है तो निष्पक्ष और तेज जांच होनी चाहिए तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

    पवन पांडेय ने कहा कि भगवान श्रीराम का मंदिर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले और करोड़ों लोगों की आस्था के आधार पर बना है। ऐसे में यदि मंदिर के चढ़ावे से जुड़े किसी भी प्रकार के आरोप सामने आते हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होना बेहद आवश्यक है, ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास कायम रह सके।

    राम मंदिर चढ़ावा मामले को लेकर पहले भी विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की ओर से जांच की मांग उठाई जा चुकी है। मामले में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद जांच एजेंसियां अपनी कार्रवाई कर रही हैं। हालांकि आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।

  • आयरलैंड से हार के बाद भी टीम इंडिया पर भरोसा, जडेजा के कोच बोले- मजबूत वापसी करेगी टीम

    आयरलैंड से हार के बाद भी टीम इंडिया पर भरोसा, जडेजा के कोच बोले- मजबूत वापसी करेगी टीम


    नई दिल्ली । आयरलैंड के खिलाफ पहले टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में मिली हार के बाद भारतीय टीम को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं लेकिन अनुभवी ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा के कोच महेंद्र चौहान ने टीम का बचाव करते हुए इसे टी20 क्रिकेट का स्वाभाविक हिस्सा बताया है। उनका कहना है कि इस फॉर्मेट में किसी भी दिन कोई भी टीम बेहतर प्रदर्शन कर सकती है और ऐसे नतीजे क्रिकेट का हिस्सा हैं।

    महेंद्र चौहान ने कहा कि भारत जैसी मजबूत टीम को एक हार के आधार पर कमजोर नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि टी20 क्रिकेट बेहद तेज और अनिश्चितताओं से भरा प्रारूप है जहां छोटी-सी गलती या विपक्षी टीम का शानदार प्रदर्शन मैच का परिणाम बदल सकता है। उनके अनुसार कभी-कभी अपेक्षाकृत नई या कमजोर मानी जाने वाली टीमें भी बड़े उलटफेर कर देती हैं।

    उन्होंने कहा कि पहले टी20 में मिली हार से यह निष्कर्ष निकालना गलत होगा कि भारतीय टीम अच्छी नहीं है। टीम इंडिया के पास विश्व स्तरीय बल्लेबाज गेंदबाज और फील्डर मौजूद हैं जो किसी भी परिस्थिति में मुकाबले का रुख बदलने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि भारतीय टीम अगले मुकाबलों में बेहतर प्रदर्शन करते हुए जोरदार वापसी करेगी।

    जब महेंद्र चौहान से पूछा गया कि वह भारतीय खिलाड़ियों को कोई विशेष सलाह देना चाहेंगे तो उन्होंने विनम्रता से कहा कि राष्ट्रीय टीम तक पहुंचने वाले खिलाड़ी अपने दम पर हर चुनौती पार करके वहां पहुंचे हैं। ऐसे खिलाड़ियों को सलाह देने की जरूरत नहीं होती क्योंकि वे खेल की बारीकियों और दबाव से अच्छी तरह परिचित हैं।

    पहले टी20 मुकाबले में आयरलैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 9 विकेट के नुकसान पर 182 रन बनाए। टीम के लिए लॉर्कन टकर ने 36 गेंदों में शानदार 50 रन की पारी खेली जबकि गैरेथ डेलानी ने 39 रन का महत्वपूर्ण योगदान दिया। दोनों बल्लेबाजों की पारियों की बदौलत आयरलैंड ने भारत के सामने चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रखा।

    183 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम शुरुआत से ही दबाव में नजर आई। नियमित अंतराल पर विकेट गिरने से टीम कभी भी मैच में मजबूत स्थिति नहीं बना सकी। सात बल्लेबाज दहाई का आंकड़ा भी पार नहीं कर सके जिससे रनचेज पूरी तरह बिखर गया।

    भारत की ओर से अभिषेक शर्मा ने सबसे अधिक 49 रन बनाए और संघर्ष जरूर किया लेकिन दूसरे छोर से उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। पूरी भारतीय टीम 148 रन पर सिमट गई और उसे 34 रन से हार का सामना करना पड़ा।

    यह जीत आयरलैंड के लिए ऐतिहासिक रही क्योंकि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उसने पहली बार भारत को हराने का कारनामा किया। हालांकि भारतीय टीम और उसके समर्थकों को उम्मीद होगी कि अगले मुकाबलों में टीम अपनी गलतियों से सबक लेकर बेहतर प्रदर्शन करेगी।

  • राम मंदिर विवाद पर धीरेंद्र शास्त्री की दो टूक, बोले- सरकारी सजा से नहीं बचेंगे, ईश्वर का न्याय भी होगा

    राम मंदिर विवाद पर धीरेंद्र शास्त्री की दो टूक, बोले- सरकारी सजा से नहीं बचेंगे, ईश्वर का न्याय भी होगा

    छतरपुर। अयोध्या स्थित राम मंदिर में कथित चढ़ावा गड़बड़ी के मामले को लेकर देशभर में चर्चा जारी है। इस बीच बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भी इस मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यदि किसी ने भगवान के मंदिर और श्रद्धालुओं की आस्था के साथ छल किया है तो वह केवल आर्थिक अपराध नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाओं के साथ विश्वासघात है। ऐसे लोगों को कानून के साथ-साथ ईश्वरीय न्याय का भी सामना करना पड़ेगा।

    इंडोनेशिया में आयोजित हनुमान कथा के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने इस मुद्दे पर बोलते हुए कहा कि मंदिर में चढ़ाए गए दान में कथित गड़बड़ी केवल धन की चोरी नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की श्रद्धा और विश्वास की चोरी है। उन्होंने कहा कि जो लोग भगवान के नाम पर चढ़ाई गई राशि में अनियमितता करते हैं वे महापाप के भागीदार बनते हैं।

    उन्होंने अपने संबोधन में रामायण का उदाहरण देते हुए कहा कि माता सीता का हरण करने वाले रावण का पूरा वंश नष्ट हो गया था। उसी प्रकार यदि कोई भगवान श्रीराम के मंदिर की पवित्रता और श्रद्धालुओं के विश्वास के साथ खिलवाड़ करता है तो उसे भी उसके कर्मों का परिणाम अवश्य भुगतना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को केवल सरकारी कार्रवाई ही नहीं बल्कि ईश्वर के न्याय का भी सामना करना होगा।

    धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि मामले में प्राथमिकी दर्ज होना एक महत्वपूर्ण कदम है लेकिन जांच को पूरी गंभीरता और निष्पक्षता के साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए। उनके अनुसार यदि निष्पक्ष जांच होगी तो पूरे प्रकरण से जुड़े सभी तथ्यों और जिम्मेदार लोगों का भी खुलासा होगा। उन्होंने कहा कि किसी भी धार्मिक संस्था की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।

    राम मंदिर में कथित चढ़ावा गड़बड़ी का मुद्दा उस समय सामने आया जब इस मामले को लेकर शिकायतें और आरोप सार्वजनिक हुए। इसके बाद जांच की मांग तेज हुई और विभिन्न स्तरों पर बैठकों तथा प्रशासनिक कार्रवाई का दौर शुरू हुआ। बाद में विशेष जांच के आधार पर संबंधित थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई और कई लोगों को नामजद किया गया।

    मामले के बीच ट्रस्ट में भी महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिले। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा के पद छोड़ने की खबर भी सामने आई। हालांकि पूरे प्रकरण की जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच एजेंसियों की रिपोर्ट तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।

    धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने श्रद्धालुओं से संयम बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि सत्य देर-सवेर सामने आता है और न्याय की प्रक्रिया पर विश्वास रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवान के दरबार में किसी भी दोषी को उसके कर्मों का फल अवश्य मिलता है।


  • अंधविश्वास बना मौत की वजह? झाड़-फूंक के दौरान युवक की मौत, मौलवी पर बलि देने का आरोप

    अंधविश्वास बना मौत की वजह? झाड़-फूंक के दौरान युवक की मौत, मौलवी पर बलि देने का आरोप


    बाराबंकी। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। बुखार से पीड़ित एक युवक की कथित झाड़-फूंक के दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मृतक के परिजनों ने मौलवी पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि झाड़-फूंक के नाम पर युवक की जीभ काट दी गई, जिससे अत्यधिक रक्तस्राव हुआ और उसकी जान चली गई। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर जांच शुरू कर दी है।

    यह मामला टिकैतनगर थाना क्षेत्र के सिहोरिया गांव का है। मृतक की पहचान सुकई गौतम के रूप में हुई है। परिजनों के मुताबिक सुकई पिछले चार दिनों से तेज बुखार से पीड़ित था। इसी दौरान उसके एक परिचित ने इलाज के लिए खजुरी गांव के मौलवी गुल्ले हिदायत रसूल को बुलाने की सलाह दी। परिवार का कहना है कि मौलवी ने घर पहुंचकर युवक पर किसी प्रेत बाधा का साया होने की बात कही और झाड़-फूंक से उसे ठीक करने का दावा किया।

    परिजनों के अनुसार अगले दिन रात करीब आठ बजे मौलवी दोबारा घर पहुंचा और झाड़-फूंक शुरू की। उस समय परिवार के कुछ सदस्य गांव में ताजिया देखने गए हुए थे जबकि घर पर केवल सुकई और उसका भाई राजेश मौजूद थे। आरोप है कि इसी दौरान मौलवी ने युवक को नहलाया, फूल-पत्ती चढ़ाई, कुछ मंत्र पढ़े और ताबीज का पानी पिलाया। इसके बाद उसने धारदार हथियार से युवक की जीभ काट दी। परिजनों का आरोप है कि इस घटना के बाद मौलवी मौके से फरार हो गया।

    बताया गया कि युवक की चीख-पुकार सुनकर उसका भाई मौके पर पहुंचा और अन्य परिजनों को सूचना दी। परिवार ने तुरंत उसे अस्पताल ले जाने की कोशिश की, लेकिन रास्ते में ही अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उसकी मौत हो गई।

    घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने आरोपी मौलवी गुल्ले बाबा उर्फ हिदायत रसूल को हिरासत में ले लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट सहित सभी वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल पुलिस ने स्पष्ट किया है कि परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों की सत्यता की जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों और घटना की परिस्थितियों का स्पष्ट खुलासा हो सकेगा। पुलिस का कहना है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर विधिक कार्रवाई की जाएगी।